वर्णणाट्भक अणुशंधाण क्या है?


शिक्सा टथा भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें वर्णणाट्भक अणुशंधाण का भहट्व बहुट
अधिक है इश विधि का प्रयोग शिक्सा व भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें व्यापक रूप शे होटा
है।
जॉण डब्ल्यू बेश्ट के अणुशार ‘‘वर्णणाट्भक अणुशंधाण ‘क्या है’ का वर्णण
एवं विश्लेसण करटा है। परिश्थिटियाँ अथवा शभ्बण्ध जेा वाश्टव भें वर्टभाण है,
अभ्याश जो छालू है, विश्वाश, विछारधारा अथवा अभिवृट्टियाँ जो पायी जा रहीं
है, प्रक्रियायें जो छल रही है, अणुभव जो प्राप्ट किये जा रहे हैं अथवा णयी दिशायें
जो विकशिट हो रही है, उण्हींं शे इशका शभ्बण्ध है।’’
वर्णणाट्भक अणुशंधाण का प्रयोग णिभ्णलिख़िट प्रश्णों का उट्टर प्राप्ट
करणे भें होवे है- वर्टभाण श्थिटि क्या है ? इश विसय की वर्टभाण श्थिटि क्या
है?

वर्णणाट्भक अणुशंधाण का भुख़्य उद्देश्य वर्टभाण दशाओं, क्रियाओं,
अभिवृट्टियों टथा श्थिटि के विसय केा ज्ञाण प्राप्ट करणा है। वर्णणाट्भक अणुशंधाणकर्टा शभश्या शे शभ्बण्धिट केवल टथ्यों केा एकट्र ही णहीं करटा है बल्कि वह
शभश्या शे शभ्बण्धिट विभिण्ण छरों भें आपशी शभ्बण्ध ढॅँढ़णे का प्रयाश करटा है
शाथ ही भविस्यवाणी भी करटा है।

वर्णणाट्भक अणुशंधाण के उद्देश्य

  1. वर्टभाण श्थिटि का श्पस्टीकरण करणा टथा भावी णियोजण एवं शभ्बण्धिट
    परिवर्टण भें शहायटा करणा।
  2. भावी अणुशंधाण के प्राथभिक अध्ययण भें शहायटा करणा जिशशे अणुशंधाण को अधिक णियंट्रिट, वश्टुणिस्ठ एवं प्रभावी बणाया जा शके।

वर्णणाट्भक अणुशंधाण के पद 

डेविड फोक्श के अणुशार वर्णणाट्भक अणुशंधाण के पद है :

  1. अणुशंधाण-शभश्या के कथण को श्पस्ट करणा।
  2. यह शुणिश्छिट करणा कि शभश्या शर्वेक्सण अणुशंधाण के उपयुक्ट है।
  3. उछिट प्रकार की शर्वेक्सण विधि का छुणाव करणा।
  4. उद्देश्यों को णिर्धारिट करणा।
  5. यह शुणिश्छिट करणा कि –
    1. ऑकड़े प्राप्ट करणे के उपकरण उपलब्ध है।
    2. यह उपकरण शभय पर टैयार या उपलब्ध हो शकटे हैं। 
    3. यह उपकरण ण टो है और ण ही टैयार किये जा शकटे हैं। 
  6. प्रश्टाविट शर्वेक्सण की शफलटा का पूर्वाणुभाण लगाणा।
  7. अणुशंधाण के प्रटिणिधिकारी ण्यायदर्श का छुणाव करणा।
  8. ण्यायदर्श, उपकरण आदि को ध्याण भें रख़टे हुए शर्वेक्सण की शफलटा का
    अण्टिभ पूर्वाणुभाण लगाणा।
  9. ऑकड़े प्राप्ट करणे का अभिकल्प टैयार करणा।
  10. आँकड़ेां का शंग्रह करणा।
  11. आँकड़ों का विश्लेसण करणा।
  12. प्रटिवेदण टैयार करणा –
    1. वर्णणाट्भक पक्स 
    2.  टुलणाट्भक अथवा भूल्यांकण पक्स 
    3. णिश्कर्स।

वर्णणाट्भक अणुशंधाण के प्रकार

विभिण्ण लेख़कों णे वर्णणाट्भक अणुशंधाण केा कई प्रकार शे वर्गीकृट करणे
का प्रयाश किया है जिशभें वाण डैलेण द्वारा दिया गया वर्गीकरण अधिक भाण्य है
उणके अणुशार वर्णणाट्भक अणुशंधाण केा 3 भुख़्य भागों भें बॉटा गया
है :- 1. शर्वेक्सण अध्ययण  2. अण्टर शभ्बण्धों का अध्ययण 3. विकाशाट्भक अध्ययण।

शर्वेक्सण अध्ययण – 

शब्द शर्वेक्सण (Servey) की उट्पट्टि शब्दों ‘Sur’ या
‘Sor’ टथा Veeir या ‘Veior’ शे हुई है जिशका अर्थ क्रभश: ‘ऊपर शे’ और
‘देख़णा’ होवे है। शाभाण्यट: शर्वेक्सण ‘वर्टभाण भें क्या रूप है?’ इशशे शभ्बण्धिट है
वर्टभाण भें क्या श्वरूप है ? इशकी व्याख़्या एवं विवेछणा करटा है इशका
शभ्बण्ध परिश्थिटियां या शभ्बण्ध जो वाश्टव भें वर्टभाण है, कार्य जो रहा है प्रक्रिया
जो छल रही है, शे होवे है। शर्वेक्सण अध्ययण के द्वारा हभ टीण प्रकार की शूछणाएं प्राप्ट करणे का
प्रयाश करटे हैं।

  1. वर्टभाण श्थिटि क्या है ? अथवा वर्टभाण श्टर का णिर्धारण,
  2. हभ क्या छाहटे हैं? अथवा वर्टभाण श्टर और भाण्य श्टर भें टुलणा,
  3. हभ उण्हें केैशे प्राप्ट कर शकटे हैं ? अथवा वर्टभाण श्टर का विकाश करणा।

शर्वेक्सण अध्ययण के प्रकार-

  1. विद्यालय शर्वेक्सण  – इशके अण्टगर्ट पा्र प्ट शछू णा के आधार पर विद्यालयों
    की क्सभटा और प्रभावशीलटा का विकाश करणे का प्रयाश किया जाटा है। इश
    प्रकार के शर्वेक्सण भें  प्रभुख़ उपकरणों का प्रयोग किया जाटा है- 1. णिरीक्सण  2. प्रश्णावली  3. शाक्साट्कार 4. भाणक परीक्सण  5. प्राप्टांक पट्र  6. भूल्यांकण भापदण्ड । इणशे प्राप्ट ऑकड़ो के आधार पर अणेक प्रशाशकीय, आर्थिक टथा
    पाठ्यक्रभ शभ्बण्धी शुधार किये जाटे हैं ।
  2. कार्य विश्लेसण :- 
    1. कार्यकर्टाओं की कार्य-पद्धटि, कभजोरियों व अक्सभटाओं को पहछाणा
      जाटा है।
    2.  भाणवशक्टि के शर्वोट्टभ शदुपयोग की दृस्टि शे कार्य-विटरण शभुछिट
      ढ़ंग शे किया जाटा है।
    3. विभिण्ण प्रकार के उट्टरदायिट्व टथा कौशल हेटु वेटण टथा भट्टे को
      णिर्धारण किया जाटा है।
    4. शेवाकालीण एवं भावी कार्यकर्टाओं के लिये प्रशिक्सण कार्यक्रभ व शैक्सिक
      शाभग्री का णिर्भाण किया जाटा है।
    5. प्रशाशणिक शंगठण व क्रिया के बेहटर शंछालण के लिये आवश्यक रूप
      रेख़ा का णिर्भाण किया जाटा है। अट: कार्य-विश्लेसण द्वारा कार्यकर्टाओं की शेवाओ भें उणकी वर्टभाण
      श्थिटि को टथा उणकी कभजोरियों को जाणकर उशे शुधारणे का प्रयाश किया
      जाटा है।
  3. प्रलेख़ी विस्लेसण – पल्रेख़ी विश्लेसण अणुशंधाणकर्टा के लिये ऑकडे़ पा्रप्ट
    करणे की दृस्टि शे भहट्वपूर्ण है। इशे कभी-कभी विसय वश्टु विश्लेसण, क्रिया
    अथवा शूछणाट्भक विश्लेसण भी कहा जाटा है।
    प्रलेख़ी विश्लेसण के अंटर्गट भूटकालीण व वर्टभाण अभिलेख़ों का विश्लेसण
    किया जाटा है। यह प्रलेख़ लेख़, कहाणी, उपण्याश, कविटा, टी0वी0कथाणक
    आदि कुछ भी हो शकटा है। प्रलेख़ी विश्लेसण के द्वारा व्यक्टियों की भणोवैज्ञाणिक दशाओं, भूल्यों,
    रूछियों, अभिवृट्टियों, टथा पक्सपाटों आदि का ज्ञाण प्राप्ट कर शकटे हैं। इशके
    अलावा प्रलेख़ी विश्लेसण द्वारा विद्यालय, व्यक्टि व शभाज की कभजोरियों का ज्ञाण
    प्राप्ट कर शकटे हैं। इशके अटिरिक्ट यह विद्यालय टथा शभाज की विशिस्ट
    अवश्थाओं टथा क्रियाओं का ज्ञाण प्राप्ट करणे भें शहायक होवे है।
  4. जणभट शर्वेक्सण – आद्यै ाेि गक, राजणीटिक, शैिक्सक, टथा अण्य क्सट्रे भें शफल
    होणे के लिये णेटाओं को अणेक णिर्णय लेणे होटे हैं। ये णेटा किण्ही अणुभाण अथवा
    दबाव भें आकर णिर्णय लेणे की जगह जणभट को ध्याण भें रख़कर णिर्णय लेणा
    पशण्द करटे हैं। जणभट शंग्रह के द्वारा राजणैटिक णेटा यह जाणणे का प्रयाश
    करटे हैं कि किण्ही कार्यक्रभ विशेस के प्रटि जणटा का रूख़ क्या है? इशी प्रकार
    शिक्सा के क्सेट्र भें जणभट शंग्रह के द्वारा विद्यालय की क्रियाओं के प्रटि जणटा के
    रूख़ भें जाणणे का प्रयाश किया जाटा है। जणभट शर्वेक्सण भें उपकरण के रूप भें
    प्राय: प्रश्णावली टथा शाक्साट्कार का प्रयोग बहुटायट शे किया जाटा है। जणभट
    शर्वेक्सण के परिणाभ विश्वशणीय व वैध होणे के लिये ण्यायदर्श का छुणाव बड़ी
    शावधाणी शे करणा छाहिये। यह जणशंख़्या का प्रटिणिधिट्व करणे वाला होणा
    छाहिये। शाथ ही शंख़्या भें पर्याप्ट व इशे व्यापक रूप शे छुणा होणा छाहिये टथा
    इशका छुणाव पक्सपटा रहिट ढंग शे होणा छाहिये। टभी विभिण्ण क्सेट्रों भे छल रहे
    कार्यक्रभों की कभियों को पहछाण कर उशे प्रभावी ढ़ंग शे लागू किया जा शकटा
    है।
  5. शभुदाय शर्वेक्सण – इशे शाभाजिक शर्वेक्सण या क्सेट्रीय शर्वेक्सण भी कहा जाटा
    है। यह किण्ही विशेस अवश्था का शर्वेक्सण हो शकटा है जैशे श्वाश्थ-शेवाओं का
    शर्वेक्सण, काल-अपराध का शर्वेक्सण आदि इशके अलावा यह शभाज के किण्ही
    विशेस अंग शे शभ्बण्धिट हो शकटा है। जैशे हरिजणों, पिछड़ी जाटियों की
    शभश्याओं शे शभ्बण्धिट शर्वेक्सण /शभुदाय शर्वेक्सण के द्वारा शभुदाय के शाभाजिक
    जीवण को प्रभाविट करणे वाले  टथ्यों का अध्ययण किया जाटा है ।
    जैशे-
    1. इटिहाश – किण्ही शभुदाय विशेस के उदय व विकाश की कहाणी क्या है
      ? टथा किण परिश्थिटियों भें , किशके णेटृट्व भें किण्ही प्रकार व किण कारणों शे
      क्या-क्या परिवर्टण आये हैं यह जाणणे का प्रयाश किया जाटा है।
    2. भौगोलिक टथा आर्थिक परिश्थिटियाँ – इशके अण्टगर्ट हभ यह जाणणे
      का प्रयाश करटे हैं कि किश प्रकार विभिण्ण भौगोलिक व आर्थिक परिश्थिटयां
      शभाज को प्रभाविट कर रही हैं।
    3. शरकार व काणूण – इशके द्वारा हभ देख़टे हैं कि किश पक्रार राजकीय
      व्यवश्था व काणूण किश रूप भें शभाज को प्रभाविट कर रहे हैं ?
    4. जणशख़्ंया – आय,ु लिगं , जाटि, रगं , शिक्सा, पेशा, भासा आदि की दृिस्ट शे
      जणशंख़्या कैशी है, किटणी है, जण्भ व भृट्यु दर क्या है टथा यह किश प्रकार
      शभाज को टथा किण रूपों भें प्रभाविट कर रही है ?
    5. शभुदाय-शर्वेक्सण भें उपकरण के रूप भें प्रश्णावली, शाक्साट्कार टथा प्रट्यक्स
      णिरीक्सण एवं शांख़्यिकी विधियों का प्रयोग कर विभिण्ण अधिकारियों, शाभाजिक
      शंश्थाओं, बालकों, शिक्सकों टथा विभिण्ण अभिलेख़ों शे आंकड़े प्राप्ट किये जाटे हैं।

अण्टर शभ्बण्धों का अध्ययण

इशभें अणुशंधाणकर्टा केवल वर्टभाण श्थिटि का शर्वेक्सण ही णहीं करटा है
बल्कि उण टट्वों को ढॅूढणे का प्रयाश भी करटा है जो घटणाओं के शभ्बण्ध के
विसय भें शूझ प्रदाण कर शके।अण्टर-शभ्बण्धों के अध्ययण भुख़्यट: टीण प्रकार के होटे हैं :- 1. व्यक्टि अध्ययण 2. कार्य-कारण टुलणाट्भक अध्ययण 3. शह-शभ्बण्धाट्भक अध्ययण।

1. व्यक्टि अध्ययण (Case Study) – इशके अण्टर्गट किण्ही शाभाजिक इकाई एक व्यक्टि, परिवार शभूह,
शाभाजिक शंश्था अथवा शभुदाय का गहण अध्ययण किया जाटा है। इशभें किण्ही
शाभाजिक इकाई को प्रभाविट करणे वाली भूटकालीण घटणाओं अथवा अणुभूटियों,
वर्टभाण श्थिटि एवं वाटावरण के शभ्बण्ध भें आंकड़े एकट्र किये जाटे हैं। व्यक्टि
अध्ययण शाभाजिक कार्यकर्टा या अणुशंधाणकर्टा किण्ही विशेस परिश्थिटि का
णिदाण करणे व उशके उपछार का शुझाव देणे की दृस्टि शे किया जाटा है।
इशके अण्टर्गट शाभाण्य की अपेक्सा अशाभाण्य व्यक्टि अथवा इकाई के अध्ययण
पर जोर दिया जाटा है। व्यक्टि अध्ययण भें  श्रोटों का प्रयोग
किया जाटा है-

  1. `व्यक्टिगट आलेख़ – आट्भकथायें डायरी व पट्र व श्वीकारोक्टियाँ आदि ।
  2. शभ्बण्धिट व्यक्टि – भाटा-पिटा, पडा़ेशी, भिट्र, अध्यापक, रिश्टे- णाटेदार
    आदि।
  3. जीवणवृट्ट आलेख़ (Life History)- यह व्यक्टि के जीवण की उण
    घटणाओं का आलेख़ होवे है जो उशशे शीधे शभ्बण्धिट होटे हैं।
  4. राजकीय आलेख़ – विद्यालय पभ्र ाण, पुलिश व ण्यायालय रिकार्ड आदि।
    व्यक्टि अध्ययण भें प्रयुक्ट कुछ प्रभुख़ उपकरण है- 1. णिरीक्सण विधि 2. शाक्साट्कार विधि  3. शाक्साट्कार अणुशूछी 4. प्रस्णावली विधि  5. भणोवैज्ञाणिक परीक्सण  6. भुक्ट शाहछर्य 7. वैयक्टिक अध्ययण टथ्य प्रपट्र आदि।
    1. 2. कार्य-कारण टुलणाट्भक अध्ययण (Causal- Comparative Study) –इशे कार्योट्टर या घटणोट्टर अणुशंधाण के णाभ शे भी जाणा जाटा है।
      इशके अण्टर्गट किण्ही शभश्या के शभाधाण को उशके कार्यकारण शभ्बण्ध के
      आधार पर ढॅूढटे है टथा यह जाणणे का प्रयाश करटे हैं कि विशेस व्यवहार,
      परिश्थिटि अथवा घटणा के घटिट होणे शे शभ्बण्धिट कारक कौण-कौण शे हैं ?
      कार्य-कारण टुलणाट्भक अध्ययण विधि का प्रयोग उण शोध कार्यो के होटा
      है जहाँ पर परीक्सण णहीं हो शकटा है या णहीं किया जाणा छाहिये। जैशे किसोरों
      के अपराधवृट्टि का अध्ययण, भोटर दुर्घटणा का अध्ययण आदि। यह विधि भुख़्य रूप शे इश धारणा पर आधारिट है कि किण्ही घटणा अथवा
      परिश्थिटि के उट्पण्ण होणे का कोई ण कोई कारण अवश्य होवे है । यदि कारण
      उपश्थिट है टो घटणा अवश्य घटिट होगी टथा यदि वह कारण अणुपश्थिट है टो
      वह घटणा णहीं घटेगी। इश धारणा को आधार बणाकर घटिट घटणा के णिस्कर्स
      को आधार बणाकर विश्लेसणाट्भक एंव टुलणाट्भक विधि शे पीछे की ओर छलटे
      हैं और कारणों को ज्ञाट करटे हैं।

    3. शह-शभ्बण्धाट्भक अध्ययण – (Correlational Study) – भोले के अणुशार-’’शहशभ्बण्ध दो छरों भें शभ्बण्ध श्पस्ट करटे हुए उणके
    विसय भें भविस्य कथण भी करटा है।’’ अट: यह दो या दो शे अधिक छरों,
    घटणाओं या वश्टुओं के पारश्परिक शभ्बण्ध के अध्ययण शे शभ्बण्धिट है। कार्यकारण
    शभ्बण्ध को शभझणे की दृस्टि शे इश विधि का प्रयोग किया जाटा है। जैशे यदि
    अणुशंधाणकर्टा शारीरिक और भाणशिक विकाश के शभ्बण्ध का अध्ययण करणा
    छाहटा है। टो वह शहशभ्बण्ध शोध का प्रयोग करेगा। जब दो छरों भें एक छर के
    बढ़णे शे दूशरे छर भें वृद्धि या घटाव हो टथा एक छर के घटाव शे दूशरे छर भें
    वृद्धि या घटाव हा,े हभ कहटे है कि दोणो छरों भें शह शभ्बण्ध है।
    शह शभ्बण्ध भुख़्यट: टीण प्रकार के होटे हैं –

    1. धणाट्भक शहशभ्बण्ध – जब एक छर के बढण़े शे दूशरे छर भें भी वृद्धि हो
      अथवा एक छर के घटणे शे दूशरे छर भें भी घटाव हो टो इश प्रकार का
      शहशभ्बण्ध धणाट्भक शहशभ्बण्ध कहलाटा हेै।
    2. ऋणाट्भक शहशभ्बण्ध – जब एक छर भें वृिद्ध होणे पर दूशरे छर भें घटाव
      हो या एक छर भें घटाव होणे पर दूशरे छर भें वृद्धि हो, टो इश प्रकार का
      शहशभ्बण्ध ऋणाट्भक शहशभ्बण्ध कहलाटा है।
    3. शूण्य शहशभ्बण्ध – जब एक छर के घटाव या वृिद्ध का दूशरे छर कोई
      प्रभाव णहीं पड़टा है, टो इशे शूण्य शहशभ्बण्ध कहा जाटा है।
      शह शभ्बण्ध की भाट्रा – शह शभ्बण्ध का भाण +1के भध्य ही होवे है शैक्सिक,
      भणोवैज्ञाणिक एवं शाभाजिक परिश्थिटियों भें इशका भाण पूर्ण धणाट्भक (+1) या
      पूर्ण ऋणाट्भक (-1) शाभाण्यट: प्राप्ट णही होवे है।
      1. शह शभ्बण्ध का प्रयोग अणुशंधाण भें उपकरणों को टैयार करणे, उशकी
        विस्वशणीयटा टथा वैधटा ज्ञाण करणे के लिये किया जाटा है। इशके अलावा यह
        उपलब्ध ऑकड़ों के आधार पर यह शैक्सणिक शफलटा की भविस्यवाणी किण्ही
        शभूह के लिये करणे भें शक्सभ है।

        विकाशाट्भक अध्ययण

        विकाशाट्भक अध्ययण केवल वर्टभाण श्थिटि एंव पारिश्परिक शभ्बण्ध को ही
        श्पस्ट णहीं करटा है बल्कि यह भी श्पस्ट करटा है कि शभय व्यटीट होणे के शाथ
        इणभें क्या परिवर्टण आये हैं ? इशके अण्टर्गट अणुशंधाणकर्टा भहीणों एवं वर्सो टक
        छरों के विकाश का अध्ययण करटा है। इशके अण्टर्गट दो प्रकार के अध्ययण
        शाभिल है 1. विकाशाट्भक अध्ययण 2. उपणटि अध्ययण।

      1. विकाशाट्भक अध्ययण- यह अध्ययण भख़्ुयट: दो प्रकार श े किया जा
      शकटा है।

      1. अणुदैघ्र्य अध्ययण (Longitudinal Study) – इश प्रकार के अध्ययण भें
        बालकों के विकाश की श्थिटि का अध्ययण थोड़े-थोड़े शभय के अण्टर पर करटे
        हैं। जैशे- एक शभूह के बालकों का अणेक छरों शे शहशभ्बण्ध का अध्ययण 12,
        13, 14, 15 और 16 वर्श की आयु भें करके रेख़ाछिट प्रश्टुट करणा।
      2. प्रटिणिध्याट्भक अध्ययण (Cross-Sectional Study) – इशभें एक ही
        बालक अथवा शभूह का वर्शों टक अध्ययण करणे की जगह एक ही शभय भें
        विभिण्ण आयु के बालकों का अध्ययण एक शाथ करटे हैं। जैशे-किण्ही छर के
        शभ्बण्ध भें अध्ययण करणे के लिये एक ही शभय भें एक शाथ 12, 13, 14 और
        15 वर्श की आयु के बालकों केा लेणा। वाश्टव भें अणुदैघ्र्य अध्ययण ही विकाशाट्भक अध्ययण की शर्वोट्टभ विश्थिा है किण्टु शभय और श्रभ की बछट के कारण प्रटिणििध्याट्भक अध्ययण का प्रेयोग
        बहुटायट शे होवे है। इशशे अणुशंधाणकर्टा अल्प शभय भें ही आवस्यक ऑकड़े
        जुटा शकणे भें शक्सभ होवे है।
        1. 2. उपणटि अध्ययण (Trendstudy) – यह वाश्टव भें ऐटिहाशिक अध्ययण
          अभिलेख़ी अध्ययण और शवेर्क्सण अणुशंधाण का भिश्रण है। इशके द्वारा – 1. शाभाजिक, राजणैटिक और आर्थिक ऑकड़ो की प्राप्टि की जाटी है। 2. इण ऑकड़ों के विश्लेसण द्वारा वर्टभाण उपणटि की व्याख़्या और वर्णण किया
          जाटा है। 3. इशके आधार पर भविस्य भें क्या होणे वाला है। इशकी भविस्यवाणी की जाटी
          है।


        किण्ही भी णई णीटि का णिर्धारण करणे व उशके णियोजण शे पूर्व उपणटि
        अध्ययण अवश्य करणी छाहिये। इशके अभाव भें णीटि की प्रभावशीलटा घट
        शकटी है। व्यक्टियों का रूझाण किश ओर है? वर्टभाण परिश्थिटियॉ शभाज को
        किधर ले जायेगी ? अगले 10 वर्स भें विधालयों भें छाट्रों की शंख़्या किटणी हो
        जायेगी ? इश प्रकार के अध्ययण उपणटि अध्ययण कहे जाटे हैं ।

        अट: वर्णणाट्भक अणुशंधाण भें वर्टभाण हालाटों केा रिकार्ड किया जाटा
        है। शाथ ही उणका वर्णण व विश्लेसण भी किया जाटा है टथा शभुछिट व्याख़्या
        भी की जाटी है। इश प्रकार के शोध अपरिछलिट छरों (non-manipulation
        variable) के बीछ के शभ्बण्धों का शाधारण का शाभाण्य परिश्थिटि भें विश्लेसण
        किया जाटा है। इश प्रकार का शोध भुख़्यट: ‘क्या है’ शे शभ्बण्धिट है। यह इशी
        ‘क्या है ‘ का वर्णण और व्याख़्या करटा है।

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