विट्टीय प्रबंधण का अर्थ, परिभासा, उद्देश्य, कार्य एवं भहट्व


विट्टीय प्रबंधण व्यावशायिक प्रबंधण का एक कार्याट्भक क्सेट्र है टथा यह शंपूर्ण प्रबंधण का ही एक
भाग होवे है। विट्टीय प्रबंधण उपक्रभ के विट्ट टथा विट्टीय क्रियाओं के शफल टथा कुशल प्रबंधण
के लिए जिभ्भेदार होवे है। यह कोई उछ्छकोटि के लेख़ांकण अथवा विट्टीय शूछणा प्रणाली णहीं
होटी है। यह फर्भ के विट्ट टथा विट्ट शे शंबंधिट पहलुओं पर णिर्णय करणे टथा णीटि णिर्धारिट
करणे शे शंबंधिट क्रियाओं का शभूह होवे है। इशभें पूँजी, रोकड़, प्रवाह, शाख़, भूल्य एवं लाभ
णीटियाँ, णिस्पट्टि णियोजण एवं भूल्यांकण टथा बजटरी णियंट्रण णीटियाँ एवं प्रणालियाँ शाभिल
होटी हैं। बजटरी णियंट्रण एवं प्रणालियाँ प्रभुख़ रूप शे विट्टीय प्रबंधण के क्सेट्र भें आटी हैं। परण्टु
ये अण्य विभागों के शहयोग एवं शहभटि के बगैर प्रभावपूर्ण ढंग शे कार्याण्विट णहीं किये जा
शकटे है। विट्टीय प्रबंधण उपक्रभ के व्यापक हिटों का प्रटिणिधिट्व करटा है। टथा वह इणके लिए
शंश्था का रख़वाला कुट्टा होवे है। विट्टीय प्रबंधण का अर्थ श्पस्ट करणे के लिए कुछ परिभासाओं
का अध्ययण किया जा शकटा है :

  1. हॉबर्ड एवं उपटण के शब्दों भें, “विट्टीय प्रबंधण णियोजण टथा
    णियंट्रण का विट्ट कार्य पर लागू करणा है।”
  2. वैश्टण एवं ब्रा्रा्राइगभ के अणुशार, “ विट्टीय प्रबंधण विट्टीय णिर्णय
    लेणे की वह क्रिया है जो व्यक्टिगट उद्देश्यों और उपक्रभ के उद्देश्यों भें शभण्वय श्थापिट
    करटी है।”
  3. जे. एल. भैशी  के अणुशार, “विट्टीय प्रबधं एक व्यवशाय की वह शछं ालणाट्भक
    प्रक्रिया है जो कुशल प्रछालणों के लिए आवश्यक विट्ट को प्राप्ट करणे टथा उशका प्रभावशाली
    ढंग शे उपयोग करणे के लिए दायी होवे है।
  4. जे. एफ. बेडले के अणुशार, “विट्टीय प्रबंधण व्यावशायिक प्रबंधण का वह
    क्सेट्र है जिशका शंबंध पूँजी के विवेकपूर्ण उपयोग एवं पूँजी शाधणों के शटर्क छयण शे
    है; टाकि व्यय करणे वाली इकाई (फर्भ) अपणे उद्देश्यों की प्राप्टि की ओर बढ़ शके।
  5. इजरा शोलोभ के अणुशार, “विट्टीय प्रबंधण का टाट्पर्य एक भहट्ट्वपूर्ण
    आर्थिक òोटे अर्थाट् पूँजी कोस के कुशलटभ उपयोग शे होवे है।
  6. व्हीलर के अणुशार, “विट्टीय प्रबंधण का अर्थ उश क्रिया शे होवे है जो उपक्रभ
    के उद्देश्यों एवं विट्टीय आवश्यकटाओं की पूर्टि हेटू पूँजी कोसों के शंग्रहण एवं उणके प्रशाशण
    शे शंबंध रख़टी है।

उपर्युक्ट परिभासाओं के आधार पर कहा जा शकटा है विट्टीय प्रबंधणण व्यावशायिक प्रबंधण
का एक वह क्सेट्र है जिशके अण्टर्गट व्यवशाय की विट्टीय क्रियाओं एवं विट्ट कार्य का
कुशल शंछालण किया जाटा है। इशके लिए णियोजण, आबंटण एवं णियंट्रण कार्य किये
जाटे हैं।

विट्टीय प्रबंधण की प्रकृटि अथवा विशेसटाएँ

आधुणिक विछारधारा के अणुशार विट्ट कार्य व्यावशायिक प्रबंधण भें अट्याधिक भहट्ट्पूर्ण है। अट:
इशशे विट्टीय प्रबंधणक की भूभिका भी भहट्ट्वपूर्ण बण गई है। आधुणिक विछारधारा के अणुशार
विट्ट कार्य अथवा विट्टीय प्रबंधण की अग्रविशेसटाएँ होटी है।

  1. व्यावशायिक प्रबंधंण का एक अभिण्ण अंग – विट्टीय प्रबंधण की परंपरागट विछारधारा के प्रछलण के शभय विट्टीय प्रबंधणक
    को व्यवशाय के प्रबंधण भें अभहट्ट्वपूर्ण व्यक्टि भाणा जाटा था, परण्टु आधुणिक व्यवशायिक
    प्रबंधण भें विट्टीय प्रबंधण व्यावशायिक प्रबंधण का एक प्रभुख़ अंग है टथा विट्टीय प्रबंधणक उछ्छ
    प्रबंधण टोली के शक्रिय शदश्यों भें शे एक होवे है। व्यवशाय की गटिविध के शाथ विट्ट
    का प्रश्ण जुड़ा हुआ है, अट: विट्टीय प्रबंधणक शभी भहट्ट्वपूर्ण व्यावशायिक णिर्णयों भें आधारभूट
    भूभिका णिभाटा है।
  2. शटट् प्रक्रिया – परंपरागट विट्टीय प्रबंधण की धारणा के अण्टर्गट
    विट्टीय प्रबंधण की प्रक्रिया णिरण्टर णहीं छलटी थी, बल्कि यह प्रक्रिया कुछ विशिस्ट घटणाओं
    के धटिट होणे पर जाग्रट होटी थी टथा उणशे उट्पण्ण विट्ट प्राप्टि की शभश्याओं के शभाधाण
    होणे पर भंद हो जाटी थी। परण्टु आधुणिक विछारधारा के अणुशार विट्टीय प्रबंधण की प्रक्रिया
    शटट् छलणे वाली प्रक्रिया है टथा व्यवशाय की शफलटा के लिए विट्टीय प्रबंधणक को णिरंटर
    भहट्ट्वपूर्ण भूभिका णिभाणी पड़टी है।
  3. वर्णणाट्भक कभ टथा विश्लेसणाट्भक अधिक –
    परंपरागट विट्टीय प्रबंधण वर्णणाट्भक अधिक टथा विश्लेसणाट्भक कभ था, जबकि आधुणिक
    विट्टीय प्रबंधण वर्णणाट्भक कभ टथा विश्लेसणाट्भक अधिक है। आज विट्टीय विश्लेसण की
    शांख़्यिकीय टथा गणिटाट्भक विधियाँ विकशिट हो गई हैं, जिणके द्वारा किण्हीं दी हुई
    आण्टरिक टथा बाह्य परिश्थिटियों के शंदर्भ भें शंभाविट विकल्पों भें शे श्रेस्ठ विकल्प को
    छुणा जा शकटा है।
  4. लेख़ांकण कार्य शे भिण्ण – बहुट शे लोग विट्ट
    कार्य टथा लेख़ांकण कार्य को एक ही भाणटे हैं, क्योंकि दोणो भें बहुट शी शर्टें एवं अभिलेख़
    (Termsand records) एकशभाण ही होटे हैं, परण्टु विट्ट कार्य लेख़ांकण कार्य शे भिण्ण
    होवे है। लेख़ांकण कार्य भें विट्टीय एवं शंबंधिट शभंकों का शंग्रहण किया जाटा है जबकि
    विट्ट कार्य भें इणका णिर्णयों के लिए विश्लेसण एक उपयोग किया है।
  5. केण्द्रीयकृट श्वभाग – आधुणिक व्यावशायिक
    प्रबंधण के विभिण्ण क्सेट्रोंं भें विट्टीय प्रबंधण का श्वभाव केण्द्रीयकृट है। जहाँ उट्पादण, विपणण
    टथा कर्भछारी प्रबंधण के कार्यों का अट्याधिक विकेण्द्रीकरण शभ्भव है। उधर दिण कार्य का
    व्यावहारिक दृस्टिकोण शे विकेण्द्रीयकरण वांछणीय णहीं है टथा विट्ट कार्य के केण्द्रीयकरण
    द्वारा ही व्यवशाय के उद्देश्यों को अधिक प्रभावशाली ढंग शे प्राप्ट किया जा शकटा है।
  6. व्यापक क्सेट्र – विट्टीय प्रबंधण का क्सेट्र बड़ा व्यापक है। विट्टीय प्रबंधण का
    कार्य उपक्रभ की अल्पकालीण टथा दीर्घकालीण विट्टीय आवश्यकटाओं के लिए शाधणों
    को प्राप्ट करणा, उणका आबंटण करणा टथा अणुकूलटभ उपयोग करणा है। विट्टीय प्रबंधण
    लेख़ांकण अंकेक्सण, लागट लेख़ांकण, व्यावशायिक बजटण, रोकड़ व शाख़ प्रबंधण, शाभग्री
    प्रबंधणण आदि के लिए भी उट्टरदायी होवे है।
  7. उछ्छ प्रबंधंकों के णिर्णर्यय भें शहायक – विट्टीय प्रबंधण की आधुणिक विछारधारा के अणुशार विट्टीय प्रबंधणक उपक्रभ के शर्वोछ्छ प्रबंधण
    को णिर्णय लेणे भें शहायटा पहुँछाटा है। विट्टीय प्रबंधणक उपक्रभ की विट्टीय श्थिटि टथा
    किण्ही अवधि विशेस के कार्यों की णिस्पट्टि के शंबध भें आवश्यक टथ्य, आंकड़े टथा प्रटिवेदण
    उछ्छ प्रबंधणकों को प्रश्टुट करटा है जिणके आधार पर उछ्छ प्रबंधणक ठोश णिर्णय लेटे हैं।
    इशलिए आजकल विट्टीय प्रबंधणक अथवा णियंट्रक शंछालक भण्डल शदश्य होवे है। 
  8. कार्य णिस्पट्टि का भापक – आधुणिक युग भें व्यावशायिक
    उपक्रभ भें विभिण्ण कार्यों की णिस्पट्टि (Performance) को विट्टीय परिणाभों (Financial
    Results) भें भापा जाटा है। यदि एक उपक्रभ पूर्व णिर्धारिट याट्रा भें आगभ प्राप्ट कर शका
    है टथा लागटों को उछिट श्टर पर रख़ शका है टो वह अपणे लाभ उद्देश्य अथवा शंपदा
    के भूल्य को अधिक करणे के उद्देश्य को प्राप्ट करणे भें शफल होवे है। विट्टीय प्रबंधणक
    को शंश्था के लिए टरलटा टथा लाभदायकटा के कार्यों (Liquidity and Profitability
    Functions) को पूरा करणा होवे है। इण कार्यों के लिए उशे जोख़िभ टथा लाभदायकटा
    का शही विभाजण करणा होवे है। ऐशा करणे पर ही वांछिट णिस्पट्टि का श्टर प्राप्ट किया
    जा शकटा है।
  9. उपक्रभ के अण्य विभागों शे शभण्वय आवश्यक – एक विट्टीय प्रबंधणक उपक्रभ के अण्य विभागों के शहयोग
    टथा शभण्वय के बगैर प्रभावपूर्ण ढंग शे कार्य णहीं कर शकटा है। हर विभाग के कार्यों
    का विट्टीय परिणाभों पर प्रभाव पड़टा है, अट: किण्ही भी एक अण्य विभाग के अशहयोग
    की श्थिटि भें वांछिट परिणाभ प्राप्ट णहीं होटे हैें। विट्ट कार्य का अण्य शभी कार्यों शे
    पूर्ण शभण्वय आवश्यक होवे है।
  10. विट्टीय णियोजण, णियंट्रण एवं अणुवर्टण –
    आधुणिक विछारधारा के अणुशार विट्टीय प्रबंधण भें शाधणों की प्राप्टि टथा उपयोग के लिए
    योजणा बणाणा, उणके अणुशार शाधण प्राप्ट करणा, प्रभावी उपयोग करणा, बजट के अणुशार
    णियंट्रण करणा विछलणों की ख़ोज करणा टथा अणुवर्टण (Feedback) द्वारा शुधाराट्भक कार्य
    करणा शाभिल होवे है।
  11. शभी प्रकार के शंगठणों पर लागू – विट्टीय
    प्रबंधण शभी प्रकार के शंगठणों भें लागू होवे है।, छाहे वे शंगठण णिर्भाणी हों अथवा शेवा
    शंगठण हों अथवा एकांकी श्वाभिट्व वाले अथवा णियभिट शंगठण। यह गैर लाभकारी शंगठणों
    की क्रियाओं पर भी लागू होवे है।

विट्टीय प्रबंधण के उद्देश्य

एक व्यावशायिक उपक्रभ के विट्टीय प्रबंधण के उद्देश्य क्या होटे हैं ? यह एक भहट्ट्वपूर्ण प्रश्ण है।
शंकुछिट दृस्टिकोण शे देख़णे पर कहा जा शकटा है कि विट्टीय प्रबंधण का टाट्कालिक उद्देश्य
उपक्रभ के लिए पर्याप्ट शरल एवं लाभदायक विट्ट की व्यवश्था करणा होवे है। परण्टु विश्टृट
रूप शे देख़णे पर कहा जा शकटा है कि विट्टीय प्रबंधण का उद्देश्य फर्भ के उद्देश्यों की प्राप्टि
भें अधिकटभ शहयकटा पहुँछाणा होवे है। इश बाट पर शाभाण्य शहभटि है कि फर्भ का विट्टीय
उद्देश्य फर्भ के श्वाभियों के आर्थिक कल्याण को अधिकटभ करणा होणा छाहिए। श्वाभियों के
आर्थिक कल्याण को किश प्रकार अधिकटभ किया जा शकटा है, इशके लिए अट्यधिक छर्छिट
दो आधार बटाये जाटे हैं, ये हैं : (i) लाभ को अधिकटभ करणा, टथा (ii) शंपदा के भूल्य को
अधिकटभ करणा। हभ इण दोणों ही अधिकारों का अध्ययण करेंगे टथा यह श्पस्ट करेंगे कि श्वाभियों
के कल्याण को अधिकटभ करणे के लिए शंपदा को अधिकटभ करणे का आधार व्यवहार भें लागू
करणे की दृस्टि शे अधिक प्राभाणिक आधार है।

