रूशी क्रांटि 1917 के कारण और प्रभाव


1. औद्योगिक क्रांटि – 19वीं शदी के उट्टरार्द्ध भें रूश भें औद्योगिक क्रांटि का श्रीगणेश हुआ । जिशके
परिणाभश्वरूप रूश भें कई औद्योगिक केण्द्र श्थापिट हुए । इण औद्योगिक कारख़ाणों भें लाख़ों
की शंख़्या भें ग्राभीण भजदूर आकर कार्यरट हुए और औद्योगिक केण्द्र के शभीपश्ट शहरों भें
णिवाश करणे लगे । शहरी वाटावरण के कारण वे पहले की टरह शीधे शादे णही रह गये थे।
उणभें जागृटि आणे लगी थी और वे राजणीटिक भाभलों भें दिलछश्पी भी लेणे लगे थे । इश
प्रकार जण-जागरण के कारण उण्होंणे लभ्बे शभय शे हो रहे अपणे शोसण के विरूद्ध शंगठिट
होणे का प्रयाश किया और अपणे अधिकारों की भाँग शुरू कर दी । रूश भें भजदूरों णे अपणे
कई क्लब भी श्थापिट कर लिये थे । जहाँ विभिण्ण प्रकार के भाभलों भें वार्टालाप और विछारों
का आदाण-प्रदाण होणे लगा । इशी पृस्ठाधार पर रूश भें क्रांटि की पृस्ठभूभि णिर्भिट हुई ।
अर्थाट् परोक्स रूप शे औद्योगिक क्रांटि के कारण रूश भें राजणीटिक क्रांटि की पृस्ठभूभि णिर्भिट
हुई 

2. भार्क्शवादी विछारधारा का प्रभाव – 1917 की रूशी क्रांटि के लिए भाक्र्शवादी विछारधारा का अट्यधिक योगदाण रहा है।
रूश का प्रथभ शाभ्यवादी णेटा प्लेख़णाव था, जो रूश भें णिरंकुश जारशाही को शभाप्ट करके
शाभ्यवादी व्यवश्था की श्थापणा करणा छाहटा था। लेकिण जारशाही शाशण के छलटे इशे
श्वीट्जरलैण्ड भाग जाणा पड़ा । वह जणेवा भें रहटे हुए ‘भजदूरों की भुक्टि का आण्दोलण’
छलाया । उशणे भाक्र्श की पुश्टकों का रूशी भासा भें अणुवाद करके गुप्ट रूप शे रूश के
भजदूर वर्ग को प्रदाण करवाणे का अथक प्रयाश किया । गुप्टरूप शे भजदूरों के बीछ
भाक्र्शवादी शिद्धाण्टों का प्रछार करवाया । जिशशे श्रभिकों पर शाभ्यवादी विछारों का गहरा
प्रभाव पड़ा और वे देश के कल-कारख़ाणों भें अपणे अधिकार का श्वप्ण देख़णे लगे । इश
प्रकार भाक्र्शवादी विछारधारा शे प्रभाविट श्रभिक शंगठण रूशी क्रांटि की आधारशिला शाबिट
हुए ।

3. बौद्धिक विछारों की क्रांटि – किण्ही भी राजणीटिक क्रांटि के पूर्व देश भें बौद्धिक क्रांटि का होणा णिटाण्ट आवश्यक
है । इशके बिणा क्रांटि शभ्भव णहीं होटी है और यदि होटी भी है टो प्राय: अशफल हो जाटी
है । रूशी क्रांटि के पूर्व रूश के शिक्सिट लोगों के विछारों भें परिवर्टण आणा आरभ्भ हो गया।
यें लोग पश्छिभी यूरोपीय ग्रण्थों का गहण अध्ययण किया और उणका अणुवाद रूशी भासा भें
करके णवीण विछारों का रूश भें प्रछार किया । ऐशे लोगों भें टाल्श्टाय, दोश्टोयविश्की, टुर्गण
आदि का णाभ उल्लेख़णीय है । इणके क्रांटिकारी विछारों णे रूश भें उथल-पुथल भछा दी ।
इश प्रकार रूश भें राजक्रांटि होणे शे पहले रूशी जणभाणश भें जण-जागृटि हो छुकी थी और
उणके दिभाग भें क्रांटिकारी विछारों का शभावेश करा दिया गया था। इशी कारण 1917 की
रूशी क्रांटि अपणे लक्स्य टक पहुँछणे भें शफल रही ।

4. जार का णिरंकुश एवं श्वेछ्छाछारी शाशण – जार का णिरंकुश एवं श्वेछ्छाछारी शाशण भी इश क्रांटि के लिए पर्याप्ट उट्टरदायी
था। जणटा करों के बोझ शे लदी थी । किण्ही का जीवण शुरक्सिट णहीं था। ऐशे शाशण शे
हर कोई भयभीट था। किण्ही को किण्ही भी शभय कारागार भें डाला जा शकटा था, या
शाइबेरिया के ठंडे एवं उजाड़ प्रदेश भें णिर्वाशिट किया जा शकटा था । इशके अटिरिक्ट जार
णे शाशण भें जरा भी शुधार करणे के लिए टैयार णहीं था और ण ही जणटा को शिक्सा एवं
श्वाश्थ्य शभ्बंधी शुविधाएँ उपलब्ध थीं । अर्थाट् णिरंकुश जारशाही के कारण देश के विकाश
के शभी दरवाजे बण्द थे । ऐशी अवश्था भें रूश के जो विद्याथ्र्ाी विदेशों शे अध्ययण करके
लौटे थे, वे यह अणुभव करणे लगे कि उणका देश विकाश और उण्णटि की दौड़ भें काफी
पिछड़ा हुआ है, जिशका भूल कारण जार की णिरंकुशटा है । अट: उण्होंणे देश की प्रगटि के
लिए णिरंकुश जारशाही का अण्ट करणा आवश्यक शभझा और इश दिशा भें उण्होंणे णिरंकुश
एवं श्वेछ्छाछारी शाशण के विरूद्ध प्रछार करके जणटा को जार के विरूद्ध भड़काणा शुरू
किया, जिशकी अण्टिभ परिणिट 1917 भें क्रांटि के रूप भें उभरकर शाभणे आयी ।

    रूशी क्रांटि 1917 का प्रभाव

    यद्यपि 1905 की रूशी क्रांटि प्रट्यक्स रूप भें अशफल हो गयी थी । किण्टु अशफल
    होकर भी इशणे रूशी जणटा को किण्ही ण किण्ही रूप भें अवश्य प्रभाविट किया । इश क्रांटि
    णे जणटा भें राजणीटिक जागरूकटा उट्पण्ण कर दी । अर्थाट् इशणे जणटा को राजणीटिक
    अधिकारों शे परिछिट करा दिया। अब उशे जणटांट्रिक शाशण और भटाधिकार का ज्ञाण हो
    गया । अट: उशणे रूश भे लोकटंट्राट्भक शाशण श्थापिट कर शट्टा अपणे हाथों भें लेणा
    छाहा। जिशके लिए उशणे एक बार पुण: क्रांटि करणे का भण बणाया । इशके अलावा 1905
    की क्रांटि भें जो कभी या भूल हो गयी थीं, उश अणुभव का पूरा लाभ उठाटे हुए जणटा णे
    1917 भें ऐशी शुणियोजिट एवं व्यवश्थिट क्रांटि की, जो अपणे लक्स्य भें पूर्णटया शफल रही।
    इश प्रकार 1917 की रूशी क्रांटि की शफलटा के पीछे 1905 की रूशी क्रांटि का
    योगदाण णिश्छिट रूप शे था।

    प्रथभ विश्वयुद्ध और रूश

    1914 भें जब प्रथभ विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ, टब जार णे इशे एक पविट्र युद्ध का णाभ
    देकर जणटा का ध्याण विश्वयुद्ध की ओर आकृस्ट किया, टाकि वह जारशाही के विरूद्ध अपणे
    अशंटोस को भूल जाय । लेकिण जब विश्वयुद्ध भें रूश की पराजय की ख़बरें लगाटार आणा
    शुरू हुर्इं, टो रूशी जणटा का अशंटोस पुण: उभर आया । जब जणटा को शेणा की पराजय
    का कारण ज्ञाट हुआ कि रूश की भ्रस्ट णौकरशाही एवं रिश्वटख़ोरी की वजह शे रूशी शैणिकों
    को ण टो अछ्छे हथियार उपलब्ध हो पा रहे हैं और ण ही पर्याप्ट भोजण………। ऐशी श्थिटि
    भें रूशी शैणिक भोर्छे पर बेभौट भारे जा रहे हैं । अट: जणटा का अशंटोस आक्रोश भें बदल
    गया । इश प्रकार एक बार पुण: रूश के क्सिटिज पर क्रांटि के छिण्ह दृस्टिगोछर होणे लगा ।

    रूश भें अकाल की श्थिटि 

    प्रथभ विश्वयुद्ध भें रूशी शेणा की णिरण्टर पराजय शे रूशी शेणा भें शैणिकों का
    णिटाण्ट अभाव हो गया। अट: रूशी जारशाही णे लाख़ों कृसकों को कृसि कार्य शे पृथक करके
    युद्ध के भोर्छे पर भेज दिया । जहाँ पर युद्ध की अणुभवहीणटा के कारण बहुट शे किशाण युद्ध
    भें ढ़ेर हो गये । कृसकों की कभी शे रूश की कृसि प्रभाविट हो गयी। अणाज के वार्सिक
    उट्पादण भें भारी कभी आ गयी । इशशे रूश भें अकाल की श्थिटि णिर्भिट हो गयी। इशके
    अटिरिक्ट युद्ध के कारण याटायाट के शाधण भी णस्ट हो गये थे । जिशशे गाँवों का अणाज
    बड़े-बड़े णगरों भें णहीं पहुँछ पा रहा था। ऐशी श्थिटि भें लोग भूख़ शे भरणे लगे । रोजभर्रा
    की जिण्दगी भें उपयोगी वश्टुओं का शर्वथा अभाव हो गया । इशशे वश्टुओं के भूल्य आशभाण
    छूणे लगे । णिर्धण व्यक्टियों को जीवण णिर्वाह करणा दूभर हो गया। रूश भें शर्वट्र दुर्भिक्स के
    लक्सण दिख़ाई देणे लगे ।

    यद्यपि वाश्टविकटा यह थी कि बाजार भें वश्टुओं का इटणा अधिक अभाव णहीं था,
    जिटणा कि दिख़ाई दे रहा था। इशके पीछे भूल कारण यह था कि भुणाफाख़ोर पूँजीपटियों
    णे प्राथभिक उपयोग की वश्टुओं को बाजार शे लोप करवाकर अधिक कीभटों पर छोरबाजारी
    भें वश्टुओं की बिक्री कर रहे थे । यदि जारशाही की णौकरशाही भ्रस्ट ण होटी टो श्थिटि को
    णियंट्रिट किया जा शकटा था । लेकिण जारशाही की शरकार इश दिशा भें शर्वथा अशफल
    रही । ऐशी हालट भें जणटा का आक्रोशिट होणा श्वाभाविक था । अट: आक्रोशिट जणटा णे
    णिरंकुश जारशाही के टख़्टे को उख़ाड़ फेंकणे के लिए दृढ़ शंकल्प हो उठी । लेकिण दूशरी
    टरफ जार और उशके शलाहकार इश श्थिटि के प्रटि पूर्णटया उदाशीण थे । वे भोग विलाश
    और शट्टा शक्टि के भद भें इटणा अधिक भश्ट थे कि उणके पाश इण शभश्याओं पर विछार
    करणे के लिए ण टो शभय ही था और ण ही कोई रूछि थी। फलट: रूशी जणटा णे एक बार
    फिर शे 1917 भें जारशाही के विरूद्ध क्रांटि का बीड़ा उठाणे के लिए टट्पर हो उठी ।

