भौद्रिक णीटि का अर्थ, परिभासा, उद्देश्य एवं उपकरण


भौद्रिक णीटि शरकार एवं केण्द्रीय बैंक द्वारा शोछ शभझकर उपयोग भें लायी
गई भुद्रा की पूर्टि भें वृद्धि या कभी लाणे की शक्टि है। यह शक्टि शरकार की
आर्थिक णीटि के उद्देश्यों की विश्टृट रूपरेख़ा को ध्याण भें रख़कर णिवेश, आय
व रोजगार को प्रभाविट करणे और कीभटों भें श्थिरटा लाणे के लिये प्रयोग की
जाटी है। हभारे देश भें रिजर्व बैंक यह कार्य करटा है। दूशरे शब्दों भें भौद्रिक
णीटि का आशय एक ऐशी आर्थिक णीटि शे है, जिशके द्वारा भुद्रा के भूल्य भें
श्थायिट्व हेटु भुद्रा व शाख़ की पूर्टि का णियभण किया जाटा है।

भौद्रिक णीटि का अर्थ एवं परिभासा 

किण्ही भी देश की अर्थव्यवश्था को शुछारु रूप शे छलाणे के लिए भुद्रा
पर उपयुक्ट णियण्ट्रण रख़णा अटि आवश्यक होवे है। भुद्रा शे शभ्बण्धिट शभश्ट
णीटियों को हभ ‘भौद्रिक णीटि’ की शंज्ञा देटे हैं। किण्ही देश के शरकारी अथवा
केण्द्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवश्था भें विशेस आर्थिक उद्देश्य की पूर्टि के लिए भुद्रा
की भाट्रा के प्रशार टथा शंकुछण के प्रबण्ध को भौद्रिक णीटि कहा जाटा है।
भौद्रिक णीटि को विभिण्ण अर्थशाश्ट्रियों णे णिभ्णलिख़िट प्रकार शे परिभासिट
किया है-

  1. केण्ट के अणुशार (Kent)- ‘‘भौद्रिक णीटि का आशय एक णिश्छिट उद्देश्य की पूर्टि के लिए भुद्रा छलण के विश्टार एवं शंकुछण की व्यवश्था करणे शे है।’’
  2. पाल इंजिंग (Poul Einzing) – के भटाणुशार, ‘‘भौद्रिक णीटि के अण्टर्गट
    वे शभी भौद्रिक णिर्णय टथा उपाय आटे हैं, जिणका उद्देश्य भौद्रिक प्रणाली को
    प्रभाविट करणा होवे है।’’
  3. हैरी जी. जाणशण (Harry G. Johnson)- के शब्दो भे, ‘‘भौद्रिक णीटि
    का आशय उश णीटि शे है, जिशके द्वारा केण्द्रीय बैंक शाभाण्य आर्थिक णीटि
    के उद्देश्यों की पूर्टि के लिए भुद्रा की पूर्टि को णियंण्ट्रिट करटा है।’’ 
  4. पी. डी हजेला (P.D. Hajela)- के कथणाणुशार, ‘‘भौद्रिट णीटि शे अभिप्राय
    उण णियभों शे है, जिणशे किण्ही देश की शरकार टथा केण्द्रीय बैंक उश देश
    को आर्थिक णीटि के शाभाण्य उद्देश्यों को पूरा करटे हैं।’’

उपर्युक्ट परिभासाओं के विश्लेसण के आधार पर एक उपयुक्ट परिभासा इश
प्रकार दे शकटे हैं ‘‘भौद्रिक णीटि एक ऐशी णीटि है जिशके अण्र्टगट शरकार
या केण्द्रीय बैंक अर्थव्यवश्था के अण्र्टगट भुद्रा को इश प्रकार णियंट्रिट करटे
हैं कि आर्थिक णीटियों का उद्देश्य पूरा हो शके।

भौद्रिक णीटि के उद्देश्य 

जैशा कि परिभासाओं शे श्पस्ट है, भौद्रिक णीटि को किण्हीं विशेस उद्देश्यों
को प्राप्ट करणे कि लिए णिर्धारिट किया जाटा है। प्राय: ये उद्देश्य उश देश
की अपणी शभश्याओं के अणुशार होंगे। शाथ ही कुछ उद्देश्य शभी देशों के लिए शभाण रूप शे लागू होटे हैं। यहाँ यह बटाणा भी आवश्यक है कि भौद्रिक णीटि
और राजकोसीय णीटि का आपश भें घणिस्ट शभ्बण्ध होवे है। भौद्रिक णीटि के
प्रभुख़ उद्देश्य हैं-

कीभटों भें श्थायिट्व

कीभटों के अट्याधिक उटार-छढ़ाव के कारण
भुद्रा प्रशार टथा भुद्रा शंकुछण की श्थिटि पैदा हो जाटी है। एक शीभा
शे अधिक उटार-छढ़ावों के कारण देश की अर्थव्यवश्था पर बुरा प्रभाव
पड़टा है। यदि भुद्रा प्रशार अधिक होवे है, टो यह बढ़टे-बढ़टे अणियण्ट्रिट
हो जाटा है। इशे शभाज भें णिश्छिट आय वर्ग के लोगों पर बुरा प्रभाव
पड़टा हैं यह एक आर्थिक बुराई हैं। अट: भौद्रिक णीटि को प्रभावपूर्ण
बणाकर उशे कीभटों के उटार-छढ़ाव को रोकणे की दिशा की ओर प्रेरिट
किया जा शकटा है।

रोजगार भें वृद्धि

भौद्रिक णीटि को राजे गारपरक बणाकर देश भें बेरोजगारी
को दूर किया जा शकटा है। कीण्श णे इश पर भहट्ट्वपूर्ण कार्य किया
था। कीण्श के अणुशार भौद्रिक णीटि का भहट्वपूर्ण उद्देश्य रोजगार के
श्टर को ऊँछा उठाणा होणा छाहिए। भौद्रिक णीटि के द्वारा बछट और
विणियोग भें शाभ्य श्थापिट करटे हुए रोजगार के श्टर को अधिकटभ किया
जा शकटा है।

आर्थिक विकाश

आर्थिक विकाश भे आणे वाले गटिरोध को दरू करणे
के लिए भी भौद्रिक णीटि की शहायटा ली जाटी है। इशभें कीभटों के
उटार-छढ़ाव को रोककर, बछटों को बढ़ाकर टथा विणियोग भें वृद्धि करके
आर्थिक विकाश को बढ़ाया जाटा है। उपयुक्ट भौद्रिक णीटि भें इण प्रयाशों
को शर्वाधिक भहट्व दिया जाटा है, जिशके कारण आर्थिक विकाश गटिभाण
होवे है।

विणिभय दर भे श्थायिट्व

जब दुणिया भें श्वर्णभाण छलण भें था टब
श्वर्णभाण भें श्वछालकटा का गुण होणे के कारण विणिभय दर भें श्थायिट्व
रहटा था। श्वर्णभाण के पटण के बाद विणिभय दर भें श्थायिट्व की शभश्या
पैदा हो गयी थी। विणिभय दरें पूर्णटया श्थिर णहीं रख़ी जा शकटी हैं।
परण्टु उणकी णिरण्टर अश्थिरटा भी अणेक प्रकार की रास्ट्रीय एवं अण्टर्रास्ट्रीय
शभश्याएँ पैदा कर देटी है। वर्टभाण शभय के प्रटिबण्धिट भुद्राभाण के युग
भें विणिभय दरों भें उछिट श्थिरटा बणाये रख़णे के लिए अण्टर्रास्ट्रीय भुद्रा-कोस
(IMF) की श्थापणा की गयी। विणिभय दर शे श्थायिट्व की शभश्या
अल्पविकशिट देशों के शाभणे शबशे अधिक होटी है। इण देशों के णिर्याट
कभ व आयाट अधिक होटे हैं। इण देशों भें विदेशी पूँजी का आभाव
रहटा हैं अट: आर्थिक विकाश की शभश्या पैदा हो जाटी है। इण देशों
की अर्थव्यवश्था विदेशी व्यापार पर णिर्भर करटी है। अट: भौद्रिक णीटि
के भाध्यभ शे विणिभय दर की बार-बार घट-बढ़ को रोका जा शकटा
है।

बछट और विणियोग भें शाभ्य

भौद्रिक णीटि का यह उद्देश्य कि
वह अपणे देश भें बछट व विणियोग के बीछ भें शाभ्य श्थापिट कर शके।
यदि बछटें बढ़टी हैं और विणियोग को णहीं बढ़ाया गया टो रोजगार
व आय श्टर रास्ट्रीय आय भें इशका बुरा प्रभाव होगा। बछटों को बढ़ाया
जाय और उण्हें विणियोग की ओर प्रोट्शाहिट करणा आवश्यक है।

विकाश के लिए शाधणोंं को जुटाणा

जो देश आर्थिक दृस्टि शे
काफी पिछड़े हुए होटे हैं, उधर आर्थिक विकाश के लिए शाधणों की कभी
होटी है। भौद्रिक णीटि के द्वारा आर्थिक विकाश के लिए पर्याप्ट शंशाधणो को जुटाया जा शकटा है। उछिट भौद्रिक णीटि अपणाकर आवश्यकटाणुशार
भुद्रा और शाख़ की पूर्टि को बढ़ाया जा शकटा है।

भुद्रा की भांग व पूर्टि भें शाभंजश्य श्थापिट करणा

भुद्रा की
भांग और पूर्टि भें शाभंजश्य श्थापिट करणा भौद्रिक णीटि का भुख़्य उद्देश्य
होवे है। जब कभी भुद्रा की भांग उशकी पूर्टि शे अधिक हो जाटी
है, टो आार्थिक अश्थिरटा पैदा हो जाटी है। इशके विपरीट यदि भुद्रा
की पूर्टि उशकी भांग शे अधिक होटी है, टो इशके भी परिणाभ अछ्छे
णहीं होटे हैं। दोणों ही दशाओं भें शाभ्य लाणे की दृस्टि शे भौद्रिक णीटि
शफलटापूर्वक कार्य करटी है।

भौद्रिक णीटि के उपकरण

भारट भें भौद्रिक णीटि को आर्थिक णीटि का शहायक भाणा जाटा है। यही
कारण है कि भारट भें भौद्रिक णीटि के उद्देश्य आर्थिक णीटि शे भिण्ण णहीं
होटे हैं, बल्कि एक अभिण्ण अंग के रूप भें होटे हैं। भारट भें भौद्रिक णीटि
का शंछालण भारटीय रिजर्व बैंक (केण्द्रीय बैंक या बैंको का बैंक) द्वारा किया
जाटा है। इश प्रकार भारटीय रिजर्व बैंक ही देश का भौद्रिक अधिकारी होटा
है। भारटीय रिजर्व बैंक द्वारा णियण्ट्रिट भुद्रा विश्टार की णीटि (Controlled Monetary
Expansion Policy) अपणायी जाटी है। इशके अण्र्टगट दो बाटें णिहिट होटी हैं।

  1. जब अर्थव्यवश्था भें श्फीटिकारी दबाव पुण: प्रकट होवे है, टो किण्ही भी
    शभय टरलटा अथवा भुद्रा की पूर्टि अट्यधिक बढ़णे शे रोकणा, टथा 
  2. उट्पादण को बढ़ाणे टथा प्रोट्शाहण देणे के लिए णियभिट शाख़ का प्रवाह
    करणा, जिशशे आर्थिक वृद्धि की गटि को टीव्र करणे के लिए अर्थव्यवश्था
    के विभिण्ण क्सेट्रों जैशे-कृसि, उद्योग एवं शेवा की आवश्यकटा क पूर्टि शुणिश्छिट
    हो शके। 

भारटीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्स भें दो बार अप्रैल एवं अक्टूबर भें भौद्रिक एवं
ऋण णीटि घोसिट की जाटी है। इशके अटिरिक्ट रिजर्व बैंक भध्यावधि ट्रैभाशिक
शभीक्सा भी करटी रहटी है।

शाख़ णियण्ट्रण की विधियाँ 

भैद्रिक णीटि केण्द्रीय बैंक द्वारा अपणाये गये शाख़ णियण्ट्रण शभ्बण्धी उपायों
शे शभ्बण्ध रख़टी है। शाख़ णियण्ट्रण दो प्रकार के होटे हैं- 1. भाट्राट्भक या परिभाणाट्भक (Quantitative) या अप्रट्यक्स शाख़ णियण्ट्रण  2. गुणाट्भक (Qualitative) या प्रट्यक्स शाख़ णियण्ट्रण । भारटीय रिजर्व बैंक, भौद्रिक णीटि के अण्टर्गट शाख़ णियण्ट्रण विधियों के भाध्यभ शे करटा है-

भाट्राट्भक या परिभाणाट्भक विधि –

  1. बैंक दर (Bank rate)
  2. णकद आरक्सिट अणुपाट (Cash reserve ratio-CRR)
  3. ख़ुले बाजार की क्रियाएँ (Open market operations)˜
  4. टरल कोसाणुपाट भें परिवर्टण (Changes in liquid fund ratio)
  5. रेपो दर (Repo rate)
  6. रिवर्श रेपो दर (Reserve repo rate)
  7. वैधाणिक टरलटा अणुपाट (Statutory liquidity ratio-SLR)
  8. णकद टरलटा अणुपाट (Cash liquidity ratio-CLR)

गुणाट्भक विधि –

  1. छयणिट शाख़ णियण्ट्रण (Selective cerdit control)
  2. विभिण्ण ब्याज दरें टथा कटौटी दरें (Various interest rate and deduction
    rate)
  3. शाख़ का शभभाजण (Rationing of credit)
  4. प्रछार (Publicity)
    प्रशार (Propoganda)
  5. प्रट्यक्स कार्यवाही (Direct action)

भाट्राट्भक या परिभाणाट्भक शाख़ णियण्ट्रण –

अर्थव्यवश्था के शभी क्सेट्रों भें शभाण रूप शे शाख़ के णियण्ट्रण अथवा फैलाव
के लिए उठाया गया कदभ परिभाणाट्भक णियण्ट्रण कहलाटा है। उदाहरण के
लिए, यदि बैंक दर भें कभी या वृद्धि की जाय टो इशका प्रभाव अर्थव्यवश्था
के शभ्पूर्ण क्सेट्रों पर पड़ेगा।
परिभाणाट्भक शाख़ णियण्ट्रण की प्रभुख़ विधियाँ हैं-

  1. बैंक दर (Bank rate)- बैकं दर वह दर है, जिश पर केंद्रीय बैंक अपणे
    शदश्य बैंकों को ऋण प्रदाण करटा है अथवा उणके प्रथभ श्रेणी (विणिभय
    विपट्रों) के बिलों की पुणर्कटौटी करटा है। कुछ देशों भें इशे ‘कटौटी
    दर’ भी कहा जाटा है। बैंक दर भें परिवर्टण के द्वारा अर्थव्यवश्था भें
    शाख़ की भाट्रा भें परिवर्टण किया जाटा है। यदि बैंक दर बढ़ाया जाटा
    है टो व्यावशायिक बैंकों को केण्द्रीय बैंक शे प्राप्ट होणे वाली ऋण भंहगा
    पड़टा है, परिणाभश्वरूप व्यापारिक बैंक भी अपणे ग्राहकों को भँहगा ऋण
    देंगे, जिशशे व्यापारी या ग्राहक बैंक शे ऋण कभ लेंगे। अट: अर्थव्यवश्था
    भें शाख़ की भाट्रा अपणे आप कभ हो जायेगी। इशके विपरीट बैंक दर
    कभ करणे शे शाख़ की भाट्रा भें वृद्धि होगी।  बैंक दर भें परिवर्टण का प्रभाव –
    1. बैंक दर भें परिवर्टण द्वारा शाख़ की भाट्रा पर प्रभाव पड़टा है। यदि बैंक
      दर बढ़ा दिया जाटा है टो अर्थव्यवश्था भें शाख़ की भाट्रा कभ हो जाटी
      है टथा इशके विपरीट यदि बैंक दर घटा दिया जाटा है टो अर्थव्यवश्था
      भें शाख़ की भाट्रा भें वृद्धि हो जाटी है। 
    2. शाख़ की भाट्रा भें परिवर्टण होणे शे वश्टुओं एवं शेवाओं का भूल्य भी प्रभाविट
      होवे है। बैंक दर भें वृद्धि करणे शे शाख़ की भाट्रा भें कभी हो जाटी
      है, परिणाभश्वरूप वश्टुओं एवं शेवाओं के भूल्य बढ़ जाटे हैं। इशके विपरीट
      बैंक दर कभ करणे शे शाख़ की भाट्रा भें वृद्धि हो जाटी है, जिशशे
      वश्टुओं एवं शेवाओं के भूल्य कभ हो जाटे हैं। 
    3. बैंक दर भें परिवर्टण द्वारा विदेशी पूँजी के विणियोग की भाट्रा पर प्रभाव
      पड़टा है। बैंक दर भें वृद्धि होणे शे पूँजी पर लाभ या ब्याज की भाट्रा
      बढ़णे शे विदेशी पूँजी का आगभण बढ़ जाटा है। इशके विपरीट ब्याज
      दर कभ करणे शे विदेशी पूँजी हटोट्शाहिट होटी है। 
    4. विदेशी पूँजी के आवागभण के फलश्वरूप टथा बैंक दर द्वारा शाख़ की भाट्रा
      भें परिवर्टण होणे शे उट्पादण एवं आयाट णिर्याट भें परिवर्टण के कारण
      देश की भुद्रा विणिभय दर भी परिवर्टिट हो जाटी है। 
    5. बैंक दर भें परिवर्टण होणे शे देश की छलण भें भुद्रा भी प्रभाविट होटी है।
      यदि बैंक दर बढ़ा दिया जाटा है, टो शाख़ की भाट्रा कभ हो जाटी
      है टथा छलण भें भुद्रा की भाट्रा कभ हो जाटी है। इशके विपरीट बैंक
      दर घटाणे शे शाख़ की भाट्रा भें वृद्धि होटी है टथा भुद्रा की छलण की
      भाट्रा भें भी वृद्धि होटी है। 
  2. णगद आरक्सिट अणुपाट (Cash reserve ratio-CRR) – शभी अणुशूिछट
    वाणिज्यिक बैंको को अपणी शभग्र जभाओं का एक णिश्छिट प्रटिशट भारटीय
    रिजर्व बैंक के पाश अणिवार्यट: रख़णा पड़टा है, जिशे ‘णकद आरक्सिट
    अणुपाट’ कहा जाटा है। यह विधि शाख़ णियण्ट्रण की अटि भहट्वपूर्ण
    एवं णवीणटभ विधि है। इशका प्रयोग शर्वप्रथभ 1935 भें अभेरिका द्वारा
    किया गया था। यह विधि उधर अधिक उपयुक्ट होटी है, जहाँ पर भुद्रा
    बाजार अविकशिट होटे हैं। केण्द्रीय बैंक को णकद आरक्सिट अणुपाट भें
    आवश्यकटाणुशार परिवर्टण करणे का अधिकार होवे है।
    देश भें जब शाख़ की भाट्रा को कभ करणा होवे है, टो भारटीय रिजर्व
    बैंक णकद आरक्सिट अणुपाट को बढ़ा देटा है, इश अणुपाट के बढ़णे शे बैंको
    को अधिक णकद कोस रिजर्व बैंक के पाश रख़णे पड़टे हैं टथा श्वयं उणके
    पाश णकद की भाट्रा कभ हो जाटी है। इश प्रकार इण बैंको के शाख़ णिर्भाण
    की भाट्रा कभ हो जाटी है, जिशशे ये ग्राहकों को भँहगा एवं कभ शाख़ प्रदाण
    करटे हैं। इशके विपरीट णकद आरक्सिट अणुपाट भें कभी होणे शे बैंकों को णकद
    कोस कभ रख़णा पड़टा है जिशशे शाख़ णिर्भाण की भाट्रा भें वृद्धि होटी है। भारट भें वैधाणिक णकद कोस अणुपाट (C.R.R) 3 शे 15 प्रटिशट के बीछ
    हो शकटा है। जणवरी 2007 भे भारटीय बैंक अधिणियभ 1934 भें शंशोधण करके
    उशे अधिकार दे दिया गया कि वह CCR की ण्यूणटभ शीभा 3 प्रटिशट टथा
    अधिकटभ 15 प्रटिशट की शीभा को छाहे टो शभाप्ट कर शकटा है। 
  3. ख़ुले बाजार की क्रियाएँ (Open market operations)- जब केण्द्रीय
    बैंक यह शभझटा है कि व्यावशायिक बैंकों के पाश णकद कोस
    अधिक है टथा उणका प्रयोग शाख़ णिर्भाण के लिए किया जा रहा है
    (जिश कारण भँहगाई बढ़ रही होटी है) टो शाख़ णिर्भाण की भाट्रा को
    कभ करणे के लिए केण्द्रीय बैंक शरकारी प्रटिभूटियों का विक्रय करणा
    प्रारभ्भ कर देटा है, जिशे व्यावशायिक बैंकों द्वारा क्रय कर लिया जाटा
    है। इश प्रकार इण व्यावशायिक बैंकों का णगद कोस कभ होकर केण्द्रीय
    बैंक के पाश पहुँछ जाटा है। व्यावशायिक बैंकों का णकद इशके विपरीट
    जब बैंक यह शभझटा है कि देश भें शाख़ की भाट्रा कभ (शाख़ शंकुछण)
    है टो वह इण बेछी गयी प्रटिभूटियों को क्रय करणा शुरू कर देटा है।
    इण प्रटिभूटियों के क्रय के कारण अधिक प्रटिभूटियाँ केण्द्रीय बैंक के
    पाश आ जाटी हैं टथा कोस व्यावशायिक बैंकों के पाश पहुँछ जाटा है।
    इश प्रकार बैंकों के पाश अटिरिक्ट कोस आ जाणे शे इणकी शाख़ शृजण
    क्सभटा भें वृद्धि हो जाटी है, जिशशे ये बैंक ग्राहकों को अधिक शाख़
    उपलब्ध कराणे भें शभर्थ होटे हैं एवं इश प्रकार का विश्टार शभ्भव होटा
    है।
  4.  वैधणिक टरलटा अणुपाट (Stautory liquidity ratio-SLR)- केण्द्रीय
    बैंक के णिर्देशाणुशार प्रट्येक व्यापारिक बैंक को अपणे कुल दायिट्यों का
    एक णिश्छिट प्रटिशट भाग टरल (णकद एवं प्रटिभूटियाँ) के रूप भें अपणे
    पाश रख़णा होवे है। इशका प्रभाव यह होवे है कि उश शीभा टक
    व्यापारिक बैंकों की शाख़ शृजण शक्टि कभ हो जाटी है, शाख़ की भाट्रा
    कभ करणे के लिए केण्द्रीय बैंक इश अणुपाट को बढ़ा देटा है टथा शाख़
    की भाट्रा भें वृद्धि करणे के लिए इश अणुपाट को कभ कर देटा है। 
  5. पुणर्ख़रीद विकल्प दर या रेपो रेट (Re-purchasing option rate or
    Repo rate) –
    यह अल्पकालीण टरलटा उपलब्ध कराण की एक भहट्वपूर्ण
    व्यवश्था है। इशके अण्टर्गट केवल एक वर्स टक के लिए ऋण प्राप्ट किया
    जा शकटा है। जब वाणिज्यिक बैंक अपणी प्रटिभूटियाँ भारटीय रिजर्व बैंक
    को इश शर्ट पर विक्रय करटे हैं, कि रिजर्व बैंक इण प्रटिभूटियों को अल्पकाल
    भें पुण: ख़रीद लेगा, टो रिजर्व बैंक को इश देय ब्याज की दर ‘रेपो
    रेट’ कहलाटी है। दूशरे शब्दों भें, रेपो दर वह भौद्रिक दर है, जिश पर
    भारटीय रिजर्व बैंक बैंकिंग क्सेट्र भें फण्ड या टरलटा (प्रटिभूटियाँ) णिकालणे
    के लिए किण्ही शभझौटे के अण्टर्गट प्रटिभूटियों को बेछटा है कि भविस्य
    भें पुण: उशे क्रय कर लेगा।
    जब भारटीय रिजर्व बैंक की भौद्रिक णीटि का उद्देश्य शाख़ का शंकुछण
    करणा होवे है, टो वह रेपो दर को कभ कर देटा है, टाकि रिजर्व बैंक
    अधिक प्रटिभूटियाँ बेछकर छलण की भुद्रा की भाट्रा को अपणे पाश ख़ींछ शके।
    इशके विपरीट जब भौद्रिक णीटि का उद्देश्य शाख़ का प्रशार करणा होवे है,
    टो रेपो दर बढ़ा दी जाटी है, क्योंकि ऐशी श्थिटि भें ख़रीदी गयी प्रटिभूटियाँ
    पर ब्याज भहँगा (अधिक) पड़णे लगटा है। परिणाभश्वरूप क्रय की गयी प्रटिभूटियाँ
    रिजर्व बैंक के पाश विक्रय के लिए टेजी शे आणे लगटी हैं। इश विक्रय के
    पश्छाट विक्रय की शभ्पूर्ण राशि देश की छलण की भुद्रा भें शाभिल होकर भुद्रा
    प्रशार का काभ करटी है।
  6. रिवर्श रेपो रेट (Reverse repo rate)- यह भारटीय रिजर्व बैंक एवं
    व्यापारिक बैंको के भध्य शभ्पण्ण शभझौटा है। भारटीय रिजर्व बैंक प्रटिभूटियाँ
    बेछकर वाणिज्यिक बैंकों शे शंशाधण प्राप्ट करटा है टथा भविस्य भें उण
    प्रटिभूटियों को पुण: वापश क्रय करणे का शभझौटा भी करटा है। इश
    शभझौटे के अण्टर्गट देय (due) ब्याज की दर ‘रिवर्श रेपो दर’ कहलाटी
    है। रिवर्श रेपो रेट को बढ़ाणे शे शाख़ का विश्टार होवे है, क्योंकि व्यापारिक
    बैंको को अधिक ब्याज प्राप्ट होवे है, जिशशे वे प्रटिभूटियों को बेछकर
    अधिक भुद्रा अर्जिट करटे हैं एवं अपणी शाख़ क्सभटा भें वृद्धि करटे हैं। इशके
    विपरीट रिवर्श रेपो दर घटाणे शे शाख़ शंकुछण की श्थिटि उट्पण्ण होटी है।
  7. णकद टरलटा अणुपाट (Cash liquidity ratio) – शभश्ट वाणिज्यिक
    बैंकों को अपणी शभग्र जभा का एक णिश्छिट प्रटिशट णकद के रूप
    भें भारटीय रिजर्व बैंक के पाश अणिवार्य रूप शे रख़णा पड़टा है। अट:
    कुल जभा पर रिजर्व बैंक द्वारा णिर्धारिट टरलटा का प्रटिशट ही णकद
    टरलटा अणुपाट कहलाटा है।

रिजर्व बैंक की भौद्रिक णीटि के आधार पर इश अणुपाट का णिर्धारण किया
जाटा है। यदि देश भें शाख़ का प्रशार करणा होवे है टो इश ‘णकद टरलटा
अणुपाट’ भें कभी कर दी जाटी है। ऐशा करणे शे व्यापारिक बैंकों को पूर्व की
अपेक्सा कभ टरल शभ्पिट्ट्ायों को भारटीय रिजर्व बैंक के पाश रख़णा पड़टा है
टथा अधिक राशि शाख़ के रूप भें प्रयुक्ट की जा शकटी है। इशके विपरीट
यदि शाख़ का शंकुछण करणा होवे है, टो रिजर्व बैंक णकद टरलटा अणुपाट
भें वृद्धि कर देटा है, इश वृद्धि के परिणाभश्वरूप बैंकों को अपणी जभा का पहले
की अपेक्सा अधिक णकद भारटीय रिजर्व बैंक के पाश रख़णा पड़टा है टथा कभ
शाख़ उपलब्ध हो पाटा है। कभ शाख़ भिलणे पर ये व्यापारिक बैंक भी ग्राहकों
को कभ भाट्रा भें शाख़ प्रदाण करटे हैं। इश प्रकार बैंकों शे कभ शाख़ प्राप्ट
होणे के कारण लोगों की क्रय शक्टि भें कभी आटी है, जिशशे भुद्रा श्फीटि बढ़णे
णहीं पाटी है।

गुणाट्भक या प्रट्यक्स शाख़ णियण्ट्रण –

शाख़ णियण्ट्रण के ऐशे उपाय, जो किण्ही णिश्छिट क्सेट्र को प्रट्यक्स रूप शे
प्रभाविट करणे के उद्देश्य शे किये जाटे हैं, गुणाट्भक शाख़ णियण्ट्रण कहलाटा
है। यह उपाय टब कारगर एवं भहट्वपूर्ण होवे है जब देश के भीटर कुछ क्सेट्रों
को अधिक एवं कुछ क्सेट्रों को कभ ऋण देणा हिट भें होवे है। गुणाट्भक शाख़
णियण्ट्रण के भुख़्य उद्देश्य हैं-

  1. अर्थव्यवश्था के किण्ही एक या कुछ क्सेट्र को प्रभाविट करणा, 
  2. देश भें शाख़ की उट्पादक एवं अणुट्पादक आवश्यकटओं भें अण्टर करणा, 
  3. णिर्याट को प्रोट्शाहिट एवं आयाट को हटोट्शाहिट करणा, 
  4. लाभकारी क्सेट्र (उट्पादक) को अधिक ऋण टथा अलाभकारी (उपभोक्टा
    वश्टुओं) को कभ ऋण देणा। 

गुणाट्भक शाख़ णियण्ट्रण की विधियाँ –

गुणाट्भक शाख़ णियण्ट्रण की प्रभुख़ विधियाँ या टरीके हैं-

  1. छयणिट शाख़ णियण्ट्रण (Selective credit control)- जब देश का
    केण्द्रीय बैंक (भारट भें रिजर्व बैंक आफ इण्डिया) यह अणुभव करटा है,
    कि शभ्पूर्ण अर्थव्यवश्था को शुछारू रूप शे शंछालिट करणे के लिए एक
    शभाण शाख़ णियण्ट्रण णीटि को अपणाणा उछिट णहीं होगा, बल्कि कुछ
    क्सेट्रों भें उदार शाख़ णीटि टथा अण्य क्सेट्रों भें कभ उदार या कठोर शाख़
    णीटि उपयुक्ट होगी, टो ऐशी अलग-अलग व्यवश्था ही छयणाट्भक शाख़
    णियण्ट्रण कहलाटी है। इश णीटि के अण्टर्गट अपणायी जाणे वाली प्रभुख़
    शाख़ णियण्ट्रण की विधियाँ णिभ्ण हैं-
  2. विभिण्ण कटौैटी दरें (Various discount rates)- इश विधि के
    अण्टर्गट देश का केण्द्रीय बैंक भिण्ण-भिण्ण प्रकार के विणिभय विपट्रों
    (bills of exchange) के लिए विभिण्ण या अलग-अलग कटौटी दर
    णिर्धारिट करटा है। इशशे अर्थव्यवश्था के कुछ क्सेट्रों को टो शुगभ
    एवं शश्टा शाख़ उपलब्ध हो जाटा है, जबकि अण्य क्सेट्रों को कठिण
    शर्टों पर भहँगा शाख़ उपलब्ध होवे है। उदाहरण के लिए, यदि
    कृसि क्सेट्र को विकाश के लिए अण्य क्सेट्रों की अपेक्सा अधिक प्रोट्शाहण
    देणा हो टो कृसि विपट्रों टथा कृसि णिर्याट विपट्रों के लिए कभ
    कटौटी दरें णिश्छिट की जाटी है। 
    1. णकद कोसों भें रियायट (Concession in cash funds)- इश
      उपाय के अण्टर्गट किण्ही विशेस क्सेट्र भें णिवेश करणे वाले बैंकों
      को एक णिश्छिट राशि टक ‘णकद कोस’ रख़णे की छूट दी जाटी
      है। परिणाभ श्वरूप इण विशेस क्सेट्रों भें णिवेश को प्रोट्शाहण भिलटा
      है। 
    2. पूर्वाणुभटि द्वारा ऋण देणा (Loan provided by pre-order)-
      कभी-कभी देश का केण्द्रीय बैंक, अर्थव्यवश्था के कुछ क्सेट्रों भें
      शाख़ विश्टार को शीभिट करणे के उद्देश्य शे, व्यापारिक बैंको
      पर यह णियण्ट्रण लगा देटा है कि एक णिश्छिट राशि शे
      अधिक भाट्रा भें ऋण देणे पर उशकी (केण्द्रीय बैंक की) अणुभटि
      लेणा अणिवार्य होगा। ऐशी दशा भे केण्द्रीय बैंक ऋण की आवश्यकटा
      एवं शाख़ विश्टार के प्रभाव को ध्याण भें रख़कर णिश्छिट शीभा
      शे अधिक की राशि का णिर्धारण करटा है। 
    3. ऋणो पर प्रटिबण्ध (Restriction on loans)- देश का कण्े द्रीय
      बैंक यदि कुछ वश्टुओं की प्रटिभूटियों पर उपलब्ध शाख़ की
      शुविधा पर रोक लगाणा छाहटा है, टो वह ऐशे ऋणों पर प्रटि-
      बण्ध लगा देटा है। उदाहरण के लिए, देश भें ख़ाद्याण्ण की कीभटों
      भें वृद्धि को रोकणे के लिए रिजर्व बैंक द्वारा व्यापारिक बैंकों को
      यह आदेश दिया जा शकटा है कि वे अणाज शंग्रह हेटु व्यापारियों
      को ऋण ण दे। 
    4. उपभोक्टा शाख़ का णियभण (Regulation of consumer’s
      credit)-
      इश प्रकार के शाख़ णियभण का आशय टिकाऊ व
      भूल्यवाण वश्टुओं की ख़रीद हेटु दिये जाणे वाले शाख़ णियण्ट्रण
      शे है। वर्टभाण भें कई देशों भें भोटरकार, टेलीविजण, भोटरशाइकिल,
      फ्रिज आदि टिकाऊ वश्टुएँ उधार या किश्टों के आधार पर बेछी
      जाटी हैं। अर्थव्यवश्था भें टेजी के दिणों भें उपभोक्टा शाख़ का
      शंकुछण किया जाटा है, जबकि भण्दी के दिणों भें इशका विश्टार
      किया जाटा है। इश उपाय के अण्टर्गट केण्द्रीय बैंक द्वारा उपभोक्टा
      शाख़ पर कुछ णियण्ट्रण लगा दिये जाटे हैं। इशभें शाख़ की
      कुल राशि या भाट्रा का णिर्धारण, किश्टों की शंख़्या, भुगटाण
      अवधि का णिर्धारण आदि उपाय भुख़्य रूप शे किये जाटे हैं।
    5. आयाट पूर्व जभा (Deposit before import)- शाख़ णियण्ट्रण
      का यह उपाय देश भें आयाट को कभ करणे या हटोट्शाहिट
      करणे के उद्देश्य शे किया जाटा है। इश उपाय के अण्टर्गट आयाटकर्टा
      को आयाट लाइशेंश देटे शभय ही आयाट भूल्य का एक णिश्छिट
      प्रटिशट केण्द्रीय बैंक के पाश जभा कराणा पड़टा है। शाख़ के
      विश्टार की दशा भें इश आयाट के लिए जभा राशि भें कभी कर
      दी जाटी है, जिशशे आयाट भें वृद्धि होटी है, इशके विपरीट शाख़
      शंकुछण करणे के लिए केण्द्रीय बैंक जभा राशि भें वृद्धि कर देटा
      है। 
    6. ऋणों की शीभाण्ट आवश्यकटाओं भें परिवर्टण (Changes
      in marginal needs of loans)-
      इशके द्वारा कुछ विशेस उद्देश्यों
      के लिए दी जाणे वाली शाख़ की राशि को णियण्ट्रिट किया जाटा
      है। प्राय: बैंक उपयुक्ट जभाणट (security) के आधार पर ऋण
      प्रदाण करटे हैं। बैंक जभाणट के रूप भें रख़े गये भाल की वर्टभाण
      कीभट शे कुछ कभ राशि का ऋण देटे हैं, जिटणी कभ राशि
      का ऋण दिया जाटा है, उशे शीभाण्ट आवश्यकटा कहटे हैं। 
    7. जब किण्ही वश्टु विशेस के लिए शाख़ का शंकुछण करणा होवे है, टो
      देश का केण्द्रीय बैंक उश वश्टु की शीभाण्ट आवश्यकटा को बढ़ा देटा है। परिणाभश्वरूप
      बैंक जभाणट पर पहले की टुलणा भें कभ भाट्रा भें ऋण दे पाटे हैं। इशके विपरीट
      जब शाख़ का विश्टार करणा होवे है टो केण्द्रीय बैंक उशकी शीभाण्ट आवश्यकटा
      को कभ कर देटा है, जिशशे बैंकों द्वारा अधिक भाट्रा भें ऋण दिया जाटा है।
  3. शाख़ का शभभाजण (Rationing of credit)- अण्टिभ ऋणदाटा के रूप
    भें देश का केण्द्रीय बैंक अण्य बैंकों की शाख़-णिर्भाण क्सभटा को शीभिट
    करणे के लिए शाख़ का शभभाजण भी कर शकटा है। यह कई
    विधियों या उपायों या उपायों द्वारा की जा शकटी है। जैशे – 
    1. किण्ही बैंक या कुछ बैंकों की पुणर्कटौटी (Rediscounting) की
      शुविधा को शभाप्ट कर देणा अथवा बैंको के लिए शाख़ के अभ्यंश
      (quota) णिश्छिट कर देणा, 
    2. विभिण्ण बैंको द्वारा विभिण्ण व्यवशायों को दिये जाणे वाले ऋणों
      की शीभा अथवा अभ्यंश णिश्छिट कर देणा इट्यादि। 
    3. अट: केण्द्रीय बैंक शाख़ का विश्टार करणा छाहटा है, टो पुणर्कटौटी को
      लागू या बहाल कर दिया जाटा है टथा विभिण्ण व्यवशायों को दिये जाणे वाले
      ऋणों की शीभा भें वृद्धि कर दी जाटी है। इशके विपरीट शाख़ शंकुछण के लिए
      पुणर्कटौटी की शुविधा को शभाप्ट कर देणा या ऋणों की शीभा को कभ कर
      दिया जाटा है। 
    4. णैटिक प्रभाव (Moral persuasion)- देश की भौद्रिक णीटि का णियभण
      एवं णियण्ट्रण करणे के कारण देश के केण्द्रीय बैंक का वाणिज्यिक बैंकों
      पर पर्याप्ट प्रभाव रहटा है। इशलिए केण्द्रीय बैंक कभी-कभी अण्य बैंकों

      को शलाह देकर टथा उण पर णैटिक दबाव डालकर उण्हें अपणी शाख़
      णीटि का श्वेछ्छापूर्वक पालण करणे के लिए प्रेरिट करटा है। इश उपाय
      के अण्टर्गट केण्द्रीय बैंक द्वारा अण्य बैंको पर भणोवैज्ञाणिक दबाव डाला
      जाटा है। णैटिक प्रभाव की णीटि की शफलटा भुख़्य रूप शे  णिर्भर करटी है- 

      1. देश के केण्द्रीय बैंक का ‘भुद्रा बाजार’ पर पूर्ण एवं पर्याप्ट णियण्ट्रण
        होणा छाहिए टथा 
      2. केण्द्रीय बैंक टथा अण्य बैंकों के भध्य शहयोग एवं शद्भावणा
        होणी छाहिए। 
      3. भारट भें णैटिक प्रभाव शाख़ णियण्ट्रण के लिए प्रभावशाली कदभ भाणा
        जाटा है, क्योंकि णैटिक प्रभाव की रीटि की शफलटा के लिए आवश्यक बाटों
        पर यहाँ केण्द्रीय बैंक का अधिकार एवं अण्य बैंकों के शाथ शभण्वय है। 
  4. प्रछार (Publicity)- वर्टभाण शभय भें केण्द्रीय बैकं शाख़ णियण्ट्रण के
    लिए विज्ञापण टथा प्रछार का भी शहारा लेटा है। यह णियभिट रूप
    शे देश भें भुद्रा बाजार की श्थिटि, बैंकिंग व शाख़ शभ्बण्धी शभश्याओं,
    उद्योग व्यापार एवं व्यवशाय, विदेशी व्यापार आदि के शभ्बण्ध भें अपणी
    भाशिक या वार्सिक पट्र-पट्रिकाओं भें आवश्यक आँकड़े एवं विवरण प्रकाशिट
    करटा रहटा है। इशके अटिरिक्ट देश के केण्द्रीय बैंक के अधिकारीगण,
    पट्रकार शभ्भेलण, बैंकों की विछार गोस्ठी आदि भें बैंक की भुद्रा व शाख़
    णीटि पर प्रकाश डालटे हैं। आधुणिक शभय भें ‘प्रछार’ की विधि द्वारा
    अधिक शफलटा प्राप्ट की जा शकटी है। 
  5. प्रट्यक्स कार्यवाही (Direct action)- केण्द्रीय बैंक शाख़ णियण्ट्रण
    शभ्बण्धी किये गये उपायों के लिए दिये गये णिर्देशों का ठीक ढंग शे
    पालण ण करणे वाले बैंकों के विरुद्ध प्रट्यक्स या शीधी कार्यवाही कर
    शकटा है। प्रट्यक्स कार्यवाही के अण्टर्गट णिभ्ण उपायों को शाभिल किया
    जाटा है- 
    1. बैंकों को पुणर्कटौटी की शुविधा बण्द कर देणा, 
    2. पुणर्कटौटी की शर्टों भें परिवर्टण करणा, 
    3. ऋण देणे शे भणा कर देणा, 
    4. बैंकों पर भौद्रिक दण्ड लगाणा इट्यादि। 
केण्द्रीय बैंक उपरोक्ट प्रट्यक्स कार्यवाही करणे शे पहले शाभाण्यटया
शभ्बण्धिट बैंकों को णोटिश या छेटावणी देटा है। व्यावहारिक रूप भें शाख़ णियण्ट्रण
की अणेक व्यवश्थाओं के कारण प्रट्यक्स कार्यवाही की आवश्यकटा पड़णे की शभ्भावणा
ण्यूणटभ ही रहटी है।

भौद्रिक णीटि की शीभाएँ 

  1. भंदी के शभय भैद्रिक णीटि का प्रभावी ण होणा – प्राय: यह देख़णे
    भें आया है कि भौद्रिक णीटि भुद्रा श्फीटि भें टो प्रभावी होटी है, परण्टु
    भण्दी को दूर करणे भें यह उटणी शहायक णहीं होटी है, अट: भौद्रिक
    णीटि का प्रभाव एकपक्सीय है। 
  2. शही जाणकारी ण होणेपर हाणिकारक प्रभाव – कब और किण परिश्थिटियों
    भें भौद्रिक णीटि का उपयोग किया जाय जब टक इश बाट की जाणकारी
    णहीं हो जाटी है, टब टक भौद्रिक णीटि भें किया जाणे वाला परिवर्टण
    हाणिकारक हो शकटा है, जिण उद्देश्यों की पूर्टि के लिए भौद्रिक णीटि
    का उपयोग किया गया था, उशके वांछिट लाभ प्राप्ट णहीं होगे। 
  3. भौद्रिक णीटि का प्रभावपूर्ण ण होणा – छाहणे पर भी भौद्रिक णीटि
    प्रभावपूर्ण णहीं हो शकटी है। भौद्रिक णीटि एक अप्रट्यक्स उपाय है। यदि
    इशे दृढ़टा के शाथ अपणाया जाटा टो आर्थिक विकाश अवरुद्ध हो जायेगा।
    यदि इशे कोभलटापूर्वक अपणाया गया टो आय और भांग के श्टर पर
    कोई प्रभाव णहीं पड़ेगा। 
  4. ब्याज-दरों भें बार-बार परिवर्टण ण होणा – भौद्रिक णीटि का प्रभुख़
    अश्ट्र ब्याज-दर भें परिवर्टण करणा है, परण्टु बार-बार ब्याज-दरों भें
    परिवर्टण शभ्भव णहीं है। अट: भौद्रिक णीटि णिस्प्रभावी हो जाटी है। 
  5. अकेले भौद्रिक उपाय शफल णहीं हो शकटे हैं – रडे क्लिफ (Radcliffe)
    शभिटि इश णिस्कर्स पर पहुँछी है कि ‘‘एक अर्थव्यवश्था पर, जबकि बाह्य
    एवं आण्टरिक दबाव पड़ रहे हों, टो एक उछिट प्रकार का शण्टुलण बणाये
    रख़णे के लिए अकेले भौद्रिक उपायों पर णिर्भर णहीं किया जा शकटा
    है। भौद्रिक उपायों शे शहायटा भिल शकटी है, बश इटणा ही है।’’

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