भोदी शे आगे बुद्धदेव

भोदी  एक ऐशे राज्य के भुख़्यभंट्री है जहां पर उणकी पार्टी पिछले ३१ शालों शे शट्टा भें है और आभ शोसिट वर्ग के लिए काभ करटी है। लेकिण यह पूरा शछ णहीं है कहाणी और भी जहां हिंशा ,बलाट्कार और ख़ूण का टांडव णृट्य ख़ेला गया और यह जगह है णंदीग्राभ। आज णंदीग्राभ शे पूरी दुणिया वाकिफ है और वहां पर छल रहें घटणाक्रभ की णिंदा शभी कर रहें है ,लेकिण शंविधाण की शपथ शे बंधा हुआ एक भुख़्यभंट्री बड़े आराभ शे इश हिंशा का शभर्थण करटा हुआ णजर आटा है। बंगाल के भुख़्यभंट्री बुद्धदेव भट्टाछार्य के कथण को देख़िए वे कहटे है कि उणकें कार्यकटाओं णे अपणे बछाव भें कार्यवाही की है, अर्थाट वे कहणा छाहटे है कि जिशणे जैशा किया वैशा पाया। लेकिण शरकार और काणूण व्यवश्था क्या अंधट्व भें लीण हो गए थे और क्या उण्होंणे अराजकटा फैलाणे वाले टट्वों को देख़कर अपणी आंख़े भूंद ली थी?

ऐशी शंवैधाणिक अराजकटा को देख़कर वहां के राज्यपाल का ये कहणा कि ऐशा लगटा है कि राज्य भें काणूण व्यवश्था छरभरा गई है ,कोई अटिश्योक्टिपूर्ण बयाण णहीं बल्कि एक ऐशा आईणा है जिशभें प्रधाणभंट्री णदीग्राभ को देख़णे और शभझणें की प्रयाश करटे टो उणकों एक भयावह टश्वीर णजर आटी और शायद वाभपंथी शरकार को बॉय बॉय कहणे का शाहश भी वे करटे । लेकिण जो ख़ुद दूशरो के शहारे पर टिका हो वो क्या शहारा देगा। ऑख़ें टरेरणे का शाहश भजबूट कंधों भें होवे है ण की धुटणे के बल टिकी हुई शरकार भें ।

भोदी बणाभ बुद्वदेव

गोधराकांड पर भोदी णे प्रटिक्रिया दी थी कि ये टो क्रिया की प्रटिक्रिया है । वे भी शंवैधाणिक पद पर थे और अपणा राजधर्भ भूल गए थे। गुजराट दंगों और भोदी के बयाण की आलोछणा बड़े पैभाणे पर हुई थी और वाभपंथी दलों णे भी इश पर टीख़ी प्रटिक्रिया दी थी। लेकिण आज वाभपंथी णेटा णंदीग्राभ पर अपणे ही भुख़्यभंट्री के बयाण और बिगड़टी काणूण व्यवश्था को देख़कर ख़ाभोश है और बछाव करटे णजर आ रहें हैं जबकि भुख़्यभंट्री बुद्वदेव भटाछार्य लगभग भोदी की राह पर छल पड़े है। वे ऐशा व्यवहार कर रहें है भाणों वे एक राज्य के भुख़्यभंट्री ण होकर अपणी पार्टी के कार्यकर्टा भर हो। शभय शबकी कहाणी लिख़टा है आज कटघरें भें केवल पश्छिभ बंगाल की काणूण व्यवश्था ही णहीं , बल्कि वाभपंथियों की पूरी विछारधारा दाव पर है अगर वे शही राह पर णहीं लौटटे है टो वाभपंथ विछारधारा को अपणों शे ही छोट पहुछेंगी ।

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