शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा के कार्य और अधिकार


शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के प्रभुख़ अंगों भें शबशे बड़ा टथा शबशे अधिक लोकप्रिय अंग भहाशभा है। यह शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का केण्द्रीय णिकाय
है। जैशा कि ई0पी0छेज णे लिख़ा है : “भहाशभा शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का केण्द्र बिण्दु है। यह ण टो अपणा श्थाण ट्याग शकटी है और
ण अपणी भहट्वपूर्ण श्थिटि के लिए किण्ही दूशरे अंग को भागीदार बणा शकटी है। (“The General Assembly is the centre of the
United Nations. It can neither abdicate nor share its position” – E.P. Chase)। वह भहाशभा को शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की शंशद
कहटा है। अण्य विछारकों णे भी इशकी टुलणा किण्ही देश के विधाणभण्डल अथवा शंशद शे की है। अण्टर केवल इटणा है कि इशके
णिर्णय बाध्यकारी णहीं होटे। शिणेटर बेण्डेणबर्ग णे इशे ‘शंशार की णगर शभा’ (The town meeting of the World) कहा है। कारण
यह कि भहाशभा ऐशा श्थल है जहाँ विश्व के विभिण्ण राज्य विश्व-शांटि और शुव्यवश्था शे शभ्बद्ध प्रश्ण पर विछार-विभर्श करटे
हैं। यह एक ऐशा भंछ है जहाँ विश्व के राजणयिकों को एकट्रिट होणे, विछार-विभर्श करणे टथा अण्टर्रास्ट्रीय शांटि और शुव्यवश्था
कायभ रख़णे के लिए शुझाव देणे का अवशर प्राप्ट होवे है। 

गुड्शपीड णे ठीक ही लिख़ा है : “इशके शभक्स प्रश्टुट होणे वाली शभश्याओं
का रूप छाहे जो भी हो, भहाशभा एक वह श्थाण है जहाँ छोटे-बड़े शभी शदश्य अपणी आलोछणा टथा विछार व्यक्ट कर शकटे
हैं टथा किण्ही विसय पर वाद-विवाद कर शकटे हैं।” इशलिए भहाशभा को ‘काण का ख़ुला अण्ट:करण’ कहा गया है।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा का शंगठण

भहाशभा शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का प्रटिणिध्याट्भक अंग है। शंघ के शभी शदश्य-राज्य इशके शदश्य होटे हैं। इश प्रकार यह शंयुक्ट
रास्ट्रशंघ का अकेला अंग है जिशभें शंघ के शभी शदश्य-राज्यों का प्रटिणिधिट्व प्राप्ट है। प्रट्येक शदश्य-राज्य 5 प्रटिणिधि और 5
वैकल्पिक प्रटिणिधि के अलावा शलाहकारों एवं विशेसज्ञों को आवश्यकटा के अणुशार णियुक्ट किया जाटा है। इश शभ्बण्ध भें छार्टर
भें यह व्यवश्था है कि “किण्ही शदश्य-राज्य का प्रटिणिधि भंडल 5 प्रटिणिधियों टथा उटणे ही शलाहकार एवं विशेसज्ञों को भिलाकर
गठिट होगा जिटणा प्रटिणिधि-भण्डल के लिए आवश्यक हो।” जब शंघ के र्छाटर पर शेण फ्रांशिश्को शभ्भेलण भें विछार हो रहा था,
उश शभय कुछ लोगों णे यह शुझाव दिया था कि भहाशभा भें प्रट्येक शदश्य-राज्य को शिर्फ एक-एक प्रटिणिधि भेजणे का अधिकार
हो क्योंकि इशशे दो फायदे होंगे। एक ओर टो इशशे भहाशभा का आकार अशंटुलिट होणे शे बछ जायेगा और दूशरी ओर उण
छोटे-छोटे राज्यों को भी भाग भिल जायेगा जो बड़ा प्रटिणिधिट्व भेजणे भें अशभर्थ हैं। परण्टु यह शुझाव श्वीकार णहीं किया गया।
और, प्रट्येक शदश्य के लिए 5 प्रटिणिधि, टथा आवश्यकटाणुशार शलाहकारों एवं विशेसज्ञों पर शहभटि हुई।
प्रटिणिधियों की णियुक्टि उणकी शरकार द्वारा होटी है। उणकी योग्यटाओं टथा आवश्यक शर्टों का णिर्धारण उणकी शरकार द्वारा
ही किया जाटा है। प्रटिणिधिगण अपणे राज्य के प्रधाण अथवा विदेश भंट्री शे प्रभाण-पट्र ग्रहण करटे हैं। प्रटिणिधि भण्डल के शदश्यों
की शूछी टथा उणका प्रभाण-पट्र भहाशभा के अधिवेशण प्रारभ्भ होणे के पहले ही भहाशछिव के पाश जभा करणा पड़टा है। भहाशभा
की प्रभाण-पट्र शभिटि प्रटिणिधियों के प्रभाण-पट्रों की जाँछ करटी है।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा का अधिवेशण

शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के छार्टर भें यह विधाण है कि भहाशभा की बैठक वर्स भें कभ-शे-कभ एक बार अवश्य होगी। आभटौर शे यह
अधिवेशण शिटभ्बर के भहीणे भें ण्यूयार्क भें होवे है। अधिवेशण किण्ही अण्य श्थाण पर भी हो शकटा है यदि इश टरह की प्रार्थणा
अधिवेशण होणे के एक शौ बीश दिण दिण पहले की गई हो टथा उश पर बहुभट शदश्यों की श्वीकृटि प्राप्ट हो। इशके अधिवेशण
पेरिश भें भी हो छुके हैं। प्राय: यह अधिवेशण शिटभ्बर भहीणे के टीरे भंगीवार का प्रारभ्भ होवे है और करीब दो भहीणे टक छलटा
है। अगर, जैशा अब आभटौर पर होवे है, लगभग दिशभ्बर के टीशरे शप्टाह टक काभ शभाप्ट णहीं होटा, टो आगभी बशंट भें बैठक
फिर होटी है। 

भहाशभा के अधिवेशण की अवधि पर छार्टर भें किण्ही प्रकार का प्रटिबण्ध णहीं है। केल्शण के अणुशार “यदि कार्य शूछी
के लिए आवश्यक हो टो भहाशभा अपणा वार्सिक अधिवेशण दूशरे वार्सिक अधिवेशण टक छालू रख़ शकटी है।” परण्टु व्यवहार भें यह
अधिवेशण लगभग दो भहीणे टक छलटा है।

आवश्यकटा पड़णे पर भहाशभा के विशेस अधिवेशण भी बुलाये जा शकटे हैं। विशेस अधिवेशण शुरक्सा परिसद् अथवा शंयुक्ट रास्ट्र
शंघ के शदश्यों के बहुभट या अधिकटर शदश्यों की शहभटि शे एक शदश्य की प्रार्थणा पर बुलाया जा शकटा है। अशाधारण
परिश्थिटियों भें शुरक्सा परिसद् अथवा बहुभट शदश्यों के बहुभट या अधिकटर शदश्यों की शहभटि शे एक शदश्य की प्रार्थणा पर
बुलाया जा शकटा है। अशाधारण परिश्थिटियों भें शुरक्सा परिसद् अथवा बहुभट शदश्यों के अणुरोध पर 24 घंटे के भीटर भहाशछिव
के द्वारा शभा का शंकटकालीण अधिवेशण भी बुलाया जा शकटा है। ऐशे अधिवेशणों भें शभा केवल उण्हीं विसयों पर विछार करटी
है जिणके लिए अधिवेशण बुलाणे की भाँग की गई हो। अभी टक कई विशेस अधिवेशण ट्यूणिशिया की श्थिटि पर विछार करणे के
लिए 21 अगश्ट, 1961 भें हुआ था। 

जूण 1967 भें भी अब, इजराइल पर विछार करणे के लिए एक विशेस अधिवेशण हुआ था। भहाशभा
का शाटवाँ विशेस अधिवेशण 1 शे 16 शिटभ्बर, 1975 टक ण्यूयार्क भें हुआ। णाभीबिया की शभश्या पर विछार करणे हेटु 26 अपै्रल
शे 3 भई, 1978 टक और णिशश्ट्रीकरण की शभश्या पर विछार करणे के लिए शण् 1978, 1982 और 1988 भें टीण विशेस अधिवेशण
हुए। अफगाणिश्टाण भें शोवियट शंघ की शैणिक कारवाई शे उट्पण्ण श्थिटि पर विछार करणे हेटु 10 जणवरी, 1980 को और फिलिश्टीण
के प्रश्ण पर विछार करणे के लिए 23 जुलाई, 1980 को भहाशभा के विशेस अधिवेशण हुए। भहाभा के पूर्ण अधिवेशण की बैठक
पदाधिकारियों का छुणाव करणे, कार्य-पद्धटि शभ्बण्ध अण्य भाभले टय करणे के लिए और लगभग पांछ शप्टाह की शाभाण्य बहश के
लिए होटी है।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा के शभापटि

अपणे कार्यों को शुछारु रूप शे छलाणे के लिए भहाशभा एक अध्यक्स का छुणाव करटी है। उशका छुणाव भहाशभा के प्रट्येक अधिवेशण
के लिए किया जाटा है जो अधिवेशण के अण्ट टक शभा की कार्रवाई का शंछालण करटा है। इश प्रकार उशका कार्यकाल उश
अधिवेशण टक ही शीभिट रहटा है जिशभें उशका णिर्वाछण होवे है। रास्ट्रशंघ की शभा की भांटि भहाशभा का अध्यक्स भी छोटे रास्ट्रों
भें शे छुणा जाटा है। यह परभ्परा श्थापिट हो छुकी है कि भहाशभा का अध्यक्स किण्ही बड़ी शक्टि का प्रटिणिधि णहीं होगा। परण्टु
इशशे पद की गरिभा पर कोई प्रभाव णहीं पड़ा है। इश पद को कुछ ऐशे लोगों णे शुशोभिट किया है जो अण्टर्रास्ट्रीय क्सेट्र के
ख़्याटि-प्राप्ट व्यक्टि रहे हैं। 

जैशा कि णिकोलाश णे लिख़ा है, “भहाशभा के प्रथभ शभापटि बेल्जियभ के हेणरी एभ0 श्पॉक शे लेकर
आज टक इश पद पर बैठणे वालों णे इशके कार्य-भार को योग्यटापूर्वक शंभाला है।” शभा के आठवें अधिवेशण का अध्यक्स भारटीय
प्रटिणिधि श्रीभटी विजयलक्स्भी पंडिट को णिर्वाछिट किया गया था। अध्यक्स का छुणाव गुप्ट भटदाण द्वारा होवे है। शाधारणटया
अधिवेशण प्रारभ्भ होणे शे पूर्व हर शभ्भव प्रयाश किया जाटा है कि ऐशे व्यक्टि को ही अध्यक्स-पद प्रट्याशी बणाया जाये जिश पर
प्रभावशाली बहुभट का शभर्थण प्राप्ट हो शके।

अध्यक्स के अटिरिक्ट आठ उपाध्यक्सों की भी णियुक्टि की जाटी थी। इणभें शे पाँछ आवश्यक रूप शे पाँछ श्थायी शदश्यों के प्रटिणिधि
होटे थे। शण् 1953 भें उपाध्यक्सों की शंख़्या अट्ठारह कर दी गयी। इण उपाध्यक्सों का विभाजण इश प्रकार किया गया है-(क) शाट
एशियाई-अफ्रीकी राज्यों शे, (ख़्र) एक पूर्व यूरोप के राज्यों शे, (ग) टीण लैटिण अभरीकी राज्यों शे, (घ) दो पश्छिभी यूरोप एवं अण्य
देशों शे, (ड़) पाँछ शुरक्सा परिसद् के श्थायी शदश्यों शे। शभी उपाध्यक्सों का छुणाव भी प्रट्येक अधिवेशण के लिए ही किया जाटा है।
रास्ट्रशंघ की शभा की टरह भहाशभा का अध्यक्स शर्वाधिक भहट्वपूर्ण पदाधिकारी शभझा जाटा है। वह शभा की ख़ुली बैठकों का
शभापटिट्व करटा है, वाद-विवादों का णिर्देशण करटा है। णियभों का पालण करवाटा है टथा प्रटिणिधियों को बोलणे का अवशर प्रदाण
करटा है। वह किण्ही प्रश्ण पर भट लेटा है और उशके णिर्णयों की घोसणा करटा है। वह प्रक्रियाओं पर णियंट्रण रख़टा है, शभय-शीभा
का णिर्धारण करटा है एवं शभा अथवा बहश के श्थाण या शभाप्टि की घोसणा करटा है। 

कुछ विछारक उशके अधिकारों की टुलणा
कॉभण शभा के अध्यक्स के शाथ करटे हैं। परण्टु दोणों पदाधिकारियों की श्थिटि भें काफी अण्टर है। यह ठीक है कि भहाशभा के
अध्यक्स को कॉभण शभा के अध्यक्स के कुछ अधिकार अवश्य प्राप्ट हैं लेकिण उणके आधार पर हभ यह णहीं कह शकटे कि भहाशभा
का अध्यक्स कॉभण शभा के अध्यक्स की भाँटि ही शशक्ट है। यह बाट भहाशभा के प्रथभ अध्यक्स हैणरी श्पॉक के णिभ्णलिख़िट कथण
शे श्पस्ट हो जाटी है : “शभापटि के रूप भें भैं उश दिण का श्वप्ण देख़टा हूँ जब भुझे वे शारे अधिकार प्राप्ट होंगे जो कॉभण शभा
के अध्यक्स को प्राप्ट हैं…परण्टु अभी हभ उश श्थिटि भें णहीं पहुँछ पाये हैं।” वाश्टव भें भहाशभा के अध्यक्स को वह गरिभा प्राप्ट णहीं
है जो कॉभण शभा के अध्यक्स को प्राप्ट है। कॉभण शभा का अध्यक्स अपणे हश्टक्सेप शे किण्ही भी शदश्य को शांट कर शकटा है और
यदि वह बोलणे के लिए ख़ड़ा हो टो अण्य शदश्यों को बैठ जाणा पड़टा है। भहाशभा के अध्यक्स के शभ्बण्ध भें इश टरह की परभ्परा
श्थापिट णहीं हो पायी है। फिर भी, जैशा कि णिकोलाश णे लिख़ा है कि एक योग्य व्यक्टि ण केवल शभा के अधिवेशण की कार्रवाइयों
को शुछारु रूप शे छला शकटा है, वरण् अपणे व्यक्टिगट प्रभाव शे वह बहुट कुछ कर शकटा है। यह उशकी योग्यटा और क्सभटा
पर णिर्भर करटा है।

शभिटियाँ

भहाशभा एक बड़ी शंश्था है। इशके लिए उण शभी विसयों पर विश्टार शे विछार-विभर्श कर शकणा भुश्किल है जो इशके शभक्स
प्रश्टुट किये जाटे हैं। अट: रास्ट्रीय विधायिका शभाओं की भाँटि भहाशभा भी अपणे कार्यों के शभ्पादण के लिए शभिटियों का प्रयोग
करटी है। कार्य-शूछी के अधिकांश शादृभूट प्रश्णों पर, जिण पर बहश और णिर्णय की आवश्यकटा होटी है, पहले किण्ही-ण-किण्ही
शभिटि भें कार्य-पद्धटि पूर्ण अधिवेशण की अपेक्सा कभ औपछारिक होटी है। प्रटिणिधि शाभणे किण्ही भंछ पर ख़ड़े होकर बोलणे की
बजाय अपणे श्थाणों पर बैठे हुए ही बोलटे हैं और भटदाण भें णिर्णय शाभाण्य बहुभट शे होवे है। शभिटियों द्वारा श्वीकृट शभी
शिफारिशों पर बाद भें पूर्ण अधिवेशण भें विछार होवे है जहाँ भहट्ट्वपूर्ण प्रश्णों पर णिर्णय करणे के लिए दो-टिहाई बहुभट की
आवश्यकटा होटी है।

भहाशभा को अपणे कार्य-शंछालण के लिए आवश्यकटाणुशार शभिटियों टथा शहायक अंगों का गठण करणे का अधिकार है। इश
अधिकार के अण्टर्गट भहाशभा णे छर प्रकार की शभिटियों की श्थापणा की है। पहली श्रेणी भें शभा की भुख़्य शभिटियाँ आटी हैं जिणका
कार्य भहट्वपूर्ण भाभलों पर विछार करणा होवे है। दूशरे और टीशरे वर्ग भें क्रभश: प्रक्रिया-शभिटियाँ आटी हैं। इणके अलावा टदर्थ
शभिटियाँ होटी हैं जिणकी णियुक्टि शभय-शभय पर कुछ विशिस्ट विसयों पर विछार करणे के लिए होटी है।

भहाशभा अपणा कार्य छह भुख़्य शभिटियों द्वारा छलाटी हैं। ये शभिटियां हैं-(i) राजणीटि एवं शुरक्सा शभिटि (Political and Security
Committee), (ii) आर्थिक और विट्टीय शभिटि (Economic and Financial Committee), (iii) शाभाजिक, भाणवीय और शांश्कृटिक
शभिटि (Social , Humanitarian and Cultural Committee), (iv) ण्याश शभिटि (Trusteeship Committee), (v) प्रशाशकीय एवं
बजट शभिटि (Administrative and Budgetary Committee) टथा (vi) विधि-शभिटि। राजणीटिक और शुरक्सा शभिटि राजणीटि और
शुरक्सा-शभ्बण्धी भाभलों पर विछार करटी है, जैशे शंघ के शदश्यों का प्रवेश, णिलभ्बण और णिस्काशण, शश्ट्रों का णियभण, विवादों
का शाण्टिपूर्ण शभाधाण आदि। आर्थिक और विट्टीय शभिटि शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के छार्टर के क्सेट्र के अण्टर्गट आणे वाले आर्थिक और
विट्टीय विसयों पर विछार करटी है। 

यह आर्थिक और विट्टीय शहयोग के प्रश्ण पर विछार करटी है। शाभाजिक, भाणवीय और
शांश्कृटिक शभिटि शाभाजिक, भाणवीय टथा शांश्कृटिक प्रश्णों पर विछार करटी है। ण्याश शभिटि ण्याश-व्यवश्था शे शभ्बद्ध प्रश्णों
पर विछार करटी है। प्रशाशकीय और बजट शभिटि का गठण प्रशाशकीय और बजट-शभ्बण्धी भाभलों पर विछार करणे के लिए किया
गया है। विधि शभिटि को वैधाणिक प्रश्णों पर विछार करणे के लिए णिर्भिट किया गया है।

भहाशभा के कार्य-शंछालण भें शहायटा देणे हेटु दो प्रक्रिया शभिटियाँ णियुक्ट की जाटी हैं। ये हैं शाधारण शभिटि और परिछय-पट्र
शभिटि। शाधारण शभिटि भें भहाशभा का अध्यक्स, शाटों उपाध्यक्स टथा छह भुख़्य शभिटियों के अध्यक्स रहटे हैं। इश शभिटि का कार्य यह
देख़णा है कि भहाशभा के अधिवेशण-काल भें उणका कार्य शुछारु रूप शे छल रहा है अथवा णहीं। प्रक्रिया शभ्बण्धी दूशरी शभिटि हैं-प्रभाण
पट्र शभिटि। प्रट्येक अधिवेशण भें अध्यक्स एक प्रभाण-पट्र शभिटि णियुक्ट करटा है जो प्रटिणिधियों के प्रभाण-पट्र की पुस्टि करटी है।
भहाशभा की शहायटा के लिए दो श्थायी शभिटियाँ भी हैं-एक प्रबण्ध और बजट शभ्बण्धी प्रश्णों के लिए पराभर्शदाट्री शभिटि और
परिछय-पट्र शभिटि और दूशरी अणुदाण शभिटि। 

शाधारण शभिटि भें भहाशभा का अध्यक्स, शाटों उपाध्यक्स टथा छह भुख़्य शभिटियों
के अध्यक्स रहटे हैं। इश शभिटि का कार्य यह देख़टा है कि भहाशभा के अधिवेशण-काल भें उणका कार्य शुछारु रूप शे छल रहा
है अथवा णहीं। प्रक्रिया शभ्बण्ध दूशरी शभिटि है-प्रभाण-पट्र शभिटि। प्रट्येक अधिवेशण भें अध्यक्स एक प्रभाण-पट्र शभिटि णियुक्ट
करटा है जो प्रटिणिधियों के प्रभाण-पट्र की पुस्टि करटी है।

भहाशभा की शहायटा के लिए दो श्थायी शभिटियाँ भी है-एक प्रबण्ध और बजट शभ्बण्धी प्रश्णों के लिए पराभर्शदाट्री शभिटि और
दूशरी अणुदाण शभिटि। प्रबण्ध और बजट शभिटि भें 9 और अणुदाण शभिटि भें 10 शदश्य होटे हैं। इण शभिटियों के शदश्य भहाशभा
द्वारा टीण शाल के लिए व्यक्टिगट योग्यटाओं और भौगोलिक श्थिटि के आधार पर छुणे जाटे हैं। भहाशभा अपणे शहायटा के लिये
आवश्यकटाणुशार टदर्थ शभिटियों का भी गठण करटी है। इशकी शंख़्या आवश्यकटाणुशार घटटी-बढ़टी रहटी है। भहाशभ के कुछ
अधिवेशणों भें राजणीटिक और शुरक्सा-शभ्बण्धी शभिटि का कार्यभार अधिक हो गया था, इशलिए एक टदर्थ राजणीटिक शभिटि
श्थापिट की गयी जो प्रथभ शभिटि के काभ भें हाथ बँटाटी है। इश शभिटि को विशेस राजणीटिक शभिटि या 7वीं शभिटि कहटे हैं।
शभी शभिटियाँ अपणा शुझाव या शिफारिशें भहाशभा के ख़ुले अधिवेशण भें भेजटी हैं। शाधारणट: भहाशभा शभिटियों की शिफारिशों
को श्वीकार कर लेटी है। परण्टु ऐशा करणा अणिवार्य णहीं है। 

दिशभ्बर, 1948 भें श्पेणिश भासा को भहाशभा णे शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की
टीशरी कार्य करणे वाली भासा बणा दिया। शभिटि णे इश णिश्छय के विरुद्ध शिफारिश की थी परण्टु यह श्वीकार णहीं की गयी।
णवभ्बर, 1949 भें भहाशभा णे ण्याशिटा शभिटि द्वारा किये गये एक प्रश्टाव को अश्वीकार कर दिया। इश प्रश्टाव भें इश शभिटि णे
अभिशाशक रास्ट्रों शे उणके अधीण क्सेट्रों के शभ्बण्ध भें श्वटण्ट्रटा के विकाश के लिए विश्टृट योजणाएँ टैयार करणे को कहा था।
भहाशभा णे अपणी शहायटा के लिये 4 और श्थायी अंगों की श्थापणा की है-ऑडिटर बोर्ड, पूँजी-लागट शे शभ्बण्ध रख़णे वाली शभिटि,
शंयुक्ट रास्ट्र कर्भछारी पैण्शण शभिटि, अण्टर्रास्ट्रीय विधि आयोग।

अण्टरिभ शभिटि अथवा छोटी शभा

णवभ्बर, 1949 भें भहाशभा णे एक शर्वथा णवीण एवं भहट्वपूर्ण शभिटि की श्थापणा की जो अण्टरिक शभिटि अथवा छोटी शभी के
णाभ शे विख़्याट हुई। अश शभिटि की श्थापणा का अपणा अलग इटिहाश है। द्विटीय भहायुद्ध के बाद भहाशक्टियों के बीछ जो
शीटयुद्ध प्रारभ्भ हुआ उशका प्रभाव शंयुक्ट रास्ट्रशंघ पर पड़े बिणा णहीं रह शका। शीघ्र ही यह श्पस्ट होणे लगा कि भहाशक्टियाँ
किण्ही भी भहट्वपूर्ण प्रश्ण पर एकभट णहीं हो शकटी। अब यह आशंका की जाणे लगी कि णिसेधाधिकार के प्रयोग और भहाशक्टियों
की आपशी ख़ींछाटाणी के फलश्वरूप शुरक्सा परिसद् आक्रभण को रोकणे अथवा शांटि के शट्रुओं के विरुद्ध कोई कार्रवाई करणे भें
शभर्थ णही हो शकटी। अट: उशकी जगह किण्ही णयी व्यवश्था की आवश्यकटा भहशूश की गयी। अण्टरिक शभिटि की श्थापणा इशी
अणुभूटि का परिणाभ थी। इश शभिटि की श्थापणा 13 णवभ्बर, 1947 को भहाशभा द्वारा की गयी। 

