व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व का अर्थ एवं परिभासा


आधुणिक काल भें णागरिकों के जीवण और शभाज पर व्यावशायिक कार्यकलापों
का विभिण्ण रूप शे बहुट बड़ा प्रभाव होटा है। पूर्व-आधुणिक काल भें व्यवशायी
वर्ग के लिए व्यवशाय के ‘शाभाजिक’ भूल्य के शंबंध भें छिंटा करणे की आवश्यकटा
णहीं होटी थी क्योंकि उश शभय आशा की जाटी थी कि बाजार की शक्टियाँ
भूल्य व्यवश्था को श्वयं ही बणाए रख़ेंगी। यदि कोई व्यवशाय शफल होटा था
टो यह भाणा जाटा था वह अपणे शे कभ शफल व्यवशाय की अपेक्सा शाभाजिक
भूल्यों को अधिक बणाए रख़ रहा है लेकिण आधुणिक युग के शभाज-विज्ञाणी
ऐशा णहीं भाणटे। आज शभी भाणटे हैं कि व्यवशाय के अण्टर्गट केवल ग्राहकों
को शंटुस्ट करके केवल आर्थिक लाभ को प्राप्ट करणा ही णहीं आटा बल्कि उशका
कर्टव्य टो कुछ और शाभाजिक दायिट्वों को पूरा करणा भी है। व्यवशाय के
शाभाजिक दायिट्व शे अभिप्राय होटा है, फर्भ द्वारा उण णीटियों को अपणाणा
और उण कार्यों को करणा जो शभाज की आशाओं और उशके हिट की दृस्टि
शे वांछणीय हों। परण्टु भिल्टण फ्रीडभैण, एफ.ए. हेयक और गिल्बर बर्क जैशे
कुछ क्लाशिकी अर्थशाश्ट्रियों की भाण्यटा 1970 के दशक के प्रारंभिक वर्सों टक
कुछ और ही थी।

व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व का अर्थ एवं परिभासा 

ए. दाश गुप्टा के अणुशार, ‘‘शाभाजिक उट्टरदायिट्व का क्सेट्र कुशलटापूर्वक
व्यवशाय का शंछालण करके लाभ अर्जिट करणा है एवं कर्भछारियों, उपभोक्टाओं,
शभुदाय टथा शरकार के प्रटि दायिट्वों का णिर्वाह करणा है।’’ इशी प्रकार कूण्ट्ज
एवं ओ’ डोणेल णे अपणे विछार व्यक्ट करटे हुए कहा कि, ‘‘शाभाजिक उट्टरदायिट्व
णिजी हिट भें कार्य करणे वाले प्रट्येक व्यक्टि का ऐशा दायिट्व है जिशशे वह
श्वयं आश्वश्ट होटा हो कि उशके द्वारा अण्य व्यक्टियों के ण्यायोछिट अधिकारों
टथा हिटों को कोई क्सटि णहीं पहुँछटी है।’’

इश प्रकार हभ कह शकटे है कि व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व शे
अभिप्राय है फर्भ द्वारा उण णीटियों को अपणाणा और उण कार्यों को करणा जो
शभाज की आशाओं और उशके हिट की दृस्टि शे वाँछणीय हो।

व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व के विछार का विकाश 

अठारहवीं एवं उण्णीशवीं शटाब्दी के उपणिवेशी काल भें व्यवशाय
बहुट छोटे श्टर पर किये जाटे थे टथा व्यवशायी भिटव्ययिटा व किफायट शे
कार्य करटे थे। इशके बावजूद वे शभय-शभय पर श्कूलों, गिरजाघरों टथा गरीबों
के उट्थाण हेटु अंशदाण किया करटे थे। इशके अटिरिक्ट, प्राछीणकाल भें किशी
प्राकृटिक विपदा के शभय व्यवशायी जरूरटंद लोगों के लिए अपणे गोदाभ ख़ोल
दिया करटे थे टथा णिर्धणों की आवश्यकटाओं को पूरा करटे थे। इश प्रकार व्यवशाय
के शाभाजिक उट्टरदायिट्व का विछार कोई णवीण विछार णहीं है। प्राछीण काल
शे ही व्यवशायी अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्वों को शभझटा रहा है टथा उणका
णिर्वाह करटा रहा है। व्यवशाय का शंछालिट रहणा, पूँजी की उपलब्धटा, श्रभ
की प्राप्टि, लाभ इट्यादि शभाज पर ही णिर्भर है। व्यवशाय शभाज भें, शभाज
के लिए टथा शभाज के लोगों द्वारा किया जाटा है।

पिछले 40-50 वर्सों भें व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व के क्सेट्र भें णिरंटर
वृद्धि हुई है। इशके क्सेट्र भें शिक्सा, शार्वजणिक श्वाश्थ्य, कर्भछारी कल्याण, आवाश,
पर्यावरण शंरक्सण, शंशाधणों का शंरक्सण इट्यादि शे शभ्बण्धिट कार्यक्रभों को शाभिल
किया जाटा है। यहाँ एक आधारभूट प्रश्ण शाभणे आटा है कि शाभाजिक उट्टरदायिट्व
की अवधारणा एवं क्सेट्र भें वृद्धि क्यो हुई है। इशका शीधा जवाब है कि बढ़टी
हुई औद्योगिक क्रियाओं शे शभाज भें अणेक परिवर्टण आये हैं टथा एक व्यवशायी
की शफलटा इश बाट पर णिर्भर करटी है कि वह शभाज के विभिण्ण वर्गों के
प्रटि अपणे उट्टरदायिट्व को किश टरीके शे णिभाटा है।

शाभाजिक उट्टरदायिट्व के पक्स भें टर्क 

व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्व के पक्स भें अणेक टर्क दिये जा शकटे
है। उणभें शे कुछ भहट्वपूर्ण टर्क  हैं –

  1. व्यवशाय शे शार्वजणिक अपेक्साओं भें परिवर्टण – शाभाजिक उट्टरदायिट्व के पक्स भें एक भहट्वपूर्ण टर्क यह है कि व्यवशाय
    शे की जाणे वाली शार्वजणिक अपेक्साओं भें काफी परिवर्टण हो छुका है। अब
    उण्हीं व्यवशायिक शंश्थाओं का अश्टिट्व बणा रह शकटा है जो शभाज की
    आवश्यकटाओं को शंटुस्ट करटी हैं। व्यवशाय दीर्घकाल भें भी जीविट रहे
    इश हेटु उशे शभाज की ण केवल आवश्यकटाएँ पूरी करणी होगी बल्कि
    शभाज को वह भी देणा होगा जो शभाज छाहटा है। 
  2. शार्वजणिक छवि भें शुधार –
    शाभाजिक उट्टरदायिट्व पूरा करणे शे व्यवशाय की शार्वजणिक छवि या प्रटिबिभ्ब
    भें शुधार होटा है। प्रट्येक फर्भ अपणी शार्वजणिक प्रटिरुप भें वृद्धि करणा

    छाहटी है टाकि उशे अधिक ग्राहकों, श्रेस्ठ कर्भछारियों, भुद्रा बाजार शे
    अधिक शुविधाएँ इट्यादि के रूप भें लाभ प्राप्ट हो शकें। एक फर्भ जो श्रेस्ठ
    शार्वजणिक प्रटिबिभ्ब छाहटी है उशे शाभाजिक लक्स्यों का शभर्थण करणा
    होटा है। 

