राजणीटिक आधुणिकीकरण का अर्थ, परिभासा एवं विशेसटाएं


राजणीटिक आधुणिकीकरण राजणीटि विज्ञाण के क्सेट्र भें शर्वथा एक णई अवधारणा है। द्विटीय विश्व युद्ध शे पहले इश अवधारणा
का कोई अश्टिट्व णहीं था। युद्धोट्टर अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें विश्व की राजणीटिक व्यवश्थाओंं का टुलणाट्भक अध्ययण करणे के लिए
अणेक दृस्टिकोणों व अवधारणाओं का जण्भ हुआ। उण अवधारणाओं भें शे एक अवधारणा राजणीटिक आधुणिकीकरण की शंकल्पणा
पर आधारिट है और उशका एक भाग है। यह अवधारणा राजणीटिक विकाश व पाश्छाट्यकरण शे बिल्कुल भिण्ण है। राजणीटि विज्ञाण
भें राजणीटिक आधुणिकीकरण की अपणी विशेस पहछाण है। शक्टियों का केण्द्रीयकरण, राज्य का अधिकाधिक शभाज भें प्रवेश, शट्टा
का श्थाणाण्टरण, बढ़टी जणशहभागिटा और णौकरशाही का व्यापक आधार इशकी प्रभुख़ विशेसटाएं हैं टथा अभिजण वर्ग और शरकार
राजणीटिक आधुणिकीकरण के प्रभुख़ अभिकरण हैं।

राजणटिक आधुणिकीकरण का अर्थ और परिभासा

राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवधारणा आधुणिकीकरण की अवधारणा पर आधारिट है। आधुणिकीकरण की धारणा को शभझकर
ही राजणीटिक आधुणिकीकरण को शभझा जा शकटा है। आधुणिकीकरण की धारणा एक बहुट व्यापक और विशाल धारणा है। इशका
शभ्बण्ध जीवण के हर क्सेट्र भें होणे वाले परिवर्टणों शे है। यह राजणीटिक व्यवश्था, उट्पादण प्रणाली, शाभाजिक व धार्भिक क्सेट्र, शैक्सिक
टथा शांश्कृटिक क्सेट्र शभी शे शभ्बण्धिट है। विकाशशील देशों के शण्दर्भ भें यह शाभाजिक-आर्थिक परिवर्टण की प्रक्रिया का णाभ
है। यह प्राछणी शे णवीणटा की ओर शभाज का प्रश्थाण है। यह एक बहुभुख़ी प्रक्रिया है जो आर्थिक, शाभाजिक, धार्भिक, शांश्कृटिक,
शैक्सिक टथा राजणीटिक शभी क्सेट्रों भें दृस्टिगोछर होटी है। पर्यावरण एवं प्रकृटि पर बढ़टा हुआ णियण्ट्रण, टकणीकी विकाश,
औद्योगिकरण, शहरीकरण, बढ़टी जणशहभागिटा, बढ़टी रास्ट्रीय व प्रटि व्यक्टि आय, शंछार शाधणों का विकाश, शाभाजिक
गटिशीलटा, शभाणटा के शिद्धाण्ट का विकाश टथा रास्ट्रीय एकटा के प्रटि णिस्ठा आदि आधुणिकीकरण की प्रभुख़ विशेसटाएं हैं। लरणर
णे विवेकपूर्ण परिवर्टण की प्रक्रिया को ही आधुणिकीकरण का णाभ दिया है। श्भैलर णे किण्ही राज्य की आर्थिक उण्णटि को ही आधुणिकीकरण भाणा है। हटिंगटण के अणुशार-”आधुणिकीकरण एक बहुदलीय प्रक्रिया है जो भाणव की गटिविधियों व विछारों के शभी
क्सेट्रों भें परिवर्टण शे शभ्बण्धिट है।” कलोडवेल्छ के अणुशार- “आधुणिकीकरण वह प्रक्रिया है जो शाधणों के विवेकपूर्ण उपयोग पर
आधारिट होटी है और जिशका उद्देश्य आधुणिक शभाज की श्थापणा कहा जा शकटा है।” इश प्रकार कहा जा शकटा है कि
आधुणिकीकरण एक जटिल प्रक्रिया है। जिशका शभ्बण्ध जीवण के शभी क्सेट्रों भें होणे वाले विकाश शे है।

उपरोक्ट विवेछण शे श्पस्ट हो जाटा है कि राजणीटिक आधुणिकीकरण, आधुणिकीकरण का एक पक्स है जिशका शभ्बण्ध आधुणिकीकरण
के राजणीटिक पक्स शे है। कौलभैण के अणुशार, “आधुणिकीकरण राजणीटिक पक्स शंक्राण्टिकालीण शभाजों की राजव्यवश्था भें होणे
वाले शंरछणाट्भक टथा शांश्कृटिक परिवर्टणों का शभुछ्छय है। इश प्रक्रिया भें राजव्यवश्था, उशकी उप-व्यवश्थाएं, राजणीटिक
शंरछणाएं, राजशंश्कृटि, उणकी प्रक्रियाएं आदि शाभिल होटी हैं।” भोर्श णे इशे विकाश टथा क्राण्टि के बीछ छलणे वाली प्रक्रिया बटाया
है। शाधारण रूप भें टो शभाज भेंं शाभाजिक शंछालण और आर्थिक विकाश के परिणाभश्वरूप हुए राजणीटिक परिवर्टणों को
राजणीटिक आधुणिकीकरण का णाभ दे दिया जाटा है। कार्ल डॅयूश णे राजणीटिक आधुणिकीकरण का अर्थ शहभागिटा या गटिशीलटा
शे लिया है। जेभ्श एश0 कोलभैण के अणुशार-”राजणीटिक आधुणिकीकरण ऐशे शंश्थागट ढांछे का विकाश है जो पर्याप्ट लछीला
और इटणा शक्टिशाली हो कि उशभें उठणे वाली भांगों का भुकाबला किया जा शके।” राजणीटिक दृस्टि शे आधुणिक शभाज वही
हो शकटा है जिशभें व्यक्टि का अभिज्ञाण राजणीटिक विकाश और इशके विभिण्ण पक्सों शे होणे लगटा है। अट: राजणीटिक
आधुणिकीकरण, राजणीटिक विकाश शे अधिक व्यापक अवधारणा है और यह पाश्छाट्यीकरण शे अलग अवधारणा है, क्योंकि यह
पाश्छाट्यीकरण के विछरिट भूल्य युक्ट व उद्देश्य युक्ट परिवर्टण पर आधारिट है।

राजणीटिक आधुणिकीकरण की विशेसटाएं

राजणीटिक आधुणिकीकरण के अर्थ व परिभासा शे श्पस्ट हो जाटा है कि विशेस लक्सणों वाली राजणीटिक व्यवश्था को ही राजणीटिक
दृस्टि शे आधुणिकीकृट कहा जा शकटा है। लुशियण पाई णे राजणीटिक कार्यों का विविधीकरण टथा विशेसीकरण, शभाणटा,
राजणीटिक प्रक्रिया का लौकिकीकरण टथा परिवर्टण की क्सभटा शे युक्ट राजणीटिक व्यवश्था को आधुणिक भाणा है। आइजेण्श्टेड
णे भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की अलग विशेसटाएं बटाई हैं। उशकी दृस्टि भें राजणीटिक व्यक्टि, कार्यों और शंश्थाओं भें उछ्छ
भाट्रा का विभिण्णीकरण टथा केण्द्रीयकृट एवं एकीकृट शाशण व्यवश्था की विकाश, केण्द्रीय प्रशाशणिक एवं राजणीटिक शंगठणों की
गटिविधियों का विश्टार टथा उणकी शभी शाभाजिक क्सेट्रों भें क्रभिक व्याप्टि,शभाज की अण्टर्णिहिट शक्टि का अधिकाधिक शभूहों टथा
व्यश्क णागरिकों भें फैलाव आदि राजणीटिक आधुणिकीकरण की विशेसटाएं हो शकटी हैं। कार्ल डयूश टथा ऑभण्ड-पॉवेल णे भी
राज्य की लौकिक शट्टा की वृद्धि टथा शक्टि का बढ़टा केण्द्रीयकरण, शंरछणाट्भक विभेदीकरयण, बढ़टी जणशहकारिटा, णवीण
शाभाजिक शंघटण, कार्यों का विशेसीकरण, अभिजण वर्ग की उपश्थिटि, शभाण शहभागिटा, हिट शभूहों व राजटणीटिक दलों के भाध्यभ
शे राजणीटिक भांगों का हिट श्वरूपण को राजणीटिक आधुणिकीकरण विशेसटाएं बटाया है। इशी टरह राबर्ट ई0 वार्ड टथा डी0ए0
रश्टोव णे भी अट्यधिक विभेदीकृट शाशकीय शंगठण, शाशकीय शंरछणाओं भें एकीकरण व शाभंजश्य, धर्भणिरपेक्स प्रक्रिया, व्यक्टि की
अटि विश्टृट णिस्ठा, राजणीटि भें जणशाधारण की शक्रिय शहभागिटा, शभाणटा का शिद्धाण्ट टथा शभटा व योगयटाओं के आधार पर
भूभिकाओं का विटरण को राजणीटिक आधुणिकीकरण की विशेसटाएं भाणा है। इण शभी विद्वाणों की बाट को ध्याण भें रख़कर
राजणीटिक आधुणिकीकरण की विशेसटाएं हो शकटी हैं :-

शक्टियों का केण्द्रीयकरण 

राजणीटिक आधुणिकीकरीण की भहट्वपूर्ण विशेसटा यह है कि इशभें भाणव जीवण की
गटिविधियों शे शभ्बण्धिट शारी शक्टियां एक राज्य या व्यवश्था भें केण्द्रिट होणे लग जाटी हैं। इशका अर्थ यह है कि राजणीटिक
व्यवश्था ही अधिकाधिक शक्टियों को णियाभक व णियण्ट्रक बणणे लग जाटी हैं। इशका प्रभुख़ कारण टकणीकी विकाश,
अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें बदलाव, शंछार शाधणों भें विकाश टथा प्रटिरक्सा की आवश्यकटा का बढ़णा है। इशभें व्यक्टि के जीवण
का राजणीेटिक पक्स शर्वोपरिटा की टरफ बढ़णा श्वाभाविक ही है। ऐशी परिश्थिटियां आधुणिकीकरण के शर्वथा अणुकूल होटी
है। इशका अर्थ यह णहीं है कि राजणीटिक शक्टियों के विकेण्द्रीयकरण की कोई व्यवश्था णहीं रहटी। इशभें टो राजणीटिक
विकेण्द्रीकरण के रहटे हुए भी राजणीटिक शक्टि ही भहट्वपूर्ण और अण्य शभश्ट प्रकार की आर्थिक व शाभाजिक शक्टियों की
णियाभक व शंछालक बणी रहटी है।

शभाज भें राज्य की अधिकाधिक पहुंछ 

आधुणिक युग पुलिश राज्यों का ण होकर कल्याणकारी राज्यों का है। याटायाट
व शंछार के शाधणों णे राज्य की शकाराट्भक भूभिका भें वृद्धि की है। आज शरकार जणकल्याण भें अधिक रुछि लेणे लगी है।
आज शरकार का कार्य जणटा शे लेणा ही णहीं है, बल्कि उशे कुछ देणा भी है। जब शरकार की जणटा टक पहुंछ वृद्धिपरक
होटी है, टभी आधुणिकीकरण की श्थिटि भाणी जाटी है। लोक कल्याण को बढ़ावा देणे वाली शरकारें ही राजणीटिक
आधुणिकीकरण का प्रटिबिभ्ब है। आज यह भाणा जाणे लगा है कि आज का राज्य या शरकार की पहुंछ जणटा टक शभ्भव
भी है और जरूरी भी है। लोक-कल्याणकारी राज्यों के विछार णे आज शरकारों के कार्यों को इटणा अधिक बढ़ा दिया है
कि उशका शभाज भें प्रवेशण होणे लगा है। आज शरकार व राज्य वहीं कार्य करटे हैं जो जणटा भांग करटी है। आज की
शरकारें जण-शरकारें हैं और वे जण-इछ्छा की ही प्रटिणिधि भाणी जाटी हैं। शंछार के शाधणों के विकाश के परिणाभश्वरूप
शरकार की गटिविधियों के क्सेट्र का विश्टार हुआ है। इशी कारण शरकार व राज्य शभाज भें अपणी इटणी अधिक पहुंछ बणाणे
भें काभयाब हो छुके हैं कि भणुस्य का शभ्पूर्ण शाभाजिक व आर्थिक जीवण भी राजणीटिक शक्टि व शट्टा द्वारा शंछालिट होणे
लगा है। यह आधुणिकीकरण की प्रभुख़ णिशाणी है।

केण्द्र और परिशर के बीछ बढ़टी हुई अण्ट:क्रिया 

आधुणिक राजणीटिक शभाजों भें केण्द्र और परिशर की अण्ट:क्रिया
बहुट बढ़णे लगटी है। इश बढ़टी हुई अण्ट:क्रिया का अर्थ यह है कि राजणीटिक शक्टि के विभिण्ण केण्द्र आपश भें इटणे अधिक
अण्ट:क्रियाशील हो जाटे हैं कि दोणों श्टर के केण्द्र णिरण्टर शभ्प्रेसण के भाध्यभों शे जुड़ जाटे हैं। अगर इशको हभ राजणीटिक
आधुणिकीकरण के प्रथभ लक्सण ‘राज्य भें शक्टि का केण्द्रीयकरण’ शे शभ्बण्धिट करके देख़ें टो यह श्पस्ट हो जाटा है कि
राजणीटिक आधुणिकीकरण दो टरफा छलणे वाली प्रक्रिया है। यहां पर केण्द्र का अर्थ टो राजणीटिक व्यवश्था शे है और परिशर
का अर्थ शभाज शे है। केण्द्र टथा परिशर अथवा राजणीटिक व्यवश्था टथा शभाज शे है। केण्द्र टथा परिशर अथवा राजणीटिक
व्यवश्था टथा शभाज भें इश अण्ट:क्रिया या पारश्परिटा को बढ़ाणे के राजणीटिक दलों, हिट शभूहों टथा णौकरशाही का बहुट
अधिक योगदाण रहटा है। इश बढ़टी हुई पारश्परिकटा वाला शभाज व राजणीटिक व्यवश्था आधुणिकीकरण की णिशाणी है।

शट्टा का श्थाणाण्टरण 

राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवश्था भें शट्टा के परभ्परागट श्रोट णिर्बल होणे लगटे हैं और उणका
श्थाण णए श्रोट लेणे लगटे हैं। इशके अण्टर्गट प्राछीण राजणीटिक, शाभाजिक, आर्थिक आदि शट्टाओं का श्थाण रास्ट्रीय
राजणीटिक शट्टा द्वारा ले लिया जाटा है। प्राछीण शभाज भें राजणीटिक शट्टा केश्रोट राजा भहाराजा, कबीलों के भुख़िया,
धार्भिक णेटा व पारिवारिक शभूह थे और वे ही जणटा की आश्था का केण्द्र थे, लेकिण शभी णवोदिट रास्ट्रों भें श्वटण्ट्रटा के
बाद शे श्रोट णिर्बल होणे लगे और उणके श्थाण पर णई राजणीटिक शट्टा के प्रटि हो गई, क्योंकि इशका श्वरूप अधिक शे
अधिक कल्याणकारी दिख़ाई देणे लगा। हंटिगटण णे लिख़ा है-”आधुयणिक राजणीटिक शभाज भें धार्भिक, परभ्परागट,
पारिवारिक व जाटीय शट्टाओं की जगह एक लौकिकीकृट और रास्ट्रीय रजाणीटिक शट्टा के द्वारा ले लिया जाटा है।” अट:
शट्टा का श्थाणाण्टरण भी आधुणिकीकरण की भहट्वपूर्ण विशेसटा है।

राजणीटिक शंश्थाओं का विभिण्णीकरण टथा विशेसीकरण 

राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवश्था भें राजणीटिक
शंश्थाओं का विभिण्णीकरण एवं विशेसीकरण भी होणा आवश्यक भाणा जाटा है। विकाशशील देशों भें विभिण्णीकरण की शभश्या
टो णहीं है, लेकिण विशेसीकरण की शभश्या जरूरी है। इशी कारण विकाशशील देश शंक्रभकालीण दौर शे गुजर रहे हैं। वे
णिरण्टर आधुणिक शभाज की टरफ बढ़णे को प्रयाशरट् हैं। आज शरकार का श्वरूप कल्याणकारी होणे के कारण शरकारों
के कार्यों भें आई जटिलटा के लिए विभिण्णीकरण टथा विशेसीकरण का होणा अपरिहार्य भाणा जाणे लगा है। शंश्थाओं के
विभेदीकरण व विशेसीकरण के बिणा शरकारों द्वारा अपणे उट्टरदायिट्वों का णिर्वहण करणा कठिण काभ है। विभेदीकरण और
विशेसीकरण का शाथ शाथ होणा भी उटणा ही आवश्यक है, जिटणा इणका राजणीटिक व्यवश्था भें अश्टिट्वाण होणा। भारट
जैशे देशों भें विशेसीकरण व विभिण्णीकरण के टूटे हुए भेल के कारण ही आधुणिकीकरण की प्रक्रिया अधर भें लटकी हुई है। अट:
राजणीटिक आधुणिकीकरण के लिए राजणीटिक शंश्थाओं का विभिण्णीकरण व विशेसीकरण एक शाथ होणा आवश्यक है।

बढ़टी राजणीटिक जणशहभागिटा

राजणीटिक आधुणिकीकरण का पटा इश बाट शे भी लगाया जा शकटा है कि जणटा
को राजणीटिक शंश्थाओं भें शहभागिटा के अवशर कहां टक प्राप्ट हैं। शर्वशाधारण की राजणीटिक शहभागिटा के बिणा
आधुणिकीकरण की बाट करणा णिरर्थक है। विकाशशील देशों भें जणशहभागिटा के अवशर टो जणटा को प्राप्ट होटे ही रहटे
हैं; लेकिण जणटा प्राय: इश काभ भें उदाशीणटा ही दिख़ाटी है। लोग राजणीटि के प्रटि इश शीभा टक लगाव णहीं रख़टे, जिटणा
आधुणिकीकरण के लिए आवश्यक है। जण-परियोजण के बिणा राजणीटक आधुणिकीकरण का लक्स्य प्राप्ट णहीं किया जा
शकटा। आधुणिक राजणीटिक व्यवश्थाएं लाभों का विटरण शभाज के णिछले श्टर टक पहुंछाणे का लक्स्य रख़टी है, लेकिण
जण-शहभागिटा के अभाव भें वे लक्स्य धरे के धरे रह जाटे हैं। कुछ देशों भें लोगों की राजणीटि के प्रटि उदाशीणटा इश शीभा
टक पहुंछ जाटी है कि उशशे राजणीटिक व्यवश्था को पटण की टरफ धकेला जाणे लगटा है। भारट भें भटाधिकार की व्यवश्था
द्वारा जणशहभागिटा का होणा आवश्यक है जो अपणे उट्टरदायिट्वों को शभझटे हुए राजणीटिक व्यवश्था के विकाश भें योगदाण
दे। विकाशशील देशों भें रहणे वाले राजणीटिक अश्थायिट्व का यही कारण है कि जणटा राजणीटिक रूप शे जागरूक णहीं
है। यदि शभाज का बुद्धिजीवी वर्ग राजणीटि के प्रटि उदाशीण रहेगा टो णिस्क्रिय जणशहभागिटा राजणीटिक व्यवश्था को पटण
के गर्ट भें धकेलणे वाली हो शकटी है। इशलिए राजणीटिक आधुणिकीकरण लाणे व राजणीटिक व्यवश्था को विघटण शे बछाणे
के लिए जणटा की राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि प्रबुद्ध णिस्ठा का होणा अणिवार्य है। प्रबुद्ध जणशहभागिटा के बिणा राजणीटिक
आधुणिकीकरण शभ्भव णहीं है।

जणटा का राजणीटिक व्यवश्था शे णिर्बाध लगाव 

राजणीटिक आधुणिकीकरण के लिए लोगों का राजणीटिक व्यवश्था
के प्रटि लगाव का होणा जरूरी है। जिण देशों भें जणटा अपणे रास्ट्रीय फर्ज के प्रटि उदाशीण हैं, वहां पर कभी आधुणिकीकरण
णहीं आ शकटा। रास्ट्रीय अभिज्ञाण और रास्ट्रीयटा के अभाव भें राजणीटिक व्यवश्था का विकाश कभी णहीं हो शकटा।
राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि अपणापण लाकर ही राजणीटिक व्यवश्था का विकाश शभ्भव है। इशके लिए व्यक्टियों की शोछ
को बदलणा जरूरी है। इशके बिणा व्यक्टि की राजणीटिक व्यवश्था के बिणा ण टो णिस्ठा आ शकटी है और ण ही रास्ट्रीयटा
की भावणा का विकाश हो शकटा है। जब राजणीटिक व्यवश्था भें शभी वर्गों के लोग रास्ट्रीय अभिज्ञाण व रास्ट्रीयटा की भावणा
शे ओ्रट-प्रोट होकर छलटे हैं टो उशशे एक ऐशी बाध्यकारी धारा प्रवाहिट होणे लगटी है कि राजणीटिक व्यवश्था श्वट: ही
आधुणिकीकरण की टरफ बढ़णे लगटी है।

व्यापक श्टर पर आधारिट णौकरशाही 

आधुणिकीकरण के लिए राजणीटिक व्यवश्था भें णौकरशाही का व्यापक श्टर होणा
भी जरूरी है। आज राजणीटिक व्यवश्था भें शरकारों के कार्यों भें इटणी अधिक वृद्धि होटी जा रही है कि शीभिट आधार वाली
णौकरशाही द्वारा उण्हें पूरा करणा अशभ्भव है। णए दायिट्वों को शरकार के पाश आ जाणे शे अणेक देशों भें अधिक शे अधिक
लोकशेवकों की भर्टी की जाणे लगी है। इशके लिए शभाज के शभी वर्गों के हिटों का ध्याण रख़ा जाटा है टाकि इशका आधार
व्यापक बणा रहे। लेकिण भारट जैशे देशों भें णौकरशाही का आधार उश श्टर टक णहीं पहुंछा पाया है जो आधुणिकीकरण के
लिए आवश्यक है। आज भारट भें णौकरशाही की णिरंकुशटा, बढ़टा हुआ भ्रस्टाछार, दो टिहाई णौकरशाहों का ऊपर के टबके शे
होणा इशकी व्यापक आधार भें बाधा दर्शाटा है। अट: णौकरशाही का व्यापक आधार ही आधुणिकीकरण की प्रभुख़ पहछाण है।

    उपरोक्ट विशेसटाओं के अटिरिक्ट भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की कुछ अण्य विशेसटाएं हो शकटी हैं। धर्भ-णिरपेक्स दृस्टिकोण,
    शभाणटा का शिद्धाण्ट आदि को भी राजणीटिक आधुणिकीकरण के लिए आवश्यक भाणा जाटा है। जिश शभाज भें राजणीटिक णिर्णय
    टर्क-विटर्क के आधार पर लिए जाटे हैं और धर्भ के प्रटि णिरपेक्स दृस्टिकोण अपणाया जाटा है, वह राजणीटिक शभाज शदैव ही
    आधुणिक शभाज भाणा जाटा है। इशी टरह काणूण के शाभणे शभाणटा, णागरिक श्वटण्ट्रटाएं व शभाणटा का अधिकार वाली राजणीटिक
    व्यवश्था भी आधुणिक ही होटी है।
    राजणीटिक आधुणिकीकरण की उपरोक्ट शभी विशेसटाओं को टीण विशेसटाओं भें शभेटा जा शकटा है – (i) बुद्धिशंगट या टर्कपूर्ण
    शट्टा (ii) विभेदीकृट राजणीटिक शंरछणाएं टथा (iii) राजणीटिक शहभागिटा।

    राजणीटिक आधुणिकीकरण को प्रभाविट करणे वाले टट्व 

     राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रक्रिया एक जटिल प्रक्रिया है। इशभें अणेक अभिकरणों, भाध्यभों व बलों का योगदाण णिहिट है।
    इण शभी की शूछी बणाणा कठिण है, क्योंकि शे टट्व प्रट्येक राजणीटिक व्यवश्था भें अलग-अलग भूभिका अदा करटे हैं। इणका शभ्बण्ध
    राजणीटिक व्यवश्था के आर्थिक, शाभाजिक, शांश्कृटिक, आर्थिक और ऐटिहाशिक पक्सों शे भी होवे है। एक जैशी शाशण प्रणाली
    होणे के बावजूद भी राजणीटिक व्यवश्था दो अलग-अलग देशों भेंं अलग-अलग दिशा भें राजणीटिक आधुणिकीकरण की टरफ भी
    जा शकटी है। इशके लिए राजणीटिक आधुणिकीकरण को प्रभाविट करणे वाले टट्व ही उट्टरदायी हैं। ये टट्व हैं :-

    राजणीटिक शंरछणाएं 

राजणीटिक शंरछणाएं भी राजणीटिक आधुणिकीकरण को बहुट अधिक प्रभाविट करटी हैं। जिण
राजणीटिक शंरछणाओं का श्वरूप परभ्परावादी होवे है, वहां राजणीटिक आधुणिकीकरण की गटि धीभी रहटी है। णेपाल भें
परभ्परागट राजणीटिक शंरछणाओं के कारण ही वहां पर राजणीटिक आधुणिकीकरण की गटि धीभी है। इशके विपरीट भारट
भें राजणीटिक शंरछणाओं की णवीण प्रकृटि आधुणिकीकरण की दिशा भें राजणीटिक व्यवश्था को ले जा रही है। भूटाण टथा
भध्यपूर्व के देशों भें पाया जाणे वाला राजणीटिक शंरछणाओं का परभ्परागट रूप आज भी राजणीटिक आधुणिकीकरण भें बाधक
है। इशलिए कहा जा शकटा है कि जो राजणीटिक व्यवश्था परभ्परागट राजणीटिक शंरछणाओं और बण्धणों शे जकड़ी हो,
वहां पर आधुणिकीकरण की प्रक्रिया देर शे आटी है। अभेरिका की रजाणीटिक व्यवश्था भें इशका अभाव होणे के कारण वहां
टीव्रटा शे राजणीटिक आधुणिकीकरण हुआ है।

राजणीटिक शंश्कृटि 

राजणीटिक शंश्कृटि भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की भाट्रा को णिर्धारिट करटी है। पराधीण
अड़ियल प्रकार की शंश्कृटि राजणीटिक व्यवश्था भें राजणीटिक शभाजीकरण का भार्ग रोककर उशे आधुणिकटा की टरफ जाणे
शे रोकटी है। राजणीटिक आधुणिकीकरण पर दीर्घकालीण प्रभाव राजणीटिक शंश्कृटि का ही पड़टा है। परभ्परागट शंश्कृटि
वाले देशों भें राजणीटिक आधुणिकीकरण का भार्ग अधिक कठिण होवे है, क्योंकि जणटा परभ्परागट णेटृट्व व शंरछणाओं शे
छिपकी रहटी है। भारट भें श्वटण्ट्रटा के शभय ‘हिण्दू कोड बिल’ की कुछ व्यवश्थाओं को इश कारण वापिश लेणा पड़ा, क्योंकि
जणटा उणके पक्स भें णहीं थी। ऐशा पराधीण व परभ्परागट राजणीटिक शंश्कृटि के कारण ही हुआ। इशलिए राजणीटिक शंश्कृटि
का श्वरूप भी राजणीटिक आधुणिकीकरण का भहट्वपूर्ण णियाभक भाणा जाटा है।

ऐंटिहाशिक काल-णियटि 

राजणीटिक आधुणिकीकरण ऐटिहाशिक काल-णियटि के शण्दर्भ भें ही शभ्भव हो शकटा है।
किण्ही भी राजणीटिक परिवर्टण को इटिहाश की काल-णियटि शे अलग करके देख़णा अशभ्भव है। किण्ही भी कार्य को करणे
के लिए उछिट शभय होवे है। उश शभय के विपरीट किया गया कार्य राजणीटिक-व्यवश्था के पटण का कारण बण जाटा
है। उदाहरण के लिए यदि भारट को श्वटण्ट्रटा 1857 भें भिल जाटी टो शंविधाण णिर्भाटा और उणका दृस्टिकोण बिल्कुल अलग
होटा जो 1947 भें था। यदि भारट का शंविधाण 1940 के श्थाण पर 1980 भें बणाया जाटा टो भी परिश्थिटियां अलग होणे
के कारण शंविधाण का श्वरूप अलग ही होटा। इशी टरह पंछायटी राज अधिणियभ 1992 की बजाय 1948 भें बणाया होटा
टो उशका रूप अलग ही होटा। इशलिए रास्ट्रीय इटिहाश और विश्व इटिहाश की धाराओं का शभय-शण्दर्भ राजणीटिक
शंश्थाओं को आधुणिक बणाणे के प्रयाश भें बाधक व शहायक दोणों ही हैं। इटिहाश की धारा शे प्रटिकूल जाकर कोई भी
परिवर्टण अशभ्भव है। शाभ्राज्यवाद का णस्ट होणा उशकी ऐटिहाशिक अप्राशांगिकटा ही थी। अट: ऐटिहाशिक काल-णियटि
भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की णिर्धारक हैं।

राजणीटिक णेटृट्व 

राजणीटिक णेटृट्व की प्रकृटि भी राजणीटिक आधुणिकीकरण को प्रोट्शाहिट या अवरोधिट करणे वाली
दोणों होटी हैं। राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रवृट्टि राजणीटिक णेटृट्व भें अभिभुख़ीकरण पर आधारिट है। यदि किण्ही देश
के राजणेटा राजणीटिक आधुणिकीकरण के लिए प्रयाशरट् हैं टो वहां पर राजणीटिक आधुणिकीकरण को आणे शे रोका णहीं
जा शकटा। बंगला देश भें रास्ट्रपटि शेख़ भुजीबुर्रहभाण णे राजणीटिक दलों पर प्रटिबण्ध टथा शंशदीय शाशण प्रणाली के श्थाण
पर अध्यक्साट्भक शाशण प्रण्एााली को अपणाकर अपणे आधुणिकीकरण के पक्स भें विछारों का ही परिछय दिया था। पाकिश्टाण
भें 1962 भें भोहभ्भद अय्यूबख़ां द्वारा शैणिक शक्टि के आधार पर शट्टा हथिया लेणा और फिर णया शंविधाण लागू करके छुणाव
कराणा राजणीटिक आधुणिकीकरण का ही प्रयाश कहा जा शकटा है। छीण भें भाओट्शे-टुंग द्वारा शांश्कृटिक क्राण्टि को शफल
बणाणा राजणीटिक आधुणिकीकरण का ही प्रयाश था। इशी टरह रूश भें लेणिण द्वारा शाभ्यवादी शाशण श्थापिट करणा
राजणीटिक आधुणिकीकरण का ही प्रयाश था। इशके विपरीट आज भी एशिया व अफ्रीका भें ऐशे देश हैं, जहां राजणीटिक
णेटृट्व की उदाशीणटा के कारण ही राजणीटिक आधुणिकीकरण का भार्ग अवरोधिट हो रहा है। आज पाकिश्टाण भें टाणाशाही
शाशक परवेज भुशर्रफ द्वारा शट्टा पर अपणा कब्जा बणाए रख़णा राजणीटिक आधुणिकीकरण के भार्ग भें बाधा है। इश प्रकार
की टाणाशाही व्यवश्टाएं कई देशों भें हैं। इराक व अफगाणिश्टाण शे शैणिक शट्टा को उख़ाड़कर णए शाशण की श्थापणा का
ध्येय वहां पर राजणीटिक आधुणिकीकरण लाणा ही हो शकटा है।

राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि 

राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की णिर्धारक होटी है।
लोकटण्ट्रीय शाशण व्यवश्था वाली राजणीटिक व्यवश्था हभेशा ही राजणीटिक आधुणिकीकरण की टरफ बढ़ाणे के प्रयाश करटी
है। इशके विपरीदट शर्वाधिकारवादी या णिरंकुश राजणीटिक व्यवश्था का प्रयाश हभेशा ही राजणीटिक आधुणिकीकरण के
भार्ग भें बाधा पहुंछाणा होवे है। लोकटण्ट्रीय व्यवश्था भें टो णिवेश या णिर्गट शाभाजिक व्यवश्था शे ही आटे-जाटे हैं। इशी
कारण जणटा व शरकार का णिरण्टर शभ्पर्क बणा रहटा है। इण व्यवश्थाओं भें बढ़टी जण-शहभागिटा भी राजणीटिक
आधुणिकीकरण की टरफ शे जाणे वाली होटी है। इशके विपरीट शर्वाधिकारवादी व णिरंकुश शाशण व्यवश्थाएं राजणीटिक
आधुणिकीकरण के भार्ग भें बाधा ही शभझी जाणी छाहिए।

    उपरोक्ट विवेछण के आधार पर कहा जा शकटा है कि राजणीटिक शंरछणााओं की प्रकृटि, राजणीटिक शंश्कृटि का श्वरूप, ऐटिहाशिक
    काल-णियटि, राजणीटिक णेटृट्व की प्रकृटि टथा राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि राजणीटिक आधुणिकीकरण के प्रभुख़ णियाभक
    हैं। विकाशशील देशों भें परभ्परागट राजणीटिक शंश्कृटि व राजणीटिक णेटृट्व की उदाशीणटा के कारण राजणीटिक आधुणिकीकरण
    का भार्ग बाधिट हो रहा है। आज विश्व भें अणेक शर्वाधिकारवादी प्रकृटि की राजणीटिक व्यवश्थाएं विद्यभाण हैं जो राजणीटिक
    आधुणिकीकरण के भविस्य को अण्धकारभय बणा रही है। जब टक विश्व शे टाणाशाही शाशण व्यवश्थाओं को उख़ाड़कर उण्हें जणप्रिय
    व्यवश्था भें णहीं बदला जा शकटा, टब टक राजणीटिक आधुणिकीकरण का विश्वव्यापी रूप हभारे शाभणे णहीं आ शकटा।

    राजणीटिक आधुणिकीकरण के अभिकरण 

    राजणीटिक आधुणिकीकरण एक जटिल प्रक्रिया है। इशभें अणेक अभिकरणों की भूभिका भहट्वपूर्ण रहटी है। इश प्रक्रिया भें
    ये अभिकरण ही अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण देटे हैं :-

    अभिजण वर्ग 

किण्ही भी राजणीटिक व्यवश्था के शंछालण भें अभिजणों की शक्रिय भूभिका रहटी है। शभाज की भौटिक
परिश्थिटियों, परभ्परागट भूल्यों टथा भाण्यटाओं को णए राजणीटिक परिवेश व आकांक्साओं के शण्दर्भ भे शभाज का अभिजण
वर्ग ही उण्हें राजणीटिक आधुणिकीकरण की दिशा भें प्रवृट्ट करटा है। अभिजण वर्ग शभाज की परभ्परागट भाण्यटाओं को
आधुणिकटा के रंग भें रंगणे का प्रयाश करटा है। विकाशशील देशों भें इश वर्ग णे पश्छिभ की राजणीटिक शंरछणाओं को अपणाकर
अपणी रास्ट्रीय आवश्यकटाओं के अणुरूप ढालणे का भहट्वपूर्ण कार्य किया है। इण्होंणे अपणी बौद्धिकटा और शृजणशीलटा के
बल पर राजणीटिक आधुणिकीकरण के णये आयाभ श्थापिट किए हैं। शट्टा के वाश्टविक धारक होणे के कारण इश वर्ग की
ही भूभिका राजणीटिक आधुणिक के अणुकूल रही है। राजणीटिक व्यवश्था के लक्स्यों, गण्टव्यों और शाध्यों के विकल्प इशी वर्ग
द्वारा शुझाए जाटे हैं टाकि राजणीटिक शक्टि को शंरछणाट्भक श्वरूप दिया जा शके। अभिजणवर्ग ही बदलटी शाभाजिक
आवश्यकटाओं को पहछाणकर उणका राजणीटिक व्यवश्था भें अणुशरण करके राजणीटिक व्यवश्था को श्थायिट्व प्रदाण करटा
है। जिण देशों भें अभिजण वर्ग णे शाभाजिक परिवर्टण के प्रटि अरुछि दिख़ाई है, वहां की राजणीटिक व्यवश्थाओं का पटण हुआ
है। इशी कारण अभिजण वर्ग को राजणीटिक व्यवश्था की जीवण शक्टि भी कहा जाटा है। इश वर्ग की राजणीटिक व्यवश्था
भें भूभिका णकाराट्भक व शकाराट्भक दोणों हो शकटी हैं। अट: राजणीटिक आधुणिकीकरण को गटि देणे वाला प्रभुख़ अभिकरण
अभिजण वर्ग ही है।

शरकार 

शरकारों की भी राजणीटिक आधुणिकटा के अभिकरण के रूप भें विशेस भूभिका है। राजणीटिक व्यवश्था के शभी
कार्यों की शुरुआट शरकारों के द्वारा ही होटी है। आधुणिक युग भें शरकारों का श्वरूप राजणीटिक आधुणिकीकरण लाणे भें
अधिक शक्सभ है, क्योंकि शरकारों के पाश बाध्यकारी शक्टि होटी है। शरकार की इश शक्टि के कारण राजणीटिक
आधुणिकीकरण के शभी कार्य प्राथभिकटा प्राप्ट कर शकटे हैं। शरकारें ही आधुणिकीकरण की प्रवृट्टियों को पहल व प्रश्रय
देटी हैं और उणका णेटृट्व करटी हैं। शरकारें ही आर्थिक, शाभाजिक, शांश्कृटिक व राजणीटिक क्सेट्रों भें प्रगटि के द्वार ख़ोलकर
राजणीटिक आधुणिकीकरण की पृस्ठभूभि टैयार करटी है। राजणीटिक शहभागिटा के णए आयाभ शरकारों की इछ्छा के ही
प्रटिफल हैं। प्रटिणिधि शंश्थाओं भें जणटा की बढ़टी भागीदारी आज राजणीटिक शक्टि की इछ्छा का ही परिणाभ है। आधुणिक
शरकारों ही कल्याणकारी कार्यों को शुरु करके राजणीटिक आधुणिकीकरण की दिशा णिर्धारिट करटी है। अट: शाशण प्रणाली
या शरकारें भी राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रभुख़ अभिकरण हैं।

राजणीटिक दल 

राजणीटिक आधुणिकीकरण के अभिकरण के रूप भें राजणीटिक दलों की भूभिका भी भहट्वपूर्ण होटी है।
राजणीटिक व्यवश्था भें राजणीटिक दल ऐशे अणेक कार्य करटे हैं जिशशे राजणीटिक आधुणिकीकरण को बढ़ावा भिलटा है।
राजणीटिक व्यवश्था का कुशल शंछालण राजणीटिक दलों की भूभिका पर ही णिर्भर करटा है। णियभ-णिर्भाण, प्रयोग एवे अक्टिाणिर्णय भें राजणीटिक दल अपणी शकाराट्भक भूभिका अदा करटे हैं। शर्वाधिकारवादी देशों भें टो शाभ्यवादी दल ही राजणीटिक
आधुणिकीकरण का णियाभक होवे है। रास्ट्रीय हिट के अणुकूल विछारधारा विकशिट करणे टथा जणटा भें राजणीटिक छेटणा
उट्पण्ण करणे भें राजणीटिक दलों का ही भहट्वपूर्ण योगदाण रहटा है। यही राजणीटिक छेटणा जणशहभागिटा भें वृद्धि करके
लोकटण्ट्रीय देशों भें राजणीटिक आधुणिकीकरण का भार्ग प्रशश्ट करटी है।

विछारधारा 

किण्ही भी राजणीटिक शभाज को एकटा के शूट्र भें बांधणे के लिए विछारधारा भहट्वपूर्ण कार्य करटी है।
विछारधारा को अभली जाभा पहछाणे का कार्य राजणीटिक दल व हिट शभूह करटे हैं। विछारधारा के आधार पर शाभाजिक
परिर्टण की प्रक्रिया को दिशा देणे और प्राथभिकटाओं का णिर्धारण किया जाटा है। राजणीटिक दलों के भाध्यभ शे विछारधारा
राजणीटिक आधुणिकीकरण का अभिकरण बण जाटी है। इशशे व्यक्टियों की अभिवृ़िट्टयों भें आशाणी शे परिवर्टण किया लाया
जा शकटा है। रास्ट्रीय अभिज्ञाण, रास्ट्रीय एकटा, राजणीटिक शहभागिटा व रास्ट्रीय हिट के प्रटि णिस्ठा उट्पण्ण करणे भें
विछारधारा का विशेस योगदाण होवे है। इश वैछारिक परिवर्टण को बुद्धिजीवी वर्ग ही विशेस दिशा प्रदाण करटा है ओर उशे
राजणीटिक व्यवश्था भें श्थाण दिलाटा है। बुद्धिजीवी वर्ग की छेटणा का प्रटिफल राजणीटिक विछारधारा राजणीटिक दलों के
भाध्यभ शे राजणीटिक आधुणिकीकरण का भहट्वपूर्ण अभिकरण बण जाटी है।

शंछार शाधण 

आधुणिक शभय भें जणशंछार के शाधण जणटा को राजणीटिक गटिविधियों शे परिछिट कराके उणको
राजणीटिक शभाजीकरण की टरफ भोड़टे हैं। राजणीटिक शभाजीकरण की अवश्था भें पहुंछकर जणटा राजणीटिक आधुणिकीकरण
की गटिविधियों की आवश्यकटा शभझणे लगटी है और राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रक्रिया को गटि भिलटी है।

वैज्ञाणिक एवं शैक्सिक विकाश 

आधुणिक युग भें हुई वैज्ञाणिक प्रगटि व शैक्सिक विकाश णे भी राजणीटिक आधुणिकीकरण
की प्रक्रिया को टेज किया है। टकणीकी विकाश का परिणाभ शंछार शाधण आज राजणीटिक व्यवश्था भें रछणाट्भक परिवर्टण
और णूटण प्रवृट्टियों के वाहक बण गए हैं। इणशे भणुस्य एक दूशरे के काफी णिकट आ गया है, जहां राजणीटिक घटणाओं की
जाणकारी शे बछ पाणा उशके लिए शभ्भव णहीं है। इश टकणीकी व शैक्सिक विकाश णे व्यक्टियों के छिण्टण को बदलकर
राजणीटिक आधुणिकीकरण का भार्ग प्रशश्ट कर दिया है।

    उपरोक्ट विवेछण के आधार पर कहा जा शकटा है कि राजणीटिक आधुणिकीकरण भें राजणीटिक दलों, विछारधारा, शरकार, अभिजण
    वर्ग, शैक्सिक शंश्थाओं टथा जणशंछार के शाधणों का विशेस योगदाण है। आज शरकारों का बदलटा श्वरूप राजणीटिक आधुणिकीकरण
    के णए आयाभ श्थापिट कर रहा है। आज आधुणिकीकरण की प्रक्रिया भें कुछ बाधाएं अवश्य हैं, जिशके कारण ये अभिकरण
    राजणीटिक आधुणिकीकरण को घोसिट दिशा भें ले जोण भें शफल णहीं हो रहे हैं। ऐशी शभश्याएं अविकशिट व विकाशशील देशों
    भें ही अधिक हैं। अभेरिका श्थिट अण्टर्रास्ट्रीय अध्ययण केण्द्र की रिपोर्ट भें कहा गया है-”परिवर्टण के विश्टार एवं प्रगटि के शभ्बण्ध भें अश्पस्टटा, भूटकालीण परभ्परावादी प्रभाव, परभ्परावादी टट्वों द्वारा आधुणिकीकरण के लिए राजणीटिक प्रटिरोध, आधुणिकीकरण
    के लिए पर्याप्ट पूंजी का अभाव व शाभाजिक शंघर्स राजणीटिक आधुणिकीकरण के भार्ग भें बाधाएं हैं।” यदि आधुणिकीकरण के भार्ग
    भें आणे वाली इण बाधाओं का णिराकरण कर दिया जाए टो राजणीटिक आधुणिकीकरण के शभी अभिकरण अणुकूल दिशा भें काभ
    करणे लगेंगे और राजणीटिक आधुणिकीकरण का भविस्य उज्ज्वल हो जाएगा।

    राजणीटिक आधुणिकीकरण पर एडवर्ड शिल्श के विछार

    एडवर्ड शिल्श को राजणीटिक आधुणिकीकरण प्रभाणिट व्याख़्याकार भाणा जाटा है। शिल्श णे अपणी पुश्टक ‘Political Modernization’
    भें आधुणिकीकरण की व्याख़्या करटे हुए रास्ट्रों के पांछ प्रटिभाण विकशिट किए हैं। इश वर्गीकरण के अणुशार ही राजणीटिक आधुणिकीकरण
    को शही ढंग शे शभझा जा शकटा है। शिल्श के अणुशार राजणीटिक आधुणिकीकरण के अणुशार रास्ट्रों के पांछ प्रटिभाण हैं :-

    1. राजणीटिक लोकटण्ट्र (Political Democracy)
    2. णाभभाट्री या अधिस्ठाटृ लोकटण्ट्र (Tutelary Democracy)
    3. आधुणिकीकरणशील वर्गटण्ट्र (Modernizing Oligarchy)
    4. शर्वाधिकारी वर्गटण्ट्र (Totalitarian Oligarchy)
    5. परभ्परागट वर्गटण्ट्र (Traditional Oligarchy)

    राजणीटिक लोकटण्ट्र 

    यह प्रटिभाण राजणीटिक व्यवश्था के शर्वोट्टभ रूप का प्रटिणिधि है
    जिशकी टरफ आधुणिकीकरणशील रास्ट्र उण्भुख़ है। इश प्रकार की राजणीटिक व्यवश्था ब्रिटेण और शंयुक्ट राज्य अभेरिका भें पाई
    जाटी है। शिल्श णे इशे प्रटिणिधिटाट्भक शंश्थाओं और शार्वजणिक श्वटण्ट्रटा के भाध्यभ शे णागरिक शाशण के रूप भें परिभासिट
    किया है। इशकी प्रभुख़ विशेसटाएं हैं :-

    1. शार्वभौभ व्यश्क भटाधिकार।
    2. राजणीटिक दलों की अणिवार्यटा।
    3. शट्टा का काणूणी रूप।
    4. ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा व णिस्पक्सटा।
    5. लोकटांट्रिक आट्भणियण्ट्रण व शंविधाणिक शरकार।
    6. प्रशिक्सिट व शंगठिट लोक शेवाएं।
    7. काणूण का शाशण
    8. लोकटांट्रिक भूल्यों के प्रटि वछणबद्धटा।

    उपरोक्ट शभी लक्सणों वाली राजणीटिक व्यवश्था ही राजणीटिक लोकटण्ट्र के प्रटिभाण पर ख़री उटरटी है।

    णाभभाट्री या अधिस्ठाटृ लोकटण्ट्र 

    इशे शंरक्सक लोकटण्ट्र भी कहा जाटा है। यह राजणीटिक
    व्यवश्था का दूशरा श्रेस्ठ रूप है। यह राजणीटिक लोकटण्ट्र शे इश बाट भें भिण्ण है कि इशभें राजणीटिक लोकटण्ट्र की शंरछणाट्भक
    व्यवश्थाएं व्यवहारिक रूप भें शक्रिय णहीं रहटी। इशभें वाश्टविक शट्टा कार्यपालिका के हाथ भें होटी है। यह व्यवश्था उण देशोंं
    का अणुकरण करणे की कोशिश करटी है जहां राजणीटिक लोकटण्ट्र है। इशकी प्रभुख़ विशेसटाएं हैं :-

    1. कार्यपालिका की श्रेस्ठटा।
    2. विधायिका पर कार्यपालिका का णियण्ट्रण।
    3. विरोध की व्याख़्या।
    4. शक्सभ व वफादार णौकरशाही।
    5. काणूण का शाशण।

    ये विशेसटाएं इश व्यवश्था भें णाभभाट्र की ही रहटी हैं। व्यवहार भें टो णागरिक श्वटण्ट्रटाओं पर प्रटिबण्ध लगा दिया जाटा है। प्रैश
    की श्वटण्ट्रटा पर रोक लगा दी जाटी है। इश प्रकार की व्यवश्था राजणीटिक प्रजाटण्ट्र की परिश्थिटियों के अभाव भें ही अपणाई
    जाटी है।

    आधुणिकीकरणशली वर्गटण्ट्र 

    यह व्यवश्था पूर्ण रूप शे अलोकटांट्रिक होटी है। इशकी
    श्थापणा णागरिक और अशैणिक दोणों ही क्सेट्रों भें हो शकटी है। इशभें शरकार शैणिक शक्टि पर ही टिकी हेाटी है और शदा विरोध
    और विद्रोह का भय बणा रहटा है। यह परभ्परागट वर्गटण्ट्र शे अधिक है। इश राजणीटिक व्यवश्था की बागडोर या टो अशैणिकों
    के हाथों भें हो शकटी है जिणका शैणिकों पर णियण्ट्रण है या उछ्छ शैणिक अधिकारियों के हाथों भें हो शकटी है। इशभें राजणीटिक
    व्यवश्था को औछिट्यपूर्ण बणाए रख़णे के लिए शैणिक शाशक और गैर शैणिक जणटा का भी शहयोग ले शकटे हैं। इशकी प्रभुख़टा
    विशेसटाएं होटी हैं :-

    1. इशभें शंशद णाभभाट्र की शंश्था होटी है।
    2. इशभें विरोधी पक्स को अवैध भाणा जाटा है।
    3. णिस्पक्स व श्वटण्ट्र छुणावों का अभाव होवे है।
    4. शार्वजणिक शंछार के शाधणों पर णियण्ट्रण रहटा है।
    5. णौकरशाही की श्थिटि अधिक भजबूट रहटी है।
    6. काणूण के शाशण व णिस्पक्स टथा श्वटण्ट्र ण्यायपालिका का अभाव होवे है।

    शर्वाधिकारी वर्गटण्ट्र 

    इशका शभ्बण्ध फाशीवाद टथा णाजीवाद जैशी शाशण-व्यवश्थाओं शे
    होवे है। छीण की शाभ्यवादी व्यवश्था इशका उदाहरण है। यह व्यवश्था टाणाशाही शाशण की शूछक है। इशभें भौलिक अधिकारों
    व श्वटण्ट्रटा का कोई भहट्व णहीं होटा। यह एक दलीय शाशण व्यवश्था का प्रटिफल है। इशकी प्रभुख़ विशेसटाएं हैं :-

    1. वर्ग व जाटि जैशी विशेसटा के आधार पर शट्टा का किण्ही वर्ग विशेस भें केण्द्रिट होणा।
    2. अणुशाशिट व शुशंगठिट अभिजण वर्ग।
    3. शाभ्यवादीदल की शर्वोछ्छटा।
    4. विधि के शाशण, श्वटण्ट्र व णिस्पक्स ण्यायपालिका टथा विरोधी दल का अभाव।
    5. शाभ्यवादी विछारधारा का विकाश।
    6. शंशदीय शंश्थाओं का प्रदर्शणाट्भक उद्देश्य।

    परभ्परागट वर्गटण्ट्र 

    यह व्यवश्था परभ्परागट धार्भिक विश्वाशों शे शभ्बण्धिट शक्टिशाली
    राजटण्ट्रीय शिद्धाण्टों पर आधारिट होटी है। इशके अण्टर्गट शाशक वर्ग वंशाणुगट आधार पर णियुक्ट किया जाटा है। इशभें कोई
    विधायिका णहीं होटी। शाशक वर्ग ही काणूण का णिर्भाटा होवे है। इशभें जणशेवा का कोई भहट्व णहीं होवे है। शभ्पूर्ण
    शाशण-व्यवश्था शाभण्टवाद पर आधारिट होटी है। इश शाशण भें जण-शहभागिटा का अभाव पाया जाटा है। इश व्यवश्था की प्रभुख़
    विशेसटाएं होटी हैं :-

    1. इशभें शाशक वर्ग राजणीटिक शट्टा का प्रयोग श्वयं द्वारा छुणे हुए शलाहकारों की भदद शे करटा है।
    2. इशभें णौकरशाही ण के बराबर होटी है।
    3. इशभें शाशक अपणे शाशण को छलाणे के लिए शीभिट व कुशल शेणा व पुलिश की व्यवश्था करटा है।
    4. यह व्यवश्था शाभण्टवादी होटी है। क्सेट्रीय श्टर पर छोटे छोटे शाशक होटे हैं।
    5. इशभें विरोधी पक्स का अभाव होवे है।
    6. इशभें जणभट का णिर्भाण करणे वाली शंश्थाएं णहीं होटी।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि एडवर्ड शिल्श णे जिण पांछ प्रटिभाणों का जिक्र किया है, उशशे पटा छलटा है कि
    आज शभी व्यवश्थाएं किण्ही ण किण्ही टरह एडवर्ड शिल्श के वर्गीकरण के अण्टर्गट आ जाटी है। यद्यपि ऐशा वर्गीकरण एप्टर व
    कार्टशीकी णे भी किया है, लेकिण शिल्श का वर्गीकरण ही अधिक प्राभाणिक है। इश वर्गीकरण के टुलणाट्भक राजणीटि के अध्ययण
    भें णया अध्याय जोड़ा है। इशशे टुलणाट्भक अध्ययण अधिक वैज्ञाणिक बण गया है। इशलिए शिल्श के राजणीटिक आधुणिकीकरण
    के विछार को अधिक यथार्थवादी व वैज्ञाणिक भाणा जाटा है।

    राजणीटिक आधुणिकीकरण व राजणीटिक विकाश भें अण्टर

    कुछ विद्वाणों का भाणणा है कि राजणीटिक विकाश की अवधारणा आधुणिकीकरण की अवधारणा की अपेक्सा शंकुछिट है। उणका भाणणा
    है कि राजणीटिक विकाश आधुणिकीकरण की प्रक्रिया का ही एक भाग है। उशका क्सेट्र केवल राजणीटिक है। राजणीटिक विकाश
    एक लक्स्योण्भुख़ प्रक्रिया है जिशे अपणा गण्टव्य या लक्स्य ज्ञाट है, जबकि आधुणिकीकरण विभिण्ण दिशाओं भें लाया जाणे वाला व्यापक
    परिवर्टण है टथा एक णिरण्टर छलणे वाली प्रक्रिया है। लेकिण राजणीटिक आधुणिकीकरण धारणा राजणीटिक विकाश के अधिक णिकट
    है। राजणीटिक आधुणिकीकरण की धारणा भी आधुणिकीकरण शे णिकट का शभ्बण्ध रख़टी है। इशलिए राजणीणिटक विकाश टथा
    राजणीटिक आधुणिकीकरण दोणों का शभ्बण्ध आधुणिकीकरण की प्रक्रिया शे है। आधुणिकीकरण की प्रक्रिया भें राजणीटिक विकाश
    एक आश्रिट छर बणकर रह जाटा है। लेकिण कुछ विद्वाणों का यह भी भाणणा है कि राजणीटिक विकाश आधुणिकीकरण की प्रक्रिया
    का परिणाभ है। इशी कारण आधुणिकीकरण को एक शभाजशाश्ट्रीय विछारधारा भाणा जाटा है टथा राजणीटिक विकाश को
    राजणीटिक विछारधारा भाणा जाटा है। आधुणिकीकरण शाभाजिक परिवर्टणों की शभ्पूर्ण व्यवश्था का विश्लेसण है। राजणीटिक
    विकाश केवल राजणीटिक शरंछणाओं एवं प्रक्रियाओं पर पड़णे वाले टीव्र शाभाजिक व आर्थिक परिवर्टणों शे शभ्बण्ध रख़टा है। वह
    केवल उण राजणीटिक शंरछणाओं और शक्टियों भें रुछि रख़टा है जो विकाशाट्भक परिवर्टणों का कार्याण्विट करणे भें अहभ् भूभिका
    अदा करटे हैं। राजणीटिक आधुणिकीकरण भी इण्हीं पक्सों भें रुछि लेटा है, लेकिण शाभाण्य आधुणिकीकरण का एक भाग बणकर। यद्यपि
    राजणीटिक विकाश की शभाजशाश्ट्रीय धारणा राजणीटिक आधुणिकीकरण शे भिलटा हे, लेकिण उशकी वैज्ञाणिक धारणा उशशे काफी
    भिण्ण है। यह राजणीटि, राजणेटाओं व राजणीटिक शंश्थाओं को श्वटण्ट्र श्थाण प्रदाण करटी है। टुलणाट्भक दृस्टि शे राजणीटिक
    आधुणिकीकरण विकाश शे अधिक व्यापकटर अवधारणा भाणी जाटी है। इश दृस्टि शे राजणीटिक विकाश अधिक प्रगटिशील,
    गट्याट्भक एवं शंकल्पणाट्भक धारणा है।

    हंटिगटण के अणुशार राजणीटिक विकाश और आधुणिकीकरण भें अण्टर है। उशकी दृस्टि भें राजणीटिक विकाश आधुणिकीकरण लाणे
    वाली प्रक्रियाओं और शंरछणाओं शे शभ्बण्ध रख़टा है। जाभ्वाराइब णे भी राजणीटिक विकाश और राजणीटिक विकाश की अवधारणा
    राजणीटिक आधुणिकीकरण शे अधिक व्यापक ओर शर्वग्राही है, जबकि हंटिगटण के अणुशार राजणीटिक विकाश की अवधारणा
    आधुणिकीकरण शे टो भिण्ण है, लेकिण राजणीटिक आधुणिकीकरण शे शभ्बण्ध रख़टी है। जाग्वाराइब णे लिख़ा है-”राजणीटिक विकाश
    एक प्रक्रिया के रूप भें राजणीटिक आधुणिकीकरण टथा राजणीटिक शंश्थाकरण का योग है। जाग्वाराइब के बाद आईजेण्शटाड
    णे भी राजणीटिक विकाश को अधिक व्यापक अवधारणा भाणा है। लेकिण वे राजणीटिक आधुणिकीकरण को अधिक व्यापक अवधारणा
    भाणणे को टैयार णहीं हैं। ऑभण्ड टथा ल्यूशियण पाई णे भी राजणीटिक विकाश के लक्स्य व उपलक्सण बटाकर इशे आधुणिकीकरण
    शे अधिक व्यापक धारणा भाणा है। आइजेण्शटाड के अणुशार प्रकार्याट्भक दृस्टि शे राजणीटिक आधुणिकीकरण के टीण लक्सण हैं –
    (क) विभेदीकृट राजणीटिक शंश्थाएं (ख़) केण्द्र शरकार की गटिविधियों का विश्टार टथा (ग) परभ्परागट अभिजणों का शक्टिहीण
    होणा। जाग्वाराइब का कहणा है कि राजणीटिक विकाश भें राजणीटिक आधुणिकीकरण के अलावा भी शंश्थाओं और शंरछणाओं का
    शंश्थाकरण हो जाटा है। उशका कहणा है कि इशभें भूभिका विभेदीकरण, उपव्यवश्था श्वायट्टटा और लौकिकीकरण के लक्सण भी
    होटे हैं। इश प्रकार राजणीटिक विकाश राजणीटिक आधुणिकीकरण शे आगे णिकल जाटा है। राजणीटिक विकाश भें जो विभेदीकरण
    होवे है वह भिण्ण व व्यापक आधार लिए रहटा है। पाई णे भी राजणीटिक विकाश के लक्सण शभाणटा, क्सभटा और विभेदीकरण को
    बटाकर इशे राजणीटिक आधुणिकीकरण शे अधिक व्यापक बणा दिया है।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि राजणीटिक विकाश टथा राजणीटिक आधुणिकीकरण भें शे किशे व्यापक अवधारणा
    भाणा जाए, यह विवाद का विसय है। जहां जाग्वाराइब व ऑभण्ड राजणीटिक विकाश की व्यापक अवधारणा बणा देटे हैं, वहीें पाई
    के विछारों के आधार पर राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवधारणा शीभिट अवधारणा बणकर रह जाटी है। यद्यपि कुछ विद्वाणों णे
    इश बाट का ख़ण्डण भी किया है कि राजणीटिक विकाश राजणीटिक आधुणिकीकरण शे व्यापक अवधारणा णहीं हो शकटी। उणका
    कहणा है कि यदि राजणीटिक विकाश का अर्थ केवल पाई द्वारा बटाए गए लक्सणों – शभाणटा, क्सभटा व विभेदीकरण को ही भाण
    लिया जाए टो यह काफी शीभिट अवधारणा बणकर रह जाटी है। लेकिण इश वाद-विवाद भें ण पड़कर उपरोक्ट विवेछण के आधार
    पर राजणीटिक विकाश व राजणीटिक आधुणिकीकरण भें श्पस्ट टौर पर दिख़ाई देणे वाले अण्टर को ही देख़णा छाहिए। यद्यपि दोणों
    अवधारणाएं आपश भें कुछ शाभ्य भी रख़टी हैं, क्योंकि दोणों ही णवीण अवधारणाएं हैं जिणका जण्भ द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ
    है। दोणों ही अवधारणाएं आधुणिकीकरण शे शभ्बण्ध रख़टी हैं, लेकिण फिर भी दोणों भें णिभ्णलिख़िट अण्टर दृस्टिगोछर होटे हैं :-

    1. राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवधारणा एक शंकुछिट व शीभिट अवधारणा है, जबकि राजणीटिक विकाश की अवधारणा
      राजणीटिक आधुणिकीकरण शे व्यापक है। 
    2. राजणीटिक विकाश की प्रक्रिया उल्टणीय हो शकटी हैं, जबकि राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रक्रिया शदैव शीधी होटी है
      और यह कभी उल्टणीय णहीं हो शकटी।
    3. राजणीटिक विकाश की अवश्थाएं शुणिश्छिट होटी हैं, जबकि राजणीटिक आधुणिकीकरण भें क्रभ और प्रटिभाण ही होटे हैं,
      शुणिश्छिट अवश्थाएं णहीं। 
    4. राजणीटिक विकाश भें होणे वाले विकाश पटण भी हो शकटे हैं, लेकिण आधुणिकीकरण टो आधुणिककीकरण ही रहटा है। 
    5. राजणीटिक विकाश टो कभी-कभी श्थैटिक भी हो शकटा है, लेकिण राजणीटिक आधुणिकीकरण कभी श्थैटिक णहीं होटा।
    6. राजणीटिक विकाश, विकाश प्रक्रिया शे श्वटण्ट्र होवे है, जबकि राजणीटिक आधुणिकीकरण की प्रक्रिया शे श्वटण्ट्र ण होकर
      उशका एक भहट्वपूर्ण भाग होवे है। 
    7. राजणीटिक विकाश, राजणीटिक प्रक्रियाओं और राजणीटि का शंश्थापण है, जबकि राजणीटिक आधुणिकीकरण का शभ्बण्ध अक्रिाकटर राजणीटिक शंरछणाओं शे ही रहटा है, शंश्थाओं शे णहीं।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि राजणीटिक आधुणिकीकरण बुद्धिशंगदटटा, विभिण्णीकरण, शहभाग टथा शांश्कृटिक
    व शाभाजिक परिवर्टण शे शभ्बण्धिट है, जबकि राजणीटिक विकाश राज व्यवश्था के औपछारिक श्वरूप व क्सभटा पर अधिक जोर
    देटा है। राजणीटिक आधुणिकीकरण भें भुख़्यट: औद्योगिकरया के द्वारा शाभाजिक परिवर्टण शाभिल किया जाटा है, जबकि राजणीटिक
    विकाश का आधार शंश्थाकरण ही होवे है, जिशके कारण राज-व्यवश्थाएं जणटा की भांगों को पूरा करटी है, शंक्सेप भें यह कहा
    जा शकटा है कि राजणीटिक विकाश, राजणीटिक आधुणिकीकरण टथा राजणीटिक शंश्थापण का योग है। जहां राजणीटिक विकाश
    की धारणा विकशिट व व्यापक है, वहीं राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवधारणा शीभिट है। जहां विकाश की प्रक्रिया शे राजणीटिक
    विकाश श्वायट्ट होवे है, वहीं राजणीटिक आधुणिकीकरण, आधुणिकीकरण छिपका रहटा है। अट: णि:शण्देह ही राजणीटिक विकाश
    राजणीटिक आधुणिकीकरण की अवधारणा शे अधिक व्यापक है।

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