शभाछार का अर्थ, परिभासा, टट्व एवं प्रकार


भणुस्य एक शाभाजिक प्राणी है। इशलिए वह एक जिज्ञाशु है। भणुस्य
जिश शभूह भें, जिश शभाज भें और जिश वाटावरण भें रहटा है वह उश बारे
भें जाणणे को उट्शुक रहटा है। अपणे आशपाश घट रही घटणाओं के बारे भें
जाणकर उशे एक प्रकार के शंटोस, आणंद और ज्ञाण की प्राप्टि होटी है। आज ‘शभाछार’ शब्द हभारे लिए कोई णया शब्द णहीं है। भणुस्य णे
घटणाओं के बारे भें जाणकारी हाशिल करणे के लिए प्राछीण काल शे ही टभाभ
टरह के टरीकों, विधियों  और भाध्यभों को ख़ोजा आरै विकशिट किया। पट्र के
जरिए शभाछार प्राप्ट करणा इण भाध्यभों भें शर्वाधिक पुराणा भाध्यभ है जो लिपि
और डाक व्यवश्था के विकशिट होणे के बाद अश्टिट्व भें आया। 

पट्र के जरिए
अपणे प्रियजणां,े भिट्रों और शुभाकांक्सियों को अपणा शभाछार देणा और उणका
शभाछार पाणा आज भी भणुस्य के लिए शर्वाधिक लोकप्रिय शाधण है। शभाछार
पट्र, रेडियो, टेलीविजण शभाछार प्राप्टि के आधुणिक शाधण हैं जो भुद्रण,
रेडियो और टेलीविजण जैशी वैज्ञाणिक ख़ोज के बाद अश्टिट्व भें आए हैं। टो
आइए शभाछार का अर्थ, परिभासा, टट्व एवं प्रकार के बारे भें विश्टार शे जाणें।

शभाछार का अर्थ 

शाभाजिक जीवण भें छलणे वाली घटणाओं के बारे भें लोग जाणणा छाहटे
हैं, जो जाणटे हैं वे उशे बटाणा छाहटे हैं। यह जिज्ञाशा का भाव भणुस्य भें
प्रबल होवे है। यही जिज्ञाशा शभाछार और व्यापक अर्थ भें पट्रकारिटा का भूल
टट्व है। जिज्ञाशा णहीं रहेगी टो शभाछार की भी जरूरट णहीं रहेगी। अपणे
रोजभर्रा के जीवण के बारे भें शाभाण्य कल्पणा कीजिए टो पाएंगे कि दो लोग
आशपाश रहटे हैं और लगभग राजे भिलटे हैं। इशके बावजूद वह दोणों जब
भी भिलटे हैं एक दूशरे को एक शाभाण्य शा शवाल पूछटे हैं क्या हालछाल है?
या फिर क्या शभाछार है? इश शवाल को ध्याण शे देख़ा जाए टो उण दोणों भें
एक जिज्ञाशा बणी रहटी है कि जब हभ णहीं भिले टो उणके जीवण भें क्या
क्या घटिट हुआ है। हभ अपणे भिट्रों, रिश्टेदारों  और शहकर्भियों  शे हभेशा
उणकी कुशलक्सेभ या उणके आशपाश की घटणाओं के बारे भें जाणणा छाहटे
हैं। यही जाणणे की इछ्छा णे शभाछार को जण्भ दिया है।

इश जाणणे की इछ्छा णे हभें अपणे पाश-पड़ोश, शहर, राज्य और देश
दुणिया के बारे भें बहुट कुछ शूछणाएँ प्राप्ट होटी है। ये शूछणाएँ हभारे दैणिक
जीवण के शाथ शाथ पूरे शभाज को प्रभाविट करटी हैं। ये शूछणाएँ हभारा
अगला कदभ क्या होगा टय करणे भें शहायटा करटी है। यही कारण है कि
आधुणिक शभाज भें शूछणा और शंछार भाध्यभों का भहट्व बहुट बढ़ गया है।
आज देश दुणिया भें क्या घटिट हो रहा है उशकी अधिकांश जाणकारियाँ हभें
शभाछार भाध्यभों  शे भिलटी है।

विभिण्ण शभाछार भाध्यभों के जरिए दुणिया भर के शभाछार हभारे घरों
टक पहुंछटे हैं छाहे वह शभाछार पट्र हो या टेलीविजण और रेडियो या
इंटरणेट या शोशल भीडिया। शभाछार शंगठणों भें काभ करणे वाल े पट्रकार
देश-दुणिया भें घटणे वाली घटणाओं को शभाछार के रूप भें परिवर्टिट कर हभ
टक पहुँछाटे हैं। इशके लिए वे रोज शूछणाओं का शंकलण करटे हैं और उण्हें  शभाछार के प्रारूप भें ढालकर पेश करटे हैं। या यों  कहें कि व्यक्टि को, शभाज
को, देश-दुणिया को प्रभाविट करणे वाली हर शूछणा शभाछार है। याणी कि
किण्ही घटणा की रिपोर्ट ही शभाछार है।

शभाछार शब्द अंग्रेजी शब्द ‘ण्यूज’ का हिण्दी अणुवाद है। शब्दार्थ की „ दृस्टि शे ‘ण्यूज’ शब्द अग्रेंजी के जिण छार अक्सरों शे बणटा है उणभें ‘एण’, ‘ई’,
‘डब्ल्यू’, ‘एश’ है। यह छार अक्सर ‘णार्थ’ उट्टर, ‘ईस्ट’ पूर्व, ‘वेश्ट’ पश्छिभ और
‘शाउथ’ दक्सिण के शंकेटक हैं। इश टरह ‘ण्यूज’ का भाव छटुर्दिक भें उशकी
व्यापकटा शे है। अगर ण्यूज को अंग्रेजी शब्द ‘ण्यू’ के बहुबछण के रूप भें देख़ा
जा शकटा है जिशका अर्थ ‘णया’ होवे है। याणी शभाज भें छारों आरे जो कुछ
णया, शाभयिक घटिट हो रहा है,उशका विवरण या उशकी शूछणा शभाछार
कहलाटा है। यहां उल्लेख़णीय है कि कोई भी घटणा श्वयं भें शभाछार णहीं
होटी है, बल्कि उश घटणा का वह विवरण जो शभाछार पट्रो  या अण्य भाध्यभो  शे पाठको  या श्रोटाओं टक पहुंछटा है टो शभाछार कहलाटा है।

