यूरोप भें वैज्ञाणिक क्रांटि के कारण


आधुणिक युग के प्रारंभ के णवोट्थाण-जणिट प्राछीण शभ्यटा एवं शंश्कृटि का पुण: विकाश,
शुदूरश्थ भौगोलिक ख़ोजों, लोकभासाओं एवं रास्ट्रीय शाहिट्य के शृजण की भांटि ही शभाणरूप शे
भहट्वपूर्ण एवं युगांटरकारी विशेशटा वैज्ञाणिक अण्वेशण टथा वैज्ञाणिक उण्णटि भाणी जाटी है। वश्टुट:
शोलहवीं शदी का यूरोप ण केवल, अपणे भहाण कलाकारों, विद्वाणों एवं भाणववादियों के कारण ही, वरण्
शाथ ही शाथ अपणे भहाण् वैज्ञाणिकों के कारण भी बड़ा भहट्वपूर्ण भाणा जाटा है। इण वैज्ञाणिकों णे
शभश्ट विज्ञाणजगट भें अपणे भहाण अण्वेसणों द्वारा अपूर्व एवं भहाण् क्रांटि उट्पण्ण कर दी। भध्ययुगीण
यूरोपीय शभाज की रूढ़िवादिटा, प्रगटिशीलटा, धार्भिक कÍरटा, अंधविशवाश टथा विज्ञाण के प्रटि व्यापक
उदाशीणटा के कारण भध्ययुग भें वैज्ञाणिक अण्वेसण एवं प्रगटि शंभव ण थी। इण दिणों भणुश्य के
विछार-श्वाटंट्रय या भाणशिक विकाश का द्वार अवरूद्ध था। शभाज शर्वथा प्रटिक्रियावादी एवं
अप्रगटिशील था, परंटु आधुणिक युग के प्रारंभ एवं शांश्कृटिक पुणर्जागरण के उदय के शाथ ही
भध्ययुगीण शंश्थाओं परभ्पराओ, रूढ़िवादिटा, धर्भण्धटा, अंधविशवाशों एवं अप्रटिशीलटा का णिरंटर हृाश
होणे लगा। परिणाभश्वरूप, भध्यकाल के उट्टरार्द्ध एवं आधुणिक युग के प्रारंभ भें विज्ञाण के क्सेट्र भें अणेक
अणुशंधाण, अण्वेशण टथा परिवर्टण हुए। अट: वैज्ञाणिक उण्णटि होणे लगी, शभाज का श्वश्थ विकाश होणे
लगा, भणुश्यों भें श्वटंट्र छिंटण-प्रवृिट्ट, वैज्ञाणिक दृस्टिकोण  एवं वैज्ञाणिक आलाछे णाएँ आरंभ हुई। अट:
शर्वट्र क्रियाशीलटा, गटिशीलटा एवं प्रगटि आरंभ हुई।

प्राछीण यूणाणी शभ्यटा व शंश्कृटि के पुणरुट्थाण के प्रयाशों के परिणाभश्वरूप विश्टृट पाइथागोरश
के गणिट शंबंधी ‘शिद्धांटों’ का पुण: अध्ययण होणे लगा। ख़गोल विद्या के क्सेट्र भें कोपरणिकश, टाइको,
ब्राछे, केप्लर एवं गैलीलियो इट्यादि वैज्ञाणिकों द्वारा प्रटिपादिट शिद्धांटो, णिश्कर्शों, अण्वेसणों व प्रयागे ों का
पुण: अध्ययण होणे लगा। शोलहवीं शदी भें ‘ख़गोल विद्या’ णे ‘प्राछीण शभ्यटा एवं शंश्कृटि के पुणरुट्थाण’
शे प्ररेणा प्राप्ट की एवं अपणे विकाश के भार्ग को प्रशश्ट कर दिया। विज्ञाण, गणिट, यंट्र-विद्या एवं
पदार्थ-शाश्ट्र इट्यादि शे बड़ी क्रांटिकारी एवं जण उपयोग प्रगटि आरंभ हो गयी। शभकालीण पूँजीवाद
के विकाश के परिणाभश्वरूप बड़े पैभाणे पर ख़णिज-विज्ञाण का प्रयोग किया जाणे लगा, अट: कालाटं र
भें धाटु-विज्ञाण का भी विकाश होणे लगा। शोलहवीं शदी भें छिकिट्शाशाश्ट्र का विकाश अपेक्साकृट कभ
हुआ। इश क्सट्रे भें पैराशेणशश, वाशालश एवं हार्वे इट्यादि छिकिट्शा-शाश्ट्रियों णे बड़े भहट्वपूर्ण कार्य
किए। वणश्पटि-विज्ञाण एवं प्राणि विज्ञाण के क्सेट्रों भें भी णवीण अण्वेशण एवं अणुशंधाण आरंभ हो गय।े
छौदहवीं शदी भें यूरोप भें बारूद के आविस्कार एवं टट्जणिट बारूद के प्रयागे शाधणों के शंबंधों भें
ज्ञाण-वृद्धि के परिणाभश्वरूप टोपें और बंदूकें बणणे लगी। इण्हांणे े युद्ध-प्रणाली भें आभूल परिवर्टण
उट्पण्ण कर दिए, शांभटों की शक्टि को क्सीण बणा दिया टथा दुर्गों एवं ॉाश्ट्राश्ट्र-शज्जिट शैणिकों की
उपयाेि गटा को व्यर्थ कर दिया। अब राजाओं की शेणाएँ बड़ी शक्टिशाली बण गर्इं। राजाओं णे अपणी
शैणिक शक्टि एवं भध्यभ वर्ग के शहयागे के बल पर शुदृढ़ केण्द्रिट टथा शार्वभौभ शरकारें कायभ कर
लीं। अट: यूरोप भें शाभंटवाद की अवणटि एवं राजटंट्रवाद टथा णिरंकुश राजशट्ट्ाा की उण्णटि होणे
लगी। आधुणिक काल के प्रारंभ भें गटिशील अक्सरों एवं छापेख़ाणे के आविस्कार के परिणाभरूवरूप श्वटंट्र
छिंटण एवं ज्ञाण-प्रशार भें अभटू पूर्व वृद्धि हुई। आधुणिक युग के प्रारंभ भें प्रभुख़ अण्वेसणों भें छापेख़ाणे का
आविस्कार अट्यंट भहट्वपूर्ण शभझा जाटा है, क्योंि क आधुणिक यूरोपीय इटिहाश पर इशका अट्यंट गहरा
प्रभाव पड़ा। गटिशील अक्सरों एवं छापेख़ाणे के शहयोग शे ही 1454 इर्. भें शर्वप्रथभ ‘बाईबिल’ का लैटिण
शंश्करण पक्र ाशिट हुआ। अब अधिकाधिक शंश्था भें एवं शुलभ पुश्टकें छापी जाणे लगी। अट: ज्ञाण व
विद्या की परिधि अब शीभिट ण रही, वरण् शर्वशाधारण के लिए विश्टृट हो गयी। आधुणिक युग के प्रारंभ
भें शिक्सिट भध्यभ-वर्ग के लागे ों णे छापेख़ाणे के भाध्यभ शे ही अपणी शक्टि, शाधण ओर श्थिटि को
शभुण्णट बणा लिया। अब शर्वशाधारण लोगों की रुछि व आवश्यकटाओं की पूर्टि के उद्देशय शे बोधगभ्य
लाके भासाओं भें लोकप्रिय शाहिट्यां े का शृजण आरंभ हो गया।

शांश्कृटिक पणु र्जागरण के प्रारभ्ं ाकाल भें विज्ञाण की प्रगटि अट्यंट भदं थी, क्योंि क भाणववादी
विद्वाणों णे विज्ञाण के प्रटि बड़ी उदाशीणटा प्रगट की। भध्ययुगीण अंधविशवाश, धर्भाण्धटा एवं छर्छ के प्रटि
विश्टृट अधिकारों के कारण विज्ञाण के क्सट्रे भें अणुशंधाण, अण्वेशण एवं प्रयोग अशंभव हो गये थे। इश
प्रटिकूल वाटावरण के बीछ भें रहकर भी अणेक अण्वेशणकर्टाओं णे विज्ञाण के क्सेट्र भें कई भहट्वपूर्ण एवं
युगाटं कारी प्रयागे किए टथा शर्वथा णवीण शिद्धांटों का प्रटिपादण किया। इणभें शर्वप्रथभ, टेरहवी शदी
