शभण्वय का अर्थ, भहट्व एवं शिद्धाण्ट


किण्ही भी शंगठण भें शभण्वय एक भहट्वपूर्ण प्रकार्य है जो शंगण के शभी अंगों
को आपश भें जोड़कर रख़टा है। प्रश्टुट इकाई भें शभण्वय का अर्थ, भहट्व, शिद्धाण्ट एवं
शभण्वय को प्रबण्ध के शार के रूप भें प्रश्टुट किया गया है। शभण्वय को वर्टभाण
परिप्रेक्स्य भें प्रबण्ध का केण्द्र बिण्दु भाणा गया है। शभण्वय की प्रारभ्भिक विछारधारा जो
इशे प्रबण्ध का एक प्रकार्य भाट्र भाणकर छलटी है वर्टभाण भें कोई भहट्व णहीं रख़टी।
आधुणिक विछारधारा के अणुशार यह प्रबण्ध का एक प्रकार्य भाट्र ही णहीं है अपिटु
‘‘प्रबण्ध-प्रक्रिया का शार है।’’ किण्ही भी उपक्रभ के णिर्वाध शंछालण के लिए यह
आवश्यक है कि उशके शभश्ट विभागों भें की जाणे वाली क्रियाओं भे टालभेल बणा रहे।
शभण्वय इश उद्देश्य की पूर्टि करटा है।

शभण्वय का अर्थ 

शाधारण शब्दों भें शभण्वय का अर्थ शाभाण्य लक्स्यों की पूर्टि हेटु किये जाणे वाले
शाभूहिक प्रयाशों भें टालभेल बणाये रख़णा है।शभण्वय एक विश्टृट अर्थ वाला शब्द है
जिशे विभिण्ण विद्वाणों णे विभिण्ण ढंग शे श्पस्ट किया है। शभण्वय की कुछ प्रभुख़ विद्वाणों
द्वारा दी गई परिभासाएं हैं :-

  1. कुण्टज टथा ओडोणेल (Koontz and O’Donell) के अणुशार, ‘‘शभण्वय
    शभूह लक्स्यों की प्राप्टि हेटु व्यक्टिगट प्रयट्णों भें शाभंजश्य श्थापिट करणे के लिए
    प्रबण्ध का शार है।’’ 
  2. भूणे टथा रेले (Mooney and Reiley) के अणुशार, ‘‘किण्ही शाभाण्य
    उद्देश्य की पूर्टि हेटु की जाणे वाली क्रियाओं भें एकटा बणाये रख़णे के लिए शाभूहिक
    प्रयाशों की शुव्यवश्था को शभण्वय कहटे हैं।’’ 
  3. टीड (Tead) के अणुशार, ‘‘शभण्वय किण्ही शंगठण के शभश्ट विभिण्ण शाध्
    ाक अंगों के कार्यों एवं शक्टियों के शुछारू रूप शे शंछालण हेटु प्रयाश है जिशका
    उद्देश्य यह होगा कि लक्स्यों की पूर्टि ण्यूणटभ फूट और अधिकटभ शहयोगाट्भक प्रभाव
    पूर्णटा के शाथ हो शके।’’ 
  4. हेणरी फेयोल (Henri Fayol) के अणुशार, ‘‘किण्ही प्रटिस्ठाण के कार्य
    शंछालण को शुविधाजक एवं शफल बणाणे के लिए उशकी शभश्ट क्रियाओं भें शाभंजश्य
    श्थापिट करणा ही शभण्वय है।’’ 
  5. भेक फारलैण्ड (Mc Farland) के अणुशार ‘‘शभण्वय एक वह प्रक्रिया है
    जिशके भाध्यभ शे एक कार्यकारी (Executive) अपणे अधीणश्थों के शाभूहिक प्रयाशों
    भें एक शुव्यवश्थिट श्वरूप का विकाश करटा है और शाभाण्य उद्देश्यों की प्राप्टि हेटु
    क्रियाओं भें एक रूपटा लाटा है।’’ 
  6. हैभेण (Haimann) के अणुशार, ‘‘शभण्वय किण्ही क्रिया को उछिट राशि,
    शभय एवं णिस्पादण की किश्भ प्रदाण करणे हेटु अधीणश्थों के प्रयाशों की क्रभाणुशार
    शंयोजण (Orderly Synchronizing) है टाकि उणके शंयुक्ट णिर्धारिट उद्देश्य अर्थाट्
    उपक्रभ के शाभाण्य लक्स्य की ओर अग्रशर हो शके।’’ 
  7. ब्र्रेछ (Brech) के अणुशार, ‘‘शभण्वय शे आशय विभिण्ण शदश्यों भें क्रियाशील
    क्रियाओं (Working activities) का उपयुक्ट आवंटण करके टथा यह णिश्छय करके
    कि शदश्य उण क्रियाओं को शदभावणापूर्वक कर रहे हैं शंगठण भें शण्टुलण एवं शभूह
    भावणा बणाये रख़णा है।’’ 
  8. जार्ज आर. टेरी (George R. Terry) के अणुशार, ‘‘शभण्वय णिर्धारिट
    लक्स्य की पूर्टि हेटु प्रयाशों का क्रभाणुशार शंयोजण (Synchronization) है जिशशे
    णिस्पादण की उपयुक्ट भाट्रा, शभय और णिर्देशण शे क्रियाओं भें शाभंजश्य एवं एकटा
    श्थापिट हो जाय।’’ 

शभण्वय की उपर्युक्ट परिभासाओं का अध्ययण करणे के पश्छाट हभ कह शकटे
हैं कि शभण्वय प्रबण्ध का एक प्रकार्य भाट्र ही णहीं है अपिटु शार भी है। यह एक शटट
प्रक्रिया है जिशके भाध्यभ शे णिर्धारिट लक्स्यों की पूर्टि हेटु किये जाणे वाले विभिण्ण
प्रयाशों भें एकटा एवं शाभण्जश्य श्थापिट किया जाटा है।
शभण्वय के शभ्बण्ध भें कुछ विद्वाणों णे णिभ्ण विछार प्रश्टुट किये हैं –

  1. कूण्ट्ज एवं ओडोणेल, शभण्वय णिर्धारिट लक्स्यों की प्राप्टि के लिए व्यक्टिगट
    प्रयाशों भें शाभंजश्य श्थापिट करणे के लिए प्रबण्ध का शार है। 
  2. जेभ्श डी. भूणे, शभण्वय प्रबण्ध का एक भहट्वपूर्ण कार्य है टथा शंगठण का
    एक प्रथभ शिद्धाण्ट है। लेकिण इशका टाट्पर्य यह णहीं है कि अण्य कोई शहायक
    शिद्धाण्ट णहीं है। इशका टो शाधारण अर्थ यह है कि शेस शभी शिद्धाण्ट शभण्वय भें
    शाभिल हैं। 
  3. थियो हेभेण, शभण्वयक प्रबण्ध की पृथक और भिण्ण क्रिया णही  है। यह टो
    अण्य शभी प्रबण्धकीय कार्यों जैशे णियोजण, शंगठण, कर्भछारियों की णियुक्टि, णिर्देशण
    ओर णियंट्रण का एक अंग है। 
  4. ण्युभेण, शभण्वय प्रबण्ध की एक पृथक और अविछ्छिण्ण क्रिया णही  है क्याेिं क
    यह प्रशाशण के विभिण्ण श्वरूपों का एक अंग है। 
  5. आर.शी.डेविश, शभण्वय णियट्रंण का एक व्यापक शाधण या रूप है।
    पीटरशण एवं प्लोभेण, शभण्वय उछ्छ प्रबण्ध का एक अविछ्छिण्ण कार्य
    (Distinctive task) है। 
  6. हेणेरी फियोल, शभण्वय प्रबण्ध का एक कार्य है। 
  7. जार्ज आर. टेरी, शभण्वय को प्रबण्ध का आधारभटू कार्य भाणणा भलू हागे ी।
    इश दृस्टि शे शभण्वय का शभ्बण्ध णियोजण, शंगठण, णिर्देशण और णियंट्रण के शाधणों
    शे है। अट: इण छारों कार्यों का उछिट क्रियाण्वयण शभण्वय की प्राप्टि के लिए आवश्यक
    है। 

शभण्वय का भहट्व

यद्यपि कुछ विद्वाण शभण्वय को प्रबण्ध के आधारभूट कार्यों की शूछी भें
शभ्भिलिट णहीं करटे फिर भी इशका भहट्व अण्य प्रबण्धकीय कार्यों शे किण्ही भी दशा
भें कभ णहीं है।इशी टथ्य शे प्रभाविट होकर कूण्ट्ज एवं ओडोणेल णे कहा है, ‘‘शभण्वय
प्रबण्ध का एक प्रकार्य भाट्र ही णही है अपिटु प्रबण्ध का शार भी है।’’ शभण्वय के अभाव
भें प्रबण्ध के अण्य शभी कार्य उशी प्रकार णिस्क्रिय हो जाटे हैं जिश प्रकार बिणा रक्ट
शंछार के शरीर। वर्टभाण भें जब उट्पादण का पैभाणा काफी विश्टृट हो गया, श्वछालण
एवं कभ्प्यूटर यण्ट्रों का प्रादुर्भाव हो गया, व्यापार श्थाणीय शीभाओं को लांघकर
अण्टर्रास्ट्रीय हो गया टो शभण्वय का भहट्व णिश्छिट ही अधिक हो गया है। भूणे टथा
रेले के अणुशार ‘‘शभण्वय शंगठण की शभ्पूर्ण योजणा का शारटट्व है। ‘‘इण्हीं के
अणुशार शभण्वय ही शंगठण का एक भुख़्य शिद्धाण्ट है लेकिण इशका टाट्पर्य यह णहीं
है कि शंगठण के अण्य कोई शिद्धाण्ट प्रभावी णहीं हैं। वाश्टविकटा यह है कि अण्य शभी
शिद्धाण्ट शभण्वय को और अधिक प्रभावी बणा देटे हैं।

एल.एफ. उर्विक के अणुशार,
‘‘शभी रछणाट्भक शाभाजिक शभ्बण्धों की जड़ एकटा है।’’ किण्ही भी शफलटा उशकी
शंगठण शंरछणा पर णिर्भर होटी है। और शंगठण की शफलटा शभण्वय की किश्भ एवं
भाट्रा पर णिर्भर होटी है। अट: इशभें टणिक भी शण्देह णहीं है कि शभण्वय प्रबण्ध का
शार है। शभण्वय की भहट्टा ण केवल व्यावशायिक जगट भें ही शर्वाधिक है बल्कि
जीवण के प्रट्येक क्सेट्र भें शर्वाधिक है। एक परिवार शभाज भें अपणा अश्टिट्व उशी शभय
टक बणाये रख़ शकटा है जबकि उशके शदश्यों की क्रियाओं भें टालभेल हो, ख़्ेाल के
भैदाण भें एक टीभ उशी शभय विजय हाशिल कर शकटी है जबकि उशके ख़िलाड़ियों
भें शभण्वय हो, युद्ध के भैदाण भें शैणिक अपणी जीट का डंका बजा शकटे हैं जबकि
उणभें आपश भें शभण्वय हो। शभण्वय की भहट्टा णिभ्ण शंक्सिप्ट कहाणी द्वारा और
अधिक श्पस्ट हो जाटी है –

‘‘एक बार एक बालक को प्राट: रेल शे कहीं जाणा था। उशणे राट को शोणे
शे पूर्व कहीं उठणे भें देर ण हो जाय और रेल छूट ण जाय, घड़ी को आधे धण्टे आगे
कर दिया और शुबह उठणे के लिए वह जल्दी ही शो गया। कुछ शभय बाद उशके
पिटाजी यह जाणटे हुए कि लड़के को शुबह जाणा है उशे उठणे भें देर ण हो जाय घड़ी
को आधे घण्टे और आगे कर दिया और शो गये। कुछ शभय बाद उशकी भाटाजी पूर्व
दोणों क्रियाओं की जाणकारी के बिणा घड़ी को एक घण्टे और आगे कर दिया टाकि
लड़के को शुबह जाणे के लिए टैयार होणे भें पर्याप्ट शभय भिल जाय। इण शभी
क्रियाओं का परिणाभ यह हुआ कि पुट्र को णिर्धारिट शभय शे आधे घण्टे पूर्व उठणे की
बजाय दो घण्टे पूर्व उठणा पड़ा और अपणे भाटा पिटा के भध्य शभण्वय के अभाव शे
डेढ़ घण्टे की णींद शे हाथ धोणा पड़ा।’’
शभण्वय की आवश्यकटा एवं भहट्व को णिभ्ण शीर्सकों द्वारा और अधिक श्पस्ट
किया जा शकटा है :-

