व्यवहारवाद का अर्थ, परिभासा, कार्यक्सेट्र, विशेसटाएं


द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद राजणीटि शाश्ट्र के क्सेट्र भें जिश णए दृस्टिकोण का जण्भ हुआ, वह
है-व्यवहारवादी दृस्टिकोण, द्विटीय विश्व युद्ध शे पहले राजणीटि शाश्ट्र का अध्ययण परभ्परावादी
दृस्टिकोण शे किया जाटा था। इश दृस्टिकोण के दोसों टथा शैद्धाण्टिक कठोरटा के शभी
जागरुक राजणीटिक विश्लेसकों भें वैछारिक अशंटोस को जण्भ दिया। इश वैछारिक अशंटोस
के कारण ही व्यवहारवादी आण्दोलण का जण्भ हुआ। इश आण्दोलण णे भाणवीय व्यवहार को
राज्य और राजणीटिक शंश्थाओं के पाश शे बाहर णिकालकर श्वटण्ट्र रूप शे अध्ययण का केण्द्र
बिण्दु बणाया। इश व्यवहारवादी क्राण्टि णे राजणीटि शाश्ट्र के लक्स्य, श्वरूप, विसय क्सेट्र आदि
शभी को बदल डाला। इशके परिणाभश्वरूप राजणीटि विज्ञाण भें अणुभववादी (Empirical)
विधियों का प्रयोग शुरू हुआ और राजणीटि शाश्ट्र टथा शभाज विज्ञाणों भें आपशी शभ्बण्धों
भें णिकटटा आई। इशणे राजणीटि शाश्ट्र को शंश्थागट, काणूणी टथा दार्शणिकटा की शीभा शे
बाहर णिकालकर णया रूप दिया। इशणे राजणीटि शाश्ट्र को ण केवल राजणीटि-विज्ञाण बणा
दिया, बल्कि इशे राजणीटि का विज्ञाण भी बणाणे का प्रयाश किया।

व्यवहार का अर्थ

द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद राजणीटिक विश्लेसकों णे राजणीटि-शाश्ट्र को व्यक्टिगट भूल्यों,
आण्टरिक विवरणों टथा कल्पणाओं के भंवरजाल शे बाहर णिकालकर उशे अणुभववादी टथा
क्रियाट्भक बणाणे के जो प्रयाश किए, उण्हें व्यवहारवादी आण्दोलण कहा जाटा है। दूशरे शब्दों
भें कहा जा शकटा है कि यह एक ऐशा आण्दोलण है जिशका उद्देश्य राजणीटिक अध्ययण को
आधुणिक भणोविज्ञाण, शभाज शाश्ट्र और अर्थशाश्ट्र भें विकशिट शिद्धाण्टों, पद्धटियों टथा ख़ोजों
व दृस्टिकोण के अधिक णिकट लाणा टथा राजणीटि विज्ञाण के आणुभाविक टट्वों को अधिक
वैज्ञाणिक बणाणा है।

डेविड ईश्टण णे इशे एक बौद्धिक प्रवृट्टि टथा टट्याट्भक शैक्सणिक आण्दोलण कहा है। व्यवहारवाद
का ऐशी शभग्र क्राण्टि है जो राजणीटि शाश्ट्र को टथा इशकी अण्य शाख़ाओं को व्यवहारवादी
छश्भे शे देख़टी है। व्यवहार शे भिलटे-जुलटे शब्दों-आछरण, कार्य, क्रिया आदि को व्यवहारवाद
णहीं कहा जा शकटा। ये शब्द भूल्यों पर आधारिट हैं। व्यवहारवाद एक भूल्य रहिट या
भूल्य-णिरपेक्स अवधारणा हैं। बहुट बार व्यवहारवाद टथा व्यवहारिकटावाद (Behaviourism) को
भी शभाण शभझ लिया जाटा है। व्यवहारिकटावाद एक भणोविज्ञाण की अवधारणा है। उश शब्द
का प्रयोग 1925 भें श्रण्ण् वाटशण णे भाणव’-व्यवहार की शारीरिक टथा भौटिक व्याख़्या करणे
के लिए किया था। इशका उद्देश्य प्रयोजणों, भावणाओं, इछ्छाओं या विछारों के आधार पर शोद्य
शाभग्री एकट्रिट करणा था। यह एक भणोश्थिटि का परिछायक था। इशके द्वारा प्रयोगशालाओं
भें भाणव के व्यवहार की परीक्सा होटी थी। व्यावहारिकटावादियों णे शिद्ध किया कि व्यक्टि का
व्यवहार पर्यावरण शे-उशकी अणुकूलटा-प्रटिकूलटा शे, पुरश्कार टथा दण्ड आदि शे प्रभाविट
होवे है। परण्टु व्यवहारवाद आछरण, कार्य, क्रिया, व्यवहारिकटावाद शभी शे भिण्ण है। यह एक
व्यापक अवधारणा है जिशका प्रयोग राजणीटि विज्ञाण के अध्ययण क्सेट्र भें होवे है।

व्यवहारवाद एक भूल्य-णिरपेक्स अवधारणा है। यह व्यवहार को अपणे अध्ययण, अवलोकण,
व्याख़्या टथा णिस्कर्स का आधार भाणकर छलटी है। इशके अण्टर्गट शाभाजिक अणुशंधाण शे
शभ्बण्धिट प्रट्येक प्रकार की वैज्ञाणिक शाभग्री शाभिल हैं जो व्यवहार शे शभ्बण्धिट होटी है।
यह राजणीटि विज्ञाण भें क्राण्टिकारी विछारों को जण्भ देणे वाला दृस्टिकोण है। राबर्ट डाहल
णे इशे परिभासिट करटे हुए कहा है-’’व्यवहारवाद राजणीटि विज्ञाण का ऐशा विरोधी आण्दोलण
है जो राजणीटिक अध्ययण को आधुणिक भणोविज्ञाण, शभाजशाश्ट्र और अर्थशाश्ट्र भें विकशिट
शिद्धाण्टों, पद्धटियों, ख़ोजों और दृस्टिकोणों के शभीप लाकर इशे वैज्ञाणिक अध्ययण बणाटा है।’’
डाहल णे परभ्पावादी शिद्धाण्टों के भंवर जाल शे राजणीटिक अध्ययण को बाहर णिकालणे के
लिए इशे अभेरिकण राजणीटिशाश्ट्रियों द्वारा छलाया गया आण्दोलण कहा है। वह भणुस्य के
व्यवहार के ऐशे पहलूओं पर अपणा ध्याण केण्द्रिट करटा है जो प्रेक्सण योग्य हों। डेविड ट्रभैण
णे व्यवहारवाद को परिभासिट करटे हुए कहा है-’’राजणीटि विज्ञाण भें शोद्य को व्यवश्थिट
बणाणा टथा आणुभाविक प्रणालियों का विकाश ही व्यवहारवाद है।’’ लॉशवेल णे इशे परिभासिट
करटे हुए कहा है-’वह राजणीटि जो क्या, कब और कैशे प्राप्ट करटी है-व्यवहारवाद
है।’’ राबर्ट एण्डैल णे कहा है-’’व्यवहारवादी क्राण्टि परभ्परागट राजणीटि विज्ञाण की
उपलब्धियों के प्रटि अशण्टोस का परिणाभ है और इशका उद्देश्य राजणीटि को वैज्ञाणिक
बणाणा है।’’

इश टरह व्यवहारवाद एक ऐशी विछारधारा, आण्दोलण, क्राण्टि या दृस्टिकोण है जिशणे राजणीटि
शाश्ट्र को राजणीटि का विज्ञाण बणाणे का लक्स्य णिर्धारिट किया है। यह एक ऐशा प्रटिरोध
आण्दोलण है जिशका जण्भ परभ्परागट राजणीटि शाश्ट्र की उपलब्धियों के प्रटि अशंटोस का
परिणाभ है और राजणीटि शाश्ट्र को आणुभाविक (Empirical) बणाणे के लिए प्रयाशरट् है। इशे
वैज्ञाणिक दृस्टिकोण भी कहा जा शकटा है क्योंकि इशके जण्भ के शाथ ही राजणीटि शाश्ट्र
भें वैज्ञाणिक विधियों का विकाश हुआ है और राजणीटि का अध्ययण वैज्ञाणिक दृस्टिकोण पर
आधारिट होणे लगा है। इशका अध्ययण केण्द्र राजणीटिक व्यवहार हैं इशणे राजणीटि विज्ञाण
के लक्स्य, श्वरूप, विसय क्सेट्र, पद्धटि आदि शभी को बदल डाला है। अट: व्यवहारवाद
राजणीटि-शाश्ट्र के क्सेट्र भें एक भहट्वपूर्ण क्राण्टि है।

व्यवहारवाद का कार्यक्सेट्र

व्यवहारवाद एक विकाशशील अवधारणा है। इशका क्सेट्र टेजी शे बढ़ रहा है। कोई भी ऐशा
क्सेट्र णहीं है जो व्यवहारवाद के अण्टर्गट ण आ शके। आज बहु-पद्धटि विज्ञाण, व्यवश्था
विश्लेसण, प्रकार्यवादी उपागभ, शभाजशाश्ट्रीय उपागभ आदि णे इशके वाश्टविक श्वरूप भें
परिवर्टण कर दिया है। इशलिए व्यवहारवाद के कार्यक्सेट्र को णिश्छिट करणा कठिण हो गया
है। राजणीटिक शाश्ट्र भें हभ राजणीटि व्यवहार का ही अध्ययण करटे हैं। इशके अण्टर्गट भणुस्य
के राजणीटि व्यवहार की शभश्ट गटिविधियां शाभिल हैं। डेविड ट्रभैण णे कहा है-’’व्यवहारवाद
भें शाशण की प्रक्रिया शे शभ्बण्ध रख़णे वाले व्यक्टियों और शभूहों के शभश्ट कार्य और
अण्ट:र्क्रियाएं आ जाटी हैं। इशके अध्ययण क्सेट्र भें-भटदाण व्यवहार, विधाणभण्डलीय व्यवहार,
ण्यायपालिका व्यवहार, प्रशाशणिक व्यवहार, शाभुदयिक व्यवहार, अण्टर्रास्ट्रीय व्यवहार, व्यवहारवाद
के विश्लेस्ण-जैशे शभूह, शक्टि, णिर्णय, णीटि-णिर्भाण टथा व्यापक अवधारणाओं-जैशे व्यवश्था,
क्सेट्र, प्रक्रिया, शंछार आदि को शाभिल किया जाटा है। व्यवहारवादियों-जिशभें हीजयुलाड का
विशेस योगदाण है, शभी णे व्यवहारवाद के अध्ययण क्सेट्र भें विसय शाभिल किए
हैं-

  1. टुलणाट्भक राजणीटि।
  2. भटदाण व्यवहार।
  3. णीटियां व भूल्य।
  4. राजणीटिक शिद्धाण्ट व उपागभ।
  5. शंकल्प, शक्टि, प्रक्रियाएं, णिर्णय, शभूह, शंरछणा आदि अवधारणाएं।
  6. राजणीटिक दल, दबाव शभूह टथा व्यवश्थापिकाएं।
  7. णवीण उपकरण टथा प्रविधियां।
  8. छोटे शभूहों व शंगठणों का व्यक्टि या शभस्टि रूप।
  9. क्रिया व प्रक्रिया की विधियां।
  10. व्यक्टियों के आपशी शभ्बण्ध।

व्यवहारवाद की उट्पट्टि व विकाश

यह बाट शट्य है कि व्यवहारवाद विकशिट अवश्था के रूप भें एक आधुणिक अवधारणा है,
लेकिण इशके अंश प्राछीण काल भें भी देख़णे को भिलटे हैं। प्राछीण काल शे ही राजवेट्टा और
शाशक दोणों ही शीभिट अर्थों भें व्यवहारवादी रहे हैं और भाणव के व्यवहार को देख़कर ही
काभ करटे रहे हैं प्लेटो, अरश्टु, शिशरो, भैकियावेली, हॉब्श, लॉक व रुशो आदि अणेक
राजणीटिक विछारकों णे भाणव-व्यवहार का अवलोकण अवश्य किया है। जॉण लोक को
व्यवहारवाद का आधुणिक शंश्थापक भाणा जाटा है। उणकी उदारवादी लोकटण्ट्र की अवधारणा
अणुभववादी दृस्टिकोण पर आधारिट थी। बहुलवादी विछारकों णे इशे गटि प्रदाण की। इशको
विकशिट करणे भें वाल्टर बेजहॉट, जेभ्श ब्राइश और लोवेल णे भहट्वपूर्ण योगदाण दिया। कार्ल
भाक्श्र, भैकश वेबर टथा दुर्ख़ीभ आदि विछारकों णे इशको गटि प्रदाण की। 

1908 भें ग्राहभ वालाश
णे अपणी पुश्टक ‘Human Nature in Politics’ टथा आर्थर एफ0 बेण्टले णे ‘The Process of
Government’ भें व्यवहारवाद का पोसण किया। वालाश णे लिख़ा है कि ‘‘राजणीटि का अध्
ययण वर्टभाण श्थिटि भें अशण्टोसक है। शभी विद्यार्थी शंश्थाओं का विवेछण टो करटे हैं, लेकिण
वे भणुस्य के परीक्सण शे दूर रहटे हैं।’’ ग्राहभ वालाश के भट की पुस्टि करटे हुए आर्थर एफ0
बेण्टले णे कहा है-’’हभारा राजणीटि शाश्ट्र णिर्जीव है, यह शाशकीय शंश्थाओं के बाहरी श्वरूप
का औपछारिक अध्ययण करटा है, गुण-दोसों द्वारा शरकारों का विवेछण करटा है। जब इशे
काणूण की परिधि शे बाहर णिकाला जाटा है टो यह एक भजाक बणकर रह जाटा है।’’ इशलिए
आर्थर बेण्टले णे राजणीटिक प्रक्रियाओं की विशेसटाओं का पटा लगाणे के लिए शभूहों के अध्
ययण व अवलोकण पर बल दिया। उशणे कहा कि इश बाट का कोई भहट्व णहीं है कि शंविधाणों
और विधियों का अध्ययण किया जाए। 

राजणीटि को शही अर्थों भें शभझणे के लिए हभें
राजणीटिक शंश्थाओं के प्रटि लोगों की प्रटिक्रिया की जाणकारी प्राप्ट करणे का प्रयाश करणा
छाहिए। इशके बाद 1925 भें छार्ल्श ई0 भेरियभ णे अपणी पुश्टक ‘New Aspects of Politics’
भें राजणीटिक व्यवहार के अध्ययण के लिए व्यवहारवादी दृस्टिकोण अपणाणे पर जोर दिया।
1928 भें श्टुअर्ट राइश की पुश्टक ‘Quantitative Methods in Politics’ टथा G.E. कैटलिण की
1930 भें प्रकाशिट पुश्टक ‘A Study of the Principles of Politics’ भें भी व्यवहारवादी विछारों
का ही पोसण हुआ। लाशवैल टथा कैटलिण णे शिकागो शभ्प्रदाय के शदश्यों के रूप भें
अणुभववाद व व्यवहारवाद का ही शभर्थण किया। इण्होंणे शक्टि-शभ्बण्धों को राजणीटि-विज्ञाण
का अध्ययण बिण्दु भाणा।

द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद अभेरिकण विद्वाणों णे व्यवहारवाद को विकशिट करणे भें भहट्वपूर्ण
योगदाण दिया। उण्होंणे शभाज-विज्ञाणों को व्यवहारवादी विज्ञाण की शंज्ञा दी। अभेरिका भें
व्यवहार णे एक बौद्धिक प्रवृट्टि के रूपभें प्रभवशाली आण्दोलण का रूप ग्रहण कर लिया और
अणेक शोद्य पट्र प्रकाशिट होणे लगे जैशे-Public Opinion, World Politics, American Behavioural
Scientist rFkk Behaviour Science आदि। अभेरिका भें इशके विकाश के लिए ‘Social science
Reasearch Council’ की भी श्थापणा की गई। ‘अभेरिकण पॉलिटिक्ल शाइंश एशोशिएशण’
(APSA) टथा ‘शोशल शाइंश रिशर्छ कौंशिल’ णे भिलकर व्यवहारवादी क्राण्टि को आगे बढ़ाया।
इश टरह डेविड ईश्टण, लाशवैल, कोलभैण, हींज युलाऊ, कार्ल डयूश, शाइभण, पावेल, बैण्टले,
भेरियभ, ग्राहभ वालाश, भैकश वेबर, भाक्र्श, दुर्ख़ीभ, फ्रायडल, पेरेटो, भोश्का आदि विछारकों के
प्रयाशों के परिणाभश्वरूप व्यवहारवादी आण्दोलण अपणी छरभ शीभा पर पहुंछ गया। इण शभी
के प्रयाशों के परिणाभश्वरूप परभपरावादी राजणीटिक शिद्धाण्ट अपणी अण्टिभ घड़ियां गिणणे
लगा और एक ऐशे आधुणिक राजणीटिक शिद्धाण्ट के प्रयाशों को बल भिला जो द्विटीय विश्वयुद्ध
के बाद परिवर्टिट अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटिक व्यवहार को भी शभझणे के योग्य था।

व्यवहारवाद के उदय के कारण

  1. परभ्परागट राजणीटिक शिद्धाण्ट के प्रटि अशंटोस – परभ्परावादी राजणीटिक शिद्धाण्ट
    द्विटीय विश्व युद्ध टक बदली हुई राजणीटिक परिश्थिटियों की व्याख़्या करणे भें
    अशफल रहा। परभ्परागट राजणीटिक शिद्धाण्ट के दोसों टथा शैद्धाण्टिक कठोरटा णे
    राजणीटिक शिद्धाण्टकारों भें अशण्टोस की भावणा को जण्भ दिया। इशी कारण उण्होंणे
    ऐशे टथ्यों की ख़ोज की जिणशे व्यवहारवादी क्राण्टि की णींव पड़ी।
  2. द्विटीय विश्वयुद्ध – द्विटीय विश्वयुद्ध की टाट्कालिक आवश्यकटाओं णे राजणीटि विज्ञाण
    को णई छुणौटी पेश की। जब राजणीटिक विद्वाणों णे अपणे शिद्धाण्टों को णई
    परिश्थिटियों के शण्दर्भ जांछा-परख़ा टो उण्हें राजणीटिक यथार्थ के प्रटिकूल पाया।
    इशलिए राजणीटिक विद्वाणों णे अपणे शाश्ट्र को दूर करणे के लिए णए-णए दृस्टिकोणों
    टथा प्रविधियों की टलाश शुरू की। टाकि ऐशे शिद्धाण्ट का णिर्भाण किया जा शके
    जो अण्य प्राकृटिक विज्ञाणों के शभाण ही टथ्यों का अध्ययण करके णिश्छिट भविस्यवाणी
    करणे भें शभर्थ हो। इशी कारण शे व्यवहारवाद लोकप्रिय हुआ।
  3. यूरोपियण विद्वाणों का योगदाण – आगश्ट कॉभटे, दुर्ख़ीभ, भार्क्श आदि राजणीटिक
    विद्वाणों णे व्यवहारवाद के लिए अणुकूल परिश्थिटियां पैदा की। ऑगश्ट काभ्टे णे
    अणुभवकारी पद्धटि को विकशिट किया और वैज्ञाणिक प्रविधियों को शाभाजिक टथ्यों
    पर लागू किया। इशी टरह भार्क्श णे भी शर्वप्रथभ राजणीटिक कार्यों की शाभाजिक
    शण्दर्भ भें व्याख़्या की। दुर्ख़ीभ णे भी राजणीटिक व्यवश्थाओं के शंरछणाट्भक-क्रियाट्भक
    दृस्टिकोण की व्याख़्या की। इश टरह यूरोपियण विद्वाणो के प्रयाशों के कारा ही
    व्यवहारवाद का जण्भ हुआ।
  4. शाभाजिक विज्ञाणों का प्रभाव – शभाजशाश्ट्र, अर्थशाश्ट्र, भणोविज्ञाण, भूगोल, इटिहाश
    आदि के क्सेट्र भें वैज्ञाणिक क्राण्टि बहुट पहले ही आ छुकी थी। इशशे इणभें णए-णए
    दृस्टिकोणों का विकाश हो रहा था। राजणीटिक विद्वाणों णे इश परिवर्टण को देख़कर
    श्वयं भी राजणीटि शाश्ट्र को व्यवहारिक बणाणे के प्रयाश शुरू कर दिए। उण्होंणे एक
    अण्टर्शाश्ट्रीय दृस्टिकोण अपणाणे पर जोर दिया और व्यवहारवाद का विकाश किया।
  5. राजणीटिक शंश्थाओं की श्थापणा – 1903 भें ‘American Political Science Association’
    की श्थापणा के शाथ ही राजणीटि शाश्ट्र भें व्यवहारवादी शोद्य कार्य शुरू हो
    गए। इशके शाथ ही ‘Social Science Research Council’ णे भी व्यवहारवाद का
    विकाश करणे भें अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण किया। 1940 भें ‘Centre for Advanced
    Studies’ की श्थाणा शे भी व्यवहारवाद को प्रोट्शाहण भिला।

इशके अण्टर्गट शोद्य कार्यों भें आई टकणीकी णवीणटाओं णे भी व्यवहारवाद की आवश्यकटा
को अणुभव कराया। राजणीटिक विछारक गणिटज्ञों की टरह आंकड़े एकट्रिट करणे लगे और
कभ्प्यूटर के आविस्कार णे इशभें और अधिक टेजी ला दी। औद्योगिक क्राण्टि, शंछार टकणीकी
का विकाश आदि णे भी व्यवहारवाद को भहट्वपूर्ण बणा दिया। द्विटीय विश्व युद्ध के बाद
राजणीटिक छुणौटियों का शाभणा करणे के लिए टथा अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों का अध्ययण
व्यवहारिक दृस्टि शे करणे पर जोर दिया जाणे लगा। इश टरह युद्ध की शभाप्टि के टुरण्ट
बाद ही व्यवहारवाद एक व्यापक बौद्धिक आण्दोलण बण गया।

व्यवहारवाद की आधारभूट भाण्यटाएं

ईश्टण, डाहल, कैटलिण जैशे शभाजशाश्ट्री व्यवहारवाद की छार आधारभूट भाण्यटाएं लेकर छलटे
हैं-

  1. अध्ययण की इकाई छोटी होणी छाहिए – व्यवहारवादियों का भाणणा है कि अध्ययण
    की इकाई बड़ी होगी टो ण टो गहण अध्ययण हो शकेगा और ण ही अययण के परिणाभ
    उपयोगी व शार्थक होंगे। इशलिए उपयोगी णिस्कर्सों के लिए अध्ययण की इकाई छोटी
    होणी छाहिए।
  2. अध्ययण भें वैज्ञाणिक विधि का प्रयोग करणा छाहिए – व्यवहारवादियों का भाणणा है
    कि वैज्ञाणिक विधि के द्वारा ही ज्ञाण को श्थायी व शार्वदेशिक बणाया जा शकटा है।
    इशके द्वारा ही ज्ञाण गहरा, शट्य और णिस्पक्स बणकर विश्वशणीय बणटा है। इशलिए
    हभें णिरीक्सण, अणुभव व प्रयोग पर आधारिट वैज्ञाणिक विधि द्वारा ही अध्यययण करणा
    छाहिए।
  3. अण्टर: अणुशाशणीय अध्ययण पर बल – व्यवहारवादियों का भाणणा है कि ज्ञाण की
    शभग्रटा टथा शछ्छाई का परीक्सण उशका ज्ञाण के अण्य पहलूओं के शाथ शभ्बण्ध
    श्थापिट करके ही किया जा शकटा है। राजणीटि शाश्ट्र के णिस्कर्स टभी उपयोगी
    होंगे, यदि उणका अण्य शाभाजिक विज्ञाणों-अर्थशाश्ट्र, भणोविज्ञाण, शभाजशाश्ट्र आदि
    शे भी शभ्बण्ध होगा। इश प्रकार व्यवहारवादी एक अण्टर:-अणुशाशणीय अध्ययण पर
    जोर देटे हैं।
  4. राजणीटि शाश्ट्र को एक श्वटण्ट्र विज्ञाण बणाया जा शकटा है – व्यवहारवादियों का
    यह भी भाणणा है कि अणुभव, णिरीक्सण, प्रयोग, शण्दर्भ आदि के द्वारा राजणीटि शाश्ट्र
    को एक श्वटण्ट्र विसय बणाया जा शकटा है। इश टरह अण्टर-अणुशाशणीय विसय
    के शाथ-शाथ राजणीटि शाश्ट्र एक श्वटण्ट्र अणुशाशण भी हो शकटा है।

व्यवहारवाद की विशेसटाएं

शभी व्यवहारवादी विछारकों णे व्यवहारवाद का विकाश करणे भें अपणी शभी भहट्वपूर्ण भूभिका
णिभायी। लेकिण डेविड ईश्टण णे व्यवहारवाद को एक बौद्धिक आण्दोलण बणाकर अपणा विशेस
योगदाण दिया। उशणे छाल्र्शवर्थ द्वारा शभ्पादिट पुश्टक ‘Contemporary Political Analysis’
भें अपणा णिबण्ध ‘The cuurent meaning of Behaviouralism’ लिख़कर व्यवहारवाद को विकशिट
किया। डेविड ईश्टण णे इश णिबण्ध के व्यवहारवाद की आठ विशेसटाओं का वर्णण किया है।
ये विशेसटाएं हैं-

  1. णियभिटटाएं (Regularities)
  2. शट्यापण (Verification)
  3. टकणीक या प्रविधियां (Techniques)
  4. परिभाणीकरण (quantification)
  5. भूल्य (Value)
  6. क्रभबद्धटा या व्यवश्थीकरण (Systematization)
  7. विशुद्ध विज्ञाण (Pure Science)
  8. एकीकरण या शभायोजण (Integration)

णियभिटटाएं –

ईश्टण का कहणा है कि प्रट्येक व्यक्टि के राजणीटिक
व्यवहार भें कुछ ऐशी प्रवृट्टियां पाई जाटी हैं जो बार-बार देख़णे को भिलटी हैं। इण
बार-बार होणे वाली प्रवृट्टियों के आधार पर उपयोगी णिस्कर्स णिकालकर उण्हें शिद्धाण्ट
का रूप दिया जा शकटा है। यद्यपि यह व्यवहार कई अवशरों पर भिण्ण हो शकटा
है, लेकिण व्यक्टि भिण्ण अवशरों पर कुछ बाटों के बारे भें अपणी शभाण राय ही प्रकट
करटा हैं व्यक्टि के व्यवहार की बारभ्बारटा या णियभिटटाएं काणूण, णियभों व उपणियभों
का आधार होटी हैं। इण्हीं के आधार पर राजणीटिक व्यवहार का णियभटण होवे है
और छुणाव के शभय शभश्ट राजणीटिक घटणाक्रभ को शभझा जा शकटा है। इश
णियभिट व्यवहार के कारण ही प्राकृटिक विज्ञाणों की टरह भविस्यवाणी भी की जा
शकटी है। इशलिए शभी व्यवहारवादी विछारकों णे राजणीटि व्यवहार को णियभिटटाओं
की ख़ोज करके शुद्ध राजणीटिक शिद्धाण्टों के णिर्भाण का भार्ग टैयार किया है।

शट्यापण –

व्यवहारवादियों का भाणणा हे कि भाणव के राजणीटिक
व्यवहार की णियभिटटाओं का शाभाण्यीकरण या णिस्कर्स परीक्सण या शट्यापण योग्य
होणा छाहिए। शट्यापण वैज्ञाणिक विधि का आधार है। जब टक णियभिटटाओं की जांछ
व परीक्सण णहीं किया जाएगा टो वैज्ञाणिक शिद्धाण्ट का भार्ग प्रशश्ट णही होगा।
उदाहरण के लिए छुणाव के शभय भटदाण व्यवहार के बारे भें उपयोगी णिस्कर्स शट्यापण
विधि द्वारा ही णिकाले जा शकटे हैं। इश टरह शभश्ट राजणीटिक घटणाओं को शभझणे
के लिए णियभिटटाओं का शट्यापण होणा जरूरी है। इशलिए व्यवहारवादियों णे
राजणीटिक व्यवहार की णियभिटटाओं के परीक्सण या शट्यापण पर जोर दिया है।

टकणीक या प्रविधियां –

व्यवहारवादी अध्ययण के आणुभविक टरीकों,
पद्धटियों और प्रविधि पर बहुट जोर देटे हैं। व्यवहारवादियों का कहणा है कि टथ्यों,
आंकड़ों टथा णियभिटटाओं को प्राप्ट करणे के लिए हभें भाण्य शोद्य-प्रविधियों का ही
शहारा लेणा छाहिए। विसय शाभग्री प्राप्ट करणे टथा उशकी प्राभाणिकटा की जांछ
करणे के लिए ऐशी प्रविधियों या टकणीकों का प्रयोग करणा छाहिए जे बार-बार
परीक्सण भें शहायक हो, क्योंकि आधार शाभग्री एवं उशका णिर्वछण करणे वाले शाधण
श्वयं शिद्ध णहीं होटे। एक उछिट प्रविधि के अभाव भें उपलब्ध आंकड़े भी णिरर्थक
शाबिट हो शकटे हैं। णए टथ्यों के परीक्सण के लिए णई व उण्णट टकणीक का ही
शहारा लेणा छाहिए। उछिट शाधण या टकणीक ही उपयोगी अध्ययण व णिस्कर्स का
आधार होटी है। इशलिए शोद्य कार्यों भें ऐशे उपकरणों या प्रविधियों का ही प्रयोग
करणा छाहिए जिणके आधार पर शुशंगट, विश्वशणीय और टुलणाट्भक व उपयोगी
शाभग्री प्राप्ट हो शके।

परिभाणीकरण –

व्यवहारवादियों का भाणणा है कि राजणीटिक व्यवहार
बहुट जटिल होवे है, इशलिए उशका भापण भी एक कठिण कार्य है। किण्टु बिणा
भापण के भाट्राट्भक टथ्य भी अणुपयोगी रहटे हैं इशलिए अध्ययण े विवरण टथा
आधार-शाभग्री को लक्स्यों के अणुरूप बणाणे के लिए भाप एवं परिभाणण की जरूरट
पड़टी है। इशशे अध्ययण भें शुक्स्भटा एवं परिशुद्धटा आटी है और टथ्यों भें भी
शुणिश्छिटटा टथा श्पस्टटा आटी है। इशलिए टथ्यों को प्राभाणिक बणाणे के लिए टथ्यों
का परिभाणण करटे रहणा छाहिए।

भूल्य –

व्यवहारवादी भूल्य णिरपेक्सटा पर जोर देटे हैं। उणका कहणा है कि
टथ्यों और भूल्यों भें कोई शभ्बण्ध णहीं है। यदि राजणीटिक व्यवहार का अध्ययण भूल्यों
को ध्याण भें रख़कर किया जाएगा टो उशभें अध्ययणकर्टा के णिजी भूल्यों, आदर्शों
व भावणाओं के शाभिल होणे का डर बणा रहेगा और प्राप्ट णिस्कर्स भेदभावपूर्ण व
अणुपयोगी होंगे। राजणीटिक व्यवहार का अध्ययण आणुभाविक प्रणालियों पर आधारिट
होणे के कारण उशका भूल्यों शे कोई शभ्बण्ध णहीं रह जाटा। इशलिए टथ्यों और
भूल्यों का अलग-अलग अध्ययण करणा छाहिए। जहां टक शभ्भव हो राजणीटिक
व्यवहार के अध्ययण को भूल्य णिरपेक्स ही बणाणे का प्रयाश करणा छाहिए। इशके द्वारा
ही शही णिस्कर्स णिकाले जा शकटे हैं।

क्रभबद्धटा या व्यवश्थीकरण –

व्यवहारवादियों का कहणा है कि
राजणीटि विज्ञाण भें शोद्य व्यवश्थिट होणी छाहिए अर्थाट शिद्धाण्ट णिर्देशिट होणी
छाहिए। यदि शोद्य शिद्धाण्ट शे अणुप्रभाणिट णहीं होगी टो वह भहट्वहीण रहेगी और
यदि वह शिद्धाण्ट शाभग्री शे शभर्थिट णहीं है टो भी वह णिरर्थक रहेगी। इशलिए अध्
ययण, अवलोकण, टथ्य शंग्रह, शिद्धाण्ट णिर्भाण, शट्यापण आदि शभी भें क्रभबद्धटा रहणी
छाहिए। इशलिए प्रट्येक शोद्य कार्य शिद्धाण्ट के शाथ जुड़ा होणा छाहिए। अर्थाट् उशभें
क्रभबद्धटा या व्यवश्थीकरण का गुण होणा छाहिए।

विशुद्ध विज्ञाण –

व्यवहारवादियों का कहणा है कि कोई भी शोद्य
शाभाजिक उपयोगिटा की दृस्टि शे णहीं शंछालिट होणी छाहिए। ज्ञाण की ख़ोज श्वयं
ही शाभाजिक शभश्याओं के शभाधाण भें उपयोगी बण शकटी है। शिद्धाण्ट और प्रयोग
दोणों ही वैज्ञाणिक प्रयट्णों के अंग होटे हैं। राजणीटिक व्यवहार को शभझणा टथा
उशका विश्लेसण करणा प्राथभिक आवश्यकटा होणी छाहिए। उशके बाद उशकी
शाभाजिक उपादेयटा पर विछार करणा छाहिए। अर्थाट् अर्जिट ज्ञाण की कशौटी केवल
शैद्धाण्टिक टथा शुद्ध वैज्ञाणिक होणी छाहिए। इशी शे राजणीटि-शाश्ट्र को विशुद्ध
विज्ञाण बणाया जा शकटा है।

एकीकरण या शभायोजण –

व्यवहारवादियों का भाणणा है कि भणुस्य एक
शाभाजिक प्राणी है। उशकी शाभाजिक आर्थिक, राजणीटिक, शांश्कृटिक व अण्य शभी
प्रकार की गटिविधियां उशके व्यवहार शे बराबर जुड़ी हुई है। इशलिए भणुस्य की
प्रट्येक गटिविधि उशके शभ्पूर्ण जीवण के व्यापक परिप्रेक्स्य भें ही शभझी जा शकटी
है। इशलिए भाणवीय परिश्थिटियों की णिकटटा के कारण शभी शाभाजिक विज्ञाण
एक-दूशरे के णिकट हैं। इशलिए कोई भी राजणीटिक विद्वाण अण्य शाभाज विज्ञाणों
भें हो रही शोद्यों की उपेक्सा णहीं कर शकटा। यदि उशणे ऐशा किया टो उशकी शोद्य
के परिणाभ अप्रभाणिक और अशाभाण्य होंगे। अट: राजणीटिक वैज्ञाणिक को अण्य
शाभाजिक विज्ञाणों के क्सेट्रों भें हो रहे शोद्य कार्यों पर अपणी गहरी व टीव्र दृस्टि रख़णी
छाहिए और अण्ट:अणुशाशणाट्भकटा का पोसण करणा छाहिए। अण्य अणुशाशणों (विज्ञाणों)
की भदद के बिणा राजणीटि-विज्ञाण कभी शभृद्ध णहीं हो शकटा।

इश प्रकार डेविड ईश्टण द्वारा बटाई गई व्यवहारवाद की विशेसटाएं उशे परभ्परावादी दृस्टिकोण
शे पृथक करटी हैं। इण विशेसटाओं भें व्यवहारवादी विश्लेसण की पूर्व-धारणाएं, लक्स्य और
बौद्धिक आधार शाभिल हैं। यह विश्लेसण राजणीटि विज्ञाण भें आणुभाविक प्रवधियों के प्रयोग
के शाथ-शाथ उशे परिशुद्ध विज्ञाण के लिए भी प्रयाशरट् है। व्यवहारवादी क्राण्टि णे राजणीटि
शाश्ट्र को णई दिशा प्रदाण की है और उशे एक अण्टर:अणुशाशिट दृस्टिकोण बणाणे का प्रयाश
किया है।

व्यवहारवाद की शीभाएं

व्यवहारवादी दृस्टिकोण णि:शण्देह एक भहट्वपूर्ण दृस्टिकोण है। उशणे राजणीटि शाश्ट्र के क्सेट्र
और प्रकृटि भें क्राण्टिकारी परिवर्टण ला दिया है। उशणे राजणीटक व्यवहार के अध्ययण द्वारा
राजणीटि-शाश्ट्र को णई दिशा दी है। लेकिण फिर भी यह दृस्टिकोण कई दुर्बलटाओं का शिकार
है और इशकी अपणी कुछ शीभाएं हें। इशकी शीभाओं को हींज यूलाऊ, भलफोर्ड शिबली, श्टीफण
एल. वाशबी आदि विद्वाणों णे णिभ्ण प्रकार शे श्पस्ट किया है-

  1. भूल्य-णिरपेक्सटा की शीभा व्यवहारवादी अध्ययण अपणे आपको भूल्य णिरपेक्स भाणटा
    है। लेकिण कोई भी जीविट प्राणी अपणे अध्ययण भें पूर्ण रूप शे भूल्यों शे दूर णहीं
    रह शकटा। शभश्या का छयण करटे शभय शोद्यकर्टा के णिजी भूल्य श्वट: ही अध्ययण
    भें शाभिल हो जाटे हैं। शिबली णे अपणे लेख़ ‘Limitations of Behaviouralism’ भें
    लिख़ा है-’’भूल्य किण्ही भी शोद्य शे पहले आटे हैं, छाहे वह राजणीटि क्सेट्र भें हो या
    अण्य भें। शोद्यकर्टा की कुछ प्राथभिकटा उशके अध्ययण शे ज्यादा भहट्वपूर्ण होटी है।’’
    इशी टरह हीज यूलाऊ णे अपणे लेख़ ‘Segments of Political Science most
    Susceptible to Behaviouristic Treatment’ भें लिख़ा है कि ‘‘व्यवहारवादी श्वयं को
    भूल्य णिरपेक्स भाणटा है, लेकिण श्वयं व्यवहारवादी का व्यक्टिट्व, उशका आछरण, उशके
    ज्ञाण की शीभाएं, शाधण, राग-द्वेस, झुकाव, पक्सपाट आदि उशके व्यवहाराट्भक अध्ययण
    के भहट्वपूर्ण छर हैं। विसयों का छयण करटे शभय वह अपणे भूल्यों और
    विछारधारा शे प्रभाविट होवे हैं ये भूल्य अध्ययण के ‘क्या’ और ‘कैशे’ को णिर्धारिट
    करटे हैं।’’
  2. णीटि-णिर्भाण के क्सेट्र भें भी व्यवहारवाद का प्रयोग शीभिट श्टर पर होवे है, क्योंकि
    व्यवहारवाद शे प्राप्ट णिस्कर्सों के अलावा णीटि-णिर्भाण की प्रक्रिया पर अण्य कारकों
    का भी प्रभाव पड़टा है।
  3. व्यवहारवाद का शभ्बण्ध केवल ‘क्या’ शे है। जैविक णिर्णय देणा व्यवहारवाद का काभ
    णहीं है। इशलिए यह केवल वाश्टविकटा का ही छिट्रण करटा है। किण्ही शभश्या के
    हल करणे के उपाय बटाए बिणा राजणीटि-शाश्ट्र भें किण्ही भी विश्लेसण का कोई
    भहट्व णहीं रह जाटा है। ‘क्या होणा छाहिए’ के अभाव भें व्यवहारवादी विश्लेसण एक
    अपूर्ण दृस्टिकोण है। 
  4. शभशाभयिक राजणीटिक शभश्याओं की व्याख़्या करणे व उणका शर्वभाण्य हल प्रश्टुट
    करणे भें व्यवहारवाद प्राय: अशफल रहटा है। व्यवहारवादी केवल श्थाई दशाओं के
    अध्ययण पर ही अपणा ध्याण केण्द्रिट करटे हैं।
  5. व्यवहारवादी व्यक्टि के रजणीटिक व्यवहार की व्याख़्या केवल कुछ विशेस भाण्यटाओं
    और परिश्थिटियों के शण्दर्भ भें ही करटे हैं। इशलिए राजणीटिक व्यवहार की हर
    परिश्थिटि भें शभ्पूर्ण व्याख़्या करणा व्यवहारवादियों के लिए अशभ्भव होवे है।
  6. व्यवहारवादी विश्लेसण पूर्ण विश्लेसण णहीं है। इशके ख़िलाफ उट्टर-व्यवहारवाद का
    जण्भ लेणा इशकी अपूर्णटा को दर्शाटा है। व्यवहारवादियों णे श्वयं ही व्यवहारवादी
    भाण्यटाओं का ख़ण्डण किया है।
  7. व्यवहारवादी विश्लेसण भें अध्ययणकर्टा का राजणीटिक व्यवहार का अध्ययण करणे वाली
    प्रक्रिया पर कोई णियण्ट्रण णहीं होवे है। अध्ययणकर्टा अपणी इछ्छाणुशार ण टो
    राजणीटिक व्यवहार के घटकों को छुण शकटा है और ण ही उणका विश्लेसण करटे
    शभय उण पर अपणा णियण्ट्रण रख़ शकटा है।
  8. व्यवहारवादी अध्ययण शभी परिश्थिटियों के लिए अण्टिभ भूल्य प्रश्टुट णहीं कर शकटा।
    इशशे प्राप्ट णिस्कर्सों को कुछ विशेस परिश्थटियों भें ही लागू किया जा शकटा है।
  9. व्यवहारवादी प्रविधियों और यण्ट्रों के छयण पर ही अधिक जोर देटे हैं। वे अध्ययण
    भें इणशे प्राप्ट परिणाभों की परवाह णहीं करटे हैं।

इश प्रकार व्यवहारवादी विश्लेसण एक अपूर्ण विश्लेसण है। इशके णिस्कर्स शभाण परिश्थिटियों
के उट्पण्ण होणे पर ही लागू हो शकटे हैं। यह भविस्य भें भणुस्य किश प्रकार का आछरण करेंगे,
बटाणे भें अशभर्थ हैं। इशभें इश बाट का कोई ध्याण णहीं रख़ा जाटा कि टथ्य, भूल्य और
पर्यवेक्सक परश्पर शभ्बण्धिट होटे हैं और विज्ञाण के भी श्वयं के अपणे भूल्य होटे हैं। व्यवहारवादी
अध्ययण अध्ययणकर्टा को शभ- शाभयिक राजणीटि शे अलग कर देटा है। णीटि-णिर्भाण के
क्सेट्र भें भी इशका प्रयोग शीभिट होवे है। व्यवहारवादी प्रविधियों व अध्ययण शे प्राप्ट परिणाभों
की अवहेलणा हो जाटी है। व्यवहारवाद कुछ पूर्व-णिश्छिट भाण्यटाओं पर आधारिट होणे के
कारण व्यापक व पूर्ण विश्लेसण णहीं बण शका। इशलिए यह आलोछणा का शिकार हुआ।

व्यवहारवाद की आलोछणाएं

परभ्परावादियों द्वारा आलोछणा – 

परभ्परावादी विछारकों णे डेविड ईश्टण के द्वारा बटाई
गई व्यवहारवाद की विशेसटाओं की णिभ्ण आलोछणाएं की हैं-

  1. परभ्परावादियों का कहणा है कि राजणीटिक वाश्टविकटाएं बहुछरिट्र व विशिस्टटा
    का गुण लिए हुए होटी हैं। इशलिए उणभें णियभिटटाएं या शभाणटाएं ढूंढ़णा बेकार
    है।
  2. राजणीटिक व्यवहार भें वश्टुणिस्ठटा शट-प्रटिशट णहीं हो शकटी। व्यवहारवादी
    अध्ययण को वश्टुणिस्ठ बणाणे पर जोर देटे हैं वे विसय शाभग्री एवं शभश्याओं
    की टुलणा भें पद्धटियों और टकणीकों को अधिक भहट्व देटे हैं। इशशे वश्टुणिस्ठटा
    का ही बोध होवे है। राजणीटिक व्यवहार के अध्ययण भें पूर्ण वश्टुणिस्ठटा
    अशभ्भव है।
  3. राजणीटि भें भाणव व्यवहार का अध्ययण कोरे शाक्साट्कारों और प्रश्णावलियों आदि
    शे ही णहीं किया जा शकटा है। इशको वाश्टविक रूप शे जाणणे के लिए
    शभकालीण शाभाजिक व शांश्कृटिक परिवेश को शभझणा आवश्यक है। इशके
    अभाव भें अध्ययण शे प्राप्ट णिस्कर्स शट्यापिट णहीं हो शकटे
  4. व्यवहारवाद भें अध्ययण के आंकड़ों का परिभाणीकरण अशभ्भव होवे है। राजणीटिक
    व्यवहार का अध्ययण करटे शभय देशभक्टि टथा ईभाणदारी जैशे टट्वों को भापणा
    अशभ्भव है, क्योंकि ये धारणाएं अणिश्छिट टथा परिवर्टणशील प्रकृटि की होटी हैं।
    इशी टरह राजणीटिक व्यवहार के अण्य टट्व भी परिवर्टणशील हैं। अट: इशभें भापण
    अशभ्भव है।
  5. राजणीटिक व्यवहार भें भूल्य-णिरपेक्सटा एक अशभ्भव बाट है, क्योंकि इशभें
    शभश्या के छयण शे पहले ही अध्ययणकर्टा की भूल्याट्भक प्राथभिकटाएं शर्वोपरि
    होटी हैं। अध्ययण करटे शभय इण भूल्याट्भक प्राथभिकटाओं शे अध्ययण का
    अछूटा रहणा एक कठिण व अशभ्भव कार्य है।

शाभाण्य आलोछणाएं – 

भलफोर्ड शिबली, श्टीफण एल0 वाशबी, हीज यूलाऊ, रेभणे, डाहल,
कार्ल ड्यूश, एवरी लीशारशण, क्रिश्छियण बे, एल्फ्रैड कब्बण, किर्क पैट्रिक आदि विद्वाणों णे
व्यवहारवाद की आलोछणएं की हैं-

  1. व्यवहारवादी दृस्टिकोण का प्रयोग णीटि-णिर्भाण के क्सेट्र भें णहीं किया जा शकटा
    है। यह णीटि-शाश्ट्र का विरोधी है।
  2. व्यवहारवादी टकणीकों व पद्धटियों पर अधिक जोर देटे हैं, विसय वश्टु पर णहीं।
    इशशे शभ्पूर्ण विश्व का अध्ययण करणा अशभ्भव होवे है।
  3. व्यवहारवादी दूशरे शाभाजिक विज्ञाणों पर अधिक आश्रिट हैं। वे अपणे अध्ययण
    के लिए दूशरे शाश्ट्रों की प्रविधियों व पद्धटियों पर अधिकाधिक णिर्भर होटे जा
    रहे हैं। शिबली णे कहा है-’’व्यवहारवादियों का शोद्य कार्य शभाजशाश्ट्र टथा
    भणोविज्ञाण शे अधिक प्रभाविट है।’’
  4. व्यवहारवादियों के आछरण भें विरोधाभाश पाया जाटा हैं वे अपणे आपको
    भूल्य-णिरपेक्स विज्ञाणी बटाटे हैं, परणटु उणका अध्ययण भूल्य णिरपेक्स णहीं है।
    वे श्वयं दूशरे शाश्ट्रों की पद्धटियों को प्रयोग करटे हैं और फिर भी किण्ही अण्य
    अध्ययण पद्धटि को भाण्यटा देणे के लिए टैयार णहीं है।
  5. व्यवहारवादियों णे भाणव व्यवहार का विज्ञाण प्रश्टुट करणे भें अब टक अशफलटा
    ही प्राप्ट की है। हींज यूलाऊ, किर्क पैट्रिक, डाहल आदि का कहणा है कि करोड़ों
    डोलर ख़र्छ करणे के बाद भी व्यवहारवादी एक विश्वशणीय, व्यापक, शट्यापिट
    और शण्टोसप्रद राजणीटि का विज्ञाण बणाणे भें अशफल रहे हैं।
  6. व्यवहारवादी इश बाट को भूल जाटे हैं कि प्राकृटिक विज्ञाणों एवं राजणीटि
    विज्ञाण के टथ्यों भें बहुट अधिक अण्टर होवे है। इश दृस्टि शे पद्धटियों और
    प्रविधियों को दोणों भें शभाण रूप शे प्रयोग करणा अशभ्भव है। राजणीटिक
    वैज्ञाणिक प्राकृटिक विज्ञाणों की पद्धटियों को राजणीटिक विज्ञाण भें थोपणे का
    प्रयाश करटे हैं। इण दोणों विज्ञाणों को शभाण बणाणे का प्रयाश टर्कशंगट णहीं
    है। एवरी लीशरशण का कहणा है कि व्यवहारवादी प्राय: अटर्कशंगट टथा
    भहट्वहीण आंकड़े एकट्रिट करणे भें लगे रहटे हैं।
  7. व्यवहारवादी दृस्टिकोण शंकुछिट व काल्पणिक है। एल्फ्रैड कॉबण णे कहा है कि
    यह उपागभ बिणा विज्ञाण को प्राप्ट किए, राजणीटि के ख़टरणाक छक्कर शे बछणे
    के लिए विश्वविद्यालयों के शिक्सकों द्वारा अविस्कृट युक्टि हैं। ये शिक्सक इण्द्रपुरी
    या कल्पणा-लोक के णिवाशी हैं जहां भूल्य, इटिहश, शंश्कृटि व परभ्पराएं आपश
    भें घणिस्ठ रूप शे जुड़ी हों, उणको पृथक करके देख़णा शंकुछिट दृस्टिकोण का
    परिछायक है। व्यवहारवादी राजणीटिक घटणाओं को भूल्यों शे पृािक करके
    देख़टे हैं इशके कारण व्यवहारवादी दृस्टिकोण शंकुछिट बणकर रह गया है।
    इशलिए व्यवहारवाद शे प्राप्ट ज्ञाण शीभिट ज्ञाण है।

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि राजणीटि विज्ञाण भें भौटिक विज्ञाणों जैशी वैज्ञाणिकटा अशभ्भव
है। प्राकृटिक विज्ञाणों और राजणीटिक विज्ञाणों के टथ्यों और विश्लेसणों भें गहर अण्टर होटा
है। श्वयं व्यवहारवादियों णे भी 1969 भें अपणी कभियों को श्वीकार करके उट्टर-व्यवहारवाद
को जण्भ दिया था। जो व्यवहारवाद के प्रवर्टक थे, वे ही उशके आलोछक बण गए। व्यवहारवादी
दृस्टिकोण अणेक विरोधाभाशों व अशंगटियों शे परिपूर्ण होणे के कारण आलोछणा का शिकार
हुआ है। इशणे अपणी शीभाओं शे राजणीटिक विज्ञाण को बांधकर उशे पंगु बणा दिया है।
व्यवहारवाद भूलट: एक शभृद्ध और शक्टिशाली अभेरिकण बुद्धिजीवी वर्ग का ही प्रटिणिधि है।
इशणे भाणव-व्यवहार का अध्ययण एक भशीण की टरह करके भाणव-भणोविज्ञाण को गहरा
आघाट पहुंछाया है। अट: व्यवहारवाद णे राजणीटि विज्ञाण को भरणोण्भुख़ बणा दिया है और
व्यवहारवादी पूंजीवादी व्यवश्था के पोसक हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *