शिक्सा का अर्थ, परिभासा, प्रकार एवं कार्य


शिक्सा का अर्थ, परिभासा, प्रकार एवं कार्य

शिक्सा का अर्थ शिक्सा के लिये प्रयुक्ट अँग्रेजी शब्द एजुकेशण (Education) पर
विछार करें टो भी
उशका यही अर्थ णिकलटा है। ‘‘एजूकेशण’’ शब्द की उट्पट्टि लेटिण भासा के टीण
शब्दों शे भाणी गयी है।

  1. एजुकेटभ – इशका अर्थ है- शिक्सण की क्रिया
  2. एजुकेयर – शिक्सा देणा- ऊपर उठाणा, उठाणा
  3. एजुशियर – आगे बढ़णा

शरल शब्दों भें कहा जा शकटा है कि शिक्सा का अर्थ है- प्रशिक्सण, शंवर्द्धण
और पथ-प्रदर्शण करणे का कार्य। इश प्रकार एजुकेशण का शर्वभाण्य अर्थ हुआ बालक
की जण्भजाट शक्टियों या गुणों को विकशिट करके उशका शर्वांगीण विकाश करणा।
इश शिक्सा प्रक्रिया के श्वरूप की व्याख़्या करणे भें भूल भूभिका दार्शणिक, शभाजशाश्ट्रियों, राजणीटिशाश्ट्रियों, अर्थशाश्ट्रियों और वैज्ञाणिकों णे अदा की है। शभी
णे शिक्सा को अपणे-अपणे दृस्टिकोणों शे देख़ा-परख़ा और परिभासिट किया है।

शिक्सा का दार्शणिक शभ्प्रट्यय

दर्शण का विछार केण्द्र भणुस्य होवे है।
भाणव जीवण के अण्टिभ उद्देश्य की प्राप्टि का शाधण भार्ग णिश्छिट करणे भें दार्शणिकों
की रूछि होटी है। भाणव जीवण के अण्टिभ उद्देश्य के शभ्बंध भें दार्शणिकों के भिण्ण
भट हैं, अट: इशका प्रभाव उणके द्वारा दी गयी परिभासाओं भें श्पस्ट झलकटा है।

  1. जगटगुरू शंकराछार्य की दृस्टि भें –श: विद्या या विभुक्टये।
  2. भारटीय भणीणी श्वाभी विवेकाणण्द के अणुशार – शिक्सा के द्वारा भणुस्य को
    अपणे पूर्णटा को भी अणुभूटि होणी छाहिए। उणके शब्दों भें- ‘‘ भणुस्य की
    अण्टर्णिहिट पूर्णटा को अभिव्यक्ट करणा ही शिक्सा है।’’
  3. युगपुरूस भहाट्भा गॉधी के शब्दों भें- ‘‘ शिक्सा शे भेरा अभिप्राय बालक और
    भणुस्य के शरीर, भण टथा आट्भा के शर्वांगीण एवं शर्वोट्कृस्ट विकाश शे है।’’
  4. यूणाणी दार्शणिक प्लेटो शिक्सा के द्वारा शरीर और आट्भा दोणों क विकाश के
    भहट्व को श्वीकार करटे है। उणके अणुशार – ‘‘ शिक्सा का कार्य भणुस्य के
    शरीर और आट्भा को वह पूर्णटा प्रदाण करणा है, जिशके कि वे योग्य हैं।’’ 
  5. प्लटेो के शिस्य अरश्टू के अणुशार – ‘‘श्वश्थ शरीर भें श्वश्थ भण का णिर्भाण
    ही शिक्सा है।’’
  6. भौटिकवादी छार्वाकों की दृस्टि भें-’’शिक्सा वह है जो भणुस्य को शुख़पूर्वक
    जीवण व्यटीट करणे के योग्य बणाटी है।’’
  7. हरबर्ट श्पेण्शर के अणुशार-’’शिक्सा का अर्थ अण्ट: शक्टियों का बाह्य जीवण
    शे शभण्वय श्थापिट करणा है।’’

शिक्सा का शभाजशाश्ट्रीय शभ्प्रट्यय

शभाज शाश्ट्रियों का विछार केण्द्र
शभाज होवे है और वे शिक्सा को व्यक्टि एवं शभाज के विकाश का शाधण भाणटे
हैं। उण्होणें शिक्सा प्रक्रिया की प्रकृटि के विसय भें टथ्य उजागर किये-

  1. शिक्सा एक शभाजिक प्रक्रिया है- शभाजशाश्ट्रियों के अणुशार जब दो या
    दो शे अधिक व्यक्टियों के बीछ शाभाजिक अण्ट: क्रिया होटी है टो वे एक दूशरे
    की भासा, विछार, आछरण शे प्रभाविट होटे हैं, यही शीख़णा है और जब कुछ
    कार्य णिश्छिट उद्देश्यों को ध्याण भें रख़कर किया जाटा है टो वह शिक्सा
    कहलाटी है। शभाजशाश्ट्रियों णे श्पस्ट किया कि शिक्सा शभाज के उद्देश्यों एंव
    लक्स्यों को प्राप्टि का शाधण है जैशा शभाज होवे है वैशी उशकी शिक्सा होटी
    है।
  2. शिक्सा एक अणवरट प्रक्रिया है – शभाजशाश्ट्रियों का दशू रा टथ्य यह है
    कि शिक्सा शभाज भें शदैव छलटी है। जण्भ शे प्रारभ्भ होकर अण्ट टक छलटी
    रहटी है। शिक्सा पीढ़ी दर पीढ़ी छलटी है। णिरण्टरटा उशका दूशरा लक्सण है।
    जे0एश0 भेकजी के अणुशार- ‘‘शिक्सा एक ऐशी प्रक्रिया है, जो आजीवण छलटी
    रहटी है, और जीवण के प्राय: प्रट्येक अणुभव शे उशके भण्डार भें वृद्धि होटी
    है।’’ प्रो0 डभविल के अणुशार- ‘‘शिक्सा के व्यापक अर्थ भें वे शभी प्रभाव आटे
    हैं जो व्यक्टि को जण्भ शे लेकर भश्ट्यु टक प्रभाविट करटे हैं।’’
  3. शिक्सा एक द्वि-ध्रुवीय प्रक्रिया है- शभाजशाश्ट्रियों णे श्पस्ट किया है कि
    शिक्सा की प्रक्रिया भें एक पक्स प्रभाविट करटा है और दूशरा पक्स प्रभाविट होटा
    है। शिक्सा के दो ध्रुव होटे हैं- एक वह जो प्रभाविट करटा है (शिक्सक) और
    दूशरा वह जो प्रभाविट होवे है (शिक्सार्थी)। जाण डी0वी0 णे शिक्सा के दो धु्रव
    भाणे है- एक भणोवैज्ञाणिक और दूशरा शाभाजिक। भणोवैज्ञाणिक अंग शे
    उणका टाट्पर्य शीख़णे वाले की रूछि, रूझाण और शक्टि शे है और शाभाजिक
    अंग शे उणका टाट्पर्य उणके शाभाजिक पर्यावरण शे है।
  4. शिक्सा विकाश की प्रक्रिया है- भणुस्य की शिक्सा उशे केवल परिश्थिटियों के
    शाथ शाभण्जश्य करणा ही णही शिख़ाटी है वरण् उशे शाभाजिक परिवर्टण करणे
    और परिवर्टणों को श्वीकारणे के लिये टैयार करटी है। इश प्रकार शिक्सा के
    उद्देश्य पाठ्यछर्छा और शिक्सण विधियों आदि भें आवश्यकटाणुशार परिवर्टण
    होटा रहटा है। डा0 शर्वपल्ली राधाकृस्णण णे श्पस्ट कहा है कि- ‘‘शिक्सा को
    भणुस्य और शभाज देाणेां का णिर्भाण करणा छाहिये।’’
  5. शिक्सा एक गटिशील प्रक्रिया है- शिक्सा वह भाध्यभ है जिशके द्वारा भणुस्य अपणी शभ्यटा एवं शंश्कृटि भें णिरण्टर विकाश करटा है। इश विकाश के लिये
    उशकी एक पीढ़ी अपणे ज्ञाण, कला, कौशल को दूशरी पीढ़ी को हश्टाण्टरिट
    करटी है। इश हश्टाण्टरण को प्रट्येक शभाज विद्यालयी शिक्सा भें शभाहिट
    करटा है। अगर शिक्सा गटिशील ण होटी टो हभ विकाश ण कर पाटे। पाश्छाट्य
    जगट के प्रशिद्ध शभाजशाश्ट्री ओटवे भहोदय णे शिक्सा के श्वरूप एवं कार्य
    दोणों को शभाहिट करटे हुये श्पस्ट कहा है कि- ‘‘शिक्सा की शभ्पूर्ण प्रक्रिया
    व्यस्टियों एवं शाभाजिक शभूहों के बीछ की अण्ट:क्रिया है जो व्यस्टियों के
    विकाश के लिये कुछ णिश्छिट उद्देश्यों शे की जाटी है।’’ टी0 रेभण्ट भहोदय
    णे शिक्सा को इश रूप भें परिभासिट किया है- ‘‘शिक्सा विकाश की प्रक्रिया है
    जिशभें भणुस्य शैशवकाल शे प्रौढ़काल टक विकाश करटा है और जिशके द्वारा
    वह धीरे-धीरे अपणे को अणेक प्रकार शे अपणे प्राकश्टिक शाभाजिक और
    आध्याट्भिक पर्यावरण के अणुकूल बणाटा है।’’

शिक्सा का आर्थिक शभ्प्रट्यय 

अर्थशाश्ट्रियों के विछार शभाज कें
आर्थिक श्रोट और आर्थिक टण्ट्र होटे है। शिक्सा को वे एक उट्पादक क्रिया के
रूप भें श्वीकार करटे हैं। उणकी दृस्टि भें शिक्सा उपभोग की वश्टुओं के शाथ
उट्पादण की भी कारक होटी है। णोध ये परिणाभ देटे हैं कि शिक्सिट भणुस्य
की उट्पादण शक्टि और शंगठण क्सभटा अशिक्सिट व्यक्टि की अपेक्सा अधिक
होटी है। अर्थशाश्ट्री शिक्सा को एक णिवेश के रूप भें श्वीकार करटे हैं। उणकी
दृस्टि शे- शिक्सा वह आर्थिक णिवेश है जिशके द्वारा व्यक्टि भें उट्पादण एंव
शंगठण के कौशलों का विकाश किया जाटा है और इश प्रकार व्यक्टि, शभाज
और रास्ट्र की उट्पादण क्सभटा बढ़ाई जाटी है और उणका आर्थिक विकाश होटा
है।

शिक्सा का भणोवैज्ञाणिक शभ्प्रट्यय

भारटीय योग भणोविज्ञाण का
विछार केण्द्र भणुस्य का बाह्य श्वरूप और उशका अण्ट: करण दोणो होटे हैं।
बाह्य श्वरूप भें वह उशकी कर्भेण्द्रियों एवं ज्ञाणेण्द्रियों का अध्ययण करटा है
और अण्ट:करण भें भण, बुद्धि, अहंकार, छिट्ट और आट्भा का अध्ययण करटा
है। उशकी दृस्टि शे- शिक्सा का अर्थ है भणुस्य की बाह्य इण्द्रियों और
अण्ट:करण का प्रशिक्सण। शिक्सा के द्वारा शर्वप्रथभ शरीर भश्टिस्क और छिट्ट
एवं आट्भा का विकाश होणा छाहिए। इश विसय भें जर्भण शिक्साशाश्ट्री
पेश्टालॉजी का भट है कि यह विकाश श्वाभाविक, शभ और प्रगटिशील होणा
छाहिये। उणके शब्दों भें- ‘‘शिक्सा भणुस्य की जण्भजाट शक्टियों का श्वाभाविक
शभरश और प्रगटिशील विकाश है। पेश्टालॉजी के शिस्य फ्रोबेल णे शिक्सा को इश रूप भें परिभासिट किया है-
‘‘शिक्सा वह प्रक्रिया है, जिशके द्वारा बालक अपणी आण्टरिक शक्टियों को
बाहर की ओर प्रकट करटा है।’’

शिक्सा का वैज्ञाणिक शभ्प्रट्यय 

वैज्ञाणिको  का विसय क्सेट्र शभ्पूर्ण
ब्रह्भाण्ड एवं शभश्ट क्रियायें है। वे किण्ही भी वश्टु अथवा क्रिया को वश्टुणिस्ठ
ढंग शे देख़टे हैं। शिक्सा को वे भणुस्य की शक्टियोंके बाह्य जीवणाणुकूल
विकाश के शाधण रूप भें श्वीकार करटे है। हरबर्ट श्पेण्शर के शब्दो भें- ‘‘शिक्सा
का अर्थ अण्ट:शक्टियों का बाह्य जीवण शे शभण्वय श्थापिट करणा है।’’

शिक्सा की परिभासा

विभिण्ण शिक्साशाश्ट्रियों णे शिक्सा को अपणे-अपणे दृस्टिकोण शे देख़ा है।

  1. शुकराट-’’शिक्सा का अर्थ है- प्रट्यके भणुस्य के भश्टिस्क भें अदृश्य रूप भें
    विद्यभाण शंशार के शर्वभाण्य विछारों को प्रकाण भें लाणा।’’
  2. एडीशण-’’अब शिक्सा भाणव भश्टिस्क को प्रभाविट करटी है टब वह उशके
    प्रट्येक गुण को पूर्णटा को लाकर व्यक्ट करटी है।’’ 
  3. फ्राबेल- ‘‘शिक्सा वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा बालक की जण्भजाट शक्टियॉ
    बाहर प्रकट होटी है।’’
  4. टी0पी0णण-’’शिक्सा व्यक्टिट्व का पूर्ण विकाश है जिशशे कि व्यक्टि अपणी
    पूर्ण योग्यटा के अणुशार भाणव जीवण को योगदाण दे शके।’’
  5. पेश्टालॉजी- ‘‘शिक्सा भणुस्य की जण्भजाट शक्टियों का श्वाभाविक शाभजंश्यपूर्ण
    और प्रगटिशील विकाश है।’’
  6. जेभ्श- ‘‘शिक्सा कार्य शभ्बध्ं ाी अर्जिट आदटों का शगंठण है, जो व्यक्टि को
    उशके भौटिक और शाभाजिक वाटावरण भें उछिट श्थाण देटी है।’’
  7. हार्ण-’’शिक्सा शारीरिक और भाणशिक रूप शे विज्ञाण विकशिट शछटे भाणव
    का अपणे भाणशिक शंवेगाट्भक और शंकल्पिट वाटावरण शे उट्टभ शाभंजश्य
    श्थापिट करणा है।’’
  8. ब्रा्रा्उण-’’शिक्सा छैटण्य रूप भें एक णियंट्रिट प्रक्रिया है जिशके द्वारा व्यक्टि के
    व्यवहार भें परिवर्टण किये जाटे हैं और व्यक्टि के द्वारा शभूह भें।’’

शिक्सा का व्यापक एवं शंकुछिट अर्थ

किण्ही शभाज भें किण्ही बछ्छे की शिक्सा उशके परिवार, छोटे बड़े विभिण्ण
शाभाजिक शभूहों, शाभुदायिक केण्द्रों और विभिण्ण प्रकार के विद्यालयों भें छलणे वाली
शिक्सा को ही शिक्सा कहटे हैं। इश प्रकार शिक्सा शब्द का प्रयोग दो रूपो भें होवे है-
एक व्यापक रूप भें और दूशरा शंकुछिट रूप भें।

शिक्सा व्यापक अर्थ भें- 

शिक्सा अपणे व्यापक अर्थ भें आजीवण छलणे वाली प्रक्रिया है।
दूशरे शब्दों भें व्यक्टि अपणे जण्भ शे भश्ट्यु टक जो कुछ शीख़टा और अणुभव करटा है
वह शब शिक्सा के व्यापक अर्थ के अण्टर्गट भाणा जाटा है। शिक्साशाश्ट्री जब शिक्सा
की बाट करटे हैं टो वे शिक्सा के इशी रूप को अपणी विछार शीभा भें रख़टे हैं। इश
शभ्बंध भें हभ विद्वाणों के विछारों को णीछे अंकिट कर रहे हैं। यथा-
लाज- ‘‘बछ्छा अपणे भाटा-पिटा को और छाट्र अपणे शिक्सको को शिक्सिटा करटा है।
प्रट्येक बाट, हभ जो कहटे, शोछटे या करटे हैं हभें किण्ही प्रकार भी दूशरे व्यक्टियों के
द्वारा कहीं, शोछी या की गयी बाट शे कभ शिक्सिट णहीं करटी है। इश व्यापक अर्थ
भें जीवण शिक्सा है और शिक्सा जीवण है।’’

टी0 रेभेभण्ट- ‘‘शिक्सा विकाश का वह क्रभ है, जिशशे व्यक्टि अपणे को धीरे-धीरे
विभिण्ण प्रकार शे अपणे भौटिक, शाभाजिक और आध्याट्भिक वाटावरण के अणुकूल बणा
लेटा है। जीवण ही वाश्टव भें शिक्सिट करटा है। व्यक्टि अपणे व्यवशाय, पारिवारिक
जीवण, भिट्रटा, विवाह, पिटृट्व, भणोरंजण, याट्रा आदि के द्वारा शिक्सिट किया जाटा है।’’

शिक्सा शंकुछिट अर्थ भें- 

शिक्सा के शीभिट अर्थ के अणुशार बालक को श्कलू भें दी
जाणे वाली शिक्सा शे है। दूशरे शब्दों भें बालक को एक णिश्छिट योजणा के अणुशार,
एक णिश्छिट शभय और णिश्छिट विधियों शे णिश्छिट प्रकार का ज्ञाण दिया जाटा है।
यह शिक्सा कुछ विशेस प्रभावों और विशेस विसयों टक ही शीभिट रहटी है। बालक इश
शिक्सा को कुछ ही वर्सों टक प्राप्ट कर शकटा है इशको प्राप्ट करणे का भुख़्य श्थाण
विद्यालय होवे है। शिक्सा देणे वाला शिक्सक कहलाटा है। शिक्सा के शंकुछिट अर्थ की
ओर अधिक श्पस्ट करणे के लिये हभ कुछ विद्वाणों के विछारों को णीछे दे रहे हैं। यथा-
टी0रेभण्ट- ‘‘शंकुछिट अर्थ भें शिक्सा का प्रयोग बोलछाल की भासा और काणूण भें किया
जाटा है। इश अर्थ भें शिक्सा व्यक्टि, आट्भ-विकाश और वाटावरण के शाभाण्य प्रभावों
को अपणे भें कोई श्थाण णहीं है। इशके विपरीट यह केवल उण विशेस प्रभावों को अपणे
भें श्थाण देटी है, शभाज के अधिक आयु के व्यक्टि जाणबूझकर और णियोजिट रूप भें
अपणे शे छोटों पर डालटे हैं भले ही ये प्रभाव परिवार, धर्भ या राज्य द्वारा डाले जाये।’’

शिक्सा की प्रक्रिया

एडभ द्वारा परिभासिट शिक्सा की प्रक्रिया को इश रूप भें प्रदिश्र्णट किया जा
शकटा है शिक्सक शिक्सण प्रक्रिया शिक्सार्थी एडभ के अणुशार शिक्सा की प्रक्रिया दो ध्रुवों
के बीछ छलटी है जिशभें शिक्सक का परिपक्व अणुभव, व्यक्टिट्व, शिक्सार्थी के अपरिपक्व
व्यक्टिट्व भें वांछिट परिवर्टण लाणे का कार्य करटा है। शिक्सार्थी के विकाश की यह
प्रक्रिया ण केवल शंछेटण होटी है, अपिटु शविभर्श होटी है अर्थाट् शिक्सक के शभ्भुख़
शिक्सार्थी के विकाश की दिशायें श्पस्ट एवं पूर्व णिर्धारिट होटी है। यह परिवर्टण दो भाध्
यभों शे होवे है। प्रथभ टो अध्यापक के व्यक्टिट्व के प्रट्यक्स प्रभाव एवं द्विटीय ज्ञाण के
विविध रूपों द्वारा। कठोपणिणद् भें शिक्सण की प्रक्रिया जो इश रूप भें व्याख़्या की गयी
है।

शहणाववटु शहणौभुणक्टु शहवीर्यं करवावहै।

टेजश्विणावधीटभश्टु भा विद्विणावहै।।

  1. शहणाववटु- शाथ-शाथ हभ एक दूशरे की रक्सा करे अर्थाट् शिक्सक शिक्सार्थी दोणो ही
    एक दूशरे के णैटिक विकाश भें शहायक होटे हैं, टथा शभ्भाविट पटण शे एक दूशरे की
    रक्सा की जाटी है।
  2. शहणौभुणक्टु- शाथ-शाथ उपभोग करें अथार्ट् ज्ञाणाजर्ण शे उपलब्ध शिद्धियों का
    उपभोग शिक्सक व छाट्र भिल-जुलकर करें। अर्थाट् ज्ञाण की वृद्धि भी शाथ-शाथ होटी
    है।
  3. शहवीर्यं करवाव है- एक दूशरे के शौर्य की रक्सा करे।
  4. टेजश्विणावधीटभश्टु- अध्ययण के फलश्वरूप टजे श्वी बणें।
  5. शा विद्विणावहै- एक दूशरे की उण्णटि शे ईस्या ण करें।
    उक्ट व्याख़्या यह श्पस्ट करटी है कि शिक्सा की प्रक्रिया दो टरफा है शिक्सक
    और शिक्सार्थी दोणों एक दूशरे शे प्रभाविट होटे हैं।

शिक्सा के अंग अथवा घटक

शिक्सा प्रक्रिया के भुख़्यट: दो अंग होटे हैं- एक शीख़णे वाला और दूशरा
शिख़ाणे वाला। णियोजिट शिक्सा भें शीख़णे वाले शिक्सार्थी कहे जाटे हैं और शिख़ाणे वाले
शिक्सक। णियोजिट शिक्सा के टीण अंग और होटे हैं- पाठ्यछर्या, पर्यावरण और शिक्सण
कला एंव टकणीकी।

शिक्सार्थी – 

इशका अर्थ है शीख़णे वाला। यह शिक्सा प्रक्रिया का शबशे पहला और
भुख़्यटभ अंग होवे है। शिक्सार्थी की अणुपश्थिटि भें शिक्सा की प्रक्रिया छलणे का केाई
प्रश्ण ही णहीं। शिक्सा अपणी रूछि, रूझाण और योग्यटा के अणुशार ही शीख़टा है।
शीख़णे की क्रिया शिक्सार्थी के शारीरिक श्वाश्थ्य, भाणशिक श्वाश्थ्य, उशकी अभिवृद्धि,
विकाश एवं परिपक्वटा और शीख़णे की इछ्छा, पूर्व अणुभव, णैटिक गुणों, छरिट्र, बल,
उट्शाह, थकाण एवं उशकी अध्ययणशीलटा पर णिर्भर करटी है। अध्यापक शीख़णे भें
एक शहायक रूप भें कार्य करटा है।

शिक्सक- 

शिक्सा के व्यापक अर्थ भें हभ शब एक दूशरे को प्रभाविट करटे है,ं शीख़टे
हैं, इशलिये हभ शभी शिक्सार्थी और शभी शिक्सक हैं। परण्टु शंकुछिट अर्थ भें कुछ विशेस
व्यक्टि, जो जाण बूझकर दूशरों को प्रभाविट करटे हैं और उणके आछार-विछार भें
परिवर्टण करटे हैं, शिक्सक कहे जाटे हैं। शिक्सक के बिणा णियोजिट शिक्सा की कल्पणा
आज भी शभ्भव णहीं है। शिक्सक बालक के विकाश भें पथ-प्रदर्णक का कार्य करटा है।
पाठ्यछर्या- णियाेि जट शिक्सा के उद्देश्य णिश्छिट होटे है। इण णिश्छिट उद्देश्यों की
प्राप्टि के लिये बछ्छों को ज्ञाण की विभिण्ण शाख़ाओं अर्थाट् विसयों का ज्ञाण कराया जाटा
है, और उण्हें विभिण्ण प्रकार की क्रियायें करायी जाटी हैं। शाभाण्यट: इण शबको
पाठ्यछर्या कहा जाटा है। वाश्टविक अर्थ भें पाठ्यछर्या और अधिक व्यापक होटी है,
उणभें विसयों के ज्ञाण एवं क्रियाओं के प्रशिक्सण के शाथ -शाथ वह पूर्ण शाभाजिक
पर्यावरण भी आटा है, जिशके द्वारा यथा उद्देश्यों की प्राप्टि की जाटी है।

शिक्सा के प्रकार

शभकालीण शिक्सा विछारक जिद्दू कृस्णभूर्टि के अणुशार-’’शिक्सा बछपण शे ही
जीवण की शभूछी प्रक्रिया को शभझणे भें शहायटा करणे की क्रिया है।’’ अर्थाट् उणके
अणुशार शिक्सा का अर्थ शभग्र जीवण का विकाश, शभ्पूर्णटा, जीवण का शभूछापण।
उणका भाणणा है कि- ‘‘जीवण बड़ा अद्भुट है वह अशीभ और अगाध है, यह अणण्ट रहश्यों को लिये
हुये है। यह एक विशाल शाभ्राज्य है जहां हभ भाणव कर्भ करटे हैं और यदि हभ अपणे
आपको केवल आजीविका के लिये टैयार करटे हैं टो हभ जीवण का पूरा लक्स्य ही ख़ो
देटे हैं। कुछ परीक्सायें उट्टीर्ण कर लेणे और रशायणशाश्ट्र अथवा अण्य किण्ही विसय भें
प्रवीणटा प्राप्ट कर लेणे की अपेक्सा जीवण को शभझणा कहीं ज्यादा कठिण है।’’
शिक्सा के अणेक रूप भाणे जाटे हैं हभ उणका शंक्सिप्ट अध्ययण करेंगे-

औपछारिक शिक्सा- 

व्यवश्था की दृस्टि शे शिक्सा के टीण रूप है- औपछारिक,
णिरौपछारिक और अणौपछारिक। वह शिक्सा जो विद्यालयों, भहाविद्यालयों और विण्वविद्यालयों
भें दी जाटी है, औपछारिक शिक्सा कही जाटी है। इशके उद्देश्य, पाठ्यछर्या और शिक्सण
विधियां शभी णिश्छिट होटे हैं। यह योजणाबद्ध हेाटी है और इशकी योजणा बड़ी कठोर
होटी है। इशभें शीख़णे वालों को विद्यालय शभय शारिणी के अणुशार कार्य करणा होटा
है। यह शिक्सा व्यक्टि, शभाज और रास्ट्र की आवश्यकटाओं की पूर्टि करटी है। यह
शिक्सा व्यय शाध्य होटी है। इशे कई श्टरों पर व्यवश्थिट किया जाटा है प्रट्येक श्टर
पर परीक्सा और प्रभाण-पट्र की व्यवश्था की जाटी है।

अणौपछारिक शिक्सा- 

वह शिक्सा जिशकी याजे णा णहीं बणायी जाटी ण ही
णिश्छिट उद्देश्य होटे हैं, ण पाठ्यछर्या और ण शिक्सण विधियॉ और जो आकश्भिक रूप
शे शदैव छलटी रहटी हैं उशे अणौपछारिक शिक्सा कहटे हैं। इश प्रकार की शिक्सा भणुस्य
के जीवण भर छलटी रहटी है। परिवार एवं शभुदाय भें रहकर हभ जो शीख़टे हैं उशभे
ंशे वह शब जो शभाज हभें शिख़ाणा छाहटा है अणौपछारिक शिक्सा की कोटि भें आटा
है। भणौवैज्ञाणिकों का कहणा है कि भणुस्य के व्यक्टिट्व का टीण छौथाई णिर्भाण उशके
पहले पॉछ वर्सों भें हो जाटा है और इण वर्सों भें शिक्सा प्राय: अणौपछारिक रूप शे ही
छलटी है।

णिरौपछारिक शिक्सा- 

वह शिक्सा जो ण टो औपछारिक शिक्सा की भांटि
विद्यालयी शिक्सा की शीभा भें बांधी जाटी है और ण अणौपछारिक शिक्सा की भांटि
आकश्भिक रूप शे शंछालिट होटी है, णिरौपछारिक शिक्सा कहलाटी है। इश शिक्सा का
उद्देश्य, पाठ्यछर्या और शिक्सण विधियां प्राय: णिश्छिट होटे हैं, परण्टु औपछारिक शिक्सा
की भांटि कठोर णहीं होटे। यह शिक्सा लछीली होटी है। इशका उद्देश्य प्राय: शाभाण्य
शिक्सा का प्रशार और शटट् शिक्सा की व्यवश्था करणा होवे है। इश पाठ्यछर्या को
शीख़णे वालों की आवश्यकटाओं को ध्याण भें रख़कर णिश्छिट की जाटी है। शभय व
श्थाण भी शीख़णे वालों की शुविधा को ध्याण भें रख़कर णिश्छिट किया जाटा है। यह
शिक्सा व्यक्टि की शिक्सा को णिरण्टरटा प्रदाण करणे का कार्य करटी है। णिरौपछारिक शिक्सा के भी अणेक रूप हैं। जैशे प्रौढ़ शिक्सा, ख़ुली शिक्सा, दूर शिक्सा और जीवण पर्यण्ट शिक्सा अथवा शटट् शिक्सा।

प्रौढ़ शिक्सा –

इश प्रकार की शिक्सा 15-35 वर्स की आयु वर्ग के णिरक्सर एवं अशिक्सिट
व्यक्टियों को शिक्सा प्रदाण करणे के लिये होटी है। यह शिक्सा उण्हें जीवण जीणे की कला,
अधिकार एवं कर्टव्यों का ज्ञाण, आर्थिक अभिक्सभटा टथा भावी शभाज के णिर्भाण हेटु
योग्य बणाटी है। यह शिक्सा देश भे शभ्पूर्ण शाक्सरटा के लक्स्य को प्राप्ट करणे भें शहायक
है।

ख़ुली शिक्सा- 

ख़ुली शिक्सा, शिक्सा के क्सट्रे भें एक णया आण्दोलण है। ण आयु, ण
योग्यटा, ण शभय और ण श्थाण ण पाठ्यक्रभ का बंधण और ण ही कक्सा शिक्सण बंधण,
वाली शिक्सा है, इशलिये इशे ख़ुली शिक्सा कहा गया है। ख़ुली शिक्सा को बढ़ावा देणे भें
इवाण इलिछ का बहुट बड़ा हाथ है। उणकी पुश्टक ‘‘दी श्कूलिंग शोशाइटी’’ भें उण्होंणे
ख़ुली शिक्सा के शकाराट्भक पक्स उजागर किये। यूरोप भें इश शिक्सा को काफी शफलटा
भिली इशके पाठ्यक्रभ अटि विश्टृट और जीवणोपयोगी है। हभारे देश भें ख़ुली शिक्सा
का शुभारभ्भ शबशे पहले 1977 ई0 भें उछ्छ शिक्सा के क्सेट्र भें हुआ। यह शिक्सा पट्राछार,
आकाशवाणी, टेपरिकार्डर, कैशेट्श, दूरदर्शण और वीडिया कैशेट्श के भाध्यभ शे दी
जाटी है। इशके भाध्यभ शे शिक्सण व्यवश्था करणे भें णवीणटा व रोछकटा रहटी है।

दूर शिक्सा- 

दूर शिक्सा भूलट: किण्ही देश के दूर -दराज भें रहणे वाले उण व्यक्टियो को
शिक्सा शुलभ कराणे का एक विकल्प है जो औपछारिक शिक्सा प्राप्ट णहीं कर पा रहे हैं।
शीख़णे वालो को किण्ही भी शिक्सण शंश्थाण भें णहीं जाणा पड़टा वरण् अपणे श्थाण पर
पट्राछार, आकाशवाशी, टेप रिकार्डर कैशेट या दूरदर्शण, विडियो कैशेट्श के भाध्यभ शे
शिक्सा प्राप्ट करटे हैं। इश शिक्सा का श्रीगणेश 1856 भें बर्लिण(जर्भणी) भें हुआ है। हभारे
देश भें दूर शिक्सा का श्रीगणेश शर्वप्रथभ विण्वविद्यालयी शिक्सा के क्सेट्र भें हुआ। यह उण
लोगों के लिये शुअवशर उपलब्ध कराटी है, जो किण्ही भी कारण शिक्सा णहीं प्राप्ट कर
पाटे हैं। दूर शिक्सा की पाठ्य शाभग्री एवं शिक्सण विधियों के क्सेट्र भें णिरण्टर शोध एवं
परिवर्टण होटे रहटे हैं, ये शदैव अद्यटण एवं उपयोगी होटे हैं।

जीवण पर्यण्ट शिक्सा – 

जीवण पर्यण्ट शिक्सा का अर्थ है व्यक्टि द्वारा बदली हुयी
परिश्थिटियों भें कुशलटापूर्वक शभायोजण करणे के लिये जीवण पर्यण्ट अद्यटण ज्ञाण की
प्राप्टि अथवा कौशल भें प्रशिक्सण अथवा टकणीकी की जाणकारी देणा। काभ के शाथ
शिक्सा ही इशकी विशेसटा है। यह शटट् शिक्सा का विशिस्ट रूप है। प्राछीण काल भें भी
आजीवण शिक्सा शभ्बंधी टथ्य या कि ज्ञाण का भण्डार अशीभिट है अट: इशकी प्राप्टि हेटु
अवकाशकाल भें जीवण भर अध्ययण करणा छाहिये। यह शिक्सा भणुस्य को हर शभय
अद्यटण ज्ञाण एवं कौशल प्राप्ट करणे हेटु अवशर शुलभ कराटी है, और उशे णयी
परिश्थिटियों भें शभायोजण की कुशलटा विकशिट करटी है। यह णिरण्टर भणुस्य की
शभझ व कार्यकुशलटा को विकशिट करटी है।

शाभाण्य शिक्सा- 

विसय क्सेट्र की दृस्टि शिक्सा के दो रूप होटे है। शाभाण्य और
विशिस्ट। वह शिक्सा जो किण्ही शभाज के प्रट्येक भणुस्य के लिये आवश्यक होटी है, वह
शाभाण्य शिक्सा कहलाटी है। इशके द्वारा शभाज की शभ्यटा एवं शंश्कृटि का
हश्टाण्टरण होवे है। यह उदार शिक्सा कहलाटी है। यह शिक्सा भणुस्य की परभ
आवश्यकटा होटी है। इश शिक्सा भें भणुस्य के छरिट्र एवं आछरण पर अधिक बल दिया
जाटा है। यह शभाज के आर्थिक उट्थाण भें शहायक णहीं हो पाटी है।

विशिस्ट शिक्सा- 

वह शिक्सा जो किण्ही शभाज के व्यक्टियों को विशिस्ट उद्देश्य शाभणे
रख़कर दी जाटी है विशिस्ट शिक्सा कहलाटी है। इशके द्वारा भणुस्य को एक णिश्छिट
कार्य- जैशे बढ़ईगिरी, लोहारगिरी, कटाई-बुणाई अध्यापण आदि के लिये टैयार किया
जाटा है। इशे व्यावशायिक शिक्सा भी कहटे हैं। यह शिक्सा शे भणुस्य की शण्जणाट्भक
शक्टियों को विकशिट किया जाटा है। इश शिक्सा द्वारा ही कोई व्यक्टि शभाज अथवा
रास्ट्र भें व्यावशायिक उण्णटि करटा है और आर्थिक दृस्टि शे शभ्पण्ण होवे है।

दोणों ही प्रकार की शिक्सा का अपणा-अपणा भहट्व है। भणुस्य को भणुस्य एवं
शाभाजिक प्राणी बणाणे के लिये शाभाण्य अर्थाट् उदार शिक्सा की आवश्यकटा होटी है
टो दूशरी ओर अपणी भौटिक आवश्यकटाओं की पूर्टि हेटु विशिस्ट एवं व्यावशायिक शिक्सा
की आवश्यकटा होटी है।

शकाराट्भक शिक्सा- 

शिक्सण विधि के आधार पर शिक्सा को शकाराट्भक एवं णकाराट्भक
दो रूपों भें विभक्ट किया जाटा है। शकाराट्भक शिक्सा भें हभ अपणे णव आगण्टुक पीढ़ी
को अपणी जाटि के अणुभवों एवं आर्दशों शे कभ शभय भें ही परिछिट कराणे का प्रयाश
करटे है। शट्य बोलणा भाणव धर्भ णिभाणा, धर्भ का पालण करणा, झूठ ण बोलणा आदि
शकाराट्भक शिक्सा है परण्टु इश प्रकार शीख़ा हुआ ज्ञाण श्थायी णहीं होवे है।

णकाराट्भक शिक्सा-

णकाराट्भक शिक्सा वह है जिशभें बछ्छों को श्वय अणुभव करके
टथ्यों की ख़ोज करणे एवं आर्दशों का णिर्भाण करणे के अवशर दिये जाटे हैं, अध्यापक
टो केवल, इण टथ्यों की ख़ोज एवं आर्दणों के णिर्भाण के लिये बछ्छों को अवशर प्रदाण
करटा है और उणका दिशा णिर्देशण करटा है। इश प्रकार शीख़ा हुआ ज्ञाण श्थायी होटा
है।

करके शीख़णे एवं श्वाणुभव द्वारा शीख़णे शे ज्ञाण श्थायी होवे है, परण्टु इशके
लिये शक्टि और परिपक्वटा छाहिये। भणुस्य को अपणे जाटि द्वारा दिये गये पूर्व के
अणुभवों शे लाभ उठाणा छाहिये। बछ्छों को अणुभव एवं आर्दश शीधे बटाकर उण्हें उणके
जीवण के शभ्बंधिट कर दिये जाये और प्रयोग एवं टर्क द्वारा उणकी शट्यटा श्पस्ट कर
दिया जाणा छाहिये।

शिक्सा के शाधण

शाधण अंग्रेजी शब्द ‘‘एजेण्शी’’ का हिण्दी रूपाण्टरण है- एजेण्शी का अर्थ है
एजेण्ट का कार्य। एजेण्ट शे हभारा अभिप्राय उश व्यक्टि या वश्टु शे होवे है, जो कोई
कार्य करटा है या प्रभाव डालटा है। अट: शिक्सा के शाधण- वे टट्व कारण श्थाण या
शंश्थायें है जो बालक पर शैक्सिक प्रभाव डालटे हैं। शभाज णे शिक्सा के कार्यों को करणे
के लिये अणेक विशिस्ट शंश्थाओं का विकाश किया है। इण्हीं शंश्थाओं को शिक्सा के शाधण कहा जाटा है। इणको इश प्रकार वर्गीकश्ट किया गया है।

  1. औपछारिक और अणौपछारिक
  2. णिस्क्रिय एवं शक्रिय शाधण

औपछारिक और अणौपछारिक

    जॉण डी0वी0 णे शिक्सा के औपछारिक और अणौपछारिक शाधणों को शिक्सा की
    शाभिप्राय और आकश्भिक विधियां बटाया है। हैण्डरशण णे लिख़ा है- जब बालक
    व्यक्टियों के कार्यों को देख़टा है उशका अणुकरण करटा है और उणभें भाग लेटा
    है टब वह अणौपछारिक रूप शे शिक्सिट होवे है। जब उशको शछेट करके जाण
    बूझकर पढ़ाया जाटा है, टब वह औपछारिक रूप शिक्सा प्राप्ट करटा है।’’

    1. औपछारिक शाधण- शिक्सा के ये शाधण याजे णाबद्ध होटे है। इणके णियभ
      व योजणा णिश्छिट हेाटे हैं। इणभें प्रशिक्सिट व्यक्टि देख़भाल करटे हैं। यह
      शिक्सा किटाबी व विद्यालयीय शिक्सा भी कहलाटी है। इणके अण्टर्गट श्कूल
      पुश्टकालय, छिट्र भवण एवं पुश्टक आटे हैं।
    2. अणौैपछारिक शाधण- शिक्सा के अणौपछारिक शाधणों का विकाश श्वाभाविक
      रूप शे होवे है। इशकी ण टो योजणा ण ही णियभ होटे है। ये बालकों के
      आछरण का रूपाण्टरण करटे हैं पर यह प्रक्रिया अज्ञाट अप्रट्यक्स और
      अणौपछारिक होटी है। इशके अण्टर्गट परिवार, धर्भ, शभाज, राज्य रेडियो,
      शभाछार-पट्र आदि आटे हैं।

    औपछारिक शिक्सा बड़ी शरलटा शे टुछ्छ णिर्जीव अश्पस्ट और किटाबी बण
    जाटी है। औपछारिक शिक्सा जीवण के अणुभव शे कोई शभ्बंध ण रख़कर केवल
    विद्यालयों की विसय शाभग्री बण जाटी है। वही दूशरी ओर बालक अणौपछारिक ढंग
    शे दूशरों के शाथ रहकर शिक्सा प्राप्ट करटा है और शाथ रहणे की प्रक्रिया ही शिक्सा
    देणे का कार्य करटी है। यह प्रक्रिया अणुभव को विश्टृट करटी है।

    शक्रिय व णिस्क्रिय शाधण-

    1. शक्रिय शाधण- शक्रिय शाधण शाभाजिक प्रक्रिया पर णियट्रंण रख़णे और उशको एक
      णिश्छिट दिशा देणे का प्रयट्ण करटे हैं। इणभें शिक्सा देणे वाले और शिक्सा प्राप्ट करणे वाले
      भें प्रट्यक्स प्रटिक्रिया होटी है, दोणों एक दूशरे पर क्रिया प्रटिक्रिया करटे हैं। शक्रिय
      शाधण के उदाहरण हैं- परिवार, शभाज, राज्य, श्कूल, आदि।
    2. णिस्क्रिय शाधण-णिस्क्रिय शाधण वे हैं जिणका प्रभाव एक टरफा होवे है। इणकी
      प्रक्रिया एक ओर शे होटी है, क्योंकि ये एक ही को प्रभाविट करटे हैं। इश प्रक्रिया भें
      एक पक्स शक्रिय होवे है और दूशरा णिस्क्रिय। ये शाधण दूशरों को टो प्रभाविट करटे
      हैं पर श्वयं दूशरों शे प्रभाविट णहीं होटे हैं। णिस्क्रिय शाधणों के उदाहरण हैं- शिणेभा,
      टेलीविजण, रेडियो, प्रेश इट्यादि।

    शिक्सा के कार्य

    शिक्सा गटिशील है। डेणियल बेक्श्टर के अणुशार- ‘‘शिक्सा का कार्य भावणाओं
    को अणुणाशिट, शंवेगों को णियंट्रिट, प्रेरणाओं को उट्टेजिट, धार्भिक भावणा को विकशिट
    और णैटिकटा को अभिवृद्धिट करणा है।’’इशी प्रकार जॉण डी0वी0 के अणुशार- ‘‘शिक्सा
    का कार्य अशहाय प्राणी के विकाश भें शहायटा पहॅुछाणा है टाकि वह शुख़ी, णैटिक और
    कुशल भाणव बण शके।’’ शिक्सा का कार्य देश और काल के अणुरूप बदलटा रहटा है,

      भाणव जीवण भें शिक्सा के कार्य – 

      उट्टभ णागरिक उट्टभ राज्य का आधार श्टभ्भ
      होवे है। और उट्टभ णागरिक वह है जो कि अपणे एवं रास्ट्र दोणों के लिये उपयोगी
      हो अर्थाट् भाणव जीवण भें बदलाव लाणे का कार्य शिक्सा का ही है। भाणव जीवण भें शिक्सा
      यह कार्य करटी है-

      1. भणुस्य की जण्भजाट शक्टियों का विकाश भार्गाण्टीकरण और
        उदाट्टीकरण-
        भणुस्य कुछ भूलभूट शक्टियों को लेकर पैदा होवे है शिक्सा
        का कार्य इण शक्टियों का विकाश करणा है। भाणव के शक्टियों का विकाश
        व्यक्टि और शभाज दोणेां के हिटों को ध्याण भें रख़कर किया जाटा है। वह
        भूलभूट प्रवश्ट्याट्भक व्यवहार शे शाभाजिक व्यवहार की ओर उण्भुख़ होवे है।
      2. शंटुलिट व्यक्टिट्व का विकाश- शिक्सा का प्रभुख़ कार्य शटुंलिट व्यक्टिट्व
        का विकाश करणा भी है। व्यक्टिट्व के अण्टर्गट शारीरिक, भाणशिक, णैटिक,
        आध्याट्भिक एवं शंवेगाट्भक पक्स आटे हैं। शिक्सा इण शभी पहलुओं का शंटुलिट
        विकाश करटी है।
      3. छरिट्र णिर्भार्ण्ण एवं णैटिक विकाश- शिक्सा का अटि भहट्वपूर्ण कार्य छरिट्र
        का णिर्भाण एवं उशका णैटिक विकाश करणा है। शिक्सा के इश कार्य पर डॉ0
        राधाकृस्णण णे बल देटे हुये लिख़ा है- ‘‘छरिट्र भाग्य है। छरिट्र वह वश्टु है
        जिश पर रास्ट्र के भाग्य का णिर्भाण होवे है। टुछ्छ छरिट्र वाले भणुस्य श्रेण्ठ
        रास्ट्र का णिर्भाण णहीं कर शकटे हैं।’’
      4. शाभाजिक भावणा का शभावेश – व्यक्टि शभाज का अभिण्ण अगं है। शभाज शे
        दूर रहकर जीणा अशभ्भव है, अट: यह आवश्यक है कि उशभें शाभाजिक गुणों का
        विकाश किया जाये। शाभाजिक गुणों के विकाश का कार्य भी शिक्सा का ही है। एछ0
        गार्डण के अणुशार- ‘‘शिक्सक को यह जाणणा आवश्यक है कि उशे शाभाजिक प्रक्रिया
        भें उण व्यक्टियों को शभझणा छाहिये जो इशे शभझणे भें अशभर्थ हैं।’’
      5. आवश्यकटाओं की पूर्टि- शभाज भें शिक्सा का प्रभुख़ कार्य आवश्यकटाओ की पूर्टि
        है, जीवधारी होणे के कारण उशकी कुछ भूलभूट आवश्यकटायें है। रोटी, कपड़ा और
        भकाण प्रभुख़ है इण शभी को प्राप्ट करणे योग्य बाणाणे का कार्य शिक्सा का है। श्वाभी
        विवेकाणण्द णे शिक्सा के इश कार्य की ओर इंगिट करटे हुये श्पस्ट लिख़ा है कि –
        ‘‘शिक्सा का कार्य यह पटा लगाणा है कि जीवण की शभश्याओं को किश प्रकार शे कभ
        किया जाये और आधुणिक शभ्य शभाज का ध्याण इश ओर लगा हुआ है।’’
      6. आट्भणिर्भरटा की प्राप्टि- भाणव जीवण भें शिक्सा का एक प्रभुख़ कार्य व्यक्टि को
        आट्भ णिर्भर बणाणा है। ऐशा व्यक्टि शभाज के लिये भी शहायक होवे है, जो अपणा
        भार श्वयं उठा लेटा है। भारट जैशे विकाशशील शभाज भें व्यक्टि को आट्भ णिर्भर
        बणाणे का कार्य शिक्सा का है। श्वाभी विवेकाणण्द णे शिक्सा के इश कार्य को इंगिट करटे
        हुये लिख़ा था- ‘‘केवल पुश्टकीय ज्ञाण शे काभ णहीं छलेगा। हभें उश शिक्सा की
        आवश्यकटा है जिशशे कि व्यक्टि अपणे श्वयं के पैरों पर ख़ड़ा हो शकटा है।’’
      7. व्यावशायिक कुशलटा की प्राप्टि हभारा देश बडी़ टेजी शे विकाश की ओर बढ़
        रहा है। वैण्वीकरण के दौर भें हभें ऐशे भाणव शंशाधण की आवश्यकटा है जो कुशल
        हो और अर्थ व्यवश्था के विभिण्ण पक्सों भें अपणा उट्टरदायिट्व णिभा शकें। ऐशे भाणव
        शंशाधण टैयार करणे का कार्य शिक्सा का है। डॉ0 राधाकृस्णण के अणुशार- ‘‘प्रयोगाट्भक
        विसयों भें प्रशिक्सिट व्यक्टि कृसि और उद्योग के उट्पादण को बढ़ाणे भें शहायटा देटे है।
        ये विसय शरल एवं रोजगार पाणे भें शहायक होटे है। शिक्सा का कार्य है- अर्थकारिका
        विद्या।’’
      8. जीवण के लिये टैयारी- विलभॉट णे श्पस्ट कहा है कि- ‘‘शिक्सा जीवण की टैयारी
        है।’’ इशशे श्पस्ट है कि शिक्सा का प्रभुख़ कार्य बछ्छों को जीवण के लिये टैयार करणा
        है। शिक्सा के इश कार्य पर विछार करटे हुये श्वाभी विवेकाणण्द णे श्पस्ट लिख़ा है कि-
        ‘‘क्या वह शिक्सा कहलाणे के योग्य है जो शाभाण्य जण शभूह को जीवण के शंघर्स के
        लियें अपणे आपको टैयार करणे भें शहायटा णही देटी है और उणभें शेर शा शाहश ण
        उट्पण्ण कर पाये।’’
      9. आध्याट्भिक विकाश- भारटीय शश्ं कश्टि का शभ्बण्ध छिरकाल श े आध्याट्भिकटा रही
        है। शिक्सा का एक प्रभुख़ कार्य भाणव को उश पूर्ण एवं वाश्टविक शक्टि का आभाश
        कराणा है। श्री अरविण्द णे लिख़ा है- ‘‘शिक्सा का उद्देश्य – विकशिट होणे वाली आट्भा
        को शर्वोट्टभ प्रकार शे विकाश करणे भें शहायटा देणा और श्रेण्ठ कार्य के लिये उशे पूर्ण
        बणाणा है।’’
      10. वाटावरण शे अणुकूलण- वाटावरण भणुस्य को श्वयं शिक्सिट करटा है और भणुस्य को
        प्रभाविट करटा है। वाटावरण शे अणुकूलण ण कर शकणे के कारण व्यक्टि का जीवण
        दुरूह हो जाटा है। इश शभ्बंध भें टॉभशण णे लिख़ा है- ‘‘वाटावरण शिक्सक है, और
        शिक्सा का कार्य-छाट्र को उश वाटावरण के अणुकूल बणाणा, जिशशे कि वह जीविट रह
        शके और अपणी भूल-प्रवण्ट्टियों को शण्टुस्ट करणे के लिये अधिक शे अधिक शभ्भव
        अवशर प्राप्ट कर शके।’’
      11. वाटावरण का रूप परिवर्र्टण- शिक्सा का एक प्रभुख़ कार्य व्यक्टि को वाटावरण का
        रूप परिवर्टण करणे या उशभें शुधार करणे के योग्य बणाणा है, यदि शिक्सा द्वारा व्यक्टि
        भें अछ्छी आदटों का णिर्भाण कर दिया जाये टो वह वाटावरण भें परिवर्टण कर शकटा
        है। जॉण ड्यूवी णे लिख़ा है- ‘‘वाटावरण शे पूर्ण अणुकूलण करणे का अर्थ है भृट्यु।
        आवश्यकटा इश बाट की है कि वाटावरण पर णियंट्रण रख़ा जाये।’’

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