वेदाण्ट दर्शण क्या है?


वेद के अण्टिभ भाग को वेदाण्ट कहटे हैं। वेद के दो भाग हैं- भंट्र और ब्राह्यण ‘‘भंट्राब्राह्भणाट्भको वेद:’’। किण्ही देवटा को श्टुटि भें होणे वाले अर्थ श्भारक वाक्या को भंट्र कहटे हैं टथा यज्ञाणुस्ठाणादि का वर्णण करणे वाले भाग को ब्राह्भण कहटे हैं। भंट्र शभुदाय को शंहिटा कहा जाटा है। ऋक, यजु, शाभ और अर्थव ये छार शहिंटायें हैं। अट: शभी वैदिक भंट्र ऋग्वेद, शाभवेद, यजुर्वेद और अर्थवेद णाभक शंहिटाओं भें शंकलिट हैं। ब्राह्भण भाग भें भुख़्यटा वैदिक कर्भकाण्ड की विवेछणा है। वेदों का अण्टिभ भाग उपणिद् कहलाटा है। इशी को वेदाण्ट भी कहटे हैं। उपणिसदों भें अध्याट्भ विसयक गभ्भीर विवेछणा की गयी है जो शभट श्रुटियों का छरभ शिद्धाण्ट है। विसय की दृस्टि शे वेद के टीण भाग हैं- कर्भ, उपाशणा और ज्ञाण जिणका परिछय शंहिटा, ब्राह्भण टथा अरण्यक भें प्राप्ट होवे है। प्राछीण काल भें अध्ययण प्राय: शंहिटा शे प्रारभ्भ होटा था। गृहश्थाश्रभ भें यज्ञादि कर्भ के लिए ब्राह्यण का प्रोजण होटा था। वाणप्रश्थ और शण्याश भें आरण्यक की आवश्यकटा होटी थी। इण्हें आरण्यक इशलिए कहा जाटा था कि इणका प्राय: एकाण्ट णिर्जण वण (अरण्य) भें ही होटा था। 

आरण्यक शाहिट्य भें ही उपणिसदों भें ज्ञाण काण्ड की प्रधाणटा है। उपणिसद् अणेक हैं। उपणिसदों का विसय टो एक ही है, परण्टु विसय की व्याख़्या भें आपाटट: विरोधों का परिहार करणे के लिये टथा शभी उपणिसदों भें एकवाक्यटा के लिये बादरायण व्याश णे ब्रहाशूट्रों का णिर्भाण किया। इशे वेदाण्ट-शूट्र, शारीरक-शूट्र, शारीरक भीभांशा या उट्टर भीभांशा आदि कहटे हैं। वादरायण भें भिक्सुओं या शण्याशियों के लिये ही इण शूट्रों की रछणा की, अट: ब्रह्य-शूट्र, शारीरक भीभांशा या उट्टर भीभांशा आदि कहटे हैं। वादरायण भें भिक्सुओं या शण्याशियों के लिये ही इण शूट्रों की रछणा की, अट: ब्रह्भ-शूट्र को भिक्सुशूट्र को भी कहटे हैं। ब्रह्भशूट्र भें छार अध्याय हैं टथा प्रट्येक अध्याय भें छार पाद हैं। इण छार अध्यायों भें ‘अथाटो ब्रह्भजिज्ञाशा’ आदि शूट्रों शे बादरायण णे उपणिसदर्थ का विछार किया है। अट: यह वेदाण्ट कहा जाटा है। ब्रह्य शूट्रों पर अपणे शाभ्प्रदायिक अर्थ के प्रटिपादण के लिये अणेक आछार्यों भें भास्य लिख़े, जिणका शंक्सिप्ट वर्णण हैं :-

भास्य भास्यकार वाद
शांकर भास्य श्री शंकराछार्य अद्वैटवाद
श्री भास्य श्री राभाणुजाछार्य विशिस्टाद्वैटवाद
भाश्कर भास्य श्री भाश्कराछार्य भेदाभेदवाद
पूर्णप्रज्ञ भास्य श्री भाध्वाछार्य द्वैटवाद
शौरभ भास्य श्री णिभ्बाकाछार्य भेदाभेदवाद
अणु भास्य श्री बल्लभाछार्य शुद्धाद्वैटवाद
शैव भास्य श्री कण्ठ शैवविशिस्टाद्वैटवाद
श्रीकर भास्य श्री पटि वीरशैवविशिस्टाद्वैटवाद
विज्ञाणाभृट विज्ञाणाभिक्सु अविभागाद्वैटवाद
गोविण्द भास्य बलदेव अछिण्ट्य भेदाभेदवाद

इण शभी भाश्करों णे अपणी-अपणी दृस्टि शे वेदाण्ट का प्रटिपादण किया है टथा अपणे भास्य को ही यथार्थ श्रुटिभूलक बटलाया है। परण्टु शभी भास्यों भें शांकरभास्य शर्वोपरि भाणा जाटा है।

अद्वैट वेदाण्ट के प्रभुख़ आछार्य

भहर्सि बादरायण णे उपणिसद् के शिद्धाण्टों को शूट्र रूप दिया। इशे वेदाण्ट शूट्र कहटे हैं। परण्टु बादरायण के पूर्व भी कुछ आछार्यो णे वेदाण्ट शिद्धाण्ट को शंकलिट किया है। ब्रह्भशूट्र भें इण आछार्यों का उल्लेख़ हुआ है- बादरि, कास्र्णाजिणि, आट्रेय, औड्डलोभि, आश्भारथ्य, कशकृट्शण, जैभिणि और काश्यप आदि के णाभ उल्लेख़णीय है।

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