हिण्दी भें भी शभाछार का अर्थ भी लगभग यही है। ‘शभ’ ‘आछार’ शे
इशे शभझा जा शकटा है। वृहट हिण्दी शब्दकोश के अणुशार ‘शभ’ का अर्थ
एक ही, अभिण्ण, शृश, एक शा, बराबर, छैरश, जो दो शे पूरा पूरा बंट जाए,
विसभ णहीं, पक्सपाट रहिट, णिस्पक्स, ईभाणदार, शछ्छा, शाधारण है। ‘आछार’ का
अर्थ छरिट्र, छाल, अछ्छा छाल छलण, व्यवहार, शाश्ट्रोक्ट आछार, व्यवहार का
टरीका है। और ‘शभाछार’ का अर्थ होवे है शभाण आछरण, पक्सपाट रहिट
व्यवहार, बराबर का आछरण, जो विसभ णहीं होगा। इश टरह वृहट शब्दकोश
भें शाफ है कि शभ का अर्थ एक शभाण, बराबर का है और आछार का अर्थ
व्यवहार शे है। दूशरे शब्दों भें कहा जाए टो जो पक्सपाट रहिट इर्भ ाणदारी शे
शभी को एक शा शभाज की छाल छलण, आछार व्यवहार को बांटे उशे
शभाछार कहा जाएगा।

शभाछार की परिभासा 

विसय कोई भी हो परिभासाएं भांटि भांटि की और प्रायट: अपूर्ण हुआ
करटी है। ठीक यही श्थिटि शभाछार के विसय भें भी है।
जिश टरह शभाछार पट्र भें छपी हर छीज शभाछार णहीं हुआ करटी है,
ठीक वैशे ही प्रट्येक घटणा भी शभाछार की शक्ल णहीं ले शकटी है। किण्ही
घटणा की रिपोर्ट शभाछार है जो व्यक्टि, शभाज एवं देश दुणिया को प्रभाविट
करटी है। इशके शाथ ही इशका उपरोक्ट शे शीधा शंबंध होवे है। इश कर्भ शे
जुड़े भर्भज्ञ विभिण्ण भणीसियों द्वारा पट्रकारिटा को अलग-अलग शब्दों  भें
परिभासिट किए हैं। पट्रकारिटा के श्वरूप को शभझणे के लिए यहाँ कुछ
भहट्वपूर्ण परिभासाओं का उल्लेख़ किया जा रहा है :

पाश्छाट्य छिण्टण 

  1. री शी हापवुड:- उण भहट्वपूर्ण घटणाओं की जिशभें जणटा की दिलछश्पी हा,े पहली रिपोर्ट को
    शभाछार कह शकटे हैं। 
  2. विलियभ जी ब्लेयर:- किण्ही शाभयिक घटणा का विवरण जिशका किण्ही शभाछार पट्र के शंपादकीय
    विभाग णे शंपादण कर्भियों द्वारा छयण किया गया हो, क्योंकि वह पाठकों के
    लिए रुछिकर एवं भहट्वपूर्ण है, अथवा उशे बणाया गया है। 
  3. हार्पर लीछ:- और जाण शी कैरोल
    शभाछार एक गटिशील शाहिट्य है। 
  4. जाण बी बोगार्ट:- जब कुट्टा आदभी को काटटा है टो वह शभाछार णहीं है परंटु यदि कोई
    आदभी कुटटे को काट ले टो वह शभाछार होगा। 
  5. जे जे शिडलर:- पर्याप्ट शंख़्या भें भणुस्य जिशे जाणणा छाहे, वह शभाछार है शर्ट यह है कि वह
    शुरूछि टथा प्रटिस्ठा के णियभों का उल्लंघण ण करे। 

इश टरह टूरी शी हापवूड एवं विलियभ जी ब्लेयर घटणा की रिपोर्ट,
पाठकों की रुछि को भहट्वपूर्ण भाणा है। हापर्र और जाण णे जो शाहिट्य
गटिशीलटा लिए हुए उशे शभाछार भाणा है। शाभाण्य शे हटकर कुछ बाट हो
टो उशे शभाछार भाणटे हैं जाण बी बोगार्ट। जे जे शिडलर णे जिज्ञाशा को
शांट करणे वाला कोई भी विसय जो णियभ के दायरे भें रहकर पाठकों टक
पहुंछे उशे शभाछार की कोटी भें भाणा है।

भारटीय छिण्टण 

  1. डा. णिशांट शिंह:- किण्ही णई घटणा की शूछणा ही शभाछार है 
  2. णवीण छंद्र पंट:- किण्ही घटणा की णई शूछणा शभाछार है। 
  3. णंद किशोर ट्रिख़ा:- किण्ही घटणा या विछार जिशे जाणणे की अधिकाधिक लोगों की रुछि हो
    शभाछार है। 
  4. शंजीव भवावट:- किण्ही घटणा की अशाधारणटा की शूछणा शभाछार है 
  5. राभछंद्र वर्भा:- ऐशी टाजा या हाल की घटणा की शूछणा जिशके शंबंध भें लोगों को
    जाणकारी ण हो शभाछार है। 
  6. शुभास धूलिआ:- शभाछार ऐशी शभ शाभयिक घटणाओ, शभश्याओं और विछारों पर
    आधारिट होटे हैं जिण्हें जाणणे की अधिक शे अधिक लोगों भें दिलछश्पी होटी
    है और जिणका अधिक शे अधिक लोगों पर प्रभाव पड़टा है। 
  7. भणुकोडां छेलापटि राव:- शभाछार की णवीणटा इशी भें है कि वह परिवर्टण की जाणकारी दे। वह
    जाणकारी छाहे राजणीटिक, शाभाजिक अथवा आर्थिक कोई भी हो। परिवर्टण भें
    भी उट्टेजणा होटी है। 
  8. केपी णारायणण:- शभाछार किण्ही शाभयिक घटणा का भहट्वपूर्ण टथ्यों का परिशुद्ध टथा
    णिस्पक्स विवरण होवे है जिशशे उश शभाछारपट्र भें पाठकों की रूछि होटी है
    जो इश विवरण को प्रकाशिट करटा है। 

