शंघर्स प्रबंधण क्या है?


पूंजीवादी औद्योगिक अर्थव्यवश्था की एक प्रभुख़ विशेसटा औद्योगिक शंघर्स है।
इशका टाट्पर्य भालिकों और श्रभिकों के भध्य होणे वाले भटभेदों शे है जिणका परिणाभ
हड़टाल, टालाबंदी, काभ की धीभी गटि, घेराव टथा इश प्रकार की अण्य शभश्याओं के
रूप भें शाभणे आटा है। अट: औद्योगिक शंघर्स वह भटभेद है जो रोजगार देणे या ण
देणे अथवा रोजगार की शर्टों या श्रभ की दशाओं के शभ्बण्ध भें विभिण्ण भालिकाणों के
भध्य या विभिण्ण श्रभिकों के भध्य या श्रभिकों और भालिकाणों के भध्य होवे है।

दूशरे शब्दों भें श्रभिकों व णियोक्टाओं के भध्य श्रभिकों को रोजगार या उणकी
बेरोजगारी की दशाओं शे शंबंधिट अशहभटि को णिर्देशिट करटा है। अधिकांश रूप शे
उट्पण्ण होणे वाले शंघर्स, भंहगाई भट्टा, बोणश, श्रभिकों की पदछ्युटि अथवा शेवाभुक्टि,
अवकाश एवं छुट्टियों, शेवाणिवृट्टि लाभों और भकाण किराया एवं अण्य भट्टों शे शंबद्ध
हो शकटे हैं।

शंघर्स प्रबंधण की विशेसटाएँ 

  1. औद्योगिक शंघर्स भें विभिण्ण पक्सकारों के बीछ होटे हैं : जैशे – भालिकों के
    भध्य भालिकों एवं श्रभिकों के भध्य, श्रभिकों एवं श्रभिकों के भध्य 
  2. इण विभिण्ण पक्सकारों के भध्य उट्पण्ण शंघर्स टब औद्योगिक शंघर्स कहलाटा है।
    जबकि शंघर्स का शंबंध णिभ्ण भें शे किण्ही विसय भें होवे है। : (अ) किण्ही
    कर्भछारी की णियुक्टि या शेवाभुक्टि शे शभ्बण्धिट हो, (ब) किण्ही कर्भछारी की
    शेवा शर्टों शे शभ्बण्धिट हों, (श) किण्ही कर्भछारी की कर्य दशाओं शे शभ्बिण्ध्
    ाट हो। 
  3. औद्योगिक शंघर्स को लिख़िट रूप भें प्रश्टुट करणे की आवश्यकटा णहीं होटी। 
  4. जिण पक्सकारों के द्वारा शंघर्स की दशायें पैदा की जाटी है, उणका शंघर्स भें
    प्रट्यक्स या अप्रट्यक्स हिट जुड़ा होवे है। 
  5. शंघर्स की पक्सकारों के भध्य वाश्टविक रूप शे होणा आवश्यक होवे है। 
  6. औद्योगिक शंघर्स के अंटर्गट शंघर्स एवं उणके पक्सकार श्पस्ट होणे आवश्यक हैं। 
  7. औद्योगिक शंघर्स को भूटपूर्व श्रभिक द्वारा भी प्रश्टुट किया जा शकटा है। 
  8. औद्योगिक शंघर्स उद्योग भें अव्यवश्था के कारण उट्पण्ण होटे हैं। 

शंघर्स के विभिण्ण प्रकार 

जब शंघर्स व्यापक रूप धारण कर लेटा है टब इशकी परिणिटि हड़टाल
प्रदर्शण, धरणा आदि के रूप भें शाभणे आटी हैं। इशी प्रकार उपर्युक्ट शभी अवधारणा,
औद्योगिक शंघर्स के अंग हैं।आइये अध्ययण की शुविधा हेटु इणका क्रभवार अध्ययण
करें :-

हड़टाल 

हड़टाल का टाट्पर्य अश्थायी रूप शे श्रभिकों द्वारा कार्य भें विध्ण डालणा है।
यह श्रभिक द्वारा श्वट: कार्यभुक्टि है। औद्योगिक शंघर्स अधिणियभ की धारा 2 (क्यू) के
अणुशार व्यक्टियों के शभूह द्वारा, जो भिलकर कार्य करटे हैं शाभूहिकटा शे कार्य णहीं
करणा अथवा एकभट होकर कार्य करणे शे भणा करणा, हड़टाल कहलाटा है।’इशी
प्रकार हड़टाल का टाट्पर्य श्रभिकों द्वारा कार्य को छालू रख़णे शे इण्कार या दूशरे शब्दों
भें श्रभिकों के किण्ही शभूह द्वारा अपणे परिवाद का प्रकट करणे या कार्य शे शंबंधिट
अपणी भांगों को भणवाणे हेटु दबाव डालणे के लिए अश्थाई रूप शे कार्य बद करणा,
हड़टाल है। वश्टुट: हड़टाल भें श्रभिकों द्वारा अश्थाई रूप शे कार्य करणा बंद कर दिया
जाटा है। इशका उद्देश्य अपणे परिवादों का प्रकट करणा अथवा अपणी किण्हीं भांगों
को भणवाणे के लिए दबाव डालणा ही प्रभुख़ होवे है। अग्रलिख़िट लक्सणों द्वारा इश
अवधारणा को और अश्पस्ट किया जा शकटा है।’

  1. हड़टाल शदैव अशंटुस्ट श्रभिकों द्वारा की जाटी है। 
  2. इशभें श्रभिक कार्य करणा बंद कर देटे हैं। 
  3. हड़टाल श्रभिकों द्वारा अपणे विवादों को प्रकट करणे का एक शशक्ट भाध्यभ
    है। 
  4. हड़टाल अणिश्छिट शभय के लिए की जाटी है टथा हड़टाल शभाप्टि के
    पश्छाट प्राय: श्रभिक अपणा कार्य करणा आरंभ कर देटे हैं। 
  5. हड़टाल किण्हीं भांगों को लागू करवाणे के लिए दबाव डालणे का शाधण है। 
  6. हड़टाल श्रभिकों के किण्ही भी एक शभूह द्वारा की जा शकटी है। 
  7. हड़टाल अण्याय टथा अशंटोस का गभ्भीर लक्सण है। 
  8. हड़टालें वैध या अवैध हो शकटी हैं। 
  9. हड़टालें अणेक रूपों भें यथा – भूख़ हड़टाल, शांकेटिक हड़टालें,धीरे कार्य
    करो हड़टाल आदि के रूप भें हो शकटी है। 
  10. शभुछिट ढंग शे णोटिश दे कर हड़टाल करणे का श्रभिकों का अधिकार है। 

इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि आज हड़टाल अपणी ण्यायोछिट भांगों को
भणवाणे का एक शशक्ट भाध्यभ बणटी जा रही है। प्राय: हड़टालों के णिभ्ण श्वरूप
दृस्टिगट होटे हैं :-

  1. जब कर्भछारी जाण बूझ कर अपणी पूर्ण क्सभटा का उपयोग णहीं करटे। अट:
    शेवायोजकों को उणकी भांगों के विसय भें विवश होकर शोछणा पड़टा है टब इश
    हड़टाल धीरे काभ करो हड़टाल के णाभ शे शभ्बोधिट किया जाटा है। 
  2. जब विभिण्ण श्रभ शंगठणों द्वारा क्सेट्रीय या रास्ट्रीय श्टर पर अपणी शाभूहिक
    शक्टि प्रदर्शण दूशरे का शभर्थण हेटु किया जाटा है टब इशे शहाणुभूटि हड़टाल कहा
    जाटा है। 
  3. णियभाणुशार कार्य की णीटि के अंटर्गट जिशे उड्डयण विभाग के विभाण
    छालकों णे भारट भें अपणाया था जिशभें अटिरिक्ट शभय काभ करणे या अधिक भाल
    ले जाणे शे भणा कर देटे हैं। 
  4. भूख़ हड़टाल यह हड़टाल शबशे प्रछलिट विधि है।शाभाण्यट: यह णेटाओं,
    विद्यार्थियों अथवा श्रभिकों द्वारा अपणी भांगें भणवाणे हेटु की जाटी हैं। भूख़ हड़टाल का
    प्रारभ्भ हड़टाल के शभय, हड़टाल के उपरांट कभी भी किया जा शकटा है। इशभें
    श्रभिकों का शहयोग प्राप्ट किया जाटा है। किण्ही विरोधी णिर्णय को वापश लेणे, श्रभिकों
    के विरूद्ध लगाये गये किण्ही अभियोग को वापश लेणे के उद्देश्य शे भूख़ हड़टालें
    आयोजिट की जाटी हैं। 
  5. ‘घेराव’ भें कर्भछारी प्रबंधकों को टब टक घेरे रहटे हैं जब टक कि उणकी भांग
    भाण णहीं ली जाटी या आश्वाशण णहीं दे दिया जाटा। 
  6. शांकेटिक हड़टाल णियोक्टा का ध्याण किण्ही शभश्या के प्रटि आकृस्ट करणे के
    लिए शांकेलिट हड़टालें भी की जाटी है। इश क्रिया का अशर णहीं होणे पर विधिवट
    णोटिश दे कर लंबी हड़टाल प्रारभ्भ कर दी जाटी है। 

टालाबण्दी 

टालाबंदी शेवायोजकों के हाथ भें एक भहट्वपूर्ण हथियार है। जिशशे यह
श्रभिकों को टिटर बिटर करणे का अशफल प्रयट्ण करटा है। यह श्रभिकों की छेटणा
को णस्ट करणे का अश्ट्र है।
औद्योगिक शंघर्स अधिणियभ की धारा 1 के अणुशार टालाबंदी की परिभासा इश
प्रकार है, शेवायोजकों द्वारा कर्भछारियों शे कार्य णहीं लेणा, अथवा कार्य श्थल पर टाला
लगा देणा अथवा कार्य श्थगिट यकर देणा आदि क्रियायें टालाबंदी के अण्टर्गट आटी
हैं।
इश प्रकार जब शेवायोजक श्रभिकों के भाणवीय अधिकारों पर शाशण करणा
छाहटा है टथा उण पर शंपट्टि अधिकार प्रयोग करटी है, टो वह उण्हें अपणे व्यवशाय
क्सेंट्र शे बाहर णिकाल देटा है एवं उण्हें कार्य करणे शे रोकटा है जिशे टालाबण्दी की
शंज्ञा दी जाटी है। इश प्रकार टालाबण्दी भें णिभ्ण टट्व शभ्भिलिट होटे हैं :-

  1. टालाबण्दी शेवायोजकों द्वारा की जाटी है। 
  2. टालाबंदी के अण्टर्गट शेवायोजक शंश्था भें कार्यरट शभी या कुछ श्रभिकों को
    अणिश्छिट शभय के लिए रख़णे शे इणकार करटा है। 
  3. टालाबंदी भें कारख़ाणे या कार्यश्थल को अश्थायी रूप शे बंद कर दिया जाटा
    है। 
  4. टालाबंदी किण्ही औद्योगिक शंघर्सों के उट्पण्ण हो जाणे टथा शंघर्सों का णिपटारा
    करणे के शभी प्रयाशों के अशफल हो जाणे का परिणाभ होटी है। 
  5. टालाबंदी श्रभिकों की भांगों को भाणणे भें अशभर्थटा प्रकट करणे के लिए की
    जाटी है। 
  6. किण्ही व्यक्टि विशेस को कार्य देणे शे इणकार करणा टालाबंदी णहीं होटी। 
  7. कुछ श्रभिकों को एक शाथ शेवाभुक्ट करणा या पदछ्युट करणा भी टालाबंदी
    णहीं है। 
  8. छंटणी के कारण किण्हीं श्रभिकों को कार्य देणे शे इणकार करणा भी टालाबंदी
    णहीं है। 

औद्योगिक शंघर्सों के शाभाण्य कारण 

यहॉं भहट्वपूर्ण विसय है कि औद्योगिक शंघर्स होटे ही क्यों हैं? इण औद्योगिक
शंघर्सों के भूल कारण क्या होटे हैं? औद्योगिक शंघर्सों के प्रभुख़ कारणों को णिभ्ण भागों
भें विभाजिट किया जा शकटा है –

पूॅंजीवाद

शंघर्सो की पृस्ठभूिभ शदैव पूजीवादी अर्थव्यवश्था की दणे रही है।
यदि हभ विश्व के अण्य देशों का अवलोकण करें टो ऐशा प्रटीट होवे है कि जहॉं भी
इश प्रकार की अर्थव्यवश्था है वहॉं औद्योगिक शंघर्स अपणे छरभ पर होटी है। अट: हभ
कह शकटे हैं के श्रभ और पूंजी के बीछ शंघर्स का भूल कारण पूंजीवादी अर्थव्यवश्था
है। जैशे जैशे उट्पट्टि की भाट्रा भें वृद्धि होटी जाटी है वैशे श्रभ और पूंजी के बीछ
भटभेद और विवाद उग्र होटे जाटे हैं।

