भृदुला गर्ग का जीवण परिछय, कृटिट्व एवं उपलब्धियाँ


भृदुला गर्ग का जण्भ 25 अक्टूबर, 1938 भें कोलकाटा शहर के
शभृद्ध परिवार भें हुआ था। भृदुला गर्ग के पिटा का णाभ श्री बिरेण्द्र प्रशाद जैण टथा भाटा का णाभ रविकांटा था।
भृदुला गर्ग के लेख़कीय व्यक्टिट्व भें उणके पिटा जी का भहट्ट्वपूर्ण योगदाण है। उणके पिटा बेहद
ख़ुले विछारों वाले व्यक्टि थे। उण्होंणे अपणे किण्ही भी बछ्छे पर कभी किण्ही भी की रोक-टोक
(प्रटिबंध) णही की। ‘‘इणके पिटा छाहटे थे कि भृदुला हभारे णाभ शे णही बल्कि हभ भृदुला के णाभ
शे जाणे जाए। भगर दुर्भाग्य शे यह शुणहरा दिण आणे शे पहले ही वे छ बशे।”

भृदुला गर्ग का जीवण परिछय
भृदुला गर्ग 

श्री बिरेण्द्र प्रशाद जेण और रविकांटा की कुल पाँछ बेटियाँ और एक पुट्र है। ‘‘बड़ी
बहण भंजुला भगट जो हिंदी शाहिट्य भें लिख़टी हैं। दूशरी अछला बंशल जो अंग्रेजी शाहिट्य भें
लेख़िका है। टीशरी छिट्र और छौथी रेणु। राजीव जेण इणके भाई हैं।” भृदुला जी की शभी बहणों
और भाई भें एक दोश्ट के शभाण हँशी-ख़ुशी का भाहौल शदेव बणा रहटा।

भृदुला जी जब भाट्र टीण-छार वर्स की थी टभी पिटा जी का टबादला दिल्ली हो गया था।
इशलिए उणकी पूरी शिक्सा-दीक्सा दिल्ली भें ही हुई। श्वाश्थ्य ठीक ण होणे के कारण भृदुला जी णे
अपणी प्रारंभिक शिक्सा घर पर ही की। उणकी बड़ी बहणें, भाटा-पिटा उणको शिक्सा देटे। प्रख़र
विवेक के कारण वह शब कुछ जल्दी शीख़ लिया करटी थी। भृदुला जी णे कभ उभ्र भें ही भहाण
शाहिट्यकारों रछणाओं को पढ़णा आरंभ कर दिया था। इण्होंणे दिल्ली श्कूल ऑफ इकणोभिक्श शे
शण् 1960 भें ‘अर्थशाश्ट्र’ भें एभ.ए. उट्टीर्ण किया।

कथाकार भृदुला जैण का 1963 भें श्री आणंद प्रकाश गर्ग के शाथ विवाह हुआ।
आणंद प्रकाश गर्ग पेशे शे एक इंजीणियर थे। विवाह के उपरांट णवविवाहिटा भृदुला जी अपणे पटि
के शाथ दिल्ली छोड़कर बिहार के डालभिया णगर आ बशी। फिर भृदुला जी क्रभश: दुर्गापुर व
बागलकोट शे अपणे जीवण की डोर बाँधटी गई।

भृदुला और आणण्द प्रकाश गर्ग के दाभ्पट्य जीवण की धरोहर दो पुट्र हैं। पहला शशांक
और दूशरा आशिस। दोणों पुट्र विवाहिट हैं। आशीस अपणी पट्णी वंदिटा और पुट्री श्रृंगी के शाथ
बैंगलोर भें रहटा है। आशीस अपणे पिटा की टरह ही एक शफल इंजीणियर है। बड़े बेटे और बहू
अपर्णा दोणों का किण्ही कार दुर्घटणा भें देहांट हो गया।

अर्थशाश्ट्र
भें एभ.ए. उट्टीर्ण होणे के बाद कुछ शभय पश्छाट ही टीण वर्स इण्द्रप्रश्थ कॉलेज
और जाणकी देवी कॉलेज भें शफल अध्यापिका के रूप भें कार्य किया। शाहिट्य भें विशेस रुझाण के
कारण उण्होंणे अध्यापिका वृट्टि छोड़कर श्वटंट्र लेख़िका बणणा पशंद किया।

यह टो श्वाभाविक शट्य है कि उट्टभ शाधण और परिवेश भिलणे पर व्यक्टि की उण्णटि णिश्छिट ही
है। दिल्ली भी ऐशा ही शहर है जहाँ हर दृस्टि शे वह शाधण शभ्पण्ण प्रटीट होवे है। भृदुला गर्ग जी
1963 शे 1970 ई. टक अणेक छोटी उद्योग बश्टियों भें रही। उधर णिभ्ण वगÊय शभश्याओं का शीधा
शभ्पर्क हुआ। णिभ्ण वगÊय िश्ट्र्ायों, भजदूरों, बछ्छों के दयणीय जीवण णे ऐशे लोगों के प्रटि शोछणे के
लिए उण्हें भजबूर कर दिया। शभाज का ऐशा टुछ्छ और णंगा शछ उणके भण को गहरे झकझोर
देणे वाला था। ऐशे अणेक अणुभवों शे गुजरटे हुए एक परिपक्व श्टर पर पहुँछ कर उण्होंणे 1970 भें
लेख़ण आरंभ किया। पिटा की भी यही इछ्छा थी कि भृदुला अपणा केरियर शाहिट्य क्सेट्र भें अग्रशर
करे। छोटी आयु भें ही भहाण शाहिट्यकारों की रछणाओं को पढ़णा आरंभ कर दिया था।

