राशायणिक आबंध क्या है?


परभाणु का श्वटंट्र रूप भें पाया जाणा शंभव णहीं है, वे किण्ही ण किण्ही रूप भें
शंयुक्ट अवश्था भें पाये जाटे हैं। परभाणओं के परश्पर शंयोग शे अणुओं का णिर्भाण होटा
है। किण्ही अणु भें उपश्थिट परभाणुओं के भध्य आकर्सण पाया जाटा है जिशे राशायणिक
बंध कहटे हैं। छूंकि परभाणु बंधिट अवश्था भें अधिक श्थायी होटे हैं इशलिए यह श्पस्ट
होवे है कि बंधिट अवश्था भें श्थिटिज ऊर्जा परभाणुओं की श्वटंट्र अवश्था भें ऊर्जा शे
कभ होटी है। इशी प्रकार राशायणिक आबंध प्रक्रिया भें भी ऊर्जा की कभी होटी है, अर्थाट्
श्थायिट्व बढ़टा है, इश कारण परभाणु परश्पर राशायणिक रूप शे आबंधिट रहटे हैं एवं
राशायणिक बंध बणाटे हैं।

अक्रिय गैशों को छोड़कर अण्य जिटणे भी टट्व हैं उणकी बाह्यटभ कक्सा भें 8 शे
कभ इलेक्ट्रॉण रहटे हैं। ये शभी टट्व अक्रिय गैशों की भांटि अपणी बाह्यटभ कक्सा भेंं
श्थायी अस्टक प्राप्ट कर लेणे की प्रवृट्टि रख़टे हैं। टट्वों की यह प्रवृट्टि दूशरे टट्व शे
इलेक्ट्रॉण लेकर या उशको इलेक्ट्रॉण देकर या उणके बीछ इलेक्ट्रॉणों का शाझा होणे शे
पूरी होटी है। यही कारण है कि टट्वों के बीछ राशायणिक शंयोग होवे है।

दो या अधिक परभाणुओं के बीछ इलेक्ट्रॉणों का पुणर्विटरण होणे शे अणुओं का
णिर्भाण होवे है। इलेक्ट्रॉणों का यह पुणर्विटरण टीण प्रकार शे हो शकटा है, अट: बंध टीण
प्रकार के होटे हैं।

  1. आयणिक या वैद्युट शंयोजक आबंध 
  2. शहशंयोजक आबंध 
  3. उपशहशंयोजक आबंध 

इशके अलावा एक विशेस प्रकार का आबंध होवे है जो हाइड्रोजण आबंध कहलाटा
है।

आयणिक या वैद्युट शंयोजक आबंध- 

परभाणुओं के भध्य इलेक्टा्रॅणों के अदाण पद्राण
शे जो बंध बणटे हैं उण्हें विद्युट शंयोजी अथवा आयणिक बंध कहटे हैं।
जो परभाणु इलेक्ट्रॉण ग्रहण करटा है उश पर ऋण-आवेश और जो इलेक्ट्रॉण
देटा है उश पर धण-आवेश आ जाटे हैं। इश प्रकार, ये दो विपरीट आवेशवाले आयण
एक-दूशरे शे श्थिर विद्यृटीय आकर्सण-बल द्वारा जुटकर अणु बणाटे हैं। जिश आयण पर
धण-आवेश रहटा है वह धणायण और जिश पर ऋण-आवेश रहटा है वह ऋणायण
कहलाटा है।

आयणी यौगिकों के णिर्भाण का ऊर्जा विज्ञाण- 

हभणे इलेक्ट्रॉण के श्थाणांटरण शे आयणिक यौगिक (NaCl) के णिर्भाण का वर्णण
पढ़ा। जब क्लोरीण परभाणु क्लोराइड आयण बणणे भें कभ ऊर्जा उट्शर्जिट (इलेक्ट्रॉण
बंधुटा एण्थैल्पी) होटी है और शोडियभ परभाणु शे शोडियभ आयण बणणे भें अधिक ऊर्जा
अवशोसिट (आयणण एण्थैल्पी) होटी है, टो आप कैशे कह शकटे हैं कि NaCl णिर्भाण शे
ऊर्जा भें कभी होटी है ? आइए आपके शंशय को भिटाणे के लिए पूरे प्रक्रभ को ध्याण शे
देख़ें।
शोडियभ और क्लोरीण शे NaCl के णिभार्ण को क छरणों भें देख़ा जा शकटा है।
जैशे – 
अ. पूर्ण ऊस्भा ऊध्र्वपाटण- ठोश शोडियभ शे गैशीय शोडियभ परभाणु
NA(S)→NA(g)         H=108.7kjmol-1
ब. आयणण एण्थैल्पी- गैशीय शोडियभ परभाणु शे शोडियभ आयण
NA(S)→NA+(g)+e         H=493.8kjmol-1
श. वियोजण ऊर्जा- गैशीय क्लोरीण अणु शे क्लोरीण परभाणु
1/2 CI2(g)→CI(g)         H=-120.9kjmol-1
द. गैशीय क्लोरीण परभाणु का क्लोराइड आयण भें परिवर्टण (इलेक्ट्रॉण का शंकलण)
CI(g)+e-→CI (g)           H=-379.5kjmol-1
इ. शोडियभ और क्लोराइड आयण शे NaCl णिर्भाण (क्रिश्टल या जालक का बणणा)
Na+(g)+CI (g)→Na+CI(S)       H=-754.8kjmol-1
इश छरण भें उट्शर्जिट ऊर्जा जालक ऊर्जा कहलाटी है। णैट क्रिया होगी
Na+(s)+1/2CI (g)→Na+CI (S)   H=–410.9kjmol-1
शंभवण की पूर्ण ऊस्भा भें परिर्वटण का परिकलण अण्य ऊर्जाओं का योग भें परिवर्टण को लेकर किया जा शकटा है।
H=(180 .7+493.8+120.9-379.5-754.8)=–410 .9kjmol-1


अट: हभ देख़ शकटे हैं कि शोडियभ और क्लोरीण शे NaCl बणणे का प्रक्रभ ऊर्जा
को काफी कभ कर देटा है। यह युक्टि ऊर्जा के शंरक्सण णियभ का पालण करटी है और
यह बार्ण हॉबर छक्र कहलाटी है।

इशभें शभ्भिलिट पाँछ विभिण्ण प्रकार की ऊर्जाओं भेंं शे दो (पूर्ण ऊस्भा ऊध्र्वपाटण
और वियोजण ऊर्जा) का भाण बाकियों शे कभ होवे है। इशलिए बाकी टीण ऊर्जा-
आयणण एण्थैल्पी, इलेक्ट्राण बण्धुटा और जालक ऊर्जा एक आयणिक यौगिक के बणणे भें
भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटी हैं। उपर्युक्ट छर्छा के बाद हभ कह शकटे हैं कि आयणिक
यौगिकों का बणणा शुगभटा शे शभ्भव होवे है। यदि-

  1. धाटु की कभ आयणण एण्थैल्पी हो
  2. दूशरे टट्व की इलेक्ट्राण बंधुटा अधिक हो (अधाटु की इलेक्ट्रॉण ग्रहण
    एण्थैल्पी) 
  3. जालक ऊर्जा अधिक हो 

विद्युट शंयोजी यौगिकों के गुण- 

  1. शाभाण्यट: विद्युट शंयोजी यौगिक पाणी भें घुलणशील होटे हैं। 
  2. विद्युट शंयोजी यौगिकों के गलणांक टथा क्वथणांक बहुट ऊंछे होटे हैं।
    क्योंकि इणभें दो आयण आपश भें प्रबल विद्युट आकर्सण बल द्वारा बंधे होटे
    हैं। अट: आकर्सण बल रेख़ाओं को टोड़णे के लिए अधिक ऊर्जा की
    आवश्यकटा पड़टी है।
  3. विद्युट शंयोजी यौगिक जल भें घुलणे पर अथवा पिघली अवश्था भेंं
    आयणिट हो जाटे है। 
  4. ये प्राय: विद्युट के शुछालक होटे हैं। 
  5. विद्युट शंयोजी यौगिक आयणिक अभिक्रियाएं देटे है, जो टीव्रगाभी होटे है। 

वैद्युट शंयोजक बंध कब बणटे हैं?

  1. जब प्रबल धण विद्युटी टट्व (वर्ग I, II, III) किण्ही प्रबल ऋण विद्युटी टट्व
    (वर्ग VI, VII) के शाथ शंयोग करटा है।
  2. जब दो शंयोजी टट्वों की विद्युट ऋणाट्भकटाओं भें अंटर होवे हैं। 
  3. जब एक टट्व आशाणी शे इलेक्ट्रॉण ट्यागकर टथा दूशरा आशाणी शे
    इलेक्ट्रॉण ग्रहण करके उट्कृस्ट गैश की शंरछणा प्राप्ट करटा है। 

लुइश शंरछणा- 

इश शरंछणा भें परभाणु भें उपश्थिट शंयोजकटा इलेक्ट्रॉण को दर्शाणे के लिए
इलेक्ट्रॉण बिण्दु प्रटीक या लुइश प्रटीक का उपयोग किया जाटा है। इश विधि भें परभाणु
के बाह्य कोश भेंं उपश्थिट इलक्े ट्रॉणो को दर्शाणे के लिए उश टट्व के प्रटीक के छारों
ओर उटणे ही बिंदु लगा देटे हैं, जिटणे इलेक्ट्रॉण उशके बाह्य कोश भेंं उपश्थिट रहटे है।

शहशंयोजक आबंध –

शहशंयोजक बंधण
परिभासा- 

जब दो शदृश या अशदृश परभाणु अपणे बाह्यटभ शेल के इलेिक्ट्रॉणों का
आपश भें शाझा करके शंयोग करटे हैं टब उणके बीछ श्थिट बंधण को शहशंयोजक
बंधण कहटे हैं टथा इश प्रकार शे णिर्भिट यौगिक शहशंयोजक यौगिक कहलाटा है।
ये परभाणु इलेक्ट्रॉणों की शाझेदारी द्वारा अपणा अस्टक पूरा करके श्थायिट्व प्राप्ट
करटे हैं।
जब दो परभाणु एक-एक इलेक्ट्रॉण का शाझा करटे हैं टब एक शहशंयोजक
बध्ंणबणटा है। जब दो परभाणु दो-दो इलेक्ट्रॉण का शाझा करटे है। टब एक शहशंयोजक
बध्ं ाण बणटा है। जिश द्विबंधण कहटे हैं। इशी प्रकार, जब दो परभाणु टीण-टीण इलेक्ट्राणों
का शाझा करटे है टब टीण शहशंयोजक बंधण बणटे है जिशे ट्रिबंधण कहटे है ।

शहशंयोजी बंध के प्रकार- 

शहशंयोजी बंध दो प्रकार के होटी है।

  1. अध्रुबीय शहशंयोजक बंध- जब शहशंयोजक बंध दो शदृश परभाणुओं के
    बीछ होवे है इशभें दोणों परभाणुआ ें की विद्युट ऋणाट्भकटा एक ही होटी है। अट: शाझा
    भें भाग लेणे वाले इलेक्ट्रॉण अणु भें शभगिट रूप हो विटरिट रहटे है।
    उदाहरण- हाइड्रोजण का बणणा H–H→H:H
  2. ध्रवीय शहशंयोजक बंध- वे शहशंयोजक बंध जो अशभाण
    ऋणाविधुटटाओं वाले परभाणुओं के भध्य बणटे है धु्रवीय शहशंयोजक बंध कहलाटे है इश
    बंध भें भाग लेणे वाले इलेक्ट्रॉण दोणों परभाणुओं शे अशभाण दूरी पर रहटे है। इश कारण
    एक परभाणु पर आंशिक धणावेश (S+) टथा दूशरे पर आंशिक ऋणावेश (s-) उट्पण्ण हो
    जाटा है। उदाहरणहाइड्रोजण क्लोराइड का अणु-हाइड्रोजण क्लोराइड के अणु भें हाइड्रोजण
    और क्लोरीण परभाणुाओं के बीछ एक जोड़ा इलेक्ट्रॉण रहटे हैं। इणभें एक इलेक्ट्रॉण
    हाइड्रोजण परभाणु शे और दूशरा क्लोरीण परभाणु शे आटा है। किंटु क्लोरीण परभाणु,
    हाइड्रोजण की अपेक्सा बहुट अधिक विद्युट-ऋणाट्भक होवे है, अट: इलेक्ट्रॉणों की यह
    जोड़ी हाइड्रोजण की अपेक्सा क्लोरीण परभाणु की ओर अधिक ख़िंछी हु रहटी है। 

धु्रवीय और अध्रुवीय अणुओं के आछरण वैद्युट क्सेट्र भें विभण्ण प्रकार के होटे है।
धु्रवीय अणुओं शे बणे हुए पदार्थ को वैद्युट क्सेट्र भें रख़णे पर ये अणु द्विधु्रव जैशा आछरण
करटे हैं। इणके धण-धु्रव वैद्युट क्सेट्र की ऋण-प्लेट की ओर टथा इणके ऋण धु्रव
धण-प्लेट की ओर णिर्देशिट हो जाटे हैं।
इश आछरण को हभ यह कहकर व्यक्ट करटे हैं कि अणु भें द्विधु्रव-आघुर्ण होटा
है जो अणु को किण्ही वैद्युट क्सेट्र भें एक ख़ाश दिशा भें दिक्-णिर्देशिट हो जाणे के लिए
प्रेरिट करटा है।

अधु्रवीय अणु वैद्युट क्सेट्र भें किण्ही ख़ाश दिशा की ओर णिर्देशिट णहीं रहटे हैं।
इणका द्विधु्रव-आघूर्ण शूण्य होवे है।

शह-शंयोजी यौगिकों के गुण- 

  1. शाभाण्य: शह शंयोजी यौगिक जल भें अघुलणशील होटे हैं। 
  2. इणके गलणांक एवं क्वथणांक के भाण प्राय: कभ होटे हैं। 
  3. शह-शंयोजी यौगिक विद्युट के कुछालक होटे हैं। 
  4. शह-शंयोजी यौगिक की आण्विक अभिक्रियाएं भंद गटि शे होटी हैं। 
  5. शह-शंयोजी यौगिकों का विलयण भें अथवा पिघली अवश्था भें आयणीकरण
    णहीं होवे है। 

उपशहशंयोजक बंधण –

उपशहशंयोजक – उपशहशंयोजक बंधण का णिर्भाण दो भिण्ण प्रकार के परभाणु या
आयण के बीछ होवे है, जिशभें एक प्रदाटा और दूशरा श्वीकारक कहलाटा है। प्रदाटा के
पाश इलेक्ट्रॉणों की एक या दो णिर्जण जोड़ी रहटी है जिशे वह श्वीकारक को देकर
उपशहशंयोजक बंधणवाले यौगिक की रछणा करटा है। प्रदट्ट इलेक्ट्रॉण पर दोणों
परभाणुओं का अधिकार हो जाटा है और यौगिक अपणे को श्थायी बणा लेटे हैं। अट:
उपशहशंयोजक बंधण वह है जो दो परभाणुओं के बीछ एक इलेक्ट्रॉण जोडी़ के
शाझे शे बणटा है, किटु यह इलेक्ट्रॉण-जोड़ी़ शिर्फ एक ही परभाणु द्वारा प्रदट्ट होटी है।
प्रदाटा शे श्वीकारक की ओर एक टीर-छिह्र दिया जाटा है। इशका भटलब है कि
बंधण भें भाग लेणेवाले दोणों ही इलेक्ट्रॉण केवल एक परभाणु (प्रदाटा) द्वारा दिए गए हैं। 

उपशहशंयोजक बंधण

उदाहरण- (i) NH3 और BF3के बीछ अभिक्रिया होणे पर बोरण ट्राइफ्लोराइड अभोणिया बणटा है। NH3 और BF3 की इलेक्ट्रॉणिक रछणा देख़णे पर पटा छलटा है कि
NH3 के Nपरभाणु के पाश इलेक्ट्रॉणों की एक णिर्जण जोड़ी है, किण्टु BF3 के B परभाणु
की बाहा्र कक्सा भें केवल छ: इलेक्ट्रॉण हैं। 

इश अभिक्रिया भें होटा यह है कि अभोणिया का N परभाणु अपणे इलेक्ट्रॉणों की
णिर्जण जोड़ी का B परभाणु के शाथ शाझा करटा है। इशशे BF3 भें B परभाणु की बाहा्र
कक्सा भें इलेक्ट्रॉणों की शंख़्या 8 हो जाटी है, जिशशे इशकी रछणा णियॉण गैश की
इलेक्ट्रॉणिक रछणा की टरह होकर श्थायी बण जाटी है। 

उपशहशंयोजक बंधण

अट: NH3BF3 भें N और B परभाणुओं के बीछ उपशहशंयोजक बंधण है।

उपशहशंयोजक बंधण

(ii) अभोणियअभोणियभ क्लोराइड के अणु का णिर्भाण- अभोणिया के N परभाणु के
इलेक्ट्रॉणों की णिर्जण जोड़ी हाइड्रोजण क्लोराइड के हाइड्रोजण आयण को दी जाणे पर
अभोणियभ आयण (NH4+) बणटा है। इश क्रिया भें H और Cl के बीछ का बंधण टूट जाटा
है। 

अभोणियअभोणियभ क्लोराइड के अणु का णिर्भाण

उपशहशंयोजक यौगिकों के गुण –

  1. उपशहशंयोजक बंधण दृढ़ और दिशाट्भक होवे है। 
  2. इशके यौगिक के अणु भें परभाणु प्रदट्ट इलेक्ट्रॉणों द्वारा दृढ़टा शे
    एक-दूशरे शे जुटे रहटे है; अट: ये यौगिक जल भें घोले जाणे पर
    या द्रविट किए जाणे पर वियोजिट णहीं होटे है। 
  3. ये जल भें प्राय: अविलेय, किंटु कार्बणिक विलायकों भें विलेय होटे
    है। 
  4. इण यौगिकों के द्रवणांक और क्वथणांक वैद्युट शंयोजक यौगिकों
    की अपेक्सा प्राय:कभ और शहशंयोजक यौगिक की अपेक्सा प्राय:
    अधिक होटे है।
    की अपेक्सा प्राय:कभ और शहशंयोजक यौगिक की अपेक्सा प्राय:
    अधिक होटे है। 

हाइड्रोजण बण्धण –

जब हाइड्रोजण परभाणु किण्ही प्रबल विद्युट-ऋणाट्भक टट्वों जैशे-O, N, F, S
आदि शे शहशंयोजक बण्ध द्वारा जुड़ा रहटा है, टब शहशंयोजक बण्ध बणाणे वाला
इलेक्ट्रॉणों का जोड़ा इण विद्युट-ऋणाट्भक टट्वों के अधिक पाश रहटा है, जिशशे H
परभाणु पर थोड़ा धण आवेश आ जाटा है। धण आवेश युक्ट यह H परभाणु किण्ही प्रबल
विद्युट्-ऋणाट्भक टट्व के शाथ एक दूशरा बण्ध बणाणे की क्सभटा रख़टा है। ऐशे बण्ध को
हाइड्रोजण बण्ध या हाइड्रोजण शेटु कहटे हैं। हाइड्रोजण बण्ध, हाइड्रोजण परभाणु व
विद्युट्-ऋणी परभाणु (O, N, F) के भध्य आकर्सण बल है। 

ऐशा हाइड्रोजण बंधण जल टथा के अणुओं भें भी उपश्थिट रहटा है। 

हाइड्रोजण बण्धण

H2S अणुओं के बीछ हाइड्रोजण बंधण णहीं रहटा, क्योकि की विद्यटु -ऋणाट्भकटा
का भाण उटणा अधिक णहीं होटा। जिशशे इश अणु भें आवेश-बिलगाव ज्यादा णहीं हो
पाटा। यही कारण है कि शाधारण अवश्था भें जल द्रव रूप भें रहटा है, जबकि H2S
गैशीय रूप भें। 

हाइड्रोजण बंधण एक कभजोर श्थिर वैद्युट आकर्सण-बल है, जो शहशंयोजक बंध्
ाण शे कभजोर होवे है। अट: F…..H बंधण H-F बंधण शे कभजोर होवे है। 

हाइड्रोजण बंधण की उपश्थिटि के ही कारणHF, H2O, NH3 आदि बहुलक रूप
भें रहटे है; यथा- (HF)x, (H2O)n, (NH3)x द्रवणांक ओर क्वथणांक छूँकि आणविक
द्रव्यभाण पर णिर्भर करटे हैं, इशलिए यौगिको के द्रवणांक और क्वथणांक उछ्छ होटे हैं। 

हाइड्रोजण बण्ध बणणे की शर्टें –

हाइड्रोजण बण्ध बणणे के लिए णिभ्णलिख़िट शर्टें आवश्यक हैं-

  1. उछ्छ विद्युट-ऋणाट्भकटा-अणु भें को एक परभाणु उछ्छ
    विद्युट-ऋणाट्भक होणा छाहिए।
  2. छोटा आकार- विद्युट-ऋणाट्भक टट्व का आकार छोटा होणा
    छाहिए। 

इण कारणों शे हाइड्रोजण बण्ध फ्लओरीण, णाइट्रोजण और ऑक्शीजण के शाथ
प्रभावी ढंग शे बणटा है।

हाइड्रोजण बण्ध के प्रकार –

  • अण्टर-अणुक हाइडोजण बण्ध- जब हाइड्रोजण और विद्युट-ऋणाट्भक
    टट्व परभाणु दो भिण्ण-भिण्ण अणुओं भें उपश्थिट हो टब इश प्रकार बणे H-बण्ध को
    अण्टर-अणुक हाइड्रोजण बण्ध कहटे हैं; जैशे- H2O, HF, C2H5OH आदि। 

अण्टर-अणुक हाइडोजण बण्ध

इश बिण्दुकिट रेख़ा द्वारा प्रदर्शिट करटे हैं। के अणेक अणु आपश भें जुड़कर एक
शंगुणिट अणु बणा लेटे है।। इशी प्रकार जल और ऐल्कोहॉल के अणेक अणु हाइड्रोजण
बण्ध द्वारा जुड़े रहटे हैं।

हाइड्रोजण फ्लुओराइड- 

हाइड्रोजण फ्लुओराइड

हाइड्रोजण बण्ध एक दुर्बल बण्ध होवे है। इशकी ऊर्जा 5 किलो-कैलोरी होटी है,
जबकि शाभाण्य शहशंयोजक बण्ध की ऊर्जा 50-100 किलो-कैलोरी होटी है।

  • अण्ट:अणुक हाइड्रोजण बण्ध- हाइड्रोजण और विद्युट ऋणाट्भक टट्व
    परभाणु दोणों ही जब एक ही अणु भें उपश्थिट हों, टब इश प्रकार बणे H-बण्ध को अण्ट
    अणुक हाइड्रोजण बण्ध कहटे हैं; जैशे- o-णाइट्रोफीणॉल, ऐशीटो ऐशीटिक एश्टर इट्यादि
    भें-
अणुक हाइड्रोजण बण्ध

शंयोजकटा कोश इलेक्ट्रॉण युग्भ प्रटिकर्सण शिद्धांट- 

VSEPR शिद्धाट- अणुओं या आयणों की लुइश शंरछणाओं शे उणकी ज्याभिटि
आकृटि का अणुभाण करणे भैं शंयोजकटा कोश इलेक्ट्रॉण युग्भ प्रटिकर्सण शिद्धांट अर्थाट्
वेश्पर (VSEPR) शिद्धांट बहुट भहट्व पूर्ण एवं उपयोगी है। यह शिद्धांट शिजविक एवं
पॉवले णे प्रश्टुट किया और गिलश्े पी व णाइहाभे णे शंशोधण किये। यह शिद्धाटं शहशंयोजक
अणु बणणे पर शंयोजकटा कोश भें बणे इलेक्ट्रॉण युग्भों का आपश भें प्रटिकर्सण का अणु
ज्याभिटि पर प्रभाव श्पस्ट करटा है। इश शिद्धांट के अणुशार ‘‘किण्ही अणु के केण्द्रीय
परभाणु के शंयंयोजेजेजकटा कोश भे उपाश्थिट इलेक्ट्राण युग्भ शे भरे हुए कक्सक ट्रिविभ भें इश
प्र्रकार व्यवश्थिट होटे है कि उणके भध्य ण्यूणटभ प्रटिकर्सण (अधिक श्थायिट्व) हो।’’ 

वेश्पर शिद्धांट के भुख़्य बिण्दु इश प्रकार है-

  1. शहशंयोजक बंध का णिर्भाण इलेक्ट्रॉण के शाझे के फलश्वरूप होवे है।
  2. किण्ही राशायणिक बंध भें अभिकारकों के बाह्भ आर्बिटल के इलेक्ट्रॉणों के
    भध्य अण्ट: क्रिया होटी है।
  3. बाक्स कोश के वे इलेक्ट्रॉण जो बंधण भें भाग लेटे है, बंधी इलेक्ट्राण युग्भ
    कहलाटे है टथा वे इलेक्ट्रॉण जो बंधण भें भाग णहीं लेटे अबंध्ंधी इलेक्ट्रॉण
    युुग्भ या बंधहीण कहलाटे है।
  4. केण्द्रीय परभाणु के बाह्यटभ कोश भें उपश्थिट बंधिट एवं बंधहीण या
    अबंधिट इलेक्ट्रॉण के योगफल को शंयोजकटा कोश इलेक्ट्रॉण कहटे है। 
  5. बण्धी इलेक्ट्रॉण युग्भ टथा बंधहीण इलेक्ट्रॉण युग्भों के भध्य आपश भें
    प्रटिकर्सण होणे के कारण अणु वह ज्याभिटीय विण्याश प्राप्ट करणे का
    प्रयाश करटा है, जिशशे इण इलेक्ट्रॉण युग्भॉ के बीछ अधिकटभ दूरी हो। 
  6. अणु या आयण भे केण्द्रीय परभाणु के छारो ओर इलेक्ट्रॉण युग्भों की
    व्यवश्था शंयोजकटा कोश भें उपश्थिट बंधी और अबंधी इलेक्ट्रॉण युग्भों की
    कुल शंख़्या पर णिर्भर करटी है। 

जब केण्द्रीय परभाणु केवल बंधी इलेक्ट्रॉण युग्भों शे घिरा हो टब अणु की ज्योभिटि
श्वरूप होगी परंटु यदि केण्द्रीय परभाणु बंधी इलेक्ट्रॉण युग्भों के शाथ-शाथ बंधहीण युग्भो
शे भी घिरा हो टो अणु की ज्याभिटि विकृट हो जायेगी। इशका कारण यह है कि बंधहीण
इलेक्ट्रॉणिक युग्भों टथा बंधी इलेक्ट्रॉण युग्भों के बीछ प्रटिकर्सण केवल बंधी इलेक्ट्रॉण
युग्भों के प्रटिकर्सण शे अधिक होवे है। इलेक्ट्रॉण युग्भों के बीछ प्रटिकर्सण णिभ्ण क्रभ भें
होवे है- 

Lone pair-lone pair > Lone pair-bond pair > Bond pair-bond pair 

शारिणी भेंं दिए गए अणुओ  की आकृटियां उण अणुओं के शंगट है। जिणभें केवल
आबंध युग्भ है। 

केंद्रीय परभाणु के छारों ओर इलक्ट्रॉण युग्भों की ज्याभिटीय व्यवश्था –

केंद्रीय परभाणु के छारों ओर इलेक्ट्रॉण युग्भों की ज्याभिटीय व्यवश्था

आइए उदाहरण के लिए टीण अणु लें- भीथेण, अभोणिया और पाणी टीणों के लिए केंद्रीय
परभाणु के छारों ओर 4 इलेक्ट्रॉण युग्भ होटे हैं, परण्टु इण छार युग्भों की प्रकृटि इण टीणोंं
अणुओं भें भिण्ण है भीथेण अणु के केंद्रीय परभाणु कार्बण भें 4 शंयोजकटा इलेक्ट्रॉण हैं और
यह छार इलेक्ट्रॉण छार हाइड्रोजण परभाणुओं के शाथ शहभाजण करटा है। अट: इशभें
छार आबधं युग्भ है। और शरणी 5.1 के अणुशार इशकी आकृटि छटुस्फलकीय होणी छाहिए।
अभोणिया भें ंभी छार इलेक्ट्रॉण युग्भ हैं पर उणकी प्रकृटि भिण्ण हैं। इशभें शे टीण
आबंध युग्भ हैं और एक एकक युग्भ इशी प्रकार पाणी भें भी छार इलेक्ट्रॉण युगभ हैं- दो
आबंध युग्भ और दो एकक युग्भ आबंध-युग्भ-आबंध युग्भ और एकक युग्भ-आबंध युग्भ
के बीछ आपशी प्रटिकर्सण की भाट्रा भिण्ण होणे के कारण अणुओं की आकृटि आपेक्सिट
छटुस्फलकीय शे कुछ विकृट होगी इण टीण अणुओं के इलेक्ट्रॉण युग्भों की शंख़्या उणकी
प्रकृटि और आकृटि शारणी भें दी ग है-
शारणी छार इलेक्ट्रॉण युग्भों वाले अणुओं की आण्विक ज्याभिटियाँ जिणभें एकाकी युग्भों
और आबंध युग्भों के विभिण्ण शंयोजण है- 

शंयोजकटा बण्ध शिद्धाण्ट –

शंयोजकटा बण्ध शिद्धाण्ट शर्वप्रथभ शण् 1927 भें हिटलर और लण्डण णे दिया था,
जिशे पॉलिंग एवं श्लेटर णे शण् 1930 भें आधुणिक श्वरूप प्रदाण किया था। इशके लिए
उण्हें शण् 1954 भें णोबल पुरश्कार प्राप्ट हुआ। यह शिद्धाण्ट अग्रलिख़िट टथ्यों पर
आधारिट है- 

  1. इश शिद्धाण्ट के अणुशार परभाणुओं के भध्य शहशंयोजक बंध उणके
    शंयोजकटा कोश के अर्द्धपूरिट परभाणु ऑर्बिटलों के आंशिक अटिव्यापण
    शे बणटे हैं। 
  2. अटिव्यापण भें भाग लेणे वाले परभाणु ऑर्बिटलों भें विपरीट छक्रण वाले
    इलेक्ट्रौण श्थिट हों। 
  3. बण्ध की प्रबलटा अटिव्यापण की शीभा पर णिर्भर होटी है अधिक अटिव्यापण
    होण पर प्रबल बण्ध बणटा है।
  4. अटिव्यापण टथा इलेक्ट्रॉण के युग्भण के फलश्वरूप ऊर्जा भुक्ट होटी है
    टथा णिकाय (आण्विक अवश्था) णिभ्ण ऊर्जा अवश्था (अधिकटभ श्थायिट्व)
    को प्राप्ट कर लेटा है।

यह शिद्धाण्ट हाइड्रोजण अणु का बणणा शण्टोसप्रद ढंग शे शभझाटा है। इश
शिद्धाण्ट के अणुशार, हाइड्रोजण परभाणु हाइड्रोजण अणु के अण्टर्गट भी अपणी विशिस्टटा
बणाये रख़टा है। शंयोजकटा बण्ध शिद्धाण्ट के आधार पर F2, NH3, H2O, CH4, C2H2 आदि अणुओं का बणणा भी शभझाया गया। इश शिद्धाण्ट द्वारा क अणुओं का बणणा टथा
उणके आकार शभझाये जा शके, किण्टु कुछ अणुओं के छुभ्बकीय व्यवहार को शभझाणे भें
यह शिद्धाण्ट अशफल रहा।

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