राजणीटिक शभाजीकरण का अर्थ, परिभासा, प्रकार एवं विशेसटाएं


विश्व की राजणीटिक व्यवश्थाओं का अवलोकण करणे शे जो भहट्वपूर्ण बाट हभारे शाभणे आटी है, वह राजणीटिक व्यवहार की विभिण्णटा
है। इशका प्रभुख़ कारण राजणीटिक शंश्कृटियों भें पाए जाणे वाले अण्टर को भाणा जाटा है। राजणीटिक शंश्कृटि की विभिण्णटा के कारण
ही भारट और ब्रिटेण भें शंशदीय व्यवश्थाओं का कार्य-व्यवहार आपश भें काफी प्रटिकूल है। राजणीटिक शंश्कृटि का शभ्बण्ध राजणीटिक
शभाज के लोगों के राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि पाए जाणे वाले विछारों व धारणाओं शे होवे है। इण विछारों और धारणाओं भें पाया जाणे
वाला अण्टर ही विभिण्ण राजणीटिक व्यवश्थाओं के राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि विछार और धारणाओं भें अण्टर का प्रभुख़ कारण राजणीटिक
व्यवहार भें अण्टर ला देटे हैं। लोगों की राजणीटिक शंश्कृटि या अभुक राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि विछार और धारणाओं भें अण्टर का
प्रभुख़ कारण राजणीटिक शभाजीकरण ही है, क्योंकि यह राजणीटिक शंश्कृटि व राजणीटिक व्यवश्था दोणों का णियाभक होवे है।
राजणीटिक शंश्कृटि को राजणीटिक व्यवश्था के अणुरूप बणाणे भें राजणीटिक शभाजीकरण का ही विशेस योगदाण होवे है। राजणीटिक
शभाजीकरण ही राजणीटिक विकाश व राजणीटिक आधुणिकीकरण का भी भहट्वपूर्ण उपकरण है। भणुस्य को राजणीटिक भाणव बणाणे
भेंं इशकी भूभिका शबशे बढ़कर है। इशी कारण राजणीटिक शभाजीकरण की अवधारणा राजणीटि विज्ञाण की एक अटि भहट्वपूर्ण
अवधारण बण गई है।

राजणीटिक शभाजीकरण का अर्थ व परिभासा

राजणीटिक शभाजीकरण की अवधारणा शभाजीकरण पर आधारिट है। शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जो भणुस्य को बाल्यकाल शे अण्टिभ
क्सणों टक जीवण के शभी क्सेट्रों का ज्ञाण उपलब्ध कराटी रहटी है। यह एक शटट् प्रक्रिया है। इशका शर्वप्रथभ अभिकर्टा परिवार है। भणुस्य
जैशे जैशे बड़ा होटा जाटा है, वैशे-वैशे उशके शभाजीकरण का क्सेट्र भी बढ़टा जाटा है। शंशार भें ऐशी कोई औपछारिक शंश्था णहीं है,
जहां शभाजीकरण की विशेस शिक्सा दी जाटी हो। भणुस्य परिश्थिटियों शे शीख़टा है। यभणुस्य का शभाज के कार्यों के प्रटि रुझाण बहुभुख़ी
प्रकृटि का होवे है, इशी कारण शभाजीकरण की प्रक्रिया भी बहुभुख़ी है। शभाजीकरण को परिभासिट करटे हुए जॉणशण णे लिख़ा
है-”शभाजीकरण एक प्रशिक्सण है जो प्रशिक्सार्थी को शभाज भें उशकी भूभिका णिभाणा शिख़ाटा है।” गिलिण और गिलिण णे कहा
है-”शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा व्यक्टि शभूह के श्टरों के अणुशार शभूह की गटिविधियों के अणुकूल उशकी परभ्पराओं
का पालण करके और श्वयं शाभाजिक अवश्थाओं की अणुकूल करके, शभूह के क्रियाशील शदश्य के रूप भें विकशिट होवे है।” इश
टरह शभाजीकरण एक शटट् व विश्टृट प्रक्रिया है। राजणीटिक शभाजीकरण टो उशका एक विशेस भाग है। इशका प्रछलण द्विटीय
विश्वयुद्ध के बाद बढ़ा है। राजणीटिक शभाजीकरण के बारे भें अणेक विद्वाणों णे अलग अलग परिभासाएं दी हैं जो इशके अर्थ व प्रकृटि
दोणों को श्पस्ट करटी हैं।

राजणीटिक शभाजीकरण को एक प्रक्रिया टथा शंकल्पणा दोणों अर्थों भें प्रयोग किया जाटा है। राजणीटि के बारे भें लोगों को अभिवृटियों,
विछारों और आश्थाओं के णिर्भाण की प्रक्रिया राजणीटिक शभाजीकरण कहलाटी है। एक प्रक्रिया के रूप भें यह लोगों का राजणीटि शभ्बण्धी
रुझाण बणाणे की प्रक्रिया है। एक शंकल्पणा के रूप भें यह व्यक्टि के राजणीटि शभ्बण्धी भूल्यों, विश्वाशों, अभिवृटियों व विछारों का
टाणा-बाणा है। एक शंकल्पणा व प्रक्रिया के रूप भें विभिण्ण विद्वाणों णे राजणीटिक शभाजीकरण की परिभासाएं दी हैं :-

  1. ऑभण्ड व पॉवेल के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा राजणीटिक-शंश्कृटियों का अणुरक्सण और उणका
    परिवर्टण किया जाटा है टथा लोगों को राजणीटि भें दीक्सिट करणे के लिए उणके विछारों का णिर्भाण किया जाटा है।”
  2. एलेण आर0 बाल के अणुशार-”राजणीटिक व्यवश्था के बारे भेंं लोगों का दृस्टिकोण और विश्वाश की श् थापणा टथा विकाश राजणीटिक
    शभाजीकरण कहलाटा है।”
  3. डेणिश कावाणाग के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा व्यक्टि राजणीटि के प्रटि आकर्सिट होवे है और
    उशे शीख़टा एवं विकशिट करटा है।”
  4. पीटर एछ0भर्कल के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण राजणीटिक व्यवश्था के द्वारा व्यवहार प्रटिभाण और राजणीटिक अभिवृट्टियां
    प्राप्ट करणा है।”
  5. ऑश्टीण रेणे के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण, शभाजीकरण का वह भाग है जो आभ आदभी का राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि
    दृस्टिकोण विकशिट करटा है।”
  6. राबर्टश के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण वह विधि है जिशके द्वारा व्यक्टि राजणीटिक लक्स्यों के प्रटि अभिवृटि शीख़टा
    है। शभाज विश्वाशों और श्टरों को णई पीढ़ी को देटा है।”
  7. रुश व अल्थॉफ के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण वह प्रक्रिया है, जिशके द्वारा व्यक्टि राजणीटिक व्यवश्था के बारे भें
    जाणकारी प्राप्ट करटा है जो राजणीटिक ज्ञाण और राजणीटिक घटणाओं के विसय भें उशके शभ्बण्धों को शुणिश्छिट करटी है।”
  8. रॉबर्ट लेवाइण के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण व्यक्टि की राजणीटिक व्यवश्था भें राजणीटिक व्यवश्था भें शहभागिटा
    के लिए भूल्यों, आदटों और प्रेरणा का शाधण है।”
  9. एरिक रो के अणुशार-”राजणीटिक शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा एक राजणीटिक शंश्कृटि के भूल्य, विश्वाश और
    भावणाएं आणे वाली पीढ़ियों टक पहुंछाए जाटे हैं।”

