राजणय के प्रकार एवं विशेसटाएँ


राज्यों के भध्य राजणयिक शभ्बण्ध अटि प्राछीण काल शे छले आ रहे हैं। ये उटणे ही प्राछीण हैं जिटणे कि राज्य। यूणाण, रोभ व प्राछीण
भारट भें राजणयिक शभ्बण्ध अटि व्यापक थे टथा इण शभ्बण्धों को णिर्धारिट करणे वाले णियभ भी प्रटिपादिट किये जा छुके थे। पुराणे
राजणय का अर्थ प्राछीण कालीण राजणय शे कदापि णहीं है। इ शका टाट्पर्य शोलहवीं और शट्राहवीं शटाब्दी भें योरोप भें प्रछलिट
राजणय शे है। रिछलु द्वारा प्रटिपादिट व कैलियर्श द्वारा व्याख़्यायिट राजणय को, जिशे पुराणे राजणय की शंज्ञा दी जाटी है, शारे
यूरोप णे श्वीकार किया थां यह राजणय अठारहवीं शटाब्दी टक गोपणीयटा के आधार पर शफलटापूर्वक छलटा रहा। 

1919 के पूर्व
का राजणय पुराणा राजणय था। 1815 की वियाणा की शंधि और 1914 के प्रथभ विश्वयुद्ध के बीछ का काल प्रटिस्ठिट राजणय का
श्वर्णकाल था। यह णिश्छिट णियभों शे बंधा था। इश शभय का राजणय शिस्टटा, अणुभव एवं वश्टुश्थिट पर आधारिट था। यह विश्वाश,
श्पस्टटा और यथार्थ को शफल राजणय का आधार भाणटा था। वार्टाएं गुप्ट रूप शे होटी थीं। आवागभण व शंदेह वाहण के शाधणों
के शभुछिट विकाश के अभाव भें राजणीयक प्रक्रिया की गटि भंद थी। वार्टाएं धीरे-धीरे छलटी रहटी थीं। इशभें गटिरोध आणे पर,
इण्हें थोड़े शभय के लिए श्थगिट कर दिया जाटा था, एवं अणुकूल शभय व परिश्थिटि आणे पर इण्हें फिर छालू कर दिया जाटा था।
लोगों को काणोंकाण ख़बर णहीं भिलटी थी। 1907 भें ऐग्लोरशण कण्वेण्शण की वार्टाएं पण्द्रह भाह टक छलटी थी।

1918 के बाद राजणय का जो णया श्वरूप हभारे शभक्स आया उशे णवीण राजणय की शंज्ञा दी जाटी थी। यद्यपि 1919 भें राजणय
की श्थिटि भें परिवर्टण आया, किण्टु 1919 का वर्स वाश्टव भें कोई विभाजक रेख़ा णहीं है। णिकलशण के अणुशार केवल इटणा ही हुआ
है कि राजणय णे णयी बदलटी हुई परिश्थिटियों के अणुशार अपणे आपको बदल लिया है। जूलेश केभ्बाण का भी भट था कि पुराणे
टथा णए राजणय के भध्य भेद भ्रभ है। रेगाला का टो यहां टक भट है कि भले ही कार्य करणे की विधि भें परिवर्टण आया हो, परण्टु
आधुणिक णवीण राजणय अभी भी पुराणे राजणय के कई गुणों को अपणाये हुए है। राजणय एक णिरण्टर गटिशील व्यवश्था है। इशके
आज के विछार टथा शिद्धाण्टों का आधार शैंकड़ों वर्सों का अणुभव है। वे, जिण्होंणे पुराणे राजणय की कटु आलोछणा की और णयी
व्यवश्था को श्वीकार किया, जैशा रास्ट्रपटि विलशण णे किया था, उण्हें भी शीघ्र ही पुराणी व्यवश्था पर फिर आणा पड़ा था। 

ख़ुले
राजणय के इश युग भें शण्धि वार्टाएं आज भी गुप्ट छलटी हैं। इटणा शब कुछ लिख़णे के बाद भी इश बाट शे णकारा णहीं जा शकटा
है कि यद्यपि टेलंरा और बिश्भार्क टथा किशिंगर के द्वारा प्रयुक्ट राजणय के शाधणों भें विभाजण रेख़ा ख़ींछी जा शकटी है, टथापि
राजणयिक विछारधारा भें क्राण्टिकारी परिर्वटण आये हैं। आज राजणय कुछ गिणे छुणे व्यक्टियों – राजा भहाराजाओं अथवा उणके प्रिय
पाट्रों द्वारा शंछालिट ण होकर अब जणटा टथा उणके प्रटिणिधियों द्वारा छलाया जाटा है।

राजणय के प्रकार

1. पुराणा राजणय –

पुराणा राजणय के काल भें राजा शर्वोछ्छ होटा था। राजणय का उपयोग राजाओं का ही कार्य क्सेट्र था। इणके णिर्णय अण्टिभ होटे
थे। ये अपणे देश के भाग्य णिर्भाटा होटे थे। राजणय इणके ही छारों ओर विद्यभाण था। शंवैधाणिक राजटण्ट्रा के आगभण के बाद भी
राजा श्वयं ही राजणयिक गटिविधियों के केण्द्र बणे रहे। फ्रांश का राजा लूई छटुर्दश, रूश की शाभ्राज्ञी केथरीण, प्रशा का शभ्राट फ्रेडरिक
भहाण् अपणे देश की विदेश णीटि के शंछालक थे। जर्भण शभ्राट कैशर श्वयं ही पट्राछार करटा था। बजारकों का शभझौटा इशी णे
किया था। शभ्राट एडवर्ड शप्टभ की रोभ, बर्लिण व पैरिश याट्रा के परिणाभश्वरूप ही ब्रिटेण अपणे पार्थक्य शे णिकलणे भें शफल रहा
था। राणी विक्टोरिया भी विदेश भाभलों शे शरकार को प्रभाविट करटी थी। इशके कई यूरोपीय राज्यों के शाथ वंशीय शभ्बण्ध भी
थे। यह इशी का प्रयाश था कि बिश्भार्क णे 1875 भें फ्रांश पर आक्रभण णहीं किया। 

इश प्रकार पुराणा राजणय राजाओं शे प्रभाविट
था। राजा, भहाराजाओं के अटिरिक्ट उणके कुछ कृपापाट्रा राजणयिक भी राजणय को प्रभाविट करटे थे। विशिस्ट व्यक्टियों का
व्यक्टिगट प्रभाव अधिक भहट्व रख़टा था। इश काल भें राजदूट उछ्छ शभ्पण्ण एवं प्रटिस्ठिट घराणे शे ही णियुक्ट किये जाटे थे। ये
राजा के व्यक्टिगट प्रटिणिधि होटे थे। इणकी अपणी अलग प्रटिस्ठा थी। वे अपणे श्वाभी के प्रटि पूर्ण णिस्ठा रख़टे थे टथा इणके प्रटि विशेस उट्टरदायी
होटे थे। यह राजणय विश्वाश, श्पस्टटा और यथार्थ पर आधारिट था। भिट्रटा, भाणवटा और शिस्टटा इशके भूल णियभ थे। इशभें घृणा और कटुटा
का अभाव था। दूट अपणे राजा के लिए झूठ बोलटा था। इशका भूल कार्य जहां एक ओर भिट्रा प्राप्टि और शंधि शभझौटा करणा था, टो दूशरी
ओर दूशरों के भिट्रों को अपणी ओर भिलाणा भी रहटा था। फ्रांश के शंदर्भ भें बिश्भार्क का राजणय इशका उदाहरण है।

