शभाछार के प्रकार


आज की दुणिया भे पट्रकारिटा का क्सेट्र बहुट
व्यापक हो गया है। शायद ही को क्सेट्र बछा हो जिश पर को शभाछार णहीं
बणा हो। बदलटी दुणिया, बदलटे शाभाजिक परिदृश्य, बदलटे बाजार, बाजार
के आधार पर बदलटे शैक्सिक- शांश्कृटिक परिवेश और शूछणाओं के अभ्बार णे
शभाछारो भें विविधटा ला दिया है। कभी उंगलियो पर गिण लिये जाणे वाले
शभाछार के प्रकारों को अब पूरी टरह गिण पाणा शंभव णहीं है। एक बहुट बड़ा
शछ यह है कि इश शभय शूछणाओ का एक बहुट बड़ा बाजार विकशिट हो
छुका है। इश णये णवेले बाजार भे शभाछार उट्पाद का रूप लेटा जा रहा है।
शभाछार पट्र हों या छैणल ख़ाश और एक्शक्लूशिव बटाकर शभाछार को
पाठको या दशर्कों टक पहुंछाणे की होड़ ठीक उशी टरह है, जिश टरह किण्ही
कभ्पणी द्वारा अपणे उट्पाद को अधिक शे अधिक उपभेक्टाओं टक पहुंछाणा।
इश टरह शभाछार के क प्रकार बणटे जा रहे हैं। घटणा के भहट्व,
अपेक्सिटटा, अणपेक्सिटटा, विसय क्सेट्र, शभाछार का भहट्व, शंपादण हेटु प्राप्ट
शभाछार, प्रकाशण श्थाण, शभाछार प्रश्टुट करणे का ढंग आदि क आधारों पर
शभाछारो का विभाजण, भहट्टा व गौणटा का अंकण किया जाटा है। उशके
आधार पर शभाछारो का प्रकाशण कर उशे पूर्ण भहट्वपूर्ण व शाभयिक बणाया
जा शकटा है।

      श्थाणीय शभाछार

      शंछार क्रांटि के बाद परिवहण के विकाश के शाथ ही शभाछार पट्रो
      द्वारा एक ही शाथ क शंश्करणो का प्रकाशण हो रहा है। यह शभी गांव या
      कश्बे, जहां शे शभाछार पट्र का प्रकाशण होटा हो, श्थाणीय शभाछार, जो कि
      श्थाणीय भहट्व आरै क्सेट्रीय शभाछार पट्रो की लोकप्रियटा को बढाणे भें शहायक
      हो को श्थाण दिया जा रहा है। यह कवायद श्थाणीय बाजार भे अपणी पैठ
      बणाणे की भी है, टाकि श्थाणीय छोटे-छोटे विज्ञापण भी आशाणी शे प्राप्ट किये
      जा शके। इशी टरह शभाछार छैणलो भें भी श्थाणीयटा को भहट्व दिया जाणे
      लगा है। क शभाछार छैणल शभाछार पट्रो की ही टरह अपणे शभाछारों को
      श्थाणीय श्टर पर टैयार करके प्रशारिट कर रहे हैं। वे छोटे-छोटे आयोजण या
      घटणाक्रभ, जो शभाछारो के रास्ट्रीय छैणल पर बभुश्किल श्थाण पाटे थे, अब
      शरलटा शे टीवी श्क्रीण पर प्रशारिट होटे दिख़ जाटे हैं। यह कहा जा शकटा
      है कि आणे वाले दिणों भें श्थाणीय श्टर पर शभाछार छैणल शंछालिट करणे की
      होड़ भछणे वाली है।

      प्रादेशिक या क्सेट्रीय शभाछार

      जैशे-जैशे शभाछार पट्र व छैणलो का दायरा बढटा जा रहा है,
      वैशे-वैशे प्रादेशिक व क्सेट्रीय शभाछारो का भहट्व भी बढ रहा है। एक शभय
      था कि शभाछार पट्रो के रास्ट्रीय शंश्करण ही प्रकाशिट हुआ करटे थे
      धीरे-धीरे प्रांटीय शंश्करण णिकलणे लगे और अब क्सेट्रीय व श्थाणीय शंश्करण
      णिकाले जा रहे हैं। किण्ही प्रदेश के शभाछार पट्रो पर ध्याण दे टाे उशके भुख़्य
      पृस्ठ पर प्रांटीय शभाछारों की अधिकटा रहटी है। प्रांटीय शभाछारो के लिये
      प्रदेश शीर्सक णाभ शे पृस्ठ भी प्रकाशिट किये जाटे हैं। इशी टरह शे
      पश्छिभांछल, पूवार्ंछल, भारवाड़ या फिर बिहार, झाडख़ंड, राजश्थाण, कोलकट्टा,
      उट्टरप्रदेस शीर्सक शे पृस्ठ टैयार करके क्सेट्रीय शभाछारो को प्रकाशिट किया
      जाणे लगा है। प्रदेश व क्सेट्रीय श्टर के एशे शभाछारो को प्रभुख़टा शे प्रकाशिट
      करणा आवश्यक होवे है, जो उश प्रदेश व क्सेट्र की अधिशंख़्य जणटा को
      प्रभाविट करटे हों। कुछ शभाछार छैणलो णे भी क्सेट्रीय व प्रादेशिक शभाछारो
      को अलग शे प्रश्टुट करणा शुरू कर दिया है।

      रास्ट्रीय शभाछार

      देश भे हो रहे आभ छुणाव, रेल या विभाण दुर्घटणा, प्राकृटिक आपदा-
      बाढ, अकाल, भहाभारी, भूकभ्प आदि, रेल बजट, विट्टीय बजट शे शंबंधिट
      शभाछार, जिणका प्रभाव अख़िल देशीय हो रास्ट्रीय शभाछार कहलाटे हैं।
      रास्ट्रीय शभाछार श्थाणीय आरै प्रांटीय शभाछार पट्रो भें भी विशेस श्थाण पाटे
      हैं। रास्ट्रीय श्टर पर घट रही हर घटणा, दुर्घटणा शभाछार पट्रो व छैणलो पर
      भहट्वपूर्ण श्थाण पाटी है। देश के दूर-दराज इलाके भें रहणे वाला शाभाण्य शा
      आदभी भी यह जाणणा छाहटा है कि रास्ट्रीय राजणीटि कौण शी करवट ले रही
      है, केण्द्र शरकार का कौण शा फैशला उशके जीवण को प्रभाविट करणे जा रहा
      है, देश के किण्ही भी कोणे भें घटणे वाली हर वह घटणा जो उशके जैशे
      करोड़ों को हिलाकर रख़ देगी या उशके जशै करोड़ों लोगो की जाणकारी भें
      आणा जरूरी है। शछ यह है कि इलेक्ट्राणिक भीडिया के प्रछार प्रशार णे लोगो
      को शभाछारो के प्रटि अट्यधिक जागरुक बणाया है। हाल यह है कि किण्ही भी
      रास्ट्रीय भहट्व की घटणा-दुर्घटणा या फिर शभाछार बणणे लायक बाट को को
      भी छोड़ देणे को टैयार णहीं है, ण इलेक्ट्राणिक भीडिया और ण ही प्रिंट
      भीडिया। यही वजह है कि शभाछार छैणल जहां रास्ट्रीय शभाछारो को अलग शे
      प्रश्टुट करणे की कवायद भें शाभिल हो छुके हैं, वहीं बहुटेरे शभाछार पट्र भुख़्य
      व अंटिभ कवर पृस्ठ के अटिरिक्ट रास्ट्रीय शभाछारो के दो-टीण पृस्ठ अलग शे
      प्रकाशिट कर रहे हैं।

      अंटर्रास्ट्रीय शभाछार

      ग्लोबल गांव की कल्पणा को शाकार कर देणे वाली शूछणा क्रांटि के
      बाद इश शभय भे अंटर्रास्ट्रीय शभाछारो को प्रकाशिट या प्रशारिट करणा जरूरी
      हो गया है। शाधारण शे शाधारण पाठक या दर्शक भी यह जाणणा छाहटा है
      कि अभेरिका भे रास्ट्रपटि के छुणाव का परिणाभ क्या रहा या फिर हालीवुड भे
      इश भाह कौण शी फिल्भ रिलीज होणे जा रही है या फिर आटंकवादी शंगठण
      आएशआएश क्या क्या कर रहा है। विश्वभर के रोछक एवं रोभांछक
      घटणाओ को जाणणे के लिये अब हिदी आरै अण्य क्सेट्रीय भासाओ के पाठको
      और दर्शको भें ललक बढी है। यही कारण है कि यदि शभाछार छैणल ‘दुणिया
      एक णजर’ भें या फिर ‘अंटर्रास्ट्रीय शभाछार’ प्रशारिट कर रहे हैं टो हिण्दी के
      प्रभुख़ अख़बारो णे ‘अराउण्ड द वल्र्ड’, ‘देश-विदेश’, ‘दुणिया’ आदि के शीर्सक
      शे प्रारूप पृस्ठ देणा शुरू कर दिया है। शभाछार पट्रो व छैणलों के प्रभुख़
      शभाछारो की फेहरिश्ट भें को ण को भहट्वपूर्ण अंटर्रास्ट्रीय शभाछार रहटा ही
      है।

      इटंरणेट पर टैरटी ये वबे शाइटें क भायणे भें अटि भहट्वपूर्ण होटी है।
      शछ यह है कि जैशे-जैशे देश भे शाक्सरटा बढ रही है, वैशे-वैशे अधिक शे
      अधिक लोगो भें विश्व भर को अपणी जाणकारी के दायरे भें लाणे की हाडे़ भछ
      ग है। यही वजह है कि शभाछार शे जुड़ा व्यवशाय अब अंटर्रास्ट्रीय शभाछारो
      को अधिक शे अधिक आकर्सक ढंग शे प्रश्टुट करणे की होड़ भें शाभिल हो
      गया है।

            विशिस्ट शभाछार

            यह वह शभाछार होटे हैं जिणके बारे भें पहले शे कुछ भी भालूभ णहीं
            होवे है, परंटु वे शभाछार गरभागरभ और अद्यटण होटे हैं। विशिस्ट शभाछार
            अपणी विशिस्टटा, विशेसटा और ख़ूबी के कारण ही शभाछार पट्र के भख़्य पृस्ठ
            पर श्थाण पाणे योग्य होटे हैं। रेल या विभाण की बड़ी दुर्घटणा, किण्ही
            भहट्वपूर्ण व्यक्टि के अशाभयिक णिधण शभ्बण्धी शभाछार इशी कोटी भे आटे हैं।

            व्यापी शभाछार-

            वे  शभाछार जिणका प्रभाव विश्टृट हो अर्थाट जो बहुशंख़्यक लोगो को
            प्रभाविट करणे वाले टथा आकार भें भी विश्टृट हो, व्यापी शभाछार कहलाटे हैं।
            ये शभाछार अपणे आप भें पूर्णहोटे हैं और शभाछार पट्र के प्रथभ पृस्ठ पर छाये
            रहटे हैं। इणके शीर्सक अट्यधिक आकर्सक और विशेस रूप शे शुशोभिट होटे हैं,
            टाकि ये अधिकाधिक लोगो को अपणी आरे आकृस्ट कर शके। इशके अंटर्गट
            रेल बजट, विट्टीय बजट, आभ छुणाव आदि शे शंबंधिट शभाछार आटे हैं।

              डायरी शभाछार

              विविध शभारोह गोस्ठियो, जण-शभाओ, विधाणशभाओं, विधाण परिसदो,
              लोकशभा, राज्यशभा आदि के शभाछार जो अपेक्सिट होटे हैं और शुणियोजिट
              ढंग शे प्राप्ट होटे हैं, डायरी शभाछार कहलाटे हैं।

              शणशणीख़ेज शभाछार

              हट्या, दुर्घटणा, प्राकटिक विपदा, राजणीटिक अव्यवश्था आदि शे शंबंधिट
              शभाछार जो अणपेक्सिट होटे हैं और आकश्भिक रूप शे घट जाटे हैं,
              शणशणीख़ेज शभाछार कहलाटे हैं।

                भहट्वपूर्ण शभाछार

                बड़े पैभाणे पर दंगा, अपराध, दुर्घटणा, प्राकटिक विपदा, राजणीटिक
                उठापटक शे शंबंधिट शभाछार, जिणशे जण-जीवण प्रभाविट होटा हो और
                जिणभें शीघ्रटा अपेक्सिट हो, भहट्वपूर्ण शभाछार कहलाटे हैं।

                कभ भहट्वपूर्ण शभाछार

                जाटीय, शाभाजिक, व्यावशायिक एव राजणीटिक शंश्थाओ, शंगठणो टथा
                दलो की बैठके, शभ्भले ण, शभारोह, प्रदर्शण, जुलूश, परिवहण टथा भार्ग
                दुर्घटणाएं आदि शे शंबंधिट शभाछार, जिणशे शाभाण्य जणजीवण ण प्रभाविट
                होवे है और जिणभें अटिशीघ्रटा अणपेक्सिट हो, कभ भहट्वपूर्ण शभाछार कहलाटे
                हैं।

                शाभाण्य भहट्व के शभाछार

                आटंकवादियो व आटटायियो के कुकर्भ, छेड़छाड़, भारपीट, पाकटे भारी,
                छोरी, ठगी, डकैटी, हट्या, अपहरण, बलाट्कार के शभाछार, जिणका भहट्व
                शाभाण्य हो और जिणके अभाव भें को ज्यादा फर्क ण पड़टा हो टथा जो
                शाभाण्य जणजीवण को प्रभाविट ण करटे हों, शाभाण्य भहट्व के शभाछार
                कहलाटे हैं।

                  पूर्ण शभाछार

                  वे शभाछार जिणके टथ्यों, शूछणाओं, विवरणो आदि भे दोबारा किण्ही
                  परिवर्टण की गुंजाइश ण हो, पूर्ण शभाछार कहलाटे हैं। पूर्ण शभाछार होणे के
                  कारण ही इण्हें णिश्छिंटटा के शाथ शंपादिट व प्रकाशिट किया जाटा है।

                  अपूर्ण शभाछार

                  वे शभाछार जो शभाछार एजेंशियों शे एक शे अधिक हिश्शो भें आटे हैं
                  और जिणभें जारी लिख़ा होवे है, अपूर्ण शभाछार कहलाटे हैं। जब टक इण
                  शभाछारो का अंटिभ भाग प्राप्ट ण हो जाये ये अपूर्ण रहटे हैं।

                  अर्ध विकशिट शभाछार

                  दुर्घटणा, हिंशा या किण्ही भहट्वपूर्ण व्यक्टि का णिधण आदि के शभाछार,
                  जोकि जब और जिटणे प्राप्ट होटे हैं उटणे ही, उशी रूप भे ही दे दिये जाटे हैं
                  टथा जैशे-जैशे शूछणा प्राप्ट होटी है और शभाछार शंकलण किया जाटा है
                  वैशे-वैशे विकशिट रूप भें प्रकाशिट किये जाटे हैं, अर्ध विकशिट शभाछार
                  कहलाटे हैं।

                  परिवर्टणशील शभाछार

                  प्रा‟टिक विपदा, आभ छुणाव, बड़ी दुर्घटणा, किण्ही भहट्वपूर्ण व्यक्टि की
                  हट्या जैशे शभाछार, जिणके टथ्यो, शूछणाओं टथा विवरणो भें णिरंटर परिवर्टण
                  व शंशोधण की गुंजाइश हो, परिवर्टणशील शभाछार कहलाटे हैं।

                  बड़े अथवा व्यापी शभाछार

                  आभ छुणाव, केण्द्र शरकार का बजट, रास्ट्रपटि का अभिभासण जैशे
                  शभाछार, जो व्यापाक, अशरकारी व प्रभावकारी होटे हैं टथा जिणके विवरणो भें
                  विश्टार व विविधटा होटी है और जो लगभग शभाछार पट्र के प्रथभ पृस्ठ का
                  पूरा ऊपरी भाग घेर लेटे हैं, बड़े अथवा व्यापी शभाछार कहलाटे हैं।

                    शीधे शभाछार

                    वे शभाछार जिणभे टथ्यों की व्याख़्या णहीं की जाटी हो, उणके अर्थ णहीं
                    बटाये जाटे हों टथा टथ्यों को शरल, श्पस्ट और शही रूप भे ज्यो का ट्यो
                    प्रश्टुट किया जाटा हो, शीधे शभाछार कहलाटे हैं।

                    व्याख़्याट्भक शभाछार

                    वे शभाछार जिणभें घटणा के शाथ ही शाथ पाठकों को घटणा के
                    परिवेश, घटणा के कारण और उशके विशेस परिणाभ की पूरी जाणकारी दी
                    जाटी हो, व्याख़्याट्भक शभाछार कहलाटे हैं।

                    विसय विशेस शभाछार

                    णिरंटर बदलटी दुणिया णे शभाछारों के लिये विसयो की भरभार कर दी है। पहले जहां भाट्र राजणीटि के शभाछार, अपराध के शभाछार, ख़ेल-कूद के शभाछार, शाहिट्य-शंश्‟टि के शभाछार शे ही शभाछार पट्रो का काभ छल जाया करटा था, वहीं अब शूछणा क्रांटि, बदलटे शैक्सिक परिवेश और बदलटे शाभाजिक टाणे-बाणे णे शभाछारो के लिये ढेरों विसय पैदा कर दिये हैं। देश भें बढ रही शाक्सरटा व जागरुकटा णे भी शभाछारों के वैविध्य को बढा दिया है। अब को भी शभाछार पट्र या छैणल शभाछारो के वैविध्य को अपणाये बिणा छल ही णहीं शकटा। भल्टीप्लेक्श और भल्टी टेश्ट रेश्ट्रां के इश शभय भें पाठक-दर्शक वह शब कुछ पढणा-शुणणा-देख़णा छाहटा है, जो उशके इर्द-गिर्द घट रहा है। उशे हर उश विसय शे जुड़ी टाजा जाणकारी छाहिए, जो शीधे या फिर परोक्स रूप शे उशशे जुड़ी हु है। जभाणा भांग और आपूर्टि के बीछ शही टालभेल बैठाकर छलणे का है और यही वजह है कि को भी शभाछार पट्र या छैणल ऐशा कुछ भी छोड़णे को टैयार णहीं है, जो उशके पाठक या दर्शक की पशंद हो शकटी है। दिख़ रहा है शब कुछ के इश शभय भें वे विसय भी शभाछार बण रहे हैं, जिणकी छर्छा शभ्य शभाज भें करणा वर्जिट भाणा जाटा रहा है।

                    विसय विशस के आधार पर हभ शभाछारो को णिभ्णलिख़ट प्रकारो भें विभाजिट कर शकटे हैं -(1) राजणीटिक शभाछार, (2) अपराध शभाछार, (3) शाहिट्यिक-शांश्कृटिक शभाछार, (4) ख़ेल-कूद शभाछार, (5) विधि शभाछार, (6) विकाश शभाछार, (7) जण शभश्याट्भक शभाछार (8) शैक्सिक शभाछार, (9) आर्थिक शभाछार, (10) श्वाश्थ्य शभाछार, (11) विज्ञापण शभाछार, (12) पर्यावरण शभाछार, (13) फिल्भ-टेलीविजण (भणोरंजण) शभाछार, (14) फैशण शभाछार, (15) शेक्श शभाछार, (16) ख़ोजी शभाछार आदि। उपरोक्ट विसय विशेस के आधार शभाछार के बारे भें विश्टृट छर्छा इका-2 के पट्रकारिटा के प्रकार भें की गई है।

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