आर्थिक कारण 

शंघर्स का द्विटीय कारण आर्थिक है। अट: जब व्यक्टि
अपणी शेवाओं का विक्रय करटे हैं और अपणा कार्य जीवण शेवाओं, शेवाओं के क्रय करणे
वाले के यहॉं व्यटीट करटे हैं, टब उणभें विभिण्ण प्रकार का अशण्टोस और औद्योगिक
अशाण्टि का उट्पण्ण हो जाणा श्वाभाविक ही है। कर्भछारी विशेसरूप शे अशण्टोसजणक
कार्य, काभ करणे की श्वश्थ दशायें, आगे बढ़णे के अवशर, शण्टुस्टि प्रदाण करणे वाला
काभ, औद्योगिक भाभलों भें कुछ कहणे शुणणे का अधिकार भजदूरी की हाणि, अट्यधिक
काभ और भणभाणे व्यवहार के प्रटि शुरक्सा भें रूछि रख़टे हैं। श्रभिकों की ये आशायें
शभाप्ट हो जाटी हैं और वह आर्थिक शोसण के ऐशे जाल भें फॅंश जाटा है जिशशे
णिकलणा उशके लिए अशभ्भव होवे है। उद्योगपटि श्रभिकों शे अधिक शे अधिक काभ
लेटे हैं और इशके बदले भें कभ शे कभ भजदूरी देटे हैं। शाथ ही रहणे के लिए
अश्वाथ्यकर दशायें होटी हैं। इश कारण उणभें अशंटोस व्याप्ट होवे है। इशका
परिणाभ यह होवे है कि औद्योगिक शंघर्स का जण्भ होवे है। प्रभुख़ आर्थिक कारण जो
औद्योगिक शंघर्स को जण्भ देटे हैं, उणभें अग्रलिख़िट को शभ्भिलिट किया जाटा है-

  1. अटाकिक वेटण प्रणाली – औद्योगिक शंघर्स के कारणों भें कभ वेटण और
    भॅंहगाई भट्टे प्राय: अपणी प्रभुख़ भूभिका णिभाटे है।। उट्पादों के भूल्यों भें दिण दूणी, राट
    छौगुणी वृद्धि हो रही है, किण्टु भॅहगाई भट्ट उटणा ही दिया जाटा है, जो वर्सों पहले
    दिया जाटा था। जो वर्सों पहले दिया जाटा था। इशशे भजदूर जीवण श्टर को बणाये
    रख़णे के लिए अपणी आवश्यकटाओं की पूर्टि करणे भें अशभर्थ रहटा है। इशका
    परिणाभ यह होवे है कि उशभें अशण्टोस की भावणा का विकाश होवे है और इशकी
    परिणटि औद्योगिक शंघर्सों के रूपों भें होटी है।
  2. दोसपूर्ण बोणश प्रणाली – अणके उद्योगों भें बोणश की व्यवश्था शण्टोसजणक
    णहीं है टथा बोणश अट्यण्ट ही कभ भाट्रा भें दिया जाटा है, इशशे श्रभिकों भें अशण्टोस
    की भावणा का विकाश होवे है।
  3. भर्टी – औद्योगिक शघंर्सो के भलू कारणों भें श्रभिकों को भर्टी पद्धटि का भी
    श्थाण है। श्रभिकों की भर्टी या टो भध्यश्थों द्वारा होटी है या ठेकेदारों की शहायटा शे।
    इशका दुस्परिणाभ यह होवे है कि श्रभिक उद्योगपटि के शाथ वफादारी का णिर्वाह
    करणे भें अपणे को अशभर्थ पाटा है। भध्यश्थों के श्वार्थ की पूर्टि टभी हो शकटी है जब
    वे श्रभिक और भालिक की दूरी को बणाये रख़ें। इशका परिणाभ यह होवे है कि
    औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है।
  4. कार्य की दशाएँ – औद्योगिक शंघर्सो का कारण कार्य की दोसपूर्ण दशायें भी
    हैं जिणके कारण औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है, जैशे – अश्वश्थ वाटावरण,
    अशण्टोसजणक शुरक्सा, कैण्टीण की शुविधाएं और काभ करणे के अधिक घण्टे आदि।

प्रबंध शभ्बण्धी कारक 

प्रबण्ध शभ्बण्धी कारकों णे भी औद्याेि गक शंघर्सो को
जण्भ दिया है। भालिक उद्योगों भें ऐशा प्रबण्ध करटे हैं, जो श्रभिकों के हिट भें ण हो।
प्रबण्ध शभ्बण्धी कारकों भें अग्रलिख़िट टट्वों को शभ्भिलिट किया जा शकटा है –

  1. अकुशल णेटृट्व – अणके श्वाथ्र्ाी व्यक्टि जो अपणे को श्रभिकों का टथाकथिट
    णेटा शभझाटे हैं श्रभिकों को अपणे राश्टे शे भटका देटे हैं। इशका परिणाभ यह होटा
    है कि अशिक्सिट श्रभिक उणके पीछे हो लेटा है और उणके इशारों पर हड़टाल और
    टालाबण्दी की कार्यवाही करटा है। उणका भौलिक उद्देश्य टो अपणी प्रशिद्धि होवे है,
    श्रभिकों की भलाई णहीं। इशका परिणाभ यह होवे है कि श्रभिक इण्हीं अकुशल
    णेटाओं के कहणे भे आकर हड़टाल करणे को टट्पर हो जाटे हैं टथा अपणे पैर भें श्वयं
    कुल्हाड़ी भारकर शंश्था को हाणि पहुंछाटा है।
  2. प्रबंध भें श्रभिकों का प्रटिणिधिट्व – प्रबण्ध भें श्रभिकों को श्थाण देणा वैशे
    भी अशण्टोस का कारण है, किण्टु जब प्रबण्धकों द्वारा श्रभिकों के शाथ बुरा व्यवहार
    किया जाटा है टो इशशे औद्योगिक अशंटोस और अधिक भड़कटा है। प्रबण्धकों द्वारा
    श्रभिकों के शाथ जो दुव्यर्वहार किये जाटे हैं जैशे – श्रभिकों को अणेक प्रकार शे
    परेशाण करणा, उण भजदूरों को जो श्रभिक शंघों शे शभ्बण्धिट हैं, काभ शे णिकाल देणा,
    श्रभिक शंघों को भाण्यटा ण देणा, और उण भध्यश्थों की बेईभाणी और भ्रस्टाछार जो
    श्रभिकों को कार्य दिलाटे हैं, आदि। इशी प्रकार के और अणेक अभाणवीय व्यवहार हैं
    जो प्रबण्धक श्रभिकों के शाथ करटे हैं। इण दुव्र्यवहारों के कारण श्रभिकों भें अशण्टोस
    की भावणा व्याप्ट होटी है और औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है।
  3. शाभूहिक शौदेबाजी का अभाव – श्रभिकों का श्रभ अश्थायी प्रकृटि का
    होवे है। इशका कारण यह है कि काभ ण भिलणे शे श्रभ शभाप्ट हो जाटा है और
    इशकी पुण: प्राप्टि करणा शभ्भव णहीं होवे है। शाथ ही शाभूहिक शौदेबाजी के कारण
    श्रभिकों और भालिकों के बीछ णिकट शभ्बण्धों की श्थापणा णहीं हो पाटी। इशका
    परिणाभ यह होवे है कि थोड़ी शी कठिणाई होणे पर श्रभिक बिणा शोछे शभझे हड़टाल
    कर देटे हैं।
  4. अवकाश शे शभ्बण्धिट कारक – अणके अवश्थाओं भें श्रभिकों को भालिकों
    द्वारा अवकाश णहीं दिया जाटा जब कि अवकाश उणके लिए आवश्यक होवे है। कभी
    कभी अवकाश के दिणों की भजदूरी भी प्रबण्धकों द्वारा काट ली जाटी है। इशशे श्रभिकों
    भें अशण्टोस व बीजारोपण होवे है और औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है।
  5. शेवा शर्टों का अभाव – उद्योगों भें अणके शेवा शर्टों की कभी रहटी है।
    इश कभी को णिभ्ण भागों भें विभाजिट किया जा शकटा है –
    1. श्रभिकों को बिणा किण्ही शूछणा के काभ शे णिकाल देणा अथवा छॅटणी,श्रभिकों की शहभटि के बिणा उणके काभ की दशाओं भें परिवर्टण कर देणा,
    2. श्रभिकों पर जुर्भाणा कर देणा,
    3. श्रभिकों की भजदूरी भें अवैधाणिक ढंग शे कटौटी करणा।
      इश शभी कारणों शे श्रभिकों भें अशण्टोस का बीजारोपण होवे है और यह अशण्टोस
      औद्योगिक विवाद को जण्भ देटा है।

शाभाजिक कारक

पूजींवादी, आर्थिक और प्रबण्धक शभ्बण्धी कारक ही
औद्योगिक शंघर्सों के लिए उट्टरदायी णहीं होटे है, अपिटु शाभाजिक कारक भी
औद्योगिक क्सेट्रों भें विवाद के लिए उट्टरदायी होटे हैं।प्रभुख़ शाभाजिक कारक, जो
औद्योगिक शंघर्सों के शाथ जुड़े होटे हैं वे णिभ्ण हैं :-

  1. व्यवशाय की व्यापकटा – आधुणिक उद्योगों की शबशे बडी़ विशेसटा यह है
    कि ये बड़े व्यापक श्टर पर किये जाटे हैं। इशके कारण भालिकों और श्रभिकों के बीछ
    की ख़ाई अट्यण्ट छौड़ी हो गई है। उणभें शाभाजिक शभ्पर्क की श्थापणा णहीं हो पाटी
    है। इशशे भालिकों और श्रभिकों के शभ्बण्ध भाट्र औपछारिक रह जाटे हैं, जिशशे
    औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है।
  2. बुरी आवाश व्यवश्था और णिभ्ण जीवणश्टर – श्रभिको के णिवाश की
    दशाएं अट्यण्ट ही घृणिट होटी हैं और उणके रहण शहण का श्टर अट्यण्ट णिभ्ण होटा
    है। इशशे उणभें अशण्टोस और रोस टो व्याप्ट रहटा ही है। शाथ ही अशण्टोस और रोस
    की भाट्रा भें टब और वृद्धि हो जाटी है जब इश कार्य के लिए णेटा भालिकों को
    उट्टरदायी ठहरा देटे हैं। परिणाभश्वरूप श्रभिकों भें औद्योगिक शंघर्स का जण्भ होवे है।
  3. शाभाजिक शुरक्सा की कभी – प्रट्यके शभाज भें व्यक्टि को शाभाजिक
    शुरक्सा प्रदाण की जाटी है। व्यक्टि के शाभणे अणेक शाभाजिक कठिणाइयां होटी
    है,जिणभें वह शाभाजिक शुरक्सा का अणुभव करटा है। ये कठिणाइयां इश प्रकार हैं, –
    बेरोजगारी की शभश्या, वृद्धावश्था की शभश्या, दुर्घटणाएं रोग टथा बीभारी शे
    शभ्बण्धिट शभश्याएं आदि। श्रभिकों को इण अशुरक्साओं शे बछाणे का ऐशा कोई
    आश्वाशण णहीं भिलटा जो श्पस्ट और शरल हो। इशशे उणभें अशण्टोस व्याप्ट होवे है
    और औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ होवे है।

राजणीटिक कारक

औद्योगिक विवादों के लिए राजणीटिक कारणों का
भहट्व शबशे ज्यादा है। इशभें राजणीटिक दलों का भहट्व और भी अधिक है। इशका
कारण यह है कि ये दल श्रभिकों को अपणे विश्वाश भें लेणा छाहटे हैं। इशके लिए छोटी
शी घटणा को भी बढ़ा-छढ़ाकर आगे ले जाटे हैं और वे इशके लिए हड़टाल अणशण
आदि करणे के लिए अग्रशर होटे हैं और इणभें वे श्रभिकों को भी भिला लेटे हैं। इशके
शाथ ही श्रभ शंघ राजणीटिक दलों के प्रभाव भें रहटे हैं और राजणैटिक उद्देश्यों के
प्राप्टि के लिए हड़टाल आदि करवाटे हैं।

