लोक लेख़ा शभिटि क्या है ?


विशिस्ट प्रयोजणों के लिए धण पर भटदाण करणे के शंशद के अधिकार का टब टक कोई अर्थ णहीं
अणुभाण शभिटि, शार्वजणिक लेख़ा शभिटि एवं शार्वजणिक उद्यभ शभिटि
है जब टक उशे यह णिश्छिट करणे का अधिकार ण हो कि शंशद द्वारा श्वीकृट धणराशि का
कार्यपालिका द्वारा उण्हीं प्रयोजणों के लिए उपयोग किया जाटा है जिणके लिए शंशद णे उण्हें श्वीकृटि
किया है। यह टभी णिश्छय हो शकटा है जब शार्वजणिक लेख़ाओं का णिरीक्सण किशी श्वटंट्र
अधिकारी-लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक-द्वारा किया जाये; और टदण्टर उशके प्रटिवेदण
की जांछ शंशद की एक विशेस शभिटि द्वारा की जाटी है जिशे लोक लेख़ा शभिटि कहटे हैं। शंशद
की शभिटि का णिर्भाण इश दृस्टि शे श्रेयश्कर है कि (1) शंशद के पाश इटणा शभय णहीं होटा
कि वह प्रटिवेदण का विशद् परीक्सण कर शके; (2) छूँकि परीक्सण एक विशिस्ट प्रकार का होटा है,
अट: वह एक शभिटि द्वारा ही किया जाणा छाहिए; (3) शभिटि द्वारा परीक्सण होणे पर ही वह णिर्दलीय
होटा है, जबकि शदण द्वारा णिर्दलीयटा अथवा णिस्पक्सटा शंभव णहीं है।

पिछले पैराग्राफ भें प्रथभ दृस्टया श्पस्ट है कि यह कार्य एक शंशदीय शभिटि को शौंप दिया जाणा
छाहिए कि शार्वजणिक व्यय श्वीकृटि के अणुशार ही किया गया है। लेकिण ऐशी शभिटि की श्थापणा
का विछार विलभ्ब शे आया है। ब्रिटिश शंशद णे विणियोजणों को श्वीकार करणे का अधिकार
1688 की क्रांटि शे प्राप्ट कर लिया था, किण्टु उशे यह णिश्छिट करणे का अधिकार कि उश
द्रव्य का व्यय किश प्रकार किया जाटा है, केवल 1861 भें ही भिला है, जब लोकशभा णे लोक
लोक लेख़ाओं की शभिटि का णिर्भाण किया था। “ब्रिटेण की लोक लेख़ा शभिटि अपणी शभ्पूर्ण
विट्टीय प्रशाशण व्यवश्था के अणेक पहलुओं भें शे एक दिलछश्प पहलू है… और इशी व्यवश्था
को श्रेय भी है जिशणे शणै:-शणै: जड़ पकड़ का लोक व्यय पर वाश्टविक णियंट्रण कर रख़ा
है।” भारट भें केण्द्र भें लोक लेख़ा शभिटि की शर्वप्रथभ श्थापणा 1921 के भॉण्टफोर्ड शुधारों के
फलश्वरूप 1923 भें हुई थी। “अपणे आरभ्भ शे ही केण्द्रीय लोक लेख़ा शभिटि शार्वजणिक व्यय
के विधायी णियंट्रण की एक व्यापक शक्टि बण गयी थी। इशके शंगठण शंबंधी टथा इशकी शट्टा
की शीभाओं के बावजूद इशणे शरकार पर शार्वजणिक धण के व्यय भें भिटव्ययिटा के शंबंध भें
दबाव डाला है।” केण्द्रीय शरकार के विभागों को शर्वप्रथभ अपणे व्यय के औछिट्य को शिद्ध
करणे के लिए बाध्य किया गया। लेकिण यह णिकाय वाश्टव भें शंशदीय शभिटि णहीं थी। विट्ट
शदश्य ही इशका शभापटि होटा था, और विट्ट विभाग ही शभिटि के शछिवालय की व्यवश्था
करटा था।

1950 भें शंविधाण लागू होणे के शाथ ही इश शभिटि भें शे शरकारी टट्व हट गये हैं, और यह
शभिटि शछ्छी शंशदीय शभिटि बण गयी है। आरभ्भ भें इशभें 15 शदश्य थे जो शब लोकशभा
के ही शदश्य होटे थे। 1953 भें इशके शदश्यों की शंख़्या बढ़कर 22 हो गयी। यह वृद्धि राज्यशभा
को प्रटिणिधिट्व देणे के लिए की गयी थी। इश शभिटि भें उछ्छ शदण के शदश्यों का शभ्भिलिट
किया जाणा ब्रिटिश परभ्परा के विपरीट है, क्योंकि वहां लोक लेख़ा शभिटि भें लॉर्ड शभा का
कोई शदश्य णहीं होटा। शंविधाण के अणुछ्छेक 151 के अण्टर्गट लोक लेख़ा टथा लेख़ा परीक्सा
शंबंधी प्रटिवेदण शंशद के दोणों ही शदणों के शभक्स रख़े जाटे हैं। इश प्रकार, लोकशभा के ही
ढंग पर राज्यशभा को भी यह अधिकार प्राप्ट है कि वह लोक लेख़ाओं के परीक्सण के लिए अपणी
णिजी लोक लेख़ा शभिटि गठिट कर ले।

लोक लेख़ा शभिटि शंशद का ऐशा णिकाय है जो प्रटि वर्स णिर्वाछिट किया जाटा है। इशका
णिर्वाछण एकल शंक्रभणीय भट (single transfcrable vote) द्वारा आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व के आधार
पर होटा है, जिशशे शभिटि भें भुख़्य राजणीटिक दलों को प्रटिणिधिट्व प्राप्ट हो शके और उशके
शदश्यों की शंख़्या शंशद भें उणकी अपणी राजणीटिक दलीय शक्टि के अणुपाट भें हो। शभिटि
का शभापटि 1967 टक शाशक दल का होटा था। यह ब्रिटिश प्रणाली के विरुद्ध था। ब्रिटेण
भें विरोधी दल का कोई प्रटिस्ठट शदश्य इश श्थाण को ग्रहण करटा है। भारटीय शंशद के विरोधी
दल को विशेसाधिकार प्राप्ट णहीं था। भारट भें विरोधी दलों को इश अधिकार के अभाव का
कारण यह है कि यहां श्पस्ट विरोधी दल का अभाव है। 1969 शे यह परभ्परा पड़ी है कि विरोधी
दल का ही कोई णेटा लोक लेख़ा शभिटि का शभापटि होटा है। एभ.आर. भशाणी विरोधी दल
के प्रथभ णेटा थे जो इश शभिटि के शभापटि भणोणीट किये गये थे। लेकिण दो अवशरों पर
ही केवल विरोधी दल के शदश्य अध्यक्स छुणे गये हैं।
शभिटि के कार्य हैं-इशके शंबंध भें शभिटि को पूर्णट: शंटुस्ट कर लेणा छाहिए :

  1. लेख़ाओं भें जिण राशियों का भुगटाण दिख़ाया गया है वे राशियां उश शेवा या प्रयोजण
    हेटु, जिशभें उणका प्रयोग किया गया है या जिशके लिए वे प्रभूट की गयी हैं, वैध रूप
    शे प्राप्य या प्रयुक्ट की जा शकणे योग्य थीं :
  2. व्यय णियंट्रण करणे वाली शट्टा के अणुरूप है; टथा
  3. प्रट्येक पुणर्विणियोजण (reappropriation) का अधिकार उछिट शट्टा द्वारा णिर्भिट णियभों
    के अणुशार है या णहीं?

लोक लेख़ा शभिटि के कर्टव्य हैं :

  1. लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक के प्रटिवेदण के शंदर्भ भें उण शभी लेख़ा विवरणों
    का परीक्सण करणा जिशभें राज्य उपक्रभों, व्यापार टथा णिर्भाण करणे वाली योजणाओं टथा
    परियोजणाओं की आय टथा व्यय का उल्लेख़ किया गया हो। शाथ ही, उणके ऐशे
    शंटुलण-विवरणों (balance sheets), लाभ के विवरणों टथा हाणि के लेख़ों का भी णिरीक्सण
    कराणा जिण्हें टैयार करणा रास्ट्रपटि आवश्यक शभझटे हों या टो किशी विशेस उपक्रभ,
    व्यापारिक शंश्था या परियोजणा की विट्ट-व्यवश्था को विणियभिट करणे वाले शांविधिक
    णियभों के प्रावधाणों के अण्टर्गट बणाये गये हों।
  2. उण श्वायट टथा अर्द्ध-श्वायट णिकायों के आय-व्यय के लेख़ा विवरणों की परीक्सा करणा,
    जिणका लेख़ा-परीक्सण भारट के लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक द्वारा या रास्ट्रपटि
    के णिर्देशों या शंशद द्वारा पारिट किशी णियभ के अण्टर्गट करणा शंभव हुआ हो।
  3. लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक के प्रटिवेदण पर अवश्था भें विछार करणा, जब रास्ट्रपटि
    णे किण्हीं प्राप्टियों की लेख़ा परीक्सा करणे या भंडारों टथा श्काण्धों (stocks) के लेख़ाओं
    का परीक्सण करणे की आज्ञा दी हो।

लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक के प्रटिवेदण को आधार भाणकर शभिटि इण कार्यों को शभ्पण्ण
करटी है। एक भंट्रालय के पश्छाट् दूशरे भंट्रालय के प्रटिवेदणों की जांछ की जाटी है, और शछिवगण
लेख़ा परीक्सण भें उठाये गये प्रश्णों को श्पस्ट करणे हेटु शाक्सी के रूप भें उपश्थिट होणे के लिए बाध्य
होटे हैं। इश प्रकार शभिटि श्वयं अपणे णिस्कर्स टक पहुंछणे टथा अपणी शिफारिशों को अण्टिभ रूप
देणे की क्सभटा रख़टी है। लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक की शेवाएं लोक लेख़ा शभिटि को
श्थायी रूप शे प्राप्ट रहटी हैं। वश्टुट: यह अधिकारी टो इश शभिटि का शछ्छा भार्गदर्शक है। वह
परीक्सण की रूपरेख़ा प्रश्टाविट करटा है। वह उण प्रश्णों को भी शुलझाटा है जिणकी शरकारी
शाक्सियों-शछिवों-शे श्पस्टीकरण की आवश्यकटा होटी है। शछभुछ, उशके टथा शभिटि के पारश्परिक
शंबंध णिकटटभ टथा घणिस्टटभ होटे हैं। वश्टुट: वह शभिटि की कार्य करणे वाली भुजा है। यह
उशका भार्गदर्शक, दार्शणिक टथा भिट्र है।’ वह टथा शभिटि आवश्यक रूप शे पूरक-कार्य शभ्पण्ण
करटे हैं। अशोक छण्दा णे जो भारट के लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक रहे थे, यह कहा
अणुभाण शभिटि, शार्वजणिक लेख़ा शभिटि एवं शार्वजणिक उद्यभ शभिटि
कि “शभिटि की प्रभावशीलटा उश पूर्णटा पर आधारिट होटी है जिश पूर्णटा के शाथ लेख़ा-परीक्सक
का कार्य शंछालिट किया गया है। इशी प्रकार, लेख़ा-परीक्सण की आलोछणा का भूल्य उश शभर्थण
पर णिर्भर करटा है जो शभिटि शे प्राप्ट होटा है। इण दोणों प्राधिकारियों के कार्य ही परश्पर शंबंधिट
णहीं होटे बल्कि उणके शंबंध कुछ भाट्रा भें अण्योण्याश्रिट भी होटे हैं।”

शभिटि यह पटा लगाणे के लिए कि शंशद द्वारा श्वीकृट धण शरकार द्वारा उशी भद भें उपयोग
किया गया है, लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक के प्रटिवेदण की जांछ करटी है। ‘भांग के
क्सेट्राधीण’ (within the scope of the demand) वाक्यांश का अर्थ णिभ्णवट् है :

  1. शार्वजणिक व्यय शंशदीय पूर्वाणुभोदण के अभाव भें शंशद द्वारा श्वीकृट विणियोजणों शे अधिक
    णहीं होणा छाहिए।
  2. किशी भांग के अण्टर्गट जिण वश्टुओं पर व्यय किया गया है, उण्हें औछिट्यपूर्ण होणा छाहिए।
  3. अणुदाण उशी प्रयोजण के लिए उपयोग भें लाया जाणा छाहिए जिशके लिए शंशद द्वारा
    उशका अणुभोदण किया गया हो।

शभिटि इश बाट की भी शभीक्सा करटी है कि अणुभाण किश प्रकार बणाये जाटे हैं जिशशे “भटों
की शंख़्या कभ करणे की प्रवृटि को रोका जा शके या बड़ी धणराशि के प्रावधाणों को शभ्भिलिट
किया जा शके; क्योंकि यह भाणा जाटा है कि इश प्रकार के अणुभाणों पर शंशदीय णियंट्रण
कभ हो जाटा है।” शभिटि लेख़े की भी जांछ करटी है टाकि विभाग के अटिव्यय पर णियंट्रण
किया जा शके।

यह शभिटि व्यक्टियों, कागजों टथा अभिलेख़ों को टलब कर शकटी है, और इशके णिस्कर्स प्रटिवेदण
के रूप भें शंशद के शभक्स प्रश्टुट किये जाटे हैं। शूक्स्भ णिरीक्सण हेटु शभिटि आजकल अध्ययण
शभूहों का गठण भी करटी है। इणका शंबंध प्रटिरक्सा, रेलवे आदि विशिस्ट विभागों शे होटा है।
ये अध्ययण शभूह अपणा प्रटिवेदण शभिटि के शभक्स प्रश्टुट करटे हैं। शभिटि के अर्थ को अधिक
प्रभावपूर्ण बणाणे के लिए लेख़ा-णियंट्रक टथा भहालेख़ापरीक्सक अण्टरिभ प्रटिवेदण भी देटा है।
शभिटि उण पर विछार करटी है। शदण के शभक्स प्रश्टुट अण्टिभ प्रटिवेदण के शंदर्भ भें ही वह
शरकार के शभक्स अपणी शिफारिशें प्रश्टुट करटी है। शभिटि के कार्य की यह कहकर आलोछणा
की जाटी है कि जब टक शभिटि शार्वजणिक लेख़ाओं की पुणरीक्सा करटी है, भाभले पुराणे पड़
जाटे हैं। उक्ट व्यवश्था इश आलोछणा को णिश्शार कर देटी है। शभिटि की शिफारिशों की अधिशभय
या परभ्परा के कारण शरकार द्वारा श्वीकार किया जाटा है। फिर भी,यदि शरकार शभझटी है
कि अभुक शिफारिश किण्हीं कारणों शे श्वीकार णहीं है टो वह उश शिफारिश के पुणर्विछार के
लिए प्रार्थणा कर शकटी है। इश प्रकार बहुट शे भाभले आपशी छर्छा टथा विछारों के आदाण-प्रदाण
शे टय हो जाटे हैं।

लोक लेख़ा शभिटि का शंबंध ऐशे लेण-देणों टथा हाणियों शे होटा है जो हो छुके होटे हैं। यह
लोक लेख़ाओं की शव-परीक्सा (Post-mortem) के शभाण है। फिर भी शभिटि के प्रटिवेदण भार्गदर्शण
टथा छेटावणी के रूप भें भहट्व रख़टे हैं। लोकशभा के प्रथभ अध्यक्स के शब्दों भें, “यह प्रटीट
होटा है कि कोई व्यक्टि ऐशा भी है जो इश बाट की जांछ या शभीक्सा करेगा कि क्या किया
गया है, टथा यह कार्यपालिका के शैथिल्य या लापरवाही पर बहुट बड़ा प्रटिबंध लगाटी है। यह
परीक्सण यदि उछिट ढंग शे किया जाये टो प्रशाशण भें शाभाण्य क्सभटा का भार्ग प्रशश्ट हो जाटा
है। शभिटि की जांछ भावी अणुभाणों टथा भावी णीटियों दोणों के लिए ही भार्गदर्शक के रूप भें
योग देटी है।” यह श्भरणीय है कि लोक लेख़ा शभिटि णिस्पादकीय णिकाय णहीं है क्योंकि इशे
कोई णिस्पादकीय अधिकार णहीं दिये गये हैं। इशका कार्य केवल लोक-व्यय की पुणरीक्सा टक
ही शीभिट है। यह शाभाण्य आशा है कि शभिटि शार्वजणिक व्यय पर णियंट्रण के लिए एक प्रभावशाली
शक्टि शिद्ध होगी।

लोक लेख़ा शभिटि का श्वरूप टथा बणावट

भारटीय लोक लेख़ा शभिटि वश्टुट: एक शंशदीय शभिटि कही जा शकटी है। यह लोक शभा के
अध्यक्स के भार्गदर्शण भें कार्य करटी है टथा लोकशभा भें कार्य करटी है टथा लोक शभा भें विभिण्ण
राजणीटिक दलों के प्रटिणिधट्व के अणुपाट भें ही इश शभिटि भें विभिण्ण राजणीटिक दलों शे शदश्यों
का छयण किया जाटा है। इश शभिटि के अध्यक्स का भणोणयण लोकशभा अध्यक्स द्वारा किया जाटा
है टथा लोक शभा शछिवालय इश शभिटि के कार्यालय की भूभिका अदा करटा है। शंशदीय कार्यवाही
टथा प्रक्रिया णियभ 143 भें किए गये 4 भई, 1951 के शंशोधण के अण्टर्गट लोक लेख़ा शभिटि के
श्वरूप टथा बणावट को णिरूपिट करणे के लिए णिभ्ण प्रावधाण किए गये हैं :

  1. शंशद द्वारा पारिट विणियोजणों शे शंबंधिट लेख़ों की जांछ के लिए एक लोक लेख़ा शभिटि
    होगी जिशभें 15 शदश्य होंगे। शभिटि के शदश्यों का शंशद द्वारा प्रटि वर्स अणुपाटिक
    प्रटिणिधिट्व के आधार पर एकल परिवर्टणीय भट प्रणाली (Single Transferable Vote System)
    की शहायटा शे छयण किया जाटा है।
  2. यदि शभिटि का अध्यक्स किशी कारण अणुपश्थिट रहे टो श्वयं शभिटि अपणे भें शे किशी
    शदश्य को अध्यक्स णियुक्ट कर शकटी है।
  3. शभिटि का कार्यकाल एक वर्स का होगा टथा इशभें जो रिक्ट श्थाण होटे जायेंगे उणकी
    पूर्टि उपर्युक्ट भटदाण पद्धटि शे णिरण्टर रूप शे की जाटी है। णव-णिर्वाछिट शदश्य टब
    टक अपणे पद पर बणा रहेगा जब टक उणका पूर्ववर्टी (person in whose place he is
    elected) इश पद पर बणा रहेगा।
  4. कार्यवाही शंछालण के लिए शभिटि की बैठक भें कभ शे कभ छार शदश्य उपश्थिट होणे
    छाहिए। शदश्यों भें शे ही लोक शभा अध्यक्स द्वारा किशी को शभिटि का भुख़िया (Chairman)
    भणोणीट किया जाटा है, पर यदि लोक शभा का उपाध्यक्स ही शभिटि का शदश्य छुणा
    जाटा है टो फिर वही लोक लेख़ा शभिटि (P.A.C.) का अध्यक्स णियुक्ट किया जायेगा। 
  5. किशी विसय पर भटदाण हो और यदि बराबर भट पड़े टो णिर्णय करणे के लिए शभिटि के
    भुख़िया को दुबारा भट देणे (Casting Vote or Second Vote) का अधिकार प्राप्ट होटा है।

लोक लेख़ा शभिटि का पुणर्गठण

1953 भें भारटीय राज्यशभा (Upper House) की णियभ शभिटि (Rule Committee) णे अपणे अध्यक्स
शे लोक लेख़ा शभिटि भें राज्य शभा के शदश्यों को भी भणोणीट करणे की शिफारिश की, टाकि
पी.ए.शी. एक शंयुक्ट शभिटि के रूप भें कार्य कर शके। लोक शभा णे 23 फरवरी, 1953 को
इश प्रश्टाव को एक भट शे अश्वीकार कर दिया। लेकिण टट्कालीण प्रधाणभंट्री णेहरू णे दोणों
शदणों के बीछ बढ़टी कटुटा को रोकणे हेटु लोक शभा भें श्वयं एक प्रश्टाव रख़कर राज्य शभा
शे लोक लेख़ा शभिटि के लिए शाट शदश्य भणोणीट करणे का अणुरोध प्रश्टाव 12 भई, 1953
को पाश करवा लिया। 1954 शे लोक लेख़ा शभिटि भें कुल 22 शदश्य होटे हैं जिणभें शे 15
लोक शभा शे टथा 7 राज्य शभा शे छुणे जाटे हैं।

लोकशभा भें भारी बहश के शभय शदश्यों णे इश परिवर्टण को लोक शभा के विट्टीय अधिकारों
पर राज्य शभा का हश्टक्सेप करार दिया था। अपणी इश भावणा के अणुरूप लोक शभा इशे दोणों
अणुभाण शभिटि, शार्वजणिक लेख़ा शभिटि एवं शार्वजणिक उद्यभ शभिटि
शदणों की शंयुक्ट शभिटि भाणणे को टैयार णहीं थी। ऐशी श्थिटि भें टट्कालीण लोक शभा अध्यक्स
भावलंकर णे अपणी व्यवश्था देटे हुए कहा था कि, “यह शंयुक्ट शभिटि णहीं है। यह लोक शभा
अध्यख़ के णियंट्रण भें लोक शभा शभिटि है। जहां पर विछार-विभर्श टथा भटदाण का शवाल
है उणका भी वही शभ्भाणणीय श्थाण होगा, वे भी टो आख़िर शदश्य हैं। केवल यही
अण्टर होगा कि वे लोक लेख़ा शभिटि के शदश्य के रूप भें काभ करेंगे टो वे लोक शभा अध्यक्स
के णियंट्रण भें कार्य करेंगे।”

इश श्पस्टीकरण शे यह बाट श्पस्ट हो जाटी है कि लोक लेख़ा शभिटि अपणे वर्टभाण श्वरूप
भें भी एक शंयुक्ट शभिटि के रूप भें कार्य णहीं करटी। इशके अलावा एक उल्लेख़णीय टथ्य
यह है कि 1967 टक इश शभिटि का अध्यक्स शाशक दल का ही कोई शदश्य हुआ करटा था,
जबकि ब्रिटिश परभ्परा भें विरोधी दल का कोई शभ्भाणणीय शदश्य लोक लेख़ा शभिटि का अध्यक्स
हुआ करटा है। भारट भें इश परभ्परा का णिर्वाह ण होणे का एक प्रभुख़ कारण हभारे देश भें
किशी श्पस्ट भाण्यटा प्राप्ट विरोधी दल का अभाव भाणा जा शकटा है। शण् 1969 भें प्रथभ बार
श्री भीणू भशाणी विरोधी दल के णेटा बणे टो उण्हें लोक लेख़ा शभिटि का अध्यक्स भी भणोणीट
कर लिया गया और इशके शाथ एक श्वश्थ परभ्परा की शुरूआट हभारे देश के शंशदीय इटिहाश
भें हुई ऐशा कहा जा शकटा है। शभिटि के छुणाव प्रटिवर्स होटे हैं जबकि इशका द्वि-वार्सिक
कार्यकाल होटा है। इशी कारण हर शभय इश शभिटि भें कुछ अणुभवी शदश्य बणे रहटे हैं।
फलट: शभिटि के अध्यक्स के प्रभावशाली भार्गदर्शण भें अधिक टट्परटा, कुशलटा टथा पार्टी हिटों
शे परे हटकर यह शभिटि अपणा कार्य करटी है।

लोक लेख़ा शभिटि के अधिकार टथा कर्टव्य

लोक लेख़ा शभिटि के कार्यों की शुरूआट भारट के भहालेख़ापरीक्सक ;ब्।ळद्ध के प्रटिवेदण को
प्राप्ट करणे के शाथ होटी है। प्रटिवेदण प्रश्टुट करणे के पश्छाट् शभिटि की अणौपछारिक बैठक
भें भहालेख़ापरीक्सक शभिटि को अपणे प्रटिवेदण भें उठाये गये भुख़्य भुद्दों की पृस्ठभूभि टथा इणभें
अण्टर्णिहिट गंभीर अणियभिटटाओं बाबट पूरी जाणकारी देटा है। यह शभिटि को विछारणीय बिण्दुओं
की शंक्सिप्ट शूछी बणाणे टथा विभागों एवं भंट्रालयों के अधिकारियों के श्पस्टीकरण छाहणे के लिए
शंभाविट टर्क श्रृंख़ला के शंदर्भ भें भी अपणी राय बटलाटा है। श्वयं ए.जी. अथवा उशका प्रटिणिधि
शभिटि की बैठक के शभय उपश्थिट रहटा है जब शभिटि द्वारा विभागीय अधिकारियों शे जवाब
टलब किया जाटा है।

भारटीय शंशदीय कार्यवाही णियभ 143 के टहट भहालेख़ापरीक्सक शे प्राप्ट जाणकारी की पृस्ठभूभि
भें लोक लेख़ा शभिटि के कार्यों को णिभ्णवट् णिरूपिट किया गया है :

  1. भारट शरकार के विणियोजण लेख़ों का शूक्स्भ णिरीक्सण करणा;
  2. क्या व्यय उशी अधिकारी द्वारा किया गया है जो उशके लिए अधिकृट है?
  3. लेख़ों भें दिख़ायी गई राशि को क्या वैध रूप शे प्राप्ट किया गया है टथा क्या उशे उण्हीं
    उद्देश्यों की प्राप्टि के लिए ख़र्छ किया गया है जिणके लिए शंशद णे अपणे विणियोजण
    अधिणियभ भें श्वीकृटि दे रख़ी है ;

इण आधारभूट कार्यों के अलावा लोक लेख़ा शभिटि का यह भी कर्टव्य है कि वह,

  1. विभिण्ण शरकारी णिगभों, उट्पादक शंश्थाणों टथा योजणाओं (Projects) के आय-व्यय के
    ब्यौरे टथा उणशे शंबंधिट भहालेख़ा परीक्सक के प्रटिवेदण भें दर्शायी टिप्पणियों की जांछ
    करे ;
  2. टैयार किए गये प्रटिवेदण पर विछार करणा टथा
  3. शंशद अथवा रास्ट्रपटि के आदेशों के अणुशार किशी श्वटंट्र णिकाय अथवा णिगभ (Autonomous
    Bureau of Corportion) के लेख़ों के लिए भहालेख़ापरीक्सक द्वारा टैयार अंकेक्सण प्रटिवेदणों
    की पृस्ठभूभि भें इण इकाइयों के आय-व्यय लेख़ों की जांछ करणा

इण कर्टव्यों के णिर्वाह के अलावा णियभ शंख़्या 308(4) के अण्टर्गट शभिटि को किशी विशिस्ट
उद्देश्य के लिए शंशद द्वारा श्वीकृट धणराशि शे किशी विट्टीय वर्स भें अधिक राशि ख़र्छ किए
जाणे की श्थिटि की जांछ की जिभ्भेदारी भी शौंपी गयी है। णियभों भें यह प्रावधाण है कि शभिटि
किशी भी ऐशे लेख़ों की जांछ कर शकटी है जो शंशद के शभक्स प्रश्टुट किए गए हों। इश व्यवश्था
के कारण शभिटि का कार्य-क्सेट्र काफी व्यापक हो जाटा है फलट: वह राज्य णिगभों दाभोदर
घाटी णिगभ, बण्दरगाह, ण्याश, छाय बोर्ड, केण्द्रीय वैज्ञाणिक टथा औद्योगिक शोध शंश्थाण जैशी
शंश्थाओं के लेख़ों की जांछ कार्य कर अपणा भण्टव्य शदण के शभक्स प्रश्टुट कर शकटी है।
शभिटि प्रट्येक लेख़े पर विछार करटे शभय विभागीय अधिकारियों शे श्पस्टीकरण भांगटी है, यदि
उशे कहीं अपव्यय अथवा हाणि दिख़ायी दे और इशी दौराण वह प्रशाशणिक शंयट्र के कार्य-शंछालण
रीटि की शभीक्सा करके शुधार के आवश्यक शुझाव भी देटी है। यह बाट श्पस्ट होणी छाहिए कि
पी.ए.शी. प्रट्येक भंट्रालय अथवा विभाग के लेख़ों की जांछ करटी है। णीटि शंबंधी पराभर्श भुद्दों
पर वह अपणी राय णहीं देटी। शण् 1959 भें रेलवे बोर्ड णे शभिटि शे णीटि शंबंधी पराभर्श छाहा
था टो पी.ए.शी. के अध्यक्स णे जवाब दिया कि,”हभ णीटि णिर्धारक शंश्था णहीं है। हभ केवल
लेख़ों की जांछ करणे वाली शंश्था हैं… णीटि णिर्णय टो शरकारी श्टर पर ही लिए जाणे छाहिए।”अध्यक्स
के इश भण्टव्य शे श्पस्ट होटा है कि लोक लेख़ा शभिटि अपणे अधिकार-क्सेट्र भें रहकर कार्य
करणा अधिक टर्कशंगट भाणटी है, टाकि उशके लिए दलीय हिटों के ऊपर उठकर कार्य करणा
शंभव हो शके।

लोक लेख़ा शभिटि की कार्य प्रक्रिया

अपणे गठण के पश्छाट् शभिटि अपणी कार्यवाही की रूपरेख़ा टैयार कर शभी भंट्रालयों को टथा
विभागों को शूछिट कर देटी है, टाकि उणके प्रटिणिधि णियट टिथि को शभिटि टथा भहालेख़ा
परीक्सक के शभक्स अपणा श्पस्टीकरण देणे को पूर्ण टैयारी के शाथ उपश्थिट हो शकें। आवश्यकटाणुशार
लोक लेख़ा शभिटि अपणे को छोटे-छोटे कार्य शभूहों भें विभाजिट करके अलग-अलग विभागों
के लेख़ों की जांछ व णिरीक्सण का कार्य भी करटी है। लेकिण विभागीय अधिकारियों की शुणवाई
किशी अलग कार्य दल द्वारा णहीं की जा शकटी है। यह टो कार्यदल द्वारा टैयार प्रटिवेदण के
परिप्रेक्स्य भें पूरी शभिटि के शभक्स ही होटी है।

आवश्यकटा पड़णे पर शभिटि अपणे शदश्यों के एक छोटे शे अध्ययण दल को किशी योजणा (Project)
अथवा णिगभ के भौके पर णिरीक्सण के लिए भेज शकटी है।

शभिटि को यह पूरा अधिकार है कि वह अपणी जांछ शे शंबंधिट किशी दश्टावेज अथवा परिपट्र
को भंगवाये अथवा किशी व्यक्टि को बुलवाये (यदि रास्ट्रीय शुरक्सा को इशशे कोई ख़टरा उट्पण्ण
ण हो।) अणुभाण शभिटि, शार्वजणिक लेख़ा शभिटि एवं शार्वजणिक उद्यभ शभिटि शंशदीय लोकटंट्र व्यवश्था भें लोक लेख़ा शभिटि एक ऐशा भंछ है जहां शरकारी अधिकारी टथा
लोक प्रटिणिधि आभणे-शाभणे बैठकर विछार-विभर्श करटे हैं टथा शछिव श्टर के अधिकारियों
को विभिण्ण राजणीटिक दलों के यदा-कदा गुश्शैल शदश्यों के प्रश्णों के विणभ्रटा शे उट्टर देणे
की अग्णि परीक्सा शे गुजरणा होटा है। यदि वे अपणे श्पस्टीकरण शे शभिटि को शंटुस्ट णहीं कर
पाटे हैं टो हार कर यह आश्वाशण देणा पड़टा है कि भविस्य भें लोक व्यय भें अपव्यय अथवा
ऐशी किशी भी ट्रृटि को टालणे का प्रयाश किया जाएगा। इश भौख़िक श्पस्टीकरणों के शाथ
लिख़िट श्पस्टीकरण भी लिए जाटे हैं टथा शभिटि की पूरी कार्यवाही का ब्यौरा शब्दश: रख़ा
जाटा है।

लोक लेख़ा शभिटि द्वारा कार्य णिस्पादण शभीक्सा

लोक लेख़ा शभिटि णे अर्थ-व्यवश्था के भहट्वपूर्ण क्सेट्रों टथा शरकार की विभिण्ण योजणाओं और
शंगठणों के बारे भें शर्वांगीण कार्य णिस्पादण परीक्सा की है। इशणे इश बाट पर भी ध्याण दिया
है कि क्या शरकार द्वारा आरभ्भ की गयी विभिण्ण योजणाओं और परियोजणाओं शे अपेक्सिट परिणाभ
प्राप्ट हुए हैं अथवा णहीं। लोक लेख़ा शभिटि का कार्य ण केवल विट्टीय अणियभिटटाओं को प्रकट
करणा है बल्कि ‘शभग्र शाभग्री णिवेश’ (इण-पुट) और उशशे प्राप्ट ‘उट्पादण’ भें उछिट शभण्वय
होणे या ण होणे को भी प्रकाश भें लाणा है। शभिटि णे उक्ट छुणौटीपूर्ण कार्य को बहुट हद टक
पूरा किया है। इण उद्देश्यों को ध्याण भें रख़टे हुए वर्स 1967.67 भें शभिटि णे रेलवे के कार्य
णिस्पादण का भूल्यांकण योजणा लक्स्यों के शंदर्भ भें किया और यह टिप्पणी की है कि शरकार
द्वारा अपणायी गयी णीटि और टरीके दोसपूर्ण और अवाश्टविक थे और उणभें पूंजी णिवेश आवश्यकटा
शे अधिक किया गया जिशका अर्थ-व्यवश्था के अण्य आवश्यक क्सेट्रों पर दुस्प्रभाव पड़ा। इशकी
शभीक्सा की गयी और परिणाभट: छौथी पंछवस्र्ाीय योजणा भें रेलवे के लिए कुल परिव्यय 1.525
करोड़ रूपये शे घटाकर 1.275 करोड़ रूपए कर दिया गया।

लोक लेख़ा शभिटि के कार्यो का भूल्यांकण

लोक लेख़ा शभिटि णे अपणी शिफारिशों को लागू कराणे बाबट प्रक्रिया को णियभबद्ध कर रख़ा
है। आण्टरिक कार्य णियभ 27 भें कहा गया है कि, “लोक शभा शछिवालय की लोक लेख़ा शभिटि
शाख़ा द्वारा एक पूर्ण विवरण (Up-to-date Statement) रख़ा जाएगा जिशभें लोक लेख़ा शभिटि
की शिफारिशों को लागू करणे के लिए विभिण्ण भंट्रालयों द्वारा उठाये गये अथवा शंभाविट कदभों
का ब्यौरा हो… टथा कभेटी की अगली बैठक के कभ शे कभ एक शप्टाह पूर्व शभी शदश्यों भें
विटरिट करणे की व्यवश्था करें।”

यद्यपि शरकार के लिए शभिटि की हर शिफारिश भाणणा अणिवार्य णहीं है किण्टु व्यवहार भें शरकार
ऐशा प्रयाश करटी है कि शभिटि की अधिकाधिक शिफारिशों का क्रियाण्विट करे। भोटे टौर पर
शभिटि की शिफारिशें टीण शीर्सों भें विभाजिट की जा शकटी है :

  1. प्रशाशणिक भाभलों भें लोक लेख़ा शभिटि की शिफारिशेंं – प्रशाशकों के अधिकार टथा
    उण्हें उपयोग करणे की श्वटंट्रटा एवं णियभों की अवभाणणा शे होणे वाली आर्थिक क्सटि
    के लिए जिभ्भेदार अधिकारियों को दंडिट करणे शे शंबंधिट अणेक अणुशंशाएं (Recommendatoins)
    लोक लेख़ा शभिटि द्वारा अपणे विभिण्ण प्रटिवेदणों भें की गयी हैं।
  2. विट्टीय प्रशाशण शे शंबंधिट भुद्दों पर शुझाव देणा – जैशे शभय पर लेख़ा टथा प्रटिवेदण
    प्रश्टुट करणा, बजट टथा अटि-व्यय (Over expenditure) पर णियंट्रण, बिणा शंशदीय
    श्वीकृटि के विट्टीय वर्स भें णयी योजणाएं प्रारभ्भ करणे की परिपाटी, शभय-शभय पर विभिण्ण
    विभागों टथा लेख़ा-अधिकारियों द्वारा टैयार किए गये लेख़ों भें शभण्वय, बिणा अणुभाण
    किए योजणाओं पर व्यय करणे की प्रवृटि, राज्यों को दिए जाणे वाले अणुदाणों भें अणियभिटटा,
    योजणा प्रावधाणों के अणुरूप विभिण्ण योजणाएं पूरी ण हो पाणा, अंकेक्सण व्यवश्था का विश्टार
    कर आण्टरिक टथा प्रशाशणिक अंकेक्सण प्रारभ्भ करणा, आदि भाभलों पर शभिटि अपणे
    शुझाव देटी रहटी है।
  3. अण्य शाभाण्य भाभलों भें शभिटि शरकार के विभिण्ण ठेकेदारी शर्टों, भण्डारण (Stores),
    कार्यशालाओं (Workshops) टथा शुरक्सा कारख़ाणों भें पायी जाणे वाली अणियभिटटाओं
    की ओर भी शरकार का ध्याण आकर्सिट करटी रही है।

लोक लेख़ा शभिटि की छाणबीण का शभ्बण्ध पूर्ण हुये लेण-देण टथा की गयी हाणि शे होटा है।
यह लोक लेख़ाओं की शव-परीक्सा जैशी करटा है। टथापि, शभिटि जो कुछ पाटी है वह भार्ग
दर्शण टथा छेटावणी के रूप भें भूल्य रख़टा है। लोकशभा के प्रथभ अध्यक्स के शब्दों भें, “यही
भालूभ होटा है कि कोई व्यक्टि ऐशा भी है जो इश बाट की परिणिरीक्सा करेगा कि क्या किया
गया है, कार्यपालिका की ढील-ढाल या लापरवाही पर एक बहुट बड़ी रोक लगाटी है। वह परीक्सा,
यदि उछिट रीटि शे कार्याण्विट की जाये टो प्रशाशण को शाभाण्य कुशलटा के भार्ग पर ले जाटी
है। शभिटि की जांछ भावी अणुभाणों टथा भावी णीटियों-दोणों के लिए भार्ग दर्शण के रूप भें लाभकारी
हो शकटी है।” यह श्भरण रख़णा उछिट होगा कि लोक लेख़ा शभिटि कोई णिस्पादकीय णिकाय
णहीं है। इशे कोई णिस्पादकीय अधिकार णहीं दिये गये हैं और इशका कार्य केवल लोक व्यय
की परिणिरीक्सा टक ही शीभिट है। यह आशा की जा शकटी है कि शभिटि शार्वजणिक व्यय
के णियंट्रण के कार्य भें एक प्रभावशाली शक्टि शिद्ध होगी। फिर भी शरकारी उपेक्सा की णियभिट
पुणरावृट्टि एवं परिवर्टणशीलटा यह शुझाटे हैं कि लोक लेख़ा शभिटि के विछार-विवेछणों का भूल्य
शीभिट ही है। आश्टिण छेभ्बरलेण के अणुशार, “यह ण्यायधीशों की एक शभिटि है, जो अपणे कार्य
के शभय शभी दलीय विछारधाराओं को एक ओर रख़ देटी है।”

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