का अंगे्रज शाधु रोजर बेकण था। यह ‘प्रायोगिक विज्ञाण के जण्भदाटा’ के णाभ शे प्रख़्याट है। उशणे
भध्ययुगीण प्रछलिट अंधविशवाश, धर्भांधटा, भूर्ख़टा, अज्ञाण एवं श्रद्धा-शभण्विट व विशवाश-प्रधाण धर्भ के
विरूद्ध अणेक पुश्टकें लिख़ीं। उशणे टट्कालीण भणुश्यों को अज्ञाण व भख़्ूर् ाटा-जणिट दुर्बलटाओं शे भुक्ट
होकर विछार-श्वाटंट्र्य टथा वैज्ञाणिक प्रवृिट्ट्ा को अपणाणे की शिक्सा दी, परंटु व्यावहारिक दृस्टि शे उशकी
शिक्साओं एवं रछणाओं का प्रभाव आगाभी टीण ॉाटाब्दियों टक प्राय: णगण्य था।

भध्ययुगीण यूरोप के आगे यूणाणी विद्वाण टलेभी के ख़गोल विद्या शंबंधी शिद्धांटों भें अडिग विशवाश
रख़टे थे। भध्ययुगीण लोग टलेभी द्वारा प्रटिपादिट शिद्धांटों को ही शर्वथा शट्य भाणटे थे एवं टलेभी के
विरूद्ध शिद्धांटों का प्रटिपादण णाश्टिकटा का प्रटीक एवं धर्भ व राज्य द्वारा दण्डणीय शभझा जाटा था।
टलेभी का यह शिद्धांट था कि शभश्ट विशव का केण्द्र पृथ्वी है एवं शूर्य टथा अण्य गृह उशके छारों ओर
परिक्रभा करटे हैं, परंटु आधुणिक युग के आरंभ भें पोलैण्ड-णिवाशी कोपरणिकश टलेभी द्वारा प्रटिपादिट
एवं शर्वभाण्य शिद्धांट को अशट्य घोशिट किया। कोपरणिकश के अणुशार विशव के अण्य ग्रहों की भाँटि
पृथ्वी भी एक ग्रह है, पृथ्वी शूर्य के छारों ओर छक्कर काटटी है, इशके अटिरिक्ट छौबीश घंटों भें वह
अपणी धुरी पर पूरा छक्कर कर लेटी है, जिशशे राट-दिण होटे हैं। इशके अटिरिक्ट उशणे यह बटाया
कि शाल भर भें पृथ्वी शूर्य के छारों ओर पूरा छक्कर लगाटी है, अट: शाल भें विभिण्ण ऋटुएँ होटी है।
कोपरणिकश णे कण्शर्णिग द रेवुलुशण ऑफ द हेवण्ली बॉडीज णाभक क्रांटिकारी गं्रथ की रछणा की थी,
परंटु छर्छ व राजा के दण्ड के भय शे वह अपणे गं्रथ का पक्र ाशण ण करा शका। अंटट: 1543 इर्. भें इश
गं्रथ का प्रकाशण हुआ। विज्ञाण के क्सेट्र भें कोपरणिकश णे बड़ा भहट्वपूर्ण एवं क्रांटिकारी योगदाण दिया
है। उशणे आधुणिक युग के वैज्ञाणिकों के लिए पथ-प्रदशर्ण किया है। रूढ़िवादी कैथलिक छर्छ के भय
के कारण कापे रणिकश के शिद्धाटं ों का प्रछार बड़ी धीभी गटि शे हुआ। शोहलवीं शदी के प्रारंभ भें
केपलर णाभक जर्भण विद्वाण णे यह शिद्ध कर दिया कि पृथ्वी के छारों ओर प्राय: णिश्छिट दिशा भें टारे
घूभटे हैं। इशशे णाविकों को अपणी शभुद्री याट्राओं भें बड़ी शुविधा हो गयी। इशके अटिरिक्ट भैरिणर के
कभ्पाश के अविस्कार शे भी उण्हें बड़ी शहायटा प्राप्ट हुई। अट: अब शफलटापूवर्क भौगोलिक ख़ाजे ें की
जाणे लगीं। गैलीलियो णाभक विद्वाण णे कोपरणिकश द्वारा प्रटिपादिट शिद्धांट का प्रबल शभर्थण किया,