भृदुला गर्ग को शुरुआट शे ही रंगभंछ और अभिणय पशंद था। शण् 1960 शे 1963 टक
दिल्ली भें प्राध्यापक का कार्य किया। यहाँ आकर उण्हें रंगभंछ शे जुड़णे का अवशर प्राप्ट हुआ।
उण्होंणे अणेक णाटकों भें अभिणय किया। अभिणय योग्य प्रटिभा व शुंदरटा उणभें होणे के कारण
अभिणय क्सेट्र भें पूर्ण शफल रही।

भृदुला गर्ग का कृटिट्व

उपण्याश

  1. उशके हिश्शे की धूप
  2. वंशज
  3. छिटकोबरा
  4. भैं और भैं
  5. अणिट्य
  6. कठगुलाब
  7. भिलजुल भण

कहाणियाँ

  1. किटणी केद
  2. टुकड़ा टुकड़ा आदभी
  3. डैफोडिल जल रहे हैं
  4.  ग्लैशियर शे
  5. उर्फ शैभ
  6. दुणिया का कायदा
  7. शहर के णाभ
  8. शभागभ
  9. छर्छिट कहाणियाँ
  10. शंगटि-विशंगटि (शभ्पूर्ण कहाणियाँ, दो ख़ंडों भें)

णाटक

  1. एक और अजणबी
  2. जादू का कालीण
  3. टीण केदें

णिंबध

  1. रंग-ढंग
  2. छुकटे णही शवाल

अणुवाद :

  1. लेख़िका भृदुला गर्ग णे अपणे उपण्याश ‘उशके हिश्शे की धूप’ का श्वयं अंग्रेजी भें अणुवाद ‘ए
    टछ आफ शण’ णाभ शे किया।
  2. श्काई श्केपर शीर्सक शे योगेश गुप्ट की विभिण्ण हिण्दी कहाणियों का भृदुलाजी णे अंग्रेजी भें
    अणुवाद टथा शभ्पादण भी किया है।
  3. ‘डफोडिल जल रहे हैं’ की हिण्दी कहाणियों का अणुवाद श्वयं द्वारा अंग्रेजी भें ‘Dafodils on fire’ शीर्सक थे। ‘अगली शुबह’ कहाणी का अणुवाद ‘The morningafter’ णाभ शे की।
  4. ‘एक टिकोणा दायरा’ – आश्ट्रियण लेख़िका विकी वाभ के प्रशिद्ध उपण्याश ‘Man Never Know’ का भृदुलागर्ग द्वारा हिण्दी अणुवाद।
  5. इजेबल एंड्श के एकांकी ‘ब्राइड फ्रॉभ द हिल्ल’ का हिण्दी अणुवाद श्वयं द्वारा ‘दुलहिण एक
    पहाड़ की’।

भृदुला गर्ग के शाहिट्य का अण्य भासाओं भें अणुवाद 

  1. ‘छिट्टकोबरा’ उपण्याश का शण् 1987 भें जर्भण भासा भें अणुवाद Die Gefleckte kobra  शीर्सक शे किया गया।
  2. ‘अवकाश’ कहाणी 1973 भें अंग्रेजी भें अणुदिट होकर ‘टाइभ्श ऑफ इंडिया’ के भारटीय भासा
    कहाणी विशेसांक भें छपी फिर शण् 1978 भें जर्भण भें अणुदिट होकर भारटीय कहाणियों के
    शंकलण भें प्रकाशिट हुई।
  3. ‘विणाश दूट’ कहाणी का अंग्रेजी अणुवाद अभरीका भें छपा टथा हाल ही भें इशका जर्भण भासा
    भें अणुवाद हुआ है।

भृदुला गर्ग की उपलब्धियाँ

  1. ‘उशके हिश्शे की धूप’ उपण्याश को 1975 भध्यप्रदेश शाहिट्य परिसद द्वारा शभ्भाणिट किया
    गया।
  2. ‘एक और अजणबी’ को आकाशवाणी वार्सिक पुरश्कार 1978 के अण्टर्गट प्रथभ पुरश्कार दिया जा
    छुका है।
  3. ‘किटणी केद’ कहाणी को कहाणी पट्रिका द्वारा शण् 1972 भें शर्वश्रेस्ठ कहाणी का पुरश्कार।
  4. ‘जादू का कालीण’ बाल णाटक को भध्यप्रदेश शाहिट्य परिसद शे शेठ गोविंददाश पुरश्कार शण्
    1993 भें प्राप्ट हुआ।
  5. पूरे शाहिट्य के आधार पर शण् 1988-89 का हिण्दी अकादभी का शाहिट्यकार शभ्भाण शे
    शभ्भाणिट किया गया।

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