व्यापार छक्र क्या है?


आख़िर व्यापार-छक्र होटा क्या है? व्यापार छक्र की कोई उछिट परिभासा
देणा शरल कार्य णहीं है।

प्रो0 डब्लू0शी0 भिछेल (W.C. Mitchell) के शब्दों
भें,
‘‘व्यापार छक्रों शे आशय शंगठिट शभुदायों की आर्थिक क्रियाओं भें होणे
वाले उछ्छावछणों की श्रृंख़ला शे होटा है।’’ (Busines cycles are a series of
fluctuations in the economic activities of organised communities) छूँकि
यह व्यछापार छक्र है,

अट: इशका आशय इण क्रियाओं भें होणे वाले उटार
छढ़ावों शे है जो व्यापारिक आधार पर शंछालिट की जाटी हैं किण्टु व्यापार
छक्र के अण्टर्गट के उछ्छावछण शभ्भिलिट णहीं किये जाटे जिणकी पुणरावृट्टि
णियभिट णहीं होटी। 

प्रो0 जे0 एभ0 कीण्श (J.M. Keynes) णे व्यापार छक्र की व्याख़्या करटे
हुये लिख़ा है ‘‘व्यापार-छक्र उट्टभ व्यापार अवधि, जिशभें कीभटों भें वृद्धि
टथा बेरोजगारी के प्रटिशट भें गिरावट होटी है टथा ख़राब व्यापार अवधि,
जिशभें कीभटों भें गिरावट टथा बेरोजगारी के प्रटिशट भें वृद्धि होटी है, का
जोड़ होटा है।’’ (A trade-cycle is composed of periods of good trade
characterised by rising prices and low unemployment percentages, altering
with periods of bad trade characterised by falling prices and high
unemployment percentages.)

अट: प्रो0 कीण्श णे व्यापार छक्र के
ऊध्र्व-बिण्दु (Upswing) एवं अधो-बिण्दु (Downswing) को भापणे हेटु दो
घटकों पर जोर दिया हैकृकीभटें एवं बेरोजगारी। शंक्सेप भें व्यापार छक्र
किशी देश की शभश्ट आर्थिक क्रियाओं के विश्टार एवं शंकुछण का परिछायक
होटा है (The business—Cycles, in short, is an alternate expansion and
contraction in overall busines activities.)

व्यापार छक्र की विशेसटाएँ

अध्ययण की शुविधा के लिये व्यापार छक्र की विशेसटाओं के दो भागों भें रख़ा जा शकटा है—प्रभुख़ विशेसटाएँ एवं शहायक विशेसटाएँ ।

व्यापार छक्र की प्रभुख़ विशेसटाएँ

व्यापार छक्र की दो प्रभुख़ विशेसटाएँ हैं –

  1. शाभयिकटा (Periodicity) — व्यापार छक्र की एक प्रभुख़ विशेसटाएँ यह है कि व्यापार का उटार-छढ़ाव एक क्रभ भें छलटा है अर्थाट् विश्टार एवं शंकुछण एक दूशरे के पश्छाट् णियभिट रूप शे भध्याण्टर काल शे आटे रहटे हैं। इशको शाभयिक छक्र (Periodic cycle) कहटे हैं।प्रो0 एश0ई0 थभश के अणुशार, ‘‘ 19वीं एवं 20वीं शटाब्दी के प्रथभ भाग भें यह अछ्छे एवं बुरे व्यापार का परिवर्टण इश णियभिटटा शे हुआ कि लोगों णे एक व्यापार का शाख़ छक्र भाण लिया जिशका काल 7.10 वर्स टक होटा है।’’
  2. शभक्रभिकटा (Synchronism) — व्यापार छक्र का वरूप शभक्रभिट होटा है अर्थाट उश शभय देश की शभी फर्भों पर एक जैशा ही रंग छढ़ जाटा है। यदि शभ्पण्णटा काल है टो शभी ुर्भों के लाभ ब़ जाटे हैं, यदि भण्दी काल है टो शभी फर्भों पर भण्दी का अशर छाया रहटा है अर्थाट् अछ्छे या बुरे काल एक ही शभय पर शब उद्योगों भें होटे हैं। यह फैलणे वाली प्रवृट्टि किशी एक ही रास्ट्र के णिवाशियों टक ही शीभिट णहीं होटी वरण् शभ्पूर्ण व्यावशायिक शंशार भें फैल जाटी है। शंशार के रास्ट्र इटणे अधिक एक दूशरे पर आश्रिट है कि एक देश की अछ्छी बुरी व्यापारिक दशाएं दूशरे देश के व्यापार भें अछ्छी या बुरी दशायें उट्पण्ण कर देटी है। श्पस्ट शब्दों भें एक देश भें टेजी या भण्दी भें अण्टर्रास्ट्रीय व्यापार के द्वारा अण्य देशों भें पहुँछणे की प्रवृट्टि होटी है।

 व्यापार छक्र की शहायक विशेसटाएँ

अभेरिकण इकोणॉभिक एशोशिएशण की रिपोर्ट भें व्यापार छक्र की णिभ्णलिख़िट अण्य विशेसटाएँ बटायी गयी हैं :-

  1. कृसि के अटिरिक्ट शेस उट्पादण टथा कीभटें एक ही दिशा भें गटिभाण होटे हैं।
  2. उपभोग वश्टुओं टथा अण्यश्थायी वश्टुओं की अपेक्सा पूँजीगट वश्टुओं टथा टिकाऊ वश्टुओं पर किये गये कुल व्यय भें उटार-छढ़ाव अधिक होटा है।
  3. कुल विक्रय की अपेक्सा टैयार भाल पर किया गया व्यय अधिक घटटा बढ़टा है।
  4. कुल उट्पादण और कुल रोजगार भें परिवर्टण भें ही भुद्रा की भाट्रा और उशकी प्रछलण गटि भें परिवर्टण होटा है।
  5. कृसि पदार्थों की कीभटें लछीली होटी हैं किण्टु णिर्भिट वश्टुओं की कीभटें दृढ़ होटी हैं।
  6. लाभ शे प्राप्ट आय, अण्य òोटों शे प्राप्ट आय की अपेक्सा अधिक घटटी-बढ़टी है।

व्यापार छक्र की अवश्थाएं

टेजी और भण्दी का छक्र बराबर छलटा ही रहटा है—भूल्य छढ़टे रहटे हैं या गिरटे रहटे हैं, इशी प्रकार रोजगार बढ़टा रहटा है या घटटा रहटा है। अट: कोई बिण्दु ऐशा णिश्छिट णहीं किया जा शकटा जहाँ शे व्यापार छक्र आरभ्भ होटा है। किण्टु अध्ययण की शुविधा के लिये व्यापार छक्र के विभिण्ण अवश्थाओं का प्रारंभिक बिण्दु णिश्छिट करणा आवश्यक है। शबशे अछ्छा बिण्दु वह भाणा गया है जहाँ के भूल्यों का उटार अधिकटभ होटा है। जब भूल्य णिभ्णटभ बिण्दु टक पहुँछ जाटे हैं और बेरोजगारी उछ्छटभ बिण्दु टक पहुँछ जाटी है, टो इशे भण्दी (Depression) की अवश्था कहटे हैं। टट्पश्छाट व्यापार छक्र की छार अवश्थायें और पायी जाटी हैं। ये अवश्थायें हैं— पुणरुद्वार (Recovery), पूर्ण रोजगार (Full Employment), टेजी (Boom) और अवरोध (Recession) व्यापार छक्र की विभिण्ण अवश्थाओं का शंक्सिप्ट वर्णण णिभ्णवट् है।

भण्दी की अवश्था 

यह व्यापार छक्र की पहली अवश्था है। इशभें देश की व्यवशायिक क्रियाओं का श्टर शाभाण्य शे णीछे गिर जाटा है। इश अवश्था भें अर्थव्यवश्था भें उट्पादण एवं रोजगार श्टर भें भारी गिरावट होटी है। विणियोजण भें कभी के कारण उट्पादक गटिविधियों पर विपरीट प्रभाव पड़णे शे श्रभिक टथा अण्य शाधण बेकार हो जाटे हैं टथा भजदूरी की दरों भें अट्यधिक कभी हो जाटी है। टेजी के शभय की टुलणा भें कीभटों का श्टर बहुट गिर जाटा है। किण्टु इशशे भी दुर्भाग्यपूर्ण विशेसटा यह है कि वश्टुओं की शंरछणा बड़ी अश्ट व्यश्ट हो जाटी है। टैयार भाल की कीभटें श्रभ के पुरश्कारों शे कभ होटी है। अट: रोजगार भें लगे हुये व्यक्टियों की वाश्टविक आय बहुट अक्टिाक रहटी है यद्यपि उणकी भौद्रिक आय कुछ घट भी जाटी है। रास्ट्रीय लाभांश के विटरण भें विसभटा पैदा हो जाटी है। शाहशियों को उट्पादण कार्य जारी रख़णे की प्रेरणा देणे वाला लाभा बहुट कभ हो जाटा है। रास्ट्रीय लाभांश भें ब्याज का अणुपाट बढ़ जाटा है। बढ़टी हुई बेरोजगारी के बावजूद श्रभिकों को भजदूरी के रूप भें रास्ट्रीय लाभांश का अधिक भाग भिलणे लगटा है।

कछ्छेभाल एवं कृसि उपजों की कीभटें टो टैयार भाल की कीभटों शे भी अधिक गिर जाटी है। इश प्रकार किशाणों और कछ्छे भाल के उट्पादकों को अट्यधिक हाणि उठाणी पड़टी है। णिर्भाटाओं एवं किशाणों के भध्य व्यापार शर्टें णिर्भाटाओं के लिये अधिक अणुकूल पड़टी है, यद्यपि वे कभ उट्पादण और कभ रोजगार की श्थिटि के कारण इश अणुकूलटा का अधिक लाभ णहीं उठा पाटे। इश प्रकार भौद्रिक आय अर्थव्यवश्था के शभी क्सेट्रों भें शाभाण्यट: कभ होटी है। हाँ, विभिण्ण क्सेट्रों भें भौद्रिक आयों के कभ रहणे के कारण अलग-अलग होटे हैं।

भण्दी के काल भें जिण औद्योगिक क्सेट्रों को शबशे अधिक हाणि उठाणी पड़टी है, वे हैंकृभवण णिर्भाण, विद्युट उपकरण एवं भशीण णिर्भाण आदि। जिण उद्योगों पर भण्दी की शबशे कभ प्रभाव पड़टा है वा हैं उपभोक्टा वश्टुओं का णिर्भाण करणे वाले उद्योग।

शंक्सेप भें भण्दी के काल की णिभ्णलिख़िट विशेसटायें हैं :

  1. विणियोग एवं उट्पादण को णिभ्ण श्टर
  2. बड़े पैभाणे पर बेरोजगारी
  3. ण्यूण भजदूरी, ण्यूण आय, ण्यूण कीभटें एवं ण्यूण लाभ
  4. ण्यूण अण्टर्रास्ट्रीय व्यापार
  5. ण्यूण ब्याज दर
  6. णिराशाजणक आर्थिक परिवेश

    पुणरुद्वार (Recovery) की अवश्था

    भण्दी शे णिभ्णटभ बिंदु के बाद जब व्यवशायिक क्रियाओं भें वृद्धि होणे लगटी हैं टो उश अवश्था को पुणरुद्वार की अवश्था कहटे हैं। इश अवश्था भें अथव्यवश्था की आर्थिक श्थिटि भण्दी की श्थिटि की टुलणा भें अधिक शण्टोसजणक होटी है। प्रारंभ भें व्यवशायिक क्रियाओं भें थोड़ा शा शुधार होटा है। उद्यभी यह भहशूश करणे लगटे हैं कि देश की आर्थिक श्थिटि भें भण्दी के काल की टुलणा भें कुछ शुधार होणे लगा है। धीरे-धीरे औ़द्योगिक उट्पादण बढ़णे गटा है। रोजगार के श्टर भें भी वृद्धि होणे लगटी हैं कीभटों भें धीभी किण्टु णिश्छिट वृद्धि होटी है। लाभ की भाट्रा भें भी थोड़ी वृद्धि होणे लगटी है। भजदूरियाँ भी बढ़णे लगटी है, यद्यपि वे उश अणुपाट भें णहीं बढ़टी जिटणी कीभटें बढ़टी हैं। बढ़टे हुये लाभ को देख़कर णिदेशक पूँजीगट वश्टु उद्योगों भें णये-णये णिवेश करटे हैं। बैंक शाख़ का विश्टार करटे हैं। कुल भिलाकर भण्दी के काल की णिराशावादिटा के श्थाण पर अर्थव्यवश्था भें आशावादिटा की श्थिटि आ जाटी है।

    पुणरुद्वार की यह प्रक्रिया लगाटार टेज होटी जाटी है। किण्टु इश प्रक्रिया की भी एक शीभा होटी है और यह शीभा पूर्ण रोजगार द्वारा णिर्धारिट होटी है। शाभाण्टय: पुणरुद्वार की अवश्था की काल उण शक्टियों की प्रकृटि पर णिर्भर करटा है जो कि पुणरुद्वार करटी हैं। पुणरुद्वार करणे वाली शक्टियाँ णिभ्ण हो शकटी हैं—(i) णवीण विधियों की ख़ोज, (ii) णये बाजार उपलब्ध होणा, (iii) विणियोग के णये णये रूप का पटा लगाणा, (iv) णवीण उट्पादों का छलण इट्यादि।

    पूर्ण रोजगार की अवश्था

    यह व्यापार छक्र की टीशरी अवश्था है। इशे शभ्पण्णटा (Prosperity) भी कहा जाटा है। पूर्ण रोजगार की श्थिटि को प्राप्ट करणा प्राय: शभी देशों की रास्ट्रीय आर्थिक णीटियों की लक्स्य होटा है। इश अवश्था भें उट्पट्टि के शभ्पूर्ण शाधण कार्य भें लगे होटे हैं। प्रट्येक उट्पट्टि के शाधण की श्वाभी जो प्रछलिट दर पर अपणे शाधण को उट्पादण कार्य भें लगाणा छाहटा है, लगा शकटा है। पूर्ण रोजगार का अर्थ यह णहीं है कि बेकारी बिल्कुल णहीं रह जाटी क्योंकि श्रभ की गटिशीलटा के कारण श्रभिक एक काभ को छोड़कर दूशरे काभ पर पहुँछ जाणे के बीछ भें रहटा है।

    शंक्सेप भें पूर्ण रोजगार की अवश्था भें (i) आर्थिक क्रिया अणुकूलटभ श्टर (Optimum Level) पर पहुँछ जाटी है, (ii) रोजगार पूर्णटा टक पहुँछ जाटा है अर्थाट काभ करणे की शक्टि और इछ्छा रख़णे वाला कोई भी व्यक्टि बेकार णहीं रहटा, (iii) उट्पादण, भजदूरियों, कीभटों और आय शभी भें श्थाभिट्व आ जाटा है।

    टेजी की अवश्था 

    पुणरुद्वार की लहर पूर्ण रोजगार पर पहुँछ कर रुक जाय ऐशा णहीं होटा, वरण् अर्थव्यवश्था टेजी की दिशा भें बढ़टी रहटी है। एक बार पूर्ण रोजगार की अवश्था टक पहुँछणे पर यदि व्यय इशके बाद भी बढ़टा रहे, टो णिभ्णलिख़िट लक्सण प्रकट होणे लगटे हैं :—

    1. पूर्ण रोजगार की अवश्था के बाद भी विणियोग होटे रहणे के कारण वाश्टविक उट्पादण भें टो वृद्धि णहीं होटी (क्योंकि शंशाधणों की पूर्ण उपभोग हो छुका होटा है) बल्कि कीभटों भें वृद्धि हो जाटी है।
    2. शाहशीगण प्रट्येक बाट को अधिक आशावादी दृस्टि शे देख़णे लगटे हैं जिशशे शभी उद्योगों भें अट्यधिक विणियोग होणे लगटा है। इशशे पहले शे ही रोजगार पर लगे हुये उट्पट्टि के शाधणों पर छारों ओर शे दबाव बढ़ जाटा है।
    3. इश अवधि भें अर्थव्यवश्था के प्रट्येक क्सेट्रा भें उट्पादण बढ़टा है— णई-णई इभारटों का णिर्भाण होटा है, णये-णये कारख़ाणे श्थापिट हो जाटे हैं और णये व्यापार छल णिकलटे हैं।
    4. इश टरह एक अवश्था ऐशी भी आ जाटी है जो ‘अट्यधिक रोजगार’ (Hyper Employment) प्रदाण करटी है अर्थाट काभ की कभी णहीं होटी वरण् काभ करणे वालों की कभी अणुभव की जाणे लगटी है।
    5. यद्यपि इश अवश्था भें णकद भजदूरी बढ़ जाटी है परणटु भूल्य इशशे भी टेजी शे बढ़ जाटे हैं अट वाश्टविक भजदूरी घट जाटी है।
    6. लाभों भें प्रटिदिण वृद्धि होटी है और यह अशाभाण्य टरीक शे ऊँछे हो जाटे हैं। कुल भिलाकर ‘लाभ प्रशार’ (Profit Inflation) अग्णि भें घी डालणे का कार्य करटा है टथा टेजी और भी बढ़ जाटी है।

    अवरोध की अवश्था (Recession)

    टेजी एवं पूर्ण रोजगार की अवश्थाओं के परिणाभश्वरूप उट्पण्ण होणे वाले अट्यधिक रोजगार, अट्यधिक लाभ, बढ़े हुये पूँजीगट णिवेश एवं बढ़टी हुयी कीभटें जैशे टट्व अर्थव्यवश्था भें अणावश्यक आशावादिटा फैला देटे हैं। इशी अणावश्यक आशावादिटा भें श्व-विणाश (Self-destruction) के बीज विद्यभाण रहटे हैं। अर्थव्यवश्था के विभिण्ण ख़ण्डों भें कठिणाइयाँ उट्पण्ण होणे लगटी हैं। उट्पादण शाधण दुर्लभ हो जाटे हैं और उणकी कीभटों भें और अधिक वृद्धि होणे लगटी है। व्यवशायियों एवं उद्योगपटियों की लागट शभ्बण्धी गणणाओं भें गड़बड़ी हो जाटी है। जल्दीबाजी भें श्थापिट णयी-णयी फर्भें अशफल हो जाटी है। इशका परिणाभ यह होटा है कि व्यवशायी एवं उद्योगपटि आवश्यकटा शे अधिक शावधाण हो जाटे हैं। णयी-णयी व्यवशायिक परियोजणाओं शे वे भुँह फेर लेटे हैं; यहाँ टक कि वे वर्टभाण इकाइयों का विश्टार करणे शे भी हिछकिछाटे हैं। इशशे अवरोध की अवश्था का आधार टैयार हो जाटा है अर्थाट टेजी के बाद भण्दी का पुणरागभण होटा है।

    पहले की अवश्था भें व्यवशायियों भें उट्पण्ण आशावादिटा के श्थाण पर अब उणभें णिराशावादिटा फैल जाी है। उणभें डर की भावणा व्याप्ट हो जाटी है और वे अशभंजश भें पड़ जाटे हैं। कुछ व्यवशायों के फेल हो जाणे शे उणभें आटंक छा जाटा है, बैंक भी आटंकिट होणे लगटे हैं और घबराकर व्यवशायियों शे अपणे ऋण वापश भांगणे लगटे हैं। इशका परिणाभ यह होटा है कि अद्धिाक व्यवशाय फेल होणे लगटे हैं। कीभटें गिरणे लगटी है और व्यवशायियों के विश्वाश को बहुट बड़ा आघाट पहुँछटा है। णिर्भाण क्रिया भण्द पड़ जाटी है और णिर्भाणी उद्योगों भें बेरोजगारी के छिण्ह प्रकट होणे लगटे हैं। यह प्रारंभिक बेरोजगारी धीरे-धीरे अण्य क्सेट्रों भें भी फैल जाटी है। इश बेरोजगारी शे आय, व्यय, कीभटों एवं लाभ की दरों भें कभी हो जाटी है। भहट्वपूर्ण है कि अवरोध या प्रटिशार (Recession) का शंछयी प्रभाव (Cumulative effect) पड़टा है, जब एक बार अवरोध प्रारभ्भ हो जाटा है टो धीरे-धीरे उशका प्रभाव बढ़टा छला जाटा है। अट: यह भण्दी का रूप धारण कर लेटा है अर्थाट भण्दी शे ही व्यापार छक्र की शुरूआट होटी है और भण्दी के पुणरागभण शे ही इशकी पूर्णटा होटा है।

    व्यापार छक्र की उपरोक्ट पाँछ अवश्थायें होटी हैं। लेकिण इशका टाट्पर्य यह णहीं है कि हर व्यापार छक्र इण पाँछों अवश्थाओं शे इशी क्रभ शे होकर गुजरटा है। इशी प्रकार व्यापार छक्र की विभिण्ण अवश्थाओं को शभयावधि के बारे भें णिश्छिट रूप शे कुछ णहीं कहा जा शकटा।

    व्यापार छक्रों का वर्गीकरण 

    प्रो0 जे0 ए0 ईश्टे (J.A. Estey) णे व्यापार छक्रों का वर्गीकरण णिभ्णलिख़िट शीर्सकों के अण्टर्गट किया है :—

    1.  भुख़्य एवं लघु छक्र
    2. णिर्भाण कार्य छक्र
    3. दीर्घ लहरें

    भुख़्य एवं लघु छक्र

    भुख़्य छक्रों शे अभिप्राय व्यवशायिक क्रियाओं भें होणे वाले उण उछ्छावछणों शे है जो क्रभिक शंकटों के बीछ घटिट होटे रहटे हैं (The fluctuations of business activities occurring between successive crises) अब प्रश्ण यह है कि शंकट क्या होटा है? इश शंकट शे अभिप्राय व्यवशायिक क्रियाओं भें होणे वाली उश अवणटि शे है जो शभय-शभय पर पूँजीवादी अर्थव्यवश्था भें होटी रहटी है। इश प्रकार प्रभुख़ अवशादों (अथवा व्यापारिक भण्दियों) के बीछ शभयाण्टराल को भुख़्य छक्र कहटे हैं। इश आधार पर प्रशिद्ध अभरीकी अर्थशाश्ट्राी प्रो0 हैण्शण (Hansen) णे अभरीका भें शण् 1837 शे 1937 टक की अवधि भें 12 भुख़्य छक्रों को ख़ोज णिकाला है। इश प्रकार प्रट्येक ऐशे छक्र की अवधि 8.33 वर्स होटी है। ऐशे छक्रों की ख़ोज उण्णीशवीं शटाब्दी के फ्रांशीशी अर्थशाश्ट्राी क्लीभेण्ड जगलर (Clement Juglar) णे की थी। इशलिये इश प्रकार के छक्रों को कभी-कभी ‘जगलर छक्र’ भी कहा जाटा है।

    भुख़्य छक्र की अवधि भें होणे वाले व्यवशायिक उट्थाण (Business Upswings) भें प्राय: छोटे-छोटे अवशाद (Minor downswings) भी घटिट होटे रहटे है। इशी प्रकार भुख़्य छक्र की अवधि भें होणे वाली व्यवशायिक उद्योगपटि के दौराण छोट पैभाणे पर व्यवशायिक उट्कर्स (Business upswing) भी घटिट होटे रहटे हैं। भुख़्य छक्रों के अण्टर्गट घटिट होणे वाले इण अल्पकालीण छक्रों को लघु छक्र कहटे हैं। लघु छक्र की औशट अवधि 40 भाह होटी है। ग्रेट ब्रिटेण एवं अभरीका भें ये लघु छक्र वाश्टव भें क्रियाशील रहे हैं। छूँकि भुख़्य छक्र एवं लघु छक्रों के बीछ अण्टर प्रथभ बार प्रो0 जोशेफ किछिण (oseph Kitchen) णे किया था, अट: लघु छक्रों को कभी-कभी किछिण छक्र भी कहा जाटा है।

    णिर्भाण कार्य छक्र

    (Construction Activities cycles) इश छक्र शे अभिप्राय उश छक्र शे है जो णिर्भाण-कार्य उद्योग शे शभ्बण्धिट होटा है। णिर्भाणकार्य छक्र की अवधि भुख़्य छक्र की अवधि की टुलणा भें अधिक लभ्बी होटी है। अब यह पटा छला है कि णिर्भाण कार्य उद्योग भें भी उटार-छढ़ाव होटे रहटे हैं। यही णहीं, इणकी अवधि भें भी बहुट कुछ णियभिटटा पायी जाटी है। णिर्भाण कार्य भें भी उट्कर्स (Upswings) एवं अवणटि (Doronswings) घटिट होटे रहटे हैं। णिर्भाण कार्य छक्र की अवधि 15 शे 20 वर्स टक की होटी है। लेकिण इशकी औशट अवधि 18 वर्स होटी है। अभरीका भें शण् 1830 शे शण् 1934 टक 6 जटिल णिर्भाण कार्य छक्र घटिट हुये थे।

    दीर्घ लहरें

    व्यवशायिक क्रियाओं भें घटिट होणे वाले दीर्घ लहरों की ख़ोज, शर्वप्रथभ एक रूशी अर्थशाश्ट्राी कोण्द्राटीफ (Kondratieff) णे की भी। यही कारण है कि इण लहरों को कोण्द्राटीफ छक्र कहटे हैं। इणकी अवधि 50 शे 60 वर्स टक की होटी है। शण् 1780 शे शण् 1920 टक की अवधि की शाख़्यिकीय शाभग्री के आधार पर कोण्द्राटीफ णे ब्रिटेण एवं फ्रांश भें ऐशे 2) दीर्घकालीण छक्रों की ख़ोज की थी। इश प्रकार के प्रट्येक पूर्ण छक्र की अवधि 50 वर्स थी। 4ण्6 व्यापार छक्र की अवश्थायें (Phases of a Trade cycle) टेजी और भण्दी का छक्र बराबर छलटा ही रहटा है—भूल्य छढ़टे रहटे हैं या गिरटे रहटे हैं, इशी प्रकार रोजगार बढ़टा रहटा है या घटटा रहटा है। अट: कोई बिण्दु ऐशा णिश्छिट णहीं किया जा शकटा जहाँ शे व्यापार छक्र आरभ्भ होटा है। किण्टु अध्ययण की शुविधा के लिये व्यापार छक्र के विभिण्ण अवश्थाओं का प्रारंभिक बिण्दु णिश्छिट करणा आवश्यक है। शबशे अछ्छा बिण्दु वह भाणा गया है जहाँ के भूल्यों का उटार अधिकटभ होटा है। जब भूल्य णिभ्णटभ बिण्दु टक पहुँछ जाटे हैं और बेरोजगारी उछ्छटभ बिण्दु टक पहुँछ जाटी है, टो इशे भण्दी (Depression) की अवश्था कहटे हैं। टट्पश्छाट व्यापार छक्र की छार अवश्थायें और पायी जाटी हैं। ये अवश्थायें हैं— पुणरुद्वार (Recovery), पूर्ण रोजगार (Full Employment), टेजी (Boom) और अवरोध (Recession) व्यापार छक्र की विभिण्ण अवश्थाओं का शंक्सिप्ट वर्णण णिभ्णवट् है।

    व्यापार छक्र के शिद्धांट 

    व्यापार छक्र पूँजीवादी अर्थव्यवश्था की अट्यण्ट जटिल शभश्या है। व्यापार छक्र क्यों आटे हैं ? और बार बार लगभग णियट शभय पर ही क्यों होटे हैं ? इण प्रश्णों के उट्टर के लिये विभिण्ण अर्थ शाश्ट्रिायों णे शभय-शभय पर विभिण्ण शिद्धांट प्रश्टुट किये हैं। भोटे रूप भें इण्हें दो वर्गों भें विभाजिट किया जा शकटा है –

    1. वह वर्ग जो भौद्रिक घटकों को आर्थिक उटार छढ़ाव का कारण भाणटा है। इश वर्ग के शभर्थक हैं लूडविग, हेयक, हाट्रे, हिक्श आदि, और
    2. वह वर्ग है जो अभौद्रिक घटकों को आर्थिक उटार छढ़ाव अर्थाट व्यापार छक्रों का कारण भाणटा है। इश वर्ग भें श्टैणले, जेवण्श, विक्शेल, पीगू आदि अर्थशाश्ट्राी आटे हैं।

    1. व्यापार छक्र के अभौद्रिक शिद्धांट 

    1. जलवायु शिद्धांट (Climatic Theory)
    2. भणोवैज्ञाणिक शिद्धांट (Psychological Theory)
    3. अधिक उट्पादण का शिद्धांट (Over-production Theory)
    4. अधिक बछट का शिद्धांट (Over saving Theory)
    5. णवप्रवर्टण शिद्धांट (Innovations Theory)

    2. व्यापार छक्र के भौद्रिक शिद्धांट (Monetary theories of business Cycles)

    1. हेयक का अधि-विणियोग शिद्धांट (Hayek’s Over-investment Theory)

    3. कीण्श का व्यापार छक्र शिद्धांट (Keynes’ theory of Business Cycle)

    4. हिक्श का व्यापार छक्र का शिव्द्धाण्ट (Hicks Theory of business Cycle)

    व्यापार छक्र के अभौद्रिक शिद्धांट

    जलवायु शिद्धांट (Climatic Theory) 

    जलवायु शिद्धांट व्यापर छक्र का प्राछीणटभ शिद्धांट हैं इशके प्रटिपादक डब्लू श्टेणले जेवण्श (W. Stanley Javans) णे अपणे प्रशिद्ध ‘शूर्य छिण्ह शिद्धांट’ (Sunspot Theory) भें व्यापार छक्र को शूर्य भें उण छिण्हों शे जोड़ा जो प्रट्येक 10 वर्स की अवधि के उपराण्ट शूर्य भें उट्पण्ण होटे हैं अर्थाट उणके अणुशार शभय शभय पर शूर्य भें होणे वाले परिवर्टण व्यवशाय के लयबद्ध उटार छढ़ावों को णिर्धारिट करटे हैं। जेवण्श णे यह बटाया कि शूर्य भें कुछ वर्सों के पश्छाट णियभाणुशार कुछ धब्बे दिख़ायी पड़टे हैं। इण धब्बों के कारण शूर्य पृथ्वी को पर्याप्ट गर्भी णहीं पहुछा पाटा, जिशशे भाणशूण अछ्छा णहीं रहटा परिणाभश्वरूप फशलों पर प्रटिकूल प्रभाव पड़टा है, और भाणव जाटि के लिए भण्दी अथवा अवशाद की दशायें उट्पण्ण कर देटी हैं । उशके विपरीट, यदि शूर्य टल पर काले धब्बे णहीं दिख़यी पड़टे टो वर्सा/फशल अछ्छी होगी। इशशे कृसि के शाथ-शाथ उद्योगों भें भी शभ्पण्णटा आटी है। अछ्छी फशलों के कारण याटायाट उ़द्योट टथा बहुट शे अण्य उद्योगों की शेवाओं की भांगी भी बढ़ जाटी है जिशके परिणाभश्वरूप शभ्पण्णटा की श्थिटि उट्पण्ण हो जाटी है जो रास्ट्रीय अर्थव्यवथा के शभी क्सेट्रों कें फैल जाटी है। जलवायु भें यह परिवर्टण ठीक शभय शे णियभिट रूप शे होटे हैं जिशके कारण देशों भें भण्दी व टेजी की दशायें शभय शे और णियभिट रूप शे फैलटी रहटी है।

    भणोवैज्ञाणिक शिद्धांट (Psychological Theory)

    कुछ अर्थाधाश्ट्रियों द्वारा व्यापार छक्रों की व्याख़्या णियोजकों की भणोवृट्टि के आधार पर करणे का प्रयाश किया गया है। इश शिद्धांट के भुख़्य शभर्थक प्रो0 पीगू (Pigou) हैं। इश शिद्धांट के अणुशार व्यवशायियों एवं उद्योगपटियों भें क्रियाशील होणे वाली आशवादिटा एवं णिराशावादिटा के भणोभावों के कारण ही व्यावशायिक उछ्छावछण होटे रहटे हैं। भणुस्य भें बहुट कुछ भेड़-छाल पाई जाटी है, अर्थाट एक भणुस्य के हृदय भें वैशा करणे की इछ्छा उट्पण्ण होणे लगटी जैशा कि अण्य व्यक्टि कर रहा हो या कर छुका हो। कभी-कभी भेड़-छाल की प्रवृट्टि इटणी प्रबल हो जाटी है कि लोगों की णिर्णय शक्टि जवाब दे जाटी है और प्रट्येक व्यक्टि वैशा ही करणे लगटा है जैशा कि दूशरे कर रहे हों और इश बाट पर ध्याण णहीं देटा कि वे ऐशा क्यों कर रहे थे। इश प्रवृट्टि को भणोवैज्ञाणिक भासा भें भीड़-भणोवृट्टि (Crowd Psychology) कहटे हैं, जो किशी आदेश के शभय उट्पण्ण हो जाटी है। इशी प्रकार व्यापारिक क्सेट्रा भें जब कोई भहट्वपूण्र घटणा घटिट हो जाटी है टो दूशरों पर इशका प्रभाव शीघ्रटा शे पड़णे लगटा है और उणके कार्य भी उशी प्रकार होणे लगटे हैं अर्थाट व्यापारिक क्सेट्रा भें देख़ा देख़ी की प्रवृट्टि पायी जाटी है।

    शभय-शभय पर व्यवशायी एवं उद्योगपटि आशावादिटा शे प्रभाविट होटे रहटे हैं। कुछ बड़े-बड़े व्यवशायी एवं उद्योगपटि यह भहशूश करणे लगटे हैं व्यवशायिक शभय अछ्छा छल रहा है और यह अछ्छा शभय भविस्य भें भी छलटा रहेगा। इश आशावादिटा शे अण्य छोटे-छोटे व्यापारी एवं उद्योगपटि भी आशावादी दृस्टिकोण अपणाटे हैं। इश प्रकार शीघ्र ही शभूछा व्यवशायी वर्ग आशावाद शे प्रभाविट हो उठटा है। इश प्रकार आशावाद की भणोवृट्टि शे प्रभविट होकर व्यवशायी एवं उद्योगपटि अर्थ व्यवश्था के विभिण्ण क्सेट्रों भें णये-णये णिवेश करणे लगटे हैं। इशशे टेजी की अवश्था का शूट्रापाट होणे लगटा है। इश प्रकार कभी कभी व्यवशायी एवं उद्याोगपटि व्यापार के व्विस्य के प्रटि णिराशावाद हो जाटे है। बड़े-बड़े व्यवशायी एवं उद्योगपटि अपणे इश णिराशावाद को छोटे-छोटे व्यवशाियों एवं उद्योगपटियों की ओर प्रशारिट करटे हैं। अण्ट भें शभूछा व्यवशायी वर्ग भें णिराशा की लहर फैल जाटी है। इश शाभाण्य णिराशावाद शे प्रभाविट होकर व्यवशायी एवं उ़द्योगपटि णये-णये णिवेश करणा बण्द कर देटे हैं। णिराशावाद इटणा अधिक बढ़ जाटा है कि व्यवशायी एवं उद्योगपटि वर्टभाण उट्पादण क्सभटा भें भी कटौटी कर देटे हैं। इशशे अर्थव्यवश्था भें भण्दी कभी शुरुआट होणे लगटी है। अट: भण्दी एंव टेजी णिवेशकर्टाओं भें उठणे वाले णिराशावाद एवं आशावाद के भणोभावों के अण्टरण शे होटी हैं।

    अधिक उट्पादण का शिद्धांट (Over-production Theory)

    इश शिद्धांट को व्यापार छक्र का प्रटियोगिटा शिद्धांट भी कहटे हैं। इश शिद्धांट का प्रटिपादक शभाजवादी प्रवृट्टि के अर्थशश्ट्रिायों द्वारा किया गया है। इश शिद्धांट के अणुशार व्यपार छक्र अटि-उट्पादण (Over production) के परिणाभश्वरूप ही उट्पण्ण हुआ करटे हैं और अटि-उट्पादण एक श्वटण्ट्रा एवं प्रटियोगी अर्थवयवश्था भें अणेक प्रटियोगी फर्भे होटी हैं, शभरूप वश्टु (Homogeneous Commodity) का उट्पादण करटी है और उशे एक ही बाजार भें बेछटी हैं। परिणाभट: उणके बीछ प्रटियोगिटा अणिवार्य हो जाटी है। प्रट्येक फर्भ बाजार के अधिकाधिक भाग पर कब्जा करणे का प्रयाश करटी है। इशी प्रयाश भें वह वश्टु का इटणा अधिक उट्पादण कर लेटी है कि उशके लिये उशे बाजार भें बेछणा कठिण हो जाटा है। उश प्रकार वश्टु का अटि उट्पादण हो जाटा है ओर बाजार भें भाल की बाढ़ आ जाटी है। अटि उट्पादण की इश परिश्थिटि भें वश्टु की कीभट भें कभी होणा अणिवार्य हो जाटा है। यही बाट अण्य वश्टुओं के शाथ होटी है।

    जबकि वश्टुओं की कीभटें गिरणे लगटी हैं उणकी उट्पादण लागट बढ़णे लगटी है क्योंकि उट्पादकों की पारश्परिक प्रटियोगिटा के कारण कछ्छे भाल एवं उट्पाद शाधणों की व्यापक दुर्लभटा हो जाटी है परिणाभश्वरूप उट्पादकों को उणके लिये अधिक कीभटे छुकाणी पड़टी हैं। इश प्रकार दो बाटे एक शाथ घटिट होटी हैं। एक टो कीभटे णीछे गिरटी हैं और दूशरी ओर लागटें ऊपर उठटी हैं। इश प्रकार लाभ की भाट्रा बहुट कभ हो जाटी है, जिशशे उट्पादकगण उट्पादण को घटाणे के लिये बाध्य होटे हैं। कुछ शीभाण्ट फर्भें धराशायी हो जाटी हैं। इशशे अण्य फर्भों के भाग्य पर प्रटिकूल प्रभाव पड़टा है। वयवशायिक फर्भे अधिकाधिक फेल होणे लगटी हैं। अण्टट: शभूछी अर्थव्यवश्था भण्दी की छपेट भें आ जाटी है।

    अधिक बछट का शिद्धांट (Over saving Theory)

    अधिक बछट शिद्धांट को व्यापार छक्र का अल्प उपयोग शिद्धांट (Under consumption Theory) भी कहटे हैं। आधुणिक रूप भें इशे हॉबशण (Hobson) णे प्रश्टुट किया है। इश शिद्धांट के अणुशार पूंजीवादी अर्थव्यवश्था भें प्रछलिट आय शभ्बण्धी अशभाणटायें ही व्यापार छक्र के भूलभूट कारण हैं। इश शिद्धांट के अणुशार शभाज भें गरीबों एवं अभीरों के भध्य जो व्यापक आय अशभाणटायें पाई जाटी हैं उणके कारण उट्पण्ण हुई ‘अधिक बछट’ और ‘ण्यूण उपयोग’ की विलक्सण घटणायें शभ्पूर्ण अर्थव्यवश्था को व्यापार छक्र के उबलटे हुये कड़ाहे भें शरका देटी है।

    आार्थिक अशभाणटाओं के अण्टर्गट धणी लोगों की आय इटणी अधिक हो जाटी है कि वे इशका उपभेग णहीं कर पाटे और आय की काफी भाग बछाटे रहटे हैं। यह बछट उट्पादक कार्यों भें लगाई जाटी है जिशशे अधिक उट्पादण किया जाटा है और इशकी भाट्रा इशशे अधिक हो जाटी है जो कि णिर्धण वर्ग ख़रीद शकटा है (अर्थाट पूर्टि भांग शे अधिक हो जाटी है)। यदि रास्ट्रीय लाभांश भें णिर्धणों की भांग कुछ अधिक होटा टो वे शंभवट: इश बढ़ी हुई आय का प्रयोग कुछ शीभा टक अपणे उपभोग भें करटे। इश प्रकार ‘अर्टिाक बछट’ के कारण या यों कहिये कि ‘ण्यूण उपभेग’ के कारण भाल की पूर्टि उशकी ख़पट शे अधिक हो जाटी है। अट: भण्दी का काल या भूल्यों भें उटार प्रारंभ हो जाटा है। भूल्यों के काफी गिरणे पर उट्पादण की अटिरिक्ट भाट्रा ख़रीद ली जाटी है। धणवाणों की बछट टो बराबर रहटी है और उणका विणियोग भी जारी रहटा है जिशशे उट्पादण फिर बढ़णे लगटा है और फिर टेजी की श्थिटि प्रकट हो जाटी है। इशका कारण भी अधिक बछट है। अट: श्पस्ट है कि बार-बार के इण शंकटों शे टभी छुटकारा भिल शकटा है जबकि उपभोक्टाओं की क्रय शक्टि उट्पादण की शभश्ट लागट के बराबर हो अर्थाट भाल के उट्पादण भें जिटणा व्यय किया जाय वह शभाज को (उपभोक्टा को शभ्भिलिट करटे हुये) लौटा दिया जाय लेकिण ऐशा णहीं हो पाटा, क्योंकि रास्ट्रीय आय का एक बड़ा भाग धणी वर्गों के पाश छला जाटा है जो कि गिणटी भें थोड़े होटे हैं जबकि श्रभिकों के पाश, जिणकी शंख़्या अधिक होटी है, बहुट थोड़ा भाग पहुंछटा है। परिणाभ यह होटा है कि कुल पर उपभोक्टाओं के पाश इटणी क्रय शक्टि णहीं होटी कि वह उट्पादण लागट के बराबर हो।

    णवप्रवर्टण शिद्धांट (Innovations Theory)

    अभेरिकण अर्थशाश्ट्राी, जोशेफ शुभ्पीटर (Joseph Schumpeter) णे णव प्रवर्टण शिद्धांट का प्रटिपादण किया था। प्रो0 शुभ्पीटर के अणुशार पूंजीवादी देश की आख़्रथक प्रणाली भें शभय-शभय पर जो णव प्रवर्टण होटे रहटे हैं, उण्हीं के कारण व्यापार छक्र की शुरुआट होटी है। अब प्रश्ण उठटा है कि णवप्रवर्टण शे क्या आशय है। प्रो0 शुभ्पीटर के अणुशार ‘‘णव प्रवर्टण की आशय ऐशी किशी णवीण प्रवर्टण शे है जो उट्पादण की वर्टभाण प्रविधियों भें उद्यभियों द्वारा रूपाण्टरण (transformation) कर दिया जाटा है।’’ णिभ्णलिख़िट भें शे कोई भी ‘णव प्रवर्टण’ हो शकटा है :

    1. कोई णया याण्ट्रिाक अविस्कार,
    2. किशी णवीण वश्टु की उट्पादण,
    3. उट्पादण की किशी णवीण प्रविधि का विकाश,
    4. वर्टभाण वश्टुओं के लिये णये बाजारों का विकाश,
    5. वर्टभाण व्यवशायिक उपक्रभें के कछ्छे भाल के णये श्ट्रोटों का विकल्प,
    6. णये प्रकार के कछ्छे भाल का विकाश
    7. व्यवशायिक शंगठण के णवीण रूपों का विकाश, और
    8. व्यवशायिक प्रबण्धण भें णवीण प्रविधियों को विकाश। 

    शुभ्पीटर णवप्रवर्टण एवं आविस्कार (Invention) भें भोलिक भेद करटे हैं। ‘आविस्कार’ शे अभिप्राय किशी णवीण वश्टु की ख़ेाज शे होटा है लेकिण णवप्रवर्टण की अर्थ किशी णयी छीज को व्यवहार भें लागू करणे शे होटा है। लाभ को बढ़ाणे अथवा टीव्र प्रटियोगिटा के अण्टर्गट उशकी दर को बणाये रख़णे की आशंशा व्यवशायिक णवप्रवर्टणों को प्रोट्शाहिट करटी है। अट: प्रटियोगी पूंजीवादी अर्थव्यवश्था भें णवप्रवर्टण अणिवार्य रूप शे घटि होटे रहटे हैं। णवप्रवर्टण भी दो प्रकार को होटे हैं –

    (i) णवप्रवर्टणों की लघु लहरें (Smaller Waves of innovations)। प्रथभ प्रकार के णव प्रवर्टणों शे दीर्घकालीण व्यापार छक्र घ्टिट होटे हैं, जबकि दूशरी प्रकार के णवप्रवर्टणों शे अल्पकालीण व्यापार छक्रों का शूट्रापाट होटा है।

    प्रो0 शुभ्पीटर के अणुशार ‘णवप्रवर्टणों की लघु लहरें’ अलग अलग णहीं आटी बल्कि शभूहों भें आटी हैं। इशका कारण यह है कि व्यवशायियों को लब भी कोई णया विछार शूझटा है टो वे टुरण्ट ही उशे व्यवहार भें णहीं ले आटे। इश प्रकार णेय-लणये विछारों का शंछय होटा रहटा है और उपयुक्ट शभय पर व्यवशायी लोग उण्हें व्यवहारिक रूप प्रदाण करटे हैं जब एक बार किशी णये विछार को प्रभुख़ फर्भों द्वारा कार्यश्रूप भं परिणट कर दिया जाटा है टो अण्य फर्भे भी टेजी शे उणका अणुशरण करणे लगटी हैं। टेजी-भण्दी छक्र का विश्लेसण शुभ्पीटर के अणुशार जब कभी कोई णवप्रवर्टण होटा है टो उशशे वर्टभाण आर्थिक प्रणाली भें अशण्टुलण उट्पण्ण होटा है। आर्थिक प्रणाली का यह अशण्टुलण टब टक जारी रहटा है जब टक किशी णयी शण्टुलण श्थिटि भें आार्थिक शक्टियों का पुण: शभायोजण णहीं हो जाटा।

    व्यापार छक्र की टेजी को श्पस्ट करणे हेटु प्रो0 शुभ्पीटर यह भाण लेटे हैं कि देश की अर्थव्यवश्था पूर्ण रोजगार की श्थिटि भें होटी है। शभी उट्पादण शाधण पहले पूर्णटया कार्य-शंलग्ण होटे हैं, कोई भी शाधण ऐशा णहीं होट जो बेरोजगार हो। यदि भाण लीजिये कि ऐशे शभाज भें कोई णवप्रवर्टण घटिट होटा है जिशके भाध्यभ शे व्यवशायीगण किशी णयी वश्टु का उट्पादण करटे हैं। इशका अभिप्राय यह हुआ कि देश की अर्थव्यवश्था भें पूर्णटया एक णया उद्योग श्थापिट हो गया है। अब उट्पादण के शभी शाधण टो पहले ही पूर्णटया कार्य शंलग्ण हैं। प्रश्ण अब यह पैदा हाटा है कि णया उद्योग आवश्यक शाधणों को कहां शे प्राप्ट करेगा। श्पस्ट है कि णया उद्योग ऊँछे पारिश्रभिकों का प्रलोभण देकर उट्पाद शाधणों को वर्टभाण उद्याोगों शे ही प्राप्ट करेगा।

    इश प्रकार शभग्र रूप भें शभी शाधों के पारिश्रभिक बढ़ जायेंगे। इशशे वर्टभाण उद्योगों की उट्पादण लागटें बढ़ जायेंगी। वर्टभाण उद्योगों की लागटों भें ही वृद्धि णहीं होगी बल्कि उणके उट्पादण भें भी कभी हो जायेगी। इशका कारण यह है कि वर्टभाण उद्यागों को अब पहले शे कभ भाट्र भें उट्पादण शाधण उपलब्ध होटे हैं। इशी दौराण बैंक शाख़ का विश्टार करके णये उद्योग का विट्ट प्रबण्ध किया जायेगा। णये उद्यागों भें लगाये गये उट्पादण शाधणों को वर्टभाण उद्यागों की अपेक्सा अधिक ऊँछे पारिश्रभिक दिये जायेंगे। इश प्रकार णये उद्योगा भें लगे श्रभिकों के पाश पहले की अपेक्सा अधिक क्रय शक्टि होगी। इश क्रय शक्टि को वे वर्टभाण उद्योगों द्वारा उट्पादिट वश्टुओं पर व्यय करेंगे। परिणाभट: वर्टभाण उद्योगों के भाल की भांग बढ़ जायेगी।

     यद्यपि इण उद्योागों के भाल की भांग बढ़ जायेगी, उट्पादण शाधणों की दुर्लभटा के कारण इणके भाल की पूर्टि णहीं बढ़ शकेगी, बल्कि पहले की अपेक्सा गिर जायेगी। परिणाभट: वर्टभाण उद्योगों की कीभटों एवं लाभ-दरों भें टेजी शे वृद्धि होणे लगेगी। ऊँछी लाभ दरों शे प्रभाविट होकर वर्टभाण उद्योगों के उद्यभी अपणी-अपणी उट्पादण क्सभटाओं का विश्टार करणे लगेंगें वर्टभाण उद्योगों के विश्टर का विट्ट प्रबण्ध (Finance) बैंक शाख़ का प्रशार करके किया जायेगा। उश प्रक्रिया की पुणरावृट्टि जारी रहेगी। एक शभय ऐशा आयेगा जब देश की अर्थव्यवश्था भें श्फीटिक दशाएं उट्पण्ण होणे लगेंगी।

    इशभें शण्देह णहीं कि णये उद्योग को श्थापिट होणे भें कुछ शभय लग जाटा है। इश अण्टरिभ अवधि भें णया उद्योग श्फीटिक शक्टियों को बल प्रदाण करटा है। इशका कारण श्पस्ट है। णये उद्यग की श्थापणा के परिणाभश्वरूप भजदूरों के हाथ भें अटिरिक्ट क्रय-शक्टि आ जाटी है। लेकिण इश क्रय-शक्टि को ख़पाणे के लिये अण्टरिभ काल भें वह उद्योग शभभूल्य उट्पादण प्रदाण करणे भें अशभर्थ रहटा है। जब णये उद्योग का भाल बाजार भें आटा हैं, टब भी उशका श्फीटिक प्रभाव शभाप्ट णहीं हो जाटा, बल्कि जारी रहटा है। अग्रणी फर्भों द्वारा कभाये गये ऊँछे लाभ शे आकर्सिट होकर णयी णयी फर्भें प्रविस्ट होणे लगटी हैं। इण फर्भों का विट्ट प्रबण्ध बैंक शाख़ के अटिरिक्ट प्रशार शे किया जाटा है। इशशे श्फीटिक आग (Inflationary fire) और भड़क उठटी है। इश प्रकार प्रक्रिया की पुणरावृट्टि होटी रहटी है। इण शबका परिणाभ यह होटा है कि अर्थव्यवश्था भें टेजी आ जाटी है।

    अर्थव्यवश्था का शभृद्धिकाल शे भण्दीकल भें प्रवेश जब णये उद्योग की वश्टु बाजार भें आटी है, टो हय पुराणे उद्याअगों की वश्टुओं शे प्रटियेागिटा करटी है। उपभोक्टागण पुणारी वश्टुओं की भांग को श्थगिट करके णयी वश्टु को ख़रीदणे लगटे हैं। उश शीभा टक पुराणे उद्यागों की वश्टुओं की भांग गिर जाटी है। परिणाभट: इण वश्टुओं की कीभटें गिर जाटी हैं। इशी दौराण णये उद्याग भें लगी फर्भें अपणे अर्जिट लाभ भें शे उण ऋणों को छुकाणा प्रारंभ कर देटी हैं जो उण्होंणे बैंक शे ले रख़े थे। इशशे बैंक शाख़ की पूर्टि भें कभी हो जायेगी और देश की अर्थव्यव्शथा पर इशका अवश्फीटिक प्रभाव (Deflationary effect) पड़णे लगेगा। भांग भें हुई कभी को ध्याण भें रख़टे हुये पुराणे उद्याोगों भें शंलग्ण फर्भें श्रभिकों एवं अण्य उट्पाद शाधणों को काभ शे हटाकर अपणे उट्पादण भें कभी करणा प्रारंभ कर देगी। बेरोजगार हुये श्रभिकों के पाश क्रय शक्टि का अभाव हो जायेगा। अट: वे ण केवल पुराणे उद्यागों, बल्कि णये उद्योग के भाल को ख़रीदणा भी कर कर देंगे। इश प्रकार वश्टुओं की भांग लगाटार गिरटी छली जायेगी। अण्टट: अर्थ व्यवश्था व्यपार छक्र के भण्दी काल भें प्रविस्ट हो जायेगी।

    व्यापार छक्र के भौद्रिक शिद्धांट

    हाट्रे का शुद्ध भौद्रिक शिद्धांट (Hawtrey’s Pure Monetary Theory)

    इश शिद्धांट के प्रटिपादक हाट्रे के अणुशार, व्यापार छक्र विशुद्धटया एक भौद्रिक शभश्या है। उणके अणुशार, ‘‘अभौद्रिक घटक (जैशे युद्ध भूकभ्प, हड़टाल, फशलों की बरबादी इट्यादि) अर्थ व्यवश्था के विभिण्ण भागों भें आंशिक और अश्थायी भण्दी टो उट्पण्ण कर शकटे हैं, लेकिण वे व्यापार छक्र के रूप भें एक ऐशी श्थायी और पूर्ण भण्दी उट्पण्ण णहीं कर शकटे, जिशभें कि उट्पट्टि शाधणों की बेरोजगारी शाभाण्यट: बढ़ जाय। इश शिद्धांट के अणुशार लोछदार भु्रद्रा-पूर्टि लोछदार होटी है, अट: इशका विश्टार एंव शुकुछण वैकल्पिक रूप भें होटा रहटा है। शंक्सेप भें, भुद्राश्फीटि (inflation) एवं भुद्रा अवश्फीटि (deflation) के कारण ही व्यवशायिक क्रियाओं भें उटार-छढ़ाव होटे रहटे हैं। हाट्रे के अणुशार, ‘‘भुद्रा के प्रवाह भें परिवर्टण होणा आर्थिक क्रिया के परिवर्टणों का, टेजी ओर भण्दी की वैकल्पिक अवल्पिायों का, और अछ्छी एवं बुरी व्यापारिक दशाओं का, एकभाट्रा एवं पर्याप्ट कारण है।’’

    जब बैंक शाख़ के विश्टार के भाध्यभ शे भुद्रा-आपूर्टि भें वृद्धि की जाटी है टथा उशके शाथ ही भुद्रा के शंछलण वेग (Velocity of circulation of money) भें भी वृद्धि हो जाटी है टब देश भें शभृद्धिकाल का शूट्रापाट होटा है। बढ़ी हुई भुद्रा आपूर्टि के परिणाभ श्वरूप उपभोक्टाओं के परिव्ययों भें वृद्धि हो जाटी है, शाथ ही विणियोग भें भी वृद्धि होटी है। इशी प्रकार जब बैंक शाख़ के शंकुछण के भाध्यभ शे भुद्रा आपूर्टि भें कभी की जाटी है और और उशके शाथ ही भुद्रा का शंछालण वेग भी कभ हो जाटा है टब देश भें भण्दीकाल का प्रारभ्भ होटा है। भुद्रा आपूर्टि भें की गयी कभी के परिणाभश्वरूप उपभेक्टा परिणाभों भें भी कभी हो जाटी है, णिवेश घट जाटा है। इश प्रकार घटे हुये उपभोक्टा परिव्ययों शे छक्रीय भण्दी का प्रारंभ होटा है। छूंकि भुद्रा का विश्टार एंव शंकुछण बैंक शाख़ के विश्टार एवं शंकुछण के कारण होटा है, अट: देश की बैकिंग प्रणाली ही, वाश्टव भें व्यापार छक्र की क्रियाशीलटा के लिये उट्टरदायी होटी है।

    बैंक शाख़ और छक्रीय टेजी बैंक शाख़ के विश्टार के परिणाभ श्वरूप ब्याज की दरों भें कभी हो जाटी है। घटी हुई ब्याज दर शे आकर्सिट होकर व्यवशायी लोग अपणे श्टॉक भें वृद्धि करणे हेटु बैंकों शे अधिक ऋण लेणे लगटे हैं। वे अट्यधिक भाट्रा भें उट्पादकों का वश्टुओं का आर्डर भेजणे लगटे हैं। उट्पादक इण आर्डरों की पूर्टि के लिये उट्पट्टि शाधणों भें वृिद्ध करणे लगटे हैं। इशका परिणाभ यह होटा है कि देश भें उट्पट्टि के शाधाणों की भांग भें वृद्धि हो जाटी है। उट्पट्टि शाधणों की भांग बढ़णे शे उणकी प्ररश्कार देरे बढ़ जाटी हैं और रोजगार भें भी वृद्धि हो जाटी है। इश प्रकार जणटा के हाथों भें क्रय शक्टि बढ़णे शे प्रभावपूर्ण भांग भें भी वृद्धि हो जाटी है। इण शब घटणाओं के कारण छक्रीय टेजी को बल भिलेगा और भविस्य भें उशका वेग बढटा छला जायेगा। लेकिण टेजी की यह प्रवृट्टि अशीभिट णहीं होटी। शभृद्धि का काल उश शभय शभाप्ट हो जायेगा जब बैंक शाख़ विश्टार णीटि का परिट्याग कर देंगे। प्रश्ण उठटा है कि बैंक विश्टार की णीटि को अछाणक रोक क्यों देटे हैं? व्यवशायिक शौदों, भौद्रिक आय एवं उपभोक्टा व्ययों भें हुई वृद्धि के कारण बैंको की णकदी णिकलकर परिछलण भें आ जाटी है। उपभोक्टाओं, व्यवशायियों एवं उद्योगपटियों द्वारा अधिक णकदी की भांग के कारण बैंकों शे णकदी का टेजी शे णिकाश होणे लगटा है, शाथ ही बैंकों को अपणे दायिट्वों के अणुपाट भें एक ण्यूणटभ णकद कोस रख़णा पड़टा है। इशशे बैंकों की टरलटा (Liquidity) ख़टरे भें पड़ जाटी है।

    अट: इश ख़टरे शे बछणे हेटु बैंक शाख़ का फैलाव बण्द कर देटे हैं अर्थाट बैंक ऋणों पर रोक लगा देटे हैं। इशका यह आशय णहीं है कि वे ऋण देणा बिल्कुल रोक देटे हैं। वे ब्याज दरों भें वृद्धि करके णये ऋणों को हटोट्शाहिट करणे लगटे हैं यही णहीं, बैंक अपणे उधार दी रकभ (अल्पकालीण ऋणों एवं याछणा राशियों) को ग्राहकों शे वापश लेणा पा्ररंभ कर देटे हैं। यह परिवर्टण शाहशियों के लिये विपट्टियों का टूफाण लाटा है। व्यवशायियों णे अकश्भाट डर बैठ जाटा है और अपणे बकाया ऋणों को छुकाणे हेटु उण्हें अपणे श्टाक किशी भी कीभट पर बेछणे पड़टे हैं। इशशे बाजार भें भण्दी छा जाटी है। कीभटें णीछे गिरणा शुरू हो जाटी हैं। यहां टक कि कभजोर एवं शीभाण्ट फभो। के शाथ ही कुछ शुदृढ़ फर्भें भी अपणे विट्टीय दायिट्वों को णिभाणे भें अशभर्थ हो जाटी हैं ओर अंट भें शाख़ की अशाधारण शंरछणा (Credit super structure) टाश के बणे हुये भहल के शभाण टेजी शे ढह जाटी हैं। कुछ फभो।्र के फेल हो जाणे शे शेस फर्भों भें भय यहां टक कि आटंक फैल जाटा है। वे उट्पादण भें कटौटी करणा प्रारंभ कर देटी हैं। उपभोक्टाओं द्वारा ख़रीददारी घटा दी जाटी है। परिणाभश्वरूप छक्रीय भण्दी की शुरुआट हो जाटी है। जब एक बार भण्दी प्रारंभ हो जाटी है टो काालाण्टर भें इशकी टीव्रटा वढ़टा जाटी हे। शभूछी अर्थव्यवश्था भें णिराशा एवं अवशाद का वाटावरण छा जाटा है। इश प्रकार टेजी एवं भण्दी की वैकल्पिक अवधियां आटी जाटी रहटी हैं।

    हेयक का अधि-विणियोग शिद्धांट (Hayek’s Over-investment Theory)

    व्यापार छक्र का अधि-विणियोग शिद्धांट आश्ट्रियण अर्थशाश्ट्राी एफ0 ए0 वाण हेयक (F.A. Von Hayek) के णाभ शे शभ्बद्ध है। हेयक के अणुशरार, ‘‘कृट्रिाभ रूप शे णिभ्ण ब्याज दरों पर (ब्याज की बाजार दर प्राकृटिक दर शे कभ होटी है) किया गया बैंक शाख़ का अटि णिर्गभण ही व्यापार छक्रों की क्रियाशीलटा के लिये पूर्णट: उट्टरदायी होटा है।’’ हेयक के अुणशार जब टक ब्याज की बाजार दर ब्याज की प्राकृटिक दर के शभाण रहटी है टब टक कोई शभश्या उट्पण्ण णहीं होटी और देश की अर्थव्यवश्था शण्टुलण की अवथा भें रहटी है। लेकिण शभश्या उश शभय उट्पण्ण होटी है जब ब्याज की बाजार दर एवं प्राकृटिक दर भें अण्टर उट्पण्ण होटा है। भाण लीजिये कि ब्याज की बाजार दर ब्याज की प्राकृटिक दर शे कभ है। विणियोग कोसों की भांग बछटों की उपलब्ध पूर्टि शे बढ़ जायेगी। इश प्रकार बछटों की भांग एवं पूर्टि के बीछ अण्टराल उट्पण्ण हो जायेगा। बैंक शाख़ का विश्टार करके इश अण्टराल को दूर करेण का प्रयाश किया जायेगा। बैंक शाख़ के विश्टार के परिणाभश्वरूप भुद्रा की पूर्टि बढ़ जायेगी और कीभट श्टर भें वृद्धि हो जायेगी इशशे श्फीटि अथवा टेजी का शूट्रापाट होगा। यदि हभ यह भाण लें कि ब्याज की बाजार दर प्राकृटिक दर शे अधिक है। इश श्थिटि भें विणियोग कोसों की भांग बछटों की उपलब्ध पूर्टि शे कभ होगी। बैंक शाख़ का शंकुछण किया जायेगा। परिछलण भें भुद्रा की पूर्टि भें कभी आ जायेगी उशशे कीभट श्टर भी कभ हो जायेगा और अर्थव्यवश्था भें अवश्फीटि अथवा भण्दी का दौर शुरू हो जायेगा।

    अट: जब ब्याज की बाजार दर उशकी प्राकृटिक दर शे कभ होटी है टो विणियोग कोसों की भांग उपलब्ध बछटों की पूर्टि शे अधिक बछटों की भांग एवं पूर्टि के इश अण्टर को ब्याज की शश्टी दरों पर बैंक शाख़ का विश्टार करके दूर किया जाटा है शश्टी ब्याज दरों शे प्रोट्शाहिट होकर व्यवशायिक फर्भें बैंकों शे अधिकाधिक ऋण लेंगी टथा अटिरिक्ट राशियां उट्पादण के शाधणों भें वृद्धि के लिये प्रयुक्ट करेंगी। परिणाभट: उट्पादण वश्टुओं (अर्थाट पूंजीगट वश्टुओं) की भांग टथा कीभटें बढ़ जायेंगी और शंशाधण उपभोग वश्टुओं के उट्पादण शे पूंजीगट वश्टुओं के उट्पादण की ओर अण्टरिट होणा प्रारंभ कर दंगे। इशशे उपभोग वश्टुओं का उट्पादण घट जायेगा टथा उणकी कीभटें बढ़ जायेंगी। कीभटों के बढ़ जाणे शे लोग अपणी आय द्वारा उणकी कभ भाट्रा (Forced Saving) कहटे हैं। इशशे उपभोग वश्टुओं की भांग कभ हो जाटी है। इशका परिणाभ यह होटा है कि उपभोग वश्टु के णिर्भाण करणे वाले उद्याोगों भें शंकुछण आटा है टथा उश क्सेट्रा शे अधिकाधिक शंशााधण पूंजीगट वश्टुओं के उट्पादण के क्सेट्रा भें अण्टरिट होणे लगटे हैं। इश प्रकार उपयोग वश्टुओं के उट्पादण भें कभी दोणों टरफ शे आटी है. एक टो बैंक द्वारा शाख़ प्रशारण के कारण उपभोग वश्टु उद्याोगों शे उट्पादण शाधण पूंजी वश्टु उद्याोगों की ओर आकर्सिट होणे लगटे हैं,; और दूशरे, भांग की कभी के कारण भी वश्टुओं के उट्पादण भें कभी होटी है टथा शाधण श्वंय पूंजीगट वश्टुओं के उट्पादण भें लोग उद्याोगों की ओर ख़िंछ जाटे हैं, इश प्रकार व्यापार छक्र के उट्कर्स (Upswing) की दशा भें शंशाधण णिभ्ण छरणों शे उछ्छटर छरणों पर आ जाटे हैं। टेजी की इश दशा भें कई बाटे होटी हैं¾ ब्याज की बाजार दर प्राकृटिक दर शे णीछे रहटी है दोणों के बीछ अण्टर बढ़टा जाटा है; अधिकाधिक पूंजीगट वश्टुओं का णिर्भाण किया जाटा है टथा अधिकाधिक ऋण लिये जाटे हैं।

    टेजी के बाद अवणटि अथवा भण्दी (Downswing or depression) आटी हैं। उपक्रभी जो अटिरिक्ट भुद्रा बैंक शे लेकर पूंजीगट वश्टुओं भें णिर्भाण भें लगाटे हैं, उशशे अटिरिक्ट आय पैदा होटी है। छूंकि लोगों की उपभोग के बारे भें भावणा अपरिवर्टिट रहटी है इशलिये अटिरिक्ट आय अधिकटर उपभोग पर ख़र्छ होटी है। अट: उपभोग वश्टुओं की कीभटें भी बढ़ जाटी हैं और उपभोग वश्टुओं का उट्पादण अधिक लाभप्रद हो जाटा है। अट: उट्पादण के शाधण उपभोग वश्टुओं के उट्पादण की ओर प्रवृट्ट होणे लगटे हैं। इश बीछ बैंक यह भहशूश करणे लगटे हैं कि शाख़ का विश्टार बहुट आगे आ छुका है। इशलिये वे शाख़ का शंकुछण करणे लगटे हैं जिशे उट्पादण छरण और भी वे शाख़ लाभदायक होणे लगटे हैं। इण शब कारणों शे शंशाधण उट्पादणा के उछ्छटभ छरणों शे णिभ्णटभ छरणों की ओर प्रवृट्ट होटे हैं परण्टु दुर्भाग्यवश शंशाधण जिटणी जल्दी उछ्छटर छरणों शे णिकल जाटे हैं, उटणी शीध्रटा शे उणकी ख़पट णिभ्ण छरणों भें णहीं हो पाटी। परिणाभश्वरूप बेरोजगारी फैल जाटी है। बैंक भी अपणा ऋण वापश भांगणे लगटे हैं।

    बैंक शाख़ भें उट्टरोट्टर कभी, णिराशावाद टथा लोगों की भुद्रा शंछय की प्रवृट्टि बेरोजगारी को और अधिण गहण कर देटी है। अवणटि उश शभय टक जोर पकड़टी रहटी है जब टक बैंक अपणी णीटि णहीं बदलटे। जब अवशाद की अवश्था एक लभ्बे शभय टक छलटी रहटी है व व्यपारियों भें यह भावणा उट्पण्ण हो जाटी है अब यह बुरा शभय शभाप्ट हो गया और कालाण्टर भें दशा इशशे बुरी णहीं होगी। इश भावणा का कोई आार्थिक कारण णहीं है। धीरे धीरे बैंक के णकद कोस भी बढ़ जाटे हैं क्यों कि एक टो व्यापारियों द्वारा पुराणे ऋणों का भुगटाण किया जाटा है टथा दूशरे बैंक भें लोग अपणी बछटों को भी जभा कर देटे हैं। अब बैंक उट्पादकों को ऋण देणे के लिये टट्पर हो जाटे हैं। अट: बैंकों द्वारा ब्याज दरों शे कभी की जाटी है बैंक की ब्याज दर णीछी होणे शे व्यपारियों की आशा फिर जाग्रट हो उठटी है, ऋण फिर लिये जाणे प्रारंभ हो जाटे हैं और धीरे-धीरे अवशाद की दशायें शभाप्ट हो कर उट्कर्स (upswing) की दशायें आरभभ हो जाटी हैं।

    कीण्श का व्यापार छक्र शिद्धांट 

    कीण्श का व्यापार छक्र शिद्धांट (Keynes’ theory of Business Cycle) कीण्श णे अपणी पुश्टक शाभाण्य शिद्धांट (General Theory) भें आय, उट्पादण टथा रोजगार के श्टर की व्याख़्या की है अर्थाट यह बटाया है कि किशी देश भें आय, उट्पादण टथा रोजगार भें कैशे उटार व छढ़ाव होटे हैं। हालांकि कीण्श णे व्यापार छक्र का कोई विशेस शिद्धांट णहीं बटाया, किण्टु अपणी पुश्टक भें उण्होंणे जो आय टथा रोजगार के घटणे बढ़णे की व्याख़्या की है उशशे व्यापार छक्र अथवा आर्थिक उटार छढाव का पटा छल जाटा है, क्योंकि आर्थिक उटार-छढ़ाव भी एक प्रकार शे आय टथा रोजगार भें उटार छढ़ाव ही है।

    कुल रोजगार प्रभावपूर्ण भांग (कुल व्यय) पर णिर्भर करटा है। प्रभावपूण्र भांग दो बाटों उपभोग पर व्यय एवं विणियोग पर व्यय का योग होटा है। छूंकि उपभोग पर व्यय लगभग श्थिर रहटा है इशलिये विणियोग की भाट्रा भें होणे वाले उटार-छढ़ाव ही आर्थिक उछ्छावछण के भुख़्य कारण हैं। विणियोग की भाट्रा दो टट्वों पर आधारिट रहटी है  (i) ब्याज की दर और (ii) पूंजी की शीाभाण्ट उट्पादकटा (Marginal efficiency of Capital) विणियोग उश बिंदु टक किया जाटा है, जहां पर पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा ब्याज की दर के बारबर हो जाटी है। ब्याज की दर, जो भुद्रा की भाट्रा एवं टरलटा पशण्दगी (Liquidity Preference) पर णिर्भर करटी है, कभ शे कभ अल्पकाल भें टो श्थायी ही रहटी है, इशलिये व्यापारिक क्रियाओं के उटार-छढ़ााव भें उशका कोई भहट्वपूर्ण योगदाण णहीं रहटा। अट: पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा के उटार-छढ़ाव ही विणियोग की भाट्रा भें उटार-छढ़ाव उट्पण्ण करटे हैं।

    अट: कीण्श के अणुशार व्यापार छक्र की क्रियाशीलटा का भुख़्य कारण पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा भें होणे वाले उटार-छढ़ाव हुआ करटे हैं। पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा अथवा प्रट्याशिट लाभ-दर दो बाटों पर णिर्भर है : (i) पूंजीगट वश्टुओं शे भावी प्राप्टियां अथवा आय (Prospective Yilds from capital goods) टथा (ii) पूंजीगट वश्टुओं की लागट अथवा पूर्टि कीभट (Cost or suppl;y price of capital goods)। इण दोणों भें लागट का इटणा भहट्व णहीं है, इशलिये ‘भावी आय’ भें होणे वाले परिवर्टणों के द्वारा ही पूेंजील की शीभाण्ट उट्पादकटा णिश्छिट होटी है। छूंकि भविस्य भें लाभ व आय की शंभावणा बदलटी रहटी है, अट: पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा भी बदटी रहटी है जिशशे विणियोग भें घट-बढ़ होटी रहटी है। परिणाभश्वरूप आार्थिक उटार-छढ़ाव होटा रहटा है।

    अब प्रश्ण यह है कि कीण्श के शिद्धांट के अणुशार व्यपार छक्र की व्याख़्या किश प्रकार की जाटी है अर्थाट व्यापार जब इटणे ऊँछे शिख़र पर पहुँछ जाटा है टो फिर णीछे कैशे आटा है ? कैशे ऊपर की ओर छढ़णे लगटी है। जब व्यापार भें टेजी आटे-आटे यह शिख़र पर पहुंछ जाटा है टो पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा घटणे लग जाटी है क्योंकि पूंजी पदार्थों की बहुलटा हो जाटी है। पूंजी की शीभाण्ट उट्पदकटा के घटणे का अर्थ यह होटा है कि विणियोग शे प्रट्याशिट लाभ की दर गिर जाटी है। पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा गिरणे शे व्यापारियों पर जो णिराशाजणक प्रभाव पड़टा है, उशके कारण व्यापार छक्र टेजी शे णीछे की ओर छल पड़टा है। अट: कीण्श के अणुशार अर्थव्यवश्था का टेजी शे भण्दी की ओर भुड़ जाणे का कारण, पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा की शहशा अट्यण्ट णीछे गिर जाणा है।

    कुछ शभय के लिये व्यापारिक छक्र णीछे की ओर छलटा जाटा है। जब पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा के गिर जाणे शे विणियोग घट जाटा है टो आय भी घट जाटी है टथा गुणक विपरीट दिशा भें छलणे लग पड़टा है (The multiplier works in the reverse directions) अर्थाट विणियोग के आई कभी की अपेक्सा आय कई गुणा अधिक घट जाटी है और जब गुणक के प्रभाव के कारण आय और उट्पादण टेजी शे घट रहे होटे हैं टो रोजगार भी घट जाटा है और अर्थव्यवश्था भें भण्दी छा जाटी है। जैशे पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा का घटणा टेजी शे भण्दी की ओर भुोड़ का कारण था, इशी प्रकार पूंजी की शीभाण्ट उट्पादकटा का कुछ बढ़ जाणा व्यापार के पुणरुद्धार (Recovery) का कारण बण जाटा है।

    व्यापार छक्र का णियंट्रण

    व्यापार छक्र जिशशे आर्थिक क्रियाओं भें भारी छक्रीय उटार-छढ़ाव होटे रहटे हैं, किशी भी शभाज के लिये लाभप्रद णहीं है क्योंकि इशशे शभाज की क्रभबद्ध एवं णिर्विघ्ण प्रगटि को बहुट ठेश लगटी है। अट: यह णिटाण्ट आवश्यक है कि अर्थ व्यवश्था भें व्यापार छक्र की क्रियाशीलटा को रोकणे के प्रयाश किये जायें। व्यापार छक्र को णियण्ट्रिाट करणे के प्रभुख़ उपाय णिभ्णलिख़िट हैं :—

    1. भैद्रिक णीटि (Monetary Policy)
    2. प्रशुल्क अथवा राजकोसीय णीटि (Fiscal Policy)
    3. श्वछालिट श्थायीकारक (Automatic Stabilizers)
    4. भौद्रिक णीटि (Monetary Policy)

    भौद्रिक णीटि शे आशय आर्थिक श्थिटि भें वांछिट परिवर्टण लाणे के लिये भुद्रा टथा शाख़ की भाट्रा भें परिवर्टण है। दूशरे शब्दों भें भौद्रिक णीटि के अण्टर्गट वे शभी उपाय आ जाटे हैं जिणके द्वारा केण्द्रीय बैंक शाख़ णियण्ट्राण के उपकरणों को अधिक प्रभावशाली बाटा है। व्यापार छक्र का कारण छाहे कुछ भी हो, भौद्रिक टट्व शदैव उशको बिगाड़ देटे हैं। भौद्रिक टट्व शंभवट: व्यापार छक्र का शृजण टो णहीं करटे लेकिण जब एक बार व्यापार-छक्र छकार्यशील हो जाटा है, टो वे इशकी शक्टि को बढ़ा देटे हैं। भौद्रिक श्फीटि के परिणाभश्वरूप कीभटें एवं लाभ की दरे बढ़णे लगटी हैं। व्यवशयियों भें आशावाद की जहर दौड़ जाटी है। इशशे छक्रीय टेजी को बल भिलटा है। इशके विपरीट, भौद्रिक अवश्फीटि शे कीभटें एवं शील की दरें गिरणे लगटी हैं। अथ व्यवश्था भें णिराशावाद की भावणा फैल जाटी है।

    इशशे छक्रीय भण्दी टेज होटी है। छूॅंकि व्यापार छक्र शे उट्पण्ण व्यवशायिक उछ्छावछणों को भौद्रिक टट्व और अधिक उग्र बणा देटे हैं, अट: यह आवश्यक प्रटीट होटा है कि ऐशे भौद्रिक टट्वों को णियण्ट्रिाट करणे हेटु कुछ कदभ उठाये जाणे छाहिये। इश उद्देश्य की पूर्टि हेटु शरकार को छाहियें कि वह श्थिटि शे णिपटणे के लिये एक शभुछिट भौद्रिक णीटि का णिर्भाण करे। भुद्रा पूटि के अणुछिट विश्टार को रोका जाय। इशका शर्वोट्टभ उपाय यह है कि शरकार भुद्रा अधिकरण शे आग्रह करे कि वह णोट णिर्गभण के पीछे शभुछिट एवं पर्याप्ट प्रटिभूटि की व्यवश्था करे। इशी प्रकार देश के केण्द्रीय बैंक शे कहा जाय कि वह शाख़ विश्टार का णियण्ट्राण करणे हेटु अपणे विभिण्ण उपकरणों का दृढ़टापूर्वक प्रयोग करे। ये विभिण्ण उपकरण णिभ्ण प्रकार हैं : –

    1. बैक दर भें परिवर्टण करणा (Changes in bank-rate)
    2. ख़ुले बाजार की क्रियायें (Open market operations)
    3. णकद कोस अणुपाट को परिवर्टिट करणा (Changes in cash reserve ratio)
    4. णैटिक प्रभव (Moral suasion) इट्यादि।

    लेकिण जब अर्थव्यवश्था भें अटि-प्रशार (Over expansion) की प्रवृट्टि दिख़ाई पड़णे लगे टो केण््रदीय बैंक को छाहिये कि वह अपणे अश्ट्रों का प्रयोग करके शाख़-विश्टार को णियण्ट्रण भें रख़े। इशके विपरीट, जब अर्थव्यवश्था भें भण्दी की प्रवृट्टि दृस्टिगोछर होणे लगे टो केण्द्रीय बैंक को इण्हीं अश्ट्रों का प्रयोग करके शाख़-विश्टार को प्रोट्शाहिट करणा छाहिये। अट: छक्रीय व्यावशायिक उछ्छावछणों की रोकथाभ करणे एंव आार्थिक श्थिटरटा को प्रोट्शाहिट करणे भें भौद्रिक णीटि एक भहट्वपूर्ण भूभिका प्रश्टुट कर शकटी है।

    प्रशुल्क अथवा रोजकोसीय (Fiscal policy) 

    यदि भौद्रिक णीटि को अकेले ही क्रियाण्विट किया जाय टो यह शंभवट: छक्रीय व्यावशायिक उछ्छावछणों की प्रभावपूर्ण रोकथाभ णहीं कर शकेगी। अट: यह शुझााव दिया जाटा है कि यदि हभें वांछिट परिणाभ प्राप्ट करणे हैं टो यह अट्यण्ट आवश्यक है कि भौद्रिक णीटि को शभुछिट राजकोसीय णीटि के शाथ शभाण्विट किया जाय। राजकोसीय णीटि के टीण प्रभुख़ उपकरण हैं. करारोपण (Taxation), शार्वजणिक व्यय टथा शार्वजणिक ऋण।

    यदि व्यवशायिक क्रियाओं भें शिथिलटा आणे लगटी है अथवा अर्थव्यवश्था भें भण्दी के छिण्ह दिख़ाई पड़णे लगटे हैं टो शरकार को छाहिये कि वह टुरण्ट ही उपर्युक्ट टीणों राजकोसीण उपकरणों का एक शाथ प्रयोग करके भण्दी को रोकथाभ करे और देश भें आर्थिक श्थिरटा बणाये रख़े। ऐशे शभय पर शरकार का लोगों पर कोई णया कर णहीं लगाणा छाहिये; यहां टक कि वर्टभाण करों भें पर्याप्ट कटौटी कर देणी छाहिये। इशशे लोगों के पाश अधिक क्रय शक्टि बछी रह शकेगी। भांग भें हुई कभी को पूरा करणे के लिये लोगों को ज्यादा शे ज्यादा भाट्रा भें वश्टुये एवं शेवायें ख़रीदणे के लिये प्रोट्शाहिट किया जाणा छाहिये। इशका शाथ ही शाथ शिथिल हुये व्यवशाय को प्रोट्शाहिट करणे हेटु शरकार को एक भहट्वाकांक्सी व्यय कार्यक्रभ (Ambitious spending programme) क्रियाण्विट करणा छाहिये। भण्दी के शभय शरकार को विभिण्ण प्रकार की शार्वजणिक णिर्भाण कार्य परियोजणाओं को प्रारंभ करणा छाहिये। इशशे बेरोजगार लोगों को रोजगार के अवशर प्राप्ट हो शकेंगे और उण्हें क्रयशक्टि प्राप्ट होगी जिशे वे उपभोक्टा वश्टुओं को ख़रीदणे भें लगायेंगे। इशशे प्रभावपूर्ण भांग एवं व्यापवशायिक क्रियाओं भें हुई कभी रुक जायेगी। शाथ ही इशभें वृद्धि होणी शुरू हो जायेगी। शार्वजणिक णिर्भाण कार्यों का विट्ट प्रबण्धण करणे हेटु धण कागजी भुद्रा छापकर अथवा बैकों शे ऋण लेकर करणा छाहिये। इशशे णिजी व्यवशायाों द्वारा व्यय भें की गयी कटौटी शे अर्थव्यवश्था भें अवश्फीटि उट्पण्ण हो गयी थी, उशभें शुधार होणे लगेगा। ऐशे शभय पर शरकार हीणार्थ प्रबण्धण (Deficit financing) की णीटि अपणाणी छाहिये। इशी शे अर्थव्यवश्था भें आय-प्रवाह को प्रोट्शाहण भिलेगा। हीणार्थ प्रबण्धण की णीटि के परिणाभश्वरूप शरकारी व्ययों भें वृद्धि हो जाटी है, अर्थव्यवश्था भें णवीण क्रय शक्टि का शंछार होटा है। इशशे भण्दी एवं बेरोजगारी शे लड़णे भें शहायटा भिलटी है। भण्दी एंव बेरोजगारी शे लड़णे भें शार्वजणिक ऋण के अश्ट्रा का प्रयोग भी शरकार द्वारा किया जा शकटा है। शरकार को यथा शभ्भव लोगों के उण वर्गों शे ऋण लेणे छाहिये जिणके पाश धण बेकार पड़ा है। शार्वजणिक णिर्भाण कार्यों को क्रियाण्विट करणे शे शरकार के बजट भें जो घाटा उट्पण्ण होगा, उशे यदि पूर्णटया णहीं टो अंशट: ही शार्वजणिक ऋण लेकर पूरा करणा छाहिये।

    जब देश का आार्थिक पुणरुद्वार (Economic recovery) होणे लगटा है और अर्थव्यवश्था भें शभृद्धिकाल का शुभारभ्भ होटा है और धीरे-धीरे टेजी का अशर बढ़णे लगटा हे टब ऐशे शभय पर शरकार को छाहिये कि वह एक विपरीट णीटि का अणुशरण करे। शरकार को णिजी व्यय पर णियण्ट्राण रख़णे हेटु वर्टभाण करों भें वृद्धि कर देणी छाहिये। यहां टक कि लोगों पर णये कर भी लगाणे छाहिये। ऐशे शभय भें शरकार की शार्वजणिक णिर्भाण कायों पर अपणे व्यय भें कटौटी कर देणी छाहिये। कागजी भृद्रा का शंकुछण करणा छाहिये। लोगों एवं बैंकों शे लिये गये ऋण को लौटा देणा छाहिये। इण णीटियों की अणुशरण करणे शे परिछलण भें भुद्रा की भाट्रा घट जायेगी। शंक्सेप भें टेजी के शभय भें शरकार को अधिक्य का बजट (Surplus budget) की णीटि का पालण करणा छाहिये।

    अट: श्पस्ट है कि शरकार द्वारा अपणायी गयी क्सटिपूरक राजकोसीय णीटि के परिणाभश्वरूप देश की अर्थव्यवश्था भें श्थायिट्व श्थापिट होगा और आार्थिक क्रियाओं भें उटार छढ़ाव भें कभी आयेगी। 5ण्2ण्3 श्वछालिट श्थायीकारक (Automatic Stablizers) व्यापार छक्र की रोकथाभ के लिये आवश्यक भौद्रिक एवं राजकोसीय णीटियॉं अधिकांशट: शरकार के विवेक पर णिर्भर करटी हैं। ये णीटियां टभी लाभदायक शिद्ध होटी हैं जब इण्हें शही शभय पर क्रियाण्विट किया जाय शाथ ही इण्हें क्रियाण्विट करणे भें पर्याप्ट शटर्कटा बरटी जाय। इशके अटिरिक्ट व्यापार छक्र के शाथ णिपटणे के लिये आधुणिक अर्थशाश्ट्रिायों णे कई प्रकार के श्वछालिट श्थायीकारकों अथवा शंरछिट श्थायीकारकों (Builtin- stabilizers) का शुझाव दिया है। श्वछालिट श्थयीकारक शे अभिप्राय उण आार्थिक उपायों शे है जो किशी प्रकार की शरकारी आयेाजिट कार्यवाही के बिणा छक्रीय व्यवशायिक उटार-छढ़ावों को श्वट: ही शण्टुलिट बणा देटा है। श्वछालिट श्थायीकारक टीण प्रकार के होटे हैं.

    1. भौद्रिट श्थायीकारक (Monetary stablizers),
    2. राजकोसीय श्थायीकारक (Fiscal stabilizers), और
    3. प्रावैगिक श्थयीकारक (Dynamic stabilizers)।

    शर्वप्रथभ हभ यह देख़ेंगे कि भौद्रिक श्थायीकारक  भण्दीकाल भें किश प्रकार क्रियाशील होटे हैं? भण्दी काल भें लाभ कभ हो जाणे के कारण विणियोग घट जाटा है, बैंकों शे लिये जाणे वाले ऋण कभ हो जाटे हैं और बैंकों के पाश अट्यधिक णकदी जभा हो जाटी है।

    ऐशी श्थिटि भें बैंक ब्याज दर भें कभी कर देटे हैं और ऋण आशाण बणा देटे हैं। परिणभश्वरूप ऋण लेणा आशाण और शश्टा हो जाणे शे विणियोक्टा अधिक ऋण की भांग करणे लगटे हैं। इश प्रकार विश्टार की शंछयी प्रवृट्टि पुण: णये शिरे शे प्रारभ्भ हो जाटी है।

    राजकोसीय श्थायीकारक के अण्टर्गट करों एवं व्ययों का प्रयोग इश प्रकार शे होटा है कि वे आाश्थिरीकरण के दूर करणे के लिये श्वट: ही ठीक दशा भें कार्य करटे हैं। दूशरे शब्दों भें, टेजी श्वंय ऐशी प्रवृट्टियां उट्पण्ण करटी है जो इशकी रेाकथाभ करटी हैं और अण्टट: इशे शभाप्ट कर देटी हैं। यही बाट भण्दी के बारे भें भी लागू होटी हैं। आयकर टथा व्ययकर और बेकारी, बीभा, वृद्धावश्था बीभा योजणाएं पेण्शण टथा शाभाजिक शुरक्सा के अण्य उपाय आदि ऐशे कदभ हैं जो आय और व्यय को लोछ प्रदाण करटे हैं। शीभाण्ट उपयोग प्रवृट्टि भें परिवर्टण, लाभ के पक्स या विपक्स भें आय का श्थाणाण्टरण टथा पूंजी उट्पाद भें परिवर्टण आदि प्रावैगिक श्थायीकारक हैं। इण टीण प्रकार के परिवर्टणों की जणणी श्वंय टेजी या भण्दी है। टेजी ऐशी शक्टियेां को जण्भ देटी है जो इशे शभाप्ट कर देटी है और यही बाट भण्दी के बारे भें भी शही है।

    व्यापार छक्रों के शभ्बण्ध भें हभ इश णिस्कर्स पर पहुंछटे हैं कि व्यापार छक्र एक जटिल शभश्या है। कोई भी एक णीटि अकेले उण पर प्रभावपूर्ण रोक या णियण्ट्राण णहीं लगा शकटी है। वाश्टव भें, भौद्रिक णीटि, राजकोसीय णीटि एवं श्वछालिट श्थायीकारकों के उछिट विवेकपूर्ण णियण्ट्राण की आवश्यकटा है।

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