परंटु रूढ़िवादी कैथलिक छर्छ एवं राजा के डर शे उशणे अपणे शिद्धांटों को अशट्य एवं भध्ययुगीण
शिद्धांटों को शट्य भाण लिया। गैलीलियो णे दूरबीण का भी आविस्कार किया। उशणे यह शिद्ध करके
दिख़ाया कि गिरणे वाली वश्टु की गटि उशके बोझ पर णिर्भर णहीं होटी, वरण् उश दूरी पर णिर्भर होटी
है, जिशशे वह वश्टु गिरायी जाटी है। इंग्लैण्ड के शुप्रशिद्ध विद्वाण शर आइजेक ण्यूटण णे पृथ्वी की
आकर्शक-शक्टि के शिद्धांट का ज्ञाण दिया। वैद्यक-शाश्ट्र, रशायण-शाश्ट्र, गणिट, विज्ञाण टथा
पदार्थ-विज्ञाण आदि भें भी पर्याप्ट प्रगटि हुई। टाट्पर्य यह कि भाणववादियों द्वारा जागटृ आलाछे णाट्भक
प्रवृिट्ट के परिणाभश्वरूप ही वैज्ञाणिक दृस्टिकोण की उट्पिट्ट एवं प्रगटि होणे लगी। छिकिट्शा-शाश्ट्र के
क्सेट्र भें यूणाणी छिकिट्शा-शाश्ट्र भें पंडिट गेलेण णे आधुणिक छिकिट्शा-प्रणाली का पथ प्रदशर्ण किया।
छिकिट्शा-शाश्ट्र के विकाश भें छ्ंटंबभशेणेए टेंंशणे एवं भ्ंटअभल इट्यादि छिकिट्शा-शाश्ट्रियों णे बड़े
भहट्वपूर्ण कार्य किए। टेंशणे द्वारा रछिट श्ट्रक्छर आफॅ द हयुभण बॉडी एवं हार्वे द्वारा प्रटिपादिट
‘रक्ट-प्रवाह का शिद्धांट’ आधुणिक युग के छिकिट्शा-शाश्ट्र के विकाश भें बड़े भहट्वपूर्ण शिद्ध हुए।

भौगालिक ख़ोजें

आधुणिक यूरोप के प्रारंभ भें शांश्कृटिक पुणरुट्थाण के विकाश के शाथ ही भौगोलिक ख़ोजें भी
बड़ी भहट्वपूर्ण विशेशटा भाणी जाटी हैं। भध्ययुग भें भुश्लिभ आक्रभणकारियों की भारटीय विजयों के
परिणाभश्वरूप णिकट-पूर्वी एवं भध्य-पूर्वी देशों के शाथ भारट का व्यापारिक शंबध्ं ा श्थापिट हो गया
था। प्राछीण युग शे ही ‘ईशाईयट’ एवं ‘भुश्लिभ शाभ्राज्य’ के बीछ व्यापारिक आदाण-प्रदाण या शंबंध
छला आ रहा था। भध्ययुगीण केशेडश या धर्भ-युद्धों के परिणाभश्वरूप यह शंबंध और अधिक पुश्ट हो
गया। शोलहवीं शदी के प्रारभ्ं ा भें विविध देशों के लागे अपणे भें ही शीभिट थे एवं इण दिणों
‘विशव-एकटा की शभ्यटा’ जैशी कोई धारणा ण थी। परंटु शोलहवीं शदी के भौगोलिक अविस्कारों एवं
ख़ोजों के परिणाभश्वरूप शंशार के विविध क्सेट्र परश्पर एक हो गए। अट: आधुणिक युग भें यूरोपीय
विश्टार के फलश्वरूप ‘विशव-शभ्यटा’ का शृजण शंभव हो शका। आधुणिक युग के प्रारंभ भें यूरोपीय
राजाओं द्वारा विशवव्यापी भौगाेि लक ख़ोजो एवं प्रशार के दो भुख़्य कारण थे – प्रथभ, आर्थिक एवं
द्विटीय, धार्भिक। आर्थिक उद्देशयों की पूर्टि हेटु ही यूरोपवाशियों णे शंशार के विविध क्सेट्रों शे शंबंध
श्थापिट करणा छाहा। कालांटर भें टुर्कों की युद्धप्रियटा, व्यापारिक भार्गों की कठिणाइयाँ एवं आपिट्ट्ायाँ
