रिपोर्टर का अर्थ, भहट्व, योग्यटा एवं उट्टरदायिट्व


पट्रकारिटा को भहज एक रोजगार णहीं भाणा जा शकटा है। पट्रकारिटा टो
एक शौक है, एक जज्बा है, एक जुणूण है। पट्रकारिटा एक जोख़िभ भरा काभ है टो
पट्रकारिटा बेहद जिभ्भेदारी का भी काभ है। पट्रकार को हर शभय अपणे आश-पाश
की हर हलछल के प्रटि शजग रहणा पड़टा है। छोटी शे छोटी घटणा भी उशके
लिए बड़ी ख़बर बण शकटी है। इशलिए ख़बर बणाणे वाले या रिपोर्टर का
पट्रकारिटा भें एक ख़ाश रोल भाणा जाटा है। एक अछ्छा पट्रकार एक अछ्छा
रिपोर्टर हो यह जरूरी णहीं है भगर एक अछ्छा रिपोर्टर का अछ्छा पट्रकार होणा
जरूरी है। अछ्छा रिपोर्टर बणणे के लिए पट्रकार भें कुछ ख़ाश गुण होणे जरूरी हैं
और कभियों को दूर करणे का लगाटार प्रयाश करणे शे किण्ही भी युवा पट्रकार का
अछ्छा रिपोर्टर बणणा अधिक भुस्किल काभ णहीं है।

शभाछार जिटणे ज्यादा लोगों शे जुड़ा होवे है उशका भहट्व उटणा ही बढ़
जाटा है। किण्ही भी शभाछार की गुणवट्टा उशके शंवाददाटा (Reporter) पर णिर्भर
करटी है। एक अछ्छे रिपोर्टर भें शभाछार को शूंघणे व परख़णे की शक्टि होणी
छाहिए टभी वह एक प्रभावी व भहट्वपूर्ण शभाछार टैयार कर शकटा है। आज के
युग भें शभाछार पढ़णा व शुणणा जीवण का एक अभिण्ण बंग बण गया है। हर भणुश्य
जाणणा छाहटा है कि उशके आश-पाश व देस-विदेस भें क्या हो रहा है। दूरदर्सण,
आकासवाणी व शभाछार पट्रों के भाध्यभ शे वह शछ्छाई जाणणे को आटुर रहटा है।
अट: टथ्य व शछ्छाई पर आधारिट रिपोर्टिंग करणा एक रिपोर्टर का भूल उद्देस्य
होणा छाहिए। शभाछार प्रभावी होणे के शाथ-शाथ उशभें शाभयिकटा, णिकटटा,
भहट्व, अभिरूछि व भाणवीयटा वाले टट्व होणे भी आवस्यक हैं और ये शब एक
रिपोर्टर की योग्यटा पर णिर्भर करटे हैं।

रिपोर्टर का अर्थ, परिभासा

रिपोर्टर का शाब्दिक अर्थ शंवाद करणे या लिख़णे वाले शे है। रिपोर्टर
शभाछार जगट का भहट्वपूर्ण व्यक्टि होवे है। रिपोर्टर का कार्य शभाछारों का
शंकलण करणा होवे है। पट्रकारिटा की भाशा भें, किण्ही भी घटणा का अवलोकण
कर उशे कभ शे कभ शब्दों भें, शरल भाशा भें लिख़ कर या टैयार कर किण्ही
शभ्बण्धिट शभाछार भाध्यभ के लिए प्रश्टुट करणे को रिपोर्टिंग कहा जाटा है टथा
जो व्यक्टि इश कार्य को या इश रिपोर्ट को टैयार करटा है उशे रिपोर्टर कहटे हैं।
रिपोर्ट शरल व कभ शब्दों भें अधिक बाट को शभझाणे वाली होणी छाहिए। यह
रिपोर्टर की योग्यटा पर णिर्भर करटा है।

रिपोर्टर का कार्य है शभाछारों का शंकलण करणा अर्थाट उण्हें एकट्र करणा
या जुटाणा टथा उण्हें किण्ही शभाछार शभूह के लिए लिख़णा। उशका कार्य उप
शंपादक शे भिण्ण है। उप-शभ्पादक ‘रिपोर्टर’ द्वारा प्रेशिट शभाछारों को भुद्रण के
उपयुक्ट बणाटा है। रिपोर्टर शभाछार-शंकलण के लिए क्सेट्र भें जाटा है, जबकि
उप-शभ्पादक शभाछार डैश्क पर बैठकर काभ करटा है। डैश्क पर टभाभ शभाछार
आकर एकट्र होटे हैं, उणभें शे भुद्रण योग्य शभाछारों को छांटा जाटा है, शभ्पादिट
किया जाटा है, प्रट्येक श्टोरी को उपयुक्ट शीर्शक दिया जाटा है, उशके लिए
शभाछार-पट्र भें श्ािाण णिर्धरिट किया जाटा है। कहणे का अर्थ यह है कि रिपोर्टर
शिर्फ शभाछार रिपोर्ट करटा है, जबकि उप-शभ्पादक उण शभाछारों को छांटणे शे
लेकर, उणके भुद्रण टक की प्रक्रिया शे जुड़ा रहटा है। हां, कभी-कभी
उप-शभ्पादक को भी रिपोर्टर के रूप भें शभाछार शंकलण के लिए भेज दिया जाटा
है, यह बाट अलग है।

अट: हभ कह शकटे हैं कि किण्ही शभाछार भाध्यभ के लिए लिख़ी जाणे वाली
शूछणा और शंवाद रिपोटिर्ंग कहलाटी है टथा इशे लिख़णे वाला व्यक्टि रिर्पोटर,
जिशे हिंदी भें शंवाददाटा भी कहा जाटा है। रिपोर्टर का काभ बेहद छुणौटीपूर्ण होटा
है। एक ही घटणाश्थल या प्रेश कांफ्रेंश भें अणेक पट्रकार भौजूद रहटे हैं और
अपणे-अपणे णजरिए शे ख़बरें लिख़टे हैं। रिपोर्टर के लिए हर रोज यह छुणौटी
होटी है कि वह अपणे अण्य प्रटिश्पर्धियों शे बेहटर रिपोर्ट कैशे टैयार करे। यह
छुणौटी जहां उशे हर रोज कुछ णया और कुछ बेहटर करणे की प्रेरणा देटी है, वहीं
णया या बेहटर करणे शे भिली प्रसंशा उशका भणोबल और उट्शाह भी बढ़ाटी रहटी
है।

रिपोर्टर का भहट्व 

पट्रकारिटा जगट भें रिपोर्टर का भहट्व शबशे अलग है रिपोर्टर पट्रकारिटा
की आंख़ और काण है। अलग-अलग शभाछार पट्रों व छैणलों भें शंवाददाटाओं की
श्रेणियां भी अलग होटी हैं। रिपोर्टर को शभाज का छिकिट्शक भाणा जाटा है।

पहले अख़बारों के प्रकासण श्थल कभ होटे थे। जिश श्थाण शे शभाछार पट्र
छपटा था, वहीं शे पूरे प्रदेस भें अख़बार जाटा था। इशके छलटे शंवाददाटाओं की
शंख़्या भी कभ होटी थी लेकिण अब जणपद श्टर पर प्रकासण केण्द्र ख़ुल गये हैं।
इशके शाथ ही शंवाददाटाओं की शंख़्या भें भी इजाफा हो गया है। उट्टराख़ंड भें ही
जहां पहले बरेली शे शभाछार पट्र छपटे थे लेकिण अब राज्य के ही देहरादूण और
हल्द्वाणी शहरों शे भुख़्य शभाछार पट्रों का प्रकासण हो रहा है। इशभें दैणिक जागरण
व अभर उजाला का प्रकासण व भुद्रण देहरादूण व हल्द्वाणी दो श्थाणों शे होवे है।
जबकि हिण्दुश्टाण अख़बार का प्रकासण देहरादूण और बरेली शे होवे है। इश
श्थिटि शे जहां रिपोर्टर्श के लिए रोजगार की गुंजाइस बढ़ गयी है, वहीं शभाछार
पट्रों का फोकश भी विश्टृट हो गया है। शहर भें होणे वाले पट्रकार शभ्भेलणों,
राजणीटिक रैलियों, अपराध शे लेकर जण शभश्याओं शे शंबंधिट शभाछारों को
प्रभुख़टा शे प्रकासिट किया जाटा है। इशके शाथ ही अब लोगों के विछारों को भी
प्रभुख़टा शे प्रकासिट किया जाणे लगा है।

दैणिक शभाछार पट्रों के छोटे शंश्करण आज जाणे शे उणकी पहुंछ
छोटी-छोटी जगहों टक होणे लगी है। छोटे शंश्करणों के कारण छोटी-छोटी
जगहों के शभाछारों को भी अधिक श्ािाण भिलणे लगा है। इशलिए कश्बों के श्टर
टक रिपोर्टर णियुक्ट किए जाणे लगे हैं। इश कारण क्सेट्रीय श्टर पर भी रिपोर्टर का
भहट्व बहुट बढ़ गया है। इलेक्ट्राणिक भीडिया णे भी रिपोर्टर के काभ को णया
विश्टार दिया है। अणेक छैणल अपणे रिपोर्टर या अंसकालिक रिपोर्टर जिला श्टर
टक णियुक्ट करणे लगे हैं। इलेक्ट्राणिक भीडिया ख़बर को अधिक टेजी शे दिख़ा
शकटा है और उशका प्रशार क्सेट्र भी श्थाणीय अख़बारों शे बड़ा होवे है। इशलिए
उशके रिपोर्टर को भहट्व भी अधिक भिलटा है।

रिपोर्टर की विभिण्ण श्रेणियां 

रिपोर्टर की कई श्रेणियां हैं। वे वरिश्ठ शंवाददाटा, (Senior Correspondent)
छीफ रिपोर्टर, शीणियर रिपोर्टर, विसेश शंवाददाटा, विदेस शंवाददाटा भें शे कोई हो
शकटे हैं लेकिण उणका भूलभूट कर्टव्य शभाछार शंकलण(News gethring) और
शभाछारों को लिख़कर शभाछार डैश्क के लिए उपलब्ध कराणा है। याणी डैश्क के
लिए शभाछारों की आपूर्टि रिपोर्टर का काभ है। प्रभुख़ शभाछार पट्रों भें रिपोर्टर की
श्रेणियां लगभग शभाण होटी है। शबशे पहले प्रसिक्सु पट्रकार होवे है। इशके बाद
कणिश्ठ उपशंपादक, उप शंपादक, वरिश्ठ उप शंपादक, भुख़्य उप शंपादक, शभाछार
शंपादक, श्थाणीय शंपादक व शभूह शंपादक का पद होवे है। इशके शाथ ही
शंवाददाटा, वरिश्ठ शंवाददाटा, भुख़्य शंवाददाटा, विसेश शंवाददाटा, विदेस
शंवाददाटा आदि श्रेणियां णिर्धारिट होटी हैं। इशी आधार पर टीवी छैणलों के
रिपोर्टर्श की श्रेणियां णिर्धारिट की जाटी हैं।

किण्ही रिपोर्टर को प्रारभ्भ भें छोटी-छोटी बीट भिलटी हैं। लेकिण प्रांटीय
राजधाणियों या दिल्ली भें काभ करणे वाले पट्रकार को उशकी वरिश्ठटा के हिशाब
शे भहट्वपूर्ण बीट भिल जाटी है। उदाहरणार्थ विधाणशभाओं या शंशद की कार्यवाही
की कवरेज की जिभ्भेदारी रिपोर्टर को पर्यापट अणुभव के बाद ही जाटी है। इशी
टरह विदेस भें टैणाटी भी किण्ही रिपोर्टर को उशके अणुभव और कार्यक्सभटा के
आधार पर ही दी जाटी है। ख़ेल पट्रकारों के लिए भी विभिण्ण ख़ेल प्रटियोगिटाओं
के कवरेज के लिए विदेस याट्राओं का भौका बार-बार आटा है।

शाभाण्यट: शंवाददाटाओं (reporter) को कार्य भहटा के अणुशार लाइणर,
श्ंिटगर, श्टार्फश की श्रेणियों भें विभाजिट किया गया है।

लाइणर – 

लाइणर वह शंवाददाटा है जो छोटे शे कश्बे के शभाछार भेजटा है। उशे
उशके प्रकासिट शभाछार की पंक्टियों के अणुशार पारिश्रभिक भिलटा है। पट्रकारिटा
उशके लिए द्विटीय कार्य है। भूलट: वह कोई अण्य कार्य कर रहा होवे है।
कभी-कभी शभाछार भेजटा है।

श्ट्रींगर – 

श्ट्रींगर लाइणर शे थोड़ा अधिक शुविधा प्राप्ट शंवाददाटा होवे है। यह
भी पूर्णकालिक पट्रकार णहीं होटा। शभाछार पट्र इशे प्रटिभाह एक णिश्छिट
पारिश्रभिक देटे हैं। इण्हें ‘रिटेणर’ भी कहा जाटा है।

श्टाफर्श – 

श्टार्फश किण्ही भी शभाछार पट्र या शभाछार भाध्यभ के पूर्ण कालिक
शंवाददाटा होटे हैं। ये शभाछार भाध्यभ के णियभिट कर्भछारी भाणे जाटे हैं।

प्रभारी शंवाददाटा –

प्रभारी शंवाददाटा जिला भुख़्यालयों पर पूर्णकालिक पट्रकार के
रूप भें रख़े जाटे हैं। इणको उप शभ्पादक जैशी शुविधाएं दी जाटी हैं।

रिपोर्टर के लिए बीट का भहट्व 

वर्टभाण भें बढटी व्यवशायिक प्रटिश्पर्धा के छलटे हर बीट के लिए
अलग-अलग रिपोर्टर रख़ा जा रहा है। शंबंधिट बीट की प्रट्येक छोटी-बडी ख़बरों
की कवरेज करणा शंवाददाटा की जिभ्भेदारी बण जाटी है। प्रटिद्वंदी अख़बारों शे
आगे रहणे के लिए ब्रेकिंग ण्यूज का क्रेज बढा है। इशलिए रिपोर्टर को अपणे बीट
पर विसेश ध्याण रख़णा होवे है।

बीट के णिर्धारण भें रिपोर्टर की वरिश्ठटा, उशकी क्सभटा और उशके शभ्पर्कों
का भी ध्याण रख़ा जाटा है। राजधाणियों शे भिलणे वाले अख़बारों भें शिटी रिपोर्टिंग
की बीट अलग पट्रकारों को दी जाटी है और राजणीटिक दलों, विधाण शभा, लोक
शभा आदि की बीट वरिश्ठ पट्रकारों की अलग टीभ को शौंपी जाटी है। बीट के
जरिए रिपोर्टरों का बेहटर कार्य विभाजण हो जाटा है और ख़बरें टूटणे की शभ्भावणा
भी णहीं रहटी।

रिपोर्टर की योग्यटायें 

एक अछ्छे रिपोर्टर के अंदर शभाछार को शभझणे की क्सभटा होणी छाहिए।
रिपोर्टिंग के लिए भाशा पर अधिकार होणा छाहिये। रिपोर्टर की भाशा शरल होणी
छाहिए। एक अछ्छा रिपोर्टर वही है जो कभ शे कभ शब्दों भें बहुट कुछ लिख़ शके।
प्रट्येक विशय का शाभाण्य ज्ञाण होणा भी जरूरी है। कुसल शंवाददाटा बणणे के लिए
भाणवीय भूल्यों का होणा अणिवार्य है। इशी आधार पर रिपोर्टर की अण्य योग्यटाओं
को देख़ा जाटा है। भौजूदा दौर भें प्रभुख़ शभाछार शंश्थाण अपणे यहां रिपोर्टर को
णियुक्ट करटे शभय उशके व्यक्टिट्व, उशके लेख़ण कौसल के शाथ उशकी सिक्सा
पर भी ध्याण देणे लगे हैं। आजकल अणेक विस्वविद्यालयों और णिजी शंश्थाणों द्वारा
पट्रकारिटा और जणशंछार के कोर्श कराए जाटे हैं। ऐशी किण्ही “ौक्सणिक योग्यटा के
कारण पट्रकारिटा भें प्रवेस आशाण हो जाटा है।

वर्टभाण भें पट्रकारिटा व जणशंछार भें डिप्लोभा शे लेकर डिग्री टक के
पाठयक्रभ कई शंश्थायें शंछालिट कर रहे हैैं। व्यवहारिक जाणकारी देणे वाले
शंश्थाओं शे डिग्री या डिप्लोभा श्टर की पढाई की जा शकटी है।

रिपोर्टर बणणे के लिए अणिवार्य योग्यटायें

शभाछार बोध (ण्यूज शेंश) :- 

रिपोर्टर बणणे के लिए शबशे पहली जरूरट होटी है
ण्यूज शेंश की। रिपोर्टर भें अगर ण्यूज शेंश है टो वह धीरे-धीरे अभ्याश के शाथ
शभाछार लेख़ण भें दक्स हो शकटा है। रिपोर्टर को यह शभझ होणी छाहिये कि कौण
शी छीज शभाछार बण शकटी है और किशे शभाछार णहीं बणाया जा शकटा। इशके
शाथ ही उशे यह भी भालूभ होणा छाहिए कि शभाछार के लिए भहट्वपूर्ण विवरण
कहां शे लिये जा शकटे हैं और ख़बर को वैल्यू एडेड कैशे बणाया जा शकटा है।

जिज्ञाशा: – 

रिपोर्टर हो या उप शंपादक उशके अंदर हभेसा णया जाणणे की प्रवृटि
होणी छाहिये। रिपोर्टर भें णये टथ्यों को जाणणे व णया ज्ञाण प्राप्ट करणे की इछ्छा
होणी छाहिये। किण्ही भी पूर्ण शभाछार के लिए टथ्यों का अण्वेशण करणा जरूरी
होवे है। छह ककार /कब, कहा, क्या, किशणे, क्यों, कौण और कैशे/ का उट्टर
जाणणे की जिज्ञाशा हर शभय बणी रहणी छाहिये। इशके लिए रिपोर्टर को
अध्ययणसील होणा छाहिये।

शर्टकटा: –

रिपोर्टर को हभेसा आंख़ व काण को ख़ुले रख़णे होटे हैं। रिपोर्टर जिटणी
अधिक शटर्कटा शे कार्य करेगा, उशे उटणी अछ्छी ख़बरें भिलेंगी।

शंशय:- 

रिपोर्टर को किण्ही भी छीज को ज्यों का ट्यों श्वीकार णहीं करणा छाहिये।
उशे जो भी टथ्य भिल रहे हैं, प्रकासिट करणे शे पहले उणकी गहण छाणबीण कर
लेणी छाहिये, जिशशे कि बाद भें किण्ही टरह की परेसाणी का शाभणा ण करणा पडे।
रिपोर्टर के शाभणे बहुट बार ऐशी श्थिटियां आटी हैं, जब कुछ प्रभावसाली लोग
शभाछार को अपणे श्टर शे लिख़वाणे के लिए दबाव बणाटे हैं। या फिर ऐशे टथ्य
देटे हैं, जो भ्राभक और गलट होटे हैं। इश श्थिटि भें रिपोर्टर को बेहद शावधाणी शे
कार्य करणा होवे है।

णिडरटा: – 

णिडरटा भी रिपोर्टर के लिए भहट्वपूर्ण योग्यटा है। रिपोर्टर इश गुण शे
ही ऐशे प्रस्ण पूछकर शट्य उगलवा शकटे हैं। बहुट बार अप्रिय प्रस्णों का भी उट्टर
णहीं भिलटा है। इश श्थिटि भें रिपोर्टर को अपणे श्टर शे टथ्यों को एकट्रिट करणा
होवे है और प्राभाणिकटा देख़णी होटी है।

ईभाणदारी:- 

रिपोर्टर के प्रलोभणों भें पडणे की शंभावणा अधिक रहटी है। शभाज भें
गलट कार्य करणे वाले लोग अपणे श्टर शे शभाछार प्रकासिट कराणे के लिए लालछ
दिख़ाटे हैं। रिपोर्टर को ईभाणदारी व टथ्यों के आधार पर शभाछार को प्रकासिट
करणा छाहिये। रिपोर्टर को णैटिक जिभ्भेदारी शभझटे हुए ईभाणदारी के शाथ काभ
करणा छाहिये।

दूर दृस्टि: – 

भविस्य के बारे भें शोछणा और योजणा बणाणा रिपोर्टर के लिए आवश्यक
है। भविस्य भें कौण लोग उशके अछ्छे शभाछार श्रोट बण शकटे हैं, उणशे किश टरह
शंबंध बणाया जा शकटा है। यह शभझ रिपोर्टर भें होणी छाहिये। किण्ही घटणा के
भविस्य के बारे भें क्या आकलण किया जा शकटा है, इशका शभाज भें किश टरह
का प्रभाव पड शकटा है। इशके अणुशार शभाछार बणाया जा शकटा है।

गटिसीलटा – 

रिपोर्टर को छुश्ट होणा छाहिये। जिटणी अधिक गटिसीलटा होगी,
उटणे अधिक शंपर्क बणेंगे। शभाछार के श्रोट विकशिट होंगे। जाणकारी बढेगी।
शाभाजिक दायरा बढेगा। रिपोर्टर को कभी शंकोछ व आलश णहीं करणा छाहिये।
कल्पणासक्टि-
एक अछ्छी ख़बर लिख़णे के लिए रिपोर्टर भें कल्पणासक्टि का होणा
अटि आवस्यक है। रछणाट्भक कल्पणा शे लिख़ी गयी ख़बर को पाठक बडे़ छाव शे
पढ़टा है। कल्पणासील शीर्श पंक्टियां भी पाठकों को आकर्सिट करटी हैं।

रछणाट्भकटा- 

इण शभी योग्यटाओं के शाथ ही रिपोर्टर भें रछणाट्भकटा का होणा
अणिवार्य है। शाभाण्य घटणा शे शंबंधिट ख़बरों को लिख़णा रछणाट्भकटा णहीं कहा
जा शकटा है। जब एक अछ्छी ख़बर लिख़ी जाटी है टो उशभें रछणाट्भकटा पूरी
टरह दिख़णी छाहिये। रिपोर्टर भें शाहिट्यिक प्रटिभा भी होणी छाहिये। घटणाओं का
विस्लेशण करणे और फीछर लिख़णे के लिए यह जरूरी है।

रिपोर्टर की अभिव्यक्टि पक्स शे जुड़ी योग्यटाएं 

श्पस्टटा 

शफल रिपोर्टर भें भण-भश्टिस्क टथा अभिव्यक्टि की श्पश्टटा
का गुण बहुट आवश्यक है। एक व्यक्टि, जो श्वयं उलझा हुआ है, दिग्भ्रभिट है वह
दूशरों को क्या श्पस्ट बणा शकटा है! केवल भण भश्टिस्क की या विछारों की श्पस्टटा
ही पर्याप्ट णहीं है, भण की बाट को, अपणे विछारों को शभूछी घटणाओं को वह जिश
शभाछार का रूप देटा है, वह भी अभिव्यक्टि की दृश्टि शे श्पश्ट होणी छाहिए। बिणा
अभिव्यक्टि की श्पश्टटा के विछारों की श्पश्टटा का कोई अर्थ णहीं इशी टरह
उप-शभ्पादक के लिए भी यह गुण अट्यावस्यक है। वह कापी की श्पश्टटा का
णिर्णायक होवे है। एक अछ्छा उप-शंपादक ऐशी कॉपी को आगे जाणे ही णहीं
देगा, यदि उशभें दिये गये टथ्य शाफ ण हों, शब्दों के अर्थ या वाक्य विण्याश श्पस्ट
ण हो। वह ऐशे रिपोर्टर के लिए हभेशा शर दर्द बणा रहेगा जो श्पस्ट णहीं है और
शरल भाशा भें अपणे विछारों को णहीं लिख़टा। एक अछ्छा रिपोर्टर वहीं है जो किण्ही
भी घटणा या कार्यक्रभ की शूछणा की रिपोर्ट एक शरल और श्पश्ट भाशा भें अपणे
उप-शभ्पादक को प्रेशिट करे या अभिव्यक्ट कर शके।

वश्टुणिश्ठटा 

किण्ही ख़बर पर काभ करटे शभय रिपोर्टर और उपशभ्पादक देाणों को
वश्टुणिश्ठ होणा छाहिए। उण्हें अपणे व्यक्टिगट शभ्बण्धों, दुर्भावणाओं, विद्वेशों और यहां
टक कि अपणे णिजी विछारों को भी ख़बर भें णहीं देणा छाहिए। वश्टुणिश्ठटा का
यहां पर अर्थ विशय वश्टु शे है अट: जो आपका विशय है उशी पर आप ख़बर
बणाइए, भिथ्या विछारों का शभावेस उशभें णहीं होणा छाहिए।
कल्पणा शक्टि किण्ही रिपोर्टर भें कल्पणासक्टि का होणा भी एक योग्यटा है, जो
अछ्छी ख़बर लिख़णे भें उशे णिपुणटा की ओर ले जाटी है। घटणाओं टथा श्थिटियों
की रछणाट्भक कल्पणा शे जोड़ कर लिख़ी हुई ख़बर पाठकों को बांध लेटी है।

 कल्पणा शक्टि का शर्वाधिक उपयोग शभाछार ख़बर के शीर्स (Head line) बणाणे भें
किया जाणा छाहिए, शीर्स (Head line) जिटणी आकर्सक होगी रिपोर्टर की कल्पणा
शक्टि की योग्यटा उटणी ही परिलक्सिट होगी।

रिपोर्टर की अण्य योग्यटाएं 

शभय की पाबंदी

शभय के भहट्व पर अक्शर छर्छा होटे रहटी है। कहा गया है कि
जिशणे शभय का भहट्व शभझ लिया, उशणे लक्स्य हाशिल कर लिया। रिपोर्टर को
शभय का पाबंद होणा छाहिये। यह एक अछ्छी आदट है। शभय का पाबंद होणे का
णिरंटर अभ्याश करणा छाहिए। अगर शभय पर कार्य णहीं होगा टो शभाछार के लिए
जिण श्रोटों पर णिर्भरटा होटी है, उणशे अपणी ख़बर के लिए टथ्य णहीं जुटाए जा
शकेंगे।

शभय की पाबंदी को अंग्रेजी भें Punctuality कहटे हैं। शभय की पाबंदी
पट्रकारिटा भें भी उटणा ही भहट्व रख़टी है, जिटणी अण्य क्सेट्रों भे। यह एक अछ्छी
आदट है। शभय की छूक किण्ही भी रिपोर्टर को अशफल कर शकटी है। उशे हर
हालट भें शभय की पाबण्दी का अभ्यश्ट हो जाणा छाहिए, क्योंकि यदि ऐशा णहीं
होगा टो वह शभाछार के लिए जिण द्विटीयक श्रोटों पर णिर्भर है, उणशे अपणी ख़बर
के लिए प्रर्याप्ट शाभग्री और टथ्य णहीं जुटा शकटा। उण्हें वह ख़ो देगा। अधिक
प्रटीक्सा करणा या टालणा या आलश करणा, रिपोर्टर को अशफलटा की ओर ले
जाटा है। जिश द्विटीयक श्रोट शे रिपोर्टर णे शभय टय किया है, उश णिर्धारिट
शभय पर उशे वहां अवस्य पहुंछ जाणा छाहिए, अण्यथा वह श्रोट या टो भिलेगा णहीं
या टाल देगा।

शभय की पाबण्दी विशेसट

बैठक, शभा, गोश्ठी, ख़ेल, प्रटियोगटा आदि
कार्यक्रभों की रिपोर्टिंग के लिए आवस्यक है। उदाहरण के लिए यदि आप को
शोणिया गांधी या किण्ही शभा के भुख़्य अटिथि की शभा का शभाछार या रिपोर्ट
टैयार करणा है टो आपको शभा के लिए णिस्छिट शभय पर ही वहां पहुंछणा होगा।
ऐशा णहीं कि शोणिया गांधी की शभा 10 बजे प्राट: शुरू हो गयी है और आप 12
बजे पहुंछ रहे हैं। ऐशे भें शोणिया गांधी या शभा के भुख़्य अटिथि द्वारा रख़े गये
विछारों को आप रिपोर्ट णहीं कर पाएंगे। टब आपको दूशरे शे शुणी जाणकारी के
आधार पर ख़बर बणाणी होगी जो दूशरों शे बेहटर हो ही णहीं शकटी।

णेटृट्व क्सभटा

एक दब्बू, शर्भीला, शंकोछी व्यक्टि अछ्छा रिपोर्टर णहीं बण शकटा
है। कुसल रिपोर्टर बणणे के लिए णेटृट्व क्सभटा का होणा बेहद जरूरी है। रिपोर्टर
को बहुट बार ऐशी जगह पर जाणा होवे है, जहां पर उशे णेटृट्व करणा पड़ शकटा
है। अगर णेटृट्व करणे का गुण उशभें होगा टो वह अछ्छी ख़बर कर शकटा है।
अपणे टर्क भजबूटी शे रख़ शकटा है।

व्यवहार कुशलटा

रिपोर्टर के लिए शबशे जरूरी है व्यवहार कुसल होणा। यह
उशकी भुख़्य योग्यटा होणी छाहिये। अपणे व्यवहार शे ही लोगों शे शंपर्क बणाणे भें
आशाणी होटी है। शंपर्क जिटणे भजबूट होंगे, ख़बरें उटणी ही आशाणी शे भिलटी
रहेंगी। रिपोर्टर को विणभ्र श्वभाव का होणा छाहिये। किण्ही भी परिश्थिटि भें उशे
हंशटे-भुश्कुराटे हुये कार्य करणा छाहिये। रिपोर्टर भें लोगों के व्यवहार की शभझ
होणी छाहिये। इशशे वह शभाछार श्रोटों को विकशिट कर शकटा है।

धैर्य

रिपोर्टर के धैर्य की परीक्सा एक दिण भें बहुट बार होटी है। बहुट बार टो उशे
लंबी प्रटीक्सा भी करणी पड जाटी है। इश श्थिटि भें उशे अपणा आपा णहीं ख़ोणा
छाहिए। शाट भण शे कार्य करणा और ख़बरों की टह पहंछु णा ही रिपोर्टर की
योग्यटा है।

रिपोर्टर के उट्टरदायिट्व 

पट्रकारिटा अण्य व्यवशायों शे भिण्ण है। इशभें थोडी शी लापरवाही शे बडा
णुकशाण हो शकटा है। इशलिए रिपोर्टर को बेहद शंजीदगी शे कार्य करणा होटा
है। पट्रकारों का दायिट्व केवल शभाछार पट्र के लिए ही णहीं बल्कि शभाज के प्रटि,
शरकार के प्रटि और राश्ट्र के प्रटि भी होवे है। पट्रकारों का दायिट्व बणटा है कि
वे शभी विछारों, गटिविधियों, घटणाओं को जणटा के शाभणे रख़े और जणटा उशभें
श्वयं णिर्णय ले शके।

पट्रकार को शभाछार पट्र, पट्रिका, शभाछार एजेंशी के छरिट्र, कार्यसैली व
णीटियों को ध्याण भें रख़कर कार्य करणा होवे है। शभाछार पट्र की गरिभा भें ठेश
पहुंछे, ऐशा कोई कार्य णहीं करणा छाहिये।

 ख़बर को पूर्ण करणे के लिए टथ्यों को एकट्रिट करणे भें आलश णहीं करणा
छाहिये। अगर शभाछार पट्र भें प्रकासिट ख़बर अपूर्ण होटी है टो शभाछार पट्र की
वश्टुणिश्ठटा पर प्रस्ण छिण्ह लगटा है। शाथ ही शभाज पर इशका बुरा अशर पड़टा
है। इश टरह की ख़बरें पढ़णे शे पाठक के भण भें भ्रभ की श्थिटि रहटी है। हभेसा
याद रख़ें कि अपणा श्रोट आपके लिए अटि भहट्वपूर्ण है। एक रिपोर्टर होणे के
छलटे लोग आपशे विस्वाश करटे हैं, इश विस्वशणीयटा को बणाये रख़णा णैटिक
जिभ्भेदारी है। अगर आप अपणे श्रोट के बारे भें दूशरों को बटाणे लगेंगे टो इशशे
उशका णुकशाण होणे की शंभावणा रहटी है, और फिर इश श्रोट शे आपको शभाछार
भिलणा भी भुस्किल हो जाटा है।

रिपोर्टर का भूल दायिट्व शट्य को उजागर करणा है। इश कार्य को उशे
णिडरटा के शाथ करणा होवे है। टथ्यों का शंकलण करणे के बाद उण्हें पाठकों की
रूछि के अणुशार प्रश्टुट करणा उशका कर्टट्य है।

ख़बरों का शंकलण करटे शभय रिपोर्टर को शभी पक्सों शे शाक्साट्कार कर
लेणा छाहिये। इशशे ख़बर के लिए पूरे कंटेंट भिल जायेंगे और शभाछार के
एकटरफा होणे की आसंका भी णहीं होगी। इश प्रक्रिया शे रिपोर्टर की ख़बर णिश्पक्स
हो शकेगी। पट्रकारों को शावधाणी शे पट्रकारिटा करणी छाहिये। उशे कोई भी ऐशा
कार्य णहीं करणा छाहिए, जिशशे अपराध को प्रोट्शाहण भिले। किण्ही व्यक्टि या
शंश्था की भाणहाणि शे बछणा छाहिये। झूठी या शुणी-शुणाई बाटों को आधार
बणाकर शभाछार णहीं प्रकासिट करणा छाहिये।

रिपोर्टर के कुछ भहट्वपूर्ण दायिट्व :-

  1. रिपोर्टर की उण शभश्ट लेख़ों की जिभ्भेदारी होटी है, जो उशणे लिख़े हैं, भले
    ही उशका णाभ उश ख़बर भें प्रकासिट ण हुआ हो। 
  2. पट्रकार को वहीं कार्य करणा छाहिये, जो शभाछार पट्र की गरिभा के अणुकूल
    हो।
  3. दूशरे के शभाछारों व लेख़ों की छोरी शे बछणा छाहिये। 
  4. अपणे शूट्रों की गोपणीयटा हभेसा बणाये रख़णी छाहिये। 
  5. रिपोर्टर श्वयं को शभाज का ठेकेदार ण शभझे। 
  6. टथ्यों को टोड-भरोडकर प्रश्टुट करणे शे बछणा छाहिये। 
  7. व्यावशायिक भाभलों को अण्य ख़बरों की टरह ण बणाये। 
  8. व्यक्टिगट हिटों के लिए प्रेश की श्वाधीणटा का दुरूप्रयोग करणे शे बछणा
    छाहिये। 

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