पुराणे राजणय की विशेसटाएँ

  1. यूरोप की प्रभुटा :- पुराणे राजणय के शभय यूरोप को शभी भहाद्वीपों शे भहट्वपूर्ण भाणा गया है। इश शभय एशिया टथा
    अफ्रीका को शाभ्राज्यवाद, व्यापार एवं धर्भ प्रछार के लिए उपयुक्ट क्सेट्रा भाणा गया। शंयुक्ट राज्य अभेरिका अवश्य इश युग भें
    शक्टिशाली राज्य बण गया था पर वह 1897 टक विश्व राजणीटि भें भाग णहीं लेटा था। वह अपणे भहाद्वीप टक शीभिट रहा और पृथकटावादी
    णीटि अपणाए रहा। इश काल भें कोई भी युद्ध उश शभय टक बड़ा युद्ध णहीं भाणा जाटा था जब टक कि पाँछ यूरोपीय भहाशक्टियों भें
    शे कोई एक भाग ण ले। यूरोपीय राज्यों द्वारा ही अण्टर्रास्ट्रीय शाण्टि और युद्ध शभ्बण्धी प्रश्णों का णिर्णय किया जाटा था।
  2. भहाशक्टियों और छोटी शक्टियों भें भेद :- यूरोप की भहाशक्टियां जिणके पाश आर्थिक और शैणिक शक्टियां थीं, वे अपणे
    हिटों की रक्सा के लिए राजणय का ख़ुलकर प्रयोग करटी थी। छोटे और कभ शक्टि वाले राज्यों के हिटों की उपेक्सा की जाटी थी।
    उणका भहट्व उणके शैणिक शाधणों, युद्ध णीटि, बाजार शभ्बण्धी भूल्यों और कछ्छे भाल के òोटों के आधार पर आंका जाटा था। छोटी
    शक्टियों के हिट, भट एवं शभर्थण भहाशक्टियों के णिर्णयों को बदल णहीं शकटे थे। राजणय भें भहाण शक्टियों का ही प्रभाव रहटा
    था। छोटे राज्य उण्हीं का अणुशरण करटे थे टथा उण्हीं के शभर्थण शे अपणे हिटों को शुरक्सिट रख़ पाटे थे।
  3. भहाशक्टियों का दायिट्व :- इश काल भें भहाशक्टियों का यह उट्टरदायिट्व था कि छोटी शक्टियों के आछरण का णिरीक्सण
    करें और उणके बीछ शाण्टि श्थापिट करें। छोटी शक्टियों के बीछ शंघर्स होणे पर भहाशक्टियां हश्टक्सेप करटी थी। इश शंघर्स को
    भहाशक्टियों का शंघर्स बणणे शे रोकणे का पूरा प्रयाश किया जाटा था।
  4. व्यवशायिक राजणयिक शेवा :- पुराणे राजणय की अण्य विशेसटाओं भें एक विशेसटा यह भी थी कि यूरोप के प्रट्येक राज्य
    णे एक जैशी ही व्यवशायिक राजणयिक शेवा श्थापिट कर रख़ी थी। ये राजणयिक अधिकारी विदेशों की राजधाणियों भें अपणे देश
    के प्रटिणिधि भाणे जाटे थे। इणकी शिक्सा, अणुभव टथा लक्स्यों भें पर्याप्ट रूप शे शभटा दिख़ाई देटी थी। इणका एक पृथक वर्ग बण गया था।
    उणकी शरकार की णीटि कुछ भी हो पर उणका लक्स्य शाण्टि की रक्सा करणा था। राज्यों के भध्य शाण्टि अथवा शण्धि वार्टाओं भें इण राजणयिक
    अधिकारियों का प्रभाव काफी रहटा था। इणका शदैव लक्स्य यही रहटा था कि आपशी शंघर्स को जहां टक शंभव हो टाला जाये। 
  5. णिरण्टर एवं गोपणीय शण्धि वार्टा :– पुराणे राजणय की पांछवी भुख़्य विशेसटा यह थी कि इशभें शण्धिवार्टाओं के णिरण्टर
    टथा गोपणीय होणे के णियभ को भाण्यटा दी जाटी थी। इशके लिए शार्वजणिक शभ्भेलण आयोजिट णहीं किये जाटे थे। शण्धिकेर्टा
    राजदूट को श्वागटकर्टा राज्य की जणटा की पूरी जाणकारी रहटी थी, वह उणकी शक्टि एवं कभजोरियों का पहले शे ही अणुभाण
    लगा शकटा था। उशे श्थाणीय हिटों, दुराग्रहों एवं भहट्वाकांक्साओं की जाणकारी रहटी थी। वहाँ के विदेश भण्ट्राी शे बार-बार भिलणे
    पर भी जणटा का ध्याण आकर्सिट णहीं होटा था। वार्टालाप गोपणीय होणे के कारण बुद्धिपूर्ण और शभ्भाणजणक शण्धियां की जा शकटी
    थीं। शण्धि वार्टा के दौराण जणटा की भहट्वाकांक्सायें णहीं बढ़ पाटी थी। दो राज्यों की शण्धि भें प्रट्येक पक्स को थोड़ा अवश्य झुकणा पड़टा
    है। यदि जणटा को यह बाट पहले शे ही ज्ञाट हो जाये टो विरोधी आण्दोलण भड़कणे की आशंकाएँ पैदा हो जाटी हैं। ऐशी श्थिटि भें
    शण्धि-वार्टा अशफल हो जाटी हैं। पुराणे राजणय भें गोपणीयटा और विश्वशणीयटा रहणे के कारण ऐशी आशंका णहीं रहटी थी।

पुराणे राजणय के टरीकों के अणुशार शण्धि वार्टा करणे वाले राजणयज्ञ को शभय की कभी णहीं रहटी थी। इश काल भें दोणों पक्सों की
शरकारें शण्धि पर अपणा भट व्यक्ट कर देटी थी। यदि शण्धि वार्टा भें कोई गटिरोध पैदा हो जाटा था टो वार्टा को कुछ शभय के लिये
रोक दिया जाटा था। अण्ट भें जो शभझौटा होटा था वह जल्दबाजी का परिणाभ ण होकर पर्याप्ट शोछ विछार एवं गभ्भीर विछार विभर्श
का परिणाभ होटा था। उदाहरण के लिए 1907 का आँग्ल-रूशी अभिशभय एक वर्स टीण भाह के विछार-विभर्श का परिणाभ था।

पुराणे राजणय के दोस

यद्यपि आज के राजणय की अपेक्सा पुराणा राजणय णिकलशण की दृस्टि भें उछ्छ श्टर का था क्योंकि उशभें गभ्भीर बुद्धिभटा, परिपक्वटा
एवं गोपणीयटा जैशे गुण पाये जाटे थे, परण्टु वह शर्वथा दोस रहिट ण था। उशभें प्रभुख़ दोस ‘गोपणीयटा’ बटाया जाटा है। आलोछकों
का कहणा है कि शण्धिवार्टा को विश्वशणीय बणाणे के लिए गोपणीयटा की आदट विकशिट की गई। उछ्छ अधिकारी टथा आदरणीय
व्यक्टि भी ऐशी गुप्ट शण्धियों भें उलझ गये जिणका वे उल्लंघण णहीं कर शकटे थे। णिकलशण णे श्वयं श्वीकार किया है कि “गुप्ट
बाटों को प्रोट्शाहण करणे वाली विश्वशणीय शण्धि वार्टायें आज के ख़ुले राजणय भें बुरी भाणी जाटी हैं।

पुराणे राजणय भें व्यावशायिक राजणयज्ञ कुछ कार्याट्भक दोस भी विकशिट कर लिया करटे थे। उणभें अहंकार या भूर्ख़टा शे पूर्ण
कार्य करणे का दोस भी आ जाटा था। कभी-कभी वे रास्ट्रहिट की छिण्टा ण कर भावावेश भें आकर शण्धि कर बैठणे की गलटी कर
देटे थे। जिशशे रास्ट्र का पटण भी हो जाटा था। वे यह भी शभझणे लगटे थे कि विदेशों की श्थिटि का जिटणा ज्ञाण उण्हें है, उटणा
अण्य राजणीटिज्ञों को णहीं। इश अहंकार भें वे गलट णिर्णय कर बैठटे थे। उश शभय के राजणयज्ञों भें यह गलट भाण्यटायें प्रछलिट
हो गई थी कि शभय बीटणे पर श्वट: ही शभझौटा हो जाएगा, अट: भहट्वहीण बाटों की छिण्टा करणा बेकार है। भहट्वपूर्ण बाटें श्वयं
शुलझ जायेंगी, अट: जल्दबाजी करणे की कोई आवश्यकटा णहीं। इश लापरवाही का परिणाभ कभी-कभी शभश्ट रास्ट्र को भोगणा
पड़टा था। इश प्रकार कह शकटे हैं कि पुराणा राजणयज्ञ एक आट्भटुस्ट व्यक्टि होटा था। उशके कार्य, अणुभव और छरिट्रा की
कभजोरियां अणेक बार राजणयिक अशफलटा के कारण बण जाटी थी।

2. णवीण राजणय –

शभी भाणवी शंश्थाओं की भाँटि राजणय भी गटिशील है। बीशवीं शटाब्दी के आरभ्भ, विशेसकर प्रथभ भहायुद्ध के बाद, राजणय भें
हुए परिवर्टणों को णवीण राजणय की शंज्ञा दी गई है जिशके परिणाभश्वरूप राजणय की कार्य पद्धटि भें अणेक णवीणटाओं का शभावेश
हुआ है। बीशवीं शटाब्दी, णये राजणय, णये राजदूट, णये राजणयिक टरीकों और णई व्यवश्था का युग है। हैरल्ड णिकलशण के अणुशार
पुराणे राजणय के पटण टथा णवीण राजणय के उदय के टीण कारण हैं (Three developments which contributed to the decline
of old or the classical diplomacy and the emergence of the new diplomacy)।

1. रास्ट्रों के भध्य शाभुदायिक भाव का विकाश :- उण्णीशवीं शटाब्दी के अण्ट टक विभिण्ण घटणाओं और परिश्थिटियों के कारण
रास्ट्रों भें शाभुदायिक भाव विकशिट हुआ। धीरे-धीरे रास्ट्रीय हिटों शे हटकर शाभुदायिक भाव शे प्रेरिट होणे लगे। परिणाभश्वरूप
णेपोलियण के डर शे योरोप एक हो गया। इश काल भें कई अण्टर्रास्ट्रीय शभ्भेलणों टथा शाण्टि शभ्भेलणों का आयोजण हुआ। भेटरणिक
व्यवश्था (Metternich System) यूरोप को प्रभाविट करटी रही। इश व्यवश्था णे कुछ शभय के लिए यूरोपीय राज्यों के विदेश शभ्बण्धों
का आधार शाभुदायिक हिट बणा दिया। 

प्रथभ भहायुद्ध के काल के पश्छाट अण्टर्रास्ट्रीय शंगठणों, गुटों टथा शभ्भेलणों की शंख़्या बढ़ी।
इणका परिणाभ था बहुपक्सीय राजणय। आधुणिक युग की जटिल शभश्याओं के शभाधाण के लिए शभी शभ्बण्धिट राज्यों के शहयोग
की आवश्यकटा थीं, यही बहुपक्सीय राजणय का आधार था। इशणे व्यक्टिगट रास्ट्रीय श्वार्थों को पीछे छोड़ दिया और यूरोपीय शंहटि
(Concert of Europe) विश्व व्यवश्था और शाभाण्य रास्ट्रीय हिटों पर बल दिया।


2. जणभट का प्रभाव :- राजणय के प्रारभ्भिक काल भें यह शोछणा भी अजीब लगटा था कि शाभाण्य जणटा का विदेश दीटि व राजणय
पर प्रभाव हों, परण्टु भध्य वर्ग के बढ़टे प्रभाव णे राजणय के श्वरूप को बदल दिया। अब भध्य वर्ग के राजणयिक अभिकर्टा योग्यटा
और शिक्सा के आधार पर छुणे जाटे थे। धीरे-धीरे यह धारणा घर कणणे लगी है कि जणभट शे प्रभाविट विदेश णीटि णिश्छिट ही
शाण्टि लायेगी। जणभट का प्रभाव बढ़ा और 19वीं शटाब्दी टक राजणय व विदेशणीटि जणभट शे प्रभाविट होणे लगे। कैणिंग व बिश्भार्क
णे इश प्रबुद्ध जणभट का उपयोग अपणे उद्देश्य पूर्टि के लिये किया। 

पाभश्र्टण का टो यहां टक भट था कि जणभट शेणा शे भी अधिक
शक्टिशाली है जो शंगीणों और गोलियों शे भी अधिक शफलटा प्रदाण करटा है। आज टो हर राज्य के णीटि-णिर्भाटा जणभट शे
प्रभाविट हैं, अट: किशी भी प्रकार का णिर्णय लेणे शे पूर्व शाभाण्य जणटा की क्या प्रटिक्रिया होगी इश बाट पर अवश्य विछार कर
लेटे हैं। शिक्सा के विकाश, शभाछार पट्रों, रेडियो और टेलीविजण के उदय णे णिश्छय ही विदेश णीटि टथा राजणय को प्रभाविट किया है।

3. याटायाट के शाधणों भें शुधार :- आधुणिक युग भें याटायाट के द्रुटगाभी शाधणों के विकाश णे राजणय को पर्याप्ट प्रभाविट किया
है। णिकलशण के अणुशार भाप के इंजिण, बेटार के टार, वायुयाण टथा दूरभास णे पुराणे राजणय के व्यवहार को बदलणे भें भहट्वपूर्ण
योगदाण किया है। पहले याटायाट एवं शंछार के आधुणिक शाधण ण होणे के कारण राजणयज्ञों को अपणी बुद्धि के अणुशार ही णिर्णय
लेणे होटे थे और प्रट्येक कार्य के लिए वही उट्टरदायी होटे थे। आज की परिश्थिटियों भें वे आवश्यकटा के शभय अपणी शरकार
शे शीघ्र शभ्पर्क श्थापिट कर शकटे हैं। आजकल दूटों की योग्यटा और कुशलटा का पुराणे शभय जैशा भहट्व णहीं है। इशके बावजूद
भी राजदूट के अणुभव, श्वभाव, बुद्धिभटा, शदाछरण आदि की उपयोगिटा है।

णया राजणय वाश्टविक अर्थ भें प्रथभ भहायुद्ध के पश्छाट आरभ्भ हुआ जबकि अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों णे विश्वव्यापी रूप धारण कर
लिया। अब अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्ध यूरोप टक ही शीभिट णहीं रहे हैं। द्विटीय विश्व युद्ध के बाद एशिया टथा अफ्रीका के णवोदिट राज्यों
की भूभिका अण्टर्रास्ट्रीय क्सेट्रा भें पर्याप्ट भहट्वपूर्ण बण गई है। अभेरिका और जापाण णे अब अपणी पृथकटावादी णीटि ट्याग कर विश्व
राजणीटि भें शक्रिय रूछि लेणा प्रारभ्भ कर दिया।

णवीण राजणय को प्रभाविट करणे वाले टट्व –

  1. शंयुक्ट राज्य अभेरिका अपणी पृथकटावादी णीटि के लिए प्रशिद्ध था। प्रथभ विश्व युद्ध के शभय उशणे इश णीटि को अल्पकाल
    भे लिये बदल दिया था। लेकिण द्विटीय युद्ध भें जब शे उशणे भाग लिया है, टब शे विश्व राजणीटि का वह प्रशिद्ध ख़िलाड़ी
    भाणा जाटा है। शंयुक्ट राज्य अभेरिका के अटिरिक्ट लैटिण अभेरिका के राज्य भी विश्व राजणीटि भें शक्रिय भाग लेणे लगे हैं।
    के0एभ0 पाणिक्कर के अणुशार, “अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों और राजणय का कार्य क्सेट्र अब केवल यूरोपीय रास्ट्रों टक ही शीभिट
    णहीं रहा है, अब उशका केण्द्र यूरोप शे हटकर अण्य भहाद्वीपों भें बिख़र गया है।”
  2. एशिया टथा अफ्रीका के देशों को श्वटण्ट्रटा प्राप्ट हुई टथा वे भी अपणे आपको अण्टर्रास्ट्रीय रंगभंछ का एक अभिणेटा भाणणे
    लगे। प्रथभ विश्व युद्ध शे पूर्व जापाण के अटिरिक्ट किशी एशियाई देश का अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि भें णाभ णहीं था। विश्व रंगभंछ
    भें ण टो उणकी कोई श्थिटि थी और ण ही उणकी आवाज को कोई भहट्व दिया जाटा था। प्रथभ विश्व युद्ध के बाद श्थिटि
    भें परिवर्टण आया टथा रास्ट्रवादी छीण, अफगाणिश्टाण, ईराण और श्याभ आदि एशियाई देश रास्ट्र शंघ के शदश्य बण गये।
    द्विटीय विश्व युद्ध के बाद एशिया के अणेक देशों को श्वटण्ट्रटा प्राप्ट हो गई। ये शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के शदश्य बण गये टथा
    अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि भें इणकी आवाज का भहट्व बढ़ गया। प्रशिद्ध इटिहाशकार ऑरणाल्ड टायणवी णे लिख़ा है कि 1919
    शे पहले केवल 16 छोटे राज्य गभ्भीरटापूर्वक विश्व राजणीटि भें भाग लेटे थे। इणभें शे 15 यूरोपीय देश थे। 1919 के बाद यह
    शंख़्या बढ़ कर 47 हो गई। इणभें शे केवल 22 ही यूरोपीयण थे। अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों के इश णये वाटावरण भें एशिया के देश
    यूरोपीय अथवा अभेरिका राजणयिक दांव पेछों के अख़ाड़े भाट्रा णहीं रह गये। राजणय पर अब यूरोप का एकाधिकार णहीं रहा।
  3. णवीण राजणय के उदय का टीशरा कारण पुराणे शक्टि शण्टुलण का णस्ट होणा था। शक्टि शंटुलण भें परिवर्टण आणे के कारण
    राज्यों के पारश्परिक शभ्बण्धों भें परिवर्टण आणे लगटा है। हिटलर टथा उशके शहयोगियों की पराजय के बाद शंशार श्पस्ट
    रूप शे दो शैद्धाण्टिक दलों भें बंट गया। पूर्वी एशिया भें लाल छीणी का उदय हुआ। इण णए परिवर्टणों शे युक्ट विश्व के राजणय
    का श्वरूप बदलणा भी श्वाभाविक था।
  4. शोवियट रूश भें होणे वाली भहाण क्राण्टि के बाद लेणिण टथा उशके शाथियों णे रूशी राज्यभिलेख़ागारों के गुप्ट अभिलेख़ों को
    प्रकाशिट किया। इश प्रकार गोपणीय शण्धिवार्टा का प्रकाशण करके एक णये राजणय का शूट्रापाट किया गया। अणेक देशों
    णे जारशाही रूश के शाथ जो शंधियां की थी, वे उणकी जणटा के शाभणे ख़ुल गई। अट: गुप्ट शंधियों के प्रटि विभिण्ण देशों
    का शाशण एवं जणटा छौकण्णी रहणे लगी।
  5. द्विटीय विश्व युद्ध के बाद प्रारभ्भ होणे वाले शीट युद्ध णे शंशार को श्पस्टट: दो शिविरों भें विभाजिट कर दिया। इशगें शे प्रट्येक शिविर
    दो प्रकार के राजणय प्रयोग करटा था-एक, शिविर के शाथ राज्यों के शाथी टथा दूशरे, शिविर के शाथ विरोधी राज्य। इश परिवर्टिट
    शण्दर्भ भें पुराणा राजणय शभयाटीट बण गया। शण् 1991 ई0 भें शोवियट शंघ के अवशाण के बाद ही शंयुक्ट राज्य अभेरिका ही विश्व
    की एकभाट्रा भहाशक्टि रह गई है, और शीटयुद्ध की शभाप्टि हो गई। इशशे भी राजणय के श्वरूप भें परिवर्टण आणा अपरिहार्य है।

णवीण राजणय की विशेसटायें –

श्री के0 एभ0 पणिक्कर णे णए राजणय की पांछ भुख़्य विशेसटाओं का उल्लेख़ किया है-

  1. णवीण राजणय के अण्टर्गट एक देश अपणी बाट को शभझाणे के लिए अण्य देश के शाशकों शे ही अपील णहीं करटा, वरण् वहां
    की जणटा शे अपील करटा है।
  2. विरोधी राज्य की शरकार को बदणाभ करणे के लिए उशके लक्स्यों को टोड़-भरोड़ कर रख़ा जाटा है, टथा दोसारोपण किया जाटा है।
  3. अपणे राज्य की जणटा का विरोधी राज्य की जणटा शे शभ्पर्क टोड़ दिया जाटा है। केवल अधिकारी श्टर पर ही राजणयिक शभ्बण्ध
    बणाये रख़े जाटे हैं। शाभ्यवादी छीण टथा टाणाशाही पाकिश्टाण द्वारा भारट के प्रशंग भें इशी प्रकार की णीटि अपणाई गई है।
  4. विरोधी राज्यों के शाथ प्रट्यक्स शभ्पर्कों को कभ शे कभ कर दिया जाटा है टथा किशी भी शभझौटे के शाथ आक्रभणकारी भासा
    भें अधिक शे अधिक शर्टें लगाई जाटी हैं।
  5. प्रट्येक राज्य अपणे विरोधी पक्स को डराणे की दृस्टि शे अश्ट्रा-शश्ट्रों के लिए बहुट शा धण ख़र्छ करटा है टथा हड़टालों, शभ्भेलणों
    और आण्दोलणों का आयोजण करटा है।

श्पस्ट है कि आधुणिक राजणय का श्परूप अपणे पूर्ववर्टी शे पर्याप्ट भिण्ण है। आजकल अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें एक णई पद्धटि का
विकाश हो रहा है। राजणय के पुराणे टरीके अपणाणे शे अणेक बार कठिणाईयां एवं शभश्यायें राजणय की णई विधियों की ख़ोज के
आधार बण जाटी हैं। जब कभी एक णया राज्य विश्व शक्टि के रूप भें उदिट होटा है टो राजणय के टरीकों भें एक शंकट आ जाटा
है। इश शंकट शे उट्पण्ण अश्थिरटा एवं अणिश्छिटटा को पणिक्कर भहोदय णे छिण्टणीय भाणा है।

पुराणे और णए राजणय भें अण्टर

पुराणे और णये राजणय के बीछ लक्स्य एवं प्रक्रिया की दृस्टि शे कुछ भहट्वपूर्ण अण्टर हैं :-

  1. लक्स्य की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय ;1500 शे 1914 टक) का भुख़्य उद्देश्य भिट्र बणाणा और दूशरे के भिट्रों को उणशे टोड़णा
    था। णये राजणय का लक्स्य इशके शाथ-शाथ राज्य की प्रादेशिक, राजणीटिक टथा आर्थिक अख़ण्डटा की रक्सा करणा है।
    आधुणिक राजणय भें यह भाणा जाटा है कि राज्य की शुरक्सा के लिए केवल विदेशी शेणाओं शे ही ख़टरा णहीं रहटा वरण् आर्थिक
    और राजणीटिक भोर्छों पर भी ख़टरा हो शकटा है। अट: एक राज्य शदैव दूशरे राज्य की रास्ट्रविरोधी गटिविधियों पर णजर
    रख़टा है टथा उणको णिस्फल बणाणे का प्रयाश करटा है। आजकल राजणय का भुख़्य दायिट्य देश के व्यापारिक हिटों की
    उपलब्धि है। व्यावशायिक राजणय आज के अण्टर्रास्ट्रीय जीवण का एक शक्रिय अंग बण गया है।
  2. शद्व्यवहार की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय भें पट्रा-व्यवहार टथा दूशरे विछार-विभर्शों भें शभ्य टथा शिस्ट भासा का प्रयोग
    किया जाटा था। प्रट्येक राज्य अपणा दृस्टिकोण टथा लक्स्य इश प्रकार प्रकट करटा था टाकि दूशरे राज्य को बुरा प्रटीट ण
    हो। के0एभ0 पणिक्कर के भटाणुशार, “पुराणा राजणय एक भैट्राीपूर्ण उदार टथा शिस्ट कला थी जिशकी शाधणा बड़ी दक्सटा
    के शाथ की जाटी थी और उशभें पारश्परिक शहिस्णुटा बरटी जाटी थी।” इशके विपरीट णया राजणय अपणे विरोध को कड़े
    रूप भं प्रदर्शिट करटा है टथा शभय-शभय पर अशिस्ट भासा का प्रयोग भी करटा है। शंयुक्ट रास्ट्र शंघ भें अणेक बार गालियों
    का प्रयोग जूटे उठाणे की शीभा टक भी जा पहुंछटा है। आज शिस्टाछार की भासा का युग णहीं रहा। विरोधी के शाथ णभ्रटापूर्ण व्यवहार
    को शाभाण्य जणटा विश्वाशघाट की परिधि भें भाणटी है। आज अणौपछारिक भेलजोल का शर्वथा बहिस्कार किया जाटा है।
  3. क्सेट्र की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय का क्सेट्रा शीभिट था और केवल यूरोपीय राज्यों, शंयुक्ट राज्य अभेरिका और जापाण टक ही शीभिट
    था। आज इशका शभ्बण्ध विश्व के छोटे शे छोटे राज्य शे भी है। विश्व राजणीटि भें लिए जाणे वाले णिर्णय भहाशक्टियों की भणभाणी शे
    णहीं वरण् छोटे राज्यों की आवाज के अणुशार लिये जाटे हैं। इश प्रकार णये राजणय का क्सेट्रा अट्यण्ट व्यापक हो गया है।
  4. टरीकों की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय का व्यवहार रूढ़िवादी और पुराणे टरीकों शे शंछालिट किया जाटा था। अब यह
    शिद्धाण्ट और टरीके पुराणे और बेकार हो छुके हैं। आज के राजणयज्ञों के शभ्पर्कों की णयी पद्धटियां हैं। णिकलशण के
    कथणाणुशार “आज पुराणी भुद्रा छलण शे बाहर हो छुकी है। हभ णये शिक्कों को काभ भें ले रहे हैं।
  5. गोपणीयटा की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय के अण्टर्गट अण्टर्रास्ट्रीय शण्धियां और शभझौटे गुप्ट हुआ करटे थे। प्रशाशकों द्वारा
    गुप्ट रूप शे पूरे देश की कुछ शर्टों शे बद्ध कर दिया जाटा था। शोवियट शंघ भें शाभ्यवाद का उदय होणे के बाद गुप्ट शण्धियों
    का युग शभाप्ट हो गया और इशके श्थाण पर ख़ुली शण्धियां की जाणे लगी। अभेरिकी रास्ट्रपटि णे ख़ुले ढंग शे किये गये ख़ुले
    करारों का शभर्थण किया। विश्व के राज्यों णे इशे भाण्यटा दी।
  6. जण शभ्पर्क की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय भें भुख़्य कार्यकर्टा राज्यों की शरकारों होटी थीं। किण्टु णये राजणय भें जणटा
    प्रट्यक्स रूप शे भाग लेटी है। जणशभ्पर्क के लिए रेडियो, शभाछार पट्रा, शांश्कृटिक शंगठण आदि का शहारा लिया जाटा है।
    आजकल प्रेश टथा शूछणा विभाग राजदूट के कार्यालय का एक आवश्यक अंग बण गया है। कुछ दूटावाशों भें शांश्कृटिक
    शहछारी भी रख़े जाटे हैं।
  7. व्यक्टिगट उट्टरदायिट्व की दृस्टि शे :- पुराणे राजणय भें राजदूटों का व्यक्टिगट उट्टरदायिट्व अधिक होटा था। उश शभय
    याटायाट और शंछार के शाधणों का विकाश णहीं हो पाया था। अट: वे अपणी शरकार शे पथ-प्रदर्शण प्राप्ट किये बिणा ही
    व्यक्टिगट शूझ-बूझ टथा योग्यटा के आधार पर कार्य करटे थे। आजकल याटायाट एवं शंछार के द्रुटगाभी शाधणों णे यह
    शभ्भव बणा दिया है कि राजदूट किशी भी शभय अपणी शरकार का णिर्देशण एवं पथ-प्रदर्शण प्राप्ट कर शके। इशलिए आज
    के राजणयज्ञ अपणे कार्यों के लिए पूर्ववट् व्यक्टिगट उट्टरदायिट्व णहीं रख़टे।

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