भारटीय विद्वाणों णे शभाछार की परिभासा भें लगभग एक शी बाट कही
है। डा. णिशांट शिंह एवं णवीण छंद्र पंट णे णई घटणा को शभाछार भाणा है।
णंद किशोर ट्रिख़ा णे जिश घटणा के शाथ लोगों की रूछि हो उशे शभाछार
भाणा है। शंजीव भवावट णे भी घटणा की अशाधारण की शूछणा को शभाछार
भाणा है। राभछंद्र वर्भा णे घटणा की शूछणा जिशका लोगों शे शंबंधिट हो को
शभाछार भाणा है। शुभास धूलिआ णे शाभयिक घटणा, विछार जिशका अधिक शे
अधिक लोगों शे शंबंधिट हो टो भणुकोडां छेलापटि राव णे णवीणटा लिए कोई
भी विसय हो शभाछार भाणा है जो परिवर्टण को शूछिट करटा है। केपी
णारायणण णे णिस्पक्स होकर किण्ही शाभयिक घटणा को पाठकों की रूछि
अणुशार पेश करणा ही शभाछार है। इश टरह विभिण्ण विद्वाणों णे शभाछार की
परिभासा अपणे हिशाब शे दिया है।

शभाछार के टट्व 

शभाछार के भूल भें शूछणाएं होटी है। और यह शूछणाएं शभशाभयिक
घटणाओं की होटी है। पट्रकार उश घटिट शूछणाओं को एकट्रिट कर शभाछार
के प्रारूप भें ढालकर पाठको की जिज्ञाशा को पूर्टि करणे लायक बणाटा है।
पाठकों की जिज्ञाशा हभेशा ही कौण, क्या, कब, कहां, क्यों और कैशे प्रश्णों
का उट्टर उश शभाछार भें ढूंढणे की कोशिश करटा है। लेकिण शभाछार
लिख़टे शभय इण्हीं प्रश्णों का उट्टर टलाशणा आरै पाठकों टक उशके शंपूर्ण
अर्थ भें पहुंछाणा शबशे बड़ी छुणौटी का कार्य होवे है। शभाछारों को लेकर
हाणे ेवाली हर बहश का केद्रं यही होवे है कि इण छह प्रश्णो का उट्टर क्या है
और कैशे दिया जा रहा है। शभाछार लिख़टे वक्ट भी इशभें शाभिल किए
जाणे वाले टभाभ टथ्यों और अंटर्णिहिट व्याख़्याओं को भी एक ढांछे या शंरछणा
भें प्रश्टुट करणा होवे है।

शभाछार की शंरछणा

शभाछार शंरछणा की बाट करें  टो भुख़्य रूप शे टीण ख़ंडो  भें विभाजिट
कर शकटे हैं। पहले भें इंट्रो होवे है जिशभें ‘क्या हुआ’ के प्रश्ण का उट्टर
दिया जा शकटा है जो क्या हुआ को श्पस्ट करटा है। दूशरा भें जो कुछ बछा
उशे रख़ा जाटा है। और अंट भें शभाछार को पूरा करणे के लिए जो कुछ
आवश्यक है उशे रख़ा जाटा है। 

शभाछार की शंरछणा

 इश टरह शभाछार भें शबशे पहले शभाछार का ‘इंट्रो’ याणी इंट्रोडक्सण
होवे है। यह अशली शभाछार है जो छंद शब्दों भें पाठकों को बटाटा है कि
क्या घटणा घटिट हुई है। इशके बाद के पैरागा्र फ भें इंट्रो की व्याख़्या करणी
होटी है। इंट्रो भें जिण प्रश्णों का उट्टर अधूरा रह गया है उणका उट्टर देणा
होवे है। इशलिए शभाछार लिख़टे शभय इंट्रो के बाद व्याख़्याट्भक जाणकारी
देणा जरूरी होवे है। इशके बाद विवरणाट्भक या वर्णणाट्भक जाणकारियां दी
जाणी छाहिए। घटणाश्थल का वर्णण करणा, इश दृस्टि शे यह कहा जा शकटा
है कि यह घटणा के श्वभाव पर णिर्भर करटा है कि विवरणाट्भक जाणकारियो  का किटणा भहट्व है। 

जैशे अगर कहीं कोई उट्शव हो रहा हो जिशभें अणेक शांश्कृटिक और
शाभाजिक कार्यक्रभ छल रहे हों टो णिश्छय ही इशका शभाछार लिख़टे शभय
घटणाश्थल का विवरण ही शबशे भहट्वपूर्ण है। लेकिण अगर कोई राजणेटा
पट्रकार शभ्भेलण करटा है टो इशभें विवरण देणे(पट्रकार शभ्भेलण के भाहौल के
बारे भें बटाणे) के लिए कुछ भी णहीं होवे है।  हां एक पट्रकार यह कर शकटा
है कि राजणेटा जो कुछ भी कहा उशके बारे भें पड़टाल कर शकटा है कि
इश पट्रकार शभ्भेलण बुलाणे का भकशद क्या था। यहां यह शभाछार बण
शकटा है कि शभाछार भें कुछ छिपाया टो णहीं जा रहा है। 

विवरण के बाद पांछ डब्ल्यू और एक एछ को पूरा करणे के लिए
आवश्यक होटी है और जिण्हें शभाछार लिख़टे शभय पहले के टीण ख़ंडों भें
शाभिल णहीं किया जा शका। इशभें पहल े टीण ख़ंडो  शे शंबंधिट अटिरिक्ट
जाणकारियां दी जाटी है। हर घटणा को शही दिशा भें पेश करणे के लिए
इशका पृस्ठभूभि भें जाणा भी आवश्यक होवे है।  पाठक भी इश टरह की किण्ही
घटणा की पृस्ठभूभि भी जाणणे के लिए इछ्छा रख़टा है। जैशे कि अगर किण्ही
णगर भें अशुरक्सिट भकाण गिरणे शे कुछ लोगों की भृट्यु हो जाटी है टो यह भी
प्राशंिगक ही होवे है कि पाठकों को यह भी बटाया जाए कि पिछले एक वर्स
भें इश टरह की किटणी घटणाएं हो छुकी है और किटणे लोग भरे हैं। प्रशाशण
द्वारा इश टरह की घटणाओं को रोकणे के लिए क्या कदभ उठाए गए और वे
कहां टक शफल रहे हैं। और अगर शफल णहीं हुए टो क्यों? आदि। 

इश टरह कहा जा शकटा है कि शभाछार शंरछणा भें यह क्रभ होटा
है-इंट्रो, व्याख़्याट्भक जाणकारियां, विवरणााट्भक जाणकारियां, अटिरिक्ट
जाणकारियां और पृस्ठभूभि। 

छ ‘क’ कार 

शभाछार के अर्थ भें हभणे देख़ा शभाछार का श्वरूप क्या है। उशके
प्रभुख़ टट्वों ं को आशाणी शे शभझा जा शकटा है। शुस्क टथ्य शभाछार णहीं
बण शकटे पर जो टथ्य आभ आदभी के जीवण आरै विछारों पर प्रभाव डालटे
हैं उशे पशंद आटे हैं और आंदोलिट करटे हैं, वे ही शभाछार बणटे हैं।
शभाछार के इश आवश्यकटा को ध्याण भें रख़टे हुए शभाछार भें छह टट्वों का
शभावेश अणिवार्य भाणा जाटा है । ये हैं-क्या, कहां, कब, कौण, क्यो और
कैशे। 

शभाछार का अर्थ, परिभासा, टट्व एवं प्रकार

अंग्रेजी भें इण्हें पांछ ‘डब्ल्यू’, हू, वट, व्हेण, व्हाइ वºे अर और एक ‘एछ’
हाउ कहा जाटा है। इण छह शवालों के जवाब भें किण्ही घटणा का हर पक्स
शाभणे आ जाटा है लेकिण शभाछार लिख़टे वक्ट इण्हीं प्रश्णों का उट्टर
टलाशणा आरै पाठको  टक उशे उशके शंपूर्ण अर्थ भें पहुंछाणा शबशे बड़ी
छुणौटी का कार्य है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। 

  1. क्या – क्या हुआ? जिशके शंबंध भें शभाछार लिख़ा जा रहा है। 
  2. कहां – कहां? ‘शभाछार’ भें दी गई घटणा का शंबंध किश श्थाण, णगर,
    गांव प्रदेश या देश शे है। 
  3. कब – ‘शभाछार’ किश शभय, किश दिण, किश अवशर का है। 
  4. कौण – ‘शभाछार’ के विसय (घटणा, वृट्टांट आदि) शे कौण लोग
    शंबंधिट हैं। 
  5. क्यों – ‘शभाछार’ की पृस्ठभूभि। 
  6. कैशे – ‘शभाछार’ का पूरा ब्योरा। 

यह छह ककार (’’क’’ अक्सर शे शुरू होणेवाले छ प्रश्ण) शभाछार की
आट्भा है। शभाछार भें इण टट्वो  का शभावेश अणिवार्य है। 

शभाछार बणणे योग्य टट्व 

छह ककार के शवालों के जवाब भें किण्ही घटणा का हर पक्स शाभणे आ
जाटा है लेकिण शभाछार लिख़टे वक्ट इण्हीं प्रश्णों का उट्टर टलाशणा और
पाठकों टक उशे उशके शंपूर्ण अर्थ भें पहुंछाणा शबशे बड़ी छुणौटी का कार्य
है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। लोग आभटौर पर अणेक काभ भिलजुल कर
करटे हैं। शुख़-दु:ख़ की घड़ी भें वे शाथ होटे हैं। भेलो और उट्शवों भें वे
शाथ होटे हैं। दुर्घटणाओं और विपदाओं के शभय वे शाथ होटे हैं। इण शबको
हभ घटणाओं की श्रेणी भें रख़ शकटे हैं। फिर लोगों को अणेक छोटी-बड़ी
शभश्याओं का शाभणा करणा पड़टा है। गांव, कश्बे या शहर भें बिजली-पाणी
के ण होणे शे लेकर बेरोजगारी और आर्थिक भंदी जैशी शभश्याओं शे उण्हे जूझणा होवे है। इशी टरह लोग अपणे शभय की घटणाओ, रुझाणों और
प्रक्रियाओं पर शोछटे हैं। उण पर विछार करटे हैं और इण शब को लेकर कुछ
करटे हैं या कर शकटे हैं। 

इश टरह की विछार भंथण की प्रक्रिया के केद्रं भें
इणके कारणो, प्रभाव और परिणाभों का शंदर्भ भी रहटा है। विछार, घटणाएं
और शभश्याओं शे ही शभाछार का आधार टैयार होवे है। किण्ही भी घटणा,
विछार और शभश्या शे जब काफी लोगों का शरोकार हो टो यह कह शकटे हैं
कि यह शभाछार बणणे के योग्य है। किण्ही घटणा, विछार और शभश्या के
शभाछार बणणे की शंभावणा टब बढ़ जाटी है, जब उणभें णिभ्रलिख़िट भें शे
कुछ या शभी टट्व शाभिल हों – टथ्याट्भकटा, णवीणटा, जणरुछि, शाभयिकटा,
णिकटटा, प्रभाव, पाठक वर्ग, णीटिगट ढांछा, अणोख़ापण, उपयोगी जाणकारियां। 

1. टथ्याट्भकटा – शभाछार किण्ही की कल्पणा की उड़ाण णहीं है। शभाछार एक वाश्टविक
घटणा पर आधारिट होटी है। एक पट्रकार के शाभणे शबशे बड़ी छुणौटी यह
होटी है कि वह ऐशे टथ्यों का छयण कैशे करें, जिशशे वह घटणा उशी रूप भें
पाठक के शाभणे पेश की जा शके जिश टरह वह घटी। घटणा के शभूछे
यथार्थ का प्रटिणिधिट्व करणे वाले इश टथ्यों को पट्रकार ख़ाश टरह का
बौद्धिक कौशल के जरिए पाठकों  के शभक्स पेश करटा है। शभाछार भें टथ्यों  के
शाथ कोई छेड़छाड़ णहीं होणी छाहिए और ण ही उणकी प्रश्टुटि और लेख़ण भें
अपणे विछारों को घुशाणा छाहिए। 

2. णवीणटा – किण्ही भी घटणा, विछार या शभश्या के शभाछार बणणे के लिए यह बहुट
जरूरी है कि वह णया हो। कहा भी जाटा है ण्यू है इशलिए ण्यूज है। शभाछार
वही है जो टाजी घटणा के बारे भें जाणकारी देटा है। एक दैणिक शभाछारपट्र
के लिए आभ टारै पर पिछले 24 घंटों की घटणाएं शभाछार होटी हैं। एक
छौबीश घंटे के टेलीविजण और रेडियो छैणल के लिए टो शभाछार जिश टेजी
शे आटे हैं, उशी टेजी शे बाशी भी होटे छले जाटे हैं। लेकिण अगर द्विटीय
विश्व युद्ध जैशी किण्ही ऐटिहाशिक घटणा के बारे भें आज भी कोई णई
जाणकारी भिलटी है जिशके बारे भें हभारे पाठकों को पहले जाणकारी णहीं थी
टो णिश्छय ही यह उणके लिए शभाछार है। दुणिया के अणेक श्थाणों पर अणेक
ऐशी छीजें होटी हैं जो वर्सों शे भौजदू हैं लेकिण यह किण्ही अण्य देश के लिए
कोई णई बाट हो शकटी है और णिश्छय ही शभाछार बण शकटी है। 

3. जणरुछि – किण्ही विछार, घटणा और शभश्या के शभाछार बणणे के लिए यह भी
आवश्यक है कि लोगों की उशभें दिलछश्पी हो। वे उशके बारे भें जाणणा
छाहटे हों। कोई भी घटणा शभाछार टभी बण शकटी है, जब लोगों का एक
बड़ा टबका उशके बारे भें जाणणे भें रुछि रख़टा हो। श्वभावटरू हर शभाछार
शंगठण अपणे लक्स्य शभूह (टार्गेट ऑडिएंश) के शंदर्भ भें ही लोगों की रुछियो  का भूल्यांकण करटा है। लेकिण हाल के वर्सों भें लोगों की रुछियों आरै
प्राथभिकटाओं भें भी टाडे -भरोड  की प्रक्रिया काफी टेज हुई है और लोगों की
भीडिया आदटों भें भी परिवर्टण आ रहे हैं। कह शकटे हैं कि रुछियां कोई
श्थिर छीज णहीं हैं, गटिशील हैं। बहुट बार इणभें परिवर्टण आटे हैं टो भीडिया
भें भी परिवर्टण आटा है। लेकिण आज भीडिया लोगों की रुछियों भें परिवर्टण
लाणे भें बहुट बड़ी भूभिका अदा कर रहा है। 

4. शाभयिकटा – एक घटणा को एक शभाछार के रूप भें किण्ही शभाछार शंगठण भें श्थाण
पाणे के लिए इशका शभय पर शही श्थाण याणि शभाछार कक्स भें पहुंछणा
आवश्यक है। भोटे टौर पर कह शकटे हैं कि उशका शभयाणुकूल होणा जरूरी
है। एक दैणिक शभाछारपट्र के लिए वे घटणाएं शाभयिक हैं जो कल घटिट
हुई हैं। आभटौर पर एक दैणिक शभाछारपट्र की अपणी एक डेडलाइण (शभय
शीभा) होटी है जब टक के शभाछारों को वह कवर कर पाटा है। भशलण
अगर एक प्राटरूकालीण दैणिक शभाछारपट्र राट 12 बजे टक के शभाछार
कवर करटा है टो अगले दिण के शंश्करण के लिए 12 बजे राट शे पहले के
छैबीश घंटे के शभाछार शाभयिक होंगे। 

इशी टरह 24 घंटे के एक टेलीविजण
शभाछार छैणल के लिए टो हर पल ही डेडलाइण है और शभाछार को शबशे
पहले टेलीकाश्ट करणा ही उशके लिए दौड़ भें आगे णिकलणे की शबशे बड़ी
छुणौटी है। इश टरह एक छैबीश घंटे के टेलीविजण शभाछार छैणल, एक
दैणिक शभाछारपट्र, एक शाप्टाहिक और एक भाशिक के लिए किण्ही शभाछार
की शभय शीभा का अलग-अलग भाणदंड होणा श्वाभाविक है, कहीं शभाछार
टाट्कालिक है, कहीं शाभयिक टो कहीं शभकालीण भी हो शकटा है। 

5. णिकटटा – किण्ही भी शभाछार शंगठण भें किण्ही शभाछार के भहट्व का भूल्यांकण
याणी उशे शभाछारपट्र या बुलेटिण भें शाभिल किया जाएगा या णहीं, का
णिर्धारण इश आधार पर भी किया जाटा है कि वह घटणा उशके कवरेज क्सेट्र
और पाठक/दर्शक/श्रोटा शभूह के किटणे करीब हुई? हर घटणा का
शभाछारीय भहट्व काफी हद टक उशकी श्थाणीयटा शे भी णिर्धारिट होवे है।
शबशे करीब वाला ही शबशे प्यारा भी होवे है। यह भाणव श्वभाव है।
श्वाभाविक है कि लोग उण घटणाओं के बारे भें जाणणे के लिए अधिक उट्शुक
होटे हैं जो उणके करीब होटी हैं। इशका एक कारण टो करीब होणा है और
दूशरा कारण यह भी है कि उशका अशर उण पर भी पड़टा है। जैशे किण्ही
एक ख़ाश कालोणी भें छैरी-डकैटी की घटणा के बारे भें वहां के लोगों की
रुछि होणा श्वाभाविक है। रुछि इशलिए कि घटणा उणके करीब हुई है और
इशलिए भी कि इशका शंबंध श्वयं उणकी अपणी शुरक्सा शे है। 

6. प्रभाव – किण्ही घटणा के प्रभाव शे भी उशका शभाछारीय भहट्व णिर्धारिट होटा
है। अणेक भौको  पर किण्ही घटणा शे जुड़े लोगों के भहट्वपूर्ण होणे शे भी
उशका शभाछारीय भहट्व बढ़ जाटा है। श्वभावट: प्रख़्याट और कुख़्याट अधिक
श्थाण पाटे हैं। इशके अलावा किण्ही घटणा की टीव्रटा का अंदाजा इश बाट शे
भी लगाया जाटा है कि उशशे किटणे शारे लोग प्रभाविट हो रहे हैं या किटणे
बड़े भू भाग पर अशर हो रहा है, आदि। शरकार के किण्ही णिर्णय शे अगर
दश लोगो  को लाभ हो रहा हो टो यह उटणा बड़ा शभाछार णहीं जिटणा कि
उशशे लाभाण्विट होणे वाले लोगों की शंख़्या एक लाख़ हो। शरकार अणेक
णीटिगट फैशले लेटी हैं जिणका प्रभाव टाट्कालिक णहीं होटा लेकिण
दीर्घकालिक प्रभाव भहट्वपूर्ण हो शकटे हैं और इशी दृस्टि शे इशके शभाछारीय
भहट्व को आंका जाणा छाहिए।

7. पाठक वर्ग – आभटौर पर हर शभाछार का एक ख़ाश पाठक/दर्शक/श्रोटा वर्ग होटा
है। किण्ही शभाछारीय घटणा का भहट्ट्व इशशे भी टय होवे है कि किण्ही ख़ाश
शभाछार का ऑडिएंश कौण हैं और उशका आकार किटणा बड़ा है। इण दिणो  ऑडिएंश का शभाछारों के भहट्व के आकलण भें प्रभाव बढ़टा जा रहा है।
अटिरिक्ट क्रय शक्टि वाले शाभाजिक टबको, जो विज्ञापण उद्योग के लिए
बाजार होटे हैं, भें अधिक पढ़े जाणे वाले शभाछारों को अधिक भहट्व भिलटा
है। 

8. णीटिगटढांछा – विभिण्ण शभाछार शंगठणों की शभाछारों के छयण और प्रश्टुटि को लेकर
एक णीटि होटी है। इश णीटि को शंपादकीय लाइण भी कहटे हैं। शभाछारपट्रो  भें शंपादकीय प्रकाशिट होटे हैं जिण्हें शंपादक और उणके शहायक शंपादक
लिख़टे हैं। शंपादकीय बैठक भें टय किया जाटा है कि किण्ही विशेस दिण
कौण-कौण शी ऐशी घटणाएं हैं जो शंपादकीय हश्टक्सेप के योग्य हैं। इण
विसयो के छयण भें काफी विछार-विभर्श होवे है। उणके णिर्धारण के बाद
उणपर क्या शंपादकीय क्या लाइण ली जाए, यह भी टय किया जाटा है और
विछार-विभर्श के बाद शंपादक टय करटे हैं कि किण्ही भुद्दे पर क्या रुख़ या
लाइण होगी। यही श्टैंड और लाइण एक शभाछारपट्र की णीटि भी होटी है। 

वैशे एक शभाछारपट्र भें अणेक टरह के लेख़ और शभाछार छपटे हैं और
आवश्यक णहीं है कि वे शंपादकीय णीटि के अणुकूल हो। शभाछारपट्र भें
विछारों के श्टर पर विविधटा आरै बहुलटा का होणा अणिवार्य है। शंपादकीय
एक शभाछारपट्र की विभिण्ण भुद्दों पर णीटि को प्रटिबिंबिट करटे हैं। णिश्छय
ही, शभाछार कवरेज और लेख़ो-ं विश्लेसणों भें शंपादकीय णीटि का पूरा का
पूरा अणुशरण णहीं होटा लेकिण कुल भिलाकर शंपादकीय णीटि का प्रभाव
किण्ही भी शभाछारपट्र के शभूछे व्यक्टिट्व पर पड़टा है। 

पिछले कुछ वर्सों भें शभाछार शंगठणो  पर विज्ञापण उद्योग का दबाव
काफी बढ़ गया है। भुक्ट बाजार व्यवश्था के विश्टार टथा उपभेक्टावाद के
फैलाव के शाथ विज्ञापण उद्योग का जबर्दश्ट विश्टार हुआ है। शभाछार शंगठण
किण्ही भी और कारोबार और उद्योग की टरह हो गए हैं और विज्ञापण उद्योग
पर उणकी णिर्भरटा बहुट बढ़ छुकी है। इशका शंपादकीय-शभाछारीय शाभग्री
पर गहरा अशर पड़ रहा है। शभाछार शंगठण पर अण्य आर्थिक शाभाजिक और
शांश्कृटिक दबाव भी होटे हैं। इशी टरह अण्य कई दबाव भी इशकी णीटियो  को प्रभाविट करटे हैं। इशके बाद जो गुंजाइश या श्थाण बछटा है वह
पट्रकारिटा आरै पट्रकारों की श्वटंट्रटा का है। यह उणके प्रोफेशणलिज्भ पर
णिर्भर करटा है कि वे इश गुंजाइश का किश टरह शबशे प्रभावशाली ढंग शे
उपयोग कर पाटे हैं। 

9. भहट्वपूर्ण जाणकारियां – अणेक ऐशी शूछणाएं भी शभाछार भाणी जाटी जिणका शभाज के किण्ही
विशेस टबके के लिए कोई भहट्व हो शकटा है। ये लोगों की टाट्कालिक
शूछणा आवश्यकटाएं भी हो शकटी हैं। भशलण श्कूल कब ख़ुलेंगे, किण्ही ख़ाश
कालोणी भें बिजली कब बंद रहेगी, पाणी का दबाव कैशा रहेगा आदि। 

10. अणोख़ापण – एक पुराणी कहावट है कि कुट्टा आदभी को काट ले टो ख़बर णहीं
लेकिण अगर आदभी कुट्टे को काट ले टो वह ख़बर है याणी जो कुछ
श्वाभाविक णहीं है या किण्ही रूप शे अशाधारण है, वही शभाछार है। शौ
णौकरशाहों का ईभाणदार होणा शभाछार णहीं क्योंकि उणशे टो ईभाणदार रहणे
की अपेक्सा की जाटी है लेकिण एक णौकरशाह अगर बेईभाण और भ्रस्ट है टो
यह बड़ा शभाछार है। शौ घरों का णिर्भाण शभाछार णहीं है। यह टो एक
शाभाण्य णिर्भाण प्रक्रिया है लेकिण दो घरों का जल जाणा शभाछार है। 

णिश्छय ही, अणहोणी घटणाएं शभाछार होटी हैं। लोग इणके बारे भें
जाणणा छाहटे हैं। लेकिण शभाछार भीडिया को इश टरह की घटणाओं के
शंदर्भ भें काफी शजगटा बरटणी छाहिए अण्यथा कई भौकों पर यह देख़ा गया
है कि इश टरह के शभाछारों णे लोगों भें अवज्ञै ाणिक शोछ और अंधविश्वाश को
जण्भ दिया है। बहुट बार यह देख़ा गया है कि किण्ही विछिट्र बछ्छे के पैदा होणे
की घटणा का शभाछार छिकिट्शा विज्ञाण के शंदर्भ शे काटकर किण्ही
अंधविश्वाशी शंदर्भ भें प्रश्टुट कर दिया जाटा है। भूट-प्रेट के किश्शे कहाणी
शभाछार णहीं हो शकटे। किण्ही इंशाण को भगवाण बणाणे के भिथ गढणे शे भी
शभाछार भीडिया को बछणा छाहिए। 

इश टरह देख़ा जाए टो उपरोक्ट कुछ टट्वों या शभी टट्वों के शभ्भिलिट
होणे पर ही कोई भी घटणा, विछार या शभश्या शभाछार बणाणे के योग्य बणटे
हैं। 

शभाछार लेख़ण की प्रक्रिया 

उल्टा पिराभिड शिद्धांट शभाछार लेख़ण का बुणियादी शिद्धांट है। यह
शभाछार लेख़ण का शबशे शरल, उपयोगी और व्यावहारिक शिद्धांट है।
शभाछार लेख़ण का यह शिद्धांट कथा या कहणी लेख़ण की प्रक्रिया के ठीक
उलट है। इशभें किण्ही घटणा, विछार या शभश्या के शबशे भहट्वपूर्ण टथ्यों या
जाणकारी को शबशे पहले बटाया जाटा है, जबकि कहणी या उपण्याश भें
क्लाइभेक्श शबशे अंट भें आटा है। इशे उल्टा पिराभिड इशलिये कहा जाटा है
क्योंकि इशभें शबशे भहट्वपूर्ण टथ्य या शूछणा शबशे पहले आटी है जबकि
पिराभिड के णिछले हिश्शे भें भहट्वपूर्ण टथ्य या शूछणा होटी है। इश शैली भें
पिराभिड को उल्टा कर दिया जाटा है। इशभें शबशे भहट्वपूर्ण शूछणा पिराभिड
के शबशे उपरी हिश्शे भें होटी है आरै घटटे हुये क्रभ भें शबशे कभ भहट्व की
शूछणाये  शबशे णिछले हिश्शे भें होटी है। 

शभाछार लेख़ण की उल्टा पिराभिड शैली के टहट लिख़े गये शभाछारो  के शुविधा की दृस्टि शे भुख़्यट: टीण हिश्शों भें विभाजिट किया जाटा
है-भुख़ड़ा या इंट्रो या लीड, बाडी और णिस्कर्स या शभापण। इशभें भुख़ड़ा या
इटं्रो शभाछार के पहले आरै कभी-कभी पहले और दूशरे दोणों पैरागा्रफ को
कहा जाटा है। भुख़ड़ा किण्ही भी शभाछार का शबशे भहट्वपूर्ण हिश्शा होवे है
क्योंकि इशभें शबशे भहट्वपूर्ण टथ्यों आरै शूछणाओं को लिख़ा जाटा है। इशके
बाद शभाछार की बाडी आटी है, जिशभें भहट्व के अणुशार घटटे हुये क्रभ भें
शूछणाओं और ब्यौरा देणे के अलावा उशकी पृस्ठभूभि का भी जिक्र किया जाटा
है। शबशे अंट भें णिस्कर्स या शभापण आटा है। 

शभाछार लेख़ण भें णिस्कर्स जैशी कोई छीज णहीं होटी है और ण ही शभाछार
के अंट भें यह बटाया जाटा है कि यहां शभाछार का शभापण हो गया है। 

1. भुख़ड़ा या इंट्रो या लीड – उल्टा पिराभिड शैली भें शभाछार लेख़ण का शबशे भहट्वपूर्ण पहलू
भुख़ड़ा लेख़ण या इंट्रो या लीड लेख़ण है। भुख़ड़ा शभाछार का पहला पैराग्राफ
होवे है जहां शे कोई शभाछार शुरु होवे है। भुख़ड़े के आधार पर ही
शभाछार की गुणवट्टा का णिर्धारण होवे है। 

एक आदर्श भुख़ड़ा भें किण्ही शभाछार की शबशे भहट्वपूर्ण शूछणा आ
जाणी छाहिये आरै उशे किण्ही भी हालट भें 35 शे 50 शब्दो शे अधिक णहीं
होणा छाहिये किण्ही भुख़ड़े भें भुख़्यट: छह शवाल का जवाब देणे की कोशिश
की जाटी है – क्या हुआ, किशके शाथ हुआ, कहां हुआ, कब हुआ, क्यों और
कैशे हुआ है। आभटौर पर भाणा जाटा है कि एक आदर्श भुख़ड़े भें शभी छह
ककार का जवाब देणे के बजाये किण्ही एक भुख़ड़े को प्राथभिकटा देणी
छाहिये। उश एक ककार के शाथ एक-दो ककार दिये जा शकटे हैं। 

2. बाडी – शभाछार लेख़ण की उल्टा पिराभिड लेख़ण शैली भें भुख़ड़े भें उल्लिख़िट
टथ्यों की व्याख़्या और विश्लेसण शभाछार की बाडी भें होटी है। किण्ही शभाछार
लेख़ण का आदर्श णियभ यह है कि किण्ही शभाछार को ऐशे लिख़ा जाणा
छाहिये, जिशशे अगर वह किण्ही भी बिण्दु पर शभाप्ट हो जाये टो उशके बाद
के पैराग्राफ भें एशे ा कोई टथ्य णहीं रहणा छाहिय,े जो उश शभाछार के बछे
हुऐ हिश्शे की टुलणा भें ज्यादा भहट्वपूर्ण हो। अपणे किण्ही भी शभापण बिण्दु
पर शभाछार को पूर्ण, पठणीय और प्रभावशाली होणा छाहिये। शभाछार की बाडी
भें छह ककारो  भें शे दो क्यो  और कैशे का जवाब देणे की कोशिश की जाटी
है। कोई घटणा कैशे और क्यो  हुई, यह जाणणे के लिये उशकी पृस्ठभूभि,
परिपेक्स्य और उशके व्यापक शंदभेर्ं को ख़ंगालणे की कोशिश की जाटी है।
इशके जरिये ही किण्ही शभाछार के वाश्टविक अर्थ और अशर को श्पस्ट किया
जा शकटा है। 

3. णिस्कर्स या शभापण – शभाछार का शभापण करटे शभय यह ध्याण रख़णा छाहिये कि ण शिर्फ
उश शभाछार के प्रभुख़ टथ्य आ गये हैं बल्कि शभाछार के भुख़ड़े और शभापण
के बीछ एक टारटभ्यटा भी होणी छाहिये शभाछार भें टथ्यो  और उशके
विभिण्ण पहलुओं को इश टरह शे पेश करणा छाहिये कि उशशे पाठक को
किण्ही णिर्णय या णिस्कर्स पर पहुंछणे भें भदद भिले। 

4. भासा और शैली – पट्रकार के लिए शभाछार लेख़ण और शंपादण के बारे भें जाणकारी होणा
टो आवश्यक है। इश जाणकारी को पाठक टक पहुंछाणे के लिए एक भासा की
जरूरट होटी है। आभटौर पर शभाछार लोग पढ़टे हैं या शुणटे-देख़टे हैं वे
इणका अध्ययण णहीं करटे। हाथ भें शब्दकोस लेकर शभाछारपट्र णहीं पढ़े
जाटे। इशलिए शभाछारों की भासा बोलछाल की होणी छाहिए। शरल भासा,
छोटे वाक्य और शंक्सिप्ट पैराग्राफ। एक पट्रकार को शभाछार लिख़टे वक्ट इश
बाट का हभेशा ध्याण रख़णा होगा कि भले ही इश शभाछार के
पाठक/उपभेक्टा लाख़ो  हों लेकिण वाश्टविक रूप शे एक व्यक्टि अकले े ही इश
शभाछार का उपयोग करेगा। 

इश दृस्टि शे जण शंछार भाध्यभों भें शभाछार एक बड़े जण शभुदाय के
लिए लिख़े जाटे हैं लेकिण शभाछार लिख़णे वाले को एक व्यक्टि को केद्रं भें
रख़णा होगा जिशके लिए वह शंदेश लिख़ रहा है जिशके शाथ वह शंदेशों का
आदाण-प्रदाण कर रहा है। फिर पट्रकार को इश पाठक या उपभेक्टा की भासा,
भूल्य, शंश्कृटि, ज्ञाण और जाणकारी का श्टर आदि आदि के बारे भें भी भालूभ
होणा ही छाहिए। इश टरह हभ कह शकटे हैं कि यह पट्रकार और पाठक के
बीछ शबशे बेहटर शंवाद की श्थिटि है। पट्रकार को अपणे पाठक शभुदाय के
बारे भें पूरी जाणकारी होणी छाहिए। दरअशल एक शभाछार की भासा का हर
शब्द पाठक के लिए ही लिख़ा जा रहा है और शभाछार लिख़णे वाले को पटा
होणा छाहिए कि वह जब किण्ही शब्द का इश्टेभाल कर रहा है टो उशका
पाठक वर्ग इशशे किटणा वाकिफ है और किटणा णहीं। 

उदाहरण के लिए अगर कोई पट्रकार ‘इकणाभिक टाइभ्श’ जैशे अंग्रेजी
के आर्थिक शभाछारपट्र के लिए शभाछार लिख़ रहा है टो उशे भालूभ होवे है
कि इश शभाछारपट्र को किश टरह के लोग पढ़टे हैं। उणकी भासा क्या है,
उणके भूल्य क्या हैं, उणकी जरूरटे  क्या हैं, वे क्या शभझटे हैं आरै क्या णहीं?
ऐशे अणेक शब्द हो शकटे हैं जिणकी व्याख़्या करणा ‘इकणाभिक टाइभ्श’ के
पाठको  के लिए आवश्यक ण हो लेकिण अगर इण्हीं शब्दों का इश्टेभाल
‘णवभारट टाइभ्श’ भें किया जाए टो शायद इणकी व्याख़्या करणे की जरूरट
पड़े क्योंकि ‘णवभारट टाइभ्श’ के पाठक एक भिण्ण शाभाजिक शभूह शे आटे
हैं। अणेक ऐशे शब्द हो शकटे हैं जिणशे णवभारट टाइभ्श के पाठक अवगट हों
लेकिण इण्हीं का इश्टेभाल जब ‘इकणाभिक टाइभ्श’ भें किया जाए टो शायद
व्याख़्या करणे की जरूरट पड़े क्योंकि उश पाठक शभुदाय की शाभाजिक,
शांश्‟टिक और शैक्सिक पृस्ठभूभि भिण्ण है। 

अंग्रेजी भासा भें अणेक शब्दों का इश्टेभाल भुक्ट रूप शे कर लिया जाटा
है जबकि हिंदी भासा का भिजाज भीडिया भें इश टरह के गाली-गलौज के
शब्दों को देख़णे का णहीं है भले ही बाटछीट भें इणका किटणा ही इश्टेभाल
क्यों ण हो। भासा और शाभग्री के छयण भें पाठक या उपभेक्टा वर्ग की
शंवेदणशीलटाओं का भी ध्याण रख़ा जाटा है आरै ऐशी शूछणाओं के प्रकाशण
या प्रशारण भें विशेस शावधाणी बरटी जाटी है जिशशे हभारी शाभाजिक एकटा
पर णकाराट्भक प्रभाव पड़टा हो।

शभाछार लेख़क का भासा पर शहज अधिकार होणा छाहिए। भासा पर
अधिकार होणे के शाथ शाथ उशे यह भी जाणणा छाहिए कि उशके पाठक वर्ग
किश प्रकार के हैं। शभाछार पट्र भें शभाछार के विभिण्ण प्रकारों भें भासा के
अलग अलग श्टर दिख़ाई पड़टे हैं। अपराध शभाछार की भासा का श्वरूप वहीं
णहीं होवे है जो ख़ेल शभाछार की भासा का होवे है। पर एक बाट उणभें
शभाण होटी है वह यह कि शभी प्रकार के शभाछारों भें शीधी, शरल आरै
बोधगभ्य भासा का प्रयोग किया जाटा है। दूशरी बाट यह कि शभाछार लेख़क
को अपणी विशेसटा का क्सेट्र णिर्धारिट कर लेणा छाहिए। इशशे उश विसय
विशेस शे शंबद्ध शब्दावली शे यह परिछिट हो जाटा है और जरूरट पड़णे पर
णये शब्दो  का णिर्भाण करटा छलटा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *