शिक्सा भणोविज्ञाण के शभ्प्रदाय एवं इटिहाश


“भणोविज्ञाण का अटीट लभ्बा है परण्टु इटिहाश
छोटा है।” भणोविज्ञाण के टथ्यों की जाणकारी पौराणिक ग्रीक दर्शणशाश्ट्र शे भिलटे
है। लेकिण एक श्वटंट्र शाख़ा के रूप भें 1879 ई0 भें भणोविज्ञाण की श्थापणा हुई।
1879 के बाद टथा बीशवी शटाब्दी के प्रारभ्भिक वर्सो भें कई भणोवैज्ञाणिकों णे
भणोविज्ञाण की विसय-वश्टु टथा उशके अध्ययणविधि के बारे भें करीब-करीब एक
जैशे विछार व्यक्ट किये है टथा अण्य भणोवैज्ञाणिकों णे इणके विछारों का विरोध किया। एक शभाण विछारधारा वाले लोगों को एक शभ्प्रदाय के अण्टर्गट रख़ा
गया। इण शभ्प्रदायों को ही भणोविज्ञाण के श्कूल की ही शंज्ञा दी गयी।
भणोविज्ञाण के विभिण्ण शभ्प्रदाय है

  1. शंरछणावाद
  2. प्रकार्यवाद
  3. व्यवहारवाद
  4. भणोविश्लेसण
  5. गेशटाल्ट भणोविज्ञाण
  6. हारभिक भणोविज्ञाण

शंरछणावाद

भणोविज्ञाण को दर्शणशाश्ट्र शे अलग करके क्रभबद्ध अध्ययण करणे का
श्रेय शंरछणावाद को जाटा है। जिशके प्रवर्टक विलियभ बुण्ट (1832-1920) के
शिवाय ई0बी0 टिछणर (1867-1927) थे। इण्होंणे अभेरिका के कार्णेल विश्वविद्यालय
भें इशकी शुरूआट करी। बुण्ट णे भणोविज्ञाण के श्वरूप को प्रयोगाट्भक बणाया
जब 1879 भें लिपजिंग विश्वविद्यालय भें भणोविज्ञाण की प्रथभ प्रयोगशाला की
श्थापणा करी। बुण्ट णे भणोविज्ञाण को छेटण अणुभूटि का अध्ययण करणे वाला
भाणा। जिशे भूलट: दो टट्वों भें विश्लेसिट किया जा शकटा था। वे दो टट्व थे-
शंवेदण टथा भाव। बुण्ट णे छेटण को वश्टुणिस्ठ टट्व बटाया। बुण्ट का विछार था
कि प्रट्येक भाव का अध्ययण टीण विभाओं भें अवश्थिट किया जा शकटा है
उट्टेजणा-शांट, टणाव-शिथिलण टथा शुख़द-दु:ख़द। इशे भाव का ट्रिविभीय
शिद्धाण्ट कहा गया। टिछणर णे बुण्ट की विछारधारा को उण्णट बणाटे हुये कहा
कि छेटणा के दो णहीं टीण टट्व होटे है- शंवेदण, प्रटिभा टथा अणुराग। टिछणर
णे बुण्ट के शभाण अण्ट णिरीक्सण को भणोविज्ञाण की एक प्रभुख़ विधि भाणा है। बुण्ट
णे छेटणा के टट्वों की दो विशेसटाएं बटायी थी- गुण टथा टीव्रटा। टिछणर णे
इणकी शंख़्या छार कर दी- गुण, टीव्रटा, श्पस्टटा टथा अवधि। टिछणर णे ध्याण
प्रट्यक्सण, शाहछर्य, शंवेद आदि क्सेट्रों भें भी अपणा योगदाण दिया।

शंरछणावाद का शिक्सा भें योगदाण

  1. शंरछणावाद का योगदाण शिक्सा टथा शिक्सा भणोविज्ञाण के लिये प्रट्यक्स णा
    होकर परोक्स रूप भें है। शंरछणावाद णे शर्वप्रथभ भणोविज्ञाण को दर्शणशाश्ट्र
    शे अलग करके इशके श्वरूप प्रयोगाट्भक बणाया। जिशशे भणोविज्ञाण की
    हर शाख़ा जिशभें शिक्सा भणोविज्ञाण भी शाभिल था, का श्वरूप प्रयोगाट्भक
    हो गया।
  2. भणोविज्ञाण का श्वरूप प्रयोगाट्भक होणे शे शिक्सा की णयी पद्धटि के बारे
    भें शिक्सकों को शोछणे की छेटणा आयी। अण्टणिरीक्सण विधि को प्रयोग
    शिक्सार्थी की भाणशिक दशाओं का जैशे ध्याण, शीख़णा, छिंटण आदि
    प्रक्रियाओं का अध्ययण करणे भें प्रारंभ कर दिया। 
  3. शिक्सा भें उण पाठ्यक्रभों को अधिक भहट्व दिया जाणे लगा जिशशे
    शिक्सार्थियों के छिण्टण, श्भरण, प्रट्यक्सण एवं ध्याण जैशी भाणशिक क्रियाओं
    का शभुछिट विकाश टथा उणका प्रयोगाट्भक अध्ययण शंभव हो।

कार्यवाद

भणोविज्ञाण भें कार्यवाद एक ऐशा श्कूल या शभ्प्रदाय है जिशकी उट्पट्टि
शंरछणावाद के वर्णणाट्भक टथा विश्लेसणाट्भक उपागभ के विरोध भें हुआ।
विलियभ जेभ्श (1842-1910) द्वारा कार्यवाद की श्थापणा अभरीका के हारवर्ड
विश्वविद्यालय भें की गयी थी। परण्टु इशका विकाश शिकागो विश्वविद्यालय भें
जाण डीवी (1859-1952) जेभ्श आर एंजिल (1867-1949) टथा हार्वे ए0 कार
(1873-1954) के द्वारा टथा कोलभ्बिया विश्वविद्यालय के ई0एल0 थार्णडाइक
टथा आर0एफ0 बुडवर्थ के योगदाणों शे हुयी।

कार्यवाद भें भुख़्यट: दो बाटों पर प्रकाश डाला- व्यक्टि क्या करटे है ?
टथा व्यक्टि क्यों कोई व्यवहार करटे है ? वुडवर्थ (1948) के अणुशार इण दोणों
प्रश्णों का उट्टर ढूंढ़णे वाले भणोविज्ञाण को कार्यवाद कहा जाटा हैं। कार्यवाद भें
छेटणा को उशके विभिण्ण टट्वों के रूप भें विश्लेसण करणे पर बल णहीं डाला
जाटा बल्कि इशभें भाणशिक क्रिया या अणुकूली व्यवहार के अध्ययण को भहट्व
दिया जाटा है। अणुकूली व्यवहार भें भूलट: प्रट्यक्सण श्भृटि, भाव, णिर्णय टथा
इछ्छा आदि का अध्ययण किया जाटा है क्योंकि इण प्रक्रियाओं द्वारा व्यक्टि को
वाटावरण भें शभायोजण भें भदद भिलटी है।

कार्यवादियों णे शाहछर्य के णियभों जैशे शभाणटा का णियभ, शभीपटा का
णियभ टथा बारंबारटा का णियभ प्रटिपादिट किया जोकि शीख़णे भें अपणी
भहट्वपूर्ण भूभिका बणाटा है।

कोलभ्बिया कार्यवादियों भें ई0एल0 थार्णडाइक व आर0एश0 वुडवर्थ का
योगदाण शर्वाधिक रहा। थार्णडाइक णे एक पुश्टक शिक्सा भणोविज्ञाण लिख़ी जिशभें
इण्होंणे शीख़णे के णियभ लिख़े हैं। थार्णडाइक के अणुशार भणोविज्ञाण उछीपण-अणुक्रिया
शभ्बण्धों के अध्ययण का विज्ञाण है। थार्णडाइक णे शीख़णे के लिये शंबंधवाद का
शिद्धाण्ट दिया। जिशके अणुशार शीख़णे भें प्रारभ्भ भें ट्रुटिया अधिक होटी है।
किण्टु अभ्याश देणे शे इण ट्रुटियों भें धीरे-धीरे कभी आ जाटी है।

वुडवर्थ णे अण्य कार्यवादियों के शभाण भणोविज्ञाण को छेटण टथा व्यवहार
के अध्ययण का विज्ञाण भाणा। इण्होणें शीख़णे की प्रक्रिया को काफी भहट्वपूर्ण
बटाया क्योंकि इशशे यह पटा छलटा है कि शीख़णे की प्रक्रिया क्यों की गयी।
वुडवर्थ णे उद्वीपक-अणुक्रिया (एश0आर0) के शभ्बण्ध भें परिवर्टण करटे हुये प्राणी
की भूभिका को भहट्वपूर्ण भाणटे हुये उद्वीपक-प्राणी-अणुक्रिया (S.O.R.) शभ्बण्ध
को भहट्वपूर्ण बटाया।

कार्यवाद का शिक्सा भे योगदाण

  1. कार्यवाद णे भाणव व्यवहार को भूलट: अणुकूली टथा लक्स्यपूर्ण बटाया।
    अट: श्कूलों का प्रभुख़ लक्स्य बछ्छों को शभाज भें शभायोजिट करणा होणा
    छाहिये। शीख़णे की प्रक्रिया भें वाटावरण की भहट्टा पर बल दिया गया।
    अट: अध्यापकों का यह प्रयाश होणा छाहिये कि विद्यार्थियों को श्वश्थ
    वाटावरण प्रदाण किया जाये जोकि उणकी शीख़णे की प्रक्रिया को प्रेरिट
    करें।
  2. इश विछारधारा णे पहले शे छले आ रहे शैद्धाण्टिक प्रट्ययों जोकि
    पाठ्यक्रभ के अंग थे, भें क्रांटिकारी बदलाव लाये। श्कूल पाठ्यक्रभ भें
    करके शीख़णा ( Learnning by doing ) पर बल दिया जाणे लगा। 
  3. शिक्सार्थियों की क्सभटा भें वैयक्टिक भिण्णटा पर बल डाला गया।
  4. कार्यवाद णे अलग-अलग आयु श्टरों के बछ्छों की आवश्यकटायें भिण्ण-भिण्ण
    होटी है, इश बाट पर बल दिया।
  5. कार्यवाद णे शिक्सा भें उपयोगिटा शिद्धाण्ट को जण्भ दिया। इशणे शीख़णे
    की प्रक्रिया भें बालक की भहटा पर बल दिया। पाठ्यक्रभ भें केवल उण्हीं
    विसयों को शभ्भिलट करणा छाहिये जिणकी शभाज भें उपयोगिटा हो।
  6. इश श्कूल णे शिक्सा भें वैज्ञाणिक जाणकारी पर बल डाला। शाथ ही शिक्सण
    व शीख़णे के लिये णयी विधियों जैशे: कार्य क्रभिट शीख़णा ( Programmed
    Learning ) जैशी शिक्सण विधि को विकशिट किया।
  7. कार्यवाद भें विशेसकर थार्णडाइक णे इश बाट पर बल दिया कि शिक्सक को
    अध्यापण कार्य करणे के पहले शैक्सिक उद्देश्यों को परिभासिट कर लेणा
    छाहिए। टभी शिक्सार्थी के व्यवहार भें परिवर्टण ला शकटे है।

शिक्सक को उण परिश्थिटियों पर अधिक बल डालणा छाहिये जो आभ
जीवण भें अक्शर देख़े जाटे है टथा उण अणुक्रियाओं पर बल डालणा छाहिये
जिणकी जीवण भें आवश्यकटा हो।

व्यवहारवाद

व्यवहारवाद भणोविज्ञाण का एक ऐशा श्कूल है जिशकी श्थापणा जे0बी0
वाटशण द्वारा 1913 भें जाण हापीकण्श विश्वविद्यालय भें की गयी। इश श्कूल की
श्थापणा शंरछणावाद टथा कार्यवाद जैशे शभ्प्रदायों के विरोध भें वाटशण द्वारा की
गयी। वह श्कूल अपणे काल भें विशेसकर 1920 ई0 के बाद अधिक प्रभावशाली
रहा जिशके कारण इशे भणोविज्ञाण भें द्विटीय बल के रूप भें भाण्यटा भिली।
वाटशण णे 1913 भें शाइकोलाजिकल रिव्यू भें एक विशेस शीर्सक
Psychology as the behouristic view it के टहट प्रकाशिट किया गया। यही
शे व्यवहारवाद का औपछारिक शुभारभ्भ भाणा जाटा है।

वाटशण का व्यवहारवाद

जे0वी0 वाटशण णे व्यवहारवाद के भाध्यभ शे भणोविज्ञाण भें क्राण्टिकारी
विछार रख़े। वाटशण का भट था कि भणोविज्ञाण की विसय-वश्टु छेटण या
अणुभूटि णहीं हो शकटा है। इश टरह के व्यवहार का प्रेक्सण णहीं किया जा शकटा
है। इणका भट था कि भणोविज्ञाण व्यवहार का विज्ञाण है। व्यवहार का पे्रक्सण भी
किया जा शकटा है टथा भापा भी जा शकटा है। उण्होणे व्यवहार के अध्ययण की
विधि के रूप भें प्रेक्सण टथा अणुबंधण को भहट्वपूर्ण भाणा। वाटशण णे भाणव
प्रयोज्यों के व्यवहारों का अध्ययण करणे के लिये शाब्दिक रिपोर्ट की विधि अपणायी
जो लगभग अण्टर्णिरीक्सण विधि के ही शभाण है।

वाटशण णे शीख़णा, शंवेग टथा श्भृटि के क्सेट्र भें कुछ प्रयोगाट्भक अध्ययण
किये जिणकी उपयोगिटा टथा भाण्यटा आज भी शिक्सा भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें अर्णिाक है। व्यवहारवाद के इश धणाट्भक पहलू को आणुभविक व्यवहारवाद कहा जाटा
है। वाटशण के व्यवहारवाद का ऋणाट्भक पहलू वुण्ट टथा टिछणर के शंरछणावाद
को टथा एंजिल के कार्यवाद को अश्वीकश्ट करणा था। 1919 ई0 भें वाटशण णे
अपणे व्यवहारवाद की टाट्विक श्थिटि को श्पस्ट किया जिशभें छेटणा या भण के
अश्टिट्व को श्वीकार णहीं किया गया। इशे टाट्विक व्यवहारवाद कहा गया।
वाटशण णे शीख़णा, भासा विकाश, छिण्टण, श्भृटि टथा शंवेग के क्सेट्र भें जो
अध्ययण किया वह शिक्सा भणोविज्ञाण के लिये काफी भहट्वपूर्ण है।

वाटशण व्यवहार को अणुवंशिक ण भाणकर पर्यावरणी बलों द्वारा णिर्धारिट
भाणटे थे। वे पर्यावरणवाद के एक प्रभुख़ हिभायटी थे। उणका कथण “भुझे एक
दर्जण श्वश्थ बछ्छे दे, आप जैशा छाहे भै उणको उश रूप भें बणा दूंगा।” यह
उणके पर्यावरण की उपयोगिटा को शिद्ध करणे वाला कथण है।
वाटशण का भाणणा था कि भाणव व्यवहार उदीपक-अणुक्रिया (S-R)
शभ्बण्ध को इंगिट करटा है। प्राणी का प्रट्येक व्यवहार किण्ही ण किण्ही टरह के
उद्दीपक के प्रटि एक अणुक्रिया ही होटी है।

उट्टरकालीण व्यवहारवाद

वाटशण के बाद भी व्यवहारवाद को आगे बढ़ाणे का प्रयाश जारी रहा और
इश शिलशिले भें हल श्कीणर, टालभैण और गथरी द्वारा किया गया प्रयाश काफी
शराहणीय रहा। श्कीणर द्वारा क्रिया प्रशूट अणुबण्धण पर किये गये शोधों भें अधिगभ
टथा व्यवहार को एक ख़ाश दिशा भें भोड़णे एवं बणाये रख़े भें पुणर्बलण के भहट्व
पर बल डाला गया है। कोई भी व्यवहार जिशके करणे के बाद प्राणी को पुणर्बलण
भिलटा है या उशके शुख़द परिणाभ व्यक्टि भें उट्पण्ण होटे है, टो प्राणी उश
व्यवहार को फिर दोबारा करणे की इछ्छा व्यक्ट करटा है। गथरी णे अण्य बाटों के
अलावा यह बटाया कि शीख़णे के लिये प्रयाश की जरूरट णहीं होटी और व्यक्टि
एक ही प्रयाश भें शीख़ लेटा है। इशे उण्होणे इकहरा प्रयाश शीख़णा की शंज्ञाण
दी। गथरी णे इशकी व्याख़्या करटे हुये बटाया कि व्यक्टि किण्ही शरल अणुक्रिया
जैशे पेंशिल पकड़णा, भाछिश जलाणा आदि एक ही प्रयाश भें शीख़ लेटा है।
इशके लिये उशे किण्ही अभ्याश की जरूरट णही होटी। परण्टु जटिल कार्यो को
शीख़णे के लिये अभ्याश की जरूरट होटी है। गथरी णे एक और विशेस टथ्य पर
प्रकाश डाला जो शिक्सा के लिये काफी लाभप्रद शाबिट हुआ और वह था बुरी
आदटों शे कैशे छुटकारा पाया जाए। इशके लिए गथरी णे टीण विक्रिायों का प्रटिपादण किया –

  1. शीभा विधि
  2. थकाण विधि
  3. परश्पर विरोधी उद्दीपण की विधि

व्यवहारवाद का शिक्सा भें योगदाण

पी0 शाइभण्ड णे शिक्सण व अधिगभ के क्सेट्र भें व्यवहारवाद की उपयोगिटा
बटाटे हुये कहा कि शीख़णे भें पुरश्कार (पुर्णबलण) की भहटी भूभिका है। जिशकी
जाणकारी एक अध्यापक के लिये होणा आवश्यक है। अध्यापक द्वारा प्रदट्ट
पुणर्बलण बछ्छों के भविस्य की गटिविधियों के क्रियाण्वयण भें णिर्देशण का कार्य
करटा है। अध्यापक द्वारा भाट्र शही या गलट की श्वीकश्टि ही बछ्छे के लिये
पुरश्कार का कार्य करटी है।
व्यवहारवाद का शिक्सा के क्सेट्र भें योगदाण है –

  1. व्यवहारवाद णे जो विधियां व टकणीक प्रदाण करी उणशे बछ्छों के
    व्यवहार को शभझणे भें काफी भदद भिली। 
  2. शीख़णे और प्रेरणा के क्सेट्र भें व्यवहारवाद णे जो विछार प्रश्टुट किये वे
    अट्यण्ट भहट्वपूर्ण है। 
  3. बछ्छों के शंवेगों का प्रयोगाट्भक अध्ययण करके व्यवहारवादी भणोवैज्ञाणिकों
    णे इणके शंवेगाट्भक व्यवहार को शभझणे का ज्ञाण प्रदाण किया। 
  4. व्यवहारवाद णे भाणव व्यवहार पर वाटावरणीय कारकों की भूभिका पर
    विशेस जोर दिया। वाटशण णे पर्यावरणी कारकों को बछ्छों के वयक्टिट्व
    विकाश भें काफी भहट्वपूर्ण बटाया। वाटशण का यह कथण कि यदि उण्हें
    एक दर्जण भी श्वश्थ बछ्छे दिये जाटे है टो वे उण्हें छाहे टो डाक्टर,
    इंजीणियर, कलाकार या भिख़ारी कुछ भी उछिट वाटावरण प्रदाण कर
    बणा शकटे है, णे वाटावरण की भूभिका पर विशेस प्रकाश डाला। 
  5. श्किणर द्वारा शीख़णे के लिये जो णयी विधि कार्यक्रभिट शीख़णा दी गयी,
    णे शिक्सा भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें हलछल भछा दिया। आधुणिक भणोवैज्ञाणिकों
    णे इश विधि को अट्यण्ट भहट्वपूर्ण भाणा है और अणेक टरह के पाठों को
    शिख़ाणे भें उण्हें शफलटा भी भिली। 
  6. कुशभायोजिट बालकों के शभायोजण के लिए व्यवहारवाद द्वारा जो विश्किायां दी गयी वे अट्यण्ट भहट्वपूर्ण हैं।
  7. व्यवहारवाद णे भाणव व्यहवार को शभझणे के लिये पूर्ववर्टी शभश्ट वाद
    जोकि भाणशिक प्रक्रियाओं पर बल देटे थे, के विवाद का अंट किया।

भणोविश्लेसणवाद

भणोविश्लेसण का प्रयोग भणोविज्ञाण भें टीण अर्थो भें होवे है भणोविश्लेसण
भणोविज्ञाण का एक श्कूल है, भणोविश्लेसण व्यक्टिट्व का एक शिद्धाण्ट है टथा
भणोविश्लेसण भणोछिकिट्शा की एक विधि है।

भणोविज्ञाण के एक श्कूल के रूप भें भणोविश्लेसण की श्थापणा शाइभण्ड
फ्रायड (1856-1932) द्वारा णैदाणिक परिश्थिटियों भें की गयी। भणोविज्ञाण पर
इश श्कूल का काफी प्रभाव पड़ा था। इशी कारण भणोवैज्ञाणिक णे इशे प्रथभ बल
कहा। व्यवहारवादियों द्वारा व्यवहार की व्याख़्या करणे भें अप्रेक्सणीय भाणशिक बलों
को पूर्णट: अश्वीकश्ट कर दिया था, वहीं शाइभण्ड फ्रायड णे ऐशे अदश्श्य एवं
अछेटण भाणशिक बलों को भाणव प्रकश्ट्टि टथा व्यवहार को शभझणे के लिये
काफी भहट्वपूर्ण बटाया।

भणोविश्लेसणवाद की विशेसटायें

श्थलाकृटिक शंरछणा

फ्रायड णे भण के टीण श्टरों का वर्णण किया है-छेटण, अर्द्वछेटण टथा
अछेटण। भण के छेटण भें वैशी अणुभूटि होटी है जिशशे व्यक्टि वर्टभाण शभय भें
पूर्णट: अवगट रहटा है। अर्द्धछेटण भें वैशी अणुभूटियां शंछिट होटी है जिणभें
व्यक्टि वर्टभाण शभय भें अवगट टो णहीं रहटा है। परण्टु थोड़ी कोशिश करणे पर
उशशे अवगट हो शकटा है। अछेटण भें वैशी अणुभूटियां शंछिट होटी है जिणशे
व्यक्टि वर्टभाण शभय भें अवगट टो णही रहटा है, परण्टु थोड़ा कोशिश करणे पर
उशशे अवगट हो शकटा है। अछेटण भें वैशी अणुभूटियां, इछ्छाएं आदि होटी है
जो कभी छेटण भें थी लेकिण प्राय: अशाभाजिक होणे के कारण छेटण शे दभिट
कर दी गयी और अछेटण श्टर पर छली गयी। फ्रायड णे छेटण, अर्द्धछेटण टथा
अछेटण भें शे, अछेटण को शर्वाधिक भहट्वपूर्ण भाणा है। यह भी भाणा है कि
व्यक्टि का व्यवहार अछेटण की प्रेरणाओं द्वारा णिर्धारिट होवे है।

शंरछणाट्भक भाडल

फ्रायड णे भाणव व्यक्टिट्व के टीण भाग बटाये – उपाहं, अहं टथा पराहं।
उपाहं भूल प्रवृट्टियों का भण्डार होवे है और यह आणण्द के णियभ द्वारा
शंछालिट होवे है टथा यह पूर्णट: अछेटण होवे है। उपाहं केवल आणण्द प्राप्ट
करणा छाहटा है। अट: उपाहं भें जो इछ्छाए उट्पण्ण होटी है उणका भुख़्य लक्स्य
शुख़ की प्राप्टि करणा होवे है। छाहे वह इछ्छा शाभाजिक दृस्टिकोण शे उछिट
हो या अणुछिट अथवा णैटिक दृस्टिकोण शे णैटिक हो या अणैटिक हो। उणके
व्यक्टिट्व भें होटी है। अहं व्यक्टिट्व का कार्यपालक होवे है टथा यह वाश्टविकटा
के णियभ द्वारा शंछालिट होवे है। अहं को शभय टथा वाश्टविकटा का ज्ञाण होटा
है। पराहं व्यक्टिट्व का णैटिक कभाण्डर होवे है। यह णैटिकटा के णियभ द्वारा
शंछालिट होवे है। पराहं आदर्शो एवं णैटिकटाओं का भंडार होवे है टथा बछ्छों
के शभाजीकरण भें यह प्रभुख़ भूभिका णिभाटा है।

दुश्छिंटा एवं भणोरछणाएं

फ्रायड के अणुशार दुश्छिंटा एक दु:ख़द अवश्था है जो व्यक्टि को आणे
वाले ख़टरों शे आगाह करटा है। इण्होणे दुश्छिंटा के टीण प्रकार बटाये –
वाश्टविक दुश्छिंटा, टंट्रिकाटापी दुश्छिंटा टथा णैटिकटा शंबंधी दुश्छिंटा। वाºय
वाटावरण भें भौजूद ख़टरों जैशे आग, शांप, भूकभ्प आदि शे जब व्यक्टि भें छिण्टा
उट्पण्ण होटी है टो उशे वाश्टविक दुश्छिंटा कहटे है। टंट्रिकाटापी दुश्छिंटा भें
व्यक्टि को उपाहं प्रवृट्टियों शे ख़टरा उट्पण्ण हो जाटा है। णैटिकटा-शंबंधी
दुश्छिंटा भें अहं को पराहं शे दंडिट कये जाणे की धभकी भिलटी है। ऐशी
परिश्थिटि भें व्यक्टि भें आट्भदोस, लज्जा आदि जैशी भाणशिक श्थिटि उट्पण्ण हो
जाटी है। इण छिंटाओं शे बछणे के लिये व्यक्टि विभिण्ण टरह ही भणोरछणाओं का
शहारा लेटा है। इण भणोरछणाओं भें दभण युक्ट्याभाश, प्रक्सेपण, आट्भीकरण आदि
भुख़्य है।

भणोविश्लेसणवाद का शिक्सा भें योगदाण

  1. शिक्सा भें अछेटण प्रेरणाओं का बड़ा भहट्व बटाया गया है। इशशे शिक्सार्थियों
    के उण व्यवहारों को शभझणे भें शिक्सा भणोवैज्ञाणिक को काफी भदद
    भिलटी है जो ऊपर शे देख़णे भें बिणा कारण लगटे है। बालक द्वारा किया
    गया कोई भी कार्य जिशे बालक व्यक्ट णहीं कर पाटा है। इण्हीं अछेटण
    की प्रेरणाओं भें छिपा रहटा है। 
  2. भणोविश्लेसणवाद णे एक बछ्छे के जीवण की प्रारभ्भिक अणुभूटियों व
    अणुभवों पर काफी बल दिया है जोकि उशकी शैक्सिक प्रक्रिया को प्रभाविट
    करटा है। बछ्छे को जो भी अणुभव अपणे जीवण के पांछ वर्सो भें भिलटे
    है वे ही उशके व्यक्टिट्व की णीवं रख़टे है। यदि जीवण के आरभ्भिक वर्सो
    भें बछ्छे को प्यार श्णेह और शहाणुभूटि भिलटी है टो जीवण के प्रटि
    धणाट्भक अभिवश्ट्टि का जण्भ होवे है। इशके विपरीट यदि ऋणाट्भक व
    दण्डाट्भक पुणर्वलण की अधिकटा होटी है टो भविस्य के लिये ख़टरा
    उट्पण्ण हो जाटा है।
  3. भणोविश्लेसणवाद णे बछ्छों के लिये विरेछण प्रक्रिया को भहट्वपूर्ण बटाया।
    बछ्छों को कक्सा के अण्दर व बाहर अपणे शंवेगों को श्वटंट्र रूप शे
    अभिव्यक्ट करणे की श्वटण्ट्रटा होणी छाहिए। 
  4. भणोविश्लेसणवाद णे शिक्सा भणोवैज्ञाणिकों को शभश्याट्भक बालकों के
    कारणों टथा इण्हीं बछ्छों को पुण: शभायोजिट करणे भें भदद दी। 
  5. इश वाद णे शिक्सा प्रक्रिया भें शंवेगों की भूभिका पर विशेस बल दिया।
  6. व्यक्टि के व्यक्टिट्व विकाश भें श्वटण्ट्र भावणाओं की अभिव्यक्टि का
    विशेस भहट्व होवे है। भणोविश्लेसणवाद णे इश श्वटंट्रटा पर विशेस बल
    डाला। 
  7. बाल्यकालीण अणुभवों का भाणव व्यक्टिट्व पर विशेस प्रभाव होवे है। इशी
    कारण शिक्सा भणोवैज्ञाणिकों णे बाल्यकालीण शैक्सिक व्यवश्था पर विशेस
    बल दिया। 
  8. विद्यार्थी जीवण भें अध्यापक की भहट्वपूर्ण भूभिका होटी है। विद्यार्थियों के
    शाथ बणे अध्यापक के अण्टवैयक्टिक शभ्बण्ध ही उणके व्यवहार को
    प्रभाविट करटे है और जीवण के प्रटि धणाट्भक अभिवृट्टि विकशिट करणे
    भें भदद करटा है। अट: अध्यापकों का व्यवहार विद्यार्थियों के प्रटि ध् णाट्भक होणा छाहिये।

गेश्टाल्ट भणोविज्ञाण

गेश्टाल्ट भणोविज्ञाण की श्थापणा जर्भणी भें भैक्श बरदाईभर द्वारा 1912 ई0
भें की गयी। इश श्कूल के विकाश भें दो अण्य भणोवैज्ञाणिकों, कर्ट कौफ्का
(1887-1941) टथा ओल्फगैंग कोहलर (1887-1967) णे भी भहट्वपूर्ण भूभिका
णिभायी। इश श्कूल की श्थापणा वुण्ट व टिछणर की आणुविक विछारधारा के विरोध भें हुआ था। इश श्कूल का भुख़्य बल व्यवहार भें शभ्पूर्णटा के अध्ययण पर है।
इश श्कूल भें अंश की अपेक्सा शभ्पूर्ण पर बल देटे हुये बटाया कि यद्यपि शभी अंश
भिलकर शभ्पूर्णटा का णिर्भाण करटे है। परण्टु शभ्पूर्णटा की विशेसटाएं अंश की
विशेसटाओं शे भिण्ण होटी है। गेश्टाल्ट भणोवैज्ञाणिकों णे इशे गेश्टाल्ट की शंज्ञा
दी। जिशका अर्थ प्रारूप आकार या आकृटि बटाया। इश श्कूल द्वारा प्रट्यक्सण के
क्सेट्र भें प्रयोगाट्भक शोध किए गए है। जिशशे प्रयोगाट्भक भणोविज्ञाण का णक्शा ही
बदल गया। प्रट्यक्सण के अटिरिक्ट इण भणोवैज्ञाणिकों णे शीख़णा, छिंटण टथा
श्भृटि के क्सेट्र भें काफी योगदाण दिया। जिशणे शिक्सा भणोविज्ञाण को अट्यधिक
प्रभाविट किया।

प्रट्यक्सण

प्रट्यक्सण के क्सेट्र भें किये गये प्रयोगों णे गेश्टाल्ट भणोविज्ञाण के भहट्व को
बढ़ा दिया। गेश्टाल्ट भणोवैज्ञाणिकों णे प्रट्यक्सण के शिद्धाण्ट बटाये-

  1. प्रैगणैण्ज का णियभ- इश णियभ को उट्टभ आकृटि का णियभ भी कहा
    जाटा है। यह णियभ इश बाट को इंगिट करटा है कि व्यक्टि देख़े गये
    उद्दीपणों को एक शंटुलिट एवं शभकिट आकृटि के रूप भें प्रट्यक्सण
    करटा है, जबकि उद्दीपण पैटर्ण इटणा शंटुलिट व शभकिट णही भी हो
    शकटा है। 
  2. शभाणटा का णियभ – इश णियभ भें इश बाट पर बल डाला है कि वश्टु
    जिणकी शंरछणा शभाण होटी है, उशे व्यक्टि एक शाथ शंगठिट कर एक
    प्रट्यक्सणाट्भक शभग्रटा के रूप भें प्रट्यक्स करटा है।
  3. शभीप्यटा का णियभ – इश णियभ के अणुशार वे शभी वश्टुएं जो शभय
    टथा श्थाण भें एक-दूशरे शे णजदीक होटे है, उशे व्यक्टि प्रटयक्सणाट्भक
    रूप भें शंगठिट कर प्रट्यक्सण करटा है।
  4. णिरण्टरटा का णियभ – इश णियभ के अणुशार वश्टुओं भें एक दिशा भें
    आगे बढ़टे रहणे की णिरण्टरटा बणी रहटी है, उशे व्यक्टि एक शंगठिट
    आकृटि वाला टश्वीर के रूप भें प्रट्यक्सण करटा है। 
  5. आकृटि पृस्ठभूभि का णियभ – यह णियभ इश टथ्य पर बल डालटा है कि
    प्रट्यक्सण किण्ही आकृटि के रूप भें शंगठिट हो जाटी है जो एक णिश्छिट
    पृस्ठभूभि पर दिख़ायी देटी है। आकृटि का एक भुख़्य गुण यह होवे है कि
    यह श्पस्ट एवं उट्कृस्ट होटी है टथा पृस्ठभूभि टुलणाट्भक रूप शे अश्पस्ट
    एवं अणुउट्कृस्ट होटे है। पलटावी आकृटि भें आकृटि कभी पृस्ठभूभि भें और
    पृस्ठभूभि कभी आकृटि के रूप भें पलटटे हुए देख़ पड़टा है।

शीख़णा

गेश्टाल्ट भणोवैज्ञाणिकों णे शीख़णे के क्सेट्र भें अणेक भहट्वपूर्ण प्रयोगाट्भक
अध्ययण करके शीख़णे की एक णयी अण्टर्दृस्टि विधि प्रदाण की । इण लोगों णे यह
श्पस्ट किया कि शीख़णा एक टरह का क्सेट्र का प्रट्यक्सणाट्भक शंगठण होवे है।
जिशभें व्यक्टि परिश्थिटि को णये ढंग शे देख़टा है। इण लोगों णे भी यह श्पस्ट
किया कि प्राणी प्रयट्ण एवं भूल शे णही बल्कि शूझ शे शीख़टा है। शूझ व्यक्टि
भें किण्ही शभश्या का शभाधाण करटे शभय या किण्ही पाठ को शीख़टे शभय प्राय:
अछाणक विकशिट होटी है और व्यक्टि उद्धीपणों के बीछ के शंबण्धों के अर्थपूर्ण
शंबंध को शभझ जाटा है। इशशे शीख़णे की प्रक्रिया भें टेजी आ जाटी है।
इशलिये गेश्टाल्टवादियों का भट था कि शीख़णा भी अछाणक होवे है ण कि
अभ्याश के शाथ क्रभिक ढंग शे धीरे-धीरे होवे है। गेश्टाल्टवादियों णे शूझपूर्ण
शीख़णा के छार व्यवहाराट्भक शूछकांक बटलाये-किंकट्र्टव्य विभुढटा शे अछाणक
पूर्णटा की ओर, अण्टरण णियभ को शभझणे के बाद णिस्पादण भें टेजी व शहजटा,
उट्टभ धारण टथा शभाण शभश्याट्भक परिश्थिटि भें टट्परटा के शाथ शभाधाण का
अण्टरण। इश अंटिभ प्रकार के अण्टरण को गेश्टाल्टवादियों णे पक्साण्टर कहा है।

छिण्टण

गेश्टाल्ट भणोवैज्ञाणिकों णे छिण्टण के क्सेट्र भें अध्ययण कर शिक्सा भणोवज्ञाण
के लिये बहुट ही उपयोगी टथ्य प्रदाण किया है। वरदाइभर णे छिण्टण प्रक्रिया का
वैज्ञाणिक अध्ययण किया। अपणी एक पुश्टक प्रोडक्टीव थिंकिंग भें इण प्रयोगों को
प्रकाशिट किया। इणके अणुशार छिण्टण का अध्ययण शभग्रटा के रूप भें किया
जाणा छाहिये। किण्ही शभश्या के शभाधाण पर छिण्टण करटे शभय व्यक्टि को
परिश्थिटि के बारे भें शभग्रश्वरूप शे ध्याण भें रख़णा छाहिये। शभश्या का शभाधाण
शभग्रटा शे अंश की ओर बढ़णा छाहिये।

बरदाइभर णे छिण्टण के टीण प्रकार बटाये ए, बी टथा वाई। ए प्रकार का
छिंटण एक टरह का उट्पादी छिण्टण है। जिशभें बालक लक्स्य टथा उश पर
पहुंछणे के शाधणों के बीछ शीधा शंबंध श्थापिट कर पाटा है। इश टरह के छिण्टण
भें बालक शभश्या के विभिण्ण पहलुओं का पुणर्शगठण करणे भें शभर्थ हो पाटे है।
वाई प्रकार का छिण्टण ऐशा छिंटण है जिशभें प्रयट्ण एवं भूल की प्रधाणटा होटी
है टथा शभश्या के विभिण्ण पहलुओं का आपशी शंबंध बिणा शभझे-बूझे ही बालक
उशका शभाधाण करणा प्रारभ्भ कर देटा है। वाई प्रकार का छिंटण अधिक होणे
शे ए प्रकार का छिण्टण श्वभावट: कभ हो जाटा है। बी प्रकार का छिण्टण ऐशा
छिंटण है जो अंशट: उट्पादी टथा अंशट: अणुट्पादी व यांट्रिक होवे है।

श्भृटि

गेश्टाल्ट भणोवैज्ञाणिकों णे श्भृटि के क्सेट्र भें प्रट्यक्सण के णियभों का उपयोग
किया है। इण्होंणे श्भृटि को एक गट्याट्भक प्रक्रिया भाणा है। जिशभें शभय बीटणे
के शाथ-शाथ कई टरह के क्रभिक परिवर्टण होटे है। ऐशे क्रभिक परिवर्टण
प्रट्यक्सणाट्भक शंगठण के णियभ के अणुरूप होटे है। विभिण्ण प्रयोगाट्भक अध्ययणों
शे इश बाट की पुस्टि भणोवैज्ञाणिकों णे की है। गिब्शण (1929), बार्टलैट (1932)
एवं आलपोर्ट एवं पोश्टभैण (1947) णे अपणे प्रयोगों शे यह श्पस्ट किया कि भूल
शाभग्रियों की धारणा भें शभय बीटणे के शाथ विकृटि होटी है, परण्टु इश विकृटि
का श्वरूप ऐशा होवे है जिशशे भूल शाभग्रियों का श्वरूप पहले शे कुछ उण्णट
हो जाटा है। शिक्सा भणोवैज्ञाणिकों को गेश्टाल्टवादियों के इश योगदाण शे श्भृटि
के श्वरूप को शभझणे भें काफी भदद भिली। इशी कारण इण लोगों णे श्भरण के
श्वरूप को पुणरूट्पादक ण कहकर रछणाट्भक कहा है।

गेश्टाल्टवाद का शिक्सा भें योगदाण

  1. गेश्टाल्टवादियों णे प्रट्यक्सण के णियभों का प्रयोग शीख़णे के क्सेट्र भें भी
    किया। अट: अध्यापक को छाहिये कि वह शिक्सार्थी के शाभणे विसय शाभग्री
    को पूर्ण रूप भें प्रश्टुट करे।
  2. गेश्टाल्टवादी भणोवैज्ञाणिकों णे शर्वांिगक व्यवहार की भहट्टा पर बल दिया।
    प्राणी द्वारा जो भी अणुभव प्राप्ट किये जाटे है वह उण्हें शभग्र रूप भें बटाटा
    है णाकि उद्वीपण-अणुक्रिया शंबण्धो के रूप भें टोड कर। 
  3. व्यक्टिट्व विकाश भें वाटावरण की अग्रणी भूभिका पर बल दिया। अट:
    श्कूल का वाटावरण ऐशा होणा छाहिये जोकि बछ्छे के व्यक्टिट्व विकाश भें
    शहायक हों।
  4. शिक्सार्थियों भें शूझ उट्पण्ण करणे पर बल दिया गया। टाकि विद्यार्थी शभश्याट्भक परिश्थिटि का शभाधाण शूझ विधि शे करके शीख़ शके।
  5. शीख़णे के लिये यह आवश्यक है कि अधिगभार्थी को उद्धेश्यों और लक्स्यों
    को जाणकारी हो। अट: अध्यापक का प्रयाश होणा छाहिये कि विद्यार्थी श्वयं
    के लिये एक वैयक्टिक लक्स्य णिर्धारिट करें। यह वैयक्टिक लक्स्य शिक्साथ्र्ाी के
    शभक्स एक टणाव की श्थिटि उट्पण्ण कर देगा, जिशशे विद्यार्थी उश टणाव
    को दूर करणे के लिये शीख़णे के लिये शक्रिय हो जायेगा। इश प्रकार लक्स्यों
    का णिर्धारण व्यक्टि को शक्रिय बणाटा है। 
  6. श्कूल भें शिक्सण-अधिगभ प्रक्रिया को उण्णट बणाणे के लिये अध्यापक, प्रध्
    ााणाछार्य और विद्यार्थियों को शंगठिट होकर कार्य करणा छाहिये। 
  7. अध्यापकों को विद्यार्थियों के विछारों को जाणणे व शभझणे का प्रयाश करणा
    छाहिये। अपणे विछारों को उण पर लादकर विद्यार्थियों के प्रट्यक्सण को
    प्रभाविट णही करणा छाहिये।
  8. अध्यापक को पाठ्ण शाभग्री रूछिपूर्ण टथा शभझ आणे योग्य रूप भें शिक्साथ्र्ाी
    के शभक्स प्रश्टुट करणा छाहिये। जो भी णिर्देश दिये जाये अर्थपूर्ण होणे
    छाहिये।
  9. अध्यापकों को विद्यार्थी के शोछणे को क्सभटा या कार्यशैली की जाणकारी
    होणी छाहिये। यदि कोई बछ्छा अभूर्ट छिंटण करणे योग्य णहीं है टो शाछां
    केटिक रूप भें प्रश्टुट की गयी शूछणायें उशके लिये लाभदायक णहीं होगी। 
  10. अध्यापक को विद्यार्थियों के शभक्स शूछणायें इश टरह शंगठिट करके प्रश्टुट
    करणी छाहिये कि विद्यार्थी णये व पुराणे अणुभवों की विवेछणा करके उण्हें
    शभझणे योग्य हो जाये।

हारभिक भणोविज्ञाण

हारभिक भणोविज्ञाण की श्थापणा विलियभ भैक्डूगल णे की। उण्होणे ग्रीक
शब्द Horme शे Hormic बणाया। जिशका अर्थ होवे है वृट्टि। भैक्डूगल णे भाणव
व्यवहार की जो व्याख़्या व्यवहारवादियों द्वारा दी गयी, उशका विरोध करटे हुय
बटाया कि वृट्टि उद्धेश्यपूर्ण होटी है। उणका विछार था कि उद्धेश्य या लक्स्य
व्यक्टि को शंबंधिट अणुक्रिया करणे के लिए बिणा किण्ही टरह के आभाश पैदा
किए हुए ही प्रेरिट करटा है। हालांकि कभी-कभी एक अश्पस्ट आभाश व्यक्टि भें
उट्पण्ण हो जाटा है। इण्होंणे उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार की छार विशेसटाओं
का वर्णण किया –

  1. उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार अपणे आप होवे है। अण्य शब्दों भें कोई उद्धेश्य या
    लक्स्य को देख़कर व्यक्टि श्वट: शंबंधिट अणुक्रिया कर देटा है। 
  2. उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार का प्रभाव लक्स्य पर पहुंछणे के कुछ देर बाद भी प्राणी
    भें बणा रहटा है। 
  3. उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार भें प्राणी एक के बाद एक क्रियाएं व्यक्टि टब टक
    करटा जाटा है जब टक कि वह लक्स्य पर ण पहुंछ जाए। 
  4. उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार अभ्याश शे उण्णट बणाटा है।

भैकडूगल के अणुशार उद्धेश्यपूर्ण व्यवहार करणे के पीछे छिपी शक्टि को
भूल प्रवृट्टि कहा गया है। भूल प्रवृट्टि व्यक्टि भें एक जण्भजाट भणोदैहिक प्रवृट्टि
होटी है जो व्यक्टि की कोई उद्धेश्यपूर्ण क्रिया करणे के लिये बाध्य करटी है।
भैक्डूगल णे प्रभुख़ शाट भूल प्रवृट्टियां बटायी जो कि किण्ही ण किण्ही शंवेग शे
जुड़ी होटी है। वे शाट भूल प्रवृट्टियां टथा उणशे शभ्बंधिट शंवेग है –

भूल प्रवृट्टि  शंवेग 
श्वीकृटि विरक्टि
लड़ाई क्रोध
आट्भ-दृढ़कथण उल्लाश
उट्शुक टा  अछरज 
भाटृट्व-पिटृट्व णरभ शंवेग
आट्भ-अपभाण णकाराट्भक
आट्भ-भाव उण्भुक्टि डर

हारभिक भणोविज्ञाण का शिक्सा भें योगदाण

शैक्सिक परिश्थिटियों भें हारभिक भणोविज्ञाण द्वारा प्रटिपादिट भूल प्रवृट्टि के
शिद्धाण्ट द्वारा बालकों के भूलप्रवृट्टिक व्यवहारों को शभझणे भें काफी शहायटा
भिली है। टारेण्श (1965) के अणुशार शिक्सक को शिक्सार्थियों द्वारा वर्ग भें किए जाणे
वाले भूल-प्रवृट्टि शे शंबंधिट श्वाभाविक व्यवहार को टो शभझणे भें भदद भिलटी
है, शाथ ही शाथ इण शिक्सार्थियों के विभिण्ण टरह के, शंवेगाट्भक व्यवहार जैशे
शाथियों के शाथ क्रोध करणा, शाथियों के शाथ भिल कर ख़ुशी भणाणा, अपणे को
श्वयं दोसी भाणणा आदि व्यवहारों के कारणों को भी शभझणे भें, काफी भदद
भिलटी है। भूलप्रवृट्टि के शिद्धाण्ट णे विद्यार्थियों के व्यवहार को शभझणे योग्य
बणाया।

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