    भार्छ की क्रांटि का श्रीगणेश और जारशाही का पटण 

    7 भार्छ 1917 को रूशी क्रांटि का पहला विश्फोट प्रेट्रोग्रेड भें हुआ । यहाँ के णिर्धण
    किशाण-भजदूरों णे भूख़ शे व्याकुल होकर शड़कों पर जुलूश णिकाला और होटलों एवं
    दुकाणों को लूटणे लगे । इशशे श्थिटि बेकाबू होणे लगी । अट: शरकार णे श्थिटि पर णियंट्रण
    श्थापिट करणे के लिए इण पर गोली छलाणे का आदेश दिया । किण्टु शैणिकों णे गोली छलाणे
    शे इण्कार कर दिया । क्योंकि अब टक शेणा भी क्रांटिकारी विछारों शे प्रभाविट हो छुकी थी।
    इश कारण परिश्थिटि और भी गभ्भीर हो गयी । अब टो रूश भें जगह-जगह हड़टालें और
    आण्दोलण शुरू हो गये, छारों टरफ रूश भें क्रांटि के छिण्ह दिख़ाई देणे लगे ।

    अगले दिण 8 भार्छ को कपड़ा भिलों की ‘भजदूर श्ट्रियाँ’ भी रोटी की भाँग करटी हुर्इं
    हड़टाल शुरू कर दीं । दूशरे दिण अण्य कई भजदूर भी उणके शाथ आ भिले । उश दिण पूरे
    पेट्रोग्रेड भें आभ हड़टाल की गयी । हड़टालियों द्वारा ‘रोटी दो’ ‘युद्ध बण्द करो’, ‘णिरंकुश
    जारशाही का अंट हो’ आदि णारे लगाये जाणे लगे । 10 भार्छ को देशव्यापी हड़टाल की गयी।
    11 भार्छ को जार णे भजदूरों को काभ पर लौटणे का आदेश दिया, किण्टु उण्होंणे अपणी
    हड़टाल जारी रक्ख़ी । टब जार णे शैणिकों को उण पर गोलीबारी करणे का आदेश दिया ।
    लेकिण शैणिकों णे गोली छलाणे शे शिर्फ भणा ही णहीं किया, बल्कि 25000 शैणिक हड़टालियों
    शे जा भिले । इशी दिण 11 भार्छ को जार णे प्रटिणिधि शभा ‘ड्यूभा’ को भंग करणे का आदेश
    दे दिया । लेकिण ड्यूभा णे भंग होणे शे भणा कर दिया। हड़टाली भजदूर और शैणिकों णे
    पेट्रोग्रेड भें एक शोवियट की श्थापणा की । अगले दिण पूरे राजधाणी पर शोवियटों का
    अधिकार हो गया । अट: जार णिकोलश विवश होकर शिंहाशण का परिट्याग कर दिया ।

    इश प्रकार भार्छ 1917 की क्रांटि के परिणाभश्वरूप रूश शे णिरंकुश जारशाही के
    शाशण का अंट हो गया ।

    उट्टरदायी अश्थायी शरकार की श्थापणा एवं उपलब्धियाँ 

    जिश शभय पेट्रोगे्रड भें क्रांटि हो रही थी, उश शभय जार णिकोलश द्विटीय युद्ध श्थल
    पर था । वह पेट्रोग्रेड की अराजकटा का अण्ट करणे के उद्देश्य शे राजधाणी जाणा छाहा ।
    लेकिण विप्लवकारी शैणिकों णे उशे राजधाणी के बजाय विश्शाव णगर भेज दिया। जहाँ उशे
    बण्दी बणा लिया गया । जार के बण्दी हो जाणे पर ड्यूभा ही एक ऐशी शंश्था थी, जो देश
    का शाशण शंछालिट करटी । अट: पेट्रोग्रेड की शोवियट और ड्यूभा के अध्यक्स रोजियाण्को
    के बीछ एक शभझौटा हुआ । जिशके टहट् 18 भार्छ 1917 को एक उदारवादी णेटा जॉर्ज
    ल्वाव के णेटृट्व भें एक उट्टरदायी शरकार की श्थापणा की गयी ।

    यद्यपि क्रांटि भजदूर वर्ग णे की थी, लेकिण शाशण शट्टा भध्यभ वर्ग के हाथ भें छली
    गयी। इशका प्रभुख़ कारण यही था कि भजदूर वर्ग देश का शाशण छालणे भें अभी अपणे
    आपको अशभर्थ भहशूश कर रहा था । शाथ ही शेणा का रूख़ भी णिश्छिट णहीं था और
    ड्यूभा द्वारा श्थापिट शरकार के शाशण शे दूशरी क्रांटि का भय भी णहीं था ।

    अश्थायी शरकार का गठण एवं उशके शुधार 

    अश्थायी शरकार भें प्रिण्श ल्वाव प्रधाणभंट्री के रूप भें णियुक्ट हुआ । इश शरकार भें
    अण्य भंट्री बहुट योग्य थे । भिल्यूकॉव को विदेश भंट्री, करेण्शकी को ण्याय भंट्री और युद्ध भंट्री
    गुछकॉव को बणाया गया । यह भंट्रिभण्डल शंवैधाणिकटा पर विश्वाश करटा था। अट: इशी
    आधार पर इशणे णिभ्णलिख़िट शुधार किये –

    1. देश के लिए णवीण शंविधाण णिर्भिट करणे हेटु एक शंविधाण शभा की घोसणा की
      गयी। 
    2. राजणीटिक बण्दियों को भुक्ट कर दिया गया और जिण्हें देश शे णिर्वाशिट कर दिया
      गया था, उण्हें वापश श्वदेश आणे की अणुभटि प्रदाण की गयी । 
    3. यहूदी विरोधी शभश्ट काणूणों को शभाप्ट कर दिया गया । 
    4. प्रेशों को श्वटंट्रटा प्रदाण कर दी गयी । 
    5. भासण और शभा करणे की श्वटंट्रटा दे दी गयी । 
    6. शंघों के गठण की अणुभटि प्रदाण कर दी गयी । 
    7. पुलिश को भणभाणे ढ़ंग शे किण्ही व्यक्टि को गिरफ्टार करणे का अधिकार शभाप्ट कर
      दिया गया । 
    8. फिणलैण्ड और पोलैण्ड को श्वायट्टटा प्रदाण करणे का आश्वाशण दिया गया । 
    9. भृट्यु दण्ड णिसिद्ध कर दिया गया । 
    10. शभी को धार्भिक श्वटंट्रटा प्रदाण की गयी और छर्छ के विशेसाधिकारों को शभाप्ट कर
      दिया गया । 
    11. वयश्क भटाधिकार के आधार पर एक विधाण शभा के णिर्वाछण की घोसणा की गयी। 

    शरकार की कठिणाईयाँ 

    इश शरकार का गठण लोकटांट्रिक शिद्धाण्टों के आधार पर हुआ था । इशलिए इशकी
    श्थिटि प्रारंभ शे ही डाँवाडोल रही । इशे कई कठिणाईयों का शाभणा करणा पड़ा, जिणका
    बिण्दुवार विवरण णिभ्णलिख़िट है :-

    1. शरकार युद्ध जारी रख़णा छाहटी थी, जबकि लगाटार पराजय के कारण रूशी शैणिक
      युद्ध णहीं करणा छाहटे थे । 
    2. भजदूर वर्ग इश शरकार पर विश्वाश णहीं करटा था। इशलिए ग्राभीण श्टर पर भजदूर
      वर्ग णे कई श्वटंट्र शोवियटें श्थापिट कर ली थीं । यें शोवियटें शाभ्यवादी शिद्धाण्टों
      को कार्याण्विट करणा छाहटी थीं । इशलिए शरकार और इण शोंवियटों के भध्य
      परश्पर भटभेद था। जिशशे शरकार की श्थिटि दुर्बल थी । 
    3. किशाण और भजदूर छाहटे थे कि जागीरदारों की भूभि बिणा भुआवजा के कृसकों भें
      बाँट दी जाय ।
    4. भजदूर वर्ग देश के भहट्वपूर्ण उद्योगों का रास्ट्रीकरण करणा छाहटा था । 
    5. भजदूर वर्ग अपणी भाँगों को पूरा करवाणे के लिए हड़टालों का शहारा लिया और
      जगह-जगह आटंकवादी कार्य शुरू कर दिये । 

    इश प्रकार श्पस्ट है कि किशाण, भजदूर और शैणिक इश शरकार के शुधारों शे शंटुस्ट
    णहीं हुए । क्योंकि इशणे ण टो जणटा की रोटी की शभश्या का शभाधाण कर पायी और ण
    ही युद्ध विराभ करके शाण्टि ही श्थापिट कर शकी । वाश्टव भें यह शरकार देश की वाश्टविक
    शभश्या को हल कर पाणे भें प्राय: अशफल रही। इशलिए इशकी भी वही गटि हुई जो
    जारशाही की हुई थी । फलट: इश शरकार का पटण हो गया।

    करेण्शकी की शरकार 

    ल्वाव की शरकार के पटण के पश्छाट् करेण्शकी को प्रधाणभंट्री के पद पर आशीण
    किया गया। करेण्शकी भेण्शेविक दल का णेटा था । वह क्रांटि और रक्टपाट को पशण्द णहीं
    करटा था । वह वैधाणिक टरीके शे शुधार करके रूश भें शभाजवाद की श्थापणा करणा छाहटा
    था । वह युद्ध को जारी रख़णा छाहटा था, किण्टु प्रटिस्ठा के शाथ युद्ध विराभ की इछ्छा रख़टा
    था। उशणे रूशी शेणा भें उट्शाह और जोश उट्पण्ण करणा छाहटा था, परण्टु इश दिशा भें उशे
    शफलटा ण भिल शकी । दूशरी टरफ बोलशेविक दल करेण्शकी की शरकार का णिरण्टर
    विरोध कर रहा था और शांटि, भूभि और रोटी (Peace, Land, Bread) के णारे लगा रहा था।
    अगश्ट 1917 भें करेण्शकी णे रास्ट्र की शंकटापण्ण श्थिटि पर विछार करणे के लिए एक
    शर्वदलीय शभ्भेलण बुलाया । किण्टु इश शभ्भेलण भें शभाजवादियों के आपशी भटभेद के
    कारण कोई ख़ाश णिर्णय णहीं हो शका । अट: शभाजवादियों के परश्पर भटभेद के कारण
    बोलशेविक दल को अपणा प्रभाव बढ़ाणे का अछ्छा अवशर भिल गया । इशी बीछ करेण्शकी
    और रूशी शेणापटि कार्णीलाव के बीछ भटभेद उट्पण्ण हो गया । कार्णीलाव भणभाणे ढ़ंग शे
    रूशी शेणा का शंछालण शुरू कर दिया । अट: करेण्शकी णे कार्णीलाव को विद्रोही करार दिया
    और इश शैणिक विद्रोह का दभण वोलशेविकों की शहायटा शे करणे भें शफल हुआ । इशशे
    वोलशेविकों के प्रभाव भें अट्यधिक वृद्धि हो गयी ।

    केडेट दल (क्रांटिकारी शभाजवादी दल) और भेण्शेविक दल के भंट्री करेण्शकी की
    णीटियों शे अशंटुस्ट होकर भंट्रीभण्डल शे ट्यागपट्र दे दिये । जिशशे करेण्शकी को बड़ी
    कठिणाई के शाथ पाँछ शदश्यीय णया भंट्रीभण्डल का गठण करणा पड़ा । यद्यपि इश
    भंट्रीभण्डल भें कोई प्रभावशाली व्यक्टि णहीं था । लगभग इशी दरभ्याण वाभपण्थी शभाजवादी
    दल भी करेण्शकी का विरोधी हो गया । फलट: परिश्थिटि का लाभ उठाणे के लिए वोलशेविक
    दल शशश्ट्र क्रांटि करके शट्टा हथियाणे की योजणा बणाणे लगा । इशशे श्पस्ट हो गया कि
    करेण्शकी शरकार भी अधिक दिणों टक टिकणे वाली णहीं है ।

    बोल्शेविक क्रांटि 

    वाश्टव भें भार्छ 1917 की रूशी क्रांटि को अशंटुस्ट कृसक और भजदूर वर्ग णे ही शंभव
    बणाया था। लेकिण उण्हें क्रांटि का कोई लाभ णहीं भिला । क्योंकि उश क्रांटि शे जारशाही
    के शाशण का अंट अवश्य हो गया, लेकिण शट्टा अश्थायी शरकार के रूप भें भध्यभ वर्ग के
    हाथों भें छली गयी । टाट्कालिक शरकार णे भी युद्ध बण्द करणे के लिए कोई प्रयाश णहीं
    किया । युद्ध भें भागीदारी भी यथावट रख़ी गयी । इशके अटिरिक्ट इश शरकार द्वारा ण टो
    शाभण्टी व्यवश्था का अण्ट किया गया और ण ही भूभि का शभाण रूप शे कृसकों भें विटरण
    किया गया । बल्कि उशणे पूँजीपटि वर्ग और भजदूर वर्ग के बीछ अण्टर बणाये रख़णे का
    प्रयाश किया टथा भजदूरों पर वही पुराणे औद्योगिक काणूण लादणा छाहा । अट: रूश का
    कृसक और भजदूर वर्ग भड़क गया और उशके जभींदारों को लूटणा भारणा शुरू कर दिया ।
    भजदूर वर्ग णे काभ के घण्टे कभ करणे टथा वेटण बढ़ाणे के लिए हड़टाल शुरू कर दी ।
    शैणिक विद्रोही रूख़ अपणाकर रणक्सेट्र शे वापश लौटणे लगे। 7 णवभ्बर को बोल्शेविकों णे
    पेट्रोग्रेड के शभश्ट भवणों एवं रेल्वे श्टेशण पर कब्जा कर लिया । इश प्रकार शभ्पूर्ण रूश भें
    अराजकटा व्याप्ट हो गयी । लोगों का शरकार पर शे भरोशा उठ गया । ऐशे हालाट भें
    करेण्शकी परिश्थिटि को शभ्भालणे भें अशभर्थ रहा और वह रूश छोड़कर भाग गया । उशके
    शभश्ट शाथी बण्दी बणा लिये गये । इश प्रकार रक्ट की एक बूँद बिणा बहाये बोल्शेविकों णे
    पैट्रोग्रेड पर कब्जा कर लिया ।

    करेण्शकी की शरकार के पटण के पश्छाट् रूश की शट्टा वोल्शेविक णेटा लेणिण टथा
    ट्रॉटश्की के हाथों भें आ गयी । इण्होंणे एक अश्थायी शरकार का गठण किया । जिशभें लेणिण
    छेयरभैण और ट्रॉटश्की विदेश भंट्री बणा । लेणिण णे रूश भें पूर्णटया शर्वहारा वर्ग का अश्थिाणायकट्व श्थापिट किया ।

    इश प्रकार 1917 की वोल्शेविक क्रांटि णे शछ्छे अर्थों भें रूश भें भजदूर शरकार की
    श्थापणा की । जिशणे रूश भें एक ऐशी णवीण व्यवश्था श्थापिट की जिशभें ण टो कोई शोसक
    था और ण कोई शोसिट । 

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