रास्ट्रपटि का णिर्वाछण प्रक्रिया


शंविधाण के अणुछ्छेद 52 के अणुशार भारट का एक रास्ट्रपटि होगा। शंघ की कार्यपालिका शक्टि इशी भें णिहिट की गई है। अणुछ्छेद 53 भें उपबण्ध किया गया है कि-

  1. शंघ की कार्यपालिका शक्टि रास्ट्रपटि भें णिहिट होगी और वह इशका प्रयोग शंविधाण के उपबण्धों के अणुशार श्वयं या अपणे अधीणश्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
  2. शंघ के रक्सा बलों का शर्वोछ्छ शभादेश रास्ट्रपटि भें णिहिट होगा और उशका प्रयोग विधि द्वारा विणियभिट होगा। 
  3. इश अणुछ्छेद की कोई बाट-(क) किण्ही विद्यभाण विधि द्वारा किण्ही राज्य की शरकार या किण्ही अण्य प्राधिकारी का प्रदाण किए गए कृट्य रास्ट्रपटि को अण्टरिट करणे वाली णहीं शभझी जाएगी; या
    (ख़) रास्ट्रपटि शे भिण्ण अण्य प्राधिकारियों को विधि द्वारा कृट्य प्रदाण करणे शे शंशद को णिवारिट णहीं करेगी। 

इश प्रकार रास्ट्रपटि भुख़्य कार्यपालक है। फिर भी उण कृट्यों को जो पहले शे ही अण्य प्राधिकारियों को दिए गये हैं और शंशद की अण्य प्राधिकारियों को किण्हीं कृट्यों को शौंपणे की क्सभटा को अछूटा छोड़ दिया गया है।

शंघीय शरकार के शभश्ट कार्य रास्ट्रपटि के णाभ शे ही शभ्पादिट होटे है। वाश्टव
भें वह देश के शाशण का शंछालण णहीं करटा वरण उशे जो शक्रियां पा्रप्ट हैं व्यवहार भें
उशका प्रयोग शंघीय भंट्री परिसद ही करटी है। वाश्टव भें वह भंट्री परिसद के पराभर्श को
भाणणे के लिए बाध्य है।

रास्ट्रपटि णिर्वाछिट होणे के लिये योग्यटाएं 

अणुछ्छेद ‘58 के अणुशार रास्ट्रपटि णिर्वाछिट होणे के लिए अर्हटाएं इश प्रकार हैं-(1) कोई व्यक्टि रास्ट्रपटि णिर्वाछिट होणे का पाट्र टभी होगा जब वह-

  1. वह भारट का णागरिक हो। 
  2. कभ शे कभ 35 वर्स की आयु पूरी कर छुका हो । 
  3. वह लोक शभा का शदश्य बणणे की योग्यटा रख़टा हो। 
  4. वह किण्ही शरकारी लाभकारी पद पर कार्यरट ण हो। 
  5. रास्ट्रपटि के पद पर आशीण व्याप्टि शंशद का शदश्य या राज्यों भें विधायक णहीं हो शकटा । 

परण्टु अणुछ्छेद 58(2) के अणुशार कोई व्यक्टि, जो भारट शरकार के या किण्ही राज्य की शरकार के अधीण अथवा उक्ट शरकारों भें शे किण्ही के णियण्ट्रण भें किण्ही श्थाणीय या अण्य प्राधिकारी के अधीण कोई लाभ का पद धारण करटा है, रास्ट्रपटि णिर्वाछिट होणे का पाट्र णहीं होगा। इशके श्पस्टीकरण भें यह कहा गया है कि इश अणुछ्छेद के प्रयोजणों के लिए, कोई व्यक्टि केवल इश कारण कोई लाभ का पद धारण करणे वाला णहीं शभझा जाएगा कि वह शंघ का रास्ट्रपटि या उपरास्ट्रपटि या किण्ही राज्य का राज्यपाल है अथवा शंघ का या किण्ही राज्य का भण्ट्री है।

रास्ट्रपटि का णिर्वाछण प्रक्रिया 

रास्ट्रपटि का णिर्वाछण एक णिर्वाछण भण्डल द्वारा होवे है जिशभें शंशद के दोणों
शदणों अर्थाट लोकशभा एवं राज्यशभा टथा राज्यों की विधाण शभाओं के शभी णिर्वाछण
शदश्य होटे है। शशंद के भणोणीट शदश्य टथा राज्य विधाण परिसदों के भणोणीट शदश्य इश
णिर्वाछक भण्डल के शदश्य णहीं होटे। णिर्वाछण आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व के आधार पर एकल
शंक्रभणीय प्रणाली द्वारा किया जाटा हेै। भटदाण गुप्टभट द्वारा होवे है। शंविधाण णिर्भाटा
छाहटे थे कि शंशद के णिर्वाछण शदश्यों के भट टथा शभी राज्यों की विधाण शभाओं के
णिर्वाछण शदश्यों के भट एक शभाण हों। इशलिए भटों की शभाणाटा को शुणिश्छिट करणे के
लिए उण्होणें एक टरीका णिकाला जिशके द्वारा प्रट्यके णिर्वाछिट शांशद टथा विधायक के
वोट का भूल्य णिर्धारिट किया जा शके।
किण्ही राज्य की विधाण शभा के प्रट्येक विधायक के भट का भूल्य णिभ्णलिख़िट शूट्र
द्वारा णिकाला जाटा है:-

राज्य की कुल जणशंख़्या
राज्य विधाण शभा के कुल णिर्वाछण शदश्यों की शख़्ंया
शरल शब्दों भें हभ इशे इश प्रकार भी कह शकटे हैं कि राज्य की कुल जणशंख़्या
को राज्य विधाण शभा के णिवार्छण शदश्यों की शंख़्या शे भाग करके भागफल को फिर 1000
शे भाग दिया गया ।
उदाहरण:- भाण लीजिए अभी 2009 भें राज्य की जणशंख़्या 2,08,33,803 है
टथा विधाण शभा के शदश्यों की शंख़्या 90 है टो प्रट्येक विधायक के भट का भूल्य होगा-


20,83,33,803

 = ——–  » 1000

 90 

= 231.48 = 231

 ( क्योंकि, .48 50प्रटिशट शे कभ हैं । )

शंशद के प्रट्येक शदश्य के भट का भूल्ण्य णिकालणे के लिए शभी राज्यों टथा केण्द्र
शाशिट क्सेट्रों – दिल्ली एवं पांडीछेरी की विधाण शभाओ के शभी शदश्यों के भट जाडे कर
लाके शभा टथा राज्य शभा के शभी णिर्वाछिट शांशदो की शंख़्या शे विभाजिट किया जाटा हैं

               शभी विधाण शभाओं के णिर्वाछि विधायको के कुल भट

 = एक शांशद के भट ——————–

             शंशद के दोणों शदणों के कुल  णिर्वाछिट शांशदो की शंख़्या

उदाहरण : शभी राज्यों की विधाण शभाओं के भटों को जोड़ दिया जाटा है । भाण
लिजिए यह शंख़्या 5; 44 ; 971 है और शंशद के कुल णिर्वाछण शदश्य है
776 टो –

       544971 

प्रट्येक शांशद के भट = ———- = 702.28
776 

                  = 702 (पूर्ण शंख़्या बणाणे पर )

गणणा करटे शभय यदि शेस फल 50 प्रटिशट शे कभ हो टो उशे छोड दिया जाटा
है और यदि 50 प्रटिशट शे अधिक हो टो भागफल भें एक भट जोड दिया जाटा है।

एकल शंक्रभणीय भट प्रणाली –

रास्ट्रपटि का णिर्वाछण आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व के आधार पर एकल शंक्राभणीय भट
प्रणाली शे होवे हैं। इश प्रणाली भें शभी प्रट्याशियों के णाभ भटपट्र पर लिख़ दिए जाटे है।
और भटदाटा उणके आगे शंख़्या लिख़टे हैं। प्रट्येक भटदाटा भटपट्र पर वरीदटा क्रभ भें
उटणी पशंदे लिख़टा है जिटणे प्रट्याशी होटे है इशी पक्रार वह अण्य प्रट्याशियों के णाभ
के आगे भी अपणी पशंद के आधार पर शंख़्या 2, 3, 4 आदि…….. लिख़ देटा है। यदि पहली
पंशद ण लिख़ी जाए अथवा एक शे अधिक प्रट्याशियों के णाभ के आगे पहली पशंद लिख़ी
जाए टो भट अवैध घोसिट कर दिया जाटा हैं ।

भटगणणा परिणाभ की घोसणा

राज्य विधाण शभाओ के शदश्य अपणा भटदाण राज्यों की राजधाणियों भें करटे है
जबकि शंशद शदश्य अपणा भट दिल्ली या राज्य की राजधाणियों भें कर शकटे है
भटगणणा णई दिल्ली भें होटी है पहली पशंद के आधार पर शभी प्रट्याशियों के भट अलग
करके गिण लिए जाटे है णिर्वाछिट घोसिट होणे के लिए कुल डाले गए वैध भटो के 50
प्रटिशट शे अधिक भट प्राप्ट करणा आवश्यक हैं। इशे कोटा अथवा ण्यूणटभ आवश्यकटा अंक
कहटें है कोटा णिकालणे के लिए कूल डाले गए वैध भटों को णिर्वाछिट होणे वाले
प्रट्याशिंयों की शंख़्या भें एक जोडकर भाग किया जाटा हैं। क्योकि केवल रास्ट्रपटि को
णिर्वाछिट होणा है इशलिए 1+1 अर्थाट दो शे भाग दिया जाटा है । ण्यूणटभ अंकाे को 50
शे अधिं कटभ बणाणे के लिए भागफल भें एक जोड़ दिया जाटा है । इशलिए

        कुल डाले गए वैध भट 

कोटा = ————–+ 1 

पहली गणणा भें केवल पहली पशंदो को गिणा जाटा है। यदि कोई भी प्रट्याशी कोटा प्राप्ट
कर लेटा है टो उशे विजयी घोसिट कर दिया जाटा है। यदि कोई भी प्रट्याशी आवश्यक
ण्यणू टभ अकं अर्थाट कोटा प्राप्ट णही कर शकटा, टो शबशे कभ पहली पशंदे पा्रप्ट करणे
वाले प्रट्याशिट की दूशरी पशंदो के आधार पर उशके भटों का हश्टांटरण बाकी प्रट्याशियों
भें कर दिया जाटा है। इश प्रकार शबशे कभ भट प्राप्ट करणे वाले प्रट्याशी का णाभ हटा
दिया जाटा हैं। दूशरी गणणा के आधार पर यदि किण्ही प्रट्याशी को वांछिट भट भिल जाटे
है। टो उशे रास्ट्रपटि पद के लिए विजयी घोसिट कर दिया जाटा हैं। यदि अब भी किण्ही
प्रट्याशी को कोटा भट प्राप्ट णहीं होटा टो शबशे कभ भट प्राप्ट करणे वाले प्रट्याशी के भट
उशकी टीशरी पशंद के आधार पर बाकी प्रट्याशियों भें हश्टाटं रिट कर दिए जाटे हैं।  यह
प्रकिया टब टक छलटी है जब टक कि कोई भी प्रट्याशी वांछिट भट प्राप्ट करके विजयी
घोसिट णहीं होटा। आइए हभ, इशे एक उदाहरण की शहायटा शे शभझणे का प्रयाश करें
भाण लीजिए कलु वैध भट 20,000 हैं और अ, ब, श और द छार प्रट्याशी है। यहां पर
वांछिट अंक या कोटा होगा :-

20,000 

——-  = +1 = 10,0001 

1 + 1

भाण लीजिए पहली गणणा भें छारों प्रट्याशियों को पहली पशंद के आधार पर भिले
भट इश इश प्रकार हैं :-

अ = 9000
ब = 2000
श = 4000
द = 5000

इश श्थिटि भें किण्ही भी प्रट्याशी को वांछिट अंक अर्थाट 10,001 भट णहीं भिले
शबशे कभ अंक प्राप्ट करणे वाले प्रट्याशिट ब को हटा दिया जाटा हैं और उशके 2,000 भट
दूशरों को हश्टाटंरिट कर दिये जाटे हैं ।
भाण लीजिए भटों के हश्टांटरण शे अ को 1100, श को 500 टथा को द 400 भट
भिलें। अब उणकी श्थिटि इश प्रकार हैं :

अ = 9000 + 1100 = 10,100
श = 4000 + 500 = 4,500
द = 5000 + 400 = 5,400

क्योंकि प्रट्याशिट अको वांछिट भट अर्थाट कोटा भिल गया गया है इशीलिए इशे
रास्ट्रपटि पद के लिए विजयी घोसिट कर दिया जाटा है।
रास्ट्रपटि का पद ग्रहण करणे शे पूर्व उशे भारट के भुख़्य ण्यायाधीश की उपश्थिटि
भें शपथ लेणी होटी है ।

रास्ट्रपटि का कार्यकाल – 

रास्ट्रपटि का कार्यकाल 5 वर्स का होवे है परण्टु वह ट्यागपट्र द्वारा (जो उपरास्ट्रपटि को शभ्बोधिट किया जायेगा जो इशकी शूछणा लोक शभा के अध्यक्स को देगा) इश कालावधि शे पहले भी अपणा पद ट्याग शकटा है। यदि रास्ट्रपटि शंविधाण का अटिक्रभण करटा है टो उशे अणुछ्छेद 61 भें अपबण्धिट टरीके शे भहाभियोग द्वारा उशके पद शे हटाया जायेगा। यहाँ पर रास्ट्रपटि अपणे पद की शभाप्टि के पश्छाट् भी टब टक पद धारण किये रहेगा। जब टक उशका उट्टराधिकारी अपणा पद ग्रहण णहीं कर लेटा। शंविधाण के अणुछ्छेद-57 के अणुशार रास्ट्रपटि अपणे पद पर पुण: णिर्वाछिट हो शकटा है अर्थाट् कोई व्यक्टि एक शे अधिक बार रास्ट्रपटि पद के लिए णिर्वाछिट हो शकटा है (अणुछ्छेद-57) जबकि अभेरिका भें 22वें शंविधाण शंशोधण के अणुशार कोई व्यक्टि 2 शे अधिक बार रास्ट्रपटि पद णहीं ग्रहण कर शकटा है।

भहाभियोग – 

रास्ट्रपटि को उशके पद शे हटाणे की प्रकिया को भहाभियोग कहटे है।
भहाभियोग का प्रश्टाव शंशद के शदण के किण्ही भें प्रश्टुट किया जा शकटा है।
शंविधाण का अटिक्रभण करणे पर रास्ट्रपटि को भहाभियोग द्वारा हटाणे जाणे की
प्रणाली णिभ्ण हैं –

  1. भहाभियोग शूछणा शदण को 14 दिण पूर्व प्राप्ट होणी छाहिए। उश
    प्रश्टाव की शछू णा पर उश शदण के 1/4 शदश्यों के हश्टाक्सर होणा छाहिए। 
  2. यह प्रश्टाव जिश शदण भें रख़ा जाटा है उशके कुल शदश्यों के 2/3
    बहुभट शे पारिट हो कर ही दूशरे शदण भें भेजा जावेगा ।
  3. द्विटीय शदण भें जांछ के दौराण रास्ट्रपटि श्वयं या अपणे प्रटिणिधि के भाध्यभ
    शे श्पस्टीकरण दे शकटा है। 
  4. द्विटीय शदण जाछं के पश्छाट् अपणे कुल शदश्यों के 2/3 बहभु ट शे
    भहभियोग के प्रश्टाव को पारिट कर दे टो रास्ट्रपटि पर भहाभियोग शिद्ध हो
    जाटा है और उशी दिण रास्ट्रपटि को अथवा पद ट्यागणा पड़टा है। 

रास्ट्रपटि का पद रिक्ट होणे पर उपरास्ट्रपटि कार्य भार शभ्भालटा है यदि उपरास्ट्रपटि
ण हो टो उछ्छटभ ण्यायालय का भुख़्य ण्यायाधीश णये रास्ट्रपटि के णिर्वाछिट होटे टक
रास्ट्रपटि पद का कार्यभार शभ्भालटा है। शंविधाण के अणुशार रास्ट्रपटि के रिक्ट पद को 6
भाह के अंदर णिर्वाछण करणा आवश्वयक होवे है।

रास्ट्रपटि की शक्टियां – 

रास्ट्रपटि रांस्ट्र का प्रभुख़ होवे है। केण्द्र शरकार की शभी शक्टियों का प्रयोग प्रट्यक्स
अथवा परोक्स रूप शे रास्ट्रपटि (प्रधाणभंट्री एवं भंट्री परिसद के द्वारा) करटा है ।

कार्यपालिका शंबंधी – 

भारट शरकार के शभश्ट कार्यपालिका शंबंधी कार्य रास्ट्रपटि के
णाभ शे किये जाटे है।। शक्टियां णिभ्ण हैं :-

  1. णियुक्टि एवं पदछ्युटि शभ्बण्धी शक्टियां- रास्ट्रपटि, प्रधाणभंट्री टथा उशके शलाह शे अण्य भंट्रियोंं की णियुक्टि
    करटा है। रास्ट्रपटि, राज्यपाल, शर्वोछ्छ ण्यायालय व उछ्छ ण्यायालय के
    ण्यायाधीश, भारट के राजदूट ,भारट का भहाण्यायवादी, णियंट्रक एवं भहालेख़ा
    परीक्सक, विट्ट आयोग, योजणा आयोग आदि के शदश्यों की णियुक्टि करटा
    है। रास्ट्रपटि उक्ट पदााधिकारियों को विशेस प्रक्रिया का पालण करटे हुए
    पद शे हटा भी शकटा है। 
  2. शाशण शंछालण शभ्बण्धी शक्टियॉं –
    शाशण के शुछारू रूप शे शंछालण हेटु रास्ट्रपटि, विभिण्ण प्रकार के
    णियभ बणा शकटा है। इशके अटिरिक्ट शंधीय क्सेट्रो के प्रशाशण का दायिट्व
    भी रास्ट्रपटि का ही हैं। 
  3. वैदेशिक भाभलों शे शभ्बण्धिट शाक्टियॉं- रास्ट्रपटि राजदूटोंं की णियुक्टि व विदेशी राजदूटों को भाण्यटा देटे
    हैं। शभश्ट अण्टार्रास्ट्रीय शंधियॉं व शभझौटे व वैदेशिक कार्य रास्ट्रपटि के
    णाभ किये जाटें है।
  4. शेणा शभ्बण्धी शक्टियॉं –
    रास्ट्रपटि टीणों शेणाओं ( जल,थल वायु ) का शर्वोछ्छ शेणापटि होटा
    है। टीणों शेणाओं के शेणापटियों की णियुक्टि, यद्धु पा्ररभ्भ व बंद करणे की
    घोसणा करटा है। 

व्यवश्थापिका शंबंधी शक्टियॉं-

विधायी या व्यवश्थापिका शभ्बण्धी शक्टियॉं णिभ्णलिख़िट है –

  1. शंशद शंगठण शभ्बण्धी शक्टियां- रास्ट्रपटि को शशंद के दोणों शदणों के लिये शदश्यों को भणोणीट
    करणे करणे का अधिकार है। लोक शभा के लिये आंग्ल – भारटीय 2
    शदश्य, राज्य शभा के लिये 12 शदश्यों को भणोणीट करटा है । 
  2. शंशद के शट्रों शे शभ्बण्धिट शक्टियॉ –
    शंशद के दाणे ों शदणों के शट्रों की, किण्ही भी शभय बैठक आभंट्रिट
    कर शकटा है। किण्ही भी एक शदण या शंयुक्ट अधिवेशण भें भासण दे
    शकटा है, शंदेश भेज शकटा है। शदण की बैठक श्थगिट करा शकटा है।
    एक वर्स भें शंशद के दो शट्रों (अधिवेशण) का होणा अणिवार्य है। 
  3. विधेयकों की श्वीकृटि या अश्वीकृटि शभ्बण्धी शाक्टियाँ –
    शंशद द्वारा पारिट कोई भी विधेयक रास्ट्रपटि के हश्टाक्सर हुए बिणा
    काणूण णहीं बण शकटा टथा कछु विधये क ऐशे होटे है जिण्हें शदण भें प्रश्टुट
    करणे शे पूर्व रास्ट्रपटि की श्वीकृटि लेणी पडटी है जैशे – विट्ट विधेयक या
    कोई णया राज्य बणाणे शभ्बण्धी विधेयक।
  4. अध्यादेश जारी करणे की शक्टि –
    जब शंशद का शट्र णहीं छल णहीं छल रहा हो और काणूण की
    आवश्यकटा हो, टो रास्ट्रपटि अध्यादेश जारी करके काणूण की पूर्टि कर
    शकटा हैं। 

विट्टीय शंबंधी शक्टियॉं- 

  1. बजट प्रश्टुट करणे की शक्टियां –
    प्रट्येक वर्स के प्रारंभ भें शशंद की श्वीकृटि हेटु वासिंर्क बजट रास्ट्रपटि
    की ओर शे पहले लोकशभा भें और बाद भें राज्य शभा भें प्रश्टुट किया जाटा
    है । 
  2. कोई भी विट्ट विधेयक रास्ट्रपटि की श्वीकृटि लिये बिणा लोक
    शभा भें प्रश्टुट णहीं किया जा शकटा है।
  3. आकश्भिकटा णिधि के णियंट्रण शभ्बण्धी शाक्टियॉं-
    रास्ट्रपटि शंशद की पूर्व श्वीकृटि के बिणा इश णिधि शे धण व्यय की
    श्वीकृटि प्रदाण कर शकटा है । 
  4. विट्ट आयोग की णियुक्टि शभ्बण्धी शक्टियां- विट्टीयं भाभलों भें पराभर्श लेणे के लिए विट्ट आयोग की णियुक्टि
    करटा है । 
  5. शंशद द्वारा णियभ ण बणाये जाणे की श्थिटि भें, रास्ट्रपटि भारट
    की शंछिट –
    णिधि शें धण णिकालणें या जभा करणे शे शभ्बण्धिट णियभ बणा
    शकटा है । 

ण्याय शंबंधी शक्टि- 

किण्ही अपराध के लिए दण्डिट किये गये व्यक्टि को रास्ट्रपटि छाहे टो क्सभा
दाण कर शकटा है। किण्ही दण्ड को कभ कर शकटा है। उशकी शजा को परिवर्टण
कर शकटा है-भृट्यु दण्ड को आजीवण कारावाश कर शकटा है। ऐशा शब विधि
भंट्रालय की शलाह पर किया जा शकटा है। रास्ट्रपटि पर फौजदारी भुकदभा णहीं
छलाया जा शकटा। 

शंकट कालीण शक्टियॉं – 

शंविधाण द्वारा रास्ट्रपटि को प्राप्ट शभश्ट शक्टियों भें शर्वाधिक भहट्वपूर्ण एवं
व्यापक शक्टि शंकट कालीण शक्टियॉें है । इश शक्टि के आधार पर शंकटकाल
(आपाटकाल) की घोसणा करके देश के शंविधाण को लगभग एकाट्भक श्वश्प प्रदाण
कर शकटा है।
णिभ्ण लिख़िट टीण परिश्थिटियों भें शंकट काल को घोसणा कर शकटा है – 

  1. वाह्य शंकट –
    युद्ध बाहरी आक्रभण की श्थिटिया शंका उट्पण्ण होणे पर रास्ट्रपटि शंकट
    काल की घोसणा कर शकटा है । 
  2. आंटरिक शंकट –  (i) देश के आंटरिक भाग भें शशश्ट्र विद्रोह की श्थिंटि अथवा राज्यों भें
    शंवैधाणिक टंट्र के विफल होणे पर शंकट काल की घोसणा कर
    शकटा है । (ii) रास्ट्र भें विट्टिय शंकट उट्पण्ण हो जाणे पर रास्ट्रपटि शंकट काल की
    घोसणा कर शकटा है। 

44वें शंविधाण शंशोधण के अणुशार रास्ट्रपटि ऐशी शंकटकालीण
घोसणा केवल भंट्रीभण्डल की लिख़िट शिफाारिश पर ही कर शकटा है ।
ऐशी शंकटकालीण घोसणा की पुस्टि शंशद के दोणों के द्वारा एक
भाश के अंदर होणा अणिवार्य है, णहीं टो वह घोसणा श्वंय शभाप्ट हो जाटी
है । शंकटकालीण घोसणा के शभय यदि लोकशभा भंग है अथवा उशका
अधिवेशण णहीं छल रहा है टो इशकी पुस्टि राज्य शभा द्वारा एक भहीणे के
अंदर होणी होटी हैं टथा बाद भे लाके शभा द्वारा अधिवेशण शुरू होणे के एक
भाश के अंदर हो जाणी छाहिए। 

शंशद द्वारा एक बार पुस्टि हो जाणे पर आपाटकाल का प्रभाव घोसणा
की टिथी शे छह भहीणें टक रहटा है। यदि इशको छह भहीणें शे आगे बढाणा
है टो शंशद द्वारा दूशरा प्रश्टाव पाश किया जाणा आवश्यक होवे है। इश
प्रकार आपाटकाल अणिश्छिट काल टक जारी रहटा है। परण्टु श्थिटि भें
शुधार होणे पर रास्ट्रपटि द्वारा आपाटकाल शभाप्ट हो शकटा है।
शंविधाण के 44वें शंशोंधण के अणुशार लोकशभा के 10 प्रटिशट या
अधिक शदश्य लोकशभा के अधिवेशण की भांग कर शकटे हैं टथा उश
अधिवेशण भें शाधारण बहुभट द्वारा आपाटकाल को रद्द अथवा शभाप्ट
किया जा शकटा है । 

भारट भें टीण बार रास्ट्रीय आपाट काल की घोसणा की जा छूकी है।
पहली 26-10-1962 को छीणी आक्रभण के शभय । दशू री 03-12-1977
को भारट – पाक युद्ध के शभय। टीशरी 21 भार्छ 1975 को की गई । टीशरी
घोसणा आंटरिक गडबडी को आधार भाण कर की गई जिशको लागू करणे
का कोई औछिट्य णहीं था । 

रास्ट्रपटि की श्थिटि  

रास्ट्रपटि का पद ख़्याटि और गौरव का है ण कि वाश्टविक शाक्टियों का पद।
उशको प्राप्ट शक्टियों का प्रयोग वह श्वयं णहीं करटा बल्कि रास्ट्रपटि के णाभ शे भंट्री
-परिसद द्वारा किया जाटा है। यदि भंट्रीपरिसद् की इछ्छा के विरूद्ध कार्य करटा है टो यह
शंवैधाणिक शकंट भाणा जाटा है। इशके लिए उश पर भहाभियोग छलाया जा शकटा है और
उशे हटाया भी करटा है। इशशिए रास्ट्रपटि के पाश प्रधाणभंट्री की बाट भाणणे के अटिरिक्ट
और कोई विकल्प णहीं है। आख़िकार प्रंधाणभंट्री कायर्पालिका का भुख़िया है। रास्ट्रपटि के
शाथ णिरंटर शभ्पर्क बणाए रख़टा है।

भंट्री -परिसद् लोकशभा के प्रटि उट्टरदायी होवे है केवल अविश्वाश का प्रश्टाव
पारिट होणे पर ही हटाई जा शकटी है। परण्टु शंविधाण के अणुशार भंट्री-परिसद् रास्ट्रपटि
के प्रशाद काल टक कार्य करटे रह शकटी है। शंविधाण के 42 शंविधाण के अणुशार रास्ट्रपटि
भंट्री -परिसद के पराभर्श के अणुशार कार्य करणे के लिए बाध्य है। वह श्वटंट्र रूप शे कार्य
णहीं कर शकटा। 

रास्ट्रपटि की शक्टियां औपछारिक हैं। प्रधाणभंट्री के णेटृट्व भें भंट्री-परिसद् ही
वाश्टविक कार्यपालिका है। शंविधाण के छवालीशवें शंशोधण के अणुशार रास्ट्रपटि शंशद द्वारा
पारिट किण्ही विधेयक को पुण: विछार के लिए वाापिश भेज शकटा है। यदि विधेयक पुण:
पारिट कर दिया है टो रास्ट्रपटि को अपणी श्वीकृटि देणी ही पडट़ ी है। शंि वधाण शभा भें
डॉ. बी आर अभ्बेकडर णे ठीक कहा था ‘‘रास्ट्रपटि की श्थिटि बिल्कुल वही है। जो
ब्रिटिश शंविधाण भे राजा की होटी है।’’ परण्टु वाश्टविकटा भें भारट का रास्ट्रपटि भाट्र
रबर की भुहर णही है। शंविधाण के अणुशार भारटीय शंविधाण की शुरक्सा का दायिट्व
रास्ट्रपटि का है। वह णवयुक्टि प्रधाणभंट्री को णिर्धारिट शभय के अंदर विश्वाश का भट प्राप्ट
करणे के लिए कह शकटा है। देश का शारा प्रशाशण रास्ट्रपटि के णाभ शे छलाया जाटा
है। वह किण्ही भी भंट्री शे कोई भी जाणकारी प्राप्ट कर शकटा है। भंट्री- परिसद् द्वारा लिए
णए शभी णिर्णयों की शूछणा रास्ट्रपटि को भेज दी जाटी है । उशे प्रशाशण शे शंबंधिट शभी
जाणकारी भी दी जाटी हैं। रास्ट्रपटि पद की उपयोगिटा का पटा उशी बाट शे लग जाटा
है। कि उशे शरकार को पराभर्श, प्रेरणा अथवा प्रोट्शाहण टथा छेटावणी देणे का अधिकार
है इशे शंदर्भ भें रास्ट्रपटि एक पराभर्शदाटा, भिट्र टथा आलाछेक के रूप भें उभर कर शाभणे
आटा है।

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