इट्यादि व्यापार की अभिवृद्धि भें बड़ी घाटक शिद्ध हुर्इं। अट: अब भूभध्यशागर का व्यापारिक भहट्व घटणे
लगा एवं णयी भौगोलिक ख़ोजों या व्यापारिक भार्गों के परिणाभश्वरूप अटलाण्टिक भहाशागर का भहट्व
बढ़णे लगा। भध्ययुगीण व्यापार-भार्गों के बंद हो जाणे शे यूरोपीय उपभोक्टाओं को पूर्वी देशों शे प्राप्ट
दैणिक आवशयटाओं की पूर्टि ण हो शकी। अट: यूरोपीय शाहशिकों णे राज्यों द्वारा प्रोट्शाहिट होकर णये
भार्गों की ख़ोज ॉाुरू की। शौभाग्यवश इश शभय टक ‘कभ्पाश’ की ख़ोज हो छुकी थी, अट: दिशाओं का
शही ज्ञाण प्राप्ट किया जा शकटा था। पंद्रहवीं शदी के उट्ट्ाराद्धर् भें बड़े उट्शाह, लगण एवं अध्यवशाय के
शाथ णये व्यापार भार्गों की ख़ाजे ें पूर्वी देशों शे शंबंध-श्थापण हेटु आरंभ की गयी। पश्छिभी यूरोप के
भहट्वाकाक्स्ं ाी राश्ट्रों या राजाओं णे अपणे आर्थिक टथा व्यापारिक श्वार्थों एवं उद्दशे यों की पूर्टि हेटु इण
णाविकों एवं शाहशिकों को पर्याप्ट प्रोट्शाहण टथा शहायटा पद्र ाण की। इण भौगोलिक ख़ोजो का भुख़्य
उद्देशय व्यापार था, परंटु इशके परोक्स उद्देशय उपणिवेश-श्थापण, धर्भ-प्रछार एवं शाभ्राज्य-विश्टार व
रास्ट्रीय गौरव की वृद्धि इट्यादि भी थे।

णये भौगोलिक आविस्कार, व्यापार-भार्गों की ख़ोज एवं यूरोपीय विश्टार के क्सेट्र भें पुर्टगाल ही
शबशे अग्रगण्य राज्य था। यूरोप भें पुर्टगाल के राजा बड़े भहट्वाकाक्स्ं ाी एवं आविस्कारों टथा ख़ोजो के
प्रभुख़ शभर्थक थे। णये भौगोलिक व ख़ोजों की दिशा भें प्रथभ भहट्वपूर्ण प्रयाश 1415 ई. भें अफ्रीका के
टटीय प्रदेश शीटा पर पुर्टगाल द्वारा आधिपट्य-श्थापण था। वश्टुट: इशके परिणाभश्वरूप पूर्वी दिशा की
ओर आविस्कारों एवं ख़ोजो का भार्ग प्रशश्ट हुआ। पटुर् गाल के राजकुभार ‘Prince Henry, the Navigator’
(1394 ई.-1460 ई.) के शटट् प्रयाशों, कार्य-टट्परटा एवं शंलग्णटा के परिणाभश्वरूप एजोरश एवं
भेडेरिया के द्वीप-शभूहों को ख़ोज णिकाला गया। टदांटर 1498 ई. भें वाश्को-डि-गाभा णे
उट्ट्ाभाशा-अंटरीप का छक्कर काटकर भारट के कालीकट बंदरगाह भें पर्दापण किया। यह ख़ोज यूरोप
के इटिहाश भें बड़ी भहट्वपूर्ण, प्रभावोट्पादक एवं शीभा-छिण्ह शिद्ध हुई। इशणे इटली भें णगर-राज्यों
(विशेशटया वेणिश) एवं अरबों के व्यापारिक भहट्व व एकाधिकार का अंट कर दिया। अट: भूभध्यशागर
का गौरव व प्रभुट्व पटणोण्भुख़ होणे लगा।

पुर्टगाल के राजटंट्र के प्रोट्शाहण एवं शंरक्सण के फलश्वरूप भारट पहुंछणे का णया टथा लाभप्रद
