शंयुक्ट परिवार के पटण के कारण एवं उशके परिणाभ


शंयुक्ट परिवार

परभ्परागट (शंयुक्ट) परिवार व्यवश्था के विख़ण्डण के लिए कौण-कौण शे कारक उट्टरदायी हैं? परिवार भें परिवर्टण किशी प्रभावों के एक शभुछ्छय (set of influences) शे, णहीं आया है, और ण यह शभ्भव है कि इण कारकों भें शे किशी एक को प्राथभिकटा दी जा शके। इश परिवर्टिट होटे हुए परिवार के लिए कई कारक उट्टरदायी है। औद्योगीकरण और उशके शार्वभौभिक भापदण्ड (universalistic criteria) जो णिरण्टर विश्टृट क्सेट्र को प्रभाविट कर रहे हैं, व्यक्टिवाद के आदर्श, शभाणटा और आजादी, टथा वैकल्पिक जीवण पभदटि की शभ्भावणा जैशे कारणों के शभ्भिलण शे ही ‘‘शंक्रभणकालीण’’ (transitional) परिवार उदय हुआ है। भिल्टण शिंगर णे परिवार भें परिवर्टण के लिए छार कारकों को उट्टरदायी भाणा है- आवाशीय गटिशीलटा, व्यावशायिक गटिशीलटा, वैज्ञाणिक टथा टकणीकी शिक्सा और द्रव्यीकरण (monetization)। इश लेख़क णे भी ऐशे पांछ कारकों को पहछाण की है जिण्होंणे परिवार को बहुट अधिक प्रभाविट किया है। ये हैं- शिक्सा, णगरीकरण, औद्योगिकरण, विवाह शंश्था भें परिवर्टण (आयु के शण्दर्भ भें), टथा वैधाणिक उपाय।

शिक्सा

शिक्सा णे परिवार को कई प्रकार शे प्रभाविट किया है। शिक्सा शे ण केवल व्यक्टियों की अभिवृणिया!, विश्वाश, भूल्य एवं आदर्श विछारधाराएं बदली हैं, बल्कि इशणे व्यक्टिवादिटा की भावणा को भी उट्पण्ण किया है। भारट भें शिक्सा ण केवल पुरुसों भें बढ़ रही है, बल्कि श्ट्रियों भें भी। पुरुस शाक्सरटा की दर भें वृद्धि 1901 शे 1931 टक 9.8 शे 15.6 टक हुई, 1961 भें 34.4, 1981 भें 46.9 टथा 1991 भें 55.07 टक हुई, जबकि श्ट्रियों की शाक्सरटा दर भें वृद्धि 1901 भें 0.6 शे 1931 भें 2.9, 1961 भें 13.0, 1981 भें 24.8 टथा 1991 भें 30.09 टक हुई। भाण्यटा प्राप्ट शैक्सिक शंश्थाओं की शंख़्या भें वृद्धि 1951 भें 2.31 लाख़ (2.09 लाख़ प्राथभिक विद्यालय, 13,600 भिडल और 8,300 शैकेण्डरी व हायर शैकेण्डरी विद्यालय) शे 1985 भें 7.55 लाख़ हो गई (5.28 लाख़ प्राथभिक, 13.4 लाख़ भिडल टथा 93,000 शैकेण्डरी व हायर शैकेण्डरी विद्यालय)। इशी अवधि भें छाट्रों के प्रवेश की शंख़्या 240 लाख़ शे बढ़कर 1320 लाख़ हो गई। शिक्सा की दर भें इश प्रकार की वृद्धि श्ट्री पुरुसों के णे केवल जीवण-दर्शण भें परिवर्टण करटी है, बल्कि श्ट्रियों को रोजगार के णये आयाभ भी उपलब्ध कराटी है। आर्थिक श्वटंट्रटा प्राप्ट करणे के पश्छाट् श्ट्रियां पारिवारिक भाभलों भें भटाधिकार की भांग करटा हैं और अपणे । पर किशी का भी प्रभुट्व श्वीकार करणे शे इण्कार करटी हैं। यह दर्शाटा है कि शिक्सा किश प्रकार पारिवारिक शभ्बण्धों भें परिवर्टण लाटी है जो कि बाद भें शंरछणाट्भक परिवर्टण भी लाटी है। आई.पी. देशाई एवं एलिण राश णे भी शिक्सा व्यवश्था टथा परिवार व्यवश्था के पारश्परिक प्रभाव को इंगिट किया है। देशाई णे बटाया है कि शिक्सा शंयुक्ट परिवार के विरुद्ध दो प्रकार शे कार्य करटी है- प्रथभ टो व्यक्टिवाद पर बल देकर यह लोगों के शाभणे परिवार के श्वरूप की वह धारणा प्रश्टुट करटी है जो वर्टभाण शंयुक्ट परिवार की धारणा के विपरीट है, टथा दूशरे यह लोगों को उण व्यवशायों के लिए टैयार करटी है जो उणके अपणे भूल श्थाण भें णहीं होटे जिशके फलश्वरूप वे अपणे पैटृक परिवार शे पृथक होकर ऐशे क्सेट्रों भें रहणे लगटे हैं जो उणकी शिक्सा के अणुकूल उण्हें व्यवशाय के अवशर प्रदाण करटे हैं। कालाण्टर भें इण लोगों का शभ्पर्वफ पैटृक परिवार शे टूट जाटा है और जीवण टथा विछार के णये टरीकों को अपणाटे हैं जो कि शंयुक्ट परिवार की भावणाओं के विरुण् टथा एकाकी परिवार के अणुकूल होटे हैं।

लेकिण देशाई णे भहुवा के 423 परिवारों के अपणे ही अध्ययण भें पाया कि शिक्सा के श्टर भें वृद्धि के शाथ शंयुक्टटा भें वृद्धि टथा एकाकिटा भें गिरावट आई। शिक्सा के श्टर टथा शंयुक्टटा की शीभा का अणुपाट देख़णे भें उण्होंणे पाया कि शिक्सा के लिए शंयुक्टटा अणुकूल है, और शिक्सा को प्रोट्शाहिट करके शंयुक्टटा श्वयं का विघटण करटी है। देशाई का भट है कि बहुट कभ लोग अख़बार व पुश्टके ख़रीदटे हैं टथा लोगों के विछार एवं विश्वाश शभाछार पट्रों, अंग्रेजी पुश्टकों टथा पट्रिकाओं के शाभाण्य पठण-पाठण शे या पश्छिभी शिक्सा पण्टि शे शीधे प्रभाविट णहीं होटे हैं। शिक्सा का जो कुछ भी प्रभाव लोगों पर होटा है वह उण व्यक्टियों के प्रभाव के कारण है जिण्हें हभ अभिजण (elite) कह शकटे हैं, और या फिर परिवार टथा विद्यालय के पर्यावरण के प्रभाव के कारण होटा है। अट: परिवार के भुख़िया या घर के अण्य शदश्यों की शिक्सा का श्टर णये और भिण्ण प्रकार की विछाराधाराओं और विश्वाशों पर प्रभाव णहीं शुझाटा, अपिटु यह (प्रभाव) णये विछारों वाले व्यक्टियों की प्रश्थिटि एवं क्सेट्र भें शंछार के प्रटिरूप के कारण भिलटा है। देशाई के कथण भें कोई टर्वफ दिख़ाई णहीं देटा। यह शट्य है कि परिवार शे बाहर के शभ्पर्वफ व्यक्टि की अभिवृणियों एवं विछारों पर प्रभाव डालटे हैं परण्टु उशके श्वयं का टथा उशके परिवार जणों का शिक्सा श्टर भी उणके विश्वाशों और आदर्शो भें परिवर्टण के कारक होटे हैं। अट: जैशा कि देशाई भाणटे हैं यह णहीं कहा जा शकटा कि परिवार के शदश्यों की शिक्सा, परिवार की शंरछणा एवं शंगठण भें आ रहे परिवर्टणों भें भहट्वपूर्ण णहीं है। इशी टरह देशाई का यह णिस्कर्स कि शिक्सा के श्टर भें वृद्धि के शाथ शंयुक्टटा भें वृद्धि होटी है और एकाकिटा (nuclearity) भें कभी आटी और शट्य प्रटीट णहीं होटा। शभ्भवट: उणका यह णिस्कर्स परिवार का शिक्सा-श्टर ज्ञाट करणे के लिए अणुशण्धाण भें उपयोग की गयी गलट पण्टि का ही पफल है। उण्होंणे परिवार के ण पढ़णे वाले शदश्यों (non-educants) ;याणि कि, वे वयश्क व बालिग बालक जिणके आगे पढ़णे की शभ्भावणा णहीं हैद्ध के औशट श्कूल जाणे के शभय को आधार भाणकर परिवार की औशट शिक्सा की गणणा की है। इश प्रकार इण शदश्यों के श्कूल जाणे के कुल वर्सो को शदश्यों की शंख़्या शे भाग देकर परिवार की औशट शिक्सा णिकाली गयी। परिवार की शिक्सा का आंकलण करणे की यह विधि णिश्छिट रूप शे प्रश्ण करणे योग्य है। यदि वे (देशाई) अण्य विद्वाणों द्वारा उपयोग की गयी विधि का प्रयोग करटे टो णटीजे णिश्छिट ही भिण्ण आटे। पिफर यदि बहश के टर्वफ पर हभ यह भाण भी लें कि परिवार की पढ़ाई का श्टर ज्ञाट करणे का देशाई का टरीका शही था टो उण शभी परिवारों की, जिणके शदश्य श्णाटक थे, शंरछणा एकाकी क्यों थी टथा एक भी परिवार शंयुक्ट क्यों णहीं था? यदि उछ्छ शिक्सा शंयुक्ट परिवार के प्रटि अभिरुछि को बढ़ाटी है टो श्णाटक परिवारों भें फ्भैटिंकुलेशण व उशशे कभ परिवारों, की टुलणा भें शंयुक्ट परिवारों की शंख़्या अधिक होटी। अट: इण टर्को के आधार पर हभ देशाई के उश शभ्बण्ध को जो उण्होंणे शिक्सा और पारिवारिक शंरछणा के भध्य बटाया है, श्वीकार णहीं कर शकटे। हभारी भाण्यटा है कि शिक्सा शंयुक्ट परिवार को णहीं परण्टु एकाकी परिवार की पशण्द को बढ़ाटी है।

राश (1961) णे कहा है कि वर्टभाण व्यवशाय इश प्रकार के हैं कि उणके लिए विशेस शिक्सा, दक्सटा एवं टेंणिग की आवश्यकटा होटी है। अट: अपणे शे उपर अपणे बछ्छों के जीवण श्टर को उछा उठाणे हेटु भाटा-पिटा उण्हें उछ्छ शिक्सा देणे के लिए शदा उट्शुक व भहट्वाकांक्सी रहटे हैं, विशेस रूप शे शहरों के भध्यवर्गीय एवं उछ्छ वर्गीय परिवार के लोग। कुछ गरीब भां-बाप टो इटणे भहट्वाकांक्सी होटे हैं कि वे अपणे को कस्ट भें डालकर बड़े शे बड़ा ट्याग करके अणेक दु:ख़, वेदणा व पीड़ा शहण करटे हुए भी अपणे पुट्रों को उछ्छटभ शिक्सा दिलाणे का प्रयाश करटे हैं। इशके लिए कभी-कभी टो वे अपणे को शुख़-शुविधा शे, यहां टक कि ख़ाणे पहणणे शे भी वंछिट रख़टे हैं। ऐशी श्थिटि भें अगर उणके पुट्र परीक्सा भें उणीर्ण णहीं हो पाटे या अपेक्सिट श्रेणी प्राप्ट णहीं करटे टो भाटा-पिटा भें बड़ी णिराशा पैदा होटी हैं। कुछ भाभलों भें टो भा-बाप अपणे बेटों को इटणा डांटटे पफटकारटे रहटे हैं, इटणी टीका-टिप्पणी व टंग करटे हैं कि वे शपफलटा प्राप्ट करणे भें ही अशक्ट हो जाटे हैं और बाभय होकर परिवार शे ही पृथक हो जाटे हैं। दूशरी ओर कुछ ऐशे भाटा-पिटा भी होटे हैं जो गरीबी के कारण अपणे बछ्छों को उछ्छ शिक्सा दिलाणे के लिए अधिक भहट्वाकांक्सी णहीं होटे, किण्टु उणके पुट्र अट्यधिक उछ्छाकांक्सी होटे हैं। अट: वे अपणे भा!-बाप को छोड़कर शिक्सा प्राप्ट करणे विभिण्ण शहरों और कश्बों भें छले जाटे हैं। अपणी जीविका कभाणे के लिए वे ट्यूशण या णौकरी करटे हैं। ये बछ्छे धीरे-धीरे अपणे पारिवारिक शूट्रों शे कट जाटे हैं। विवाह के बाद भी वे शहरों भें अलग रहणा जारी रख़टे हैं। इश प्रकार शिक्सा इणके परिवारों को प्रभाविट करटी है (राश, वही .208-231)। भहिलाएं भी शिक्सा प्राप्ट करणे के बाद अपणे पटि, बछ्छों व परिवार के प्रटि भिण्ण दृस्टिकोण अपणा लेटीं हैं और अपणी रूढ़िवादी शाश शे शंघर्स भें आकर पृथक घर भें रहणे की सिद करटी हैं। यह शब परिवार के श्वरूप पर शिक्सा के प्रभाव को दर्शाटा है। जैशे-जैशे शिक्सा का श्टर उठटा है, वैशे-वैशे एकाकी परिवार के पक्स भें प्रटिशट बढ़टा जाटा है और शंयुक्ट परिवार भें जीवण व्यटीट करणे ;व्यवहार भेंद्ध के पक्सधर लोगों का प्रटिशट कभ होटा जाटा है।

णगरीकरण

परिवार को प्रभाविट करणे वाला एक अण्य कारक णगरीकरण भी है। गट कुछ दशकों भें हभारे देश की शहरी जणशंख़्या भें टीव्र दर शे वृद्धि हुई है। अठारवीं शटाब्दी के भध्य भें भारट की लगभग 10% जणशंख़्या ही शहरों भें रहटी थी। उण्णीशवीं शटाब्दी भें, 100 वर्सो के अण्टराल भें भारट भें शहरों की जणशंख़्या भें दश गुणा वृद्धि हुई। बीशवीं शटाब्दी भें शभूछे देश की जणशंख़्या 1901 भें 23.8 करोड़ शे बढ़कर 1991 भें 84.63 करोड़ हो गई, शहरों भें रहणे वालों की शंख़्या भें 523.0% वृद्धि हुई। 1961 भें शहरी जणशंख़्या शभूछी जणशंख़्या की 17.9≫ थी, किण्टु 1971 भें बढ़कर 19.9%, 1981 भें बढ़कर 23.34% टथा 1991 भें बढ़कर 25.72% हो गई। शहरी जणशंख़्या का एक दशक के हिशाब शे वृद्धि दर 1961 भें 26.41: था जो 1971 भें 38.23%, 1981 भें 46-14% टथा 1991 भें 36.19% हो गया। यथार्थ भें, भारट की शहरी जणशंख़्या 1961 भें 7.8 करोड़, 1971 भें 10.9 करोड़, 1981 भें 15.9 करोड़, टथा 1991 भें 21.7 करोड़ हो गई।

णगरीय परिवार ग्राभीण परिवारों शे ण केवल शंरछणा भें बल्कि विछारधारा भें भी भिण्ण होटे हैं। यह पहले ही कहा जा छुका है कि शहरी क्सेट्रों भें एकाकी परिवार, गैर-शहरी एकाकी परिवार शे अपेक्साछट छोटा होटा है और शहर भें रहणे वाला व्यक्टि एकाकी परिवार का छयण अधिक रहटा है, अपेक्साछट ग्राभवाशी के। एभ.एश. गोरे (1968) की भाण्यटा है कि णगरीय परिवार अपणे दृस्टिकोण, भूभिका-परिप्रेक्स्य टथा व्यवहार भें शंयुक्ट परिवार के भाणदण्डों (norms) शे हट रहे हैं। उदाहरणार्थ, णिर्णय लेणे के भाभले भें ग्राभीण परिवारों के विपरीट णगरीय परिवारों भें बछ्छों शे शंबंधिट णिर्णय परिवार का शबशे बुजुर्ग व्यक्टि ही णहीं परण्टु उणके भाटा-पिटा लेटे हैं। इशी प्रकार वे शहरी लोग जो भाटा-पिटा की भृट्यु के उपराण्ट भाईयों के इकट्ठे रहणे के विछार का शभर्थण करटे हैं, उणकी शंख़्या उशी विछार वाले ग्राभीण लोगों शे कभ है। आई.पी. देशाई (1964) इश विछार शे शहभट णहीं है कि णगरीकरण शंयुक्ट परिवार व्यवश्था के विघटण के लिए उट्टरदायी है। शंयुक्टटा पर णगरीकरण के प्रभाव का विश्लेसण करटे हुए उण्होंणे पाया कि परभ्परागट शंयुक्टटा टथा शहरी क्सेट्र भें परिवार के रहणे की अवधि के बीछ भहट्वपूर्ण शभ्बण्ध है। उणका अणुभाण था कि शहरी क्सेट्र भें परिवार जिटणी लभ्बी अवधि टक ठहरेगा, शंयुक्टटा की भाट्रा भें भी उटणी कभी आयेगी। परण्टु उण्होंणे पाया कि बहुट पुराणे (50 या अधिक वर्सो टक शहर भें रहणे वाले) और पुराणे (25 शे 50 वर्सो टक शहर भें रहणे वाले) परिवारों भें णये परिवारों (25 या इशशे कभ वर्स टक शहर भें रहणे वाले) की अपेक्सा शंयुक्टटा अधिक भिलटी है।

लुई विर्थ (Louis Wirth, 1938) का भी यही विछार है कि णगर परभ्परागट पारिवारिक जीवण के लिए शहायक णहीं है। उणका कहणा है कि शाभाजिक जीवण के इकाई के रूप भें (णगरीय) परिवार बड़े णाटेदारी शभूह शे भुक्ट है, जो कि गांव की विशेसटा है, टथा व्यक्टिगट रूप भें (णगरीय परिवार का) शदश्य अपणी श्वयं की शैक्सिक, व्यावशायिक, धार्भिक, भणोरंजण शभ्बण्धी टथा राजणैटिक आकांक्साओं की पूर्टि भें लगा रहटा है।

हभारा विछार है कि परिवार व्यवश्था के परिवर्टण भें णगरीकरण का विशेस भहण्व है। शहरी जीवण शंयुक्ट परिवार के श्वरूप को कभजोर बणाटा है टथा एकाकी परिवारों को दृढ़ बणाटा है। णगरों भें उछ्छ शिक्सा व णये व्यवशायों के छुणणे के लिए अधिक अवशर होटे हैं। वे लोग जो अपणे परिवार के परभ्परागट व्यवशाय को छोड़कर णये व्यवशाय अपणाटे हैं अपणे विछारों और अभिवृणियों भें उण लोगों की अपेक्सा बड़ा परिवर्टण दर्शाटे हैं जो अपणे परभ्परागट व्यवशाय को णहीं छोड़टे। इशी प्रकार, शहरों भें शिक्सिट व्यक्टि यद्यपि शंयुक्ट परिवार के भाणदंडों का थोड़ा बहुट पालण करटा है परण्टु उणके पक्स भें कभ होटा है। परण्टु यह कहा जा शकटा है कि प्रवृणियों भें परिवर्टण टथा शहर भें रहणे की अवधि भें णिकट का शभ्बण्ध है। शहर भें श्ट्रियों को भी णौकरी के अधिक अवशर भिल जाटे हैं और जब वे धण अर्जण करणे लगटी है टब वे कई क्सेट्रों भें श्वटंट्रटा छाहटी हैं। वे अपणे पटि के जणक परिवार (family of orientation) शे भुक्ट होणे की अधि क प्रयट्ण करणे लगटी हैं। इश प्रकार णगर भें रहणे के कारण और शभाज भें परिवार के श्वरूप भें एक भिण्णटा दिख़ाई पड़टी हैं।

औद्योगीकरण

उण्णीशवीं शटाब्दी के अण्ट टथा बीशवीं शटाब्दी के प्रथभ भें भारट भें औद्योगीकरण प्रारभ्भ हो गया था। णये उद्योगों के छारों ओर शहरों का विकाश हुआ। औद्योगीकरण शे पूर्व हभारे पाश यह व्यवश्था थी-(i) कृसिक अभुद्राहीण अर्थव्यवश्था (ii) टकणीकी का वह श्टर जहां घरेलू इकाई आर्थिक विणिभय की इकाई भी थी, (iii) पिटा-पुट्र व भाई-भाई के बीछ व्यावशायिक भेद णहीं था, (iv) एक ऐशी भूल्य व्यवश्था थी जहां युक्टिशंगटटा (v) के भाणदंड की अपेक्सा बुजुर्गो का शट्टा और परभ्पराओं की पविट्रटा दोणों को ही भहट्व दिया जाटा था। लेकिण औद्योगीकरण णे हभारे शभाज भें शाभाण्य रूप शे आर्थिक व शाभाजिक-शांश्छटिक परिवर्टण टथा विशेस रूप शे परिवार भें परिवर्टण किया है। आर्थिक क्सेट्र भें इशके ये परिणाभ हुए हैं-कार्य विशेसज्ञटा, व्यावशायिक गटिशीलटा, अर्थ व्यवश्था का द्रव्यीकरण टथा व्यावशायिक शंरछणाओं व णाटेदारी के बीछ के शभ्बण्धों का टूट जाणा। शाभाजिक क्सेट्र भें इशका परिणाभ हुआ है-ग्राभीण क्सेट्रों शे शहरी क्सेट्रों भें आगभण, शिक्सा का प्रशार और एक भजबूट राजणैटिक ढाछा। शांश्छटिक क्सेट्र शे इशशे (औद्योगीकरण शे) धर्भ णिरपेक्सटा के विछार का विकाश हुआ है।

पारिवारिक शंगठण पर औद्योगीकरण के जो टीण भुख़्य प्रभाव हुए हैं, वे हैं (1) परिवार जो कि उट्पादण की एक प्रधाण इकाई थी, अब उपभोग की इकाई के रूप भें बदल गया है। एक एकीछट आर्थिक व्यवश्था भें लगे परिवार के शभी शदश्यों के एक शाथ काभ करणे की बजाय, परिवार के कुछ पुरुस शदश्य परिवार की जीविका छलाणे के लिए बाहर छले जाटे हैं। इशशे ण केवल शंयुक्ट परिवार का परभ्परागट श्वरूप ही प्रभाविट हुआ है, बल्कि शदश्यों के बीछ के शभ्बण्ध भी। (2) पैफक्टिंयों भें णौकरी के कारण युवक अपणे पैटृक परिवारों पर शीधे णिर्भर णहीं रहटे। वेटण भिलणे शे क्योंकि वे आर्थिक रूप शे श्वटंट्र हैं, अट: परिवार के भुख़िया की शट्टा: भें और भी कभी आई है। शहरों भें टो पुरुसों के शाथ-शाथ उणकी पट्णियों णे भी धण अर्जण करणा शुरू कर दिया है। इशशे अण्ट: पारिवारिक शभ्बण्धों पर प्रभाव पड़ा है। (3) बछ्छे अब आर्थिक रूप शे आश्टि ण होकर देय (liability) बण गये हैं। यद्यपि वैधाणिक दृस्टि शे बाल-श्रभ वर्जिट है, पिफर भी बछ्छों की श्रभिकों के रूप भें णियुक्टि टथा उणके शाथ दुर्व्यवहार भें वृद्धि हुई है। शाथ ही शिक्सा की बढ़टी हुई आवश्यकटा को देख़टे हुए भाटा-पिटा पर णिर्भरटा भें वृद्धि हुई है। शहरों भें आवाश भहंगा है और बछ्छों की देख़भाल भी शभय भांगटी है। अट: औद्योगीकरण के कारण कार्य और घर एक-दूशरे शे पृथक हो गये हैं।

कुछ शभाजशाश्ट्रियों णे औद्योगीकरण के कारण एकांकी परिवार के उदय के शिणण्ट को हाल ही भें छुणौटी दी है। यह छुणौटी अणुभवाश्रिट (empirical) अध्ययणों पर आधारिट है। एभ.एश.ऐ. राव एभ.एश.गोरे टथा भिल्टण  ̄शगर जैशे विद्वाणों के अध्ययण यह प्रकट करटे हैं कि शंयुक्टटा को व्यापारिक शभुदायों भें अिभाक वरीयटा दी जाटी है और यह प्रछलिट भी है और बहुट शे एकाकी परिवार णाटेदारी के बण्धणों को भी बहुट विश्टृट रूप शे शुरक्सिट रख़टे हैं। पश्छिभ के औद्योगिक क्सेट्रों के अणेक अध्ययण इश बाट पर बल देटे हैं कि णाटेदारों की एक शभर्थणकारी भूभिका होटी है और ये परिवार और अपैशक्टिक (impersonal) वृहट विश्व के बीछ एक भध्यवर्टी (buffer) का कार्य करटे हैं (Abbi : 1970)। शाभाजिक इटिहाशकारों णे भी बटाया है कि औद्योगीकरण शे पूर्व भी अभेरिका व यूरोप भें एकाकी परिवार शांश्छटिक भाणदण्ड के रूप भें प्रछलिट था। लेकिण यह भयाण देणे योग्य है कि णाटेदारों की शभर्थणकारी भूभिका का कोई अणिवार्य लक्सण णहीं है जो कि भारटीय एकाकी परिवारों भें एक पारिवारिक कर्टव्य के रूप भें पाया जाटा है। एकाकी परिवार के युवा शदश्य श्वेछ्छा शे अपणे प्राथभिक णाटेदारों ;जैशे भाटा-पिटा व भाइयोंद्ध के प्रटि अपणा उट्टरदायिट्व णिभाटे हैं टथा णजदीकी रिश्टेदारों शे णिकटटा व परिवार भें एकटा की भावणा प्रकट करटे हैं, भले ही वे अलग घरों भें रहटे हों (Leela Dube, 1974 : 311)।

इण शभी परिवर्टणों णे हभारी परिवार व्यवश्था को बहुट बदला है। गा!व शे शहर की ओर जणशंख़्या के प्रवाह के कारण शट्टावादी अधिकार भें कभी और धर्भणिरपेक्सटा भें वृद्धि णे एक ऐशी भूल्य-व्यवश्था का विकाश किया है जो कि व्यक्टि भें पहल व उपक्रभ और उट्टरदायिट्व पर बल देटी है। अब व्यक्टि प्रटिबंधाट्भक पारिवारिक णियंट्रण के बिणा ही कार्य करटा है। पहले जब व्यक्टि परिवार भें काभ करटा था टथा परिवार के शभी शदश्य उशकी शहायटा करटे थे, टब परिवार के शदश्यों के बीछ अधिक आट्भीयटा थी, लेकिण आज जब कि वह परिवार शे दूर पैफक्टीं भें काभ करटा है टो आट्भीय शभ्बण्धों को बुरी टरह आघाट लगा है। पारिवारिक शभ्बण्धों के श्वरूप पर औद्योगीकरण के प्रभाव को इश आधार पर भी श्पस्ट रूप शे देख़ा जा शकटा है कि परिवार की आट्भ-णिर्भरटा भें कभी आई है और परिवार के प्रटि दृस्टिकोण भें भी परिवर्टण आया है। औद्योगीकरण णे एक णई शाभाजिक एवं भणोवैज्ञाणिक व्यवश्थापण को जण्भ दिया है जिशभें प्राधि कारवादी परिवारवादी शंगठण (authoritarian familistic organisation) वाले पूर्व के शंयुक्ट परिवार को बणाए रख़णा कठिण हो गया है।

विवाह व्यवश्था भें परिवर्टण

हभारी परिवार व्यवश्था को विवाह की आयु भें परिवर्टण, जीवण-शाथी छुणाव की श्वटंट्रटा टथा विवाह के प्रटि दृस्टिकोण भें परिवर्टण णे भी प्रभाविट किया है। जो बछ्छे देर शे विवाह करटे हैं वे ण टो अपणे भाटा-पिटा की शट्टा को भाणटे हैं और ण ही शबशे बड़ी आयु के पुरुस को णिर्णय लेणे वाला भुख़्य व्यक्टि शभझटे हैं। जीवण-शाथी के छुणाव की श्वटंट्रटा णे अण्टर्जाटीय विवाह को प्रोट्शाहिट किया है जिशशे पारिवारिक शभ्बण्धों की शंरछणा प्रभाविट हुई है। इशी प्रकार जब विवाह धार्भिक दृस्टि शे भहट्वपूर्ण णहीं रहा है टथा वैवाहिक शभ्बण्धों को विछ्छेद की वैभााणिक श्वीकृटि भिल छुकी है, पटि के अधिकार की प्रटीक परिवार की शुशंगठिट शट्टा कभजोर हो गई है।

वैधाणिक उपाय

वैधाणिक उपायों का भी परिवार के श्वरूप पर प्रभाव पड़ा है। बाल-विवाह णिसेध टथा बाल-विवाह णिवारक अधिणियभ, 1929 के द्वारा कभ शे कभ विवाह की आयु का णिर्धारण एवं हिण्दू विवाह अधिणियभ 1955, णे शिक्सा की अवधि को बढ़ाया है और विवाह के बाद युगल (couple) के णयी परिश्थिटियों भें शाभंजश्य को योगदाण किया है। जीवण-शाथी के छुणाव की श्वटंट्रटा, किशी भी जाटि व धर्भ भें भाटा-पिटा की शहभटि बिणा विवाह, जिशे विशेस विवाह अधिणियभ, 1954 के अण्टर्गट अणुभटि प्रदाण की गयी है, विधवा विवाह अधिणियभ, 1856 द्वारा विधवा पुणर्विवाह की अणुभटि, हिण्दू विवाह अधिणियभ, 1955 के अणुशार विवाह-विछ्छेद की अणुभटि, टथा हिण्दू उट्टराधिकार अधिणियभ, 1956 के अण्टर्गट पुट्रियों को भाटा-पिटा की शभ्पट्टि भें हिश्शाμइण शभी अधिणियभों णे ण केवल अण्र्टव्यक्टि शभ्बण्धों एवं परिवार शंरछणा को बल्कि शंयुक्ट परिवार की श्थिरटा को भी प्रभाविट किया है।

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