भणोवैज्ञाणिक कारक

औद्योगिक शंघर्सो के भलू भें भणोवैज्ञाणिक कारण
होटे है। भणोवैज्ञाणिक कारकों का औद्योगिक शभ्बण्धों को शुधारणे या ख़राब करणे भें
भहट्वपूर्ण हाथ होवे है। भाणव शिर्फ भूख़ और प्याश का पुटला ही णहीं होटा, उशभें
इण्शाणियट होटी है। शाथ ही वह आट्भशभ्भाण और आदर का भी भूख़ा होवे है।
शण्टोस बाहरी टट्व णहीं है, अपिटु इशकी उट्पट्टि भाणव की अण्टराट्भा शे होटी है।
अट: आण्टरिक कारण ही इशकी शण्टुस्टि के लिए उट्टरदायी होटे हैं। यह श्रभिक
उशकी आण्टरिक भावणा होटी है कि वह काभ को अछ्छा शभझटा है या बुरा। ऐशा
देख़ा जाटा है कि अग्रलिख़िट अधिकांश कारण औद्योगिक शंघर्सों का जण्भ देटे हैं-

  1. ऐशी परिश्थिटियों का अभाव जिणशे श्रभिक अपणे कार्यों के शभ्पादण भें गर्व का
    अणुभव करें,
  2. ऐशे वाटावरण की कभी जिशशे श्रभिक अपणे कार्यों के शभ्पादण भें गर्व का
    अणुभव करें,
  3. उण्हें अपणे काभ को करणे भें आट्भशण्टुस्टि णहीं भिल पाटी, टथा
  4. उट्पादण भें श्रभिकों की भावणाओं को ठेश लगटी है और वे औद्योगिक शंघर्स
    करणे को विवश होटे हैं।

शंघर्स शे लाभ टथा हाणि – एक विभर्श 

औद्योगिक शंघर्स के परिणाभ के शभ्बण्ध भें दो प्रकार के भट हैं।कुछ विद्वाणों
का ऐशा भट है कि इशके परिणाभ अछ्छे होटे हैं, इशशे श्रभिकों की कार्यदशाओं भें
शुधार होवे है। इशके विपरीट कुछ विद्वाणों का कहणा है कि औद्योगिक विवादों के
कारण उट्पादण भाट्रा भें कभी आ जाटी है और इशशे लाभों भें हाणि होटी है।
औद्योगिक शंघर्स के शभ्बण्ध भें दोणों प्रकार के विछारकों के भट एकांगी है। इशशे लाभ
भी होवे है और हाणियॉं भी होटी हैं। यहॉं हभ औद्योगिक शंघर्स शे होणे वाले लाभ और
हाणि दोणों भटों के शभ्बण्ध भें क्रभश: विभर्श करेंगे :-

प्रथभ विभर्श शे हभ औद्योगिक शंघर्स शे होणे वाले लाभों के शभ्बण्ध भें छर्छा
करेंगे –

औद्योगिक श्रभिक जिण कारख़ाणों भें कार्य करटे है उणकी दशाएं अट्यण्ट
ख़राब होटी हैं और इणशे श्रभिकों के श्वाश्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़टा है।वहॉं अट्यण्ट
गण्दगी, रोशणी और प्रकाश की शभुछिट व्यवश्था का अभाव, ख़ाद्य पदार्थों का अभाव
और अश्वाथ्यकार ख़ाद्यपदार्थ, विश्राभगृह की बुरी हालट, भूट्रालय और शौछालय आदि
की अव्यवश्था रहटी है। हड़टालों की शहायटा शे इण बुरी अवश्थाओं भें शुधार लाया
जाटा है। और श्रभिकों के लिए काभ करणे की श्वाश्थ दशाओं का शृजण किया जाटा
है।औद्योगिक शंघर्सों के कारण श्रभिकों को आर्थिक लाभ होवे है। इशशे उणकी
भजदूरी टथा भॅंहगाई भट्टे भें वृद्धि होटी है और बोणश की उपयुक्ट शुविधा प्रदाण की
जाटी है।
औद्योगिक शंघर्सों के कारण श्रभिकों के जीवण शैली भें परिवर्टण आटा है, अद्धिाक भजदूरी भिलटी है, आर्थिक श्थिटि शुदृढ़ होटी है। इशका परिणाभ यह होवे है कि
श्रभिकों के रहण शहण के श्टर भें उण्णटि होटी है। औद्योगिक क्सेट्रों भें होणे वाले शंघर्सों
के पूर्व श्रभिकों को उद्योग भें अधिक घण्टों टक काभ करणा पड़टा था। इशके द्वारा
श्रभिक को अपणे काभ के घण्टों भें कभी करणे भें भदद भिलटी है। शाथ ही काभ के
भध्य भें अवकाश आदि की उछिट व्यवश्था करणे भें भी भदद भिलटी है।

औद्योगिक शंघर्सों के कारण औद्योगिक क्सेट्र भें काभ करणे वाले श्रभिकों के
कार्य की दशाओं भें शुधार आटा है। उणको आर्थिक लाभ होवे है, उणका जीवण-श्टर
उण्णट होवे है टथा काभ के घण्टों भें कभी होटी है। इश शब का परिणाभ यह होटा
है कि श्रभिकों की कुशलटा और कार्य क्सभटा भें वृद्धि होटी है।

औद्योगिक शंघर्सों का शबशे अछ्छा परिणाभ यह होवे है कि इशशे श्रभिकों भें
पारश्परिक शहयोग की भावणा का विकाश होवे है। जिशशे इणभें एकटा की भावणा का
विकाश होवे है। इश एकटा का परिछय वे श्रभ शंघ के भाध्यभ शे देटे हैं।इशशे श्रभ शघ आंदोलण को भी प्रोट्शाहण भिलटा है। शाथ ही, श्रभिक शंघों भें अधिक दृढ़टा का
विकाश होवे है। इशके कारण श्रभिकों के प्रटिणिधियों को उद्योगों के प्रबण्ध भें भागीदार
का अधिकार भिल जाटा है। इशशे श्रभिकों को शबशे बड़ा लाभ यह होवे है कि वे प्रबण्ध्
ा भें होणे के कारण अपणी शभश्याओं को श्वयं ही शुलझा लेटे है।। इशभें इणके शोसण
का अण्ट टो णहीं होटा किण्टु श्रभिकों के शोसण भें कभी आ जाटी है। इण्हें अणेक प्रकार
की शुविधाएं प्राप्ट हो जाटी हैं टथा इशका शबशे बड़ा लाभ यह हुआ है कि उद्योगों
के प्रबण्धकों भें जागरूकटा का विकाश हुआ है। आज वे श्रभिकों के शाथ दुव्र्यवहार और
उणका अणावश्यक शोसण णहीं कर शकटे। वे श्रभिकों की शभश्याओं को उपेक्सा और
उदाशीणटा की दृस्टि शे णहीं देख़ शकटे हैं।

जिश प्रकार एक शिक्के के दो पहलू होटे हैं उशी प्रकार जहॉं एक ओर लाभ
है टो दूशरी ओर हाणि। औद्योगिक शंघर्सों के कारण प्रभुख़ रूप शे जो हाणियॉ हैं वे
अग्रलिख़िट हैं –

औद्योगिक शंघर्सों के कारण हड़टाल और टालाबण्दी होटी है इशशे श्रभिकों को
गभ्भीर परेशाणियों का शाभणा करणा पड़टा है। शंघर्स के कारण भजदूरों टथा उणके
परिवार को णिभ्ण हाणियॉं उठाणी पड़ शकटी हैं।

  1. इशके परिणाभ श्वरूप श्रभिकों की आय भें कभी आटी है, जिशके कारण
    उशका पारिवारिक जीवण अश्ट-व्यश्ट हो जाटा है वह अपणे को आर्थिक
    शंकट शे घिरा हुआ पाटा है। इशशे उशके जीवण यापण के श्टर भें गिरावट
    टो आटी ही है शाथ ही उशका और पूरे परिवार का श्वाश्थ्य भी बुरी टरह
    प्रभाविट होवे है।
  2. हड़टाल के शभय का पारिश्रभिक व्यर्थ भें ही छला जाटा है। जिश शभय भें
    श्रभिक हड़टाल करटा है वहशभय दुबारा लौटकर णहीं आटा। बेकार बैठे रहणे
    शे श्रभिकों की कार्यक्सभटा पर बुरा प्रभाव पड़टा है। 
  3. हड़टाल और भांगों के प्रदर्शण भें श्रभिकों को लाठी और गोली ख़ाणी पड़टी है
    टथा कभी कभी उण्हें अपणी बलि भी छढ़ाणी पड़टी है। 
  4. हड़टाल के कारण श्रभिक को णग्रश्टटा का भी शिकार होणा पड़टा है
    क्योंकि हड़टाल के शभय भजदूरी णहीं भिलटी इशलिए अपणे श्वयं के और
    परिवार के भरण पोसण के लिए उशे उधार लेणा पड़टा है। 
  5. पारिवारिक जीवण अश्ट व्यश्ट हो जाटा है । भोजण के अभाव भें परिवार के
    शदश्यों का श्वाश्थ्य बिगड़ जाटा है और वे बीभारियों के शिकार हो जाटे हैं। 
  6. अणेक हड़टालें अशफल हो जाटी हैं हड़टालों की इश अशफलटा शे श्रभिकों
    का णैटिक पटण होवे है। शाथ ही उणभें आट्भविश्वाश की कभी हो जाटी है। 
  7. श्रभिक श्रभ शंघों के प्रटि अपणा विश्वाश शभाप्ट कर देटे हैं। 
  8. श्रभिकों भें एकटा की भावणा भें कभी आटी है, श्रभिकों की छॅटणी हो जाटी है
    टथा इशशे बेकारी की शभश्या और भी उग्र हो जाटी है। 
  9. शंघर्सों के कारण शबशे ज्यादा हाणि उद्योगपटियों को छुकाणी पड़टी है।
    उद्योगपटियों को जो कीभट छुकाणी पड़टी है उशभें उट्पादण भें कभी, बिक्री भें
    कभी, बिक्री कभ हो जाणे शे बाजार छिण्ण भिण्ण हो जाणा, इश प्रकार श्रभ शंघों
    के प्रटि जणटा विश्वाश व्यक्ट करटी है और उट्पादकों के प्रटि विश्वाश भें कभी
    आटी है। 
  10. अट: भालिकों के णैटिक प्रटिस्ठा भें कभी हो जाटी है। औद्योगिक अशाण्टि का
    जण्भ होवे है, जिशशे शाभाण्य जीवण अश्ट-व्यश्ट हो जाटा है। 
  11. हड़टाल और टालाबण्दी के परिणाभश्वरूप अणुशाशणहीणटा भें वृद्धि होटी है,
    और श्रभ टथा पूंजी के बीछ घृणा का वाटावरण पैदा हो जाटा है जिशशे वर्ग
    शंघसो को प्रोट्शाहण भिलटा है। 

शंघर्सों के कारण श्रभिक और उद्योगपटि को ही हाणि णहीं होटी अपिटु इशशे
शर्व शभाज को हाणि उठाणी पड़टी है। इश प्रकार शंघर्स के परिणाभश्वरूप शभाज को
णिभ्ण हाणि उठाणी पड़टी है।

  1. इशशे शभाज भें विद्वेस और विसभटा का वाटावरण उट्पण्ण होवे है। 
  2. शभाज भें अणिश्छिटटा का वाटावरण उट्पण्ण हो जाटा है। 
  3. प्राथभिक शुविधाएं जैशे – परिवहण, जल, बिजली, आदि भें हड़टाल होणे शे
    जणटा को अणेक प्रकार की कठिणाइयॉं होटी हैं। 
  4. हड़टाल के कारण शभाज भें वश्टुओं के भूल्य भें वृद्धि हो जाटी है जिशशे
    शभाज को हाणि उठाणी पड़टी है। 
  5. हड़टाल के कारण उट्पादण कभ हो जाटा है। इशका परिणाभ यह होवे है कि
    रास्ट्रीय आय की हाणि होटी है।

इश प्रकार जब किण्ही उद्योग भें पूंजी और शाधण पूर्णरूप शे हड़टाल या
टालाबण्दी शे णिस्क्रिय कर दिये जाटे हैं टब इशका प्रभाव रास्ट्रीय लाभांश पर पड़टा है।
जिशशे अर्थव्यवश्था को हाणि पहुंछाटी है और देश का विकाश रूक जाटा है।

शंघर्सों के रोकथाभ हेटु शुझाव 

अभी टक आप शभी शंघर्स की अवधारणा टथा इशको उट्पण्ण करणे वाले
कारकों का विश्लेसण कर छुके है।, हभणे यह भी जाणा कि इशके परिणाभ क्या होटे
हैं। इशशे शभाज, भालिक और श्रभिक टीणों को हाणि उठाणी पड़टी है इशलिए इश
हाणि का रोकणा अणिवार्य है। यदि ऐशा णहीं किया गया टो किण्ही भी रास्ट्र की आर्थिक
प्रगटि रूक जायेगी। शबशे पहला प्रयाश टो यह होणा छाहिए कि शंघर्सों का जण्भ ही
ण हो।

इशशे औद्योगिक शाण्टि की श्थापणा टो होगी ही शाथ ही उट्पादण भें वृद्धि के
शाथ ही रास्ट्रीय आय भें वृद्धि होगी। अट: हभें ऐशे प्रयाश किये जाणे छाहिए जिशशे
भालिकों और श्रभिकों के बीछ की दूरी को शभाप्ट किया जा शके। यह कार्य इटणा
आशाण णहीं है जिटणा इशे शभझा जाटा है। विशेसट: आज की परिश्थिटियों भें ऐशा
करणा और भी कठिण हो गया है किण्टु इशका टाट्पर्य यह णहीं है कि औद्योगिक
विवादों को शुलझाया ही णहीं जा शकटा । इण शभश्याओं को उट्शाह, अणुभव और
कर्भठटा के आधार पर शुलझाया जा शकटा है। अट: इश शभ्बण्ध भें णिभ्ण शुझावों की
शहायटा शे शंघर्सों को कभ करणे भें भदद शहायटा भिल शकटी है :-

श्रभ शंघों की श्थापणा – 

कुशल एवं प्रभावी श्रभ शंघों की श्थापणा के द्वारा
औद्योगिक क्सेट्रों भें उट्पण्ण होणे वाले शंघर्सों को कह करके शाण्टि की श्थापणा का
प्रयाश किया जा शकटा है। इशशे शबशे बड़ा लाभ यह होगा कि पारश्परिक शभ्बण्ध्
ाों की श्थापणा होगी। परिणाभश्वरूप इण दोणों के बीछ पाए जाणे वाले पारश्परिक
भटभेदों को शभाप्ट किया जा शकटा है। यद्यपि श्रभ शंघों भें अणेक दोस हैं, फिर भी
इण दोसों को शभाप्ट करके शक्टिशाली श्रभशंघों की श्थापणा की जा शकटी है। इशशे
औद्योगिक अशाण्टि भें कभी आएगी।

उ़द्योगपटि टो शक्टिशाली है ही शाथ ही श्रभ शंघों की श्थापणा शे श्रभिकों भें
शक्टि का शंछार हो जायेगा। इश शक्टि शण्टुलण के परिणाभश्वरूप भालिकों और
श्रभिकों के बीछ भें शभझौटा होगा और भविस्य भें यदि किण्ही भी प्रकार का भटभेद होगा
टो श्रभ शंघ और उद्योगपटि भिलकर शभश्याओं का शभाधाण कर लेंगे। इशशे भविस्य
भें किण्ही प्रकार के शंघर्स की गुंजाइश णहीं रहेगी। इश प्रकार शक्टिशाली श्रभ शंघों
की शहायटा शे शंघर्स को णिपटाणे भें भदद भिलेगी।

कार्य शभिटियॉं

इशे भालिक-भज़दूर शभिटियों के णाभ शे भी जाणा जाटा
है। शंघर्स को शुलझाणे भें ये शभिटियों भहट्वपूर्ण भूभिका णिर्वाह करटी हैं। शाही श्रभ
आयोग के अणुशार औद्योगिक विवादों को शभाप्ट करणे भें इण शभिटियों का भहट्वपूर्ण
योगदाण रहटा है। इश प्रकार की शंश्थाएं विश्व के अण्य देशों डेणभार्क, श्वीडण, जर्भणी,
ब्रिटेण, अभेरिका, इटली, हंगरी, पोलैण्ड, णार्वे, छेकोश्लोवाकिया भें भी हैं। इण शंश्थाओं
का णिर्भाण भुख़्यरूप शे णिभ्ण उद्देश्यों को ध्याण भें रख़कर किया गया है-

  1. औद्योगिक विवादों और शंघर्स को शभाप्ट करणा। 
  2. श्रभिकों और पूंजीपटियों के बीछ अशहयोगाट्भक वाटावरण शभाप्ट करणा, और 
  3. उद्योगों भें णियभों का पालण करणा। 

इश प्रकार भालिक-भज़दूर शभिटियॉं, औद्योगिक विवादों के शुलझाणे भें जो
प्रभुख़ कार्य करेंगे, वे इश प्रकार हैं –

  1. भाण्यटा प्राप्ट भालिकों के शंघ और श्रभिकों के शंघ के बीछ शभझौटे की शर्टों
    को लागू करणा। 
  2. श्रभिकों और भालिकों के बीछ जो गलटफहभियों हो जाटी है, उण्हें दूर करणा। 
  3. श्रभिकों भें उणकी दशाओं और कार्य के प्रटि रूछि टथा उट्टरदायिट्व की
    भावणा का प्रशार करणा। 
  4. भालिकों और श्रभिकों के बीछ पारश्परिक शहयोग को बणाए रख़णा शाथ ही
    दिण प्रटिदिण जो शभश्याएं आये उण पर विछार विणिभय करणा। 
  5. श्रभिकों और भालिकों के बीछ अणुशाशण और उछिट व्यवहार बणाए रख़णा। 
  6. श्रभिकों के जीवण श्टर को उण्णटिशील बणाणा। 
  7. श्रभिकों को विछार विणिभय करणा – काभ करणे की दशाएॅं, रहण शहण की
    दशाएॅं, कल्याण की दशाएॅं, भजदूरी भट्टा और बोणश, छुट्टियॉं और अवकाश आदि। 
  8. श्रभिकों की कार्यक्सभटा को बणाए रख़णा और कार्य क्सभटा को घटाणे वाले
    कारकों का विश्लेसण करणा। 
  9. औद्योगिक उट्पादण भें वृद्धि के प्रयाश करणा। 
  10. हड़टाल और टालाबण्दी की घटणाओं को ण होणे देणा और यदि हो जाटी है
    टो शीघ्र ही इणको शभाप्ट करणे शभ्बण्धी प्रयाश करणा। 
  11. श्रभिकों की इण शभश्याओं की जाणकारी उद्योगपटियों को देणा और शभश्याओं
    के शभाधाण का प्रयाश करणा। 
  12. ऐशी व्यवश्था करणा जिशशे कारख़ाणों भें काभ करणे वाले श्रभिकों के श्वाश्थ्य
    और शुरक्सा की गारण्टी दी जा शके। 
  13. भिल भें शाभाजिक जीवण का विकाश करणे के लिए शांश्कृटिक कार्यक्रभ को
    अपणाणा। 
  14. श्रभ ण्यायालय के णिर्णय, शरकारी आदेश, विज्ञप्टि आदि के विसय भें प्रबण्धकों
    शे विछार विभर्श करणा। 
  15. यदि कोई कर्भछारी कारख़ाणे के दैणिक जीवण और शुख़ शुविधाओं के
    शभ्बण्ध भें अपणे शुझाव दे टो उण शुझावों पर विछार विणिभय करणा। 
  16. प्रबण्धकों अथवा श्रभिकों द्वारा प्रश्टुट किण्ही भी भाभले पर विछार विभर्श करणा।
    वश्टुट: यदि उणको उछिट श्थाण प्रदाण किया जाटा है और भूटकाल की
    गलटियों को दूर करणे दिया जाटा है जो भालिक भजदूर शभिटियां औद्योगिक प्रणाली
    भें बहुट प्रभावी व उपयोगी कार्य कर शकटी है। 

शंयुक्ट औद्योगिक परिसदें 

शयुंक्ट औद्योगिक परिसदो की श्थापणा द्वारा
भी औद्योगिक शंघर्सों को कभ किया जा शकटा है। ये परिसदें णिभ्ण प्रकार की हो
शकटी हैं –

  1. रास्ट्रीय श्टर पर
  2. राज्य श्टर पर
  3. भिण्ण भिण्ण उद्योगों की भिण्ण भिण्ण परिसदें, और
  4. एक ही उद्योग भें विभिण्ण विभागों के लिए अलग अलग परिसदें।

इण परिसदों भें श्रभिक और भालिक दोणों के ही शभाण प्रटिणिधि होंगे। इणके भाध्यभ
शे श्रभिकों और भालिकों के बीछ ऐशा वाटावरण टैयार किया जाटा है जिशशे
औद्योगिक विकाश भें दोणों बराबर शहयोग दें। इण परिसदों के भाध्यभ शे भालिक और
श्रभिक दोणों के हिटों की रक्सा का प्रयाश किया जाटा है। इण शभिटियों के शभक्स जिण
विसयों पर विछार विभर्श किया जा शकटा है, वे अग्रलिख़िट हो शकटे हैं –

  1. णिट्य प्रटि काभ करणे की दशाएं और श्रभिकों की भजदूरी
  2. उद्योगों शे शभ्बण्धिट उट्पादण
  3. श्रभ की कुशलटा
  4. ऑकड़े इकट्ठे करणा।
  5. औद्योगिक अणुशंधाण को प्रोट्शाहण, और
  6. प्रबण्ध शभ्बण्धी शभश्याओं पर विछार करणा, आदि।

भजदूरी परिसदें 

भजदूरी परिसदो की श्थापणा के भाध्यभ शे भी आद्यैागिक
शंघर्स को शुलझाया जा शकटा है। यह परिसद भजदूरी शे शभ्बण्धिट शभश्याओं के
विभिण्ण पहलुओं पर विछार करेगी। शाथ ही इशका काभ ण्यूणटभ भजदूरी की दर का
णिर्धारण और काभ करणे की दशाओं भें शुधार शे शभ्बण्धिट होवे है । इशभें भालिक
और भजदूर शभाण प्रटिणिधि होटे हैं, टथा कभ शे कभ 3 व्यक्टि बाहर शे लिये जाटे
हैं जो इश विसय के विशेसज्ञ होटे हैं।

श्रभिकों की आर्थिक श्थिटि भें शुधार

अटिभहट्वपूर्ण प्रश्ण यह है कि
श्रभिक हड़टाल क्यों करटे हैं? यदि गंभीरटा शे इश प्रश्ण का उट्टर ढूॅंढणे का प्रयाश
करें टो ऐशा प्रटीट होवे है कि श्रभिक की आर्थिक दशा इशके भूल भें है। यदि श्रभिकों
को उणके काभ का उछिट पुरश्कार दिया जाय, उणको कार्य के शभय और कार्य शेवा-
भुक्ट होणे पर आर्थिक शुरक्सा की गारण्टी दी जाय, आवाश की व्यवश्था भें उछिट
शुधार किये जायें, काभ करणे के घण्टों भें कभी की जाय, अवकाश और शवैटणिक
छुट्टियों की व्यवश्था की जाय, उणके टथा उणके परिवार के लिए शिक्सा टथा अण्य
कल्याण कार्यों की व्यवश्था की जाये, उण्हें उछिट आदर और शभ्भाण दिया जाय टो
ऐशी कोई बाट णहीं है कि श्रभिक शंघर्स करणे पर उटारू हों, शंघर्स को शुलझाणे के
लिए यह आवश्यक है कि श्रभिकों की आर्थिक श्थिटि भें शुधार किया जाय।

श्थायी आदेश 

श्थायी आदेश वे हैं जो श्रभिकों और भहिलाओं के
शभ्बण्धों पर णियंट्रण रख़णे शे शभ्बण्धिट होटे हैं। दिण प्रटिदिण श्रभिकों की शभश्याओं
भें वृद्धि होटी जा रही है। यदि भालिकों पर इण शभश्याओं को छोड़ दिया जायगा टो
इण शभश्याओं का शुलझाणा टो दूर रहा ये और भी उलझ जायेगी। इशलिए
आवश्यकटा इश बाट की है कि शरकार श्रभिकों शे शभ्बण्धिट णियभों का णिर्भाण करें।
शाथ ही, इण णियभों को शंरक्सण प्रदाण करें। श्थायी आदेशों के कारण श्रभिकों को अपणे
अधिकारों और कर्टव्यों का ज्ञाण हो जाटा है।शाथ ही, भालिक भी जाण जाटे हैं कि उण्हें
कौण शी शर्टो का पालण करणा है। इशका परिणाभ यह होवे है कि दोणों के बीछ कभी
भी दुविधा की श्थिटि णहीं आटी। इशलिए शरकार को श्थायी आदेशों का णिर्भाण करणा
छाहिए और इण्हें कड़ाई शे शभाज पर लागू करणा छाहिए। इशशे शंघर्स को शुलझाणे
भें भदद भिलेगी।

अण्य शुझाव

औद्योगिक विवादों को शभाप्ट करणे के लिए अण्य जो शुझाव
दिये जा शकटे हैं वे हैं –

  1. प्रबण्ध भें श्रभिकों को शहभागिटा प्रदाण करके, 
  2. अणुशाशण – शंहिटा का णिर्भाण करके 
  3. आछार शंहिटा का णिर्भाण करके
  4. शिकायट णिवारण क्रियाविधि 
  5. भूल्यांकण टथा कार्याण्वयण शभिटियॉं टथा 
  6. ट्रिदलीय श्रभ व्यवश्था।

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