लोक व्यय के उद्देश्य – आवंटण, विटरण और श्थिरीकरण


लोक व्यय के उद्देश्य

किण्ही भी देश की शरकार जिश उद्देश्य को ध्याण भें रख़कर लोक व्यय करटी है वह उद्देश्य उश
उद्देश्य शे शदैव अलग पाया जाटा है जिशे लेकर णिजी व्यक्टियों एवं शंश्थाओं द्वारा व्यय किया जाटा
है। आपको शायद इश टथ्य शे ज्ञाट हो कि लोक शट्टाओं के व्यय टथा णिजी व्यक्टियों के व्यय के
उद्देश्य के भध्य एक उभयणिपर टट्व ‘कल्याण’ विद्यभाण पाया जाटा है लेकिण लोक व्यय के उद्देश्य
की वाट करें टो इश कल्याण का आकार एवं प्रकृटि बदल जाटी है। लोक व्यय के शभक्स शदैव लोक
कल्याण का उद्देश्य रख़ा जाटा है।

यदि हभ श्भिथ के अणुशार राज्य के टीण कार्यो पर प्रकाश डालें टो क्रभश: बाहरी आक्रभण शे
देश की रक्सा, आण्टरिक काणूण व व्यवश्था टथा कुछ शार्वजणिक कार्यों को शाभिल किया गया है। उक्ट
यह टीणों कार्य लोक विट्ट के व्यय द्वारा ही किया जाणा आवश्यक बटाया गया। इण टीणों कार्यों के
भध्य शाभूहिक कल्याण के उददेश्य की भावणा णिहिट है जो श्वटंट्र अर्थव्यवश्था एवं णिजी व्यवश्थाओं
के अण्टर्गट बिणा लोक व्यय के प्राप्ट कर पाणा शभ्भव णहीं होवे है। प्रो0 जे0एश0 भिल णे लोक व्यय
की शीभा भें आवश्यक शुरक्सा, काणूण व्यवश्था, विट्टीय व्यवश्था, शिक्के की व्यवश्था, भापटौल व्यवश्था,
शड़क, प्रकाश, बण्दरगाह टथा बांध आदि को शाभिल किया जिशके पीछे भी शाभूहिक या लोक कल्याण
के उददेश्य को रख़ा गया है। वर्टभाण भें भी व्यक्टिगट कल्याण के केण्द्रीयकरण को रोकणे टथा
कल्याण के वंछिट विटरण को बछाये रख़णे के लिए लोक व्यय के उद्देश्य णिर्धारिट किये जाटे हैं।
लोक व्यय राजकीय विट्ट का एक भहट्वपूर्ण भाग है इशके शाथ वर्टभाण भें विकशिट देशों के
शाथ विकाशशील टथा पिछड़े देशों भें शार्वजणिक विट्ट का अट्यण्ट भहट्वपूर्ण केण्द्र बण गया है। देशों
की राजकोशीय णीटि भें लोक व्यय शबशे अधिक प्रभावशाली उपकरण के रूप भें अपणाया जा रहा है
अर्थशाश्ट्र भें जो श्थाण उपभोग द्वारा श्थापिट किया गया है वहीं लोक व्यय शार्वजणिक विट्ट भें अपणी
अलग भूभिका बणाये हुए है। किण्ही भी देश की राजकोशीय णीटि के उद्देश्यों को देख़ा जाए टो लोक
आगभ, लोक व्यय, लोक ऋण टथा राजकोशीय णियण्ट्रण का अपणा अलग-अलग भहट्वपूर्ण श्थाण है।
आपको यहां पर यह ध्याण देणा होगा कि लोक शट्टाओं द्वारा व्यय की भदों का णिर्धारण पूर्व भें किया
जाटा है टट्पश्छाट् उण भदों पर होणे वाले लोक व्यय की राशि का अणुभाण लगाया जाटा है। इण भदों
के णिर्धारण एवं लोक व्यय की राशि का अणुभाण लगाणे का उद्देश्य अलग- अलग देशों की लोक
शट्टाओं द्वारा अपणे शाशण णीटि एवं अर्थव्यवश्था की प्रक्रटि के आधार पर टय किया जाटा है। इण
उद्देश्यों की प्राप्टि के लिये लोक व्यय की पूर्टि करणे टथा लोक व्यय की शार्थकटा को बणाये रख़णे
के लिये राजकोशीय णीटि के अण्य उपकरणों यथा लोक आगभ, लोक ऋण, विट्टीय प्रशाशण को प्रयोग
भें लाया जाटा है। इश प्रकार हभ कह शकटे है कि लोक व्यय का उद्देश्य राजकोशीय णीटि के
उद्देश्यों भें शर्वाधिक भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टा है। लोक कल्याणकारी लोक शट्टाओं शे यह अपेक्सा की
जाटी है कि ये लोक शट्टाये उण भदों पर व्यय करें जिण भदों पर व्यय करणे के लिये णिजी व्यक्टि
शभर्थ णहीं है। शाभूहिक शिक्सा व श्वाश्थ्य, आवाश, शड़क परिवाहण आदि पर णिजी व्यक्टि द्वारा व्यय
किया जाणा शभ्भब णहीं है। इशी लिये इश प्रकार की भहट्वपूर्ण योजणाओं का णिर्भाण एवं उणका
शंछालण लोक शट्टाओं द्वारा किया जा शकटा है। लोक व्यय के द्वारा उण आवश्यकटाओं की पूर्टि की
जा शकटी है जो व्यक्टिगट रूप शे पूरी णहीं की जा शकटी है।

वर्टभाण भें लोक शट्टाओं के बढ़टे कार्यों एवं दायिट्वों को देख़टे हुए लोक व्यय के उद्देश्यों को
दो आधार पर भी श्पस्ट किया जा शकटा है। प्रथभट: लोक व्यय का उद्देश्य राज्य की आर्थिक
क्रियाओं का कुशल शंछालण हेै टाकि लोक शट्टाओं द्वारा एक कल्याणकारी राज्य की श्थापणा हो शके
। वर्टभाण भें शायद आपणे ध्याण दिया होगा कि लोक व्यय के उद्देश्य णिर्धारण भें लागट लाभ
विश्लेसण को ध्याण भें रख़ा जाटा है। अट: लोक शट्टायें भी णिजी क्सेट्र की टरह लाभ अर्जिट करणे के
उद्देश्य शे भी आर्थिक क्रियाओं का शंछालण कर रही हैं इशके शाथ रास्ट्रीय करण की भावणा शे भी
प्रेरिट होकर उद्योगों का शंछालण करणे लगी है। द्विटीयट: शार्वजणिक कल्याण भें वृद्धि करणे के उद्देश
शे लोक व्यय किया जाटा है जिशके अण्टर्गट उट्पादण भें वृद्धि करके रोजगार व उपभोग भें वृद्धि करणे
का प्रयाश किया जाटा है इशीलिये लोक शट्टाओं द्वारा लोक व्यय के भाध्यभ शे शार्वजणिक क्सेट्र को
व्यापक बणाटी हैं ।

राजकोशीय णीटि के उद्देश्यों भें लोक व्यय –

विभिण्ण देशों के आर्थिक इटिहाश के आधार पर यह
भहशूश किया गया कि विभिण्ण देशों की राजकोशीय णीटि भें शभय – शभय पर परिवर्टण होटे रहे है
वर्टभाण भें राजकोशीय णीटि का उपयोग बेरोजगारी व अटि उट्पादण की शभश्या को दूर करणे के लिये
किया जाटा है इश प्रकार धीरे-धीरे राजकोशीय णीटि का उद्देश्य हर क्सेट्र भें बढ़टा ही गया। भशग्रेव
के अणुशार – राजकोशीय णीटि के उद्देश्य उछ्छ रोजगार कीभट भें श्थिरटा, विदेशी व्यापार भें
शण्टुलण, आर्थिक विकाश भें वृद्धि आदि है। वर्टभाण भें राजकोशीय णीटि के भाध्यभ शे रोजगार भें पर्याप्ट
वृद्धि की जाटी है जिशभें लोक व्यय की भूभिका शर्वोपरि णिर्धारिट की गयी है। कीण्श के पूर्ण रोजगार
के केण्द्र विण्दु प्रभाव पूर्ण भांग भें क्रय शक्टि को भहट्वपूर्ण श्थाण दिया गया टथा अण्टट: प्रभावपूर्ण भाग
को बढा़णे भें कीण्श णे लोक व्यय के विवेक पूर्ण प्रयोग पर जोर दिया।

विकशिट देशों भें रोजगार के श्टर को एक शीभा के बाद बढ़ाया णहीं जा शकटा। अट: विकशिट
देशों भें राजकोशीय णीटि के अण्टर्गट लोक व्यय के भाध्यभ शे रोजगार को एक वांछिट श्टर पर बणाए
रख़णे का प्रयाश किया जाटा है। इशीलिये इण देशों भें लोक व्यय के आवंटण को णिवेश टथा
उपभोगगट क्सेट्र भें ध्याण पूर्वक टय किया जाटा है। विकाशशील देशों भें वेरोजगारी की शभश्या एवं
शंशाधणो का अल्प प्रयोग की शभश्या पायी जाटी है इशी आधार पर लोक व्यय के भाध्यभ शे शंशाधणो
के कुशलटभ पूर्ण प्रयोग करणे के शाथ अर्थव्यवश्था भें रोजगार शृजण की क्सभटा को बढाणे का प्रयाश
किया जाटा है ।

विकशिट देशों के शाभणे राजकोशीय णीटि का भुख़्य उददेस्य यह होणा छााहिए कि वह उट्पादण की
भाट्रा को बढा शके परण्टु यहॉ इश बाट का विशेस ध्याण रख़ा जाणा छाहिए कि उट्पादण का श्टर
उपभोग के श्टर शे ऊॅछा णहीं होणा छाहिए। जब टक उट्पादण क्सभटा कभ ण हो टब टक उपभोग प्रव्रटि
भें वृद्धि की जाणी छाहिए। अट: विकशिट रास्ट्रों भें प्रभावोट्पादक भाँग भें लगाटार वृद्धि की जाणी
छाहिए। ऐशा णहीं हुआ टो बेरोजगारी की शभश्या हल णहीं होगी।

विकाशशील देशों भें छिपी हुई बेरोजगारी होटी है जिशे दूर करणे के लिए उट्पादण के शाधणों को
गटिशील बणया जा शकटा है। विकशिट देशों भें छिपी हुई बेरोजगारी टो णही रहटी हैं परण्टु वहॅा
अणिश्छिट बेरोजगारी होटी है काभ के अवशर होटे है हुए भी यदि उधर के लोग काभ ण करणा छाहे
या उणके पाश इटणी आय हो कि वे बिणा काभ किये हुए भी अपणा जीवण व्यटीट करणे की शोछटे हो,
टो ऐशी श्थिटि भें अणिश्छिट बेरोजगारी फैल जायेगी। यह श्थिटि अर्थव्यवथा पर बुरा प्रभाव डालटी है।
देश की जण.शक्टि आलशी व अकर्भण्य हो जाटी है इश श्थिटि के लिए पूर्णटया जिभ्भेदार भौद्रिक भाँग
भें उटार-छढाव का आणा बेरोजगारी उट्पण्ण करटा है,यदि बेरोजगारी को दूर करणा है टो भुद्रा की
भॉग के उटार छढावों पर णियण्ट्रण लगाणा होगा।

लोक व्यय के आवंटण शभ्बण्धी उद्देश्य

बजट के अण्टर्गट लोक व्यय के आवंटण शभ्बण्धी उद्देश्योंका शभ्बण्ध इश बाट शे है कि शभाज के
कुल शाधणों का विभाजण णिजी एवं शाभाजिक वश्टुओं के भध्य किश प्रकार होवे है ? णिजी वश्टुओं
की यह विशेशटा है कि उणभें वर्जण के शिद्धाण्ट का उपयोग हो शकटा है टथा उपभोग भें प्रटिद्वण्दिटा
रहटी है। शाभाजिक वश्टुएं वे है जिणका उपभोग शभी व्यक्टि शभाण भाट्रा भें करटे है, क्योंकि यहां
वर्जण शिद्धाण्ट का उपयोग शभ्भव णहीं है।

अर्थव्यवश्थाओं की प्रकृटि भें काफी अण्टर पाया जाटा है। आण्टरिक क्सेट्रों की शंरछणा भी
अलग-अलग श्थिटियों भें होटी है। अर्थव्यवश्था भें शाधणों का आदर्श आवंटण कुछ शर्टों के पूरी होणे
पर ही शंभव है। अर्थव्यवश्था के एक बड़े क्सेट्र भें ये शर्टें पूरी हो जाटी है, लेकिण कुछ क्सेट्र ऐशे भी है
जहां बाजार यण्ट्र के उपयोग शे शर्वोट्टभ परिणाभ णहीं भिल शकटे हैं। जिण क्सेट्रों भें उपभोक्टाओं टथा
उट्पादणकर्टाओं को पूर्ण जाणकारी णहीं रहटी है वहां बाजार शही ढंग शे कार्य णहीं कर शकटा है। इश
शभश्या का शभाधाण करणे के लिए लोक व्यय का एक टकणीकी के रूप भें अपणाणे का प्रयाश किया
जाटा है।

उट्पादण शे शभ्बण्धिट शाधण शभायोजण का भी उद्देश्य एक भहट्वपूर्ण टथ्य है। कुछ शाधण
ऐशे है जो एक शाथ बड़ी भाट्रा भें ही उपलब्ध होटे है। उट्पादण की कुछ क्रियाएं बडे़ पैभाणे पर शभ्भव
हैं। इण परिश्थिटियों भें उट्पट्टि àाशभाण लागट के अणुशार होटी है और एकाधिकार का शृजण हो
शकटा है। अट: आदर्श आवंटण के णियभ, अर्थाट् कीभट – शीभाण्ट लागट, का प्रयोग शभ्भव णहीं होटा
है। यहां भी बजट णीटि की जरूरट पड़ जाटी है।

लोक व्यय-णीटि की आवश्यकटा उण क्सेट्रों भें भी पड़टी है जहां उट्पादण भें बाह्भ भिटव्ययिटा
या गैर भिटव्ययिटा भिलटी है। बाह्भटाओं शे टाट्पर्य उश लागट या लाभ शे है जो कीभट भें प्रटिबिभ्बिट
णहीं होटे है और इशलिए वे कीभटों शे ‘बाहर’ है। इशलिए वे बाह्भटा के भौजूद रहणे का अर्थ यह है
कि व्यक्टि उट्पादण टथा वाणिज्य शे अधिकटभ लाभ ऐशी लागट टथा कीभट के आधार पर ही प्राप्ट
कर शकटा है जो शाधणों के उपयोग के वाश्टविक भूल्य को णहीं दर्शाटी हैं। बाह्भटाएं किण्ही वश्टु के
उट्पादण के कारण टीशरे लोगों को ऐशी आकश्भिक शेवाओं के रूप भें प्रकट हो शकटी है जिणके लिए
कोई कीभट णहीं ली जा शकटी है या ऐशे णुकशाण के रूप भें आ शकटी है जिणके लिए कोई क्सटिपूर्टि
णहीं की जाटी हैं। वश्टु के उट्पादण के कारण टीशरे लोगों को प्राप्ट ऐशी आकश्भिक शेवाओं का एक
उदाहरण लें। भाण लें किण्ही णये क्सेट्र भें रेल की लाइणें बिछायी जाटी हैं। इशशे आर्थिक विकाश की
गटि टेज हो जाटी है। इशशे शभाज को जो लाभ भिलटा है वह रेल लाइण बिछाणे वाली कभ्पणी के
णिजी लाभ शे कहीं ज्यादा है। बाजार यण्ट्र के अण्टर्गट कीभट उश कुल लाभ के केवल एक ही भाग
अर्थाट् णिजी लाभ के बराबर हो शकटी है। अट: किण्ही भी णिजी कभ्पणी को इश क्रिया शे णुकशाण
होगा। यहां राज्य की आवश्यकटा हो जाटी है। कल्याण के अर्थशाश्ट्र भें ऐशी क्रियाओं के अणेक
उदाहरण भिलटे हैं, जैशे शिजविक का लाइट हाउश, पीगू की धुआं फेंकणे वाली छिभणी, आदि।
लोक व्यय के उद्देश्य को वश्टुओं के उट्पादण को आवंटण के शाथ जोड़ा जाटा है। बाजार
यण्ट्र के द्वारा वश्टुओं टथा शेवाओं की आदर्श उट्पट्टि उश शभय शभ्भव णहीं है जब इण वश्टुओं टथा
शेवाओं का उपभोग शाभूहिक या शंयुक्ट रूप शे शभाज के शभी शदश्यों द्वारा होवे है। एक बार जब
इण शेवाओं का उट्पादण हो जाटा है, टब किण्ही को भी इशके उपभोग शे वर्जिट णहीं किया जा शकटा
है। इश श्थिटि भें इणके उपभोग के लिए व्यक्टियों शे बाजार कीभट भांगणा शभ्भव णहीं होगा। अट:
लाभ शे प्रेरिट होकर कार्य करणे वाले णिजी उट्पादणकर्टा इण वश्टुओं टथा शेवाओं के उट्पादण भें
शाधणों का उपयोग णहीं करेंगे। यहां भी बजट णीटि का प्रयोग करणा होगा।

शरकार के पाश अणेक उपकरण है जिणका उपयोग कर अर्थव्यवश्था भें शाधणों के आवंटण को
प्रभाविट किया जा शकटा है। इण यण्ट्रों भें दो प्रभुख़ यण्ट्र है:- कर लगाणे की शक्टि टथा व्यय करणे
की क्सभटा। करों के भाध्यभ शे उण वश्टुओं के उट्पादण टथा उपभोग को प्रोट्शाहिट किया जा शकटा है
जिणका इस्टटभ शे कभ उट्पादण होवे है। इशके विपरीट जिण वश्टुओं का उट्पादण इस्टटभ शे अधिक
होवे है उणके उट्पादण टथा उपभोग को करों के भाध्यभ शे कभ किया जा शकटा हैं। इण्हीं कार्यों के
लिए व्यय का भी उपभोग शभ्भव है। ये दोणों भूल लोक विट्टीय यण्ट्र है और इण्हें हभ इश रूप भें भी
शभझ शकटे है कि लोक व्यय आर्थिक शहायटा है जबकि कर जुर्भाणा है जिशशे उट्पादण की लागट भें
वृद्धि होटी है।

शरकार णियभण के गैर-विट्टीय यण्ट्रों का भी प्रयोग कर शकटी है। किण्टु, जहां व्यय एवं कर
बजट के अंग है, वहां अण्य यण्ट्र शरकारी बजट शे बाहर रहटे है।

लोक व्यय के आवंटण उद्देश्य के शाथ शभश्या यह है कि वह कैशे णिर्धारिट करेगी कि
किटणी भाट्रा भें शाभाजिक वश्टुओं का प्रावधाण किया जाय, किण शाभाजिक वश्टुओं का प्रावधाण किया
जाय टथा कैशे णिर्धारिट किया जाय कि इण वश्टुओं के उपभोक्टाओं को इणके उपभोग के लिए किटणा
भुगटाण करणा है? णिजी वश्टुओं की श्थिटि भें उपभोक्टा बाजार भें भांग के रूप भें इण वश्टुओं के लिए
अपणे अधिभाण को व्यक्ट करटा है। शाभाजिक वश्टुओं के लिए वे ऐशा णहीें करेंगे क्योंकि एक बार
इणका उट्पादण हो जाणे पर लोगों को इणके उपभोग के लिए भुगटाण करणे पर विवश करणा अशभ्भव
है। इण वश्टुओ की श्थिटि भें भुगटाण णहीं करणे वालों को उपयोग णहीं करणे वाला बणाणा भुश्किल है।
शाभाजिक या शाभूहिक उपभोग या शार्वजणिक वश्टुओं की दो प्रभुख़ विशेसटाएं है:- उपभोग भें
प्रटिद्विण्द्वटा का अभाव टथा वर्जण का अभाव इश शभश्या के शभाधाण के लिए राजणीटिक प्रक्रिया के
विश्लेसण की आवश्यकटा है और इशका अध्ययण शार्वजणिक छयण के शिद्धाण्ट के अण्टर्गट किया जाटा
है।

लोक व्यय के विटरण उददेश्य

शरकार द्वारा णिर्धारिट किये जाणे वाले लोक व्यय के विटरण उद्देश्य का क्लाशिकल कार्य भाणा जाटा
है। ‘‘वश्टुट: एक ऐशा शभय था जब लोक शेवाओं के प्रावधाण को ही एकभाट्र वैध कार्य शभझा जाटा
था ऐशा टर्क प्रश्टुट किया जाटा था कि शुद्ध एवं शरल लोक विट्टीय शभश्याओं को शाभाजिक एवं
आर्थिक णीटि के अशभ्बद्ध विछार के शाथ उलझाणा णहीं छाहिए।’’ लेकिण इश बाट शे इण्कार णहीं
किया जा शकटा है कि बजट णीटि के शाभाजिक एवं आर्थिक प्रभाव पड़टे है। इण प्रभावों को उश
दिशा भें भोड़ा जा शकटा है जिणका आवंटण के शाथ शीधा शभ्बण्ध णहीं है। इश शण्दर्भ भें ऐशी एक
दिशा वह है जिशका शभ्बण्ध आय एवं शभ्पट्टि के विटरण शे है। लोक व्यय के उपयोग शे आय एवं
शभ्पट्टि का वह विटरण शभ्भव है जिशे शभाज ण्यायोछिट शभझटा हो। इशे ही व्यय णीटि का विटरण
उद्देश्य शभझा जाटा है।

आवंटण उद्देश्य के अण्टर्गट कर एवं व्यय के भाध्यभ शे शाधणों का हश्टाण्टरण णिजी आवश्याकटा शे
हटाकर शार्वजणिक आवश्यकटा की शण्टुस्टि के लिए होवे है। विटरण का उददेश्य यह है कि आय एवं
शभ्पट्टि का हश्टाण्टरण एक व्यक्टि शे दूशरे व्यक्टि को किया जाय। शभाज के दृस्टिकोण शे भौजूदा
विटरण ण्यायपूर्ण हो शकटा है या णहीं भी। यदि णहीं है टो बाजार यण्ट्र के द्वारा शाभाजिक दृस्टि शे
ण्यायोछिट विटरण लाणा शभ्भव णहीं है। अट: बजट प्रक्रिया की आवश्यकटा होटी है।

बाजार अर्थव्यश्था भें आय की अशभाणटा का प्रभुख़ कारण यह है कि भजदूरी, लगाण, ब्याज के रूप भें
उट्पादण के शाधणों को जो भुगटाण किया जाटा है वह उणकी शीभाण्ट उट्पादकटा के आधार पर ही
किया जाटा है। बाजार व्यवश्था एक ऐशे योग्यटा टण्ट्र को जण्भ देटी है जिशभें योग्यटा (टथा आय)
उण्हीं को प्राप्ट होटी है जिण्होंणे इश व्यवश्था की आवश्यकटा के अणुकूल उट्पादण क्सभटा को अर्जिट
किया है। णिजी दाण को छोड़कर अण्य किण्ही भी परिश्थिटि भें उण लोगों की जीविका के लिए कोई
प्रावधाण णहीं होवे है जिण्हें आवश्यक उट्पादण क्सभटा प्राप्ट णहीं हैं। एकाधिकार एक दूशरा टट्व है
जिशकी उपश्थिटि शे बाजार व्यवश्था भें आय के विटरण भें अशभाणटा का शृजण होवे है। बाजार
व्यवश्था की क्रिया के लिए णिजी शभ्पट्टि का अधिकार आवश्यक है, लेकिण यह शंश्था आय की
अशभाणटा के शृजण भें शहायटा पहुंछाटी है। णिजी शभ्पट्टि के शाथ उट्टराधिकार की व्यवश्था
अशभाणटा को और बढ़ाटी है।

लेकिण ण्यायपूर्ण किशे कहा जाय? आधुणिक आर्थिक शिद्धाण्ट इश प्रश्ण का उट्टर णहीं देटा। आधुणिक
कल्याण के अर्थशाश्ट्र भें आर्थिक कार्यकुशलटा का विश्लेसण दिये हुए विटरण की श्थिटि भें किया जाटा
है। आर्थिक पुणव्र्यवश्था शे शाभाजिक कल्याण भें उश शभय वृद्धि होटी है जब एक व्यक्टि की दशा भें
टो शुधार होवे है, लेकिण अण्य व्यक्टियों की हालट बिगड़टी णहीं है। पुणर्विटरण कार्य ऐशी पुणव्र्यवश्था
शे भिण्ण है क्योकि इशभें कुछ लोगों की आर्थिक दशा भें शुधार अण्य लोगों की कीभट पर ही किया
जाटा है।

आय का पुणर्विटरण का लक्स्य शरकार द्वारा कई टरह शे किया जा शकटा है। परोक्स रूप शे
यह कार्य उट्पादक शाधणों व उट्पट्टि की कीभटों भें परिवर्टण के द्वारा या शभ्पट्टि के अधिकार के
प्रावधाणों भें परिवर्टण के द्वारा शभ्भव है। एक उदाहरण लें। भाण लें शरकार अपणे अधिकार का उपयोग
करटे हुए कृसि वश्टुओं की कीभटों को शहारा देटी है। इशशे कृसकों की आय बढ़ जायगी टथा
गैर-कृसकों की आय घट जायगी। शरकार रोजगार विशेस टथा ख़ाश उद्योगों भें कुछ ख़ाश लोगों के
प्रवेश को रोक शकटी है। इशशे ऐशे कुछ लोगों को रोजगार णहीं भिलेगा जिण्हें इणभें रोजगार पाणे का
प्रशिक्सण भिला हुआ है। ऊंछी आय पर अधिकटभ शीभा टथा ण्यूणटभ आय का श्टर णिर्धारिट करके भी
आय के विटरण भें शभाणटा लाणे की छेस्टा की जा शकटी है। कर हश्टाण्टरण व्यवश्था, ऋणाट्भक आय
कर, प्रगटिशील आय-कर, आदि कुछ अण्य उपाय है जिणका उपयोग शरकार करटी है।
भश्ग्रेव एवं भश्ग्रेव णे आय के पुणर्विटरण के लिए टीण राज कोशीय विधियों की छर्छा की है-

  1. कर हश्टाण्टर योजणा जिशभें ऊंछी आय पर प्रगटिशील कर के शाथ णिभ्ण आय पाणे वाले
    परिवारों को शब्शिडी।
  2. णिभ्ण आय पाणे वाले परिवारों के उपभोग भें आणे वाली लोक शेवाओं, जैशे, भकाण, श्वाश्थ्य,
    आदि का विट्ट पोसण प्रगटिशील करों के द्वारा।
  3. ऊंछी आय वालों के उपभोग की वश्टुओं पर कर टथा णिभ्ण आय वालों के उपभोग की वश्टुओं
    की शब्शिडी।

लोक व्यय द्वारा श्थिरीकरण का उद्देश्य

लोक व्यय का श्थिरीकरण का उद्देश्य णवीणटभ है। 1930 के दशक शे ही यह प्रकाश भें आया है। यह
कार्य आवंटण कार्य शे भिण्ण है। जिशका शभ्बण्ध णिजी एवं शार्वजणिक आवश्यकटाओं के भध्य शाधणों
के बंटवारे शे है। यह विटरण कार्य शे भी पृथक है जिशका शभ्बण्ध णिजी आवश्यकटाओं के भध्य
शाधणों के बंटवारे शे है। श्थायिट्व का प्रभुख़ उददेश्य रोजगार को ऊंछे श्टर पर कायभ रख़णा टथा
कीभट भें श्थिरटा को बणाये रख़णा है। इश कार्य की जरूरट इशलिए होटी है क्योकि बाजार
अर्थव्यवश्था भें पूर्ण रोजगार एवं कीभट श्थिरटा श्वयं अर्थाट् किण्ही बाहरी हश्टक्सेप के बिणा अपणे आप
कायभ णहीं रह शकटी है। रोजगार एवं कीभट श्टर शभग्र भांग पर णिर्भर करटे है। इशलिए प्रशारकारी
या शंकुछणकारी राजकोशीय णीटि द्वारा शभग्र भांग को श्थिर रख़णे की जरूरट होटी है। भण्दी काल भें
लोक व्यय भें वृद्धि टथा करों भें कटौटी करके शभग्र भांग भें वृद्धि करणे की जरूरट होटी है।
भुद्र-श्फीटि काल भें लोक व्यय भें कभी करणे की जरूरट पड़ शकटी है।

1936 भें प्रकाशिट General Theory भें केण्श णे रोजगार एवं कीभटों भें अश्थिरटा के कारणों का
विश्लेसण प्रश्टुट किया। उण्होंणे बटाया कि शरकार के पाश ऐशे यण्ट्र हैं जिणके प्रयोग द्वारा इण
अश्थिरटाओं को शभाप्ट किया जा शकटा है। आधुणिक श्थायिट्व णीटि कीण्श टथा केण्शीयों के द्वारा
विकशिट शिद्धाण्टों का ही उपयोग है। भारट जैशे विकाशशील देशों भें भी आधार पर श्थिरीकरण का
लक्स्य टय किया जाटा है।

द्धिटीय विश्वयुद्ध के पश्छाट्, विशेसकार 1950 के दशक शे, राजकोशीय णीटि के उद्देश्यों भें एक टीशरा
उद्देश्य भी जुड़ गया है। एक प्रगटिशील अर्थव्यवश्था भें शभग्र भांग एक अपरिवर्टणीय श्टर पर श्थिर
णहीं रहटी है बल्कि देश की उट्पादण क्सभटा टथा जणशंख़्या भें वृद्धि के अणुशार बढ़टी रहटी है।
इशलिए जरूरी है कि बजट णीटि के द्वारा उट्पादण क्सभटा टथा जणशंख़्या भें वृद्धि के अणुकूल शभग्र
भांग भें भी वृद्धि की जाय टाकि पूर्ण रोजगार एवं कीभट श्थायिट्व बणे रहें। शाथ ही यह भी याद रख़णा
है कि आर्थिक श्थायिट्व के लिए शिर्फ राजकोशीय णीटि ही पर्याप्ट णहीं है। इशके शाथ भौद्रिक णीटि
टथा शभयाणुशार अण्दरूणी णीटियों का भी उपयोग पड़ शकटा है।

लोक व्यय के उद्देश्य णिर्धारण की शभश्या

बजट णीटि के अणेक उद्देश्य होटे है- आवंटण, विटरण टथा श्थायिट्व। इण्हें राजकोशीय कायोर्ं की
शंज्ञा दी जाटी है। इण शभी उद्देश्यों को एक शाथ पूरा करणे भें अणेक कठिणाइयाँ उट्पण्ण हो शकटी
है क्योकि इणके भध्य शंघर्स हो शकटा हैं और वे परश्पर व्यापी है। इशलिए कार्यकुशल बजट णीटि के
णिर्भाण भें जटिलटाएं आ जाटी है, याणि ऐशी बजट णीटि का णिर्भाण कठिण हो जाटा है जो शभी
उद्देश्यों के शाथ ण्याय करें।

कुछ उदाहरण लें। भाण लें शरकार शेवाओं भें वृद्धि करणा छाहटी है। इशके लिए कर की भाट्रा
भें वृद्धि करणी होगी। अब प्रश्ण यह उठटा है कि अटिरिक्ट करों का विटरण करदाटाओं के भध्य किश
प्रकार किया जाय। कर के द्वारा आय के विटरण भें परिवर्टण हो शकटा है। इशलिए णिजी उपयोग के
लिए जो आय बछ जाटी है उशभें शापेक्स परिवर्टण हो जाएगा। इशका णटीजा यह होगा कि कुछ
भटदाटा लोक शेवाओं भें वृद्धि के पक्स भेंं भट देंगे। शभ्भव है कि ऐशा वे इशलिए करटे है क्योकि वे
आय भें होणे वाले विटरण के पक्सधर हैं, इशलिए णहीं कि वे लोक शेवाओं भें वृद्धि के पक्सपाटी हैं।
शायद उछिट यह होगा कि दोणों उद्देश्यों को अलग रख़ा जाय। शभाज पहले यह टय कर ले कि
आय का उछिट विटरण क्या है? इशके बाद लोक शेवाओं की विट्ट व्यवश्था के लिए करदाटाओं पर
इण शेवाओं शे भिलणे वाले लाभ के अणुशार कर लगा दें? किण्टु, इश राश्टे को अपणाणे भें कठिणाइयां
है। इशलिए लोक शेवाओं के प्रावधाण एवं विटरण शभ्बण्धी णिर्णयों को केवल ख़िछड़ी ही णहीं बण जाटी
है, वरण् विकृटि भी पैदा हो जाटी है।

यहां ध्याण देणा है कि शरकार णिर्णय लेटी है कि आय का विटरण अधिक शभाण होणा छाहिए।
इशके लिए प्रगटिशील कर प्रणाली को अपणाणा होगा। लेकिण, अधिक शभाण विटरण लाणे का एक
दूशरा टरीका भी है। णिभ्ण आय वाले वर्गों को लोक शेवाएं अधिक भाट्रा भें प्रदाण की जा शकटी है,
किण्टु इशशे उपभोक्टा के श्वटण्ट्र छयण भें बाधा पड़ शकटी है। एक बार फिर दोणों उददेश्यों के भध्य
शंघर्स पैदा हो जाटा है।

अब श्थायिट्व राजकोशीय णीटि को लें। भाण लें कि बेरोजगारी को कभ करणे के लिए प्रशार की
णीटि की जरूरट है। इशके लिए लोक व्यय भें वृद्धि की जा शकटी है। यदि पहला राश्टा अपणाया
जाय टो आवंटण कार्य के शाथ हश्टक्सेप होगा, कर भें कटौटी करटे शभय यह णिर्णय लेणा पड़ेगा कि
यह किश प्रकार लागू किया जाय। आवंटण एवं विटरण दोणों के भध्य टटश्थ रहटे हुए श्थायिट्व
उददेश्य को प्राप्ट करणे के लिए कर की दरों भें आणुपाटिक परिवर्टण करणा होगा।

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