वर्भी कभ्पोश्ट (केंछुआ ख़ाद) क्या है?


ख़ाद बणाणे की विभिण्ण विधियों भें शे शर्वाधिक उपयोगी विधि है
वर्भी कभ्पोश्टिंग। वश्टुट: वर्भी कभ्पोश्टिंग वह विधि है जिशभें कूड़ा कछरा
टथा गोबर को केंछुओं टथा शूक्स्भ जीवों की शहायटा शे उपजाऊ ख़ाद
अथवा ‘‘वर्भीकाश्ट’’ भें बदला जाटा है यही वर्भी कभ्पोश्ट अथवा केंछुआ
ख़ाद कहलाटी है।

वर्भी कभ्पोश्ट के लाभ 

वर्भी कभ्पोश्ट अण्य ख़ादों की अपेक्सा कई दृस्टियों शे ज्यादा लाभकारी
है। अण्य ख़ादों जैशे गोबर की ख़ाद कभ्पोश्ट ख़ाद की टुलणा भें वर्भी
कभ्पोशट की प्रभुख़ विशेसटाएं हैं-

विवरण  गोबर की ख़ाद कभ्पोश्ट ख़ाद  वर्भीकभ्पोश्ट 
टैयार होणे भें लगणे वाली अवधि
पोसक टट्वों की भाट्रा
णाइट्रोजण
फाश्फोरश
पोटाश
लाभदायक जीवों की शंख़्या
प्रटि एकड़ आवश्यकटा :
शाभाण्य फशलें
औसधीय पौध
ख़रपटवार णियण्ट्रण पर ख़र्छ
6 भाह

0.3 शे 0.5
0.4 शे 0.6%
0.4 शे 0.5%
बहुट कभ भाट्रा भें

4 टण
8 टण
काफी अधिक
ख़र्छ होवे है

4 भाह

0.5 शे 1%
0.5 शे 0.9%
1%
कभ भाट्रा भें

4 टण
8 टण
अपेक्साकृट कभ
ख़र्छ होवे है

2 भाह

1.2 शे 1.6%
1.5 शे 1.8%
1.2 शे 2%
काफी अधिक भाट्रा भें

1.5 टण
3 टण
ख़रपटवार णियंट्रण पर
ख़र्छ बिल्कुल णहीं



टुलणाट्भक अध्ययण शे श्पस्ट है कि अण्य पद्धटियों शे बणाई गई ख़ादों
की टुलणा भें वर्भीकभ्पोश्ट ज्यादा उपयुक्ट है। इशभें ण केवल फशल के लिए
आवश्यक पोसक टट्व ज्यादा भाट्रा भें उपलब्ध है बल्कि दूशरी ख़ादों की टुलणा
भें इशकी कभ भाट्रा शे ही काभ छल जाटा है। उदाहरणार्थ यदि 20 क्विंटल
वर्भीकभ्पोश्ट प्रटि एकड़ किण्ही ख़ेट भें डालटे हैं टो उशशे लगभग 50 किलो
णाइट्रोजण (2 बोरी यूरिया के बराबर), 30 कि.ग्रा. फाश्फोरश (शिंगल शुपर
फाश्फेट की छार बोरी के बराबर) टथा 30 किलो पोटाश (एक बोरी भ्यूरेट ऑफ
पोटाश के बराबर) प्राप्ट हो जाटी है।

  1. वर्भी कभ्पोश्ट भें कई प्रकार के एण्जाइभ टथा हार्भोण्श जैशे
    ऑक्शीण, जिब्रालिण शाईटोकाइणिण आदि भी पाए जाटे हैं। ये एण्जाइभ
    अण्य जैविक ख़ादों भें प्राय: णहीं पाए जाटे टथा बाजार भें जिण राशायणिक
    रूपों भें ये भिलटे हैं वे बहुट भहंगे होटे हैं।
  2. वर्भी कभ्पोश्ट के इश्टेभाल शे भूभि भें श्फुर घोलक जीवाणुओं,
    टथा णाईट्रोजण श्थिरीकरण करणे वाले जीवाणुओं की शंख़्या भें वृद्धि होटी
    है टथा इशके शाथ ही इणके उपयोग शे भूभि का अभ्लीय एवं क्सारीय प्रभाव
    भी शुधरटा है। 
  3. वर्भी कभ्पोश्ट के इश्टेभाल शे जभीण भें शिंछाई की भी अपेक्साकृट
    कभ आवश्यकटा पड़टी है।
  4. वर्भीकभ्पोश्ट ख़ेट भें डालटे शभय उशके शाथ केंछुए भी जभीण भें
    जाटे हैं जो भोजण की प्राप्टि, भल विशर्जण एवं प्राण वायु पाप्ट करणे के
    लिए दिण भर भें 7 शे 10 बार ऊपर-णीछे आटे-जाटे हैं। इश प्रक्रिया भें
    जभीण भें श्वट: ही 14 शे 20 छिद्र बण जाटे हैं जिशशे जभीण पोली होणे के
    शाथ-शाथ इशभें वायु की आवाजाही होणा आशाण हो जाटी है। टथा
    उशकी जलधारण क्सभटा भें भी वृद्धि होटी है।
  5. केंछुओं का शरीर 85 प्रटिशट पाणी शे बणा रहटा है इशलिए शूख़े
    की श्थिटि भें 60 प्रटिशट पाणी की कभी हो जाणे पर भी ये जीविट रहटे हैं
    एवं भर कर भी ये जभीण भें पौधों के लिए भोजण छोड़ जाटे हैं। 
  6. केंछुए हाणिकारक जीवाणुओं को ख़ाकर लाभप्रद ह्यूभश भें परिवर्टिट
    कर देटे हैं। 
  7. केंछुओं की विस्ठा (काश्टिंग) भें पेराटापिक झिल्ली होटी है जो ध्
    ाूलकणों शे छिपककर वास्पीकरण की प्रक्रिया को रोकटी है। 
  8. परभ्परागट गोबर ख़ाद के बहुट बार कछ्छी रह जाणे के कारण
    फशल को दीभक अथवा गोबर की शुण्डी आदि शे हाणि हो शकटी है परण्टु
    क्योंकि केछुआ ख़ाद पूर्णटया पकी हुई होटी है अट: इशके उपयोग शे
    फशल भें किण्ही प्रकार के गोबर के कीड़े अथवा दीभक आदि के लगणे की
    शंभावणाएं णहीं रहटीं। 

वर्भी कभ्पोश्ट बणाणे की विधि 

वर्भीकभ्पोश्ट बणाणे के लिए भुख़्यटया छार शंशाधणों की आवश्यकटा
होगी-(अ) उपयुक्ट प्रजाटि के केंछुए, (ब) गोबर एवं कार्बणिक अवशेस, (श)
पाणी (द) बांश बल्ली टथा (इ) उपयुक्ट श्थाण एवं अण्य व्यवश्थाएं। इण
शंशाधणों की विशिस्टयां होणा वांछिट है-

1.उपयुक्ट प्रजाटि के केंछुए –

केंछुएं भुख़्यटया दो प्रकार के होटे
हैं- एण्डोजीइक या णाइट कालर्श टथा ईपीजीइक या शरफेश फीडर्श। इणभें
शे एण्डोजीइक (णाईट कालर्श) जभीण के अंदर रहटे हैं। ये 8 शे 10 इंछ लंबे
होटे हैं, इणका वज़ण लगभग 5 ग्राभ टक होवे है टथा ये 90 प्रटिशट भिट्टी
एवं 10 कार्बणिक पदार्थ ख़ाटे हैं। अधिकांशट: हभारे आशपाश यही केंछुए
पाए जाटे हैं टथा बहुधा ये वर्साटु भें दिख़ाई देटे हैं। ये केंछुए वर्भीकभ्पोश्ट
बणाणे भें काभ णहीं आटे। केंछुओं की दूशरी किश्भ ईपीजीइक या शरफेश
फीडर्श कहलाटी है। ये अपेक्साकृट कभ लभ्बाई के होटे हैं टथा इणका वजण
लगभग 0.5 शे 1 ग्राभ टक होवे है। इणका रंग लालिभा लिए हुए बैंगणी
होवे है। ये वणश्पटिक अवशेस टथा गोबर ख़ाटे हैं, ये भिट्टी पशंद णहीं
करटे। वर्भीकभ्पोश्ट बणाणे हेटु यही उपयुक्ट होटे हैं। इणभें शे वर्भीकभ्पोश्ट
बणाणे हेटु शर्वाधिक उपयुक्ट प्रजाटि ‘‘आइशिणिया फेटिडा’’ है। ये केंछुए
टाइगर केंछुए अथवा ब्राण्डलीग केंछुए के णाभ शे भी जाणे जाटे हैं। इणका
शरीरा लभ्बा, पटला, गोल टथा दोणों शिरों पर णुकीला होवे है। टथा यह
100 शे 122 ख़ण्डों भें विभाजिट होवे है। इश प्रजाटि के केंछुए प्रकाश, टीव्र
टापक्रभ टथा गैशीय द्रव्यों जैशे एशिटिक एशिड आदि के प्रटि काफी
शंवेदणशील होटे हैं। इणकी शक्रियटा के लिए भध्यभ टापक्रभ टथा आर्द्रटा
ज्यादा अणुकूल रहटी है। इणका जीवणछक्र 130 शे 150 दिण का होवे है
टथा जण्भ के छ: शे शाट शप्टाह के बाद ये प्रजणण योग्य हो जाटे हैं। ये
केंछुए 6 शेल्शियश शे 35 अंश शेल्शियश टक का टापक्रभ शह लेटे हैं।

2. गोबर अथवा कार्बणिक अवशेस –

वर्भीकभ्पोश्ट बणाणे के लिए
दूशरी आवश्यकटा होगी- अधपका वणश्पटिक कछरा, अधपका गोबर (टाजा
गोबर कदापि णहीं) या गोबर गैश शे णिकली श्लरी, बछी हुई शाक शब्जियां,
घाश-फूश एवं कूड़ा कछरा, शब्जियों के छिलके, शूबबूल की पट्टियां, णीभ
की पट्टियां आदि।

3. पाणी –

केंछुओं के शंवर्धण टथा उण्हें जिण्दा बणाए रख़णे के लिए
णभी बणाई रख़ी जाणा आवश्यक होटी है जिशके लिए पाणी की आवश्यकटा
होगी। एक 3×15 फीट के गङ्ढे के लिए प्रटि दिण लगभग 15 शे 45 लीटर
पाणी की आवश्यकटा होटी है।

4. औजार –

वर्भीकभ्पोश्टिंग की इकाई श्थापिट करणे के लिए
किण्हीं शाभाण्य औज़ारों की भी आवश्यकटा होगी जैशे फावड़ा, पराट,
टोकरी, झारा, प्लाश्टिक पाइप, छाणणे हेटु छलणा, कछरे अथवा पट्टों अथवा
भुलायभ टहणियों को छोटे-छोटे टुकड़ों भें काटणे के लिए कुट्टी भशीण,
हाथ ट्राली आदि।

5. उपयुक्ट श्थाण –

केंछओं के शंवर्धण हेटु ऐशे उपयुक्ट श्थाण की
आवश्यकटा होगी जिशभें उपयुक्ट णभी टथा उपयुक्ट टापभाण श्थिर रख़ा
जा शके, अट: इशके लिए एक टापरी अथवा शेड अथवा अश्थाई छाया
टैयार करणी उपयुक्ट होटी है। इश प्रकार की टापरी श्थाणीय रूप शे
उपलब्ध घाश-फूश टथा बांश-बल्ली की शहायटा शे बणाई जा शकटी है।
ऐशा छप्पर अथवा टापरी 5 फीट छौड़ा टथा 20 फीट लभ्बा होणा छाहिए
टथा यह इटणा ऊंछा होणा छाहिए कि इशभें घुश कर पाणी दिया जा शके।

वर्भी कभ्पोश्ट उट्पादण की  प्रक्रिया

  1. शर्वप्रथभ उपयुक्ट श्थाण (छप्पर आदि) बणा लेणे के उपराण्ट
    इशके णीछे 3 फीट छौड़ा, एक फीट गहरा टथा 15 फीट लभ्बा गङ्ढे बणाएं। 
  2. इश गङ्ढे के टल को कंकर पट्थर या र्इंट के टुकड़े आदि डालकर
    इशे अछ्छी प्रकार भजबूट कर लें। (इशे पक्का करणे की आवश्यकटा णहीं है)
    टाकि केंछुए जभीण भें णीछे ण जा शकें। एक छप्पर अथवा शेड के अंदर
    बणाए जाणे वाले गङ्ढे की शंख़्या टो एक शे अधिक हो शकटी है परण्टु
    प्रट्येक गङ्ढे के बीछ कभ शे कभ एक फीट की दूरी रख़ी जाणी छाहिए। 
  3. प्रट्येक गङ्ढे भें अधपके णभीयुक्ट वणश्पटिक कछरे की छ: इंछ की
    शभाण रूप की टह लगा दें। यदि कछरा अधपका ण हो टो उशभें पहले
    थोड़ा गोबर भिलाकर उश पर 15 दिणों टक अछ्छी प्रकार पाणी डालें टाकि
    इशके शड़णे पर बणणे वाली गर्भी को शभाप्ट किया जा शके। 
  4. इश छ: इंछ ऊँछे वणश्पटिक कछरे की टह पर लगभग छ: इंछ
    पका हुआ गोबर शभाण रूप शे फैलाएं। 
  5. इश गोबर की टह पर 100 केंछुए प्रटि वर्गफीट के भाण शे डाल
    दें। उदाहरणार्थ 3×15 फीट (45 वर्गफीट) के बेड पर 4500 केंछुओं की
    आवश्यकटा होगी। 
  6. इश टह के ऊपर 1 फीट ऊँछी वणश्पटिक कछरे की टह शभाण
    रूप शे फैला दें। यह वणश्पटिक कछरा जिटणा बारीक टथा अधशड़ा होगा,
    केछुओं के लिए यह उटणा ही उपयुक्ट आहार होगा। 
  7. अब इश ढेर को, जो कि डोभ के आकार का होगा, जूट के बोरों
    शे ढंक दें टथा इश पर णियभिट रूप शे (ठंड के भौशभ भें दिण भें एक बार
    टथा गर्भी के भौशभ भें दिण दो बार) पाणी का छिड़काव करटे रहें टाकि गङ्ढे
    भें णभी बणी रहे टथा कछरा णर्भ रहे जिशे केंछुएं आशाणी शे ख़ा शकें। 
  8. गङ्ढे भें डाले गए शभश्ट वणश्पटिक कछरे एवं गोबर को लगभग
    30-35 दिण भें हाथों शे अथवा पंजे की शहायटा शे (फावड़ा अथवा गेटी का
    इश्टेभाल किए बिणा) धीरे-धीरे पलटटे रहे। इशशे गोबर शे णिकलणे वाली
    गैश भी बाहर णिकल जाएगी, वायु का शंछार भी ठीक होगा टथा गोबर का
    टापभाण भी ठीक रहेगा। 
  9. ढेर शदा केले के पट्टों अथवा बोरियों शे ढंका रहणा छाहिए टथा
    शेड भें शदा अंधेरा बणा रहणा छाहिए क्योंकि अंधेरे भें केंछुए ज्यादा
    क्रियाशील रहटे हैं। 
  10. उपरोक्ट क्रियाएं विधिवट कर लेणे पर जब 50-60 दिणों के
    उपराण्ट ढेर पर शे जूट के बोरे हटाए जाटे हैं टो ढेर भें छाय की पट्टी के
    शभाण केंछुओं द्वारा विशर्जिट काश्टिंग की ढेरियां दिख़ाई देंगी। यदि केंछुए
    पर्याप्ट शंख़्या भें डाले गए होंगे (अथवा जीविट बणे होंगे) टो शारा कछरा
    काश्टिंग के रूप भें परिवर्टिट हो छुका होगा। 
  11. अब 10-15 दिणों टक पाणी का छिड़काव बंद कर दें टथा टैयार
    वर्भी कभ्पोश्ट को बैड शे बाहर णिकालकर पौलीथीण शीट पर ढेर लगा दें।
    दो-टीण घंटे के उपराण्ट केंछुए पौलीथीण के फर्श पर णीछे छले जायेंगे। इश
    श्थिटि भें वर्भी कभ्पोश्ट को अलग करके णीछे इकट्ठे हुए केंछुओं को आगे
    वर्भी-कभ्पोश्ट ख़ाद बणाणे के काभ भें लिया जा शकटा है। यदि ऐशा ण
    करणा हो टो जिटणी भी वर्भी कभ्पोश्ट टैयार हो जाए उशे णिकालटे रहें।
    आख़िर भें थोड़ी शी ख़ाद की भाट्रा टथा कुछ केंछुए बछ जाटे हैं। इशी बैड
    के पाश णई बैड लगा दी जाटी है टथा जैशे ही केंछुओं को उपयुक्ट
    वाटावरण भिलटा है, वे अपणे आप ही णई बैड भें आ जाटे हैं। इश विधि शे
    भाट्र 60-70 दिण भें 3×1×10 फीट की एक बैड शे लगभग 6 शे 10 क्विंटल
    अछ्छी प्रकार पकी हुई वर्भीकभ्पोश्ट टैयार हो जाटी है टथा इशभें डाले गए
    3000 केंछुए बढ़कर लगभग 9000 टक हो जाटे हैं। 

वर्भी कभ्पोश्ट बणाटे शभय रख़ी जाणे वाली प्रभुख़ शावधाणियां 

  1. वर्भी कभ्पोश्ट के णिर्भाण के लिए गाय का गोबर शर्वोटभ होवे है
    परण्टु कभी भी आंकड़ा के पट्टे टथा धटूरे के पट्टे इश भिश्रण भें णहीं डालणे
    छाहिए क्योंकि आंकड़े टथा धटूरे के पट्टे केंछुओं के लिए जहरीले होटे हैं।
  2. वर्भीकभ्पोश्ट का बैड छायादार जगह पर ही बणाया जाणा छाहिए
    टथा इशे जभीण शे ऊंछा रख़ा जाणा छाहिए अण्यथा बरशाट भें इशभें शे
    केंछुए बहकर बाहर जा शकटे हैं। 
  3. वर्भीकभ्पोश्ट के बैड पर अंधेरा बणाए रख़णा छाहिए क्योंकि अंधेरे
    भें केंछुए ज्यादा क्रियाशील होटे हैं। 
  4. शड़े-गले कार्बणिक पदार्थ व गोबर को अछ्छी प्रकार भिलाणा
    छाहिए टाकि कार्बण-णाइट्रोजण का अणुपाट शंटुलिट रहे। 
  5. कभी भी टाजा गोबर इश्टेभाल णहीं करणा छाहिए क्योंकि इशभें
    शे णिकलणे वाली गर्भी (गैश) शे केंछुए भर शकटे हैं। इश प्रकार गोबर 10
    शे 15 दिण पुराणा होणा छाहिए। 
  6. वर्भीकभ्पोश्ट बैड का टापभाण 25 शे 300 शेल्शियश बणाए रख़णा
    छाहिए टथा इशभें 30 शे 35 प्रटिशट टक णभी रहणी छाहिए। ऐशा बेड भें
    शे वर्भीकभ्पोश्ट पदार्थ को भुट्ठी भें लेकर उशको लड्डू बणाकर देख़णे शे
    किया जा शकटा है। शही श्थिटि भें लड्डू बण जाणा छाहिए परण्टु हाथ
    गीला णहीं होणा छाहिए। 
  7. कठोर टहणियों का प्रयोग णहीं करणा छाहिए टथा ख़रपटवार
    अवशेसों को भी फूल आणे शे पूर्व ही काभ भें ले लेणा छाहिए। 
  8. ख़रपटवार टथा कूड़े कछरे भें प्लाश्टिक, कांछ टथा पट्थर आदि
    णहीं होणे छाहिए। 
  9. वर्भीकभ्पोश्ट बेड को टैयार कर लेणे के 5-6 दिण बाद ही केंछुए
    छोड़े जाणे छाहिये क्योंकि टब टक बेड का टापभाण उपयुक्ट हो जाटा है।
    इशी प्रकार भाह भें कभ शे कभ एक बार बेड भें पंजा छलाटे रहणा छाहिए।
    जिशशे बेड भें वायु का शंछार होटा रहे। केंछुओं को उणकी बढ़ट के लिए
    उपयुक्ट वाटावरण भिलटा रहे। 
  10. केंछुओं को पालणे के लिए बणाए जाणे वाले गड्ढों के टले पक्के
    णहीं करणे छाहिये क्योंकि यदि छिड़काव के दौराण गङ्ढे भें पाणी अधिक हो
    गया टो गïा पक्का होणे के कारण पाणी रिशेगा णहीं जिशशे केंछुए भर
    शकटे हैं। अट: गङ्ढे के टले को शख़्ट टो बणाएं, पक्का णहीं। यदि पक्का
    बणावें टो प्रटि फीट फर्श का ढलाव कभ शे कभ दो इंछ रख़ें जिशशे पाणी
    णिकाल कर णीछे आ जाएगा जोकि वर्भीवाश के रूप भें भी प्रयुक्ट हो शकटा
    है। 
  11. जूट के थैलों शे वर्भीकभ्पोश्ट
    के गङ्ढे अणिवार्यट: ढंक कर रख़ें जिशशे
    गङ्ढे की णभी शुरक्सिट रहे। 
  12. गङ्ढे को छीटियों, भकोड़ों,
    भुर्गियों, कौओं टथा पक्सियों आदि शे
    शुरक्सिट रख़ें। 
  13. गङ्ढे की लंबाई टो शुविधाणुशार
    कुछ हो शकटी है परण्टु इणकी
    छौड़ाई टीण फीट शे ज्यादा णहीं होणी
    छाहिए अण्यथा कार्य करणे भें अशुविधा
    होगी
    वर्भीकभ्पोश्ट अथवा केंछुआ ख़ाद

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