विछार एवं विछारधरा

 विछार एवं विछारधरा

यह भाणणा ही पड़ेगा कि बिणा विछार के ण टो किण्ही शाहिट्य की रछणा हो शकटी है एवं ण ही किण्ही शंश्था का णिर्भाण हो शकटा है। शभश्ट ज्ञाण-विज्ञाण विछार की ही देण है। जब विछार व्यक्टिगट श्टर शे ऊपर उठकर शाभाजिक रूप लेणे लगटे है टो यही विछारधारा बण जाटी है। ‘भैं छला था जाणिबे भंज़िल भगर  लोगआटे गये और कारवां बणटा गया’। इश प्रकार विछारधरा बहुट शे लोगों के विछारों का शभावेशी रूप होवे है। 

वर्टभाण शभय भें हभ जिण विछारों एवं विछारधरा शे प्रभाविट हुए हैं वे अध्किांश भें पश्छिभ शे आये हैं। हभारा विकाश का भाडल, शिक्सा, टैक्णोलाॅजी यहाँ टक की शभ्पर्क-भासा भी वहीं शे ली गई है। कभी-कभी लगटा है कि पश्छिभ की यह आँध्ी हभारा अपणा शब उड़ा टो णहीं देगी एवं हभ कटी पटंग की टरह इध्र-उध्र भटकटे रह जायेंगे। वैशे शभ्यटा एवं शंश्कृटि प्रवाहभाण होटे हैं एवं उण्हें छिर पुराटण, छिर णवीण भी कहा जाटा है। वह णये को आट्भशाट करके भी अपणे भूल टट्वों को णहीं ख़ोटी। हजारों वर्स पुराणी हभारी शंश्कृटि भी णिट्य णया रूप धरण करके भी शाश्वट बणी हुई है। इश झंझावाट शे भी यह और अध्कि शुदृढ़ होकर णिकलेगी ऐशा विश्वाश हभ शबको रख़णा छाहिए। 

श्वयंशेवी शंश्थाएँ एवं विकाश 

शाभाण्यटः विकाश का अर्थआध्ुणिकटा की ओर प्रगटि शे लिया जाटा है। इशका उद्देश्य रास्ट्र के प्रट्येक णागरिक को रोटी, कपड़ा, भकाण, शिक्सा एवं श्वाश्थ्य की शुविधाऐं उपलब्ध् करणा है। ये शुविधऐं शभाज के एक विशिस्ट वर्ग टक शीभिट ण रहकर णिछले पायदाण पर ख़ड़े हुए व्यक्टि टक पहुँछणी छाहिएँ एवं उण्हें उण्णटि के शभाण अवशर उपलब्ध् होणे छाहिएँ। 

किण्टु विकाश की यह प्रक्रिया केवल भौटिक आवश्यकटाओं टक शीभिट ण रहकर बौ(िक एवं आध्याट्भिक क्सेट्रों भें पहुँछणी आवश्यक है। पश्छिभ भें भौटिक विकाश टो भरपूर हुआ है किण्टु आध्याट्भिक विकाश कहीं ख़ो गया है। अटः उधर भी आवश्यकटा भहशूश की जा रही है कि इश विकाश भें कुछ और भी जुड़णा छाहिए था। 

विकाश का कार्य प्रायः ही शरकार के हवाले कर दिया जाटा है। शरकारी एंजेण्शियाँ बहुट कुछ करटी हैं किण्टु उणकी अपणी शीभाऐं हैं। शरकारी कार्य णियभों के बण्ध्णों शे बंध होवे है। शरकारी कर्भछारी अपणी जीविका के लिए कार्य करटा है। उशभें परहिट एवं जणहिट की भावणा णहीं होटी। शरकारी भशीणरी भौटिक विकाश भी पूर्ण रूप शे णहीं कर पाटी बौ(िक एवंआध्याट्भिक विकाश का टो उधर प्रश्ण ही णहीं उठटा। 

यहीं शे श्वयं शेवी शंश्थाओं की भूभिका प्रारभ्भ होटी है।  ये शंश्थाऐं प्रायः ही कुछ व्यक्टियों के कठिण परिश्रभ की उपज होटी हैं। शरकारों को राजा का प्रटिणिध्एिवं श्वयं शेवी शंश्थाओं को जणटा का प्रटिणिध् ि कहा जाटा है। वे जभीण शे जुड़ी होटी हैं एवं उणके णियभ-काणूण लछीले होटे हैं। इणकी उट्ट्पटि, विकाश एवं ये किटणी प्रकार की होटी है इश शंबंध् भें विश्टृट विवेछण अण्दर के पृस्ठों भें भिलेगा। किण्टु शभय के शाथ श्वयं शेवी शंश्थाओं भें भी कुछ विकृटियाँ आ गई हैं। कुछ विद्वाणों णे अपणी शोधें के आधर पर इण विकृटियों को णिभ्ण प्रकार गिणाया है-

1. इण पर कुछ व्यक्टियों णे एकाध्किार श्थापिट कर लिया है।

2. कुछ भाभलों भें ये शरकारी ध्ण को हड़पणे का शाध्ण बण गई हैं।

3. एक ही प्रकार का कार्य, एक ही श्थाण पर कई शंश्थाऐं कर रही हैं एवं उणभेंकोई टालभेल णहीं है।

4. पारदर्शिटा का अभाव है।

5. किण्ही की कोई जवाबदेही णहीं है।

दूशरी ओर शरकारी शहायटा प्राप्ट करणे वाली श्वयं शेवी शंश्थाओं की शिकायटें भी कभ णहीं हैं। उणका कहणा है कि शरकार शे शहायटा प्राप्ट करणा अट्यंट कठिण है। णियभ अट्यंट पुराणे एवं कठोर हैं। उणभें लछीलेपण का अभाव है।शरकारी अध्किारियों का रवैया काभ भें विलभ्ब करणे, रोड़े अटकाणे एवं टकराणे वाला रहटा है। भ्रस्टाछार शे भी इण्कार णहीं किया जा शकटा। वाश्टविकटा टो यही है कि शरकारी ध्ण अपणे लक्स्य टक पहुँछटे-पहुँछटे आध या उशशे भी कभ रह जाटा है। 

उपरोक्ट शभी कारणों शे श्वयंशेवी शंश्थाओं को अध्कि शक्सभ बणाणे के लिये विशेसज्ञों णे णिभ्ण शुझाव दिये हैं-

1. ये शंश्थायें जिण लोगों के लिये कार्य करटी हैं उणशे अध्कि शे अध्कि शभ्पर्क बणाणा छाहिये।

2. णिधर््ण वर्ग को णिस्पक्स रूप शे लाभ पहुँछणा छाहिए। इशभें जाटि, शभ्प्रदाय याराजणैटिक विछारधरा आड़े णहीं आणी छाहिए।

3. जण शाधरण की आवश्यकटाओं एवं दुख़ दर्द के प्रटि इण्हें शंवेदणशील होणा छाहिए।

4. लाभार्थी किटणा भी णिधर््ण या णिर्बल क्यों ण हो उशके प्रटि शभ्भाण पूर्ण व्यवहार किया जाणा छाहिए।

5. शंश्था के शंछालकों का जीवण शादा टथा व्यवहार इटणा विणभ्र होणा छाहिए कि प्रट्येक व्यक्टि उण टक पहुँछ शके।

6. कार्य प्रणाली इश प्रकार की हो जिशशे विकाश, प्रगटि एवं शाभाजिक परिवर्टण को बढ़ावा भिल शके।

7. विछारों एवं कार्यों भें एक रूपटा टथा ईभाणदारी होणी छाहिए।

8. शंश्था के लक्स्यों के प्रटि शभर्पण एवं णिस्ठा हो।

9. किये गये कार्यों का कुछ परिणाभ दृस्टिगोछर होणा छाहिए।

10. इण शंश्थाओं को अपणा कार्य क्सेट्रा णगरों टक शीभिट ण रख़कर ग्राभों भें भी कार्य करणा छाहिए क्योंकि अभी भी भारट की 70% आबादी गाँवों भें ही रहटीहै।

11. अध्किांश श्वयं शेवी शंश्थाऐं अपणे को प्रायः ही भौटिक विकाश के कार्यों टकही शीभिट रख़टी हैं। उण्हें शेवा के शाथ ही शंश्कारों के क्सेट्रा भें भी कार्य करणाछाहिए। इशशे भणुस्य का भाणशिक एवं आध्याट्भिक विकाश भी होगा।

भारट विकाश परिसद् उण गिणी छुणी रास्ट्र व्यापी शंश्थाओं भें शे एक है जिण्होंणे शेवा शंश्कार दोणों ही क्सेट्रों भें बड़े पैभाणे पर कार्य किया है एवं अब भी उश कार्यके विश्टार भें लगे हुए हैं। परिसद् णे अब टक लगभग 120 प्रकल्प शिक्सा के क्सेट्र,भें 380 छिकिट्शा के क्सेट्र भें टथा 100 शे अध्कि ऐशे श्थायी प्रकल्पों का णिर्भाण किया जो णियभिट रूप शे जण शेवा भें कार्यरट हैं। 550 के लगभग कुछ अण्य प्रकार के प्रकल्प हैं जिणभें गर्भियों भें जल शेवा शे लेकर भेलों भें ख़ोये बछ्छों की शहायटा करणा शाभिल हैं।

परिसद् की शदश्यटा वाले 45000 परिवार णिस्ठा पूर्वक इण क्सेट्रों भें राट दिणकार्य कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *