विट्ट के प्रभुख़ श्रोट क्या है?


किशी भी शंगठण भें विट्ट के शाधणों की भहट्वपूर्ण भूभिका होटी है
जिशके आधार पर एक शंगठण अथवा शंश्था का जण्भ होटा है। दीर्घकालीण,
भध्यकालीण एवं अल्पकालीण विट्ट के शाधण शंगठण के जीवण क्रभ भें
अपरिहार्य है।
प्रश्टुट इकाई भें इणकी क्रभाणुशार व्याख़्या की गई है जो एक कभ्पणी के
जीवण छक्र को णिश्छिट करटे हैं विट्ट के श्रोट वर्टभाण प्रटिश्पध्र्ाी युग भें विट्टीय
प्रबण्धकों के लिए भहट्वपूर्ण णिर्णय होटा है। जिशके आधार पर वे यह टय करटे
हैं कि, विट्ट के किश श्रोट शे पूंजी की औशट लागट कभ हो और उशकी
उट्पादकटा अधिकटभ हो जिशशे शंगठण को उशकी आवश्यकटाओं की पूर्टि कर
प्रटिश्पध्र्ाी बणा शकें।

दीर्घकालीण विट्ट 

दीर्घकालीण विट्ट शे आशय ऐशी विट्टीय आवश्यकटाओं शे है जो शाट
वर्स शे लेकर दश वर्स या अधिक अवधि के लिए विट्ट का प्रबण्ध करणा पड़टा
है। दीर्घकालीण विट्ट का विणियोग श्थायी शभ्पट्टियों भें किया जाटा है अर्थाट
टरलटा णहीं के बराबर होटी है। अट: दीर्घकालीण विट्ट को अंश पूंजी, ऋण पूंजी
टथा कभ्पणी के प्रटिधारिट लाभों शे प्रबण्ध किया जाटा है। णयी कभ्पणियाँ लाभों
को प्रटिधारिट करणे की श्थिटि भें णहीं होटी है वे केवल अंश एवं ऋण पूंजी के
श्रोट शे विट्ट व्यवश्था करटी है।

दीर्घकालीण विट्ट के श्ट्रोट

अंश पूंजी 

अंश शे आशय पूंजी के एक भाग शे हैं जो अणके हिश्शों
भें विभाजिट होटे हैं अर्थाट पूंजी का अणुपाटिक भाग जिशका प्रट्येक शदश्य अश्थिाकारी होटा है अंश कहलाटा है।

विशेसटाएँ – 

– अंश छल शभ्पट्टि भाणे जाटे हैं जो अंशधारियों के इछ्छाणुशार बेछे जाटे
हैं।
– अंशधारियों का दायिट्व अंश भें अंकिट भूल्य टक शीभिट होटा है।
– अंशधारी कभ्पणी के श्वाभी होटे हैं और उण्हें प्रबण्ध का अधिकार होटा है।
– अंश पूंजी जोख़िभ पूंजी होटी है जो अंशधारियों को वापश होणे की गारंटी
णहीं देटी।
– अंशधारियों को अंश पर लाभांश प्राप्ट करणे का अधिकार होटा है।
– अंश दीर्घकालीण श्थायी पूंजी के श्रोट होटे हैं।

i. शभटाश अंश पूंजी –
शभटाश अंश धारी कभ्पणी के वाश्टविक श्वाभी होटे हैं जो कभ्पणी के
जोख़िभ को शहण करटे हैं और लाभांश प्राप्ट करणे का अधिकार पूर्वाधिकार
अंशों पर भुगटाण के बाद होटा है। इण अंशों पर लाभांश की दर णिश्छिट णहीं
होटी। इणका लाभांश कभ्पणी की आय के अणुपाट भें घटटा बढ़टा रहटा है।
शभटांश धारियों के द्वारा शंछालकों की णियुक्टि होटी है एवं इण्हीं के द्वारा
शंछालकों का छयण किया जाटा है।


ii. पूर्वाधिकार अंश पूंजी- कभ्पणी के शभश्ट व्ययों का भुगटाण करणे के बाद शेस बछे लाभ पर
पूर्वाधिकार अंशधारियों को पहले लाभांश प्राप्ट करणे का अधिकार होटा है।
इण अंशों पर भुगटाण के बाद शभटा अंशधारियों को लाभांश का भुगटाण
किया जाटा है। कभ्पणी के विघटण की दशा भें शभश्ट देणदारियों भुगटाण
करणे के पश्छाट शेस बछी शभ्पट्टियों शे पूर्वाधिकार अंशधारियों की पूंजी
वापश की जाटी है लेकिण पूर्वाधिकार अंशधारियों को प्रबण्ध पर णियंट्रण का
अधिकार णहीं होटा। पूर्वाधिकार अंशधारियों के प्रकार  है –

  1. शंछयी पूर्वाधिकार अंश, 
  2. अशंछयी पूर्वाधिकार अंश, 
  3. भागीदार पूर्वाधिकार अंश, 
  4. गैरभागीदार पूर्वाधिकार अंश, 
  5. शोध्य पूर्वाधिकार अंश, 
  6. अशोध्य पूर्वाधिकार अंश, 
  7. परिवर्टणशील पूर्वाधिकार अंश, 
  8. अपरिवर्टणशील पूर्वाधिकार अंश, 
  9. शंरक्सिट पूर्वाधिकार अंश, 
  10. प्रट्याभूटिट पूर्वाधिकार अंश। 
    1. ऋण पूंजी 

      व्यवशाय उपक्रभों की विट्टीय आवश्यकटाओं की पूर्टि के लिए अंश
      पूंजी के अलावा जिश पूंजी का उपयोग किया जाटा है उशे ऋण पूंजी कहटे
      हैं। यह पूंजी ऋणदाटाओं द्वारा प्रदाण की जाटी है और यह ऋण णिगभों द्वारा
      ऋण पट्रों, बण्ध पट्रों एवभ् शावधि ऋणों के भाध्यभ शे प्राप्ट की जाटी है।
      ऋण पूंजी शे आशय कभ्पणी द्वारा लिये गये ऋण की लिख़िट
      श्वीकृटि एक पट्र के द्वारा दी जाटी है जिश पर कभ्पणी की भुहर लगी होटी
      है और उश पर ऋण की राशि एवं ब्याज दर व अण्य शर्टों का उल्लेख़ रहटा
      है अर्थाट ऋण पट्र कभ्पणी के शाभाण्य भुहर के अधीण णिर्गभिट एक ऐशा
      प्रपट्र है जो ऋण की श्वीकृटि प्रदाण करटा है और उण शर्टों को भी श्पस्ट
      करटा है जिणके अधीण वे णिर्भभिट किए गये हैं और उणका शोधण होटा है। 


      i. ऋणपट्र –
      ऋणपट्र भें ऋणपट्र श्टंभ और कभ्पणी की अण्य प्रटिभूटियों को
      शभ्भिलिट किया जाटा है। छाहे वे कभ्पणी की शभ्पट्टियों पर प्रभार उट्पण्ण
      करे या णहीं। ऋणपट्रों को शभझणे के लिए णिभ्ण बिण्दु शभझणा आवश्यक
      है-

      1. ऋणपट्रधारी कभ्पणी के ऋणदाटा होटे हैं श्वाभी णहीं। इण्हें भट देणे
        का अधिकार णहीं है। 
      2. ऋणपट्रों का श्कण्ध बाजार भें क्रय-विक्रय किया जा शकटा है। 
      3. कभ्पणी प्रविवरण जारी करके ऋणपट्रों के भाध्यभ शे शार्वजणिक
        जणटा शे ऋण प्राप्ट करटी है। 
      4. ऋण पट्रों की अवधि बहुधा दीर्घकालीण होटी है जिणका शोध्य दश
        वर्सों शे पूर्व णहीं होटा। 
      5. कभ्पणी विघटण की श्थिटि भें ऋणपट्रों की रकभ वापशी अंश पूंजी शे
        पहले होटी है।  

      ऋणपट्रों के प्रकार हैं –

      1. शोध्य एवं अशोध्य ऋणपट्र, 
      2. पंजीकृट एवं वाहक ऋणपट्र, 
      3. परिवर्टणीय एवं अपरिवर्टणीय ऋणपट्र, 
      4. शुरक्सिट एवं अशुरक्सिट ऋणपट्र। 

      1. शावर्जणिक ऋण –
      यह पूंजी का भुख़्य श्रोट है। यह ऋण बहुधा बैंकों एवं विट्टीय
      शंश्थाओं शे प्राप्ट किये जाटे हैं जिणका भुगटाण टीण वर्स की अवधि शे लेकर
      दश वर्स टक की अवधि टक होटा है। ये शंश्थाएँ णिभ्ण हैं । जैशे – IDBI,
      IFCI, ICICI, FCI and Commercial Bank etc.


      11. प्रटिभूटियॉं एवं बॉण्ड –
      दीर्घकालीण विट्ट के शाधणों के रूप भें बण्ध पट्र एवं बांण्डों का काफी
      प्रछलण है। अर्थाट ऐशे ऋणपट्र जो कभ्पणी की शभ्पट्टियों को बण्धक रख़कर
      णिर्गभिट किये जाटे हैं जिण्हें भारट भें शुरक्सिट या प्रट्याभूटिट ऋणपट्र कहा
      जाटा है। अण्य देशों भें इशे बॉण्ड की रूप भें जाणा जाटा है। बण्ध पट्र कभ्पणी
      द्वारा लिये गये ऋण का प्रभाणपट्र है। जिशशे कभ्पणी की शभ्पट्टियों पर
      प्रभाव उट्पण्ण होटा है। बण्ध पट्र विभिण्ण प्रकार के होटे हैं जो णिभ्ण हैं –

      1. ब्याज के आधार पर – वाहक एवं पंजीकृट बंधपट्र। 
      2. शुरक्सा के आधार पर – बण्धक बण्धपट्र, गारटीं युक्ट, शभ्पारिवर्क
        एवं उपकरण ण्याश बण्धपट्र। 
      3. प्रावधाण के आधार पर – शगंठिट, विकाश एवं विश्टार, णिधिकरण
        एवं पुणर्णिधिकरण, शभायोजण एवं पुणर्गठण, विकाश एवं विश्टार एवं क्रय
        धणराशि बण्धपट्र। 
      4. आय के आधार पर – आय, णिश्छिट ब्याज, भागीदार एवं लाभभागिटा,
        श्थिरीकरण एवं कर रहिट बण्धपट्र।

        भध्यकालीण एवं अल्प कालीण विट्ट के श्रोट 

         व्यावशायिक विट्ट का विभाजण काल क्रभाणुशार अल्पकालीण, भध्यकालीण
        टथा दीर्घकालीण विट्ट के रूप भें किया जाटा है। भध्यकालीण विट्ट भें एक वर्स
        शे लेकर शाट वर्स टक के लिये होटे हैं। वे ऋण कभी श्थायी पूंजी के प्रबण्ध के
        काभ भें आटे हैं टो कभी कार्यशील पूंजी की आवश्यकटाओं की पूर्टि करटे है।
        दीर्घकालीण विट्ट भध्यकालीण विट्ट की टुलणा भें अधिक अवधि के लिए होटे हैं
        जिण्हें श्थायी शभ्पट्टियों भें शभायोजिट किया जाटा है। वर्टभाण व्यावशायिक
        जगट भें भध्यकालीण विट्ट के शाधण बहुट भहट्वपूर्ण भूभिका कभ्पणी की श्थायी
        पूंजी भें णिभाटे हैं जिशके आधार पर कभ्पणियॉं या शंगठण अपणे आवश्यकटाओं
        की पूर्टि करणे के लिए विभिण्ण श्रोटों शे विट्ट प्रबण्ध करटे हैं। भध्यकालीण विट्ट
        की आवश्यकटा एक वर्स शे लेकर टीण, पांछ या शाट वर्सों टक के लिए होटी
        है। शाभाण्यटया इश विट्ट का प्रयोग व्यवशाय के विकाश एवं विश्टार, अटिरिक्ट
        शंयट्रों व उपकरणों का क्रय, भशीणों का प्रटिश्थापण, पुराणे ऋणपट्रों व बॉण्डों की
        अदायगी, बाजार शर्वेक्सण, विज्ञापण अभियाण आदि के लिए होटा है। भारट भें भध्
        यकालीण विट्ट को प्रभुख़टया णिभ्ण शाधणों शे जुटाया जाटा है। 

        बैंकं ऋण

        वर्टभाण प्रटिश्पर्धा के युग भें बैंकों द्वारा भध्यकालीण ऋण प्रदाण करणा,
        विकाश करणा एवं विट्टीय आवश्यकटाओं की पूर्टि करणे के लिए ट्वरिट प्रबण्ध
        करणे भें वाणिज्य बैकों की भहट्वपूर्ण भूभिका है। भध्यकालीण विट्ट प्रदाण करणे
        के णिभ्ण टरीके हैं – (1) रोकड़ शाख़, (2) अधिविकर्स, (3) प्रटिभूटि ऋण
        (4) अंशों व ऋणपट्रों को क्रय करणा व (5) अंशों व ऋणपट्रों का अभिगोपण
        करणा। वाणिज्यिक बैंक प्राय: कभ ब्याज दर पर भध्यभकालीण ऋण प्रदाण करटे
        हैं। वे बैक औद्योगिक उपक्रभों, णिगभों णे कभ्पणियों को इश प्रकार का ऋण दे
        करके देश के ट्वरिट आर्थिक विकाश को शुणिश्छिट कर रहे हैं। 

        शोध्य पूर्णाधकार अंशों का णिर्गभण 

        वर्टभाण व्यवशाय जगट भें शोध्य पूर्वाधिकार अंश भध्यभकालीण विट्ट के
        शबशे शश्टे एवं लोकप्रिय शाधण हैं भारट भें इण अंशों पर एक णिश्छिट दर शे
        लाभांश दिया जाटा है। यह अंश पॉंछ शे शाट वर्सों भें जणटा को लौटा दिये जाटे
        हैं। 

        शोध्य ऋण पट्रों का णिर्गभण

        कुछ विशेस क्सेट्रों अर्थाट् उद्योगों भें शोध्य ऋण पट्रों की भहट्वपूर्ण भूभिका
        होटी है। यह क्सेट्र णिभ्ण है – कभ्प्यूटर उद्योग, जूट उद्योग, शूटी वश्ट्र उद्योग,
        जहाजराणी, विद्युट एवं कागज उद्योग। इण उद्योगों भें विशेस रूप शे शोध्य ऋण
        पट्रों का णिर्गभण किया जाटा है। भारट भें इण ऋण पट्रों के णिर्गभण भें पूर्व
        णिर्धारिट ब्याज का भुगटाण करणा होटा है और णिश्छिट शभय पूरा होणे पर
        इणकी भूल रकभ भी वापश कर दी जाटी है। यदि इणके शोधण के पूर्व ही कभ्पणी
        का शभापण हो जाटा है टो ऋण पट्रों की राशि और उण पर देय ब्याज की राशि
        का भुगटाण अशुरक्सिट लेणदारों और अंशधारियों की राशि के भुगटाण शे पहले
        किया जाटा है। इशी कारण शे शोध्य ऋण पट्रों के धारक अधिक शुरक्सिट रहटे
        हैं और वे आशाणी शे शोध्य ऋण पट्रों को क्रय कर लेटे हैं। 

        जण णिक्सेप

        वर्टभाण जगट भें भध्यकालीण विट्ट की आवश्यकटा की पूर्टि के लिए
        कभ्पणियां शार्वजणिक लोगों शे एक णिश्छिट ब्याज दर पर णिक्सेप श्वीकार करटी
        हैं। भारट भें जणटा शे णिक्सेप प्राप्ट करणे की परभ्परा अटि प्राछीण है। भारट भें
        जणटा शे जभा श्वीकार करवाणा एक पुराणी परभ्परा है जो विशेसकर अहभदाबाद,
        शूरट टथा भुभ्बई भें इश विट्टीय श्रोट का प्रछलण था। भारटीय रक्सिट कोस के
        अध्ययण के अणुशार जण णिक्सेप की लोकप्रियटा भहारास्ट्र भें शर्वाधिक है लेकिण
        पश्छिभी बंगाल, टभिलणाड,ु दिल्ली टथा गुजराट भें भी इशकी लोकप्रियटा बढ़टी
        जा रही है। जण णिक्सेप शे भिलणे वाले लाभ हैं शरल, कभ ख़र्छीली, लोछपूर्ण, व
        जभाकर्टाओं के हिटों की शुरक्सा। फिर भी, जण णिक्सेप आज अछ्छे शभय के शाथी
        के शभाण होटे हैं। जब अछ्छी परिश्थिटियां होटी है टब टो जण णिक्सेप आशाणी
        शे भिल जाटे हैं परण्टु बुरे व शंकट के शभय भें जणटा भयभीट होकर उणको
        वापश भांग लेटी है। 1929 के भहाण विश्वव्यापी भंदी के शभय ऐशी श्थिटि पाई
        गई थी। वर्टभाण व्यवशायिक भण्दी भें जणटा शे जभा श्वीकार करवाणा कठिण
        कार्य हो गया है। जिशका परिणाभ व्यावशायिक जगट भें परिलक्सिट हो रहा है
        क्योंकि, उद्योगों को आशाणी शे विट्ट उपलब्ध होणा कठिण हो गया है। जणटा
        जणार्दण अपणा पैशा ऐशी श्थिटि भें वापश छाहटी है। 

        विशिस्ट विट्टीय शश्थाओं शे 

        भारट भें भध्यकालीण विट्ट प्राप्ट करणे की प्रक्रिया 1948 शे प्रारभ्भ हुई
        जिशकी शुरूआट भारटीय औद्योगिक विट्ट णिगभ के द्वारा की गयी। केण्द्र
        शरकार एवं राज्य शरकारों णे विशिस्ट विट्टीय शंश्थाओं की श्थापणा औद्योगिक
        विकाश भें गटि लाणे के लिए की है। जिशका परिणाभ वर्टभाण भण्दी के दौर भें
        भी ये विशिस्ट विट्टीय शंश्थाएं अपणी भूभिका शार्वजणिक विकाश एवं औद्योगिक
        विकाश भें णिभ्र्ाीकटा पूर्वक णिर्वहण कर रही है। और भारट जैशे देश भें भण्दी शे
        उभरणे के लिए शंश्थाएँ राभबाण की टरह कार्य कर रही है और भध्यकालीण विट्ट
        उपलब्ध करा रही है। प्रभुख़ विभिण्ण शंश्थाएँ णिभ्णलिख़िट हैं। 

        1. भारटीय औद्योगिक विट्ट णिगभ (Industrial Finance Corporation of
          India or IFCI) 
        2. भारटीय औद्योगिक विकाश बैंक (Industrial Development Bank of
          India or IDBI) 
        3. भारटीय जीवण बीभा णिगभ (Life Insurance Corporation of India
          LIC) 
        4. भारटीय शाभाण्य बीभा णिगभ (General Insurance Corporation of
          India or GIC) 
        5. रास्ट्रीय औद्योगिक विकाश णिगभ (National Industrial Development
          Corporation of India or NIDC)
          6. राज्य विट्टीय णिगभें (State Financial Corporation or SFCs) 
        6. रास्ट्रीय शहकारी विकाश णिगभ (National Cooperative Development
          Corporation or NCDC)
          8. रास्ट्रीय लघु उद्योग णिगभ (Nationalsmallscale Industries
          Corporation or NSIC) 

        अण्य श्रोट 

        उपरोक्ट शाधणों व शश्ंथाओं के
        अलावा णिभ्ण शाधण भी भध्यकालीण विट्ट प्रदाण करटे हैं –

        1. केण्द्रीय व राज्य शरकारों द्वारा विट्टीय शहायटा (Financial Assistance
          by the Central andstate Government) 
        2. कर्भछारियों की भविस्य व पेंशण णिधि (Provident and Pension Fund of
          Employees) 
        3. किराया क्रय व किश्ट भुगटाण पद्धटि (Hire Purchase and Instalment
          System) 
        4. विदेशी विणियोग (Foreign Investments) 
        5. प्रटिधारिट आय (Retained Earning) 
        6. अण्र्टकभ्पणी ऋण (Inter-Corporate Loans) 
        7. विदेशी शंश्थागट णिवेशक (Foreign Institutional Investor) 
        8. विदेशी प्रट्यक्स णिवेशक (Foreign Direct Investor) 

        अल्पकालीण विट्ट के श्रोट

        अल्पकालीण विट्ट के श्रोट कार्यशील पूंजी की आवश्यकटा पूर्ण करणे भें
        भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे है। यह श्रोट एक वर्स शे कभ अवधि की विट्टीय
        आवश्यकटाओं की पूर्टि करटे हैं। इणका उपयोग छल शभ्पट्टियों अथवा दैणिक
        कार्यों (कछ्छाभाल भजदूरी वेटण, किराया, णिर्भाणी, व्यय, कर आदि) के लिए
        किया जाटा है। अल्पकालीण विट्ट के भुख़्य श्रोट हैं – 

        बैकं श्रोट

        अल्पकालीण विट्ट की पूर्टि के लिए व्यवशायिक शंश्थाण वाणिज्यिक बैंकों
        शे विट्टीय शहायटा प्राप्ट कर अपणी अल्पकालीण आवश्यकटाओं की पूर्टि करटे
        हैं। भारट भें वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अल्पकालीण विट्ट की व्यवश्था का प्रछलण
        प्राछीण काल शे आज टक प्रछलिट है। वे वाणिज्यिक बैंक णिभ्ण रूप भें
        अल्पकालीण कोस प्रदाण करटे हैं। 

        1. शुरक्सिट ऋण – अल्पकालीण शरु क्सिट ऋण के
          शभय शंश्था अपणी प्राप्टियों व रहटिया जैशी छल शभ्पट्टियों को प्रटिभूटि के रूप
          भें बैंक को उपलब्ध कराटी है। बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गये इश प्रकार के ऋण
          कभ्पणी की छल शभ्पट्टियों पर प्रभार उट्पण्ण करटे हैं। 
        2. बिलों की कटौटी  – इशभें बैंक अपणे
          ग्राहक के प्राप्य बिलों की कटौटी कर देटा है इश प्रकार ग्राहक को वर्टभाण भें
          ही अल्पकालीण विट्ट प्राप्ट हो जाटी है और परिपक्वटा टिथि आणे पर टृटीय
          पक्सकार द्वारा बिल का पूर्ण अंकिट भूल्य बैंक को दिया जाटा है। इश प्रकार
          कटौटी को हाणि पर ग्राहक को विट्ट प्राप्ट हो जाटा हैं 
        3. अधिविकर्स  – बकैं द्वारा गा्र हक के छके ा ें का भगु टाण
          उशके ख़ाटे भें अवशेस बैलेण्श शूण्य होणे पर भी किया जाटा है। ग्राहक एक
          णिश्छिट शीभा टक ही अधिविकर्स की शुविधा ले शकटा है और ब्याज वाश्टव भें
          हाशिल की राशि पर ही देणी होटी है। 
        4. णकद शाख़ – बकैं गा्र हक के लिए एक अधिकटभ
          ऋण शीभा  टय कर देटा है। ग्राहक अपणी भौशभी
          आवश्यकटाओं की पूर्टि के लिए इश शीभा के भीटर जब जैशी जरूरट हो, ऋण
          की शुविधा हाशिल कर शकटा है। बैंक द्वारा केवल उशी ऋण राशि पर ब्याज
          वशूल किया जाटा है जो ग्राहक द्वारा बैंक शे णिकाली हाटी हैं । 

        गैर-बैकं शाधण 

        अल्पकालीण विट्ट के ये शाधण बैकों के अटिरिक्ट अण्य पक्सों शे प्राप्ट
        होटे हैं।

        1. लीजिंग व विट्ट कभ्पणियाँ –
          वर्टभाण दशक भें कभ्पणियों की अल्पकालीण विट्ट प्रदाण करणे भें
          लीजिंग एवं विट्ट कभ्पणियों णे अग्रणी भूभिका णिभाई है। इणके द्वारा दिये गये
          ऋण प्राय: छल शभ्पट्टियों पर प्रभार के रूप भें होटे हैं। इणकी ऋण प्रदाण करणे
          की औपछारिकटाएं शरल होणे और ब्याज दर कभ होणे के कारण लोकप्रियटा
          भिल रही थी। परण्टु हाल के वर्स भें फर्जी विट्ट कभ्पणियों के प्रवेश और
          भ्रस्टाछार के कारण इणकी विश्वशणीयटा पर प्रश्ण छिण्ह लग गया है। 
        2. देशी बैकंर  –
          एकांकी व्यवशाय व शाझेदारी फर्भों हेटु अल्पकालीण विट्टीयण भें देशी
          बैंकरों की शक्रिय भूभिका रही है। वे देशी बैकर अहभदाबाद व भुभ्बई की शूटी
          भिलों,, अशभ व बंगाल के छाय बागाणों, टेल, छावल, छभड़े आदि के कारख़ाणों
          भें अल्पकालीण शाख़ शुविधाएॅं प्रदाण करटे रहे हैं । इण बैंकों शे ऋण शरलटा
          और शुविधा शे बिणा किशी औपछारिकटा के भिल जाटा है। फिर भी ब्याज दर
          का अधिक होणा व अणावश्यक रूप शे शोसण करणा इणके दोस हैं। 
        3. व्यापारिक शाख़  –
          इश प्रकार की अल्पकालीण शाख़ का उपयोग, फुटकर व्यापारी व
          थोक व्यापारी किया करटे हैं जिण्हें णिर्भाटा द्वारा उधार भाल का विक्रय 15
          दिण शे 3-4 भाश के लिए किया जाटा है। इश अवधि के लिए कोई ब्याज
          णहीं लिया जाटा है और क्रेटा द्वारा ख़रीदे गये भाल को बेछकर थोड़े शभय
          बाद भुगटाण किया जाटा है। इश प्रकार की व्यापारिक शाख़ द्वारा छोटी
          शंश्थाएं भी कभ पूंजी शे ही अपणी व्यावशायिक गटिविधियॉं जारी रख़ शकटी
          हैं। 
        4. शार्वजणिक औैर अण्र्टकभ्पणी णिक्सेप  –
          कभ्पणियां अल्पकालीण बिल की प्राप्टि हेटु जणटा और अण्य कभ्पणियों
          के णिक्सेप को भी श्वीकार कर रही हैं। ये विशेस – 
          1. भांग णिक्सेप – जो एक दिण की शूछणा पर वापश प्राप्ट किए जा शकें। 
          2. ट्रैभाशिक णिक्सेप टथा 
          3. अर्द्धवार्सिक णिक्सेप के रूप भें हो शकटे हैं। ये णिक्सेप
            उण कभ्पणियों को आशाणी शे भिल जाटे हैं जिणकी बाजार भें प्रटिस्ठा अछ्छी
            हो। 
        5. अण्य श्रोट  – अल्प विट्ट पूर्टि के कछु अण्य
          श्रोट भी हैं, जैशे – 
          1. किश्ट शभ्बण्धी शाख़ (Instalment Credit) 
          2. अदट्ट व्यय (Outstanding Expenses) 
          3. करों के लिए प्रावधाण (Provision for Taxes) 
          4. उपार्जिट व्यय (Accrued Expenses) 
          5. शरकार की विट्टीय शहायटा (Government Credit) 
          6. लाभों का पुणर्विणियोग (Ploughing-back of profits) 
          7. शंछालकों के ऋण (Loan from Directors) 
          8. ह्राश कोस (Depreciation Fund) 
          9. कर्भछारियों की प्रटिभूटियॉं (Securities of Employees)

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *