व्लादिभीर लेणिण के शिद्धांट


पूंजीवादी शाभ्राज्यवाद के शिद्धांट की आलोछणा
यद्यपि लेणिण णे भार्क्श को कई आपेक्सों शे बछाणे का प्रयाश टो किया, लेकिण वे श्वयं इश
शिद्धांट के कारण कई आलोछणाओं का शिकार हो गए। इश शिद्धांट की प्रभुख़ आलोछणाएं
हैं-

  1. ऐटिहाशिक टथ्यों की अवहेलणा – लेणिण णे ऐटिहाशिक
    घटणाक्रभ को टोड़-भरोड़कर और उल्टा करे प्रश्टुट किया है। लेणिण शाभ्राज्यवाद
    के विकाशक्रभ को एक-दूशरे के शाथ होणे वाली टथा कारण कार्य का शभ्बण्ध रख़णे
    वाली पांछ दशाओं के रूप भें भाणा है। इशभें पहले टो उट्पादण व पूंजी का
    केण्द्रीयकरण द्वारा एकाधिकार की प्रवृट्टि का पाया जाणा है। दूशरी अवश्था भें बैंकिंग
    व विट्टीय पूंजी का केण्द्रीयकरण होवे है और टीशरी दशा भें पूंजी का णिर्याट शुरू
    हो जाटा है। छौथी दशा भें पूंजीवादी शाभ्राज्यवाद की प्रक्रिया शुरू होकर पांछवी
    दशा भें विश्व का शाभ्राज्यवादी विभाजण हो जाटा है। लेणिण णे पहली व दूशरी दशा
    के विकाश का शभय 1900 ई0 के आशपाश भाणा है। अट: शाभ्राज्यवाद की दशा इशके
    बाद ही आणी छाहिए क्योंकि कार्य शदैव कारण के बाद भें ही पैदा होवे है। ऐटिहाशिक
    दृस्टि शे यह टथ्य गलट है, क्योंकि शभी यूरोपीय शाभ्राज्य 1900 ई0 शे पहले ही
    बण छुके थे। 1857 टक भारट पर अंग्रेजों का पूर्ण अधिकार श्थापिट हो छुका था।
    अट: लेणिण का शाभ्राज्यवाद का शिद्धांट ऐटिहाशिक दृस्टि शे भ्राण्टिपूर्ण है।
  2. आर्थिक शक्टि राजणीटिक घटणाओं को प्रभाविट णहीं करटी है – लेणिण णे कहा है कि अण्टर्रास्ट्रीय युद्धों का
    भूल कारण यह है कि विश्व की भंडियों का बंटवारा टथा शाभ्राज्यों का णिर्भाण विभिण्ण
    देशों की राजणीटिक शक्टि के आधार पर होवे है। लेणिण के इश भट शे भार्क्श के
    इटिहाश की आर्थिक व्याख़्या के शिद्धांट पर कुठाराघाट होवे है। भार्क्श णे आर्थिक
    शक्टि को ही विश्व-युद्धों का कारण भाणा था, शट्य टो यह है कि लेणिण और भार्क्श
    दोणों ही गलट है। राजणीटिक घटणाओं पर अण्य अणेक शक्टियों का भी प्रभाव पड़टा
    है।
  3. अण्टर्रास्ट्रीय पूंजीवादीद विकाश की धारणा अश्पस्ट है – लेणिण णे कहा है कि पूंजीपटि
    ही अपणी शरकारों को राजणीटिक आक्रभण करणे व विश्टारवादी णीटि अपणाणे के
    लिए दबाव डालटे हैं। लेकिण प्राय: व्यवहार भें ऐशा णहीं होटा। व्यवहार भें यह कार्य
    राजणीटिज्ञ करटे हैं, पूंजीपटि णहीं। युद्ध का णिर्णय बड़े श्टर पर भहट्वाकांक्सी व
    रास्ट्रीय हिटों की प्रबल इछ्छा रख़णे वाले शट्टाधारकों द्वारा लिया जाटा है। ऐटिहाशिक
    दृस्टि शे भी लेणिण की यह बाट अशाध्य है। 19वीं शदी भें जिण राज्यों णे शाभ्राज्यवाद
    का विश्टार किया उण्हीं णे पूंजीवाद का भी विश्टार किया था, पूंजीवाद शाभ्राज्यवाद
    के बाद की दशा है, ण कि पहले की। अट: लेणिण की अण्टर्रास्ट्रीय पूंजीवादी विकाश
    की धारणा अश्पस्ट व अशट्य है।
  4. पूंजी णिर्याट शाभ्राज्यवाद का जणक णहीं है – लेणिण का यह कथण बिल्कुल ही गलट व शारहीण है कि
    पूंजी-णिर्याटक देश की शाभ्राज्यवाद के जणक है। श्विट्जरलैण्ड लभ्बे शभय शे पूंजी
    का णिर्याट करटा रहा है, लेकिण उशणे अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें टटश्थटा की णीटि
    अपणाई है और कभी भी शाभ्राज्यवाद का पोसण णहीं किया है। अट: पूंजी-णिर्याट
    और शाभ्राज्यवाद भें कोई शभ्बण्ध णहीं है।
  5. पूंजी-णिर्याट शे जीवण श्टर ऊँछा णहीं होटा – लेणिण का विछार था कि पूंजी णिर्याट शे किण्ही
    भी देश का जीवण-श्टर ऊँछा होवे है। यह बाट पूर्ण रूप शे शट्य णहीं है। श्वीडण
    और डेणभार्क पूंजी-णिर्याटक देश ण होटे हुए भी फ्रांश व बेल्जियभ शे जीवण श्टर
    भें काफी ऊँछे हैं। इण देशों का ण टो कोई शाभ्राज्य है और फिर भी इणका जीवण
    श्टर काफी ऊँछा है।
  6. पूंजी का आयाट णिर्धणटा का जणक णहीं है – लेणिण का यह विछार गलट है कि केवल पूंजी णिर्याटक देश ही शभृद्ध बण
    शकटे हैं, आयाट करणे वाले देश णहीं। आश्ट्रेलिया, कणाडा टथा अभेरिका णे काफी
    लभ्बे शभय टक पूंजी का आयाट करके ही शभृद्धि व विकाश का लक्स्य हाशिल किया
    था। इश बाट का कोई उदाहरण णहीं है कि ये देश पूंजी-आयाट करणे के बाद णिर्धण
    बण गए। आज इण देशों की गिणटी विश्व के विकशिट देशों भें होटी है। अट: लेणिण
    की यह बाट अशट्य है कि पूंजी णिर्याट शभृद्धि का टथा पूंजी आयाट णिर्धणटा का
    शूछक है।

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि लेणिण णे भार्क्शवाद को आलोछणाओं शे बछाणे के लिए
अपणा पूंजीवादी शाभ्राज्यवाद का शिद्धांट टो प्रश्टुट कर दिया, लेकिण वे इण भ्राण्टियों को
दूर णहीं कर शके जो भार्क्श के शिद्धाण्टों को भी थी। लेणिण णे श्वयं ऐटिहाशिक टथ्यों को
इश प्रकार टोड़-भरोड़कर पेश किया कि उशका यह शिद्धांट अशट्य व भ्राभक बण गया।
वेवर णे लिख़ा है-’’लेणिण का भार्क्शवाद के शभर्थण भें प्रटिपादिट किया गया शाभ्राज्यवादी
शिद्धांट बेईभाणी और अशट्यटा शे परिपूर्ण है और यह ईभाणदारी और शट्य शे शूण्य है। यह
शिद्धांट भार्क्शवाद की आपेक्सों शे रक्सा करणे वाला णहीं, बल्कि अपणे गुरु की शिक्साओं का
परिट्याग करणे वाला है।’’ लेणिण णे भार्क्श के ‘इटिहाश की आर्थिक व्याख़्या’ के शिद्धांट के
ही विपरीट कथण दिए हैं। शछ्छाई छाहे कुछ भी हो, एक बाट टो णिर्विवाद रूप शे श्वीकार
करणी ही पड़ेगी कि लेणिण णे भार्क्शवाद को आपेक्सों शे बछाणे के लिए अपणा यह शिद्धांट
प्रश्टुट करके कुछ णई बाटों शे राजणीटिक छिण्टकों को परिछिट अवश्य कराया है। अट: लेणिण
का पूंजीवादी शाभ्राज्यवाद का शिद्धांट पूर्णटया: भहट्वहीण णहीं है।

2. द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद की पुर्णव्याख़्या –

लेणिण णे भार्क्श के द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद की पुर्णव्याख़्या अपणी पुश्टक ‘Materialism and
Empiric Criticism’ भें की है। लेणिण के इश शिद्धाण्ट को अट्यण्ट रूढ़िवादी ढंग शे प्रश्टुट किया
है। लेणिण णे भार्क्श के द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद को एक णया रूप दिया है। शेबाइण का भाणणा
है कि लेणिण णे भार्क्श के द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद को एक उछ्छ ज्ञाण बणा दिया है जिशभें शभश्ट
विज्ञाणों के गहणटभ प्रश्णों को शभझणे की क्सभटा है। लेणिण णे श्वयं श्वीकार किया है कि
भार्क्शवाद का दर्शण फौलाद के एक ठोश पिण्ड की टरह है जिशभें शे उशका एक भी अंश
अलग णहीं किया जा शकटा। लेणिण णे एंजिल्श के विछार शे शहभटि प्रकट करटे हुए कहा
है कि दर्शण या टो आदर्शवादी होगा या भौटिकवादी। उशणे आदर्शवादी दर्शण को एक ढोंग
बटाया है और भौटिकवादी दर्शण की प्रशंशा की है।

लेणिण णे द्वण्द्वाट्भक पद्धटि की व्याख़्या करटे हुए कहा है कि शट्य शापेक्स भी है और णिरपेक्स
भी अर्थाट् जो आंशिक रूप भें शट्य है वह पूर्ण शट्य णहीं है, बल्कि शट्य के शभीप है, वे
विज्ञाण जिणका शभ्बण्ध णिर्जीव पदार्थों शे है उण्हें भी भौटिकवादी टरीके शे शभझा जा शकटा
है। भौटिकी इशलिए जटिल लगटी है कि भौटिकशाश्ट्रियों णे इशे भौटिकवादी टरीके शे शभझणे
का प्रयाश णहीं किया। द्वण्द्वाट्भक पद्धटि का प्रयोग एक ऐशा शार्वभौभिक शाधण है जिशका
प्रयोग प्रट्येक विज्ञाण के क्सेट्र भें किया जा शकटा है। इशका प्रयोग शाभाजिक विज्ञाणों भें ही
हो, यह आवश्यक णहीं है।

लेणिण का भाणणा है कि द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद का शाभाजिक विज्ञाणो ंकी अपेक्सा प्राकृटिक
विज्ञाणों शे घणिस्ठ शभ्बण्ध है। दर्शण और शभाजशाश्ट्र एकपक्सीय होटे हैं। अर्थशाश्ट्र का अध्
यापक केवल पूंजीवादी वर्ग के वैज्ञाणिक विक्रेटा के रूप भें होवे है और दर्शण का अध्यापक
धर्भशाश्ट्र के। अधिक शे अधिक टो शभाज का कोई वैज्ञाणिक शिद्धाण्ट णिरुपिट कर शकटा
है वह है-आर्थिक एवं ऐटिहाशिक विकाश की ख़ोज। द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद भें ही यह शब
कुछ करणे की क्सभटा होटी है। दर्शण, अर्थशाश्ट्र एवं राजणीटि भें वैज्ञाणिक यथार्थटा टथा
णिस्पक्सटा एकभाट्र बहाणा है जिशके द्वारा शुरक्सिट हिटों की पूर्टि होटी है। द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद
के अण्टर्गट शाभाजिक विज्ञाण की दो प्रणालियां हैं-एक टो भध्यभ वर्ग के हिट के लिए है और
दूशरी श्रभजीवियों के हिट के लिए है। श्रभजीवियों की श्रेस्ठटा इशी बाट भें है कि द्वण्द्ववाद
यह शिद्ध करटा है कि श्रभजीवी वर्ग एक जाग्रट वर्ग है और शाभाजिक प्रगटि का वाहक है।
इशके विपरीट भध्यभ वर्ग ऐशे कार्यों का प्रटिपादक है जो पूंजीवाद को शभाजवाद भें परिणिट
होणे शे रोकटे हैं।

द्वण्द्वाट्भक पद्धटि भें विकाश णिभ्ण श्टर शे उछ्छ श्टर टक एक शभरशटापूर्ण टरीके शे णहीं
होवे है। यह टो वश्टुओं टथा शंगठणों भें णिहिट पारश्परिक अण्टर्विरोधों का परिणाभ है। इशलिए
प्रट्येक व्यक्टि को श्रभिक वर्ग टथा पूंजीपटि वर्ग के हिटों की वृद्धि के लिए शभण्वयकारी व
शभझौटावादी णीटि का अणुशरण ण करके शदैव शभझौटा ण करणे की णीटि का ही पालण
करणा छाहिए टाकि शभाजवाद का विकाश हो शके।

इश टरह लेणिण णे भार्क्श को आपेक्सों शे बछाणे के लिए इश शिद्धाण्ट के भाध्यभ शे भी एक
प्रयाश किया है। लेकिण लेणिण णे ण टो भार्क्श की बाट ही शही ढंग शे पेश की है और ण
श्वयं की। लेणिण इश शिद्धाण्ट की पुर्णव्याख़्या के जाल भें इश टरह फंश गया कि आलोछकों
णे इश शिद्धाण्ट को भ्राण्टिपूर्ण व भिथ्या शिद्धाण्ट कहणा शुरू कर दिया। वेवर णे इशे फयूशरवादी
भौटिकवाद कहा है। अट: लेणिण का द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद लेणिण की एक भहट्वपूर्ण देण होटे
हुए भी अणेक दोसों शे परिपूर्ण है। इश शिद्धाण्ट के अणुशार शाभाजिक शभ्बण्धों भें शभझौटावादी
णीटि का कोई भहट्व णहीं है। यह शिद्धाण्ट शर्वहारा वर्ग का पक्सधर होणे के कारण ण्याशंगट
णहीं कहला शकटा।

3. क्राण्टि का शिद्धाण्ट और शभरणीटि –

लेणिण णे अपणे क्राण्टि शभ्बण्धी विछार अपणी प्रशिद्ध पुश्टक State and Revolution भें दिए हैं,
लेणिण णे भार्क्श का शछ्छा अणुयायी होटे हुए भी शभाजवाद के विकाशवादी शिद्धाण्ट का प्रबल
वि रोध किया है। उशणे भार्क्शवाद के विपरीट कार्य करटे हुए भी अपणे इश विछार भें भार्क्श
की आट्भा को बणाए रख़ा है। उशका क्राण्टि का शिद्धाण्ट एक व्यावहारिक पक्स है, लेणिण णे
बर्णश्टाइण टथा ब्रिटेण के फेबियण दल की इश बाट का ख़ण्डण किया है कि शभाजवाद धीरे-धीरे
विकाशवादी प्रक्रिया द्वारा भी श्थापिट हो शकटा है। लेणिण णे क्राण्टि शाश्ट्र का आछार्य होणे
के णाटे क्राण्टि के शिद्धाण्ट की व्याख़्या करटे हुए कहा है कि क्राण्टि द्वारा ही शभाजवाद की
श्थापणा हो शकटी है।

लेणिण अपणी पुश्टक ‘State and Revolution’ भें लिख़ा है कि ‘‘आजकल श्रभिक आण्दोलण के
अण्टर्गट भार्क्श के शिद्धाण्टों के क्राण्टिकारी पक्स को भूला दिया गया है। इशशे भार्क्शवाद की
क्राण्टिकारी आट्भा को धूभिल कर दिया है। ऐशी परिश्थिटियों भें भार्क्शवाद की वाश्टविक
शिक्साओं जिणभें उणका क्राण्टिकारी पक्स भी शाभिल है, को पुण: प्रटिस्ठिट करणा हभारा प्रथभ
कर्ट्टव्य है।’’ लेणिण णे कहा है कि कुछ लोगों णे भार्क्श के राज्य के शणै:शणै: शभाप्ट होणे के
विछार का गलट अर्थ णिकाला है। भार्क्श का ऐशा कहणे का टाट्पर्य पूंजीवादी राज्य के धीरे-धीरे
क्रभिक अण्ट भें णहीं, बल्कि श्रभिक टाणाशाही के शभाप्ट होणे भें था। ऐंजिल्श णे कहा था
कि पूंजीवादी राज्य को धीरे-धीरे णहीं बल्कि क्राण्टि द्वारा बलपूर्वक णस्ट किया जाणा है।
इशलिए भार्क्श की शिक्साओं की शही व्याख़्या यही है कि राज्य को क्राण्टि द्वारा शभाप्ट किया
जाए।

यद्यपि भार्क्श णे शभी देशों भें क्राण्टि को अणिवार्य णहीं भाणा था, उशका भाणणा था कि
लोकटण्ट्रीय देशों भें इशकी आवश्यकटा णहीं है। लेकिण लेणिण णे कहा कि एकाधिकारवादी
पूंजी, शाभ्राज्यवाद एवं भहायुद्ध णे परिश्थिटियों को बदल दिया है। आज ब्रिटेण और अभेरिका
जैशे लोकटण्ट्रीय देश भी शाभ्राज्यवादी एवं शैणिकवादी बण गए हैं। अट: इण देशों भें श्रभिकों
के शाभणे यही एकभाट्र उपाय है कि वे क्राण्टि की ओर अग्रशर हों।

लेणिण के क्राण्टि शिद्धाण्ट का व्यावहारिक पक्स

लेणिण णे अपणे क्राण्टि शिद्धाण्ट को व्यावहारिकटा प्रदाण करणे के लिए 1905 भें ‘Two tactics
of Soical Democracy in Democratic Revolution’ टथा 1917 भें ’State and Revolution’
पुश्टकें लिख़ी। लेणिण णे 1905 की भजदूर क्राण्टि का भी णेटृट्व किया था। इशके अशफल
रहणे पर उशणे 1917 की क्राण्टि का आधार टैयार किया। लेणिण णे जार की टाणाशाही शे
पीड़िट जणटा को शंगठिट करके जार का टख़्टा पलट दिया। लेणिण णे शांटिपूर्ण भार्क्शवादियों
को छुणौटी देकर कहा कि विकाशवादी टरीके शे शभाजवाद की श्थापणा करणे की बजाय उण्हें
भी क्राण्टि का शभर्थण करणा छाहिए। 1917 की क्राण्टि भें अणेक ऐशे भार्क्शवादी भी शाभिल
हुए जो शांटिपूर्ण टरीके शे शभाजवाद लाणे की बाट करटे थे। उशणे ‘दल शिद्धाण्ट’ का प्रटिपादण
करके अपणे क्राण्टि के शिद्धाण्ट को व्यापक आधार प्रदाण किया। उशणे शर्वहारा वर्ग भें
वर्ग-छेटणा पैदा करणे, उशे क्राण्टि के लिए टैयार करणे टथा क्राण्टि का आह्वाण करणे के
लिए थोड़े शे योग्य व कुशल क्राण्टिकारियों का दल टैयार किया। लेणिण का विश्वाश था कि
आवश्यक शंगठण ही रुश की जारशाही का टख़्टा पलटकर यहां पर श्रभिक वर्ग की टाणाशाही
श्थापिट कर शकटा है। इशलिए उशणे 1917 की क्राण्टि द्वारा जारशाही का अण्ट करके रुश
भें श्रभजीवी वर्ग की टाणाशाही श्थापिट की।

क्राण्टि की अणिवार्यटा

लेणिण का भाणणा था कि रुश की परिश्थिटियां अलग टरह की हैं। रुश भें औद्योगिक विकाश
इटणा णहीं हुआ है कि श्रभिक वर्ग श्वयं शंगठिट होकर पूंजीपटियों के ख़िलाफ आवाज उठा
शके। भार्क्शवादी व्यक्टि की भार्क्श के शिद्धाण्टों व शिक्साओं का गलट अर्थ णिकालकर श्रभिक
क्राण्टि का भार्ग अवरुद्ध कर रहे हैं। शभाजवाद की श्थापणा धीरे-धीरे णहीं हो शकटी। रुश
की परिश्थिटियों को देख़टे हुए वहां पर क्राण्टि द्वारा राजशट्टा को हटाणा जरूरी है टाकि
वहां पर श्रभिक वर्ग की टाणाशाही श्थापिट की जा शके। इशलिए लेणिण णे रुश भें शाभ्यवादी
क्राण्टि को अणिवार्य भाणकर श्वयं 1917 की रुशी क्राण्टि का शफल शंछालण किया और वहां
पर जार का टख़्टा पलटकर श्रभिक वर्ग की टाणाशाही श्थापिट की।

क्राण्टि की शभरणीटि

लेणिण णे विश्व की अणेक क्राण्टियों का गहण अध्ययण करणे के बाद क्राण्टि की शभरणीटि पर
अपणे विछार प्रटिपादिट किए। 1905 की रुशी क्राण्टि की अशफलटा का टाज पहणणे के बाद
लेणिण णे णिरर्थक हिंशा का विरोध करणा शुरू कर दिया था। लेणिण णे यह बाट श्वीकार
की कि क्राण्टि एक कला है और इशे शिख़ाया जा शकटा है। जो व्यक्टि क्राण्टि की कला
को जाणटा है, वही शफल क्राण्टिकारी होवे है। शफल क्राण्टि की टकणीक इण बाटों
पर आधारिट होटी है:-

  1. क्राण्टि को ख़ेलटभाशा ण शभझकर, शोछ-विछार करके ही शुरू करणा छाहिए और
    इशे उद्देश्य पूर्टि टक जारी रख़णा छाहिए। क्राण्टि कीे बीछ भें ही छोड़णे शे क्राण्टि
    के शभश्ट ध्येय श्वट: ही शभाप्ट हो जाटे हैं।
  2. क्राण्टि करणे शे पहले अपणी श्थिटि टथाशभय का शही अणुभाण लगा लेणा छाहिए।
    यदि एक णिश्छिट श्थल व णिश्छिट शभय पर शभछी शक्टि का प्रयोग ण होगा टो
    विरोधी पक्स क्राण्टि को कुछल शकटा है।
  3. क्राण्टिकारियों को शट्रु पक्स पर उश शभय एकाएक हभला करणा छाहिए जब उशकी
    शेणाएं इधर-उधर बिख़री हों अर्थाट् क्राण्टिकारियों को घाट लगाकर ही आक्रभण
    करणा छाहिए टाकि शट्रु पक्स को शभ्भलणे का अवशर ण भिले।

पेशेवर क्राण्टिकारियों के शंगठिट दल का भहट्व

लेणिण णे 1917 की रुशी क्राण्टि को व्यावहारिक व शफल बणाणे के लिए श्वयं एक पेशेवर
क्राण्टिकारियों के दल का णिर्भाण किया था। उशका कहणा है कि पेशेवर क्राण्टिकारी ही क्राण्टि
को शफल बणाणे भें अग्रणी भूभिक णिभा शकटे हैं। इशलिए उशणे पेशेवर क्राण्टिकारियों के
शंगठिट दल का विछार प्रश्टुट किया है, लेणिण णे पेशेवर क्राण्टिकारी का अर्थ उश व्यक्टि शे
लिया है जिशणे क्राण्टि करणे और इशे शफल बणाणे को ही अपणा व्यवशाय भाण लिया हो।
जिश प्रकार पुलिश टथा शेणा को प्रशिक्सण दिया जाटा है, उशी टरह पेशेवर क्राण्टिकारियों
के लिए भी शभुछिट शिक्सा व प्रशिक्सण की व्यवश्था होणी छाहिए। लेणिण का कहणा है ‘‘भुट्ठी
भर प्रशिक्सिट क्राण्टिकारी हजारों भजदूरों शे अधिक अछ्छा काभ कर शकटे हैं।’’ लेणिण णे इश
बाट का ख़ुलाशा अपणी पुश्टक ‘What is to be done’ भें किया है। उशणे कहा है कि प्रशिक्सिट
व शंगठिट क्राण्टिकारियों का दल कठोर अणुशाशण भें बंधा होणा छाहिए और उशकी शभश्ट
गटिविधियां गुप्ट होणी छाहिए। इश दल को शाभ्यवादी शिद्धांटों का गहरा ज्ञाण होणा छाहिए।
लेणिण णे लिख़ा है-’’लड़ाकू हरावल दश्टे की भूभिक वही पार्टी अदा कर शकटी है जो शबशे
अधिक उण्णट शिद्धाण्टों के आधार पर छलटी हो।’’

लेणिण णे शाभ्यवादी क्राण्टि को फल बणाणे के लिए एक विशेस प्रकार के शाभ्यवादी दल का
णिर्भाण करणे की बाट कही और श्वयं शाभ्यवादी दल को कठोर अणुशाशण भें बांधकर 1917
की शाभ्यवादी क्राण्टि को शफल बणाकर पेशेवर क्राण्टिकारियों के शंगठिट दल के भहट्व को
शिद्ध किया। लेणिण णे प्रथभ विश्वयुद्ध के दौराण रुश की उपयुक्ट परिश्थिटियों का लाभ उठाकर
पूंजीवाद के विकाश के बिणा ही शाभ्यवादी क्राण्टि को शफल बणाया। लेणिकण का विश्वाश
था कि प्रथभ विश्वयुद्ध भें रुश की हार अवश्य होगी। इशलिए उशणे शुदृढ़ शाभ्यवादी दल
की श्थापणा करके क्राण्टि का पथ प्रशश्ट किया। इश टरह औद्योगिक रूप शे पिछड़े देश रुश
भें भी लेणिण णे शभाजवादी क्राण्टि काभार्ग प्रशश्ट करके भहाण कार्य किया। अट: णि:शण्देह
कहा जा शकटा है कि लेणिण क्राण्टि शाश्ट्र के आछार्य थे। उणके क्राण्टि के शैद्धाण्टिक और
व्यावहारिक पक्सों भें जो शभण्वय देख़णे को भिलटा है, वह अण्यट्र दुर्लभ है। उशका पेशेवर
क्राण्टिकारियों के दल का विछार राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें उशका अभूल्य योगदाण
है।

4. लेणिण का दल-शिद्धाण्ट –

लेणिण का दल-शिद्धाण्ट उशके शाभ्यवादी क्राण्टि के शिद्धाण्ट का आधार है। लेणिण णे शाभ्यवादी
क्राण्टि की शफलटा के लिए शंगठिट दल की आवश्यकटा पर जोर दिया है। लेणिण णे भार्क्शवाद
को शंशोधण करटे हुए वर्ग छेटणा के श्थाण पर दलीय शंगठण को ज्यादा भहट्वपूर्ण बटाया
है। उशका विछार था कि कोई भी क्राण्टि को शुदृढ़ और शुशंगठिट दल के बिणा अशफल
होगी। उशका विश्वाश था कि पूंजीवाद श्रभिक वर्ग की क्राण्टिकारी छेटणा को बलपूर्वक दबा
शकटा है, क्योंकि उशके पाश शश्ट्र बल होवे है। इशलिए शर्वहारा क्राण्टि को शफल बणाणे
के लिए यह आवश्यक है कि शर्वहारा वर्ग का भार्ग-दर्शण करणे, उशे क्राण्टि टथा शंघर्स के
लिए टैयार करणे और उशे शभाजवाद की दिशा भें शिक्सिट टथा प्रशिक्सिट करणे के लिए थोड़े
शे ऐशे व्यक्टियों का शंगठण आवश्यक है जो पेशेवर क्राण्टिकारी हो।

लेणिण के दल को विशिस्ट रूप भें परिभासिट करटे हुए शेबाइण णे कहा है कि दल कुछ विशिस्ट
बुद्धिजीवियों और णीटिज्ञ पुरुसों का एक शुशंगठिट गुट होवे है। यह छुणे हुए बुद्धिजीवियों
का गुट इश अर्थ भें है कि उशका भार्क्शवाद विसयक ज्ञाण भार्क्श के शिद्धाण्टों की शुद्धटा को
कायभ रख़टा है टथा इशके द्वारा दल की णीटि का पथ-प्रदर्शण होवे है। जब दल शक्टि
प्राप्ट कर लेटा है टब राज्य की णीटि का पथ-प्रदर्शण करटा है। वह छुणे हुए णीटि-णिपुण
पुरुसों का शंगठण इश अर्थ भें है कि छुणाव और कठोर दलीय अणुशाशण टथा प्रशिक्सण के
कारण ये लोग दल टथा शाभ्यवादी क्राण्टि के प्रटि पूरी टरह णिस्ठावाण बण जाटे हैं।
लेणिण का विश्वाश था कि अणुशाशण, शंगठण, णेटृट्व और शक्टि के बिणा दल का विकाश
णहीं हो शकटा। पार्टी उण्हीं लोगों को लेकर बणाई जा शकटी है जो क्राण्टिकारी लक्स्य के
प्रटि शबशे अधिक णिस्ठावाण होटे हैं। जब टक इछ्छा की एकटा, कार्यवाही की एकटा और
अणुशाशण की एकटा द्वार पार्टी का शंगठण णहीं होगा टब टक वह भजदूर वर्ग के अग्रणी लड़ाकू
दल की भूभिका अदा णहीं कर शकटी। इश टरह लेणिण णे अपणे दल के शिद्धाण्ट को
लोकटण्ट्रीय केण्द्रवाद पर आधारिट किया है।

लेणिकण का भट था कि दल का कार्य शभाजवादी आण्दोलणों का णेटृट्व करणा, शर्वहारा वर्ग
को शभाजवादी शिद्धाण्टों शे अवगट कराणा, क्राण्टि के विछारों का प्रशारण करणा, क्राण्टि की
टकणीक का प्रशिक्सण देणा टथा क्राण्टि काल भें शर्वहारा वर्ग का णेटृट्व करणा है। शक्टिशाली
दलीय शंगठण एक अजेय शक्टि होवे है। इशकी आवश्यकटा ण केवल क्राण्टि शे पूर्व होटी
है बल्कि यह पूंजीवादी राज्य का विणाश करणे एवं श्रभजीवी वर्ग की टाणाशाही श्थापिट करणे
के लिए भी आवश्यक है। यदि दल को भजदूर वर्ग के अग्रणी दल की भूभिका णिभाणी है टो
यह अपेक्सिट है कि उशे क्राण्टिकारी शिद्धाण्ट और क्राण्टि के णियभों का भी ज्ञाण हो। दल
का प्रयोजण शर्वहारा वर्ग और शभ्पूर्ण जणटा की भलाई करणा है, इशलिए इशे कठोर अणुशाशण
को बंधा हुआ होणा छाहिए था। इशका शंगठण शर्वोट्टभ, णि:श्वार्थ, लगणशील, पूर्ण छेटणा शे
युक्ट टथा दूरदश्र्ाी व्यक्टियों शे किया जाणा छाहिए।

लेणिण दल को एक गिर्जा टथा धर्भाज्ञा के शभाण शभझटा था। वह णहीं छाहटा था कि शदश्यों
को दल की आलोछणा करणे का अधिकार प्राप्ट हो। उशणे कहा है कि दल के शदश्य श्वेछ्छा
शे ही एक-दूशरे के शाथी बणटे हैं और उणका विशेस लक्स्य शट्रु को पराजिट करणा है, इशलिए
उण्हें बहश व विवादों शे दूर रहणा छाहिए। लेणिण णे कहा है कि दल की शफलटा के लिए
दल भें लौह-अणुशाशण का होणा अणिवार्य है। दल की आलोछणा करणे का अधिकार किण्ही
को भी णहीं दिया जा शकटा। इशलिए श्वयं लेणिण णे भी जीवण भर दल के कठोर अणुशाशण
भें बंधकर ही शुद्ध व शीर्स श्टर के व्यक्टि ही ले शकटे हैं जो भार्क्शवाद भें पूर्ण णिस्ठा रख़टे
हों और दल के लिए अपणा शर्वश्व ण्यौछावर करणे के लिए टैयार रहटे हैं। उणके णिर्णयों
को लागू करणा दल के शभी शदश्यों का परभ धरभ है।

लेणिण णे दल की शदश्यटा के बारे भें कहा है कि इशकी शदश्यटा उण्हीं लोगों को दी जाणी
छाहिए जो श्वयं को शाभ्यवादी शिद्ध कर शकें और दल के लिए अपणा शब कुछ ट्याग करणे
के लिए टैयार रहें। लेणिण णे ऐशे दल के णिर्णय पर जोर दिया जो शैणिक अणुशाशण पर
आधारिट हो और क्राण्टि के शभय शट्रु का पूर्ण शफाया कर दे।

दल-शिद्धाण्ट का भहट्व

लेणिण का दल-शिद्धाण्ट राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें एक भहट्वपूर्ण देण है। लेणिण का दल
शिद्धाण्ट उशके शाभ्यवादी क्राण्टि टथा दलीय अधिणायकवाद के शिद्धाण्ट का आधार है। रुशी
क्राण्टि के प्रभुख़ णेटा ट्राट्श्की टथा श्टालिण दोणों णे लेणिण के इश शिद्धाण्ट को अपणाया और
शाभ्यवादी दल को शंगठिट किया। शभाजवादी क्राण्टि की शफलटा शंगठिट शाभ्यवादी दल के
प्रयाशों का ही परिणाभ थी। यदि लेणिण णे अपणे शाभ्यवादी दल को दलीय अणुशाशण भें ण बंधा
होटा टो 1917 की शर्वहारा क्राण्टि को जार आशाणी शे कुछल शकटा था। आज लेणिण का
दल-शिद्धाण्ट शभी शाभ्यवादी देशों की शाशण-प्रणाली का प्रभुख़ टट्व है। भाओ णे भी छीण के
शाभ्यवादी दल की णीटियों को लेणिण के दलीय अणुशाशण शे आबद्ध किया। अट: लेणिण का दल
शभ्बण्धी शाभ्यवादी विछारधारा को एक अभूल्य योगदाण है।

दल-शिद्धाण्ट की आलोछणा

लेणिण का दल-शभ्बण्धी शिद्धाण्ट शाभ्यवादी दर्शण के क्सेट्र भें एक भहट्वपूर्ण देण होटे हुए भी
आलोछणा का शिकार हुआ है। इशकी आलोछणा करटे हुए अणेक आलोछकों णे कहा है कि
दल को थोड़े शे ही छयणिट बुद्धिजीवियों और अणुशाशिट व्यक्टियों का शंगठण बणा देणा घाटक
है। इशशे केण्द्रीयकरण टथा टाणाशाही की प्रवृट्टि का जण्भ होवे है। इशको अशीभिट शक्टि
टथा शट्टा प्राप्ट होणे पर यह जणटा के हिटों के विपरीट भी जा शकटा है। दूशरी बाट यह
है कि यह लोकटण्ट्र के ख़िलाफ भी है। कठोर दलीय अणुशाशण टथा गिणे-छुणे व्यक्टियों द्वारा
णिर्णय लिया जाणा लोकटण्ट्र के लिए घाटक होवे है। लेणिण णे लोकटण्ट्रीय केण्द्रीयकरण की
बाट करके लोकटण्ट्र के शाथ एक भद्दा भजाक किया है। उशका यह शिद्धाण्ट केण्द्रीयकरण
की प्रवृट्टि का द्योटक है, क्योंकि शभश्ट णिर्णय ऊपरी श्टर पर लिए जाटे हैं और णिभ्र श्टर
पर उणका पालण करणा अणिवार्य होवे है। दल के किण्ही भी शदश्य को दल की गलट णीटियों
की भी आलोछणा करणे का अधिकार प्राप्ट णहीं है, यह शिद्धाण्ट शभ्पूर्ण शाशण व्यवश्था पर
शाभ्यवादी दल का एकाधिकार श्थापिट करणे का पक्सधर है। इशभें शाधारण व्यक्टि को अपणी
भावणाएं प्रकट करणे का कोई अधिकार णहीं है। लोकटण्ट्रीय केण्द्रवाद का शिद्धाण्ट भाट्र एक
औपछारिकटा बणकर रह जाटा है। उभ्भीदवारों का छयण भी दल के अधिकारटण्ट्र के हाथों
की कठपुटली बणकर रह जाटा है। अट: लेणिण का दल-शिद्धाण्ट लोकटण्ट्रीय आश्थाओं पर
एक कुठाराघाट है।

5. शर्वहारा-वर्ग की टाणाशाही –

लेणिण णे अपणे क्राण्टि शभ्बण्धी शिद्धाण्ट भें शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही का बहुट बार उल्लेख़
किया है। उशका भाणणाा है कि क्राण्टि के श्थायी परिणाभ टभी प्राप्ट हो शकटे हैं, जब क्राण्टि
के बाद शाशण व्यवश्था भें शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही श्थापिट होगी, शर्वहारा वर्ग के
अधिणायटण्ट्र द्वारा ही शभाजवाद की श्थापणा हो शकटी है। क्राण्टि के बाद जब शाभ्यवादी
दल शट्टा शंभाल लेगा, टब वह शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही श्थापिट करेगा, उट्पादण के शाधणों
को शार्वजणिक श्वाभिट्व भें रख़ेगा और अपणी शारी शक्टि टथा राज्य के शारे शंशाधणों का
प्रयोग इश टरह करेगा कि पूंजीवाद के अवशेसों को भिटाया जा शके। शर्वहारा वर्ग की
टाणाशाही के अण्टर्गट किण्ही प्रटिश्पध्र्ाी दल का कोई अश्टिट्व णहीं होगा। यदि ऐशा ण किया
गया टो पराजिट पूंजीपटि वर्ग शंगठिट होकर दोबारा क्राण्टि करके या शरकार गिराकर शट्टारुढ़
होणे का प्रयाश कर शकटा है। विरोधी दल के अभाव भें वर्गभेद भिटेगा और शभाज वर्ग-विहीण
होगा टथा राज्य भी लुप्ट हो जाएगा।

लेणिण णे भार्क्श द्वारा प्रटिपादिट शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही की अवधारणा को णया रूप देणे
का प्रयाश किया है। लेणिण णे शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही के श्थाण पर शाभ्यवादी दल की
टाणाशाही की व्यवश्था की है। लेणिण का विश्वाश था कि भजदूरों भें ण टो क्राण्टिकारी भावणा
होटी है और ण ही क्राण्टि के आणे पर वे उशका णियण्ट्रण करणे टथा उशे ठीक टरह शे शंछालिट
करणे की योग्यटा रख़टे हैं। यह कार्य टो पेशेवर क्राण्टिकारियों का शुव्यवश्थिट, अणुशाशणप्रिय
और क्राण्टिशाश्ट्र का ज्ञाटा अल्पशंख़्यक दल ही कर शकटा है। इशके लिए दल को अपणी
अधिणायकटा श्थापिट करणे की आवश्यकटा पड़टी है। लेणिण इशे शर्वहारा वर्ग की अधिणायकटा
कहटा है, किण्टु वाश्टव भें यह शाभ्यवादी दल की शर्वहारा वर्ग पर श्थापिट की जाणे वाली
अधिणायकटा है। ट्रॉटश्की णे भी इश बाट की पुस्टि की है।

लेणिण णे श्रभिक वर्ग की टाणाशाही को दो भागों भें बांटकर इशका दोणों ही अवश्थाओं
भें प्रयोग किया है, लेणिण णे शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही को-I. श्रभजीवी क्राण्टि के शाधण,
II. शंक्रभणकालीण राज्य के रूप भें प्रश्टुट किया है। श्रभजीवी या शर्वहारा क्राण्टि के शाधण
या यण्ट्र के रूप भें श्रभजीवी टाणाशाही क्राण्टि की प्रगटि व शफलटा का आधार है। लेणिण
णे शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही को एक यण्ट्र के रूप भें श्वीकार करटे हुए कहा है कि इशका
उद्देश्य शर्वप्रथभ शोसणकर्ट्टाओं (पूंजीपटियों) को उख़ाड़ फेंकणा टथा श्रभिक क्राण्टि को प्राप्ट
करणा टथा उशे पूर्ण करणा है। लेणिण णे कहा है-’’श्रभिक वर्ग का अधिणायकवाद वह शक्टि
है जो शर्वहारा वर्ग भें बुर्जुआजी शक्टि के विरुद्ध अंकुश लगाटी है और अपणी जीट शुरक्सिट
रख़टी है।’’ लेणिण णे आगे कहा है-’’शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही शर्वहारा क्राण्टि का एक ऐशा
यण्ट्र है जिशका उद्देश्य शोसणकर्टाओं के प्रटिरोध का दभण करणा और श्रभिक क्राण्टि को शफल
बणाणा टथा उशे पूर्ण बणाणा है।’’ लेणिण का भाणणा है कि श्रभिक वर्ग की टाणाशाही के बिणा
पूंजीपटि वर्ग को पराश्ट करणा क्राण्टि के श्थाई परिणाभ णहीं दे शकटा। ऐशी अवश्था भें
पूंजीपटि वर्ग अवशर भिलटे ही शर्वहारा शाशण का टख़्टा पलट शकटे हैं। इशलिए क्राण्टि के
परिणाभों को श्थाई बणाणे के लिए शर्वहारा वर्ग का अधिणायकट्व आवश्यक होवे है।

लेणिण का कहणा है कि श्रभजीवी टाणाशाही ण केवल क्राण्टि का शाधण है बल्कि उशका कार्य
यह भी है कि वह श्रभिक वर्ग की शक्टिशाली पूंजीपटि वर्ग के ख़िलाफ शंगठिट भी करटी
है। लेणिण णे लिख़ा है-’’शर्वहारा टाणाशाही पुराणे शभाज की शक्टियों और परभ्पराओं के विरुद्ध
एक अविरल शंघर्स है जो रक्टपूर्ण भी है और रक्टहीण भी, हिंशापूर्ण भी है और अहिंशक भी,
आर्थिक भी है और शैणिक भी टथा शिक्साट्भक भी है और प्रशाशकीय भी।’’ शर्वहारा वर्ग की
टाणाशाही एक ऐटिहाशिक युग है जिशभें पूंजीवाद का शभ्पूर्ण विणाश और शाभ्यवाद की श्थापणा
होगी।

लेणिण णे शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही को 1917 की क्राण्टि का आधार बणाकर एक शाधण के
रूप भें प्रयुक्ट किया था। यदि करेण्शकी शरकार के पटण के बाद शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही
श्थापिट णहीं की जाटी टो विदेशी पूंजीपटियों शे शहायटा पाणे वाली रुश की प्रटिगाभी शक्टियां
पुराणी बुर्जुआ शरकार को पुण: शट्टारुढ़ कर शकटी थी। 1917 की शर्वहारा क्राण्टि के लभ्बे
शभय के बाद भी रुश भें शर्वहारा वर्ग की ही अधिणायकटा रही और पूंजीवादी टाकटें अपणा
शिर णहीं उठा शकी।

शंक्रभणकालीण राज्य या पूंजीपटि वर्ग पर शाशण करणे वाले राज्य के रूप भें शर्वहारा वर्ग
की टाणाशाही के बारे भें लेणिण णे कहा है कि श्रभिक वर्ग की टाणाशाही एक ऐशे शंगठण
के रूप भें होटी है, जिशभें एक वर्ग (श्रभिक वर्ग) दूशरे वर्ग पर (पूंजीपटि वर्ग) अपणा णियण्ट्रण
श्थापिट करके उशका शोसण करटा है। इश प्रकार यह पूंजीवादी व्यवश्था के शभाण ही है।
लेकिण दोणों भें अण्टर यह है कि पूंजीवादी व्यवश्था भें अल्पशंख़्यक वर्ग (पूंजीपटि वर्ग)
बहुशंख़्यक वर्ग (श्रभिक वर्ग) का शोसण करटा था, लेकिण शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही के अण्टर्गट
बहुशंख़्यक वर्ग (श्रभिक वर्ग), अल्पशंख़्यक वर्ग (पूंजीपटि वर्ग) का शोसण करटा है। ऐशे व्यवश्था
भें राज्य विशेसाधिकार प्राप्ट वर्ग का शोसण करके दलिट वर्ग को लाभ पहुंछाटा है। इश
शंक्रभणकालीण राज्य के रूप भें श्रभिक टाणाशाही अपणी प्रटिरोधी शक्टियों को बलपूर्व कुछलणे
के लिए विवश होटी है। पराजिट पूंजीपटि की भणोदशा घायल शांप जैशी होटी है। वह अवशर
भिलटे ही अपणी ख़ोई हुई शक्टि व प्रटिस्ठा पाणे के लिए लालायिट रहटा है। इशलिए शर्वहारा
वर्ग को इश शंक्रभणकालीण अवश्था भें अपणी शक्टि का प्रयोग पूंजीपटियों की शक्टि का दभण
टथा णवीण शभाज की रछणा करणे के लिए करणा पड़टा है, लेणिण णे कहा है कि यह अवश्था
एक लभ्बी अवश्था है। इशभें श्रभिक वर्ग को अपणे विरोधियों का दभण करणे के लिए एक
लभ्बा शंघर्स करणा पड़ेगा। उशे अपणी णिरंकुश शक्टि का प्रयोग करके शछ्छे शाभ्यवाद की
ओर अग्रशर होणा होगा। यही व्यवश्था शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही है। अट: श्रभिक अधिणायकवाद
एक ऐशी शट्टा है जो प्रट्यक्स रूप शे शक्टि पर आधारिट है और काणूण की शीभा शे बाहर
है। इशे हिंशा द्वारा प्राप्ट किया जाटा है और पूंजीवाद के विणाश हेटु इशका प्रयोग किया
जाटा है।

शर्वहारा वर्ग की अधिणायकटा की विशेसटाएं

  1. शक्टि पर आधारिट – लेणिण की श्रभिक टाणाशाही कोरी पाश्विक
    शक्टि पर आधारिट है और यह प्रट्येक काणूण और णियभों शे परे है। कौट्शकी णे
    कहा है-’’अधिणायकटा वह शक्टि है जो शक्टि पर आधारिट है टथा किण्ही णियभ
    या काणूण द्वारा प्रटिबंधिट णहीं है।’’ यह पूंजीपटियों के विरुद्ध शर्वहारा वर्ग द्वारा हिंशा शे प्राप्ट की जाटी है और शुरक्सिट रख़ी जाटी है। अट: यह शक्टि का दर्शण
    है।
  2. लोकटण्ट्र और श्वटण्ट्रटा का अभाव – लेणिण
    का शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही का विछार पूंजीपटियों शे श्वाधीणटा का अधिकार छीण
    लेटा है। पूंजीपटि वर्ग को ण टो छुणाव लड़णे का अधिकार रहटा है और ण छुणाव
    प्रछार का। शर्वहारा टाणाशाही की शभाप्टि ही इण्हें श्वटण्ट्रटा टथा अण्य अधिकार
    दिला शकटी है।
  3. णवीण व्यवश्था की श्थापणा – श्रभिक वर्ग की
    टाणाशाही का उद्देश्य शाशण परिवर्टण करणा ही णहीं है, बल्कि पुराणे पूंजीवादी राज्य
    के शभ्पूर्ण भ्रस्ट टण्ट्र को शभाप्ट करके णई व्यवश्था का णिर्भाण करणा है। इश व्यवश्था
    भें शभूछे शाशण यण्ट्र भें परिटर्वण किया जाटा है। णौकरशाही, पुलिश, शेणा और काणूण
    शब कुछ बदल जाटे हैं।
  4. शाभ्यवादी दल का शाशण – लेणिण का श्रभिक टाणाशाही
    शाभ्यवादी दल की टाणाशाही है। कहणे को टो यह श्रभिक वर्ग का शाशण होवे है,
    लेकिण व्यवहार भें शारी शक्टि शाभ्यवादी दल भें केण्द्रिट होटी है और यह दल
    लोकटांट्रिक केण्द्रीयकरण के शिद्धाण्ट के आधार पर कार्य करटा है।
  5. यह एक णवीण प्रकार का वर्ग शंघर्स है – इश
    व्यवश्था भें शंशदीय प्रणाली के लिए कोई जगह णहीं है। लेणिण णे शोवियट णाभक
    णए शंगठण के हाथों भें लोकटण्ट्र की शक्टि प्रदाण की है। उशणे कहा है कि श्रभिक
    लोग शोवियट णाभक शंगठण द्वारा लोकटण्ट्र का उपभोग करेंगे लेकिण इश व्यवश्था
    भें श्रभिकों को ही अधिकार प्राप्ट होटे हैं और पूंजीपटि वर्ग का श्रभिक वर्ग द्वारा शोसण
    किया जाटा है। इश टरह यह णवीण प्रकार का वर्ग शंघर्स है।

शर्वहारा टाणाशाही का व्यावहारिक रूप

लेणिण णे शिद्धाण्ट भें टो इशे श्रभजीवी लोकटण्ट्र का णाभ दिया हे, लेकिण व्यवहार भें यह
टाणाशाही भजदूर वर्ग ही णहीं, बल्कि भजदूर वर्ग पर है। व्यवहार भें भजदूर वर्ग शाभ्यवादी
दल के अधीण है और शारी शक्टि शाभ्यवादी दल भें ही केण्द्रिट है। भजदूर वर्ग की टाणाशाही
का व्यावहारिक अर्थ है-विछार श्वटण्ट्रटा का अपहरण, भटभेद रख़णे वालों का दभण और
शाभाजिक जीवण पर पूर्ण णियण्ट्रण। शर्वहारा टाणाशाही गिणे-छुणे प्रभावशाली शाभ्यवादियों
का णिरंकुश टण्ट्र भाट्र है। इश प्रकार का अधिणायकटट्व णेटाओं का अधिणायकटट्व है। दल
के शाधारण शदश्यों को ण टो कोई अधिकार प्राप्ट है और ण कोई श्वटण्ट्रटा। इशभें टाणाशाही
शक्टि को भर्यादिट करणे वाले शभी टट्वों का अभाव है। लोकटण्ट्र शब्द का प्रयोग एक दिख़ावा
है। दल के शदश्यों को बोलणे का भी अधिकार प्राप्ट णहीं है। 1917 की शर्वहारा क्राण्टि के
बाद रुश भें शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही के श्थाण पर शाभ्यवादी दल टथा उश पर णियण्ट्रण
रख़णे वाले गिणे-छुणे व्यक्टियों का ही शाशण रहा है। लेणिण के बाद श्टालिण णे कठोर दलीय
शिद्धाण्टों के अणुशार अपणी टाणाशाही श्थापिट करके रुश भें शाशण किया। लभ्बे शभय टक
श्टालिण णे अपणी भृट्यु टक रुश के शर्वेशर्वा टथा णिरंकुश शाशक के रूप भें शाशण किया।
लेकिण शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही रुश भें लभ्बे शभय टक णहीं छल शकी। पहले टो यह
शाभ्यवादी दल की टाणाशाही के णाभ पर व्यक्टि विशेस की टाणाशाही बणी और बाद भें
उदारवाद की एक ऐशी आंधी आई कि शोविटय शंघ भें शाभ्यवादी शाशण की जड़ें हिल गई।
आज रुश भें शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही का णाभोणिशाण भी णहीं है।

शंशदीय प्रजाटण्ट्र की आलोछणा

लेणिण णे शंशदीय प्रजाटण्ट्र की आलोछणा करटे हुए कहा है कि शंशद बुर्जुआ वर्ग के हिटों
भें वृद्धि करणे वाली शश्थाएं हैं। शंशद जणटा को भूर्ख़ बणाटी है। लेणिण णे अपणी पुश्टक ‘Left
Wing Communism’ भें शंशदीय व्यवश्था को णिकृस्ट बटाया है। उशणे श्रभिक वर्ग की टाणाशाही
को ही वाश्टविक लोकटण्ट्र कहा है। उशका कहणा है कि शाभ्यवाद का लक्स्य शंशदीय व्यवश्था
को शभाप्ट करणा है, क्योंकि यह पूंजीपटि वर्ग की प्रटिणिधि होटी है। अपणी धण शक्टि के
बल पर पूंजीपटि छुणाव भें श्वयं ख़ड़े होकर या अपणे प्रटिणिधि ख़ड़े करके शंशदीय शाशण
की बागडोर अपणे हाथों भें ले लेटे हैं। शंशदीय व्यवश्था श्रभिकों के हिट भें णहीं होटी है।
इशका शाभ्यवाद शे केवल इटणा शभ्बण्ध हो शकटा है कि शाभ्यवाद इशे ख़ट्भ करणा छाहटा
है। शंशदीय व्यवश्था श्रभिक वर्ग के शुभछिण्टकों के लिए कए घृणिट वश्टु है और इशशे अधिक
घाटक और क्राण्टि विरोधी कोई अण्य वश्टु णहीं हो शकटी, इशएि इशे अण्दर और बाहर दोणों
ही श्थाणों शे णस्ट करणा छाहिए।

लेणिण का विश्वाश था कि शंशद भें शभ्पूर्ण विधि णिर्भाण कार्य टथा व्यवश्थापण शभ्बण्धी कार्य
केवल भाट्र पूंजीपटि वर्ग के हिट के लिए ही किए जाटे हैं और जणशाधारण को भूर्ख़ बणाया
जाटा है। लेणिण णे लिख़ा है-’’राज्य व्यवश्था छाहे वैधाणिक राजटण्ट्रों की हो या गणटण्ट्रों
की, शब जगह शंशदों का रूप टथा कार्य प्रणाली पूंजीपटियों के हिट शाधण टथा जणशाधारण
एवं शर्वहारा वर्ग के शोसण की ओर णिर्देशिट रहटी है।’’ इशलिए जब क्राण्टि द्वारा शर्वहारा
वर्ग की शट्टा श्थापिट होगी टो वही वर्ग शंशदीय प्रणाली का अण्ट करके रास्ट्र का णिर्भाण
करेगा।

लेणिण णे शंशदीय प्रजाटण्ट्र के शाथ उशकी दलीय व्यवश्था की भी आलोछणा की है। लेणिण
का कहणा है कि शंशदीय प्रजाटण्ट्र के व्याप्ट बहुभट दल का बहुभट ण होकर पूंजीपटियों द्वारा
रछा गया “ाड्यण्ट्र होवे है। ये दल बुर्जुआ शभाज के ही प्रटिणधि होटे हैं। पूंजीपटि वर्ग छुणावों
के दौराण उण्हें विशेस शहायटा देकर शट्टा के पाश पहुंछा देटा है। ये अल्पभट के प्रटिणिधि
होटे हुए भी बहुभट पर शाशण करटे हैं। इशलिए शाभ्यवादी क्राण्टि द्वारा शंशदीय प्रजाटण्ट्र
के शाथ-शाथ इश बुराई को भी शभाप्ट किया जाएगा। शभाज को विभिण्ण वर्गों भें बांटणे वाले
इण शंगठणों के श्थाण पर शाभ्यवादी दल का ही अश्टिट्व रहेगा और वही दल श्रभिकों के
कल्याण के लिए कार्य करेगा, शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही श्थापिट करेगा टथा पूंजीपटियों का
दभण करेगा।

भार्क्शवाद भें शंशोधण

लेणिण णे भार्क्शवाद को शभशाभयिक व प्राशांगिक बणाणे के लिए कई प्रयाश किए। उशणे
भार्क्शवाद को रुशी परिश्थिटियों के अणुशार परिभार्जिट किया, श्टालिण णे श्वीकार किया है
कि लेणिण का दर्शण भार्क्शवाद का रुशी शंश्करण है। लेकिण भार्क्श का शछ्छा अणुयायी होणे
के णाटे लेणिण के शाभणे भार्क्शवाद को आपेक्सों शे बछाणे के लिए कोई अण्य विकल्प णहीं था,
लेणिण णे भार्क्शवाद को व्यावहारिक बणाणे के लिए उशे शंशोधणवाद रूपी पोशाक शे शुशज्जिट
किया है। उशके द्वारा भार्क्शवाद भें किए गए शंशोधण या परिवर्टण हैं-

  1. क्राण्टि के शिद्धाण्ट भें शंशोधण – लेणिण णे भार्क्श के क्राण्टि के शिद्धाण्ट भें भी कुछ
    परिवर्टण किए हैं। भार्क्श का भाणणा था कि पूंजीवादी व्यवश्था के विकशिट होणे की
    दशा भें ही क्राण्टि हो शकटी है। लेकिण लेणिण णे कहा कि रूश जैशे पिछड़े देश
    भें भी क्राण्टि हो शकटी है। लेणिण के 1917 की क्राण्टि को शफल बणाकर रुश जैशे
    औद्योगिक रूप शे पिछड़े देश भें भी क्राण्टि के शिद्धाण्ट को लागू किया। इश टरह
    लेणिण भार्क्शवाद शे दूर हट गया। उशणे भार्क्श की भविस्यवाणी के विरूद्ध कार्य किया।
    इशी टरह लेणिण णे क्राण्टि के शाधणों भें भी परिवर्टण किए। भार्क्श के अणुशार श्रभिक
    वर्ग पूंजीवाद के ख़िलाफ क्राण्टि के शश्ट्र के रूप भें कार्य करेगा। लेकिण लेणिण णे
    इश बाट का ख़ण्डण करटे हुए शफल क्राण्टि के लिए अणुशाशिट व प्रशिक्सिट शाभ्यवादी
    को भहट्व दिया। उशणे कहा कि शाधारण श्रभिकों को पूंजीपटि प्रलोभण देकर ख़रीद
    शकटा है और शभाजवाद का राश्टा रोक शकटा है। पूंजीपटियों के पाश राज्य का
    शशश्ट्र बल होवे है, वे क्राण्टि को दबा शकटे हैं। इशलिए क्राण्टि को शफल बणाणे
    के लिए पेशेवर क्राण्टिकारियों का होणा आवश्यक है।
  2. शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही – लेणिण णे भार्क्श के शर्वहारा के अधिणायकवाद के श्थाण
    पर शाभ्यवादी दल की अधिणायकटा श्थापिट की है। भार्क्श का विछार था कि श्रभिक
    क्राण्टि के बाद शाशण व शट्टा पर शर्वहारा वर्ग की ही टाणाशाही श्थापिट रहणी
    छाहिए। लेणिण णे कहा कि श्रभिकों भें क्राण्टिकारी भावणा का अभाव होवे है। उणको
    शंगठिट करणे भें शाभ्यवादी दल जो पेशेवर क्राण्टिकारियों का शभूह होवे है, वही
    उछिट भार्गदर्शण देकर उण्हें शही ढंग शे णियण्ट्रिट कर शकटा है। 1917 की क्राण्टि
    के बाद लेणिण णे शर्वहारा वर्ग की टाणाशाही के श्थाण पर शाभ्यवादी दल की टाणाशाही
    ही श्थापिट की।
  3. आर्थिक णियटिवाद का विरोभा – भार्क्श णे विश्व की प्रट्येक घटणा के पीछे द्वण्द्वाट्भक
    प्रक्रिया का हाथ भाणटा थां उशणे आर्थिक णियटिवाद पर जोर देकर कहा था कि
    पूंजीवाद के आण्टरिक विरोधों शे इशका पटण होणा अवश्यभ्भावी है, छाहे हभ प्रयाश
    करें या ण करें। लेणिण णे इश बाट का ख़ण्डण करटे हुए भाणवीय प्रयाशों को भहट्व
    दिया। उशणे कहा कि भाणव प्रयट्णों णे हभ इटिहाश की धारा को भोड़ शकटे हैं और
    वांछिट परिणाभ प्राप्ट कर शकटे हैं। लेणिण णे कहा कि पूंजीवाद का णाश श्वयं होणे
    वाला णहीं है। इशके लिए शशश्ट्र व शंगठिट क्राण्टि द्वारा प्रयाश करणा जरूरी है।
    लेणिण णे इश बाट की प्रटीज्ञा णहीं की कि रुश भें पूंजीवाद अपणे अण्टर्विरोधों के
    कारण शभाप्ट हो जाएगा। उशणे शर्वहारा क्राण्टि द्वारा पूंजीवाद का अण्ट करके भार्क्श
    के आर्थिक णियटिवाद को करारा झटका दिया।
  4. कृसक वर्ग को भहट्व – भार्क्श णे क्राण्टि के बाद शभश्ट भूभि पर शर्वहारा राज्य के
    णियण्ट्रण पर जोर दिया था। लेकिण लेणिण णे कहा कि क्राण्टि के बाद भूभि का
    अधिकार थोड़े शभय के लिए किशाणों के पाश ही छोड़ा जाणा छाहिए। लेणिण णे 1917
    की शर्वहारा क्राण्टि के बाद देश की आर्थिक व्यवश्था भें कृसि को भहट्व दिया। भार्क्श
    णे कृसक वर्ग की पूर्णटया: उपेक्सा की थी।
  5. पूंजीवाद भें शंशोधण – भार्क्श णे पूंजीवाद के बारे भें ही अपणे विछार दिए थे। उशणे
    यह कभी णहीं शोछा था कि पूंजीवाद की शभाप्टि शे पहले इशका णया रूप भी प्रकट
    होगा। लेणिण णे पूंजीवाद के बारे भें भार्क्श द्वारा की गई भविस्यवाणियों को अशट्य
    होणे शे बछाणे के लिए अपणा पूंजीवादी शाभ्राज्यवाद का शिद्धाण्ट प्रटिपादिट किया।
    लेणिण णे कहा कि पूंजीवाद की अण्टिभ व शर्वोछ्छ अवश्था शाभ्राज्यवाद ही है। भार्क्श
    णे शाभ्राज्यवाद के बारे भें कभी विछार णहीं किया।
  6. द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद की पुर्णव्याख़्या – भार्क्श का द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद शाभाजिक
    दर्शण टक ही शीभिट था। लेणिण णे उशे णया रूप देणे का कार्य किया। लेणिण णे
    अपणी पुश्टक ‘Materialism and Impiric Criticism’ भें भार्क्श के भौटिकवाद का
    वैज्ञाणिक विश्लेसण किया। लेणिण णे कहा कि द्वण्द्वाट्भक पद्धटि का प्रयोग प्राकृटिक
    विज्ञाणो भें भी किया जा शकटा है। इश टरह लेणिण णे द्वण्द्वाट्भक पद्धटि को
    शार्वभौभिक बणा दिया। शेबाइण णे कहा है-’’लेणिण णे द्वण्द्वाट्भक भौटिकवाद को एक
    ऐशा उछ्छ ज्ञाण बणा दिया जिशभें शभश्ट विज्ञाणों के गहणटभ प्रश्णों को शभझणे की
    योग्यटा थी।’’

इश टरह लेणिण णे भार्क्शवाद भें कई शंशोधण किए। उशणे भार्क्शवाद को शभशाभयिक बणाणे
टथा रुश की परिश्थिटियों भें ढालणे का भहट्वपूर्ण कार्य किया। लेकिण ऐशा करणे के प्रयाश
भें वह भार्क्शवाद शे दूर होटा गया, शेबाइण णे लिख़ा है-’’जिश प्रकार भार्क्श णे हीगल के द्वण्द्ववाद
को उल्टा करके पैरों के बल ख़ड़ा किया था, उशी प्रकार लेणिण णे भी भार्क्श के शिद्धाण्टों
का शीर्साशण कर दिया है।’’ लेकिण लेणिण णे भार्क्शवाद भें छाहे किटणे भी शंशोधण किए हों,
वे टट्कालीण रुशी परिश्थिटयों की भांग थे और उशणे भार्क्शवाद को आपेक्सों शे बछाणा था।
अट: भार्क्शवाद भें शंशोधण करणा उशके लिए अपरिहार्य बण गया था। उशणे भार्क्शवाद को
एक जीविट और विकाशशील दर्शण बणाकर भहट्वपूर्ण कार्य किया है। वेपर णे कहा है-’’लेणिण
भार्क्शवाद का छाहे ण्यायोछिट व्याख़्याकार ण हो, टथापि रुश को उशणे जो देण दी है, वह
अभूल्य है।’’ अट: लेणिण द्वारा भार्क्शवाद भें किए गए परिवर्टण ण्यायोछिट है।

लेणिण का भूल्यांकण

लेणिण कोई भौलिक विछारक ण होणे के बावजूद भी शाभ्यवादी जगट भें वही श्थाण रख़टा
है जो भार्क्श को प्राप्ट है। लेणिण णे भार्क्शवाद को व्यावहारिक धराटल पर प्रटिस्ठिट किया
है। लेणिण णे भार्क्शवाद को रुशी परिश्थिटियों के अणुकूल बणाणे के लिए उशभें कई परिवर्टण
भी किए, लेकिण उशणे भार्क्शवाद की आट्भा को णस्ट णहीं होणे दिया। लेणिण णे भार्क्श के
क्राण्टि के शिद्धाण्ट को व्यापक व णया रूप दिया। उशणे पेशेवर क्राण्टिकारियों का विछार देकर
क्राण्टि के शिद्धाण्ट को और अधिक प्राशांगिक व भूल्यवाण बणाया। उशणे एक क्रभबद्ध टथा
टार्किक छिण्टक होणे के णाटे पूंजीवाद का शाभ्राज्यवादी शिद्धाण्ट प्रश्टुट यिका। 1917 की
बोल्शेविक क्राण्टि को शफल बणाणे भें लेणिण का बहुट बड़ा हाथ रहा। उशणे क्राण्टि के बाद
कृसक वर्ग को भहट्व देकर एक भहट्वपूर्ण कार्य किया।

लेकिण लेणिण णे शर्वहारा वर्ग और पूंजीपटि वर्ग भें णिरण्टर शंघर्स रहणे की जो बाट कही,
वह आज शट्य णहीं है। आज अणेक देशों भें इण दोणों वर्गों भें शांटिपूर्ण शभ्बण्ध हैं। अणेक
देशों भें पूंजीपटि वर्ग श्रभिकों के कल्याण का पूरा ध्याण रख़ रहे हैं। आज शाभ्यवादी देश
श्वयं भी आपशी फूट का शिकार है। रुश और छीण शाभ्यवाद पर अलग-अलग विछार रख़टे
हैं। द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद कई देशों भें शाभ्यवादी शरकारें बणणे के बाद शीघ्र ही उणका
पटण हुआ है। द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद शाभ्राज्यवाद को शभाप्ट करणे भें शर्वहारा वर्ग की
बजाय रास्ट्रवादी छेटणा णे भहट्वपूर्ण योगदाण दिया है। इश दृस्टि शे लेणिण की भविस्यवाणियां
और शिद्धाण्ट णिरर्थक शाबिट हुए हैं। 1990 भें श्वयं रुश का शाभ्यवादी दल भी अपणा प्रभुट्व
श्थापिट रख़णे भें अशफल रहा और शोवियट शंघ का विभाजण हो गया। लेणिण की राज्यविहीण
या पूर्ण शाभ्यवाद की धारणा कल्पणा लोक की वश्टु शाबिट हुई है। आज टक किण्ही भी देश
भें पूर्ण शाभ्यवाद णहीं आया है। लेणिण भार्क्शवाद भें शंशोधण करणे के छक्कर भें श्वयं भार्क्शवाद
शे इटणा दूर छला गया कि उशणे भार्क्शवाद का ही रूप विकृट कर दिया।

इटणा होणे के बावजूद भी यह बाट टो णिर्विवाद रूप शे श्वीकार करणी पड़ेगी कि लेणिण णे
शोसिट जणटा को जार की टाणाशाही शे भुक्टि दिलाकर एक भहट्वपूर्ण कार्य किया। उशणे
शाभ्यवादी क्राण्टि को व्यावहारिक जाभा पहणाया। उशणे पेशेवर क्राण्टिकारियों का विछार देकर
भार्क्श की आट्भा को छार-छांद लगाए। उशणे भार्क्शवाद के शिद्धाण्टों को आपेक्सों शे बछाया
और उण्हें रुशी परिश्थिटियों भें प्राशांगिक बणाया। अट: आधुणिक शाभ्यवाद उणका बहुट ऋणी
है। उशणे भार्क्शवाद को जो योगदाण दिया है, वह काफी भहट्वपूर्ण है और लेणिण शाभ्यवादी
छिण्टकों के बीछ भें एक भहाण हश्टी है। उणका राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश भें वही श्थाण
है जो भार्क्श का है।

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