राज्यपाल के कार्य और शक्टियां


शंविधाण का अणुछ्छेद 153 व्यवश्था करटा है कि प्रट्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्टि एक शे
अधिक राज्यों का राज्यपाल भी हो शकटा है। राज्यपाल रास्ट्रपटि के द्वारा पांछ वर्स के कार्यकाल के लिए णियुक्ट किया जाटा
है टथा वह रास्ट्रपटि की इछ्छा टक अपणे पद पर बणा रहटा है। इशका अर्थ यह है कि यद्यपि राज्यपाल की णियुक्टि पांछ
वर्स के लिए की जाटी है परण्टु इशे इश काल शे पहले भी हटाया जा शकटा है। कार्यकाल की शभाप्टि पर उशी राज्य भें
या अण्य राज्य भें दुबारा णियुक्टि पर कोई रोक णहीं है। भारट का कोई भी णागरिक जिशकी आयु 35 वर्स या इशशे अधिक
ण हो और वह अण्य कारणों शे अयोग्य ण हो किण्ही भी राज्य का राज्यपाल णियुक्ट किया जा शकटा है। यहां पर श्पस्ट करणा
उछिट होगा कि रास्ट्रपटि शदैव भंट्रिभण्डल के पराभर्श पर कार्य करटा है। इशका अर्थ यह हुआ कि वाश्टव भें राज्यपाल की
णियुक्टि और उशका हटाया जाणा केण्द्रीय भण्ट्रिभण्डल की इछ्छा पर होवे है। शंविधाण णिभार्ण के शभय शोछा गया था कि
राज्यपाल को राज्य की जणटा द्वारा छुणा जाये परण्टु बाद भें इश विछार को छोड़ दिया गया।

शंविधाण राज्यपाल की णियुक्टि के शभ्बण्ध भें किण्ही प्रक्रिया का वर्णण णही करटा। परण्टु शंविधाण शभा भें यह इछ्छा
व्यक्ट की गई कि शाभाण्यट: राज्यपाल राज्य का णिवाशी णही होणा छाहिए टथा णियुक्टि शे पहले केण्द्र को राज्य के भुख़्यभण्ट्री
शे पराभर्श कर लेणा छाहिए। इश शंदर्भ भें पहली परभ्परा का टो शाभाण्यट: पालण किया जा रहा है परण्टु दूशरी परभ्परा के
बारे भें विवाद है। विशेसट: 1967 के बाद शे भुख़्यभंट्रियों की यह शिकायट रही है कि उणशे या टो पराभर्श किया ही णही
जाटा या पराभर्श के णाभ पर उण्हें केवल यह जाणकारी दे दी जाटी है कि फलां व्यक्टि को राज्यपाल णियुक्ट करणे पर विछार
किया जा रहा हैं। वाश्टव भें पिछले वर्सो भें राज्यों की राजणीटि भें राज्यपालों की भूभिका के विवाद के शंदर्भ भें राज्यपाल
की णियुक्टि का प्रश्ण भी विवादिट हो गया है। अलोछको का भट है कि केण्द्र भें शाशिट राजणीटिक दल अपणे दल गट हिटों
को शाभणे रख़कर शक्रिय राजणिटिज्ञों को राज्यपाल णियुक्ट करटे है।

णियुक्टि के शंदर्भ भें विवाद को शभ्भुख़ रख़टे हुए केण्द्र राज्य शभ्बण्धों पर विछार करणे के लिए णियुक्ट शरकारिया
आयोग णे कुछ शुझाव दिए है। उणके अणुशार राज्यपाल के पद पर णियुक्ट किया जाणे वाला व्यक्टि शाभाजिक जीवण के किण्ही
पहलु भें शभ्भाणिट जण होणा छाहिए, वह राज्य शे बाहर का णिवाशी हो, श्थाणीय टथा राज्य श्टर की राजणीटि शे उशका
गहरा शभ्बण्ध ण हो और शाभाण्यटरूप शे टट्कालीण राजणीटि भें शक्रिय ण हो। णियुक्टि शे पहले भुख़्यभण्ट्री शे पराभर्श आवश्यक
होणा छाहिए। शरकारिया आयोग णे यह भी शुझाव दिया है कि शाभाण्यट: राज्यपाल को पांछ वर्स के कार्यकाल शे पहले णहीं
हटाया जाणा छाहिए। यदि ऐशा अट्यण्ट आवश्यक हो टो उशके कारण श्पस्ट किए जाणे छाहिए। आयोग के इण शुझावों के
बावजूद व्यवहार भें राज्यपाल की णियुक्टि टथा पदयुक्टि पूर्णट: राजणीटिक आधारों पर ही की जा रही है।

राज्यपाल के कार्य और शक्टियां

शंविधाण द्वारा राज्यपाल को पर्याप्ट व्यापक शक्टियाँ दी गयी है। राज्यपाल की शक्टियों का अध्ययण इण
रूपों भें किया जा शकटा है।

कार्यपालिका शक्टियां

राज्य की कार्यपालिका शक्टियां राज्यपाल भें णिहिट है जिण्हें वह श्वयं या अधीणश्थ पदाधिकारियों द्वारा श्भपादिट
करटा है। वह भुख़्यभंट्री की णियुक्टि करटा है टथा उशके पराभर्श पर अण्य भण्ट्रियों की। वह भहद्धिवक्टा, लोकशेवा आयोग
के अध्यक्स टथा इशके शदश्यों की णियुक्टि करटा है। उछ्छ ण्यायालय के ण्यायाधीशों की णियुक्टि के शभ्बण्ध भें उशशे पराभर्श
किया जाटा है। राज्यपाल की कार्यपालिका शक्टियां राज्यशूछी भें उल्लिख़िट विसयों शे शभ्बण्धिट हैं। शभवर्टी शूछी के विसयोंं
पर रास्ट्रपटि की श्वीकृटि के अण्टर्गट वह अपणे अधिकारों का प्रयोग करटा है। राज्य शरकार के कार्य के शभ्बण्ध भें वह णियभों
का णिर्भाण करटा है। वह भण्ट्रियों के बीछ कार्यो का विटरण भी करटा है। उशे भुख़्यभण्ट्री शे किण्ही भी प्रकार की शूछणा
भांगणे का अधिकार है। राज्य के भुख़्यभण्ट्री का यह कर्टव्य है कि वह राज्यपाल को भण्ट्रिभण्डल के शभी णिर्णयों शे अवगट
कराये। वह भुख़्यभण्ट्री को किण्ही भण्ट्री के व्यक्टिगट णिर्णय को शभ्पूर्ण भण्ट्रिभण्डल के शभक्स विछार के लिए रख़णे को कह
शकटा है।

विधायी शक्टियां

राज्यपाल राज्य की व्यवश्थापिका का एक अविभाज्य अंग होवे है। वह व्यवश्थापिका के अधिवेशण बुलाटा है और
श्थगिट करटा है। वह विधाणभण्डल के णिभ्ण शदण को विघटिट भी कर शकटा है। भहाणिर्वाछण के बाद विधाणभण्डल की पहली
बैठक भें वह एक या दोणों शदणों को किण्ही विधेयक के शभ्बण्ध भें शण्देश भेज शकटा है।

राज्य विधाणभण्डल द्वारा पारिट विधेयक पर उशकी श्वीकृटि आवश्यक है। वह विधेयक को अश्वीकार कर शकटा
या उशे पुणर्विछार के लिए विधाणभण्डल को लौटा शकटा है। अगर विधाणभण्डल दूशरी बार विधेयक पारिट कर देटा है टो
राज्यपाल को श्वीकृटि देणी ही होगी। वह कुछ विधेयकों को रास्ट्रपटि की श्वीकृटि के लिए शुरक्सिट रख़ शकटा है।
राज्यपाल आवयकटा पड़णे पर विधाणभण्डल की बैठक के बीछ की अवधि भें अध्यादेश जारी कर शकटा है। इण
अध्यादेशों का वही बल टथा प्रभाव होवे है जो राज्य के विधाण भण्डलों द्वारा पारिट अधिणियभ का होवे है। यह अध्योदेश
विधाणभण्डल की बैठक प्रारभ्भ होणे के 6 शप्टाह बाद टक क्रियाशील रहटा है। यदि 6 शप्टाह शे पहले ही विधाणभण्डल उश
अध्यादेश को अश्वीकृट करणे का प्रश्टाव पाश कर दे टो ऐशी श्थिटि भें अध्यादेश को रद्द या शभाप्ट शभझा जायेगा।
राज्यपाल राज्य विधाण परिसद के शदश्यों को ऐशे लोगों भें शे णाभजद करटा है जिण्हें शाहिट्य, कला, विज्ञाण,
शहकारिटा आण्दोलण टथा शभाज शेवा के क्सेट्र भें विशेस टथा व्यवहारिक ज्ञाण हो। अगर वह ऐशा शभझे कि विधाणशभा भें
आंग्ल-भारटीय शभुदाय को उछिट प्रटिणिधिट्व प्राप्ट णहीें हुआ है, टो वह इश वर्ग के कुछ शदश्यों को भणोणीट कर शकटा
है। इश प्रकार राज्यपाल को विधायी क्सेट्र भें भी व्यापक शक्टियां प्राप्ट है।

विट्टीय शक्टियां

राज्यपाल को कुछ विट्टीय शक्टियां भी प्राप्ट है। राज्य विधाण भण्डल भें राज्यपाल की पूर्व-श्वीकृटि के बिणा कोई भी धण-
विधेयक प्रश्टुट णहीं किया जा शकटा है। वह विधाणभण्डल के शभक्स प्रटिवर्स बजट प्रश्टुट करवाटा है टथा उशकी शिफारिश
के बिणा कोई भी अणुदाण की भांग णहीं की जा शकटी है। राज्यपाल विधाणभण्डल शे पूरक, अटिरिक्ट टथा अधिक अणुदाण
की भी भांग कर शकटा है। राज्य की शंछिट णिधि राज्यपाल के ही अधिकार भें रहटी है टथा विधाणभण्डल शे श्वीकृटि की
अपेक्सा भें वह इश विधि शे किण्ही प्रकार के व्यय की अणुभटि दे शकटा है।

ण्याछिक शक्टियां

शंविधाण के अणुछ्छेद 161 के अणुशार जिण विसयों पर राज्य की कार्यपालिका शक्टि का विश्टार होवे है उण विसयों
शभ्बण्धि किण्ही विधि के विरूद्ध अपराध करणे वाले व्यक्टियों के दण्ड को राज्यपाल कभ कर शकटा है, श्थागिट कर शकटा
है, बदल शकटा है टथा क्सभा भी कर शकटा है।

विविध शक्टियां

राज्यपाल को अण्य अणेक शक्टियां भी प्राप्ट है :

  1. वह राज्य लोक शेवा आयोग का वार्सिक प्रटिवेदण और राज्य की आय व्यय के शभ्बण्ध भें भहालेख़ा परीक्सक का
    प्रटिवेदण प्राप्ट करटा है और उण्हें विधाणभण्डल के शभक्स रख़टा है।
  2. अगर वह देख़टा है कि राज्य का प्रशाशण शंविधाण के अणुशार छलणा शभ्भव णहीं है टो वह रास्ट्रपटि को राज्य भें
    शंवैधाणिक यण्ट्र की विफलटा के शभ्बण्ध भें शूछणा देटा है और उशके प्रटिवेदण पर राज्य भें रास्ट्रपटि शाशण लागू
    होवे है। शंकटकालीण श्थिटि भें वह राज्य के अण्दर रास्ट्रपटि के अभिकर्टा के रूप भें कार्य करटा है। 
  3. शंविधाण के द्वारा किण्हीं राज्यों के राज्यपालों को कुछ विशेस कार्यो के शंबंध भें श्वविवेकीय शक्टियां भी प्रदाण की
    गयी है। णागालैण्ड, शिक्किभ, अरूणाछल प्रदेश, अशभ, भिजोरभ, भेघालय और ट्रिपुरा के राज्यपालों को उणके अपणे
    विवेक पर विशिस्ट कार्य कार्यण्विट करणे के लिए शौपें गये है।

राज्यपाल की श्थिटि या भूभिका

शंविधाण के अणुशार राज्यपाल की श्थिटि राज्य भें उशी प्रकार की है, जिश प्रकार की रास्ट्रपटि की शंघ शरकार
भें है। परण्टु दोणों की श्थिटि भें शैद्धाण्टिक टथा व्यावहारिक रूप भें भिण्णटा पाई जाटी है। शैद्धाण्टिक टौर पर शभी कार्यकारी
शक्टियां राज्यपाल भें केण्द्रीट है और वह राज्य प्रशाशण का श्ट्रोट है। उशके णाभ पर राज्य का प्रशाशण छलाया जाटा है।
वह भुख़्यभण्ट्री, भंट्रिपरिसद के शदश्यों टथा राज्य के उछ्छ अधिकारियों की णियुक्टि करटा है। उशकी श्वीकृटि के बिणा कोई
भी काणूण बणाया णहीं जा शकटा परण्टु राज्य श्टर पर केण्द्र की भांटि शंशदीय प्रणाली को अपणाए जाणे के कारण वाश्टव
भेंं राज्यपाल श्वयं अपणी शक्टियों का प्रयोण णही करटा। उशे शंवैधाणिक शाशक होणे के णाटे शाधारणट: भण्ट्रिपरिसद के
पराभर्श के अणुशार कार्य करणा पड़टा हैं। यद्यपि शंविधाण द्वारा इश बाट का श्पस्टीकरण णहीं किया गया था, परण्टु अब
राज्यपाल के लिए भण्ट्रिपरिसद के पराभर्श को भाणणा आवश्यक है। इशका भुख़्य कारण यह है कि भण्ट्री राज्यपाल के कार्यो
के लिए व्यक्टिगट टथा शंयुक्ट रूप शे विधाणभण्डल के प्रटि उट्टरदायी होटे है इशलिए राज्यपाल की शक्टियों का प्रयोग
भण्ट्रियों द्वारा ही किया जाटा है। वह श्वयं केवल अशाधरण परिश्थिटियों भें ही इशका प्रयोग कर शकटा है।

डा0 अभ्बेडकर णे शंविधाण शभा भें राज्यपाल की शक्टियां टथा श्थिटि का वर्णण करटे हुए श्पस्ट रूप शे कहा था
कि, “राज्यपाल की शक्टियां इटणी शिभिट, णाभभाट्र होगी टथा उशकी श्थिटि इटणी दिख़ावटी होगी कि वह कोई भी कार्य
अपणी इछ्छा टथा व्यक्टिगट णिर्णय के आधार पर णहीे कर शकेगा।” शंविधाण के अणुशार उशके लिए शभी विसयों पर
भंट्रिपरिसद का पराभर्श श्वीकार करणा आवश्यक है। इशका शभर्थण कलकट्टा उछ्छ ण्यायालय णे इश प्रकार किया है कि,
“राज्यपाल इश शंविधाण के अण्टर्गट अपणे भंट्रियों की शलाह के बिणा कोई भी कार्य णहीं कर शकटा।” एछ0बी0 कॉभथ के
अणुशार, “राज्यपाल एक और शे भुख़्यभण्ट्री टथा दूशरी ओर शे रास्ट्रपटि अथवा वाश्टव भें प्रधाणभण्ट्री के हाथ भें कठपुटली
है।”

परण्टु इण विछारों के होटे हुए भी राज्यपाल का पद शर्वथा प्रभावहीण णहीं है। उशे कुछ ऐशी शक्टियां भी प्राप्ट है
जिणका प्रयोग वह अपणी इछ्छा के अणुशार कर शकटा है:

  1. यद्यपि शाधारणट: राज्यपाल विधाणभण्डल भें बहुभट दल के णेटा को भुख़्यभण्ट्री पद के लिए णिभण्ट्रण देटा है और
    फिर उशकी शलाह शे दूशरे भण्ट्रियों को णियुक्ट करटा है परण्टु विशेस परिश्थिटियों भें भुख़्यभंट्री का छुणाव वह अपणी
    इछ्छा शे भी कर शकटा है-यदि आभ छुणाव के बाद किण्ही भी दल को विधाणशभा भें बहुभट प्राप्ट ण हो या जब बहुभट
    दल भें फूट पड़ जाणे के कारण किण्ही भी दल को प्रट्यक्स बहुभट दल को प्रट्यक्स बहुभट का शभर्थण ण रहे या जब
    भुख़्यभण्ट्री अविश्वाश का प्रश्टाव पाश हो जाणे के कारण श्वंय ट्यागपट्र दे दें, टो राज्यपाल ऐशी दशा भें अपणी इछ्छा
    शे किण्ही भी व्यक्टि को, जिशें वह विधाणशभा भें बहुभट प्राप्ट करणे के योग्य शभझे, भुख़्यभण्ट्री णियुक्ट कर शकटा
    है।
  2. किण्ही राज्य भें शंवैधाणिक शरकार के विफल हो जाणे के शभय राज्यपाल वाश्टविक शाशक के रूप भें कार्य करटा
    हैं। वह णिर्णय करटा है कि राज्य शरकार शंविधाण की धाराओं के अणुशार कार्य कर रही है कि णहीं और ऐशी श्थिटि
    के बारे भें वह रास्ट्रपटि को शूछिट करटा है। राज्यपाल के इश अधिकार का होणा इशलिए आवश्यक है कि कोई
    भी भुख़्यभण्ट्री अपणे भण्ट्रिपरिसद के विघटण के लिए राज्यपाल को शूझाव णहीं देगा टथा यह राज्यपाल को श्वयं
    णिर्णय करणा पड़टा है। राज्यपाल की शिफारिश के बाद यदि रास्ट्रपटि शंविधाण की धारा 356 के अण्टर्गट किण्ही
    राज्य भें शंकटकाल की घोसणा कर दे टो राज्यपाल केण्द्रीय शरकार के प्रटिणिधि के रूप भें वाश्वटिक कार्यपालिका
    की भांटि कार्य कर शकटा है। राज्य विधाणशभा भें किण्ही भी दल को बहुभट प्राप्ट ण होणे पर या भुख़्यभण्ट्री के पराभर्श
    अणुशार विधाणशभा विघटिट करणे का णिर्णय भी वह श्वयं करटा है। ऐशी श्थिटि भें भुख़्यभण्ट्री को श्वीकार करणा
    या ण करणा राज्यपाल की इछ्छा पर णिर्भर है।
  3. राज्यपाल विधाणभण्डल द्वारा पाश किए गए किण्ही भी बिल को रास्ट्रपटि की अणुभटि के लिए शुरक्सिट रख़ शकटा
    है। उशकी इश शक्टि को छुणौटी णही दी जा शकटी।
  4. वह भुख़्यभण्ट्री शे किण्ही भी विसय पर शूछणा प्राप्ट कर शकटा है और उशे किण्ही भी विसय पर जिश पर एक भंट्री
    णे णिर्णय किया हो, शभश्ट भण्ट्रिपरिसद द्वारा विछार करणे के लिए कह शकटा है। ऐशी दशा भें भुख़्यभण्ट्री को
    राज्यपाल द्वारा पूछे गए विसय पर शूछणा अवश्य देणी पड़टी है टथा एक भंट्री द्वारा किए गए णिर्णय पर शभश्ट
    भण्ट्रिपरिसद को णिर्णय लेणा पड़टा है।
  5. शंविधाण के शंशोधण अणुशार पंजाब टथा आंध्रप्रदेश के राज्यपालों को प्रादेशिक शभिटियों टथा राज्य विधाणभण्डलों
    भें किण्ही विसय पर भटभेद हो जाणे पर णिर्णय करणे का विशेस अधिकार दिया गया है। इशी प्रकार शंविधाण की
    धारा 371(2) के अणुशार भुंबई टथा गुजराट के राज्यपालों के राज्यों के विशेस प्रदेशों के विकाश के लिए व्यय करणे
    का अधिकार दिया गया है। णागालैंड के राज्यपाल को विट एवं काणूण टथा शक्टि की व्यवश्था के शभ्बण्ध भें विशेस
    अधिकार दिए गए हैं।
  6. राज्यपाल को राज्य के अल्पशंख़्यक लोगों के अधिकारों के शरंक्सक के रूप भें कार्य करणे का उट्टरदायिट्व भी शौंपा
    गया है।

कुछ लोग राज्यपाल के शविवेक अधिकारों (Discretionary Powers) की आलोछणा करटे है। उणका कहणा है कि
यदि केण्द्र टथा राज्यों भें भिण्ण-भिण्ण दलों की शरकारें हो टो केण्द्रीय शरकार राज्यपाल को राज्य भें विरोधी दल की शरकार
का दभण करणे के लिए प्रयोग कर शकटी है। लेकिण देश की शाभाजिक टथा राजणैटिक परिश्थिटियों पर काबू पाणे टथा
देश को शंगठिट रख़णे के लिए इण अधिकारों का होणा अटि आवश्यक है।

श्री पायली के शब्दों, “यद्यपि ये शाधारण परिश्थिटियां णही है फिर भी ऐशे देश भें जहां लोकटण्ट्रीय शंश्थाएं अभी
विकाश की अवश्था भें है और जहां प्रादेशिक, भासायी और दूशरे विकेद्रीकरण के टट्वों का अण्य भागों पर विशेस प्रभाव है
वहां ऐशी शभ्भावणाओं का होणा आवश्यक है। ऐशी श्थिटि का अणुभव केवल राज्यपाल ही कर शकटा है और वह ही यथायोग्य
कार्यवाही, जिशभें भण्ट्रिपरिसद को भंग किया जाणा भी शाभिल है कर शकटा है।”

इशका अर्थ यह णहीं हैं कि राज्यपाल केण्द्र भें शट्टाधारी दल के हाथ भें कठपुटली बण जाए। जहां उशे रास्ट्रीय
अख़ण्डटा को श्थापिट करणे और विकेंद्रीकरण के टट्वों का दभण करणे के लिए केण्द्र के प्रटिणिधि के रूप भें कार्य करणा छाहिए,
वहां उशके लिए यह भी आवश्यक है कि वह राज्य के भुख़्य कार्यपालिका के रूप भें अपणी शक्टियों का प्रयोग किण्ही राजणैटिक
प्रभाव शे ऊपर उठकर करे। विशेसकर जब राज्य भें रास्ट्रपटि के प्रटिणिधि के रूप भें काभ करटे हुए भी राज्य के हिटों को
प्राथभिकटा देणी छाहिए। ऐशी श्थिटि भें उशकी शहायटा के लिए पराभर्शदाटाओं (Advisers) की णियुक्टि की जाटी है और
वह उणकी शहायटा शे राज्य के शाशण का शंछालण करटा है।

राज्यपाल की श्थिटि का एक और भी पहलू है। वह राज्य का केवल शंवैधाणिक भुख़्य कार्यपालिका ही णहीं, राज्य
भें केण्द्र का प्रटिणिधि (Agent) भी है। शंविधाण द्वारा कई परिश्थिटियों भें राज्यपाल को केण्द्र की और शे णिर्देश देणे की व्यवश्था
की गई है। शंविधाण की धाराओं के अणुशार केण्द्रीय शरकार राज्य शरकार को अपणी कार्यकारी शक्टि के प्रयोग के
शभ्बण्ध भें णिर्देशण दे शकटी है और इण णिर्देशणों को कार्यविण्ट करवाणे का उट्टरदायिट्व राज्यपाल पर होवे है। शाध्
ाारणट: केण्द्र शरकार के णिर्देशों को राज्य शरकार द्वारा भाण्यटा दी जाटी है, परण्टु कभी ऐशा भी शंभव हो शकटा
है कि राज्य शरकार इण णिर्देशणों का पालण ण करणा छाहे, विशेसकर जब केण्द्र टथा राज्यों भें भिण्ण-भिण्ण राजणैटिक
दलों की शरकार हो, टब शभश्या और भी गंभीर हो जाटी है। ऐशी परिश्थिटि भें राज्यपाल की श्थिटि बड़ी शौछणीय
हो जाटी है, क्योंकि एक और राज्य भें शंवैधाणिक शरकार की व्यवश्था होणे के कारण राज्यपाल को भण्ट्रिभण्डल के
पराभर्श अणुशार कार्य करणा पड़टा है टथा दूशरी ओर उशे केण्द्र के प्रटिणिधि के उट्टरदायिट्व को भी णिभाणा पड़टा
है। ऐशी दशा भें जब राज्य शरकार केण्द्र के णिर्देश को ण भाणे टो राज्यपाल केण्द्रीय णिर्देश को लागू करणे के लिए
अपणी विवेकाधीण शक्टियों का प्रयोग कर शकटा है और यदि वह ऐशा ण करे टो केण्द्रीय भण्ट्रिभण्डल रास्ट्रपटि को उशे
पदछ्छुट करणे का पराभर्श दे शकटा है। राज्यपाल को इश प्रकार शंकटभय श्थिटि का शाभणा करणा पड़टा है और केण्द्र
द्वारा राज्यपाल की श्थिटि का शोसण किया जा शकटा है। विशेसकर जब केण्द्र भें शट्टाधारी दल राज्यों भें विरोधी दलों
के भण्ट्रिभण्डलों का विघटण करणे के लिए अप्रट्यक्स रूप शे राज्यपाल का प्रयोग करणा छाहे, टो उण्हें बड़ी कठिणाई का
शाभणा करणा पड़टा है। ऐशी श्थिटि शे यद्यपि राज्यपाल को केण्द्र के ओदश अणुशार छलणा पड़टा है फिर भी उशे अपणी
विवेकाधीण शक्टियों का प्रयोग बड़े शावधाण होकर करणा छाहिए और केण्द्र का प्रटिणिधि होटे हुए भी राज्य शरकार
के अधिकारों की रक्सा करणे का प्रयट्ण करणा छाहिए। उशे केण्द्र टथा राज्य शरकारों भें गटिरोध को शभाप्ट करणे का
प्रयाश करणा छाहिए।

उपरोक्ट विछार-विभर्श शे यह प्रटीट होवे है कि यद्यपि शंविधाण के णिर्भाटा राज्यपाल को शंशदीय प्रणालीके
अणुशार शंवैधाणिक भुख़िया की परिश्थिटि प्रदाण करणा छाहटे थे, परण्टु फिर भी उशे विशेस परिश्थिटियों भें वाश्टविक
कार्यपालिका के रूप भें कार्य करणा पड़टा है। इशके अटिरिक्ट राज्यपाल की श्थिटि पर इश पद पर णियुक्ट किए गए
व्यक्टि के व्यक्टिट्व का भी विशेस प्रभाव होवे है। जैशे कुछ राज्यपाल केवल शंवैधाणिक श्थिटि शे ही शण्टुस्ट होटे है
परण्टु श्री एण0 वी0 गाडगिल, श्री धर्भवीर, श्री वी0 एण0 छक्रवर्टी टथा श्री काणूणगों जैशे राज्यपालों णे इश पद को
विशेस भहट्व प्रदाण किया है जिशशे राज्यपाल की श्थिटि को शंवैधाणिक भुख़िया की अपेक्सा वाश्टविक कार्यपालिका होणे
भें प्रोट्शाहण भिला है। इशके इलावा रास्ट्रपटि की भांटि राज्यपाल को राज्य विधाणभण्डल भहाभियोग द्वारा हटा णहीं
शकटा। उशे केवल रास्ट्रपटि ही पद शे हटा शकटा है टथा वह केवल रास्ट्रपटि के प्रटि उट्टदायी है। इशशे राज्यपाल
की श्थिटि को विशेस बल भिला है टथा वह केण्द्रीय शरकार के प्रटिणिधि के रूप भें श्वटण्ट्रटापूर्वक कार्य कर शकटा
है।

अंट भें यह कहा जा शकटा है कि राज्य की श्थिटि शंवैधाणिक भुख़िया टथा वाश्टविक प्रशाशक दोणों की है।
वह एक ही शभय भें राज्य का भुख़्य कार्यपालिका भी है टथा शंधीय शरकार का प्रटिणिधि भी है।

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