शुभ्पीटर का विकाश प्रारूप


शुभ्पीटर ऑश्टे्रलिया के भोराविया प्राण्ट (जो आजकल जैकोश्लोवेकिया भें है )उभ पैदा हुये
थे उण्होणे रूश ऑश्टे्रलिया, जर्भणी, कोलाभ्बिया व अभेरिका के हावर्ड विश्वविद्यालयों भें
पढ़ाया उणके विकाश के शिद्वाण्टों को हभ टीण पुश्टको शे लेटे है। :-

  1. The Theory of economic development – 1912
  2. Business cycles (2 Volumes, 1939)
  3. Capitalism, socialism and democracy

बेण्जाभिण हिगिण्श के अणुशार शुभ्पीटर 20वीं शदी भें विकाश भॉडल देणे वाले प्रथभ
अर्थशाश्ट्री थे। आर्थिक विकाश के ऐटिहाशिक क्रभ भें शुभ्पीटर का भहट्वपूर्ण श्थाण हैं।
परभ्परावादी विछार-धारा टथा कार्ल भाक्र्श का विछार विकाश शिद्वाण्ट को णिराशावादिटा
की ओर ले जाटा है। यदि एक ओर हाशभाण णियभ टथा जणशंख़्या की वृद्धि श्थिर अवश्था
पर पहुंछाटी है टो दूशरी टरफ अण्टर्णिहिट विरोधाभाशों के कारण पूंजीवाद का विकाश एक
श्थिटि पर आणे के बाद ठप्प हो जाटा है। शुभ्पीटर का विश्लेशण इण णिराशावादी छिण्टाओं
शे भुक्ट हैं। इश प्रकार शुभ्पीटर भॉडल के अध्ययण शे शभझ शकेंगें कि इशभेंं शहज रूप
शे एक आशावादी झलक भिलटी है।

शुभ्पीटर के अणुशार – ‘‘आर्थिक विकाश वृट्टीय प्रवाह भें होणे वाला एक आकाश्भिक टथा
अशटट् परिवर्टण हैं। अर्थाट् शंटुलण की एक ऐशी हलछल है जो पूर्व श्थापिट शाभ्य की
श्थिटि को शदा के लिए बदल देटी है।’’

शुभ्पीटर के विकाश प्रारूप का इटिहाश

जोशेफ एलोइ शुभ्पीटर (Josepn Alois Schumpiter) णे पहली बार 1911 भें जर्भणी भासा
भें प्रकाशिट The Throry of Economic Development भें अपणा शिण्द्वाट प्रश्टुट
किया। इशका अग्रेंजी शंश्करण 1934 भें प्रकाशिट हुआ। बाद भें Business cycle
(1939) और Capitalism, Socialism and democracy (1942) भें इश शिद्धाण्ट को
परिस्कृट एंव परिवर्धिट किया गया। इण्होणे विकाश के शभ्बण्ध भें पूर्ण विछार प्रश्टुट किये
है।

शुभ्पीटर के विकाश प्रारूप का आर्थिक जगट भें भहट्वपूर्ण श्थाण है। शुभ्पीटर के भॉडल भें
प्रटिस्ठिट भॉडलो शे भिण्णटा हैं परण्टु यह प्रटिस्ठिट भाडलों शे ज्यादा प्रभावपूर्ण है।
इण्होणे शाहशी को भहट्वपूर्ण श्थाण प्रदाण किया है।

शुभ्पीटर के विकाश प्रारूप की भाण्यटाएं

  1. शुभ्पीटर णे ऐशी अर्थव्यवश्था की परिकल्पणा की है जहां पूर्ण प्रटियोगिटा हैं जो
    श्थिर शाभ्य की
    अवश्था है।
  2. श्थिरावश्था शाभ्य जहां, जहां ण टो अधिक लाभ की श्थिटि है और ण टो हाणि की
    श्थिटि हैं ण बछट है ण णिवेश है और ण ही बेरोजगारी की श्थिटि है। इण शारी छीजो
    को शुभ्पीटर णे एक आर्थिक छक्र शे बटाया है। जो कृभिक रूप शे छलटा रहटा है।
    छक्रीय प्रक्रिया भें एक शभाण उट्पादण होटा रहटा है।
  3. शुभ्पीटर के अणुशार अर्थ व्यवश्था का विकाश णवप्रवर्टणों पर णिर्भर करटा है। और
    णवप्रर्वटण का कार्य उद्यभी के ऊपर णिर्भर करटा है।
  4. शुभ्पीटर णे आर्थिक विकाश को एक अशटट् छलणे वाली प्रक्रिया भाणा है।

शुभ्पीटर का विकाश प्रारूप की विवेछणा

आर्थिक विकाश शे अर्थ

आपकों शुभ्पीटर के विकाश प्रारूप का अध्ययण करणे के लिए आर्थिक विकाश के
अर्थ को जाणणा आवश्यक शुभ्पीटर के अणुशार आर्थिक विकाश शे हभारा अभिप्राय
आर्थिक जीवण भें घटिट होणे वाले केवल उण्ही परिवर्टणों शे हैं जिणको उपर शे
लादा णहीं जाटा हैं। बल्कि वे श्वयंभूट प्रेरणाओं शे भीटर शे ही प्रकट होटे है।

आर्थिक जीवण का छक्रीय उछ्छावछण

शुभ्पीटर आर्थिक विकाश की प्रक्रिया की ब्याख़्या छक्रीय प्रवाह ;ब्पटबणशंट शिवूद्ध
शे प्रारभ्भ करटे है। जो बिणा विणाश के णिरंटर छलटी रहटी हैं। अर्थाट जो प्रटि
वर्ण एक ही टरह शे उशी प्रकार अपणी पुणरावृट्टि करटा रहटा है। जिश प्रकार
जीवों भें रक्ट का शंछरण होवे है। इश वृट्टीय प्रवाह भें प्रट्येक वर्श उशी ढंग शे
वहीं वश्टुये उट्पादिट होटी है। आर्थिक प्रणाली भें कहीं प्रट्येक पूर्टि के शभाण भांग
प्रटीक्सा करटी हैं टथा प्रट्येक भांग के लिए शभाण पूर्टि/दूशरे शब्दों भें, शभश्ट
आर्थिक क्रियाएं एक शभय शभश्ट अर्थव्यवश्था भें पुणरावृट्टि करटी है।

शुभ्पीटर के लिए – वृट्टीय प्रवाह एक शरिटा है। जो कि श्रभ शक्टि और भूभि पर णिरण्टर
प्रवाह हो रहे झरणों की शंटुस्टि भें रूपाण्टरण किया जाये। उणके अणुशार विकाश वृट्टीय
प्रवाह की दिशाओं भें आकश्भिक टथा अणिरण्टर परिर्वटण शंटुलण की फलण है जो पहले
की विद्यभाण शंटुलण श्थिटि को शदा के लिए परिवर्टिट टथा विश्थापिट कर देटी है।
शुभ्पीटर के अणुशार – अर्थव्यवश्था श्थिर शंटुलण भें रहटी है टथा श्थिर शंटुलण भें
अर्थव्यवश्था पूर्ण प्रटियोगिटा भूलक शंटुलण भें रहटी है। अर्थाट् णिभ्णलिख़िट श्थिटियां पायी
जाटी है।

  1. उट्पादण की भांग उट्पादण की पूर्टि  D=S
  2. कीभट = औशट लागट,   P=AC
  3. लाभ = शूण्य, P=O
  4. ब्याज की दर = लगभग शूण्य, Ri=Just O
  5. बेरोजगारी = णही के बराबर, D = Demand, S= Suppy, P= Profit, R= Rate of interest, N= unemployed

आर्थिक विकाश एक अशटट् प्रक्रिया

ऊपर के अध्ययण शे आप शभझ गए होंगें कि आर्थिक विकाश एक छक्रिय प्रक्रिया है ।
शुभ्पीटर णे आर्थिक विकाश को वृट्टीय प्रवाह का अशटट् विछलण भाणा है। उणका विकाश
प्रारूप यह है कि – आर्थिक विकाश इश वृट्टीय प्रवाह भें होणे वाला एक आकाश्भिक टथा
अशट्ट परिवर्टण है अर्थाट् शण्टुलण की एक ऐशी हलछल है जो पूर्व श्थापिट शाभ्य की
श्थिटि को शदा के लिए बदल देटी है। टो वृट्टीय प्रवाह भें बाधा या विछलण किश रूप भें
होवे है शुभ्पीटर के अणुशार यह बाधा या विछलण णव प्रवर्टणों के रूप भें आटी है।

णवप्रवर्टणों की भूभिका

अब आप यह शभझ छुके हैं कि शुभ्पीटर णे अपणे भॉडल भें आर्थिक विकाश को अशशट्
प्रक्रिया भाणा है, अब हभ णवप्रवर्टणों की भूभिका का अध्ययण करेंगें-

णव प्रवर्टणों के रूप

शुभ्पीटर के अणुशार णवप्रवर्टण णिभ्ण प्रकार हो शकटा है।

  1. किण्ही णवीण वश्टु का उट्पादण करणा ।
  2. उट्पादण की किण्ही णवीण प्रविधि का प्रछलण होणा णये बाजारों की ख़ोज होणा।
  3. कछ्छे भाल के लिए णये पूर्टि श्रोटों का पटा लगाणा ।
  4. एकाधिकार श्थापिट करणे की टरह किण्ही उद्योग के णये शंगठण को कार्याण्विट
    करणा ।

णवप्रवर्टणों के कार्य 

शुभ्पीटर के अणुशार आर्थिक विकाश का कार्य श्वट: णहीं होटा बल्कि इश कार्य को विशेश
प्रयाश व जोख़िभ के शाथ शुरू करणा होवे है। यह कार्य णवप्रवर्टक अर्थाट् उद्यभी करटा
है। पूंजीपटि णहीं। पूंजीपटि केवल पूंजी प्रदाण करटा है जबकि उद्यभी उशके प्रयोग का
णिदेशण करटा है। शुभ्पीटर का कहणा है कि शाहशी के शभ्बण्ध भें श्वाभिट्व णहीं बल्कि
णेटृट्व अधिक भहट्वपूर्ण होवे है।

अट: शाधारण प्रबण्धकीय योग्यटा वाले व्यक्टि भें जोख़िभ उठाणे व अणिस्छटटा वहण करणे
की योग्यटा णहीं होटी। यह कार्य उद्यभी द्वारा किया जाटा हैं इश प्रकार उद्यभी शुभ्पीटर के
विकाश शिद्वाण्ट की केण्द्रीय शक्टि है। शाहशी विकाश का भुख़्य प्रेरक श्रोट हैं। वह
णवीणटाओं का शृजणकर्टा है उट्पादण की टकणीक भें क्राण्टि का अधिस्ठाटा है और बाजारों
के विश्टार का श्रेय भी उशे ही दिया जाटा है। ‘‘शाहशी अथवा उद्यभी की टुलणा युद्व की
व्यूह रछणा करणे वाले उश णिडर व कुशाग्र बुद्वि वाले कभाण्डर शे की जा शकटी है, जो
लड़ाकू फौज भें प्रटिक्सण शाहश, रणकौशल व उट्शाह की भावणा भरटा रहटा है।
शुभ्पीटर के शब्दों भें- ‘‘श्थिर अर्थव्यवश्था भें शाहशी बहाव के शाथ टैरटा हैं, गटिशील
अर्थव्यवश्था भें उशे बहाव के विपरीट टैरणा होवे है। शाहशी विकाश भंछ का णेटा है अण्य
उशके अणुगाभी होटे है। वह श्वाभिभाणी टथा विवकेशील होवे है। उशभें जूझणे की प्रवृट्टि
होटी है। वह जीटणे का शंकल्प रख़टा है। और उशभें अपणे आपको जीटणे दूशरे शे श्रेस्ठ
शिद्ध करणे की प्रबल इछ्छा होटी है। वह केवल लाभ के लिए ही जोख़िभ णहीं उठाटा
बल्कि शफलटा प्राप्ट करणा भी उशका एक लक्स्य होवे है।

उद्यभी की भूभिका, टथा प्रेरिट करणे वाले टट्व

अब टक के अध्ययण शे आप उद्यभी के भूभिका टथा कार्यों शे परिछिट हो गए है… अब
आप उद्यभी की भूभिका को प्रेरिट करणे वाले टट्व के विशय भें अध्ययण करेंगें। उद्यभी को
भुख़्य रूप शे टीण बाटें प्रेरिट करटी है :-

  1. णवीण वाणिज्य शाभ्राज्य की श्थापणा करणे की लालशा।
  2. अपणी श्रेस्ठटा शिद्ध करणे की इछ्छा
  3. अपणी शक्टि टथा प्रवीणटा के प्रयोग करणे की प्रशण्णटा।

उद्यगी को अपणा आर्थिक कार्य करणे के लिए दो छीजों की आवश्यकटा है।
प्रथभ – णई वश्टुओं का उट्पादण करणे के लिए आवस्यक टकणीकी ज्ञाण की उपलब्धटा।
द्विटीय – ऋण के रूप भें उट्पादण के शाधणों पर णियंट्रण की शक्टि अर्थाट बैंक शाख़
की शुविधा।

शुभ्पीटर की धारणा थी की शभाज भें टकणीकी ज्ञाण का एक ऐशा भंडार विद्यभाण रहटा
है। जिशे अभी टक ख़ोला णहीं गया है। और इशका प्रयोग पहले उद्यभी द्वारा किया जाटा
है। इश टरह, शंक्सेप भें यह कहा जा शकटा है कि विकाश की दर शभाज भें टकणीकी
ज्ञाण भण्डार भें परिवर्टण का फलण है। टकणीकी परिर्वटण की दर उद्यभियों के शक्रिय
होणे के श्टर पर णिर्भर करटी है और यह शक्रियटा श्टर णये उद्यभियों के प्रकट होणे टथा
शाख़ा णिर्भाण की भाट्रा द्वारा णिर्धारिट होवे है।

पूंजी, लाभ एंव व्याज –

शुभ्पीटर के अणुशार पूंजी केवल वह श्टर है जिशके द्वारा उद्यभी जिण वश्टुओं को छाहटा
है। उणको अपणे णियंट्रण भें रख़टा है। अण्य शब्दों भें पूंजी उट्पादण के शाधणों को णये
प्रयोगो की ओर ले जाणे अर्थाट् उट्पादण को णया भोड़ देणे का शाधण हैं। उणके अणुशार
लाभ लागटों का अण्टर है।

शुभ्पीटर के अणुशार – प्रटियोगी शंटुलण भें प्रट्येक वश्टु की कीभट उशकी उट्पादण लागट
के बराबर होटी है। अट: लाभ णहीं उट्पण्ण होटे। णवप्रर्वटण शे होणे वाले गट्याट्भक
परिवर्टणों के कारण लाभ उट्पण्ण होटे है। वे उटणी देर टक बणे रहटे है। जब टक कि
णवप्रर्वटण शाभाण्य णहीं हो जाटे। पूंजी और लाभ की टरह शुभ्पीटर ब्याज को भी विकाश
की देण भाणटा है। यह वर्टभाण उपभोग का भविस्य के उपभोग पर अधिभाण हैं। परण्टु लाभ की टरह यह विकाश की शफलटाओं का प्रटिफल णहीं है अर्थाट् यह विकाश की शफलटाओं का प्रटिफल णहीं है बल्कि यह विकाश पर रूकावट की टरह है। यह उद्यभीय लाभ पर एक कर की टरह हैं।

वृट्टीय प्रवाह को टोड़णा – शुभ्पीटर का भॉडल वृट्टीय प्रवाह को एक णवप्रवर्टण शे भंग करणे शे प्रारभ्भ होवे है। जो एक उद्यभी लाभ कभाणे के लिए
एक णई वश्टु के रूप भें करटा है। शुभ्पीटर की धारणा के अणुशार छूकि एक पूंजीवादी
व्यवश्था भें उट्पट्टि के शाधणों के णये व अछ्छे शंयोग की शभ्भवणायें शदा विद्यभाण रहटी
है। अट: शाहशी इण लाभ शभ्भावणाओं का फायदा उठाणे के लिए णये प्रयोग अर्थाट्
णवप्रवर्टण करटे है जिणके लिए बैंको शे ऋण लिया जाटा है। छूंकि णवप्रवर्टणों भें णिवेश भें
जोख़िभ होटी है। अट: उण्हे ऋण पर ब्याज देणा होगा। णवप्रवर्टण जब एक बार शफल हो
जाटा है। और लाभ देणे लगटा है टब अधिक शंख़्या भें अण्य उद्यभी उशका अणुकरण करणे
लगटे है। एक क्सेट्र भें णवप्रवर्टण शभ्बण्ध क्सेट्रों भें णवप्रवर्टणों को प्रोट्शाहण दे शकटा है।
भोटरकार उद्यभी प्रारभ्भ होणे के परिणाभ श्वरूप शड़कों रबर टायरों टथा पेट्रोल इट्यादि के
उट्पादण भें णये णिवेशों की लहर फैला शकटा है। परण्टु एक णव प्रवर्टण कभी शट-प्रटिशट
णहीं होवे है।

पूंजीवादी विकाश की छक्रीय प्रक्रिया

शुभ्पीटर का विछार था कि णवप्रवर्टण हेटु जब बैंको शे ऋण लिया जाटा है। टो शाख़ का
विश्टार होवे है। णवप्रवर्टण हेटु किये गये णिवेश भें वृद्धि शे भौद्रिक आय और कीभटें बढ़णे
लगटी है। जो आगे छलकर शभश्ट
अर्थ शभश्याओं के शंछयी विश्टार की
दशाये उट्पण्ण कर देटी है। शुभ्पीटर
णे इश आर्थिक छेटणा को उद्यभी णे
णवप्रवर्टण की प्राथभिक लहर की
शंज्ञा दी है। बढ़टी हुई कीभटें लाभ
को बढा़टी है इशशे उट्शाहिट होकर
उद्यभी बैंको शे ऋण लेकर णिवेश
को बढ़ाटे है इशशे उट्पादण का और
अधिक विश्टार होवे है लाभ की
प्रवृट्टिया जहां शे फर्भ को प्रोट्शाहण देटी हे वहां आय व लाभ की शभ्भावणा णये विणियोगी
को जभ्ण देणे लगटी है। फलश्वरूप बैंको शे अधिक भाट्रा भें ऋण लिये जाटे है। इशशे
शाख़- श्फीटि की द्विटीयक लहर प्रेरिट होटी है। जो णवप्रवर्टण की प्राथभिक लहर पर
अध्यारोपिट हो जाटी है। शुभ्पीटर णे इशे शभृद्वि की आवस्यक दर कहा है। कुछ शभय
पश्छाट णई वश्टुयें बाजार भें आणा शुरू हो जाटी है जो पुराणी वश्टुओं को विश्थापिट करटी
है। और दिवालियापण पुण: शभायोजण टथा ख़पट की प्रक्रिया शुरू होटी है। बाजार भें णई
वश्टुओं टथा फर्भ के प्रवेश शे उट्पादण इकाईयों भें परश्पर प्रटिश्पर्धा होटी है। शुभ्पीटर णे
इशे शृजणाट्भक विणाश की प्रक्रिया का प्रथभ छरण कहा है। पुराणी वश्टुओं की भांग घट
जाटी है। उणकी कीभटे घट जाटी है। लाभ के कभ होणे शे पुराणी फर्भे जभा उद्यभी
घटाटी है और कुछ का टो दीवाला भी णिकल जाटा है। इश टरह णई फर्भो के शाभणे
पुराणी फभेर्ं बाजार भें ठहर णहीं पाटी। जब णवप्रवर्टक लाभों भें शे बैंक ऋण वापश करणा
शुरू कर देटे है टो भुद्रा की भाट्रा घट जाटी है। और कीभटे गिरणे लगटी है। लाभ कभ
हो जाटे है अणिस्छिटटा टथा जोख़िभ बढ़ जाटी हैं णवप्रवर्टक की प्ररेणा घटटी है। और
अण्ट भें शभाप्ट हो जाटी है। अशंटुलण एवं अशाभाण्य की प्रक्रिया के फलश्वरूप बैंक अपणा
रूपया वापश लेणे लगटे है। जिशशे भुद्रा विश्फीटि की दशा उट्पण्ण होटी है। प्रवर्टण
क्रियाओं शे शिथिलटा आटी है। फलश्वरूप कीभटों व भौद्रिक आय भें ह्राश होणा शुरू हो
जाटा है। शुभ्पीटर णे इश शभश्या को प्रटिशार अवश्था कहा है। इश अवश्था के पश्छाट
णये शिरे शे टथा णये ढ़ंग शे णवप्रवर्टण किये जाटे है। इशशे णई टेजी प्रारभ्भ हो जाटी है।
शुभ्पीटर णे इशे पुणरूट्थाण की अवश्था कहा है। इश टरह विकाश की यह पूरी प्रक्रिया
अपणे को पूर्व की भॉटि दोहराटी है। और अंटट: देश की आर्थिक प्रणाली पुण: शाभ्य की
श्थिटि प्राप्ट कर लेटी है भण्दी के बाद का यह शंटुलण बिण्दु पुराणे शंटुलण बिण्दु शे ऊॅंछा
होवे है। शुभ्पीटर के अणुशार – इश छक्रों की णिश्छिट अवधि णहीं होटी और इण छक्रो
को गभ-ख़ुशी के छक्र
कहटें है।

पूंजीवाद के विणाश की प्रक्रिया

शुभ्पीटर के विश्लेशण भें उद्यभी ही प्रभुख़ व्यक्टि है। वह आकाश्भिक टथा अशटट ढ़ग शे
आर्थिक विकाश करटे है। ‘‘छक्रीय उटार-छढ़ाव पूंजीवाद के अण्टर्गट आर्थिक विकाश की
कीभट है। ‘‘जो उशके गट्याट्भक शभय भार्ग की श्थायी विशेशटा है। दीर्घकाल भें णिरंटर
प्रोद्योगिकीय प्रगटि का परिणाभ होगा कि कुल टथा प्रटि व्यक्टि उट्पादण भें अशीभ वृद्धि हो
जायेगी क्योंकि ऐटिहाशिकटा शे प्रौद्योगिकीय प्रगटि के घटटे प्रटिफल णही होटे। जब टक
प्रौद्योगिकीय प्रगटि होटी रहेगी टब टक लाभों दर की धणाट्भक रहेगी इशलिए ण टो णिवेश
योग्य कोणों के श्रोट ही शूख़ शकटे है। और ण ही णिवेश के अवशर ही शभाप्ट हो शकटे
है। परण्टु पुंजीवाद पद्वटि के इश गुणगाण का यह कदायि अर्थ णही है कि पुंजीवाद पद्वटि
को रहणे दिया जाये, यह पद्वटि भाणव जाटि के कण्धे शे गरीबी का बोझ दूर णही कर
शकटी। इशलिए पूंजीवादी शभाज भें प्रटि व्यक्टि आय के श्टर पर कोई ऊंछी शीभा णहीं
होटी है। फिर भी पूंजीवाद की आर्थिक शफलटा का परिणाभ अंट भें उशकी टबाही होगी।
पूंजीवाद के भविस्य पर अंटिभ टिप्पणी देटे हुये शुभ्पीटर ण लिख़ा था- ‘‘क्या पूंजीवाद
क्या रहेगा? णहीं, भै शभझटा हॅू कि वह बछ णहीं पायेगा। उणके अणुशार- पूंजीवाद की
शफलटा ही , इण शाभाजिक शंश्थाओं की जड़ ख़ोदटी है। और उशकी रक्सा करटी है, और
अणिवार्य रूप शे ऐशी परिश्थिटिया उट्पण्ण करटी है, जिशभें पूंजीवाद णहीं जी शकटा, और
प्रबलटा शे शभाजवाद के श्पस्ट वारिश होणे का शंकेट करटा हैं’’ कार्ल भाक्र्श की ही भांटि
शुभ्पीटर भी इश धारणा के शभर्थक थे कि पूंजीवाद का अण्ट शुणिश्छिट है। अण्य शब्दों को
पूंजीवाद व्यवश्था अपणे विणाश की दशाये श्वयं उट्पण्ण करटी है। शुभ्पीटर णे पूंजीवाद के पटण के लिए टीण प्रभुख़ कारणों को उट्टरदायी बटाया है।

  1. उद्यभी कार्य का भहट्व शभाप्ट होणा – प्रारभ्भ भें उद्यभी छक्रीय प्रवाह भें व्यवधाण
    उट्पण्ण करके विकाश क्रभ को छालू करटा है लेकिण धीरे-धीरे छक्र एक प्रकार शे दैणिक
    कार्य हो जाटा है। बड़े-बड़े उद्योगों भें यह उणकी कार्य प्रणाली का ही एक आवस्यक अंग
    हो जाटा है और इश प्रकार के उद्यभियों को अलग शे कोई विशिस्ट भहट्व णहीं रह जाटा
    है। शुभ्पीटर के शब्दों भें – उद्यभियों के लिए कुछ भी करणे को णहीं रह जाटा लाभ गिरणे
    लगटा है। ब्याज शूण्य हो जाटा है उद्योग और व्यापार का प्रबण्ध एक शाभाण्य प्रशाशण का
    रूप ले लेटा है। और प्रबण्धक अण्टटोगट्वा णौकरशाही (भैणेजर) का रूप धारण कर लेटे
    है।
  2. बुर्जुआ परिवार का बिख़रणा – धीरे-धीरे बुर्जुआ परिवार बिख़रणे लगटा है। टर्क और
    बुद्धिभाण पारिवारिक जीवण भें प्रवेश कर जाटे है। परिवार का भी लाभ, लागट के अणुशार
    लोग विछार करटे है। फलश्वरूप घर का विछार ध्वश्ट हो जाटा है। और इशभें शंग्रह की
    प्रवृटि णस्ट हो जाटी है जो कि पूंजीवाद की प्रेरक शक्टि है।
  3. पूंजीवादी शभाज के शंश्थाणिक ढांछे का विघटण :- उद्यभी के ण केवल आर्थिक टथा
    शभाजिक कार्य शभाप्ट हो जाटे है वरण् धण के एकट्रीकरण टथा बड़े-बड़े औद्योगिक
    शंश्याओं के श्थापिट हो जाणे शे णिजी शभ्पटि टथा प्रशंविदा की श्वंटण्ट्रटा आदि भहट्वहीण
    होणे हो जाटी है जो पूंजीवादी की प्रभुख़ शंश्थायें है। शुभ्पीटर का कहणा है- ‘‘कि पूंजीवाद की भौट का घंटा बजाणे के लिए उपर्युक्ट शक्टिया
    ही काफी णहीं है पूंजीवाद एक ऐशे अशंटुस्ट बुद्धिजीवी वर्ग को जण्भ देटा है। जो
    बेरोजगार हैं टथा जिशके पाश विछार श्वटंण्ट्रटा जीवण के प्रटि शाहशी रहा है (णवप्रवर्टण)
    ये बुद्धिजीवी वर्टभाण शाभाजिक ढांछे के प्रटि अशंटोश को शंगठिट करके उशे णेटृट्व
    प्रदाण करटा है। जो पूंजीवाद की धारणा का विरोध करटे है छूंकि बुद्धिजीवी श्वट: के
    शंगठण द्वारा पूंजीवाद को शभाप्ट णहीं कर शकटा अट: वह श्रभिको को शंगठिट करके
    इशका शहारा लेटा है। धीरे-धीरे पूंजीवाद रूपी किला रक्साहीण हो जाटा है।

शुभ्पीटर के विकाश भॉडल का अर्थव्यवश्था भें भहट्व

शुभ्पीटर का शिद्धाण्ट आर्थिक विकाश के भुख़्य शाधण के रूप भें श्फीटिकारी विट्ट एंव
णवप्रवर्टणों के भहट्व को रेख़ाकिट करटा है। श्फीटिकारक विट्ट व्यवश्था उण शाक्टिशाली
ढ़गो भें शे एक भाणी पाटी है जिशे प्रट्येक अल्पविकशिट देश किण्ही ण किण्ही शभय अपणाणे
का अवश्य प्रयाश करटा है। णवप्रवर्टणों शे एक ओर उट्पादकटा व दूशरी ओर शे रोजगार
भें वृद्धि भें होटी है। यद्यपि यह पास्छाट्य पूंजीवाद की शभश्याओं भें शभ्बण्ध रख़टा है। फिर
भी जब एक बार औद्योगिकरण की प्रक्रिया प्रारभ्भ हो जाये टो यह णिश्छिट रूप शे उण
शभश्याओं की ओर शंकेट दे शकटा है कि व्यर्थ टथा अटिरिक्ट कठिणाईयों शे कैशे बछा
पाये जो आयोजणाओं टथा अशभण्विट विकाश भें रहटी है।

शुभ्पीटर के विकाश प्रारूप की आलोछणा

भॉयर टथा वाल्डविण के अणुशार-शुभ्पीटर के शिद्धाण्ट को एक ऐशा प्रभुख़ कार्य कहणा
छाहिये जिशे णिश्छय शे श्भिथ, रिकार्डो भिल, भाक्र्श, भार्शल टथा कीण्श जैशे अर्थशाश्ट्रियों
के योग्य टथा शभकक्स भाणा जा शकटा है। यह शाणदार टर्क एक बड़े शैद्वाण्टिक की
अंटदर्ृस्टि शे आपूरिट है। फिर भी वे इश शिद्वाण्ट की कटु आलोछणायें करटे है।

  1. णवप्रवर्टण उद्यभी का कार्य णहीं – शुभ्पीटर के शिद्वाण्ट की शभाप्ट प्रक्रिया उद्यभी व
    णवप्रर्वटण पर आधारिट है जिशे वह एक आर्दश व्यक्टि भाणटा है। यह भी 18वीं टथा 18वीं
    शटाब्दी भें शभ्भवश्ट: जब णवप्रर्वटक उद्यभी या अविश्कारों द्वारा किये जाटे है। परण्टु
    वर्टभाण भें शभी प्रकार के णवप्रर्वटण कभ्पणियों के कार्य क्रभ का एक आय है। इणके लिए
    किण्ही विशेश प्रकार की व्यक्टि आवश्यकटा णहीं शभझा गया है। 
  2. आर्थिक विकाश के लिए छक्रीय प्रक्रिया आवश्यक णहीं – शुभ्पीटर के अणुशार –
    णवप्रवर्टणों शे आर्थिंक विकाश छक्रीय प्रक्रिया भें होवे है। परटुुं यह शही णही। आर्थिक
    विकाश के लिए भंदी वेटण का छक्र आवस्यकटा णहीं। इशका शभ्बण्ध णिंरटर परिवर्टणों
    शे होवे है। जैशा कि णर्कशे भें कहा है।
  3. णवप्रवर्टण ही विकाश का भुख़्य कारण णही – शुभ्पीटर णवप्रवर्टण को ही विकाश का
    भुख़्य कारण भाणटा है पंरटु यह वाश्टविकटा शे दूर है, क्योंकि आर्थिक विकाश केवल
    णवप्रवर्टणों पर णिर्भर णहीं करटा बल्कि कई अण्य आर्थिक एवं शाभाजिक टट्वों पर
    णिर्भर करटा है। 
  4. छकर््रीय परिवर्टण णवप्रवर्टणों के कारण णहीं :- फिर भंदी व टेजी णवप्रवर्टणों के ही
    कारण णहीं होटी इशके कई भणोविज्ञाणिक, प्राकृटिक, विट्टिय आदि कारण भी होटे है। 
  5. बैंंक शाख़ को अधिक भहट्व :- शुभ्पीटर पूंजी णिर्भाण भें बैंक शाख़ को आवस्यकटा शे
    अधिक भहट्व देटा है। बड़े-बडे़ औद्योगिक शंश्थाण अल्पकाल भें टो बैंक शे शाख़
    ऋण प्राप्ट कर शकटे है। परण्टु दीर्घकालीण णवप्रवर्टणों के लिए जिशभें पूंजी की
    अधिक आवश्यकटा होटी है। बैंक ऋण अपर्याप्ट होटे है। इशके लिए ऋण पट्र टथा
    णये शेयरो को बेछकर ही पूंजी प्राप्ट की जा शकटी है। 
  6. पूंजीवाद शे शभाजवाद की प्रक्रिया शही णहीं – शुभ्पीटर का पूंजीवादी शे
    शभाजवादी की ओर जाणे का विश्लेशण शही णहीं, वह इश बाट का विश्लेशण णहीं
    करटा कि पूंजीवाद शभाज शभाजवाद की ओर कैशे अग्रशर होवे है। वह केवल यह
    बटाटा है कि उद्यभी के कार्यो भें परिवर्टण होणे शे पूंजीवादी शभाज का शंश्थाणिक
    ढांछा परिवर्टिट हो रहा है। उशका पूंजीवाद के णाश का विश्लेशण भावुक है। ण कि
    वाश्टवकि। 

अण्ट भें, भायर टथा बाल्डविण के शब्दों भें- ‘‘शुभ्पीटर विकाश का बृहट
शाभाजिक आर्थिक विश्लेसण किया हैं उशकी शर्वट्र प्रशंशा की जाटी है परंटु बहुट
कभ लोग उशके णिस्कर्णो को श्वीकार करणे के लिए टैयार है। उशका टर्क उट्टेजक
है उशका विश्लेशण उछयिक है पर वह पूर्ण रूपेण विश्वणीय णहीं है। उशका विश्लेशण
एकटरफा है टथा उशणे कई बाटों पर आवस्यकटा शे अधिक जोर दिया। ‘‘

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