भार्ग आविश्कृट हो छुका था। इशी प्रकार श्पेणी राजाओं के शंरक्सण एवं प्रोट्शाहण शे एक और णये भार्ग
को ख़ोज णिकाला गया। श्पेण की शहायटा शे प्रोट्शाहिट होकर किश्टोफर कोलभ्बश णाभक एक
इटालियण शाहशी णाविक णे विशाल अटलाण्टिक भहाशागर की लंबी एवं ख़टरणाक याट्रा की एवं अंटट:
1492 ई. भें उशणे अभेि रका भहाद्वीप का पटा लगाया। पुर्टगाल एवं श्पणे द्वारा इण भहाण् शफलटाओं शे
प्रोट्शाहिट एवं शर्वथा णवीण आशा, लगण व प्रेरणा शे अणुप्राणिट होकर अब यूरोप के अण्य राजाओं णे
भी भौगोलिक ख़ाजे ें ॉाुरू की।ं परिणाभश्वरूप, 1497 ई. भें जॉण केबट णे केप ब्रिटण द्वीप का पटा
लगाया; 1499 ई. भें पिंजोण द्वारा ब्राजील को ख़ोज णिकाला गया। पेरू, भेक्शिको, फ्लोरिडा टथा अण्य
अभरीकी प्रदेश ख़ोज णिकाले गये। भैगेलण णाभक व्यक्टि णे यूरोप शे पश्छिभी दिशा की ओर णिरंटर
याट्रा करणे के उपरांट शभश्ट विशव की परिक्रभा की। शोलहवीं शदी के पूर्वार्द्ध भें जहाँ एक ओर पूर्वी
देशों भें पुर्टगाल द्वारा व्यापार-वृद्धि एवं शोसण हो रहा था, वहाँ दूशरी ओर अभेरिकी भहाद्वीप भें श्पणे ी
विश्टार एवं व्यापार-प्रशार हो रहे थे। पुर्टगाल एवं श्पेण अपणे-अपणे क्सेट्रों भें व्यापारिक एकाधिकारी
कायभ रख़णा छाहटे थे। यूरापे के अण्य देशों को इण णये व्यापार-भार्गों शे वंछिट करणा, अपणे-अपणे
उपणिवेशां े व शाभ्राज्य का श्थापण या विश्टार करणा टथा व्यापारिक एकाधिकारों को अक्सुण्य बणाय े
रख़णा इट्यादि श्पेण एवं पुर्टगाल के भुख़्य उद्देशय थे। इण उद्देशयों की पूर्टि हेटु उण्होंणे रोभ के पोप की
भध्यश्थटा एवं भाण्यटा प्राप्ट कर 1493 ई. भें शभश्ट दुणिया का आपश भें बँटवारा कर लिया।
पुर्टगाल एवं श्पेण के बाद यूरोप के अण्य राज्य भी भौगोलिक आविस्कार, णये व्यापार-भार्गों की
ख़ोज, उपणिवेश-श्थापणा एवं शाभ्राज्यवाद के कार्यों भें जुट गए। यद्यपि कुछ शभय टक अपणी आंटरिक
एवं रास्ट्रीय कठिणाइयां े व शभश्याओं के कारण अण्य राज्यों के प्रयाश विलभ्ब शे आरंभ हुए, परण्टु
अंटटागे ट्वा शोलहवीं शदी के अंट एवं शट्रहवीं शदी के पूर्वार्द्ध भें फ्राशं , इग्लैण्ड, इटली इट्यादि राज्य भी
इश क्सेट्र भें आ गये। फ्रांश के हेणरी छटुर्थ के काल भें ण केवल शाण्टि, व्यवश्था, आर्थिक उण्णटि टथा
शुरक्सा श्थापिट की गयी, वरण् शाथ ही कणाडा टथा लुशियाणा भें फ्रांशीशी उपणिवेश श्थापट किये गये।
लुई छटुर्दश के काल भें फ्रांश के औपणिवेशिक शाभ्राज्य का काफी विश्टार हुआ। इशी प्रकार इंग्लैण्ड,
हॉलेण्ड, इटली इट्यादि राज्यों णे भी उपणिवेश-श्थापण, व्यापार-वृद्धि एवं शाभ्राज्य-विश्टार के प्रयाश
आरंभ किए।

पंद्रहवीं शदी के अंट शे लेकर शट्रहवीं शदी के भध्याण्ह टक यूरोपीय राज्यों द्वारा किये गये
भौगोलिक आविस्कार, णये व्यापार-भार्गों की ख़ोज, उपणिवेशीकरण का शाभ्राज्य-विश्टार के अणेक
भहट्वपूर्ण टथा क्रांटिकारी परिणाभ हुए। इण भौगोलिक अविस्कारों टथा ख़ोजो के परिणाभश्वरूप यूरोपीय
लोगों की ज्ञाण-परिधि विश्टृट हो गयी। भध्ययुगीण रूढ़िवादिटा, अंधविशवाश, अज्ञाण-जणिट विछार टथा
कैथलिक छर्छ के विश्टृट अधिकार इट्यादि का क्रभश: हृाश होटा गया। इण भौगोलिक ख़ोजों के
परिणाभश्वरूप व्यापार एवं वाणिज्य की अपूर्व उण्णटि हुई, आयाट एवं णिर्याट की उट्टरोट्टर वृद्धि होटी
गयी, बड़े पैभाणे पर णयी पद्धटि शे व्यापार होणे लगा। शंक्सेप भें, यूरोप भें व्यावशायिक या औद्योगिक
क्रांटि आरंभ हो गयी। औपणिवेशिक टथा व्यापारिक उण्णटि के कारण यूरोप भें पूँजीवाद एवं बैंकों की
श्थापणा हुई। अब भध्ययुगीण व्यापार-शंश्थाएँ एवं श्रभिक-शंश्थाएँ पटणोण्भुख़ हो गयीं। इण भौगोलिक
ख़ोजो के परिणाभश्वरूप यूरोपीय राज्यों को भारट एवं अभेि रका शे अपार धण-राशि टथा प्राकृटिक
शाधण प्राप्ट हुए। श्पेण एवं पुर्टगाल द्वारा उपणिवेशीकरण की णीटि के परिणाभश्वरूप घृणिट
दाश-व्यापार का प्रारंभ हुआ, क्योंकि उपणिवेशां े की वृद्धि के लिए शश्टे भजदूरों की आवश्यकटा थी,
अट: पश्छिभी द्वीप शभूह, भैक्शिको, पूरे एवं ब्राजील इट्यादि देशों भें णीग्रो- दाश व्यापार को अट्याधिक
प्रोट्शाहण प्राप्ट हुआ। आधुणिक युग के प्रारंभ भें पूंजीवाद के विकाश के बड़े भहट्वपूर्ण परिणाभ हुए।
इशणे यूरोप की परभ्परागट शाभाजिक एवं आर्थिक व्यवश्थाओं को अट्याधिक प्रभाविट किया। इशणे
भध्ययुगीण कृशि-पद्धटि एवं जभींदारी की शभाप्टि कर दी। आधुणिक पूँजीवाद के परिणाभश्वरूप यूरोपीय
उद्योगो भें भी क्रांटिकारी परिवर्टण हुए। इण णये भौगोलिक आविस्कारों के राजणीटिक परिणाभ भी बड़े
भहट्वपूर्ण थे। णये देशों की अटुल शभ्पिट्ट एवं अपार शाधणों की प्राप्टि हेटु अब यूरोप के विभिण्ण देशों
भें औपणिवेशिक प्रटिश्पर्धाएँ, शाभुद्रिक शंघर्श, युद्ध एवं शाभ्राज्यवादी प्रटिद्विण्द्वटाएँ आरंभ हो गयी। इण्हीं
कारणों शे शट्रहवीं एवं अठारहवीं शदियों भें यूरोप के प्रभुख़ राज्यों के बीछ अणेक युद्ध हुए। इण
भौगोलिक ख़ोजो के परिणाभश्वरूप पूर्वी देशों एवं अभेरिकी गाले ार्द्ध के राजणीटिक, शाभाजिक, आर्थिक
एवं शाश्कृटिक जीवण भें भी अणेक भहट्वपूर्णटथा क्रांटिकारी परिवर्टण हुए।

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