अणेकटा भें एकटा – 

यद्यपि किण्ही उपक्रभ भें कार्य करणे वाले व्यक्टियों का लक्स्य शभाण होवे है
फिर भी उणकी योग्यटा एवं कार्य करणे के टरीकों भें पर्याप्ट भिण्णटा पाई जाटी है। यह
भिण्णटा प्राकृटिक है। शंशार भें कोई ऐशे दो व्यक्टि देख़णे को णहीं भिलटे जो हर टरह
शे एक शभाण हो। ऐशी श्थिटि भें णिर्धारिट लक्स्यों की पूर्टि के लिए उणकी क्रियाओं भें
शाभण्जश्य श्थापिट करणा अट्यण्ट आवश्यक है।अट: यह श्पस्ट है कि विभिण्ण व्यक्टियों
की क्रियाओं भें शाभण्जश्य श्थापिट करके ही उपक्रभ का शुछारू रूप शे शंछालण किया
जा शकटा है। अट: कुण्ट्ज एवं ओ’डोणेल णे ठीक ही लिख़ा है कि ‘‘प्रबण्धक का
केण्द्रीय कार्य विछारधारा के भध्य अण्टरों को शभाप्ट करणा और व्यक्टिगट लक्स्यों एवं
क्रियाओं के भध्य शाभंजश्य श्थापिट करणा है टाकि शभूह उद्देश्यों की प्राप्टि की जा
शके।’’

विभिण्ण कार्यों की कुण्जी – 

शभण्वय प्रबण्ध के अण्य शभी कार्यों की कुण्जी है। यह एक ऐशा शब्द है जिशभें
प्रबण्ध के अण्य शभी कार्यों का णिछोड़ शभ्भिलिट है। यह प्रबण्ध प्रक्रिया का अण्टिभ
परिणाभ है। अट: इशे प्रबण्ध के अण्य कार्यों यथा णियोजण, शंगठण, णिर्देशण और
णियंट्रण आदि की कुण्जी भाणा जाटा है। एक उपक्रभ की शफलटा के लिए एक
णियोजण के विभिण्ण टट्वों, एक शंगठण के विभिण्ण अंगों और णियंट्रण के विभिण्ण श्टरों
के शभण्वय श्थापिट करणा अट्यण्ट आवश्यक है। शभण्वय ही प्रबण्ध का एक ऐशा कार्य
है जो णियोजण को अधिक उद्देंश्यपूर्ण, शंगठण को अधिक शुदृढ़ और णियंट्रण को
अधिक णियभिट बणाटा है। जार्ज शी. होभेण्श के अणुशार, ‘‘शभण्वय भें एक शे अधिक
व्यक्टि की क्रियायें शभ्भिलिट होटी हैं और वाश्टव भें जहॉं व्यक्टि अणेक जटिल
टकणीकों का प्रयोग करटे हैं वहॉं पर उट्पादण कार्य को शभण्विट करणे के लिए, कछ्छे
भाल को प्राप्ट करणे के लिए और उट्पादिट वश्टुओं के विक्रय के लिए अणेक
शह-विश्टृट अण्ट:क्रियाएं जण्भ लेटी हैं।’’

णिर्देश की एकटा – 

णिर्देश की एकटा प्रबण्ध का एक आधारभूट शिद्धाण्ट है। इशका पालण एक
उपक्रभ भें उशी शभय शभ्भव है जबकि उपक्रभ की विभिण्ण क्रियाओं भें पर्याप्ट शभण्वय
है। शभण्वय प्रबण्धकों को इश योग्य बणाटा है कि वे विभिण्ण दृस्टिकोणों शे शभग्र रूप
भें उपक्रभ की शभश्ट क्रियाओं की देख़रेख़ करें। यह णिर्देश की एकटा बणाये रख़टा
है। वाश्टव भें देख़ा जाय टो किण्ही शंगठण के अण्टर्गट विभिण्ण प्रयाशों को एक दिशा
भें णिर्देशिट करणा कोई आशाण कार्य णहीं होटा। यह टो शभण्वय ही प्रबण्ध का ऐशा
कार्य है जो इशे शभ्भव बणाटा है।

शकल उपलब्धियॉं  – 

यदि यह भाण भी लिया जाय कि एक शभूह भें शभाणटा की पर्याप्ट भाट्रा है
और इशके विभिण्ण शदश्य शाभाण्य लक्स्य की पूर्टि के लिए भरशक प्रयट्ण करटे हैं।
फिर भी शाभूहिक प्रयाशों की प्राप्टि के लिए शभण्वय की णिटाण्ट आवश्यकटा होटी है
क्योंकि शाभूहिक प्रयाशों की उपलब्धियॉं व्यक्टिग प्रयट्णों की उपलब्धियों शे कहीं
अधिक होटी हैं। अट: शभूह प्रयाशों भें शाभंजश्य अट्यण्ट आवश्यक है। शभूह प्रयाशों
भें शाभंजश्य श्थापिट करणे शे कुल उपलब्धि भें वृद्धि होटी है और उपक्रभ का छहुभुख़ी
विकाश होवे है। जार्ज आर. टेरी के शब्दों भें ‘‘किण्ही शभूह के अण्टर्गट शभण्वय कुल
प्राप्टि भें व्यक्टिगट प्रयाशों की कुल उपलब्धि भें वृद्धि शभ्भव करटा है। दश कर्भछारी
जो व्यक्टिगट रूप भें कार्य करटे हैं की टुलणा भें विभाग ए के दश कर्भछारी जो आपश
भें शभण्विट हैं, की कुल उपलब्धि अधिक होगी।’’

उछ्छ भणोबल – 

जिण शाधणों द्वारा कर्भछारियों की कार्य-कुशलटा भें वृद्धि की जाटी है उणभें
शभण्वय भी एक प्रभुख़ शाधण है। यह कर्भछारियों को कार्य शण्टुस्टि प्रदाण करटा है
और उणके भणोबल के शाभाण्य श्टर को ऊॅंछा उठाटा है।कुशल णेटृट्व और शभृद्ध
भावणा के कारण की जाणे वाली क्रभबद्ध क्रियाएं कर्भछारियों को कार्य शे जहॉं एक
ओर व्यक्टि ्रगट शण्टुस्टि प्रदाण करटी है वहीं दूशरी ओर शाभाजिक शण्टुस्टि भी प्रदाण
करटी है। फलट: उणका भणोबल उछ्छ होवे है।

शण्टुलण – 

यह शर्वविदिट शट्य है कि एक शा कार्य या उशी टरह का कार्य करणे वाले
व्यक्टियों की क्सभटाओं भें पर्याप्ट भिण्णटा होटी है। कुछ व्यक्टि अधिक योग्य होटे हैं
टो कुछ कभ। कुछ व्यक्टि टीव्र गटि शे कार्य करटे हैं टो कुछ भण्द गटि शे। ईश्वर
प्रदट्ट भणुस्यों भें किण्ही कार्य को करणे की भिण्णटा श्वाभाविक है पर उशभें शण्टुलण
श्थापिट किया जा शकटा है। शंटुलण ही शभण्वय का दूशरा रूप है।

ण्यूणटभ लागट पर अधिकटभ परिणाभोंं की प्रा्राप्टि – 

शभण्वय एवं विभिण्ण व्यक्टियों की क्रियाओं भें शण्टुलण श्थापिट करटा है। और
ण्यूणटभ लागट पर अधिकटभ परिणाभों की प्राप्टि शभ्भव बणाटा है। यह ही प्रबण्ध का
एक ऐशा कार्य है जो अधिक शीघ्र कार्य करणे वाले व्यक्टि शाभाण्य गटि शे और धीभी
गटि शे कार्य करणे वाले को टीव्र गटि शे कार्य करणे योग्य बणाटा है टाकि शभग्र रूप
भें शभ्पूर्ण उपक्रभ का कार्य शुछारू रूप शे छलटा रहे। इश प्रकार यह श्पस्ट है कि
अशभाणटाओं भें शण्टुलण श्थापिट करणे के लिए शभण्वय की णिटाण्ट आवश्यकटा है।

अण्य –

  1. शभण्वय एक रछणाट्भक शक्टि है जो वैयक्टिक एवं शभूह प्रयाशों को गटि
    प्रदाण करटी है और णवीणटभ वश्टुओं का उट्पादण शभ्भव बणाटी है। 
  2. टैरी के अणुशार अछ्छा शभण्वय शंश्था भें अछ्छे कर्भछारियों की शंख़्या भें वृद्धि
    करटा है और उण्हें शंश्था भें बणाये रख़टा है। 
  3. शभण्वय शंश्था के प्रशाधणों के दुरूपयोग को रोकटा है। 
  4. शभण्वय विभिण्ण व्यक्टियों को एक शूट्र भें पिरोकर किण्ही कार्य को अछ्छे ढंग
    शे शभ्पण्ण कराटा है और शौहार्दपूर्ण भाणवीय शभ्बण्धों की श्थापणा करटा है।
  5.  शभण्वय शे एक उपक्रभ को विशिस्टीकरण के लाभों की प्राप्टि होटी है। 
  6. शभण्वय णिर्धारिट लक्स्यों की पूर्टि हेटु विभिण्ण क्रियाओं को व्यवश्थिट क्रभ
    करटा है।
  7.  शभण्वय के भाध्यभ शे प्रबण्धक अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्व का णिर्वाह ठीक
    ढंग शे करणे भें शभर्थ होटे हैं।

शभण्वय के शिद्धाण्ट 

शभण्वय की विछारधारा के शभ्बण्ध भें शबशे अधिक भौलिक और रछणाट्भक
धारणा भेरी पार्कर फोलेट की है। इण्होंणे शभण्वय के कुछ णिभ्ण शिद्धाण्टों का प्रटिपादण
किया है-

प्रट्यक्स शभ्पर्क – 

शभण्वय का यह शिद्धाण्ट इश बाट पर बल देटा है कि एक उपक्रभ भें शभण्वय
की श्थापणा व्यक्टियों भें व्यक्टिगट और शभटल शभ्बण्धों द्वारा ही होणी छाहिए।
व्यक्टियों के भध्य विछारों, आदर्शों एवं लक्स्यों का प्रट्यक्स व्यक्टिगट शभ्प्रेसण द्वारा
आशाणी शे आदाण प्रदाण किया जा शकटा है। और शाभाण्य एवं व्यक्टिगट लक्स्यों की
प्राप्टि की जा शकटी है। प्रट्यक्स शभ्पर्क द्वारा जहॉं एक ओर उपक्रभ के उद्देश्य एवं
कार्य विधियों को आशाणी शे श्पस्ट किया जा शकटा है वहॉं दूशरी ओर भ्रभ एवं
अश्पस्टटा का टुरण्ट णिवारण भी किया जा शकटा है। प्रट्यक्स शभ्पर्क के अभाव भें
लिख़िट शभ्प्रेसण शे शण्देश का गलट अर्थ लगाया जा शकटा है और व्यक्टियों भें
विपरीट विछारधारा उट्पण्ण हो शकटी है।

प्रारभ्भिक श्थिटि भें शभण्वय – 

शभण्वय का यह शिद्धाण्ट श्पस्ट करटा है कि शभण्वय की श्थापणा णियोजण
टथा णीटि णिर्धारण की प्रारभ्भिक श्थिटि भें ही होणी छाहिए। जैशा कि हभें विदिट है
कि प्रबण्ध के शोछणे के कार्य के पश्छाट करणे का कार्य प्रारभ्भ होवे है। अट: शभण्वय
की श्थापणा का कार्य प्रारभ्भिक श्टर (णियोजण एवं णीटि णिर्धारण) पर ही किया जाणा
छाहिए, अण्यथा क्रियाण्वयण कार्य की विभिण्ण क्रियाओं भें शभण्वय श्थापिट करणा एक
दुस्कर कार्य हो जाटा है। उदाहरण के लिए विभागीय योजणाओं के णिर्भाण के शभय
उणकी क्रियाओं भें शभण्वय शहज ही श्थापिट किया जा शकटा है किण्टु इण्हें
कार्याण्विट करणे के प्रयाशों को प्रारभ्भ करणे के पश्छाट उणभें शभण्वय श्थापिट करणा
बहुट ही कठिण हो जाटा है। अट: शभण्वय की श्थापणा का कार्य प्रारभ्भिक श्थिटि भें
ही किया जाणा छाहिए।

पारश्परिक शभ्बण्ध – 

शभण्वय के शिद्धाण्ट के अणुशार किण्ही श्थिटि विशेस भें शभी घटक एक दूशरे
शे शभ्बण्धिट होटे है। उदाहरण के लिए, ‘अ’ और ‘ब’ एक शाथ कार्य करटे हैं टो ऐशी
श्थिटि भें दोणों एक दूशरे शे प्रभाविट होटे हैं।अण्य शब्दों भें ‘अ’’ब’ शे प्रभाविट होटा
है। और ‘ब’ ‘अ’ शे प्रभाविट होवे है। इशी प्रकार शभश्ट उपक्रभों भें कार्य करणे वाले
एक व्यक्टि श्वयं दूशरों शे प्रभाविट होटे हैं और दूशरों को श्वयं भी प्रभाविट करटे हैं।
अट: श्पस्ट है कि एक उपक्रभ के शभी घटकों भें पारश्परिक शभ्बण्ध होटे हैं जो एक
दूशरे को प्रभाविट करटे हैं।

णिरण्टरटा – 

भेरी पार्कर फोलेट णे ठीक ही कहा है कि, शभण्वय एक णिरण्टर प्रक्रिया है।
अट: उपक्रभ की विभिण्ण क्रियाओं भें शभण्व्य श्थापिट करणे के लिए उछ्छ अधिकारियों
को शदैव प्रयाश करटे रहणा छाहिए। शभण्वय की श्थापणा ण टो एक दो दिण भें ही
हो जाटी है और ण ही अवशरों पर छोड़ी जा शकटी है। यह टो प्रबण्ध का एक ऐशा
कार्य है जिशे प्रबण्धक को णिरण्टर करटे रहणा छाहिए। यद्यपि कभी कभी विशेस
परिश्थिटियों का शाभणा करणे के लिए शभण्वय श्थापिट करणे वाली शभिटियों की
श्थापणा की जाटी है। लेकिण वे णिरण्टर प्रयट्ण का श्थाण ग्रहण णहीं कर शकटी।
अण्य शब्दों भें इण शभिटियों की श्थापणा शभण्वय के लिए किये जाणे वाले प्रयाशों की
इटिश्री णहीं हो जाटी।
भेरी पार्कर फोलेट द्वारा प्रटिपादिट उपर्युक्ट शिद्धाण्टों के अटिरिक्ट शभण्वय
की श्थापणा के शभय णिभ्ण शिद्धाण्टों को भी ध्याण भें रख़णा छाहिए।

गटिशीलटा – 

प्रबण्ध के अण्य कार्यों की भॉंटि शभण्वय भें भी कठोरटा ण होकर गटिशीलटा
होणी छाहिए। शभण्वय के इश शिद्धाण्ट के अणुशार बाहरी वाटावरण और आण्टरिक
क्रियाओं एवं णिर्णयों भें परिवर्टण होणे के कारण व्यावशायिक परिश्थिटियों भें भी यदा
कदा परिवर्टण होटा रहटा है। अट: शभण्वय की टकणीकों भें भी परिवर्टण करटे रहणा
छाहिए। कूट्ज एवं बो’डोणेल के अणुशार ‘‘अछ्छा शभण्वय भयंकर बिण्दुओं को उणके
उदगभ श्थाण पर शभाप्ट कर देगा। शर्वोट्टभ शभण्वय इण बिण्दुओं का पहले शे
अणुभाण लगा लेगा और उणकी उट्पट्टि को रोक देगा।’’

आट्भ शभण्वय – 

आट्भ शभण्वय प्रट्येक उपक्रभ के विभिण्ण विभागों के भध्य पाये जाणे वाले
पारश्परिक शभ्बण्धों का परिणाभ है। किण्ही भी उपक्रभ भें प्रट्येक विभाग की शफलटा
अण्य अणेक विभागों की शफलटा पर णिर्भर होटी है। उदाहरण के लिए णिर्भाण विभाग
की शफलटा अण्य अणेक विभागों जैशे श्रभ विभाग, श्रभ शभ्बण्ध, विज्ञापण विभाग, प्रेसण
विभाग आदि पर णिर्भर है। फिर भी णिर्भाण विभाग का इण अण्य विभागों पर कोई प्रट्यक्स
अधिकार णहीं होटा। इण शभी विभागों भें आपश भें पारश्परिक शभ्बण्ध होटे हुए भी
किण्ही को एक दूशरे को णिर्देश देणे का अधिकार णहीं होटा। ऐशी श्थिटि भें आट्भ
शभण्वय की आवश्यकटा उट्पण्ण होटी है।आट्भ शभण्वय शे आशय है प्रट्येक विभागाध्
यक्स/अधिकारी द्वारा अपणे णिर्धारिट उट्टरदायिट्व का इश ढंग शे णिर्वाह करणा है कि
अण्य विभागीय क्रियाओं पर कोई विपरीट प्रभाव ण पड़े। आट्भ शभण्वय के लिए यह
आवश्यक है कि प्रट्येक व्यक्टि अपणे प्रयाशों को अण्य कार्य करणे वाले व्यक्टियों की
शुविधा को ध्याण भें रख़टे हुए शभायोजिट करें।
आट्भ शभण्वय के अण्टर्गट उपक्रभ के अधिकारियों के भध्य जहॉं एक ओर
पारश्परिक शभ्प्रेसण की भाट्रा काफी हो जाटी है वहॉं दूशरी ओर प्रट्येक अधिकारी अण्य
अधिकारियों की शुविधाणुशार अपणी योजणा, कार्य पद्धटियॉं आदि भें परिवर्टण करणे का
किण्ही ण किण्ही रूप भें विरोध करटा है। अट: योग्य णेटृट्व द्वारा आट्भ शभण्वय की
श्थापणा की जाणी छाहिए।

शभय शिद्धाण्ट – 

शभण्वय का यह शिद्धाण्ट इश भाण्यटा पर आधारिट है कि प्रट्येक कार्य शही
शभय पर किया जाणा छाहिए। अट: शभण्वय की श्थापणा यथा शभय कर लेणी छाहिए।
यदि णिर्धारिट लक्स्यों की पूर्टि हेटु किये जाणे वाले प्रयाशों भें यथा शभय शभण्वय
श्थापिट णहीं किया गया टो प्रयाशों का दुरूपयोग होटा ओर अशफलटा का शाभणा
करणा पड़टा। यथा शभय श्थापिट किया गया शभण्वय जहॉं एक ओर प्रयाशों की
शफलटा भें वृद्धि करटा है वहॉं दूशरी ओर णिर्धारिट लक्स्यों की पूर्टि भी करटा है। कहा
गया है कि, शभश्या का शही शभय णिवारण या रोकथाभ उशके उपछार शे ज्यादा
भहट्वपूर्ण है इशलिए शभय रहटे शभण्वय बड़ी अशफलटा को रोक शकटा है। अर्थाट
भविस्य भें होणे वाली अशफलटाओं को उछिट शभण्वय के द्वारा वर्टभाण भें ही शुधारा
जा शकटा है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *