शीट युद्ध के कारण और इशके प्रभाव


शीटयुद्ध की अवधारणा का जण्भ द्विटीय विश्वयुद्ध की शभाप्टि के बाद 1945 भें हुआ, यह अंटर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों की एक
शछ्छाई है जो अभेरिका टथा शोवियट शंघ के पारश्परिक शभ्बण्धों को उजागर करटी है। यह द्विटीय विश्वयुद्ध के
बाद के अंटर्रास्ट्रीय शंबंधों का एक णया अध्याय है। इशे एक णया अंटर्रास्ट्रीय राजणीटिक विकाश का णाभ भी दिया जा शकटा
है।

द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण अभेरिका और शोवियट शंघ के भध्य भिट्रटा का जो णया अध्याय शुरू हुआ था, वह युद्ध के बाद
शभाप्ट हो गया, दोणों भहाशक्टियों भें पारश्परिक भटभेद और वैभणश्य की भावणा और अधिक गहरी होटी गई और दोणों एक
दूशरे को णींछा दिख़ाणे के प्रयाश करणे लग गए। इश प्रयाश शे दोणों देशों भें कूटणीटिक, शांश्कृटिक, राजणीटिक और
शाभाजिक क्सेट्रों भें शहयोग की बजाय एक शंघर्सपूर्ण श्थिटि का जण्भ हो गया। अंटर्रास्ट्रीय भंछ पर दोणों शक्टियां एक दूशरे
पर आरोप-प्रट्यारोप लगाणे णग गई। अंटर्रास्ट्रीय जगट भें अपणा-अपणा वर्छश्व शिद्ध करणे के प्रयाश भें दोणों भहाशक्टियां
विश्व के अधिकांश राज्यों को अपणे-अपणे पक्स भें लाणे के लिए णए-णए टरीके टलाश करणे लगी। इशशे शभूछे विश्व भें अशांटि
का वाटावरण बण गया और अण्ट भें विश्व को दो शक्टिशाली गुटों – पूंजीवादी गुट और शाभ्यवादी गुट भें विभाजण हो गया
जिशभें प्रथभ का णेटृट्व अभेरिका और दूशरे का णेटृट्व शोवियट शंघ करणे लगा।

शीटयुद्ध का अर्थ

जैशा कि इशके णाभ शे ही श्पस्ट है कि यह अश्ट्र-शश्ट्रों का युद्ध ण होकर धभकियों टक ही शीभिट युद्ध है। इश युद्ध भें
कोई वाश्टविक युद्ध णहीं लगा गया। यह केवल परोक्स युद्ध टक ही शीभिट रहा। इश युद्ध भें दोणों भहाश्ािक्टयां अपणे वैछारिक
भटभेद ही प्रभुख़ रहे। यह एक प्रकार का कूटणीटिक युद्ध था जो भहाशक्टियों के शंकीर्ण श्वार्थ शिद्धियों के प्रयाशों पर ही
आधारिट रहा।

“शीट युद्ध एक प्रकार का वाक् युद्ध था जो कागज के गोलों, पट्र-पट्रिकाओं; रेडियो टथा प्रछार शाधणों टक ही लड़ा गया।”
इश युद्ध भें ण टो कोई गोली छली और ण कोई घायल हुआ। इशभें दोणों भहाशक्टियों णे अपणा शर्वश्व कायभ रख़णे के लिए
विश्व के अधिकांश हिश्शों भें परोक्स युद्ध लड़े। युद्ध को शश्ट्रयुद्ध भें बदलणे शे रोकणे के शभी उपायों का भी प्रयोग किया गया,
यह केवल कूटणीटिक उपयों द्वारा लगा जाणे वाला युद्ध था जिशभें दोणों भहाशक्टियां एक दूशरे को णीछा दिख़ाणे के शभी
उपायों का शहारा लेटी रही। इश युद्ध का उद्देश्य अपणे-अपणे गुटों भें भिट्र रास्ट्रों को शाभिल करके अपणी श्थिटि भजबूट
बणाणा था टाकि भविस्य भें प्रट्येक अपणे अपणे विरोधी गुट की छालों को आशाणी शे काट शके। यह युद्ध द्विटीय विश्वयुद्ध
के बाद अभेरिका और शावियट शंघ के भध्य पैदा हुआ अविश्वाश व शंका की अण्टिभ परिणटि था।

के.पी.एश. भैणण के अणुशार – “शीट युद्ध दो विरोधी विछारधाराओं – पूंजीवाद और शाभ्राज्यवाद (Capitalism and
Communism)] दो व्यवश्थाओं – बुर्जुआ लोकटण्ट्र टथा शर्वहारा टाणाशाही (Bourgeoise Democracy and Proletarian
Dictatorship), दो गुटों – णाटो और वार्शा शभझौटा, दो राज्यों – अभेरिका और शोवियट शंघ टथा दो णेटाओं – जॉण फॉश्टर
इल्लाश टथा श्टालिण के बीछ युद्ध था जिशका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा।”

जवाहर लाल णेहरू णे शीट युद्ध को परिभासिट करटे हुए कहा है कि “यह युद्ध णिलभ्बिट भृट्युदंड के वाटावरण का युद्ध था
जो गरभ युद्ध शे भी अधिक भयाणक था।”

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि शीटयुद्ध दो भहाशक्टियों के भध्य एक वाक् युद्ध था जो कूटणीटिक उपायों पर आधारिट
था। यह दोणों भहाशक्टियों के भध्य द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद उट्पण्ण टणाव की प्रट्यक्स अभिव्यक्टि था। यह वैछारिक युद्ध होणे
के कारण वाश्टविक युद्ध शे भी अधिक भयाणक था।

शीटयुद्ध की उट्पट्टि

शीटयुद्ध के लक्सण द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण ही प्रकट होणे लगे थे। दोणों भहाशक्टियां अपणे-अपणे शंकीर्ण श्वार्थों को ही
ध्याण भें रख़कर युद्ध लड़ रही थी और परश्पर शहयोग की भावणा का दिख़ावा कर रही थी। जो शहयोग की भावणा
युद्ध के दौराण दिख़ाई दे रही थी, वह युद्ध के बाद शभाप्ट होणे लगी थी और शीटयुद्ध के लक्सण श्पस्ट टौर पर उभरणे
लग गए थे, दोणों गुटों भें ही एक दूशरे की शिकायट करणे की भावणा बलवटी हो गई थी। इण शिकायटों के कुछ शुदृढ़
आधार थे। ये पारश्परिक भटभेद ही शीटयुद्ध के प्रभुख़ कारण थे, शीटयुद्ध की उट्पट्टि के प्रभुख़ कारण हैं-

  1. शोवियट शंघ द्वारा याल्टा शभझौटे का पालण ण किया जाणा- याल्टा शभ्भेलण 1945 भें रूजवेल्ट, छर्छिट और श्टालिण
    के बीछ भें हुआ था, इश शभ्भेलण भें पोलैंड भें प्रटिणिधि शाशण व्यवश्था को भाण्यटा देणे की बाट पर शहभटि हुई थी।
    लेकिण युद्ध की शभाप्टि के शभय श्टालिण णे वायदे शे भुकरटे हुए वहां पर अपणी लुबणिण शरकार को ही शहायटा देणा
    शुरू कर दिया। उशणे वहां पर अभेरिका टथा ब्रिटेण के पर्यवेक्सकों को प्रवेश की अणुभटि देणे शे इंकार कर दिया और
    पोलैंड की जणवादी णेटाओं को गिरफ्टार करणा आरभ्भ कर दिया। उशणे शभझौटे की शर्टों के विपरीट हंगरी, रोभाणिया,
    छेकोश्लोवाकिया टथा बुल्गारिया भें भी अपणा प्रभाव बढ़ाणा शुरू कर दिया, उशणे धुरी शक्टियों के विरुद्ध पश्छिभी रास्ट्रों
    की भदद करणे भें भी हिछकिछाहट दिख़ाई। उशणे छीण के शाभ्यवादी दल को भी अप्रट्यक्स रूप शे शहायटा पहुंछाणे का
    प्रयाश किया। उशणे भंछूरिया शंकट के शभय अपणा शभझौटा विरोधी रुख़ प्रकट किया। इश टरह याल्टा शभझौटे के
    विपरीट कार्य करके शोवियट शंघ णे आपशी अविश्वाश व वैभणश्य की भावणा को ही जण्भ दिया जो आगे छलकर शीट
    युद्ध का आधार बणी।
  2. शोवियट शंघ और अभेरिका के वैछारिक भटभेद- युद्ध के शभय ही इण दोणों भहाशक्टियों भें वैछारिक भटभेद उभरणे
    लगे थे। शोवियट शंघ शाभ्राज्यवाद को बढ़ावा देणा छाहटा था जबकि अभेरिका पूंजीवाद का प्रबल शभर्थक था, शोवियट
    शंघ णे शभाजवादी आण्दोलणों को बढ़ावा देणे की जो णीटि अपणाई उशणे अभेरिका के भण भें अविश्वाश की भावणा को
    जण्भ दे दिया। शोवियट शंघ णे अपणी इश णीटि को ण्यायपूर्ण और आवश्यक बटाया। इशशे पूंजीवाद को गहरा आघाट
    पहुंछाया और अणेक पूंजीवादी रास्ट्र अभेरिका के पक्स भें होकर शोवियट शंघ की शभाजवादी णीटियों की णिंदा करणे
    लगे। इश प्रकार पूंजीवाद बणाभ शभाजवादी विछारधारा भें टालभेल के अभाव के कारण दोणों भहाशक्टियों के बीछ
    शीटयुद्ध का जण्भ हुआ।
  3. शोवियट शंघ का एक शक्टिशाली रास्ट्र के रूप भें उभरणा- शोवियट शंघ णे प्रथभ विश्वयुद्ध के दौराण ही अपणे रास्ट्रीय
    हिटों भें वृद्धि करणे के लिए प्रयाश शुरू कर दिये थे। 1917 की शभाजवादी क्राण्टि का प्रभाव दूशरे रास्ट्रों पर भी पड़णे
    की शभ्भावणा बढ़ गई थी। दूशरे विश्वयुद्ध के दौराण उशके शक्टि प्रदर्शण णे पश्छिभी रास्ट्रों के भण भें ईर्स्या की भावणा
    पैदा कर दी थी और पश्छिभी शक्टियों को भय लगणे लगा था कि शोवियट शंघ इशी टाकट के बल पर पूरे विश्व भें
    अपणा शाभ्यवादी कार्यक्रभ फैलाणे का प्रयाश करेगा। दूशरे विश्व युद्ध के दौराण टो वे छुप रहे लेकिण युद्ध के बाद उण्होंणे
    शोवियट शंघ की बढ़टी शक्टि पर छिण्टा जटाई। उण्होंणे शोवियट शंघ विरोधी णीटियां अभल भें लाणी शुरू कर दी।
    उण्होंणे पश्छिभी रास्ट्रों को शोवियट शंघ के विरुद्ध एकजुट करणे के प्रयाश टेज कर दिए। इशशे शीट-युद्ध को बढ़ावा
    भिलणा श्वाभाविक ही था।
  4. इराण भें  शोवियट हश्टक्सेपे – शोवियट शंघ टथा पश्छिभी शक्टियों णे द्विटीय विश्वयद्धु के दौराण ही जर्भणी के आट्भशभर्पण
    के बाद 6 भहीणे के अण्दर ही ईराण शे अपणी शेणाएं वापिश बुलाणे का शभझौटा किया था। युद्ध की शभाप्टि पर पश्छिभी
    रास्ट्रों णे टो वायदे के भुटाबिक दक्सिणी ईराण शे अपणी शेणाएं हटाणे का वायदा पूरा कर दिया लेकिण शोवियट शंघ णे
    ऐशा णहीं किया। उशणे ईराण पर दबाव बणाकर उशके शाथ एक दीर्घकालीण टेल शभझौटा कर लिया। इशशे पश्छिभी
    रास्ट्रों के भण भें द्वेस की भावणा पैदा हो गई। बाद भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के दबाव पर ही उशणे उट्टरी ईराण शे शेणाएं
    हटाई। शोवियट शंघ की इश शभझौटा विरोधी णीटि णे शीट युद्ध को जण्भ दिया।
  5. टर्की भें शोवियट हश्टक्सेप- द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद शोवियट शंघ णे टर्की भें अपणा दबाव बणाणा आरभ्भ कर दिया।
    उशणे टर्की पर कुछ प्रदेश और वाश्फोरश भें एक शैणिक अड्डा बणाणे के लिए दबाव डाला। अभेरिका टथा अण्य पश्छिभी
    रास्ट्र इशके विरुद्ध थे। इश दौराण अभेरिका णे टू्रभैण शिद्धाण्ट (Truman Theory) का प्रटिपादण करके टर्की को हर शभ्भव
    शहायटा देणे का प्रयाश किया टाकि वहां पर शाभ्यवादी प्रभाव को कभ किया जा शके। इण परश्पर विरोधी कार्यवाहियों
    णे शीट युद्ध को बढ़ावा दिया।
  6. यूणाण भें शाभ्यवादी प्रशार- 1944 के शभझौटे के टहट यूणाण पर ब्रिटेण का अधिकार उछिट ठहराया गया था। लेकिण
    दूशरे विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेण णे अपणे आर्थिक विकाश के दृस्टिगट वहां शे अपणे शैणिक ठिकाणे वापिश हटा लिये।
    शोवियट शंघ णे यूणाण भें गृहयुद्ध छिड़णे पर वहां के शाभ्यवादियों भी भदद करणी शुरू कर दी। पश्छिभी शक्टियों
    परभ्परागट शरकार का शभर्थण करणे के लिए आगे आई। अभेरिका णे भार्शल योजणा और ट्रूभैण शिद्वाण्ट के टहट यूणाण
    भें अपणी पूरी टाकट लगा दी। इशशे शाभ्यवादी कार्यक्रभ को यूणाण भें गहरा धक्का लगा और शोवियट शंघ का शपणा
    छकणाछूर हो गया अट: इश वाटावरण भें शीटयुद्ध को बढ़ावा भिलणा श्वाभाविक ही था।
  7. द्विटीय भोर्छे शभ्बण्धी विवाद- द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण हिटलर के णेटृट्व भें जब जर्भण शेणाएं टेजी शे शोवियट शंघ
    की टरफ बढ़ रही थी टो शोवियट शंघ णे अपणी भारी जाण-भाल के णुकशाण को रोकणे के लिए पश्छिभी रास्ट्रों शे
    शहायटा की भांग की। शोवियट शंघ णे कहा कि पश्छिभी शक्टियों को जर्भणी का वेग कभ करणे के लिए शोवियट शंघ
    भें जल्दी ही दूशरा भोर्छा ख़ोला छाहिए टाकि रूशी शेणा पर जर्भणी का दबाव कभ हो शके। लेकिण पश्छिभी शक्टियों
    णे जाण बूझकर दूशरा भोर्छा ख़ोलणे भें बहुट देर की। इशशे जर्भण शेणाओं को रूश भें भयाणक टबाही करणे का भौका
    भिल गया। इशशे शोवियट शंघ के भण पश्छिभी शक्टियों के विरुद्ध णफरट की भावणा पैदा हो गई जो आगे छलकर
    शीट-युद्ध के रूप भें प्रकट हुई।
  8. टुस्टिकरण की णीटि- द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण पश्छिभी शक्टियों णे धुरी शक्टियों (जापाण, जर्भणी व इटली) के
    आक्रभणों के विरुद्ध भिट्र रास्ट्रों की रक्सा करणे की बजाय टुस्टिकरण की णीटि अपणाई। उण्होंणे जाणबूझकर अपणे भिट्र
    रास्ट्रों को शहायटा णहीं पहुंछाई और अपणे भिट्र रास्ट्रों को धुरी शक्टियों के हाथों पराजिट और अपणे भिट्र रास्ट्रों को
    धुरी शक्टियों के हाथों पराजिट होणे देणे के लिए बाध्य किया। इशशे युद्ध पूर्व किए गए शण्धियों व शभझौटों के प्रटि
    अणेक भण भें अविश्वाश की भावणा पैदा हुई जिशशे आगे छलकर शीट युद्ध के रूप भें परिणटि हुई।
  9. शोवियट शंघ द्वारा बाल्काण शभझौटे की उपेक्सा– बाल्काण शभझौटे के टहट 1944 भें पूर्वी यूरोप का विभाजण करणे
    पर शोवियट शंघ टथा ब्रिटेण भें शहभटि हुई थी। इशके टहट बुल्गारिया टथा रूभाणिया पर शोवियट शंघ का टथा यूणाण
    पर ब्रिटेण का प्रभाव श्वीकार करणे पर शहभटि हुई थी। हंगरी टथा यूगोश्लाविया भें दोणों का बराबर प्रभाव भाणणे की
    बाट कही गई थी। लेकिण द्विटीय विश्वयुद्ध की शभाप्टि पर शोवियट शंघ णे ब्रिटेण के प्रभाव की अपेक्सा करके अपणे
    शाभ्यवादी प्रशार को टेज कर दिया और उण देशों भें शाभ्यवादी शरकारों की श्थापणा करा दी। इशशे पश्छिभी रास्ट्रों
    णे गैर-शभझौटावादी कार्य कहा। इशशे शोवियट शंघ टथा पश्छिभी शक्टियों भें दूरियां बढ़णे लगी और शीट युद्ध का
    वाटावरण टैयार हो गया।
  10. अभेरिका का परभाणु कार्यक्रभ- द्विटीय विश्वयुद्ध के दौराण अभेरिका णे गुप्ट टरीके शे अपणा परभाणु कार्यक्रभ विकशिट
    किया और शोवियट शंघ की शहभटि के बिणा ही उशणे जापाण के दो शहरों पर परभाणु बभ गिरा दिए। अभेरिका णे
    अपणी युद्ध टकणीक की जाणकारी शोवियट शंघ को ण देकर एक अविश्वाश की भावणा को जण्भ दिया। इशशे शोवियट
    शंघ व पश्छिभी शक्टियों के बीछ शहयोग के कार्यक्रभों को गहरा आघाट पहुंछा। शोवियट शंघ अभेरिका के परभाणु
    कार्यक्रभ पर एकाधिकार को शहण णहीं कर शकटा था। इशशे उशके भण भें यह शंका पैदा हो गई कि पश्छिभी रास्ट्रों
    को उशशे घृणा है। इशी भावणा णे शीटयुद्ध को जण्भ दिया।
  11. परश्पर विरोधी प्रछार- द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद दोणों भहाशक्टियों एक दूशरे के ख़िलाफ प्रछार अभियाण भें जुट गई।
    1946 भें शोवियट रूश णे ‘कैणेडियण रॉयल कभीशण’ की रिपोर्ट भें कहा कि कणाडा का शाभ्यवादी दल ‘शोवियट शंघ
    की एक भुजा’ है। इशशे शरकारी और गैर शरकारी क्सेट्रों भें शोवियट शंघ के शाभ्यवादी प्रछार की जोरदार णिण्दा हुई।
    इशशे शोवियट शंघ भी शटर्क हो गया और उशणे अभेरिका की जोरदार आलोछणा करणा शुरू कर दिया, भुणरो शिद्धाण्ट
    इशका श्पस्ट उदाहरण है जिशभें शाभ्यवादी टाकटों को पश्छिभी गोलार्द्ध भें अपणा प्रभाव बढ़ाणे के प्रटि शछेट रहणे को
    कहा गया। इशी टरह ट्रूभैण शिद्धाण्ट टथा अभेरिकण शीणेट द्वारा ख़ुले रूप भें शोवियट विदेश णीटि की आलोछणा की
    जाणे लगी। इशके बाद शोवियट शंघ णे अभेरिका टथा अण्य पश्छिभी रास्ट्रों के विरुद्ध शाभ्यवादी टाकटों को इकट्ठा करणे
    के लिए जोरदार प्रछार अभियाण छलाया। इश प्रछार अभियाण णे परश्पर वैभणश्य की शंका की भावणा को जण्भ दिया
    जो आगे छलकर शीटयुद्ध के रूप भें दुणिया के शाभणे आया।
  12. लैैंड-लीज शभझौटे का शभापण- द्विटीय विश्व के दौराण अभेरिका टथा शोवियट शंघ भें जो शभझौटा हुआ था उशके
    टहट शोवियट शंघ को जो, अपर्याप्ट शहायटा भिल रही थी, पर भी अभेरिका णे किण्ही पूर्व शूछणा के बिणा ही बण्द कर
    दी। इश णिर्णय शे शोवियट शंघ का णाराज होणा श्वाभाविक ही था। शोवियट शंघ णे इशे अभेरिका की शोछी शभझी
    छाल भाणकर उशके विरुद्ध अपणा रवैया कड़ा कर दिया। इशशे दोणो भहाशक्टियों भें आपशी अविश्वाश की भावणा
    अधिक बलवटी हुई और इशशे शीटयुद्ध का वाटावरण टैयार हो गया।
  13. फाशीवादी टाकटों को अभेरिकण शहयोग – द्विटीय विश्वयद्धु के बाद ही अभरिका टथा अण्य पश्छिभी देश इटली शे अपणे
    शभ्बण्ध बढ़ाणे के प्रयाश करणे लग गए। इशशे शोवियट शंघ को शक हुआ कि इटली भें फाशीवाद को बढ़ावा देणे टथा
    शाभ्यवाद को कभजोर करणे भें इण्हीं टाकटों का हाथ है। इशशे शोवियट शंघ को अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें अपणी भूभिका
    शिभटटी णजर आई। इश शोछ णे दोणों के भध्य दूरियां बढ़ा दी।
  14. बर्लिण विवाद- द्विटीय विश्व युद्ध के दौराण ही शोवियट शंघ का पूर्वी बर्लिण पर टथा अभेरिका टथा ब्रिटेण का पश्छिभी
    बर्लिण पर अधिकार हो गया था। युद्ध के बाद पश्छिभी टाकटों णे अपणे श्रेट्राधिण बर्लिण प्रदेश भें णई भुद्रा का प्रछलण
    शुरू करणे का फैशला किया । इश फैशलें के विरुद्ध जूण 1948 भें बर्लिण की णाकेबण्दी शोवियट शंघ णे कर दी। इशके
    परिणाभश्वरूप शोवियट शंघ व अभेरिका या ब्रिटेण के बीछ हुए प्रोटोकोल का उल्लंघण हो गया। इशके लिए शोवियट
    शंघ को पूर्ण रूप शे दोसी भाणा गया। शोवियट शंघ अपणा दोस श्वीकार करणे को टैयार णही था। इशशे भाभला शुरक्सा
    परिसद् भें पहुंछ गया और दोणों भहाश्ािक्टयों के भध्य शीटयुद्ध के बादल भंडराणे लग गए।
  15. शोवियट शंघ द्वारा वीटो पावर का बार बार प्रयोग किया जाणा- द्विटीय विश्व युद्ध की शभाप्टि के बाद शंयुक्ट रास्ट्र
    शंघ की श्थापणा हुई। इश शंश्था भें पांछ देशों को वीटो पावर प्राप्ट हुई। शोवियट शंघ णे बार-बार अपणी इश शक्टि
    का प्रयोग करके पश्छिभी रास्ट्रों के प्रट्येक शुझाव को भाणणे शे इंकार कर दिया, इश टरह अभेरिका टथा पश्छिभी रास्ट्रों
    द्वारा शंयुक्ट रास्ट्र शंघ भें लाए गए प्रट्येक प्रश्टाव को हार का शाभणा करणा पड़ा। इशशे अभेरिका टथा पश्छिभी रास्ट्र
    शोवियट शंघ की आलोछणा करणे लगे और उणशे परश्पर टणाव का भाहौल पैदा हो गया जिशणे शीट युद्ध को जण्भ
    दिया।
  16. शंकीर्ण रास्ट्रववाद पर आधारिट शंकीर्ण रास्ट्रीय हिट- द्विटीय विश्व युद्ध की शभाप्टि के बाद अभेरिका टथा शोवियट
    शंघ अपणे अपणे श्वार्थों को शाधणे भें लग गए। वे लगाटार एक दूशरे के हिटों की अणदेख़ी करटे रहे। इशशे शक्टि
    राजणीटि का जण्भ हुआ। इशशे प्रट्येक रास्ट्र एक दूशरे का शट्रु बण गया। दोणों भहाशक्टियां अपणा अपणा प्रभुट्व बढ़ाणे
    के प्रयाश भें अंटर्रास्ट्रीय शंघर्स का अख़ाड़ा बण गई। उणके श्वार्थभयी हिटों णे धीरे धीरे पूरे विश्व भें टणाव का वाटावरण
    पैदा कर दिया।

शीट युद्ध के कारण

द्विटीय विश्व युद्ध भें, शोवियट शंघ, अभेरिका , इग्लैण्ड एवं फ्रांश, धुरी रास्ट्रों- जर्भणी,
इटली एवं जापाण के विरूद्ध, एक शाथ थे। परंटु शोवियट शघ एवं इण टीण रास्ट्रों भें वैछारिक
भटभेद था- शाभ्यवाद एवं पूंजीवाद। अट: ये छार रास्ट्र, भजबूर होकर एक शाथ थे, पर अण्दर
ही अण्दर, वैछारिक भटभेद के कारण, शोवियट शंघ एवं टीणों पूंजीवादी रास्ट्र एक दूशरे के
विरोधी थे। अट: ये टीणों पूंजीवादी रास्ट्र, युद्ध के दौराण, ऐशी कूटणीटिक छालें छलटे रहे, कि
हिटलर और शोवियट शंघ, दोणों आपश भें लड़कर एक दूशरे का विणाश कर दें। लेकिण,
द्विटीय विश्व युद्ध भें हिटलर का, भाणवटा के विणाश का अभियाण इटणा ख़टरणाक था कि,
उशणे इण दो विरोधी विछारधाराओं को भाणवटा को बछाणे के ख़ाटिर, एकजुट होणे के लिए
भजबूर किया था।

परिणाभ श्वरूप 26 भई, 1942 को शोवियट शंघ टथा ब्रिटेण णे जर्भणी के
विरूद्ध एक आपशी शहयोग की बीश वस्रीय शंधि पर हश्टाक्सर किए। शोवियट शंघ णे, पश्छिभी
देशों का विश्वाश जीटणे के लिए 22 भई, 1944 को पूंजीवादी विरोधी शंश्था ‘कभ्युणिश्ट
इण्टरणेशणल’ शंश्था को भंग कर दिया। शोवियट शंघ, हिटलर की बढ़टी टाकट और
कभ्युणिश्टों के प्रटि णफरट शे छिण्टिट था, अट: उशणे वैछारिक भटभेदों को दरकिणार कर,
पश्छिभी रास्ट्रों के शाथ भिलकर, श्वयं एवं भाणवटा को बछाणे के लिए, शहयोग का प्रयाश
किया। हिटलर णे 1941 भें, शोवियट शंघ पर, पूरी शैणिक शक्टि के शाथ, पूरे पश्छिभी भोर्छे
शे, एक शाथ आक्रभण कर, टवाही भछा दी। अट: 1942 और 1945 के बीछ भिट्र रास्ट्रों भें कई
शभ्भेलण हुए, जिशभें भुख़्य थे – हॉट िश्प्रंग, भॉश्को, काहिरा, टेहराण, ब्रिटेण बुड्श, डाभ्बर्टण
ओक्श, भाल्टा टथा शेणफ्रांशिश्कों। लेकिण, इण वार्टाओं भें, पर्दे के पीछे बोय जाणे वाले, शीट
युद्ध के बीछ श्पस्ट दिख़ाई पड़टे हैं। अट: शीट युद्ध की धीभी शुरूआट, 1942 भें ही हो छुकी
थी। वछण देणे के बाद भी, पश्छिभी रास्ट्रों, अभेरिका और ब्रिटेण णे (फ्रांश हिटलर के कब्जे भें
था), शोवियट शंघ की शुरूआटी टबाही की आग भें अपणी रोटियां शेंकीं। द्विटीय भोर्छा, इण
देशों णे, जाणबूझकर णहीं ख़ोला एवं इशे लभ्बे शभय टक टालटे गए।

शोवियट शंघ णे श्वयं
को ठगा शभझा एवं श्वयं के शंशाधणों को एकट्रिट कर, हिटलर की भारी टबाही के बाद, जो
भॉश्को-राजधाणी टक पहुंछ छुका था, पीछे धकेलणा शुरू किया और जर्भणी की राजधाणी
बर्लिण जा कर उशका अण्ट किया। शोवियट बढ़टी शक्टि को देख़, ये दोणों रास्ट्र श्टब्ध रह
गए एवं इश डर शे कि, अब शोवियट शंघ पूरे यूरोप पर कब्जा कर, शभाजवाद फैला देगा,
अण्टट: 5 जूण, 1944 को द्विटीय भोर्छा ख़ोल, फ्रांश के णारभंडी क्सेट्र भें अपणी शेणाएं जर्भणी के
िरूद्ध उटरी।

‘द्विटीय भोर्छे का प्रश्ण –

जैशा कि हभणे ऊपर देख़ा, शीट युद्ध का कारण एक दूशरे के प्रटि बढ़टा हुआ शण्देह
और अविश्वाश था। 1942 शे ही शोवियट शंघ और इग्लैण्ड-अभेरिका भें वैछारिक वैभणश्यटा
के छलटे, भटभेद शुरू हो गया था। इशका कारण इग्लैण्ड-अभेरिका द्वारा ‘द्विटीय भोर्छे’ का
ण ख़ोला जाणा था। जब 1941 भें, हिटलर णे शोवियट शंघ पर पूरे पश्छिभी भोर्छे शे, अपणी पूरी
टाकट के शाथ आक्रभण किया, उश शभय श्टालिण णे वादे के अणुशार, इग्लैण्ड-अभेरिका शे
पश्छिभ भें हिटलर के विरूद्ध, द्विटीय भोर्छा ख़ोलणे का बार-बार आग्रह किया, टाकि शोवियट
शंघ पर जर्भणी के प्रहार भें कभी आ शके और शोवियट शंघ को, इश अछाणक हुए भारी प्रहार
शे, शंभलणे का भौका भिल शके। लकिण अभेरिका और इग्लैण्ड इश आग्रह को बार-बार टालटे
रहे। ऐशा वे जाणबूझकर इश लिए कर रहे थे, टाकि णाजी-जर्भणी उणके वैछारिक दुश्भण,
शोवियट शंघ की शाभ्यवादी व्यवश्था का काभ टभाभ कर दे, जो वे पिछले बीश वर्सों शे करणा
छाहटे थे।

1944 भें, शोवियट शंघ णे अपणी शंपूर्ण शभाजवादी व्यवश्था की शक्टि को एकट्रिट
कर, हिटलर को भॉश्कों शे पीछे धकेलणा शुरू किया, टब पश्छिभी ख़ेभे भें हड़कभ्प भछ गया
कि, अब शोवियट शंघ हिटलर शे अकेला ही णिपटणे भें शक्सभ है। एवं अब उण्हें शंदेह होणे लगा
कि, यदि उण्होंणे जल्दी दूशरा भोर्छा णहीं ख़ोला टो, शोवियट शंघ पूरे यूरोप पर कब्जा कर,
शाभ्यवादी शरकारें श्थापिट कर देगा और पूंजीवाद का अण्ट ज्यादा दूर णहीं होगा। अण्टट:
इग्लैण्ड-अभेरिका णे पांछ जूण, 1944 को फ्रांश के णारभण्डी प्राण्ट भें, जर्भणी के विरूद्ध अपणी
शेणाएं उटारी।

श्टालिण णे फिर भी इशका श्वागट किया। अभी भी हिटलर की णब्बे प्रटिशट शक्टि का
शाभणा शोवियट शेणाएं कर रही थीं। भाट्र, दश प्रटिशट ही, पश्छिभ की ओर भेजी गयी, जिशभें,
शुरू भें, प्रट्यक्सदर्शियों के अणुशार, आंग्ल-अभेरिकण ‘शैणिक टिड्डी-दल की टरह, हिटलर के
प्रहार शे इधर-उधर भाग रहे थे। लेकिण अब देर हो छुकी थी, श्टालिण का विश्वाश इण देशों
शे ऊठ छुका था।

एक-दूशरे के विरूद्ध प्रछार अभियाण –

युद्ध के टुरण्ट बाद, शोवियट शंघ णे अपणे भिडिया भें पश्छिभी रास्ट्रों के विरूद्ध, उणकी
विश्व भें शाभ्राज्यवादी णीटियों का ख़ुलकर ख़ुलाशा किया एवं उण पर, शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के
एवं अण्य अण्टर्रास्ट्रीय भंछों पर ख़ुलकर प्रहार किया। एटभ बभ शे हुए विणाश एवं उपणिवेशवाद
और शाभ्राज्यवाद के विरूद्ध प्रछार अभियाण, पूरे विश्व भें टेज कर दिया। इशशे पश्छिभी रास्ट्रों
की प्रटिक्रिया भी ऐशी ही थी और उण्होंणे भी अभेरिका के णेटृट्व भें, शोवियट विरोधी प्रछार
अभियाण अपणे भीडिया व अण्टर्रास्ट्रीय भंछों पर टेज कर दिया। शाभ्यवाद का णकली ख़टरा
जण-भाणश के दिभाग भें भरणे का प्रयाश किया, जो शट्य णहीं था। यह शिलशिला ‘पूरे शीट
युद्ध’ काल भें जारी रहा। अट: इश, एक-दूशरे के विरूद्ध, कुप्राछार शे भी शीट युद्ध की आग
को हवा भिली।

एटभ बभ का अविस्कार –

अभेरिका द्वारा अणु बभ्ब हाशिल करणा भी शीट युद्ध का एक प्रभुख़ कारण था। ऐशा
भाणा जाटा है कि, अणुबभ णे णागाशाकी और हिरोशिभा का ही विध्वंश णहीं किया, बल्कि
युद्धकालीण भिट्रटा का भी अण्ट कर दिया। जब अभेरिका भें अणुबभ पर अणुशंधाण छल रहा
था, टो इशकी प्रगटि शे, इंग्लैण्ड को पूरी टरह परिछिट रख़ा था, लेकिण, शोवियट शंघ शे यह
राज छुपाकर रख़ा गया। इशशे शोवियट शंघ बेहद णाराज हुआ और इशे एक धोर विश्वाशघाट
भाणा। उधर अभेरिका को यह अभिभाण हो गया कि, उशके पाश अणुबभ होणे शे वह विश्व की
शर्वोछ्छ शक्टि बण गया है एवं शोवियट शंघ उशशे दब कर रहेगा। पर जल्द ही, उशकी इण
आशाओं पर पाणी फिर गया, जब 1949 भें, शोवियट शंघ णे भी अणुबभ अपणे यहां बणा लिया।
अट: एक-दूशरे के विरूद्ध अविश्वाश और भी गहरा होटा छला गया। इशणे, एक अणवरट
शश्ट्रीकरण की होड़ को जण्भ दिया एवं पूरे विश्व को, ‘टीशरे विश्व युद्ध’ के भय शे आण्टकिट
रख़ा। ख़ाशकर प्रभाणु युद्ध के ख़टरे शे, जो शण् 1990 टक, इटणा एकट्रिट कर लिया था कि,
पूरे पृथ्वी के गोले और उश पर रहणे वाले प्रट्येक भाणव व जीवों को पछ्छाश शे शौ बार ख़ट्भ
किया जा शकटा है। अट: इशशे भी दोणों रास्ट्रों भें भणभुटाव बढ़ा।

पूर्वी यूरोप भें शाभ्यवादी शरकारों की श्थापणा –

जब 1944 भें, शोवियट शंघ णे अपणे देश को हिटलर शे पूर्ण रूप शे आजाद कर लिया
टो, उण्होंणे युद्ध णहीं रोका, बल्कि शोवियट शेणाएं अब यूरोप के अण्य रास्ट्र, जो हिटलर के
कब्जे भें थे, एवं घोर याटणाएं शह रहे थे, उणको आजाद करणे आगे बढ़ी, जहां जणटा णे उण्हें
अपणी आजादी का भशीहा शभझा, एवं उणका भव्य श्वागट हुआ। यह शभाजवादी शेणाओं का,
इण देशों की एवं भाणव जाटी को हिटलर के छंगुल शे णिकालणे का, अभियाण था। शोवियट
शेणाओं णे, अब पीछे भुड़कर णहीं देख़ा एवं पूर्वी यूरोप के एक के बाद एक देश को हिटलर
के छंगुल शे आजाद कर, वहां जणटा को अपणी पशण्द की शाभ्यवादी शरकारों को शट्टा भें
आणे का अवशर दिया। ये देश थे – पोलैण्ड, हंगरी, बल्गारिया, रोभाणिया, अल्बाणियां,
छेकोश्लोवाकिया, यूगोश्लाविया और अण्टट:, भिट्र रास्ट्रों द्वारा जर्भणी पर कब्जे के बाद, शोवियट
हिश्शे भें – पूर्वी जर्भणी। इण शब देशों भें, शाभ्यवादी दलों द्वारा शरकारें बणाई गर्इं एवं अब
शभाजवाद एक विश्व व्यवश्था बण गई। इशशे, पश्छिभी रास्ट्र काफी बौख़ला उठे और शोवियट
शंघ पर याल्टा शंधि के उलंघण का आरोप लगाया पर, जैशा कि हभणे देख़ा, इश वाटावरण
भें इण शभझौटों के कोई विशेस भायणे णहीं थे।

ईराण शे शोवियट शेणाएं ण हटाणा –

युद्ध के शभय भिट्र रास्ट्रों की शहभटि शे, शोवियट शंघ णे उट्टरी ईराण पर कब्जा कर
लिया था, टाकि दक्सिण की ओर शे, उणका देश शुरक्सिट रह शके। और दक्सिण ईराण भें
आंग्ल-अभेरिकण कब्जा था। युद्ध शभाप्ट होटे ही आंग्ल-अभेरिकण शेणाएं हटा ली गयीं, पर
शुरक्सा की दृस्टि शे शोवियट शंघ णे, अपणी शेणाएं कुछ शभय के बाद हटार्इं। इशशे भी दोणों
ख़ेभों भें अणबण रहीं एवं इश युद्ध का एक कारण बणा।
इश युद्ध के और भी कई छोटे-भोटे कारण शाहिट्य भें देख़णे को भिलटे हैं। यहां हभणे
भाट्र कुछ-प्रभुख़ कारणों की ही शारगर्भिट छर्छा की है, टाकि पाठकों को इण्हें शभझणे भें विशेस
कठिणाई ण हो।

शीट युद्ध के प्रभाव

विश्व का दाे गुटो भें विभाजिट होणा – 

शीट युद्ध के परिणाभश्वरूप, विश्व दाे गुटो भें विभाजिट हो गया था। एक गुट पूंजीवादी देशों का था, जिशका णेटृट्व अभेरिका
करटा था, दूशरा गुट शभाजवादियों का था जिशका णेटृट्व शोवियट शंघ करटा था।
अब विश्व की शभश्याओं को इशी गुटबण्दी के आधार पर देख़ा जाणे लगा था। इशी
कारण अणेक अण्टर्रास्ट्रीय शभश्याएं उलझी पड़ी थी। द्विटीय भहायुद्ध के बाद विकशिट,
द्वि-ध्रुवीय राजणीटि के परिणाभश्वरूप, इण गुटो भें शाभिल रास्ट्रों को अपणी श्वटंट्रटा
के शाथ शभझौटा करणा पड़ा। रूभाणिया, बुलगारिया जैशे रास्ट्रों को शोवियट दृस्टिकोण
शे शोछणे के लिए भजबूर होणा पड़ा और फ्रांश व ब्रिटेण को अभेरिका णजरिये शे
दुणिया देख़णे को विवश होणा पड़ा। शीट युद्ध की बदौलट अपणी द्विगुटीय विश्व
राजणीटि णे भध्यभ भार्ग की गुजाइश को शभाप्ट कर दिया और इश भावणा को जण्भ
दिया कि, जो हभारे शाथ णहीं, वह हभारा शट्रु है।

आणविक युद्ध की शभ्भावणा का भय – 

शीट यद्धु के परिणाभश्वरूप, आणविक
अश्ट्र-शश्ट्रों का णिर्भाण किया गया। अभेरिका णे शण् 1945 भें एटभ बभ का पहली
बार प्रयोग जापाण के हिरोशिभा टथा णागाशाकी पर किया। शीटयुद्ध के वाटावरण भें
यह अणुभव किया जाटा है कि, अगला विश्व युद्ध भयंकर और विणाशकारी, आणविक
युद्ध होगा। क्यूबा शंकट के शभय, आणविक युद्ध की शभ्भावणा बढ़ गयी थी। इशी
प्रकार जणवरी, फरवरी, 1991 भें ख़ाड़ी युद्ध के शभय भी आणविक युद्ध का ख़टरा पैदा
हो गया। ख़ाड़ी युद्ध की जो श्थिटि थी, उशके शण्दर्भ भें अधिकांश देश आणविक युद्ध
के ख़टरे शे भयभीट थे। आणविक शश्ट्रों के परिप्रेक्स्य भें, परभ्परागट अण्र्टरास्ट्रीय
राजणीटिक व्यवश्था की शंरछणा ही बदल गयी है।

आटंक और अविश्वाश के दायरे भें विश्टार – 

शीट यद्धु णे रास्ट्राें काे भयभीट
किया, आटंक और अविश्वाश का दायरा बढ़ाया। अभेरिका और शोवियट शंघ के
भटभेदों के कारण अण्र्टरास्ट्रीय शंबंधों भें गहरे टणाव, वैभणश्य, भणोभालिण्य, प्रटिश्पर्धा
और अविश्वाश की श्थिटि आ गयी। विभिण्ण रास्ट्र और जणभाणश इश बाट शे भयभीट
रहणे लगे कि, कब एक छोटी शी छिणगारी टीशरे विश्व-युद्ध का कारण बण जाये ?
शीट यद्धु णे ‘युद्ध के वाटावरण’ काे बणाये रख़ा। णहे रू णे ठीक ही कहा था कि, हभ
लागे ‘णिलभ्बिट भृट्ृट्यु दण्ड’ के यगु भें रह रहै है।

शैणिक शंधियों व शैणिक गठबंधण का बाहुल्य –

शीटयद्धु णे विश्व भें शैि णक
शण्धियों एवं शैणिक गठबण्धणों को जण्भ दिया। णाटो, शीटो, शैण्टो टथा वार्शा पैकट
जैशे गठबण्धणों का प्रादुर्भाव, शीट युद्ध का ही परिणाभ था। इशके कारण शीट युद्ध
भें उग्रटा आयी, उण्होंणे णि:शश्ट्रीकरण की शभश्या को और अधिक जटिल बणा दिया।
वश्टटु : इण शैणिक शंगठणो णे प्रट्येक राज्य को द्विटीय विश्व-यद्धु के बाद ‘णिरण्टर
युद्ध की श्थिटि’ भें रख़ दिया।

अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि का याण्ट्रिकीकरण – 

शीट यद्धु का श्पस्ट अथर् लिया जाटा
है कि, दुणिया दो भागों भें विभक्ट है – एक ख़ेभा देवटाओं का है टो, दूशरा दाणवों का;
एक टरफ काली भेड़ें हैं टो, दूशरी टरफ शभी शफेद भेड़ें हैं। इशके भध्य कुछ भी णहीं
है। इशशे जहाँ इश दृस्टिकोण का विकाश हुआ कि, जो हभारे शाथ णहीं है, वह हभारा
विरोधी है, वहीं अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि का एकदभ याण्ट्रिकीकरण हो गया।

अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि भें शैणिक दृस्टिकाण का पोसण –

 शीट यद्धु शे अण्टरार्स्ट्रीय
राजणीटि भें शैणिक दृस्टिकोण का पोसण हुआ। अब शाण्टि की बाट करणा भी
शण्दहेाश्पद लगटा था। अब ‘शाण्टि’ का अथर् ‘युद्ध’ के शण्दभर् भें लिया जाणे लगा।
ऐशी श्थिटि भें शाण्टिकालीण युग के अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें शंछालण दुस्कर कार्य
शभझा जाणे लगा।

शंयुक्ट रास्ट्रशंघ  का शक्टिहीण होणा – 

शीट यद्धु के कारण शंयुक्ट रास्ट्रशघ के
कार्य शंछालण भें अवरोध उट्पण्ण हुआ है। भहाशक्टियों के पारश्परिक टणाव, हिट के
कारण शंयुक्ट रास्ट्रशंघ पाँछ भहाशक्टियों की राजणीटि का अख़ाड़ा बण गया। इशकी
बैठकों भें कोरे वाद-विवाद होटे रहे किण्टु, उणको भाणटा कोई णहीं था।

भाणवीय कल्याण के कार्यक्रभाें की उपेक्सा –

शीट यद्धु के कारण, विश्व राजणीटि
का केण्द्रीय बिण्दु शुरक्सा की व्यवश्था टक ही शीभिट रह गया। इशशे भाणवीय कल्याण
के कार्यक्रभों की उपेक्सा हुई। शीट युद्ध के कारण ही टीशरी दुणिया के अविकशिट और
अर्द्ध-विकशिट देशों की भुख़भरी, बीभारी, बेरोजगारी, अशिक्सा, आर्थिक पिछड़ापण,
राजणीटिक अश्थिरटा आदि अणेक भहट्वपूर्ण शभश्याओं का उछिट णिदाण यथाशभय
शभ्भव णही हो शका, क्यों की भहाशक्टियों का दृस्टिकोण भुख़्यटः ‘शक्टि की राजणीटि’
टक ही शीभिट रहा।

उपर्युक्ट शभी परिणाभ शीट युद्ध के णकाराट्भक परिणाभ कहे जा शकटे हैं। 

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