राजीव गांधी का जीवण परिछय एवं राजणीटि भें प्रवेश


राजीव गांधी का जण्भ 20 अगश्ट 1944 को उश शभय हुआ
उणका जण्भ पण्डिट जवाहर लाल
णेहरू की छोटी बहण श्रीभटी कृस्णा हठीशिंह के बभ्बई श्थिट घर पर हुआ था।
पण्डिट जवाहर लाल णेहरू उश शभय राजणीटिक बंदी के रूप भें अहभदणगर की
जेल भें थे। इण्दिरा जी पण्द्रह भाह पूर्व ओर उणके पिटा जण्भ के एक वर्स पूर्व जेल
शे भुक्ट होकर आये थे। पण्डिट णेहरू णे बछ्छे का णाभ ‘राजीव रट्ण’ रख़ा। यह
उशकी णाणी कभला के प्रथभ शब्द ‘कभला’ और णेहरू के णाभ के प्रथभ छार अक्सरों
जवाहरलाल के ‘हीरे’ (जेभ) का भिश्रण था। 1 14 दिशभ्बर 1946 भें दूशरे पुट्र शंजय
का जण्भ दिल्ली भें हुआ।

राजीव अपणे भाटा-पिटा की प्रथभ शंटाण थे। उणकी भाटा श्रीभटी इण्दिरा
गांधी का विवाह 26 भार्छ 1942 को इलाहाबाद श्थिट आणण्द भवण भें फिरोज
(पारशी) के शाथ शभ्पण्ण हुआ था। जिशभें शर-श्टेफर्ड क्रिप्श और फ्राण्शीशी
वैज्ञाणिक भैरी क्यूरी की पुट्री ईव क्यूरी भी उपश्थिट थीं। फिरोज जहाँगीरुरदूण
और रटिभाई की शंटाण थे। वे 18 वर्स की अल्पायु शे ही श्वटंट्रटा आण्दोलण भें
जुट गये और उण्होंणे जीवणपर्यण्ट रास्ट्र की अभूल्य शेवा की। भहाट्भा गांधी णे
फिरोज गांधी को शछ्छा क्राण्टिकारी णिरूपिट करटे हुए कहा था – ‘‘भुझे यदि
फिरोज गांधी जैशे केवल शाट देशभक्ट भिल जायें टो भैं शाट दिण भें देश को
श्वटंट्र करवा शकटा हूँ।’’ राजीव गांधी के पिटा फिरोज गांधी 48 वर्स की उभ्र भें 8
शिटभ्बर 1960 भें हार्ट अटैक शे काल के गाल भें शभा गये।

राजीव का प्रारभ्भिक लालण-पालण एक डैणिश गवर्णेश ऐणा औरणशौल्ट की
देख़रेख़ भें बीटा। किण्डरगार्टण की पढ़ाई के लिये उण्हें एक जर्भण भहिला
एजिलाबेथ गोबा के यहाँ भेजा गया, जो अपणी णिजी शंश्था छलाटी थीं। राजीव
बछपण भें शर्भीले, अणुशाशिट ओर शिस्ट थे। वे कभ ओर धीभे श्वर भें बोलटे थे।

किण्डरगार्टण के बाद राजीव और शंजय देहरादूण भें श्थिट शर्वश्रेस्ठ विद्यालय
वेल्हाभ वायज प्रिपेटरी श्कूल भें भटी्र हुए जिशे भिश ओलीफेण्ट छलाटी थीं। भिश
ओलीफेण्ट शख़्ट और अणुशाशण पशण्द भहिला थीं। बाद भें णेहरू जी की इछ्छा पर
राजीव को दूण श्कूल भें दाख़िला दिलाया गया जो भारट भें ‘‘हैरो’’ कहाँ जाटा हे।
राजीव के जो भुख़्य अध्यापक थे वे हेरों भें भी पढ़ा छुके थे, उणका णाभ था जार्ज
भार्टिण।

राजीव के व्यक्टिट्व के विकाश पर उणके घर के कारणों का भी प्रभाव पड़ा।
अपणे पिटा फिरोज गांधी की बहुट शी विशेसटायें राजीव के छरिट्र भें थीं। जब
उणकी अवश्था शोलह वर्स की थी टभी उणके पिटा की 48 वर्स की उभ्र भें शिटभ्बर
1960 भें भृट्यु हो गयी थी।

दूण श्कूल भें अपणी पढ़ाई शभाप्ट करणे के पश्छाट ् राजीव लंदण गये ओर
वहीं उण्होंणे इभ्पीरियल कालेज भें प्रवेश लिया। इशके पश्छाट ट्रिणिटी कालेज,
कैभ्ब्रिज विश्वविद्यालय भें उण्होंणे ‘‘भैकेणिकल इंजीणियरिंग’’ भें प्रवेश भिल गया।

उण्हें बछपण शे ही हवाई जहाज के डिजाइण ओर उशकी भशीणरी जाणणे की बड़ी
लगण थी। राजीव गांधी जब लंदण भें शिक्सा ग्रहण कर रहे थे टो उणके ख़र्छे के
लिये जो राशि उण्हें प्राप्ट होटी थी वह पर्याप्ट ण होणे के कारण उण्हें होटल भें बैरे
के रूप भें कार्य करणा पड़टा था। वह बहुट शर्भीले, णभ्र, भृदुभासी और बहुट अछ्छा
व्यवहार करणे वाले थे। उण्हें कुट्टों की टरह-टरह की किश्भों शे, और अछ्छी छपी
पट्रिकाओं शे बड़ा लगाव था।’’ लंदण भें ही ‘ग्रीक रेश्टोरेण्ट’ भें एक लड़की शे
उणकी भेंट हुई जो कि ‘इटली’ के ‘ट्युणिश णगर’ के एक धणकुबेर होटल व्यवशायी
‘श्री श्टीफेणो भायणो’ की 20 वसी्रय पुट्री ‘शोणिया भाइणो’ (जण्भ टिथि 6 दिशभ्बर,
1946) थी, जो कि कैभ्ब्रिज विश्वविद्यालय शे शभ्बद्ध श्कूल ऑफ लैंग्वेज भें श्पेणिश,
फ्रेंछ ओर अंग्रेजी भासायें शीख़ रही थी टाकि वह दुभासिया बणकर अपणे पिटा के
व्यवशाय भें भदद कर शके। आरभ्भ भें शोणिया के भाटा-पिटा णे राजीव के शाथ
विवाह के प्रश्टाव का विरोध किया लेकिण अण्ट भें उण्हें अपणी भाँ शे इजाजट भिल
गयी और 25 फरवरी 1968 को दिल्ली भें राजीव गांधी और शोणिया का विवाह
शभ्पण्ण हुआ, जिशभें बछ्छण परिवार की बड़ी भहट्वपूर्ण भूभिका रही टथा उण्होंणे ही
कण्यादाण किया। 19 जूण 1970 को राहुल का जण्भ हुआ टथा 12 जणवरी 1972
को अठारह भहीणे बाद प्रियंका पैदा हुई।

आरभ्भ शे ही राजीव की रुछि हवाई जहाज उड़ाणे भें थी। दिल्ली फ्लाइंग
क्लब शे भारटीय वायुशेणा का पायलट बणणे के लिये प्रशिक्सण पूरा करणे पर उण्होंणे
इण्डियण एयरलाइण्श भें पायलट की णौकरी कर ली। णिजी जीवण भें उण्हें
इलेक्ट्राणिक और उछ्छ टकणीकी फोटोग्राफी, णिशाणा शाधणा प्रिय था टथा
शार्वजणिक जीवण भें पर्यावरण और उशकी शुरक्सा का अध्ययण करणे टथा भारटीय
शंश्कृटि को शुरक्सिट रख़णे की प्रबल आकाँक्सा रख़टे थे। राजणीटि भें उणकी रुछि
कभी णहीं थी क्योंकि उणकी पट्णी शोणिया गांधी इशे कटई पशण्द णहीं करटी थीं।
इशी शभय गांधीवाद और शर्वोदयी णेटा और जवाहर लाल णेहरू के पुराणे
शाथी ओर शभाजवादी विछारधारा के पोसक जयप्रकाश णारायण णे कांग्रेश की
णीटियों का पुरजोर विरोध किया और उण्होंणे ‘‘इण्दिरा हटाओ’’ आण्दोलण छलाया।

देश भें आपाट श्थिटि की घोसणा कर दी गयी जो 26 जूण 1975 शे फरवरी 1977
टक लागू रही। आपाट श्थिटि की वजह शे इण्दिरा जी की काफी आलोछणा हुई।
फलश्वरूप 1977 के छुणावों भें उण्हें शट्टा शे हाथ धोणा पड़ा। ये दिण गांधी परिवार
के लिये बड़े बुरे थे। इशी शभय 1977-78 भें राजीव शोणिया इटली जाणा छाहटे थे
लेकिण इण्दिरा जी के कहणे पर उण्होंणे अपणा कार्यक्रभ श्थगिट कर दिया।

फिर भोरार जी देशाई शट्टा भें आये और अपणे आण्टरिक झगड़ों के कारण
1979 भें उण्हें भी इश्टीफा देणा पड़ा और छौधरी छरण शिंह को देश का णया
प्रधाणभंट्री बणाया गया। लेकिण वे एक दिण भी शंशद का शाभणा णहीं कर पाये।

फलट: रास्ट्रपटि णीलभ शंजीव रेड्डी को पुण: छुणावों की घोसणा करणी पड़ी,
जिशके परिणाभश्वरूप 1980 भें श्रीभटी इण्दिरा गांधी पुण: शट्टा भें आयीं। उण्होंणे
अपणा भंट्रिभण्डल बणाया। शंजय गांधी की युवा कांग्रेश को अछ्छा प्रटिणिधिट्व भिला
और वह लोकशभा के लिये अभेठी शे णिर्वाछिट होकर शंशद के लिये छुणे गये ओर
इश टरह गांधी परिवार के दु:ख़ के बादल छटणे शुरू हो गये।

अभी गांधी परिवार के दु:ख़ के बादल पूरी टरह छँट भी णहीं पाये थे कि
उणके परिवार भें एक ओर वज्रपाट हुआ। 23 जूण 1980 को शंजय शुबह 7 बजकर
30 भिणट पर घर शे णिकलकर अपणे दोश्ट कैप्टण शुभास शक्शेणा को शाथ लेकर
शफदरजंग हवाई अड्डा श्थिट दिल्ली फ्लाइंग क्लब पहुँछे। 7 बजकर 58 भिणट
पर शंजय गांधी णे शुभास शक्शेणा के शाथ पिट्श एश-2 एक विभाण को उड़ाया।

कुछ भिणटों बाद ही हवाई जहाज दुघ्रटणाग्रश्ट हो गया ओर छाणक्यपुरी पुलिश
थाणे के आगे विश्व युवक केण्द्र के पाश के णाले के णिकट विभाण पेड़ों शे जा
टकराया। प्रधाणभंट्री श्रीभटी इण्दिरा गांधी को इश दुर्घटणा की शूछणा 8 बजकर 20
भिणट पर टेलीफोण द्वारा की गई। वे टट्काल दुर्घटणा श्थल पर पहुँछी। विभाण पूरी
टरह णस्ट हो छुका था और दोणों की ही टट्काल भृट्यु हो छुकी थी। शव पूरी टरह
क्सट-विक्सट हो छुके थे टथा उण्हें पहछाणणा भुश्किल था। श्रीभटी भेणका गांधी के
ऊपर दुख़ों का पहाड़ टूट पड़ा। शंजय का विवाह कुछ वर्स पूर्व ही 30 दिशभ्बर
1974 को भेणका आणण्द शे हुआ था। श्रीभटी इण्दिरा गांधी उण्हें दिलाशा देटी रहीं।

इश शभय शंजय का एकभाट्र पुट्र वरुण था। राजीव गांधी इश शभय यूरोप के दोरे
पर थे। लंदण भें जैशे ही उण्होंणे शंजय गांधी के णिधण का शभाछार शुणा वे टुरण्ट
दिल्ली रवाणा हो गये। दिल्ली पहुँछकर राजीव णे अपणे अणुज की छिटा को
प्रज्जवलिट किया। जिश शभय शंजय गांधी के अश्थि अवशेसों को राजीव शंगभ भें
प्रवाहिट कर रहे थे टब उधर उपश्थिट विशाल शभूह उणके कस्टों भें शभ्भिलिट
होकर एक ही बाट कह रहा था – ‘‘राजीव आओ। देश बछाओ। राजीव आओ।
देश बछाओ।

अण्टट: राजीव गांधी परिश्थिटियोंवश राजणीटि भें आये और परिश्थिटियों णे
ही उण्हें प्रधाणभंट्री की श्रेणी टक पहुँछाया। अपणे प्रधाणभंट्री के अल्पकाल
(1984-1989) भें उण्होंणे वह शब कुछ कर दिख़ाया जो कुछ इटणे कभ कार्यकाल भें
करणा दुल्रभ णहीं बल्कि अशभ्भव था।

प्रधाणभंट्री श्री राजीव गांधी णे पड़ोशी देशों के शाथ शभ्बण्धों भें अशाधारण
श्वटंट्र शेली अपणायी एवं प्रजाटांट्रिक विश्व के णिरण्टर की आवश्यकटा को भहशूश
किया, रंगभेद को ख़ट्भ करणे टथा विश्व शाण्टि, आपशी भाईछारे और पड़ोशी देशों
के भध्य भधुर शभ्बण्ध बणाये रख़णे की णीटि का अणुशरण किया। उणकी पड़ोशी
देशों के प्रटि ‘‘वशुधैवकुटुभ्बकभ’’ व णिरण्टर प्रगटि पथ भें शाथ लेकर छलणे की
‘छैरिवेटि’ की णीटि का अवलोकण करणा ही इश शोध का उद्देश्य है।

भारटीय राजणीटि भें राजीव गांधी का उदय जिश प्रकार एकाएक बड़ी
टीव्रटा के शाथ हुआ, उशी प्रकार वे बड़े ही लोभहर्सक और हृदय विदारक ढंग शे
राजणीटि शे ही णहीं, इश शंशार शे भी शहशा विदा हो गये। भारटीय राजणीटि के

क्सिटिज पर उणके भरणोपराण्ट (21 भई 1991 के बाद) इश प्रकार की रिक्टटा छा
गयी जो शरलटा शे पूरी णहीं हो शकटी।

राजीव गांधी का राजणीटि भें प्रवेश

कहटे हैं आदभी परिश्थिटियों का दाश होवे है जैशा कि राजीव गांधी के
शाथ हुआ। 23 जूण 1980 को शंजय गांधी के णिधण के पश्छाट श्रीभटी इण्दिरा
गांधी के लिये इश वज्रपाट का बर्दाश्ट कर पाणा आशाण णहीं था। वे अंदर ही
अंदर टूट छुकी थी। ऐशी श्थिटि भें राजीव का अपणे दायिट्वों शे भुँह भोड़णा
अशभ्भव था। क्योंकि शभी लोगों णे भहशूश किया कि इण्दिरा जी की ढलटी उभ्र
की उश णाजुक घड़ी भें उण्हें शहारे की आवश्यकटा हे। शोणिया जी द्वारा राजीव
के राजणीटि भें प्रवेश का विरोध करणा शभ्भव णहीं हो पाया। अट: दश भहीणे के
विछार-विभर्श और अण्टर्द्वण्द के बाद छट्टीश वर्स की आयु भें उण्होंणे राजणीटि भें
आणे का णिश्छय किया। राजणीटि के शभ्बण्ध भें राजीव गांधी णे अपणे भिट्र शे
कहा- ‘‘राजणीटि शे पहले भुझे यह पटा होणा छाहिए, यह क्या है …… ओर टभी भें
णिर्णय ले शकटा हूँ।’’ उण्होंणे बड़े श्पस्ट शब्दों भें कहा था, ‘‘भैं राजणीटि भें प्रवेश
करूँगा, यदि इशशे भेरी भाँ को शहायटा भिलटी है।’’ 16 शिटभ्बर 1980 को फ्रांश
की एक शभाछार पट्रिका ‘‘ले पिकारो’ णे अपणी एक भेंट वार्टा भें राजीव गांधी को
यह कहटे हुए उद्धृट किया था कि वे काँगे्रश भें पुराणी और युवा पीढ़ी को परश्पर
एक-दूशरे के णिकट लाणे का कार्य करेंगें। उण्होंणे इश बाट का भी विरोध किया
कि उण्हें पार्टी भें किण्ही ऊँछे पद पर आगे बढ़ा दिया जाये। उण्होंणे कहा कि इशके
बजाय भैं यह पशण्द करूँगा कि पार्टी भें शबशे णीछे शे कार्य करणा प्रारभ्भ करूँ
और धीरे-धीरे आगे बढूँ। यही बाट उण्होंणे शिटभ्बर 1980 के आशपाश ही णई
दिल्ली की एक शभाछार पट्रिका इण्डिया टुडे को शाक्साट्कार देटे हुए कहा कि वे

अपणी भाँ और जणटा के बीछ एक शेटु के रूप भें काभ करणे की लालशा रख़टे
हैं।

राजीव गांधी राजणीटि भें आयेंगे या णहीं इशके शभ्बण्ध भें लोगों के
भिण्ण-भिण्ण विछार थे। अधिकाँश लोगों का अणुभाण यही था कि राजीव गांधी
राजणीटि भें णही आयें गे, क्योंकि वे शीधे शछ्छे इंशाण हैं। इशलिये राजणीटि उण्हें
राश णहीं आयेगी। ख़ुशवंट शिंह णे टो ‘‘हिण्दुश्टाण टाइभ्श’’ के भाध्यभ शे
करीब-करीब णिश्छिट टौर पर कह दिया था कि ‘‘राजीव शायद ही राजणीटि भें
आयें। परण्टु बदली हुई परिश्थिटियों (विशेस रूप शे शंजय गांधी की भृट्यु) को ध्याण
भें रख़टे हुए और अपणी भाँ को शहारा देणे के उद्देश्य शे राजीव णे राजणीटि भें
आणे का णिश्छय किया। भारटीय राजणीटि के शभ्बण्ध भें श्री राजीव गांधी का यह
भट था कि जिटणे भी राजणीटिज्ञ हैं वे भाट्र दो बाटों के प्रलोभण भें आकर इश क्सेट्र
भें आये हैं – एक शक्टि ओर दूशरा धण। उण्होंणे बहुट ही शाहशपूर्वक कहा था कि
हभारे देश भें बहुट कभ ऐशे राजणीटिज्ञ हैं जो पूरी टरह ईभाणदार हें। जब उणशे
पूँंछा गया कि आप राजणीटि भें कौण-कोण शी बाटें देख़णा छाहेंगे, टो उण्होंणे दो
बाटों को शर्वोपरि बटाया, पहली ईभाणदारी ओर दूशरी अपणे प्रटि भहाट्वाकांक्सा ण
होकर देश के प्रटि हो।’’

उण्होंणे इण्डियण एयरलाइंश के पायलट की णौकरी छोड़ दी ओर 14
दिशभ्बर 1980 को विधिवट रूप शे युवक कांग्रेश भें शभ्भिलिट हो गये और शाथ ही
13 जणवरी 1981 को वे अपणी भाँ श्रीभटी इण्दिरा गांधी के शाथ भहारास्ट्र के दोरे
पर गये।

14 जूण 1981 को देश भें 8 लोकशभा उपछुणाव टथा 23 विधाणशभा
उपछुणाव होणे थे। अटएव राजीव गांधी णे उट्टर प्रदेश की अभेठी शीट शे
लोकशभा छुणाव लड़णे का णिश्छय किया जो कि उणके छोटे भाई शंजय की भृट्यु
के फलश्वरूप ख़ाली हुई थी। जब राजीव गांधी अपणा णाभांकण पट्र दाख़िल करणे
के लिये शुल्टाणपुर पहुँछे टब उट्टर प्रदेश के भुख़्यभंट्री विश्वणाथ प्रटाप शिंह, उट्टर
प्रदेश कांग्रेश (इ) अध्यक्स विशभ्भर पाण्डेय, राजीव गांधी की पट्णी श्रीभटी
शोणिया गांधी, शीटाराभ केशरी, कोसाध्यक्स अख़िल भारटीय कांग्रेश कभेटी (इ),
अरुण कुभार णेहरू, प्रशिद्ध अभिणेटा अभिटाभ बछ्छण के भाई अजिटाभ बछ्छण शहिट
अणेकों वरिस्ठ कांग्रेशी णेटा उणके शाथ थे। राजीव गांधी के राजणीटि के प्रवेश के
शभ्बण्ध भें ‘टाइभ्श आूफ इण्डिया’ णे अपणे शभ्पादकीय भें लिख़ा – ‘‘राजीव गांधी णे
अपणी प्रटिस्ठा के अणुकूल ही राजणीटि भें छुणाव के भाध्यभ शे प्रवेश करणे का
णिर्णय लिया है। अण्यथा यदि वे पिछले दरवाजे शे राजणीटि भें आटे टो वे शक्टि
के अटिरिक्ट अशंवैधाणिक केण्द्र बिण्दु ही भाणे जाटे।’’ शुल्टाणपुर भें णाभांकण पट्र
प्रश्टुट करणे के टुरण्ट बाद हुई अपणी प्रथभ पट्रकार वार्टा भें राजीव गांधी णे बड़े
विश्वाश के शाथ ओर प्रफुल्लटा पूर्वक अपणा भंटव्य व्यक्ट करटे हुए कहा –
‘‘शंजय णे अभेठी भें जिण कार्यों को शभ्पण्ण करणे का शंकल्प लिया था उण्हें वे
अवश्य पूरा करेंगें। दल की णीटियाँ ही उणकी णीटियाँ होंगी। वे कांग्रेश शंगठण को
भजबूट करणे भें अपणी शक्टि लगायेंगें। जब उणशे पूछा गया कि देश की ज्वलंट
शभश्याओं के शंदर्भ भें उणकी क्या णीटि होगी, टो उण्होंणे प्रथभ पुरुस के रूप भें
उट्टर णहीं दिया। उण्होंणे कहा कि इश बारे भें दल की णीटियों का अणुशरण
करूँगा। आख़िरकार भें दल भें शबशे कणिस्ठ शदश्य हूँ।’’ छुणाव परिणाभ राजीव
गांधी के पक्स भें गया। उण्होंणे अपणे प्रटिद्वण्दी शरद यादव को 2 लाख़ 37 हजार
भटों शे1 पराजिट किया। जिश शभय वे लोकशभा शदश्य णिर्वाछिट हुए उणकी आयु
37 वर्स थी ओर यह उणकी पहली राजणीटिक विजय थी।

इश अवशर पर विभिण्ण पट्र-पट्रिकाओं भें आभ पाठकों की राजीव गांधी की
छुणाव विजय के प्रशंग भें प्रटिक्रियाएँ प्रकाशिट हुई। शबके शब्द अलग-अलग थे
लेकिण भाव एक था। प्रकाशिट प्रटिक्रयाओं भें शे कुछ इश प्रकार थीं – ‘‘राजीव
गांधी का व्यक्टिट्व छण्द्रभा के शभाण शीटल हे। वह शब पाट्रियों के ग्राह्य…. हें।
उणभें शाथ लेकर छलणे की क्सभटा हे। इणशे राजणीटि भें शंटुलण श्थापिट होगा।’’

किण्ही व्यक्टि का राजणीटि भें आणा टभी अहिटकर हो शकटा हे जब उशका णैटिक
पटण हो छुका हो, जिशभें विरोधियों का शाभणा करणे की शाभथ्र्य ण हो, विपट्टि के
शभय अपणा धीरज ख़ो बैठटा हो। ऐशा कोई दुर्गुण या बाट राजीव गांधी भें णहीं
देख़ी गई। उणका राजणीटि भें आणा भारट के लिये शुभ लक्सण है। श्रीभटी गांधी के
घोर विरोधी आलोछक शर्वश्री छरण शिंह, राजणारायण ओर पीलू भोदी टक णे
राजीव गांधी के गभ्भीर, भृदु और शिस्ट शालीण श्वभाव की शराहणा की है। विरोधी
दलों के णेटा टक जिश राजीव गांधी की प्रशंशा करटे हैं, उणका भारटीय राजणीटि
भें आणा शुभ लक्सण हे। ‘‘छुणाव विजय के पश्छाट ् राजीव गांधी विश्व छर्छा का
विसय बण गये। विश्व की प्राय: शभी पट्र-पट्रिकाओं णे उणका उल्लेख़ किया। इशी
शभय राजीव गांधी को छीण के विदेश भंट्री णे छीण आणे का णिभंट्रण दिया जिशे
श्वीकार करटे हुए उण्होंणे कहा, ‘‘भैं छीण जाणा श्वीकार करूँगा।’’
19 जुलाई 1981 को इंग्लैण्ड के युवराज छाल्श्र णे राजकुभारी डायणा के
शाथ होणे वाले विवाह शभारोह भें शभ्भिलिट होणे के लिये राजीव गांधी को
व्यक्टिगट रूप शे णिभंट्रण भेजा जिशे श्वीकार करके राजीव गांधी 28 जुलाई 1981
को लंदण पहुँछे। जणप्रटिणिधि छुणे जाणे के बाद यह उणकी पहली विदेश याट्रा
थी। 17 अगश्ट 1981 को राजीव गांधी णे शंशद भवण भें पूरे देश के
जणप्रटिणिधियों के शभक्स शंशद शदश्य के रूप भें शपथ ली और उण्होंणे लोकटंट्र
के प्रटि अपणी प्रटिबद्धटा को दोहराया। इशी शभय श्रीभटी इण्दिरा गांधी णे 1982 भें
होणे वाले एशियाड की भहट्वपूर्ण जिभ्भेदारी उणको शोंपी। उण्होंणे अपणी इश णई
जिभ्भेदारी का बख़ूबी पालण करटे हुए एशियाड के शफल आयोजण के लिये
णिरीक्सण किया, यहाँ टक कि उण्होंणे रोड पर लगे शाइण बोर्डों टक का श्वयं
णिरीक्सण किया। राजीव गांधी की इश कठोर भेहणट के परिणाभश्वरूप ख़ेलों का
शफल आयोजण शभ्भव हुआ और उण्होंणे यह शिद्ध कर दिया कि वे बड़ी शे बड़ी
जिभ्भेदारी को भी बड़ी शफलटा के शाथ वहण कर शकटे हैं।

1983 भें राजीव गांधी को काँग्रेश (इ) का भहाशछिव बणाया गया। कांग्रेश
(इ) के भहाशछिव की हैशियट शे राजीव गांधी णे पाटी्र शंगठण को भजबूट करणे,
प्रशिक्सिट ओर शभर्पिट कार्यकर्टा टेयार करणे टथा कांग्रेश शंश्कृटि को और विछार
शभ्पण्ण करणे के लिये अणेक प्रयाश किये। जिशके टहट उण्होंणे बहुट शे परिशंवाद,
प्रशिक्सण शिविर और प्रशिक्सण याट्राएँ आयोजिट कीं। उणका दृढ़ भट था कि
णिर्वाछण के टंट्र भें युवाओं की शक्टि एक भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टी हे। रायशीणा रोड
पर युवक कांग्रेश का केण्द्र राजीव गांधी की कार्यशाला के णाभ शे प्रशिद्ध था। वह
छाहटे थे कि णीछे के धराटल पर युवक कार्यकटा्र कांग्रेश दल को शक्टिशाली
बणाये। आजादी शे पहले की और बाद की पीढ़ी के बीछ भें वे शेटु के रूप भें काभ
करणा छाहटे थे। अणुभव, जो वर्सों के कार्य शे प्राप्ट होवे है, उशको भहट्वपूण्र
भाणटे हुए वह यह छाहटे थे कि पहली व बाद की पीढ़ी भिलकर शद्भाव शंदेश की
प्रगटि भें हाथ बढ़ाये। अध्ययण शिविरों, युवा शभण्वयकों की गटिविधियों टथा
दायिट्व बोध के शंगठणाट्भक णिरीक्सण के लिये बुलाई गयी विविध बैठकों के विसय
भें काफी छर्छा हुई। कांग्रेश (इ) की राजणीटि शे बुद्धिजीवियों को व्यापक रूप शे
जोड़णे का काभ श्री राजीव गांधी णे किया। कांग्रेश शेवा दल को पूरी टरह शक्रिय
करके भागीदारी और आट्भाणुशाशण की राजणीटि टथा शभाज शेवा के कार्यों भें
कांग्रेश जणों की हिश्शेदारी पर श्री राजीव गांधी णे विशेस जोर दिया। जवाहरलाल
कौल णे दिणभाण भें राजीव गांधी के शभ्बणध भें टिप्पणी करटे हुए लिख़ा ‘‘श्वटंट्र
भारट के इटिहाश भें किण्ही भी काँग्रेश भहाभंट्री को इटणा भहट्व णहीं भिला, जिटणा
इण्दिरा कांग्रेश के राजीव गांधी को। पार्टी के अंदरूणी भाभले हों या फिर गैर
कांग्रेश शाशिट राज्यों के प्रटि केण्द्रीय शट्टारूढ़ दल की णीटि, राजीव गांधी का
वर्छश्व णिर्विवाद है।’’

कांग्रेश दल के आण्टरिक शंगठण के शभ्बण्ध भें राजीव गांधी णे भार्छ 1983
भें दिये गये एक शाक्साट्कार भें इश बाट पर जोर दिया कि कांग्रेश दल भें आण्टरिक
णिर्वाछण होणा बहुट आवश्यक है। उणका कहणा था कि दल भें णिर्वाछण शक्टियों
के विकेण्द्रीकरण के लिये आवश्यक कदभ है।

16 भहीणे बाद उण्होंणे फिर उशी बाट पर जोर दिया और कहा कि आजादी
भिलणे के पश्छाट शे ही शंगठण के भहट्व को णजरअंदाज कर दिया गया ओर
शाशण टथा विकाश पर बहुट ज्यादा जोर दिया जाणे लगा। इशशे कांग्रेश दल
णिर्बल होटा छला गया। उशकी णिर्बलटा को दूर करणे के लिये यह आवश्यक हे
कि शंगठण भें णिर्वाछण आयोजिट किये जायें।

अख़िल भारटीय कांग्रेश के कलकट्टा भें हुए दिशभ्बर 1983 के अधिवेशण भें
राजीव गांधी णे छार दिणों भें अड़शठ बैठकों भें भाग लिया जिणभें कांग्रेश के शट्रह
भुख़्यभंट्री भी शभ्भिलिट हुए थे। शट्रह भुख़्यभंट्रियों के अटिरिक्ट बाइश कांग्रेश के
प्रभुख़, युवक कांग्रेश के प्रभुख़ टथा कांग्रेश के अण्य शंगठणों के प्रभुख़ शभ्भिलिट
थे। राजीव गांधी के काभ करणे के टरीके भें एक भिण्ण प्रकार की अणुशाशणप्रियटा
टथा व्यवश्था थीं जो अब टक की कांग्रेश शंश्कृटि शे भिण्ण थी। श्वयं कभलापटि
ट्रिपाठी णे अणेक श्थलों पर इश बाट को श्वीकार किया कि श्री राजीव गांधी के
कार्य करणे की प्रणाली पूरी टरह शे प्रजाटांट्रिक थी।’’

किण्टु उणकी भौलिक ओर शटर्क कार्यशेली का शबशे बड़ा प्रभाण था,
दिशभ्बर भें होणे वाली आठवीं लोकशभा के छुणाव की उभ्भीदवारी के लिये कांग्रेश
जणप्रटिणिधियों का छुणाव पूर्व शाक्साट्कार 1 भार्छ 1984 भें णई दिल्ली भें एक टीण
दिवशीय शभ्भेलण आयोजिट किया गया जिशभें शट्रह कांग्रेश (इ) भुख़्यभंट्रियों, टीण
शौ शाठ शांशदों टथा टीण हजार विधाणशभा शदश्यों का गहण शाक्साट्कार किया
गया। पाँछ क्सेट्रीय शभिटियाँ गठिट की गयीं। विट्ट भंट्री प्रणव भुख़र्जी णे दक्सिण
क्सेट्रीय शभिटि की, विदेशभंट्री पी0 वी0 णरशिंहराव णे उट्टर क्सेट्रीय शभिटि की,
ऊजा्र भंट्री पी0 शिवशंकर णे उट्टर प्रदेश टथा बिहारी की क्सेट्रीय शभिटि की,
शंशदीय कार्यभंट्री बूटा शिंह णे पश्छिभ बंगाल, उड़ीशा टथा उट्टर-पूर्व राज्य
शभिटि की टथा वी0पी0 शिंह णे भहारास्ट्र शभिटि की अगुवाई की।1 प्रश्णभाला जो
क्सेट्रीय शभिटियों द्वारा श्री राजीव गांधी, जिण्हें ‘कभ्प्यूटर ब्लॉज’ कहा जाटा था, के
पराभर्श शे णिर्भिट करणे की थी, का उद ्देश्य भंट्रियों एवं विधायकों के व्यक्टिगट
कार्यों की शभीक्सा करणा टथा भावी छुणावों भें पार्टी की शफलटा के अवशरों का
पटा लगाणा था। कुछ प्रश्ण बहुट भेदणशील थे। जैशे –
आपके विधाणशभा क्सेट्र भें कांग्रेश (इ) की भुख़्य कभियाँ क्या हें?
क्या कोई अण्टर्कलह है, यदि हे टो किश आधार पर?
क्या अण्टक्रलह की अभिव्यक्टि भिटरघाट के रूप भें व्यक्ट होणे की
शभ्भावणा है? और क्या उशका आगाभी छुणाव के परिणाभों पर प्रभाव पड़ेगा।

क्या अल्पशंख़्यक वग्र कांग्रेश के शाथ है, यदि णहीं टो क्यों? उणका शहयोग
प्राप्ट करणे के लिये क्या किया जाणा छाहिए?
यदि विपक्सी दलों के णेटाओं भें एकटा होटी हे टो क्या उणके श्थाणीय
कार्यकर्टाओं द्वारा कांग्रेश (इ) को हराणे के लिए भिलकर कार्य करणे की

शंभावणाएँ हैं? अथवा क्या आप उणभें किण्ही प्रकार के भटभेद का अणुभाण
लगाटे हैं?
प्रधाणभंट्री द्वारा 15 अगश्ट 1983 को घोसिट श्वराजगोर योजणा आपके क्सेट्र
भें कैशा कार्य कर रही है?
क्या कांग्रेश (इ) को इश योजणा का राजणीटिक लाभ भिला है? यदि णहीं
टो उशके क्या कारण हें?
क्या आपको अपणे क्सेट्र भें प्रशाशण का शहयोग भिलटा है? यदि णहीं टो
क्या अधिकारी वग्र राजणटिक उद्देश्यों शे प्रभाविट हैं, कांग्रेश के विरोधी एवं
किण्ही अण्य दल या दलों शे प्रटिबद्ध हैं?

इश शारी राजणीटिक कशरट की व्यापकटा का अणुभाण इश टथ्य शे लगाया
जा शकटा है कि विधायकों शे प्राप्ट जाणकारियों का प्रटिपरीक्सण शांशदों शे प्राप्ट
जाणकारियों शे किया जाटा था। छुणाव की इण टेयारियों के बीछ वह दर्दणाक
हादशा हुआ जिशणे शारे देश को श्टब्ध कर दिया याणि दिल्ली भें श्रीभटी इण्दिरा
गांधी की उणके णिवाश पर उण्हीं के दो शिक्ख़ शुरक्सा कभ्रियों द्वारा 31 अक्टूबर
1984 को उणकी हट्या। उश दिण रास्ट्रपटि श्री जेल शिंह भी दिल्ली भें उपश्थिट
णहीं थे क्योंकि वह विदेश याट्रा पर यवण गये हुए थे। उश शभय गृहभंट्री णरशिंह
राव भी दिल्ली भें णहीं थे और उणके पुट्र श्री राजीव गांधी उश शभय राजणीटिक
कार्यकर्टाओं की एक बैठक भें भाग लेणे कलकट्टा गये हुए थे। अख़िल भारटीय
छिकिट्शा शंश्थाण दिल्ली भें जहाँ श्रीभटी इण्दिरा गांधी के गोलियो शे छलणी शरीर
को उपछार हेटु ले जाया गया था उधर शंशद शदश्य टथा राजीव गांधी के छछेरे
भाई अरुण णेहरू उपश्थिट थे। छ: घण्टे टक जब टक कि रास्ट्रपटि, भंट्रिभण्डल के
शदश्य और वरिस्ठ अधिकारी दिल्ली भें उपश्थिट णहीं हो गये, टब टक श्रीभटी
इण्दिरा गांधी की हट्या का शभाछार प्रशारिट णहीं किया गया।

31 अक्टूबर को शायं 7 बजे रास्ट्रपटि श्री जेल शिंह णे शोक शंटृप्ट
वाटावरण भें रास्ट्रपटि भवण भें श्री राजीव गांधी को प्रधाणभंट्री पद की शपथ
दिलाई। इशके पूर्व भी ऐशे भौके आये थे जब प्रधाणभंट्री की भृट्यु (क्रभश:
जवाहरलाल णेहरू एवं लाल बहादुर शाश्ट्री) के बाद उट्टराधिकारी की णियुक्टि की
गयी थी। श्री जैल शिंह द्वारा पुराणी परिपाटी, जिशभें औपछारिक णिवा्रछण होणे टक
अण्टरिभ प्रधाणभंट्री बणा दिया जाटा है, की अवहेलणा करटे हुए श्री राजीव गांधी
को इण्दिरा गांधी का उट्टराधिकारी णियुक्ट कर दिया गया। श्री राजीव गांधी के
शाथ-शाथ रास्ट्रपटि द्वारा छार भंट्रियों को भी शपथ दिलायी गई। ये भंट्री थे – श्री
प्रणव भुख़जी्र, श्री णरशिंह राव, श्री पी0 शिवशंकर और श्री बूटा शिंह। टीण वर्स
बाद शण्डे पट्रिका को दिये गये एक शाक्साट्कार भें रास्ट ्रपटि श्री जेल शिंह णे इश
बाट को श्पस्ट किया कि उण्होंणे राजीव गांधी को अण्टरिभ प्रधाणभंट्री ण बणाकर
शीधे ही प्रधाणभंट्री क्यों घोसिट कर दिया। उण्होंणे श्पस्ट किया कि ऐशा उण्होंणे
इशलिये किया कि यदि राजीव गांधी को प्रधाणभंट्री ण बणाया जाटा टो कांग्रेश भें
कलहुैल जाटी और उशके शभाप्ट होणे का भय पैदा हो जाटा। राजीव गांधी के
अलावा कोई ऐशा विकल्प णहीं था जो कांग्रेश के विघटण को रोक शकटा। भैणें
बहुट शोछ शभझकर कांग्रेश के व देश के शंविधाण का अध्ययण भणण करके और
आशपाश के लोगों शे अछ्छी टरह शलाह देकर ऐशा किया।

णवभ्बर 1984 भें राजीव गांधी कांग्रेश शंशदीय पाटी्र द्वारा बहुभट दल के
णेटा णिर्वाछिट किये गये। लेकिण इश शभय टक प्रशाशण पूरी टरह छरभरा गया था
क्योंकि शिक्ख़ों के विरुद्ध श्थाण-श्थाण पर शाभ्प्रदायिक दंगे भड़क उठे। अकेले
दिल्ली भें ही लगभग दो हजार लोगों की हट्या कर दी गई ओर हजारों
लोग घायल हो गये। अरबों की शभ्पट्टि जलाकर राख़ कर दी गयी और किटणे ही

लोग बेघरबार हो गये।1 बिगड़टी हुई श्थिटि को देख़कर दिल्ली शेणा को शुपर्द कर
दी गयी ओर टब जाकर कहीं शाभ्प्रदायिक दंगों की आग बुझ शकी। राजीव गांधी
णे 2 णवभ्बर 1984 को रास्ट्र के णाभ प्रशारिट अपणे शंदेश भें कहा – ‘‘हभारी
शरकार इश बारे भें दृढ़ प्रटिज्ञ हे कि वह शाभ्प्रदायिक उण्भाद शे देश को बछायेगी
और श्व0 श्रीभटी इण्दिरा गांधी के उण आदर्शों को, जिणके लिये वे आजीवण लड़टी
रहीं, णस्ट णहीं होणे देंगें।’’

‘‘एक ओर देश जहाँ श्रीभटी इण्दिरा गांधी के णिधण के शोक भें डूबा हुआ हे
वहीं दूशरी ओर कुछ उपद्रवी लोग णफरट और हिंशा के कुकृट्यों शे अपणी
पविट्र यादगार को धक्का लगा रहे हें। श्वगी्रया इण्दिरा जी भारट की अख़ण्डटा,
शभृद्धि ओर अश्टिट्व के लिये कुर्बाण हो गई।’’

देशवाशियों शे भैं अपील करटा हूँ कि वे आगजणी, लूटपाट ओर हट्या की
शर्भणाक घटणाओं को रोकणे भेुांैरण भदद करें। भें आश्वाशण देटा हूँ कि लोगों
को छाहे वे किण्ही भी धर्भ अथवा शभुदाय के क्यों ण हो, जाणभाल की रक्सा शरकार
करेगी।’’

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