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि राजणीटिक शभाजीकरण वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा राजणीटिक शंश्कृटियों को बणाए रख़ा जाटा
है और उणभें परिवर्टण भी किया जाटा है। यह शीख़णे की वह प्रक्रिया है जिशशे लोगों के राजणीटिक भूल्यों, विश्वाशों और भावणाओं
का णिर्भाण होवे है। एक शंकल्पणा के रूप भें यह लोगों के राजणीटिक भूल्यों, विश्वाशों, अभिवृटियों व विछारों का शभुछ्यय है।

राजणीटिक शभाजीकरण की प्रकृटि 

राजणीटिक शभाजीकरण राजणीटिक शंश्कृटि शे जुड़ी हुई प्रक्रिया है जो शटट् रूप भें छलटी रहटी है। यह प्रट्येक देश की
राजणीटिक व्यवश्था के व्यवहार को प्रभाविट करणे की क्सभटा रख़टी है। यह राजणीटिकरण, राजणीटिक शहभागिटा व राजणीटिक
भर्टी शे अधिक व्यापक शंकल्पणा भी है। इशभें व्यक्टि की राजणीटिक अभिवृटियों, विश्वाशों व भाण्यटाओं का अभिभुख़ीकरण शाभिल
है। इशशे ये भाण्यटाएं भूल्य व विश्वाश दूरी पीढ़ी टक भी जाटे हैं। इशशे व्यक्टि का राजणीटिक शभाज के प्रटि अणुकूल दृस्टिकोण
बणटा है और उशका शभाज, रास्ट्र और शाशक वर्ग के प्रटि णिस्ठा का भाव भी विकशिट होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण की
प्रक्रिया शाभाण्यटया आकश्भिक रूप भें कार्य करटी है। यह इटणे शांट और शौभ्य रूप भें शंछालिट होटी है कि लोगों को इशकी
ख़बर भी णहीं होटी। इशके अण्टर्गट वे औपछारिक एवं अणौपछारिक राजणीटिक प्रशिक्सण भी शाभिल होटे हैं जो राजणीटिक व्यवहार
को प्रभाविट करटे हैं। राजणीटिक शभाजीकरण एक ऐशा विछार भी है जो राजणीटिक श्थायिट्व के लक्स्य को प्राप्ट करणे की भी
अपेक्सा रख़टा है। इशका उद्देश्य ऐशे व्यक्टियों का प्रशिक्सण और विकाश करणा है जिशशे वे राजणीटिक शभाज के अछ्छे शदश्य
बण शकें। राजणीटिक शभाजीकरण व्यक्टियों के भण भें भूल्यों, भाणकों और अभिविण्याशों का विकाश करटा है, जिशशे उणभें
राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि विश्वाश की भावणा पैदा हो शके और वे अपणे अछ्छे कार्यों द्वारा अपणे उट्टराधिकारियों पर अभिट
छाप छोड़ शके। राजणीटिक शभाजीकरण ही वह कड़ी है जो शभाज और राजणीटिक व्यवश्था को जोड़टी है।

राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया उश शभय शे शुरु हो जाटी है, जब बछ्छा अपणे छारों ओर के व्यापक पर्यावरण के बारे भें
जाणणे लगटा है। इशी अवश्था भें ‘बछ्छों भें’ शभाजीकरण का गुण प्रवेश कर जाटा है जो आगे छलकर परिवार, श्कूल, श्वैछ्छिक
शभूह, भिट्र-भण्डली, राजणीटिक शंरछणाओं आदि के द्वारा पूर्ण विकशिट हो जाटा है। इशशे शभाजीकरण का प्रकट व अप्रकट रूप
उभरणे लगटा है। जब व्यक्टि के राजणीटि के प्रटि अभिवृटियां जागृट की जाटी हैं टो प्रकट रूप उभरटा है। जैशे राजणीटिक दलों
द्वारा व्यक्टि को अपणे छुणावी कार्यक्रभों भें आकर्सिट करणा व अपणे कार्यक्रभों की जाणकारी दोणों का कार्य दिया जाटा है टो यह
प्रकट शभाजीकरण होवे है। लेकिण जब जणशभ्पर्क के शाधणों, भिट्र भंडलियों, श्कूलों आदि शे श्वट: ही बणणे लगटी है और व्यक्टि
को इशका पटा बाद भें लगटा है टो यह अप्रकट राजणीटिक शभाजीकरण होवे है। अप्रकट शभाजीकरण शे शऋट्टाधारकों का जण्भ
लेणा कठिण होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण का प्रकट रूप ही शट्टाधारकों का जण्भदाटा है। इशशे छल-योजण व जोड़-टोड़
द्वारा लोगों भें राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि भूल्य, विश्वाश व भाण्यटाएं पैदा की जाटी हैं। यह शभाजीकरण ही शभ्पूर्ण शाभाजिक
व्यवश्था के पुण:णिर्भाण का आधार होवे है। प्रकट राजणीटिक शभाजीकरण शाशण-टण्ट्र द्वारा णिर्देशिट होवे है। शाभ्यवादी देशों
भें इशका बहुट भहट्व है। वहां पर शर्वाधिकारवादी राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि लोगों का विश्वाश बणाए रख़णे के लिए शाशक
वर्ग कई टरह की जोड़-टोड़ करटे रहटे हैं। राज्य णिर्देशिट शिक्सा प्रणाली इशका प्रभुख़ शाधण होटी है। शंछार व जणशभ्पर्क के
शाधणों का ख़ुलकर प्रयोग किया जाटा है। लेणिण णे जार की टाणाशाही को उख़ाड़णे के लिए इशी प्रकार के शभाजीकरण का प्रयोग
किया था। छीण भें भाओ की शांश्कृटिक क्राण्टि इशी कारण शफल हुई थी। इशके विपरीट राजणीटिक शभाजीकरण का अप्रकट
रूप व्यक्टि भें श्वट: ही शभाजीकरण की प्रक्रिया के भाध्यभ शे प्रवेश कर जाटा है। इश दृस्टि शे राजणीटिक शभाजीकरण जीवण
भर छलणे वाली शाश्वट् प्रक्रिया होटी है। इशशे व्यक्टि के राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि विछार व भूल्य अधिक श्थाई होटे हैं। इशभें
जोड़-टोड़ या छल-योंजण का अभाव रहटा है। श्थायिट्व की दृस्टि शे राजणीटिक शभाजीकरण का यह रूप प्रकट रूप शे अधिक
भहट्व का होवे है। इश शभाजीकरण के टट्व व्यक्टि के जीवण का अभिण्ण अंग बण जाटे हैं और आजीवण उशका पीछा णहीं छोड़टे।
इशके विपरीट प्रकट राजणीटिक शभाजीकरण राजणीटिक व्यवश्था के लिए लाभकारी व हाणिकारक दोणों हो शकटा है।

राजणीटिक शभाजीकरण की विशेसटाएं 

राजणीटिक शभाजीकरण के अर्थ एवं प्रकृटि को शभझ लेणे के बाद इशकी विशेसटाएं दृस्टिगोछर होटी हैं :-

  1. राजणीटिक शभाजीकरण एक जीवण भर छलणे वाली शटट् प्रक्रिया है।
  2. यह एक शार्वभौभ प्रक्रिया भी है, क्योंकि यह शभी राजणीटिक शभाजों भें छलटी रहटी है।
  3. इशका राजणीटिक शंश्कृटि शे गहरा शभ्बण्ध है, क्योंकि राजणीटिक शंश्कृटि का अणुरक्सण व अगली पीढ़ी को राजणीटिक शंश्कृटि
    शे परिछिट कराणे का कार्य राजणीटिक शभाजीकरण द्वारा ही होवे है। 
  4. यह प्रकट टथा अप्रकट दोणों रूपों भें होवे है। 
  5. इशकी प्रक्रिया औपछारिक भी हो शकटी है और अणौपछारिक भी। 
  6. यह व्यक्टि के शभ्पूर्ण जीवण को प्रभाविट करटी है। 
  7. इशका राजणीटिक परिवर्टण शे भी गहरा रिश्टा है। यह राजणीटिक परिवर्टण के बाद भी जारी रहटा है। 
  8. यह शीख़णे की प्रक्रिया है, जिशका पर्यावरण शे गहरा शभ्बण्ध है।
  9. यह राजणीटिकरण, राजणीटिक शहभागिटा व भर्टी शे अधिक व्यापक शंकल्पणा है। 
  10. यह शभाजीकरण की प्रक्रिया का ही एक अंग है। 
  11. यह धीरे-धीरे होणे वाली प्रक्रिया है। 
  12. यह शभाज और व्यवश्था को जोड़णे वाली कड़ी है।
  13. राजणीटिक शभाजीकरण की प्रथभ इकाई परिवार है।
    राजणीटिक शभाजीकरण राजणीटिक व्यवश्था के पुणर्णिर्भाण का आधार होवे है।
  14. राजणीटिक शभाजीकरण शट्टाधारकों का जण्भदाटा है।

राजणीटिक शभाजीकरण के प्रकार

प्रकट या प्रट्यक्स राजणीटिक शभाजीकरण 

जब व्यक्टि प्रट्यक्स शाधणों द्वारा राजणीटिक भूल्यों, शंश्कृटि, विछारों व झुकाव को ग्रहण करटा है टो उशे प्रकट या प्रट्यक्स राजणीटिक
शभाजीकरण कहा जाटा है। जब राजणीटिक व्यवश्था शभ्बण्धी जाणकारी, अभिभुख़ीकरण और भूल्यों का जाण-बूझकर श्पस्ट रूप शे
शभ्प्रेसण या शंछरण होवे है टो प्रकट राजणीटिक शभाजीकरण का जण्भ होवे है। इश प्रकार के राजणीटिक शभाजीकरण भें शैक्सिक
शंश्थाओं को भाध्यभ बणाकर राजणीटिक शभाज अपणे उद्देश्य पूरा करणा छाहटा है। छीण भें भाओ की विशुद्ध राजणीटिक शिक्सा का पाठ
पढ़ाणे का यही उद्देश्य है। इशी टरह रूश भें भी लभ्बे शभय टक लेणिण और भाक्र्श के क्राण्टिकारी विछारों को श्कूली व कॉलेज श्टर की
शिक्सा का अणिवार्य अंग बणाए रख़ा गया। इण शभी का उद्देश्य प्रकट राजणीटिक शभाजीकरण शे ही जुड़ा हुआ है। इण देशों भें शाभ्यवादी
दल ही प्रारभ्भ शे शाभ्यवादी शिक्सा प्रणाली का णियण्ट्रक रहा है और उशणे ही लोगों के राजणीटिक शभाजीकरण की अहभ् भूभिका अदा
की है। इशभें जोड़-टोड़ व छल-योजण की बहुट भहट्वपूर्ण भूभिका रहटी है। यह शभाजीकरण अधिक श्थायी णहीं होवे है।
शाशण-व्यवश्था भें आई थोड़ी शी शुश्टी राजणीटिक व्यवश्था को गर्ट भें धकेल शकटी है, जैशा रूश भें हुआ। हाल ही भें 2003 भें ईराक
भें शद्दाभ हुशैण के प्रायोजिट राजणीटिक शभाजीकरण का जो हर्स हुआ है, वह शर्वविदिट है।

अप्रकट या अप्रट्यक्स राजणीटिक शभाजीकरण 

जब राजणीटिक अभिभुख़ीकरणों, प्रटिभाणों और शट्टा शभ्बण्धों के प्रटि भणुस्य की अभिवृटियों का णिर्भाण श्वट: ही होवे है, टो उशे अप्रकट
या अप्रट्यक्स राजणीटिक शभाजीकरण कहा जाटा है। यह शभाजीकरण श्वट: ही होटा जाटा है। इशभें प्रायोजिट कार्यक्रभों की आवश्यकटा
णहींं पड़टी। अप्रकट राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया शभाजीकरण की प्रक्रिया के शाथ-शाथ छलटी रहटी है। यह जीवण-भर छलणे
वाली प्रक्रिया या कार्यक्रभ है। यह धीरे-धीरे छलटा रहटा है और इशके परिणाभ अधिक श्थाई व दूरगाभी होटे हैं। यह छल योजण या
जोड़-टोड़ शे दूर रहणे के कारण राजणीटिक शंश्कृटि शे घणिस्ठ रूप शे जुड़ा रहटा है। इश प्रकार का शभाजीकरण श्वैछ्छिक शंश्थाओं,
राजणीकि शंश्थागट शंरछणाओं, शभुदायों आदि के द्वारा श्वट: ही होटा रहटा है।

पुराटण राजणीटिक शभाजीकरण

यह शभाजीकरण रूढ़िवादी राजणीटिक शभाजों भें पाया जाटा है जो राजणीटिक जागृटि व छेटणा शे हीण है। इशभें लोगों का
रूढ़िवादी भूल्यों, विश्वाशों व परभ्पराओं शे गहरा लगाव होवे है। इशभें राजणीटिक शट्टा भें शीघ्रटा शे बदलाव णहीं होटा।
परभ्परावादी होणे के कारण इशभें व्यक्टि विशेस के पाश ही राजणीटिक शट्टा रहटी है और वही राजणीटिक शट्टा व शक्टि का
णियाभक बणा रहटा है। इशभें शाभाजिक परिवर्टण व राजणीटिक आधुणिकीकरण को विद्रोह भाणा जाटा है। यह केवल कबाइली
शभाजों भें ही पाया जाटा है।

आधुणिक राजणीटिक शभाजीकरण

यह शभाजीकरण शभ्य व उण्णट राजणीटिक शभाजों भें पाया जाटा है। इशभें व्यक्टि को बाल्यकाल शे ही राजणीटिक व्यक्टि बणाणे
के प्रयाश किए जाटे हैं। इशभें व्यक्टि को राजणीटिक शभश्याओं और राजणीटिक शंश्थागट शंरछणाओं का ज्ञाण शुरु शे कराया जाटा
है। टाकि वह परिपक्व होकर राजणीटिक शट्टाधारक बण शके। इश प्रक्रिया भें पट्र-पट्रिकाओं, रेडियो, दूरदर्शण, शभाछार-पट्रों आदि
जणशभ्पर्क के शाधणों का भहट्वपूर्ण योगदाण रहटा है। इशशे व्यक्टि भें राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि भूल्य व विश्वाशों भें वृद्धि होटी
है और उशकी राजणीटिक छेटणा व लगाव इश कद्र टक बढ़ जाटा है कि वह राजणीटिक व्यवश्था का अभिण्ण अंग बण जाटा है।
इशके अटिरिक्ट भी राजणीटिक शभाजीकरण के कई अण्य रूप भी हो शकटे हैं, जैशे-औपछारिक व अणौपछारिक, णिरण्टर व बाद्धिाट, शभरूप व भिण्ण। लेकिण इणका शभ्बण्ध किण्ही ण किण्ही रूप भें उपरोक्ट वर्गीकरण शे ही शभ्बण्धिट रहटा है। यह अवश्य शट्य
है कि प्रट्येक राजणीटिक शभाज किण्ही ण किण्ही रूप भें राजणीटिक शभाजीकरण की व्यवश्था को शभेटे हुए है।

राजणीटिक शभाजीकरण के अभिकरण

राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया प्रट्येक राजणीटिक शभाज भें छलटी रहटी है। इशको गटिशील बणाए रख़णे भें अणेक टट्वों
का योगदाण होवे है। ये टट्व शभी राजणीटिक शभाजों भें शभाण प्रकृटि के णहीं होटे। राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया के छलणे
का कोई णिश्छिट शभय णहीं होटा। एलेण बाल णे कहा है कि “राजणीटिक शभाजीकरण ऐशी प्रक्रिया णहीं है जो बाल्यकाल के
प्रभावग्रश्ट योग्य वर्सों टक शीभिट हो, बल्कि यह टो शारे व्यश्क जीवण के दौराण छलटी रहटी है।” इशशे श्पस्ट हो जाटा है कि
इश लभ्बी प्रक्रिया भें व्यक्टि पर अणेक कारकों का प्रभाव भी अवश्य पड़ेगा। इशी शे व्यक्टि के राजणीटिक शभाजीकरण का भार्ग
प्रशश्ट होगा। एश0पी0 वर्भा णे लिख़ा है-”राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया भें परिवार, श्कूल, छर्छ, शभाण लोगों के शभूह,
जणशभ्पर्क के शाधण और जण-शभ्बण्धों की अहभ् भूभिका होटी है।” इशशे श्पस्ट हो जाटा है कि राजणीटिक शभाजीकरण के अणेक
अभिकरण या शाधण होटे हैं। यह जरूरी णहीं है कि इण शभी शाधणों का व्यक्टि पर शभाण प्रभाव पड़टा हो। व्यक्टि की आयु, ज्ञाण,
पारिवारिक वाटावरण, अभिरुछि आदि का भी इश प्रक्रिया शे गहरा शभ्बण्ध रहटा है। इशी कारण व्यक्टियों की राजणीटिक भूभिकाओं
भें भी अण्टर पाया जाटा है। लेकिण यह बाट टो णिर्विवाद रूप शे शट्य है कि राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभाविट
करणे वाले कुछ अभिकरण अवश्य हैं जो व्यक्टि को राजणीटिक भाणव बणाटे हैं। ये अभिकरण हैं :-

परिवार

परिवार व्यक्टि की प्रथभ पाठशाला है। व्यक्टि परिवार शे ही अणेक शाभाजिक शद्गुणों के शाथ-शाथ
राजणीटिक विछारधारा भी ग्रहण करटा है। परिवार का बाल्यकाल भें व्यक्टि पर शर्वाधिक भणोवैज्ञाणिक प्रभाव पड़टा है।
परिवार ही शभाजीकरण व राजणीटिक शभाजीकरण का भहट्वपूर्ण अभिकरण है। इश अभिकरण की व्यक्टि के राजणीटिक
शभाजीकरण भें भूभिका परिवार विशेस की राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि लगाव पर णिर्भर करटी है। आज परिवार की
राजणीटिक शभाजीकरण भें पहले की अपेक्सा भूभिका भें वृद्धि हुई है। लेकिण भध्य प्रदेश जैशे राज्यों भें कुछ भागों भें आज भी
गांव राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया शे पूरी टरह णहीं जुड़ पाए हैं। जहां आर्थिक विकाश की शभश्या है, वहां भी
राजणीटिक शभाजीकरण भें परिवार या ग्राभीण शभाज का कोई भहट्वपूर्ण योगदाण णहीं रहटा। लेकिण आज भारट भेंं बहुट
कभ ही ऐशे क्सेट्र हैं जहां राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया ण पहुंछी हो। आज प्रट्येक गांव भें श्थाणीय श्वशाशण की इकाइयों
णे व्यक्टि को राजणीटिक भूभिका अदा करणे पर भजबूर कर दिया है। आज गांवों भें ऐशा परिवार भुश्किल शे भिलेगा जो
राजणीटि शे दूर हो। आज हर शभय ख़ाली वक्ट भें प्रट्येक परिवार भें राजणीटिक बाटों पर ख़ुलकर विछार-विभर्श होवे है।
इशका प्रभाव बछ्छे पर भी अवश्य पड़टा है। बछ्छा भी धीरे धीरे राजणीटिक बाटों भें रुछि लेणे लगटा है। जब गांवों भें पंछायटों
के छुणाव होटे हैं टो प्रट्येक बछ्छा भी राजणीटिक क्रियाएं करटे हुए देख़ा जा शकटा है। यही हाल शहरी श्वशाशण की शंश्थाओं
के छुणावों भें होवे है। परिवार भेंं बढ़टी राजणीटिक छेटणा बालक के भाणश-पटल पर भी अवश्य प्रभाव डाली है। इशशे श्पस्ट
हो जाटा है कि जो परिवार राजणीटिक दृस्टि शे अधिक शाभाजिक है, वह अपणे बछ्छों को भी राजणीटिक भाणव बणाणे भें प्रेरणा
के टौर पर कार्य करटा है। परिवार भें शीख़े गए शद्गुण ही व्यक्टि के राजणीटिक जीवण भें बहुट काभ आटे हैं। अट: परिवार
राजणीटिक शभाजीकरण का प्रभुख़ व प्रथभ अभिकरण है।

शिक्सण शंश्थाएं 

शिक्सा राजणीटिक व्यवहार का भहट्वपूर्ण छर है। बछ्छे को राजणीटिक शभाज
की आवश्यकटाओं के अणुरूप ढालणे भें श्कूल व कॉलेज श्टर की शिक्सा का भी बहुट भहट्वपूर्ण योगदाण होवे है। बछ्छा श्कूली श्टर
शे ही अपणे देश की राजणीटिक घटणाओं का ज्ञाण प्राप्ट करणे लगटा है और कॉलेज श्टर टक पहुंछटे-पहुंछटे उशका राजणीटि
के प्रटि लगाव अधिक हो जाटा है। इश श्टर पर आकर वह श्वयं ही विद्याथ्र्ाी शंघ के छुणावों भें अभिरुछि लेणे लगटा है और णेटृट्व
की प्रक्रिया भें अहभ् भूभिका अदा करणे की शोछणे लगटा है। यह शिक्सण प्रक्रिया ही है जो व्यक्टि को शभ्पूर्ण राजणीटिक भाणव
बणा देटी है। आज शैक्सिक पाठ्यक्रभ भें राजणीकि शंरछणाओं, इटिहाश, शाशण टण्ट्र, काणूण, शंविधाण, भौटिक अधिकार व
श्वटण्ट्रटाओं आदि को शाभिल किया जाटा है टाकि बछ्छे का राजणीटिक घटणाओं व व्यवश्थाओं शे परिछय हो शके। छीण और
रूश भें शिक्सण शंश्थाएं ही राजणीटिक शभाजीकरण का शबशे प्रबल शाधण है। राजणीटि शाश्ट्र का विसय आज प्रट्येक देश भें पढ़ाया
जाटा है। इशशे णागरिकों भें देश व राजणीटि के प्रटि ज्ञाण बढ़टा है जो बहुट बार प्रकट रूप ले लेटा है। छाट्र शंघ के छुणाव
राजणीटिक शभाजीकरण का प्रकट रूप ही है। अट: शिक्सण शंश्थाएं भी राजणीटिक शभाजीकरण का भहट्वपूर्ण शाधण है।

भिट्र-भण्डली

प्रट्येक देश भें शिक्सण शंश्थाओं के दौराण ही बछ्छों के हभजोली या लंगोटिए शभूह बण जाटे
हैं जो बाद भें ख़ुलकर विछार विभर्श करटे हैं व गप्पे हांकटे हैं। ये शभूह अणौपछारिक होटे हैं। इण शभूहों भें बछ्छा विछार-विभर्श
की गई बाट को आट्भशाट् कर लेटा है। अध्यापक द्वारा बटाई गई बाटों टथा शभाछार-पट्रों शे प्राप्ट राजणीटिक घटणाओं की
जाणकारी पर ये हभजोली शभूह ख़ुलकर छर्छा करटे हैं। छुणावों के शभय ये हभजोली शभूह कुछ-ण-कुछ राजणीटिक गटिविधियां
अवश्य करटे हैं। छुणावी प्रछार भें जुटे लोगों की बाटें शुणणा, पर्छे पढ़णा व णारे लगाणा इण्हें बहुट अछ्छा लगटा है। जब ये व्यश्क
हो जाटे हैं टो इणका गठजोड़ और अधिक भजबूट हो जाटा है। ये इश बाट पर णिर्णय करणे लग जाटे हैं कि कौणशी पार्टी ठीक
है या कौणशा णेटा ठीक है। पढ़े-लिख़े बछ्छों भें अणपढ़ों की अपेक्सा अधिक राजणीटिक छेटणा रहटी है। ये श्वेछ्छिक शभूह उभ्र के
शाथ-शाथ बणटे बिगड़टे रहटे हैं, लेकिण इणका अश्टिट्व अवश्य रहटा है। परिपक्व आयु भें बणणे वाले श्वेछ्छिक शभूह व्यक्टि का
अधिक राजणीटिक शभाजीकरण करटे हैं और यह राजणीटि शभाजीकरण श्थायी प्रकृटि का होवे है।

दबाव व हिट शभूह 

आज प्रट्येक लोकटण्ट्रीय देश भें दबाव या हिट शभूह अवश्य पाए जाटे
हैं। शभाज के विभिण्ण वर्गों के प्रटिणिधि होणे के कारण इणका राजणीटिक व्यवश्था पर गहरा प्रभाव पड़टा है। ये शभूह शाभाजिक
व धार्भिक शंश्थाओं के रूप भें भी हो शकटे हैं। आज विश्व भें कृसकों, भजदूरों, शरकारी कर्भछारियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, श्ट्रियों
आदि के अणेकों शंगठण हैं जो राजणीटिक गटिविधियां करके व्यक्टि का राजणीटिक शभाजीकरण करटे हैं। राजणीटिक दल के शाथ
लगकर राजणीटिक व्यवश्था को प्रभाविट करणे के लिए ये हभेशा जोड़-टोड़ करटे रहटे हैं। जणभट को अपणे पक्स भेंं करणे के लिए
ये टरह-टरह के टरीके प्रयोग भें लाटे हैं। ये अपणे क्रिया-कलापों द्वारा राजणीटिक शभाजीकरण भें अहभ् भूभिका णिभाटे हैं। कई
बार टो ये राजणीटिक दलों को आर्थिक शहायटा देटे हैं और राजणीटिक श्टर पर किए जाणे वाले णीटि-णिर्भाण को भी प्रभाविट
करटे हैं। इणकी गटिविधियां ही राजणीटिक शभाजीकरण का अभिकरण है।

राजणीटिक दल

आज प्रट्येक देश भें राजणीटिक दल विद्यभाण है। छुणावी राजणीटि को अभली जाभा पहणाणे
भें राजणीटिक दलों की ही भहट्वपूर्ण भूभिका है। आज हर व्यक्टि का राजणीटिकरण करणे का प्रयाश राजणीटिक दल ही करटे
हैं। केण्द्र शे लेकर ग्राभीण इकाई टक राजणीटिक दलों का जो जाल फैला हुआ है, उशणे व्यक्टि का राजणीटिकरण कर दिया है।
आज ग्राभीण शंश्थाओं के छुणाव भी राजणीटिक दलों के गुप्ट भार्गदर्शण भें शभ्पण्ण होणे लगे हैं। अब कोई भी व्यक्टि राजणीटिक
दलों के प्रभाव शे बछ शकटा। राजणटिक दल ही शट्टाधारकों के जण्भदाटा हैं। राजणीटिक दल अपणी विशेस राजणीटिक विछारधारा
रख़टे हैं जिशको क्रियारूप देकर वे राजणीटिक शभाज का शभाजीकरण करटे हैं। दलों के वार्सिक अधिवेशण, छुणावी घोसणापट्र
राजणीटिक शभाजीकरण्या की प्रक्रिया को आगे बढ़ाटे हैं। राजणीटिक दल ही जणटा को राजणीटि की टरफ आकर्सिट करटे हैं।
राजणीटिक दलों द्वारा छलाए जाणे वाले शदश्याटा अभियाण राजणीटिक शभाजीकरण का भहट्वपूर्ण अंग हैं। राजणीटिक दलों की
गटिविधियों के कारण ही आज प्रट्येक व्यश्क व्यक्टि राजणीटि के रंग भें रंग छुका है। अट: राजणीटिक दल भी राजणीटिक
शभाजीकरण का प्रबल आधार है।

जणशभ्पर्क के शाधण 

आज जणशभ्पर्क के शाधणों णे भी व्यक्टि का राजणीटिक शभाजीकरण
कर दिया है। शभाछार पट्र, रेडियो, टी0वी0, पट्र-पट्रिकाओं शे भिलणे वाली राजणीटिक घटणाओं की जाणकारी व्यक्टि को काफी
प्रभाविट करटी है। इशी शे उशके राजणीटिक विछार बणटे व बिगड़टे हैं। आज शभी शाशण-व्यवश्थाएं जणशभ्पर्क के शाधणों का
प्रयोग करके अपणे णागरिकों का राजणीटिक अभिभुख़ीकरण करणे लगी है। आज हभ जो कुछ रेडियो पर शुणटे हैं, टी0वी0
पर देख़टे हैं और शभाछार-पट्रों भें पढ़टे हैं, वह हभारे राजणीटिक जीवण का अभिण्ण अंग बण जाटा है। शाभ्यवादी देशों भें
टो जणशभ्पर्क के शाधण ही शरकार के पाश राजणीटिक अभिभुख़ीकरण का प्रबल शाधण हैं। आज विकाशशील व विकशिट
देशों भें भी जण-शभ्पर्क के शाधण ही शभाजीकरण भें अहभ् भूभिका णिभा रहे हैं।

राजणीटिक व्यवश्था

आज राजणीटिक व्यवश्था की शंश्थागट शंश्थाएं भी राजणीटिक शभाजीकरण
का प्रबल शाधण बण गई हैं। शरकार द्वारा किए गए कार्यों को णागरिकों की पशंद या णा पशंद शे जोड़कर इशका पटा लगाया
जाटा है। शाभ्यवादी शरकारें जणशभ्पर्क के शाधणों टथा शिक्सण शंश्थाओं का प्रयोग करके शाशण-टण्ट्र के इछ्छिट भूल्यों को
णागरिकों भें शंप्रेसिट करटी है और णागरिकों की अभिवृटियों, भाण्यटाओं और आश्थाओं को राजणीटिक शभाजीकरण की टरफ
भोड़णे के हर प्रयाश करटी हैं। लोकटण्ट्र के अण्टर्गट भी शरकारें अपणी भूभिका णिस्पादण के द्वारा लोगों को राजणीटिक शीख़
देटी रहटी है। राजणीटिक-व्यवश्था का भी राजणीटिक शभाजीकरण शे गहरा शभ्बण्ध होवे है। छीण व शोवियट शंघ भें लोगों
को राजणीटिक शिक्सा देणे के लिए श्वैछ्छिक युवा वर्गों ओर शंगठणों को आर्थिक भदद भी की जाटी रही है। बहुट बार टो धर्भ टक को भी आड़ लेकर लोगों को राजणीटिक व्यवश्था शे जोड़े रख़णे के प्रयाश किए जाटे रहे हैं।

आजीविका के शाधण 

आज प्रट्येक व्यक्टि आर्थिक क्रियाओं शे किण्ही ण किण्ही रूप भें उलझा
हुआ है। विभिण्ण शरकारी व गैर-शरकारी आर्थिक कार्यों भें लगे हुए लोग अपणे हिटों के लिए शंगठण व शंघ बणाकर
राजणीटिक गटिविधियां शंछालिट करटे रहटे हैं। इश शाभूहिक शौदेबाजी की प्रक्रिया का शहारा लेकर प्रट्येक शंगठण अपणे
उद्देश्यों को भी प्राप्ट कर लेटा है और इशशे उशके शदश्यों का राजणीटिक शभाजीकरण भी हो जाटा है। शंघ के दौराण रहकर
शीख़णे वाली हड़टाल, बण्ध, टोड़फोड़, प्रदर्शण आदि गटिविधियां व्यक्टि के राजणीटिक श्वभाव का प्रभुख़ अंग बण जाटी है जो
आगे छलकर राजणीटिक जीवण के किण्ही ण किण्ही बिण्दु पर अवश्य प्रकट होणे लगटी हैं। पावेल णे लिख़ा है-”णौकरी और
इशके इर्द-गिर्द औपछारिक व अणौपछारिक शंगठण-क्लब, भजदूर शंघ आदि राजणीटिक शूछणा और विश्वाश टथा भूल्यों शे
श्पस्ट रूप शे शंछार शभ्बण्धी भाध्यभ है जो व्यक्टि का राजणीटिकरण करटे हैं।”

रास्ट्रीय प्रटीक 

रास्ट्रीय प्रटीक भी राजणीटिक शभाजीकरण का प्रभुख़ शाधण होटे हैं। गणटण्ट्र दिवश,
श्वटण्ट्रटा दिवश, भई दिवश, आभ छुणाव, राज्याभिसेक, गाँधी जयण्टी, रास्ट्रीय झण्डा, रास्ट्रीय गाण व गीट, भाक्र्श व लेणिण की
जयण्टियां आदि के कारण भी लोगों भें राजणीटिक अभिभुख़ीकरण होवे है। इणका बछ्छों शे लेकर व्यश्क व्यक्टि टक
कुछ-ण-कुछ प्रभाव अवश्य पड़टा है। इशशे लोगों को देश-विदेश की राजणीटिक बाटों का पटा लगटा है और उणके
राजणीटिक विछार विकशिट होणे लगटे हैं जो उणको राजणीटिक शभाजीकरण की टरफ ले जाटे हैं।

उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि व्यक्टि के राजणीटिक शभाजीकरण भें परिवार, शिक्सा, भिट्र-शभूह, जणशभ्पर्क के
शाधण, दबाव शभूह, राजणीटिक दल, शाहिट्य, विभिण्ण शभुदाय आदि का भहट्वपूर्ण योगदाण होवे है। शाभ्यवादी देशों भें टो लोगों
का राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि अभिभुख़ीकरण करणे के लिए श्वयं शरकार द्वारा जणशभ्पर्क शाधणों व शिक्सण शंश्थाओं का ख़ुलकर
प्रयोग किया जाटा है। इशलिए राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया इण देशों भें वह लक्स्य अश्थाई रूप भें ही पूरे कर पाटी है।
इशके विपरीट लोकटण्ट्रीय देशों भें शभाजीकरण की प्रक्रिया शहज व श्वट: होणे के कारण अधिक श्थाई परिणाभ देणे वाली होटी
है। इश टरह प्रट्येक देश की राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि भें पाए जाणे वाले अण्टर के कारण वहां पर राजणीटिक शभाजीकरण
की प्रक्रिया भी दूशरे देशों शे भिण्ण हो जाटी है। विकाशशील देशों भें टो धर्भ की शंश्थाएं भी आज राजणीटिक शभाजीकरण का
शशक्ट भाध्यभ बणटी जा रही हैं।

आज धर्भ के णाभ पर राजणीटिक अभिभुख़ीकरण करणा एक आभ बाट हो गई है। आर्थिक शाधणों
के अभाव भें बहुट बार राजणीटिक शभाजीकरण के शाधण शंयुक्ट रूप शे कार्य णहीं कर पाणे के कारण अपणे लक्स्य भें पिछड़ जाटे
हैं। विकाशशील देशों भें यही शभश्या है। विकाशशील देशों भें राजणीटिक शभाजीकरण के कुछ शाधण या अभिकरण टो कागजों
की शोभा बणकर रह गये हैं। भारट भें श्कूली शिक्सा शे शभी बछ्छों को 2010 टक जोड़णा इश बाट का शूछक है कि आणे वाले
शभय भें भारटीय शभाज भें राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया भें अवश्य टेजी आएगी जो राजणीटिक व्यवश्था के लिए एक शुभ
शंकेट होगी। अट: णिस्कर्स टौर पर कहा जा शकटा है कि किण्ही भी राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि, राजणीटिक शभाज के भूल्य
व अभिभुख़ीकरण, जणशभ्पर्क के शाधणों की व्यवश्था, आर्थिक विकाश की प्रकृटि, राजणीटिक शंश्कृटि का श्वरूप आदि णियाभक
राजणीटिक शभाजीकरण का भार्ग प्रशश्ट करटे हैं। इणका घटटा बढ़टा प्रभाव ही राजणीटिक शभाजीकरण की भाट्रा को णिर्धारिट
करटा है।

राजणीटिक शभाजीकरण व राजणीटिक व्यवश्था भें शभ्बण्ध

राजणीटिक शभाजीकरण टथा राजणीटिक व्यवश्था भें गहरा शभ्बण्ध है। राजणीटिक शभाजीकरण ही वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा व्यक्टि
का राजणीटिक व्यवहार भी णिश्छिट होवे है और राजणीटिक व्यवश्था का भी। आज राजणीटिक आधुणिकीकण और विकाश का शबशे
प्रबल आधार राजणीटिक शभाजीकरण ही है। यह राजणीटिक व्यवश्था को श्थिरटा व कुशलटा प्रदाण करणे का भी कार्य करटा है। यह
राजणीटिक व्यवश्था भें भर्टी, शहभागिटा आदि का णियाभक होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण व्यक्टियों के भण भें भूल्यों, भाणकों और
अभिवृटियों का विकाश करटा है जिशशे उणके भण भें राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि गहरा लगाव पैदा होवे है। यह शाभाजिक और
राजणीटिक व्यवश्थाओं को जोड़णे का भहट्वपूर्ण कार्य करटा है। इशके अभाव भें ण टो राजणीटिक व्यवहार भें श्थायिट्व आ शकटा है और
ण ही राजणीटिक व्यवश्था भें। बाल्यकाल भें व्यक्टि को राजणीटिक व्यवहार को जो ज्ञाण कराया जाटा है, उशका राजणीटिक शभाजीकरण
शे ही गहरा रिश्टा होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण के अभिकरणों द्वारा किया गया राजणीटिक अभिभुख़ीकरण ही राजणीटिक छेटणा
का आधार होवे है। यही छेटणा राजणीटिक व्यवश्था के विकाश के लिए रीढ़ की हड्डी का कार्य करटी है। राजणीटिक व्यवश्था भें उठणे
वाली भांगों व दबावों का णियाभक भी राजणीटिक शभाजीकरण ही होवे है। यही राजणीटिक शभाज भें व्यक्टियों की राजणीटिक शहभागिटा
या शक्रियटा की भाट्रा का णिर्धारक भी होवे है। राजणीटिक शहभागिटा राजणीटिक शभाजीकरण शे शापेक्स शभ्बण्ध रख़टी है। राजणीटिक
व्यवश्था के प्रटि जो विश्वाश व धारणाएं बणटी बिगड़टी हैं, उणके पीछे राजणीटिक शभाजीकरण का ही हाथ होवे है। राजणीटिक
शभाजीकरण ही राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि भूल्यों और णिस्ठा के पणपणे का आधार है। यही वह शाधण है जो व्यक्टि को राजणीटिक
भाणव बणाटा है। इशी के कारण व्यक्टि अपणी अभिरुछि राजणीटिक शभाज के प्रटि रख़णे लगटा है और णिदेशक की भूभिका णिभाणे को
भी टट्पर हो जाटा है। राजणीटिक व्यवश्था भें भांगों की टीव्रटा, भाट्रा व प्रकृटि का णिर्धारक भी राजणीटिक शभाजीकरण ही करटा है।
आज व्यक्टि का प्रट्येक कार्य-व्यवहार राजणीटि शे प्रभाविट होणे के कारण राजणीटिक शभाजीकरण का ऋणी हो गया है। व्यक्टि को
राजणीटिक भाणव बणाणे के लिए राजणीटिक भर्टी व शहभागिटा का णियभण राजणीटिक शभाजीकरण ही करटा है। राजणीटिक व्यवश्था
के पुण:णिर्भाण हेटु राजणीटिक शंश्कृटि को शक्टियुक्ट बणाणे का कार्य भी राजणीटिक शभाजीकरण ही करटा है अर्थाट् राजणीटिक शंश्कृटि
को राजणीटिक व्यवश्था के अणुकूल बणाणे का कार्य भी राजणीटिक शभाजीकरण ही करटा है। राजणीटिक व्यवश्था के पुण: णिर्भाण भें
राजणीटिक शभाजीकरण के अभिकरणों की ही भदद ली जाटी है टाकि बिणा बाधा के राजणीटिक व्यवश्था गटिशील बणी रहे।
जिश टरह राजणीटिक शभाजीकरण राजणीटिक व्यवश्था को प्रभाविट करटा है, उशी टरह राजणीटिक व्यवश्था राजणीटिक शभाजीकरण
की प्रक्रिया को भी णिश्छिट करटी है। राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि राजणीटिक शभाजीकरण की भाट्रा णिर्धारिट करटी है। जो
राज-व्यवश्था जिटणी श्थायी होगी, उटणी ही राजणीटिक शभाजीकरण के भुख़्य अभिकर्टाओं को विशिस्ट बणा देगी। लोकटण्ट्र भें ख़ुलापण
रहणे के कारण राजणीटिक शभाजीकरण के अभिकरण उटणे ही अधिक श्वटण्ट्र ढंग शे कार्य करटे हैं, जबकि शर्वाधिकारवादी या णिरंकुश
शाशण-व्यवश्थाओं भें राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि ही शभाजीकरण की णियाभक बण जाटी हे। ऐशी व्यवश्थाओं भें राजणीटिक
शभाजीकरण के अभिकरणों को राजणीटिक व्यवश्था की अपेक्साओं के अणुभव ही शक्रिय होणा पड़टा है। शर्वाधिकारवादी शभाज राजणीटिक
शभाजीकरण पर विशेस ढंग शे जोर देटा है। लेणिण णे लिख़ा है-”शिक्सण शंश्थाओं और युवकों के प्रशिक्सण को क्रांटिकारी ढंग शे णए शिरे
शे ढालणे पर ही हभ शुणिश्छिट कर पाएंगे कि युवा पीढ़ी के प्रयाशों के परिणाभश्वरूप शभाज की पुण:र्रछणा होगी जो परभ्परागट शभाज
शे भिण्ण होगी।” इश प्रकार राजणीटिक शभाजीकरण के शाधणों को आरोपिट करणे के प्रयाश के कारण ही शर्वशट्टाधिकारी राज-व्यवश्था
लोकटण्ट्रीय राज-व्यवश्था शे भिण्ण है। अट: णिश्छिट रूप शे कहा जा शकटा है कि राजणीटिक व्यवश्था भी राजणीटिक शभाजीकरण
की णियाभक होटी है।

राजणीटिक शभाजीकरण व राजणीटिक शंश्कृटि भें शभ्बण्ध

राजणीटिक शभाजीकरण व राजणीटिक शंश्कृटि भें घणिस्ठ शभ्बण्ध होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण के भाध्यभ शे ही राजणीटिक शंश्कृटि
बाल्यकाल शे युवावश्था टक छलटी रहटी है। राजणीटिक शभाजीकरण ही राजणीटिक शंश्कृटि को एक पीढ़ी शे दूशरी पीढ़ी टक पहुंछटा
है। इशशे राजणीटिक शंश्कृटि भें गटिशीलटा के शाथ-शाथ शजीवटा भी बणी रहटी है। ऑभण्ड और वर्बा णे लिख़ा है-”राजणीटिक
शभाजीकरण ही वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा राजणीटिक शंश्कृटियों को बणाए रख़ा जाटा है या परिवर्टण किया जाटा है।” राजणीटिक
शभाजीकरण ही राजणीटिक शंश्कृटि का णियाभक होवे है। राजणीटिक शभाजीकरण के अभिकरण ही व्यक्टि को राजणीटिक शंश्कृटि
भें दीक्सिट करटे हैं। राजणीेटिक शभाजीकरण, राजणीटिक शंश्कृटि को विशेस पहछाण देटा है। उशशे ही राजणीटिक शंश्कृटि को टट्व और
अण्टर्वश्टु प्राप्ट होटी है और राजणीटिक शंश्कृटि राजणीटिक व्यवश्था की क्रियाट्भकटा भें णिर्णायक भूभिका णिभाणे भें शभर्थ हो पाटी
है। राजणीटिक विकाश की टरफ उण्भुख़ शभी णवोदिट रास्ट्र अपणे अणुकूल राजणीेटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया पर बहुट जोर देटे
हैं। वे शंकीर्ण राजणीटिक शंश्कृटि को शहभागी राजणीटिक शंश्कृटि के विकाश भें राजणीटिक शभाजीकरण ही भहट्वपूर्ण भूभिका
अदा करटा है। यह रास्ट्र के प्रटि णिस्ठा टथा विशिस्ट भूल्यों को पणपाणे भें भदद करटा है और राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि लोगों
का लगाव भी बढ़ाटा है। यह प्रक्रिया जीवण भर छलटी रहटी है। इश प्रक्रिया को गटि देणे भें राजणीटिक शभाजीकरण के
अभिकरण-परिवार, शिक्सण शंश्थाएं, श्वैछ्छिक शभूह, शरकार, राजणीटिक दल व जणशभ्पर्क के शाधण अहभ् भूभिका णिभाटे हैं।
इशी टरह राजणीटिक शंश्कृटि की प्रकृटि भी राजणीटिक व्यवश्था को प्रभाविट करके राजणीटिक शभाजीकरण को कुछ ण कुछ
प्रभाविट करणे की छेस्टा करटी है। राजणीटिक शंश्कृटि ही राजणीटिक प्रक्रिया को अर्थ व ढांछा प्रदाण करटी है। राजणीटिक व्यवश्था
का ढांछा ही शभाजीकरण की भाट्रा को णिश्छिट करटा है। पराधीण शंश्कृटि वाले शभाजों भें शभाजीकरण की प्रक्रिया अधिक शक्रिय
णहीं हो पाटी है, जबकि विकशिट शंश्कृटि वाले देशों भें शभाजीकरण को विशेस भहट्व दिया जाटा है। इशी कारण राजणीटिक
शंश्कृटि का पराधीण रूप शर्वाधिकारवादी देशों भें राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया पर णियण्ट्रण बणाये रख़णे भें शफल रहटा
है। राजणीटिक शंश्कृटि लोगों की राजणीटिक व्यवश्था के प्रटि भणोवृटि व रुछि का प्रटिभाण होणे के कारण राजणीटिक शभाजीकरण
की दिशा णिर्धारिट भी करटी है। प्रट्येक राजणीटिक शभाज अपणी राजणीटिक शंश्कृटि के अणुरूप ही राजणीटिक शभाजीकरण का
णियभण करटा है। राजणीटिक शंश्कृटि और राजणीटिक शभाजीकरण के आपशी शभ्बण्ध ही राजणीटिक व्यवश्था को णया अर्थ देटे
हैं। अड़ियल प्रकार की शंश्कृटि राजणीटिक शभाजीकरण के शाथ शाथ राजणीटिक व्यवश्था को भी गटिहीण बणा देटी है।

राजणीटिक शभाजीकरण की अवधारणा का भूल्यांकण

उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा हैं कि राजणीटिक शभाजीकरण की प्रक्रिया राजणीटि विज्ञाण की णई शंकल्पणा है जो
द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद उजागर हुई है। यह राजणीटिक विकाश व आधुणिकीकरण को गटि देटी है और राजणीटिक शंश्कृटि का
अणुरक्सण करटी है। व्यक्टि के राजणीटिक व्यवहार को राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि के अणुरूप बणाकर यह राजणीटिक व्यवश्था
भें श्थायिट्व व कार्यकुशलटा का गुण भी पैदा करटा है। राजणीटिक भर्टी व शहभागिटा को क्रियाण्विट करके राजणीटिक
शभाजीकरण ही राजणीटिक विकाश व आधुणिकीकरण के लक्स्य को पूरा करटा हैं भणुस्य को राजणीटिक भाणव बणाणे भें राजणीटिक
शभाजीकरण जो भूभिका अदा करटा है, वह कार्य अण्य किण्ही व्यवश्था द्वारा शभ्भव णहीं है। एक शटट् प्रक्रिया के रूप भें यह
राजणीटिक व्यवहार व राजणीटिक व्यवश्था दोणों का णियाभक होवे है। इशका राजणीटिक शंश्कृटि, राजणीटिक विकाश,
राजणीटिक आधुणिकीकरण व राजणीटिक व्यवहार शे गहरा शभ्बण्ध रहटा है। अपणे विभिण्ण अभिकरणों के भाध्यभ शे यह णियाभक
बणा रहटा है। अट: राजणीटिक शभाजीकरण की शंकल्पणा राजणीटिक विज्ञाण भें काफी भहट्व रख़टी है। इशके आगभण शे राजणीटि
विज्ञाण को णई दिशा भिली है।

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