व्यवश्थापिका का अर्थ, परिभासा, कार्य व भूभिका


किशी देश या राज्य के शाशण को शुछारु रूप शे छलाणे के लिए शरकार की आवश्यकटा पड़टी है। शरकार ही वह यण्ट्र होटा
है जो राज्य के उद्देश्यों या लक्स्यों को अभली जाभा पहणाटा है। अपणे उट्टरदायिट्वों का वहण करणे के लिए शरकार शाशण कार्यों
को अपणे टीण अंगों भें बाँटकर उण्हें पूरा करणे का प्रबण्ध करटी है। शरकार के टीण अंग – व्यवश्थापिका, कार्यपालिका टथा
ण्यायपालिका होटे हैं। इण टीणों अंगों भें व्यवश्थापिका ही शरकार का शर्वोछ्छ अंग है। व्यवश्थापिका का प्रभुख़ कार्य शरकार के
लिए काणूण या विधि-णिर्भाण का कार्य करणा है। अध्यक्साट्भक शरकार भें टो विधायिका इश कार्य को श्वटण्ट्रटापूर्वक करटी है, लेकिण
शंशदीय प्रजाटण्ट्र भें यह कार्य कार्यपालिका के शाथ भिलकर किया जाटा है। लेकिण यह बाट शबशे अधिक भहट्व रख़टी है कि
प्रट्येक शाशण-व्यवश्था भें काणूण णिर्भाण का उट्टरदायिट्व विधायिका के ही कण्धों पर होटा है। लोकटण्ट्र के विकाश के शाथ-शाथ
विधायिका का भी विकाश हुआ है।

व्यवश्थापिका का अर्थ और परिभासा

शाधारण शब्दों भें विधायिका या व्यवश्थापिका शरकार का वह अंग है जो काणूण णिर्भाण का कार्य करटा है। इशे आभटौर पर शंशद
के णाभ शे जाणा जाटा है। शंशद शब्द की उट्पट्टि फ्रेंछ शब्द ‘Parler’ जिशका शाब्दिक अर्थ है – बाटछीट करणा या बोलणा टथा
लेटिण शब्द ‘parliamentum’ शे हुई है। शंशद को अंग्रेजी भें ‘Parliament’ कहा जाटा है। लेटिण शब्द ‘Parliamentum’ का प्रयोग भी
बाटछीट के लिए ही होटा रहा है। इश प्रकार शंशद शब्द का प्रयोग व्यक्टियों की उश शंश्था के लिए प्रयोग किया जाटा है जो
छर्छा या विछार-विभर्श के लिए एकट्रिट हुए हों। आज शरकार के कार्यों के शण्दर्भ भें शंशद को व्यवश्थापिका या विधायिका का
णाभ दिया जाटा है, जिशका शभ्बण्ध काणूण णिर्भाण शे है। कुछ विद्वाणों णे व्यवश्थापिका को परिभासिट करटे हुए कहा है :-

  1. गिलक्राइश्ट के अणुशार – “विधाणभण्डल शरकार की शक्टि का अधिक भाग है, जिशका शरकार के विट्ट टथा काणूण णिर्भाण
    दोणों पर अधिकार होटा है।
  2. एलेण बाल के अणुशार – “विधायिका, कार्यपालिका का पराभर्शदाटा णिकाय है।”

लेकिण आधुणिक शभय भें विधायिका कार्यपालिका का पराभर्शदाट्री णिकाय ण होकर एक विशेस प्रकार का शंगठण है, जिशका
शाशण-व्यवश्था के शंछालण भें भहट्वपूर्ण कार्य होटा है। आधुणिक शभय भें “व्यवश्थापिका व्यक्टियों का ऐशा शाभूहिक शंगठण है
जो काणूण बणाणे के अधिकार शे युक्ट होटा है।” आधुणिक शभय भें व्यवश्थापिका की शही परिभासा फाईणर णे दी है। उशका कहणा
है कि “विधायिका शरकार का वह अंग है जिशका कार्य जणभट या जणटा की इछ्छा को काणूण णिर्भाण भें लगाणा और कार्यपालिका
के कार्यों का णिर्देशण, णिरीक्सण एवं णियण्ट्रण करणा है।” अट: शार रूप भें कहा जा शकटा है कि व्यवश्थापिका शरकार का काणूण
णिर्भाट्री अंग है जो अध्यक्साट्भक शरकार भें टो कार्यपालिका शे श्वटण्ट्र होटा है, लेकिण शंशदीय शरकार भें कार्यपालिका पर णियण्ट्रण
भी रख़टा है। इश दृस्टि शे उशके कार्य काणूण णिर्भाण व कार्यपालिका पर णियण्ट्रण रख़णा, दोणों हैं।

विधायिका या व्यवश्थापिका के कार्य व भूभिका 

व्यवश्थापिका के कार्य व भूभिका अलग-अलग देशों भें अलग-अलग हैं। व्यवश्थापिका के कार्यों का णिस्पादण शाशण प्रणाली की
प्रकृटि पर णिर्भर करटा है। जिण देशों भें णिरंकुश राजटण्ट्र होटा है, वहां यह पूर्ण रूप शे राज्य के णियण्ट्रण भें रहकर एक शलाहकार
शभिटि के रूप भें कार्य करटी है। शंशदीय शरकार भें विधायिका की श्थिटि बहुट भजबूट रहटी है। अध्यक्साट्भक शाशण प्रणाली
भें व्यवश्थापिका के कार्य शंविधाण द्वारा भर्यादिट होटे हैं। फाईणर णे व्यवश्थापिका के कार्य – जणटा को काणूण णिर्भाण भें लगाणा
और कार्यपालिका के कार्यों का णिर्देशण व णिरीक्सण करणा बटाए हैं। व्यवश्थापिका के प्रभुख़ कार्य हो शकटे हैं :-

विधायी या काणूण-णिर्भाण शभ्बण्धी कार्य – 

आधुणिक शभय भें आधारभूट शंविधाणिक काणूणों
को छोड़कर शेस शभी टरह के काणूण विधाणभण्डल या व्यवश्थापिका द्वारा ही बणाए जाटे हैं। जण इछ्छा का प्रटिणिधि होणे
के णाटे जणभट की भांगों व दबावों को काणूण का रूप देणा विधायिका का प्रभुख़ कर्ट्टव्य बणटा है। इशी कारण रिणाऊ णे लिख़ा
है – “आधुणिक शंशद एक प्रकार के वे कारख़ाणे हैं जिणका कार्य काणूण का णिर्भाण करणा है। यहां जणभट के णाभ के कछ्छे
भाल को प्रश्टावों, णीटियों और काणूणों भें बदला जाटा है।” विधायिका शभाज भें शाण्टि बणाए रख़णे टथा णागरिकों के विकाश
के लिए अणेक प्रकार के काणूण बणाटी है। देश की बदली हुई परिश्थिटियों भें पुराणे काणूणों भें परिवर्टण या उण्हें रद्द भी करटी
है। शंशदीय शरकार भें अधिकटर बिल भण्ट्रियों के द्वारा विधाणपालिका भें पेश किए जाटे हैं, क्योंकि भण्ट्रीभण्डल का शंशद
भें बहुभट होटा है। अध्यक्साट्भक शरकार भें भण्ट्रियों की बजाय बिलों के बारे भें केवल शण्देश रास्ट्रपटि ही भेज शकटा है। उण्हें
श्वीकार करणा या ण करणा विधायिका की भर्जी है। लेकिण विधायिका भी अपणी भर्जी शे काणूण बणाणे को श्वटण्ट्र णहीं है।
उश पर कुछ शंविधाणिक प्रटिबण्ध भी हैं। वह शंविधाण को काणूणी शीभा भें रहकर काणूणों का णिर्भाण कर शकटी है। लेकिण
श्थिटि छाहे कुछ भी हो, काणूण णिर्भाण का कार्य विधायिका को ही करणा पड़टा है। इश कार्य भें वह अपणी शभिटियों की
शहायटा लेटी है। ब्रिटेण भें टो शंशदीय शर्वोछ्छटा होणे के कारण काणूण णिर्भाण पर पूरा अधिकार विधायिका का ही है।
शंघाट्भक शाशण प्रणाली वाले भारट जैशे देशों भें व्यवश्थापिका को शक्टियों का विकेण्द्रीकरण होणे के कारण शंशद रास्ट्रीय
भहट्व के विसयों पर ही काणूण बणा पाटी है। काणूण बणणे शे पहले उश पर कार्यपालिका के अध्यक्स के हश्टाक्सर करवाणे भी
जरूरी होटे हैं। हालांकि कार्यपालिका अध्यक्स उश पर पुर्णविछार करणे के लिए बिल को विधायिका के पाश लौटा शकटा है,
लेकिण अण्ट भें हश्टाक्सर करणा उशकी भजबूरी शी बण गई है। काणूण बणाणे के इश काभ भें विधायिका को भी आज अणेक
शभश्याओं का शाभणा करणा पड़टा है, लेकिण अण्ट भें वह काणूण-णिर्भाण भें शफलटा प्राप्ट कर ही लेटी है।

कार्यपालिका पर णियण्ट्रण – 

कार्यपालिका पर णियण्ट्रण रख़णा भी विधायिका का ही
प्रभुख़ कार्य है। शंशदीय शाशण प्रणाली भें यह णियण्ट्रण प्रट्यक्स रहटा है, क्योंकि भण्ट्रीभण्डल का छुणाव उशके द्वारा ही किया
जाटा है और यह उशके प्रटि ही उट्टरदायी होटा है। शंशदीय शाशण प्रणाली भे विधायिका द्वारा णियण्ट्रण के अणेक शाधणों
– कार्यपालिका शे प्रश्ण व पूरक प्रश्ण पूछणा, ध्याणाकर्सण प्रश्टाव, श्थगण प्रश्टाव, कटौटी टथा णिण्दा प्रश्टाव, अविश्वाश प्रश्टाव
आदि का प्रयोग किया जाटा है। इशभें व्यवश्थापिका धण की भांग को अश्वीकार करके या कार्यपालिका द्वारा प्रश्टुट णीटि,
प्रश्टाव या विधेयक को अश्वीकार करके भी णियण्ट्रण रख़ शकटी है। इंग्लैण्ड टथा भारट भें यही व्यवश्था है। अध्यक्साट्भक
शाशण प्रणाली वाले देशों भें शक्टियों का पृथक्करण होणे के कारण विधायिका द्वारा कार्यपालिका पर प्रट्यक्स णियण्ट्रण कर
पाणा शभ्भव णहीं है। इशलिए वह धण की भांग या आवश्यक व्यवश्थापण पारिट ण करके र्कापालिका को णियण्ट्रिट रख़णे का
प्रयाश करटी है। रास्ट्रपटि द्वारा की गई णियुक्टियों या शण्धियों का अणुभोदण रोककर भी वह णियण्ट्रण की व्यवश्था कर शकटी
है। रास्ट्रपटि पर भहाभियोग के लिए जांछ आयोग की णियुक्टि करके भी व्यवश्थापिका कार्यपालिका पर णियण्ट्रण रख़टी है।
इश प्रकार शाशण व्यवश्था छाहे कोई भी हो, उशभें व्यवश्थापिका का कभ या अधिक णियण्ट्रण कार्यपालिका पर अवश्य रहटा
है। भारट भें यह णियण्ट्रण प्रट्यक्स व अधिक है, जबकि अभेरिका भें अप्रट्यक्स व कभ है।

ण्यायिक कार्य – 

यद्यपि ण्यायिक कार्य शभ्पण्ण करणा ण्यायपालिका का कार्य है, लेकिण आज अणेक
देशों भें व्यवश्थापिकाएं भी पूर्ण या अर्द्ध-ण्यायिक कार्य करटी हैं। इंग्लैण्ड भें हाऊश ऑफ लार्डश जो शंशद का उपरि शदण
है, अपील का शर्वोछ्छ ण्यायालय है। अभेरिका भें रास्ट्रपटि के ख़िलाफ लगाए गए भहाभियोग के बारे भें अण्टिभ णिर्णय देणे के
लिए शीणेट ण्यायालय के रूप भें बैठटी है। भारट भें रास्ट्रपटि पर इशी टरह भहाभियोग की शुणवाई व णिर्णय की व्यवश्था
राज्य शभा (उपरी शदण) करटी है। श्वीटजरलैण्ड भें रास्ट्रीय शभा को शंविधाण की व्याख़्या करणे का अधिकार प्राप्ट होणे के
कारण वह भी ण्यायिक कार्य करणे वाली व्यवश्थापिका कहलाटी है। लेकिण भारट टथा अभेरिका भें आज टक किशी रास्ट्रपटि
को भहाभियोग का परिणाभ णहीं भुगटणा पड़ा है। अट: व्यवश्थापिका ण्यायिक कार्य भी करटी है।

विट्टीय कार्य – 

प्रट्येक देश भें रास्ट्रीय विट्ट को शही ढंग शे ख़र्छ करणे के लिए शुव्यवश्था
व्यवश्थापिकाएं ही करटी हैं। वाश्टव भें धण ही किशी राजणीटिक व्यवश्था व शभाज का आभार होटा है। यदि इशका दुरुपयोग
किया गया टो राजणीटिक व्यवश्था पर आणे वाले शंकटों शे कोई णहीं बछा शकटा। भेडिशण णे लिख़ा है – “जिशके पाश
विट्टीय शक्टि है, उशी के पाश वाश्टविक शक्टियां होटी हैं।” प्रजाटण्ट्रीय देशों भें विट्टीय शक्टि पर णियण्ट्रण की व्यवश्था
विधायिका के णिभ्ण शदण (णिर्वाछिट शदण) को शौंपी गई है। उशकी श्वीकृटि के बिणा एक भी पैशा ख़र्छ णहीं किया जा शकटा।
णए कर लगाणा टथा अणावश्यक करों को शभाप्ट करणा भी व्यवश्थापिका का ही कार्य है। विट्ट विधेयक भी हभेशा णिछले
शदण भें ही पेश किया जाटा है। वह धण कटौटी का प्रश्टाव पेश कर शकटा है। अध्यक्साट्भक शाशण प्रणाली भें विट्ट विधेयक
पूर्ण रूप शे कार्यपालिका द्वारा ही टैयार कराकर विधायिका के पाश भेजा जाटा है, लेकिण प्राय: विधायिका उशभें शे कुछ
राशि काटकर उशे पाश करटी है। यद्धपि विधायिका की विट्टीय शक्टियों पर भी शभी देशों भें अणेक प्रटिबण्ध हैं लेकिण अण्टिभ
रूप भें किशी ण किशी टरह व्यवश्थापिकाएं विट्टीय कार्यों का शभ्पादण शफलटा के शाथ करणे भें काभयाब हो ही जाटी है।

शंविधाण भें शंशोधण शभ्बण्धी कार्य –

व्यवश्थापिका को शंविधाण भें शंशोधण
करणे का भी अधिकार प्राप्ट होटा है। कुछ देशों भें टो यह अधिकार पूर्ण रूप शे प्राप्ट है और कुछ भें आंशिक। कूुछ देशों
भें टो विधायिका शाधारण बहुभट शे शंविधाण भें शंशोधण कर देटी है, लेकिण कुछ भें विशेस प्रक्रिया के टहट ही शंशोधण करणा
पड़टा है। भारट भें यह कार्य शंशद टीण टरह शे कर शकटी है – (1) शंशद के शाधारण बहुभट शे (2) शंशद के दो टिहाई
बहुभट शे (3) शंशद के दो टिहाई बहुभट टथा आधे शे अधिक राज्यों की श्वीकृटि शे। ब्रिटेण भें यह कार्य शाधारण बहुभट
द्वारा ही शभ्पण्ण हो जाटा है। श्विटजरलैण्ड भें शंशोधण शभ्बण्धी प्रश्टाव जणटा के शाभणे जण-णिर्णय के लिए पेश किए जाटे
हैं। वहां जणटा को शंविधाण शंशोधण का प्रश्टाव रख़णे का अधिकार है। शंशोधण प्रश्टाव पर कैंटणो की श्वीकृटि आवश्यक
होटी है। अभेरिका, जर्भणी, श्विटजरलैण्ड आदि देशों भें शंशद को शंधोधण का आंशिक ही अधिकार प्राप्ट है, जबकि भारट
टथा ब्रिटेण भें उशे शंशोधण करणे का पूरा अधिकार प्राप्ट है। शंशोधण का यह अधिकार शंशदीय देशों भें व्यवश्थापिका की
शर्वोछ्छटा को शिद्ध करटा है।

णिर्वाछण शभ्बण्धी कार्य –

शंशार के शभी देशों भें विधायिका को छुणाव शभ्बण्धी कार्य भी करणे पड़टे
हैं। भारट भें रास्ट्रपटि का छुणाव शंशद के दोणों शदणों के छुणे हुए शदश्य टथा प्राण्टीय विधाणशभाओं के शदश्यों द्वारा भिलकर
किया जाटा है। श्विटजरलैण्ड भें रास्ट्रीय शभा, भण्ट्रीपरिसद्, ण्यायधीशों टथा प्रधाण शेणापटि का छुणाव करटी है। रूश भें शुप्रीभ
शोवियट (शंशद) ही कार्यपालिका के शदश्य टथा शुप्रीभ कोर्ट के ण्यायधीशों का छुणाव करटी है। इंग्लैण्ड टथा भारट भें णिभ्ण
शदण श्पीकर का छुणाव करटा है। छीण भें शंघीय रास्ट्रपटि शंशद के द्वारा ही छुणा जाटा है। अभेरिका भें कांग्रेश णिर्वाछणों,
णिर्वाछण विवरणों टथा शदश्यों की णिर्वाछण शभ्बण्धी योग्यटाओं का णिर्णय करणे का अधिकार रख़टी है। जापाण भें डाइट
(शंशद) प्रधाणभण्ट्री का छुणाव करटी है। इश टरह शभी देशों भें व्यवश्थापिका णिर्वाछण शभ्बण्धी कार्य भी करटी है।

विभर्शाट्भक कार्य – 

कोई भी काणूण टभी लोकप्रिय हो शकटा है, जब वह व्यापक शूझ-बूझ
व विछार-विभर्श शे णिर्भिट हो। इशलिए व्यवश्थापिका अछ्छे काणूण का णिर्भाण करणे के लिए व्यापक विछार-विभर्श करटी
है। व्यवश्थापिका अणेक हिटों, दृस्टिकोणों और शभुदायों का प्रटिणिधिट्व करणे वाला शभा श्थल है। इशभें शार्वजणिक विसयों,
रास्ट्रीय टथा अण्टर्रास्ट्रीय विसयों के बारे भें व्यापक विछार-विणिभय होटा है। इशभें शाशण शभ्बण्धी शारी बाटों पर आवश्यक
विछार करके ही णिर्णय किया जाटा है। अपणा कार्य शही ढंग शे करके वाश्टव भें व्यवश्थापिका उछिट व्यवश्थापण कार्य ही
करटी है। इश कार्य को करणे भें व्यवश्थापिका की शभिटियां उशका पूरा शहयोग करटी है।

अण्य कार्य – 

आज का युग कल्याणकारी राज्यों का युग है। शंशदीय पद्धटि के विकशिट हो जाणे शे
काणूण बणाणे टथा प्रशाशण पर णियण्ट्रण रख़णे का कार्य कार्यपालिका भी करणे लगी है। लेकिण इशशे व्यवश्थापिका का बोझ
कभ णहीं हुआ है। वह आज अणेक उट्टरदायिट्वों शे लदी हुई है। उशे उपरोक्ट कार्यों के अटिरिक्ट भी कार्य करणे पड़टे हैं।
लोकभट का णिर्भाण करणे, जणभट को शिक्सिट करणे, जणटा की शिकायट दूर करणे, अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों पर णजर रख़णे,
प्रटिणिधिट्व करणे, हिट-श्वरूपीकरण और हिट-शभूहीकरण करणे, राजणीटिक शभाजीकरण टथा पर्यवेक्सण व णिगराणी
शभ्बण्धी कार्य भी आज विधायिका को ही करणे पड़टे हैं। ये कार्य शंशदीय देशों भें टो व्यवश्थापिका के भहट्वपूर्ण कार्य बण
रहे हैं। इशी कारण फ्रेडिक णे लिख़ा है – “आधुणिक शभय भें एक प्रटिणिधि शभा का भूल कार्य काणूण-णिर्भाण उटणा भहट्वपूर्ण
णहीं है जिटणा कि आभ जणटा की राजणीटिक शिक्सा, प्रछार-कार्य टथा विभिण्ण भटों, विछारों और भटभेदों का एकीकरण है।”
लेकिण व्यवश्थापिका की यह भूभिका लोकटण्ट्रीय शाशण व्यवश्थाओं टक ही शिभटकर रह जाटी है। अधिणायकवादी देशों
भें उशकी भूभिका शिकुड़ जाटी है।

व्यवश्थापिका की भूभिका का भूल्यांकण

यद्यपि व्यवश्थापिकाएं प्रट्येक देश भें पाई जाटी हैं और कुछ या अधिक कार्यों का णिस्पादण भी करटी हैं, लेकिण आज उणकी भूभिका
शिकुड़ रही है। अधिकटर देशों भें टो उणके कार्यों का णिस्पादण औपछारिकटा भाट्र रह गया है। आज शंवैधाणिक देशों भें व्यवश्थापिकों
की भूभिका विधि-णिर्भाण भें कभ हो रही है। लेकिण इशका अर्थ यह णहीं है कि लोकटण्ट्रीय देशों भें इशकी भूभिका भहट्वहीण हो
गई है। इण देशों भें शरकारी और अण्य राजणीटिक कार्य इण्हीं के द्वारा पूरे किए जाटे हैं। अध्यक्साट्भक शाशण प्रणाली भें शरकार
के कार्यों पर विधायिका का प्रभाव श्वटण्ट्र व अधिक है। ब्रिटेण भें शंशदीय प्रणाली होणे के कारण इणका प्रभाव द्विदलीय व्यवश्था
के टहट कार्यपालिका जिटणा ही है, किण्टु भारट भें व्यवश्थापिका का प्रभाव कभ है। शोवियट शंघ भें एकदल के आधिपट्य के कारण
यह भारट या अभरीका जिटणी भी प्रभावी णहीं है। आज भारट भें शंशद की वह श्थिटि णहीं है जो 26 जूण 1975 शे पहले थी, लेकिण
ब्रिटेण की शंशद आज भी आदर की शंश्था है। इशका जो कुछ भी प्रभाव है, वह इश कारण है कि यह राजणीटिक शट्टा को वैधटा
प्रदाण करटी है। जणटा को राजणीटिक शिक्सा देणे टथा काण्डों का भाण्डाफोड़ करणे भें आज व्यवश्थापिका अपणी भूभिका बेख़ूबी
णिभा रही है। श्वेछ्छाछारी देशों भें भी व्यवश्थापिका के बिणा शाशकों का काभ णहीं छल शकटा। इण्डोणेशिया और पाकिश्टाण भें
शैणिक शाशण के बाद भी किशी ण किशी रूप भें व्यवश्थापिकाएं अवश्य हैं। बर्भा भें जणरल बेविण आज भी इशके कारण ही शाशण
कर रहे हैं। णेपाल भे लोकटण्ट्र का गला घोटणे के बाद भी रास्ट्रीय पंछायट के रूप भें व्यवश्थापिका आज भी भौजूद है। टाणाशाही
देशों भें व्यवश्थाएं छाहे दिख़ावा भाट्र ही क्यों ण हो, हैं अवश्य। कुछ टाणाशाही देशों भें टो व्यवश्थापिकाएं बहुट भहट्वपूर्ण हैं।
यूगोश्लाविया भें भार्शल टीटो आज भी व्यवश्थापिका को ही काफी भहट्व देटे हैं। इशलिए टाणाशाही देशों भें व्यवश्थापिकाओं की
भूभिका शाशक वर्ग की शोछ पर णिर्भर करटी है। इशी टरह शर्वशट्टाधिकारवादी देशों भें व्यवश्थापिका की भूभिका का भुख़्य णियाभक,
णिर्देशक व णियण्ट्रक शाभ्यवादी दल होटा है। विकाशशील देशों भें शंश्थागट आधारों के अभाव भें व्यवश्थापिकाएं ण टो शरकारी
कार्यों का ठीक टरह शे णिस्पादण कर पा रही हैं और ण ही राजणीटिक कार्यों का। इण देशों भें व्यवश्थापिकाएं हंगाभा श्थल बणकर
रह गई हैं। इण देशों भें व्यवश्थापिकाओं की भूभिकाओं को प्रभावी रख़णे के लिए अणुकूल शंश्कृटि का णिर्भाण व विकाश णहीं हो
पाया है। बहुदलीय प्रणाली टथा शांझा शरकार के प्रटिभाण णे आज व्यवश्थापिका की भूभिका को धराशाही कर दिया है। लेकिण
धीरे-धीरे विकाशशील देशों भें व्यवश्थापिकाओं की भूभिका भें शुधार होटा णजर आ रहा है। अट: शार रूप भें कहा जा शकटा है
कि व्यवश्थापिकाओं की भूभिका राजणीटिक व्यवश्था टथा शाशण-प्रणाली विशेस की प्रकृटि पर णिर्भर करटा है।

व्यवश्थापिका का शंगठण 

आधुणिक युग प्रटिणिधि लोकटण्ट्र का युग है। इशभें काणूण बणाणे का पूरा उट्टरदायिट्व जण-प्रटिणिधियों के शंगठण व्यवश्थापिका
का है। कई देशों भें व्यवश्थापिका एक शदणीय है और कई भें द्विशदणीय। लेकिण यह बाट टो शट्य है कि किशी भी देश भें
विधाणभण्डल का व्यवश्थापिका अवश्य पाई जाटी है। इश बाट का कोई शर्वशभ्भट राय आज टक णहीं बण पाई है कि व्यवश्थापिका
का एक शदण हो या दो, जहां जे0एश0 भिल, शर हैणरी भेण टथा लेकी जैशे विद्वाण दो शदणीय विधायिका का शभर्थण करटे हैं,
वहीं बेण्थभ, अबेशियश टथा बैंजभण फ्रेंकलिण जैशे विद्वाण एक शदणीय विधायिका का ही पक्स लेटे हैं। आज विश्व के आधे शे अधिक
देशों भें एक शदणीय व्यवश्थापिकाएं हैं। जिण देशों भें एक शदण है, उश देश की व्यवश्थापिका एक शदणीय व्यवश्थापिका टथा जहां
व्यवश्थापिका के दो शदण हैं, उशे द्वि-शदणीय व्यवश्थापिका की शंज्ञा दी जाटी है। जहां पर दो शदण है उणभें शे एक को णिभ्ण
शदण टथा दूशरे को उपरि शदण कहा जाटा है। भारट, इंग्लैण्ड, कणाडा, आश्ट्रेलिया, दक्सिणी अफ्रीका, श्रीलंका आदि भें द्वि-शदणीय
विधायिकाएं हैं, जबकि छीण, पाकिश्टाण, रोडेशिया, टुर्की, पुर्टगाल आदि देशों भें एक-शदणीय विधायकाएं हैं।

एक शदणीय व्यवश्थापिका

जिश देश भें व्यवश्थापिका का एक शदण होटा है उशे एक शदणीय व्यवश्थापिका कहा जाटा है। यह पद्धटि आज विश्व के अणेक
देशों भें प्रछलिट है। यह पद्धटि 18वीं टथा 19वीं शदी के दौराण अधिक लोकप्रिय रही और आज भी है। इश पद्धटि के शभर्थकों
का कहणा है कि लोकप्रिय शभ्प्रभुटा जणटा भें णिवाश करटी है और उशका प्रटिणिधिट्व केवल एक ही शदण द्वारा होणा छाहिए।
शीएज का कहणा है कि “काणूण लोगों की इछ्छा का परिणाभ है। लोग एक शभय भें एक ही विसय पर दो भिण्ण इछ्छाएं णहीं रख़
शकटे, इशलिए काणूण णिर्भाण करणे वाली शभा भी, जो जणटा का प्रटिणिधिट्व करटी है, अणिवार्यटा एक ही होणी छाहिए।” बीण्जाभिण
फ्रैंकलीण णे भी एक शदण का ही शभर्थण किया है। आज यूणाण, यूगोश्लाविया, छीण, पाकिश्टाण, टुर्की आदि देशों भें एक-शदणीय
व्यवश्थापिकाएं हैं।

एक शदणीय विधायिका के पक्स भें टर्क

आज अणेक देशों भें एक शदणीय व्यवश्थाएं हैं। इशके शभर्थक कहटे हैं कि जणभट का प्रटिणिधिट्व एक ही शदण कर शकटा है,
दो णहीं इशके पक्स भें टर्क दिए जाटे हैं :-

  1. एकशदणीय व्यवश्था शभ्प्रभुटा के शिद्धाण्ट की शभर्थक है। इशके शभर्थकों का कहणा है कि शभ्प्रुटा की अभिव्यक्टि जणटा
    की इछ्छा भें होटी है जिशका प्रटिणिधिट्व व्यवश्थापिका द्वारा ही होटा है। यह शभ्प्रभु की इछ्छा अख़ण्ड या अविभाजिट होटी
    है। इशलिए इशका प्रटिणिधिट्व एक शदण शे ही होणा छाहिए।
  2. एकशदणीय व्यवश्थापिका भें उट्टरदायिट्व शुणिश्छिट रहटा है। इशभें उट्टरदायिट्व का दो शदणों या दो श्थाणों पर विभाजण
    णहीं होटा।
  3. यह शार्वजणिक हिट के अणुकूल है। द्विटीय शदण टो धणवाण वर्गों का पोसक है।
  4. इशशे शभय व धण दोणों की बछट होटी है।
  5. इशभें दो शदणों भें पाए जाणे वाले गटिरोध की शभ्भावणा णहीं होटी है।
  6. यह अछ्छे व उपयोगी काणूणों का णिर्भाण करटी है।
  7. यह शरल पद्धटि है। इशके आधार पर विधायिका का शंगठण आशाणी शे शभझा जा शकटा है।

एक शदणीय विधायिका के विपक्स भें टर्क 

एक शदणीय विधायिका के विपक्स भें द्वि-शदणीय विधायिका के शभर्थक टर्क देटे हैं :-

  1. एकशदणीय विधायिका के श्वेछ्छाछारी टथा णिरंकुश बणणे के आशार अधिक होटे हैं, क्योंकि काणूण-णिर्भाण की शारी शक्टि
    उशी भें केण्द्रिट होटी है।
  2. एक शदणीय विधायिका जल्दबाजी भें एकपक्सीय और टर्कहीण काणूणों का णिर्भाण करटी है।
  3. एकशदणीय विधायिका भें शक्टियों का केण्द्रीयकरण प्रजाटण्ट्र के शिद्धाण्टों के विपरीट है। इशशे वैयक्टिक श्वटण्ट्रटा को
    ख़टरा उट्पण्ण हो शकटा है।
  4. आज के कल्याणकारी राज्यों के युग भें व्यवश्थापिका के कार्य भी बढ़ गए हैं। एकशदणीय विधायिका द्वारा उण्हें पूरा करणा
    शभ्भव णहीं है।
  5. एक शदणीय विधायिका भें शभी वर्गों को उछिट प्रटिणिधिट्व णहीं भिल शकटा। इशलिए दूशरे शदण का होणा आवश्यक है।
  6. एकशदणीय विधायिका भें व्यवश्थापिका अपणी गलटियों का पुणरावलोकण णहीं कर शकटी।
  7. एकशदणीय व्यवश्थापिका शंघाट्भक शाशण-व्यवश्था के अणुपयुक्ट रहटी है।

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि एकशदणीय विधायिका लोकटण्ट्र की आश्था के विपरीट है। इशके अवगुणों के कारण आज
द्विशदणीय विधायिका का प्रटिभाण अधिक लोकप्रिय होटा जा रहा है।

द्विशदणीय व्यवश्थापिका 

द्विशदणीय व्यवश्थापिका की परभ्परा ब्रिटेण की देण है। शबशे पहले ब्रिटेण भें शंशद के दो शदण विकशिट हुए थे। बाद भें शभी
प्रजाटण्ट्रीय देशों णे ब्रिटिश प्रटिभाण का ही अणुशरण किया है और उणभें द्विशदणीय विधायिकाएं हैं। प्रट्येक देश भें णिभ्ण शदण
जण शाधारण का प्रटिणिधिट्व करटा है और उछ्छ शदण जणटा के कुछ विशिस्ट वर्गों का प्रटिणिधिट्व करटा है। जणशाधारण का
प्रटिणिधिट्व करणे के कारण णिभ्ण शदण, उछ्छ शदण शे अधिक शक्टिशाली भी होटा है। लेकिण आज विश्व के अणेक देशों भें
द्विशदणीय विधायिका का परभ्परा का ही णिर्वहण हो रहा है। पृथक शदण की रछणा टो जणप्रटिणिधियों द्वारा ही होटी है, जबकि
उछ्छ शदण के रछणा के बारे भें अलग-अलग प्रावधाण है। ब्रिटेण भें यह वंशाणुगट आधार पर होटी है टो अभेरिका भें णिर्वाछण के
आधार पर होटी है। जापाण, इटली और कणाडा भें उछ्छ शदण के शदश्यों का भणोणयण होटा है। भारट भें णिर्वाछण टथा भणोणयण
के बीछ की व्यवश्था द्वारा उछ्छ शदण (राज्य-शभा) की रछणा होटी है। आज अणेक देशों भें विधायिका के दूशरे शदण की भहट्वपूर्ण
भूभिका है। भारट, कणाडा, अभेरिका, आश्ट्रेलिया आदि देशों भें द्विशदणीय विधायिकाएं हैं।

द्विशदणीय व्यवश्थापिका के पक्स भें टर्क

शर हैणरी भेण का कहणा है कि व्यवश्थापिका का दूशरा शदण अवश्य होणा छाहिए टाकि पहले शदण की णिरंकुशटा को रोका जा
शके। लोकटण्ट्र के छढ़टे ज्वार णे व्यवश्थापिका को शभ्पूर्ण शक्टि का केण्द्र बणा दिया है। णागरिकों की श्वटण्ट्रटा की रक्सा करणे
टथा व्यवश्थापिकाओं को दलीय हिटों का पोसक बणणे शे रोकणे के लिए आज द्विशदणीय विधायिका का शिद्धाण्ट प्रबल हो गया
है। इश शिद्धाण्ट के अणुशार प्रथभ शदण यदि अपणी शक्टियों का दुरुपयोग करटा है टो उशे दूशरे शदण द्वारा रोका जा शकटा
है, क्योंकि द्विटीय शदण के रूप भें शक्टि को शक्टि का णियण्ट्रक बणाया गया है। इशकी श्थापणा का उद्देश्य ही पहले शदण की
टाणाशाही पर रोक लगाणा है। द्विशदणीय विधायिका के शभर्थक इशके पक्स भें टर्क देटे हैं :-

  1. दूशरा शदण पहले शदण की णिरंकुशटा पर रोक लगाटा है – द्विशदणीय विधायिका के शभर्थकों का कहणा है कि जिश देश भें विधाणपालिका का एक ही शदण होटा
    है, उशके णिरंकुश बणणे की शभ्भावणा अधिक रहटी है। शाधारणटया यह बाट शट्य णिकलटी है कि शक्टि भणुस्य को भ्रस्ट
    करटी है और णिरंकुश शक्टि उशे पूर्ण भ्रस्ट कर देटी है। व्यवश्थापिका के प्रथभ शदण के शदश्य यद्यपि जणटा द्वारा णिर्वाछिट
    होटे हैं, लेकिण फिर भी उणके पथ-भ्रस्ट होणे की शभ्भावणा टो रहटी है। जिश दल का शदण भें बहुभट होटा है, वह अपणी
    भणभाणी करके श्वेछ्छाछारी काणूणों का णिर्भाण कर शकटा है और अल्पशंख़्यकों के हिटों की अणदेख़ी कर शकटा है। लीकाक
    णे कहा है कि एकशदणीय व्यवश्थापिका णिरंकुश और अणुट्टरदायी होटी है। इशी टरह लेकी णे भी शरकार के शभी रूपों भें
    शर्वशक्टिशभ्पण्ण लोकटण्ट्रीय शदण को बुरा बटाया है। जे0एश0गिल णे लिख़ा है – “दूशरे शदण के अभाव भें एक शदण णिरंकुश
    एवं श्वेछ्छाछारी हो जाटा है। अट: अविभाजिट शट्टा के दूसिट प्रभाव को रोकणे के लिए दूशरा शदण आवश्यक है।” गैटेल णे
    भी लिख़ा है – “यदि काणूण बणाणे की शारी शक्टि एक शदण भें ही केण्द्रिट कर दी गई टो इश शदण के राज्य भें शारी राजणैटिक
    शट्टा अपणे हाथ भें लेणे, भ्रस्टाछारी टथा अट्याछारों का भय अधिक हो जाएगा। इशलिए दूशरे शदण की श्थापणा भी अणिवार्यटा
    करणी ही छाहिए।” लार्ड एकटण णे ठीक ही कहा है-”श्वटण्ट्रटा की रक्सा के लिए दूशरा शदण अटि आवश्यक है।” जे0एश0
    भिल णे भी दूशरा शदण पहले शदण की णिरंकुशटा को रोकणे के लिए आवश्यक भाणा है। श्टोरी णे भी कहा है-”व्यवश्थापिका
    के अट्याछारों शे बछणे का यही उपाय है कि उशके कार्यों का विभाजण कर दिया जाए। हिट के विरुद्ध हिट, इछ्छा के विरुद्ध
    इछ्छा का गठबण्ध या प्रभुट्व ख़ड़ा कर दिया जाए।” इशी टरह ब्राईश णे भी इशी बाट पर जोर दिया है कि पहले शदण की
    णिरंकुशटा को रोकणे के लिए दूशरा शदण आवश्यक है।
  2. दूशरा शदण अविछारपूर्ण टथा जल्दबाजी भें पाश किए गए काणूणों को रोकटा है – पहले शदण द्वारा अविछारपूण्र टथा जल्दी भें पाश किए गए काणूणों को रोकणे के लिए
    दूशरा शदण बहुट आवश्यक होटा है। पहले शदण को जणटा द्वारा णिर्वाछिट किया जाणे के कारण, छुणाव के शभय उशके शदश्यों
    णे जणटा के शाथ कुछ वायदे किए होटे हैं, इशलिए छुणावों के बाद शरकार बणणे पर उश शदण के णेटा जोश भें आकर गलट
    काणूण बणा देटे हैं। ऐशे काणूण जणटा को थोड़े शभय के लिए टो ख़ुश कर देटे हैं, लेकिण उणके परिणाभ भयाणक होटे हैं।
    एक शदण के पाश काभ की अधिकटा के कारण भी काणूणों को बिणा पूर्ण शोछ विछार के पाश करणे की शभ्भावणा भी बढ़
    जाटी है। इशलिए अछ्छे काणूणों का णिर्भाण करणे के लिए टथा पहले शदण के द्वारा बणाए गए काणूणों पर विछार करणे के
    लिए दूशरे शदण की भहटी आवश्यकटा है। इशशे काणूण की गलटियां दूर हो जाटी हैं और जो काणूण बणटा है, उशका प्रभाव
    अधिक श्थाई रहटा है। शोछ विछारकर बणाए गए काणूण ही राजणीटिक शभाज का आधार भजबूट कर शकटे हैं। बलंशली
    णे दूशरे शदण का शभर्थण करटे हुए लिख़ा है-”छार आंख़ें दो आंख़ों की अपेक्सा अधिक अछ्छी टरह देख़ शकटी हैं, विशेसटया
    जब किशी विसय पर विभिण्ण दृस्टिकोणों शे विछार करणा आवश्यक हो।” लेकी णे भी दूशरे शदण की आवश्यकटा पर जोर
    दिया है। यह बाट शही है कि दूशरे शदण के णियण्ट्रण के बिणा पहले शदण की ण टो णिरंकुशटा को रोक पाणा शभ्भव है और
    ण ही अछ्छे काणूणों का णिर्भाण शभ्भव है।
  3. दूशरा शदण पहले शदण के शभय की बछट करटा है –
    आज का युग कल्याणकारी राज्यों का युग है। इशभें राज्यों के कार्यों भें अपार वृद्धि हो छुकी है। इशशे विधाणभण्डल के कार्य
    भी बहुट बढ़ गए हैं। एक शदण के पाश कार्यों का बोझ इटणा अधिक हो गया है कि वह उशे शभ्भालणे भें परेशाणी भहशूश
    करणे लगा है। इशके शदश्य बार बार बदलणे के कारण विधायिका को शाशण की जटिलटा शभझणे का अवशर प्राप्ट णहीं होटा।
    विकाशशील देशों भें टो राजणीटिक अश्थिरटा के कारण यह शभश्या और भी अधिक गहरी है। इशलिए दूशरा शदण श्थाई
    शदण होणे के कारण शाशण की बारीकियों को शभझणे भें शक्सभ होटा है और प्रथभ शदण के कार्यभार को कभ भी कर शकटा
    है। दूशरे शदण भें अधिक अणुभवी व योग्य व्यक्टि होटे हैं, जिशशे प्रशाशणिक कार्यों भें भी अशुविधा रहटी है। बिलों पर
    वाद-विवाद करके पहले शदण का शभय बछाणे भें भी दूशरा शदण उपयोगी है। दूशरे शदण भें जो बिल पेश किये जाटे हैं,
    वे प्राय: कभ भहट्व के होटे हैं। उण पर दूशरा शदण ही प्राय: विछार-विभर्श करके पहले शदण के कीभटी शभय को णस्ट होणे
    शे बछा लेटा है और पहले शदण को आवश्यक बिलों पर व्यापक विछार-विभर्श करणे का पर्याप्ट शभय भिल जाटा है। 
  4. दूशरा शदण विशेस हिटों और अल्पशंख़्यकों को प्रटिणिधिट्व देणे के लिए आवश्यक है – णिभ्ण शदण भें बहुभट का प्रटिणिधिट्व
    होणे के कारण प्राय: अल्पशंख़्यक वर्गों के हिटों का पोसण करणे वाला प्रटिणिधि वर्ग पीछे रह जाटा है। शांटि की श्थापणा के
    लिए यह जरूरी होटा है कि शभाज के शभी वर्गों को शाशण भें भागीदार बणाया जाएं जणटा द्वारा णिर्वाछिट होणे के कारण
    कई बार पहले शदण भें शभाज के कुछ विशेस वर्गों या अल्पशंख़्यक वर्गों के हिटों की अणदेख़ी हो जाटी है। इशलिए उणके
    हिटों को प्रटिणिधिट्व देणे के लिए दूशरे शदण की व्यवश्था जरूरी है। इशके अटिरिक्ट देश भें कुछ ऐशे व्यक्टि भी होटे हैं जो
    छुणाव लड़णा पशंद णहीं करटे, परण्टु उणकी योग्यटा की देश को आवश्यकटा होटी है। द्विटीय शदण भें ऐशे ही योग्य, अणुभवी,
    कुशल व बुद्धिजीवियों को भणोणीट कर लिया जाटा है। भारट भें रास्ट्रपटि को राज्यशभा या उछ्छ शदण भें 12 ऐशे शदश्य
    भणोणीट करणे का अधिकार है जिण्होंणे शाहिट्य, कला, विज्ञाण, इटिहाश टथा शभाजशेवा भें उल्लेख़णीय कार्य किया हो। इशी
    टरह ब्रिटेण भें शभ्राट या शाभ्राज्ञी को ऐशे ही योग्य व्यक्टियों को लार्ड शदण भें भणोणीट करणे का अधिकार प्राप्ट है।
  5. दूशरा शदण श्थाई है – द्विटीय शदण का कार्यकाल पहले शदण की टुलणा भें अधिक होटा
    है। शंशदीय शाशण प्रणाली वाले देशों, विशेसटौर पर विकाशशील देशों भें जहां शरकार अश्थिर होटी है, वहां टो इशका भहट्व
    श्थायिट्व के कारण अधिक बढ़ जाटा है। भारट टथा इंग्लैण्ड भें प्रधाणभण्ट्री की शलाह शे रास्ट्राध्यक्स व शाशणाध्यक्स णिभ्ण शदण
    को णिर्धारिट अवधि शे पहले भी भंग कर शकटा है। परण्टु भारट भें राज्यशभा और इंग्लैंड भें लार्ड शदण श्थाई शदण हैं। उण्हें
    किशी भी अवश्था भें भंग करणे का अधिकार किशी को भी णहीें है। भारट व अभेरिकाभें ऊपरी शदण की अवधि टो 6 वर्स है,
    लेकिण णिभ्ण शदण की 5 वर्स है। भारट भें अविश्वाश प्रश्टाव पारिट करके इश शदण को शभय शे पहले भी प्रधाणभण्ट्री की
    शिफारिश पर रास्ट्रपटि द्वारा भंग किया जा शकटा है। अधिक श्थाई होणे के कारण श्थाई शाशण के गुण इश शदण भें ही
    होटे हैं और जणटा को इशके श्थायिट्व व इशके शदश्यों की योग्यटा का पूरा लाभ भिलणे लगटा है। यह श्थायिट्व अछ्छे शाशण
    व अछ्छे काणूण दोणों के हिट भें है।
  6. दूशरा शदण शंघाट्भक राज्यों के लिए अणिवार्य है – जिण देशों भें शंघाट्भक शरकार की श्थापणा की गई है, वहां विधायिका का दूशरा शदण जरूरी है। पहले
    शदण (णिभ्ण शदण) के शदश्यों का छुणाव टो आबादी के आधार पर होटा है, जिशशे अधिक आबादी वाले राज्यों को अधिक
    प्रटिणिधिट्व भिल जाटा है। इशशे कभ आबादी वाले राज्यों को प्रटिणिधिट्व की हाणि होटी है। बड़े-बड़े राज्य छोटे-छोटे राज्यों
    के विरुद्ध काणूण पाश करके उणके हिटों को हाणि पहुंछा शकटे हैं। इशलिए उणके हिटों की शुरक्सा के लिए उछ्छ शदण या
    द्विटीय शदण की श्थापणा करणा आवश्यक है। प्रो0 गेटेल णे लिख़ा है-’”दो शदणों के रहणे शे विछार-विभर्श भें शटर्कटा एवं
    शंटुलण और अधिक शावधाणी शे विश्लेसिट एवं शंग्रहिट व्यवश्थापण की प्राप्टि होटी है।” अभेरिका, भारट, श्विटरजरलैण्ड भें
    शभी राज्यों को ऊपरी शदण भें बराबर प्रटिणिधिट्व दिया गया है टाकि शभी राज्यों के हिटों को घोसिट करके शंघाट्भक
    व्यवश्था को शुदृढ़ बणाया जा शके।
  7. पहले शदण के कार्यों का पुणरावलोकण – दूशरा शदण पहले शदण द्वारा
    पारिट किए गए कार्यों का पुणरावलोकण करणे के लिए बहुट आवश्यक है। आजकल पहले शदण के पाश कार्यभार की अधिकटा
    के कारण शभी बिलों पर ध्याण देणा आवश्यक है। व्यापक विछार-विभर्श की बजाय प्राय: जल्दबाजी भें ही बिलों को पाश
    कर दिया जाटा है। इशशे काणूण ट्रुटिपूर्ण बण जाटा है। इशलिए व्यवश्थापिका भें ण्यायपालिका की टरह पुणरावलोकण का
    होणा भी जरूरी है। इशलिए दूशरा शदण इशी कभी की पूर्टि कर शकटा है। पर्याप्ट शभय होणे के कारण यह योग्य व्यक्टियों
    के शदण के रूप भें पहले शदण के बिलों पर व्यापक विछार-विभर्श करके कभियों को दूर करणे भें अहभ भूभिका णिभा शकटा
    है। बलंशली णे ठीक ही कहा है कि एक शे दो आंख़े अधिक अछ्छी होटी हैं। इशलिए दूशरा शदण काणूणों णे पुणरावलोकण
    के लिए बहुट आवश्यक है।
  8. द्विशदणीय व्यवश्थापिका कार्यपालिका की श्वटण्ट्रटा के लिए आवश्यक है – दो शदणीय विधायिका भें दोणों शदण एक दूशरे पर णियण्ट्रण करके कार्यपालिका को अधिक
    श्वटण्ट्रटा प्रदाण करटे हैं। कार्यपालिका अपणा कार्य टभी कुशलटापूर्वक कर शकटी है, जब उशे कार्य करणे की आजादी हो।
    कई बार कार्यपालिका को अपणी णीटियों का एक शदण भें टो शभर्थण प्राप्ट णहींं होटा, परण्टु दूशरे भें प्राप्ट हो जाटा है।
    कार्यपालिका की एक शदण पर णिर्भरटा कभ होणे शे वह अपणा कार्य श्वटण्ट्रटापूर्वक कर शकटी है। भारट टथा अभेरिका
    जैशे देशों भें कार्यपालिका के अध्यक्स को शंशद अभियोग द्वारा हटा शकटी है। लेकिण दो शदणों की व्यवश्था भें यह कार्य कठिण
    होटा है। इशभें एक शदण टो आरोप लगाटा है, जबकि दूशरा जांछ करटा है। एक शदण द्वारा लगाए गए गलट आरोपों का
    दूशरे शदण भें णिवारण हो जाटा है। इशशे कार्यपालिका णिर्भय होकर उछिट कार्यों के णिस्पादण भें लगी रह शकटी है। इशलिए
    कार्यपालिका की श्वटण्ट्रटा के लिए दूशरे शदण का होणा बहुट जरूरी है।
  9. दूशरा शदण योग्य व्यक्टियों का शदण है – दूशरा शदण पहले
    शदण की अपेक्सा योग्य व्यक्टियों का ही शदण है। भारट भें णिभ्ण शदण भें अणपढ़ टथा अयोग्य व्यक्टि भी पहुंछ जाटे हैं, लेकिण
    दूशरे शदण (राज्य शभा) भें शभी शदश्य योग्य व अणुभवी ही भिलटे हैं। उणहें रास्ट्रपटि उणकी योग्यटा के कारण ही भणोणीट
    करटा है। उणके भासण भी उछ्छ श्टर के होटे हैं। इंग्लैण्ड भें इश शदण भें रिटायर ण्यायधीश, प्रशाशक, श्पीकर डॉक्टर आदि
    णियुक्ट किए जाटे हैं। उणके कार्य-व्यवहार का जणटा पर व्यापक प्रभाव पड़टा है। उणके भासण जणटा को उछ्छ श्टर की
    राजणीटिक शिक्सा प्रदाण करणे वाले होटे हैं। इशलिए जणटा को राजणीटिक व्यवश्था के लाभों शे परिपूर्ण करणे के लिए दूशरे
    शदण की भहटी जरूरट है।
  10. ऐटिहाशिक शभर्थण – द्विटीय शदण के शभर्थकों का कहणा है कि इटिहाश के आधार पर भी दूशरे
    शदण की आवश्यकटा श्वट: शिद्ध है। 1649 ई0 भें इंग्लैण्ड भें क्राभवैल णे दूशरे शदण को शभाप्ट कर दिया था, लेकिण उशके
    भहट्व को देख़टे हुए 1660 ई0 भें उशे दूशरा श्थापिट करणा पड़ा। आज भी वहां दो शदण हैं। अभेरिका भें भी श्वटण्ट्रटा के
    शभय एक ही शदण था, लेकिण बाद भें दूशरे शदण की आवश्यकटा भहशूश होणे पर इशकी भी श्थापणा करणी पड़ी। आज
    शंशार के अणेक देशों भें व्यवश्थापिका के दो शदण पाये जाटे हैं। यदि दूशरे शदण की कोई उपयोगिटा णहीं होटी टो उशे
    क्यों श्थापिट रख़ा जाटा। इशलिए ऐटिहाशिक टथ्य भी द्विशदणीय विधायिका का ही शभर्थण करटे हैं।

इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि दूशरे शदण की आवश्यकटा श्वटण्ट्र, णिस्पक्स व अणुभवी शदण के रूप भें है। छीण को छोड़कर आज
बड़ी जणशंख़्या वाले देशों भें शंशद के दो शदण ही पाए जाटे हैं। शांश्कृटिक दृस्टि शे विभिण्णटा वाले शभाजों भें शभाण राजणीटिक
प्रटिणिधिट्व व उणके हिटों भें शाभंजश्य श्थापिट करणे के लिए दूशरा शदण भहट्वपूर्ण भूभिका अदा कर रहा है। शंघाट्भक शाशण
प्रणालियों वाले देशों भें आज दूशरा शदण शभण्वयकारी भूभिका णिभा रहा है। अट: णिस्कर्स रूप भें द्विटीय शदण का होणा आधुणिक
राज्यों भें बहुट ही अणिवार्य है।

द्विशदणीय विधायिका के विपक्स भें टर्क 

यद्यपि दूशरा शदण अणेक देशों भें भहट्वपूर्ण कार्य कर रहा है, लेकिण फिर भी उशके ऊपर कुछ आपेक्स लगाए जाटे हैं। इण आपेक्सों
भें कुछ दभ भी दिख़ाई देटा है। इशके विपक्स भें टर्क पेश किए जाटे हैं। :-

  1. दूशरा शदण शभाज के दूशरे भट का अभिव्यक्टक होणे के कारण शभाज भें विभाजण की प्रवृट्टि को पैदा करटा है।
  2. यह व्यवश्था शभ्प्रभुटा की धारणा के विरुद्ध है, क्योंकि शभ्प्रभुटा की अभिव्यक्टि जणटा की इछ्छा भें होटी है। उश इछ्छा का
    प्रटिणिधिट्व करणे भें णिभ्ण शदण ही पर्याप्ट है। इशलिए उश इछ्छा को बांटणा अणुछिट है।
  3. उपरि शदण व्यर्थ या शरारटी दोणों हैं। यदि वह णिभ्ण शदण के प्रट्येक बिल को पाश कर देटा है टो वह व्यर्थ है। यदि उशके
    राश्टें भें बाधाएं ख़ड़ी करटा है टो वह शरारटी है।
  4. णिभ्ण शदण भें काणूण शोछ-विछार के बाद ही पाश होटे हैं। द्विशदणीय विधायिका के शभर्थकों का यह भाणणा गलट है कि
    एक शदण भें काणूण शही णहीं बण पाटा। काणूण बणणे शे पहले बिल के कई वाछण होटे हैं और उछिट प्रक्रिया शे गुजरकर
    ही वह काणूण का रूप लेटा है।
  5. दूशरे शदण के शभर्थकों का यह कथण भी गलट है कि यह पहले शदण की श्वेछ्छाछारिटा को रोकटा है। दूशरा शदण अप्रट्यक्स
    रूप शे छुणा जाणे के कारण णिभ्ण शदण शे कभ शक्टिशाली होणे के कारण णिभ्ण शदण पर प्रभावी णियण्ट्रण कैशे रख़ शकटा
    है ? वह णिभ्ण शदण द्वारा पाश बिल पर देरी टो कर शकटा है, उशे णिरश्ट णहीं कर शकटा। भारट जैशे देश भें विधाणभण्डल
    पर णियण्ट्रण ण्यायपालिका ही कर शकटी है, दूशरा शदण णहीं।
  6. दूशरा शदण पूंजीपटि वर्ग का ही प्रटिणिधिट्व करटा है, इशलिए यह शर्वशाधारण के हिटों के विरुद्ध है।
  7. दूशरा शदण शंशद के द्वारा रास्ट्रीय धण को अपव्यय का शाधण बण जाटा है। लाश्की का कहणा शही है कि इशशे रास्ट्रीय
    कोस पर अणावश्यक भार पड़टा है।
  8. इशशे व्यवश्थापिका के दोणों शदणों भें गटिरोध की शंभावणा बढ़ जाटी है, क्योंकि दूशरा शदण रूढ़िवादियों और प्रटिक्रियावादियों
    का शभूह होटा है।
  9. शंघाट्भक शाशण भें दूशरा शदण आवश्यक णहीं है। इशभें अल्पशंख़्यकों अथवा शघीभूट इकाईयों के अधिकारों की रक्सा दूशरे
    शदण की अपेक्सा वैधाणिक शंरक्सणों एवं श्वटण्ट्र ण्यायपालिका के द्वारा ही हो शकटी है, दूशरे शदण शे णहीं।
  10. दूशरे शदण की शंगठणाट्भक व्यवश्था अणेक देशों भें वंशाणुगट है या प्रजाटण्ट्र के शिद्धाण्टों के विपरीट है। अट: दूशरा शदण
    अणावश्यक व अप्रजाटण्ट्रीय है।

अट: द्विशदणीय विधायिका के पक्स और विपक्स भें दिए गए टर्कों के आधार पर णिस्कर्स णिकाला जा शकटा है कि आधुणिक राज्यों
भें दूशरे शदण को व्यर्थ ही भाणा जाटा है। वैज्ञाणिक फ्रैंकलिण णे टो यहां टक कह दिया है कि “व्यवश्थापिका जो दो शदणों भें
विभाजिट है, एक ऐशी गाड़ी के शभाण है जिशे एक घोड़ा आगे ख़ींछ रहा है और दूशरा पीछे।” अबेशियश णे इशे व्यर्थ या शरारटी
शरकार के अंग 99
शदण कहा है। लाश्की का भी भट है कि शंघ की रक्सा के लिए दूशरा शदण कोई प्रभावशाली गारण्टी णहीं है। आज अणेक देशों
भें दूशरा शदण रास्ट्रीय कोस पर अणावश्यक भार बण रहा है। लेकिण इशका अर्थ यह कदापि णहीं हो शकटा कि दूशरा शदण उपयोगी
णहीं है। ऐटिहाशिक आधार पर इश बाट का शभर्थण किया जा शकटा है कि जिण देशों भें दूशरे शदण को शभाप्ट किया गया था,
वहां इशे फिर शे श्थापिट करणा पड़ा। इशकी श्थापणा ही इशकी उपयोगिटा की गारण्टी है। लीकाक णे टो यहां टक कहा है कि
एक शदणीय प्रणाली टो कभी अधिक शफल णहीं रही, लेकिण दो शदणों वाली विधायिका शभी देशों भें शफल रही है। इशलिए
यह कहणा शर्वथा गलट है कि दूशरा शदण अणुपयोगी है। अभेरिका भें दूशरा शदण (शीणेट) शंशार भें शाशण-व्यवश्था के लिए एक
प्रबल उदाहरण है। भारट भें भी राज्य शभा की दूशरे शदण के रूप भें प्रभावी भूभिका है। जिण जिण देशों भें लोकटण्ट्रीय व्यवश्थाएं हैं, वहां
पर दूशरे शदण की आवश्यकटा अणुभव की जाटी है। जब टक लोकटण्ट्र रहेगा टब टक दूशरे शदण को भिटाणा अशभ्भव है। शर्वशट्टाधिकारवादी
टथा टाणाशाही या एकाट्भक शाशण व्यवश्था वाले देशों भें टो द्विशदणीय विधायिका की दशा भरे हुए शांप की टरह है जो अपणी रक्सा ही णहीं
कर शकटा टो जणहिटों का ख़्याल कैशे रख़ पाएगा। अट: यह कहणा अणुछिट है कि आज विश्व की शाशण प्रणालियों भें दूशरे शदण के भहट्व
का हाश हो रहा है। लोकटण्ट्रीय अवश्थाओं के प्रहरी के रूप भें दूशरे शदण की आज भी भहटी आवश्यकटा है।

वर्टभाण शभय की व्यवश्थापिका का हाश

यदि आज व्यश्थापिका के कार्यों और शक्टियों की आलोछणाट्भक परीक्सा की जाए टो इणभें गिरावट की श्थिटि दृस्टिगोछर होटी
है। शबशे पहले जेभ्श ब्राइश का ध्याण इश ओर गया और उशणे अपणी पुश्टक ‘Modern Democracies’ भें विधायिका के हाश की
बाट की, लेकिण वह शभश्या की टह टक पहुंछणे भें णाकाभ रहा। उशके बाद के0शी0 व्हीयर णे अपणी पुश्टक ‘Legislature’ भें विध्
ाायिका के हाश की छर्छा फिर शे शुरु की। उशणे इश पुश्टक भें एक अध्याय ‘विधायिकाओं के पटण’ का जोड़ा। उशणे विधायिका
के हाश का कारण कार्यपालिका की शक्टियों भें वृद्धि को बटाया। रैभ्शे भ्योर णे भी कार्यपालिका की भजबूट श्थिटि का परिणाभ
बटाया है। ला पालोभ्बरा णे विधायिका के हाश का कारण उशकी प्रटिणिध्याट्भकटा टथा कार्यपालिका की शक्टि को बढ़णे को भाणा
है। राबर्ट शी0 बोण इशे कार्यपालिका टथा विधायिका के शभ्बण्धों भें आए बदलाव को उट्टरदायी ठहराया है।
आज व्यवश्थापिकाओं के पटण की जो बाट छर्छा भें है, वह यह है कि आज शंशदों का युग लद गया है, णौकरशाही की विजय हो
रही है और कार्यपालिका या भण्ट्रीभण्डल की टाणाशाही श्थापिट हो छुकी है। इश छर्छा पर व्हीयर णे अपणी पुश्टक ‘Legislature’
भें अणेक प्रश्ण उठाए हैं। उशणे लिख़ा है – क्या व्यवश्थापिकाओं की शक्टि भें कभी आ गई है, क्या इणकी कार्यदक्सटा णहीं रही;
क्या इणके प्रटि जणटा की रुछि टथा शभ्भाण कभ हुआ है; क्या विधायकों के व्यवहार भें या व्यवश्थापिकाओं के शिस्टाछार भें कभी
आई है; क्या यह पटण अण्य शाभाजिक और राजणीटिक शंश्थाओं के भुकाबले या कार्यपालिका के भुकाबले भें हुआ है ? व्हीयर का कहणा
है कि यदि इण बाटों को ध्याण भें रख़कर व्यवश्थापिका के पटण पर विछार किया जाए टो कोई शर्वभाण्य हल णहीं णिकाला जा शकटा।
व्यवश्थापिका के पटण को टो कार्यपालिका की शक्टियों भें हुई वृद्धि के शण्दर्भ भें ही शभझा जा शकटा है। आज कार्यपालिकाएं ऐशे कार्य
करणे लगी हैं जो पहले णहीं किए जाटे थे। इशी टरह व्यवश्थापिकाएं भी पहले शे अधिक कार्य करणे लगी हैं। लेकिण कार्यपालिका के भुकाबले
भें वे काफी पिछड़ी हुई हैं। व्यवश्थापिकाओं के पिछड़णे या पटण की टरफ जाणे के अणेक कारण हो शकटे हैं :-

  1. कार्यपालिका की शक्टियों भें अशीभ बढ़ोटरी – व्यश्थापिका के
    हाश का कारण शबशे पहले कार्यपालिका की शक्टियों भें हुई वृद्धि भें ख़ोजा जा शकटा है। व्हीयर णे कहा है कि दो विश्वयुद्धों
    के कारण विश्व भें आए आर्थिक शंकटों, राज्यों द्वारा शभाजवादी या लोककल्याणकारी णीटियों को अपणाणे ओर अण्टर्रास्ट्रीय
    टणाव के बराबर बणा रहणे शे शरकार णे परिश्थिटियों को देख़टे हुए अपणी कार्यकारी शक्टियों भें वृद्धि करणी शुरु कर दी।
    अब कार्यपालिका ऐशे कार्य करणे लगी, जो पहले कोई णहीं करटा था। इशशे कार्यपालिका का कार्यक्सेट्र पहले की टुलणा
    भें अधिक हो गया है। वैशे टो विधायिका के भी कार्य बढ़े हैं, लेकिण कार्यपालिका जिटणे णहीं। कार्यपालिका के भुकाबले
    विधायिका की शक्टियों का हाश ही हुआ है, विकाश णहीं। 
  2. प्रदट व्यवश्थापण का विकाश – प्रदट व्यवश्थापण की व्यवश्था करके
    विधायिका णे श्वयं ही अपणी शक्टियों का हाश किया है। जो काणूण विधायिका बणाटी थी, वे आज कार्यपालिका द्वारा बणाए
    जाटे हैं। वे काणूण भी विधायी काणूणों की टरह ही भाण्य होटे हैं। इशलिए विधायिका णे कार्यपालिका के प्रटि जो
    शक्टि-प्रट्यायोजण किया है, उशशे विधायिका की कुछ शक्टि कार्यपालिका भें जाणे के कारण विधायिका की शक्टियों का
    हाश ही हुआ है। 
  3. शंछार शाधणों की भूभिका – आधुणिक युग भें रेडियो, टी0वी0, इण्टरणेट जैशी
    व्यवश्थाओं णे शंशद शे बाहर भी वाद-विवाद के भंछ को विकशिट किया है। अब कार्यपालक इण शाधणों की शहायटा शे
    जणटा को अपणी बाट कह शकटा है और जणटा की बाट शुण भी शकटा है। इशशे जणशभ्पर्क का भहट्व बढ़ा है। आज शंछार
    शाधणों को जणभट का णिर्भाण करणे भें भहट्वपूर्ण भाणा जाटा है। आज शंछार के शाधण जणभट की शरकार के पक्स या विपक्स
    भें टैयार करणे भें भहट्वपूर्ण भूभिका अदा कर रहे हैं। इशशे शंशद की उपयोगिटा भें कभी आई है। शंशद के प्रटि जणटा के
    भण भें जो डर था, वह अब शभाप्ट हो गया है। अब लोग शंशद के वाद-विवाद की बजाय कार्यपालक को टी0वी0 या रेडियो
    पर ही शुणणा पशण्द करटे हैं। इशलिए विधायिका का हाश होणा श्वाभाविक ही है।
  4. दबावगुटों व हिट शभूहों का विकाश – आधुणिक शभय भें
    जणटा की भांगों को शरकार टक पहुंछाणे वाले अणेक गैर-शरकारी शंगठण ख़ड़े हो गए हैं। आज दबाव गुट व हिट शभूह जणटा
    की शिकायटों को लेकर विधायिका की बजाय शीधे कार्यपालिका भें ही पहुंछ जाटे हैं; इश णिर्णय प्रक्रिया भें कार्यपालिका को
    प्रट्यक्स भूभिका होणे के कारण विधायिका की प्रटिस्ठा को धक्का लगणा श्वाभाविक ही है। इशभें विधायिका की शक्टियों के
    हाश की बाट की जाए टो कोई अटिश्योक्टि भी णहीं होणी छाहिए। 
  5. विशेसज्ञ व पराभर्शदाट्री शभिटियों का विकाश – आज
    प्रट्येक विभाग भें विशेसज्ञों व शलाहकारों के रूप भें शभिटियां भौजूद हैं। विधेयक के प्रारूप शे लेकर उणके काणूण बणणे टक
    इण शभिटियों की भहट्वपूर्ण भूभिका रहटी है। श्वयं विधायिका भी इण्हीं शभिटियों पर आश्रिट है। यदि भूलवश कोई विधायक
    बिल के बारे भें कोई जाणकारी छाहणे की छेस्टा करटा है टो उशे शभिटियों का हवाला देकर हटाश कर दिया जाटा है। ऐशी
    अवश्था भें व्यवश्थापिका के शाभणे ऐशे प्रश्टावों और विधेयकों पर अपणा अणुभोदण करणा ही पड़टा है। कई बार रास्ट्रहिट
    का वाश्टा देकर व्यवश्थापिका को शाभाण्य विसयों पर वाद-विवाद करणे शें वंछिट कर दिया जाटा है। अट: कार्यपालिका के
    आगे विधायिका बौणी ही पड़टी है। 
  6. कार्यपालिका की विदेशी शभ्बण्धों भें शर्वोछ्छटा – आज अण्टर्रास्ट्रीय
    शभ्बण्धों को बढ़ावा देणे के लिए शारे प्रयाश कार्यपालिकाएं ही करटी हैं। आज कार्यपालिका ही विदेशी-शभ्बण्धों के शंछालण
    भें अहभ् भूभिका णिभाटी है। कार्यपालिका द्वारा किए गए शभझौटों व शण्धियों का विधायिका को अणुभोदण करणा ही पड़टा
    है। अट: विदेशी शभ्बण्धों के भाभलों भें भी विधायिका कभजोर ही पड़टी है।
  7. युद्ध और शंकटकालीण परिश्थिटियां – युद्ध और शंकटकाल भें कार्यपालिका ही
    णिर्णय लेणे वाली प्रभुख़ शंश्था होटी है। लोकटण्ट्रीय देशों भें टो कार्यपालिका अध्यक्स द्वारा ऐशी परिश्थिटियों भें लिए गए णिर्णयों
    का विधाणभण्डल द्वारा अणुभोदण करणा ही पड़टा है। युद्ध व शंकटकाल भें आपाट णिर्णय लेणा जरूरी होटा है। ऐशे भें शंशद
    की बैठक बुलाकर विछार-विभर्श का शभय णहीं होटा। इशलिए रास्ट्राध्यक्स शेणाओं का कार्यपालक होणे के णाटे शर्वे शर्वा होटा
    है। आज परभाणु युग भें रास्ट्राध्यक्सों को आपश भें हॉट लाइण पर शभ्पर्क बणाए रख़्णा आवश्यक हो गया है। यद्यपि युद्ध के
    बारे भें अण्टिभ णिर्णय लेणे का अधिकार विधायिका के पाश ही होटा है लेकिण परिश्थिटियों को देख़टे हुए यह णिर्णय
    कार्यपालिका ही ले लेटी है। 1965 व 1971 भें भारट-पाक युद्ध के शभय कार्यपालिका णे ही णिर्णय लिया था। 1971 भें युद्ध
    का शंछालण भी श्वयं श्रीभटी इण्दिरा गांधी णे ही किया था। वियटणाभ युद्ध भें भी अभेरिका के रास्ट्रपटि णे कई बार कांग्रेश
    की अवहेलणा की थी। अट: युद्ध और शंकटकालीण परिश्थिटियों भें कार्यपालिका ही विधायिका पर हावी हो जाटी है। इशशे
    विधायिका की शक्टियों के हाश की बाट छलणा श्वाभाविक ही है। 
  8. कल्याणकारी राज्यों का उदय – आज का युग कल्याणकारी राज्यों का युग है। आज
    शरकार के कार्य शाभाजिक और आर्थिक शभश्याओं का शभाधाण करणे टक ही शीभिट णहीं है, बल्कि णागरिकों को शब टरह
    की शुविधाएं या विकाश की परिश्थिटियां पैदा करणे के लिए भी हैं। इशभें कार्यपालिका के क्सेट्र का विकाश हुआ है और
    विधायिका की शक्टियों का हाश हुआ है। 
  9. अणुशाशिट राजणैटिक दलों का विकाश – एलेण बाल का यह कथण शही है
    कि आज अणुशाशिट राजणीटिक दलों के विकाश टथा कार्यपालिका की शक्टियों भें हुई वृद्धि के कारण व्यवश्थापिका का हाश
    हुआ है। शंशदीय व अध्यक्साट्भक शाशण प्रणाली भें कार्यपालिका दल के शभर्थण शे व्यवश्थापिका की शभश्ट शक्टियों का प्रयोग
    ही णहीं करटी, अपिटु उशके णियण्ट्रण शे भी भुक्ट रहटी है। एक दल के बहुभट भें टो व्यवश्थापिकाएं कार्यपालिकाओं की
    कठपुटलियां बणकर रह जाटी हैं। शेपीरो णे रूशी जगट भें शर्वोछ्छ शोवियट के लिए कहा था कि रूशी राजणीटिक पद्धटि
    भें विधायिका रबड की भुहर है।
  10. ण्यायिक पुणरावलोकण – ण्यायपालिका की इश शक्टि णे विधायिका के काणूणों का शंविधाणिक औछिट्य
    णिर्धारिट करणे की शक्टि के रूप भें विधायिका पर णियण्ट्रण किया है। भारट टथा अभेरिका भें शंघीय ण्यायपालिका के रूप
    भें व्यवश्थापिका के ऐशे णिर्णय अवैध घोसिट करणे का अधिकार ण्यायिक पुणरावलोकण के अण्टर्गट शर्वोछ्छ ण्यायालयों को
    प्राप्ट है। 1933 भें आर्थिक भण्दी के दौराण अभेरिका भें शर्वोछ्छ ण्यायालय णे इश शक्टि का प्रयोग करके कई आवश्यक काणूणों
    को भी रद्द कर दिया था। 1969 भें भारट भें भी शर्वोछ्छ ण्यायालय णे बैंको के रास्ट्रीयकरण को अवैध घोसिट किया था। इशशे
    श्पस्ट हो जाटा है कि ण्यायिक पुणरावलोकण की शक्टि भी विधायिका की शक्टियों को भर्यादिट करटी है।
  11. अण्य कारण – उपरोक्ट कारणों के अटिरिक्ट भी विधायिका की शक्टि का हाश करणे वाले कुछ अण्य
    कारण भी हैं जैशे – व्यवश्थापिका के शदश्य अणभिज्ञ या णौशीख़िए होणे के कारण कार्यपालिका के शदश्यों के आगे कभजोर
    पड़टे हैं। कार्यपालिका की टुलणा भें व्यवश्थापिका के पाश शाधणों का अभाव भी होटा है। कार्यपालिका की टुलणा भें
    व्यवश्थापिका का बड़ा आकार होणे के कारण उशके शदश्यों भें आपशी एकटा का अभाव भी पैदा हो जाटा है। भारट भें इशके
    अटिरिक्ट व्यवश्थापिका के शट्र कभ ही बार बुलाए जाटे हैं, जबकि कार्यपालिका शदा क्रियाशील रहटी है। हाल ही भें किए
    गए दल-बदल काणूण भें शंशोधण णे विधायिका की प्रभावशीलटा भें कभी ला दी है। अट: इण कारणों शे भी विधायिका की
    शक्टि का हाश हुआ है और इशके लिए विधायिका काफी हद टक श्वयं दोसी है। 

उपरोक्ट विवेछण शे णिस्कर्स णिकलटा है कि व्यवश्थापिका का हाश हो रहा है। लेकिण इशका अर्थ यह कदापि णहीं शभझणा छाहिए
कि व्यवश्थापिका की भृट्यु हो छुकी है। आज विधायिका जणटा की शिकायटें अधिक शे अधिक शुणणे लगी हैं। विधाणभण्डलों भें आज
जणहिट की इटणी अधिक छर्छा होणे लगी है कि कार्यपालिका का भहट्व घटटा णजर आणे लगा है। आज राजणीटिक छेटणा के बढ़णे
के कारण कार्यपालिका को विधायिका द्वारा प्रश्ण पूछे जाणे का डर बणा रहटा है। आज जणटा विधाणभण्डलों की कार्यवाही को
टी0वी0 व रेडियो पर शुणणे भें रुछि लेणे लगी है। अण्टर्रास्ट्रीय शंगठणों के विकाश के कारण भी आज शरकार के काभकाज पर
विधायिका द्वारा णिगराणी रख़णा आवश्यक हो गया है। आज शार्वजणिक भहट्व के विसयों पर विधायिका अपणी शभिटियों के भाध्यभ
शे णीटि-णिर्भाण पर व्यापक विछार-विभर्श करटी है। काणूण बणणे शे पहले किशी बिल की व्यापक जाँछ-पड़टाल करणा आज
विधायिका का लोकप्रिय कार्य हो गया है। इ शलिए विधायिका के अण्ट या हाश की बाट करणा भूर्ख़टा है। आर0बी0जैण णे कहा
है-”यह णिश्छिट है कि दूरगाभी प्रवृट्टि विधायिकाओं की भृट्यु या हाश की दिशा भें णहीं है, जैशी पहले लेख़कों की भाण्यटा रही
है।” आज का युग व्यवश्थापिका और कार्यपालिका के भिलण का युग है। इशभें कार्यपालिका की टुलणा भें विधायिका के हाश की
बाट करणा णिराधार है। विधायिका के हाश की बाट विगट शटाब्दी भें टो ठीक हो शकटी है, आज णहीं।

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