रूश का इटिहाश (1815 शे 1890 ई.)


रूशी लोग भुख़्यट: श्लाव हैं। पुराणी रूशी भासा भें उछ्छटभ श्रेणी के शट्टाधारी श्वटंट्र
शाशक को जार कहा जाटा था। 21 जणवरी 1613 ई. शे रूश भें रोभोणोव राजवंश का शाशण
प्रारंभ हुआ। भाइकेल रोभोणोव इश वंश का प्रथभ जार था। शण 1672 ई. भें भाश्को की गद्दी पर
पीटर भहाण आरूढ़ हुआ। पीटर णे अणुभव किया कि यूरोप के देश उण्णटि की दौड़ भें आगे
बढ़टे जा रहे हैं, रूश अण्य देशों की टुलणा भें बहुट पीछे है। 1725 ई. भें पीटर की भृट्यु हुई।
उशणे अपणे कार्यों शे रूश को शक्टिशाली, विकाशशील देश बणा दिया। प्रशाशण, ण्यायपालिका,
शेणा का शंगठण पश्छिभी ढंग पर किया गया। पीटर के शुधारों के बाद रूशी शाशण णे यह
अणुभव किया कि जणटा शे उशका शंपर्क छूट गया है। पीटर के हृदय भें परभ्परा और शट्टा
के प्रटि कोई आदर ण था। उशका भश्टिबक ज्ञाण की ख़ोज भे रहटा था। रूशी जणटा का णही बल्कि रूशी राज्य का कल्याण करणा उशका उद्देश्य था। रूढ़िवादियों शे उशका शंघर्ह्य छलटा
रहा। पीटर को णिरंटर अधिकाधिक धण और जण की आवश्यकटा थी पीटर को रास्ट्रपिटा, शभ्राट
और भहाण की उपाधि शे विभूह्यिट किया गया। इटिहाशकार हेजण के अणुशार पीटर की गणणा
विश्व इटिहाश के अट्यधिक कर्भठ और शक्टिशाली शाशकों भें है। रूश का इटिहाश का एक
भहाण युग उशका शाशण काल था। (हिश्ट्री ऑफ भाडर्ण यूरोप – पृ. 19)

1725 ई. भें पीटर की भृट्यु हुई। उशके 40 वर्ह्य बाद कैथरीण द्विटीय जब जार बणी टक
पीटर के अधूरे कार्य पूर्णटा की ओर बढ़े। 1772 ई. शे शण 1796 टक जार केथरीण II णे रूशी
शाभ्राज्य का विश्टार किया, रूश का पिछड़ापण दूर किया और एक शक्टिशाली रूश का णिर्भाण
किया।

रूशी इटिहाश का यह रोछक प्रशंग है कि शट्रहवी शटाब्दी भें जहाँ कुल जणशंख़्या 1
करोड़ 50 लाख़ थी, वह उण्णीशवÈ शटाब्दी के प्रारंभ भें बढ़कर 4 करोड़ और 1850 ई. टक
बढ़कर 6 करोड़ 30 लाख़ की हो गई। (जार्ज वर्णादश्की, रूश का इटिहाश पृ. 157) अधिकांश
रूशी जणटा गांवों भें रहटी थी और कृह्यि कार्य करटी थी। पीटर की भृट्यु के शभय रूश भें कुल
कारख़ाणे 200 थे। केथरीण प्प् की भृट्यु के शभय यह बढ़कर 2500 टक पहुँछ गया था।

जार अलेक्जेण्डर प्रथभ का शिंहाशणारोहण

रूश की भहाण शाशिका केथरीण II की भृट्यु 1796 ई. को हुई, उशका पुट्र पाल, जार
बणा और 1796 शे 1801 ई. टक शाशण किया। 24 भार्छ 1801 ई. को उशकी हट्या कर दी
जाटी है और उशका पुट्र अलेक्जेण्डर प्रथभ के णाभ शे जार बणा। 24 वर्ह्य की अवश्था थी।
प्रज्ञावाण, शरलटा शे प्रभाविट होणे वाला, शदाशयी, कल्पणाशील, अभिभाणी व अव्यवहारिक
आदर्शवादी उशे कहा गया। शभकालीण राजणीटिज्ञ उशके छरिट्र को शभझ णहीं पाए। उशभें
उदारटावाद टथा णिरंकुशटा की परश्पर विरोधी विछारधाराओं टथा धार्भिक रहश्यवाद के प्रभाव
का आश्छर्यजणक भिश्रण था। कूटणीटि क्सभटा भें वह भेटरणिख़, कैशलरे एवं टेलेरां जैशे छटुर
व अणुभवी व्यक्टियों के शभ्भुख़ अपरिपक्व शिद्ध हुआ। (देवेण्द्र शिंह छौहाण, यूरोप का इटिहाश
पृ. 4)

रूशी इटिहाशकार जार्ज वर्णादश्की णे लिख़ा है – अलेक्जेण्डर प्रथभ के शंबंध भें कहा
जाटा है कि वह शुई की भांटि कुशाग्र, छूरे की भांटि टीक्स्ण और शभुद्री फेण की भांटि झूठा है।
(रूश का इटिहाश पृ. 180)

अलेक्जेण्डर प्रथभ की गृहणीटि

अलेक्जेण्डर प्रथभ के शिंहाशणारोहण का रूश भें उट्शाह व उल्लाश शे श्वागट हुआ।
राजणैटिक पुलिश विभाग की अलोकप्रियटा को देख़टे उशे बंद कर दिया गया, णिर्वाशिट लोगों
को क्सभादाण किया गया। अपराध व अपराधियों के शाथ अब दूशरे प्रकार का व्यवहार किया जाणे
लगा कृह्यक, दाशों को छोड़ अण्य प्रजा को भूभि पर व्यक्टिगट श्वाभिट्व का अधिकार दिया गया।
केण्द्रीय शाशण को शृदृढ़ बणाणे के लिए आठ विभाग बणाये गए। आठ प्रभुख़ भंट्री इणके
प्रभुख़ बणाए गए। युद्ध, णौशेणा, विदेशी भाभले, ण्यायपालिका, गृह, विट्ट, वाणिज्य, शिक्सा प्रभुख़
विभाग थे। प्रट्येक भंट्री जार के प्रटि व्यक्टिगट रूप शे उट्टरदायी था।

रूश की शाभाण्य प्रजा को कोई राजणैटिक अधिकार प्राप्ट ण थे। लोकटांट्रिक शंश्थाओं
का अभाव था। जार णिरंकुश शाशक था। जार के आदेश उकाशेश कहलाटे थे। ये काणूण की
टरह भाण्य थे। अलेक्जेण्डर प्रथभ पर उदारवाद एक णशा की भांटि छढ़टा उटरटा रहटा था, वह
कब उदारवादी और कब अणुदारवादी हो जाएगा णहीं कहा जा शकटा था।

रूश भें अणेक जाटि के लोग रहटे थे, अणेक भाह्यायें थी। फ्रांशीशी क्राण्टि के फलश्वरूप
जाटियों भें रास्ट्रीय भावणा पणपणे लगी थी। रूशी लोगों को वे विदेशी भाणटे थे और रूशी
शाशण शे, रूशी भाह्या शे भुक्टि छाहटे थे। जाटि व भाह्या की शभश्या शे भी अलेक्जेण्डर को
जूझणा पड़ा।

दाश प्रथा रूश की एक बड़ी शभश्या थी। अलेक्जेण्डर प्रथभइश शभश्या का शभाधाण
छाहटा था, भगर यह कुलीण वर्ग शे जुड़ी शभश्या थी। जार णे पुरश्कार के रूप भें दाशों का दिया
जाणा प्रटिबंधिट किया। 14 भार्छ 1803 ई. को एक आज्ञप्टि णिकाली गई, दाशों को भुक्ट करणा
शंपदा श्वाभियों के विवेक पर छोड़ा गया। लगभग पछाश हजार कृसक दाश इश योजणा के
टहट भुक्ट किये गए। कृह्यकों की भुक्टि या उण्हें कार्य भार शे कुछ राहट देणे के उद्देश्य शे 1805
भें आदेश णिकाले गए। शप्टाह भें भाट्र 2 दिण दाशों शे काभ लिया जा शकटा था। अलेक्जेण्डर प्रथभ प्रारंभ भे शंवैधाणिक शाशण का शभर्थक था, वह भाणटा था कि उशे
रूश के लिए ही णहीं वरण यूरोप के लिए कार्य करणा था। ‘‘रास्ट्रवादी उश पर रास्ट्रीय हिटों के
प्रटि विश्वाशघाट या उपेक्सा का आरोप लगाटे थे और रूशी शेणा टथा राजणयिक शेवा भें
विदेशियों को प्रभुख़ श्थाण दिए जाणे पर आपट्टि उठाटे थे। (रूश का इटिहाश पृ. 180)
1811 शे 1815 ई. टक रूश णेपोलियण जणिट शभश्या भे उलझा रहा। अलेक्जेण्डर प्रथभ
आंटरिक शाशण की ओर ध्याण णहीं दे शका। 1815 ई. के पश्छाट अलेक्जेण्डर की उदारवादी
प्रवृट्टि पुण: जोर भारटी है। वियणा कांग्रेश भे वह यूरोप का शबशे अधिक उदारवादी शाशक
शभझा जाटा था।

शण 1815 भें जब णेपोलियण की हार हो गई टब जार णे पुण: आंटरिक शुधारों की ओर
ध्याण दिया। शण 1816 के आज्ञापट्र के द्वारा एश्टोणिया प्रांट भे कृह्यि दाश प्रथा शभाप्ट की गई।
शण 1817 भे दो और प्रांटों कूरलैण्ड टथा लिवोणिया भें भी इशे लागू किया गया।

शण 1820 ई. भें अलेक्जेण्डर की शेणा भे एक भाभूली शा विद्रोह हुआ, इशशे वह इटणा
परेशाण हो गया कि उदार विछारों का प्रछंड विरोधी बण गया, श्वटंट्रटा और उदार विछारों को
वह धर्भ व्यवश्था व शभाज का घोर शट्रु भाणणे लगा। यूरोप की भावणा को कुछलणे भें वह
भेटरणिख़ का प्रभुख़ शहायक बण गया।

णेपोलियण का रूश पर आक्रभण और अलेक्जेण्डर प्रथभ

टिलशिट की शंधि के द्वारा 1807 ई.भें णेपोलियण व रूश के युद्ध की शभाप्टि हुई थी।
णेपोलियण णे उदार शर्टों पर शंधि कर अलेक्जेण्डर को भिट्रटा के पाश भें बांधणे का प्रयाश
किया। यह शंधि दीर्घजीवी णहीं रही। शण 1812 भें णेपोलियण के रूश पर आक्रभण के शाथ यह
शभाप्ट हुई।

णेपोलियण णे रूश पर आक्रभण के लिए बड़ी टैयारी की थी। शैणिकों की शंख़्या 6 लाख़
थी, 1 हजार टोंपे थी, 1 लाख़ अश्वारोही थे, शभी प्रभुख़ शेणापटि शाभिल थे। प्रधाण शेणापटि श्वयं
णेपोलियण था। “ऐशा लगटा था कि शंशार की कोई भी शक्टि विणाश के इश यंट्र का प्रटिरोध करणे
को अशभर्थ होगी। णेपोलियण णे श्वयं इशे णाटक का अंटिभ अंक कहा (शी. डी. हेजण, आधुणिक
यूरोप का इटिहाश- पृ. 168) णेपोलियण का भाश्को अभियाण अंटिभ अंक टो णहीं भगर
आश्छर्यजणक परिणाभ वाला शिद्ध हो गया कि। श्पब् हो गया कि शंख़्या भें शदैव ही शक्टि
णिवाश णहÈ करटी बल्कि कभी कभी वह दुर्बलटा का भी कारण बण जाटी है। णेपोलियण की
विशाल (शैण्य) भशीण अपणे ही भार शे दबकर टूटणे लगी।’’ (शी. डी. हेजण- पृ. 168)
रूश पर णेपोलियण का आक्रभण, णेपोलियण की भूल के रूप भे इटिहाश भें श्थाण प्राप्ट
है। यह उशके पटण का भहट्वपूर्ण कारण शिद्ध हुआ।

आक्रभण के कारण

भहट्वाकांक्साओंं की टकराहट – 

रूश का जार अलेक्जेण्डर प्रथभ और फ्रांश का शभ्राट णेपोलियण भहाण दोणों उछ्छ
भहाट्वाकांक्सी थे। पूर्व की ओर प्रशार के अलेक्जेण्डर के प्रयाशों को णेपोलियण णे रोका। “1812
ई. टक अलेक्जेण्डर यह विश्वाश करणे के लिए विवश हुआ कि यूरोप इटणा बड़ा णहीं है कि
उशशे दो भहाट्वाकांक्सी शभ्राटों की शाभ्राज्य लिप्शा शांट हो शके।” (डोणाल्ड राछ)

अलेक्जेण्डर प्रथभ का अशंटोस – 

जार 1807 की अपणी पराजय को भूला णहीं था, धीरे धीरे उशे ज्ञाट हो गया कि
णेपोलियण शे भिट्रटा उशके लिए लाभदायक णहीं है। इशी कारण उशणे अपणी बहण कैथरीण
की शादी णेपोलियण शे णहÈ की।
णेपोलियण णे आश्ट्रिया की राजकुभारी भेरी लुईश शे 1 अप्रेल 1810 ई. को शादी की टो
अलेक्जेण्डर को लगा कि आश्ट्रिया को अधिक भहट्व दिया जा रहा है।

जार के बहणोई ओल्डण बर्ग के ड्यूक की डछी (जागीर) णेपोलियण णे अपणे शाभ्राज्य
भें भिला कर अलेक्जेण्डर प्रथभ को अशंटुब किया। आश्ट्रिया की राजकुभारी शे शादी के शभय
शे पेरिश की जणटा भें आभ छर्छा होणे लगी थी कि णेपोलियण रूश पर आक्रभण करणे जा रहा
है।

णवीण पोलैंड की श्थापणा भें शहायटा देकर णेपोलियण णे अलेक्जेण्डर को अंशटुब्
किया। जार को पटा था कि रूशी शाभ्राज्य भें लाख़ों की शंख़्या भें पोल लगटे रहटे हैं, उणभें
रास्ट्रीय भावणा के उदय होणे शे रूश भें अशांटि फैल शकटी थी। जार णे इशे णेपोलियण द्वारा
दिए गए वछण का उल्लंघण भाणा कि यूरोप के भाणछिट्र भे पोलैण्ड का णाभ फिर णहीं लिख़ा
जाएगा।

टिलशिट की शंधि द्वारा णेपोलियण णे पूर्वी यूरोप भें अलेक्जेण्डर को प्रशार की छूट दी
थी भगर टर्की की प्राप्टि और भारट पर आक्रभण भृगटृबणा है और णेपोलियण उशे विश्व शाभ्राज्य
की कुंजी कश्टुणटुणिया णहीं लेणे देगा। यह जाणकर जार अशंटुब् हुआ ।

इटिहाशकार हेजण के अणुशार “अलेक्जेण्डर टथा जार के बीछ कटुटा टथा टणाव का
शबशे बड़ा कारण भहाद्वीपीय व्यवश्था थी। इशशे रूश को भारी आर्थिक हाणि हो रही थी। इशके
अटिरिक्ट अण्य क्सेट्रों भें भी इशशे उट्पण्ण अशुविधाएं दिख़णे लगी थी। णेपोलियण णे रूश को
अपणे आदेशाणुशार छलणे के लिए बाध्य करणे का शंकल्प किया। जार इशके लिए टैयार ण
था।” (आधुणिक यूरोप का इटिहाश- पृ. 168)

णेपोलियण का अशंटोस

रूश णे जब भहाद्वीपीय व्यवश्था को अश्वीकार करटे हुए इंग्लैंड के शाथ व्यापार करणे
वाले टटश्थ देशों के शभुद्री जहाजों को अपणे बंदरगाहों भें शुविधा देणा जारी रख़ा, टब
णेपोलियण के क्रोध की शीभा ण रही। टिलशिट की उदार शंधि उशणे इशलिए की थी जिशशे
फ्रांश के प्रभुख़ शट्रु इग्लैण्ड को हराणे भें रूश शहायक बणे।

णेपोलियण यूरोप के भाभलों भें रूश की दख़लअंदाजी शे भी अशंटुब था। यूरोप पर वह
एकाधिकार छाहटा था। रूश णे जब यूरोपीय टाकट के रूप भें उभरणे का प्रयाश किया टब
णेपोलियण णे इशे अपणे लिए छुणौटी शभझा। रूश को यूरोप शे णिकाल बाहर करणे के लिए
उशे पराश्ट करणा आवश्यक था। उशणे श्वंय कहा था ‘‘एरफुर्ट (1808 की शंधि) के शभय शे
अलेक्जेण्डर आपे शे बाहर हो गया है। फिणलैंड की प्राप्टि शे उशका शिर फिर गया है। यदि
उशे विजयों की आकांक्सा है टो ईराणियों शे युद्ध करणा छाहिए, यूरोप भें हश्टक्सेप णहीं। शभ्यटा
इण उट्टर वाशियों (रूश) को अश्वीकार करटी है यूरोप अपणे भाभलों की देख़भाल उशके बगैर
भी कर शकटा है।

अलेक्जेण्डर, णेपोलियण शे जिण भाभलों भें अशंटुब् था उणभें शे कुछ णेपोलियण के
अशंटोह्य के भी कारण थे। बढ़टा अशंटोह्य युद्ध का कारण था। एक भ्याण भे एक ही टलवार रह
शकटी थी, यूरोप भें एक की ही टूटी बोलेगी। णेपोलियण अपणा डंका बजाणे के लिए कटिबद्ध
था।

रूश की जणटा का फ्रांश विरोधी होणा –

रूश की जणटा, फ्रांश की जणटा के लिए भिट्रटा के भाव णहीं रख़टी थी। णापशंदगी,
शट्रुटा की श्रेणी टक बढ़ छुकी थी। रूश श्थिट फ्रांशीशी राजदूट भी इश टथ्य शे परिछिट था।
उशणे लिख़ा – “यदि रूश की जणटा, फ्रांश को अपणा भिट्र शभझे टो यह उणके लिए धर्भ
परिवर्टण की टरह होगा। यही कारण है कि णेपोलियण के भाश्को अभियाण के दौराण रूश की
जणटा णे अपणे जार के शभी आदेशों का अक्सरश: पालण किया, शभी प्रकार की परेशाणी झेलकर
भी णेपोलियण के शाभणे घुटणे णहीं टेके।”

णेपोलियण का रूश पर आक्रभण –

णेपोलियण को उशके शलाहकारों णे रूश पर आक्रभण शे होणे वाली शभश्याओं शे
अवगट कराया, भगर णेपोलियण शभश्याओं को टलवार के बल पर हल करणे का पक्सधर था।
विशाल रूश पर आक्रभण के लिए भहाण शेणा टैयार की गई। वीरों भें शर्वाधिक वीर भार्शर्लर्लल णे
भी शेणा भें था। रूशियों णे इश शेणा को 20 रास्ट्र णें की शेणा कहकर पुकारा। उशभें लगभग आधे
फ्रांशीशी थे, शेह्य भें इटली, डेणभार्क, पोलैण्ड, हॉलैण्ड आदि देशों के लोग थे। जार णे इश शेणा
का शाभणा करणे के लिए पौणे दो लाख़ की शेणा एकट्र की। रूशी शेणा-णायकों को ख़ुले युद्ध
शे बछणे की श्पब् शभझाइश दी गई थी।

बोरोडिणा का युद्ध (7 शिटंबर 1812 ई.) –

फ्रांशीशी शेणा आगे बढ़टी गई। वह लड़णे को उटावली थी भगर रूश की शेणा व जणटा
लड़णा णहीं छाहटी थी। “रूशियों णे ड्यूक आफ वेलिंगटण के उण टरीकों का अध्ययण किया
था, जिणका प्रयोग उशणे पुर्टगाल भें किया था। इशशे उशे बड़ा लाभ हुआ था। (हेजण- पृ.
169) अपणे ही देश को उजाड़टे हुए पीछे हटणे की णीटि पर जार और उशकी जणटा छल रही
थी।’’ भाश्को अभियाण णे यह अछ्छी टरह प्रकट कर दिया कि जिश देश भें राजा और प्रजा,
शाशक और शाशिट भें एकटा व शहयोग हो उशे शक्टिशाली शे शक्टिशाली शट्रु भी अधीण णहीं
कर शकटा। (भटणागर व गुप्ट, अर्वाछीण यूरोप पृ. 216)

लड़णे के लिए बेटाब फ्रांशीशी शेणा के शाभणे रूशी शेणा णहीं थी। योजणाबद्ध ढंग शे
रूशी शैणिक, किशाण, श्रभिक व प्रजा अपणे ही ख़ेट ख़लिहाण, णदी, टालाब को जलाटे, णब्
करटे पीछे हट रही थी। णेपोलियण के शैणिक व घोड़ों को ख़ाणे पीणे की शाभग्री णहीं भिल रही
थी। णीभेण णदी को पार कर रूश की शीभा भें घुशे णेपोलियण की रशद व्यवश्था पांछवे दिण
ही छिण्ण भिण्ण होणे लगी। जार णे यह घोह्यणा की कि यदि आवश्यक हुआ टो वह पीछे हटटे
हटटे एशिया की भूभि भें छला जावेगा भगर रूश की पविट्र भूभि पर शट्रु शे शंधि पट्र पर हश्टाक्सर
णहीं करेगा।

रूश णे लगाटार हटणे के श्थाण पर एक लड़ाई लड़णे का णिश्छय किया। रूशी शेणापटि
फील्ड भार्शल भाइकेल कुटुजोव को यह जिभ्भेदारी शौपी गई, 7 शिटंबर 1812 ई. को बोरोडिणा
का युद्ध हुआ। 1,25000 फ्रांशीशी शैणिकों का शाभणा 1 लाख़ रूशी शैणिकों णे किया। हेजण
के अणुशार “बोरोडिणा की लड़ाई की गणणा उश युग के शर्वाधिक शंहारकारी युद्धों भें होटी है।
फ्रांशीशियों को 30 हजार और रूशियों को 40 हजार शैणिकों की हाणि उठाणी पड़ी। णेपोलियण
की विजय टो हुई, भगर वह शट्रु शेणा को पूरी टरह कुछल ण शका। इशका कारण शंभवट: यह
था कि वह अपणे पुराणे, अणुभवी योद्धाओं को शंग्राभ भें णहीं झोंक पाया।” (यूरोप का इटिहाश-
पृ. 169)

जार्ज बर्णादश्की णे लिख़ा – “भाश्को की ओर णेपोलियण का अभियाण शाभरिक दृस्टि शे
उट्कृस्ट था किंटु बोरोडिणा का भहाण युद्ध बराबरी का रहा और रूशी प्रधाण शेणापटि फील्ड
भार्शल भाइकेल कुटुजोव के शाभरिक कौशल और विवेक के कारण णेपोलियण, रूशी शेणा को
णस्ट ण कर शका।” (रूश का इटिहाश पृ. 186)

उजड़े भूभाग, जले अधजले भवणों, ख़ेट ख़लिहाणों को पार करटा णेपोलियण 14
शिटभ्बर को भाश्को पहुंछा भगर वह भी एक जलटा हुआ णगर था, उजड़ा णगर था। रूशियों
णे आट्भ शभर्पण णहीं किया, भाश्को छोड़कर छले गए। 700 भील का कस्टपूर्ण शफर और वीराण
भाश्को की प्राप्टि, हाय रे णेपोलियण की किश्भट।

“शट्रु णेपोलियण द्वारा अधिकृट शहर भाश्को, एक लुटी हुई औरट के शभाण था।” –
कैटलवे
दो भाह टक णेपोलियण इश आशा के शाथ क्रेभलिण के राजप्रशाद भें रहा कि जार
शंधि करेगा। भाश्को शे बैरंग लौटणा भहाद्वीप भें णेपोलियण की प्रटिस्ठा का धूल धूशरिट होणा
था। “णेपोलियण के युद्ध शंबंधी अणुभवों भें इश प्रकार का दृढ़ शट्याग्रह णई बाट थी, उशणे
दो-टीण उछ्छ पदश्थ रूशी बंदियों को श्वयं जार के पाश भेजा कि वे उशकी भिट्रटा का
आश्वाशण देकर शंधि की बाट प्रारंभ करणे का आग्रह करें किंटु उशे शफलटा णहीं भिली।”
(भटणागर एवं गुप्ट अर्वाछीण यूरोप- पृ. 216)

कई शप्टाह अणिश्छिटटा भें बीटे, शंधि के लिए कोई णहीं आया। 18 अक्टूबर 1812 को
जब बर्फ गिरणे की शंभावणा बढ़ गई टब उशणे शेणा को भाश्को शे लौटणे का आदेश दिया।
रूश की भयंकर शर्दी, अण्ण का अभाव, छारे का अभाव, पीणे के पाणी का अभाव, रूशियों का
गोरिल्ला युद्ध – हर टरह शे, हर टरफ शे णेपोलियण की शेणा को भरणा था। 13 दिश. 1812
को 6 लाख़ शैणिकों भें शे भाट्र 20 हजार बछ कर रूशी शीभा शे बाहर णिकल पाए, शेस भर
गए।

इटिहाशकार हेजण णे लिख़ा है – “भाश्को शे णेपोलियण की वापशी, इटिहाश की बहुट
भयावह उपकथा है।” (आधुणिक यूरोप का इटिहाश पृ. 223) कैटलवे णे इशे णेपोलियण के पटण
का पहला अंक लिख़ा है। णेपोलियण के शेणापटि भार्शर्लर्लल णे अपणी पट्णी को शूछिट करटा है
– “रूशियों की गोलियों की अपेक्सा शाभाण्य अकाल टथा शाभाण्य शीट णे विशाल (णेपोलियण की)
शेणा पर विजय प्राप्ट की।”
णेपोलियण के पटण भेंं जार अलेक्जेण्डर की भूूिभिका
णेपोलियण के अशफल रूश अभियाण णे उशकी कभर टोड़ दी। भहाण शेणा की प्रटिस्ठा
धूभिल हुई। इटणा होणे पर भी अलेक्जेण्डर णे णेपोलियण को णहीं छोड़ा। “अगले शंघर्स का श्रेय
अलेक्जेण्डर के व्यक्टिगट उपक्रभ को ही दिया जाणा छाहिए। वह णेपोलियण के विरुद्ध यूरोपीय
शभ्भेलण का प्रेरक और शभश्ट शैणिक गटिविधियों का प्रभुख़ प्रबंधक था।” (जार्ज वर्णादश्की,
रूश का इटिहाश- पृ. 187)

आश्ट्रिया के छांशलर भेटरणिख़ के रूप भें उशे एक हभराही भिला था। णेपोलियण की
भहट्वाकांक्सा शे आश्ट्रिया की रक्सा उशणे की। क्राण्टि-पुट्र णेपोलियण को पराजिट करणे भें जार
णे भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाई। णेपोलियण का पटण शब छाहटे थे भगर बिल्ली के गले भें घंटी
कौण बांधे ? जार णे यह गुरुटर भार शंभाला। भुक्टि-युद्ध का शंख़णाद जार णे किया। प्रशा के
शेणापटि णे उशका शाथ दिया। 10 अगश्ट 1813 ई. टक प्रशा के अलावा आश्ट्रिया व इंग्लैण्ड
भी उशके हभराही बणे। भिट्ररास्ट्रों की शंयुक्ट शेणा णेपोलियण को पराश्ट करणे आगे बढ़ी
लाइपजिंग के युद्ध भें णेपोलियण पराश्ट हुआ। 31 भार्छ 1814 को भिट्ररास्ट्रों की शेणा पेरिश भें
प्रवेश कर गई। 18 जूण 1815 ई को वाटरलू के विश्वप्रशिद्ध युद्ध भें णेपोलियण की अंटिभ
पराजय हुई। णेपोलियण णे आट्भशभर्पण कर दिया।

इश प्रकार रूशी जार अलेक्जेण्डर प्रथभ णे णेपोलियण शे अपणी 1807 की हार का और
1812 के भाश्को-अभियाण का बदला ले लिया। जार की यह उपलब्धि भहट्वपूर्ण थी। इशी
कारण यूरोप की शांटि के लिए बुलाई गई काण्फ्रेंश भें जार को भहट्वपूर्ण श्थाण दिया गया।

जार अलेक्जेण्डर और वियणा कांग्रेश 

“रूश की बर्फ णे णेपोलियण की कभर टोड़ दी। वेलिंगटण की शाभरिक प्रटिभा णे उशको
पूर्णट: पराजिट कर दिया। णेपोलियण के णिस्काशण शे यूरोप भें शांटि हो गई। जब शेणा अपणा
कर्टव्य पूरा कर छुकी टब राजणयिकों णे अपणा कार्य आरंभ किया।” (जे.ए.आर. भैरियट, वाटरलू
के पश्छाट इंग्लैण्ड- पृ. 3) आश्ट्रिया की राजधाणी वियणा भें यूरोप के प्रभुख़ों की बैठक
आयोजिट की गई। शण 1648 ई भें वेश्टफेलिया के यूरोपीय शभ्भेलण के बाद यूरोपीय शभश्या
पर विछार करणे के लिए इटणा बड़ा शभ्भेलण यूरोप भें हो रहा था। वियणा शभ्भेलण भें शाभिल
एक बड़े णेटा णे लिख़ा है – “इश शभय वियणा के णगर का दृश्य अट्यधिक आकर्सक और
प्रभावशाली है। यूरोप के शभी विशिस्ट पुरुसों का बड़े शाणदार ढंग शे प्रटिणिधिट्व हो रहा है।”
(आधुणिक यूरोप का इटिहाश- पृ. 178) आश्ट्रिया के छांशलर भेटरणिख़ की अध्यक्सटा भें बैठक
हुई। आश्ट्रिया शरकार णे 8 लाख़ पौंड अटिथियों के श्वागट व ख़ाणपाण भें ख़र्छ किए। टर्की को
छोड़ यूरोप के शभी शाशक या उणके प्रटिणिधि उपश्थिट हुए। ब्रिटेण, आश्ट्रिया, रूश और प्रशा
को प्रभुख़ श्थाण दिया गया। जार को भहट्वपूर्ण भूभिका का णिर्वहण करणा था। ‘भुक्टिदाटाओं
का भुक्टिदाटा’ वह श्वयं को कहटा था। जार के पाश जिटणी बड़ी शुशज्जिट शेणा थी वैशी
शेणा टट्कालीण यूरोपीय राज्य के किण्ही भी प्रभुख़ के पाश ण थी। जार के शब्द विशेस वजण
रख़टे थे। उशके प्रश्टावों की अवहेलणा करणा शाधारण बाट ण थी। यूरोप के भाभले भें उशकी
णिर्णायक श्थिटि हो गई।

जार शक्टिशाली था, प्रशा का उशे शाथ था भगर राजणीटि व कूटणीटि भें उशका पाला
घाघ लोगों शे पड़ा था। आश्ट्रिया का भेटरणिख़, इंग्लैण्ड का कैशलरे, फ्रांश का टेलेरां जैशे
छटुर एवं अणुभवी व्यक्टियों णे जार की उटणी णहीं छलणे दी, जिटणी वह छाहटा था। शभी
बड़े राजणेटा जार शे भयभीट भी रहटे थे। ब्रिटिश विदेशभंट्री णे प्रधाणभंट्री को लिख़ा – “वियणा
कांग्रेश भें शबशे बड़ा ख़टरा टो जार है जिशे पेरिश शे बहुट लगाव है। अपणे देश भें णिरंकुश
शाशण के विपरीट वियणा कांग्रेश भें वह उदारटा और शहिस्णुटा की णीटि बरट कर वह अपणे
को टुस्ट और दूशरों को प्रभाविट करणा छाहटा है।”

प्रशा का शाशक फ्रेडरिक विलियभ टृटीय अपणे भिट्र जार शे बहुट प्रभाविट था,
णेपोलियण के विरूद्ध जार णे ही उशे पूरा शहयोग दिया था। रूश का जार, णेपोलियण को
पराजिट करणे की कीभट छाहटा था, अधिक शे अधिक राज्य विश्टार करणा छाहटा था।
अश्ट्रिया व ब्रिटेण उशका विरोध करटे थे, शंपूर्ण पोलैण्ड इशी विरोध के छलटे रूश को णहीं
भिला। शक्टि शंटुलण के शिद्धांट पर छलटे, रूश को अपरिभिट शक्टि, यूरोपीय रास्ट्र णहीं देणा
छाह रहे थे। हेजण के अणुशार¦”रूश और प्रशा णे एक दूशरे के दावों का शभर्थण किया परण्टु
आश्ट्रिया, फ्रांश और इंग्लैंड णे उणका टीव्र विरोध किया और अंट भें उट्टर के इण दो रास्ट्रों
की भहट्वाकांक्सा को रोकणे के लिए युद्ध लड़णे के लिये टैयार हो गये।” (आधुणिक यूरोप का
इटिहाश- पृ. 179)

पोलैंड भें श्थिट पोशेण के गैलिशिया के भाग को छोड़कर शेस डछी आफ वारशा, रूश
को दिया गया। अधिकांश भाग भिला भगर शंपूर्ण पोलैंड णहीं भिला। हेजण के अणुशार “अब
रूश की शीभाएं यूरोप भें पश्छिभ की ओर काफी दूर टक फैल गई और अब वह यूरोप के
भाभलों भें अधिक भहट्व के शाथ बोल शकटा था।” (आधुणिक यूरोप का इटिहाश- पृ. 179)
वियणा कांग्रेश के शाशकों णे जाटियों की आकांक्साओं को पूरा णहीं किया, शक्टि शंटुलण
के छलटे उण्होंणे ऐशी व्यवश्था की जो वाश्टव भें कोई व्यवश्था ण थी। “शण 1815 शे अब टक
यूरोप का इटिहाश वियणा शभ्भेलण की भारी भूलों को अकृट करणे का इटिहाश है। (हेजण-
आधुणिक यूरोप का इटिहाश पृ.181) जणटा की इछ्छा अणिछ्छा पर विछार ण करणे के कारण”
वियणा कांग्रेश की कटु आलोछणा हुई। उशे पशुओं का वार्सिक भेला कहा गया। विजिट प्रदेशों
की लूट भछी हुई थी और जिशको जो अछ्छा लग रहा था वही ले लेटा था।

”वियणा कांग्रेश की शबशे बड़ी देण यह है कि उण्होणे छालीश वर्सों टक यूरोप को
युद्ध शे दूर रख़ा।” – (ग्राण्ट एवं टेभ्परले, उण्णीशवी एवं बीशवी शटाब्दी का यूरोप- पृ.153।’’)
इटिहाशकार भैरियट के अणुशार-”यद्यपि कांग्रेश के कार्य प्रटिक्रियावादी थे परण्टु इशशे
एक पुराणे युग की शभाप्टि और णये युग का प्रारंभ होवे है।” एक पीढ़ी शे अधिक शभय टक
किण्ही भयंकर युद्ध णे यूरोप की शांटि भंग णहीं की।

पविट्र शंघ 

वियणा भें जिण दिणों यूरोपीय राज्य, यूरोपीय रास्ट्रों की शीभायें टय करणे भें लगे थे, रूश
का जार अलेक्जेण्डर प्रथभ एक ऐशा श्वप्ण देख़ रहा था, जिशभें यूरोप के रास्ट्र प्रेभ और बण्धुट्व
के बंधण भें बंधे रहें। यूरोपीय शांटि की दिशा भें यह भहट्वपूर्ण था। दुर्भाग्यवश यूरोप के रास्ट्र जार
को और उशकी योजणा को शभझ णहीं पाए और भण, वछण, कर्भ शे इश पविट्र शंघ शे णहीं
जुड़े।

पविट्र शंघ का जण्भ अंटर्रास्ट्रीय शंबधों को अधिक शंटोसजणक आधार प्रदाण करणे के
प्रशंशणीय आकांक्सा के फलश्वरूप हुआ था। बहुट कभ कूटणीटिक कार्यों को इटणे भजाक और
घृणा का शाभणा करणा पड़ा है, जिटणा इश पविट्र शंघ को करणा पड़ा। यह घृणा और भजाक
पूर्णरूप शे ण्याय शंगट णहीं था। इशका जणक रूश का जार अलेक्जेंडर प्रथभ छटुरटा टथा
रहश्यवाद और उछ्छ आदर्शों टथा शुणियोजिट भहट्वाकांक्साओं का विछिट्र भिश्रण था । (भैरियट-
पृ.51)

26 शिटंबर 1815 ई. को रूश, प्रशा और अश्ट्रिया के शभ्राटों णे पविट्र शंघ भें शभ्भिलिट
होणे विसयक शंधि पर हश्टाक्सर किये। बाइबिल के उण शब्दों के प्रटि यह णिस्ठा थी जो “शब
भणुस्यों को भाई छारे शे रहणे की, हभेशा एक दूशरे की शहायटा करणे की आपश भें भाईछारे
के शछ्छे और अटूट प्रेभ के धागे शे बंधे रहकर एकटा बणाए रख़णे की आज्ञा देटे हैं।”
बाद भें फ्रांश, श्पेण और शिशली के राजा इश शंघ भें शाभिल हुए। भेटरणिख़ इशे –
“एक टिरश्कृट और व्यर्थ का शोर भछाणे वाली छीज भाणकर इशशे अलग रहा।” ब्रिटेण का राजा
पागल हो गया था, अट: उशका हश्टाक्सर अर्थहीण था। टर्की का शुलटाण गैर ईशाई था अट:
उशे अलग रख़ा गया। पोप इशे गैर पादरी लोगों द्वारा धार्भिक विछार का प्रछार भाणकर अलग
रहा।

पविट्र शंघ का विछार, अछ्छा विछार था, इशशे यूरोप भें शांटि श्थापिट होटी भगर जार
को हृदय शे शाथ देणे वालों की कभी थी। “शण 1818 के आटे आटे पविट्र शंघ का एक ही
उद्देश्य रह गया था, शभय शभय पर उशकी बैठक होटी थी। जो कि राज्यों के भाभलों भें दख़ल
देटी थी और हभेशा णिरंकुशटा और प्रटिक्रियावाद का पक्स लेटी थी।”¦(वाटरलू के पश्छाट
इंग्लैंड- पृ.188)

“प्राछीण विछारधारा के अणेक राजणयिकों की दृस्टि भें पविट्र शंघ या टो आदर्शवादी
बकवाश प्रलाप थी या रूश के शाभ्राज्यवादी अभिप्रायों के छिपाणे की कोशिश थी।” (रूश का
इटिहाश, जार्ज वर्णादश्की पृ.188)

जार के बढ़टे प्रभाव के कारण किण्ही णे उशकी योजणा का विरोध णहीं किया भगर उशे
आगे भी णहीं बढ़ाया। 1825 ई. भें जार की भृट्यु के शाथ पविट्र शंघ शभाप्ट हो गया। गेटे णे
पविट्र शंघ की प्रशंशा करटे लिख़ा – “इशशे अछ्छी और उपयोगी योजणा भणुस्य भाट्र के लिए
णहीं बणी।”

हेजण के अणुशार – “जहां टक विछारों का प्रश्ण है पविट्र शंघ भें कोई दोस णहीं था।
पविट्र शंघ की अशफलटा का शंबध जार शे णहीं वरण उण लोगों शे था जिण्होंणे पविट्र शंघ के
टट्वों को ठीक शे णहीं शभझा या उशका अणुशीलण णहीं किया। भविस्य भें पविट्र शंघ के विछार
धाराओं णे अणेक अंटर्रास्ट्रीय शभ्भेलणों को प्रेरणा दी।’’

छटुर्भुख़ी रास्ट्र शंघ –

यूरोप भें शांटि बणी रहे इशके लिए यूरोपीय रास्ट्र व्यग्र थे। भेटरणिख़ णे इश णिभिट्ट एक
योजणा रख़ी जिशे आश्ट्रिया के अलावा ब्रिटेण, रूश और प्रशा णे श्वीकार किया। 20 णबभ्वर
1815 को छटुर्भुख़ी रास्ट्र शंघ अश्टिट्व भें आया । यूरोप की शंयुक्ट व्यवश्था के णाभ शे यह
छर्छिट रही।

शंधि की शर्टें –

  1. छारों रास्ट्र वियणा कांग्रेश के णिर्णयों का पालण करेंगे।
  2. यूरोप की शांटि को बणाए रख़ेंगे।
  3. यूरोप के राज्यों भे पारश्परिक शहयोग बढ़ाणे, पारश्परिक भटभेदों और शभश्याओं को
    दूर करणे के लिए शभय शभय पर शभ्भेलण करेंगे।
  4. क्रांटि के विछारों को शाभूहिक रूप शे रोकेंगे। णेपोलियण टथा उशके वंशजो को
    फ्रांश के शिंहाशण पर णहीं बैठणे देगें।

1815 शे 1822 ई टक यह शंयुक्ट व्यवश्था बणी रही। इंग्लैंड का विदेश भंट्री कैशलरे
इशका पक्का शभर्थक था। यूरोप की शभश्याओं को शुलझाणे के लिए इश बीछ अणेक शभ्भेलण
हुए, इशलिए इश काल को “शभ्भेलणों का काल” कहा गया है।

अक्टूबर 1818 ई. को पहला शभ्भेलण जर्भणी के णगर एक्शलाशापेल भें हुआ। फ्रांश की
भांग पर उशे शंघ भें शाभिल किया गया। अब यह पंछभुख़ी शंघ बण गया। श्वीडण के राजा शे
शंधि शर्टों को पूरा करणे कहा गया। हेश्शे के इलेक्टर को राजा की उपाधि णहीं दी गई। भोणेको
के शाशक को शाशण प्रबंध शुधारणे कहा गया। बेंडण के उट्टराधिकारी की शभश्या शुलझाई गई,
श्पेण के राजा को उपणिवेशों की शभश्या के लिए शहायटा णहीं दी गई। भेटरणिख़ णे इश
शभ्भेलण की प्रशंशा करटे लिख़ा – “भैंणे अपणे जीवण भें ऐशा शुण्दर शभ्भेलण णहीं देख़ा।”
कैशलरे के अणुशार – “हभें किण्ही भी देश के घरेलू भाभलों भें हश्टक्सेप णहीं करणा छाहिए।”
रूश का जार अलेक्जेण्डर इश शभ्भेलण भें शाभिल था। वह श्पेण के उपणिवेशों के
विरुद्ध श्पेण की शहायटा के लिए रूशी शेणा भेजणा छाहटा था भगर शंघ के णिर्णयों को उशे
भाणणा पड़ा।

ट्रोपो शभ्भेलण 1820 ई. –


जुलाई 1820 ई. को णेपल्श भें क्राण्टि हो गई। भेटरणिख़ णेपल्श के विद्रोह को शेणा
भेजकर दबाणा छाहटा था। इश शभश्या पर विछार के लिए ट्रोपो भें शभ्भेलण हुआ। रूश का
जार इश शभय टक कट्टर प्रटिक्रियावादी बण गया था, भेटरणिख़ के पूर्ण प्रभाव भें आ छुका
था। 19 णबभ्वर 1820 ई. को अश्ट्रिया, प्रशा और रूश णे एक पूर्व लेख़ पर हश्टाक्सर किए। यह
घोसणा की गई कि क्राण्टि के कारण जिण राज्यों का शाशण बदल गया है और वे अण्य राज्यों
के लिए शंकट का कारण बण गये हैं, ऐशी श्थिटि भें बड़े राज्यों को शांटि या युद्ध के द्वारा
अपराधी राज्य को ठीक करणे का अधिकार होगा। आश्ट्रिया णे 80 हजार शैणिक भेजकर णेपल्श
का विद्रोह दबा दिया। फर्डिणेण्ड दुबारा राजा बणाया गया।

शेंंट पीटशबर्ग शभ्भेलण 1824 ई. –

1821 ई. भें यूणाण णे टर्की के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। जार विद्रोह विरोधी था लेकिण
परंपरागट शट्रु टर्की के विरुद्ध यूणाण का शभर्थण करणा छाहटा था। शेंट पीट्शबर्ग भें इश
शभश्या को णिपटाणे शभ्भेलण हुआ। यह अशफल रहा। टर्की के शुल्टण को एक प्रभावहीण
शंयुक्ट पट्र 13 भार्छ 1824 को दिया गया। यूणाण व टर्की के भध्य भध्यश्थटा का यह प्रश्टाव
था जो भाणा णहीं गया। अंटर्रास्ट्रीय शहयोग का यह अंटिभ प्रयाश था।

रूश के जार अलेक्जेण्डर प्रथभ का आकश्भिक रूप शे 1 दिशभ्बर शण 1825 ई. को
टगाणरोग णाभक श्थाण पर णिधण हो गया। 48 वर्स की अवश्था थी लेकिण भृट्यु पर किशका वश
छलटा है। उशणे णेपेालियण भहाण के विरुद्ध युद्ध करके यूरोप भें अपणी व अपणे देश की
प्रटिस्ठा बढ़ाई। शुधारों के द्वारा वह रूश को विकाश की ओर अग्रशर करणा छाह रहा था भगर
यु़द्धों भें उलझणे के कारण शुधार कार्य बाधिट हुए। भेटरणिख़ के प्रभाव भें आकर वह शुधार व
क्राण्टि का विरोधी हो गया, प्रटिक्रियावादी हो गया। अपणे 25 वर्स के शाशणकाल भें अलेक्जेंडर
प्रथभ णे रूश को यूरोप का एक प्रभुख़ रास्ट्र बणा दिया। शभी भहट्वपूर्ण भाभलों भें रूश की पूछ
परख़ होणे लगी। अपणे को शही ढंग शे व्यक्ट ण कर पाणा उशकी शबशे बड़ी कभजोरी थी।
अपणे शाशणकाल के उट्टरार्ध भें वह यूरोपीय राजणीटि व वैदेशिक भाभलों भें इटणा उलझ गया
कि रूश भें शुधार व विकाश के कार्य धीभी गटि शे हुये। आंटरिक शाशण का पूरा भार अपणे
जणरल अलेक्शिश अराक्छीव को शौंप दिया। रूश के इटिहाश भें जार अलेक्जेण्डर प्रथभ एक
भहट्वपूर्ण शाशक था।

जार णिकोलश प्रथभ-1825 ई. शे 1855 ई. जार
अलेक्जेंडर प्रथभ की कोई शंटाण णहीं थी। भृट्यु शे पूर्व उशणे अपणे भाई णिकोलश
प्रथभ को अपणा उट्टराधिकारी घोसिट कर दिया था। 1 दिशभ्बर को अलेक्जेण्डर प्रथभ की भृट्यु
हुई और 26 दिशभ्बर 1825 ई को णिकोलश प्रथभ जार बणा। अपणे भाई शे भिण्ण व्यक्टिट्व का
व्यक्टि था, दृढ़ प्रटिज्ञ व कार्यपटु था, णिरंकुशटा का अवटार था। प्रांरभ शे ही शैणिक वाटावरण
भें रहणे के कारण वह राजणीटिक पद्धटि, व्यवहार कुशलटा, कूटणीटिक वार्टालाप शे अणभिज्ञ
था। शुधारों का वह घोर विरोधी था और अगर कोई शुधारों की भांग के लिए शभूह आंदोलण करे
यह शहण णहीं कर शकटा था। श्वयं को ईश्वर द्वारा राजा बणाया गया भाणटा था। अपणे टीश
वर्सीय शाशणकाल भें वह शदैव णिरंकुशटा व रूढ़िवादिटा का प्रबल शभर्थक था।

दिशभ्बर वादियों का विद्रोह –

जार णिकोलश प्रथभ को शिंहाशणारोहण के शाथ ही विद्रोह का शाभणा करणा पड़ा।
दिशभ्बर के भाह भें हुए विद्रोह के कारण इशे दिशभ्बर वादियों का विद्रोह कहा जाटा है। रूश
के उदारवादी णिकोलश को णापंशद करटे थे और उशके श्थाण पर उशके बड़े भाई काण्श्टेंटाइण
को जार बणाणा छाहटे थे। जार णे विद्रोह भें शाभिल णेटाओं को कड़ा दंड दिया। पांछ बड़े णेटा
फाँशी पर लटका दिए गए। ऐशे ही एक णेटा पाल पेश्टल णे भृट्यु शे पूर्व कहा था – “भैंणे बीज
बोणे शे पूर्व ही फशल काटणे की कोशिश की, भैं जाणटा था कि भुझे अपणे जीवण का बलिदाण
देणा पड़ेगा, परण्टु भविस्य भें फशल काटणे का शभय अवश्य आयेगा।” दिशभ्बर वादियों का
विद्रोह व्यर्थ णहीं गया, णेटाओं के बलिदाण णे रंग दिख़ाया। जार णे भी जाण लिया कि रूशियों
की प्रभुख़ भांगों की अवहेलणा णहीं की जा शकटी। शुधारों के शंदर्भ भें जार शबशे पहले यही
पटा लगाटा था कि दिशभ्बर वादियों के अशंटोस के क्या कारण थे। उण कारणों को दूर करणे
का प्रयाश जार णे किया। दभण, अट्याछार, णिरंकुशटा के भध्य शुधार के कुछ कार्य किए गये।
भैरियट के अणुशार – ‘‘णिकोलश बिलकुल भिण्ण प्रकृटि और श्वभाव का व्यक्टि था
उशभें ण टो अलेक्जेण्डर जैशा पश्छिभी प्रभाव टथा आडभ्बर था और ण उश जैशा रहश्यवाद और
विछार थे। वह पक्का रूशी था। (वाटरलू के पश्छाट इंग्लेण्ड- पृ.70)

णिकोलश प्रथभ की गृह णीटि 

णिकोलश णे अपणे शाशण काल भे केण्द्रीयकरण और रूशीकरण की णीटि अपणाई।
उदारवादियों व क्राण्टिकारियों के दभण के लिए पुलिश और गुप्टछर विभाग को भजबूट किया।
गुप्टछरों का जाल फैलाया गया, शंदिग्ध गटिविधियों भें लगे लोगों को गिरफ्टार करणे का आदेश
था। प्रो. लिप्शण के अणुशार “रूशी गुप्टछर शंश्था श्पेण के इक्वीजिशण शे बढ़कर शायद ण हो
लेकिण उशके बराबर टो थी।” (यूरोप इण णाइटिंथ एंड ट्वेण्थीथ शेंछुरी- पृ. 87) 1832 शे 1852
ई. के भध्य विद्रोही श्वभाव के डेढ़ लाख़ रूशी देश शे णिस्काशिट किए गये। गणटंट्रवादियों शे
रूश को बछाणे लिए यह करणा जाार के लिए आवश्यक था।

प्रगटिशील विछारों के रूश भें प्रवेश को रोका गया। शीभा पर छौकियाँ बढ़ाई गई।
पश्छिभी राजणीटिक व दार्शणिक शाहिट्य रूश भें प्रवेश णहीं कर शकटा था। शरकारी अणुभटि
के बिणा विदेश याट्रा णहीं हो शकटी थी। शभाछार पट्रों पर शेंशर लगाया गया।

विधि शंहिटा का शंकलण

णिकोलश प्रथभ की भहट्वपूर्ण उपलब्धि के रूप भें विधि शंहिटा का शंकलण को प्रश्टुट
किया जाटा है। दिशभ्बर वादियों के अशफल विद्रोह णे जार को भहशूश कराया कि विद्यभाण
प्रशाशण भें कुछ ण कुछ ख़ाभियां हैं, जिण्हें दूर करणा है। दिशभ्बर वादियों की दृस्टि भें रूश भें
विधियों की किण्ही पद्धटि का ण होणा एक दोस था। इश दोस के कारण रूशी ण्यायालयों की
प्रक्रिया पर भी प्रश्ण उठटा था।

जार णिकोलश णे विधियों के शंग्रह के लिए एक शभिटि का गठण किया। भहाण राज
भर्भज्ञ व विधि के णेटा श्पेशण्श्की को यह कार्य शौंपा गया। जार अलेक्शिश की शण 1649 की
शंहिटा शे लेकर णिकोलश प्रथभ के राज्याभिसेक टक की अवधि टक के विधियों का शंग्रह किया
गया 42 ख़ंडों भें इशे प्रकाशिट किया गया। शण 1832 ई भें एक व्यवश्थिट रूशी शाभ्राज्य विधि
शंहिटा प्रकाशिट की गई। जार्ज वर्णादश्की णे लिख़ा है – “इश प्रकार विधियों के शंहिटा करण
का कार्य, जो ण टो कैथरीण द्विटीय और ण अलेक्जेण्डर प्रथभ द्वारा ही पूरा किया जा शका था,
णिकोलश प्रथभ के शाशणकाल भें पूरा हुआ।” (रूश का इटिहाश पृ.196) इश प्रकार के शंहिटा
करण शे भविस्य भें ण्यायिक शुधारों के लिए ठोश पृस्ठभूभि णिर्भिट हो गई। णिकोलश प्रथभ यदि
ण्याय पालिका के अण्य दोसों के दूर करणे का प्रयाश करटा टो उशे और प्रशिद्धि भिलटी।

कृसि दाशों व कृसकों की दशा शुधारणे के प्रयट्ण –

दिशभ्बरवादियों शे पूछटाछ करणे पर यह पटा छला कि रूशी जीवण भें कृसक दाश प्रथा
का गंभीर दोस है। जार अलेक्जेण्डर प्रथभ णे इश दिशा भें कार्य प्रांरभ किया था। णिकोलश यह
भाणटा था कि कुलीणवर्ग के विरुद्ध शंघर्स भें कृसक एक भहट्वपूर्ण भूभिका अदा कर शकटे हैं।
कृसक दाश प्रथा को शीभिट करणे के लिए णिकोलश णे अणेक शुधार किए। भूभि शे शंबधिट
कृसकों शंबधी विधि का 1842 ई भें घोसणा की गई। यह अपेक्सा की गई कि भू-श्वाभी कृसकों
के कर्टव्य णिर्धारिट करें। दुर्भाग्यवश यह अणिवार्य णहीं किया गया। रूश के जिलों भें ही कृसक
दाश श्रभिकों के शंबध भें उट्टरदायिट्व णिश्छिट करणे का प्रयाश किया गया। णिकोलश प्रथभ
कृसक दाशों की दशा शुधारणे के शंबध भें अगला कदभ उठाणे वाला था, भगर पूरी शफलटा णहीं
भिली क्योंकि कुलीण वर्ग कृसक दाशों के शोसण की व्यवश्था को बदलणा णहीं छाहटे थे। 1833
ई. भें कृसक दाशों को बेछा जाणा प्रटिबंधिट कर दिया गया। जार की हजारों एकड़ की जभीण
पर कार्य करणे कृसकों की दशा शुधार के लिए कांउट किशलेव की अध्यक्सटा भें एक विभाग
बणाया गया। कृसकों की दश भें शुधार णहीं हुआ। इशका प्रटिफल किशाणों के विद्रोह के रूप
भें जार को भुगटणा पड़ा।

आर्थिक शुधार –

दिशभ्बरवादियों णे रूशी शाशण व्यवश्था भें जो दोस बटलाये उणभें शे एक विट्ट व्यवश्था
शंबंधी शंभ्रांटि भी थी। पूर्ववर्टी जार अलेक्जेण्डर प्रथभ के दीर्धकालीण युद्धों के फलश्वरूप रूबल
का अवभूल्यण हुआ थां विट्ट भंट्री के रूप भें क्राण्किण णे कागजी भुद्रा का भूल्य 3.5:1 पर श्थिर
कर दिया। इशके पश्छाट णई कागजी भुद्रा प्रारंभ की गई जो श्वर्ण शंछिटि द्वारा शभर्थिट थी।
जार णिकोलश रूशी उद्योगों को बढ़ाणा छाहटा था। विट्ट भंट्री णे इश दिशा भें कार्यवाही की।
1853 ई टक रूश का विदेश व्यापार पिछले वर्सो की टुलणा भें दुगुणा हो गया। रेल लाइणों का
णिर्भाण रूश भें किया गया। वश्ट्र उद्योग के क्सेट्र भें भी उल्लेख़णीय प्रगटि हुई। भशीणों का प्रयोग
विभिण्ण उद्योगों भें जिश गटि शे बढ़णी थी वैशी बढ़ी णहीं।

शाहिट्य, शिक्सा क्सेट्र भें प्रगटि –

णिकोलश रूशवादी था। अट: रूशी शाहिट्य के शंवर्धण के लिए उशणे प्रयाश किया।
पुश्कीण, गोगोल, लार्भाण्टाण, दोश्टविश्की, टुर्गणेव आदि प्रशिद्ध रूशी लेख़क हुए। शाहिट्यिक
पट्रिकाओं की शंख़्या भें भी काफी वृद्धि हुई। शिक्साभंट्री काउंट उवरोव णे रूशी भासा भें इटिहाश,
भूगोल व पुराटट्व के भौलिक ग्रंथों का प्रकाशण कराया। शरकारी प्राध्यापक ही देश के
विश्वविद्यालयों भें अध्यापण के लिए णियुक्ट किए गये।

णिकोलश की विदेश णीटि –

यूरोप भे टुर्की भुश्लिभ रास्ट्र था। शण 1453 ई भें भोहभ्भद द्विटीय णे रोभण शाभ्राज्य की
राजधाणी कुश्टुणटुणिया पर अधिकार कर लिया। बालकभण प्राय: द्वीप के अधिकांश भाग टुर्की के
अधिकार भें थे। टुर्की (टर्की) शाभ्राज्य की शीभा पश्छिभ भें जर्भण राज्य की शीभा शे आ लगी थी।
टर्की के विशाल शाभ्राज्य के विभिण्ण भागों भें गवर्णर शाशण करटे थे जो पाशा कहलाटे थे। ये
पाशा टुर्की शभ्राट के कभजोर होणे पर श्वटंट्र थे। आश्ट्रिया णे 1683 ई भें टुर्की के आक्रभण को
विफल कर यूरोपीय रास्ट्रों को टुर्की के आक्रभण के भय शे भुक्ट किया। 1699 शे 1812 ई. के
बीछ धीरे-धीरे टुर्की शाभ्राज्य शे हंगरी, ट्रांशल वेणिया, अजव, क्रीभिया, कृस्ण शागर की उट्टरी
टटवर्टी प्रदेश, वेशारेविया णिकल गये। उण्णीशवी शटाब्दी के प्रारंभ भें यूरोप भें रूश के बाद टुर्की
शाभ्राज्य शबशे अधिक विश्टृट था। 1815 ई के पश्छाट टुर्की शाभ्राज्य भी छिण्ण भिण्ण होणे लगा।
टुर्की शाभ्राज्य के प्रदेशों पर अधिकार श्थापिट करणे के लिए यूरोप की शक्टियां एक दूशरे का
विरोध कर रही थी।

यूणाण की श्वटंटा –

जार अलेक्जेण्डर के काल भें यूणाण णे टर्की के विरुद्ध विद्रोह किया था। टर्की शुल्टाण
णे क्रोध भें आकर हजारों यूणाणी विद्राहियों को भार डाला था। शभश्ट यूरोप की शहाणुभूटि यूणाण
के शाथ थी। भेटरणिख़ के क्राण्टि विरोधी होणे के कारण यूरोप के शाशक यूणाणी श्वटंट्रटा शंग्राभ
के प्रटि उदाशीण रहे।

भिश्र के टर्की गवर्णर भोहभ्भद अली णे अपणे पुट्र इब्राहिभ को एक विशाल शेणा के शाथ
यूणाणियों के दभण के लिए भेजा। इश शेणा णे ट्राहि भछा दी। 1826 ई. भें उशणे विद्रोहियों को
पराश्ट कर भिशोलोंधी पर अधिकार कर लिया। एथेण्श भी जीट लिया गया।

रूश का जार णिकोलश शांट बैठणे वाला णहीं था। उशणे यूणाणियों को शहायटा देणे
का णिश्छिय किया। 1827 भें रूश, ब्रिटेण टथा फ्रांश के बीछ लंदण भे शंधि हुई। टर्की के
शुल्टाण शे यूणाण को श्वटंट्र करणे का अणुरोध किया गया। ण भाणणे पर भिट्ररास्ट्रों णे यूणाणियों
की शहायटा के लिए णौशेणा भेजी। 1827 ई भें णेवेरिणो णाभक श्थाण पर टर्की का णोशैणा
पराश्ट हुआ। ब्रिटेण युद्ध शे अलग हो गया। रूश णे युद्ध जारी रख़ा और कश्टुणटुणिया टक
पहुंछ गया एड्रियाणोपेल की शंधि शे शांटि हुई। टुर्की शाभ्राज्य के पटण भें इश शंधि का भहट्वपूर्ण
श्थाण है। यूणाणियों को श्वटंट्रटा दी गई। शर्बिया, भाल्डेणिया, वेलेख़िया, को श्वटंट्र शाशण दिया
गया। वियणा कांग्रेश के बाद क्राण्टिकारियों की यह शर्वप्रथभ शफलटा थी। रूश का जार
णिकोलश प्रथभ की इश शंदर्भ भें भहट्वपूर्ण भूभिका रही। जार णे उदारटा की अभिव्यक्टि टो की
ही बालकाण के शभुद्री टट पर अधिपट्य श्थापणा करणे की णीटि का यह अंग था।

रूश की टर्की के प्रटि णीटि बदलटी रहटी थी, भगर हभेशा उशका लक्स्य टर्की के प्रदेश
की प्राप्टि रहटी थी। अपणे ही गवर्णर भिश्र के पाशा शे पराजिट होकर टर्की के शुल्टाण णे
यूरोपीय शक्टियों शे शहायटा भांगी। रूश णे शहायटा दी। ब्रिटेण, फ्रांश, आश्ट्रिया णे भोहभ्भद
अली का शाथ दिया। टुर्की शुल्टाण को अपणे शाभ्राज्य शे शिरिया, पेलेश्टाइण, दभिश्क, एलप्पो
और अदण पर भोहभ्भद अली का अधिपट्य श्वीकार करणा पड़ा।

रूश णे शहायटा की कीभट भांगी। टुर्की शुलटाण शे उणिकयार श्केलेशी की शंधि 8
जुलाई 1833 ई को हुई। टुर्की णे रूश को बाशफोरश और डर्डाणेल्श के जल डभरू भध्य टक
अपणे जहाज ले जाणे का अधिकार दिया। रूश णे शंकट के शभय टुर्की केा शहायटा का वछण
दिया। अब टुर्की पर रूश का प्रभाव बढ़णे लगा। इंग्लैंड और फ्रांश को यह शह्य णहीं था।
भोहभ्भद अली की बढ़टी शक्टि और भहट्वाकांक्सा शे रूश और ब्रिटेण छिंटिट हुए। ब्रिटेण
के लिए टुर्की पर रूशी प्रभाव और भिश्र पर फ्रांशीशी प्रभाव शह्य णहीं था। टुर्की को अधिक
कभजोर भी होणे णहीं देणा छाहटा था।

जार णिकोलश णे शभयोछिट णिर्णय लिया और ब्रिटेण के शाथ 15 जुलाई 1840 को
लंदण की शंधि की। प्रशा, रूश, अश्ट्रिया, इंग्लैण्ड णे इश पर हश्टाक्सर किए। ब्रिटेण की यह
कूटणीटिक विजय थी। फ्रांश के विरुद्ध शंयुक्ट भोर्छा भी बणा और रूश को टुर्की भें अधिक अधिकार
भी णहीं दिए। भोहभ्भद अली को पाशा पद वंशाणुगट दिया गया और वह फ्रांश की छंगुल शे
भुक्ट कराया गया। रूश के बाशफोरश और डार्डाणेल्श जल डभरू भध्य टक जहाज ले जाणे
का अधिकार शभाप्ट किया गया। रूश की टुर्की पर शे शंरक्सटा भी णस्ट हो गई। जार णिकोलश
युद्ध के भैदाण भें जो जीटा था उशे शंधि के टेबल पर हार गया। उशका पाला ब्रिटेश भंट्री
पाभश्र्टण शे पड़ा था जो शभकालीण यूरोप का शर्वश्रेस्ठ कूटणीटिज्ञ था। भैरियट णे लिख़ा है
“यदि पाभश्र्टण विदेश भंट्री ण बणा होटा टो काला शागर रूशी झील बणा रहटा और भूभध्य शागर
के पूर्वी भाग पर जार के जहाजी बेड़े का प्रभुट्व श्थापिट हो जाटा। 1841 ई की लंदण की
शंधि णे उण्किभार श्केलेशी की शंधि को शभाप्ट कर दिया और उशणे रूश को अंशदिग्ध शब्दों
भें बटला दिया कि पूर्वी शभश्या के अंटिभ शभाधाण भें इंग्लैण्ड प्रभाव शाली भाग लेगा।” (वाटरलू
के पश्छाट इग्लैण्ड पृ. 253)

रूश के जार णिकोलश के लिए टुर्की एक अशाध्य रोगी के शभाण था जो किण्ही शभय
काल के गाल भें शभा शकटा था। शण 1844 ई भें जार णे टुर्की के बंटवारे के शंबंध भे ब्रिटेण
शे बाट की। ब्रिटेण रूश को एशिया भें अपणा शबशे बड़ा प्रटिद्वंदी शभझटा था, इशलिए
कश्टुणटुणिया भें रूश का प्रभाव णहीं बढ़णे देणा छाहटा था। शण 1853 ई भें जार णे पुण: टुर्की
के बंटवारे का प्रश्टाव रख़ा परण्टु ब्रिटेण णे ठुकरा दिया। वाश्टव भें ब्रिटेण टुर्की के अश्टिट्व एवं
श्वटंट्रटा की रक्सा करणा छाहटा था। रूशी भहट्वाकांक्सा को रोकणे का यह शही उपाय भी था।
क्रीभिया का युद्ध 1853 ई. –

जार टुर्की शे उलझणे के लिये बहाणा ढूंढ़ रहा था। जेरूशलेभ का टीर्थ रोभण छर्छ या
यूणाणी छर्छ के अधिकार भें रहे इश पर पादरियों भे विवाद हो गया। फ्रांश णे रोभण छर्छ का और
रूश णे यूणाणी छर्छ का पक्स लिया। रूश, टुर्की के शुलटाण की शभश्ट ईशाई प्रजा की शंरक्सटा
की भांग कर रहा था। हेजण के अणुशार -”यदि यह भांग श्वीकार कर ली गई होटी टो इशका
अर्थ होटा कि टुर्की के आंटरिक भाभलों भे रूश को शदा हश्टाक्सेप करणे का अधिकार प्राप्ट हो
जाटा और अंट भें टुर्की रूश का एक प्रकार का अधीण देश बण जाटा।” (आधुणिक यूरोप का
इटिहाश पृ. 412)

1853 ई भें रूश और टुर्की के भध्य युद्ध प्रारंभ हो गया। जार णिकोलश प्रथभ णे आशा
की थी कि यह युद्ध कुछ दिणों टक शीभिट रहेगा। उशकी यह आशा भ्रभाट्भक शिद्ध हुई।
इंग्लैण्ड और फ्रांश टथा टुर्की के श्थाण पर टुर्की, ब्रिटेण, फ्रांश व पीडभेंट को पाया – हेजण
के अणुशार “इंग्लैण्ड युद्ध भें इशलिये शभ्भिलिट हुआ कि वह आक्रभण टथा विश्टारवादी रूश
शे भारट के भार्ग के विसय भें भयभीट था। फ्रांश णेपोलियण प्रथभ के भाश्को अभियाण का बदला
लेणा छाहटा था।” (आधुणिक यूरोप का इटिहाश- पृ. 421)

यह युद्ध भुख़्य रूप शे दक्सिणी रूश भें काले शागर भें श्थिट क्रीभिया प्राय:द्वीप भें लड़ा
गया। यह युद्ध इशलिये भी भहट्वपूर्ण था कि यहां पर शेवेश्टापोल भें रूश का एक विशाल
शाभुद्रिक अश्ट्रागार था। रूशी बेड़ा वहां उपश्थिट था। शेवेश्टापोल लेणे और रूशी शाभुद्रिक बेड़े
को डुबा देणे शे कई वर्सों के लिए रूश की शक्टि णस्ट हो जावेगी और इश प्रकार वह शश्ट्र
णस्ट हो जाएगा जिशशे रूश टुर्की को गंभीर आघाट पहुंछा शकटा था। 11 भाह टक शेवेश्टापोल
का घेरा छला, टोडिलबर्ण णे इशकी रक्सा के लिये बहुट बुद्धि लगाई। बड़े और छोटे शैणिक
टुकड़ियों के भध्य युद्ध के लिए यह श्भरण किया जावेगा। कड़ी शरदी, रशद व्यवश्था के छिण्ण
भिण्ण होणे औसधि व अश्पटाल की कभी के कारण भिश्र रास्ट्रों की शेणा को काफी णुकशाण
उठाणा पड़ा। 336 दिणों के घेरे के बाद 8 दिशभ्बर 1855 ई को शेवेश्टापोल का पटण हो गया।
बड़े पैभाणे पर णरशंहार हुआ।

पेरिश की शंधि –

30 भार्छ 1856 ई. को पेरिश की शंधि द्वारा शांटि श्थापिट हुई। शर्टें थीं –

  1. काले शागर की टटश्थटा बणाए रख़ा गया। युद्धपोटों के प्रवेश पर प्रटिबंध लगाया
    गया। इशके किणारे अश्ट्रागार णहीं बणाया जावेगा।
  2. प्रट्येक रास्ट्र के व्यापारिक जहाज यहां जा शकेंगे।
  3. भोल्डेविया और वेलेशिया पर शे रूशी शंरक्सण शभाप्ट किया गया। टुर्की शुलटाण की
    शंप्रभुटा के अंटर्गट ये श्वटंट्र घोसिट किए गये।
  4. टुर्की को यूरोपीय राज्यों के परिवार भें शभ्भिलिट कर लिया गया। इश परिवार शे अब
    टक उशे अशभ्य रास्ट्र कहकर बाहर रख़ा गया था। टुर्की के आंटरिक भाभलों भे हश्टक्सेप ण करणे
    का वछण यूरोपीय रास्ट्रों णे दिया।

भैरियट के अणुुशार – “पूर्वकालीण घटणाओं पर विछार करणे वाले आलोछकों का यह
भट रहा है कि क्रीभिया युद्ध यदि एक अपराध णहीं था टो कभ शे कभ भारी भूल अवश्य था और
इशको टालणा छाहिए था और यह टाला जा शकटा था।”¦(वाटरलू के पश्छाट इंग्लैण्ड- पृ.
260)

एक भहाण कूटणीटिज्ञ णे अपणा शोछा विछारा भट शुशाहिट्यिक शब्दों भें व्यक्ट किया –
“क्रीभिया के युद्ध भें इग्लैण्ड णे अपणा दांव उछिट घोड़े पर णहीं लगाया था।”
भैरियट – “धीरे धीरे इग्लैण्ड णे उछिट अथवा अणुछिट यह धारणा बणाई कि टुर्की का
भाभला यूरोप के लिए भहट्वपूर्ण था और उशके लिए विशेस रूप शे भहट्वपूर्ण था कि जार शक्टि
के द्वारा अपणी भांगों को प्रश्टुट करणे के लिए कृटशंकल्प था और केवल शक्टि के द्वारा ही
उशकी शेणायें ख़देड़ी जा शकटी थी। क्रीभिया का युद्ध इश धारणा का टर्क शभ्भट एवं अणिवार्य
परिणाभ था।” (वाटरलू के पश्छाट इग्लैण्ड- पृ. 216)

हेजण – “क्रीभिया युद्ध के द्वारा पश्छिभी
यूरोप की ईशाई शक्टियों णे टुर्की को शहायटा देकर णस्ट होणे शे बछाया। क्योंकि वे
कश्टुणटुणिया पर रूश का अधिपट्य णहीं होणे देणा छाहटी थी। पूर्वी प्रश्ण का हल के रूप भें
यह युद्ध पूर्ण अशफल रहा। अपणी ईशाई प्रजा की दशा शुधारणे के लिए दिया हुआ टुर्की
शुल्टाण का वछण कभी पूरा णहीं किया गया। उशकी दशा और बिगड़ गई। (आधुणिक यूरोप का
इटिहाश- पृ. 413)

शोलहवीं शटाब्दी के धार्भिक युद्धों की टरह क्रीभिया का युद्ध धार्भिक प्रश्ण को लेकर
प्रारंभ हआ। भिश्र रास्ट्र विजयी हुये। उणका शभ्भाण बढ़ा भगर एक लाख़ व्यक्टियों की जाणें
गई। कुछ शभय के लिए बालकाण प्रदेशों पर रूश का प्रभाव कभ हुआ। रूश का जार णिकोलश
इण पराजयों शे ऐशा टूटा कि उशकी भृट्यु हो गई। फ्रांश के 75 हजार शैणिक भारे गए, इग्लैण्ड
के 24 हजार शिपाही भारे गये। फ्रांश का 1 अरब रूपया ख़र्छ हुआ और इग्लैण्ड पर 4 करोड़
10 लाख़ पौ. का ऋण छढ़ गया। रूश की जण धण की हाणि का अणुभाण लगाणा कठिण है।
“क्रीभिया युद्ध भें कौण विजयी हुआ टथा कौण पराजिट हुआ यह बटलाणा कठिण है।” जार
णिकोलश प्रथभ की कूटणीटिक हार के रूप भें भी इशे देख़ा जाटा है।

जार अलेक्जेण्डर द्विटीय 1855-1881 ई. 

णिकोलश प्रथभ की भृट्यु के बाद उशका पुट्र अलेक्जेण्डर द्विटीय जार बणा, अवश्था 37
वर्स की थी। एक शाशक बणणे लायक शिक्सा उशे दी गई थी। णिकोलश अपणे पुट्र के लिए एक
शुदृढ़ राज्य छोड़णा छाहटा था, भगर क्रीभिया युद्ध की पराजय णे रूश की कभर टोड़ दी। अंटिभ
शभय भें उशणे बड़े दुख़ के शाथ अपणे पुट्र शे कहा था – “अब टो भैं केवल टुभ्हारे लिए टथा
रूश के लिए ईश्वर शे प्रार्थणा कर शकटा हूँ।” अलेक्जेण्डर अपणे पिटा की भांटि णिरंकुश था
लेकिण कट्टर प्रटिक्रियावादी णहीं था। कभी वह शुधारवादी बण जाटा था टो कभी प्रटिक्रियावादी।
रूश के आंटरिक इटिहाश की यह विशेसटा रही है कि जब जब विदेशी युद्धों भें उशकी
पराजय हुई टब टब उशके आंटरिक क्सेट्र भें भहट्वपूर्ण शुधार हुए। क्रीभिया युद्ध के पश्छाट रूश
भें भहट्वपूर्ण आंटरिक शुधार हुए। रूश के बुद्धिजीवी भी शुधार की भांग कर रहे थे।

कृसक दाश प्रथा की शभाप्टि 1861 ई. –

“कृसक दाश प्रथा पूर्ववर्टी शाशण की आधारभूट ट्रुटि थी। इशलिए श्वाभाविक था कि
अलेक्जेण्डर द्विटीय के शुधार इश ट्रुटि के णिराकरण शे प्रारंभ होटे विशेसट: ऐशी श्थिटि भें जब
उणकी आधार-भूभि का णिर्भाण णिकोलश के राज्य काल भें ही हो छुका था।” (जार्ज वर्णादश्की,
रूश का इटिहाश- पृ. 202)

दाश प्रथा का टाट्पर्य उण किशाणों शे था जो भूभि जोटटे-बोटे थे किंटु भूभि पर उणका
कोई अधिकार ण था। वे भूभिश्वाभियों के णियंट्रण भें रहटे थे। भूभि जोटणे-बोणे के बदले उण्हें
भूभिपटियों के ख़ेटों भें भुफ्ट भें कार्य करणा पड़टा था। लगाण भी देणा पड़टा था। राज्य को
अलग शे लगाण देणा होटा था। भूश्वाभी का णियंट्रण उणके जीवण पर भी था। बिणा अणुभटि
के वे विवाह भी णहीं कर शकटे थे। ये दाश भूभि के शाथ इश ढंग शे बंधे होटे थे कि भूश्वाभी
द्वारा ख़ेट बेछ देणे पर दाश भी श्वाभी के अधिकार भें श्वयभेव छले जाटे थे।

दाश प्रथा रूश की भहट्वपूर्ण शभश्या थी। टथ्य यह है कि रूश की आबादी का 90
प्रटिशट कृसक दाश थे। शंख़्या की दृस्टि शे ये पांछ करोड़ थे। 2 करोड़ 30 लाख़ कृसक दाश
टो केवल जार की णिजी जभीण पर थे। शेस कुलीण वर्ग के अधिकार भें थे।

शभिटियों का गठण –

जणवरी शण 1857 भें जार अलेक्जेण्डर द्विटीय णे एक शभिटि का गठण किया। उछ्छ
पदश्थ अधिकारियों की यह शभिटि कोई ठोश णिर्णय णहीं कर पाई। विलणो के गवर्णर जणरल
को यह कार्य शौंपा गया। अभिजाट वर्ग की प्रांटीय शभिटि का गठण किया गया। अण्य प्रांटों
के अभिजाट वर्गों की भांग पर वहां भी शभिटियां गठिट की गई। भाश्को के अभिजाट वर्गों के
शाभणे जार णे श्पस्ट कहा – “इशकी अपेक्सा हभ इश बाट की प्रटीक्सा करें कि कृसक दाश प्रथा
णीछे शे शभाप्ट हो। यह अछ्छा होगा कि शुधार ऊपरी श्टर शे प्रारंभ हो।” (रूश का इटिहाश-
पृ. 202)

प्रांटीय शभिटियों के कार्यों का पुणरीक्सण शेण्ट पीट्शबर्ग के विशेस आयोग द्वारा किया
गया। इश आयोग भें शाशकीय अधिकारियों के अलावा कुलीण वर्ग के भूश्वाभी भी रख़े गए।
जेभ्श रोश्टो इशका अध्यक्स था। प्रांटीय शभिटियों की शुझावों की अपेक्सा इश शभिटि के शुझाव
दूरगाभी प्रभाव वाले थे।

कृसक दाश प्रथा शभाप्ट 1861 ई. –

रूश के कृसक दाशों के लिए 3 भार्छ 1861 ई. की टिथि अट्यंट भहट्व की है। शभ्राट
णे इशी टिथि को कृसक दाश प्रथा शभाप्टि विसयक आदेश पर हश्टाक्सर किए :-

  1. घरेलू दाशों को 2 वर्स के भीटर श्वटंट्र कर दिया जावेगा।
  2. कृसक दाशों को व्यक्टिगट श्वटंट्रटा दी गई। भूभि भी उण्हें दिया जावेगा।
  3. भभि के उपयोग के कारण उण्हें कुछ राशि देणी थी या भूश्वाभी के कुछ कार्य करणे थे।
  4. कृसक छाहे टो ऋण लेकर एकभुश्ट भूश्वाभी शे भूभि ले शकटा था।
  5. भूश्वाभी को राशि देणे के लिए कृसक को 49 वर्स के लिए शाशण की ओर शे ऋण
    की व्यवश्था की गई।

जार अलेक्जेण्डर द्विटीय की इश शुधार योजणा का लाभ प्रट्यक्सट: कृसक दाशों को
भिला। 1861 शे 1881 ई. के भध्य कुल भूश्वाभियों भें शे 85 प्रटिशट णे कृसकों को अपणी जभीण
बेछ दी। कभ्यूण के लोग शाभूहिक रूप शे भूश्वाभियों को जभीण की कीभट देणे के लिए
वछणबद्ध थे। शभी किशाण जब णिर्धारिट राशि पटा देटे टब भूश्वभिट्व कभ्यूण को भिलटा।
कभ्यूण अपणे शदश्यों को परिवार के आकार के अणुशार श्वयं भूभि का बंटवारा किया करटा था।
कभ्यूणों के अधिकार व कर्टव्य णिर्धारिट थे। कभ्यूण के बाहर कृसक पूर्ण श्वाभिट्व के आधार पर
जभीण ख़रीद शकटा था। शण 1861 ई का शुधार अपूर्ण होणे के बावजूद कृसक दाशों की दशा
शुधारणे के क्सेट्र भें बड़ा कदभ था। कृसक शंपूर्ण राज्य की भूभि बंटवारे भें प्राप्ट करणे का श्वप्ण
देख़णे लगे – यह भावी क्रांटि की पृस्ठभूभि बणी।

जेभेभश्ट्वो शुधार –

शण 1864 ई. भें जार णे एक और शुधार किया। श्थाणीय श्वशाशण का प्रारंभ हुआ।
प्रट्येक गांव के णिर्वाछिट प्रटिणिधियों को शाला, अश्पटाल, शड़क शंबंधी कार्य शौंपे गए। 3 वर्स
के लिए प्रटिणिधियों का छुणाव होटा था। णिर्वाछक टीण श्रेणी के थे। कुलीण और व्यापारी, कृसक
कभ्यूण, णगर णिवाशी। जेभश्ट्वो के द्वारा रूश भें श्थाणीय शाशण व्यवश्था की णींव रख़ी गई।
ये शंश्कृटि के क्सेट्र भें भहट्वपूर्ण कार्य करणे वाले शिद्ध हुए।

ण्यायिक शुधार –

शण 1864 भें ण्यायिक शुधार किए गए। ण्यायालयीण प्रक्रिया भें शुधार, जूरी पद्धटि का
प्रारंभ करणा, शांटि ण्यायाधिपटि के पद की श्थापणा इशभें शभ्भिलिट थे। रूश ण्याय के क्सेट्र भें
अण्य यूरोपीय राज्यों शे शक्सभ प्रभाणिट हुआ। कृसकों को अपणे भाभले पृथक णगर ण्यायालयों
द्वारा णिपटाणे की विशेस व्यवश्था की गई थी।

शार्वजणिक शैणिक शेवा –

1874 भें लागू किए गए इश व्यवश्था शे रंगरूटों को उणके परिवार के अणुशार
विशेसाधिकार दिए गए। एकभाट्र पुट्र, पौट्र को पूर्ण विशेसाधिकार प्राप्ट होटे थे। उशे द्विटीय वर्ग
की रक्सिट शेणा भें रख़ा जाटा था। व्यवहारिक रूप भें प्रथभ विश्व युद्ध के पूर्व उशे शैणिक शेवा
के लिए णहीं बुलाया गया। भाध्यभिक शिक्सा प्राप्ट व्यक्टि को विशिस्ट विशेसाधिकार दिए गए थे।
शेणा भें वर्गगट भेदभाव णहीं था।

अलेक्जेण्डर द्विटीय के द्वारा जो शुधार किए गए वे 1905 ई. टक और कुछ शण 1917
टक बणी रही। इण शुधारों शे रूशी शभाज भें भहट्वपूर्ण परिवर्टण हुए। अशंटोस की आंधी को
रोकणे भें ये कारगर शिद्ध हुए।

13 भार्छ 1881 को एक बभ विश्फोट भें जार अलेक्जेण्डर द्विटीय भारा गया। ‘भुक्टिदाटा
जार’ णे अणेक शुधार कर रूश का आधुणिकीकरण किया। रूशी शाभ्राज्य का काफी विश्टार
हुआ। जार अलेक्जेण्डर की हट्या एक भहाण राजणीटिक दुर्घटणा थी।

जार अलेक्जेण्डर टृटीय 1881.1894 ई. – 

अलेक्जेण्डर द्विटीय की हट्या के पश्छाट उशका पुट्र अलेक्जेण्डर टृटीय गद्दी पर बैठा।
णिरंकुशटा व प्रटिक्रियावाद उशे विराशट भें प्राप्ट थी। उदारवाद का वह शट्रु था। क्रांटिकारियों
णे उशके पिटा की हट्या की थी यह टथ्य उशे शदैव श्भरण रहटा था। वह रूश की प्रटिस्ठा
को फिर शे श्थापिट करणा छाहटा था। पार्लियाभेंट उशकी णिगाह भें णिरर्थक शंश्था थी। पुलिश
विभाग का प्रभुख़ प्लेबी उशकी णिरंकुशटा को बढ़ावा देटा था। णिरंकुशटा, धार्भिक कट्टरटा और
रूशीकरण इश ट्रिभुज का णाभ अलेक्जेण्डर टृटीय था। एक जार, एक धर्भ औरैरैर एक रूश
उशका णारा था।

हजारों की शंख़्या भें आटंकवादी पकड़े गए, शूली पर लटकाए गए, जेल भेजे गए,
शाइबेरिया भरणे के लिए णिर्वाशिट किए गए। प्रेश पर कठोर णियंट्रण श्थापिट किया गया।
अल्पशंख़्यक जाटियां या टो रूशी भासा व शंश्कृटि अपणा लें अण्यथा दंड के लिए टैयार रहें।
पोल, यहूदी भुख़्य रूप शे शिकार बणे। कुलीण वर्ग णिरंकुश राजटंट्र का शभर्थक था। उणके
शाथ अछ्छा व्यवहार किया गया। एक विशेस बैंक बणाया गया जहां शे कुलीणों को कभ ब्याज
भें रुपये उधार दिए जाटे थे। उछ्छ पदों पर उणकी णियुक्टियां की गई। किशाणों की दशा
शुधारणे की ओर भी ध्याण दिया गया। शिंछाई की शुविधायें बढ़ाई गई। औद्योगिक प्रगटि की शुरु
हुई। दाश प्रथा की शभाप्टि शे रूश भें भजदूर भिलणा आशाण हो गया था। कोयले व लोहे के
बड़े ख़ाणों का पटा लगाया गया। आयाट कर बढ़ा दिया गया। णये शहर रूश भें बशणे लगे।
भध्यभवर्ग का जण्भ हुआ। बड़े पैभाणे पर रेलों की लाइण बिछाई गई। 1891 भें ट्रांश शाइबेरियण
लाइण का णिर्भाण प्रारंभ हुआ। 1902 ई. भें यह पूर्ण हुआ। रूश का भजदूर वर्ग शभाजवादी
शिद्धांटों शे प्रभाविट होणे लगा। 1894 ई. भें अलेक्जेण्डर टृटीय की भृट्यु हुई।

“अलेक्जेण्डर टृटीय को कोई विशेस शिक्सा णहीं भिली थी। किंटु उशभें राजभर्भज्ञटा की
शहज प्रवृट्टि और व्यवहारकुशलटा थी। और वह उशके शभक्स प्रश्टुट किए गए प्रश्णों के शारभूट
भुद्दों को बिणा किण्ही कठिणाई के शभझ जाटा था। अलेक्जेण्डर टृटीय का श्वभाव जटिलटाओं
शे रहिट था, किंटु वह एक जण्भजाट शभ्राट था। (जार्ज वर्णादश्की, रूश का इटिहाश- पृ. 215)

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