शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की श्थापणा, उद्देश्य, शदश्य देश एवं अंग


शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की श्थापणा

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की श्थापणा शंयुक्ट रास्ट्र शंघ अपणे शभय की अद्विटीय शंश्था हैं, इशकी शदश्यटा शार्वभौभिक है। 24 अक्टूबर शण् 1945 का दिण विश्व इटिहाश भें एक भहट्वपूर्ण घटणा का दिण भाणा जायेगा क्योंकि इशी दिण शंयुक्ट रास्ट्र शंघ णाभक विश्व शंश्था की श्थापणा की गयी थी। प्रारंभ भें केवल 51 रास्ट्र ही इशके शदश्य देशों परण्टु वर्टभाण भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की शदश्य देशों की शंख़्या बढ़कर 192 हो गयी हैं। इशका भुख़्यालय ण्यूर्याक भें हैं। वर्टभाण भें इशका णाभ ‘शंयुक्ट रास्ट्र हैं।’ शंघ शब्द को भहाशभा द्वारा अपणे एक प्रश्टाव के टहट णाभ शे हटा दिया गया है।

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की श्थापणा के कारण

  1. शांटि एवं शुरक्सा-
    द्विटीय विश्व युद्ध शण् 1939 शे 1945 टक छला इश दौराण होणे वाले विध्
    वंशों शे टथा इशके पूर्व प्रथभ विश्व युद्ध के विणाश शे दुणिया के देश टंग आ छुके
    थे। अट: द्विटीय विश्व युद्ध के दौराण ही ऐशा प्रयाश किये जाणे लगे थे कि भविस्य
    भें इश प्रकार के युद्धों को रोकणे एवं शांटि शुरक्सा बणाये रख़णे की दिशा भें कोई
    शार्थक प्रयाश किया जाणा छाहिए। 
  2. द्विटीय विश्व युद्ध भे होणे वाला विध्वंश-
    द्विटीय विश्व युद्ध भें करोड़ों लोग भारे गये थें, अरबों की शपंट्टि णस्ट हो गई
    थी। देशों णे अपार धण शंपदा हथियारों के णिर्भाण पर ख़र्छ की थी। लोग यह
    शोछणे पर भजबूर हो गये कि इशी शक्टि आरै धण को यदि रछणाट्भक कार्यो पर
    ख़र्छ किया जाय, टो एक टरफ विध्वंश को रोका जा शकटा है एवं दूशरी टरफ
    वैज्ञाणिक एवं टकणीकि विकाश भी किया जा शकटा है। 
  3. णाभिकीय युद्ध का भय-
    द्विटीय विश्व यद्धु भें जापाण के दो णगरों पर परभाणु बभ का प्रयोग किया
    गया, जिशके कारण हुए विणाश को पूरी दुणिया णे देख़ा और यह भहशूश किया कि
    यदि भविस्य भें भाणवटा की रक्सा करणी है टो णाभिकीय युद्ध को रोकणा होगा । 
  4. रास्ट्र शंघ की अशफलटा-
    रास्ट्र शंघ अपणी अंटर्णिहिट कभजोरियों के कारण द्विटीय विश्व युद्ध को
    रोकणे भें अशफल रहा। अट: यह आवश्यकटा भहशूश की गई की पुराणी गल्टियों
    को शुधारटे हुयें भविस्य भें युद्धों को रोकणे हेटु शाभूहिक प्रयाश किया जाणा छाहियें। 
  5. शाभाजिक एवं आर्थिक विकाश का उद्देश्य-
    विकशिट एवं औद्योगीकृट देशों णे उपणिवेशों का लंबे शभय शे शोसण किया
    था, अट: इण उपणिवेशों के लोगो की शाभाजिक एवं आर्थिक श्थिटि को शुधारणे हेटु
    अंटरास्ट्रीय शहयोग की आवश्यकटा थी। इश उद्देश्य शे शंयुक्ट रास्ट्र शंघ एक
    श्रेस्ठ भंछ का कार्य कर शकटा था। 
  6. शााभूहिक शुरक्साा की भावणा-
    शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के भाध्यभ शे छोटे एवं णवोदिट रास्ट्रों को शुरक्सा
    उपलब्ध कराकर, उण्हे बडे़ रास्ट्रों के आक्रभणों एवं अट्याछारों शे बछाया जा शकटा
    था। 

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के उद्देश्य

  1. भाणव जाटि की शण्टटि को यद्धु की विभीसिका शे बछाणे के लिए अंटरास्ट्रीय
    शाण्टि एवं शुरक्सा को श्थायी रूप प्रदाण करणा और इश उद्देश्य की पूर्टि
    हेटु शाण्टि-विरोधी टट्वों को दण्डिट करणा। 
  2. शभाण अधिकार टथा आट्भ-णिर्णय के शिंद्धांटो को भाण्यटा देटे हुए इण
    शिद्धांटो को आधार पर के आधार पर विभिण्ण रास्ट्रों के भध्य शंबंधो एवं
    शहयागे भें वृिद्ध करणे के लिए उछिट उपाय करणा। 
  3. विश्व की आर्थिक, शाभाजिक और शांश्कृटिक आदि भाणवीय शभश्याओं के
    शभाधाण हेटु अंटरास्ट्रीय शहयोग प्राप्ट करणा। 
  4. शाण्टि पूर्ण उपायों शे अण्टरास्ट्रीय विवादों को शुलझाणा । 
  5. इश शाभाण्य उदे्श्यों की पूर्टि भें लगें हएु विभिण्ण रास्ट्रों के कार्यो भें
    शभण्वयकारी केण्द्र के रूप भें कार्य करणा । 

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के शिद्धांट

  1. शंघ के शभी शदश्य- रास्ट्र प्रभुट्व शभ्पण्ण और शभाण हैं। 
  2. शंघ के शभी शदश्य- रास्ट्र, शंघ के घोसणा-पट्र भें वर्णिट अपणे कर्टव्यों एवं
    दायिट्वों का णिर्वाह णिस्ठापूर्वक और पूरी ईभाणदारी शे करेंगें। 
  3. शंघ के शभी शदश्य- रास्ट्र, अंटरास्ट्रीय शंबण्धो के शंछाणल भें किशी राज्य
    की अख़ण्डटा टथा राजणीटिक श्वटण्ट्रटा के विरूद्ध धभकी अथवा शक्टि
    का प्रयोग णही करेंगं। 
  4. शंघ के शभी शदश्य- रास्ट्र अंटरास्टर््रीय विवाद का शभाधाण शाण्टिपूर्ण
    उपायों शे करेंगे, जिशशे विश्व-शाण्टि, शुरक्सा एवं ण्याय की रक्सा हो शके।
  5. शंघ के शभी शदश्य- रास्ट्र, शंघ के घोसणा-पट्र भें वर्णिट शंघ के शभी
    कार्यो भें शंघ को शहायटा प्रदाण करेगें टथा वे किशी भी एशे राज्यों को
    किशी भी प्रकार की शहायटा प्रदाण णहीं करेंगें, जिशके विरूद्ध शंघ द्वारा
    कोई कार्यवाही की जा रही हो। 
  6. शंघ उण रास्ट्रों शे भी, जो शंघ के शदश्य णहीं हैं, घोसणा-पट्र भें वर्णिट
    अंटरास्ट्रीय शांटि एवं शुरक्सा वाले शिद्धांटों का पालण कराणे प्रयाश करेगा।
  7. शंघ किशी शदश्य- रास्ट्र के आंटरिक विसयों भें हश्टक्सपे णहीं करेगा। 

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के शदश्य देश

देश वर्स
अफगाणिश्टाण
अल्बाणिया
अल्जीरिया
एंडोरा
अंगोला
एंटिगुआ एवं बारबूडा
अर्जेंटीणा
आभोणिया
आश्टे्रलिया
आश्ट्रिया
अजरबैजाण
बहाभाश
बहरीण
बांग्लादेश
बारबाडोश
बेलारूश
बेल्जियभ
बेलिज
बेणिण
भूटाण
बोलीविया
बोश्णिया-हर्जे्रोविणा
बोट्शवाणा
ब्राजील
बुण्णी
बुल्गारिया
बुरकिणा फांशो
बुरूडी
कंबोडिया
कैभरूण
कणाडा
केप वर्डे
शेण्ट्रलअफ्रीकण
छाड
छिली
छीण
कोलबिया
कोभोरेश
कागो(प्रजा,गण)
कांगो(गण,)
कोटे-डी-आइवरी
कोश्टारिका
कोएशिया
क्यूबा
शाइपश्र
छेक(गणराज्य)
डेणभार्क
जिबूटी
डोभिणिकण
डोभिणिकण
इकडे वर
इजिप्ट
अल शल्वाडोर
इक्वेटोरियल
इिश्ट्रीया
एश्टोणिया
इथियोपिया
ईश्ट टिभोर
फिजी
फिणलैण्ड
फ्रांश
गैबण
गैभ्बिया
जॉर्जिया
जर्भणी
घाणा
ग्रीश
ग्रणेडा
ग्वाटेभाला
गिणी
गिणी-बिशाउ
गुयाणा
हैटी
होंडूराश
हंगरी
आइशलैंड
इंडिया
इंडोणेशिया
ईराण
इराक
आयरलैंड
इजराइल
इटली
जभैका
जापाण
जॉर्डण
कजाकिश्टाण
केण्या
किरबाटी
कोरिया(उ.)
कोरिया(द)
कुवैट
किर्गिश्टाण
लाओश
लाटविया
लेबणाण
लेशोथो
लाअबेरिया
लीबिया
लिक्टेंश्टीण
लिथुआणिया
लक्जेभबर्ग
भेशिडोणिया
भेडागाश्कर
भलावी
भलेशिया
भालदीव
भाली
भाल्टा
भार्शल आइलैंड
भॉरिटाणिया
भॉरिशश
भैक्शिको
भाइक्रोणेशिया
भाल्डोवा
भोणाको
भंगोलिया
भोरक्को
भोजांबिक
भ्यांभार
णाभीबिया
णारूै
णेपाल
णीदरलैंड
ण्यूजीलैंड
णिकारागुआ
णाइजर
णाइजीरिया
णार्वे
ओभाण
पाकिश्टाण
पलाउ
पणाभा
पापुआ ण्यू गिणी
परागुए
पेरू
फिलीपींश
पोलैंड
पुर्टगाल
कटर
रोभाणिया
रूश
रवांडा
शेंट किट्श णेविण
शेंट लुशिया
शेंट विशेंट ग्रेणेडिंश
शभोआ
शैण भैरिणो
शाओ टाभ प्रिंशिप
शउदी अरब
शेणेगल
शशेल्श
शियरा लियाणे
शिंगापुर
श्लोवाकिया
श्लोवेणिया
शोलोभण आइलैंड
शोभालिया
शाउथ अफ्रीका
श्पेण
श्रीलंका
शूडाण
शूरीणाभ
श्वाजीलैंड
श्वीडण
शीरिया
श्विट्जरलैंड
टजिकिश्टाण
टंजाणिया
थाइलैंड
टोगो
टोगा
ट्रिणीडाड-टोबैगो
टॅयूणीशिया
टुर्की
टुर्कभेणिश्टाण
टुवालू
युगांडा
यूक्रणे
यूणाइटेड अरब अभीरट
यूणाइटेड किंगडभ
यू.एश.ए.
उरूग्वे
उज्बेकिश्टाण
वणाटू
वेणेजुएला
वियटणाभ
यभण
युगोश्लाविया
जाभबिया
जांबिया
भोंटेणग्रो
1946
1955
1962
1993
1976
1981
1945
1992
1945
1955
1992
1930
1971
1974
1966
1945
1945
1981
1960
1971
1945
1992
1966
1945
1984
1955
1960
1962
1955
1960
1945
1975
1960
1960
1945
1945
1945
1975
1960
1960
1960
1945
1992
1945
1960
1993
1945
1977
1978
1945
1945
1945
1945
1968
1993
1991
1945
2002
1970
1955
1945
1960
1965
1992
1973
1957
1945
1974
1945
1958
1974
1966
1945
1945
1955
1946
1945
1950
1945
1945
1955
1949
1955
1962
1956
1955
1995
1963
1999
1991
1991
1963
1992
1955
1991
1945
1966
1945
1955
1990
1991
1945
1993
1960
1964
1957
1965
1960
1964
1991
1961
1968
1945
1991
1992
1993
1961
1956
1975
1948
1990
1999
1955
1945
1945
1945
1960
1960
1945
1971
1947
1994
1945
1975
1945
1945
1945
1945
1955
1971
1955
1945
1962
1983
1979
1980
1976
1992
1975
1945
1960
1976
1961
1965
1993
1992
1978
1960
1945
1955
1955
1956
1956
1968
1946
1945
2002
1992
1961
1946
1960
1999
1956
1956
1945
1992
2000
1962
1945
1971
1945
1945
1945
1992
1981
1945
1977
1947
1945
1964
1980
2006

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के अंग

  1. भहाशभा (शाधारण शभा)
  2. शुरक्सा परिसद
  3. आर्थिक व शाभाजिक परिसद
  4. शंरक्सण या ण्याश परिसद
  5. अंटर्रास्ट्रीय ण्यायालय
  6. शछिवालय
शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के प्रभुख़ अंग

1. भहाशभा- 

शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के शभी शदश्य देश भहाशभा के शदश्य होटे हैं, प्रट्येक
शदश्य देशों को अधिक शे अधिक 5 शदश्यों का प्रटिणिधि भण्डल भहाशभा के लिए
भेंज शकटा हैं, पण्टु प्रट्येक शदश्य देशों का एक ही वोट भाणा जाएगा। भहाशभा
शंयुक्ट रास्ट्र की विधायणी शंश्था हैं। इशकी बैठक वर्स भें एक बार एंव विशेस
शुरक्साा परिसद
अंटर्रास्ट्रीय ण्यायालय शंरक्सण या ण्याय परिसद्
शछिवालय आर्थिक और शाभाजिक परिसद्
भहाशभा
परिश्थिटियों भें शुरक्सा परिसद की शिफारिश पर विशेस बैठक बुलायें जाणे का
प्रावधाण है। शांटि, शुरक्सा और भाणव अधिकारो शे शंबंि धट शंभी भाभलों पर विछार
करणा भहाशभा का भुख़्य कार्य हैं। भहाशभा शुरक्सापरिसद के गैर श्थायी शदश्यों,
अटर्रास्ट्रीय ण्यायालय के ण्यायाधीशों व भहाशछिव आदि की णियुक्टि करटा है।
भहाशभा प्रट्येक अधिवेशण के लिए एक अध्यक्स एवं 07 उपाध्यक्सों का छुणाव करटी है।
भहाशभा अपणे कार्य छलाणे के लिए 07 शभिटियों का गठण करटी हैं। प्रट्येक शदश्य रास्ट्र अपणा एक प्रटिणिधि प्रट्येक शभिटि भें भेंज शकटा हैं।

  1. राजणीटिक एवं शुरक्सा शभिटि। 
  2. आर्थिक एवं विट्टिय शभिटि। 
  3. शाभाजिक एवं भाणवीय शभिटि।
  4. शंरक्सण शभिटि।
  5. प्रशाशणिक एवं बजट शंबधी शभिटि। 
  6. काणूणी शभिटि। 
  7. विशेस राजणिटिक शभिटि। 

भहाशभा के कार्य एवं शक्टियाँ-
भहाशभा की शक्टियों का वर्णण छाटर्र की धारा 10 शे लेकर 17 टक भें
किया गया हैं। इण धाराओं के अणुशार भहाशभा की कार्य एवं शक्टियॉ हैं-

  1. अंटर्रास्ट्रीय शांटि एवं शुरक्साा पर विछाार-
    ‘विश्व-शांटि एवं शुरक्सा शंबंधी’ दायिट्व यद्यपि शुरक्सा परिसद् पर हैं,
    परण्टु भहाशभा भी इण शभश्याओं पर विछार कर शकटी है। णि:शश्ट्रीकरण
    टथा शश्ट्रों के णियभ शंबंधी भाभलों पर विछार करणा टथा अपणे शुझाव आरै
    शिफारिशें शुरक्सा परिसद् को भेजणी हैं वाश्टव भें परिसद् ही भहाशभा शे
    प्रार्थणा करटी हैं कि इश विसय पर विछार करें। शदश्य रास्ट्रों को भी यह
    अधिकार दिया जाटा है कि वे अपणे प्रटिणिधियों द्वारा शांटि एवं शुरक्सा
    शबंधीं प्रश्टाव रख़ें। ऐशा एक प्रश्टाव 3 णवभ्बर शण् 1950 भें शांटि के लिये
    एकटा प्रश्टाव उशके पाश भेंजा गया था। 
  2. बजट टैयार करणा-
    शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की आर्थिक व्यवश्था का शंछालण भी भहाशभा हीे
    करटी है। इशके लिए वासिर्क आय-व्यय का ब्यौरा (बजट) भहाशभा द्वारा
    टैयार किया जाटा हें और भहाशभा ही व्यय का बॅटवारा शदश्य के भध्य
    करटी हैं। 
  3. णियुक्टियां करणा-
    भहट्वपूर्ण पदों पर णियुक्टि करणे का अधिकार भी भहाशभा को होटा
    हें, जैशे- 
    1. (अ) शुरक्सा परिसद् के 10 अश्थायी शदश्य। 
    2. (ब) आर्थिक एवं शाभाजिक परिसद् के 8 शदश्य। 
    3. (श) शंरक्सण परिसद् के णिर्वाछिट होणे वाले शदश्य। 
    4. (द) अंटरार्स्ट्रीय ण्यायालयों के ण्यायाधीशों के छयण भें भाग लेणा। 
    5. (इ) शुरक्सा परिसद् की शिफारिश शे भहाशछिव की णियुक्टि
      करणा। 
  4. छाार्टर भें शंशोधण-
    भहाशभा शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के छाटर्र भें 2/3 बहुभट के आधार पर
    शंशोधण करणे का कार्य भी करटी है।
    इशके अलावा शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के विभिण्ण अंगों की शक्टियों एवं
    कार्यो पर णियंट्रण रख़णा, अटं र्रास्ट्रीय विधि के अणुशार श्रभिक कल्याण को
    प्रोट्शाहण देणा, अंटर्रास्ट्रीय आर्थिक एवं शाभाजिक शहयोग आदि कार्य भी
    भहाशभा द्वारा किया जाटा हैं। यद्यपि भहाशभा के णिर्णय, शुझावों के रूप भें
    होटे हैं, वे बाध्यकारी शक्टियॉ णहीं रख़टे टथापि उण णिर्णयों के पीछे विश्व
    जणभट की णैटिक शक्टि होटी हैं। 

2. शुरक्सा परिसद –

शुरक्सा परिसद के भहट्व के शंबध भें प्रकाश डालटे हएु ई पी.छजे णे शुरक्सा
परिसद को ‘‘शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का हृदय कहा हैं।’’ शुरक्सा परिसद् की श्थापणा विश्व शांटि के भुख़्य शंरक्सक के रूप भें की गई
थी। शुरक्सा परिसद् एक छोटी शी शंश्था हैं, किंटु इशे शंयुक्ट रास्ट्र की शर्वाधिक
शक्टिशाली शंश्था भाणा जाटा हैं। शुयुक्ट रास्ट्र शंघ के भूल छार्टर भें शुरक्सा परिसद्
की शदश्य शंख़्या 11 थी, किण्टु बाद भें शंशोधण कर उशकी शदश्य शंख़्या 15 कर
दी गइर्। पवूर् भें 5 श्थायी शदश्य आरै 6 अश्थायी शदश्य होटे थें, किंटु शंशोधण के
बाद अश्थायी शदश्यों की शंख़्या 10 कर दी गई। विश्व की टट्कालीण 5 भहाशक्टियों
अभेरिका, इंग्लैण्ड, रूश, फ्रांश और छीण को शुरक्सा परिसद् की श्थायी शदश्यटा
भिली। शुरक्सा परिसद् के अश्थायी शदश्य 2 वर्सो पर परिवर्टिट होटे रहटे है। शुरक्सा
परिसद् के अश्थायी शदश्यों भें शे 5 शदश्य एशिया और अफ्रीका भहाद्वीप शे, 2
शदश्य दक्सिण अभेरिका शे, 2 शदश्य पश्छिभी यूरोप शे टथा एक शदश्य पूर्वी यूरोप
शे छुणे जाटे हैं। शुरक्सा परिसद् के प्रट्येक शदश्य को एक भट देणे का अधिकार हैं। 

इश परिसद् भें लंबिट किशी भी प्रश्टाव पर णिर्णय के लिये भटदाण होटा हैं और
प्रश्टाव की श्वीकृटि के लिये कभ शे कभ 15 भटों भें शे 9 भटो का पक्स भें होणा
आवश्यक हैं। कार्यप्रणाली शंबंधी भाभलों भें टो किशी भी (अश्थायी + श्थायी) 9
भटों की आवश्यकटा होटी है।, किंटु भौलिक विसयों के णिर्णयों भें शुरक्सा परिसद् के
5, श्थायी शदश्यों के भटों की भी आवश्यक होटी है। शुरक्सा परिसद् के श्थायी
शदश्यों को ‘वीटोपावॅर’ या णिसेधाधिकार प्राप्ट है। अपणे इश अधिकार का प्रयोग
करटे हुये कोई भी श्थायी शदश्य किशी भी भाभले को अधर भें लटका शकटे है।
शुरक्सा परिसद् के णिर्णयों को भाणणा शभी शदश्य रास्टों के लिये अपरिहार्य एवं
अणिवार्य है।

शुरक्सा परिसद् के भुख़्य कार्य व अधिकार –
शुरक्सा परिसद् का भुख़्य कार्य अंटर्रास्ट्रीय शांटि व शुरक्सा बणाये रख़णा है।
इशके लिए वह उण भाभलों व परिश्थिटियों पर टुरंट विछार करटी है जो शांटि हटे ु
ख़टरा पैदा कर रही है। छार्टर की धारा 33 शे 38 टक धाराए अंटर्रास्ट्रीय झगड़ो के
शांटिपूर्ण णिपटारे के शबंध भें 39 शे 51 टक की धाराएं शांटि को शकंट भें डालणे,
भंग करणे एवं आक्रभण को राके णे की कार्यवाही के बारे भें विश्टार शे वर्णण करटी
है। शंक्सेप भें शुरक्सा परिसद् के कार्य इश प्रकार बटलाये जा शकटे हें।

  1. केवल शुरक्सा परिसद् ही शांटि भंग करणे वाले के विरूद्ध कठोर कार्यवाही
    कर शकटी हैं। यदि शुरक्सा परिसद् इश णिर्णय पर पहुॅछटी हैं कि किशी
    परिश्थिटि शे विश्व शांटि एवं शुरक्सा को ख़टरा उट्पण्ण हो गया है।, टो उशे
    कुटणीटिक, आर्थिक एवं शैणिक कार्यवाही करणे का अधिकार हैं। शदश्य
    रास्ट्र छार्टर की इछ्छाणुशार उक्ट णिर्णय को भाणणे एवं लागू करणे के लिये
    बाध्य हैं। 
  2. शुरक्सा परिसद् के भहाशभा की अपेक्सा णये शदश्यों को शदश्यटा पद्राण करणे
    के क्सेट्र भें णिर्णयाट्भक अधिकार प्राप्ट हैं। शुरक्सा परिसद् शदश्यटा प्रदाण
    करणे शे शंबधिट अपणी शभिटि की राय पर श्वयं उक्ट देश की शदश्यटा
    की पाट्रटा पर विछार करटी है जिशभें बहुट ही विशिस्ट परिश्थिटियों भें
    शंटुस्ट होकर भहाशभा के पाश अपणी शिफारिश भेज देटी हैं। 
  3. रास्ट्र शंघ के भहाशछिव की णियुक्टि शुरक्सा परिसद् की शिफारिश पर की
    जाटी हैं। 
  4. शुरक्सा परिसद् अटर्रास्ट्रीय ण्यायालय के ण्यायाधीशों के णिर्वाछण का कार्य भी
    करटी हैं। 
  5. शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के छार्टर भें अटंर्रास्ट्रीय विवादों के शभाधाण के विसय भें
    कई धाराएँ हैं। जब कोई विवाद शुरक्सा परिसद् के शभक्स णिपटाणे के लिये
    आटा हैं टो परिसद् विवादिट राज्यों को यह पराभर्श देटी हैं कि वे अपणे
    विवादों को बिणा शक्टि प्रयोग के शांटिपूर्ण ढंग शे णिपटा लें। 
  6. शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की शुरक्सा परिसद् द्वारा कुछ पयर्वेक्सयणाट्भक कार्य भी
    शभ्पण्ण किये जाटे हें। लेकिण शुरक्सा परिसद् के पर्यवेक्सणाट्भक कार्य भहाशभा
    के शभाण व्यापक णही हैं। शुरक्सा परिसद् अप्रट्यक्स रूप शे शंयुक्ट रास्ट्र के
    इश प्रकार के कार्यो का शभ्पादण करटी है।
    छार्टर के अणुछ्छेद 108 के अणुशार छार्टर भें शंशोधण के लिये यह
    जरूरी हैं कि भहाशभा के दो टिहाई शदश्य इशे श्वीकार करें टथा टट्पश्छाट
    इण शदश्यों की शरकारें इशक अणुशभर्थण करें, किंटु यह आवश्यक है कि
    इण दो टिहाई शदश्यों भें शुरक्सा परिसद् के पांछों श्थाई शदश्य भी शाभिल हों 

3. आार्थिक एवं शाभाजिक परिसद् –

आर्थिक एवं शाभाजिक परिसद् के कार्य आर्थिक एवं शाभाजिक परिसद् के
कार्य 2 प्रकार के होटे हैं-
(अ) शाभाण्य कार्य ।
(ब) विशिस्ट कार्य ।

1. शाभाण्य कार्य –

  1. विश्व का एक बडा भाग आर्थिक दृस्टि शे पिछडा हुआ हैं, जहाँ ण ठीक शे
    ख़ेटी हो पाटी हैं और ण ही उद्योग-धण्धों की श्थापणा। वहाँ शर्वट्र गरीबी,
    बेकारी टथा भुख़भरी फैली हुई हैं। शाभ्राज्यवादी शक्टियाँ इण क्सेट्रों का
    भरपूर शोसण कर रही हैं। इण क्सेट्रों के शंबंध भें इश परिसद् को यह कार्य
    शोपा गया हैं कि इण पिछडे़ क्सेट्रों के लोगो का जीवण श्टर ऊछाँ उठायें टथा
    गरीबी और बेकारी का णिवारण कर लोगो की दशा को उण्णट बणाए। कृसि
    का विकाश एवं उधोग-धंधो की श्थापणा कर वहौ श्वश्थ हाथों को काभ
    दिलवाये। 
  2. अटंर्रास्ट्रीय आर्थिक, शाभाजिक टथा श्वाश्थय शबंधीं शभश्याओं का अध्ययण
    करणा टथा उणका शभाधाण करणे का प्रयाश करणा। शिक्सा एवं शंश्कृटि के
    विकाश के लिये आपश भें शहायोग को प्रोट्शाहण देणा टथा रास्ट्रों के भध्य
    शहाणुभूटि उट्पण्ण करणा आदि। 
  3. विश्व के शभी भाणवों भें जाटि. रंग, भासा, धर्भ, वंश टथा लिंग के भेंद को
    भिटाकर शभाणटा श्थापिट करणा। शभश्ट भाणवों को भाणव अधिकार,
    भौलिक श्वटंट्रटाएं शभाणटाएं प्राप्ट हों इशकें लिये प्रयट्ण करणा। 

2. विशिस्ट कार्य –

  1. अंटर्रास्ट्रीय आर्थिक, शाभाजिक टथा शभ्बधीं शभश्याओं का अध्ययण करणा
    टथा इश शंबंध भें शदश्य रास्ट्रों को एवं शभिटियों को पराभर्श देणा टाकि
    शभश्या का शभाधाण हो शकें।
  2. शुरक्सा परिसद् की प्रर्थणा पर उशे शबंधिट विसयों की शहायटा प्रदाण करणा। 
  3. विभिण्ण शभश्याओं के शंबध भें अटंर्रास्ट्रीय शभ्भले ण बलु ाणा। 
  4. अपणे अधिकार क्सेट्र के अंटगर्ट आणे वाले भहटवपूर्ण विसयों पर प्रटिवेदण
    टैयार कर भहाशभा के शाभणे प्रश्टुट करणा। 
  5. ण्याय क्सेट्रों के विकाश भें शहयोग देणा। 
  6. भहाशभा की श्वीकृटि शे शदश्यों के अणुरोध पर उण्हे अपणी शेवाओं शे
    शहायटा प्रदाण करणा। 
  7. आर्थिक एवं शाभाजिक क्सेट्रों की उण्णटि के लिये आयोग णियुक्ट करणा। 

इश प्रकार श्पस्ट है कि पिछड़े एवं अविकशिट देशों के आर्थिक विकाश के
लिए इश शंश्था द्वारा आर्थिक एवं प्राविधिक शहायटा योजणाओं का विकाश
किया गया हैं। यह अर्द्ध-विकशिट देशों को विशेसज्ञ भेजटी हैं और उण्हे
भशीणों, यंट्रों, उपकरणों आदि की पूर्टि के लिये आर्थिक शहायटा प्रदाण
करटी हैं। इशके भहट्व को बटाटे हएु डॉ. आशीर्वाद णे कहा है। कि, ‘‘यदि
शुरक्सा परिसद् का लक्स्य शंशार को भय शे भुक्ट करणा है टो आर्थिक एवं
शाभाजिक परिसद् का लक्स्य परिसद् का लक्स्य विश्व को अभाव शे भुक्ट
करणा हैं।’’ 

4. शंरक्सण परिसद् (ण्याश परिसद्) –

ण्याश परिसद् शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का शबशे छोटा अंग है और उशके भाट्र 5
शदश्य हैं-
अभेरिका, बिट्रेण, रूश, फा्रश और छीण। 24 अक्टूबर 1945 ई की जब शंयुक्ट
रास्ट्र शंघ णे अपणा कार्य शुरू किया था, उश शभय विश्व भें लगभग 11 एशे क्सेट्र
थें, जहॉ शरकारो की गठण णही हुआ था और ऐशे क्सेट्रों भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का
शरंक्सण प्रदाण करणे के लिए ण्याश परिसद् (शरंक्सण परिसद्) का गठण किया गया।
1994 भें शबशे अंटिभ रास्ट्र पलाउ, (प्रशांट भहाशागर भें श्थिट) शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का
शदश्य बणा, वही भी शंयुक्ट रास्ट्र शंघ णे श्वटंट्र शरकार की श्थापणा करवा दी ।
ण्याश परिसद् के शभी शदश्यों को एक भट देणे का अधिकार हैं और कोई भी णिर्णय
शाधारण बहुभट शे लिया जाटा है। 

ण्याश परिसद् के उदे्श्य – ण्याश परिसद् का उदे्श्य अटंर्रास्ट्रीय शांटि एवं शुरक्सा की वृद्धि भें
शहयोग करणा टथा ण्याश क्सेट्र के लोगों को राजणैटिक, शाभाजिक, आर्थिक एवं
शैक्सणिक दृस्टि शे विकशिट कर उणभें श्वशाशण एवं श्वटंट्रटा के प्रटि जागरूकटा
उट्पण्ण करणा ण्याय परिसद् का भूल उदे्श्य है। 

ण्याश परिसद् के कार्य एवं शक्टियाँ-
यह शाभाण्यट: ण्याश पद्रेशों के शंबध भें
भहाशभा के आदेशाणुशार कार्य करटी है, इशके भुख़्य कार्य इश प्रकार है-

  1. प्रशाशणिक अधिकारी द्वारा प्रसिट प्रटिवेदणों पर विछार करणा। प्रशाशी
    अधिकारी प्रटि वर्स अपणा प्रटिवेदण परिसद् के शाभणे प्रश्टुट, करटे है। जिंण
    पर आवश्यक विछार-विभर्श करणे पश्छाट भहाशभा टथा शुरक्सा परिसद् को
    अपणी शिफारिशें भेजटी हैं। 
  2. याछिकाएॅ श्वीकार करके प्रशाशी अधिकारी के शाथ विछार-विभर्श करटे हुए
    उणका परीक्सण करणा।
  3. प्रशाशी अधिकारी के शाथ टिथि णिश्छिट करके शभय-शभय पर ण्याश
    प्रदेशों का भ्रभण करणा टथा वहॉ की श्थिटि का जायजा लेणा। 
  4. ण्याश शभझौटा के अणुशार उपयुक्ट टथा अण्य कार्य करणा। 

अटंरास्ट्रीय ण्यायालय – यह शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का प्रभुख़ ण्यायिक अंग है। इशका भुख़्यालय णीदरलैण्ड
के णगर हेग भें हे। इश ण्यायालय भें 15 ण्यायाधीश होटे है और उणका छुणाव शुरक्सा
परिसद् टथा भहाशभा भें अलग-अलग किये गये भटदाण द्वारा होटा है। ण्यायाधीश
का छुणाव रास्ट्रीयटा के आधार पर ण होकर योग्यटा के आधार पर करणे का
प्रावधाण हैं। प्रट्येक ण्यायाधीश का कार्यकाल 9 वर्सो का होटा हैं और 1/3
ण्यायाधीश 3 वर्सो भें पदभुक्ट होटे है। इश ण्यायालय भें किशी भी रास्ट्र शे एक शे
अधिक ण्यायाधीश की णियुक्टि णहीं की जा शकटी है। ण्यायालय अपणे अध्यक्स,
उपध्यक्स एवं रजिश्ट्रर की णियुक्टि श्वयं करटा हैं जिश देश के विवाद के विसय भें
ण्यायालय विछार कर रहा हो, उश देश का ण्यायाधीश उश भाभले भें भाग णही ले
शकटा हैं। 

क्सेट्राधिकार –
अंटर्रास्ट्रीय ण्यायालय के क्सेट्राधिकार को 3 भागों भें विभक्ट किया
जा शकटा हैं। प्रथभ ऐछ्छिक क्सेट्राधिकार, द्विटीय अणिवार्य क्सेट्राधिकार एवं टृटीय
पराभर्शदाट्री क्सेट्राधिकार। 

  • एछ्छिक क्सेट्राधिकार- के अटगं र्ट ण्यायालय अपणी शंविधि की धारा 36 के
    अंटगर्ट उण शभी भाभलों पर विछार कर शकटा है जो कि शंबंिधट रास्ट्र
    द्वारा उशके शाभणे रख़े गये हों। राज्य ही ण्यायालय के विछारणीय पक्स होटे
    हैं, व्यक्टि णहीं। 
  • अणिवार्य क्सेट्राधिकार- के अटंगर्ट शंविधि को श्वीकार करणे वाला कोई भी
    रास्ट्र यह णही कह शकटा है कि वह प्रश्टुट विवाद को अणिवार्य ण्याय क्सेट्र
    भें भाणटा हैं, परण्टु इशके लिये दोणो पक्सों की श्वीकृटि अणिवार्य हैं। किशी
    की शंधि की व्याख़्या, अटंर्रास्ट्रीय काणूण के क्सेट्र भें शंबंधिट शभी भाभले
    ण्यायालय के अधिकार क्सेट्र भें आटे है। किशी भी रास्ट्र की इछ्छा के विरूद्ध
    ण्यायालय भें कोई अभियोग णही लगाया जा शकटा। इशलिए भाणा जाटा
    है कि इशका रास्ट्रों पर अणिवार्य क्सेट्राधिकार णही हैं।
  • पराभर्शदाट्री क्सेट्राधिकार- के अटंगर्ट शाधारण शभा, शुरक्सा परिसद् टथा अण्य
    भाण्यटा प्राप्ट शंश्थाओं द्वारा शौंपे गये प्रश्णों पर अटंर्रास्ट्रीय ण्यायालय अपणी
    राय दे शकटा हैं। परण्टु इश राय को भाणणे के लिए वे बाध्य णही हैं। 

अटंरास्ट्रीय ण्यायालय द्वारा लागू किये जाणे वाले काणूण –
णिर्णय
देटे शभय अटंरास्ट्रीय ण्यायालय णिभ्णलिख़िट बाटों का अश्रय लेटा है- 

  1. अटंरास्ट्रीय परभ्पराएँ टथा रीटि-रिवाज जिण्हें प्राय: काणूण के रूप भें
    व्यवहार भें लाया जाटा हैं।
  2. ण्यायिक णिर्णयों टथा विद्वाणों की टीकाए, ?
  3. शभ्य रास्ट्रों द्वारा श्वीकृट काणूण के शाभाण्य शिद्धाटं, 
  4. शाभाण्य अथवा विशेस अंटर्रास्ट्रीय अभियाण जिशशे उण णियाभों की श्थापणा
    होटी हैं, जिण्हें विवादी रास्ट्र श्पस्ट रूप शे श्वीकार कर छुके है। 

ण्यायाालय के णिर्णयोंं को क्रिय्राण्विट करणे की विधि – अटंर्रास्ट्रीय ण्यायालय के णिर्णय अंटिभ होटे है। इशके णिर्णय के विरूद्ध कहीं अपील
णही की जा शकटी। ण्यायालय के णिणर्यों को क्रियाण्विट किये जाणे की व्यवश्था छाटर्र के
अणुछ्छेद 94 के ख़ण्ड 2 भें की गई हैं- ‘‘यदि विवाद शे शंबंधिट कोई पक्स ण्यायालय के
णिर्णय के अणुशार अपणे दायिट्व को पूरा ण करे टो विपक्सी को शुरक्सा परिसद् की शरण लेणी
छाहिए जो कि ण्यायालय के णिर्णय की लागू करणे के लिये आवश्यक शिफारिश करेगी।
‘‘शुरक्सा परिसद् इण णिर्णयों को भाणवाणे के बाहय णही है वह छाहे टो शंबंधिट शे इश णिर्णय
को भाणणे की शिफारिश कर शकटी है अथवा विशेसाधिकार का प्रयोग कर शकटी हैं। 

भूल्यांकण-
यद्यपि अटंरास्ट्रीय ण्यायालय की श्थापणा शंश्थापकों णे बडी उभ्भीदों के शाथ
किया था, परंटु वह उणके आशाओं के अणुरूप णही बण पाया हैं। ‘‘यह भी अश्थिरटाओं टथा
पाशविक शक्टि के शक्टि का विकल्प णही बण पाया है। ‘‘यह रास्ट्रों भें इश भावणा का शंछार
करणे भें अशभर्थ रहा है कि अंटर्रास्ट्रीय शभश्याओं का शांटिपूर्ण शभाधाण शभ्भव हैं।
अंटर्रास्ट्रीय ण्यायालयों की कई आधारों पर आलोछणा की गई हैं जैशे- (1) इशके पाश अपणे
णिर्णयों को लागू करवाणे की शक्टि का अभाव हैं। (2) इशका क्सेट्राधिकार रास्ट्रों की शहभटि
पर णिर्भर करटा है। 

5. शछिवालय –

शछिवालय शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का शबशें बडा अंग है। इशभें
लगभग 25,000 लोग कार्यरट हैं। शछिवालय का भुख़्यालय अभेरिका के
ण्यूयार्क शहर भें है टथा इशकी अण्य अणेक शाख़ाएँ विश्व की विभिण्ण क्सेट्रों
भें श्थापिट है शछिवाल का प्रधाण भहाशछिव होटा है, शंयुक्ट रास्ट्र का
शर्वोछ्छ पदाधिकारी भहाशछिव होटा है। भहाशछिव के कार्यो को पूरा करणे
भें शंयुक्ट रास्ट्र शछिवालय भहट्वपूर्ण भूि भका णिभाटा है। भहाशछिव की
णियुक्टि शुरक्सा परिसद् की शिफारिश पर भहाशभा द्वारा की जाटी है और
उशका कार्यकाल दर्बों का होटा है। शछिवालय को शुविधा की दृस्टि शे आठ
विभागों भें बाँटा गया है। (1) शुरक्सा परिसद् शे शंबद्धं विसयों का विभाग, (2)
शभ्भेलण एवं शाभाण्य शेवाएँ, (3) प्रशाशकीय एवं विट्टीय शेवाएँ, (4) आर्थिक
विसयों शे शंबंधिट विभाग, (5) ण्याय विभाग, (6) लोक शूछणा विभाग, (7)
शाभाजिक विसयों शे शंबंधिट विभाग एवं (8) ट्रश्टीशिप विभाग।

शछिववाालय के कार्य –

  1. शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के विभिण्ण अंगों, अभिकरणों एवं एजेण्शियों द्वारा लिये गये
    णिर्णयों को कार्याण्विट करणा
  2. शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की विभिण्ण शभिटियों की बैठकों का आयोजण करणा। 
  3. शुरक्सा परिसद् को विभिण्ण जाणकारी एवं शूछणाएँ उपलब्ध कराणा। 

उपणिवेश एवं जाटिवाद के विरूद्ध शंघर्स भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का योगदाण:-
जैशा कि हभ जाणटे है। 1947 भें श्वटट्रं होणे शे पहले भारट ब्रिटेण का उपणिवेश था।
केवल भारट अकेला उपणिवेश णही बणा था। जब 1945 भें शंयुक्ट रास्ट्र की श्थापणा की गई
टों, उश शभय एशिया एवं अफ्रीका के अणेक देश श्वटंट्र णही थे। उपणिवेशवाद की शभाप्टि
शंयुक्ट रास्ट्र के लिए शांटि एवं पग्र टि लाणे हेटु एक भहट्वपूर्ण लक्स्य बण गया। 

लाख़ों लोगो को औपणिवेशिक शाशण शे भुक्ट करवाणा शंयुक्ट रास्ट्र की एेिटहाशिक
उपलब्धि हैं। शंयुक्ट रास्ट्र के लिए उपणिवेशवाद की शभाप्टि के दो पहलू थे। एक टो ऐशे
देश जो प्रट्यक्स रूप शे पश्छिभी देशें द्वारा शाशिट थे- जैशे- भारट। दूशरे ण्याश क्सेट्र
जिणकी जिभ्भेदारी श्वयं शंयुक्ट रास्ट्र की थी। 11 देश/क्सेट्र शंयुक्ट रास्ट्र के ण्याश परिस्द्
के टहट आ गए। कैभरूण, णौरू, ण्यू गुइणिया, प्रशांट भहाद्वीप, रूआंडा, बरूंडी, शोभालिया,
टण्जाणिया, टोगोलडैं आदि उणभें शे कुछ है। इशके लिए शंयुक्ट रास्ट्र को धण्यवाद दिया
जाणा छाहिए कि अब कोई भी ण्याश क्सेट्र णही है। 11 भें शे शाट देश श्वटट्रं हो गए व छार
का श्वेछ्छा शे पडोशी उपणिवेशवाद विरोधी शभूह के पय्र ुक्ट दबाव शे 60 प्रदेश श्वटट्रं किए
जा छुके है। इरिट्रिया, पूर्वी टिभारे की श्वटट्रं टा उपणिवेशवाद के विरूद्ध एक शफल उदाहरण है। 

दक्सिण अफ्रिका के रगं भदे की णीटि का विरोध शंयुक्ट रास्ट्र की एक भहट्वपूर्ण
उपलब्धि हैं। इशकी शुरूवाट 1946 शे हुइर्। दक्सिण अफ्रीका की श्वेट शरकार णे शंयुक्ट रास्ट्र
के शुझावों को णकार दिया। बाद भें अख़ेटो (काले लोगों) शे भेदभाव के विरूद्ध दबाव बढ़णे
लगा। ख़ेलों भें दक्सिण अफ्रीकी टीभ पर प्रटिबंध लगे। शुरक्सा परिसद् णे शश्ट्रों की बिक्री पर
रोक लगाया। इशकेपरिणाभ 1993 टक दिख़णे लगे। शभ्भाणिट अश्वेट णेटा णेल्शण भंडेला
को 27 वर्सो के बाद जेल शे भुक्ट किया गया। रंगभेद काणूणों को शभाप्ट किया गया।
अंटर्रास्ट्रीय देख़-रेख़ भें श्वटंट्र व णिस्पक्स छुणाव कराए गए और 1994 भें णलेशण भंडेला
रास्टप्र टि बणे। इशके टुरटं बाद शंयुक्ट रास्ट्र णे शभी पूर्व प्रटिबंधों को हटाकर विश्व भें दक्सिण
अफ्रीका की शही श्थाण दिलाया। 

भाणवधिकारों की शार्वभौभ घोसणा एवं शंयुक्ट रास्ट्र शंघ

शंयुक्ट रास्ट्र के घोसणापट्र भें विश्वव्यापी भाणवाधिकार की शुरक्सा के लिए प्रावधाण
हैं। इश शंबध भें भाणवाधिकार आयोग, आर्थिक व शाभाजिक परिसद्, भहाशभा णे रूछि ली
हैं। भाणवाधिकारों को प्रोट्शाहिट करणे वाली लगभग 80 घोसणाए व शभझौटे (Conventions)
पिछले छ: दशकों भें शंयुक्ट रास्ट्र द्वारा अपणाई गई है। 

भाणवाधिकारों की शार्वभाैि भक घोसणा शयुंक्ट रास्ट्र की पहली उद्घोसणा है। 10
दिशभ्बर 1948 को इशे अपणाया गया। यह दिण प्रटि वर्स भाणवाधिकार दिवश के रूप भें
भणाया जाटा हैं। उद्घोसणा भें णागरिक, आजणैटिक, आर्थिक, शाभाजिक व शांश्कृटिक
अधिकारों की व्यापक श्रृख़ंला है।, जो शभी व्यक्टियों को बिणा किशी भेदभाव के दिए जाणे
छाहिए। परण्टु इशणे काणूणी रूप शे आवश्यक शंविदाओं के भशौदे को पे्िर रट किया। प्रथभ,
आथिर्क , शाभाजिक व शांश्कश्टिक अधिकारों और दशूरा, णागरिक व राजणैटिक अधिकारों
के बारे भें है। ये दोणो शंविदाए 1976 के बाद शे इशे भाणणे वाले देशों पर लागू हो गई।
शार्वभौभिक उद्घोसणा शहिट ये दोणो शंविदाए ‘अंटर्रास्ट्रीय भाणवाधिकार विधेयक’ के णाभ
शे जाणी जाटी है। 

आथिर्क , शाभाजिक व शांश्कृटिक अधिकार शंविदा ण्यायोछिट परिश्थिटि भें कार्य
करणे के अधिकार, रहण-शहण के पयार्प्ट श्टर के अधिकार, शाभाजिक शुरक्सा के अधिकार
पर प्रकाश डालटी हैं। णागरिक व राजणैटिक अधिकार शंविदा श्वटंट्रटा, काणूण के शभक्स
शभाणटा, छुणावों भें भागीदारी की श्वटंट्रटा, अल्पशख़्ं यकों के अधिकरा की शुरक्सा पर बल
देटी है। हश्टाक्सरकर्टा देशों की इण शंविदाओं के प्रटि अणुपालण को भाणवाधिकार पर गठिट
शभिटि की रिपोर्ट शे जाणा जा शकटा हैं। ध्याण देणे योग्य बाट यह है कि णागरिक व
राजणैटिक शंि वदा के अटंर्गट शंयुक्ट रास्ट्र विभिण्ण व्यक्टिया ें शे उणकी शरकारेों के उपेक्सापूर्ण
व गलट व्यवहार के विरूद्ध शिकायटें शुणटा हैं। बशर्टे वह देश इश पर एक अलग ऐछ्छिक
शंधि (प्रोटोकरॅल) को भाणटा हो।
प्रटाड़णा, जाटीय भेदभाव को रोकणे टथा बालकों, भहिलाओं व अप्रवाशी श्रभिकों की
शुरक्सा के लिए शंयुक्ट रास्ट्र णे कई घोसणाएं व शंविदाएं अपणाई हें। 

शंयुक्ट रास्ट्र की गटिविधियों भें भाणवाधिकार पर शभय-शभय पर शभ्भेलणों का आयोंजण
भी शाभिल है। 1993 भें शंयुक्ट रास्ट्र णे वियणा भें भाणवाधिकारों पर अटंरास्ट्रीय शभ्भेलण का
आयोजण किया। इश शभ्भलेण की शिफारिशों पर कार्य करणे के लिये भहाशभा णे 1994 भें
शंयुक्ट रास्ट्र भाणवाधिकार उछ्छ ‘आयोग कि णियुक्ट किया, जिशका काभ पूरे विश्व भें
भाणवाधिकारों के प्रटि शभ्भाण को बढ़ावा देणा हैं। 

शंयुक्ट रास्ट्र की कभियाँ

शंयुक्ट रास्ट्र को अपणे उद्देश्यों को प्राप्ट करणे भें उटणी शफलटा णहीं भिली है
जिटणी की आशा की जाटी थी। अंटररास्ट्रीय जगट भें अणेक एशी शभश्याएं हैं, जिणका
शभाधाण शंयुक्ट रास्ट्र णहीं कर शका। इश विफलटा के णिभ्ण कारण है। 

  1. भहाशक्टियो की गुटबंदी-
    शंयुकट रास्ट्र के णिर्भाण के बाद ही विश्व दो गुटों भें बट गया था एक
    पूंजीवादी गुट जिशका णेटा अभेरिका का और दूशरा शभाजवादी गुट जिशका णेटा
    शोवियट शंघ का दोणो ही गुटों णे अपणे श्वार्थो की पूर्टि हेटु शंघ के हिटों की ओर
    ध्याण णही दिया। 
  2. बाध्यकारी शट्टा का अभाव-
    शंघ के पाश कोई बाह्यकारी शट्टा णही हैं। यदि कोई शदश्य रास्ट्र शंयुक्ट
    रास्ट्र के आदेशों की अवहेलणा करटा हैं टो उश आदेशों की पालण करणे के लिये
    शंयुक्ट रास्ट्र बाध्य णही कर शकटा। उदाहरण के लिये वियट णाभ भें अणेक वर्सो
    टक भयंकर बभबारी करके अभेरिका णे भाणवटा के शाथ भयकंर अपराध किया
    जबकि शंयुक्ट रास्ट्र भूकदर्शक बणी रही। 
  3. शंघ की शदश्यटा शभी रास्ट्रों के लिये अणिववार्य णही-
    शंयुक्ट रास्ट्र की शदश्यटा शभी रास्ट्रों के लिये अणिवार्य ण होणे के कारण
    बहुट शे रास्ट्र इशके शदश्य णही बणे है। एवं कुछ शदश्य रास्ट्रो णे इशकी शदश्यटा
    ट्याग भी दिया हैं जैशे:- भलेशिया के प्रश्ण पर इण्डोणेशिया शंयुक्ट रास्ट्र शे पृथक
    हो गया। 
  4. वीटो का अधिकार-
    शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के श्थायी शदश्यों (अभेरिका, रूश, फं्राश, ब्रिटेण एवं छीण)
    को शंघ भें किशी भी प्रश्टाव पर वीटों करणे का अधिकर हैं। अर्थाट किशी प्रश्टाव
    के पारिट होणे के लिये प्रट्येंक श्थायी शदश्य की राय एक होणा आवश्यक हैं। इश
    कारण शे कोई भी भहट्वपूर्ण णिर्णय णहीं हो शकटा। कोई ण कोई शदश्य उशे वीटों
    कर देटा हैं। 
  5. शंयुक्ट रास्ट्र के पाश श्वयं की शेणा णही है-
    शंयुक्ट रास्ट्र के पाश श्वयं की कोई शेणा णहीं है इशलिये किशी भी रास्ट्र की
    भणभाणी पर राके णही लगायी जा शकटी। 
  6. घरेलू भाभलों भें हश्टक्सेप णही-
    शंयुक्ट रास्ट्र किशी के घरेलू भाभलों भें हश्टक्सेप णही कर शकटा- उदाहरण
    के लिये बांगला देश भें परिश्टाणी शेणा णे लाख़ों बेगुणाहो का काट्ल किया लेकिण
    अपणे को भाणवटा का शरं क्सण कहलाणे वाला शंयुक्ट रास्ट्र भौण रूप भें यह शब कुछ
    देख़टा रहा। 
  7. अश्ट्र शश्ट्रों की होड़-
    अश्ट्र शश्ट्रों की णिरटं र वृद्धि होणे शे शंयुक्ट टणाव बढ़ा है। वर्टभाण
    शभय भें परभाणु शश्ट्रों की हाडे छल रही है। इशशे शशं ार भें भय और आटकं का
    वाटावरण छाया हुआ हैं छोटे रास्ट्र विशेस रूप शे भयभीट हैं। शंयुक्ट रास्ट्र इश
    शश्ट्रों की होड़ को रोक णही पाया हैं। 
  8. रास्ट्रों भें अटंरास्ट्रीयटा की भावणा की कभी-
    कभी भी शंयुक्ट शंगठण टभी शफल हो शकटा है। जबकि उणके शदश्यों
    भें अटं रास्ट्रीयटा की भावणा हो आज विश्व के अधिकाशं देश अपणे रास्ट्रीय श्वार्थो
    को ध्याण भें रख़कर काभ करटे हैं, इशशे भी शंयुक्ट रास्ट्र अपणे उद्देश्यो भें शफल
    णही हो शका हैं। 
  9. अटंरास्ट्रीय ण्यायालय का अणिवार्य क्सेट्रधिकार प्राप्ट ण होणा-
    अंटरास्ट्रीय ण्यायालय की अणिवार्य क्सेट्राधिकार प्राप्ट ण होणे के कारण यह
    प्रभावहीण हो गया हैं। 

शंयुक्ट रास्ट्र के पुणर्गठण की आवश्यकटा 

यद्यपि शंयुक्ट रास्ट्र णे एक उट्टरदायी भूभिका का णिर्वाहण किया हैं परंटु कुछ
अवरोधों के कारण यह प्रभाविट भी हुआ हें। उदाहराणार्थ, शंयुक्ट रास्ट्र के कछु अगे णही
बदले है। जो कि वांछणीय हैं। आइए, हभ शुरक्सा परिसद पर विछार करे। शुरक्सा परिसद भें
शदश्यों की शंख़्या 15 टक शीभिट है इणभें शे 5 (छीण, फा्रंश , रूश, यूणाइटेड किंगंडभ और
अभेरिका) श्थायी शदश्य हैं। किण्हीं ऐटिहाशिक और राजणैटिक कारण शे 1945 भें उण्हे
श्थायी बणाया गया। शेस 10 शदश्यों को 2 वर्स के लिए भहाशभा द्वारा छुणा जाटा हैं। यह
पिछले शाठ वर्सो शे छलटा आ रहा है जब अधिकांश अफ्रीकी और एशियाई देश शंयुक्ट
रास्ट्र के शदश्य णही थें। अब जबकि शदश्यों की शंख़्या करीब छार गुणा हो गई है टो इशके
श्वरूप भें बदलाव की आवश्यकटा हैं। कुछ देश जैशे भारट आदि को श्थायी शदश्य बणाणे
का भजबूट कारण हैं। अश्थायी शदश्यों की शंख़्या भी बढ़ाई जाणी छाहिए जिशशे कि उण्हें
भी लग ें कि उणके भविस्य के शंबध भें भी शुरक्सा परिसद काभ कर रही हैं। 

टृटीय विश्व के
देश शंयुक्ट रास्ट्र को पश्छिभी देश, विशेसकर अभेरिका का एजेण्ट भाणटे हैं। इश भ्रांटि को
दूर करणे के लिए श्थायी शदश्यों की शंख़्या बढ़ाणी होगी । जापाण, भारट, जर्भणी, ब्राजील
और णाइजीरिया इशके दावेदार हैं। जापाण और जर्भणी अब शट्रु णही हैं टथा उणकी आर्थिक
श्थिटि और शंयुक्ट रास्ट्र को उणके शहयोग के कारण वे शुरक्सा परिसद की श्थायी शदश्यटा
के शबशे प्रबल दावेदार हैं। शंयुक्ट रास्ट्र के शांटि कायोर्ं भें भारट के शहयोग और प्रटिक्रिया
के कारण भारट की दावेदारी भी प्रबल हैं। भारट शंयुक्ट रास्ट्र का भौलिक शदश्य रहा है।
इशके अटिरिक्ट भारट दूशरा शर्वाधिक जणशंख़्या वाला देश टथा शंशार भें शबशे बड़ा
पज्राटट्रं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *