रीतिकालीन काव्य की विशेषताएं



रीतिकालीन हिंदी साहित्य की रचना, जिन सामन्तीय परिस्थितियों में हुई, उस साहित्य को साधारण लोगों के जीवन
से तो सम्बद्ध नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह साहित्य तो मूलतः दरबारी या शाही साहित्य था। आश्रित कवियों
तथा आचार्यों ने जिस साहित्य की सृष्टि की, उसमें तत्कालीन राजाओं या सामन्तों की शृंगार वासना को तृप्त
करने के लिए सुरा, सुन्दरी, सुराही आदि के वर्णन के अतिरिक्त कविता रूपी कामिनी के अलंकरण एवं

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