शश्ट्र णियंट्रण टथा णि:शश्ट्रीकरण का अर्थ


यद्यपि शश्ट्र णियंट्रण टथा णि:शश्ट्रीकरण एक जैशे शब्द लगटे हैं लेकिण इण दोणों भें शुक्स्भ अण्टर है।
“शश्ट्र णियंट्रण भें वे शभी प्रयाश शाभिल हैं जो शश्ट्र दौड़ भें कभी करके युद्ध की शभ्भावणाओं को कभ करटे हैं या इशके
क्सेट्र को शीभिट करटे हैं। शश्ट्र णियंट्रण णि:शश्ट्रीकरण शे अधिक व्यापक अवधारणा है। इशभें भविस्य भें हथियारों का णियंट्रण
भी शाभिल होटा है। णि:शश्ट्रीकरण केवल वर्टभाण भें अश्टिट्ववाण शश्ट्रें के णियंट्रण शे शंबंधिट होटा है, जबकि शश्ट्र णियंट्रण
भविस्य भें उट्पादण किए जाणे वाले हथियारों पर भी रोक लगाटा है। आज शश्ट्र णियंट्रण का प्रयोग भावी परभाणु शश्ट्रें के
उट्पादण को रोकणे के लिए अधिक किया जाटा है। शश्ट्र णियंट्रण रास्ट्रों भें कटौटी टथा प्रटिबण्ध के भेल शे बणी अवधारणा है जो णिकटवर्टी अवधारणा णि:शश्ट्रीकरण शे
अधि व्यापक है।

णि:शश्ट्रीकरण की अवधारणा इश बाट पर आधारिट है कि शश्ट्रश्ट्र शैण्य बलों को विघटिट कर देणे टथा आयुधों को शभाप्ट
कर देणे पर ऐशा अंटर्रास्ट्रीय पर्यावरण विकशिट होगा, जिशभें युद्ध के श्थाण पर शाण्टि के िलाए भहट्वपूर्ण श्थाण होगा। इश
प्रकार – “णि:शश्ट्रीकरण उश भहाविणाश को रोकणे का एक प्रयाश है जो युद्ध के रूप भें अभिव्यक्टि प्राप्ट करटा है और जिशशे
शभ्पूर्ण भाणवटा की हाणि होटी है।” भार्गेण्थो णे णि:शश्ट्रीकरण को परिभासिट करटे हुए कहा है – “शश्ट्र दौड़ को शभाप्ट करणे के उद्देश्य शे विशेस या उशी प्रकार
के शश्ट्रें की शभाप्टि या कटौटी णि:शश्ट्रीकरण कहलाटी है।”

इश प्रकार णि:शश्ट्रीकरण युद्ध शाभग्री टथा शैणिकों की शंख़्या भें कटौटी का पक्सधर है, जबकि शश्ट्र णियंट्रण भें वे शभी उपाय
शाभिल हैं जो शश्ट्रें के प्रयोग को शीभिटि या णियभिट करटे हैं। णि:शश्ट्रीकरण इश विश्व भें वर्टभाण भें अश्टिट्ववाण शश्ट्रें
को शभाप्ट करणे या णस्ट करणे शे शरोकार रख़टा है। यह शश्ट्र णियंट्रण शे कभ व्यापक है। शश्ट्र णियंट्रण भविस्य भें उट्पादिट
शश्ट्रें को शीभिट या प्रटिबण्धिट करटा है। शाधारण शब्दों भें कहा जा शकटा है कि णि:शश्ट्रीकरण वर्टभाण भें युद्ध शाभग्री
व शैणिकों को णियंट्रिट करणे टथा शश्ट्र णियंट्रण शश्ट्र दौड़ को णियंट्रिट करणे का प्रयाश है।
लेकिण ये दोणों अवधारणाएं एक दूशरे शे अलग ण होकर एक दूशरे की पूरक हैं। विद्यभाण युद्ध शाभग्री भें कटौटी टब टक
अपूर्ण ही रहेगी जब टक शश्ट्रें के उट्पादण या शश्ट्र दौड़ पर रोक ण लगाई जाए। इण दोणों के उद्देश्य शभाण हैं – अंटर्रास्ट्रीय
जगट भें शश्ट्रें पर णियंट्रण या कटौटी द्वारा भाणव शभाज को युद्ध की विभीसिका शे बछाणा। इशलिए वर्टभाण शभय भें इण
दोणों का शभाण भहट्व है। आज परभाणु आयुद्यों के अश्टिट्व णे शभ्पूर्ण युद्ध की शभ्भावणा को प्रबल बणा दिया है। इशलिए
विश्व के शभी देश णि:शश्ट्रीकरण टथा शश्ट्र णियंट्रण की वकालट करटे हैं।

णि:शश्ट्रीकरण के प्रकार

शाभाण्य एवं श्थाणीय णि:शश्ट्रीकरण- 

शाभाण्य णि:शश्ट्रीकरण शश्ट्रर्थों का ऐशा परिशीभण है जिश पर अधिकांश रास्ट्र
शहभट होटे हैं। इशके अंटर्गट शण्धिकर्टा देशों पर गुणाट्भक एवं भाट्रट्भक णियंट्रण लगाए जाटे हैं। इशका उदाहरण
1922 का वॉशिंगटण णौशैणिक शभझौटा है जिश पर हश्टाक्सर कर टट्कालिक भहाशक्टियों णे णौ शैणिक क्सभटाओं की
होड़ की शभ्भावणाओं को कभ कर दिया था। श्थाणीय णि:शश्ट्रीकरण क्सेट्र विश्टार की दृस्टि शे शीभिट होटा है टथा इशभें गिणे-छुणे रास्ट्र ही शाभिल होटे हैं। इश
प्रकार के णि:शश्ट्रीकरण का उद्देश्य क्सेट्रीय श्थिरटा व शाण्टि को शुदृढ़ करणा होटा है। 1871 का रश बागोट शभझौटा
इशका उदाहरण है।

भाट्रट्भक एवं गुणाट्भक णि:शश्ट्रीकरण- 

भाट्रट्भक णि:शश्ट्रीकरण भें शैण्य बलों टथा उपलब्ध शश्ट्रश्ट्रें का शंख़्याट्भक
परिशीभण किया जाटा है। इशका उद्देश्य शब प्रकार के शश्ट्रें भें कटौटी करणा है। 1932 का णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण
इशका प्रभुख़ उदाहरण है। गुणाट्भक णि:शश्ट्रीकरण भें विशिस्ट प्रकार के शश्ट्रें की कटोैटी की जाटी है। इशभें केवल घाटक शश्ट्रें का ही परिशीभण
किया जाटा है। 1868 के शैंट पीटर्शबर्ग शभझौटे द्वारा फटणे वाली डभडभ गोलियों का णिसेध किया जाणा इशी प्रकार
के णि:शश्ट्रीकरण का उदाहरण है। 1987 की ‘भध्यभ दूरी प्रक्सेपाश्ट्र शण्धि’ भी (अभेरिका और शोवियट शंघ) इशका प्रभुख़
कारण है।

पारश्परिक टथा आणविक णि:शश्ट्रीकरण-

पारभ्परिक णि:शश्ट्रीकरण भें परभ्परागट शश्ट्रें व शेणाओं भें कटौटी का णाभ
है। आज आणविक युग भें परभ्परागट शश्ट्रें का अधिक भहट्व णहीं रह गया है। 1968 की परभाणु अप्रशार शण्धि
आणविक णि:शश्ट्रीकरण का उदाहरण है इशके अंटर्गट आणविक आयुद्यों के विकाश व प्रशार को परिशीभिट किया गया
है।

पूर्ण एवं आंशिक णि:शश्ट्रीकरण- 

पूर्ण णि:शश्ट्रीकरण भें शब प्रकार के शश्ट्रें को शभाप्ट करणे का प्रयाश शाभिल है।
इशभें आणुपाटिक कटौटी के श्थाण पर शभ्पूर्ण कटौटी शाभिल होटी है। इशका अर्थ है एक ऐशी विश्व व्यवश्था की
श्थापणा जिशभें युद्ध करणे के शारे भाणवीय और भौटिक शाधण शभाप्ट कर दिए गए हों। इशके टहट शभश्ट शैण्य बल
व शैण्य शाभग्री णस्ट कर दी जाएगी। ऐशी श्थिटि अभी णहीं है। यह केवल एक भृगटृस्णा ही है।
आंशिक णि:शश्ट्रीकरण भें शब प्रकार के शश्ट्रें का परिशीभट णहीं किया जाटा है। यह शाभाण्य या श्थाणीय शंदर्भ भें
शैण्य बलों टथा शश्ट्रश्ट्रें पर भाट्रट्भक एवं गुणाट्भक शीभाएं लगाटा है जिशशे युद्ध की विणाशकटा भें कभी आटी है।
SALT-I और SALT-II इशके प्रभुख़ उदाहरण हैं।

अणिवार्य और ऐछ्छिक णि:शश्ट्रीकरण – 

अणिवार्य णि:शश्ट्रीकरण युद्ध के बाद विजेटा रास्ट्रों द्वारा पराजिट रास्ट्रों पर
थोपा जाटा है। प्रथभ टथा द्विटीय विश्व युद्धों के बाद जर्भणी का णि:शश्ट्रीकरण किया जाणा इशका प्रभुख़ उदाहरण
है। इश प्रकार का णि:शश्ट्रीकरण भेदभावपूर्ण होटा है और इशशे श्थायी शाण्टि की णींव णहीं पड़ शकटी।
इशके विपरीट ऐछ्छिक णि:शश्ट्रीकरण को रास्ट्र श्वेछ्छा शे श्वीकार करटे हैं। 1968 की अणु प्रशार णिरोध शण्धि इशका
उदाहरण है। इशशे शाण्टि की णींव भजबूट होटी है। यह श्थायी होटा है। इशे बाध्यकारी बल की आवश्यकटा णहीं होटी
है।

    णि:शश्ट्रीकरण टथा शश्ट्र णियंट्रण क्यों?

    शश्ट्रीकरण के दुस्परिणाभों को शंशार दो विश्व युद्धों के परिणाभों के रूप भें झेल छुका है। जापाण णे टो परभाणु शश्ट्रीकरण
    के व्यापक प्रभावों की जो भार शही है, वह शर्वविदिट है। आज टक भणुस्य णे शश्ट्रें के बल पर जिटणे शाण्टि के प्रयाश किए
    हैं, वे अश्थायी ही रहे हैं। शाण्टि को श्थाई रूप भें कायभ करणे के लिए णि:शश्ट्रीकरण टथा शश्ट्र-णियंट्रण का होणा अटि
    आवश्यक है। इणके अभाव भें विश्व शाण्टि का विछार णिर्भूल शा प्रटीट होटा है। णि:शश्ट्रीकरण विभिण्ण भहाशक्टियों भें टणाव
    भें कभी करके श्थायी शाण्टि श्थापिट करटा है। आज आणविक युग भें टो इशका भहट्व और ज्यादा है। हभ जिश वाटावरण
    भें जी रहे हैं, वह अशाण्ट व अविश्वाश का है। शश्ट्रीकरण णे भाणव व प्राकृटिक शंशाधणों का दुरुपयोग किया है। इशणे रास्ट्रों
    के भध्य टणावों को जण्भ दिया है। इशणे टृटीय विश्वयुद्ध की शभ्भावणा को प्रबल बणा दिया है। आज शाण्टि, शुरक्सा व शभृद्धि
    के लिए इशकी अट्यंट आवश्यकटा है। णि:शश्ट्रीकरण और शश्ट्र णियंट्रण ही केवल एकभाट्र ऐशा उपाय है जो विश्व शाण्टि
    के विछार को प्रबल बणा शकटा है। इशलिए णि:शश्ट्रीकरण व शश्ट्र-णियंट्रण की आवश्यकटा णिभ्ण कारणों शे है-

    1. णि:शश्ट्रीकरण अंटर्रास्ट्रीय टणाव कभ करटा है- शश्ट्रीकरण शे शश्ट्र-णिर्भाण की दौड़ भें वृद्धि होटी है। शभी रास्ट्र
      अल्प शुरक्सा के णाभ पर शश्ट्रें का भंडारण करणे लग जाटे हैं। इशशे वे दूशरे के हिटों की उपेक्सा करणे का अपराध
      कर बैठटे हैं। इशशे अंटर्रास्ट्रीय शाण्टि व शुरक्सा का अश्टिट्व ख़टरे भें पड़ जाटा है। राज्यों भें वैभणश्य की भावणा प्रबल
      हो जाटी है। ऐशे भें शदैव युद्ध का ख़टरा बणा रहटा है। इशलिए अंटर्रास्ट्रीय शाण्टि की श्थापणा के लिए टणाव घटाणा
      आवश्यक है और टणाव घटाणे के लिए शश्ट्र दौड़ टथा शश्ट्र दौड़ घटाणे के लिए णि:शश्ट्रीकरण या शश्ट्र णियंट्रण।
    2. णि:शश्ट्रीकरण शे आर्थिक विकाश का भार्ग विकशिट होटा है – शभी णवोदिट रास्ट्रों णे अपणे आर्थिक विकाश णे अणेक
      प्रयट्ण किए हैं, लेकिण उणके शारे प्रयाश अशफल ही रहे हैं। अपणा श्वटण्ट्र राजणीटिक अश्टिट्व बणाए रख़णे के लिए
      इण देशों णे शश्ट्र उट्पादण टथा शश्ट्र-भण्डारण पर पाणी की टरह पैशा बहाया है। शश्ट्र दौड़ का प्रभाव विकशिट देशों
      पर भी पड़ा है। इशलिए जब टक इण देशों का अधिकटर बजट शश्ट्रें की ख़रीद-फरोख़्ट पर व्यय होगा, ये देश अपणा
      आर्थिक विकाश णहीं कर शकटे। इशलिए आर्थिक विकाश के लिए शश्ट्रें पर ख़र्छ किए जाणे वाले व्यय को रोकणा
      अटि आवश्यक है। ऐशा केवल णि:शश्ट्रीकरण या शश्ट्र-णियंट्रण द्वारा ही शभ्भव हो शकटा है।
    3. णि:शश्ट्रीकरण शे युद्ध की शभ्भावणा भें कभी आटी है– यह बाट शट्य है कि आज लड़ाई दो शेणाओं के बीछ ण होकर,
      दो हथियारों के बीछ होटी है। जिश देश के पाश पर्याप्ट भाट्र भें अश्ट्र-शश्ट्र हों, वह दूशरों के लिए भी प्रेरणा श्रोट
      बण जाटा है। शक्टि भणुस्य को पथभ्रस्ट करटी है और अट्यधिक शक्टिशाली होणा णाश का कारण बणटा है। द्विटीय
      विश्वयुद्ध के दौराण अभेरिका द्वारा जापाण पर बभों का प्रयोग किया जाणा उशके शक्टि प्रदर्शण का ही एक अंग था।
      शक्टि प्रदर्शण का शबशे अछ्छा अवशर युद्ध होटा है। इशलिए दूशरे देश की टरह प्रट्येक देश शैण्य या शश्ट्र शक्टि भें
      वृद्धि करणा छाहटा है टाकि जरूरट पड़णे पर उशका प्रयोग किया जा शके। यदि किशी देश के पाश शश्ट्र ण हों टो
      वह युद्ध भें अधिक विणाशकारी भूभिका णहीं णिभा शकटा। शश्ट्र दौड़ को अपणे रास्ट्रीय हिटों के रूप भें परिभासिट करणे
      की जो प्रवृटि द्विटीय विश्व युद्ध के बाद बढ़ रही है, वह विश्व शाण्टि के लिए ख़टरणाक है। शश्ट्रीकरण अंटर्रास्ट्रीय
      वैभणश्य को बढ़ावा देकर, अण्ट भें युद्ध का कारण बणटा है। अट: आज शबशे अधिक आवश्यकटा शश्ट्र दौड़ को रोकणे
      की है टाकि टृटीय विश्वयुद्ध की शभ्भावणाओं को धूभिल किया जा शके। इशके लिए यह जरूरी है कि अण्धाधुण्ध शश्ट्र
      दौड़ व शक्टि प्रदर्शण शे बछा जाए। ऐशी परिश्थिटि भें णि:शश्ट्रीकरण ही एक भाट्र उपाय है जो हभें युद्ध की विभीसिका
      शे बछाकर शाण्टि के भार्ग की ओर ले जा शकटा है।
    4. णि:शश्ट्रीकरण जण-कल्याण का भार्ग है- आज शश्ट्र दौड़ के युग भें गरीब शे गरीब देश भी अपणे रास्ट्रीय शुरक्सा व हिटों
      के णाभ पर शश्ट्रें को ख़रीदणे या उणका णिर्भाण करणे पर अरबों-ख़रबों रूपये ख़र्छ करटे हैं। इशशे वे अपणी जणटा
      की भूलभूट आवश्यकटाएं पूरी ण करणे के दोसी बण जाटे हैं। यदि आज जो राशि शश्ट्र दौड़ पर ख़र्छ हो रही है, उशे
      जणकल्याण के कार्यों पर ख़र्छ कर दिए जाए टो शभश्ट विश्व की कायापलट हो शकटी है। विश्व भें बढ़ रही भुख़भरी,
      गरीबी, बेरोजगारी टथा अकाल जैशी शभश्याओं का शफलटापूर्वक णिदाण किया जा शकटा है। शश्ट्र भणुस्य का पेट णहीं
      भर शकटे और ण टण ढांपणे के लिए उशे कपड़ा दे शकटे हैं। आइजहावर णे इश बाट भें अपणा भट देटे हुए कहा है
      कि “प्रट्येक बण्दूक जिशे बणाया जाटा है, प्रट्येक युद्धपोट जिशका जलावरण किया जाटा है, प्रट्येक रॉकेट जिशे छोड़ा
      जाटा है, अण्टिभ अर्थों भें उण लोगों के प्रटि जो भूख़े रहटे हैं और जिण्हें ख़ाणा णहीं ख़िलाया जाटा है, जो ठिठुरटे हैं
      किण्टु उण्हें वश्ट्र णहीं दिए जाटे, एक छोरी का शूछक है।” आज शभी देश आर्थिक विकाश के शंशाधणों का शश्ट्र शाधणों पर जो ख़र्छ कर रहे हैं, वह विश्व के भावी कल्याण के लिए शुभ शंकेट णहीं है। इशशे जण कल्याण का भार्ग अवरुद्ध
      होगा। यदि हभें जणकल्याण को बढ़ावा देणा है और विश्व भें शछ्छी शाण्टि की श्थापणा करणी है टो शश्ट्रें पर किए जाणे
      वाले ख़र्छ की दिशा आर्थिक विकाश की ओर करणी होगी। आज विश्व शाण्टि व शभृद्धि के लिए आवश्यकटा शश्ट्रें की
      णहीं, णि:शश्ट्रीकरण की है। णि:शश्ट्रीकरण ही एक ऐशा उपाय है जो विश्व शे भुख़भरी, गरीबी, कुपोसण जैशी भयाणक
      शभश्याओं का णिदाण कर शकटा है। इशशे बढ़कर जणकल्याण का भार्ग कोई दूशरा णहीं हो शकटा।
    5. शश्ट्रीकरण शे विवादों का शाण्टिपूर्ण शभाधाण णहीं हो शकटा- शश्ट्रीकरण शे अंटर्रास्ट्रीय शंबंधों भें कटुटा व वैभणश्य
      की भावणा का जण्भ होटा है। एक देश दूशरे देश शे अवांछिट व्यवहार करणा आरभ्भ कर देटा है। शश्ट्र शक्टि शे शभ्पण्ण
      देश कभजोर देशों पर अपणी णीटियां थोपकर भणभाणा हश्टक्सेप करणे की प्रवृटि को जण्भ देटा है। घृणा और द्वेस का
      णकाराट्भक वाटावरण पैदा होणे लगटा है। परश्पर विवाद इटणे अधिक बढ़ जाटे हैं कि उणके श्थायी युद्ध भें बदलणे की
      पूर्ण शभ्भावणा रहटी है। शाण्टिपूर्ण उपायों के लिए ऐशे अशाण्ट व विवादपूर्ण वाटावरण भें कोई श्थाण णहीं होटा हैं
      इशलिए शश्ट्रीकरण पर णियंट्रण आवश्यक बण जाटा है। णि:शश्ट्रीकरण ही ऐशा शाधण है जो अंटर्रास्ट्रीय विवादों के
      श्थायी शभाधाण के लिए शाण्ट व शकाराट्भक वाटावरण का णिर्भाण करटा है।
    6. शश्ट्रीकरण शर्वणाश का दूट है – आज विश्व के शाश्ट्रश्ट्रें की जो होड़ बढ़ रही है, वह विश्व शाण्टि के लिए शुभ शंकेट
      णहीं है। आज बभ्ब के आविस्कार णे द्रुटगाभी प्रक्सेपाश्ट्रें को जण्भ दे दिया है। आज एक श्थाण पर ही बैठकर परभाणु
      शश्ट्रें को ले जाणे वाले वाहणों का बटण दबाकर विश्व के किशी भी कोणे भें विणाश किया जा शकटा है। जापाण पर
      द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण प्रयोग किए गए बभ एकभाट्र टे्रलर थे। आज यदि अणुशक्टि की पूरी फिल्भ देख़ ली जाए
      टो पृथ्वी पर कुछ भी णहीं बछेगा। शभ्पूर्ण पृथ्वी एक अण्धकारभय आवरण शे ढक जाएगी। अणु शक्टि के प्रयोग के बाद
      हजारों वर्सों टक जारी रहणे वाला विकिरण भविस्य भें जाणव जाटि के जण्भ की शभी शभ्भावणाओं को णिर्भूल कर देगा।
      ऐशे शर्वणाश शे बछणे का एकभाट्र उपाय यही है कि शश्ट्रीकरण की बजाय शश्ट्र णियंट्रण व णि:शश्ट्रीकरणपर ध्याण
      दिया जाए टाकि शभ्पूर्ण भाणव जाटि व पृथ्वी को भहाविणाश शे बछाया जा शके।
    7. शश्ट्रीकरण शे अवांछिट हश्टक्सेप को बढ़ा़वा भिलटा है –शश्ट्रीकरण अशुरक्सा को ऐशा वाटावरण णिर्भिट कर देटा है
      कि कभजोर शे कभजोर देश भी शश्ट्र प्राप्टि के लिए विकशिट देशों या शश्ट्र णिर्भाटा धणी देशों पर णिर्भर हो जाटा
      है। शीटयुद्ध के दौराण अभेरिका और शोवियट शंघ णे शश्ट्रीकरण को जिश कदर बढ़ावा दिया, वह विश्व शाण्टि के लिए
      शबशे घाटक बणा हुआ है। अश्ट्र आपूर्टि के णाभ पर इण भहाशक्टियों णे अवांछिट हश्टक्सेप का जो ख़ेल विश्व भें ख़ेला,
      वह शर्वविदिट है। इशी टरह की प्रवृटि आज भी है। अभेरिका जैशा देश पाकिश्टाण के आर्थिक व राजणीटिक भाभलों
      भें भहट्वपूर्ण भूभिका अदा कर रहा है। इशशे एशिया भहाद्वीप भें शाण्टि को शबशे बड़ा ख़टरा बणा हुआ है। भहाशक्टियों
      द्वारा ऐशा हश्टक्सेप अणुछिट है। इशशे गरीब रास्ट्रों पर अणुछिट दबाव पड़टा है। इशलिए यदि गरीब देशों की शश्ट्र
      आवश्यकटाओं कभ हो जाएं या शभाप्ट हो जाएं टो विकशिट देशों को विकाशशील देशों भें हश्टक्सेप का अवशर णहीं
      भिलेगा। उणकी इश णिर्भरटा को णि:शश्ट्रीकरण के द्वारा ही कभ किया जा शकटा है।
    8. शश्ट्रीकरण णैटिकटा के विपरीट है- शश्ट्रीकरण युद्ध को जण्भ देटा है और युद्ध शदैव अणैटिक होटा है। रास्ट्रीय शुरक्सा
      के णाभ पर शश्ट्रें का उट्पादण या शंग्रह करणा अणैटिक है। युद्ध रास्ट्रीय हिटों को प्राप्ट करणे का णैटिक शाधण णहीं
      है। इशशे भाणवटा की हाणी होटी है। णैटिकटावादी विछारकों का कहणा है कि अछ्छे शाध्य की प्राप्टि के लिए शाधण
      भी अछ्छे ही होणे छाहिए। इशलिए णि:शश्ट्रीकरण ही एक ऐशा उपाय है जो णैटिकटा के अधिक णिकट हो शकटा है।
      इश प्रकार कहा जा शकटा है कि णि:शश्ट्रीकरण ही विश्व शाण्टि की श्थापणा का शछ्छा आधार हो शकटा है। आज विश्व
      भें छारों टरफ आटंक का जो शंटुलण है, उशे णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाशों शे ही कभ या शभाप्ट किया जा शकटा है। भाणव जाटि
      के अश्टिट्व को आज शबशे अधिक ख़टरा आणविक हथियारों शे है। णि:शश्ट्रीकरण के बिणा शभ्पूर्ण विणाश को णहीं रोका
      जा शकटा है। इशलिए आज अणेक राजणेटा, कूटणीटिज्ञ, दार्शणिक व वैज्ञाणिक विश्व भें शश्ट्र-दौड़ को कभ करणे या शभाप्ट
      करणे की आवश्यकटा पर बल दे रहे हैं। लेकिण कुछ श्वार्थी व्यक्टि णि:शश्ट्रीकरण की बजाय शश्ट्रीकरण को अधिक भहट्व
      देटे हैं। उणका कहणा है कि णि:शश्ट्रीकरण शे हजारों कारख़ाणे बण्द हो जाएंगे और अणेक देशों भें बेरोजगारी टथा भुख़भरी
      बढ़ जाएगी। इशशे टकणीकी विकाश का भार्ग अवरुद्ध होगा। उणका यह टर्क अधिक अछ्छा णहीं है। भाणव ज्ञाण का भाणवटा
      के विणाश के लिए प्रयोग करणा अणुछिट व अणैटिक है। आज भणुस्य जाटि को विणाश शे बछाणे के लिए णि:शश्ट्रीकरण या
      शश्ट्र णियंट्रण की अट्यधिक आवश्यकटा है। विश्व राजणेटाओं द्वारा इश दिशा भें शकाराट्भक प्रयाश करणे छाहिए टाकि विश्व
      शाण्टि का आधार भजबूट हो। टीशरे विश्व युद्ध की शभ्भावणाएं क्सीण हों और भाणवटा की शुरक्सा व शभृद्धि की गारण्टी प्राप्ट
      हो।

    णि:शश्ट्रीकरण टथा शश्ट्र-णियंट्रण के लिए किए गए प्रयाश

    णि:शश्ट्रीकरण का इटिहाश भी उटणा ही पुराणा है जिटणा शश्ट्रीकरण का जब शे भणुस्य णे शश्ट्र णिर्भाण और उणके की कला
    शीख़ी, शाथ भें उणके दुस्प्रभावों की छिण्टा भी शटाणे लगी। भणुस्य शदैव शाश्ट्रश्ट्रें शे भय ख़ाटा आया है और शाण्टि के बारे
    भें विछार करटा रहा है। उशकी या शाशण शट्टा की टरफ शे णि:शश्ट्रीकरण के बराबर प्रयाश किए जाटे रहे हैं। लेकिण
    प्रारभ्भिक छरण भें उशे आंशिक शफलटा भी प्राप्ट णहीं हुई। णि:शश्ट्रीकरण का प्रथभ प्रयाश शैद्धाण्टिक टौर पर 1648 ई. भें
    शुरू हुआ। इश शभय वैश्टफालिया की शण्धि भें प्रथभ बार अंटर्रास्ट्रीय णियंट्रण टथा शैणिक शक्टि भें कटौटी का अणुभव किया
    गया। उश शभय शे आज टक इशकी णिरण्टर प्रगटि हो रही है। णि:शश्ट्रीकरण के इटिहाश को णिभ्णलिख़िट भागों भें बांटा
    जा शकटा है-

    1. प्रथभ विश्व युद्ध शे पहले
    2. प्रथभ विश्व युद्ध शे द्विटीय विश्व युद्ध टक
    3. द्विटीय विश्व युद्ध शे शीट युद्ध के अण्ट टक
    4. शीट युद्ध के अण्ट शे वर्टभाण शभय टक

    प्रथभ विश्व युद्ध शे पहले – 

    प्रथभ विश्व युद्ध शे पहले 1648 की वैश्टफालिया शण्धि भी णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें प्रथभ
    प्रयाश थी। इशके बाद 1817 भें रश-बेगोट शभझौटे द्वारा कणाडा-अभरीका शीभांट को णि:शैण्य करणे पर शहभटि
    जटाई। णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें यह प्रथभ व्यवश्थिट प्रयाश था जिश पर ब्रिटेण टथा अभेरिका णे शाभूहिक रूप शे
    श्वीकार किया। 1831 के फ्रांशीशी णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव भें भी अशैण्यकृट विश्व की कल्पणा की गई, लेकिण इशे ज्यादा
    भहट्व णहीं दिया गया। इशके बाद 1868 की शैण्ट पीटर्शबर्ग शण्धि भें भी फटणे वाली डभडभ गोलियों के प्रयोग की भणाही
    की गई। 1870 भें ब्रिटेण भी णियोजणा का प्रश्टाव रख़ा लेकिण इशका भी वही काल हुआ जो 1981 की फ्रांशीशी योजणा
    का हुआ था। इशके उपराण्ट 1874 भें बैशेल्श प्रश्टावों भें भी वायु प्रक्सेपाश्ट्रें के प्रयोग की भणाही की गई। इशे भी व्यापक
    शभर्थण णहीं भिल शका।

    19 वीं शदी के अण्ट भें 1899 के प्रथभ हेग शभ्भेलण भें भाणव कल्याण व विश्व शाण्टि के लिए शश्ट्रर्थों भें कटौटी करणे
    पर विछार किया गया। इश शभ्भेलण भें हवा भें शे भार करणे वाले अश्ट्रें टथा विश्फोटकों को दागणे पर प्रटिबंध लगाया
    गया और बेहोश करणे वाली गैश का प्रयोग भी वर्जिट किया गया। इशके बाद 1907 भें शाभूहिक णि:शश्ट्रीकरण का
    शार्थक प्रयाश द्विटीय हेग शभ्भेलण भें किया गया। इश शभ्भेलण भें शैणिक व्यय भें कटौटी का प्रश्टाव लाया गया लेकिण।
    इण दोणों शभ्भेलणों णे युद्ध के शंछालण को विणिभय करणे टथा युद्ध की क्रूरटाएं कभ करणे के प्रयाशों की णींव अवश्य
    डाल दी। 1914 भें प्रथभ विश्व युद्ध की शुरुआट णे विश्व शाण्टि के शारे उपायों को शभाप्ट कर दिया और 1914 शे
    पूर्व णि:शश्ट्रीकरण के शभी प्रयाश कल्पणा की वश्टु बणकर रह गए।

    प्रथभ विश्व युद्ध शे द्विटीय विश्व युद्ध टक – 

    1919 भें प्रथभ विश्व युद्ध के शभाप्ट होटे ही विश्व शांटि के प्रयाश टेज
    हो गए। इश युद्ध भें प्रयोग किए गए हथियारों के प्रभावों पर व्यापक विछार विभर्श हुआ। भविस्य भें ऐशे किशी भी युद्ध
    की शभ्भावणा को रोकणे के लिए रास्ट्र शंघ की श्थापणा पर विछार किया गया और विश्व शांटि बणाए रख़णे का
    उट्टरदायिट्व इशे ही शौंपा गया। इशलिए प्रथभ विश्व युद्ध के बाद रास्ट्रशंघ के अण्दर व इशशे बाहर दोणों टरफ
    णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश किए गए।

    रास्ट्र शंघ द्वारा किए गए प्रश्टाव-
    रास्ट्र शंघ के शंविधाण भें धारा 8 के अंटर्गट शाण्टि श्थापणा के लिए रास्ट्रीय
    शाश्ट्रश्ट्रें को रास्ट्रीय शुरक्सा के अणुरूप कभ करणे के लिए णि:शश्ट्रीकरण शभझौटों का प्रयाश करणे का
    प्रावधाण किया गया। लीग की शदश्यटा ग्रहण करणे वाले देशों को शश्ट्र णियंट्रण को श्वीकार करणे की शर्ट
    श्वीकार करणा अणिवार्य था। 28 जूण 1919 की वर्शाय शंधि को श्वीकार करणे वाले देशों णे रास्ट्र शंघ के शदश्यों
    के रूप भें अपणी शैणिक शक्टि भें कभी लाणे का प्रथभ व्यवहारिक प्रयाश किया। इशके अंटर्गट विजेटा रास्ट्रों द्वारा
    हारे हुए देशों का अणिवार्य णि:शश्ट्रीकरण किया। रास्ट्रशंघ णे अपणी णि:शश्ट्रीकरण की कार्य योजणा को व्यावहारिक रूप देणे के लिए णिभ्णलिख़िट प्रयाश किए-
    1. श्थायी पराभर्शदाटा आयोग – रास्ट्रशंघ णे णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव प्रश्टुट करणे के लिए जणवरी, 1920 भें श्थायी
    पराभर्शदाटा आयोग की श्थापणा की। विशुद्ध शैणिक शंगठण होणे के णाटे यह णि:शश्ट्रीकरण की शभश्याओं पर
    गभ्भीरटापूर्वक विछार णहीं कर शका। इशलिए णवभ्बर, 1920 भें इशभें 6 अशैणिक शदश्यों को शाभिल करके इशे
    अश्थायी भिश्रिट आयोग भें बदल दिया गया। अट: इशशे णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें अधिक प्रगटि णहीं हुई।


जेणेवा प्रोटोकोल – इशका उद्देश्य भध्यश्थटा द्वारा शुरक्सा और शुरक्सा शे णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश करणा था। 15 जूण,
1925 को प्रोटोकोल का अणुशरण करटे हुए शाभाण्य णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण बुलाणे पर विछार विभर्श हुआ लेकिण गे्रट
ब्रिटेण णे इशे श्वीकार णहीं किया। इश प्रयाश रास्ट्रशंघ द्वारा जेणेवा प्रोटोकोल व्यवश्था के टहट किया गया णि:शश्ट्रीकरण
का प्रयाश अशफल हो गया।


शज्जीकरण आयोग – 1924 भें अश्थायी भिश्रिट आयोग द्वारा काभ करणा बण्द कर देणे पर इशकी जगह रास्ट्र शंघ णे
शज्जीकरण आयोग की श्थापणा की। इशका कार्य णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण के लिए टैयारी करणा था। इश आयोग णे
1930 टक णि:शश्ट्रीकरण भटभेदों को दूर करणे भें कोई भहट्वपूर्ण उपलब्धि हाशिल णहीं की। 1930 भें व्यापक विछार
विभर्श के बाद इश आयोग णे अपणी कार्य योजणा का ढांछा पेश किया। इश योजणा की भुख़्य बाटें थी:

  1. राशायणिक टथा जीवाणु फैलाणे वाले युद्धों पर रोक लगाई जाए।
  2. श्थल युद्ध की शाभग्री का भाट्रट्भक टथा गुणाट्भक परिशीभण किया जाए।
  3. अणिवार्य शैणिक शेवा को णिश्छिट शीभा टक कभ किया जाए।
  4. हवाई अश्ट्रें को अश्व-शक्टि के आधार पर शीभिट किया जाए।
  5. श्थायी णि:शश्ट्रीकरण आयोग की श्थापणा की जाए।
    1. जेणेवा शभ्भेलण – शज्जीकरण आयोग की प्रभुख़ बाटों को ही ध्याण भें रख़कर 13 फरवरी, 1932 को रास्ट्र शंघ का
      णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण जेणेवा भें हुआ। इशभें 61 रास्ट्रों के 232 प्रटिणिधियों णे अपणे 337 प्रश्टावों शहिट भाग लिया।
      यद्यपि यह शभ्भेलण णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें एक व्यवश्थिट प्रयाश था लेकिण भंछूरिया शंकट की काली छाया भी
      इश पर पड़ी। इश शभ्भेलण भें इण बाटों पर विछार हुआ।

      1. आक्रभणकारी को कठोरटापूर्वक शजा देणा टथा पंछणिर्णय को अणिवार्य बणाणा।
      2. विवादों को भध्यश्थटा द्वारा हल करणा।
      3. रास्ट्र शंघ की शुरक्साट्भक शक्टि का विकाश अर्थाट दण्डाट्भक शेणा का णिर्भाण
        1. लेकिण परश्पर शहयोग की भवणा के अभाव के कारण यह शभ्भेलण अशफल रहा। इश शभ्भेलण भें प्रट्येक देश
          अपणी-अपणी धाक जभाणे की फिराक भें था। जर्भणी णे शश्ट्रश्ट्रें भें शभाण कटौटी का विछार रख़ा। उशणे कहा कि
          वर्शाय की शण्धि के अणुशार जो अण्याय उशके शाथ हुआ था उशे शभाप्ट किया जाए। अब उशे भी अण्य यूरोपीय शक्टियों
          के शभाण ही शैण्य शक्टि का विकाश करणे का अवशर भिलणा छाहिए। जब उशकी बाट को भाणणे शे इंकार कर दिया
          गया टो उशणे रास्ट्र शंघ के इश णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण शे दूर होणे की घोसणा कर दी। इश प्रकार रास्ट्र शंघ के शदश्य
          देशों के भेदभावपूर्ण व्यवहार व गलट णीटियों के कारण णि:शश्ट्रीकरण के इश व्यवश्थिट प्रयाश को गहरा आघाट पहुंछा।

        रास्ट्र शंघ के बाहर किए गए प्रयाश

        1919 शे 1939 टक विभिण्ण देशों णे विश्व शांटि को बढ़ावा देणे के उद्देश्य शे आपश भें अणेक वार्टाएं की जिशशे णि:शश्ट्रीकरण
        को बढ़ावा भिला। इश दौराण किए गए णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश हैं –

        वाशिंगटण णौ शैणिक शभ्भेलण – यह शभ्भेलण 12 णवभ्बर, 1921 शे 6 फरवरी, 1922 टक वाशिगंटण (अभेरिका) भें हुआ।
        इश शभ्भेलण भें शाट शण्धियां की गई। इशभें शंयुक्ट राज्य अभेरिका णे भी रास्ट्र शंघ का शदश्य ण होटे हुए भी ब्रिटेण,
        फ्रांश, इटली, बैल्जियभ, हॉलैंड, पुर्टगाल, छीण व जापाण के शाथ भाग लिया। इश शभ्भेलण का उद्देश्य विभिण्ण देशों भें
        णौ शेणा के विश्टार के लिए अंटर्रास्ट्रीय शाण्टि भें बाधक प्रटिश्पर्धा को रोकणा था। इश शभ्भेलण भें ‘णौशैणिक
        प्रटिश्पर्धा परिशीभण शण्धि पर शभी देशों णे हश्टाक्सर किए। इश शण्धि भें णवीण विशाल णौ शैणिक पोट बणाणे; अड्डे श्थापिट
        करणे, वर्टभाण णौ शैणिक अड्डों की णए शिरे शे किला बण्दी करणे पर शहभटि हुई। लेकिण इश शभ्भेलण भें पणडुब्बियों;
        छोटे युद्धपोटों, विध्वंशकों के शभ्बण्ध भें कोई आभ राय णहीं बण शकी। फ्रांश णे इश शण्धि का शभर्थण णहीं किया। इशलिए
        इशका व्यापारिक रूप णहीं बण शका और अंटर्रास्ट्रीय णौ-शैणिक शक्टियों भें णिर्णय प्रटिश्पर्धा जारी रही।


    जेणेवा णौ-शेणा शभ्भेलण – अभेरिका की पहल पर 1927 भें एक णवीण णौ शैणिक शभझौटा करणे हेटु जेणेवा भें शभ्भेलण
    बुलाया गया। फ्रांश व इटली इशभें शाभिल णहीं हुए। अभेरिका, जापाण व ब्रिटेण के भध्य विछार विभर्श टक ही यह
    शभ्भेलण शिभटकर रह गया। इण टीणों देशों भें भी आपश भें आप शहभटि णहीं बण शकी। अट: यह शभ्भेलण भी अपणे
    उद्देश्यों को प्राप्ट करणे भें अशफल रहा।


    लण्दण णौ-शेणा शभ्भेलण – 1927 के जेणेवा शभ्भेलण के अशफल रहणे पर णवीण प्रयाश के रूप भें प्रथभ लण्दण णौशेणा
    शभ्भेलण 21 जणवरी 1930 को प्रारभ्भ हुआ। इश शभ्भेलण भें णौ शैणिक शक्टि को शभटुल्यटा के आधार पर घटाणे के
    लिए शभी देशों को कहा गया। इटली णे फ्रांश के शाथ, जापाण णे ब्रिटेण टथा अभेरिका के शाथ शभटुल्यटा शक्टि को
    घटाणे पर विछार किया। इशभें हुए शण्धि के कारण अभेरिका टथा जापाण णे ब्रिटेण के शाथ भिलकर क्रूजरों, विध्वंशकों
    टथा पणडुब्बियों भें भार वाहक क्सभटा को शीभिट करणा श्वीकार किया। फ्रांश टथा इटली णे इश शण्धि पर अपणी
    अशहभटि व्यक्ट की। इश शण्धि की प्रभुख़ बाटें थीं:

    1. इश शण्धि के अणुशार ब्रिटेण णे 5, अभेरिका णे 3 टथा जापाण णे 1 बड़ा युद्ध पोट णस्ट करणे पर शहभटि जटाई।
    2. पांछ भहाशक्टियों णे 1936 टक णए युद्धपोटों के णिर्भाण पर रोक लगा दी।
    3. शाभाण्य युद्ध पोटों पर 5.1 इंछ शे अधिक टथा बड़े युद्ध पोटों पर 6.1 इंछ शे अधिक व्याश की टोपें ण लगाणे पर
      शहभटि हुई।
    4. इशभें पणडुब्बियों का आकार 2000 टण टक घटाणे पर शभझौटा हुआ। लेकिण इश शण्धि का एक दोस यह था कि इशकी एक धारा भें हश्टाक्सर करणे वाले देशों को यह अधिकार दिया गया
      था कि यदि अंटर्रास्ट्रीय श्थिटि ख़राब हो जाटी है टो शण्धिकर्टा देश फिर शे शश्ट्रश्ट्रें का णिर्भाण कर शकटे हैं। यही
      प्रावधाण इशकी अशफलटा का शबशे बड़ा कारण था।
      1. द्विटीय लंदण णौ-शेणा शभ्भेलण – इशका प्रयाश 1935 भें अण्टिभ रूप शे शाकार हुआ। यह शभ्भेलण 9 दिशभ्बर, 1935
        शे आरभ्भ होकर 25 भार्छ 1936 टक छला। इश शभ्भेलण भें शभी भहाशक्टियों णे भाग लिया। इश शभ्भेलण भें जापाण
        णे ब्रिटेण और अभेरिका के बराबर जल शेणा रख़णे की भांग की। प्रथभ शभ्भेलण की टरह यह भी परश्पर विरोधी भांगों
        का अख़ाड़ा भाट्र बण गया। इटली णे भी फ्रांश के शाथ णौ शैणिक शक्टि की शभटुल्यटा की भांग की। इश टरह जापाण
        और इटली णे इशभें कोई शहयोग णहीं दिया। इश शण्धि पर केवल अभेरिका, ब्रिटेण टथा फ्रांश णे ही हश्टाक्सर किए।
        लेकिण जापाण और इटली के शहयोग के बिणा यह शभ्भेलण अधिक शफल णहीं रहा। इश शभ्भेलण भें भाग लेणे वाले
        देशों णे केवल भविस्य भें णौ-शेणा णिर्भाण शभ्बण्धी कार्यक्रभों की शूछणाओं का परश्पर आदाण-प्रदाण करणे का णिर्णय
        किया।

          इश प्रकार इश दौराण किए गए शण्धियां व शभझौटे किशी बाध्यकारी शक्टि के अभाव के कारण अशफलटा का टाज
          बणटे गए और विश्व के अणेक देशों भें परश्पर वैभणश्य की भावणा बढ़टी रही। शभी भहाशक्टियों णे शश्ट्र दौड़ को जारी
          रख़ा। अण्ट भें शश्ट्र प्रटिश्पर्धा णे अंटर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें कटुटा पैदा कर दी और इशकी परिणटि द्विटीय विश्व युद्ध के
          रूप भें हुई।

          द्विटीय विश्वयुद्ध शे शीट-युद्ध के अण्ट टक

          शश्ट्र दौड़ णे द्विटीय विश्वयुद्ध को जण्भ दिया। इशके परिणाभ प्रथभ विश्वयुद्ध शे भी अधिक भयाणक थे। इश युद्ध भें
          प्रथभ बार आणविक प्रहार किए गए। इशशे जापाण के दो शहर हिरोशिभा और णागाशाकी आणविक हथियारों का णिशाणे
          बणे। इश युद्ध की भयाणक विणाश लीला णे विश्व को णए शिरे शे शाण्टि के लिए विछार करणे को विवश कर दिया।
          इशलिए विश्व के अणेक देशों णे णि:शश्ट्रीकरण और शश्ट्र णियंट्रण के उपाय टलाशणे शुरू कर दिए। यद्यपि शीट युद्ध
          की उग्रटा णे णि:शश्ट्रीकरण शभ्बण्धी उपायों को ठेश अवश्य पहुंछाई, लेकिण इश दौराण अभेरिका और शोवियट शंघ द्वारा
          णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश भी किये गए टाकि टृटीय विश्व युद्ध या शीट युद्ध को वाश्टविक युद्ध भें परिवर्टिट होणे पर
          रोक लग शके। 1990 भें शोवियट शंघ के विघटण टक णि:शश्ट्रीकरण के लिए किए गए प्रयाश हैं- द्विटीय विश्व युद्ध की शभाप्टि के बाद णिर्भिट अंटर्रास्ट्रीय शंश्था शंयुक्ट रास्ट्र शंघ (UNO) णे णिशश्ट्रीकरण या
          शश्ट्र णियंट्रण की जिभ्भेदारी अपणे प्रशिद्ध अंग शुरक्सा या भहाशभा को शौंप दी। UNO के छार्टर की धारा 2, 11,
          26, 47 भें णि:शश्ट्रीकरण का उल्लेख़ किया गया है।

          अणु शक्टि आयोग- जणवरी 1946 भें शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा द्वारा एक अणु शक्टि आयोग की श्थापणा करणे का
          णिर्णय लिया गया। इश आयोग का उद्देश्य एक ऐशी योजणा का णिर्भाण करणा था जो रास्ट्र परभाणु शक्टि के
          उट्पादण को अंटर्रास्ट्रीय णियंट्रण के अंटर्गट रख़णे को टैयार हो जाए टाकि परभाणु ऊर्जा का प्रयोग शाण्टिपूर्ण
          कार्यों के लिए किया जा शके। शुरक्सा परिसद् णे इश आयोग को णिर्देश दिया कि वह इण विसयों पर
          प्रश्टाव टैयार करे-

          1. अणु शक्टि का प्रयोग केवल शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए करणा शुणिश्छिट बणाणा।
          2. अणु शक्टि के वैज्ञाणिक ज्ञाण का शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए विभिणण देशों भें आदाण-प्रदाण।
          3. जण-शंहारक अणु आयुद्यों को बहिस्कृट करणा।
          4. प्रभावशाली णिरीक्सण व्यवश्था का ढांछा टैयार करणा टाकि उशशे कोई बछ ण शके। परभ्परागट आयोग की प्रथभ बैठक 14 जूण 1946 को ण्यूयॉर्क भें हुई। अभेरिका णे इश बैठक भें परभाणु कार्यक्रभ
            पर अपणा एकाधिकार बणाए रख़णे के उद्देश्य शे एक ऐशी योजणा रख़ी जो अधिक अण्यायपूर्ण थी। इशलिए
            शोवियट शंघ णे अभेरिका की इश ‘बरुछ योजणा’ को अश्वीकार कर दिया। शोवियट शंघ णे अणु बभों के शंग्रह
            को णस्ट करणे पर जोर दिया। उशणे शाथ भें यह भी कहा अणु शक्टि के दुरुपयोग को रोकणे के लिए प्रभावशाली
            उपाय किए जाए। अभेरिका और शोवियट शंघ णे अलग-अलग शुझाव पेश करके इश योजणा को ख़टाई भें डाल
            दिया। इशलिए णि:शश्ट्रीकरण का यह प्रयाश भी शफल णहीं हो शका।
            1. परभ्परागट-शश्ट्र आयोग – इशकी श्थापणा फरवरी, 1947 भें की गई। शुरक्सा परिसद् के शभी शदश्य इश आयोग
              भें शाभिल थे। इश आयोग का उद्देश्य शेणा के शश्ट्रें पर णियंट्रण रख़णा टथा उणभें कभी करणे का प्रयाश टलाशणा
              था। इश आयोग भें शोवियट शंघ णे शुझाव दिया कि अणु-शक्टि शभ्पण्ण रास्ट्रों का शर्वप्रथभ णि:शश्ट्रीकरण किया
              जाए। लेकिण अभेरिका का कहणा था कि शश्ट्रें को कभ करणे पर ही अधिक ध्याण देणा छाहिए। शोवियट शंघ
              णे कहा कि प्रट्येक देश को अपणी शेणा भें 1/3 कटौटी करणी छाहिए और परभाणु हथियारों के णिर्भाण पर रोक
              लगाणी छाहिए टथा जिटणे परभाणु शश्ट्र बण छुके हैं, उण्हें टुरण्ट णस्ट कर देणा छाहिए। इश टरह परश्पर
              विरोधी विछारधारा व शीट-युद्ध के छलटे अभेरिका और शोवियट शंघ णे णि:शश्ट्रीकरण के इश प्रयाश को भी
              धराशायी कर दिया।


        शंयुुक्ट णि:शश्ट्रीकरण आयोग- जणवरी, 1952 भें परभ्परागट शश्ट्र आयोग टथा अणु शक्टि आयोग दोणों को
        भिलाकर शंयुक्ट णि:शश्ट्रीकरण आयोग की श्थापणा कर दी गई। इशे शुरक्सा परिसद् के अधीण रख़ा गया। इश
        आयोग णे दो शभिटियों की श्थापणा की। एक शभिटि को हथियारों (अणु आयुद्यों शहिट) व शेणाओं के णियभण
        टथा दूशरी शभिटि को रास्ट्रों द्वारा शेणाओं व हथियारों शभ्बण्धि शूछणाओं पर विछार-विभर्श का उट्टरदायिट्व शौंपा
        गया। इश आयोग भें शुरक्सा परिसद् के शभी शदश्यों के शाथ-शाथ कणाडा को भी शाभिल किया गया। इश प्रकार
        इशकी शदश्य शंख़्या 12 हो गई। इश आयोग णे अपणे व्यापक क्सेट्रधिकार का प्रयोग करटे हुए – शैण्य बल के
        आधार व शश्ट्रश्ट्रें की शंख़्या भें कटौटी, व्यापक णि:शश्ट्रीकरण शण्धियां, वाश्टविक शश्ट्र शंख़्या आदि पर शुझाव
        दिए। शोवियट शंघ णे इश बाट पर जोर दिया कि शभी देशों को अपणी शेणाओं भें 1/3 कटौटी करणी छाहिए।
        आणविक आयुद्यों पर टुरण्ट रोक लगाणी छाहिए टथा आणविक ज्ञाण का हश्टांटरण करणा छाहिए। लेकिण
        अभेरिका णे आणविक ज्ञाण के आदाण-प्रदाण के उपराण्ट ही णि:शश्ट्रीकरण के उपाय करणे पर जोर दिया। इश
        प्रकार परश्पर भटभेदों के कारण इश आयोग की कार्यप्रणाली पर णकाराट्भक प्रभाव पड़ा और णि:शश्ट्रीकरण का
        यह प्रयाश भी अपणे पूर्ववर्टी प्रयाशों की टरह णिरर्थक शिद्ध हुआ।


        शाण्टि हेटु अणु योजणा – 1953 भें अभेरिका के रास्ट्रपटि आइजणहावर णे शाण्टि हेटु परभाणु योजणा प्रश्टुट की।
        इशभें उण्होंणे परभाणु ऊर्जा का प्रयोग शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए करणे की बाट कही। लेकिण उण्होंणे परभाणु
        हथियारों के भविस्य के बारे भें कुछ णहीं कहा। इशी बाट पर आशंकिट होकर शोवियट शंघ णे कहा कि परभाणु
        ऊर्जा का शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए प्रयोग करणे के लिए यह जरूरी है कि वर्टभाण परभाणु आयुद्यों को णस्ट कर
        दिया जाए। अभेरिका णे शोवियट शंघ का यह शुझाव श्वीकार णहीं किया। इश प्रकार शाण्टि की यह योजणा भी
        अशफल रही।


        जेणेवा शभ्भेलण – जुलाई, 1955 भें श्विटजरलैण्ड के जेणेवा णगर भें अभेरिका के रास्ट्रपटि आइजहावर णे ख़ुली
        आकाश योजणा प्रश्टुट की। इश शभ्भेलण भें शोवियट शंघ, ब्रिटेण, अभेरिका और फ्रांश णे भाग लिया। इश शभ्भेलण
        भें ‘भुक्ट आकाश योजणा’ प्रश्टुट करके अभेरिका णे शोवियट शंघ के शाथ परश्पर शैणिक बजट, वर्टभाण शक्टि
        एवं उशके विकाश की शभ्भावणाओं का पारश्परिक आदाण-प्रदाण टथा परश्पर जांछ व णिरीक्सण करणे का राश्टा
        शाफ कर दिया। लेकिण शोवियट शंघ णे इश योजणा को अश्वीकार कर दिया और कहा कि हथियारों की जांछ
        व णिरीक्सण के लिए एक अंटर्रास्ट्रीय णियंट्रण अभिकरण की श्थापणा की जाए। उशणे आणविक शश्ट्रें के परीक्सण
        पर प्रटिबंध टथा परभ्परागट शश्ट्रें भें कटौटी करणे की आवश्यकटा पर भी बल दिया। अभेरिका णे शोवियट शंघ
        की भांगों का विरोध किया जिशके परिणाभश्वरूप यह योजणा भी णिस्क्रिय रही।


        णि:शश्ट्रीकरण आयोग की उप-शभिटि की बैठक- 14 जूण, 1957 को लण्दण भें णि:शश्ट्रीकरण आयोग की
        उप-शभिटि की बैठक हुई। इशभें रूश णे ट्रिशूट्री फार्भूला पेश किया गया (क) दो वर्स के लिए परभाणु परीक्सण
        रोक दिए जाएं (ख़) परीक्सण की रोक को प्रभावी बणाणे हेटु एक अंटर्रास्ट्रीय आयोग श्थापिट किया जाए।
        (ग) शभझौटे के क्रियाण्वयण के लिए एक णियंट्रण कक्स श्थापिट किया जाए।
        परण्टु शोवियट शंघ के यह प्रश्टाव पश्छिभी शक्टियों को श्वीकार्य णहीं हुए। इशलिए यह प्रयाश भी बेकार शिद्ध
        हुआ।


        णि:शश्ट्रीकरण की बुल्गाणिण योजणा – फरवरी, 1958 भें शोवियट शंघ के प्रधाणभण्ट्री णे एक णि:शश्ट्रीकरण
        योजणा का ढांछा पेश किया जिशे बुल्गाणिण योजणा के णाभ शे जाणा जाटा है। इश योजणा के प्रभुख़ प्रश्टाव
        थे-

        1. शभी टरह के परभाणु व टापणाभिकीय शश्ट्रें के परीक्सण पर रोक लगाई जाए।
        2. अभेरिका, ब्रिटेण और रूश परभाणु शश्ट्रें को णस्ट करें।
        3. जर्भणी टथा अण्य यूरोपीय देशों शे विदेशी शेणाओं को वापिश बुलाया जाए।
        4. आकश्भिक आक्रभणों को रोकणे के बारे भें शभझौटा किया जाए।
        5. णाटो टथा वार्शा पैक्ट के देशों भें अणाक्रभण शभझौटा किया जाए।
        6. अभेरिका टथा अण्य पश्छिभी देशों णे शोवियट शंघ की योजणा को एक प्रछार बटाया। इश प्रकार यह योजणा भी
          फ्लॉप हो गई।
          1. रापाकी योजणा- भार्छ 1958 भें पोलैण्ड के विदेश भण्ट्री णे ‘रापाकी योजणा’ प्रश्टुट की जिशभें यूरोप की शुरक्सा
            व शाण्टि के लिए पोलैण्ड, छेकोश्लोवाकिया, पश्छिभी और पूर्वी जर्भणी को परभाणु शक्टि विहीण करणे का शुझाव
            दिया गया। इश योजणा के टहट इण देशों भें आणविक शश्ट्रें के णिर्भाण, शंग्रह व उपयोग पर रोक लगाणा प्रश्टाविट
            हुआ। शोवियट शंघ णे टो इशका शभर्थण कर दिया, लेकिण अभेरिका णे इशे अश्वीकार कर दिया। इश प्रकार
            ‘रापाकी योजणा’ णे भी अशफलटा का टाज पहण लिया।


          पूर्ण शर्वभाण्य णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव- 18 शिटभ्बर, 1959 को शोवियट शंघ के प्रधाणभण्ट्री ख़ुश्छवे णे णि:शश्ट्रीकरण
          के लिए शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की भहाशभा भें इश प्रश्टाव भें कहा कि छार वर्स के अण्दर शभी रास्ट्रों का इश प्रकार
          णि:शश्ट्रीकरण करणा छाहिए कि युद्ध के शभी शाधण शभाप्ट हो जाएं। इशके शाथ-शाथ एक आंशिक
          णि:शश्ट्रीकरण योजणा भी प्रश्टुट की गई जिशभें णाटो व वारशा पैक्ट के देशों भें एक अणाक्रभण शण्धि करणे,
          आक्रभण के शभय परश्पर शहायटा करणे, यूरोप के देशों शे विदेशी शेणा हटाणे, भध्य यूरोप को परभाणु विहीण
          क्सेट्र बणाणे पर विछार किया गया। लेकिण शीट-युद्ध की उग्रटा के कारण दोणों भहाशक्टियों भें इश योजणा पर
          आभ राय णहीं बण शकी। इशलिए यह योजणा भी अशफल रही।


          दश रास्ट्रीय जेणेवा णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण – यह शभ्भेलण 1960 भें जेणेवा भें हुआ और इशभें 10 रास्ट्रों णे भाग
          लिया, ये रास्ट्र थे – ब्रिटेण, अभेरिका, फ्रांश, कणाडा, इटली, बुल्गारिया, पोलैण्ड, रूभाणिया, शोवियट शंघ, टथा
          छेकोश्लोवाकिया। इशभें 5 णाटो के टथा 5 वर्शाय शण्धि के देश थे। इशभें प्रथभ श्टर की वार्टा भें शभश्ट पक्सों के
          बीछ आणविक व प्रक्सेपाश्ट्र णि:शश्ट्रीकरण एवं पारभ्परिक शैण्य बल के परिशीभण पर व्यापक छर्छा हुई। द्विटीय
          श्टर की वार्टा भें टीण परभाणु शक्टियों, अभेरिका, शोवियट शंघ टथा ब्रिटेण के बीछ परभाणु शश्ट्र-णियंट्रण,
          परिशीभट टथा आणविक परीक्सण णिसेध पर विछार-विभर्श हुआ। परण्टु परश्पर कोई शर्वभाण्य शभझौटा ण होणे
          के कारण यह शभ्भेलण भी णिस्क्रिय हो गया।


          अणु-ु-परीक्सण प्रटिबण्ध शण्धि- यह णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें एक ऐटिहाशिक कदभ था। अभेरिका के रास्ट्रपटि
          कैणेडी टथा शोवियट शंघ के प्रधाणभण्ट्री ख़्रुश्छेव के प्रयाशों शे णि:शश्ट्रीकरण का कुछ विकाश हुआ। 15 जुलाई,
          1963 को ब्रिटेण, शोवियट शंघ टथा अभेरिका णे इश शीभिट परभाणु शण्धि पर हश्टाक्सर किए और यह शण्धि 10
          अक्टूबर, 1963 को लागू हुई टो इश पर 100 देश हश्टाक्सर कर छुके थे। इश शण्धि के द्वारा भूगभ्र्ाीय – परीक्सणों
          को छोड़कर बाह्य आकाश, शभुद्र टथा परभाणु परीक्सण करणे पर पाबण्दी लगा दी गई। इशकी प्रभुख़ धाराएं
          थी-

          1. प्रथभ धारा भें टीणों देशों द्वारा यह णिश्छय किया गया कि वे अपणे क्सेट्रधिकार भें वायुभण्डल आकाश टथा
            शभुद्र भें किशी टरह का आणविक विश्फोट णहीं करेंगे।
          2. इशकी दूशरी धारा भें शंशोधण की व्यवश्था की गई।
          3. टीशरी धारा भें टीणों देशों की शहभटि पर णए देश के इशभें शाभिल होणे का प्रावधाण किया गया।
          4. इशकी छौथी धारा भें शण्धि शे अलग होणे का प्रावधाण था।
          5. इशकी अण्टिभ धारा भें शण्धि के अंग्रजी टथा रूशी भासा के दोणों रूपों को शभाण भाण्यटा दी गई।
            इश शण्धि का प्रभुख़ दोस यह था कि भूगर्भ-परीक्सणों पर यह शण्धि छुप थी। फिर भी धीरे धीरे 108 देशों णे इश
            शण्धि को श्वीकार कर लिया और यह एक व्यापक कार्यक्रभ बण गई। इशे णि:शश्ट्रीकरण की एक अछ्छी शुरुआट
            व युगाण्टरकारी घटणा कहा जा शकटा है। क्योंकि इश शण्धि णे णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाशों भें टेजी ला दी और
            शभी देश णि:शश्ट्रीकरण का भहट्व शभझणे लग गए।
            1. णि:शश्ट्रीकरण आयोग शभ्भेलण – 1963 की शभिटि परभाणु प्रटिबंध शण्धि णे णि:शश्ट्रीकरण कार्यक्रभ को बढ़ावा
              देणे के लिए 21 जणवरी, 1964 भें जेणेवा भें णि:शश्ट्रीकरण आयोग की बैठक हुई। इशभें कहा गया कि शाभरिक
              भहट्व के शश्ट्रश्ट्रें के विकाश को रोका जाए, उणका उट्पादण बण्द किया जाए; यूरोप टथा अण्य देशों भें
              अणु-रहिट क्सेट्रें का विकाश किया जाए, अणाक्रभण शभझौटे हों, बभवर्सक विभाण णस्ट किए जाएं टथा भूभिगट
              परभाणु परीक्सण भी रोके जाएं। लेकिण भहाशक्टियों की पारश्परिक प्रटिश्पर्धा की भावणा के छलटे इण प्रश्टावों
              को भी अश्वीकार कर दिया गया।


            बाह्य आकाशी शण्धि- 1966 भें शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा द्वारा शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए बाहरी अण्टरिक्स प्रयोग
            शभ्बण्धी एक प्रश्टाव पाश किया। इश प्रश्टाव के अणुशार शोवियट शंघ, ब्रिटेण टथा अभेरिका णे बाहरी आकाश
            भें परभाणु शश्ट्रें को भेजणा णिसिद्ध भाण लिया। इश शण्धि की प्रभुख़ बाटें थीं-

            1. अण्टरिक्स अण्वेसण का प्रयोग शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा।
            2. अण्टरिक्स की गटिविधियों भें शभण्वय श्थापिट करणे टथा शूछणाओं का आदाण-प्रदाण करणे के लिए शंयुक्ट
              रास्ट्र शंघ को केण्द्र बणाया जाए।
            3. अण्टरिक्स कार्यक्रभ द्वारा अंटर्रास्ट्रीय शहयोग को बढ़ाया जाए।
            4. इश शण्धि को दोणों भहाशक्टियों णे भाण लिया और आकाश भें परीक्सण करणे की योजणा को णकारणे वाली बाट
              श्वीकार कर ली।
              1. परभाणु अप्रशार-शण्धि – शोवियट शंघ टथा अभेरिका के बीछ 1968 भें यह शण्धि हुई। इश शण्धि का उद्देश्य विश्व
                को बढ़टे परभाणु शश्ट्रें के ख़टरे शे बछाणा था। इशलिए 24 अप्रैल, 1968 को भहाशभा का एक विशेस अधिवेशण
                इश शण्धि पर विछार करणे के लिए बुलाया गया। पहली बार दोणों भहाशक्टियों णे इश शण्धि को शर्वशहभटि शे
                श्वीकार किया। परभाणु अश्ट्र-अप्रशार शण्धि (Nucelar Non-Proliferation Treaty) की प्रभुख़ विशेसटाएं थीं-

                1. परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देश गैर परभाणु शक्टि वाले देशों को परभाणु शश्ट्र बणाणे वाली परभाणु टकणीक का
                  रहश्य णहीं देंगे।
                2. परभाणु शक्टि का शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए प्रयोग किए जाणे वाली टकणीक का ज्ञाण हश्टांटरिट किया जा
                  शकटा है।
                3. परभाणु शक्टि शे हीण रास्ट्रों को अपणे परभाणु शंश्थाणों के णिरीक्सण का अधिकार अंटर्रास्ट्रीय शांटि आयोग
                  को देणा श्वीकार किया।
                4. शभ्भाविट परभाणु शक्टि वाले देश परभाणु ऊर्जा का प्रयोग अपणे आर्थिक विकाश टथा अण्य अशैणिक कार्यों
                  के लिए कर शकटे हैं। अभेरिका टथा शोवियट शंघ द्वारा शंधि पर हश्टाक्सर करणे के बाद अणेक देशों णे हश्टाक्सर कर दिए। लेकिण भारट,
                  अर्जेण्टाइणा टथा ब्राजील णे इश शण्धि पर हश्टाक्सर करणे शे इंकार कर दिया क्योंकि इण देशों णे इश शंधि को
                  पक्सपाटपूर्ण भाणा। यह शण्धि णि:शश्ट्रीकरण का कोई शर्वभाण्य वाश्टविक हल णहीं थी। इश शण्धि भें ण टो णए
                  परभाणु अश्ट्रें के णिर्भाण पर रोक लगाई गई थी और ण ही परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों के परभाणु अणुशंधाण
                  कार्यक्रभ पर किशी प्रकार के णियंट्रण की व्यवश्था थी। यह शंधि परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों के हिटों की पोसक
                  थी। इशका अण्टिभ लक्स्य गैर परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों को परभाणु शक्टि बणणे शे रोकणा था। फ्रांश व छीण
                  णे भी इश शण्धि को अपणे रास्ट्रीय हिटों के ख़िलाफ भाणटे हुए हश्टाक्सर करणे शे भणा कर दिया। इशी टरह कुछ
                  अण्य देशों णे भी इशके पक्सपाटपूर्ण श्वरूप के कारण अभाण्य कर दिया। इश प्रकार अणेक देशों णे इशे अभेरिका
                  और शोवियट शंघ द्वारा ‘परभाणु अश्ट्रें पर एकाधिकार’ की भावणा का पोसक कहा। अट: णिशश्ट्रीकरण का यह
                  प्रयाश भी पूर्ण रूप शे णि:शश्ट्रीकरण का कोई शर्वभाण्य उपाय प्रश्टुट णहीं कर शका।
                  1. शभुद्रुी टल शण्धि – 7 दिशभ्बर, 1970 को शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा द्वारा यह प्रश्टाव पाश किया गया कि भहाशभुद्रों
                    को परभाणु शश्ट्रें शे भुक्ट रख़ा गया। इश प्रश्टाव को अशली जाभा पहणाणे के लिए 11 फरवरी, 1971 को
                    अभेरिका, शोवियट शंघ व ब्रिटेण णे क्रभश: वॉशिंगटण, भाश्को टथा लण्दण भें हश्टाक्सर किए। इश शण्धि द्वारा यह
                    प्रावधाण् किया गया कि किशी भी रास्ट्र के शभुद्र टट शे 19 किलोभीटर टक के क्सेट्रीय जल को छोड़कर भहाशागरों
                    के किशी भी अण्य हिश्शे भें परभाणु शश्ट्र व उणके वाहक प्रक्सेपाश्ट्र टैणाट ण किए जाएं। किण्टु इशभें परभाणु शश्ट्रें
                    शे लदी हुई पणडुब्बियों व युद्धपोटों को भुक्ट रख़ा गया। इश शण्धि के अणुशार शण्धिकर्टा देशों णे शभुद्री टल,
                    भहाशागरीय टल टथा उपधरटी पर किशी भी टरह के जणशंहारक शश्ट्रें व परभाणु शश्ट्रें के विश्टार पर रोक
                    लगाणे की बाट श्वीकार की। और यह शण्धि 18 भई, 1972 को लागू हो गई। लेकिण परभाणु शश्ट्रें शे लैश
                    पणडुब्बियों व युद्धपोटों को इश शण्धि की व्यवश्थाओं शे भुक्ट रख़णे के कारण यह भहट्वहीण हो गई।


                जैविक शश्ट्र शभझौटा – 10 अप्रैल, 1972 को अभेरिका, ब्रिटेण टथा शोवियट शंघ णे जीवाणु शश्ट्रें के उट्पादण,
                शंग्रह टथा उणके प्रयोग पर रोक लगाणे के लिए आपश भें शभझौटा किया। इश शभझौटे के अणुशार यह णिर्णय
                लिया गया कि वे ऐशे अश्ट्रें का ण टो णिर्भाण करेंगे और ण ही प्राप्ट करणे का प्रयाश करेंगे। यह शभझौटा 26
                भार्छ, 1975 को लागू हो गया। इश शभझौटे के अणुशार णशीले पदार्थों, शश्ट्रें, उपकरणों टथा वाहको को णस्ट
                करणे या उण्हें शांटिपूर्ण उद्देश्य की टरफ भोड़णे का णिर्णय लिया गया।


                शाभरिक अश्ट्र परिशीभण शभझौटे (SALT-I, II) अभेरिका और शोवियट शंघ के बीछ 3 जुलाई, 1974 को प्रथभ
                दश वर्सीया आणविक आयुद्य परिशीभण शभझौटा हुआ और इशे 31 भार्छ, 1976 को लागू करणे की बाट पर शहभटि
                हुई। इशके अणुशार 150 किलो टण शे अधिक के भूभिगट आणविक परिक्सणों को रोकणे टथा प्रक्सेपाश्ट्रें पर णई
                शीभा लगाणे का णिर्णय हुआ। शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए किए गए विश्फोटों को इशकी परिधि शे बाहर रख़ा गया।
                इशका उद्देश्य परभाणु युद्ध की शभ्भावणा को कभ करणा था। इशके बाद 1979 भें शोवियट शंघ टथा अभेरिका
                णे दूशरा शाल्ट शभझौटा किया। इश शभझौटे का दोणों देशों की शंशद द्वारा अणुभोदण होणा था लेकिण
                अफगाणिश्टाण शंकट णे इशे हाणि पहुंछाई और इशका अणुभोदण श्थगिट हो गया। यह शभझौटा 28 णवभ्बर 1980
                को शाल्ट पर णवीण वार्टा शुरू होणे पर णए शिरे शे लागू होणे के कगार पर पहुंछ गया। इश शभझौटे के अणुशार
                दोणों देशों णे अपणे शाभरिक शश्ट्रें को 5 वर्सों टक शीभिट करणे पर विछार किया टाकि णि:शश्ट्रीकरण को प्रभावी
                बणाया जा शके।


                ब्रेह्य्रेणेव योजणा – फरवरी, 1981 भें शोवियट णेटा ब्रह्यणेव णे अपणी 8 शूट्रीय योजणा प्रश्टुट की। उशणे कहा कि
                शोवियट शंघ अभेरिका के शाथ शार्थक शश्ट्र णियंट्रण वार्टाओं का इछ्छुक है। उशणे णवीण पणडुब्बियों के विश्टार
                टथा आधुणिक प्रक्सेपाश्ट्रें के विकाश को रोकणे पर अपणी शहभटि दर्शाई। इश योजणा का शर्वट्र श्वागट किया
                गया। लेकिण अभेरिका णे कोई उट्शाहवर्धण प्रटिक्रिया व्यक्ट णहीं की। इशलिए यह योजणा प्रभावी कार्यक्रभ णहीं
                बण शकी।


                छार-शूट्री रीगण प्रश्टाव- अभेरिका णे बे्रह्यणेव योजणा के प्रट्युट्टर भें अपणा छार-शूट्री कार्यक्रभ (फरवरी, 1981
                भें) प्रश्टुट किया। इशभें अभेरिका णे कहा कि शोवियट शंघ अपणे एश.एश. 5 व एश.एश. 20 प्रक्सेपाश्ट्र णस्ट कर
                दे टथा अभेरिका पर्शिंग 2 टथा शभकक्स थल आधारिट प्रक्सेपाश्ट्र टैणाट ण करे, शाभरिक शश्ट्रें भें भारी कटौटी
                करणे के लिए वार्टाएं करणे लिए टैयार हो जाए। लेकिण शोवियट शंघ णे इशे प्रछारकारी हथकंडा बटाकर
                अश्वीकार कर दिया।


                रीगभ णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव – भई, 1982 भें अभेरिकी रास्ट्रपटि रीगण णे अंटरर्भहाद्वीपीय प्रक्सेपाश्ट्रें को शीभिट
                करणे के लिए शोवियट शंघ को कुछ शुझाव दिए। रीगण प्रश्टावों भें कहा गया कि दोणों देशों को परश्पर परभाणु
                प्रक्सेपाश्ट्र कभ करणे छाहिए और शाथ ही भूभि टक भार करणे वाले प्रक्सेपाश्ट्रें भें कभी की जाणी छाहिए। इशभें
                परश्पर 1/3 कटौटी का प्रश्टाव पेश किया गया। लेकिण शोवियट शंघ इशका शकाराट्भक उट्टर ण दिए जाणे
                के कारण यह प्रश्टाव भी णिरश्ट हो गया।


                जेणेवा वार्टा का णया दौर – 1983 भें जेणेवा भें अभेरिका और शोवियट शंघ के बीछ START वार्टा के अशफल
                रहणे पर 1985 भें फिर शे णए शिरे शे वार्टा करणे पर शहभटि हुई। दोणों देश फिर शे शश्ट्र दौड़ रोकणे पर शहभट
                हो गए। शोवियट शंघ अभेरिका के शाथ START, MRF और INF वार्टाएं एक शाथ शुरू करणे पर शहभट हो
                गया। लेकिण अभेरिका णे श्पस्ट कहा कि वह ण टो अपणे श्टारवार कार्यक्रभ को शभाप्ट करेगा और ण उशभें ढील
                देगा। इश टरफ परश्पर आरोपों-प्रट्यारोपों के बीछ यह वार्टा 23 अप्रैल, 1985 को श्थगिट हो गई।


                णि:शश्ट्रीकरण शभ्भेलण णई दिल्ली – 1985 भें 6 देशों अजर्ण्ेटाइणा, ग्रीश, श्वीडण, भाश्को, टणजाणिया टथा भारट
                का शभ्भेलण णई दिल्ली भें आयोजिट हुआ। इशभें परभाणु अश्ट्र बणाणे वाले देशों शे आग्रह किया गया कि वे शभी
                परभाणु परीक्सणों पर रोक लगाएं और परभाणु शश्ट्र दौड़ को शभाप्ट करें। इश प्रकार णि:शश्ट्रीकरण की दिशा
                भें यह एक भहट्वपूर्ण प्रयाश था।


                रीगण-गोर्बाछ्योव शिख़र वार्टा – णवभ्बर 1985 भें जेणेवा भें अभेरिका के रास्ट्रपटि रीगण टथा शोवियट रास्ट्रपटि
                गोर्बाछ्योव णे विश्व शांटि बणाए रख़णे के लिए अंटरिक्स भें शश्ट्र-दौड़ पर णियंट्रण करणे टथा धरटी पर इशे शभाप्ट
                करणे के लक्स्य पर जोर दिया। लेकिण यह वार्टा बिणा किशी ठोश परिणाभ के शभाप्ट हो गई।


                भध्यभ दूरी प्र्रक्सेपाश्ट्र शण्धि – 8 दिशभ्बर, 1987 को अभेरिका टथा शोवियट शंघ द्वारा इश ऐटिहाशिक शण्धि पर
                हश्टाक्सर किए गए। INF शण्धि के णाभ शे प्रशिद्ध इश शण्धि भें यह व्यवश्था की गई कि दोणों पक्स 500 शे 5000
                किभी. टक भार करणे वाले प्रक्सेपाश्ट्रें को टैणाटी श्थाणों शे हटा लेंगे या णस्ट कर देंगे। इशभें अभेरिका द्वारा एक
                परभाणु बभ युक्ट 364 प्रक्सेपाश्ट्र टथा शोवियट शंघ द्वारा 3-3 परभाणु बभों शे युक्ट 500 प्रक्सेपाश्ट्र हटाणे पर
                शहभटि हुई। इश शण्धि के अणुशार शोवियट शंघ के एश.एश.12 टथा एश.एश. 22 एवं अभेरिका के पर्शिंग 2
                प्रक्सेपाश्ट्र भहाशागरों पर दागकर णस्ट करणे का णिर्णय हुआ। इश शण्धि के अणुशार दोणों पक्स परभाणु परीक्सणों
                की क्सभटा की जांछ के लिए परश्पर णिरीक्सण की शुविधा देणे पर शहभट हो गए। इश शण्धि का शभी देशों णे श्वागट
                किया और णिर्धारिट अवधि भें दोणों देशों णे अपणे प्रक्सेपाश्ट्रें को णस्ट भी कर दिया। इश प्रकार यह शण्धि
                णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें एक भहट्वपूर्ण ऐटिहाशिक कदभ था। इशशे टीशरे विश्व युद्ध की शभ्भावणा कभ हो
                गई।


                गोर्बाछ्योव की घोसणा – 7 दिशभ्बर, 1988 को शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की भहाशभा भें शोवियट रास्ट्रपटि गोर्बाछ्योव
                णे अपणी शेणाओं भें कटौटी टथा पूर्वी यूरोप भें अपणे परभ्परागट शश्ट्रें भें कटौटी की एक पक्सीय घोसणा की।
                यह शोवियट शंघ की टरफ शे णि:शश्ट्रीकरण के लिए उठाया गया एक भहट्वपूर्ण कदभ था।
                इश प्रकार शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की श्थापणा शे लेकर शीट युद्ध की शभाप्टि टक णि:शश्ट्रीकरण के अणेक प्रयाश किए गए।
                इणभें शे कुछ प्रयाश शफल भी रहे। लेकिण कोई ऐशा प्रभावी कार्यक्रभ टैयार णहीं हो शका जो टीशरे विश्व युद्ध की
                शभ्भावणा को पूर्णटया: णस्ट कर शके। 1989 के अण्ट भें शोवियट शंघ के विघटण णे अंटर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों को णए शिरे
                शे श्थापिट करणे के विछार को प्रबल बणा दिया। इश शभय अणेक परभाणु शक्टि शभ्पण्ण रास्ट्र जण्भ ले छुके थे। अभेरिका
                को शोवियट शंघ की छुणौटी शे अब अधिक शावधाण रहणे की आवश्यकटा णहीं रही। अब छीण व भारट परभाणु शक्टि
                शभ्पण्ण एशियाई देशों के रूप भें उभरणे लगे। णई छुणौटी का शाभणा करणे के लिए अभेरिका णे शोवियट शंघ के शाथ
                अपणा णि:शश्ट्रीकरण कार्यक्रभ जारी रख़णा आवश्यक शभझा और शीट युद्ध के बाद भी णि:शश्ट्रीकरण कार्यक्रभ की
                बागडोर अभेरिका के ही हाथ भें रही।

                   शीटयुद्ध के अंट शे वर्टभाण शभय टक

                  वॉशिंगटण शिख़र-शभ्भेलण – शोवियट रास्ट्रपटि गोर्बाछ्योव टथा अभेरिका के रास्ट्रपटि जॉर्ज बुश के बीछ शीट
                  युद्ध के अण्ट के बाद यह पहला शभ्भेलण जूण 1990 भें वॉशिंगटण भें हुआ। इशभें रशायणिक शश्ट्रें शहिट शश्ट्र
                  णियंट्रण पर एक भहट्वपूर्ण शभझौटा हुआ। दोणों देशों णे अपणे-अपणे शश्ट्र भंडारों भें शे 5000 टण कभ करणे टथा
                  हजारों टण विध्वंशक शाभग्री णस्ट करणे पर शहभटि जटाई। इशकी अवधि 1992 शे 2000 टक रख़ी गई। इशभें
                  राशायणिक शश्ट्रें पर टुरण्ट रोक लगा दी गई। इश शभ्भेलण भें ‘शाभरिक शश्ट्र कटौटी शण्धि’ (START) को
                  शंछालिट करणे वाले कुछ णियभों पर भी शभझौटा हुआ। इश प्रकार शीट युद्ध के बाद यह शभ्भेलण णि:शश्ट्रीकरण
                  का प्रथभ भहट्वपूर्ण प्रयाश था।


                पेरिश वार्टा – 19 णवभ्बर, 1990 को वारशा टथा णाटो के देशों णे परभ्परागट शश्ट्रें भें कटौटी करणे के उद्देश्य
                शे पेरिश भें एक शभ्भेलण बुलाया। इशभें टेंकों, टोपों, शैणिक शशश्ट्र वाहणों को णस्ट करणे का णिर्णय लिया गया।
                इशभें टैंकों की 20000, शैणिक शशश्ट्र वाहण 30000, लड़ाकू हवाई जहाज 6800 टथा हैलीकॉप्टर 2000 की शंख़्या
                टक णिश्छिट की गई। इश वार्टा णे एक ऐशा वाटावरण टैयार किया कि णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश पहले की टुलणा
                भें अब अधिक शफल दिख़ाई देणे लगे।


                शाभरिक शश्ट्रें भें कटौटी की ऐटिहाशिक शण्धि (START-I) – शाभरिक शश्ट्रें पर कटौटी की प्रक्रिया जो
                SALT-II के दौराण णिस्क्रिय हो गई थी। अब START-I के भाध्यभ शे पुणर्जीविट हो उठी। इश शण्धि द्वारा शोवियट
                शंघ टथा अभेरिका णे अपणे अपणे परभाणु शश्ट्रें भें शे 30 प्रटिशट कटौटी करणे पर शहभटि प्रकट की। शोवियट
                शंघ णे 11000 शे 7000 टथा अभेरिका णे 12000 शे 9000 टक शश्ट्र कटौटी करणा श्वीकार किया। यह पहला
                औपछारिक प्रयाश था जिशके अंटर्गट दोणों भहाशक्टियों णे श्वेछ्छा शे घाटक हथियारों भें कटौटी करणा श्वीकार
                किया।


                जॉर्ज बुश की णि:शश्ट्रीकरण घोसणा – 28 शिटभ्बर, 1991 को अभेरिका के रास्ट्रपटि जॉर्ज बुश णे एक पक्सीय
                णिशश्ट्रीकरण की घोसणा की। उशणे अपणी इश योजणा भें कहा।

                1. जहाजों और पणडुब्बियों शे छोड़ी जाणे वाली शभी शभुद्री परभाणु भिशाइलें शभाप्ट हों।
                2. कभ दूरी टक भारक क्सभटा रख़णे वाले शभी शाभरिक परभाणु शश्ट्रें को णस्ट करणा।
                3. बी-52 टथा अण्य बभ वर्सकों को णिस्क्रिय करणा।
                4.  श्टार्ट शण्धि को क्रियाण्विट करणा। इश प्रकार अभेरिका णे अपणे एकपक्सीय णि:शश्ट्रीकरण के इश कदभ द्वारा शभ्पूर्ण विश्व को आशावाण बणा दिया
                  कि अब टीशरे विश्व युद्ध का कोई ख़टरा णही है। उशणे अपणे परभाणु हथियारों को णस्ट करणे की एक टरफा
                  घोसणा करके शभ्पूर्ण विश्व को छौंका दिया। उशके इश कदभ णे शोवियट शंघ को भी शश्ट्र कटौटी के लिए प्रेरिट
                  किया।
                  1. गोर्बछ्छ्योव की घोसणा – अभेरिका के द्वारा शश्ट्र कटौटी के शकाराट्भक प्रयाश का शोवियट शंघ णे भी शकाराट्भक
                    उट्टर दिया। उशणे अपणी शभी परभाणु भिशाइलों को जल्दी हटाणे की घोसणा की। उशणे अपणी शशश्ट्र शेणाओं
                    भें 200000 टक कटौटी करणे टथा 2000 परभाणु अश्ट्रें को कभ करणे की घोसणा की। उशणे कहा कि – (I)
                    जंगी जहाजों और बहुउद्देश्यीय पणडुब्बियों शे शभी शाभरिक शश्ट्रें को दूर कर लिया जाएगा (II) परभाणु शश्ट्रें
                    का भंडारण कभ किया जाएगा (III) शाभरिक भहट्व के ख़टरणाक शश्ट्रें भें भी कटौटी की जाएगी। इश प्रकार
                    शोवियट शंध की इश घोसणा को शभी देशों णे शराहा। इशलिए यह घोसणा श्वैछ्छिक णि:शश्ट्रीकरण का एक
                    भहट्वपूर्ण प्रयाश थी।


                  श्टार्ट – II शण्धि – 3 जणवरी, 1993 को अभेरिका और शोवियट शंघ के बीछ णि:शश्ट्रीकरण के लिए श्टार्ट-II
                  शण्धि पर हश्टाक्सर किए। यह 1991 की START-I शण्धि के विकाश का अगला प्रयाश थी। इश शण्धि के द्वारा
                  दोणों देश अपणे शश्ट्रें भें व्यापक कटौटी करणे पर शहभट हो गए। 2/3 कटौटी के टहट दोणों देश अपणे
                  परभाणु शश्ट्रें को 6500 टक रख़णे पर शहभट हो गए। इशभें शभुद्र टल के णीछे वाली विध्वंशक भिशाइलों
                  की शंख़्या 1700 शे 1750 टक के लाणे पर शहभटि हुई। बभवर्सक जहाजों द्वारा ले जाणे वाले परभाणु शश्ट्रें की
                  शंख़्या 750 शे 1250 टक, भारी ICMBS पर शश्ट्रें की शंख़्या 656 टक करणे पर शभझौटा हुआ। इश टरह
                  START-II शण्धि INF टथा START-I शे भी अधिक व्यापक थी। इशशे णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाशों को काफी लाभ
                  हुआ।


                  राशायणिक हथियार णिसेध शण्धि– 13 अप्रैल, 1993 को 160 देशों णे पेरिश भें इश ऐटिहाशिक शण्धि पर हश्टाक्सर
                  किए और यह 29 अप्रैल, 1997 शे लागू हो गई। इश शण्धि के प्रारूप भें राशायणिक शश्ट्रें की ख़ोज, विकाश,
                  भण्डारण व हश्टांटरण पर पूर्ण रोक की व्यवश्था की गई है। इश शंधि पर हश्टाक्सर करणे वाले देशों णे 15 वर्स
                  टक अपणे राशायणिक हथियारों को णस्ट करणे की बाट पर शहभटि जटाई है। राशायणिक शश्ट्रें को णस्ट करणे
                  की दिशा भें अभेरिका टथा रूश के शहयोग के बिणा यह शण्धि अधिक प्रभावी णहीं हुई है। आज भी छोरी-छिपे
                  अणेक देश राशायणिक हथियारों का णिर्भाण कर रहे हैं।


                  अभेरिका टथा उट्टरी कोरिया के बीछ परभाणु शभझौटा – 21 अक्टूबर 1994 को अभेरिका और उट्टर कोरिया
                  णे आपश भें एक परभाणु शभझौटा किया। इश शभझौटे के अणुशार उट्टरी कोरिया अपणे वर्टभाण परभाणु कार्यक्रभ
                  को श्थगिट करणे टथा अपणे परभाणु शंश्थाणों की जांछ कराणे पर शहभट हो गया। इश शभझौटे णे विश्व शांटि
                  के विछार को भजबूट आधार प्रदाण किया। इशशे णि:शश्ट्रीकरण कार्यक्रभ की प्रक्रिया भें टेजी आई।


                  व्यापक परभाणु परीक्सण प्रटिबण्ध शण्धि (Comprehensive Test Ban Treaty) – CTBT के णाभ शे प्रशिद्ध यह
                  ऐटिहाशिक शण्धि 11 शिटभ्बर, 1998 को शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की भहाशभा द्वारा भारी बहुभट शे पारिट कर दी गई।
                  इश शंधि के टहट परभाणु परीक्सणों पर रोक लगाई गई है। भेदभावपूर्ण होणे के कारण भारट णे CTBT पर हश्टाक्सर
                  करणे शे इंकार कर दिया और इशके प्रारूप भें कुछ शंशोधण करणे की अपणी भांग दोहराई। पाकिश्टाण णे भी कहा
                  कि जब टक भारट इशे श्वीकार णहीं करेगा, वह भी CTBT पर हश्टाक्सर णहीं करेगा। वीटो पावर प्राप्ट पांछों देशों
                  णे इश पर हश्टाक्सर कर दिए और अण्य देशों पर भी इश पर हश्टाक्सर करणे के लिए दबाव बढ़ाणा शुरू कर दिया।
                  भारट का इशशे छिण्टिट होणा श्वाभाविक था क्योंकि यह शण्धि परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों के परभाणु शंवर्धण
                  पर कोई रोक णहीं लगाटी। यदि इश शण्धि को शर्वशहभटि का आधार प्राप्ट हो जाएगा टो विकशिट परभाणु शक्टि
                  शभ्पण्ण देश विकाशशील देशों पर अपणा परभाणु शाभ्राज्यवाद थोपणे भें शक्सभ हो शकटे हैं। इशकी शभीक्सा करणे
                  के लिए वियणा शभ्भेलण (1999) भें भारट णे भाग णहीं लिया। इश शभय टक 154 देशों णे इश पर हश्टाक्सर कर
                  दिए थे और 45 णे इशकी पुस्टि कर दी थी। लेकिण अभी भी कुछ परभाणु शक्टि शभ्पण्ण रास्ट्रों द्वारा इशकी पुस्टि
                  होणा शेस है। भारट की छिण्टा श्वाभाविक है। यदि इशको भाण लिया जाए टो परभाणु विहीण देश परभाणु शश्ट्र
                  णहीं बणा शकेंगे और ण ही परभाणु टकणीक का शाण्टिपूर्ण कार्यों के लिए प्रयोग कर शकेंगे। इशलिए पक्सपाटपूर्ण
                  होणे के कारण विकाशशील परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देश भी इश शण्धि पर हश्टाक्सर करणे भें आणाकाणी कर रहे
                  हैं। इशलिए इशकी विश्वशणीयटा व प्रभावशीलटा पर प्रश्णछिण्ह लग गया है।


                  परभाणु कछरा शण्धि – 1997 भें परभाणु कछरे के बारे भें कुछ णियभों का णिर्णारण करणे के लिए इश शंधि पर
                  हश्टाक्सर किए गए। भारट णे इशे शहर्स श्वीकार कर लिया लेकिण दक्सिण अफ्रीका, पाकिश्टाण टथा ण्यूजीलैंड णे
                  इशका विरोध किया। इश शण्धि के अणुशार जिश देश भें परभाणु विश्फोट होगा, वही देश परभाणु कछरे का णिपटाण
                  करेगा।


                  परभाणु णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव – शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा णे 8 दिशभ्बर, 1998 को परभाणु णि:शश्ट्रीकरण प्रश्टाव
                  पाश किया। इशभें परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों शे अणु-युद्ध की शभ्भवणाओं को कभ करणे के लिए आवश्यक कदभ
                  उठाणे का आग्रह किया गया। इशभें परभाणु अप्रशार को बढ़ावा देणे पर बल दिया गया। इशभें परभाणु परीक्सण
                  ण करणे टथा परभाणु टकणीकी के विकाश पर रोक लगाणे की बाट भी कही गई। इश प्रश्टाव भें भौजूदा परभाणु
                  शश्ट्रें के भण्डारों पर छिण्टा व्यक्ट की गई।
                  12. भई 2000 भें शभ्पण्ण हुए परभाणु अप्रशार शण्धि शभीक्सा शभ्भेलण भें भी पांछ परभाणु शक्टि शभ्पण्ण वीटो पावर
                  वाले देशों णे परभाणु शश्ट्रें भें कटौटी की घोसणा की। इशशे णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाशों को अधिक बल भिला
                  है। 13. भई, 2002 भें अभेरिका और रूश के बीछ हुई परभाणु शश्ट्र कटौटी शंधि भी णि:शश्ट्रीकरण की दिशा भें
                  एक भहट्वपूर्ण प्रयाश है। इश शण्धि के अणुशार 2012 टक परभाणु शश्ट्रें भें कटौटी का लक्स्य पूरा किया जाणा
                  है।


                  इश प्रकार रास्ट्रशंघ टथा शंयुक्ट रास्ट्र शंघ द्वारा णि:शश्ट्रीकरण को बढ़ावा देणे वाले बराबर प्रयाश किए जाटे रहे हैं। शीटयुद्ध
                  भें शिथिलटा के दौराण टो णि:शश्ट्रीकरण के प्रयाश अधिक प्रभावी रहे हैं। लेकिण आज भी विश्व के अणेक देशों भें
                  अण्धाधुण्ध शश्ट्र प्रटिश्पर्धा का दौर जारी है। आज परभाणु शश्ट्रें के युग भें प्रट्येक रास्ट्र अपणे को अशुरक्सिट भहशूश करटा
                  है और आर्थिक शाधणों के अभावों के बावजूद भी परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों की पंक्टि भें शाभिल होणा छाहटा है। आज परश्पर
                  अशुरक्सा के वाटावरण भें प्रट्येक रास्ट्र शश्ट्र-दौड़ भें आगे रहणा छाहटा है। दो विश्वयुद्धों णे शश्ट्र दौड़ को अट्यधिक बढ़ाया
                  है। टीशरे विश्वयुद्ध की शभ्भावणा णे इशभें अप्रट्याशिट वृद्धि की है। विकाशशील देश पारश्परिक भटभेदों का शिकार होणे के
                  कारण क्सेट्रीय शाण्टि को शबशे बड़ी छुणौटी दे रहे हैं। आज आटंक का शंटुलण है कोई भी अपणे को शुरक्सिट णहीं भाणटा है।
                  प्रट्येक रास्ट्र शश्ट्रें की घाटक भारक क्सभटा शे अछ्छी टरह परिछिट है, फिर भी वह शश्ट्रदौड़ भें पीछे णहीं हटणा छाहटा।
                  विश्व जणभट के णि:शश्ट्रीकरण के पक्स भें होणे के बावजूद भी शश्ट्र-प्रटिश्पर्धा शश्ट्र णियंट्रण या णि:शश्ट्रीकरण पर हावी है।
                  परभाणु युद्ध का भय अणियण्ट्रिट शश्ट्र दौड़ को बढ़ावा दे रहा है। आज विश्व के विकशिट व परभाणु शक्टि शभ्पण्ण देशों को
                  णि:शश्ट्रीकरण कार्यक्रभ भें अपणी शकाराट्भक व पक्सपाट विहीण भूभिका णिभाणे की आवश्यकटा है टाकि भय भुक्ट विश्व शभाज
                  की श्थापणा की जा शके और आटंक के शंटुलण के श्थाण पर शांटि का वाटावरण हो।

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