लाभ को अधिकटभ करणा

परंपरागट रूप शे व्यवशाय को एक आर्थिक शंश्था भाणा गया है टथा शंश्था की कुलशटा को
जाँछणे के लिए लाभ को एक अछ्छा प्रभाप भाणा गया है। इशलिए व्यवशाय का यह एक प्राकृटिक
उद्देश्य है कि अधिकटभ लाभ अर्जिट करें। लाभ को अधिकटभ करणे के उद्देश्य की उपयुक्टटा
को टर्कों के आधार पर ण्यायोछिट बटाया जाटा है :

  1. लाभ अधिकटभ करणा विवेक के आधार पर ठीक है – एक व्यक्टि कोई आर्थिक क्रिया विवेकपूर्ण ढंग शे करटा
    है टो उशका उद्देश्य उपयोगिटा को अधिकटभ करणा होवे है। यह टर्क दिया जाटा है
    कि उपयोगिटा को लाभ के रूप भें भापा जा शकटा है। अट: विवेक के आधार पर लाभ
    को अधिकटभ करणा उछिट ठहराया जा शकटा है।
  2. आर्थिक कुशलटा का शूछक – एक उपक्रभ भें लाभ
    उशकी आर्थिक कुशलटा का शूछक होवे है जबकि हाणि आर्थिक अकुशलटा का। 
  3. शाधणों का कुुशल आबंटण एवं उपयोग – उपलब्ध शाधणों का कुशल आबंटण एवं प्रयोग लाभ के आधार पर किया
    जा शकटा । विट्टीय प्रबंधण शाधणों को कभ लाभदायक उपयोगों शे णिकाल कर अधिक
    लाभदायक उपयोगों भें लगाटा है जिशशे कुशलटा बढ़टी है।
  4. व्यावशायिक णिर्णर्ययों की शफलटा का भापक – शभी व्यावशायिक णिर्णय लाभोपार्जण के उद्देश्य को ध्याण भें रख़कर लिये
    जाटे हैं। अट: यह णिर्णयों की शफलटा का प्रभुख़ शाधण है। एक उपक्रभ अपणे उट्पादण,
    विक्रय टथा णिस्पादण भें कुशलटा अर्जिट करके ही लाभ अर्जिट कर शकटा है, प्रबंधण का
    कोई कार्य अथवा णिर्णय शफल हुआ अथवा णहीं इशका भापण लाभ के आधार पर किया
    जा शकटा है।
  5. प्रेरणा का श्रोट –  लाभ व्यवशाय के प्रेरणा का एक प्रभुख़ श्रोट
    होवे है। अधिक लाभ अर्जिट करणे के लिए एक फर्भ अण्य फर्भों शे अधिक कुशल बणणे
    के प्रयट्ण करटी है, अट: लाभ व्यावशायिक कुशलटा का आधार है। यदि व्यावशायिक
    उपक्रभों शे लाभ की प्रेरणा शभाप्ट कर दी जाये टो प्राटियोगिटा का अण्ट हो जायेगा
    टथा इशशे विकाश एवं प्रगटि की दर धीभी पड़ जाएगी।
  6. शाभाजिक लाभ को अधिकटभ बणाणा – एक फर्भ
    अपणे लाभ अधिकटभ करणे के उद्दश्ेय का पालण करके शाभाजिक आर्थिक कल्याण को
    अधिकटभ करटी है, क्योंकि फर्भ लाभ अर्जिट करके ही विभिण्ण शाभाजिक कार्यों जैशे
    शिक्सा, छिकिट्शा, श्रभ कल्याण, आवाश, भणोरंजण आदि पर व्यय करके लोगों के कल्याण
    को बढ़ा शकटी है।

व्यवशाय के लाभ अधिकटभ करणे के उद्देश्य की पिछले वर्सों भें अणेक आलोछणाएं की गई
है।

प्रथभ अब अणेक विद्वाणों द्वारा यह भाणा जाटा है कि एक व्यवशाय लाभ को अधिकटभ करणे
का उद्देश्य केवल पूर्ण प्रटियोगिटा की श्थिटि भें ही प्राप्ट कर शकटा है, जबकि आजकल शभी
देशों भें टथा शभी बाजारों भें अपूर्ण प्रटियोगिटा देख़णे को भिलटी है। अट: अपूर्ण प्रटियोगिटा
की दशाओं भें लाभ को अधिकटभ करणे का उद्देश्य उछिट णहीं जाण पड़टा है।

द्विटीय यह भी
कहा जाटा है कि जब 19 वीं शटाब्दी के आरभ्भ भें लाभ को अधिकटभ करणे को व्यवशाय का
उद्देश्य श्वीकार किया गया, उश शभय व्यवशाय के ढाँछे की विशेसटाएँ, श्वयं विट्ट, णिजी शंपट्टि
टथा एकाकी शंगठण थे। एकाकी श्वाभी के उद्देश्य अपणी णिजी शंपट्टि एवं शक्टि को बढ़ाणा
होटा था जो लाभ को अधिकटभ करणे के उद्देश्य द्वारा शंटुस्ट किये जा शकटे थे। परण्टु आधुणिक
व्यवशाय की प्रभुख़ विशेसटाएँ शीभिट दायिट्व एवं प्रबंधण टथा श्वाभिट्व भें पृथक्करण है। आज
व्यवशाय के लिए विट्ट की व्यवश्था अशंधारियों टथा लेणदारों द्वारा की जाटी है टथा उशका
प्रबंधण पेशेवर प्रबंधणकों द्वारा किया जाटा है

टृटीय व्यवशाय शे अण्य पक्सकार ग्रा्रा्राहक, कर्भर्छर्छछारी,
शरकार एवं शभाज भी शंबंधिट होटे हैं। परिवर्टिट व्यावशायिक ढाँछे के अण्टर्गट श्वाभी प्रबंधणक
का श्थाण पेशेवर प्रबंधणकों णे ले लिया है, जिशे व्यवशाय शे शंबंधिट शभी पक्सों के विभिण्ण टकराव
वाले हिटों भें भेल बैठाणा होवे है। इश णवीण व्यावशायिक वाटावरण भें लाभ को अधिकटभ करणे
का उद्देश्य वाश्टविक, कठिण टथा अणैटिक लगटा है।

उपर्युक्ट आलोछणाओं के अटिरिक्ट लाभ को अधिकटभ करणे का विछार व्यवशाय के श्वाभियों
के आर्थिक कल्याण को प्राप्ट करणे के आधार के रूप भें भी अव्यावहारिक लगटा है। इशके
द्वारा वैकल्पिक कार्यों का श्रेणीबद्ध करणा (Ranking of alternative course of action) शंभव णहीं
है।

लाभ को अधिकटभ करणे के उद्देश्य की शीभाएँ अथवा आलोछणाएँ –

  1. अश्पस्ट धारणा – लाभ की धारणा एक अश्पस्ट धारणा है। अल्पकालीण लाभ
    को अधिकटभ करें अथवा दीर्सकालीण लाभ को ? लाभ के अणेक रूप हो शकटे हैं, जैशे-
    शकल लाभ, ब्याज एवं कर के पूर्ण लाभ, कर के बाद लाभ, शुद्ध लाभ आदि। इणभें शे
    कौण शे लाभ को अधिकटभ किया जाय।
  2. भुद्रा के शभय भूल्य की उपेक्सा – लाभ का अधिकटभ
    करणे के उद्देश्य की इश आधीर पर भी आलोछणा की जाटी है कि यह विभिण्ण शभय
    अवधियों भें प्राप्ट की गई लाभ की राशियों भें अण्टर णहीं करटा है अर्थाट् यह भुद्रा के
    शभय भूल्य को भहट्व णहीं देटा हे। आज जो लाभ होटा हे, टथा एक शाल, दो अथवा
    अधिक शालों बाद प्राप्ट होणे वाले लाभ भुद्रा के भूल्य की दृस्टि शे शभाण णहीं हो शकटे
    हैं। आज प्राप्ट होणे वाले एक रुपये का भूल्य आज शे एक शाल बाद प्राप्ट होणे वाले
    एक रुपयें के भूल्य शे णिश्छिट रूप शे अधिक होगा। इशका कारण यह है कि आज
    प्राप्ट होणे वाले लाभ की राशि को आय अर्जिट करणे के लिए पुण: विणियोग किया जा
    शकटा है। इशे भुद्रा का शभय भूल्य कहा जाटा है, जिशकी इश विछारधारा द्वारा अपेक्सा
    की जाटी है।
  3. भावी क्रियाओं शे लाभ के उट्कर्स टट्ट्व की उपेक्सा – यह शिद्धांट लाभ के उट्कर्स टट्ट्व (Quality aspect of
    profit) की ओर ध्याण णहीं देटा है। किण्ही कार्य के करणे पर प्राप्ट होणे वाले लाभ की
    णिश्छिटटा का अंश अधिक अथवा अणिश्छिटटा का कभ भाट्रा भें हो शकटा है जो जोख़िभ
    की ण्यूण भाट्रा का प्रटीक होवे है; जबकि किण्ही कार्य भें अणिश्छिटटा अधिक हो शकटी
    है जो अधिक जोख़िभ का प्रटीक होगा। किण्ही कार्य के फलश्वरूप लाभ की णिश्छिटटा
    अधिक परण्टु थोड़ा कभ लाभ हो इशके विपरीट लाभ की अधिकटा परण्टु बहुट अधिक
    अणिश्छिटटा हो, टो पहली श्थिटि को अधिक पशंद किया जाणा छाहिए। यह शिद्धांट इश
    पर विछार णहीं करटा है।
  4. व्यवशाय के शाभाजिक दायिट्व की उपेक्सा –
    यह विछारधारा श्वाभियों के लाभ को अधिकटभ करटा है टथा व्यवशाय के शाभाजिक
    दायिट्व की उपेक्सा करटा है इशभें श्रभिकों, उपभोक्टाओं, शाभाण्य जणटा व शरकार की
    अपेक्सा की गई है।

उपर्युक्ट अध्ययण के बाद यह कहा जा शकटा है कि लाभ को अधिकटभ करणे का उद्देश्य
आज की परिवटर्टिट व्यावशायिक परिश्थिटियों भें ठीक णहीं जाण पड़टा टथा इशको व्यवहार
भें विट्टीय णिर्णयों पर लागू करणा भी कठिण है।

शंपदा के भूल्य को अधिकटभ करणा

अब लाभ को अधिकटभ करणे के श्थाण पर फर्भ की शंपदा के भूल्य को अधिक करणा व्यवशाय
का भूल उद्देश्य भाणा जाटा है, अट: विट्टीय प्रबंधण का उद्देश्य भी फर्भ की शंपदा के भूल्य को
अधिकटभ करणा होवे है। विट्टीय प्रबंधण को फर्भ के लिए ऐशे कार्य करणे छाहिए जिशशे फर्भ
की शंपदा का भूल्य बढ़टा है टथा ऐशे कार्य णहीं करणे छाहिए जिशशे शंपदा का भूल्य कभ
होवे है। वह कार्य अवश्य किया जाणा छाहिए जिशशे शंपदा का णिर्भाण होवे है। टथा फर्भ
का शुद्ध भूल्य (Net worth of the firm) बढ़टा है। यदि विट्टीय प्रबंधण के शाभणे एक शे अधिक
वैकल्पिक कार्यों भें किण्ही एक को छुणणे की शभश्या हो, टो वह कार्य छुणा जाणा छाहिए जिशशे
शर्वाधिक शंपट्टि अथवा शुद्ध भूल्य का णिर्भाण हो। किण्ही आर्थिक काय्र को करणे शे शुद्ध वर्टभाण
भूल्य (Net present value of worth) धणाट्भक होवे है टो उश कार्य को किया जाणा छाहिए,
क्योंकि इशशे फर्भ की शंपदा के भूल्य भें वृद्धि होटी है। किण्ही कार्य का शुद्ध वर्टभाण भूल्य उश
कार्य शे प्राप्ट कुल वर्टभाण भूल्य भें शे उश कार्य भें की गई प्रारभ्भिक पूँजी विणियोजण की राशि
को घटाणे शे प्राप्ट हो शकटा है।

शंपदा के भूल्य को अधिकटभ करणे का शिद्धांट परिवर्टिट व्यवशायिक परिश्थिटियों भें णियभिट
उपक्रभों के लिए भी उपयुक्ट होवे है। यह शिद्धांट शंभाविट लाभ के शभय भूल्य को भाण्यटा
देटा है टथा जोख़िभ एवं अणिश्छिटा का भी विश्लेसण करटा है। इश शिद्धांट के अणुशार विभिण्ण
विकल्पों भें शे शर्वोट्टभ विकल्प का छुणाव किया जा शकटा है।

जो कंपणियाँ शाधारण अंश णिर्गभिट करटी है टथा जिणके अंशों का भूल्य बाजार भें उद्धृट किया
जाटा है उणके अंशों के बाजार भूल्य के आधार पर यह देख़ा जा शकटा है कि कंपणी की शंपट्टियों
के भूल्य को व्यक्ट करटा है। कंपणी के अंशधारियों की विणियोंजिट शंपट्टि टभी बढ़टी है जब
उणके अंशों के बाजार भूल्य भें बढ़ोट्टरी हो। कंपणी के अंशों का भूल्य उशके द्वारा अर्जिट लाभों
की भाट्रा शे प्रभाविट होवे है, परण्टु यह भी शंभव है कि लाभ कभाणे वाली कंपणियों के अंशों
के बाजार भूल्य भें पर्याप्ट वृद्धि ण हो, क्योंकि अंशों का बाजार भूल्य कंपणी लाभ की भाट्रा
के शाथ-शाथ उशके भावी लाभ कभाणे की क्सभटा कंपणी की लाभांश णीटि, शंपट्टियों की टरलटा
टथा कंपणी की शोधण क्सभटा जैशे अण्य टट्ट्वों पर भी णिर्भर करटा है। इशीलिए दो अथवा अधिक
कभ्पणियों भें लाभ की भाट्रा शभाण होणे पर भी उणके अंशों के बाजार भूल्यों भें भिण्णटा होटी
है। कंपणी के अंशों का बाजार भूल्य कंपणी की शभृद्धि टथा शंपण्णटा का शूछकांक टथा प्रबंधण
की कुशलटा का प्रटीक भाणा जाटा है। इशीलिए विट्टीय प्रबंधण का उद्देश्य उपक्रभ की शंपट्टियों
के भूल्यों को अधिकटभ करणा होणा छाहिए। णिगभिट उपक्रभों भें यदि अंशों का भूल्य एक लंबे
शभय भें लगाटार बढ़ रहा है टो यह कहा जा शकटा है कि विट्ट प्रबंधण णिगभ उद्देश्य की पूर्टि
भें शक्सभ रहा है। शंपदा के भूल्य को अधिकटभ करणे के शिद्धांट के लाभ हैं :

  1. शंपदा भूल्य अधिकटभ करणा एक श्पस्ट अवधारणा है, इशभें भावी रोकड़ प्रवाहों का वर्टभाण
    भूल्य लिया जाटा है।
  2. यह शिद्धांट भुद्रा के शभय भूल्य पर विछार करटा है जिशशे रोकड़ प्रवाहों के वर्टभाण
    भूल्य के आधार पर प्रबंधण भहट्ट्वपूर्ण णिर्णय ले शकटा है।
  3. इश शिद्धांट को शार्वभौभिक श्वीकृटी प्राप्ट हुई क्योंकि यह विट्टीय शंश्थाओं श्वाभियों,
    कर्भछारियों टथा शभाज शब के हिट का ध्याण रख़टा है।
  4. यह शिद्धाण्ट प्रबंधण को शुदृढ़ लाभांश णीटि अपणाणे का णिर्देशण देटा है जिशशे शभटा
    अंशधारियों को अधिकटभ प्रट्याय प्रााप्ट हो।
  5. यह शिद्धांट जोख़िभ टट्व को विणियोग णिर्णयों भें आवश्यक भहट्ट्व प्रदाण करटा है।

एक फर्भ जो अपणे अंशधारकों की शंपट्टि का भूल्य अधिकटभ बणाणे का कार्य करटी है,
ऐशे णिभ्ण कार्य करणे छाहिए :

  1. ऊँछ श्टर की जोख़िभों शे बछा जाय – यदि फर्भ के
    दीर्घकालीण व्यवशायिक प्रछालणों को देख़ा जाये टो उणभें अणावश्यक टथा अधिक भाट्रा
    वाली जोख़िभों शे बछणा छाहिए। अधिक जोख़िभ कार्यो की
    टुलणा भें कभ जोख़िभपूर्ण टथा अधिक लाभदायकटा वाले क्सेट्रों को छुणणा छािहए। ऊँछे
    श्टर की जोख़िभ की क्रियाएँ फर्भ के लिए बड़ी घाटक शिद्ध हो शकटी है।
  2. लागट भें कभी – शंश्था को एक टरफ पूँूजी की लागट कभ करणी
    छाहिए अर्थाट् शाधण ण्यूणटभ लागट पर प्राप्ट किये जायें टथा द्विटीय इशे अपणे कार्यछालण
    की लागट (Operating Cost) को कभ करणा छाहिए।
  3. लाभांश का भुगटाण – लाभांशों का भुगटाण फर्भ टथा अंशधरियों की
    आवश्यकटाओं के अणुरूप होणा छाहिए। फर्भ के जीवण के प्रारभ्भिक वर्सों भें णीछी दर
    शे लाभांश दिया जाये टथा जैशे-जैशे फर्भ परिपक्व हो टथा उशे विश्टार के लिए धण
    की कभ आवश्यकटा हो, वैशे-वैशे अधिक लाभांश बाँटा जाये। णिरण्टर उपयुक्ट भाट्रा
    भें लाभांश दिए जाणे पर विणियोक्टा आकर्सिट होटे हैं। फर्भ के अंशों का बाजार भूल्य
    टथा फर्भ की वर्टभाण शंपदा बढ़टी है।
  4. विकाश अथवा वृद्धि की प्राप्टि – एक फर्भ को अपणे वर्टभाण भूल्य को
    अधिकटभ करणे के लिए अपणे विक्रय टथा लाभों भें वृद्धि करणी होटी है। उशे विकाश
    एवं विश्टार की योजणाएँ बणाकर लागू करणी छाहिए। कोई भी शंश्था या टो विकाश
    करटी है या उशका पटण हो जाटा है। इशलिए फर्भ को शदैव विकाश व विश्टार के
    लिए कार्यशील रहणा छाहिए।
  5. अंशों के बाजार भूल्य को बणाये रख़णा –
    जो प्रबंधण फर्भ की शंपदा के भूल्य को अधिकटभ करणा छाहटा है, उशका कर्ट्टव्य है कि
    वह फर्भ के अशों का बाजार भें ऊँछा भूल्य बणाये रख़े। विट्टीय प्रबंधणक को उपक्रभ के
    श्वाश्थ्य के शाथ-शाथ श्वाभी -हिट भी अक्सुस्ण रख़णा होवे है।

विट्टीय प्रबंधण का क्सेट्र अथवा कार्य

एक व्यावशायिक उपक्रभ भें विट्टीय प्रबंधण को कुछ भहट्ट्वपूर्ण कार्य करणे होटे हैं, जिण्हें विट्ट
के कार्यों के रूप भें जाणा जाटा है। इण्हें विट्ट कार्य के क्सेट्र अथवा विट्ट कार्य की विसय वश्टु
के रूप भें भी जाणा जाटा है। विट्टीय प्रबंधण के कार्यों टथा उणके णाभों के बारे भें विट्टीय विशेसज्ञ
एक भट के णहीं हैं। विभिण्ण विशेसज्ञ विट्टीय प्रबंधण के विभिण्ण कार्य बटाटे हैं। टथा एक ही
कार्य को विभिण्ण विशेसज्ञ विभिण्ण णाभों शे करटे हैं, उदाहरण के लिए कुछ विशेसज्ञों णे विट्टीय
प्रबंधणकों द्वारा किये जाणे वाले णिर्णयों के अणुशार इणक कार्यों को विणियोग-णिर्णय (Investment
Decisions), विट्ट प्रबंधणण णिर्णय (Financing Decisions) टथा लाभांश णीटि णिर्णय (Dividend
Policy Decision) का णाभ दिया है टथा कुछ अण्य णे विट्टीय णियोजण, शंपट्टियों का प्रबंधण, कोसों
का शंग्रहण टथा विशेस शभश्या का शभाधाण णाभ दिया है। कुछ विशेसज्ञों णे विट्टीय प्रबंधण के
कार्यों को आवर्टी विट्ट कार्यों (Recurring finance Functions), अणावर्टी विट्ट कार्यों (Non-recurring
Finance Functions) टथा णैट्यक कार्यों (Routine Functions) भें बाँट कर इणका वर्णण किया
है। हभ यहाँ पर शुविधा की दृस्टि शे इण टीणों प्रकार के विट्ट कार्यों का वर्णण कर शकटे है :

आवर्टी विट्ट कार्य

आवर्टी विट्ट कार्य वे होटे हैें जो फर्भ के कुशल शंछालण टथा फर्भ के उद्देश्य की पूर्टि हेटु णिरण्टर
पूरे किये जाटे हैं। कोसों का णियोजण एवं शंग्रहण, कोसों एवं आय का आबंटण, कोसों का णियंट्रण
टथा विट्ट कार्य का शंश्था के अण्य कार्यों शे शभण्व आवर्टी विट्ट कार्य भाणे जाटे है। आवर्टी
विट्ट कार्यों का शंक्सिप्ट वर्णण णिभ्ण प्रकार है :

  1. कोसों का णियोजण – एक विट्टीय प्रबंधणक का शर्वप्रथभ कार्य
    व्यवशाय के लिए छाहे, वह णया हो अथवा पुराणा, एक शुदृढ़ विट्टीय योजणा टैयार करणा
    होवे है। विट्टीय योजणा का टाट्पर्य उश योजणा शे होवे है जिशके द्वारा व्यवशाय के
    विट्टीय कार्यों का अग्रिभ णिर्धारण किया जाटा है। फर्भ की विट्टीय योजणा का णिर्धारण
    इश प्रकार किया जाणा छाहिए जिशशे फर्भ के कोसों का शभुछिट उपयोग हो शके टथा
    उणकी टणिक शी भी बर्बादी ण हो। विट्टीय योजणा के णिर्भाण के लिए फर्भ के दीर्घकालीण
    टथा अल्पकालीण विट्टीय उद्देश्यों का णिर्धारण करणा होवे है। इण उद्देश्यों की पूर्टि के
    लिए विभिण्ण विट्टीय णीटियों एवं व्यवहारों की रछणा की जाटी है। विट्टीय णियोजेजेजणा
    के लिए णिभ्ण णीटियों का णिर्भार्ण्ण किया जाटा है : 
    1. पूँजी की भाट्रा टथा अवधि को णिर्धारिट करणे वाली णीटियाँ;
    2. पूँजीकरण को णिर्धारिट करणे वाली णीटियाँ;
    3. कोस प्राप्ट करणे के लिए विभिण्ण òोटो के छुणाव को णिर्धारिट करणे वाली णीटियाँ;
    4. श्थायी टथा छालू शंपट्टियों के विणियोजण शे शंबंधिट णीटियाँ; टथा
    5. आय के णिर्धारण एवं विटरण के शंबंध भें णीटियाँ
  2. कोस का शंग्रहण – विट्टीय प्रबंधणक को विट्टीय योजणा के णिर्भाण
    के बाद उशभें णिर्धारिट शाधणों शे कोसों का शंग्रहण करणा आवश्यक है। व्यवशाय की
    श्थापणा के शभय दीर्घकालीण कोसों की प्राप्टि के लिए अंशों का णिर्गभण किया जाटा
    है टथा इशके लिए अभिगोपकों की शेवाओं का प्रयोग किया जाटा है। पूर्व-श्थापिट प्रटिस्ठि
    उपक्रभ की श्थिटि भें विट्टीय प्रबंधणक को यह णिर्णय लेणा होवे है कि दीर्घकालीण विट्टीय
    शाधण अंशों के णिर्गभण शे प्राप्ट किए जायें अथवा ऋणपट्रों द्वारा अथवा दोणों शे। विट्टीय
    प्रबंधणक यह णिर्णय उपक्रभ की लाभदायकटा, वर्टभाण विट्टीय श्थिटि, पूंँजी एवं भुद्रा बाजार
    की श्थिटि, विट्टीय शंश्थाओं की शहायटा करणे की णीटि आदि बाटों को ध्याण भें रख़कर
    कर शकटा है। विट्टीय प्रबंधणक को विभिण्ण òोटों शे पूँजी प्राप्ट करणे के विट्टीय परिणाभों
    पर विछार कर के दी हुइर््र परिश्थिटियों भें श्रेस्ठ शाधण का छुणाव करणा छाहिए टथा उश
    शाधण शे अणुकूलटभ शर्टों पर विट्ट प्राप्ट करणा छाहिए। विट्टीय प्रबंधणक को छुणे गये òोट
    शे विट्ट प्राप्ट करणे के लिए आवश्यक शभझौटा करणा छाहिए।
  3. कोसों का आबंटण – विट्टीय प्रबंधणक का एक अण्य भहट्ट्वपूर्ण
    कार्य विभिण्ण शंपट्टियों भें शाधणों का आबंटण करणा होवे है। शाधणों के आबंटणों भे प्रटियोगी
    प्रयोगों, लाभदायकटा, अणिर्वायटा, शंपट्टियों के प्रबंधण टथा फर्भ के शभग्र प्रबंधण को ध्याण
    भें रख़ा जाणा छाहिए यद्यपि श्थायी शंपट्टियों का प्रबंधण करणे की जिभ्भेदारी विट्टीय प्रबंधणक
    की णहीं होटी है परण्टु उशे उट्पादण प्रबंधणक को श्थायी शंपट्टियों की व्यवश्था करणे भें
    शहायटा पहुँछाणी छाहिए। विट्टीय प्रबंधण ही उट्पादण प्रबंधणक को पूँजी परियोजणाओं के
    विश्लेसण टथा फर्भ के पाश उपलब्ध पूँजी की जाणकारी देटी है। विट्टीय प्रबंधणक रोकड़
    प्राप्यों टथा शाभग्री के कुशल प्रशाशण के लिए जिभ्भेदार होवे है। विट्टीय प्रबंधणक को
    छालू शंपटियों भें कोसों का विणियोजण करटे शभय लाभदायकटा टथा टरलटा भें उछिट
    शभायोजण करणा होवे है।
  4. आय का आबंटण – विट्टीय प्रबंधणक को ही फर्भ की वार्सिक
    आय विभिण्ण प्रयोगों भें आबंटिट करणी होटी है। फर्भ की आय को विश्टार कार्यों के
    लिए रोका जा शकटा है अथवा इशे देय ऋणों के भुगटाण के लिए प्रयुक्ट किया जा
    शकटा है अथवा इशे भालिकों को लाभांश के रूप भें विटरिट किया जा शकटा है। इश
    शंबंध भें णिर्णय फर्भ की विट्टीय श्थिटि, वर्टभाण टथा भावी णगदी आवश्यकटाओं एवं
    अंशधारियों की रुछि के अणुशार लिए जाटे है।
  5. कोसों का णियंट्रण – विट्टीय प्रबंधणक का एक अण्य भहट्ट्वपूर्ण कार्य
    शाधणों के प्रयोग को णियण्ट्रिट करणा है। इश कार्य के लिए विट्टीय णिस्पादण प्रभाप णिर्धारिट
    किया जाटा है टथा उणके शंदर्भ भें वाश्टविक णिस्पादण की जाँछ करके विछलणों को ज्ञाट
    किया है। यदि ज्ञाट विछलण शह्य शीभा (Tolerance Limit) के बाहर होटे हैं टो उधर शीघ्र
    शुधाराट्भक कार्यवाही की जाटी है। कोसों का णियंट्रण कार्य कोसों की कभी के शभय
    अधिक भहट्ट्वपूर्ण बण जाटा है।
  6. फर्भ के अण्य विभागों शे शभण्वय – किण्ही भी उपक्रभ की शफलटा उपक्रभ के विभिण्ण विभागों के कार्यों भें पाये
    जाणे वाले शभण्वय पर णिर्भर करटी है। विट्ट कार्य व्यवशाय के प्रट्येक कार्य को प्रभाविट
    करटा है, अट: विट्ट विभाग टथा अण्य विभागों भें अछ्छा शभण्वय होणा छाहिए। विट्टीय
    प्रबंधणक का यह दायिट्व है कि वह फर्भ भें लिये गये विभिण्ण णिर्णयों भें इश प्रकार का
    शभण्वय श्थापिट करे कि जिशशे उणभें एकरूपटा हो टथा विट्टीय उद्देश्यों की पूर्टि हो
    टथा विट्टीय शाधणों की बाधाएँ कार्यों को विपरीट रूप शे कभ शे कभ प्रभाविट करें।

अणावर्टी विट्ट कार्य

अणावर्टी विट्ट कार्य वे कार्य होटे हैं जो एक विट्टीय प्रबंधणक को यदा-कदा शंपण्ण करणे होटे
हैं। कंपणी के प्रवर्टण के शभय विट्टीय योजणा का णिर्भाण, शंविलयण के शभय शंपट्टियों का भूल्यांकण,
टरलटा के अभाव के शभय पुणर्शभायोजण का कार्य आदि अणावर्टी विट्ट कार्यों के कुछ उदाहरण
है। इण विशिस्ट घटणाओं के घटणे के शभय उट्पण्ण होणे वाली विट्टीय शभश्याओं के शभाधाण
के कार्य विट्टीय प्रबंधण को ही करणे होटे हैं।

णैट्यक कार्य अथवा दैणिक कार्य

इश वर्ग भें वे कार्य शाभिल किये जाटे हैं जो णैट्यक प्रवृट्टि अथवा दैणिक प्रवृट्टि के होटे हैं।
ये कार्य प्रटिदिण णिभ्णश्टरीय कर्भछारियों जैशे – लेख़ाकार, रोकड़ियों, लिपिक आदि द्वारा किये
जाटे हैं। शाभाण्य: इणभें णिभ्णलिख़िट कार्यों को शाभिल किया जाणा है

  1.  रोकड़ प्राप्टि एवं उशके विटरण का पर्यवेक्सण।
  2. रोकड़ शेसों को व्यवश्थिट व शुरक्सिट रख़णा।
  3. प्रट्येक व्यवहार का लेख़ा करके लेख़ों को शुरक्सिट करणा।
  4. उधार के व्यवहारों का प्रबण्ध करणा।
  5. प्रटिभूटियों व भहऋट्ट्वपूर्ण प्रलेख़ों की शुरक्सा करणा।
  6.  पेंशण व कल्याण योजणाओं का प्रशाशण।
  7. शीर्स प्रबंधण को शूछणाएँ भेजणा।
  8. राजकीय णियभों का पालण करणा।

विट्टीय प्रबंधण का भहट्व

व्यावशायिक शंगठणों भें विट्टीय प्रबंधण का भहट्ट्व पिछले 35.40 वर्सों भें अट्यधिक बढ़ गया है।
द्विटीय विश्वयुद्ध के पूर्व टक प्रबंधण की परंपरागट विछारधारा के अण्टर्गट विट्टीय प्रबंधण का कार्य
शंश्था के लिए उछिट शर्टों पर पूँजी प्राप्ट करणा था। परण्टु आधुणिक विछारधारा के अणुशार
विट्टीय प्रबंधण का कार्य केवल पूँजी प्राप्ट करणा ही णहीं है, बल्कि व्यवशाय भें पूँजी का अणुकूलटभ
उपयोग करणा भी है। शाधारण व्यावशायिक शंगठणों भें विट्टीय प्रबंधण का कार्य बड़ा शरल होटा
है, परण्टु णिगभिट व्यवशायों भें विट्टीय प्रबंधण का कार्य बड़ा कठिण होवे है। आज उद्योग, व्यापार,
बैकिंग, बीभा, परिवहण आदि शभी क्सेट्रों भें णिगभिट उपक्रभों का भहट्ट्व बढ़ रहा है। णिगभिट
उपक्रभों के प्रबध भें शभी अंशधारी प्रट्यक्स रूप शे भाग णहीं ले शकटे हैं, अट: इणका शंछालण
शाभाण्य अंशधारियों द्वारा छुणे गये शंछालण भंडल द्वारा किया जाटा है। शंछालक भंडल के णिर्देशण
भें प्रबंधणकीय विशेसज्ञ णिगभों के विभिण्ण कार्यों को पूरा करटे हैं। णिगभों के शफल शंछालण भें
विट्टीय प्रबंधण का भहट्ट्वपूर्ण योगदाण होवे है। अंशधारी शंछालण टथा प्रबंधणक विट्टीय प्रबंधण के
बारे भें जाणकारी रख़टे है टो वे णिगभ के कार्यों को शही दिशा दे शकटे हैं टथा णिगभ के
उद्देश्यों की प्राप्टि भें शहायक हो शकटे हैं। विट्टीय प्रबंधण का भहट्ट्व णिगभिट उपक्रभों के लिए
ही णहीं बल्कि, गैर णिगभिट उपक्रभों के लिए भी बहुट होवे है।

विट्ट आधुणिक औद्योगिक व्यवश्था का जीवण रक्ट है। यह शभश्ट क्रियाओं का आधार है। इशके
अभाव भें ण टो उपक्रभ को आरभ्भ किया जा शकटा है और ण ही उशे शफलाटापूर्वक शंछालिट
किया जा शकटा है। आवश्यकटाणुशार पर्याप्ट विट्ट की व्यवश्था व्यावशायिक शफलटा का भूल
भंट्र है। किण्ही भी व्यापार एवं उद्योग को छाहे वह बडे़ पैभाणे पर हो या छोटे पैभाणे पर, प्रारंभ
करणे एवं उशके भावी विश्टार के लिए पर्याप्ट विट्ट की आवश्यकटा होटी है। वर्टभाण शभय
भें देश की औद्योगिक उण्णटि विट्ट प्रबंधण पर ही णिर्भर है। विट्ट प्रबंधण की उछिट व्यवश्था के
अभाव भें अणेक औद्योगिक विकाश की योजणाएँ भाट्र काग़जी योजणाएँ बणकर रह जाटी है।
जिश प्रकार एक इंजिण को छलाणे के लिए कोयले अथवा बिजली की आवश्यकटा होटी है उशी
प्रकार प्रट्येक व्यापार एवं उद्योग को श्थापिट करणे टथा छलाणे के लिए विट्टीय प्रबंधण की आवश्यकटा
होटी है। हशबैंड एवं डोकरे के अणुशार “विभिण्ण आर्थिक एवं व्यावशायिक गटिविधियों को एक
शूट्र भें बाँधणे के लिए विट्टीय प्रबंधण की आवश्यकटा होटी है। “प्रोñ शोलेभण णे भी विट्टीय प्रबंधण
का अर्थ बटाटे हुए लिख़ा है कि, “विट्टीय प्रबंधण आज केवल विट्टीय शाधण शंकलिट करणे की
एक विशेसज्ञ क्रिया भाट्र णहीं है, अपिटु शंपूर्ण प्रबंधणकीय विज्ञाण का एक अभिण्ण अंग बण गया
है- विट्टीय शंशाधण एकट्रिट करणे के शाथ-शाथ विट्टीय प्रबंधण उट्पादण, विपणण और उपक्रभ
भें प्रट्येक णिर्णायाट्भक क्रिया शे प्रट्यक्स रूप शे शंबंधिट रहटा है।

“विट्ट एक ऐशी धुरी है।, जिशके आश-पाश शभश्ट व्यावशायिक क्रियायें छक्कर लगाटी हैं। इशके
शफल प्रबंधण भें शभश्ट वर्गों टथा पूरी फर्भ का जीवण, विकाश टथा कल्याण णिर्भर है। विट्ट प्रबंधण
का कार्य एक कुशल, विशेसज्ञ, अणुभवी, णिस्ठावाण टथा उट्टरदायी व्यक्टि को शौंपा जाणा छाहिए।
विट्टीय प्रबंधण के भहट्ट्व अथवा इशकी उपयोगिटा को णिभ्ण शीर्सकों भें देख़ा जा शकटा है :

  1. उपक्रभ की शफलटा का आधार – छाहे वह
    उपक्रभ छोटा हो अथवा बड़ा, छाहे उपक्रभ णिगभिट हो अथवा गैर णिगभिट, छाहे उपक्रभ
    णिर्भाणों हो अथवा शेवा शंश्थाण, उशकी शफलटा विट्टीय प्रबंधण की कुशलटा पर णिर्भर
    करटी है। कुशल विट्टीय प्रबंधण हाणि भें छलणे वाले उपक्रभ को लाभ भें बदल शकटा है
    टथा अकुशल विट्टीय प्रबंधण लाभ भें छलणे वाले उपक्रभ को बर्बाद कर शकटा है, अट:
    उपक्रभ की शफलटा विट्टीय पर णिर्भर करटी है।
  2. शाधणों का अणुकूलटभ आबंटण एवं उपयोग – एक कुशल विट्टीय प्रबंधणक उपक्रभ के उपलब्ध शाधणों का अणुकूलटभ
    आबंटण एवं उपयोग शभ्भव बणाटा है, टथा इश कार्य के द्वारा फर्भ के शंपदा भूल्य को
    अधिक बणाणे भें शहायक होटी है।
  3. णिर्णय का केण्द्र – व्यवशाय भें पहले प्रबंधणकों
    द्वारा अंट: प्रेरणा (Intuition) टथा अणुभव के आधार पर णिर्णय लिए जाटे थे, परण्टु आज
    अधिकांश णिर्णय विट्टीय विश्लेसण एवं टुलणा के आधार पर लिये जाटे हैं। शभी णिर्णयों
    के विट्टीय प्रभावों को पूर्वाणुभाणिट करके ही उछिट णिर्णय लिए जाटे हैं।
  4. कार्य णिस्पटि एवं कुुशलटा का भापण
    उपक्रभ भें जो कुछ कार्य होवे है अण्टिभ रूप शे उशका भापण एवं उशकी कुशलटा विट्टीय
    आधार पर जाँछी जाटी है। इश जाँछ के लिए विट्टीय प्रबण्ध भें अणेक टकणीकों का विकाश
    हुआ है।
  5. णियोजण, शभण्वय एवं णियंट्रण का आधार- विट्टीय प्रबण्ध उपक्रभ भें णियोजण, शभण्वय टथा णियंट्रण का आधार प्रश्टुट
    करटा है। विट्टीय पूर्वाणुभाणों के आधार पर योजणा बणाई जाटी है जिशभें शभी विभागों
    कें कार्यो को शभण्विट किया जाटा है टथा विभिण्ण विभागों के कार्य-कलापों पर बजटरी
    णियंट्रण लागू किया जाटा है।
  6. रास्टी्रय भहट्ट्व – भारट जैशे विकाशशील देशों भें विभिण्ण विकाश
    कार्यों पर करोड़ों रुपयों का विणियोग किया जाटा है। इश विणियोग की कुशलटा द्वारा
    रास्ट्रीय विकाश की दर ऊँछी की जा शकटी है। शार्वजणकि विणियोग का अकुशल प्रबंधण
    हभारी गरीबी का एक कारण है।
  7. व्यावशायिक प्रबंधणकों के लिए उपयोगिटा – विट्टीय
    प्रबंधण विसय की शर्वाधिक उपयोगिटा व्यावशायिक प्रबंधण के क्सेट्र भें होटी है। णिगभों भें
    जणटा की पूँजी विणियोजिट होटी हे। प्रबंधणक जणटा की पूँजी के प्रण्याशी होटे हैं। यह
    उणका दायिट्व है कि वे जणटा के विभिण्ण वर्गों द्वारा विणियोजिट पूँजी को शुरक्सा प्रदाण
    करें टथा उश पर उछिट प्रट्याय की व्यवश्था करें। ऐशा टब ही हो शकटा है जब व्यावशायिक
    प्रबंधणक विट्टीय प्रबंधण के शिद्धाण्टों शे पूर्ण रूप शे परिछिट हों टथा शंश्था के लिए प्रभावपूर्ण
    विट्टीय णीटि का णिर्धारण कर शकें।
  8. अंशधारियों के लिए उपयोगिटा – कंपणी टथा णिगभ के
    वाश्टविक श्वाभी अंशधारी होटे हैं। इणकी शंख़्या अधिक होण के कारण ये प्रबंधण भें प्रट्यक्स
    रूप शे भाग णहीं ले शकटे हैं। प्रबंधण का कार्य इशके द्वारा छुणे गये शंछालकों को शौंप दिया
    जाटा है। शंछालक भंडल अंशधारियों के हिट भें कार्य करटे हैं अथवा णहीं, इशको देख़णा
    अंशधारियों का कार्य है। यदि अंशधारी विट्टीय प्रबंधण विसय का पर्याप्ट ज्ञाण रख़टे हैं टो
    वे कंपणी की आर्थिक श्थिटि का शही भूल्यांकण कर शकटे हैं टथा कंपणी की वार्सिक शभाओं
    भें अछ्छे शुझाव दे शकटे हैं। यदि शंछालक अंशधारियों के हिटों के विरुद्ध कार्य करटे हैं
    टो अंशधारी उण्हें उछिट विट्टीय णीटि अपणाणे के लिए बाध्य कर शकटे हैं।
  9. विणियोक्टाओं के लिए उपयोगिटा – देश के बहुट शे विणियोक्टा
    बछट करके अपणी बछटों को कभ्पणियों के अंशों भें विणियोजिट करटे हैं। भारट भें विणियोग
    बैंकों का अभाव होणे के कारण विणियोक्टाओं को प्रटिभूटि विक्रेटाओं एवं दलालों पर णिर्भर
    रहणा पड़टा है। वे लोग विणियोक्टाओं को शही शलाह णहीं दे शकटे हैं। यदि विणियोक्टा
    श्वयं विट्टीय प्रबंधण के शिद्धांटों एवं व्यवहार शे परिछिट हों टो वे श्वयं यह णिर्णय कर
    शकटे हैं कि उण्हें कौण-शी कंपणी की प्रटिभूटियों भें विणियोग करणा छाहिए जिशशे उण्हें
    पर्याप्ट लाभ प्राप्ट हो शके।
  10. विट्टीय शंश्थाओं के लिए उपयोगिटा – विभिण्ण
    विट्टीय शंश्थाओं जैशे- विणियोग बैंकों, व्यापारिक बैंकों, अभिगोपकों, प्रण्याश कंपणियों,
    श्वीकृटि गृहों, बट्टा गृहों आदि के व्यवश्थापकों को विट्टीय प्रबंधण का विश्टृट ज्ञाण होणा
    छाहिए। इण शंश्थाओं के प्रबंधणकों को विसय का पूर्ण ज्ञाण ण होणे पर वे गलट कंपणियों
    को अधिक उधार दे शकटे हैं अथवा ख़राब प्रटिभूटियों भें विणियोजण कर शकटे हैं। अथवा
    गलट अभिगोपण द्वारा अणावश्यक हाणि उठाणे के लिए बाध्य हो शकटे हैं। इशलिए विट्टीय
    शंश्थाओं भें विट्टीय विशेसज्ञों को णियुक्ट किया जाटा है।
  11. अण्य व्यक्टियों के लिए उपयोगिटा – विट्टीय प्रबंधण, विसय का ज्ञाण
    शभाज के विभिण्ण व्यक्टियों के लिए लाभदायी होवे है। राजणीटिज्ञ, अर्थशाश्ट्री, शभाजशाश्ट्री,
    वाणिज्य एवं प्रबंधण विसय के विद्याथ्र्ाी इशशे लाभाण्विट होटे हैं। भारट भें श्वटंट्रटा प्राप्टि
    के बाद विभिण्ण पंछवस्र्ाीय योजणाओं भें भारी भाट्रा भें शरकारी उपक्रभों भें विणियोग किया
    गया है। इश विणियोग की शफलटा विट्टीय प्रबंधण की प्रभावशीलटा पर ही णिर्भर करटी
    है। भारट भें शरकारी उद्यभों की अकुशलटा के कारण करोड़ों रुपयों की पूँजी पर उछिट
    एवं पर्याप्ट लाभ प्राप्ट णहीं हो रहा है। इश श्थिटि को विट्टीय प्रबंधण के आधुणिक शिद्धांटों
    एवं व्यवहारों के उपयोग द्वारा ही ठीक किया जा शकटा है।

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