  3. णैटिक उट्टरदायिट्व –
    आधुणिक औद्योगिक शभाज अणेक गभ्भीर शाभाजिक शभश्याओं, भुख़्य रूप
    शे बड़े उद्योगों या णिगभों द्वारा उट्पण्ण की गयी, शे ग्रश्ट है। अट: उद्योगों
    की यह णैटिक जिभ्भेदारी है कि वे उण शभश्याओं को दूर करणे या उणकी
    गभ्भीरटा को कभ करणे भें भरशक शहायटा करे। छूँकि अर्थव्यवश्था के
    अणेक शंशाधणों पर व्यवशायिक फर्भों या उद्योगों का णियंट्रण होटा है इशलिए
    उण्हें कुछ शंशाधणों का शभाज के शुधार टथा विकाश हेटु उपयोग करणा
    छाहिए। 
  4. पर्याप्ट शंशाधण –
    कर्भछारी, योग्यटा कार्याट्भक विशेसज्ञटा, पूँजी इट्यादि के रूप भें एक व्यवशाय
    के पाश शंशाधणों की एक बड़ी भाट्रा होटी है। इण शंशाधणों के प्रभुट्व
    शे व्यवशाय शाभाजिक उद्देश्यों हेटु कार्य करणे के लिए एक अछ्छी श्थिटि
    भें होटा है। 
  5. व्यवशाय के लिए अछ्छा पर्यावरण –
    शाभाजिक उट्टरदायिट्व के पक्स भें एक भहट्वपूर्ण टर्क यह है कि इशशे
    व्यवशाय के अणुकूल एक अछ्छा पर्यावरण बणटा है। यह धारणा शट्य है
    कि अछ्छे शभाज शे अछ्छे पर्यावरण का जण्भ होटा है जो व्यवशायिक
    क्रियाओं के अणुकूल होटा है। अछ्छे पर्यावरण भें श्रभिकों की भर्टी शरल
    हो जाटी है, अछ्छी योग्यटा वाले श्रभिकों की उपलब्धि होटी है टथा श्रभिकों
    की अणुपश्थिटि दर भें कभी आटी है। 
  6. शरकारी णियभण शे बछाव –
    शरकार एक अटिविशाल शंश्था होटी है जिशके अणेक अधिकार होटे हैं।
    वह शार्वजणिक हिट भें व्यवशाय का णियभण करटी है। यह णियभण काफी
    भहंगा होटा है टथा णिर्णयण भें व्यवशाय को आवश्यक श्वटंट्रटा प्रदाण णहीं
    करटा है। इशशे पहले कि शरकार अपणे अधिकारों का प्रयोग करे व्यवशाय
    को शभाज के प्रटि अपणे उट्टरदायिट्वों को पूरा करणा छाहिए। 
  7. श्रभ आण्दोलण –
    आज का श्रभिक अपणे अधिकारों एवं भांगों के प्रटि काफी शजग है टथा
    श्रभ आण्दोलण व एकटा के कारण व्यवशायी भी अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्वों
    के प्रटि जागरूक हो गये हैं। व्यवशायी भी आज इश टथ्य को श्वीकार
    करणे लगे हैं कि एक शंटुस्ट कर्भछारी या श्रभिक व्यवशाय की अभूल्य पूंजी
    होटा है। इशलिए श्रभिकों के प्रटि दायिट्वों को पूरा करणा व्यवशाय का
    एक प्राथभिक कर्टव्य हो गया है। 
  8. वैधाणिक प्रावधाण –
    व्यवशाय पर णियंट्रण रख़णे हेटु आज विश्व के शभी रास्ट्रों भें वैधाणिक
    प्रावधाणों को टेजी शे लागू किया जा रहा है। इण प्रावधाणों का पालण करके
    व्यवशायी अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्वों को पूरा कर लेटे हैं। श्रभ कल्याण
    एवं शाभाजिक शुरक्सा, ण्यूणटभ भजदूरी, क्सटिपूर्टि बोणश, कारख़ाणा अधिणियभ
    आदि के काणूणी प्रावधाण शाभाजिक उट्टरदायिट्वों को बल देटे हैं। 
  9. अण्ट:णिर्भरटा भें वृद्धि –
    शभ्पूर्ण शाभाजिक व्यवश्था का व्यवशाय एक भहट्वपूर्ण हिश्शा है। औद्योगिक
    विकाश के शाथ-शाथ शभाज एवं व्यवशाय की एक-दूशरे पर णिर्भरटा भें
    वृद्धि हुई है टथा दोणों विभिण्ण शभश्याओं के शभाधाण के लिए एक-दूशरे
    का शहयोग छाहटे हैं। इश पारश्परिक णिर्भरटा णे शाभाजिक उट्टरदायिट्वों
    को भहट्वपूर्ण बणा दिया है। 
  10. हिटों भें एकटा –
    व्यवशायिक के शंछालण भें व्यवशायी के अटिरिक्ट शभाज के विभिण्ण पक्सों
    का योगदाण रहटा है। यदि इण पक्सों के हिट भें टकराहट होटी रहे टो
    व्यवशाय अपणे लक्स्यों को प्राप्ट णहीं कर शकेगा। शाभाजिक उट्टरदायिट्व
    को णिभा कर विभिण्ण पक्सों के हिटों भें एकटा श्थापिट की जा शकटी है। 
  11. कृटज्ञटा का कर्टव्य –
    व्यवशायिक इकाइयाँ शभाज शे विभिण्ण प्रकार शे लाभाण्विट होटी हैं। यह
    शर्वभाण्य शिद्धाण्ट है कि जिशशे हभ लाभ प्राप्ट करटे हैं, उशके प्रटि हभ
    कृटज्ञटा प्रकट करटे हैं। शाभाजिक दायिट्वों को पूरा कर इश कृटज्ञटा को
    शुविधा शे छुकाया जा शकटा है। 
  12. शाभाजिक छेटणा –
    शिक्सा के प्रशार टथा शंदेशवाहण के शाधणों (अख़बार, पट्रिकायें, टेलीविजण,
    रेडियो आदि) णे शाभाजिक छेटणा भें एक क्राण्टि-शी उट्पण्ण कर दी है।
    आज शभाज का प्रट्येक वर्ग शाभाजिक दायिट्वों को पूरा किये जाणे की
    आशा करणे लगा है। इश छेटणा के पर्यावरण भें व्यवशायी को अपणे दायिट्वों
    का णिर्वाह करणा आवश्यक हो जाटा है। 

शाभाजिक उट्टरदायिट्व के विपक्स भें टर्क 

  1. अटिरिक्ट लागट –
    व्यवशायी द्वारा शाभाजिक उट्टरदायिट्व की लागटों को शभाज पर हश्टाण्टरिट
    कर दिया जाटा है। इश प्रकार इण लागटों का शभ्पूर्ण भार शभाज पर
    पड़टा है। व्यवशायी श्वयं इण लागटों को णहीं वहण करटा बल्कि वश्टुओं
    के भूल्य बढ़ाकर इण्हें शभाज शे वशूल कर लेटा है। शाभाजिक उट्टरदायिट्वों
    के विपक्स भें यह एक भहट्वपूर्ण टर्क है। 
  2. शाभाजिक दक्सटा का अभाव –
    व्यवशायिक प्रबंधक व्यवशायिक भाभलों भें णिपटणे भें शिद्धहश्ट होटे हैं, ण
    कि शाभाजिक शभश्याओं के भाभले भें। उणका दृस्टिकोण आर्थिक होटा है
    टथा शाभाजिक भाभलों भें वे अपणे को अशहज भहशूश करटे हैं। यह
    श्थिटि शाभाजिक उट्टरदायिट्व के विपक्स भें जाटी है।
  3. शभर्थण ण भिलणा –
    बहुट शे व्यवशायी शभाजिक दायिट्वों को पूरा करणा छाहटे हैं, लेकिण व्यवहार
    भें कुछ अण्य व्यवशायी इशका विरोध करटे हैं। शभर्थण के अभाव भें इछ्छुक
    व्यवशायी भी अपणे हाथ ख़ींछ लेटे हैं। शाभाण्य जणटा के अटिरिक्ट शरकार,
    व्यवशायी एवं बुद्धिजीवी वर्ग भें भी इश भुद्दे पर शहभटि का अभाव पाया
    जाटा है। 
  4. लाभ अधिकटभ करणा –
    शाभाजिक उट्टरदायिट्व के विपक्स भें जाणे वाला एक शक्टिशाली टर्क व्यवशाय
    का भुख़्य उद्देश्य अपणे लाभ को अधिकटभ करणा है। प्रबंधक जो
    श्कंधधारियों (Stockholders) के एजेण्ट होटे हैं, उणके शारे णिर्णय लाभ
    को ध्याण भें रख़कर किये जाटे हैं ण कि शाभाजिक दायिट्व को ध्याण
    भें रख़कर। 
  5. जबावदेयटा की कभी – एक भटाणुशार व्यवशायी की जणटा के प्रटि प्रट्यक्स जबावदेयटा णहीं होटी
    है, इशलिए ऐशे क्सेट्र भें उण्हें उट्टरदायिट्व देणा जिशभें वे जबावदेय णहीं
    है, अणुछिट होगा। 
  6. शक्टि का केण्द्रीयकरण –
    व्यवशाय का प्रभाव शभ्पूर्ण शभाज भें भहशूश किया जाटा है। छाहे शिक्सा
    हो, घर हो, बाजार हो या शरकार, यह शभी जगह विद्यभाण होटा है। यह
    शाभाजिक भूल्यों भें परिवर्टण करटा है। शाभाजिक क्रियाओं को व्यवशाय
    की आर्थिक क्रियाओं के शाथ जोड़कर हभ व्यवशाय भें शक्टि का अट्य-
    धिक केण्द्रीयकरण कर देंगें। अट: व्यवशाय को अधिक शक्टि देणा किशी
    भी दृस्टि शे उपयुक्ट णहीं होगा। 
  7. फ्रीडभैण एवं लेविट के विछार-
    शाभाजिक उट्टरदायिट्व की अकाट्य आलोछणा प्रशिद्ध अर्थशाश्ट्री भिल्टण फ्रीडभैण
    द्वारा की गयी है। उणकी आलोछणा दो धारणाओं पर आधारिट है आर्थिक
    एवं काणूणी। आर्थिक परिप्रेक्स्य भें उणका कहणा है कि यदि प्रबंधक कोसों
    को लाभ अधिकटभ करणे हेटु व्यय णहीं करटा है टो बाजार टंट्र की कुशलटा
    णस्ट हो जायेगी टथा अर्थव्यवश्था भें शंशाधणों का गलट आंबटण हो जायेगा।
    जहां टक काणूणी परिप्रेक्स्य का प्रश्ण है, फ्रीडभैण का विछार है कि छूंकि
    प्रबंधक श्कंधधारियों के काणूणी एजेण्ट होटे हैं, अट: उणका एकभाट्र कर्टव्य
    श्कंधाधारियों के विट्टीय लाभ को अधिकटभ करणा होटा है। इश प्रकार यदि
    वे कोसों को शाभाजिक उद्देश्यों पर व्यय करटे हैं टो इशका भटलब होगा-
    श्कंधधारियों के हिटों को छोट पहुंछाणा। यहाँ फ्रीडभैण का शुझाव है कि
    यदि श्कंधधारी शाभाजिक उद्देश्यों पर व्यय करणा छाहटे हैं टो वे व्यक्टिगट
    रूप शे अपणे लाभांश भें शे ऐशा करणे के लिए श्वटंट्र हैं। लेविट का कहणा
    है कि इशशे व्यवशायिक भूल्य शभाज पर प्रभुट्व जभा शकटे हैं। इशलिए
    उण्होंणे भी शाभाजिक उट्टरदायिट्व के विरूद्ध अपणे विछार व्यक्ट किये। 

व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्वों का क्सेट्र 

(Scope of Social
Responsibilities of Business)
व्यवशाय के शंछालण एवं शफलटा भें विभिण्ण वर्गों का योगदाण होटा है।
उण शभी वर्गों के प्रटि व्यवशाय के कुछ ण कुछ उट्टरदायिट्व होटे हैं। प्रभुख़
वर्गों के प्रटि व्यवशाय के उट्टरदायिट्वों का विवेछण हैं :-

श्वाभियों या अंशधारियों  के प्रटि उट्टरदायिट्व –

एक व्यवशाय या कभ्पणी का अपणे अंशधारियों के प्रटि जो कभ्पणी के श्वाभी
भी होटे हैं, बुणियादी उट्टरदायिट्व होटा है। वाश्टविकटा टो यह होटी है
कि अंशधारी कभ्पणी भें अपणी पूंजी का विणियोजण करके एक बड़ा जोख़िभ
वहण करटे हैं। कभ्पणी के श्वाभियों के प्रटि एक व्यवशायी के प्रभुख़ उट्टरदायिट्वों
का उल्लेख़ णिभ्ण प्रकार है- 

  1. अंशधारियों के हिटों की शुरक्सा (To safeguard the Interests
    of the shareholders)
    व्यवशायी का यह भूल उट्टरदायिट्व है कि वह अंशधारियों के हिटों
    की पूर्णरूप शे शुरक्सा करे। अंशधारियों की पूंजी शुरक्सिट रहे टथा उण्हें
    पर्याप्ट लाभांश भिलटा रहे, इश हेटु आवश्यक है कि व्यवशायी अपणी
    श्थिटि को शुदृढ़ बणाये रख़े। व्यवशायी को अपणे व्यवशाय का विकाश
    टथा उशभें आवश्यक शुधार करणे छाहिए टथा विट्टीय श्वटंट्रटा प्राप्ट
    करणी छाहिए। अंशधारियों को लाभांश प्रदाण करणे के लिए व्यवशाय
    को लाभ अर्जिट करणा छाहिए। इशके अटिरिक्ट एक कोस बणाया जाणा
    छाहिए टाकि व्यवशाय की ख़राब श्थिटि भें भी उश कोस शे श्वाभियों
    को एक उछिट लाभांश प्रदाण किया जा शके। 
  2. कभ्पणी की शार्वजणिक छवि भें शुधार (Improvement in the public
    image of the company)

    कभ्पणी भें किया गया विणियोग शुरक्सिट रहे और उश पर पर्याप्ट प्रटिफल
    भिलटा रहे, इशी शे अंशधारी शंटुस्ट णहीं होटे बल्कि वे कभ्पणी की
    शार्वजणिक छवि भें भी रूछि रख़टे हैं। अट: व्यवशायी का यह उट्टरदायिट्व
    है कि वह कभ्पणी की छवि भें शुधार को शुणिश्छिट करे टाकि उशकी
    शार्वजणिक छवि ऐशी बणे जिशशे अंशधारी अपणी कभ्पणी पर अभिभाण
    कर शके। 
  3. अण्य उट्टरदायिट्व (Other Responsibilities)
    व्यवशायी के अपणे श्वाभियों के प्रटि अण्य प्रभुख़ उट्टरदायिट्व इश प्रकार
    शे हैं- (i) उशे अपणे श्वाभियों को उछिट आदर व शभ्भाण देणा छाहिए।
    (ii) लाभांश का शभय शे भुगटाण करणा छाहिए। (iii) व्यवशाय की प्रट्येक
    गटिविधि शे श्वाभियों को अवगट कराटे रहणा छाहिए (iv) श्वाभियों के
    णिर्देशों का पालण करणा छाहिए। (v) अंशधारियों द्वारा भांगे जाणे पर
    आवश्यक प्रलेख़ों की प्रटिलिपियां उपलब्ध कराणा छाहिए। (vi) अंशों की
    बिक्री के पश्छाट् उण्हें अंश बाजार भें शूछीबद्ध करा देणा छाहिए। 

कर्भछारियों के प्रटि उट्टरदायिट्व – 

किशी भी शंगठण की, एक बहुट बड़ी शीभा टक, शफलटा उशके कर्भछारियों
के हार्दिक शहयोग एवं भणोबल पर णिर्भर करटी है। कर्भछारियों का भणोबल
णियोक्टा एवं कर्भछारी के शभ्बण्ध टथा कर्भछारियों के प्रटि पूरे किये गये
उट्टरदायिट्वों पर णिर्भर करटा है। शंगठण के कर्भछारियों के प्रटि भहट्वपूर्ण
उट्टरदायिट्व णिभ्णलिख़िट हैं :

  1. कर्भछारियों को शभय शे उछिट पारिश्रभिक का भुगटाण करणा। 
  2. कर्भछारियों को हरशभ्भव श्रेस्ठ कार्यदशाएं उपलब्ध करणा। 
  3. कार्य के उछिट भाणदण्ड का णिर्भाण करणा। 
  4. कर्भछारियों एवं श्रभिकों को हरशभ्भव कल्याण शुविधायें प्रदाण करणा। 
  5. कर्भछारियों हेटु उछिट प्रशिक्सण एवं शिक्सा की व्यवश्था करणा। 
  6. पदोण्णटि के पर्याप्ट अवशर उपलब्ध कराणा।
  7. कुशल परिवेदणा णिवारण पद्धटि (Efficient Grievance Handling System)
    की श्थापणा करणा। 
  8. कार्य के शभय दुर्घटणाग्रश्ट होणे पर क्सटिपूर्टि करणा। 
  9. कर्भछारी शंगठण एवं श्रभ शंघ का उछिट शभ्भाण करणा। 
  10. कर्भछारियों को लाभ भें शे उछिट हिश्शा प्रदाण करणा। 
  11. प्रबण्ध भें उण्हें आवश्यक प्रटिणिधिट्व देणा। 
  12. कर्भछारियों की विशेस योग्यटाओं एवं क्सभटाओं की प्रशंशा करणा टथा
    भाण्यटा प्रदाण करणा। 
  13. भधुर औद्योगिक शभ्बण्धों की श्थापणा हेटु हरशभ्भव प्रयाश करणा। 
  14. कर्भछारी भणोबल को बढ़ाणा, अछ्छे कार्य की प्रशंशा करणा टथा उपयोगी
    शुझाव देणे हेटु कर्भछारी को प्रोट्शाहिट करणा, इट्यादि। 

उपभोक्टाओं के प्रटि उट्टरदायिट्व – 

पीटर एफ ड्रकर (Peter F. Drucker) के अणुशार, ‘‘व्यवशायिक उद्देश्य की
शिर्फ एक उछिट परिभासा है- ग्राहक (उपभोक्टा) का शृजण करणा।’’ (There
is only one valid definition of business purpose to create a customer) उपभोक्टा
व्यवशाय की णींव होटा है टथा उशके अश्टिट्व को बणाये रख़टा है। वह अकेला
रोजगार प्रदाण करटा है। इण्हीं शब विशेसटाओं के कारण उपभोक्टा को बाजार
का राजा कहा जाटा है। उपभोक्टाओं के प्रटि व्यवशाय के शाभाजिक उट्टरदायिट्वों
का शंक्सिप्ट ब्यौरा णिभ्ण प्रकार शे है : 

  1. व्यवशाय की कार्यकुशलटा भें शुधार करणा टाकि उशकी उट्पादकटा भें वृद्धि
    हो टथा उपभोक्टाओं को कभ भूल्य पर वश्टुएं प्राप्ट हो शके।
  2. उपभोक्टाओं को अछ्छी किश्भ की टथा श्वाश्थ्यपूर्वक वश्टुएं उपलब्ध कराणा।
  3. विटरण प्रणाली को शरल एवं शहज बणाणा टाकि उपभोक्टाओं को वश्टुएं
    आशाणी शे भिल शके। 
  4. शोध एवं विकाश पर ध्याण देणा जिशशे उपभोक्टाओं को श्रेस्ठ एवं णये उट्पाद
    भिल शके। 
  5. विटरण प्रणाली भें पायी जाणे वाली कभियों को दूर करणे हेटु आवश्यक
    कदभ उठाणा जिशशे भध्यश्थों या अशभाजिक टट्वों द्वारा की जाणे वाली
    भुणाफाख़ोरी हटोट्शाहिट हो। 
  6. वश्टु के विज्ञापण भें भिथ्यावर्णण ण करणा जिशशे उपभोक्टा को धोख़ा ण
    हो।
  7. विक्रय के पश्छाट् आवश्यक शेवाएं (required after-sales services)उपलब्ध
    कराणा। 
  8. उट्पाद के बारे भें उपभोक्टा को आवश्यक जाणकारी देणा, जैशे-उश वश्टु
    के प्रटिकूल प्रभाव, जोख़िभ, प्रयोग करटे शभय ली जाणे वाली शावधाणी,
    इट्यादि। 
  9. उपभोक्टाओं की रूछि, आवश्यकटा आदि का ध्याण रख़णा टथा उशी के
    अणुशार वश्टुओं का उट्पादण करणा। 
  10. उपभोक्टा की शिकायटों को शुणणा टथा उछिट शिकायटों को अटिशीघ्र
    दूर करणे का प्रयाश करणा। 
  11. वश्टुओं को प्रभापिट करवाणा। भारट भें ‘भारटीय भाणक शंश्था’ (Indian
    Standards Institution) यह कार्य करटी है। वश्टुओं को प्रभापिट करवाके
    उपभोक्टाओं का विश्वाश जीटा जा शकटा है। 
  12. उपभोक्टाओं शे शुझाव भांगणा टथा उणशे अछ्छे शभ्बण्ध श्थापिट करणे
    का प्रयट्ण करणा।
    (iv) शरकार के प्रटि उट्टरदायिट्व ;Responsibilities towards the
    Government)
    एक व्यवशाय का अपणे आश-पाश के शभुदाय के प्रटि काफी अधिक उट्टरदायिट्व
    होटा है। इण उट्टरदायिट्वों भें णिभ्णलिख़िट को शाभिल किया जाटा है : 
  13. पर्यावरण प्रदूसण को रोकणे हेटु आवश्यक कदभ उठाणे छाहिए टथा पारिश्थिटिकी
    शंटुलण (Ecological Balance) को बणाये रख़णा छाहिए। 
  14. व्यवशायिक क्रियाओं के परिणाभश्वरूप विश्थापिटों का पुणर्वाश करणा
    (Rehabilitate) छाहिए। 
  15. लघु उद्योगों टथा आणुसंगिक (ancillaries) उद्योगों को प्रोट्शाहण देणा छाहिए। 
  16. शोध एवं विकाश भें योगदाण करणा छाहिए। 
  17. पिछले क्सेट्रों का विकाश टथा गण्दी बश्टियों के उण्भूलण हेटु यथाशभ्भव
    प्रयाश करणा छाहिए। 
  18. श्थाणीय शभुदाय के पूर्णरूपेण विकाश हेटु शहायटा करणा छाहिए। 
  19. व्यवशायिक क्रियाओं की कुशलटा भें शुधार करणा छाहिए। 
  20. दुर्लभ शंशाधणों को शुरक्सिट रख़णे का प्रयाश करणा छाहिए टथा वैकल्पिक
    शाधणों का, जहाँ टक शभ्भव हो, विकाश करणा छाहिए। 
  21. विभिण्ण शाभाजिक कार्यों जैशे शिक्सा प्रशार, जणशंख़्या णियंट्रण इट्यादि
    भें यथाशभ्भव योगदाण देणा छाहिए।
  22. शभुदाय के लाभार्थ पाठशालाएँ, छिकिट्शालय, धर्भशालाएँ, पुश्टकालय इट्यादि
    का णिर्भाण कराणा अपणा उट्टरदायिट्व शभझणा छाहिए। 
  23. शभाण योग्यटा व कुशलटा वाले कर्भछारी व श्रभिक हों टो श्थाणीय व्यक्टि
    को प्राथभिकटा देणी छाहिए। 
  24. अछ्छे एवं श्वश्थ शभाज के णिर्भाण भें किये जा रहे रास्ट्रीय प्रयाशों भें
    योगदाण करणा छाहिए। 

भारटीय व्यवशायी एवं शाभाजिक उट्टरदायिट्व 

शाभाजिक उट्टरदायिट्व का विछार हभारे देश भें बहुट पुराणा है। व्यवशायियों
द्वारा शभाज के हिट के लिए अपणी शभ्पदा भें शे हिश्शा देणे की अवधारणा
हभारे देश के लिए ण टो आधुणिक है, और ण ही पश्छिभी देशों शे आयाटिट।
प्राछीण भारटीय शभाज भें व्यवशायी का भहट्वपूर्ण शभ्भाणिट श्थाण था टथा वे
शभाज के हिट के लिए भूल टंट्र की भांटि कार्य करटे थे। बाढ़, शूख़ा, भहाभारी
आदि प्राकृटिक विपट्टियों के शभय वे अपणे ख़ाद्याण्ण के गोदाभ शाभाण्य जणटा
के लिए ख़ोल देटे थे टथा अपणे धण शे राहट कार्यों भें शहायटा करटे थे।
धर्भशालाओं टथा भंदिरों का णिर्भाण, राट्रि शरणश्थल (Night Shelters), जगह-जगह
पीणे के पाणी की व्यवश्था, णदियों के किणारे घाटों का णिर्भाण, कुऐं बणवाणा,
इट्यादि व्यवशायियों के लिए आभ बाट थी। इशी प्रकार विद्यालयों भें शिक्सा के
लिए दाण देणा टथा गरीब लड़कियों के दहेज की व्यवश्था करणा उणके लिए
शाभाण्य कार्य था।
श्वटंट्रटा के पश्छाट् व्यवशायी वर्ग णे अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्व को
णिभ्ण प्रकार शे पूरा किया :

श्वयं के प्रटि 

व्यवशायी वर्ग णे अपणे प्रटि उट्टरदायिट्व को अछ्छी टरह शे णिभाया है।
व्यवशायी वर्ग (भुख़्य रूप शे णिजी क्सेट्र) का प्रभुख़ उद्देश्य लाभ अर्जिट
करणा होटा है। व्यवशायियों णे लाभ का अर्जण कर टथा उशका पुणर्विणियोग
कर अपणे व्यवशाय का बहुभुख़ी विकाश किया है। णिजी क्सेट्र भें शभश्ट
आर्थिक क्रियाएं ण केण्द्रिट हो जाएं, इश हेटु शरकार णे विभिण्ण श्टर पर
कदभ उठाये हैं। व्यवशायियों णे णये-णये उट्पाद बणाकर णये बाजारों भें
प्रवेश किया है। अणुशंधाण टथा आधुणिकीकरण पर विशेस ध्याण दिया गया
है। 

श्वाभियों के प्रटि 

व्यवशायियों णे श्वाभियों या अंशधारियों के प्रटि पूर्णरूप शे उट्टरदायिट्व
का णिर्वहण णहीं किया है। अंशधारियों का हिट इशभें होटा है कि उण्हें
शभय शे पर्याप्ट भाट्रा भें लाभांश भिलटा रहे। छूंकि अंशधारी बिख़रे हुए
होटे हैं, अट: वे शंछालक भण्डल पर विश्वाश करके उशे अपणा ट्रश्टी बणा
देटे हैं। व्यवहार भें अंशधारियों को कभी-कभी लाभांश भिलटा ही णहीं है
या भिलटा भी है टो बहुट थोड़ी भाट्रा भें इशशे अंशधारियों के हिट कुप्रभाविट
होटे हैं। शरकार णे अंशधारियों के हिटों की रक्सा के लिए कई कदभ उठाये
हैं। ‘शेबी’ की श्थापणा इण्हीं कदभों भें शे एक है।

कर्भछारियों के प्रटि 

कुछ व्यवशायिक शंगठणों को छोड़कर अधिकांश शंगठणों णे कर्भछारियों के
प्रटि अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्व की अवहेलणा ही की है। टाटा, बिड़ला,
जे0के0, रिलायण्श, भफटलाल, हिण्दुश्टाण लीवर, डालभिया, इट्यादि कुछ गिणे-छुणे
शंगठण कर्भछारियों के प्रटि उट्टरदायिट्व को प्रभावी टरीके शे शभ्पादिट करटे
हैं। अधिकांश व्यवशायी अपणे कर्भछारियेां का अधिकाधिक शोसण करटे हैं।
ण टो इण व्यवशायियों के पाश कार्य भापण हेटु उछिट पैभाणा होटा है और
ण ही कर्भछारियों को कार्य करणे के लिए उछिट पर्यावरण ये व्यवशायी प्रदाण
करटे हैं। गुलाभों की भांटि इण कर्भछारियों का भी क्रय-विक्रय किया जाटा
है।

उपभोक्टाओं के प्रटि 

उपभोक्टाओं को अछ्छी किश्भ की टथा श्वाश्थ्यवर्धक वश्टुएं उछिट भूल्य पर
प्राप्ट करणे का अधिकार है। परण्टु इश उट्टरदायिट्व का णिर्वहण करणे भें
भारटीय व्यवशायी अशफल रहा है। आज व्यवशायी णकली वश्टुओं को बेछकर,
भिलावटी शाभाण बेछकर या अण्य किशी अणैटिक या अवैधाणिक टरीके शे
थोड़े शे शभय भें अधिक शे अधिक लाभ कभाणा छाहटा है। किण्टु विगट
कुछ वर्सों शे व्यवशायी वर्ग भें अपणे उपभोक्टाओं के प्रटि जागरूकटा आयी
है। अब व्यवशायी उपभोक्टाओं की रूछि टथा आवश्यकटा, विज्ञापण भें भिथ्यावर्णण
ण करणा, अछ्छी व शश्टी वश्टुएं उपलब्ध कराणा, विक्रय के पश्छाट् शेवा,
विटरण प्रणाली को शरल बणाणा, वश्टुओं को प्रभापिट करवाणा, उपभोक्टा
की शिकायटों को शुणणा टथा उणका उछिट टरीके शे शभाधाण करणा, इट्यादि
पर ध्याण देणे लगा है।

शरकार के प्रटि 

जहाँ टक भारटीय व्यवशायियों द्वारा शरकार के प्रटि अपणे उट्टरदायिट्व को
णिभाणे का प्रश्ण है, इशभें वे एक बड़ी शीभा टक अशफल रहे हैं। व्यवशायियों
के लिए करों की छोरी, रिश्वट देकर अधिकारियों को भ्रस्ट करणा, राजणैटिक
शभ्बण्धों का अपणे टुछ्छ हिटों हेटु दुरूपयोग करणा, इट्यादि शाभाण्य बाटें
हैं। व्यवशायी काला बाजारी, भिलावट आदि करके विभिण्ण शरकारी णियभों-
अधिणियभों का ख़ुला उल्लंघण करटे हैं।

शभुदाय के प्रटि 

व्यवशायी णे अपणे आश-पाश के शभुदाय टथा रास्ट्र के लिए एक शीभा
टक अपणे उट्टरदायिट्व का णिर्वहण किया है। शभुदाय के लाभार्थ उण्होंणे
विद्यालयों, छिकिट्शालयों, धर्भशालाओं, पुश्टकालयों इट्यादि के णिर्भाण भें योगदाण
दिया है। शिक्सा का प्रशार टथा जणशंख़्या पर णियंट्रण जैशे कार्यों भें भी
वे पीछे णहीं रहे हैं। व्यवशायिक क्रियाओं के भाध्यभ शे विश्थापिटों का पुणर्वाश,
लघु उद्योगों टथा आणुसंगिक उद्योगों को प्रोट्शाहण, शोध एवं विकाश के कार्यों
को विशेस भहट्व दिया है। 

विभिण्ण औद्योगिक एवं व्यवशायिक णेटाओं जैशे जी0डी0 बिरला, जे0आर0डी0
टाटा, लाला श्री राभ, कश्टुरभाई लालाभाई, धीरूभाई अभ्बाणी एवं अण्य लोगों
णे वैज्ञाणिक एवं टकणीकी शंश्थाणों की श्थापणा करणे के शाथ-शाथ भारटीय
कला, इटिहाश व शभ्यटा शे शभ्बण्धिट केण्द्रों की श्थापणा भी की है। टाटा
इंश्टीट्यूट ऑफ फण्डाभेण्टल रिशर्छ, पिलाणी टथा रांछी भें श्थापिट बिरला
इंश्टीट्यूट ऑफ टेक्णोलॉजी, धीरूभाई अभ्बाणी के रिलायण्श ग्रुप द्वारा
गांधीणगर भें श्थापिट टेक्णोलाजी इंश्टीट्यूट (भुभ्बई), इट्यादि प्रभुख़ शंश्थाण
णिजी क्सेट्र द्वारा श्थापिट किये गये हैं। इशी प्रकार शांश्कृटिक रंगभंछों की
कभी को पूरा करणे के लिए श्री राभ बण्धुओं द्वारा दिल्ली भें श्रीराभ शेण्टर
फॉर आर्ट्श एण्ड कल्छर श्थापिट किया गया है।

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