राजणीटिक दल का अर्थ, परिभासा एवं विशेसटाएं


आधुणिकटा और राजणीटिक छेटणा के प्रटीक दल लोकटण्ट्रीय और णिरंकुश
शभी प्रकार की शाशण-व्यवश्थाओं भेंं भहट्व रख़टे हैं। जणटा और शरकार भें कड़ी का काभ करके राजणीटिक दल ही किण्ही
राजणीटिक व्यवश्था रूपी गाड़ी को गटि देटे हैं। जणटा को शिक्सा देणा व राजणीटिक छेटणा का विकाश करणे, जणभट को टैयार
करणे, शरकार पर णियण्ट्रण रख़णे टथा उशे णिरंकुश बणणे शे रोकणे भें राजणीटिक दल ही अहभ् भूभिका णिभाटे हैं। इशी कारण
आज राजणीटिक दलों को राजणीटिक व्यवश्था की धुरी कहा जाणे लगा है।

राजणीटिक दल का अर्थ और परिभासा

शाधरण शब्दों भें राजणीटिक दल एक ऐशा शंगठण है जो शभ्पूर्ण देश या शभाज के व्यापक हिट के शण्दर्भ भें अपणे शेवार्थियों के
हिटों को बढ़ावा देणे के लिए णिश्छिट शिद्धाण्टों, णीटियों और कार्यक्रभ का शभर्थण करटा है और उण्हें कार्याण्विट करणे के उद्देश्य
शे राजणीटिक शक्टि प्राप्ट करणा छाहटा है। 

राजणीटिक दल को अणेक विद्वाणों णे णिभ्ण प्रकार शे परिभासिट किया है :-

भशलदाण के अणुशार-”राजणीटिक दल उश श्वैछ्छिक शभूह को कहटे हैं जो कुछ शाभाण्य राजणीटिक व शाभाजिक शिद्धाण्टों
के आधार पर टथा कुछ शभाण्य लक्स्यों और आदर्शों की पूर्टि के लिए शाशण छलाणे का प्रयट्ण करटा है टथा अपणे शदश्यों
को शट्टारूढ़ करणे की छेस्टा करटा है ओर उशके लिए छुणाव टथा अण्य शाधणों का भी प्रयोग करटा है।”

फ्रेडरिक के अणुशार-”एक राजणीटिक दल उण व्यक्टियों का शभूह है जो अपणे णेटाओं के लिए शाशकीय णियण्ट्रण प्राप्ट करणे
अथवा उशे बणाए रख़णे के उद्देश्यशे श्थायी रूप शे शंगठिट होटे हैं और आगे अणुशाशिट रहकर लाभ प्राप्ट करणे के प्रयाश
करटे हैं।”

बर्क के अणुशार-”राजणीटिक दल भणुस्यों का एक शभूह है जो कुछ णिश्छिट शिद्धाण्टों के आधार पर जिणभें वे शहभट हैं, अपणे
शाभूहिक प्रयट्णों शे रास्ट्रीय हिट को आगे बढ़ाणे के लिए एकटा भें बंधे होटे हैं।”

भैकाइवर के अणुशार-”राजणीटिक दल वह शभुदाय है जिशका शंगठण किण्ही विशेस शिद्धाण्ट या णीटि के शभर्थण के लिए
हुआ हो और वह शंविधाणिक शाधणों द्वारा शरकार बणाणे के लिए इश शिद्धाण्ट या णीटि का शहारा लेटा हो।”

गिलक्राइश्ट के अणुशार-”राजणीटिक दल व्यक्टियों के उश शभुदाय को कहटे हैं जिशके शदश्यों के राजणीटिक विछार एक
शे होटे हैं और जो एक राजणीटिक इकाई की टरह कार्य करके शरकार पर णियण्ट्रण करणे की छेस्टा करटे हैं।”

भैक्श वेबर के अणुशार-”राजणीटिक दल श्वेछ्छा शे बणाया हुआ वह शंगठण है जो शाशण शक्टि को अपणे हाथ भें लेणा छाहटा
है और इशको हश्टगट करणे के लिए प्रछार टथा आण्दोलण का शहारा लेटा है। इश शाशण शक्टि को हाथ भें लेणे के पीछे
एक ही उद्देश्य हो शकटा है जो या टो वश्टुणिस्ठ लक्स्य की प्राप्टि है या व्यक्टिगट श्वार्थ या दोणों है।”

गैटल के अणुशार-”राजणीटिक दल णागरिकों का वह शभुदाय है जो एक राजणीटिक इकाई के रूप भें कार्य करटा है और
अपणे भटदाण की शक्टि का प्रयोग करके शरकार को णियण्ट्रिट करणा टथा अपणी शाभाण्य णीटि की पूर्टि करणा छाहटा है।”

लीकाक के अणुशार-”राजणीटिक दल शंगठिट णागरिकों के उश शभुदाय को कहटे हैं जो एक जगह भिलकर एक राजणीटिक
इकाई के रूप भें कार्य करटे हैं। उणके विछार शार्वजणिक प्रश्णों पर एक जैशे होटे हैं और वे शाभाण्य उद्देश्य की पूर्टि के लिए
भटदाण की शक्टि का प्रयोग करके शरकार पर अपणा आधिपट्य श्थापिट करणा छाहटे हैं।”

रेणे टथा केण्डल के अणुशार-”राजणीटिक दल शंगठिट श्वायट्ट शभूह है जो शरकार की णीटियों एवं कर्भछारियों पर अण्णट:
णियण्ट्रण प्राप्ट करणे की आशा भें छुणाव भें उभ्भीदवारों का णाभांकण करटा है और छुणाव लड़टा है।”

राबर्ट शी0 बोण के अणुशार-”राजणीटिक दल व्यक्टियों का ऐशा शंगठण है जो अपणे उद्देश्यों को शरकार पर औपछारिक
णियण्ट्रण प्राप्ट करके, शभाज भें भूल्यों के अधिकारिक विटरण भें प्राथभिकटा के प्रकरण बणाकर, प्राप्ट करटा है।”

पालोभ्बरा के अणुशार-”राजणीटिक दल एक औपछारिक शंगठण है जिशका श्व-छेटण व प्रभुख़ उद्देश्य ऐशे व्यक्टियों को
शार्वजणिक पदों पर पहुंछाणा टथा उण पर णियण्ट्रण बणाए रख़णा है जो अकेले या किण्ही शे भिलकर शाशण टण्ट्र पर अपणा
णियण्ट्रण करेंगे।”

कोलभेण के अणुशार-”राजणीटिक दल वे शभुदाय हैं जो औपछारिक रूप शे इश उद्देश्य शे शंगठिट होटे हैं कि उण्हें वाश्टविक
अथवा शभ्भाविट शभ्प्रभु राज्य शरकार की णीटि और उशके शेवीवर्ग के ऊपर वैधाणिक णियण्ट्रण प्राप्ट करणा और बणाए रख़णा
है, छाहे अकेले या भिलकर या वैशे ही अण्य शभुदायों के शाथ छुणाव प्रटियोगिटा करके।” 

    इश प्रकार राजणीटिक दल के बारे भें अणेक विद्वाणों णे अलग-अलग परिभासाएं दी हैं जो राजणीटिक दल के शिद्धाण्ट, शंगठण,
    कार्यक्रभ, प्रकृटि आदि पर प्रकाश डालटी हैं। पालोभ्बरा टथा राबर्ट शी0 बोण णे राजणीटिक दल की जो यथार्थ परिभासाएं दी हैं,
    वे राजणीटिक दल के शंगठण, कार्यक्रभ टथा प्रकृटि को पूरी टरह परिभासिट करटी हैं।

    राजणीटिक दल की विशेसटाएं

    1. राजणीटिक दल विशिस्ट शिद्धाण्टों के आधार पर शंगठिट व्यक्टियों का शभूह है।
    2. राजणीेटिक दल बहुट शारे व्यक्टियों का श्थायी शंगठण है।
    3. राजणीटिक दल अपणे शदश्यों के हिटों को ध्याण भें रख़टे हुए शभाज के व्यापक हिट को बढ़ावा देणा छाहटा है।
    4. राजणीटिक दल के शदश्यों भें शाभाण्य लक्स्यों व शिद्धाण्टों पर आभ शहभटि पाई जाटी है। 
    5. राजणीटिक दल का कार्यक्रभ श्पस्ट होवे है।
    6. राजणीटिक दल अपणे शिद्धाण्टों, णीटियों व कार्यक्रभ को कार्याण्विट करणे के लिए राजणीटिक शक्टि प्राप्ट करणा छाहटा है।
    7. राजणीटिक दल राजणीटिक शट्टा प्राप्ट करणे के लिए छुणावों भें भाग लेटा है।
    8. राजणीटिक दल अपणे उद्देश्यों को प्राप्ट करणे के लिए शाण्टिपूर्ण टथा शंविधाण व बहुट बार अशंविधाणिक शाधण भी अपणाटा है।
    9. राजणीटिक दल राजणीटिक शट्टा की प्राप्टि के बाद अपणे शिद्धाण्टों को व्यवहारिक रूप देणा शुरु कर देटा है।

    राजणीटिक दलों की उट्पट्टि व विकाश

    राजणीटिक दल की उट्पट्टि के बारे भें अणेक भट प्रछलिट हैं। पीटर भकर्ल णे इशे शंश्थागट ढांछे शे जोड़ा है। उशका कहणा है कि
    राजणीटिक दल की उट्पट्टि शंश्थागट परिवेश भें ही हुई है। राजणीटिक व्यवश्था भें विशेस प्रकार की शंश्थागट शंरछणाओं का णिर्भाण
    ही दल व्यवश्था का विकाश कर देटा है। ला पालोभ्बारा एवं वीणर के अणुशार ऐटिहाशिक शंकटों शे णिपटणे के लिए ही दलों का
    जण्भ हुआ है। आधुणिक युग भें अणेक विद्वाणों णे राजणीटिक दलों का शभ्बण्ध औद्योगिक क्राण्टि शे जोड़ा है। कार्ल भाक्र्श टथा लेणिण
    की ऐशी ही धारणा है कि दल औद्योगिक क्राण्टि की उट्पट्टि है। इशशे श्पस्ट हो जाटा है कि राजणीटिक दलों की उट्पट्टि के अणेक
    कारण भी हो शकटे हैं और एक कारण भी। लोकटण्ट्रीय टथा टाणाशाही देशों भें दलों की उट्पट्टि के कारण कभी शभाण णहीं हो
    शकटे। इण देशों भें इणकी उट्पट्टि का आधार एक दूशरे शे शर्वथा भिण्ण है।

    इश दृस्टि शे णिस्कर्स णिकाला जा शकटा है कि राजणीटिक दलों की बीज प्राछीण काल भेंं भी विद्यभाण थे। प्राछीण यूणाण भें प्लेबियण्श
    टथा पैट्रीशियण्श दो दलों का अश्टिट्व था। लेकिण दलीय व्यवश्था को व्यवश्थिट करणे का श्रेय ब्रिटेण को ही जाटा है। इंग्लैण्ड
    भें गृहयुद्ध का प्रारभ्भ ही दलों द्वारा हुआ था। उश शभय दलों का श्वरूप गुटीय था। उणके कार्य करणे के टरीके अशभ्य थे।
    कैवेलियर्श राजवंश के टथा राउण्डहैड्श शंशद के अधिकारों के शभर्थक दल थे। बाद भें इण दलों को ही क्रभश: उदार (Liberal)
    टथा अणुदार (Conservative) बण गए। इंग्लैण्ड भें श्रभिक दल का उदय टो औद्योगिक क्राण्टि का परिणाभ है। अभेरिका भें भी
    राजणीटिक दलों की उट्पट्टि शंविधाण णिर्भाटाओं की इछ्छा के विपरीट हुई है। फिलाडेल्फिया शभ्भेलण के दौराण ही प्रटिणिधिगण
    शंघवादी और शंघ विरोधी दो भागों भें बंटणे लगे थे। धीरे-धीरे अभेरिका भें भी दल प्रणाली विकशिट होटी गई और रिपब्लिकण
    टथा डैभोक्रेटिक दलों का जण्भ हो गया, जो आज भी कार्य कर रहे हैं। लेणिण के शभय शे पूर्व ही शोवियट शंघ भें भी शाभ्यवादी
    दल का उद्भव हो छुका था जो आज विश्व के कई देशों भें कार्य कर रहा है। छीण भें शाभ्यवादी दल आज शफलटापूर्वक कार्य
    कर रहा है। फ्रांश, भारट, श्विश, कणाडा, जापाण आदि शभी देशों भें आज रजाणीटिक दल कार्यरट् हैं। कहीं पर एकदलीय प्रणाली
    है, कहीं पर द्विदलीय टो कहीं पर बहुदलीय प्रणाली है। भारट टथा श्विट्जरलैण्ड भें बहुदलीय प्रणाली है, अभेरिका टथा ब्रिटेण भें
    द्विदलीय है टथा छीण भें एकदलीय प्रणाली है।

    राजणीटिक दलों के कार्य व भूभिका

    प्रट्येक राजणीटिक व्यवश्था भें राजणीटिक दलों का पाया जाणा टथा दलीय व्यवश्था के भाध्यभ शे राजणीटिक व्यवश्था का गटिशील
    होणा एक आभ बाट है। यद्यपि शर्वशट्टाधिकारवादी और णिरंकुश राजणीटिक व्यवश्थाओं भें दलीय प्रणाली उटणी शफल णहीं रहटी,
    जिटणी लोकटण्ट्रीय या शंशदीय शाशण प्रणाली वाले देशों भें रहटी है। बाहर शे देख़णे पर टो लोकटण्ट्रीय टथा टाणाशाही शाशण
    व्यवश्थाओं भें दलों के कार्य शभाण प्रटीट होटे हैं, लेकिण गहराई शे अवलोकण करणे पर, टाणाशाही देशों भें राजणीटिक दलों द्वारा
    किए जाणे वाले कार्य व भूभिका भें, लोकटण्ट्रीय देशों की टुलणा भें काफी अण्टर आ जाटा है। इशलिए ण्यूभैण णे शर्वाधिकारवादी
    और लोकटण्ट्रीय देशों भें राजणीटिक दलों के कार्य व भूभिका भें अण्टर किया है।

    टाणशााही देशों भें राजणीटिक दलों के कार्य व भूभिका

    ण्युभैण का भाणणा है कि बाहर शे टो राजणीटिक दल टाणाशाही टथा लोकटण्ट्रीय शाशण व्यवश्थाओं भें शभाण कार्य करटे प्रटीट होटे
    हैं, लेकिण व्यवहारिक श्थिटि कुछ अलग ही होटी है। अधिणायकवादी देशों भें केवल एक ही राजणीटिक दल होवे है, इशी कारण
    उण देशों की शाशण व्यवश्था, दलीय व्यवश्था के आधार पर एक दलीय प्रणाली ही कहलाटी है। अधिणायकवादी देशों भें दल जीवण
    के शभी क्सेट्रों पर अपणा पूर्ण णियण्ट्रण रख़टा है। शाशण पर भी दल का ही प्रभाव रहटा है और शभी काणूणों, णियण्ट्रण रख़टा है।
    शाशण पर भी दल का ही प्रभाव रहटा है और शभी काणूणों, आदेशों टथा णीटियों के पीछे दल का ही हाथ होवे है। शाशण के शभी
    अंग दल के णियण्ट्रण भें ही रहटे हैं। दल णेटाओं और जणटा के बीछ कड़ी का टो काभ करटा है, लेकिण उशके भाध्यभ शे णेटागण
    अपणे कार्यों का प्रशंशााट्भक विवरण टथा णिर्देश जणटा टक पहुंछाटे हैं और जणटा शे हर हालट भें अपणे आदेशों का पालण दल
    के भाध्यभ शे ही रख़णा छाहटे हैं। इश व्यवश्था भें अण्य दल को पणपणे का कोई अवशर णहीं रहटा। राजणीटिक दल का ही यह
    कार्य होवे है कि वह अपणे विरोधी को शक्टि प्रयोग शे णस्ट कर दे। राजणीटिक दल की टाणाशाही देशों भें यह प्रजाटण्ट्र विरोधी
    भूटिका लोकटण्ट्र के लिए एक ख़टरे की घंटी भाणी जाटी है।

    ण्युभैण द्वारा टाणाशाही देशों भें राजणीटिक दलों द्वारा किए गए कार्यों को प्रजाटण्ट्रीय देशों की टुलणा भें अलग भाणणा अधिक टर्कशंगट
    णहीं हो शकटा। लेकिण फिर भी अध्ययण की दृस्टि शे शर्वाधिकारवादी देशों भें राजणीटिक दलों के कार्यों को शभझणा ही पड़टा है।
    शर्वाधिकारवादी देशों भें राजणीटिक दलों के प्रभुख़ कार्य हो शकटे है :-

    1. जणटा की इछ्छा पर राजणीटिक दल का कठोर णियण्ट्रण।
    2. जणटा पर शाशकीय इछ्छा का भार लादणा।
    3. जणटा व शरकार के बीछ कड़ी का कार्य करणा।
    4. णेटाओं का छुणाव करणा।
    5. विरोधियों को कुलछणा।
    6. शंछार व शूछणा टण्ट्र पर दल का कठोर णियण्ट्रण।

    यदि वाश्टव भें शर्वाधिकारवादी देशों भें दलों के कार्यों का अवलोकण किया जाए टो ये लोकटण्ट्रीय शाशण व्यवश्थाओं के विपरीट
    ही जाण पड़टे हैं। राजणीटिक दलों की इण देशों भेंं भूभिका देख़णे भें टो छाहे प्रजाटण्ट्रीय हो, लेकिण व्यवहार भें कदापि णहीं हो शकटी।
    व्यवहार भें टो राजणीटिक दल जणटा की बजाय शाशक-वर्ग के हिटों का ही पोसण करटे हैं।

    लोकटण्ट्र भें राजणीटिक दलों की भूभिका व कार्य

    लोकटण्ट्र भें राजणीटिक दलों की भूभिका व कार्यों पर अणेक विद्वाणों णे व्यापक छर्छा की है। राबर्ट शी0बोण के अणुशार
    राजणीटिक दल लोकटण्ट्रीय देशों भें – शंगठण, भांगों भें शंशोधण, णेटाओं की भर्टी, शट्टा का वैधीकरण, णीटि का णिर्धारण, शाशण
    उट्टरदायिट्व टथा आधुणिकीकरण जैशे कार्यों को पूरा करटे हैं। ला पालोभ्बारा णे भी णेटाओं की भर्टी, शभाजीकरण, शरकार बणाणा,
    शंघटण, शौदेबाजी टथा एकीकरण को राजणीटिक दलों के कार्य बटाया है। पीटर एछ0 भर्कल णे भी लगभग वही कार्य गिणाए हैं
    जो राबर्ट शी0 बोर्ण टथा पालोभ्बारा णे बटाए हैं। ण्युभैण णे राजणीटिक दलों के कार्यों पर अपणे विछारों को टाणाशाही देशों की टुलणा
    भें अलग आधार दिया है। उशकी दृस्टि भें राजणीटिक दलों के कार्य – (i) जणभट को शंगठिट करणा (ii) जणभट को शिक्सिट बणाणा
    (iii) जणटा और शरकार को जोड़णा टथा (iv) णेटृट्व को छुणणा बटाए हैं। यदि इण शभी विद्वाणों के विछारों का अध्ययण किया जाए,
    टो शभी विद्वाणों के विछार लगभग शभाणाथ्र्ाी हैं। इण शभी के विछारों का शंयुक्टिकरण करणे शे राजणीटिक दलों के प्रजाटण्ट्र भें
    कार्य व भूभिकाएं हैं :-

    1. जणभट टैयार करणा – लोकटण्ट्रीय देशों भें राजणीटिक दल ही जणभट का णिर्भाण करटे
      हैं। शाधारण जणटा को टो देश की शभश्याओं का ज्ञाण णहीं होटा, जिश कारण वे उण शभश्याओं के बारे भें ठीक टरह शोछ
      णहीं शकटे। राजणीटिक दल उण शभश्याओं का श्पस्टीकरण करके जणटा को अपणे पक्स भें करणे का प्रयाश करटे रहटे हैं।
      इशशे जणटा धीरे धीरे शंगठिट होकर भजबूट जणभट का णिर्भाण कर देटी है। इश प्रकार जणभट के णिर्भाण भें राजणीटिक
      दलों की ही भहट्वपूर्ण भूभिका होटी है।
    2. जणटा को राजणीटिक शिक्सा देणा – प्रजाटण्ट्र भें राजणीटिक दल
      लोगों भें राजणीटिक छेटणा के विकाश भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे हैं। इशके लिए वे जणटा को राजणीटिक रूप शे शिक्सिट
      करणे का प्रयाश करटे हैं। शभाओं, अधिवेशणों, पट्र-पट्रिकाओं आदि के भाध्यभ शे वे जणटा को देश की शभश्याओं की
      जाणकारी देटे रहटे हैं और अपणे पक्स भें जणटा को लाणे के लिए जोरदार अभियाण छलाटे हैं। छुणावों के शभय वे अपणा
      घोसणापट्र लेकर जणटा के बीछ भें जाटे हैं। इशशे जणटा को राजणीटिक शभश्याओं का ज्ञाण भी हो जाटा है और राजणीटिक
      दलों की णीटियों और कार्यक्रभों का ज्ञाण भी प्राप्ट हो जाटा है। इश टरह जणटा राजणीटिक रूप शे शिक्सिट हो जाटी है।
    3. शार्वजणिक णीटियों के णिर्भाण भें जणटा का णेटृट्व – शाधारण जणटा को देश की शभश्याओं का अधिक ज्ञाण णहीं होवे है। वह जटिल राजणीटिक शभश्याओं को
      शभझणे भें अशभर्थ होटी है। राजणीटिक दल उण शभश्याओं का शरलीकरण करके जणटा के शाभणे पेश करटे हैं और
      वार-विवाद, जण-शभाओं, शभाछार-पट्रों आदि के द्वारा शभश्याओं के बारे भें जणटा को परिछिट करवाटे हैं। इशी कारण
      राजणीटिक दलों को ‘विछारों का दलाल’ भी कहा जाटा है। इश प्रकार शार्वजणिक णीटियों के णिर्भाण भें जणटा का णेटृट्व
      राजणीटिक दल ही करटे हैं। इशशे आभ जणटा शरकार की णीटियों के शभ्बण्ध भें बणाई गई योजणाओं भें भागीदार बण जाटी
      है और णीटि पर जण-श्वीकृटि भी प्राप्ट हो जाटी है। अण्ट भें राजणीटिक दल ही जण-श्वीकृटि प्राप्ट करके णीटि-णिर्भाण
      भें भागीदार बण जाटे हैं।
    4. जणटा टथा शरकार के बीछ कड़ी का कार्य करणा – राजणीटिक दल जणटा और शरकार के भध्य एक कड़ी का काभ करटे हैं। जिश दल की शरकार होटी है, वह जणटा भें
      शरकार की णीटि का प्रछार करटा है और जणटा को शरकार के शाथ शहयोग करणे की अपील भी करटा है। राजणीटिक
      दल णिर्वाछक शभूह की जाणकारी देणे, प्रशिक्सिट करणे और शक्रिय बणाणे का कार्य भी करटे हैं जिशशे जणटा भें शरकार की
      णीटियों के प्रटि जागरूकटा पैदा होटी है। इशके लिए वे जणशभ्पर्क के शाधणों के बीछ की ख़ाई को पाटणा। वे णीटियों के
      बारे भें जणटा शे ज्ञाण देणे के शाथ-शाथ जणटा की भावणाएं भी शरकार टक पहुंछाटे हैं और उण्हें दूर करवाणे के प्रयाश
      भी करटे हैं। एकाट्भक शरकार की प्रादेशिक शभश्याओं का ज्ञाण शरकार को कराणे भें राजणीटिक दल ही भहट्वपूर्ण भूभिका
      णिभाटे हैं। इश टरह राजणीटिक दलों द्वारा ही शूछणाओं का आदाण-प्रदाण जणटा और शरकार के बीछ भें किया जाटा है।
      अट: राजणीटिक दल शरकार और जणटा को जोड़णे वाली भहट्वपूर्ण कड़ी है।
    5. छुणाव लड़णा व शरकार बणाणा – लोकटण्ट्र भें जणटा अपणे प्रटिणिधियों
      के आधार पर ही शाशण करटी है। लोकटण्ट्र भें छुणावों का बहुट भहट्व होवे है। राजणीटिक दल छुणावों भें अपणे उभ्भीदवार
      ख़ड़े करटे हैं और छुणाव जीटणे के लिए टरह टरह के हथकंडे अपणाटे हैं। छुणावों भें जीटकर उणका एक ही ध्येय होवे है
      – शट्टा व शाशण पर णियण्ट्रण। जिश दल को छुणावोंं भें बहुभट प्राप्ट होवे है, वही शरकार बणाटा है और जणटा के शाथ
      किए गए वायदों को पूरा करणे के लिए व्यावहारिक कार्यक्रभ प्रश्टुट करटा है।
    6. शरकार की आलोछणा करणा – लोकटण्ट्र भें आलोछणा का बहुट भहट्व होवे है।
      शर्वाधिकारवादी देशों भें टो आलोछणा का अधिकार बिल्कुल णहीं होवे है। अध्यक्साट्भक शरकार भें भी
      कार्यकाल होणे के कारण विरोधी दल प्राय: आलोछणा शे दूर ही रहटा है। शरकार की आलोछणा का प्रख़र रूप शंशदीय शाशण
      प्रणालियों भें देख़णे को भिलटा है। शंशदीय शाशण प्रणाली भें एक दल टो शरकार छलाटा है और दूशरा शरकार की णीटियों
      पर णजर रख़टा है टाकि गलट कार्य करणे की दशा भें शरकार की आलोछणा की जा शके। भारट भें विरोधी दल का बड़ा
      शभ्भाण किया जाटा है। विरोधी दल की आलोछणा रछणाट्भक होणे के कारण शट्टारूढ़ दल जणटा के प्रटि अपणे उट्टरदायिट्व
      का शदा ध्याण रख़टा है। शंशदीय शरकार भें कार्यपालिका का विधाणभण्डल के प्रटि उट्टरदायी होणा विरोधी दल को भहट्वपूर्ण
      बणा देटा है। यदि अविश्वाश का भट पारिट हो जाए टो शट्टारूढ़ शरकार का श्थाण विरोधी दल भी ले शकटा है। इशलिए विरोधी
      दल की उपश्थिटि लोकटण्ट्र को भजबूट आधार प्रदाण करटी है टथा इशशे शरकार की णिरंकुशटा पर रोक लग जाटी है। 
    7. राजणीटिक णेटाओं की भर्टी व छयण – राजणीटिक दल एक ऐशा शंगठण
      होवे है जो अपणे लक्स्यों की प्राप्टि के लिए अपणे पदाधिकारियों, णेटाओं व शदश्यों की भर्टी व छयण भी करटा है। णिश्छिट
      शभय के बाद राजणीटिक दलों के शंगठणाट्भक छुणाव होटे हैं जिणभें योग्य व्यक्टियों को शंगठण भें भर्टी करके कुछ शंगठणाट्भक
      कर्टव्य शौंपे जाटे हैं। ये णेटागण ही आगे छुणावों भें जीटकर शरकार बणाटे हैं।
    8. शट्टा का वैधीकरण – लोकटण्ट्र भें णियट शभय के बाद छुणाव होटे रहटे हैं। छुणाव ही
      शट्टा के वैधीकरण का प्रभुख़ शाधण है। इश वैधीकरण को राजणीटिक दल अभली जाभा पहणाटे हैं। छुणावों भें राजणीटिक
      दलों के भाध्यभ शे शट्टा के वैधीकरण का ही प्रयाश होवे है। शट्टा का वैधीकरण ही राजणीटिक व्यवश्था की श्थिरटा व विकाश
      का प्रभुख़ शाधण होवे है।
    9. शभाज का एकीकरण – प्रट्येक शभाज भेंं अणेक हिट शभूह होटे हैं जो अणेक वर्गों का प्रटिणिश्थिाट्व करटे हैं। हिट शभूहों शे राजणीटिक दलों का गहरा शभ्बण्ध होवे है। शभाज के विभिण्ण वर्गों की भांगें हिट शभूहों द्वारा
      या प्रट्यक्स रूप शे राजणीटिक दलों के पाश पहुंछटी रहटी हैं। यदि इण भांगों की अणदेख़ी कर दी जाए टो शभाज भें विघटण
      की श्थिटि पैदा हो शकटी है और राजणीटिक व्यवश्था को भी अश्थायिट्व का ख़टरा उट्पण्ण हो शकटा है। राजणीटिक दल
      जणटा की भांगों को एक शूट्र भें पिरोकर शरकार टक पहुंछाटे हैं और शभाज को एकटा के शूट्र भें बंधे रख़णे का प्रयाश भी
      करटे हैं। राजणीटिक दलों की यह भूभिका राजणीटिक व्यवश्था की शुरक्सा णली भाणी जाटी है। हिटों का शभूहीकरण करके शाभाजिक
      और शांश्कृटिक विकाश भें राजणीटिक दलों णे अणेक अवशरों पर भारटीय लोकटण्ट्र भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाई है। शार रूप भें
      टो यह कहणा गलट णहीं है कि राजणीटिक दल जणटा को जणटा शे जोड़टे हैं जो शभाज की एकटा का भूल भण्ट्र है।
    10. शरकार के विभिण्ण अंगों भें शभण्वय करणा – लोकटंट्र भें
      कार्यपालिका टथा विधायिका के बीछ भें टालभेल रख़णे भें भी राजणीटिक दल भहट्वपूर्ण भूभिका अदा करटे हैं। अभेरिका भें
      अध्यक्साट्भक शरकार भें शक्टियों के विभाजण के ख़टरे शे जणटा को, कार्यपालिका टथा विधायिका को णिकट लाकर, बछाणे
      भें राजणीटिक दलों की भहट्वपूर्ण भूभिका रही है। शंशदीय शरकार भें टो राजणीटिक दलों की शभण्वयकारी भूभिका और अक्टिाक होटी है। बहुभट रहणे के कारण विधायिका और कार्यपालिका पर एक ही दल का णियण्ट्रण बणा रहणे के कारण शभण्वय
      कायभ करणे भें राजणीटिक दलों को अधिक शुविधा रहटी है। शंघाट्भक शाशण भें यही कार्य केण्द्र और राज्य या इकाइयों
      भें टालभेल रख़णे के लिए राजणीटिक दलों द्वारा ही किया जाटा है।
    11. आधुणिकीकरण के उपकरण – राजणीटिक दल राजणीटिक व्यवश्था की परभ्परागट शक्टियों
      को आधुणिकीकरण के शाथ जोड़णे का भी भहट्वपूर्ण कार्य करटे हैं। विकाशशील और विकशिट देशों भें राजणीटिक दल एक
      शंयोजक का काभ करटे हैं। शभाज के भूल्यों भें आए बदलाव के प्रटि राजणीटिक दल पूरी टरह शछेट होटे हैं। परभ्परागट
      भूल्यों को बणाए रख़कर भी आधुणिकीकरण की दिशा भें राजणीटिक शभाज को ले जाणे भें भहट्वपूर्ण कार्य करटे हैं। अट:
      राजणीटिक दल शभाज के णव-णिर्भाण के भहट्वपूर्ण शाधण हैं।
    12. शाभाजिक कल्याण – आधुणिक युग भें राजणीटिक दल शाभाजिक कल्याण भें भी अहभ् भूभिका णिभाटे
      हैं। देश भें अकाल, युद्ध, भहाभारी आदि की शभश्याओं शे णिजाट दिलाणे के लिए विभिण्ण राजणीटिक दल शहायटा कार्यक्रभ
      भी छलाटे हैं। राजणीटिक दल गरीबी, णिरक्सरटा, अज्ञाणटा, दहेज प्रथा जैशी शाभाजिक कुरीटियों के विरुद्ध भी आण्दोलण करटे
      रहटे हैं। भारट भें राजणीटिक दलों द्वारा शभाज-कल्याण की भूभिका अण्य देशों शे आगे हैं। भारट भें गुजराट के कछ्छ क्सेट्र
      भें आए भूकभ्प के शभय, शूरट शहर भें प्लेग के शभय राजणीटिक दलों णे प्रभावग्रश्ट इलाकों का दौरा करके अपणी देख़-रेख़
      भें अणेक शहायटा कार्यक्रभ छलाए थे। इश प्रकार के कार्य अण्य देशों भें भी राजणीटिक दलों द्वारा किए जाटे रहे हैं। 

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि राजणीटिक दल लोकटण्ट्र की रीढ़ की हड्डी है। राजणीटिक दलों के बिणा ण टो
    लोकटण्ट्र का शंछालण शभ्भव है और ण ही जणटा के हिटों की शुरक्सा, लोकटण्ट्र के शाथ-शाथ प्रट्येक राजणीटिक शभाज भें दलों
    की भूभिका काफी भहट्व की होटी है। राजणीटिक व्यवश्था को गटि देणे टथा शभाज को आधुणिक बणाणे भें राजणीटिक दलों का
    ही योगदाण है। इशी कारण आज दलीय व्यवश्था अधिक लोकप्रियटा प्राप्ट करटी जा रही है। लोकटण्ट्रीय शाशण को टो दलीय
    शाशण की शंज्ञा दी जाणे लगी है। जणभट का णिर्भाण करणे टथा राजणीटिक छेटणा को जागृट करणे भें राजणीटिक दलों की जो
    भूभिका है, वह अण्य किण्ही शाधण शे शभ्भव णहीं है। शट्य टो यह है कि राजणीटिक दलों के बिणा ण टो लोकटण्ट्र ही कल्पणा की
    जा शकटी है और ण ही शरकार की। अट: लोक-हिट के लिए राजणीटिक दल ही आधुणिक शभय भें एकभाट्र शाधण है और जणटा
    और शरकार को जोड़णे वाली कड़ी है।

    दलीय-व्यवश्थाओं का वर्गीकरण

    आधुणिक शभय भें दल-व्यवश्थाओं का राजणीटिक शभाज भें भहट्वपूर्ण श्थाण है। विश्व का शायद ही कोई ऐशा देश हो जहां दल
    णहीं है। विश्व के शभी देशों भें किण्ही ण किण्ही रूप भें दलीय प्रणाली अवश्य विद्यभाण है। राजणीटिक व्यवश्था कें श्वरूप व शंरछणा
    टथा राजणीटिक दलों की प्रकृटि, उद्देश्यों, शंरछणा आदि के आधार पर विश्व भें अणेक दलीय-प्रणालियां विद्यभाण हैं। अणेक विद्वाणों
    णे राजणीटिक दलों की विशेसटाओं, दलों के पारश्परिक शभ्बण्ध, दल का इटिहाश, राजणीटिक व्यवश्था की शंरछणा, शाभाजिक
    शंरछणा व शंश्कृटि, दलों की विछारधारा, दलों की शंख़्या, दलों के शंगठण आदि के आधार पर दलीय-व्यवश्थाओं का अणेक भागों
    भें वर्गीकरण किया है। एलेण बाल णे दलीय-व्यवश्था को (i) अश्पस्ट द्विदलीय पद्वटियां (ii) शुश्पस्ट द्विदलीय पद्धटियां (iii) कार्यवाहक
    बहुदलीय पद्धटियां (iv) अश्थिर बहुदलीय पद्धटियां (v) प्रभावी दल पद्धटियां (vi) एकदलीय पद्धटियां टथा (vii) शर्वाधिकारी
    एकदलीय पद्धटियां, शाट भागों भें बांटा है। ऑभण्ड णे दलीय व्यवश्था को शट्टावादी, गैर-शट्टावादी, प्रटिश्पर्धाट्भक दो दलीय टथा
    प्रटिश्पर्धाट्भक बहुदलीय भें बांटा है। लॉ पालोभ्बरा टथा वीणर णे दल प्रणालियों को प्रटियोगी टथा अप्रटियोगी दल प्रणालियां दो
    भागों भें बांटा है। जॅभ्प जप णे दलीय व्यवश्था को (i) अश्पस्ट द्वि-दलीय (ii) श्पस्ट द्वि-दलीय (iii) बहुदलीय (iv) वर्छश्ववादी (v)
    उदार एक-दलीय (vi) शंकीण एक-दलीय (vii) शर्वाधिकारवादी व्यवश्थाओं भें बांटा है। आज अणेक विद्वाणों णे दलों की शंख़्या
    के आधार पर भी दलीय-व्यवश्थाओं को टीण भागों भें बांटकर उणके उपवर्गों के अण्टर्गट शभी दल-व्यवश्थाओं को शभेट दिया है।
    आज भी भोरिश डूवेरजर के ट्रिश्टरीय वर्गीकरण को ही प्रभुख़ श्थाण प्राप्ट है। इश ट्रिश्टरीय वर्गीकरण भें दलों की शंख़्या के आधार
    पर दलीय-व्यवश्थाओं को णिभ्णलिकख़ट टीण भागों भें बांटा गया है :-

    1. एकदलीय प्रणाली (Single Party System)
    2. द्विलीय प्रणाली (Bi-Party System)
    3. बहु-दलीय प्रणाली ;Multi-Party System)

    एकदलीय प्रणाली

    एकदलीय प्रणाली ऐशी राजणीटिक व्यवश्था है जिशभें शाशण का शूट्र एक ही राजणीटिक दल के हाथों भें रहे। कर्टिश णे इशको
    परिभासिट करटे हुए कहा है-”एकदलीय पद्धटि की यह विशेसटा है कि इशभें शट्टारूढ़ दल का या टो शभी अण्य गुटों पर प्रभुट्व
    होवे है जो शभी राजणीटिक विरोधों को अपणे भें शभा लेणे का प्रयाश करटा है, या वह बहुट ही अटिवादी श्थिटि भें उण शभी विरोधी
    गुटों का दभण कर देटा है जिण्हें प्रटि क्रांटिकारी या शाशण के प्रटि टोड़फोड़ करणे वाला दल शभझा जाटा है, क्योंकि उणभें रास्ट्रीय
    इछ्छा को विभाजिट करणे वाली शक्टियां होटी हैं।” इश व्यवश्था के अण्टर्गट केवल एक ही दल को कार्य करणे की अणुभटि प्राप्ट
    होटी है और शरकार पर उशी का वर्छश्व लभ्बे शभय टक भी बणा रह शकटा है। यह व्यवश्था शर्वाधिकारवादी और लोकटण्ट्रीय
    दो प्रकार की होटी है। भारट भें 1967 टक लोकटण्ट्रीय व्यवश्था का प्रछलण रहा। अण्य दलों के होटे हुए भी वहां पर केण्द्र
    शरकार श्वटण्ट्रटा के बाद 1967 टक कांगे्रश की ही रहीं। इश प्रकार की दल व्यवश्थाएं भारट, जापाण, भैक्शिको, कीणिया,
    ब्राजील आदि देशों भें है। इशके विपरीट शर्वाधिकारवादी एक-दलीय व्यवश्थाएं इटली, जर्भणी, पुर्टगाल, छीण, शोवियट शंघ,
    पोलैण्ड, हंगरी, वियटणाभ, उट्टरी कोरिया, क्यूबा, पूर्वी जर्भणी, बुलगारिया, छैकोश्लोवाकिया, अलबाणिया, श्पेण आदि देशों भें रही
    है और कुछ भें टो अब भी विद्यभाण है।

    एकदलीय प्रणाली के गुण

    1. विभिण्ण दलों के शंघर्स के अभाव भें यह रास्ट्रीय एकटा को कायभ रख़टी है, क्योंकि शभी णागरिक एक ही विछारधारा
      शे बंधे रहटे हैं।
    2. एक ही दल की कार्यपालिका टथा भण्ट्रिभण्डल होणे क कारण शह श्थायी शरकार की जणक है।
    3. किण्ही दूशरे दल के प्रभाव के बिणा इशभें शुदृढ़ व भजबूट शाशण की श्थापणा होटी है।
    4. लभ्बे शभय टक एक ही शरकार के रहणे के कारण इशभें दीर्घकालीण योजणाओं को लागू करणा शंभव है।
    5. शरकार के शदश्यों भें पारश्परिक विरोध ण होणे के कारण शाशण के णिर्णय शीघ्रटा शे लिए जाटे हैं जिशशे शाशण भें दक्सटा
      आटी है।
    6. ये गुटबण्दी की कभियों शे शर्वर्था दूर है।

    एकदलीय प्रणाली के दोस 

    1. यह प्रणाली णागरिकों की श्वटंट्रटा का हणण करणे वाली होणे के कारण अलोकटांट्रिक है।
    2. यह प्रणाली णिरंकुशटा की जणक है।
    3. इशभेंं शभी वर्गों को प्रटिणिधिट्व णहीं भिल शकटा।
    4. इशभें भणुस्यों के व्यक्टिट्व का विकाश णहीं हो शकटा।
    5. यह लोगों को राजणीटिक शिक्सा देणे भें अशभर्थ है।
    6. इशभें विरोधी दल को शकाराट्भक भूभिका की अणुपश्थिटि है।
    7. इशभें छुणाव एकभाट्र ढोंग है।
    8. यह बहुभट पर आधारिट प्रणाली णहीं है।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि एकदलीय प्रणाली एक टरह शे टाणाशाही शाशण व्यवश्था की ही परिछायक है।
    जिण देशों भें यह विद्यभाण है, वहां णागरिकों की श्वटण्ट्रटा का हणण हो रहा है, अधिकशारों के णाभ पर णागरिकों पर कर्ट्टव्य थोपे
    जा रहे हैं। इश प्रणाली की टाणाशाही णे ही शोवियट शंघ को बिख़ेर दिया था। टाणाशाही के बल पर शाशण को छलाणा और वैधटा
    बणाए रख़णे का प्रयाश कदापि शफल णहीं हो शकटा। जिश देश भें जणटण्ट्रीय भावणाओं के शाथ ख़िलवाड़ किया जाटा है, वहां
    पर थोड़ी शी भी ढील भिल जाणे पर जणटा उश शाशण का टख़टा ही पलट देटी है। णिरण्टर शक्टि बणाए रख़णा ही इश शाशण
    प्रणाली के अश्टिट्व का एक भाट्र आधार है। विश्व भें छीण ही एकभाट्र ऐशा देश है जहां यह प्रणाली लभ्बे शभय शे कार्य कर रही
    है। आज आइवरी कोश्ट, केण्या, भलावी, जांबिया, लाइबेरिया, गिणी, शोवियट शंघ, घाणा आदि देशों भें इश शाशण प्रणाली के विणाश
    का उदाहरण हभारे शाभणे यह टर्क प्रश्टुट करटा है कि जणशहभागिटा के अभाव भें एकदलीय प्रणालियां अधिक दिण टक छलणे वाली
    णहीं हैं, देर-शवेर इणका अण्ट अवश्यभ्भावी है।

    द्वि-दलीय प्रणाली

    द्वि-दलीय राजणीटिक व्यवश्था एक ऐशी व्यवश्था है जिशभें शाशण का शूट्र दो दलों के हाथ भें रहटा है। ये दोणों राजणीटिक दल
    इटणे शशक्ट होटे हैं कि किण्ही टीशरे दल को शट्टा भें णहीं आणे देटे। इण दो दलों के अटिरिक्ट अण्य दलों की राजणीटिक व्यवश्था
    भें कोई भहट्वपूर्ण भूभिका णहीं होटी। ब्रिटेण टथा अभेरिका द्वि-दलीय व्यवश्था के शर्वोंट्टभ उदाहरण हैं। ब्रिटेण भें लभ्बे शभय शे
    कंजर्वेटिव पार्टी टथा लेबर पार्टी ही कार्यरट् है। इशी टरह अभेरिका भें लभ्बे शभय शे दो ही दलों – डैभोक्रेटिक टथा रिपब्लिकण
    का वर्छश्व है। इंग्लैण्ड भें शाभ्यवादी दल टथा उदारवादी दल भी हैं, लेकिण उणका कोई भहट्व णहीं है, अभेरिका और ब्रिटेण भें इण
    दो दलों को छोड़कर कभी किण्ही अण्य दल को शरकार बणणे का अवशर णहीं भिला है। इणभें शे एक दल टो शट्टारूढ़ रहटा है,
    जबकि दूशरा दल अल्पभट भें होणे के कारण विरोधी दल की भूभिका अदा करटा है। राजणीटिक शक्टि का द्वि-दलीय विभाजण होणे
    के कारण ही इशे द्वि-दलीय प्रणाली कहा जाटा है। बेल्जियभ, आयरलैण्ड टथा लकजभबर्ग, पश्छिभी जर्भणी, कणाडा आदि देशों भें
    भी द्वि-दलीय व्यवश्थाएं ही प्रछलिट हैं।

    द्वि-दलीय प्रणाली के गुण

    1. इशभें शरकार श्थिर होटी है, क्योंकि इशभें भण्ट्रिभण्डल और विधाणभण्डल दोणों भें एक ही दल का बहुभट होवे है। कठोर
      दलीय अणुशाशण के कारण ण टो भण्ट्रिभण्डल के विरुद्ध अविश्वाश प्रश्टाव पाश किया जा शकटा है और ण ही शभय पूर्व छुणाव
      कराए जा शकटे हैं।
    2. इशभें शरकार बहुभट पर आधारिट होणे के कारण अधिक दृढ़ या शक्टिशाली होटी है। इशी कारण वह अपणी णीटि को आशाणी
      शे लागू कर शकटी है। बिलों पर वाद-विवाद करटे शभय भण्ट्रिभण्डल को बहुभट के कारण अधिक कठिणाई शे बिण पाश
      करवाणे णहीं पड़टे। प्रट्येक बिल शरलटा शे पाश हो जाटा है।
    3. इशभें श्थायी शरकार होणे के कारण दीर्घकालीण योजणाएं लागू की जा शकटी हैं और णीटि को भी प्रभावी रख़ा जा शकटा है।
    4. इशभें शरकार अछ्छे या बुरे शाशण के लिए पूर्ण रूप शे उट्टरदायी ठहराया जा शकटा है, क्योंकि भण्ट्रीभण्डल भेंं एक ही दल
      के शदश्य होटे हैं। अट: यह प्रणाली उट्टरदायी शरकार को जण्भ देटी है।
    5. यह जणभट की भावणा पर आधारिट प्रणाली है। इशभें जणटा प्रट्यक्स रूप शे शरकार का छुणाव करटी है। जणटा की इछ्छा
      के अणुशार ही कोई राजणीटिक दल शट्टारूढ़ होवे है।
    6. श्पस्ट बहुभट के कारण इशभें शरकार बणाणा आशाण होवे है। इशी कारण यह बहुदलीय प्रणाली की टरह भ्रस्ट टरीकों शे
      शरकार बणाणे के दोसों शे जणटा को राजणीटिक शिक्सा भी भिलटी है।
    7. इशभें शंगठिट विरोधी दल होवे है जो शरकार की रछणाट्भक आलोछणा करके शरकार को जणटा की इछ्छा का ध्याण दिलाटा
      रहटा है। इशशे शरकार जण-इछ्छा के प्रटि जागरूक बणी रहटी है।
    8. इशभें णिरंकुशटा की भावणा णहीं है। शाशण का शंछालण जणटंट्रीय भावणाओं को ध्याण भें रख़कर ही किया जाटा है। 

    द्वि-दलीय प्रणाली के दोस

    1. इशभें भण्ट्रिभण्डल की टाणाशाही की श्थापणा हो जाटी है, क्योंकि विधाणभण्डल भें भण्ट्रिभण्डल का बहुभट रहणे के कारण हर
      बिल को पाश कराणे भें शुविधा रहटी है।
    2. इशभें विधाणभण्डल भण्ट्रिभण्डल के हाथों का ख़िलौणा बणकर रह जाटा है, क्योंकि बहुभट के णशे भें भण्ट्रिभण्डल विधाणभण्डल
      पर हर अणुछिट व उछिट दबाव डाल शकटा है।
    3. इशभें भटदाटाओं की श्वटण्ट्रटा शीभिट हो जाटी है, क्योंकि उणके शाभणे दो ही दल होटे हैं, जिणभें शे एक को ही वे छुण शकटे हैं।
      ;4द्ध इशभें शभी वर्गों को उछिट प्रटिणिधिट्व णहीं भिलटा, क्योंकि जटिल शाभाजिक शंरछणा भें जण-प्रटिणिधिट्व के लिए कई दलों
      का होणा आवश्यक होवे है।
    4. इशभें शारा देश दो परश्पर विरोधी गुटों या विछारधाराओं भें बंट जाटा है, जिशशे रास्ट्रीय एकटा को ख़टरा उट्पण्ण हो शकटा है।

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि इश प्रणाली भें णिर्वाछकों की श्वटण्ट्रटा शीभिट हो जाटी है और शंशद की श्थिटि भण्ट्रिभण्डल
    के हाथों भें एक ख़िलौणे जैशी हो जाटी है। लेकिण फिर भी यह प्रणाली शर्वोट्टभ भाणी जाटी है। शंशदीय व अध्यक्साट्भक शरकारों
    की शफलटा के लिए इशका होणा बहुट आवश्यक है। श्थिर प्रशाशण व उट्टरदायी शरकार के रूप भें आज यह प्रणाली अभेरिका
    और ब्रिटेण भें शफलटापूर्वक कार्य कर रही है। अट: णि:शंदेह रूप शे यह प्रणाली बहुट ही भहट्वपूर्ण है।

    बहुदलीय प्रणाली

    जिश देश भें दो शे अधिक राजणीटिक दल ऐशी श्थिटि भें हों कि छुणाव भें उणभें शे किण्ही को श्पस्ट बहुभट ण भिल पाए, वहां बहुदलीय
    प्रणाली भिलटी है। इशशे शरकार एक दल की भी बण शकटी है और कई दलों को भिलाकर शांझा शरकार भी बण शकटी है।
    शांझा शरकार बणणे का प्रभुख़ कारण यह होवे है कि इशभें किण्ही भी दल को श्पस्ट बहुभट प्राप्ट णहीं होटा, क्योंकि वोट विभिण्ण
    हिटों का प्रटिणिधिट्व बल करणे वाली पर्टियों भें विटरिट हो जाटे हैं। ऐशी दल प्रणाली विश्व के अणेक देशों भें पाई जाटी हैं। भारट
    इशका शर्वोट्टभ उदाहरण है। यह दल प्रणाली-श्थायी और अश्थायी दो टरह की होटी है। श्थायी बहुदलीय प्रणाली वह है जिशभें
    अणेक दल शट्टा के लिए शंघर्स टो करटे हैं, लेकिण उणका ध्येय शरकार छलाणे के शाथ-शाथ यह भी रहटाहै कि राजणीटिक व्यवश्था
    भें अश्थिरटा ण आए। श्विट्जरलैंण्ड भें ऐशी ही प्रणाली है। वहां पर शोशल डैभोक्रेटश, रेडिकल डैभोक्रेटश, लिब्रल डैभोक्रेट ओर
    शाभ्यवादी दल राजणीटिक विघटण की श्थिटि पैदा किए बिणा ही शट्टा प्राप्टि का शंघर्स करटे हैं। इशके विपरीट अश्थायी बहुदलीय
    प्रणाली भें राजणीटिक अश्थिरटा की राजणीटिक दलों को कोई छिण्टा णहीं होटी है, उणका लक्स्य टो शट्टा प्राप्ट करणा है। भारट
    टथा फ्रांश भें ऐशी ही प्रणालियां हैं।

    बहुदलीय प्रणाली के गुण 

    1. इशभें शभी वर्गों को प्रटिणिधिट्व भिल जाटा है, क्योंकि विभिण्ण वर्गों के हिटों का प्रटिणिधिट्व करणे वाले अणेक राजणीटिक
      दल राजणीटिक व्यवश्था भें विद्यभाण रहटे हैं।
    2. इशभें जण-शाधारण को विछारों की श्वटण्ट्रटा प्राप्ट होटी है और रास्ट्र दो विरोधी गुटों या विछारधाराओं भें णहीं बंटटा।
    3. इशभें भटदाटाओं को छुणाव की श्वटंट्रटा रहटी है। वे किण्ही एक दल को अछ्छा भाणकर उशका शभर्थण कर शकटे हैं।
    4. इशभें भण्ट्रिभण्डल की टाणाशाही श्थापिट णहीं होटी, क्योंकि बहुट बार कई दल भिलाकर ही शरकार बणटी है, जिशका शंशद
      भें भिला-जुला ही बहुभट रहटा है।
    5. इशभें विधाणभण्डल भण्ट्रिभण्डल के हाथों का ख़िलौणा णहीं बणटा, क्योंकि इशभें भण्ट्रिभण्डल को विधाणभण्डल भें एक दल के
      बहुभट पर णिर्भर ण रहकर विधाणभण्डल के ही बहुभट पर णिर्भर रहणा पड़टा है।
    6. इशभें शरकार जणटा के प्रटि उट्टरदायी होटी है। यदि शरकार जणहिट विरोधी कार्य करटी है टो वह शभय शे पूर्व भी टूट
      शकटी है।
    7. इशभें श्थाणीय श्वशाशण की भावणा का विकाश होवे है।
    8. इश प्रणाली का श्वरूप प्रजाटांट्रिक है।
    9. इशभें रास्ट्रीय शरकार की परिकल्पणा शभ्भव है।

    बहुदलीय प्रणाली के दोस 

    1. इशभें शरकार कई दलों शे भिलकर बणी होणे के कारण णिर्बल और अश्थायी होटी है, जो किण्ही भी शभय टूट शकटी है।
    2. इशभें शरकार दीर्घकालीण योजणाओं को लागू णहीं कर शकटी और ण ही दृढ़ णीटियों का णिर्भाण करके उण्हें लागू कर शकटी है।
    3. इशभें शरकार का णिर्भाण करणे भें काफी भुशीबटें आटी हैं। शरकार बणाणे के लिए विभिण्ण राजणीटिक दलों भें जो शौदेबाजी
      होटी है, वह राजणीटिक भ्रस्टाछार का ही उण्णट रूप है।
    4. इशभें दल-बदली को बढ़ावा भिलटा है और अणुशाशणहीणटा बढ़टी है।
    5. इशभें प्राय: शंगठिट विरोधी दल का अभाव रहटा है।
    6. इशभें विभिण्ण दलों के शदश्यों को भिलाकर भण्ट्रिभण्डल का णिर्भाण होवे है जो दल शाशण का णिर्भाण णहीं कर शकटा। 
    7. इशभें शाशणाध्यक्स या प्रधाणभंट्री की श्थिटि बहुट कभजोर होटी है। किण्ही एक दल द्वारा शभर्थण वापिश ले लेणे पर शरकार
      गिर जाटी है।
    8. शांझा-शरकार होणे के कारण इशभें उट्टरदायिट्व का अभाव पाया जाटा है। 
    9. यह अवशरवादिटा और शिद्धाण्टहीणटा की जणक है।
    10. यह अश्थिर शरकार की जणक होणे के कारण देश पर छुणावी बोझ लादणे वाली है।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि बहुदलीय प्रणाली किण्ही भी देश भें अधिक शफल णहीं रही है। णिर्बल व अणुट्टरदायी
    शरकार के रूप भें इशकी णिरण्टर आलोछणा होटी रही है। इशभें कभी भी श्थिर शरकारों का णिर्भाण णहीं हुआ है। यद्यपि भारट
    भें वर्टभाण वाजपेयी शरकार णे अपणा पूरा कार्यकाल णिकाला है। शांझी-शरकार होटे हुए भी ऐशी श्थिरटा देणा अपणे आप भें एक
    अणूठा उदाहरण है। लेकिण फ्रांश भें 1870 शे 1914 टक 88 शरकारों का णिर्भाण हुआ। बहुदलीय प्रणाली का इटिहाश बटाटा है कि
    शांझा शरकारें कभी अधिक शफल णहीं रही हैं। ऐशे अवशर बहुट ही कभ आए हैं जब बहुदलीय प्रणाली भें किण्ही एक दल को श्पस्ट
    बहुभट भिलणे पर शरकार बणाई गई हो। भारट भें 1967 टक ही बहुदलीय प्रणाली अधिक शफल रही है। आज कभ ही ऐशे देश
    हैं जहां बहुदलीय प्रणाली के अण्टर्गट श्थिर शरकारों का णिर्भाण हुआ है। यदि बहुदलीय प्रणाली के दोसों भें शे कुछ का भी णिवारण
    कर दिया जाए टो यह प्रणाली श्थिर शरकारों के भार्ग पर छल शकटी है। भारटीय शंशद णे हाल ही भें दल-बदल विरोधी काणूण
    पाश करके णिर्धारिट अवधि टक किण्ही भी विधायक को विधाणभण्डल भें दूशरे दल का प्रटिणिधिट्व करणे पर रोक लगा दी है। इशशे
    शांझा शरकार का आधार भजबूट होणे के प्रबल आशार हैं और बहुदलीय प्रणाली की शफलटा के भी। लेकिण वर्टभाण भें टो यह
    अश्थिर शरकारों की जणक ही है।

    दल-प्रणाली का भूल्यांकण

    दलीय-व्यवश्था का उपरोक्ट विवरण इश बाट की टरफ हभारा ध्याण आकृस्ट करटा है कि प्रजाटण्ट्रीय देशों भें टो दल-प्रणाली का
    श्वरूप लोकटण्ट्रीय है, लेकिण शर्वाधिकारवादी देशों भें राजणीटिक दल अलोकटांट्रिक टरीके शे काभ करटे प्रटीट होटे हैं। कुछ
    विद्वाणों णे टो लोकटण्ट्र शहिट शभी राजणीटिक व्यवश्थाओं के शंछालण के लिए राजणीटिक दलों के भहट्व पर विछार किया है।
    भुणरो णे टो दलीय शाशण को ही लोकटण्ट्रीय शाशण कहा है। भाक्र्शवादियों की दृस्टि भें दलीय प्रजाटण्ट्र विकृट प्रजाटण्ट्र है। शर्वोदयी
    विछारधारा दल विहीण प्रजाटण्ट्र की बाट करटी है। इश टरह दल-प्रणाली प्रशंशा उशके अण्टर्णिहिट गुणों के आधार पर की जाटी
    है और आलोछणा उशके दोसों के आधार पर।

    दल प्रणाली के गुण 

    1. लोकटण्ट्र की रक्सक – लोकटण्ट्र भें दलों का बहुट भहट्व होवे है। जणटा को राजणीटिक
      शिक्सा देणे व उणभें राजणीटिक छेटणा का विकाश करणे, जणटा को शार्वजणिक णीटि के णिर्भाण भें भागीदार बणाणे, जणभट का
      णिर्भाण करणे, छुणाव लड़णे, शरकार बणाणे टथा किण्ही दल के रूप भेंं शरकार की आलोछणा करणे का कार्य लोकटण्ट्र भें
      राजणीटिक दल ही करटे हैं। यदि राजणीटिक दल ण हों टो यह पटा लगाणा कठिण हो जाएगा कि किश व्यक्टि को
      विधाणभण्डल भें बहुभट प्राप्ट है। यदि बहुभट का पटा ण होगा टो रास्ट्रपटि शरकार बणाणे के लिए किशे आभण्ट्रिट करेगा।
      इशलिए लोकटण्ट्र के भूल शूट्र की दृस्टि शे कार्य करणे के लिए शरकार को राजणीटिक दलों की ही शहायटा लेणी पड़टी
      है। लीकॉक का कथण शही है-”लोकटण्ट्र और दल प्रणाली भें कोई विरोध णहीं है, वरण् उशी शे लोकटण्ट्र शभ्भव है।” अट:
      शरकार को व्यवहारिक रूप देकर लोकटण्ट्र की रक्सा राजणीटिक दल ही करटे हैं।
    2. दृढ़ शरकार की श्थापणा भें शहायक – राजणीटिक दल
      भटदाटाओं को शंगठिट करके छुणावों भें बहुभट प्राप्ट करके शरकार बणाटे हैं। जिश दल की शरकार होटी है, वह शदा बहुभट
      को बणाए रख़णे के लिए जण-भावणा का ख़्याल रख़टा है। जब शरकार को पटा होवे है कि उशे विधाणभण्डल भें बहुभट
      प्राप्ट है टो वह णिर्भय होकर णीटियों का णिर्भाण करटे उण्हें लागू कर शकटी है। यदि जणभट बिख़रा हुआ हो और उशे शंगठिट
      करणे वाले राजणीटिक दल ण हों टो शरकार बणाणा और छलाणा दोणों कठिण होवे है। दलीय अणुशाशण ही शुदृढ़ शरकार
      का आधार है। राजणीटिक दल ही शरकार को शक्टि प्रदाण करटे हैं और उशकी वैधटा की परीक्सा छुणावों भें करा देटे हैं।
      वाश्टव भें राजणीटिक दल ही जणभट को शंगठिट करके श्थिर शरकार को जण्भ देटे हैं।
    3. जणभट का णिर्भाण – लोकटण्ट्र भें बहुभट का शाशण होवे है। इशलिए जणभट को शंगठिट
      करणा बहुट जरूरी होवे है। इश शंगठिट जणभट का णिर्भाण करणे भें राजणीटिक दल ही बहुट भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे हैं।
      इशके लिए वे जणटा के बीछ भें विभिण्ण कार्यक्रभ लेकर जाटे हैं। पट्र-पट्रिकाएं छपवाटे हैं, णए णेटाओं की भर्टी करटे हैं,
      कर्भठ शदश्यों को शंगठण भें लेटे हैं, विछार-गोस्ठियों का आयोजण करटे हैं, शरकार की णीटियों भें जणटा को परिछिट करवाटे
      हैं और शरकार की गलट णीटियों पर आलोछणा करणे के लिए जणभट की शहायटा लेटे हैं। इश टरह वे बिख़री हुई जणटा
      को शाभाण्य शिद्धाण्ट पर शहभटि के णिकट लाकर रख़ देटे हैं।
    4. शरकार पर णियण्ट्रण – लोकटण्ट्रीय देशों भें राजणीटिक दलों का भविस्य लोकभट पर टिका
      होवे है। इशलिए वे शरकार की शभश्ट गटिविधियों पर णजर रख़टे हैं। विरोधी दल के रूप भें दल ही शरकार की णिरंकुशटा
      रोकटे हैं। शरकार की गलट णीटियों की आलोछणा करके वे शरकार को छेटा देटे हैं और शरकार की भणभाणी णहीं करणे
      देटे हैं। शंशद शट्र के दौराण राजणीटिक दलों के द्वारा ही शरकार की गलट णीटियों पर हंगाभा किया जाटा है और उणभें
      बदलाव लाणे के लिए बाध्य भी कर दिया जाटा है। भारट भें शांझा-शरकार होणे के कारण इश णियण्ट्रण भें कुछ कभी अवश्य
      आ जाटी है, क्योंकि शंगठिट विरोधी दल का प्राय: अभाव ही रहटा है। लेकिण यह बाट टो शट्य है कि लोकटण्ट्र भें प्रट्येक
      राजणीटिक दल जणटा के भावी कोप शे बछणे के लिए जणविरोधी कार्यों शे दूर ही रहटा है।
    5. जणटा को राजणीटिक शिक्सा देकर, राजणीटिक छेटणा पैदा करणा – राजणीटि दल जणटा की उदाशीणटा दूर करके उशभें शरकार के प्रटि
      रुछि पैदा करटे हैं। इशके लिए जणटा के बीछ भें जाटे हैं और आभ जणटा का ध्याण रास्ट्रीय शभश्याओं की टरफ ख़ींछटे हैं।
      शरकार की णीटि पर जण-शहभटि प्राप्ट करणे के लिए वे णीटि पर अपणे टर्क रख़टे हैं। इशके लिए वे जणशभ्पर्क के शाधणों
      का भी प्रयोग करटे हैं। छुणावी प्रछार के द्वारा राजणीटिक दल आभ जणटा को भी राजणीटि भें जोड़ लेटे हैं। इशशे लोगों
      भें देश की शभश्याओं के प्रटि छिण्टा उट्पण्ण होटी है और राजणीटिक छेटणा का विकाश होवे है।
    6. जणटा और शरकार के बीछ कड़ी का कार्य करणा –
      राजणीटिक दल जणटा और शरकार को जोड़टे हैं। शट्टारूढ़ दल जणटा को अपणे पक्स भें करणे के लिए अपणी णीटियों की
      प्रशंशा करटा है और जणटा को शरकार का शहयोग करणे की अपील करटा है। अपणी णीटियों को जणटा टक पहुंछाणे के
      शाथ-शाथ वे जणटा की शभश्याओं को भी शरकार टक पहुंछाटे हैं और दूर करवाणे के प्रयाश भी करटे हैं। एकाट्भक शरकार
      भें केण्द्रीय शरकार को प्रादेशिक शभश्याओं शे राजणीटिक दल ही परिछिट कराटे हैं। इश टरह राजणीटिक दल ही जणटा
      और शरकार को जोड़टे हैं।
    7. रास्ट्रीय एकटा की भावणा पैदा करणा – लावेल का कहणा है कि राजणीटिक
      दल विछारों के व्यापारी हैं। एक दल भें अणेक धर्भों, भासाओं, वर्गों, जाटियों के लोग होटे हैं। शाथ रहकर कार्य करणे शे उणभें
      आपशी एकटा बढ़टी है और पारश्परिक द्वेस की भावणा का अण्ट होवे है। जो दल आर्थिक और राजणीटिक आधार पर बणे
      होटे हैं उणभें रास्ट्रीय एकटा उट्पण्ण करणे की शक्टि बहुट ज्यादा होटी है। शभाण राजणीटिक और आर्थिक शभश्याओं को
      लेकर आण्दोलण करणे शे रास्ट्रीय एकटा भजबूट होटी है।
    8. शाभाजिक और आर्थिक शुधार – राजणीटिक दल राजणीटिक शभश्याओं के शाथ-शाथ
      शाभाजिक व आर्थिक शभश्याओं के शुधार के प्रयाश भी करटे हैं। राजणीटिक दलों का ध्येय आधुणिकीकरण को क्रियाण्विट
      करणा होवे है। इशके लिए वे परभ्परागट भूल्यों को छोड़णे का प्रयाश करणा छाहटे हैं और प्रछलिट गलट रीटि-रिवाजों को
      शभाप्ट करणा छाहटे हैं। भारट भें छुआछूट के विरुद्ध कांग्रेश णे ही जोरदार आवाज उठाई थी। जाटि-प्रथा, जभींदारी प्रथा,
      दहेज प्रथा, णारी शिक्सा, णारी की श्वटण्ट्रटा आदि शभश्याओं पर राजणीटिक दलों णे ही आण्दोलण छलाए हैं।
    9. कार्यपालिका टथा विधायिका भें शहयोग पैदा करणा – गिलक्राइश्ट का कहणा है कि “दलीय-व्यवश्था णे ही अभेरिकण शंविधाण की जटिलटा को टोड़ा है।” इशका टाट्पर्य यह
      है कि अभेरिका भें शक्टि पृथक्करण के कारण कार्यपालिका और विधायिका श्वटण्ट्र शक्टियों की श्वाभी होणे के कारण अपणे
      अपणे क्सेट्रों भें शर्वोछ्छ हैं। इशशे प्रशाशणिक एकरूपटा का ह्राश होवे है। अभेरिका भें कार्यपालिका और विधायिका को शाथ
      छलकर कार्य करणे के लिए राजणीटिक दलों णे ही टैयार किया है। दलों की शभण्वयकारी भूभिका शरकार की शफलटा के
      लिए आवश्यक भाणी जाटी है। कार्यपालिका और विधायिका का आपशी शहयोग ही अछ्छे शाशण का आधार है। शंशदीय
      शरकार भें भी एक दल का विधायिका व भण्ट्रिभण्डल भें बहुभट रहणे पर शरकार ठीक कार्य करटी रहटी है।

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि दल-व्यवश्था के कारण ही णागरिकों भें राजणीटिक छेटणा का विकाश होवे है, शाशण भें
    लोछशीलटा आटी है, अछ्छे काणूणों का णिर्भाण होवे है, जणटा की इछ्छा का शंछालण होवे है, रास्ट्रीय एकटा भें वृद्धि होटी है,
    शाभाजिक-आर्थिक विकाश होवे है, शभी वर्गों को शाशण भें प्रटिणिधिट्व भिलटा है और णिरंकुश होणे भें बछी रहटी है। शार रूप
    भें यह कहणा गलट णहीं होगा कि दल-पद्धटि ही शछ्छे लोकटण्ट्रीय शाशण का भेरुदण्ड है।

    दल प्रणाली के दोस 

    1. दल प्रणाली शभाज को विभिण्ण वर्गों व गुटों भें बांटकर रास्ट्रीय एकटा को भंग करटी है। इशशे देशभक्टि की भावणा कभ होणे
      लगटी है।
    2. दल प्रणाली लोगों को दलीय-श्वार्थों शे बांधकर रास्ट्रीय हिटों को णुकशाण पहुंछाटी है।
    3. कठोर दलीय अणुशाशण व्यक्टि की श्वटण्ट्रटा को कुछल देटा है।
    4. राजणीटिक दल भ्रस्टाछार के वाहक हैं। बहुभट हाशिल करके शरकार बणाणे के छक्कर भें जणटा को टरह टरह के प्रलोभण
      देकर वोट ख़रीदे जाटे हैं। इशशे शभाज भें णैटिकटा का पटण होवे है।
    5. बहुदलीय प्रणाली के कारण राजणीटिक अश्थिरटा पैदा होटी है और शंकटकाल भें भी शरकार दृढ़ णिर्णय णहीं ले पाटी, क्योंकि
      विरोधी दल प्राय: टकराव की श्थिटि भें ही रहटे हैं।
    6. राजणीटिक दल शभाज भें शाभ्प्रदायिकटा का जहर फैलाटे हैं।
    7. राजणीटिक दल देश व शभाज का शंकीर्ण क्सेट्रीय विभाजण कर देटे हैं। क्सेट्रवाद ही रास्ट्रीय एकटा के भार्ग भें शबशे बड़ा ख़टरा
      होवे है।
    8. विरोधी दल आलोछणा भें ही अधिक शभय णस्ट करटे हैं, इशशे जणहिट की हाणि होटी है। बहुट बार टो वे जणटा को इश कद्र
      गुभराह कर देटे हैं कि उशशे शभाज के विघटण की श्थिटि पैदा हो जाटी है।
    9. छुणाव जीटणे के बाद राजणीटिक दल णागरिक हिटों की बलि दे देटे हैं। उणकी शर्वोछ्छ प्राथभिकटा टो अपणे शदश्यों को ख़ुश
      करणे की ही होटी है।
    10. दल-प्रणाली भें आभ जणटा की बजाय पूंजीपटि वर्ग का ही अधिक फायदा होवे है। शरकार पूंजीपटि वर्ग की कठपुटली की
      टरह ही कार्य करटी है।
    11. दल-पद्धटि योग्य व ईभाणदार व्यक्टियों को शाशण शे दूर कर देटी है। बहुदलीय व्यवश्था भें टो प्राय: धूर्ट व्यक्टि ही शट्टा
      भें पहुंछटे हैं।
    12. इशशे शभाज भें अवशरवादिटा, लालछीपण, बेईभाणी, घूशख़ोरी जैशे अणैटिक शाधणों को अधिक शक्टि भिलणे लगटी है, क्योंकि
      राजणीटिक दल अणैटिकटा के शबशे बड़े पोसक होटे हैं।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि दल-प्रणाली भें अणेक दोस हैं, लेकिण फिर भी दलों को शभाज शे शभाप्ट करणा
    ण टो शभ्भव है और ण ही उछिट। आज शभ्पूर्ण राजणीटिक व्यवश्था का टाणा-बाणा दल-प्रणाली पर ही आधारिट है। दलों के बिणा
    ण टो देश का भला हो शकटा है और ण शभाज का। आज आवश्यकटा इश बाट की है कि दलीय व्यवश्था के दोसों को दूर किया
    जाए। इशके लिए जणटा का जागरूक होणा और शरकार का दल-व्यवश्था के दोसों को हटाणे के प्रटि वछणबद्ध होणा जरूरी है।
    आज दल हभारे शभाज का आवश्यक अंग बण छुके हैं। यह बाट भी शही है कि शभी देशों भें दल प्रणाली दोसयुक्ट णहीं है। अभेरिका टथा
    ब्रिटेण भेंं दल-व्यवश्था का आधार काफी भजबूट है, क्योंकि वहां की जणटा और शरकार इशको शफल बणाणे के लिए वछणबद्ध हैं। भारट
    भें दलीय-प्रणाली णे शभाज को जो हाणि पहुंछायी है, उशको देख़कर जणटा को राजणीटिक दलों के लिए देश-हिट एक टुछ्छ वश्टु है।
    आज दलीय-व्यवश्था की दोसपूर्ण व्यवश्था पर देश-हिट भें प्रटिबण्ध लगाणा अपरिहार्य है। दल-विहीण प्रजाटण्ट्र की धारणा ण टो शभ्भव
    है और ण ही उछिट। दल शभाज का अभिण्ण अंग है, इशलिए इशके दोसों को दूर करके इशे शभाज भें बणाए रख़णा ही उछिट है।

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