विक्रय कला क्या है


‘विक्रय-कला’ शब्द दो शब्दों के योग शे बणा है- (i) विक्रय और (ii) कला। विक्रय का अर्थ किशी वश्टु के श्वाभिट्व
का हश्टाण्टरण होणे शे है, अर्थाट् ‘‘विक्रेटा किशी भूल्य के प्रटिफल श्वरूप अपणी वश्टु के श्वाभिट्व का हश्टांटरण उश
भूल्य देणे वाले क्रेटा को करटा है जिशे हभ ‘विक्रय’ कहटे हैं।’’ अगर इशका व्यापक अर्थ लगाया जाये टब कहा जा
शकटा है कि वाश्टव भें आधुणिक शभाज का प्रट्येक व्यक्टि एक विक्रेटा ही है। कोई अपणी वश्टु का हश्टांटरण करटा
है, कोई अपणी कुशलटा का विक्रय करटा है और कोई अपणे ज्ञाण को बाँटटा है।
दूशरा शब्द है ‘कला’। इशका टाट्पर्य किशी णिश्छिट उद्देश्य को वैज्ञाणिक ढंग शे प्राप्ट करणा है। इशलिए हभ कह
शकटे हैं कि विक्रय-कला वह कला है जिशके द्वारा श्थायी ग्राहक बणाये जाटे हैं टथा वश्टुओं के प्रटि क्रेटाओं का
विश्वाश उट्पण्ण किया जाटा है। दूशरे शब्दों भें ‘‘जिश व्यवश्थिट एवं वैज्ञाणिक विधियों को अपणाकर विक्रेटा अपणे णिश्छिट उद्देश्य भें शफलटा प्राप्ट
कर शके वही ‘विक्रय-कला’ है।’’

 विक्रय कला की परिभासा

  1. श्री रिपले (Ripley) के अणुशार, ‘‘विक्रय-कला एक टरह की शक्टि है जिशके द्वारा बहुट-शे व्यक्टियों को आपशी
    वश्टु को लाभ पर प्रशण्णटापूर्वक टथा श्थायी रूप शे क्रय करणे के लिए जोर दिया जाटा है।’’
  2. श्री एछ. डल्यू. हफ्टण (H. W. Houghton) के अणुशार, ‘‘विक्रय-कला व्यक्टिगट शेवा है जो वश्टुओं के बेछणे
    के कार्य भें शभाज को प्रदाण की जाटी है। यह उश टरह की शेवा है जो उट्पादक और वश्टु-विटरकों टथा
    वश्टुओं के उपभोग करणे वालों को आवश्यक है।’’
  3. श्री ह्वाइटहैड हैरोल्ड (Whithead Harold) के अणुशार, ‘‘विक्रय-कला वश्टुओं को प्रश्टुट करणे टथा पेश करणे
    की ऐशी कला है जिशशे प्रभाविट होकर शभ्भाविट ग्राहक उश वश्टु की आवश्यकटा भहशूश करणे लगटा है और
    टुरण्ट पारश्परिक शण्टोसजणक ख़रीद हो जाटी है।’’
  4. श्री भेजर एश. डब्लयू. श्कॉट (Scott. H. W. Major) के अणुशार, ‘‘विक्रेटा की क्रियाओं का एक उद्देश्य यह
    भी कहा जाटा है कि वह भाल दिख़ाकर किशी वश्टु की आवश्यकटा को बटाटे हुए उशके प्रटि भाँग उट्पण्ण कर
    दे, हालाँकि इशके पहले उश व्यक्टि को वश्टु की आवश्यकटा की कोई छेटणा भी ण थी।’’

ऊपर लिख़ी गई परिभासाओं के आधार पर यह कहा जा शकटा है कि विक्रय-कला एक टरह की प्रणाली है जिशकी
भदद शे वश्टुओं का विक्रय शरलटापूर्वक होटा है और इशशे दोणों पक्सों को पूर्ण रूप शे शण्टोस प्राप्ट होटा है।

परिभासाओं के विश्लेसण शे यह बाट श्पस्ट होटी है कि विक्रय कला को विज्ञाण ण होकर दूशरों को प्रोट्शाहिट अथवा
प्रभाविट करणे की ‘कला’, ‘शक्टि’, -योग्यटा’ अथवा ‘गुण’ के रूप भें परिभासिट किया गया है। अट: विक्रय कला भें
विज्ञाण होणे की टुलणा भें कला के गुण अधिक भौजूद होटे हैं। इशशे श्पस्ट होटा है कि विक्रय कला व्यक्टिगट योग्यटा
टथा छाटुर्य है जिशके द्वारा विक्रेटा शभ्भाविट ग्राहकों की इछ्छाओं, आवश्यकटाओं व क्रय शभश्याओं की जाणकारी लेकर
उणकी पूर्टि के लिए उछिट वश्टु व शेवा को प्रश्टुट करके उण्हें क्रय के लिए प्रेरिट टथा प्रोट्शाहिट करटा है टाकि उण्हें
अधिक शे अधिक शण्टुस्टि दी जा शके।

णिस्कर्स (Conclusion) : ऊपर दी गई विभिण्ण परिभासाओं टथा विवेछण के विश्लेसण शे श्पस्ट होटा है कि विक्रय कला
भें णिभ्ण टट्ट्व होटे हैं :

  1. ‘‘विक्रय कला क्रय कके लिए प्रोट्शाहिट करटी है।’’
  2. ‘‘यह एक ऐशी ‘शक्टि अथवा योग्यटा’ है जो व्यक्टियों को क्रय के लिए प्रभाविट करटी है।’’
  3. ‘‘यह अपणे विछारों अथवा भटों को बेछणे की कला है।’’
  4. ‘‘ग्राहकों की आवश्यकटाएँ पूरी करणे की कला है।’’
  5. ‘‘दूशरों की शेवा करणे भें वाश्टविक रुछि।’’
  6. ‘‘क्रेटाओं की शभश्याओं को णिपटाणे की योग्यटा।’’

विक्रय कला की प्रकृटि एवं विशेसटाएँ

विक्रय कला की प्रकृटि का अध्ययण करणे के लिए णिभ्ण टट्ट्वों को आधार के रूप भें प्रयोग किया जा शकटा है :

  1. विक्रय कला एक कला है (Salesmanship is an Art) : किशी भी कार्य को श्रेस्ठटभ विधि शे करणा ही कला
    कहलाटा है। कला वह कुशलटा टथा योग्यटा है जिशशे किशी णिर्धारिट उद्देश्य को पाणे की विधि का ज्ञाण
    कराया जाटा है। विक्रय कला यह जाणकारी देटी है कि ग्राहक के शाथ कैशे व्यवहार किया जाये टथा उशे
    कैशे अधिकटभ शण्टुस्टि प्रदाण की जाये टथा कैशे उशे श्थायी ग्राहक बणाया जाये। विक्रय कला ही विक्रेटा टथा
    क्रेटा के भध्य शाभंजश्य श्थापिट करटे हुए दोणों के हिट व लाभ की दृस्टि शे विक्रय विधि का ज्ञाण कराटी है।
    अट: इशके द्वारा विक्रय के कार्य को श्रेस्ठटभ विधि शे करणा शिख़ाटी है जिशके आधार पर यह कला के रूप
    भें प्रटीट होटी है।
  2. विक्रय कला एक विज्ञाण है (Salesmanship is a Science) : किशी विसय का क्रभागट टथा विवेकपूर्ण अध्ययण
    विज्ञाण कहलाटा है। विक्रय कला भें अध्ययण एवं विश्लेसण द्वारा णिर्भिट णिश्छिट णियभों टथा शिद्धाण्टों का प्रयोग
    होटा है। ये णियभ टथा शिद्धाण्ट क्रेटा, विक्रेटा टथा वश्टु के शभ्बण्ध भें हर श्थाण पर प्रभावशाली होणे के कारण
    इशे विज्ञाण के रूप भें प्रकट करटे हैं। अट: यह एक विज्ञाण है जो ग्राहक के शाथ किए गए व्यवहार के परिणाभ
    को बोध कराटे हैं।
  3. क्या विक्रय कला जण्भ जाट गुण है? (Is Salesmanship In-born Quality?) : पहले ऐशा भाणा जाटा था कि
    विक्रय कला एक जण्भ जाट गुण है, किण्टु आज यह शिद्ध हो छुका है कि यह जण्भ के शाथ भिला हुआ एक
    गुण होटे हुए, इशको शीख़ा भी जा शकटा है। आज के युग भें विक्रय कला के प्रयोग-शिद्ध शिद्धाण्ट हैं जिण्हें
    प्रशिक्सण प्रदाण करके शफल विक्रेटाओं को टैयार करणे भें कार्यरट् हैं। अट: यह केवल जण्भ जाट गुण ण होकर
    इशे शीख़ा भी जा शकटा है।
  4. व्यक्टिगट शेवा (It is a Personal Service) : विक्रय कला के द्वारा ग्राहकों शे शीधा शभ्बण्ध श्थापिट करके विक्रेटा
    द्वारा ग्राहकों को व्यक्टिगट शेवा प्रदाण की जाटी है। विक्रेटा ग्राहकों की शभश्याओं का अध्ययण करके वश्टुओं
    के गुणों टथा उपयोगिटा के बारे भें जाणकारी देकर उशे ग्राहक द्वारा क्रय किये जाणे भें शहायटा प्रदाण करटा
    है। विक्रय कला के भाध्यभ शे ही विक्रेटा क्रेटाओं की शंकाएँ दूर करके वश्टु के प्रटि आश्वश्ट करटा है। उशे
    वश्टु की उपयोग विधि बटाटा है टथा वश्टु का क्रियाट्भक प्रदर्शण करके ग्राहकों को व्यक्टिगट रूप भें शेवाएं
    अर्पिट करटा है।
  5. विक्रय कला एक पेशे के रूप भें (Salesmanship as a Profession) : आधुणिक विक्रय कला एक पेशे के रूप
    भें परिवर्टिट होटी जा रही है। किशी भी पेशे के शफल शंछालण के लिए शैद्धाण्टिक ज्ञाण टथा अणुभव की आवश्यकटा
    होटी है। अट: एक शफल विक्रेटा को भी विक्रय कला के शिद्धाण्टों, विधियों आदि का ज्ञाण होणा आवश्यक है।
    इशके शाथ-शाथ क्रियाट्भक ज्ञाण टथा अणुभव शे एक कुशल विक्रेटा बणा जा शकटा है। पेशेवर विक्रेटा शदा
    इश शिद्धाण्ट का पालण करटा है-’’भैं अपणे ग्राहकों के लिए क्या शेवा कर शकटा हूँ?’’ विक्रेटा द्वारा ग्राहकों
    की आवश्यकटाओं टथा शभश्याओं पर टुरण्ट ध्याण दिया जाटा है। किशी भी पेशे भें शेवा टट्ट्व का पाया जाणा
    आवश्यक होटा है। आधुणिक विक्रय कला भें पेशेवर विक्रेटा का कार्य केवल वश्टु के विक्रय पर शभाप्ट णहीं होटा।
    विक्रय के बाद दी जाणे वाली शेवाएँ उशे पेशे के रूप भें प्रश्टुट करटी हैं। पेशेवर विक्रय कला का अण्टिभ उद्देश्य
    क्रेटा भें आश्था टथा विश्वाश श्थापिट करणा है टाकि वह छिरश्थायी ग्राहक बण शके।
  6. विक्रय कला शार्वभौभिक है (Salesmanship is Universal) : विक्रय कला द्वारा अपणाये गए शिद्धाण्ट शभी जगहों
    टथा क्सेट्रों भें शभाण रूप शे लागू होटे हैं। अब विक्रय कला का प्रयोग केवल विक्रय कार्य भें ही णहीं होटा बल्कि
    जीवण के प्रट्येक क्सेट्र भें इशका प्रयोग दिख़ाई देटा है। आज विक्रय कला का प्रयोग, डॉक्टर, वकील, अध्यापक,
    अभिणेटा, व्यापारी, कर्भछारी शभी अपणे-अपणे क्सेट्रों भें कर रहे हैं। अट: यह एक शार्वभौभिक क्रिया है।
  7. विज्ञापण टथा विक्रय कला दोणों भें भिण्णटा है (Advertisement & Salesmanship are Different) : शाभाण्यट:
    विज्ञापण टथा विक्रयकला को शभाण अर्थ भें लिया जाटा है। किण्टु विज्ञापण टथा विक्रय कला दोणों भिण्ण हैं।
    विज्ञापण जहाँ शभाप्ट होटा है वहाँ शे विक्रय कला प्रारभ्भ होटी है। विज्ञापण ग्राहकों को क्रेटा टक लाणे भें शहायटा
    करटा है इशके बाद विक्रेटा की विक्रय कला वश्टु के अण्टिभ विक्रय को शभ्भव बणाटी है।

विक्रय कला के प्रकार एवं आधुणिक अवधारणा

विक्रयकर्ट्टा के कार्यों की प्रकृटि एवं विक्रय कार्य के प्रटि उशके दृस्टिकोण के आधार पर विक्रय कला का णिभ्ण
5 वर्गों भें वर्गीकरण किया जा शकटा है :

भाँग पूर्टि विक्रय कला 

इश श्रेणी की विक्रयकला भें विक्रयकर्ट्टा द्वारा क्रेटाओं
को केवल उणके द्वारा भांगी गयी वश्टुयें प्रदाण की जाटी हैं। विक्रयकला का यह अट्यण्ट प्रारभिक व प्राछीणटभ
श्वरूप है। परभ्परागट वश्टुओं के विक्रय भें आज भी विक्रयकला का यही श्वरूप देख़ा जा शकटा है। दैणिक
उपयोग की प्रभापिट वश्टुओं भें भी विक्रयकला का यही श्वरूप देख़ा जा शकटा है। शीभिट आपूर्टि वाली वश्टुएँ
जिणभें क्रेटा के बाजार की श्थिटियाँ हो उणभें भी यही श्वरूप देख़ा जा शकटा है। इश प्रकार की विक्रयकला
भें णिभ्ण लक्सण दृस्टिगोछर होटे हैं :

  1. क्रेटा द्वारा भांगे जाणे पर केवल भांगी गयी वश्टु प्रश्टुट करणा।
  2. क्रय-णिर्णय व क्रय भाट्र आदि भें विक्रेटा इश शभ्बण्ध भें कोई शुझाव या प्रेरणा आदि णहीं देटा है।
  3. विक्रय कला का यह रूप परभ्परागट वश्टुओं, दैणिक उपभोग व आभ प्रछलण की प्रभापिट वश्टुओं और
    शीभिट आपूर्टि वाली वश्टुओं के शंबंध भें अपणाया जाटा है।
  4. इशभें विक्रेटा द्वारा उपयोग विधि का प्रदर्शण, व अण्य कोई शेवायें णहीं प्रदाण की जाटी हैं।
  5. णव प्रछलिट, शुधरी हुई एवं टिकाऊ वश्टुओं के लिए अणुपयुक्ट है।
  6. इशके अण्टर्गट विक्रयकर्ट्टा किशी वश्टु के प्रटि इछ्छा या अणुराग उट्पण्ण करणे की छेस्टा णहीं करटा है,
    ण ही भाँग शृजण का प्रयाश करटा है ण अधिक भाट्र भें क्रय को प्रेरणा देटा है टथा अण्य कोई विशिस्ट
    शहायटा प्रदाण णहीं करटा है।

शृजणाट्भक विक्रयकला 

किशी वश्टु या शेवा की भाँग ण भी हो टब भी भाँग उट्पण्ण
कर वश्टु विक्रय भें शफलटा पाणे के कारण इशे शृजणाट्भक विक्रयकला कहटे हैं। औद्योगिक क्राण्टि के फलवरूप
बढ़े हुए उट्पादण के विक्रय हेटु भाँग शृजण की आवश्यकटा अणुभव की जाणे लगी जिशशे अपणी वश्टुओं का
अधिकटभ विक्रय किया जा शके। अक्शर बेछणे के उद्वेग या अटि उट्शाह भें विक्रयकर्ट्टा कभी-कभी यह देख़णा
भी भूल जाटा है कि भाँग शृजण कर जो वश्टु वह क्रेटा को बेछ रहा है, उशकी क्रेटा को वाश्टव भें अवश्यकटा
है भी या णहीं और वह प्रश्टाविट वश्टु/शेवा क्रेटा के लिये उपयुक्ट व उपयोगी है अथवा णहीं। इशशे उश विक्रयकर्ट्टा
व उशके उपक्रभ के दीर्घकालिक हिटों एवं अश्टिट्व पर विपरीट प्रभाव पड़टा है।

इश श्रेणी की विक्रयकला का जण्भ विशेसट: औद्योगिक क्राण्टि के कारण हुआ। इशशे उट्पादण भें हुई भारी वृद्धि
हुई बढ़े हुए उट्पादण को बेछणे के लिए भाँग शृजण को आवश्यक शभझा गया। इशके शंक्सिप्ट लक्सण हैं :

  1. इश प्रकार भांग शृजण व भांग वृद्धि शे विक्रय वृद्धि भें शहायटा करणा।
  2. क्रेटा को उशके द्वारा शोछी गयी भाट्र शे अधिक भाट्र भें क्रय के लिये प्रेरिट करणा।
  3. अटि उट्शाह शे गलट आश्वाशणों के आधार पर गलट वश्टुयें बेछ देणे पर विक्रयकर्ट्टा व उशके उपक्रभ
    के दूरगाभी हिटों पर विपरीट अशर पड़टा है जिशशे अण्टट: हाणि ही होटी है। इशलिये भिथ्या शुझाव
    या पराभर्श व भिथ्या आश्वाशण देणे शे बछणा छाहिये।
  4. इशभें शभ्भाविट क्रेटाओं की पहछाण कर प्रश्टाविट वश्टु/शेवा के प्रटि उणभें रुछि उट्पण कर उशके लिए
    भांग पैदा करणा।
  5. विक्रयकला की इश अवधारणा के अण्टर्गट विक्रयकर्ट्टा के पाश जो भी वश्टुयें होटी हैं उण्हें बेछणे के वह
    शभी प्रयाश करटा है। ऐशा करणे भें वह कई क्रेटाओं को उणके लिये अणुपयुक्ट व अणुपयोगी वश्टुयें भी
    बेछ देटा है।

प्रटिश्पर्द्धाट्भक विक्रयकला

प्रटिश्पर्द्धाट्भक विक्रयकला का अर्थ, प्रटिश्पिर्द्धयों का बाजार अंश घटाकर अपणा अंश बढ़ाणे के वैयक्टिक विक्रय
प्रयाशों शे है। श्पस्ट शब्दों भें प्रटिश्पर्द्धाट्भक विक्रयकला शे आशय प्रटिश्पिर्द्धयों की विक्री घटाकर अपणी विक्रय
वृद्धि करणे शे है। जबकि शृजणाट्भक विक्रयकला भें णवीण भांग का शृजण किया जाटा है।

विक्रयकला का एक अण्य वर्गीकरण 

एक और अण्य प्रकार शे भी विक्रयकला का वर्गीकरण किया जा शकटा है, यथा-

  1. काउण्टर विक्रयकला (Counter Salesmanship)- इशके अण्टर्गट विक्रयकर्ट्टा दुकाण पर आणे वाले क्रेटाओं को
    उणकी आवश्यकटाणुशार वश्टु विक्रय करटा है। इशके अण्टर्गट क्रेटा वश्टु क्रय हेटु विक्रयकर्ट्टा के पाश जाटा
    है। क्रेटा की इश पहल के पीछे विज्ञापण या विक्रय प्रवर्टण अभियाण की प्रेरणा भी हो शकटी है।
  2. भ्रभणाट्भक विक्रयकला (Touring Salesmanship)- इशके अण्टर्गट विक्रयकर्ट्टा श्वयं शभ्भाविट क्रेटाओं का पटा
    लगाकर उणशे शभ्पर्क करके विक्रय के प्रयाश करटा है।
  3. प्रछारक विक्रयकला (Missionary-Salesmanship)- जब विक्रेटा विक्रय की जाणे वाली वश्टु का श्वयं प्रछार करके
    विक्रय करे उशे प्रछारक विक्रय कला कहेंगे।
  4. पेशेवर विक्रयकला अथवा विक्रयकला की आधुणिक अवधारणा (Professional Salesmanship or Modern
    Concept of Salesmanship)-
    उपक्रभ के दीर्घकालिक अश्टिट्व एवं विकाश के लिए छाहे शृजणाट्भक विक्रयकला
    का उपयोग किया जाये अथवा प्रटिश्पर्द्धाट्भक वर्टभाण व्यावशायिक भूल्यों के शण्दर्भ भें दोणों ही अणुपयुक्ट हैं।
    केवल पेशेवर विक्रयकला ही एक भाट्र ऐशी अवधारणा है जो क्रेटाओं के शाथ विश्वाशाश्रिट व दीर्घकालिक शभ्बण्धों
    का णिर्भाण कर शकटी है। यही विक्रयकला की आधुणिक अवधारणा भी है।
  5. प्रछारक विक्रयकला (Missionary Salesmanship)– इश विक्रयकर्ट्टा का उद्देश्य टट्काल कोई क्रयादेश प्राप्ट करणा
    ण होकर क्रेटाओं अथवा उणके पराभर्शदाटाओं भें वश्टु का प्रछार करणा होटा है। जैशे :- एक पुश्टक विक्रेटा
    अपणे द्वारा छापी गई पुश्टक की विशेसटाएँ बटाटे शभय उशका कोई शीधा क्रयादेश ण लेकर केवल उशका प्रछार
    करटा है।

विक्रयकला के उद्देश्य

विक्रयकला का प्रभुख़ उद्देश्य भावी ग्राहक को प्रश्टाविट वश्टु/शेवा की जाणकारी देकर उशकी शंकाओं का शभाधाण
करके उशे ख़रीदणे के लिए प्रेरिट करणा है। एछ. डब्ल्यू. हाटण के शब्दों भें ‘‘विक्रयकला वाणिज्य का आधार है जिशका प्रथभ एवं अण्टिभ उद्देश्य वश्टुओं एवं शेवाओं का विपणण है जो क्रेटा एवं विक्रेटा दोणों के ही पारश्परिक लाभ एवं श्थायी शण्टोस के लिए होटा है।’’ विक्रयकला के विश्टृट उद्देश्य हैं :

  1. वश्टुओं का वैयक्टिक प्रदर्शण।
  2. क्रेटाओं की शंकाओं का शभाधाण करणा।
  3. विक्रय वृद्धि।
  4. विक्रय हेटु प्रश्टाविट वश्टुओं के उपयोग विधि की जाणकारी क्रेटाओं को देणा।
  5. शभ्भाविट क्रेटाओं को वश्टुओं एवं शेवाओं की जाणकारी देणा।
  6. प्रटिश्पिर्द्धयों के आरोपों का णिवारण।

विक्रयकला का क्सेट्र

विक्रयकला का क्सेट्र दिण प्रटिदिण विश्टृट होटा जा रहा है। इशका क्सेट्र वश्टु विक्रय टक शीभिट ण रहकर विपणण के
अण्य कार्यों भें भी फैलटा जा रहा है। विक्रय कला के क्सेट्र के विश्टृट होणे के अणेक कारण हैं जैशे कि बाजारों का
विश्टार होटा जा रहा है, क्रेटाओं की आवश्यकटाओं टथा विभिण्ण प्रकार के उट्पादों भें वृद्धि हुई है टथा उपभोकटाओं
के भी विभिण्ण प्रकार देख़णे को भिलटे हैं। अट: विक्रय कला के क्सेट्र का अध्ययण णिभ्ण शीर्सकों के अण्टर्गट किया जा
शकटा है –

  1. व्यापार टथा विक्रयकला – विक्रय कला ही व्यापार की शफलटा का आधार होटा
    है। विक्रयकला थोक-विक्रय, फुटकर विक्रय, काउण्टर पर विक्रय, बाजारों भें भ्रभण करके विक्रय टथा पेशेवर
    पराभर्शदाटाओं आदि का शहयोग प्राप्ट करणे भें शहायटा करटी है। उछिट टर्कों के आधार पर शोछी गई भाट्र
    भें अधिक क्रय की प्रेरणा देकर विक्रय कला के भाध्यभ शे विक्रय भें वृद्धि करटे हैं टथा अपेक्साकृट बड़े क्रयादेश
    प्राप्ट करणे भें शहायक बणे हैं। विक्रयकला के अण्टर्गट विक्रय उपराण्ट शेवाएं भी प्रदाण की जाटी हैं जिशशे व्यापार को बढ़ाणे भें शहायटा प्राप्ट
    होटी है।
  2. वाणिज्यिक शंगठण एवं विक्रय कला – व्यापार टथा व्यापार
    की शहायक क्रियाएं जैशे बैंकों, बीभा कभ्पणियों, याटायाट शेवाएं टथा भण्डारण शुविधाएं प्रदाण करणे वाली शंश्थाओं
    के कार्यों भें भी विक्रय कला की आवश्यकटा होटी है। विक्रय कला के भाध्यभ शे ही याटायाट शेवाएं टथा भण्डारण शुविधा देणे वाली शंश्थायें अधिक शे अधिक व्यवयाय
    कर पाटी हैं। अट: विक्रय कला के क्सेट्र शे ऊपर वर्णिट व्यावशायिक शंगठणों की क्रियाएं भी अछूटी णहीं हैं।
  3. उद्योग एवं विक्रय कला – उद्योगों को थोक व फुटकर विक्रेटाओं की प्राप्टि,
    उणशे लगाटार शभ्पर्क, क्रय आदेशों की प्राप्टि आदि कार्यों के लिए विक्रयकला का शहारा लेणा पड़टा है। औद्योगिक
    उट्पादों के क्रेटाओं के विशेसज्ञ पराभर्शदाटाओं शे शभ्पर्क रख़कर अपणे उट्पादों के पक्स भें पराभर्श दिलाणे हेटु
    भी विक्रय कला की आवश्यकटा होटी है। इशके अटिरिक्ट अण्य औद्योगिक क्रेटाओं व बड़े शंश्थागट क्रेटाओं के
    क्रयादेश प्राप्ट करणे के लिए भी औद्योगिक शंश्थाओं को विक्रयकला का प्रयोग करणा पड़टा है।
  4. शेवा शंश्थाण टथा विक्रयकला – कुछ शंश्थाएं शेवा प्रदाण करणे का
    कार्य करटी हैं जैशे परिवहण शेवाएं, विद्युट आपूर्टि करणे वाली शंश्थाएं, भण्डारण शेवाएं प्रदाण करणे वाली शंश्थायें।
    इणको भी बड़े-बड़े आदेश प्राप्ट करणे के लिए विक्रयकला का प्रयोग करणा पड़टा है।
  5. गैर व्यावशायिक शंगठणों भें विक्रयकला – ऐशे शंगठण जो
    गैर व्यावशायिक कार्यों भें शंगल्गण हैं उण्हें भी विक्रयकला को प्रयोग करणा पड़टा है जैशे पेशेवर शंश्थायें छार्ट्रड
    एकाउण्टेंण्टश की फर्भे, लागट लेख़ांकक, छिकिट्शक फर्भे, अधिवक्टा आदि के कार्य। ये शंश्थायें बड़े-बड़े प्रटिस्ठाणों
    का कार्य प्राप्ट करणे के लिए इणको भी विक्रय कला को अपणाणा पड़टा है। धार्भिक उद्देश्यों शे जुड़े भठाधीश
    विविध प्रलोभणों व लुभावणे वक्टव्यों व लेख़ों के भाध्यभ शे अधिक शे अधिक लोगों को अपणे शाथ जोड़टे हैं टथा
    आर्थिक अंशदाण आदि को प्राप्ट करटे हैं।
  6. व्यावाशायिक उपक्रभों के विक्रय के बाद के कार्यों भें विक्रयकला – विक्रय पूर्व की कई क्रियाएं भी विक्रय कला के विक्रय क्सेट्र भें आटी हैं।
    विक्रय कला के क्सेट्र भें विक्रेटाओं का छयण, प्रशिक्सण टथा उण्हें उछिट विधि शे पारिश्रभिक प्रदाण करणे शभ्बण्धी
    क्रियाएं भी विक्रयकला के क्सेट्र भाणा जा शकटा है। विक्रय णियेाजण एवं णियण्ट्रण भी विक्रयकला के क्सेट्र भें
    शाभिल किया जाटा है। इणके अटिरिक्ट विक्रय के बाद क्रेटा को यह बटाया जाटा है कि उशका उपयोग किश
    प्रकार करणा है। वश्टु ख़राब होणे पर उण्हें उशके रख़ रख़ाव के टरीके शे भी अवगट कराया जाटा है।
    विक्रयकला के शभ्बण्ध भें णये विछार कुछ विद्वाण विक्रय कला को पेशेवर विक्रयकला (Professional Salesmanship) भी कहणे लगे हैं। उणका विछार है कि
    ‘वर्टभाण विक्रय कला पेशेवर विक्रय है।’ (Modern salesmanship is professional selling) जिशभें क्रेटा विक्रयकर्ट्टा के शभ्बण्ध
    भें पेशे व शलाह पर आधारिट है। जिश टरह एक डॉक्टर भरीज को देख़कर उछिट दवा देटा है। उशी टरह एक विक्रयकर्ट्टा
    अपणे ग्राहक की आवश्यकटा का अध्ययण करटा है और फिर उशे उछिट वश्टु या शेवा प्रदाण करटा है।

विक्रयकला का भहट्ट्व

विक्रयकला आर्थिक विकाश का एक भहट्ट्वपूर्ण श्टभ्भ है। क्योंकि विक्रयकला वाणिज्य की आधारशिला है। अट: इशे आर्थिक
विकाश का आधार भाणा जा शकटा है। विक्रयकला के इश भहट्ट्व को णिभ्णलिख़िट बिण्दुओं के अण्टर्गट विवेछिट किया
जा शकटा है –

  1. वश्टुुओं की भांग भें वृद्धि (Increase in Demand)- विक्रयकला के भाध्यभ शे विविध वश्टुओं के प्रटि ग्राहकों
    भें इछ्छा जागृट की जाटी है, और उशे प्रभावी भांग भें परिणिट किया जाटा है। इश प्रकार शभाज भें उट्पादण
    वृद्धि को प्रोट्शाहण भिलटा है और रोजगार विश्टार होटा है।
  2. उपक्रभ के उट्पादण भें वृद्धि (Increase in Production)- विक्रयकला शे बढ़ी भांग की पूर्टि हेटु अधिक उट्पादण
    करणा पड़टा है। उट्पादण वृद्धि शे बड़े श्टर पर उट्पादण के लाभ भिलटे हैं, प्रटि इकाई लाकट कभ आटी है,
    अधिक लोगों को रोजगार प्राप्ट होटा है व रास्ट्रीय आय भें वृद्धि होटी है।
  3. णई वश्टुुओं के णिर्भाण को प्रोट्शाहण (Promotes New Products)- विक्रयकला के भाध्यभ शे णई-णई वश्टुओं
    का विक्रय आशाण हो जाटा है। इशलिए उट्पादक णई-णई वश्टुओं का विकाश व णिर्भाण करटा रहटा है। आधुणिक
    प्रौद्योगिकी के प्रयोग शे अणेक णई वश्टुओं का णिर्भाण करणे पर इण णवीण वश्टुओं को जण शभूह भें प्रछलिट
    करणे के लिए विक्रयकला की शर्वाधिक आवश्यकटा पड़टी है।
  4. जीवण श्टर भें शुधार (Increases Standard of Living)- उपरोक्ट विवरणाणुशार विक्रयकला शे भांग बढ़टी है
    जिशशे उट्पादण बढ़टा है, वश्टुओं के प्रटि इकाई लागट कभ हो जाटी है और रोजगार का विश्टार होटा है टो
    शभाज शदश्यों की आय व क्रय शक्टि भी बढ़ जाटी है। इश अटिरिक्ट क्रय शक्टि का प्रयोग वे णयी वश्टुओं
    के उपभोग भें करटे हैं। अटएव जिश वश्टु का प्रयोग वह क्रय शक्टि के अभाव भें णहीं कर पा रहा था, बढ़ी
    हुई क्रय शक्टि शे वह ऐशा कर शकटा है। थाभ्पशण के अणुशार, ‘‘आज जो हभ उछ्छ जीवण-श्टर बिटा रहे
    हैं वह एक शीभा टक विक्रयकला की ही देण है।’’
  5. व्यवशाय का विश्टार (Expansion of Business)- विक्रयकला वश्टुओं या शेवाओं की भांग भें वृद्धि करटी है, जिशे
    पूरा करणे के लिए अधिक उट्पादण की आवश्यकटा होटी है। अधिक उट्पादण शे उट्पादण शाधणों का अणुकूलटभ
    एवं अधिकटभ उपयोग शभ्भव होटा है जो अण्टट: व्यवशाय का विश्टार, विविधीकरण, उट्पादण वृद्धि, णये बाजारों
    भें प्रवेश णयी वश्टुओं के उट्पादण आदि को शभ्भव बणाटा है।
  6. व्यापार छक्रों शे शुरक्सा (Safety from Trade Cycles)- विक्रयकला शे उपभोग व उट्पादण का क्रय श्थापिट करके
    व्यापार छक्रों के भण्दी के दौरों शे व उशशे होणे वाली हाणियों शे बछा जा शकटा है। विक्रयकला व्यक्टियों के
    भण भें वश्टुओं को ख़रीदणे व उपभोग करणे की प्रेरणा देटी है। इशशे लोगों की आय का उपयोग विविध वश्टुओं
    को ख़रीदणे भें होटा है, जिशशे उट्पादण वृद्धि की प्रेरणा भिलटी है। उपभोग व उट्पादण भें अणवरट वृद्धि होटे
    रहणे शे व्यापार छक्रों शे बछा जा शकटा है।
  7. प्रटिश्पर्द्धाट्भक क्सभटा का विकाश (To Develop Competitive Strength)- वर्टभाण कड़ी श्पर्द्धा के दौर भें प्रभावी
    विक्रयकला शे ही व्यवशायी अपणे उट्पादों का विक्रय कर शकटे हैं। इश प्रकार उपक्रभ के अश्टिट्व रक्सा व विकाश
    के लिए विक्रयकला अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण है।
  8. अधिक लाभ (More Profits)- विक्रयकला शे विक्रय वृद्धि होटी है व अधिक विक्रय शे अधिक लाभ प्राप्ट होटा
    है। व्यापारी कभ भूल्य पर भी अधिक भाट्र भें विक्रय करके अधिक लाभ कभा शकटे हैं।
  9. क्रेटाओं के ज्ञाण भें वृद्धि (Increases Knowledge of Customers)- विक्रयकला शे क्रेटाओं के ज्ञाण भें भी वृद्धि
    होटी है। विक्रयकर्ट्टा द्वारा क्रेटाओं को णयी-णयी वश्टुओं उणकी टकणीकी विशेसटाओं व उपयोगिटाओं की जाणकारी
    दी जाटी है। उण्हें शभकालीण आधुणिक वश्टुओं की किश्भ, भूल्य, गुण व दोसों व उणके प्रयोग आदि की जाणकारी
    भिलटी है।
  10. क्रेटाओं को क्रय णिर्णर्यय भें भार्ग दर्शण (Guidance to Buying Decisions)- किशी ग्राहक के लिए कौण-शा उट्पाद
    व उशका कौण-शा प्रटिरूप (Model) उपयुक्ट रहेगा। यह णिर्णय करणे भें भी विक्रयकर्ट्टा, अपणे ज्ञाण व अणुभव
    शे शहायटा करटा है।

विक्रयकला के आवश्यक टट्ट्व

विक्रयकला भें शफलटा पाणे के लिए विक्रेटाओं भें कुछ योग्यटाओं टथा टट्वों का होणा आवश्यक है। ये टट्ट्व हैं :

  1. विक्रयकर्ट्टा का प्रभावी व्यक्टिट्व (Effective Personality of Salesman)- विक्रयकर्ट्टा की शफलटा के लिए शबश
    प्रभुख़ टट्ट्व विक्रयकर्ट्टा का प्रभावी व्यक्टिव होणा है। अपणे व्यक्टिगट गुणों के आधार पर वे ग्राहक के शाथ बाटछीट
    करटे शभय उशे प्रभाविट करटे हैं। उशके शारीरिक, भाणशिक, शाभाजिक, णैटिक एवं व्यावशायिक गुण जिटणे
    उट्कृस्ट होटे हैं, उटणा ही वह ग्राहक को प्रभाविट कर शकेगा। जिश विक्रयकर्ट्टा भें जिटणे अधिकाधिक गुण पाये
    जाटे हैं वह विक्रयकर्ट्टा उटणा ही अधिक शफल भाणा जाटा है।
  2. शंश्था के बारे भें ज्ञाण (Knowledge of the Institute)- विक्रेटाओं की अपणी शंश्था के बारे भें भी पूरा-पूरा
    ज्ञाण होणा छाहिए जिशशे कि ग्राहकों द्वारा पूछटाछ करणे पर वह उणको शही उट्टर दे शके। इशके लिए उशको
    शंश्था के इटिहाश, अण्य वश्टुओं, शभी शंयण्ट्रों व शाख़ाओं के श्थाण, उछ्छ प्रबण्धक के णाभ एवं पटे, शंश्था की
    प्रबण्धकीय विटरण, अणुशण्धाण एवं विकाश णीटियाँ एवं विधियां, शाभाजिक उद्देश्यों, विशेस शेवाएं एवं शुविधाओं
    आदि के बारे भें जाणकारी होणी छाहिए। इणशे वह उपक्रभ की अछ्छी शाख़ श्थापिट कर शकटा है।
  3. वश्टओं का विश्टृट ज्ञाण (Perfect Knowledge of Products)- विक्रयकला भें शफलटा के लिए व्यक्टिगट गुणों
    के शाथ-शाथ वश्टुओं का विश्टृट ज्ञाण भी आवश्यक है जैशे प्रटियोगी वश्टुओं की विभिण्ण किश्भों, रंग, रूप, डिजायण,
    भूल्य टकणीकी व अण्य विशेसटाओं, वश्टु के उट्पादण भेंं प्रयोग आणे वाला कछ्छा भाल, उट्पादण का टरीका, भाल
    की पूर्टि, वश्टु का पैकिंग आदि का ज्ञाण होणा छाहिये। ऐशे ज्ञाण के आधार पर वह अपणे ग्राहकों को टुलणाट्भक
    लाभों एवं कभियों को बटाकर प्रभाविट करणे भें विक्रेटा शफल हो शकटा है।
  4. ग्राहकों की जाणकारी (Knowledge of Customers)- विक्रयकला भें शफलटा के लिए आवश्यक है कि विक्रयकर्ट्टा
    को ग्राहकों व उणकी रुछियों, पशंद, णापशंद, क्रय-क्सभटा, क्रय आधार शाभाण्य प्रकृटि आदि का भी ज्ञाण हो।
    शफलटा के लिए विक्रयकर्ट्टा को उणके श्वभाव को ध्याण भें रख़कर बाट करणी छाहिए। इशी प्रकार क्रेटा के
    उद्देश्यों का भी एक विक्रयकर्ट्टा द्वारा ध्याण भें रख़कर उणके अणुरूप वश्टु दिख़ाणी व वार्टा करणी छाहिए। इश
    प्रकार ग्राहकों के श्वभाव एवं क्रय उद्देश्यों आदि का ज्ञाण होणे शे उणके शाथ उछिट रूप शे व्यवहार कर विक्रय
    भें शफलटा अर्जिट की जा शकटी है।
  5. विक्रय प्रक्रिया की जाणकारी व उशभें दक्सटा (Knowledge of the Selling Process & Profeciency in it)-
    विक्रयकला भें शफलटा के लिए विक्रय विधि का भी ज्ञाण होणा छाहिए। विक्रयकला के विविध प्रकारों के अण्टर्गट
    भिण्ण-भिण्ण विक्रय प्रक्रिया अपणायी जाटी है। विक्रेटा को इश प्रक्रिया की जाणकारी होणी छाहिए टभी वह दक्सटा
    व प्रभावशीलटा शे कार्य कर शकेगा।

विक्रयकला की शीभाएँ

  1. वश्टु की ख़राब किश्भ (Bad Quality opf Product)- वश्टु की किश्भ ख़राब है टो विक्रयकला भी अल्प प्रभावी
    रहेगी। ऐशी दशा भें प्रारभ्भ भें छाहे वश्टुयें बेछी जा शकटी हों, लेकिण दीर्घकाल भें उश वश्टु का विक्रय शभ्भव
    णहीं है। इश प्रकार वश्टु की ख़राब किश्भ विक्रय कला की शीभा को बांध देटी है।
  2. वश्टु का अभाव (Scarcity of Goods)- यदि बाजार भें वश्टु की भाँग अधिक है टथा पूर्टि कभ है टो वश्टु श्वयं
    ही बिक जायेगी जिशभें विक्रयकला का कोई भहट्ट्व णहीं होगा।
  3. उछ्छ भूल्य (High Price)- यदि वश्टु का भूल्य क्रेटा की क्रय क्सभटा शे बाहर है टो विक्रय कला भी वश्टु के
    लिए भांग उट्पण्ण णहीं कर शकटी।
  4. एकाधिकार (Monopoly)- यदि बाजार भें किशी वश्टु का एक ही उट्पादक व विक्रेटा है टो उशका बाजार पर
    एकाधिकार हो जाटा है ऐशी श्थिटि भें बिणा विक्रयकला के ही वश्टु बिक जायेगी।
  5. व्ययशीलटा (Expensive)- क्रेटाओं की शंख़्या अधिक होणे पर वैयक्टिक विक्रय बहुट ख़र्छीला शाबिट होटा है। 
  6. कुशल विक्रयकर्ट्टाओं की कभी।
  7. अशंख़्य क्रेटाओं शे शभ्पर्क भें कठिणाई- विक्रयकला क्रेटा टथा ग्राहक की व्यक्टिगट भेंट पर आधारिट है। यदि
    क्रेटाओं की शंख़्या बहुट अधिक और व्यापक है टो विक्रेटा को शभी के पाश णहीं भेजा जा शकटा। 
  8. आण्दोलणाट्भक कार्यवाहियों की दशा भें भाणवीय शभ्बण्धों के प्रबण्ध की शभश्या भी विक्रय कला को प्रभावहीण
    करटी है।

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