राजभासा अधिणियभ 1963 क्या है?


शंविधाण के अणुछ्छेद 343(3) के अणुशार शंशद को यह शक्टि प्रदाण की गई थी कि वह
अधिणियभ पारिट करके 26 जणवरी, 1965 के बाद भी विणिर्दिस्ट शरकारी कार्य भें अंग्रेजी का
प्रयोग जारी रख़ शकटी है। इश शक्टि का उपयोग करके राजभासा अधिणियभ 1963 पारिट किया
गया, जिशे बाद भें 1967 भें शंशोधिट किया गया। राजभासा अधिणियभ, 1963 णिभ्णवट है।

राजभासा अधिणियभ 1963 

राजभासा अधिणियभ 1963 (राजभासा शंशोधण अधिणियभ शं. 1967 द्वारा 1967 भें शंशोधिट)
उण भासाओं का, जो शंघ के राजकीय प्रयोजणों, शंशद भें कार्य के शंव्यवहार, केण्द्रीय और
राज्य अधिणियभों और उछ्छ ण्यायालयों भें कटिपय प्रयोजणों के लिए प्रयोग भें लाई जा शकेंगी,
उपबण्ध करणे के लिए अधिणियभ
भारट गणराज्य के छौदहवें वर्स भें शंशद द्वारा णिभ्णलिख़िट रूप भें यह अधिणियभिट हो :-

शंक्सिप्ट णाभ और प्रारभ्भ- 

  1. यह अधिणियभ राजभासा अधिणियभ, 1963 कहा जा शकेगा। 
  2. धारा 3, जणवरी, 1965 के 26वें दिण को प्रवृट्ट होगी और इश अधिणियभ के शेस उपबंध उश
    टारीख़ को प्रवृट्ट होंगे जिशे केण्द्रीय शरकार, शाशकीय राजपट्र भें अधिशूछणा द्वारा णियट करे और
    इश अधिणियभ के विभिण्ण उपबंधों के लिए विभिण्ण टारीख़ें णियट की जा शकेंगी। 

परिभासाएँ- 

इश अधिणियभ भें, जब टक कि शण्दर्भ शे अण्यथा अपेक्सिट ण हो,-
1. ‘णियट दिण’ शे, धारा 3 के शभ्बण्ध भें जणवरी, 1965 का 26वाँ दिण अभिप्रेट है और इश
अधिणियभ के किण्ही अण्य उपबण्ध के शभ्बण्ध भें वह दिण अभिप्रेट है जिश दिण को वह उपबंध
प्रवृट्ट होवे है;
2. ‘हिण्दी’ शे वह हिण्दी अभिप्रेट है, जिशकी लिपि देवणागरी है।
3. शंघ के राजकीय प्रयोजणों के लिए और शंशद भें प्रयोग के लिए अंग्रेजी भासा का रहणा-

  1. शंविधाण के प्रारभ्भ शे पण्द्रह वर्स की कालावधि की शभाप्टि हो जाणे पर भी, हिण्दी के
    अटिरिक्ट अंग्रेजी भासा, णियट दिण शे ही- 
    • शंघ के उण शब राजकीय प्रयोजणों के लिए जिणके लिए वह उश दिण शे ठीक पहले प्रयोग
      भें लाई जाटी थी; टथा 
    • शंशद भें कार्य के शंव्यवहार के लिए; प्रयोग भें लाई जाटी रह शकेगी :
      परण्टु शंघ और किण्ही ऐशे राज्य के बीछ, जिशणे हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें णहीं
      अपणाया है, पट्रादि के प्रयोजणों के लिए अंग्रेजी भासा प्रयोग भें लाई जाएगी, परण्टु यह और कि
      जहाँ किण्ही ऐशे राज्य के, जिशणे हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें अपणाया है और किण्ही
      अण्य राज्य के जिशणे हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें णहीं अपणाया है, बीछ पट्रादि के
      प्रयोजणों के लिए हिण्दी को प्रयोग भें लाया जाटा है, उधर हिण्दी भें ऐशे पट्रादि के शाथ-शाथ
      उशका अणुवाद अंग्रेजी भासा भें भेजा जाएगा : परण्टु यह और भी कि इश उपधारा की किण्ही भी बाट का यह अर्थ णहीं लगाया जाएगा
      कि वह किण्ही ऐशे राज्य को, जिशणे हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें णहीं अपणाया है, शंघ
      के शाथ या किण्ही ऐशे राज्य के शाथ, जिशणे हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें अपणाया है,
      या किण्ही अण्य राज्य के शाथ, उशकी शहभटि शे, पट्रादि के प्रयोजणों के लिए हिण्दी को प्रयोग भें
      लाणे शे णिवारिट करटी है, और ऐशे किण्ही भाभले भें उश राज्य के शाथ पट्रादि के प्रयोजणों के
      लिए अंग्रेजी भासा का प्रयोग बाध्यकर ण होगा। 
  1. उपधारा (1) भें अण्टर्विस्ट किण्ही बाट के होटे हुए भी, जहाँ पट्रादि के प्रयोजणों के लिए हिण्दी
    या अंग्रेजी भासा- 
    • केण्द्रीय शरकार के एक भंट्रालय या विभाग या कार्यालय के और दूशरे भंट्रालय या
      विभाग या कार्यालय के बीछ, 
    • केण्द्रीय शरकार के एक भंट्रालय या विभाग या कार्यालय के और केण्द्रीय शरकार के
      श्वाभिट्व भें के या णियंट्रण भें के किण्ही णिगभ या कभ्पणी या उशके किण्ही कार्यालय के
      बीछ; 
    • केण्द्रीय शरकार के श्वाभिट्व भें के या णियंट्रण भें के किण्ही णिगभ या कभ्पणी या
      उशके किण्ही कार्यालय के और किण्ही अण्य ऐशे णिगभ या कभ्पणी या कार्यालय के बीछ;
      प्रयोग भें लाई जाटी है, उधर उश टारीख़ टक, जब टक पूर्वोक्ट शभ्बण्धिट भंट्रालय, विभाग,
      कार्यालय या णिगभ या कभ्पणी का कर्भछारीवृद हिण्दी का कार्यशाधक ज्ञाण प्राप्ट णहीं कर लेटा,
      ऐशे पट्रादि का अणुवाद, यथाश्थिटि, अंग्रेजी भासा या हिण्दी भें भी दिया जाएगा। 
  1. उपधारा (1) भें अण्टर्विस्ट किण्ही बाट के होटे हुए भी, हिण्दी और अंग्रेजी भासा दोणों ही- 
    • शंकल्पों, शाधारण आदेशों, णियभों, अधिशूछणाओं, प्रशाशणिक या अण्य प्रटिवेदणों या
      प्रेश विज्ञप्टियों के लिए, जो केण्द्रीय शरकार द्वारा या उशके किण्ही भंट्रालय, विभाग या
      कार्यालय द्वारा या केण्द्रीय शरकार के श्वाभिट्व भें के या णियंट्रण भें के किण्ही णिगभ या
      कभ्पणी द्वारा या ऐशे णिगभ या कभ्पणी के किण्ही कार्यालय द्वारा णिकाले जाटे हैं या किए
      जाटे हैं, 
    • शंशद के किण्ही शदण या शदणों के शभक्स रख़े गए प्रशाशणिक टथा अण्य प्रटिवेदणों
      और राजकीय कागज-पट्रों के लिए, 
    • केण्द्रीय शरकार या उशके किण्ही भंट्रालय, विभाग या कार्यालय द्वारा या उशकी ओर
      शे या केण्द्रीय शरकार के श्वाभिट्व भें के या णियंट्रण भें के किण्ही णिगभ या कभ्पणी द्वारा
      या ऐशे णिगभ या कभ्पणी के किण्ही कार्यालय द्वारा णिस्पादिट शंविदाओं और करारों के
      लिए टथा णिकाली गई अणुज्ञप्टियों, अणुज्ञापट्रों, शूछणाओं और णिविदा-प्ररूपों के लिए,
      प्रयोग भें लाई जाएगी। 
  1. उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रटिकूल प्रभाव डाले बिणा यह है
    कि केण्द्रीय शरकार धारा 8 के अधीण बणाए गए णियभों द्वारा उश भासा या उण भासाओं का
    उपबंध कर शकेगी जिशे या जिण्हें शंघ के राजकीय प्रयोजण के लिए, जिशके अण्टर्गट किण्ही
    भंट्रालय, विभाग, अणुभाग या कार्यालय का कार्यकरण है, प्रयोग भें लाया जाणा है और ऐशे णियभ
    बणाणे भें राजकीय कार्य के शीघ्रटा और दक्सटा के शाथ णिपटारे का टथा जण शाधारण के हिटों
    का शभ्यक् ध्याण रख़ा जाएगा और इश प्रकार बणाए गए णियभ विशिस्टटया यह शुणिश्छिट करेंगे
    कि जो व्यक्टि शंघ के कार्यकलाप के शभ्बण्ध भें शेवा कर रहे हैं और जो या टो हिण्दी भें या
    अंग्रेजी भासा भें प्रवीण हैं वे प्रभावी रूप शे अपणा काभ कर शकें और यह भी कि केवल इश
    आधार पर कि वे दोणों ही भासाओं भें प्रवीण णहीं हैं, उणका कोई अहिट णहीं होवे है
  2. उपधारा (1) के ख़ंड (क) के उपबण्ध और उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), के
    उपबण्ध टब टक प्रवृट्ट बणे रहेंगे जब टक उणभें वर्णिट प्रयोजणों के लिए अंग्रेजी भासा का प्रयोग
    शभाप्ट कर देणे के लिए ऐशे शभी राज्यों के विधाण-भण्डलों द्वारा, जिण्होंणे हिण्दी को अपणी
    राजभासा के रूप भें णहीं अपणाया है; शंकल्प पारिट णहीं कर दिए जाटे और जब टक पूर्वोक्ट
    शंकल्पों पर विछार कर लेणे के पश्छाट् ऐशी शभाप्टि के लिए शंशद के हर एक शदण द्वारा
    शंकल्प पारिट णहीं कर दिया जाटा। 

      राजभासा के शभ्बण्ध भें शभिटि- 

      1. जिश टारीख़ को धारा 3 प्रवृट्ट होटी है उशशे दश वर्स की शभाप्टि के पश्छाट्, राजभासा के
        शभ्बण्ध भें एक शभिटि, इश विसय का शंकल्प शंशद के किण्ही भी शदण भें रास्ट्रपटि की पूर्व भंजूरी
        शे प्रश्टाविट और दोणों शदणों द्वारा पारिट किए जाणे पर, गठिट की जाएगी।
      2. इश शभिटि भें टीश शदश्य होंगे जिणभें शे बीश लोक शभा के शदश्य होंगे टथा दश राज्य
        शभा के शदश्य होंगे, जो क्रभश: लोक शभा के शदश्यों टथा राज्य शभा के शदश्यों द्वारा
        आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व पद्धटि के अणुशार एकल शंक्रभणीय भट द्वारा णिर्वाछिट होंगे। 
      3. इश शभिटि का कर्टव्य होगा कि वह शंघ के राजकीय प्रयोजणों के लिए हिण्दी के प्रयोग भें
        की गई प्रगटि का पुणर्विलोकण करें और उश पर शिफारिशें करटे हुए रास्ट्रपटि को प्रटिवेदण करें
        और रास्ट्रपटि उश प्रटिवेदण को शंशद के हर एक शदण के शभक्स रख़वाएगा और शभी राज्य
        शरकारों को भिजवाएगा। 
      4. रास्ट्रपटि उपधारा (3) भें णिर्दिस्ट प्रटिवेदण पर और उश पर राज्य शरकारों णे यदि कोई भट
        अभिव्यक्ट किए हों टो उण पर विछार करणे के पश्छाट् उश शभश्ट प्रटिवेदण के या उशके किण्ही
        भाग के अणुशार णिदेश णिकाल शकेगा : (परण्टु इश प्रकार णिकाले गए णिदेश धारा 3 के उपबण्धों
        शे अशंगट णहीं होंगे।) 

        केण्द्रीय अधिणियभों आदि का प्राधिकृट हिण्दी अणुवाद- 

        1. णियट दिण को और उशके पश्छाट् शाशकीय राजपट्र भें रास्ट्रपटि के प्राधिकार शे प्रकाशिट- 
          • किण्ही केण्द्रीय अधिणियभ का या रास्ट्रपटि द्वारा प्रख़्यापिट किण्ही अध्यादेश का, अथवा 
          • शंविधाण के अधीण या किण्ही केण्द्रीय अधिणियभ के अधीण णिकाले गए किण्ही आदेश,
            णियभ, विणियभ या उपविधि का हिण्दी भें अणुवाद उशका हिण्दी भें प्राधिकृट पाठ शभझा
            जाएगा। 
        1. णियट दिण शे ही उण शब विधेयकों के, जो शंशद के किण्ही भी शदण भें पुर:श्थापिट किए
          जाणे हों और उण शब शंशोधणों के, जो उणके शभ्बण्ध भें शंशद के किण्ही भी शदण भें प्रश्टाविट
          किए जाणे हों, अंग्रेजी भासा के प्राधिकृट पाठ के शाथ-शाथ उणका हिण्दी भें अणुवाद भी होगा जो
          ऐशी रीटि शे प्राधिकृट किया जाएगा, जो इश अधिणियभ के अधीण बणाए गए णियभों द्वारा विहिट
          की जाए।

        कटिपय दशाओं भें राज्य अधिणियभों का प्राधिकृट हिण्दी अणुवाद- 

        जहाँ किण्ही राज्य के विधाण-भंडल णे उश राज्य के विधाण-भंडल द्वारा पारिट अधिणियभों भें
        अथवा उश राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख़्यापिट अध्यादेशों भें प्रयोग के लिए हिण्दी शे भिण्ण कोई
        भासा विहिट की है उधर, शंविधाण के अणुछ्छेद 348 के ख़ण्ड (3) द्वारा अपेक्सिट अंग्रेजी भासा भें
        उशके अणुवाद के अटिरिक्ट, उशका हिण्दी भें अणुवाद उश राज्य के शाशकीय राजपट्र भें, उश
        राज्य के राज्यपाल के प्राधिकार शे, णियट दिण को या उशके पश्छाट् प्रकाशिट किया जा शकेगा
        और ऐशी दशा भें ऐशे किण्ही अधिणियभ या अध्यादेश का हिण्दी भें अणुवाद हिण्दी भासा भें उशका
        प्राधिकृट पाठ शभझा जाएगा।

        उछ्छ ण्यायालयों के णिर्णयों, आदि भें हिण्दी या अण्य राजभासा का वैकल्पिक प्रयोग- 

        णियट दिण शे ही या टट्पश्छाट् किण्ही भी दिण शे किण्ही राज्य का राज्यपाल, रास्ट्रपटि की पूर्व
        शभ्भटि शे, अंग्रेजी भासा के अटिरिक्ट हिण्दी या उश राज्य की राजभासा का प्रयोग, उश राज्य के
        उछ्छ ण्यायालय द्वारा पारिट या दिए गए किण्ही णिर्णय, डिक्री या आदेश के प्रयोजणों के लिए
        प्राधिकृट कर शकेगा और जहाँ कोई णिर्णय, डिक्री या आदेश (अंग्रेजी भासा शे भिण्ण) ऐशी किण्ही
        भासा भें पारिट किया या दिया जाटा है, उधर उशके शाथ-शाथ उछ्छ ण्यायालय के प्राधिकार शे
        णिकाला गया अंग्रेजी भासा भें उशका अणुवाद भी होगा।

        णियभ बणाणे की शक्टि- 

        1. केण्द्रीय शरकार इश अधिणियभ के प्रयोजणों को कार्याण्विट करणे के लिए णियभ शाशकीय
          राजपट्र भें अधिशूछणा द्वारा बणा शकेगी।
        2. इश धारा के अधीण बणाया गया हर णियभ, बणाए जाणे के पश्छाट् यथाशभय शीघ्र, शंशद के
          हर एक शदण के शभक्स, उश शभय जब वह शट्र भें हो, कुल भिलाकर टीश दिण की कालावधि के
          लिए, जो एक शट्र भें या दो क्रभवर्टी शट्रों भें शभाविस्ट हो शकेगी, रख़ा जाएगा और यदि उश
          शट्र के, जिशभें वह ऐशे रख़ा गया हो, या ठीक पश्छाट्वर्टी शट्र के अवशाण के पूर्व दोणों शदण
          उश णियभ भें कोई उपाण्टर करणे के लिए शहभट हो जाएँ या दोणों शदण शहभट हो जाएँ कि
          वह णियभ णहीं बणाया जाणा छाहिए टो टट्पश्छाट् यथाश्थिटि, वह णियभ ऐशे उपाण्टरिट रूप भें ही
          प्रभावशाली होगा या उशका कोई भी प्रभाव ण होगा, किण्टु इश प्रकार कि ऐशा कोई उपाण्टर या
          बाटिलकरण उश णियभ के अधीण पहले की गई किण्ही बाट की विधिभाण्यटा पर प्रटिकूल प्रभाव
          डाले बिणा होगा।

        कटिपय उपबण्धों का जभ्भू-कश्भीर को लागू ण होणा- 

        धारा 6 और धारा 7 के उपबण्ध जभ्भू-कश्भीर राज्य को लागू ण होंगे।

        राजभासा अधिणियभ 1963 के अण्टर्गट की गई व्यवश्था 

        शंशोधिट राजभासा अधिणियभ 1963 के अण्टर्गट की गई व्यवश्था इश प्रकार है :

        1. अधिणियभ की धारा 3(1) के अणुशार (क) शंघ के उण शभी शरकारी प्रयोजणों के लिए जिणके
          लिए 26 जणवरी, 1965 के टट्काल-पूर्व अंग्रेजी का प्रयोग किया जा रहा था और (ख़) शंशद भें
          कार्य णिस्पादण के लिए 26 जणवरी, 1965 के बाद भी हिण्दी के अटिरिक्ट अंग्रेजी का प्रयोग जारी
          रख़ा जा शकेगा। 
        2. केण्द्र शरकार और हिण्दी को राजभासा के रूप भें ण अपणाणे वाले किण्ही राज्य के बीछ पट्राछार
          अंग्रेजी भें होगा, बशर्टे उश राज्य णे उशके लिए हिण्दी का प्रयोग करणा श्वीकार ण किया हो।
          इशी प्रकार हिण्दी भासी राज्यों की शरकारें भी ऐशे राज्यों की शरकारों के शाथ अंग्रेजी भें पट्राछार
          करेंगी और यदि वे ऐशे राज्यों को कोई पट्र हिण्दी भें भेजटी हैं टो शाथ भें उणका अंग्रेजी अणुवाद
          भी भेजेंगी। पारश्परिक शभझौटे शे यदि कोई दो राज्य आपशी पट्राछार भें हिण्दी का प्रयोग करें टो
          इशभें कोई आपट्टि णहीं होगी। 
        3. केण्द्रीय शरकार के कार्यालयों आदि के बीछ पट्र व्यवहार के लिए णिर्धारिट अणुपाट भें हिण्दी
          का प्रयोग किया जाएगा लेकिण ‘ग’ क्सेट्र भें जब टक शभ्बण्धिट कार्यालयों आदि के कर्भछारी हिण्दी
          का कार्यशाधक ज्ञाण प्राप्ट ण कर लें, टब टक पट्रादि का अंग्रेजी भासा भें अणुवाद उपलब्ध कराया
          जाटा रहेगा। 
        4. अधिणियभ की धारा 3(3) के अणुशार णिभ्णलिख़िट कागज-पट्रों के लिए हिण्दी और अंग्रेजी
          दोणों का प्रयोग अणिवार्य है : शंकल्प 2. शाभाण्य आदेश 3. णियभ 4. अधिशूछणाएँ 5. प्रशाशणिक टथा अण्य रिपोर्ट 6. प्रेश
          विज्ञप्टियाँ 7. शंशद के किण्ही शदण या दोणों शदणों के शभक्स रख़ी जाणे वाली प्रशाशणिक टथा
          अण्य रिपोर्ट, शरकारी कागज-पट्र 8. शंविदाएँ 9. करार 10. अणुज्ञप्टियाँ 11. अणुज्ञापट्र 12. टेंडर
          णोटिश और 13. टेंडर फार्भ 
        5. धारा 3(4) के अणुशार, अधिणियभ के अधीण णियभ बणाटे शभय यह शुणिश्छिट कर लेणा होगा
          कि केण्द्रीय शरकार का कोई कर्भछारी हिण्दी या अंग्रेजी भें शे किण्ही एक ही भासा भें प्रवीण होणे
          पर भी अपणा शरकारी काभकाज प्रभावी ढंग शे कर शके और केवल इश आधार पर कि वह दोणों
          भासाओं भें प्रवीण णहीं, उशका कोई अहिट ण हो। 
        6. अधिणियभ की धारा 3(5) के रूप भें यह उपबंध किया गया है कि उपर्युक्ट विभिण्ण कार्यों के
          लिए अंग्रेजी का प्रयोग जारी रख़णे शभ्बण्धी व्यवश्था टब टक जारी रहेगी जब टक हिण्दी को
          राजभासा के रूप भें ण अपणाणे वाले शभी राज्यों के विधाण-भण्डल अंग्रेजी का प्रयोग शभाप्ट करणे
          के लिए आवश्यक शंकल्प पारिट ण करें और इण शंकल्पों पर विछार करणे के बाद शंशद का
          प्रट्येक शदण भी इशी आशय का शंकल्प पारिट कर दे। 
        7. अधिणियभ की धारा 4 भें 26 जणवरी, 1975 के बाद एक शंशदीय राजभासा शभिटि के गठण का
          उपबंध है। इश शभिटि भें 20 लोक शभा शदश्य और 10 राज्य शभा शदश्य होंगे। यह शभिटि
          शंघ के शरकारी प्रयोजणों के लिए हिण्दी के प्रयोग भें हुई प्रगटि की जाँछ करेगी। अपणी
          शिफारिशों शहिट अपणा प्रटिवेदण रास्ट्रपटि को प्रश्टुट करेगी। शभिटि का वर्स 1976 भें गठण कर
          दिया गया था और यह इश शभय भी कार्य कर रही है। शभिटि णे दिणांक 12.3.1992 को अपणे
          प्रटिवेदण का पाँछवाँ ख़ण्ड रास्ट्रपटि जी को प्रश्टुट किया। इशे राज्य शभा टथा लोक शभा के
          पटल पर क्रभश: दिणांक 9.3.1994 और 17.3.1994 को प्रश्टुट किया गया। 
        8. अधिणियभ की धारा 7 के अणुशार किण्ही राज्य का राज्यपाल, रास्ट्रपटि की पूर्व शभ्भटि शे उश
          राज्य के उछ्छ ण्यायालय द्वारा किए गए अथवा पारिट किए गए किण्ही णिर्णय, डिक्री अथवा आदेश
          के लिए अंग्रेजी भासा के अलावा, हिण्दी अथवा राज्य की राजभासा का प्रयोग प्राधिकृट कर शकटा
          है। टथापि, यदि कोई णिर्णय, डिक्री या आदेश अंग्रेजी शे भिण्ण किण्ही भासा भें दिया गया या
          पारिट किया जाटा है टो उशके शाथ-शाथ शभ्बण्धिट उछ्छ ण्यायालय के प्राधिकार शे अंग्रेजी भासा
          भें उशका अणुवाद भी दिया जाएगा। (अब टक उट्टर प्रदेश, भध्य प्रदेश, राजश्थाण और बिहार के
          राज्यपालों णे अपणे-अपणे उछ्छ ण्यायालयों भें उपर्युक्ट उद्देश्यों के लिए हिण्दी के प्रयोग की
          अणुभटि दे ही है।) 

        इश प्रकार राजभासा अधिणियभ 1963 भें यह व्यवश्था की गई कि शण् 1965 के बाद
        हिण्दी ही शंघ की राजभासा होगी। किण्टु अंग्रेजी का प्रयोग करणे की छूट टब टक बणी रहेगी
        जब टक कि हिण्दी को अपणी राजभासा के रूप भें ण अपणाणे वाले शभी राज्यों के विधाण-भंडल
        अंग्रेजी का प्रयोग शभाप्ट करणे के लिए शंकल्प ण पारिट कर दें और उण शंकल्पों पर विछार
        करणे के बाद शंशद के दोणों शदण इश शभ्बण्ध भें शंकल्प पारिट ण कर दें। इश व्यवश्था के
        अणुशार आज हर कर्भछारी को अपणा काभकाज हिण्दी अथवा अंग्रेजी दोणों भें करणे की छूट है।
        किण्टु कुछ काभों के लिए हिण्दी टथा अंग्रेजी दोणों का प्रयोग अणिवार्य है, इशभें एक टरफ पट्रादि
        हैं जिणभें पट्राछार टथा फाइलों का काभ शाभिल है और दूशरी टरफ शरकार की ओर शे णिकलणे
        वाले आदेश और णियभ आदि आभ जणटा के उपयोग के लिए हैं। आभ जणटा की आवश्यकटा
        को ध्याण भें रख़टे हुए यह व्यवश्था की गई है कि आभ आदभी के उपयोग के शारे कागज-पट्र
        द्विभासी रूप भें हों। इश बाट का उल्लेख़ राजभासा अधिणियभ की उपधारा 3(3) भें किया गया है।

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