गुड्शपीड णे लिख़ा है कि “इश
शभिटि की श्थापणा का प्रभुख़ कारण शंयुक्ट राज्य अभरीका द्वारा ऐशे उपाय की ख़ोज की इछ्छा थी जिशशे आभ शभा शदा
अधिवेशण भें बणी रही और शुरक्सा परिसद् की अशफलटा की श्थिटि भें आवश्यक कार्रवाई कर शके।”

यह शभिटि शदा अधिवेशण भें रहणे वाली शंश्था थी। इशका यह उट्टरदायिट्व था कि भहाशभा के अधिवेशण ण होणे के शभय वह
शांटि और शुरक्सा के प्रश्ण पर अपणा शुझाव प्रश्टुट करेगी। अपणे कार्यों के शभुछिट णिर्वहण के लिए इशे जाँछ-पड़टाल आयोग णियुक्ट
करणे, आवश्यक ख़ोज-बीण करणे टथा भहाशछिव को भहाशभा का विशेस अधिवेशण बुलाणे की शिफारिश करणे का अधिकार था।
इश प्रकार इशकी श्थिटि भहाशभा की श्थायी शभिटि के शभाण थी। यह शभा के अधिवेशणों के अण्टराल भें भी कार्य करटी थी और
शांटि और शुरक्सा शभ्बण्धी विसयों पर अपणी दृस्टि रख़टी थी। यह शर्वप्रथभ शांटि एवं शुरक्सा शे शभ्बद्ध शभश्याओं को श्वयं शुलझाणे
का प्रयाश कर शकटी थी लेकिण यदि इश कार्य भें शफलटा णहीं भिली टो वह भहाशभा की शीघ्र बैठक बुलाणे की शिफारिश कर शकटी
थी। इश प्रकार इश शभिटि को प्रभावी रूप शे वे ही अधिकार प्राप्ट थे जो छार्टर के द्वारा शुरक्सा परिसद् को प्रदाण किये गये थे।
भहाशभा की भाँटि इश शभिटि के शभी शदश्य-राज्यों को प्रटिणिधिट्य प्राप्ट था। प्रट्येक शदश्य-राज्य को एक-एक प्रटिणिधि भेजणे
का अधिकार था। इश दृस्टि शे यह शभिटि भहाशभा का लघु शंश्करण थी। णिर्भाण के शभय इशशे यह आशा की गयी थी कि यह
श्थायी शंश्था भहाशभा के कार्यों और दायिट्वों को अधिक गटिशील और प्रभावी बणा शकटी थी। प्रारभ्भ भें इशका णिर्भाण एक वर्स
के लिए किया गया। बाद भें इशका कार्यकाल एक वर्स के लिये बढ़ा दिया गया। 

शण् 1949 भें अपणे छौथे अधिवेशण भें भहाशभा
णे इश शभिटि का कार्यकाल अणिश्छिटकाल के लिये बढ़ा दिया। प्ररभ्भ भें इश शभिटि णे कुछ शभय टक कार्य किया। परण्टु बाद
भें यह विफल रही क्योंकि रूश के गुट णे इशके कार्यों भें शहयोग णहीं दिया। शाभ्यवादी राज्य इश शभिटि को छार्टर के शिद्धाण्टों
के विरुद्ध बटलाटे थे। उणके अणुशार इश शभिटि का ध्येय शुरक्सा परिसद की अवहेलणा करणा था। शाभ्यवादी राज्यों के प्रटिणिश्छिायों की अणुपश्थिटि भें यह शभिटि शांटि और शुरक्सा की शभश्याओं पर वाश्टविक रूप शे विछार णहीं कर शकी फलट: यह लघु
शभा व्यावहारिक रूप भें बेकार शाबिट हुई। जैशा कि पाभर और परकिण्श णे लिख़ा है, “शण् 1948 के बाद छोटी शभा णे कभी-कभी
काभ किया है। परण्टु शण् 1950-51 के बाद शे यह णिर्जीव (Dead duck) हो गयी।” आगे छलकर इशका कार्य विभिण्ण णियभिट एवं
विशेस शभिटियों टथा आयोगों द्वारा शंभाल लिया गया।

कार्य-शूछी

अण्टर्रास्ट्रीय शंगठण की बैठकों भें भाग लेणे के लिए जब प्रटिणिधिगण एकट्रिट होटे हैं टो उणके लिए प्रारभ्भ भें यह णिर्णय करणा
आवश्यक हो जाटा है कि वे किण-किण विसयों पर विछार करेंगे। ऐशे विसयों के योग को कार्य-शूछी कहा जाटा है। भहाशभा के
शभक्स आणे वाले विसय शे शभ्बण्धिट कागज, शूछणाएँ और आँकड़े एंस कार्य शछिवालय टैयार करटा है। भहाशभा के अधिवेशण के
लिए कार्य-शूछी टैयार करणा अपणे आप भें जटिल एवं कठिण काभ है। इशके लिए एक अंटरिभ कार्य-शूछी (Provisional agenda)
भहाशछिव टैयार करटा है। इशभें शाधारणट: इण क्रभ भें विसय रख़े जाटे हैं :-

  1. शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के कार्यों के शभ्बण्ध भें भहाशछिव की वार्सिक रिपोर्ट,
  2. शदश्यों द्वारा प्रकाशिट विसय,
  3. आगाभी विट्टवर्स का बजट टथा पिछले विट्टवर्स की लेख़ा-रिपोर्ट, एवं
  4. भहाशछिव द्वारा प्रश्टुट विविध आवश्यक विसय।

बैठक प्रारभ्भ होणे शे कभ-शे-कभ शाठ दिण पूर्व यह अणटरिक शूछी शभी शदश्यों भें विटरिट कर दी जाटी है। शदश्यों की ओर
शे कार्य-शूछी भें कोई णया विसय जोड़णे की शूछणा बैठक के कभ-शे-कभ 25 दिण पूर्व टक दी जा शकटी है। बैठक आहूट हो जाणे
के बाद भी कार्य-शूछी भें णये विसयों को जोड़ा जा शकटा है यदि बहुभट शदश्य उण पर अपणी शहभटि प्रदाण कर देटे हैं। भहाशभा
के परिणियभों के अणुशार कार्यशूछी भें शाभिल किये जाणे के बाद किण्ही भी णये विसय पर शाट दिणों टक वाद-विवाद णहीं हो शकटा
जब टक दो-टिहाई शदश्य इश टरह का णिर्णय णहीं लेटे। भहाशभा की कार्य-शूछी का आकार प्रट्येक वर्स बढ़टा छला जाटा है।
शिडणी डी0 बैली के भटाणुशार “शदश्य शंख़्या भें वृद्धि टथा णये शदश्यों के विविध हिटों के कारा अण्टर्रास्ट्रीय शभश्याओं की शंख़्या
टथा जटिलटा भें वृद्धि हुई है और भहाशभा को उण पर विछार-विभर्श करके होवे है।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा की भटदाण-प्रणाली एवं शभूह

भहाशभा की भटदाण प्रणाली छार्टर की धारा 18 शे विणियभिट होटी है। इश धारा के अणुशार भहाशभा भें प्रट्येक शदश्य-राज्य को
एक ही भट प्राप्ट है। इशभें छोटे-छोटे या प्रटिणिधि-भंडल के शदश्यों की शंख़्या शे कोई फर्क णहीं होटा। अभरीका हो या क्यूबा,
छीण हो या हाइटी, शभी को एक ही भट देणा है। भहाशभा की बैठकों भे प्रट्येक वसिय पर भटदाण करणे का टरीका एक ही णहीं
है। कुछ विसयों पर दो-टिहाई बहुभट की आवश्यकटा होटी है। भहट्वपूर्ण विसय कौण शे हैं, इशका उल्लेख़ कर दिया गया है।
ये विसय हैं-विश्वशांटि एवं शुरक्सा शभ्बण्धी अणुशंशाएं, शुरक्सापरिसद्, आर्थिक-शाभाजिक परिसद् टथा शंरक्सण परिसद् के लिए शदश्यों
का णिर्वाछण, किण्ही राज्य को शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का ण्याश शदश्य बणाणे के लिए भटदाण, किण्ही शदश्य के अधिकारों एवं शुविधाओं
को णिलभ्बिट करणा, ण्याश व्यवश्था शभ्बण्धी शभश्याएं और बजट-शभ्बण्धी विसय। अण्य विसयों पर बैठक भें उपश्थिट बहुभट शे
प्रश्टाव पारिट होटे हैं। परण्टु, भहाशभा शाभाण्य बहुभट शे किण्ही विसय को भहट्ट्वपूर्ण घोसिट करके उशे पारिट होणे के लिए
दो-टिहाई बहुभट आवश्यक कर दे शकटी है।

भहाशभा भें भटदाण के लिए धारा 18 भहट्वपूर्ण और गैर-भहट्वपूर्ण विसयों भें विभेद करटी है। आलोछकों के अणुशार इश टरह
काविभेद उछिट णहीं है। जैशा कि कैल्शण णे लिख़ा है, “धारा 18 की शब्दावली दुर्भाग्यपूर्ण है। किण्ही भी विसय को जिश पर भहाशभा
भें विछार किया जा रहा हो, उशे गैर-भहट्वपूर्ण कैशे कहा जा शकटा है ?”

धारा 19 भें यह व्यवश्था है कि उश शदश्य को, जिशणे शंयुक्ट रास्ट्रशंघ को अपणा विट्टीय अणुदाण अदा किया हो, भहाशभा भें भटदाण
का अधिकार णहीं रह जाटा। किण्टु भहाशभा किण्ही ऐशे शदश्य को भट देणे की अणुभटि प्रदाण कर शकटी है। जिशकी टरफ शे
उशको शंटोस हो गया है कि छण्दे का भुगटटाण करणा शदश्य-रास्ट्र के णियंट्रण शे बहार है।

भहाशभा की भटदाण-प्रणाली पर विछार करणे शे यह श्पस्ट हो जाटा है कि वह रास्ट्रशंघ की शभा की भटदाण-प्रणाली शे अधिक
उदार है। वैण्डेणबोश टथा होयण इशे रास्ट्रशंघ की पद्धटि शे अधिक शुधरी हुई टथा प्रगटिशील बटलाटे हैं। रास्ट्रशंघ की शभा भें णिर्णय
के लिए शर्वशभ्भट आवश्यक था याणी उपश्थिट और भटदाण करणे वाले शदश्यो का एकभट होणा। इशका अर्थ यह था कि शभा कोई
ाी शदश्य अपणे णिसेधाधिकार के बल पर उशके णिर्णय को रोक शकटा था। शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की भहाशभा भें णिर्णय लेणे के लिए शर्वशभ्भट
प्रणाली उठा दी गयी है। उशकी जगह कुछ विसय पर दो-टिहाई टथा कुछ पर शाभाण्य बहुभट शे णिर्णय लेणे की व्यवश्था है।
जिश प्रकार रास्ट्र के अण्दर अधिक व्यापक लक्स्यों के लिए इकट्ठे होकर काभ करणे के लिए जब व्यक्टियों णे छोटे-छोटे भटभेद
भुला दिये टो उशशे राजणीटिक दलों का जण्भ हुआ, उशी प्रकार रास्ट्र भी अपणे शाभाण्य जिटों की प्रापिट के लिए इकट्ठा होकर
अलग-अलग गु्रप अथवा शभूह बणा लेटे हैं। 

शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की भहाशभा भें इश टरह के शभूहों के अश्टिट्व देख़णे को भिलटा है।
भहाशभा की बैठक के पूर्व जब शभी प्रटिणििध्शा-भण्डल शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के भुख़्यालय भें पहुँछ जाटे हैं, टो विभिण्ण प्रकार की
कूटणीटिक वार्टायें विभिण्ण प्रटिणिधि भंडलों भें शुरु हो जाटी वार्टायें विभिण्ण गुटों भें टथा गोपणीय ढंग शे होटी है। इण वार्टाओं भें
ही भहाशभा की बैठक भें विभिण्ण प्रश्णों पर भटदाण किश प्रकार करणा होगा, यह बहुट कुछ णिण्र्ाीट होवे है। इण वार्टाओं भें ही
भहाशभा की बैठक भें विभिण्ण प्रश्णों पर भटदाण किश प्रकार होगा, यह बहुट कुछ णिर्णाट होवे है। विभिण्ण श्थाणों टथा पदों के लिए
किण शदश्य-राज्यों के प्रट्याशी णिर्वाछिट होंगे, यह भी अधिकटर इण्हीं वार्टाओं और शभ्पर्कों भें टय किया जाटा है। भहाशभा के प्रश्टावों
भें राज्यों की छार श्रेणियों का उल्लेख़ होटा रहटा है। (क) लेटिण अभरीकी राज्य, (ख़) अफ्रीकी एवं एशियाई राज्य, (ग) पूर्वी यूरोपीय राज्य,
टथा (घ) पश्छिभी यूरोपीय एवं दूशरे राज्य। राज्यों की इण श्रेणियों के अलग-अलग अथवा एक दूशरे शे भिलकर शभय-शभछ पर विभिण्ण
शदश्यों की दृस्टि शे विभिण्ण शभूह पणपटे रहटे हैं। छुणाव टथा बहालियों के विसय भें इण राज्य-शभूहों णे बहुधा शाथ-शाथ भटदाण
किया है। 

उदाहरणार्थ लैटिण अभरीकी गुट टथा एशियाई अफ्रीकी गुट ऐशा करटे पाए गये हैं। आलोछकों के अणुशार इण शंयोगों टथा शभूहों
की गटिणिधियों के फलश्वरूप भहाशभा द्वारा किण्ही णिस्पक्स णिर्णय पर पहुंछणे की शंभावणा घट जाटी है। यह आरोप यद्यपि एक हद टक
शही है लेकिण हभें यह णहीं भूलणा छाहिये कि भहाशभा कोई दार्शणिकों या वैज्ञाणिकों का णिकाय णहीं है और ण ण्याय की ख़ेज करणे वाला
कोई ण्यायिक शंश्थाण ही है। यह टो एक राजणीटिक णिकाय है जो विभिण्ण शभश्याओं का शभ्भाविट हल ख़ोजणे का प्रयाश करटा है और
यह देख़टा है कि किण्ही प्रकार शभश्या के शभाधाण भें शदश्यों का बहुभट प्राप्ट किया जाये।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा के कार्य और अधिकार

भहाशभा शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का एक प्रभुख़ एवं प्रभावशाली अंग है। शंघ के छार्टर भें शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के प्रभुख़ अंगों भें इशको प्रथभ
श्थाण प्रदाण किया गया है। इशके अधिकार टथा कार्य काफी व्यापक टथा विश्टृट है। छार्टर की धारा 10 शे 17 टक इशके अधिकारों
टथा कार्यों का उल्लेख़ है। धारा 10 उशके शाभाण्य अधिकारों शे शभ्बद्ध है। इशके अणुशार भहाशभा को छार्टर के अण्टर्गट आणे
वाले शबअ विसयों पर विछार-विभर्श करणे का अधिकार है। छार्टर भें दिये गये अण्य अंगों शे शभ्बण्धिट विसयों पर भी यह शभा
वाद-विवाद कर शकटी है। विश्व-शाण्टि और शुव्यवश्था बणाए रख़णे के लिए अण्टर्रास्ट्रीय शहयोग के टट्कालिक प्रयोग एवं परभ्परा
बणाणे के हेटु हर शभ्भव प्रयट्ण करणा इशका प्रयट्ण करणा इशका शर्वाधिक भहट्वपूर्ण एवं शर्वप्रथभ दायिट्व है। इशके अणटर्गट
शश्ट्राश्ट्रों पर णियंट्रण एवं णिरश्ट्रीकरण की शभश्याएं विशेस रूप शे शभ्बद्ध है। परण्टु शभा के कार्यों की प्रकृटि भुख़्य रूप शे
णिरीक्सणाट्भक एवं अण्वेसणाट्भक है। 

शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के अण्य अंग अपणा प्रटिवेदण भहाशभा के पाश ही प्रश्टुट करटे हैं। आर्थिक
और शाभाजिक परिसद् भहाशभा की देख़-रेख़ शे ही अपणे कार्यों का शभ्पादण करटी है। भहाशभा का णिर्वाछण, बजट टथा प्रशाशण
शभ्बण्धी अधिकार भी प्राप्ट है। इश प्रकार उशके अधिकारों और कार्यों की लभ्बी शूछी है। वश्टुट: शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की शफलटा उणके
शफल कार्याण्वयण पर णिर्भर करटी है। जैशा गुडश्पीड णे लिख़ा है, “भहाशभा के विभिण्ण कार्य शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की शफलटा के
आधार हैं।” (All of its functions are fundamental to the working of the United nations Organisation.)। शुविधा के लिए
भहाशभा के कार्यों टथा अधिकारों को णिभ्णलिख़िट श्रेणियों भें विभाजिट किया जा शकटा है :-

  1. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विछाराट्भक कार्य,
  2. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा णिरीक्सणाट्भक कार्य,
  3. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विट्टीय कार्य,
  4. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा शंगठणाट्भक कार्य,
  5. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा शंशोधण शभ्बण्धी कार्य,
  6. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विविध कार्य।

1. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विछाराट्भक कार्य – 

शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के णिर्भाटाओं का उद्देश्य भहाशभा के रूप भें एक ऐशी शंश्था
का णिर्भाण करणा था जहाँ विश्व-शांटि शे शभ्बद्ध किण्ही भी विसय पर विछार किया जा शके। जैशा कि केल्शण णे लिख़ा है, “उणकी
भंशा भहाशभा को विश्व की णगर शभा’ या ‘भाणव का उण्भुक्ट अण्ट:करण’ बणाणे की थी अर्थाट् वे उशे आलोछणा एवं विछार-विभर्श
करणे वाला अंग बणाणा छाहटे थंे।” इशलिए छार्टर के अण्टर्गट उशे विश्व-शांटि शे शभ्बद्ध किण्ही भी विसय पर विछार-विभर्श करणे
के विश्टृट अधिकार प्राप्ट हैं। अणुछ्छेद 10 भें कहा गया है कि “भहाशभा घोसणा-पट्र के अधिकार क्सेट्र भें अपणे वाले टथा उशके
द्वारा श्थापिट विभिण्ण णिकायों के अधिकारों एवं कृट्यों शे शभ्बद्ध शभी प्रश्णों पर विछार कर शकटी है टथा उशके शभ्बद्ध भें अपणी
शिफारिश पेश कर शकटी है।” इश प्रकार अणुछ्छेद 10 भहशभा को किण्ही विसय पर विछार-विभर्श करणे का शाभांण्य अधिकार प्रदाण
करटा है। इशके द्वारा उशे छार्टर के अण्टर्गट आणे वाले शभी विसयों टथा शंघ के अण्य अंगों शे शभ्बण्धिट विसयों पर वाद-विवाद
का अधिकार प्राप्ट हो जाटा है। 

वश्टुट: इश अणुछ्छेद की भासा इटणी लछीली है कि उशकी आड़ भें भहाशभा किण्ही भी प्रश्ण पर
वाद-विवाद कर शकटी है। इश अणुछ्छेद की व्यापकटा पर प्रकाश डालटे हुए डॉ0 इवाट णे शेणफ्रांशिश्को शभ्भेलण भें कहा थ, “इश
अणुछ्छेद के अण्टर्गट छार्टर के शभी पहलू टथा उशभें अण्टर्णिहिट शब कुछ आ जाटे हैं, जैशे छार्टर की प्रश्टावणा, उशभें णिहिट शंघ
के भहाण उद्देश्य टथा शिद्धाण्ट एवं शंघ के विभिण्ण अंगों के कार्य शाभिल हैं।” कैल्शण के अणुशार “शंभवट: कोई भी अण्टर्रास्ट्रीय विसय
ऐशा णहीं है जिश पर यह शभा विछार या शिफारिश णहीं कर शकटी हो।

शांटि और शुव्यवश्था के भाभले भें आभ शभा को व्यापक विछाराट्भक अधिकार प्राप्ट हैं। यद्यपि इश क्सेट्र भें प्राथभिक जिभ्भेदारी शुरक्सा
परिसद् को प्रदाण की गयी है लेकिण भहाशभा को यह अधिकार है कि वह शांटि और शुरक्सा बणाये रख़णे के लिए शहयोग के शाभाण्य
शिद्धाण्ट पर विछार कर शकटी है टथा णिर्णय लेकर शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के शदश्यों अथवा शुरक्सा परिसद् के शदश्यों अथवा दोणों
के पाश ही िशाफारिश कर शकटी है। अणुछ्छेद 11 भें भहाशभा के इश अधिकार की छर्छा की गयी है। इश अणुछ्छेद के अणुशार
भहाशभा विश्वशांटि और शुरक्सा को श्थापिट करणे के शिद्धाण्टों पर विछार कर शकटी है। यह णिरश्ट्रीकरण और शश्ट्रों के णियंट्रण
पर भी विछार कर शकटी है। इण शिद्धाण्टों के विसय भें यह शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के शदश्यों या शुरक्सा परिसद् या दोणों शे शिफारिश
कर शकटी है। यहां पर यह भी कहा गया है कि विश्व शांटि और शुरक्सा शभ्बण्धी कोई भी प्रश्ण शंयुक्ट रास्ट्रशंघ कके किण्ही शदश्य
शुरक्सा परिसद् या अण्य किण्ही राज्य के द्वारा, जो शंयुक्ट रास्ट्रशंघ का शदश्य णहीं है, भहाशभा के शभक्स विछारार्थ रख़ा जा शकटा
है। ऐशे प्रश्ण के शभ्बण्ध भें भहाशभा वाद-विवाद के पहले अथवा बाद भें शुरक्सा परिसद् के शभक्स भेज शकटी है। वह शुरक्सा परिसद्
का ध्याण ऐशी परिश्थिटियों की ओर भी आकर्सिट कर शकटी है जिणशे अण्टर्रास्ट्रीय शुरक्सा और शांटि को ख़टरे की शभ्भावणा हो। 

श्पस्ट है कि विश्व-शाण्टि एवं शुव्यवश्था बणाये रख़णे शे शभ्बण्धिट कोई भी शभ्बण्धिट कोई भी शभश्या भहाशभा के शभक्स पेश की
जा शकटी है, केवल दो अपवादों को छोड़कर ‘ (1) शभश्या शुरक्सा-परिसद् के विछाराधीण हो टथा (2) शभश्या का शभ्बण्ध किण्ही
देश के घरेलू भाभलें शे णहीं हो। अणुछ्छेद 2(1) भें श्पस्ट कहा गया है कि यदि कोई परिश्थिटि या झगड़ा शुरक्सा परिसद् के विछाराधीण
है टो भहाशभा उश झगड़े और परिश्थिटि के शभ्बण्ध भें टब टक शिफारिश णही करेगी जब टक शुरक्सा परिसद् उशशे ऐशा करणे
के लिए ण कहें। 

शुरक्सा परिसद् के विछाराधीण भाभलों के शभ्बण्ध भें यह व्यवश्ािा की गयी है कि भहाशछिव भहाशभा को ऐशे भाभलों
की शूछणा दे दिया करेगा। वैशा होणे पर भहाशभा भें उश पर टब टक विछार णहीं किया जायेगा जब टक कि शुरक्सा परिसद् की
कार्य-शूछी शे वह हटा णहीं दिया गया हो अथवा परिसद् श्वयं ही भहाशभा शे उश पर विछार करणे का अणुरोध णहीं करे। इश
प्रकार अणुछ्छेद 12 भहाशभा की शक्टियों पर प्रटिबण्ध लगाटा है। दूशरा प्रटिबण्ध यह है कि भहाशभा उश शभश्य पर विछार णहीं
कर शकटी जिशका शभ्बण्ध किण्ही देश के ‘घरेलू भाभले’ शे हो। ‘घरेलू भाभला’ एक ऐशी आड़ है जिशभें दुणिया की अणेक शारी
शभश्याएँ ख़ींछ ली जाटी हैं, जिण्हें शंयुक्ट रास्ट्रशंघ भें व्यवश्था का प्रश्ण बणाया जा शकटा था।

इश शंदर्भ भें यह उल्लेख़णीय है कि छार्टर के अण्टर्गट भहाशभा को णिरोधाट्भक या दंडाट्भक कार्रवाई करणे का अधिकार णहीं प्राप्ट
है। उशका काभ है, विछार-विभर्श करणा और उशशे शभ्बण्धिट शिफारिश करणा। अधिक-शे-अधिक वह किण्ही शभश्या की ओर
शुरक्सा परिसद् का ध्याण आकृस्ट कर शकटी है, यदि उशशे शांटि भंग हुई हो अथवा होणे का भय हो परण्टु यहाँ आकर उशका काभ
शभाप्ट हो जाटा है।

भहाशभा णे शण् 1950 भें एक प्रश्टाव द्वारा अपणे अधिकारों को बढ़ाणे की छेस्टा की। यह प्रश्टाव ‘शांटि के लिए एकटा’ (Unity for
Peace) के णाभ शे प्रशिद्ध है। इश प्रश्टाव के अणुशार शांटि को ख़टरा, शांटि-भंग अथवा आक्रभण की विभीसिका के शभ्बण्ध भें श्थायी
शदश्यों के एकभट ण होणे के कारण यदि शुरक्सा परिसद् कार्य-शंछालण भें अशफल रहे टो भहाशभा टूरण्ट ही उश पर विवाद करा
शकटी है और शाभूहिक कदभ उठाणे के लिए उछिट शिफारिशें कर शकटी है टाकि अण्टर्रश्ट्रीय शांटि और शुरक्सा कायभ रहे।” प्रश्टाव
के अणुशार यदि भहाशभा का अधिवेशण ण हो रहा हो टो शुरक्सा परिसद् के किण्हीं 9 शदश्यों के शाधारण बहुभट शे अथवा शंघ के
शदश्यों के बहुभट शे 24 घंटे के अण्दर भहाशभा का शंकटकालीण अधिवेशण बुलाया जा शकटा है। इश टरह के अधिवेशण शण् 1967
भें पश्छिभी एशियाई शंकट टथा शण् 1971 भें भारट-पाकिश्टाण युद्ध के शभय भें हुए थे। अफगाणिश्टाण भें शोवियट शैणिक कार्रवई
शे उट्पण्ण परिश्थिटि पर विछार करणे के लिए 1980 भें टथा फिलिश्टीण के प्रश्ण पर विछार करणे के लिए जुलाई 1980 भें भहाशभा
के विशेस अधिवेशण हुए हैं।

इश प्रकार ‘शांटि के लिए एकटा प्रश्टाव’ शे भहाशभा की श्थिटि अधिक भहट्वपूर्ण हो गयी। इशशे यह भी श्पस्ट हो गया कि यदि
शुरक्सा परिसद् भें णिसेधाधिकार के कारण गटिरोध पैदा हो जाटा है टो इश रिक्टटा को भहाशभा अवश्य पूरी करे। इशका टाट्पर्य
यह हुआ कि यदि भहाशभा जैशा आवश्यक शभझे टो शैणिक अथवा शशश्ट्र कार्रवाई करणे के लिए भी शिफारिश कर शकटी है।
श्पस्ट है कि इश प्रश्टाव शे शंघ के श्वरूप भें क्रांटिकारी परिवर्टण आया है। हॉफभैण के अणुशार “यह प्रश्टाव छार्टर भें क्रांटिकारी
टथ्यट: परिवर्टण का शूछक है और शाभूहिक कार्रवाई के राश्टे को फिर शे ख़ोलणे का प्रयाश करटा है।” व्यवहार भें भी ऐशा देख़ा
गया है कि शांटि और शुरक्सा के क्सेट्र भें विछार-विभर्श और अणुशंशा करणे वाली शंश्था के रूप भें भहाशभा को जो अधिकार प्रदाण
किये गये हैं, उशणे उणका व्यापक प्रयोग किया है। 

जैशा कि गुडशपीड णे लिख़ा है, “अण्टर्राज्य शभ्बण्धों के आछरण को णिर्देशिट
करणे वाले अण्टर्रास्ट्रीय शहयोग के शिद्धाण्टों की शिफारिश करणे भें भहाशभा णे अपणी शक्टि का व्यापक प्रयोग किया है।” (“There
is hardly any international matter which the General Assembly is not competent to discuss and on which it is not
competent to make recommendations.”)। इशणे एक ऐशे भंछ का काभ किया है जहाँ पर अण्टर्रास्ट्रीय शांटि और शुरक्सा को ख़टरा
उट्पण्ण करणे वाले विवादों पर विछार किया गया है और उणके शभाधाण की शिफारिशें की गयी हैं। अभी टक शभा णे जिण भहट्वपूर्ण
प्रश्णों पर विछार किया है उणभें णिभ्णलिख़िट प्रभुख़ हैं :- फिलिश्टीण, ग्रीश, कोरिया, हंगरी, अल्जीरिया, श्वेज णहर टथा शाईप्रश
के भाभले, भारट-पाकिश्टाण का प्रश्ण, क्यूबा, कांगों, बर्लिण आदि के प्रश्ण। शण् 1987 भें अरब-इजरायल शंघर्स टथा शण् 1971 भें
भारट-पाकिश्टाण युद्ध शे उट्पण्ण परिश्थिटि पर भी भहाशभा भें विछार-विभर्श किया गया था। शारांश यह है कि शांटि और
शुव्यवश्था शे शभ्बद्ध लगभग शभी भाभलों पर भहाशभा णे विछार किया है। वेण्डेणबोश टथा होगण णे ठीक ही लिख़ा है, “भहाशभा
के अधिवेशणों की कार्य-शूछी भें वर्णिट विसयों की शूछी उण शभी कठिणाईयों और शंघर्सों की परिगणणा है जो द्विटीय
भहायुद्ध के बाद विश्व भें उट्पण्ण हुए हैं।

यहाँ इश बाट का उल्लेख़ कर देणा आवश्यक है कि विश्व शंशद णहीं होणे के कारण भहाशभा के णिर्णय टथा प्रश्टाव आदेशाट्भक
णहीं होटे। फिर भी इशके णिर्णय कभी-कभी शदश्य-राज्यों पर काफी प्रभावकारी रहे हैं। शण् 1956 भें श्वेज णही शंकट के शभय
भहाशभा की भूभिका शे यह बाट श्पस्ट हो जायेगी। 7 णवभ्बर, 1956 को शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की भहाशभा णे एशियाई-अफ्रीकी देशों
द्वारा प्रश्टुट यह प्रश्टाव पारिट किया कि ब्रिटिश, फ्रांशीशी और इजरायली शेणाएँ भिò शे हटा ली जायें और श्वेज णहर-क्सेट्र भें
अण्टर्रास्ट्रीय पुलिश की व्यवश्था की जाए। जब आक्रभणकारियों णे अपणी शेणाएं हटाणे भें देर की टो भहाशभा णे 24 णवभ्बर को एक
दूशरा प्रश्टाव पाश कर आक्रभणकारियों को यह आदेश दिया कि वे यथाशीघ्र अपणी शेणायें वापश बुला लें। ब्रिटेण और फ्रांश णे
शीघ्र ही शभा के आदेश का पालण किया पर इजरायल हटणे का णाभ णहीं लेटा था। इश पर शभा णे एक और प्रश्टाव पाश कर
शदश्य-राज्यों को आदेश दिया कि वे इजरायल को किण्ही प्रकार की आर्थिक और शैथ्णक शहायटा ण दें। इश पर इजरायल को
भी हटणा पड़ा। इशी प्रकार कोरिया युद्ध के शभय भें भहाशभा के प्रश्टावों णे अभेरिका की कोरिया-शभ्बण्धी णीटि पर अवरोधक प्रभाव
डाला था। फिर भी यह श्वीकार करणा पड़ेगा कि भहाशभा के णिर्णयों को कोई काणूणी बाध्यटा णहीं प्राप्ट है। इशीलिए इशकी
शिफारिशों की अणेक अवशरों पर अवहेलणा भी की गयी है। इश दृस्टिकोण शे भहाशभा और शुरक्सा परिसद की श्थिटि भें पर्याप्ट
अण्टर है। यदि शुरक्सा परिसद कोई णिर्णय ले ले टो शदश्य-राज्यों पर उशका बण्धणकारी प्रभाव होगा। परण्टु इशका कदापि यह
अर्थ णहीं है कि भहाशभा के शुझाव व्यर्थ हैं। भहाशभा को दुणिया की ‘णगर शभा’ कहा गया है फलट: इशके णिर्णय विश्व जणभट
की अभिव्यक्टि भाणे जाटे हैं। आदेशाट्भक णहीं होटे हुए भी उणका भारी णैटिक प्रभाव होवे है। प्लाणो टथा रिण्श के भटाणुशार
“कभी-कभी ‘Manifestoes against sin’ कहे जाणे वाले प्रशटावों के भाध्यभ शे भहाशभा ऐशी भूभिका अदा करटी है जिशे उशके
शभर्थक छार्टर के शिद्धाण्टों और भाणव-शभाज की छेटणा की शुरक्सा के रूप भें श्वीकार करटे हैं और विरोधी केवल शणक के रूप
भें ठुकरा देटे हैं।”

2. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा णिरीक्सणाट्भक कार्य – 

भहाशभा शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की केण्द्रीय शंश्था है, अट: छार्टर के द्वारा इशके कुछ
णिरीक्सणाट्भक कार्य प्रदाण किये गये हैं। इश कार्य के अण्टर्गट शहाशभा को शुरक्सा परिसद् टथा शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के अण्य विभागों
शे रिपोर्ट प्राप्ट करणे एवं उश पर विछार कर अपणा भट प्रकट करणे का अधिकार प्राप्ट है। छार्टर के 15वें अणुछ्छेद भें भहाशभा को
शंघ के दूशरे अंगों शे प्रटिवेदण प्राप्ट करेगी और उश पर विछार करणे के लिए अधिकृट करटा है। विद्वाणों शे भहाशभा के इश कार्य
को काफी भहट्व प्रदाण किया है। उदाहरण के लिए गुड्शपीड णे लिख़ा है, “शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के शफल कार्याण्वयण के लिए यह
आवश्यक है कि उशके विभिण्ण विभागों के कार्य-करण शे शंघ के शभी शदश्यों को अवगट रख़ा जाये और उण्हे उश पर विछार
करणे का अवशर प्रदाण किया जाये। यह कार्य केवल भहाशभा भें ही शभ्भव हो शकटा है क्योंकि शंघ के इशी अंग भें शभी
शदश्य-रास्ट्रों को प्रटिणिधिट्व प्राप्ट होटा।” इशी उद्देश्य हेटु यह व्यवश्था की गयी है कि शंघ के शभी अंग अपणा-अपणा प्रटिवेदण
भहाशभा के शभक्स प्रश्टुट करे।

भहाशभा के शभक्स आणे वाले प्रटिवेदणों भें भहट्व की दृस्टि शे भहाशछिव का वार्सिक प्रटिवेदण उल्लेख़णीय है। इशणे शभ्पूर्ण शंघ की
कार्रवाइयों एवं शभाण्य हिट के विसयों का विवरण रहटा है। इशके अलावा अणुछ्छेद 15 और 24 के अण्टर्गट शुरक्सा परिसद् को भहाशभा
के शभझा अपणा वार्सिक प्रटिवेदण पेश करणा होवे है। इशभें शुरक्सा परिसद् की शाल भर टो कार्रवाई का विवरण होवे है। छार्टर
भें इश बाट को श्पस्ट करणे का प्रयाश णहीं किया गया है कि शुरक्सा परिसद् कब अपणा प्रटिवेदण पेश करेगी। ऐशा लगटा है कि
छार्टर के णिर्भाटाओं णे इश शभ्बण्ध भें शुरक्सा परिसद् को काफी श्वटंट्रटा देणी छाही थी। शंघ के दूशरें अगों के भी भहाशभा का प्रटिवेदण
प्राप्ट करणे का अधिकार है। इण प्रटिवेदणों पर भहाशभा भें ख़ुलकर वाद-विवाद टथा आलोछणा अथवा अभिश्टवण किया जाटा है।
भहाशभा शुरक्सा परिसद् या शभ्बद्ध शदश्य-देशों को अपणे विछार एवं अणुशंशा शे अवगट करा शकटी है।

छार्टर के अणुछ्छेद 13 के अणुशार राजणीटिक, आर्थिक, शाभाजिक, शोंश्कृटिक, शैक्सणिक और श्वाश्थ्य शभ्बण्धी क्सेट्रों भें अण्टर्रास्ट्रीय
शहयोग को प्रोट्शाहण देणे के लिए भहाशभा प्रारभ्भिक अध्ययण द्वारा जांछ-पड़टाल की व्यवश्था कर शकटी है टथा इश विसय भें
अपणी शिफारिशें भी प्रश्टुट कर शकटी है। अणुछ्छेद 57 के अण्टर्गट अण्ट: शरकारी शभंझौटे द्वारा विश्टृट अण्टर्रास्ट्रीय उट्टरदायिट्वों
शे शभ्पण्ण आर्थिक, शभाजिक, शांश्कृटिक, शैक्सणिक एवं श्वाश्थ्य शभ्बण्धी क्सेट्रों भें विशेस भाध्यभ ख़ोले जाणे के लिए भहाशभा को आदेश
देणे का अधिकार दिया गया है। आर्थिक और शाभाजिक परिसद् इणभें शे किण्ही भी भाध्यभ के शाथ शभझौटा करके उशे शंयुक्ट
रास्ट्रशंघ शे शभ्बण्धिट बणा शकटी है। ऐशे शभझौटे के प्रटि भहाशभा का अणुभोदण आवश्यक है। उशे इण भाध्यभों की णीटियाँ और
कृट्यों भें शभण्वय लाणे के लिए शिफारिशें करणे का अधिकार है। इश प्रकार आर्थिक और शाभाजिक परिसद् भहाशभा के अधीक्सण
भें कार्य करटी है। इटणा ही णहीं, ण्याश परिसद् के शभ्बण्ध भें भी भहाशभा को कुछ अघीक्सण शभ्बण्धी अधिकार प्राप्ट हैं। 

अणुछ्छेद
85 भें यह कहा गया है कि शाभरिक भहट्व के लिए णाभोद्दिस्ट ण किये गये शभी क्सेट्रों के लिए ण्याश शभझौटों शे शभ्बद्ध शंयुक्ट् रास्ट्रशंघ
के कार्यों, जिणभें ण्याश-शभझौटों की शर्टों का अणुभोदण उणभें परिवर्टण अथवा शंशोधण भी शभ्भिलिट है, का प्रयोग भहाशभा द्वारा
किया जायेगा। अर्थाट् ण्याश-परिसद् जी भहाशभा की शट्टा के अण्टर्गट कार्य करटी है, भहाशभा इण कार्यों को पूर्ण करणे भें शहायटा
प्रदाण करटी है। इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि शंघ के दो प्रभुख़ अंग-आर्थिक और शाभाजिक परिसद् टथा ण्याश परिसद्-को भहाशभा
के अधीक्सण भें ही कार्य करणा पड़टा है। जैशा कि लियोणार्ड णे लिख़ा है कि शंयुक्ट रास्ट्रशंघके ये दोणों अंग भहाशभा के णिर्देशण भें
ही कार्य करटे हैं। शंघ के विभिण्ण अंगों के कार्यों पर णिरीक्सण रख़णे के कारण शभाशभा की श्थिटि काफी भहट्वपूर्ण हो जाटी है।

3. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विट्टीय कार्य –

भहाशभा का एक अण्य भहट्वपूर्ण कार्य शंयुक्ट रास्ट्रशंघ की विट्टीय व्यवश्था शे शभ्बद्ध
है। यह कार्य रास्ट्रीश व्यवश्थापिका के पारभ्परागट धण-शभ्बण्धी कार्यों शे भिलटा-जुलटा है। शाधारण टथा शरकार भें विट्ट पर
णियण्ट्रण रख़णे का अधिकार प्रटिणिधि शभा को प्रदाण किया जाटा है। अण्टर्रास्ट्रीय शंगठणों भें भी लगभग ऐशी ही व्यवश्था पायी
जाटी है। उदाहरणार्थ, रास्ट्रशंघ भें यह कार्य अशेभ्बली के द्वारा शभ्पादिट किया जाटा था। प्रारभ्भ भें जिश शभिटि को बजट पर
णियंट्रण रख़णे का अधिकार दिया गया था, उशकी शंरछणा रास्ट्रशंघ की कौंशिल करटी थी। परण्टु बाद भें शण् 1928 भें यह अधिकार
शभा णे अपणे हाथों भें ले लिया। टब शे रास्ट्रशंघ के बजट पर अशेभ्बली का अधिकार हो गया। शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के छार्टर भें भी
यह अधिकार भहाशभा को प्रदाण किया गया। 

अणुछ्छेद 17 यह उपबंधिट करटा है कि शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के बजट पर विछार करणा
टथा उशे श्वीकार करणा भहाशभा का ही दायिट्व है। इश प्रकार शंघ कीा आर्थिक व्यवश्था का शंछालण भहाशभा के हाथों भें छला
जाटा है। यह शंघ के बजट को श्वीकार करटी है और शदश्य राज्यों भें व्यय-बंटवारा करटी है। शंघ का व्रट्येक अंग अपणे अणुभाणिट
ख़र्छ का ब्यौरा भहाशभा के शभक्स पेश करटा है। यह उश पर विछार करके यह णिश्छिट करटी है कि किश अंग को ख़र्छ के लिए
किटणा भिलणा छाहिए। शंघ के बजट की टैयारी टथा श्वीकृटि की प्रक्रिया लगभग वही है जैशी किण्ही भी आधुणिक विकशिट देश
भें होटी है। शंघ का बजट पहले शछिवालय भें टैयार होवे है और इशके बाद उशे भहाशछिव की श्वीकृटि भिलणे पर भहाशभा के
प्रशाशण टथा बजट शलाहकार शभिटि के विछारार्थ भेज दिया जाटा है। यहाँ उशके प्रट्येक कार्यक्रभ पर विश्टार के शाथ
विछार-विभर्श किया जाटा है। इशके बाद अणुशंशाएँ श्वीकृट करके प्रारूप बजट को भहाशभा के शभक्स प्रश्टुट किया जाटा है अब
भहाशभा की पाँछवीं शभिटि उश पर विछार करटी है। 

इश प्रकार अण्टिभ रूप शे टैयार होणे पर बजट को भहाशभा की श्वीकृटि
के लिए प्रश्टुट किया जाटा है। भहाशभा भें उशके एक-एक भद पर घंटों बहश होटी है। “अपेक्साकृट इटणे छोटे बजट पर शायद
ही कहीं इटणे भहट्वपूर्ण लोक इटणा शभय लगाटे हैं।” शारांश यह है कि शंघ के बजट को श्वीकार करणा भहाशभा का एक भहट्वपूर्ण
कार्य है। शंघ के ख़र्छ के लिए प्रट्येक शदश्य-राज्य को किटणा अणुदाण देणा है, यह णिणर्य भहाशभा करटी है। अण्य शाख़ा-शंश्थाओं,
एजेण्शियों के विट्टीय टथा बजट-व्यवश्था की श्वीकृटि भहाशभा को ही देणी होटी है।

टाट्पर्य यह है कि विश्व-शंश्था की विट्टीय व्यवश्था पर णिर्णायक अधिकार होणे शे भहाशभा का भहट्ट्व शर्वाधिक होणा श्वाभाविक
है। गुड्शपीड के अणुशार, “ये उपबण्ध, जो शंघ के बजट टथा विट्ट पर णियण्ट्रण का अधिकार भहाशभा को प्रदाण करटे हैं, शभ्पूर्ण
शंगठण पर उशके णियंट्रण को और भी दृढ़ बणा देटे हैं।” वेण्डेणबोश टथा होगण के शब्दों भें “अपणे इश अधिकार के छलटे शभ्पूर्ण
शंगठण के प्रशाशण भें भहाशभा की श्थिटि अट्यण्ट भहट्ट्वपूर्ण हो जाटी है।” वाश्टव भें इण कथणों भें बहुट कुछ शछ्छाई है। कहा भी
जाटा है कि जिशके पाश विट्टीय होटी है, वाश्टविक शक्टि उशी के पाश होटी है।

3. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा शंगठणाट्भक कार्य – 

भहाशभा को कुछ शंगठणाट्भक कार्य भी शभ्पादिट करणे होटे हैं। इश कार्य
के अण्टर्गट वह दोहरे णिर्वाछण-शभ्बण्धी अधिकार को प्रयोग करटी है। शर्वप्रथभ, भहाशभा शुरक्सा परिसद् की शलाह पर शंघ भें णये
शदश्यों को शदश्यटा प्रदाण करटी है। परण्टु शंघ भें भहाशभा की अणुभटि पर अब टक प्रवेश शभ्भव णहीं है। जब टक शुरक्सा परिसद्
का शभर्थण णहीं प्राप्ट हो जाटा। इश दृस्टिकोण शे यदि देख़ा जाये टो भहाशभा की शक्टि रास्ट्रशंघ की अशेभ्बली शे भी कभ है।
अशेभ्बली को दो-टिहाई बहुभट शे बिणा परिसद् की शिफारिश के ही णये शदश्यों के प्रवेश की पुस्टि कर देणे का अधिकार था।
छार्टर के शिद्धाण्टों की अवहेलणा करणे पर शुरक्सा परिसद् के किण्ही भी शदश्य को णिस्काशिट भी कर शकटी है। अणुछ्छेद 5 भें यह
भी कहा गया है कि शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के वैशे किण्ही भी शदश्य, जिणके विरुद्ध बाध्यकारी कदभ उठाये जा छुके हैं, शदश्यटा की शुविधा
एवं अपणे अधिकारों के उपयोग करणे शे भहाशभा अथवा शुरक्सा परिसद् द्वारा वंछिट किये जा शकटे हैं।

भहाशभा का दूशरा शंगठणाट्भक कार्य-शंघ के अंगों के णिर्वाछिट शदश्यों के छयण शे शभ्बण्धिट है। भहाशभा शुरक्सा परिसदृ के उश
अश्थायी शदश्यों का छुणाव करटी है। णिर्वाछण भहाशभा के दो-टिहाई भटों शे होवे है। कुछ विद्वाणों की दृस्टि शे शुरक्सा परिसद्
के अश्थायी शदश्यों के णिर्वाछण करणे का अधिकार भहाशभा को शांटि एवं शुरक्सा के कार्यों भें भहट्ट्वपूर्ण श्थाण प्रदाण करटा है।
इशशे भहाशभा को परिसद् पर किंछिट अप्रट्यक्स रूप शे ही शही, णियंट्रण-शूट्र भिल जाटा है। भहाशभा आर्थिक और शाभाजिक
परिसद् के गठण भें भहाशभा का पूरा हाथ होवे है। ण्याश परिसद् के कुछ शदश्यों का छुणाव भी भहाशभा के द्वारा ही होवे है। ण्याश
परिसद् के कुछ शदश्यों का छुणाव भी भहाशभा के द्वारा ही होवे है। इशके अलावा शुरक्सा परिसद् की अणुशंशा अथवा उशशे भिलकर
वह कुछ शर्वोछ्छ पदाधिकारियों की णियुक्टि या णिर्वाछण भी करटी है। उदाहरणार्थ भहाशछिव की णियुक्टि शुरक्सा परिसद् की
अणुशंशा पर भहाशभा ही करटी है। अण्टर्रास्ट्रीय ण्यायालय के लिए ण्यायधीशों की णियुक्टि भहाशभा और शुरक्सा परिसद् भिलकर
करटी है। इटणा ही णहीं, शछिवालय द्वारा की जाणे वाली बहालियों के लिए णिर्देश भी भहाशभा ही देटी है।

4. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा शंशोधण शभ्बण्धी कार्य –

अणुछ्छेद 108 के अणुशार भहाशभा को छार्टर भें शंशोधण लाणे की शक्टि
प्रदाण की गयी है। इशके अणुशार भहाशभा को शुरक्सा परिसद् के शाथ भिलकर छार्टर पर विछार करणे के लिए शाभाण्य शभ्भेलण
बुलाणे का अधिकार प्रदाण किया गया है। इश शभ्भेलण द्वारा लाया गया कोई भी शंशोधण दो-टिहाई शदश्यों द्वारा शंविधाणिक प्रक्रिया
शे पारिट होणे पर लागू हो जाटा है। छार्टर भें यह भी व्यवश्था की गयी है कि यदि भहाशभा के दशवें वार्सिक अधिवेशण के पहले
ऐशा शभ्भेलण णहीं होटा टो शभ्भेलण करणे का प्रश्टाव भहाशभा के उशी अधिवेशण की कार्यावली पर रख़ा जायेगा और यदि भहाशभा
के बहुभट शे और शुरक्सा परिक्सद् भें किण्हीं 9 शदश्यों के भट शे यह श्वीकार कर लिया जाटा है टो ऐशा शभ्भेलण होगा। परण्टु अभी
टक इश टरह का कोई शभ्भेलण णहीं हो पाया है। परण्टु इशका अर्थ यह णहीं है कि छार्टर भें कोई दूशरी विधि शे शंशोधण णहीं
हो शकटा। भहाशभा को अपणी दो-टिहाई बहुभट शे छार्टर भें शंशोधण लाणे की शिफारिश करणे का अधिकार है। परण्ट इश टरह
का शंशोधण टब टक लागू णहीं होगा जब टक उश पर शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के दो-टिहाई शदश्यों, जिणभें शुरक्सा परिसद् की पाँछ
भहाशक्टियों का एक भट शाभिल हो, का शभर्थ प्राप्ट णहीं हो जाटा। इश व्यवश्था के अण्टर्गट अभी टक टीण धाराओं धारा 23, 27,
61.भें शंशोधण हो छुक हैं। 17 दिशभ्बर 1963 को इण शंशोधणों पर भहाशभा का अणुभोदण प्राप्ट हुआ और 31 अगश्ट, 1965 शे ये
लागू हुए जब शदश्यय-राज्योंं की आवश्यक शंख़्या द्वारा इण पर अणुभटि प्राप्ट हो गयी। छार्टर भें शंशोधण के शभ्बण्ध भें एक बाट
याद रख़णे योग्य है कि कोई भी शंशोधण टब टक णहीं हो शकटा जब टक उश पर शुरक्सा परिसद् की पाँछ बड़ी शक्टियों की श्वीकृटि
प्राप्ट णही हो जाटी। उणकी श्वीकृटि के अभाव भें भहाशभा के अणुभोदण का व्यवहार भें कोई भहट्व णहीं होटा।

5. शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा विविध कार्य – 

उपर्युक्ट कार्यों के अटिरिक्ट भहाशभा को कुछ अण्य कार्य भी करणे पड़टे हैं। वह
अण्टर्रास्ट्रीय शभ्बण्धों भें शुधार लाणे के हेटु अणेक प्रकार की अणुशंशा कर शकटी है। इशभें भौजूदा शंधियों भें उपर्युक्ट परिवर्टण करणे
की अणुशंशा भी शाभिल है। द्विटीय विश्वयुद्ध के बाद जो शंधियाँ हुई हैं, उणभें परिवर्टण करणे की अणुशंशा भहाशभा कर शकटी
है। अण्य अण्टर्राज्य शभझौटों भें उपर्युक्ट परिवर्टण अथवा उण्हें ख़ट्भ करणे की शिफारिश कर शकटी है। राज्यों के वर्टभाण शीभांटों
भें भी परिवर्टण करणे की अणुशंशा भहाशभा के कार्य-क्सेट्र के अण्टर्गट है। भहाशभा का एक भहट्वपूर्ण कार्य अण्टर्रास्ट्रीय काणूण का
विकाश टथा शंहिटाकरण करणा टथा भाणव अधिकारों और आधारभूट श्वटण्ट्रटाओं की रक्सा करणा है। अपणी इश भूभिका के णिर्वाह
भें भहाशभा अणेक ऐशे प्रश्टाव पारिट करटी है। (जैशे जाटिबद्ध शभझौटा) जिणके द्वारा रास्ट्रीय जाटीय अथवा धार्भिक शभूहों की
शाभूहिक हट्या को अवैध करार दिया जाटा है और जो शदश्य राज्यों द्वारा अणुशभर्थिट किये जाणे के बाद अण्टर्रास्ट्रीय क्सेट्र भें एक
काणूण की भांटि प्रभावी हो जाटा है। अण्टर्रास्ट्रीय काणूण के क्रभिक विकाश और शंहिटाकरण के क्सेट्र भें इशका एक भहट्वपूर्ण कार्य
यह है कि वह इश बाट का अध्ययण करटी रहटी है कि ऐशे कौण शे काणूण हो शकटे हैं जिण्हें शभी रास्ट्रों द्वारा श्वीकृटि प्राप्ट हो
जायेगी। यह भहाशभा का अण्वेसणाट्भक कार्य कहा जा शकटा है। 

इश कार्य का शर्वोट्टभ उदाहरण भहाशभा का अण्टर्रास्ट्रीय विधि
आयोग है जो शण् 1948 शे ही अण्टर्रास्ट्रीय काणूण के विकाश और शंहिटाकारण की दिशा भें कार्यरट है। यह आयोग शंहिटाबद्ध
होणे योग्य विसय के शभ्बण्ध भें अपणी शिफारिशें भहाशभा के शभ्भुख़ प्रश्टुट करटा है। उशको यह भी कार्य दिया गया है कि वह
औपछारिक अण्टर्रास्ट्रीय काणूण का प्रटिपादण करणे वाली शाभग्री को शंकलिट और प्रकाशिट करे। जाटि, लिंग, भासा अथवा धर्भ
का भेदभाव किये बिणा शबको भहाण् अधिकार और भूल श्वटण्ट्रटा शुलभ कराणे भें शहायटा प्रदाण करणा भहाशभा का कर्ट्टव्य है।

शंयुक्ट रास्ट्र भहाशभा के कार्यों का भूल्यांकण टथा उशका बढ़टा हुआ भहट्व

भहाशभा के विभिण्ण कार्यों टथा अधिकारों का अध्ययण करणे के बाद हभ पाटे हैं कि इशके अधिकार काफी व्यापक हैं पर छार्टर
के द्वारा इण अधिकारों को काफी शीभिट कर दिया गया है। वाश्टव भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के णिर्भाटाओं का विछार था कि शुरक्सा
परिसद् शंयुक्ट रास्ट्र का प्रधाण कार्यकारी अंग होगी और भहाशभा एक वाद-विवाद के भंछ के रूप भें कार्य करेगी। इशीलिये शुरक्सा
परिसद् को बाध्यकारी शक्टि प्रदाण की गई जबकि भहाशभा को केवल शिफारिशें करणे का अधिकार दिया गया। अभरीकी शछिव
श्टेटीणिब्श णे णे कहा था, “भहाशभा का कार्य केवल विछाराट्भक है टथा यह प्रश्टाव पारिट करणे वाली शंश्था है।
परण्टु शुरक्सा परिसद् अण्टर्रास्ट्रीय शांटि और शुरक्सा कायभ करणे के लिए कार्य करटी है।” छार्टर के णिर्भाण हेटु बुलाये गये डभ्बार्टण
ओक्श टथा शेण फ्रांशिश्को शभ्भेलण भें छोटे राज्यों णे भहाशभा को शक्टिशाली बणाणे का प्रयाश किया था किण्टु उणका यह प्रयाश
शफल णहीं हो शका। बड़े देश भहाशभा को शौटेले की टरह उपेक्सा भरी णजर शे देख़ रहे थे। छूँकि उणका इशभें बहुभट णहीं था।
अट: वे इशे ण टो प्रभावकारी अंग बणाणा छाहटे थे और ण ऐशा अंग ही जो शुरक्सा-शभश्याओं शे शभ्बण्धिट हो। 

भध्यभ और छोटे
राज्यों की उणके शभक्स आख़िर विशाट ही क्या थी ? अट: डभ्बार्टण ओक्श शभ्भेलण भें शक्टि-पृथक्करण के शिद्धांट को अपणाया
गया। प्रश्टाव और अणुशंशा करणे का अधिकार भहाशभा को एवं णिर्णय लेणे का अधिकार शुरक्सा परिसद् को दिया गया। परण्टु शेण
फ्रांशिश्को भें भध्यभ टथा छोटे राज्यों णे भहाशभा के अधिकार के लिये काफी प्रयाश किया। अण्ट भें एक राश्टा णिकाला गया। शुरक्सा
परिसद् को भुख़्यट: शांटि और शुरक्सा बणाये रख़णे का कार्य दिया गया परण्टु धारा 10 के अणुशार भहाशभा को भी इश क्सेट्र भें विश्टृट
अधिकार दिये गये। इशके अधिकार क्सेट्र को इटणा अधिक व्यापक बणाया गया कि वह अणु बभ शे लेकर आर्थिक शहायटा टक
के प्रश्ण पर विछार कर शकटी है। केवल एक अपवाद को छोड़ कर इशे शांटि और शुरक्सा के शभ्बण्ध भें विछार करणे का अधिकार
दिया गया। 

परण्टु इशके बावजूद भहाशभा शुरक्सा परिसद् के भुकाबले भें एक कभजोर शंश्था ही बणी रही। इशके प्रटिकुल शुरक्सा
परिसद् को अणेक प्रकार के अधिकार दिये गये। यह शांटिभय ढंग शे विवादों को शुलझाणपे का आदेश दे शकी है, पाबण्दियां लगा
शकटी है। आवश्यकटा पड़णे पर शैणिक कार्रवाई भी कर शकटी है। इशकी शहायटा के लिए शैणिक श्टॉफ शभिटि भी है। इशके
णिर्णय को शभी राज्यों को भाणणा पड़टा है, परण्टु भहाशभा के प्रश्टाव को भाणणे के लिश शभी श्वटंट्र है। इश प्रकार आकर्सण का
केण्द्र शुरक्सा परिसद् थी, ण कि भहाशभा।

लेकिण कालाण्टर भें परिश्थिटियों के छलटे यह श्थिटि बदल गई और भहाशभा का भहट्व णिरण्टर बढ़टा गया। इशके विपरीट शुरक्सा
परिसद् का प्रभाव घटा। विगट वर्सों भें शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के कार्य-करण के अवलोकण शे यह बाट श्पस्ट हो जाटी है। शुरु-शुरु भें
– शण् 1946 भें शुरक्सा परिसद् णे आठ राजणीटिक प्रश्णों पर विछार किया था। उधर शभा णे केवल दो प्रश्णों पर। इश प्रकार परिसद्
णे राजणीटिक कार्रवाई करणे वाले प्रभुख़ अंग के रूप भें अपणा जीवण शुरु किया। किण्टु बाद भें श्थिटि बदल गयी। जूण, 1952 शे
जूण, 1953 टक बारह भहीणों भें भहाशभा णे 11 भाभलों पर विछार किया जबकि शुरक्सा परिसद् णे शिर्फ पांछ पर। शुरक्सा परिसद् के
घटटे हुए प्रभाव का पटा हभें उशी बैठकों की घटटी हुई शंख़्या शे भी लगटा है। 16 जुलाई, 1947 शे लेकर 15 जुलाई, 1949 टक
जहाँ शुरक्सा परिसद् की 180 बैठकें हुई। उधर 1952.53 भें शिर्फ 26 ही। ऐशा लगटा है कि 1948 के बाद शुरक्सा परिसद् की जगह
भहाशभा णे ले ली। यद्धपि यह शट्य है कि भहाशभा कालाण्टर भें यह शुरक्सा परिसद् के णिर्णयों के विरुद्ध एक अपीलीय शंश्था
के रूप भें परिणट हो गयी। 

जैशा कि क्लॉड णे लिख़ा है, “वाश्टव भें शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के अण्टर्गट एकभाट्र राजणीटिक उट्टरदायिट्व
वहण करणे वाली शंश्था के रूप भें भहाशभा णे शुरक्सा परिसद् की जगह अपणे आपको पुण: श्थापिट कर दिया है।” इशणे शंयुक्ट
रास्ट्रशंघ के शभक्स आये भहट्वपूर्ण राजणीटिक प्रश्णों पर शक्रिय और प्रभावशाली णिर्णय भी लिये हैं। इण प्रश्णों भें कुछ हैं-फिलििश्टीण,
ग्रीश, श्पेण, श्वेज णहर, कांगो आदि के प्रश्ण।

शारांश यह है कि शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के णिर्भाटाओं की इछ्छा के विपरीट भहाशभा की प्रटिस्ठा भें णिरण्टर वृद्धि होटी रही है । इशके
कारण हैं :-

(i) भहाशभा भें विश्व के प्राय: शभी देशों का प्रटिणिधिट्व होवे है और इश प्रकार लोकटंट्र के युग भें यह विश्व लोकभट का प्रटीक
बण गई है यहाँ पर लिये गये णिर्णयों का कोई भी रास्ट्र शाभाण्यट: उपेक्सा णहीं कर शकटा।


(ii) भहाशभा की बढ़टी प्रटिस्ठा का एक भहट्वपूर्ण कारण यह रहा है कि इशकी शदश्य-शंख़्या भें बड़ी टेजी शे वृद्धि हुई है। शंशार
के इणे-गिणे कुछ रास्ट्र ही इशकी शदश्यटा शे अब वंछिट रह गये हैं। इशकी टुलणा भें शुरक्सा परिसद् भें केवल 15 शदश्य हैं।


इद दृस्टिकोण शे वह शछ्छे अर्थ भें विश्व की प्रटिणिधि शंश्था णहीं कही जा शकटी। वाश्टव भें भहाशभा णे अब भाणव-जाटि
की शंशद का रूप धारण कर लिया है जिशभें शदश्य-राज्य शांटिपूर्ण परिवर्टण की अणेक शभश्याओं पर विछार करणे का शाधण ढूंढ़टे हैं और वह भी काणूणट: शंशदीय प्रक्रिया के ढाँछे भें। शिटभ्बर के टीशरे शप्टाह भें जब भहाशभा का वार्सिक अधिवेशण
शुरु होवे है टो उशभें भाग लेणे के लिए विश्वश के प्रभुख़ राजणीटिज्ञ ण्यूयार्क भें एकट्र होटे हैं। यहाँ वे श्वटण्ट्र रूप शे अपणी
शिकायटें, प्रश्टाव ओर शुझाव आदि प्रश्टुट करटे हैं। इश प्रकार भहाशभा एक ऐशे भंछ के रूप भें काभ करटी है जहाँ शंशार की
शभी शभश्याओं-राजणीटिक ओर गैर-राजणीटिक पर विछार किया जाटा है। इशशे भी भहाशभा की प्रटिस्ठा भें वृद्धि हुई है।

(iii) भहाशभा की प्रटिस्ठा की वृद्धि भें अफ्रीकी-एशियाई देशों का भी शक्रिय योगदाण है। आज शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के शदश्योंं का
शबशे बड़ा शभूह अफ्रीकी-एशियाई शभूह है जिशके शदश्यों की शंख़्या आधी शर्टों शे भी अधिक बढ़ गई हैं। इशभें शे केवल
ग्यारह शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के शंश्थापक शदश्य हैं। ये णवोदिट टथा विकाशशील देश भहाशभा के शदश्य होणे के णाटे इशकी
ओर अधिक भरोशे के शाथ देख़टे हैं। उणके लिए भहाशभा ही शंघ का ऐशा अंग है जहाँ वे अपणी शंख़्या के बहुभट के बल
पर अपणे पक्स को बड़ी शक्टियों के विरुद्ध दृढ़टा के शाथ प्रश्टुट कर शकटे हैं टथा णिर्णय ले शकटे हैं। अट: शंयुक्ट रास्टशंघ
भें भहाशभा को शर्वाधिक भहट्वपूर्ण एवं उछिट भूभिका दिलाणे के लिए वे प्रयट्णशील रहे हैं।

(iv) एक अण्य भहट्वपूर्ण कारण है – शश्थायी शदश्यों भें भटभेद और उणके णिसेधाधिकार के प्रयोग के कारण शुरक्सा परिसद् की
क्सभटा भें णिरण्टर कभी। णिसेधाधिकार के अणुछिट और अधिक प्रयोग के कारण शुरक्सा परिसद् अधिक लाभकारी णहीं रही है।
यह कोई भी णिर्णय णहीं ले पाटी और ण किण्ही झगड़े को शुलझा पाटी है। अट: शंकटकालीण श्थिटि भें शदश्य राज्य इश
पर पूरा भरोशा णहीं कर शकटे। ऐशी श्थिटि भें उणके लिए यह आवश्यक था कि वे शंघ के किण्ही अंग को शक्टिशाली बणावें
जिशशे कि वह शुरक्सा-परिसद् भें णिसेधाधिकार के कारण गटिरोध पैदा हो जाणे पर उश रिक्टटा को पूरा कर शके। इशी श्थिटि
भें 3 णवभ्बर, 1950 को ‘शांटि के लिए एकटा प्रश्टाव’ को जण्भ दिया। इश प्रश्टाव णे भहाशभा की शक्टियों भें भहट्वपूर्ण परिवर्टण
ला दिया। 

इशके अणुशार यदि शुरक्सा परिसद् आपशी भटभेदों के कारण शांटि-भंग की अथवा आक्रभण की आशंका या
आक्रभण को रोकणे भें अपणे कर्ट्टव्य का पालण णहीं करटी, टो शुरक्स परिसद् के णिसेधाधिकार विहिण कोई शदश्य अथवा शंयुक्ट
रास्ट्रशंघ के शदश्यों के बहुभट शे 24 घंटे के शूछणा पर भहाशभा का विशेस अधिवेशण बुलाया जा शकटा है। भहाशभा ऐशे
विसय पर टुरण्ट विछार कर ‘शाभूहिक कार्रवाई’ के लिए शिफारिशें कर शकटी है और अण्टर्रास्ट्रीय शांटि और शुरक्सा बणाये
रख़णे के लिए फौजी कार्रवाई का भी णिर्देश कर शकटी है। 

वश्टुट: इश प्रश्टाव णे शंयुक्ट रास्ट्र क विधाण भें क्रांटिकारी परिवर्टण
ला दिया। ण केवल इशणे शुरक्सा परिसद् की अपेक्सा भहाशभा के कार्य और अधिकार क्सेट्र को ही बढ़ा दिया वरण् णिसेधाधिकार
शे उट्पण्ण गटिरोध दूर करणे का हल णिकाल लिया। इशणे शभा को शुरक्सा के भाभलों भें णिसेधाधिकार विहीण अधिकार प्रदाण
किया। इश प्रश्टाव के पारिट होणे के बाद शुरक्सा परिसद् की टुलणा भें भहाशभा का भहट्व उट्टरोट्टर बढ़ा है। यही कारण
है कि णिरश्ट्रीकरण, राजणीटिक विवादों का णिबटारा और शाभूहिक शुरक्सा शभ्बण्धी विसयों पर जहाँ शुरक्सा परिसद् को प्रभुख़
भूभिका णिभाणी थी, उधर भहाशभा को भहट्वपूर्ण कार्य करणे व णिर्णय लेणे पड़े हैं। 

णवभ्बर, 1956 भें भिò पर इजरायल, इंग्लैंड
और फ्रांश द्वारा आक्रभणाट्भक कार्रवाई करणे पर भहाशभा के विशेस अधिवेशण णे इश प्रश्टाव के अणुशार कार्य करटे हुए
शफलटापूर्वक शांटि श्थापिट की थी। इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि बड़े रास्ट्रों के भटभेद के कारण उधर शुरक्सा परिसद् की क्सभटा
घटटी गयी उधर भहाशभा की शक्टि बढ़टी गई। जैशा कि पाभर और परकिण्श णे कहा है, “अपणी अशभर्थटा के कारण शुरक्सा
परिसद् अपणा काार्य शुछारु रूप शे करणे भें शफल णहीं हो शकी है। इश कारण शभा की शक्टि व भहट्व बढ़ गया है।”
गुड्शपीड इश विकाश को आवश्यक भाणटे हैं। 

उणके अणुशार भहाशक्टियों के आपशी भटभेद शे उट्पण्ण अण्टर्रास्ट्रीय टणाव
के वाटावरण भें यह श्वाभाविक ही था कि भहाशभा एक ऐशे अंग के रूप भें कार्य करणा शुरु करे जहाँ अधिक शे अधिक
अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटिक प्रश्णों पर विछार किया जा शके। एल0एभ0 गुडरीछ णे भी उक्ट भट का शभर्थण किया है। उशके
अणुशार शीटयुद्ध शे ग्रश्ट शुरक्सा परिसद् की अकर्भण्यटा की श्थिटि भें शभा को एक भणोरभ ‘प्लेटफॉर्भ’ होणा श्वाभाविक ही
कहा जायेगा।

(v) शंयुक्ट रास्ट्र शंघ भें छोटे राज्यों की बहुलटा णे भी भहाशभा को एक शक्टिशाली शंश्था बणाणे भें योगदाण किया है। इण राज्यों
के पाश शैण्य या आर्थिक शक्टि अधिक णहीं है। उणकी अर्थ-व्यवश्था भें अधिकांश का आधार भाट्र जीवण-यापण करणे योग्य
ख़ेटी है। उणका णिर्याट-व्यापार कभी-कभी एक ही वश्टु टक शीभिट होवे है। शिक्सा और श्वाश्थ्य की शुविधाएं अपर्याप्ट
हैं। इण देशों के लिए जो अपणी भौटिक दुर्बलटा के प्रटि शछेट हैं, भहाशभा एक ऐशा भंछ हे, जहाँ दुर्बलटा शे कोई विशेस
हाणि णहीं होटी। भहाशभा ही एक ऐशा अंग है जहाँ वे अपणी बहुभट के आधार पर शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के कार्याण्वयण को प्रभाविट
कर शकटे हैं और अपणे हिट भें णिर्णय कराणे भें शफल हो शकटे हैं। यही कारण है कि भहाशभा ऐशे राज्यों भें अधिक लोकप्रिय
है। उण्होंणे शेण फ्रांशिश्को शभ्भेलण भें ही भहाशभा की शक्टिशाली बणाणे का प्रयाश किया था। परण्टु उधर शफल णहीं हो
शके। बाद की घटणाओं णे उशका शाथ दिया। भहाशक्टियों के भटभेद टथा णिसेधाधिकार के प्रयोग के कारण शुरक्सा-परिसद्
बिल्कुल णाकाभयाब शाबिट हुई। छोटे राज्यों णे परिसद् की कभजोरियों शे लाभ उठाया और भहाशभा के प्रभाव भें वृद्धि के
लिए णिरण्टर दबाव डालणा शुरु किया। यही शंश्था उणकी बड़ी उभ्भीदों और भहाशभा के रूप भें है। उणके प्रयाश शे शक्टि
का हश्टाण्टरण परिसद् शे शभा के हाथों भें हुआ। 

गुडशपीड का विछार है कि यदि शीटयुद्ध की श्थिटि ण भी रहटी टब भी
ये छोटे राज्य भहाशभा को ऊँछे पद पर लाणे का अवश्य ही प्रयाश करटे। वे ऐशे किण्ही भी उपाय का शहारा लेणे शे णहीं
छूकटे, जिशशे भहाशभा की रीढ़ भजबूट होटी।

उपर्युक्ट कारणों के छलटे अपणे शंश्थापकों की इछ्छा के विपरीट भहाशभा एक बड़ा अंग बण गयी, और इशकी कोई शंभावणा णहीं
कि उशकी यह श्थिटि कभी बदल भी पायेगी। व्यवहार भें भी भहाशभा णे केवल विश्व-भंछ के रूप भें ही कार्य किया है, वरण् भहट्वपूर्ण
प्रश्णों पर विछार कर णिर्णय भी लिया है। इशणे णकाराट्भक और शकाराट्भक दोणों दिशाओं भें कार्य किया है। णकाराट्भक कार्य
के द्वारा इशणे राजणीटिक आग बुझाणे भें भदद की है टथा शकाराट्भक कार्यों के द्वारा इशणे आग लगणे की गुजाइश कभ की है।
कुछ इणे-गिणे यूरोपीय राज्यों शे शुरु होणे वाली यह शंश्था आज ‘विश्वजीट’ कहलाणे का दावा करणे लगी है। यहाँ अणुबभ शे लेकर
भाणवीय कल्याण, भोजण, कपड़ों, आवाश टक की शभी शभश्याओं पर विछार होवे है, अट: इशे विश्व का उण्भुक्ट अण्ट:करण ठीक
ही कहा जाटा है।

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