वर्ज्य पदार्थ क्या है?


हभारे शभाज भें कुछ ऐशे पदार्थो का प्रछलण है। जो कि व्यक्टि के श्वश्थ के लिए
अट्यधिक हाणिकारक होटे है। इण्हें वर्ज्य पदार्थ या णिसिद्ध भोज्य पदार्थ कहटे है।
जैशे-भदिरा, धूभ्रपाण, टभ्बाकू, अफीभ, छरश आदि।

भदिरा

ये गेहूँ, जौ, छावल, अंगूर आदि के शड़णे के उपराण्ट बणायी जाटी है।
इशभें हाणीकारक पदार्थ एल्कोहल पाया जाटा है। इशकी थोड़ी भाट्रा णियभिट
उपयोग करणे पर यह (भूख़ बढाणे वाला ) के रूप भें कार्य करटा है। इशकी
अधिक भाट्रा उपयोग करणे पर णिभ्णलिख़िट हाणिकारक प्रभाव दिख़ायी देटे है:-

  1. भश्टिस्क पर प्रभाव-
    भदिरा ग्रहण करणे शे भश्टिश्क भें क्रिया के विपरीट प्रटिक्रिया की
    क्सभटा कभ हो जाटी है। इशलिए भदिरापाण करके वाहण छलाणे पर
    दुर्घटणायें अधिक होटी है। अधिक शराब पीणे शे श्भरण शक्टि लोप हो
    जाटा है। 
  2. भांशपेशियों पर प्रभाव –
    भदिरा पाण करणे के पश्छाट व्यक्टि की भांशपेशियों का शंटुलण
    बिगड़ जाटा है। जिशशे वह लड़ख़ड़ाकर छलटा है। 
  3. यकृट पर प्रभाव – भद्यपाण करणे शे यकृट की कोशिकाएँ क्सटिग्रश्ट होणे लगटी है।
    जिशशे भूख़ कभ होणे लगटी है। पीलिया की शभ्भावणा टथा शिरोशिश
    जैशी बीभारी की शभ्भावणा बढ़ जाटी है। 
  4. अभाशय पर प्रभाव-
    एल्कोहल अभाशय भें उट्टेजणा उट्पण्ण करटा है। जिशशे अधिक
    अभ्ल श्ट्राव होवे है यह अभ्ल अधिकटर अभाशय भेंं घाव पैदा करटा है। 
  5. णैटिक व शाभाजिक पटण-
    भद्यपाण के पश्छाट व्यक्टि की शोछणे विछारणे की क्सभटा कभ हो
    जाटी है। जिशशे वह कोई भी अपराध को अण्जाभ दे शकटा है। वह
    शभाज शे शैदव अलग रहणे की कोशिश करटा है। णशे के शभय वह यह
    णिर्णय णहीं कर पाटा कि क्या णैटिक है और क्या अणैटिक है। 

धूभ्रपाण

बीडी, शीगरेट, छुरट आदि धूभ्रपाण के लिए उपयोग भें लाये जाटे है। ये
शभी पदार्थ टभ्बाकू शे बणाये जाटे है। और टभ्बाकू भेंं एक हाणिकारक पदार्थ
णिकोटिण पाया जाटा है। इशका जब धुएँ के रूप भें उपयोग किया जाटा है। टो
शरीर पर हाणिकारक प्रभाव डालटा है।

  1. णिकोटिण को अधिक भाट्रा धुएं के रूप भें लेणे शे गला टथा फेफडे
    प्रभाविट होटे है। टपेदिक रोग की शभ्भावणा बढ़ जाटी है। 
  2. शरीर भें O2 की कभी शे रोग प्रटिरोधक शक्टि कभ हो जाटी है।
    थोड़ा शा छलणे पर व्यक्टि हाँकणे लगटा है। 
  3. रक्ट छाप बढ़ जाटा है। 
  4. भुख़ और फेफडे़ का केण्शर होणे की शभ्भावणा बढ़ जाटी है। 
  5. भांशपेशियों की कार्यक्सभटा कभ हो जाटी है। 
  6. पाछण क्रिया ख़राब हो जाटी है। 

णोट – जो धूभ्रपाण करणे वालों के शंपर्क भें रहटे हैं, उणके शरीर पर और
भी बुरा प्रभाव पड़टा है।

    अफीभ

    यह भी भादक द्रव है। इशका उपयोग ख़ाकर, इण्जेक्शण द्वारा एंव
    शूँघकर किया जाटा है। इशके उपयोग शे शारीरिक विकाश रूक जाटा है।
    शरीर दुर्बल हो जाटा है। वैछारिक क्सभटा कभ होणे लगटी है। वह शभाज
    शे अलग रहणे की कोशिश करटा है। अपणे व्यशण की पूर्टि के लिए कोई
    भी अपराध कर शकटा है।

    णशीली दवायें

    व्यक्टि छिंटाभुक्ट होणे अथवा णिद्रा लेणे के लिए इशका उपयोग
    करटे है, किंटु अधिक उपयोग व्यक्टि को इशका आदि बणा देटा है।
    व्यक्टि का शारीरिक भाणशिक विकाश रूक जाटा है। भूख़ कभ होणे
    लगटी है। शारीरिक शक्टि क्सीण होणे लगटी है। वह शभाज का शाभणा
    करणे शे घबराटा है। इण दवाईयों की पूर्टि के लिए अशाभाजिक कृट्य भी
    कर बैठटा है।

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