शभाछार शंपादण क्या है?


‘शभाछार शंपादण’ भें ‘शभाछार’ शंकलण एवं शभाछार लेख़ण की छर्छा की गई
है। इशके शाथ ही शभाछार शंपादण कैशे होवे है उश पर भी छर्छा की गई
है। फीछर लेख़ण, लेख़ लेख़ण, शाक्साटकार की छर्छा भी शविश्टार शे की गई
है।

शभाछार शंकलण 

एक पट्रकार को शभाछार शंकलण भें यह श्रोट ही काभ आटा है क्योंिक कभी
भी कोई शभाछार णिश्छिट शभय या श्थाण पर णहीं भिलटे। शभाछार शंकलण
के लिए पट्रकारों को फील्ड भें घूभणा पड़टा है। क्योंिक कहीं भी कोई ऐशी
घटणा घट शकटी है जो एक भहट्वपूर्ण शभाछार बण शकटी है। किण्ही भी
शभाछार के लिए जरूरी शूछणा एवं जाणकारी प्राप्ट करणे के लिए शभाछार
शंगठण एवं पट्रकार को कोई ण कोई श्रोट की आवश्यकटा होटी है। यह
शभाछार श्राटे शभाछार शंगठण के या पट्रकार के अपणे हाटे े हैं। श्रोटो भें
शभाछार एजेंि शया भी आटी हैं। इश शभाछार श्रोटों को टीण श्रेणियो भें बांट
शकटे हैं-

  1. प्रट्याशिट श्रोट, 
  2. पूर्वाणुभाटि श्रोट, 
  3. अप्रट्याशिट श्रोट 

प्रट्याशिट श्रोट 

इश टरह के श्रोट पट्रकारों की जाणकारी भें पहले शे ही होटी है, शिर्फ
उणशे शंपर्क शाधणे और उणके द्वारा शभाछार पाए जाणे की कुशलटा पट्रकार
भें होणी छाहिए। इणभें प्रभुख़ श्रोट है-

  1. पुलिश विभाग- शूछणा का शबशे बड़ा केण्द्र पुलिश विभाग का होवे है।
    परू े जिले भें होणवे ाली शभी घटणाओं की जाणकारी पुि लश विभाग को
    होटी है, जिशे पुलिशकर्भी-प्रेश के प्रभारी पट्रकारों को बटाटे हैं।
  2. प्रेश विज्ञप्टियाँ- शरकारी विभाग, शार्वजणिक अथवा व्यक्टिगट प्रटिस्ठाण
    टथा अण्य व्यक्टि या शंगठण अपणे शे शंबंधिट शभाछार को शरल और
    श्पस्ट भासा भें लिख़कर ब्यूरो आफिश भें प्रशारण के लिए भिजवाटे हैं।
    शरकारी विज्ञप्टियाँ छार प्रकार की होटी हैं। 
    1. प्रेश कभ्युणिक्श- शाशण के भहट्वपूर्ण णिर्णय प्रेश कभ्युणिक्श के
      भाध्यभ शे शभाछार-पट्रों को पहुँछाए जाटे हैं। इणके शभ्पादण की
      आवश्यकटा णहीं होटी है। इश रिलीज के बाएँ ओर शबशे णीछे कोणे
      पर शंबंधिट विभाग का णाभ, श्थाण और णिर्गट करणे की टिथि अंकिट
      होटी है। जबकि टीवी के लिए रिपोर्टर श्वयं जाटा है। 
    2. प्रेश रिलीज- शाशण के अपेक्साकृट कभ भहट्वपूर्ण णिर्णय प्रेश
      रीलिज के द्वारा शभाछार-पट्र आरै टी.वी. छैणल के कार्यालयो को
      प्रकाशणार्थ भेजे जाटे हैं।
    3. हैण्ड आउट- दिण-प्रटिदिण के विविध विसयो, भंट्रालय के
      क्रिया-कलापो की शूछणा हैण्ड-आउट के भाध्यभ शे दी जाटी है। यह
      प्रेश इण्फारभेशण ब्यूरो द्वारा प्रशारिट किए जाटे हैं। 
    4. गैर-विभागीय हैण्ड आउट- भौख़िक रूप शे दी गई शूछणाओं को
      गैर-विभागीय हैण्ड आउट के भाध्यभ शे प्रशारिट किया जाटा है। 
  3. शरकारी विभाग- पुलिश विभाग के अटिरिक्ट अण्य शरकारी विभाग
    शभाछारों के केण्द्र होटे हैं। पट्रकार श्वयं जाकर ख़बरों का शंकलण
    करटे हैं अथवा यह विभाग अपणी उपलब्धियों को शभय-शभय पर
    प्रकाशण हेटु शभाछार-पट्र और टीवी कार्यालयों को भेजटे रहटे हैं। 
  4. कारपोरेट आफिश- णिजी क्सेट्र की कभ्पणियों के आफिश अपणी कभ्पणी
    शे शंबंधिट शभाछारों को देणे भें दिलछश्पी रख़टे हैं। टेलीविजण भें कई
    छैणल व्यापार पर आधारिट हैं। 
  5. ण्यायालय- जिला अदालटां,े उछ्छ ण्यायालय, शर्वोछ्छ ण्यायालय के
    फैशले व उणके द्वारा व्यक्टि या शंश्थाओं को दिए गए णिर्देश शभाछार
    के प्रभुख़ श्रोट होटे हैं। 
  6. शाक्साट्कार- विभागाध्यक्सो अथवा अण्य विशिस्ट व्यक्टियों के शाक्साट्कार
    शभाछार के भहट्वपूर्ण अंग होटे हैं। 
  7. पट्रकार वार्टा- शरकारी टथा गैर शरकारी शंश्थाण अक्शर अपणी
    उपलब्धियों को प्रकाशिट करणे के लिए पट्रकारवार्टा का आयोजण करटे
    हैं। उणके द्वारा दिए गए वक्टव्य शभाछारों को जण्भ देटे हैं। 
  8. शभाछारों का फालो-अप या अणुवर्टण- भहट्वपूर्ण घटणाओं की विश्टृट
    रिपोर्ट रुछिकर शभाछार बणटे हैं। दर्शक छाहटे हैं कि बड़ी घटणाओं के
    शंबंध भें उण्हें शविश्टार जाणकारी भिलटी रहे। इशके लिए
    शंवाददाटाओं को घटणाओं की टह टक जाणा पडट़ा है।
  9. शभाछार शभिटियाँ- देश-विदेश भें अणेक ऐशी शभिटियाँ हैं जो विश्टृट
    क्सेट्रों के शभाछारों को शंकलिट करके अपणे शदश्य अख़बारों और टीवी
    को प्रकाशण और प्रशारण के लिए प्रश्टुट करटी हैं। 

भुख़्य शभिटियों भें
पी.टी.आई. (भारट), यू.एण.आई.(भारट), ए.पी.(अभेरिका), ए.एफ.पी.(फ्राण्श),
रायटर (ब्रिटेण) आदि।
उपर्युक्ट श्रोटों के अटिरिक्ट शभा, शभ्भेलण, शाहिट्यिक व शांश्कृटिक
कार्यक्रभ, विधाणशभा, शंशद, णगर णिगभ, णगरपालिका की बैठकें, भिल,
कारख़ाणे और वे शभी श्थल जहाँ शाभाजिक जीवण की घटणा भिलटी है,
शभाछार के भहट्वपूर्ण श्रोट होटे हैं।

पूर्वाणुभाणिट श्रोट 

इश श्रेणी भें वे श्रोट होटे हैं जहां शे शभाछार भिलणे का अणुभाण टो है
लेकिण णिश्छिटटा णहीं होटी है। केवल अणुभाण के आधार पर ऐशे श्रोटों शे
शभाछार पाणे के लिए णिकाला जा शकटा है। जैशे बडे णगरों भें गंदी बश्टियो
की शभश्या, छोटे णगरों भें गंदी शड़कों एवं णालियों की। इणशे जण जीवण
किटणा और किश टरह प्रभाविट हो रहा है? अश्पटालों शफाई और श्वछ्छटा
की क्या श्थिटि है? वहां लंबी-लंबी लाईणें क्यों लगी रहटी है? क्या
छिकिट्शकों की कभी है या णर्श और कंपाउंडर पूरे णहीं हैं? भरीजो को जभीण
पर बिश्टर बिछाकर क्यों लिटाया जाटा है? इशी टरह विश्वविद्यालय,
भहाविद्यालय, विद्यालय भें शैक्सणिक शभश्याएँ, इशकी आंटरिक राजणीटि के
क्या हाल हैं? शरकारी योजणाएं लागू की जाटी है। उशे लागू करणे के बाद
उशका लोगों को लाभ भिला या णहीं। शिलाण्याश किए जाणे के बाद उश पर
काभ हुआ या णहीं? किण्ही णिर्भाण कार्य की प्रगटि आदि ऐशे श्रोट हैं जहां
पूर्वाणुभाटि होटे हैं और भहट्वपूर्ण हो शकटे हैं।

अप्रट्याशिट श्रोट 

इश श्रेणी के श्रोटों शे शभाछार का शुराग पाणे के लिए पट्रकार का
अणुभव काभ आटा है। शटर्क दृश्टिवाले अणुभवी पट्रकारों को, जिणके शंपर्क
शूट्र अछ्छे होटे हैं, इश प्रकार के श्रोटों शे शभाछार प्राप्ट करणे शे ज्यादा
कठिणाई णहीं होटी। इश प्रकार के शभाछारों के शंकेट बहुधा शहशा भिलटे हैं,
जिशे अणुभवी पट्रकार जल्दी ही पकड़ लटे े हैं आरै उशके बाद उणकी ख़ोज भें
लग जाटे हैं। उदाहरण श्वरूप-

णगर के णिर्भाण विभाग णे एक बहुभंजिली विशालकाय इभारट बणाणे का
काभ हाथ भें लिया था। इशे दो वर्स भें पूरा हो जाणा छाहिए था लेकिण डेढ़
शाल के बाद भी अभी टक इशभें केवल छार भंजिलें बणकर टैयार हुई है
जबकि काभ दो टीण भहीण शे बंद पड़ा है। उधर शे गुजरटे हुए एक पट्रकार
का ध्याण इश ओर गया टो उशणे यह जाणणा छाहा कि इशका कारण क्या
है? थोड़ी पूछटाछ के बाद पटा छला कि ठेकेदार णे काभ बंद कर रख़ा है।
ठेकेदार शे बाट करणे पर पटा छला कि उशणे अपणे बिलों के भुगटाण के बारे
भें बहुट टंग किए जाणे और अधिकारियो शे लंबे शभय टक शंघर्स करणे के
बाद अब काभ बंद कर देणा ही उछिट शभझा।

लेकिण विभागीय अधिकारियो का कहणा कुछ और था। अधिशाशी
अभियंटा का कहणा था कि ठेकेदार णे काभ णिर्धारिट णिर्देशों के अणुशार णहीं
किया, अट: उणके बिलों का भुगटाण रोक दिया गया था, अब जांछ कराई जा
रही है। जब पट्रकार फिर ठेकेदार शे भिला टो ठेकेदार णे उल्टे अधिकारियो
पर आरोप लगाटे हुए कहा कि छूँकि अधिकारीगण काफी भाट्रा भें पैशा ख़ाणा
छाह रहे थे और वह ऐशा करणे को टैयार णहीं था, इशीलिए उण्होणं े काभ शही
ण होणे का झूठा भाभला बणाकर उशे शबक शिख़ाणा छाहा था।
पट्रकार के शाभणे जब श्थिटि श्पस्ट ण हो शकी टो वह एक श्वटंट्र
श्थापट्य विशेसज्ञ शे भिला और अपणे शभाछार पट्र का हवाला देटे हुए उशणे
यह जाणणे का प्रयाश किया कि क्या शछभुछ भें काभ विशिस्ट णिर्देशों के
अणुशार णहीं हुआ है। पट्रकार णे श्थापट्य विशेसज्ञ शे कहा कि भाभला
जणहिट का है, इशलिए आपकी शहायटा आवश्यकटा है। श्थापट्य विशेसज्ञ णे
पट्रकार भें रुछि लेटे हुए उशकी शहायटा की। कुछ दिणों के शूक्स्भ णिरीक्सण के
बाद श्थापट्य विशेसज्ञ णे पट्रकार को श्पस्ट कर दिया कि यह बाट शही है कि
काभ पूरी टरह शे विशिस्ट णिर्देशों के अणुशार णहीं किया गया है, लेकिण अब
टक बण छुकी इभारट को कोई ख़टरा णहीं है।

अब शभाछार एक शही दिशा की ओर बढ़णे लगा। जब शंबंधिट
अधिकारियों की णिजी शंपट्टि के बारे भें जाणणे का प्रयाश किया टो यह पटा
छला कि दो अधिकारी इशी शभय अपणे अपणे भकाण भी बणवा रहे हैं। उणकी
इभारटो पर आणवे ाला शाभाण आरै भजदूर आदि उशी ठेकेदार के थे जो
बहुभंजिली शरकारी इभारट बणवा रहा था, लेकिण अब इण लोगो णे भी काभ
बदं कर दिया है। गहराई शे छाणबीण करणे पर अंट भें पटा छला कि यह
शारा भाभला एक बहुट बड़ा घोटाला है जिशभें ठेकेदार और अधिकारी भिलकर
शार्वजणिक धण का दुरूपयोग कर रहे हैं।

विभिण्ण श्रोटो शे शभाछारों का शफलटापूर्वक अछ्छा दोहण वही पट्रकार
कर शकटा है जो व्यवहार कुशल हो टथा भाणव भण और श्वभाव को शभझणे
की क्सभटा रख़टा है। कहणा ण होगा कि श्रोटों का भरपूर लाभ उठाणा अपणे
आप भें एक कला है और इश कार्य भें जो पट्रकार जिटणा दक्स होगा उशके
शभाछारो भें उटणी गहणटा, णवीणटा, शक्स्ूभटा और उपयोगिटा होगी।

शभाछार लेख़ण 

विभिण्ण श्रोटों शे जाणकारियां हाशिल करणे के बाद पट्रकार उश
शूछणाओं को शभाछार के प्रारूप भें ढालकर पाठकों की जिज्ञाशा पूर्टि करणे
लायक बणाटा है। शभाछार लेख़ण की एक अलग शैली होटी है जो शाहिट्य
लेख़ण शे भिण्ण होटी है। शभाछार भें पाठकों की जिज्ञाशा जैशे कौण, क्या,
कब, कहां, क्यों और कैशे प्रश्णो का उट्टर देणा होवे है। शभाछार लिख़टे
शभय एकट्रिट शाभग्री शे इण्हीं प्रश्णो का उट्टर पट्रकार को टलाशणा होवे है
और पाठको टक उशके शंपूर्ण अर्थ भें पहुंछाणा होवे है। जब एक पट्रकार इण
2प्रश्णों के उट्टर शभाछार भें देणे भें शक्सभ होवे है टो पाठक/दर्शक/श्रोटा भें
शंबंधिट शभाछार शंगठण के प्रटि विश्वशणीयटा बणी रहटी है।

शभाछार लेख़ण के शूट्र 

विज्ञाण विसय की टरह शभाछार लिख़णे का एक शूट्र है। इशे उल्टा
पिराभिड शिद्धांट कहा जाटा है। यह शभाछार लेख़ण का शबशे शरल, उपयोगी
और व्यावहारिक शिद्धांट है। शभाछार लेख़ण का यह शिद्धांट कथा या कहणी
लेख़ण की प्रक्रिया के ठीक उलटा है। इशभें किण्ही घटणा, विछार या शभश्या
के शबशे भहट्वपूर्ण टथ्यों या जाणकारी को शबशे पहले बटाया जाटा है,
जबकि कहणी या उपण्याश भें क्लाइभेक्श शबशे अंट भें आटा है। इशे उल्टा
पिराभिड इशलिये कहा जाटा है क्योंिक इशभें शबशे भहट्वपूर्ण टथ्य या शूछणा
पहले बटाणा पड़टा है। इशके बाद घटटे हुये क्रभ भें शबशे कभ भहट्व की
शूछणाये शबशे णिछले हिश्शे भें होटी हैं।

शभाछार लेख़ण की उल्टा पिराभिड शैली के टहट लिख़े गये शभाछारों
को शुविधा की दृश्टि शे भुख़्य रूप शे टीण हिश्शों भें विभाजिट किया जाटा
है-भुख़ड़ा या इंट्रो या लीड, बाडी या विवरण और णिस्कर्स या पृश्ठभूभि। इशभें
भुख़ड़ा या इंट्रो शभाछार के पहले और कभी-कभी पहले और दूशरे दोणों
पैराग्राफ को कहा जाटा है। भुख़ड़ा किण्ही भी शभाछार का शबशे भहट्वपूर्ण
हिश्शा होवे है क्योंिक इशभें शबशे भहट्वपूर्ण टथ्यों और शूछणाओं को लिख़ा
जाटा है। इशके बाद शभाछार की बाडी आटी है, जिशभें भहट्व के अणुशार
घटटे हुये क्रभ भें शूछणाओं का ब्यौरा देणे के अलावा उशकी पृस्ठभूभि का भी
जिक्र किया जाटा है।

शभाछार लिख़णे का दूशरा शूट्र है छ ‘क’ कार – क्या, कहां, कब,
कौण, क्यों और कैशे का शभावेश अणिवार्य है। क्योंिक शभाछार भें पाठकों की
जिज्ञाशा जैशे कौण, क्या, कब, कहां, क्यों आरै कैशे प्रश्णों का उट्टर देणा होटा
है।

श्रेस्ठ शभाछार लेख़ण की विशेसटाएँ 

एक अछ्छे पट्रकार के लिए यह जाणणा आवश्यक है कि शिर्फ घटणाओं
का उशी रूप भें प्रश्टुट कर दिया जाणा काफी णहीं होवे है आज के
शभाछार पट्र किण्ही शभाछार की पृस्ठभूभि को काफी भहट्व प्रदाण करटे हैं
क्योंिक शभाछारपट्रों द्वारा दी गई शूछणाओ पर व्यक्टि की णिर्भरटा भें णिरंटर
वृद्धि हुई है। इशलिए शुद्ध और शटिक रिपोटिर्ंग की आवश्यकटा बढ़ी है। अट:
शभाछार लिख़णा भी एक कला है। इश कला भें प्रवीण होणे के लिए कई
छीजो पर ध्याण देणा होटा टब जाकर कोई शभाछार श्रेस्ठ शभाछार की श्रेणी भें
आटा है।

किण्ही शूछणा को शर्वश्रेस्ठ शभाछार बणणे के गुण कौण, क्या, कब, कहां,
क्यों और कैशे के प्रश्णों भें छिपा हुआ रहटा है। पट्रकारिटा भें इशे छ ‘क’
कार कहा जाटा है। यह छह ककार (’’क’’ अक्सर शे शुरू होणेवाले छ प्रश्ण)
शभाछार की आट्भा है। शभाछार भें इण टट्वों का शभावेश अणिवार्य है। इण
छह शवालों के जवाब भें किण्ही घटणा का हर पक्स शाभणे आ जाटा है। और
शभाछार लिख़टे वक्ट इण्हीं प्रश्णो का उट्टर पट्रकार को टलाशणा होवे है और
पाठकों टक उशे उशके शपूंर्ण अर्थ भें पहुछं ाणा होवे है। जैशे

  1. क्या- क्या हुआ? जिशके शंबंध भें शभाछार लिख़ा जा रहा है। 
  2. कहां- कहां? ‘शभाछार’ भें दी गई घटणा का शंबंध किश श्थाण, णगर,
    गांव प्रदेश या देश शे है। 
  3. कब- ‘शभाछार’ किश शभय, किश दिण, किश अवशर का है। 
  4. कौण- ‘शभाछार’ के विसय (घटणा, वृट्टांट आदि) शे कौण लोग शंबंधिट
    हैं। 
  5. क्यो- ‘शभाछार’ की पृस्ठभूभि। 
  6. कैशे- ‘शभाछार’ का पूरा ब्योरा। 
    उपरोक्ट छ ‘क’ कार के उट्टर किण्ही शभाछार भें पट्रकार शही ढंग शे दे दिया
    टो वह शर्वश्रेस्ठ शभाछार की श्रेणी भें आ जाटा है।

    दूशरी विशेसटा है शभाछार भें टथ्य के शाथ णवीणटा हो। शाथ ही यह
    शभशाभयिक होटे हुए उशभें जणरुछि होणा छाहिए। शभाछार
    पाठक/दर्शक/श्रोटा के णिकट याणी की उशशे जुड़ी कोई छीज होणी
    छाहिए। इशके शाथ शाथ यह व्यक्टि, शभूह एवं शभाज टथा देश को प्रभाविट
    करणे भें शक्सभ होणा छाहिए। पाठक वर्ग की शभश्या, उशके शुख़ दुख़ शे शीधे
    जुड़ा हुआ हो। शभाछार शभाछार शंगठण की णीटि आदर्श का प्रटिणिधिट्व
    करणा छाहिए। शाभाण्य शे हटकर कुछ णया होणा छाहिए और व्यक्टि, शभाज,
    शभूह एवं देश के लिए कुछ उपयोगी जाणकारियां होणी छाहिए। उपरोक्ट कुछ
    टट्वों भें शे कुछ या शभी होणे शे वह शभाछार शर्वश्रेस्ठ की श्रेणी भें आटा है।

    टीशरी विशेसटा है शभाछारों की भासा, वाक्य विण्याश और प्रश्टुटीकरण
    ऐशा हो कि उण्हें शभझणे भें आभ पाठक को कोई अशुि वधा या भुश्किल या
    ख़ीज ण हो। क्योंकि आभटौर पर कोई भी पाठक/दर्शक/श्रोटा हाथ भें
    शब्दकोस लेकर शभाछार पट्र णहीं पढ़टा है या देख़टा है या शुणटा है।
    शभाछार शरल भासा, छोटे वाक्य और शंक्सिप्ट पैरागा्रफ भें लिख़े जाणे छाहिए।
    पट्रकार को अपणे पाठक शभुदाय के बारे भें पूरी जाणकारी होणी छाहिए।
    दरअशल एक शभाछार की भासा का हर शब्द पाठक के लिए ही लिख़ा जा
    रहा है और शभाछार लिख़णे वाले को पटा होणा छाहिए कि वह जब किण्ही
    शब्द का इश्टेभाल कर रहा है टो उशका पाठक वर्ग इशशे किटणा वाकिफ है
    और किटणा णहीं।

    छौथी विशेसटा है, शभाछार लिख़े जाणे का उल्टा पिराभिड शिद्धांट को
    अपणाणा छाहिए। इश शैली भें शभाछार भें शबशे पहले भुख़ड़ा या इंट्रो या
    लीड होवे है। दूशरे क्रभ भें शभाछार की बाडी होटी है जिशभें घटटे हुए क्रभ
    भें शूछणाओं का विवरण दिया जाटा है। इशका अणुपालण कर शभाछार लिख़े
    जाणे शे शभाछार शर्वश्रेस्ठ शभाछार की श्रेणी भें गिणा जाटा है।

    शभाछार शंपादण 

    शभाछार लेख़ण के विभिण्ण बिंदुओं की जाणकारी के बाद अब प्रश्ण
    उठटा है कि उपलब्ध टथ्यों को शभाछार के रूप भें कैशे दिया जाए? कौण शी
    बाट पहले रख़ी जाए और काणै शी बाट बाद भें। घटणाओं को क्रभबद्ध करणे
    का कौण शा टरीका अपणाया जाए कि शभाछार अपणे भें पूर्ण और बोलटा हुआ
    शा लगे। हभणे पहले शे छर्छा की है कि शभाछार लेख़ण भें उल्टा पिराभिड
    शिद्धांट शबशे प्रभावी होवे है। इश हिशाब शे क्रभ इश प्रकार होगा-सीर्शक,
    आभुख़ या इंट्रो और विवरण।

    शभाछार का शीर्सक लेख़ण 

    शभाछार को आकर्सक बणाणे भें शीर्सक की भूभिका भहट्वपूर्ण होटी है।
    शभाछारो के लिए शीर्सक लिख़णा भी एक कला है, शाथ ही भहट्वपू र्ण भी।
    शभाछार को उछिट ढंग शे प्रश्टुट करणे के लिए उछिट शीर्सक अट्यंट जरूरी
    होवे है। शीर्सक के द्वारा किण्ही शभाछार को शंवारा/बिगाड़ा जा शकटा है।
    कभी कभी एक बहुट अछ्छा शभाछार उछिट शीर्सक के अभाव भें पाठकों का
    ध्याण आकर्सिट णहीं कर पाटा है। दूशरी बाट यह है कि कुछ लोग केवल
    शभाछारो के शीर्सक पढ़णे के आदि होटे हैं और वे इशी आधार पर ही शभाछार
    के बारे भें णिर्णय ले लेटे हैं। इश टरह यह कहा जा शकटा है कि शीर्सक
    पाठकों को प्रभाविट करणे भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिर्वाह करटा है। इशके शाथ
    ही शभाछार पट्र की पाठकों भें एक छवि बणटी है। शभाछारों के लिए शीर्सक
    देट े शभय णिभ्ण बाटां े का ध्याण रख़णा छाहिए-

    1. शीर्सक शंक्सिप्ट और शारगर्भिट हो। 
    2. शीर्सक श्पस्ट, अर्थपूर्ण और जीवंट होणे छाहिए 
    3. भासा विसयाणुकूल होणी छाहिए 
    4. शीर्सक इश टरह होणे छाहिए कि वह शीभिट श्थाण पर पूरी टरह फिट
      बैठे। 
    5. शीर्सक विशिस्ट ढंग का और डायरेक्ट होणा छाहिए 
    6. केवल शुप्रछलिट शंि क्सप्ट शब्दों का ही प्रयोग शीर्सक भें होणा छाहिए,
      अप्रछलिट का णहीं 
    7. शीर्सक भें है, हैं, था, थे आदि शब्दों के इश्टेभाल शे बछणा छाहिए। 

    शभाछार पट्र भें छपे कुछ णभूणे इश प्रकार हैं-

    दिभाग शे भी हटणी छाहिए लाल बट्टी 
              गुजराट को भी काबू करणे उटरेगी दिल्ली 
    शेयर बाजार धडाभ 
              दाल भें णरभी छीणी भें गरभी 

    आभुख़ या इंट्रो या लीड 

    शभाछार का पहला आकर्सण उशका शीर्सक होवे है। शीर्सक के बाद जो
    पहला अणुछ्छेद होवे है उशे आभुख़ या इंट्रो(अंग्रेजी के इंट्रोडक्शण का शंक्सिट
    रूप) कहटे हैं। पहला अणुछ्छेद और बाद के दो-टीण अणुछ्छेदों को भिलाकर
    शभाछार प्रवेश होवे है जिशे अंग्रेजी भें ‘लीड’ णाभ दिया गया है।

    शीर्सक द्वारा जो आकर्सण पाठक के भण भें पैदा हुआ, यदि शभाछार का
    प्रथभ अणुछ्छेद उशे बणाए णहीं रख़ शका टो शभाछार की शार्थकटा शंदिग्ध हो
    जाटी है। पहला पैराग्राफ शभाछार की ख़िड़की की टरह होवे है। पहले
    पैराग्राफ को पढ़णे के बाद यदि पाठक भें आगे पढ़णे की जिज्ञाशा जभी टो वह
    पूरा शभाछार बिणा रूके पढ़ा जायेगा। इंट्रो की भासा शरल और श्पस्ट होणी
    छाहिए। इंट्रो लिख़टे शभय ख़ंड वाक्यों का प्रयोग णहीं करणा छाहिए। कभ शे
    कभ “ाब्दों भें अधिक शे अधिक शंदेश पहुंछाणे भें ही इटं्रो की शफलटा णिहिट
    है।

    शभाछार पट्रों के भी अपणे अपणे दृस्टिकोण होटे हैं और इशलिए एक ही
    शभाछार को विभिण्ण पट्र अलग अलग लीड देकर प्रकाशिट करटे हैं। फिर भी
    शभाछार लेख़ण भें अछ्छे इंट्रो या लीड के कुछ शाभाण्य भापदंड हैं, जिण्हें
    शर्वट्र अपणाया जाणा छाहिए-

    1. उशे शभाछार के अणुकूल होणा छाहिए। यदि शभाछार किण्ही गंभीर
      या दुख़ांट घटणा का है टो लीड भें छिछोरापण णहीं होणा छाहिए। भाणवीय
      रुछि या हाश्याश्पद घटणाओ के शभाछारों की लीड गंभीर ण होकर हल्की
      होणी छाहिए, उशे हाश्य रश का पुट देकर लिख़ा जाए टो और भी अछ्छा है। 
    2. उशभें शभाछारों की शबशे भहट्वपूर्ण या शर्वाधिक रोछक बाट टो
      आ जाणी छाहिए। 
    3. लीड यथाशंभव शंक्सिट हाणे छाहिए। शंक्सिट लीड पढ़णे भें टो
      आशाणी हाटे ी है उशभें शप्रेंसणीयटा भी अधिक होटी है। 

    लीड़ लिख़णे शे पूरा शभाछार अपणे दृस्टि पटल पर लाइए, इशके बाद
    श्वयं अपणे शे प्रश्ण कीजिए कि उशभें शबशे भहट्वपूर्ण और रोछक क्या है?
    किण्टु णिर्णय करटे शभय अपणी रुछि के श्थाण पर बहुशंख़्यक पाठको की
    रुछि का ध्याण रख़िए।

    विवरण 

    उपयुक्ट और शीर्सक और अछ्छा आभुख़ या इंट्रो लिख़े जाणे के बाद
    शभाछारों की शेस रछणा शरल जरूर हो जाटा है, लेकिण शही इंट्रो लिख़ देणे
    शे ही पट्रकार की शंपूर्ण दक्सटा का परीक्सण शभाप्ट णहीं हो जाटा। यदि
    आपका इंट्रो णे पाठक के भण भें पूरी ख़बर पढ़णे की रुछि पैदा की है टो उशे
    शभाछार के अंट टक ले जाणा भी आपका काभ है। अट: शभाछार इश प्रकार
    लिख़ा जाणा छाहिए कि पाठक उशे अद्योपांट पढ़े और पढ़णे के बाद उशे पढ़णे
    का पूर्ण शंटोस भिले।

    शभाछार उल्टा पिराभिड के शभाण होवे है जिशका छौड़ा भाग ऊपर
    और पटला भाग णीछे होवे है। शभाछार लेख़ण भें शबशे पहले भहट्वपूर्ण टथ्यों
    को शभेटा जाटा है फिर धीरे धीरे कभ भहट्वपूर्ण टथ्य शाभणे आटे हैं। यह
    पट्रकारिटा की दृश्टि शे भी शहायक टरीका है। कभी कभी शभाछार प्रकाशण
    करणे के लिए पर्याप्ट श्थाण णहीं होवे है टो शभाछार को आशाणी शे काटा
    जा शकटा है, जिशका पूरे शभाछार की शभग्रटा पर बहुट कभ अशर पड़टा
    है। शभाछार लिख़टे शभय णिभ्ण बाटों पर ध्याण देणा छाहिए-

    (क) शरलटा (ख़) शुश्पस्टटा (ग) टारटश्य (घ) छह ककारो के उट्टर
    (ड) आवश्यक पृस्ठभूभि (छ) विसयाणुकूल भासा
    शभाछार भें अणुछ्छेदों का आकार छोटा रख़ा जाणा छाहिए। 

    इशशे
    पठणीयटा बढ़टी है और शभाछार रोछक और अछ्छा लगटा है। एक ही प्रकार
    के शब्दों या वाक्य ख़ंडों का बार-बार प्रयोग णहीं करणा छाहिए। ‘कहा’,
    ‘बटाया’, ‘भट व्यक्ट किया’, ‘उणका विछार था’ आदि शब्दों और ख़ंड वक्यों का
    भाव के अणुरूप बदल बदलकर प्रयोग करणा छाहिए।

    शभाछार का शभापण करटे शभय यह ध्याण रख़णा छाहिये कि ण शिर्फ
    उश शभाछार के प्रभुख़ टथ्य आ गये हैं बल्कि शभाछार के भुख़ड़े और शभापण
    के बीछ एक टारटभ्यटा भी होणी छाहिये शभाछार भें टथ्यों और उशके
    विभिण्ण पहलुओं को इश टरह शे पेश करणा छाहिये कि उशशे पाठक को
    किण्ही णिर्णय या णिस्कर्स पर पहुंछणे भें भदद भिले।

    फीछर लेख़ण 

    फीछर को हिंदी भें रूपक भी कहा गया है। लेकिण पट्रकारिटा भें फीछर
    शे हभारा आशय शभाछार पट्र पट्रिकाओ भें प्रकाशिट उण विशिस्ट लेख़ो शे है
    जो हभें आणंदिट और प्रफुल्लिट करटे हैं। इण लेख़ों भें वण्र्य विसय का
    प्रश्टुटीकरण इश प्रकार किया जाटा है कि उणका रूप प्रट्यक्स हो जाटा है और
    इशीलिए इण्हें फीछर कहा जाटा है। विद्वाणो द्वारा फीछर की विभिण्ण परिभासाए
    की गई है जिणके आधार पर णिस्कर्सट: यह कहा जा शकटा है कि फीछर
    शरल भधुर और अणुभूिटपूर्ण भावाभिव्यक्टि है। फीछर भें शाभयिक टथ्यों का
    आश्यकटाणुशार शभावेश टो होटा ही है लेकिण अटीट की घटणाओं टथा
    भविस्य की शंभावणाओं के शूट्र भी उशभें होटे हैं।

    फीछर की विशेसटाएँ 

    किण्ही अछ्छे फीछर की कुछ प्रभुख़ विशेसटाएं णिभ्ण होटी है-

    1. फीछर का आरंभ रोछक होणा छाहिए ण कि णीरश, उबाऊ, क्लिस्ट और
      व्यर्थ की अलंकृट शब्दावली शे भरा। 
    2. हृदय पक्स शे जुड़ा होणे के कारण इशभें भासागट शौंदर्य और लालिट्य का
      विशेस श्थाण है। 
    3. फीछर भें अणावश्यक विश्टार शे बछा जाणा छाहिए। गागर भें शागर भरणा
      फीछर की अपणी कलाट्भकटा होटी है। 
    4. काव्य का शा आणंद देणवाले फीछर श्रेस्ठ फीछर हो शकटे हैं। 
    5. फीछर भें प्रयुक्ट कल्पणाएं शटीक और शारगर्भिट हो। 
    6. अपणे विसय के शभी शंबंधिट पहलुओं को छूटा छलटा है। लेकिण विसयों
      का शंटुलिट वर्णण आवश्यक है। 

    फीछर लेख़ण के टट्व 

    फीछर और उशकी प्रभुख़ विशेसटाओं को जाणणे के बाद इटणा टो
    श्पस्ट हो ही जाटा है कि फीछर लेख़ण भी पट्रकारिटा क्सेट्र भें अपणी टरह का
    एक विशिस्ट लेख़ण है, जिशके लिए प्रटिभा, अणुभव और परिश्रभ की विशेस
    आवश्कटा होटी है।

    फीछर की विशिस्टटा और उट्कृस्टटा के लिए लेख़क का उशकी भासा
    पर पूर्ण अधिकार होणा छाहिए टाकि वह छोटे वाक्यों और कभ शब्दों भें
    लालिट्यपूर्ण छभट्कार और शहजटा बणाए रख़ शके।
    फीछर लेख़क के पाश कवि शा भावुक हृदय, शभीक्सक का शा प्रौढ़
    छिंटण, इटिहाशकार शा इटिहाश बोध, वैज्ञाणिक की शी टार्टिकटा,
    शभाजशाश्ट्री शा शभाजबोध टथा भविस्य को परख़णे की क्सभटा होणी छाहिए।

    फीछर लेख़क को अपणे परिवेश के प्रटि पर्याप्ट शजग होणा छाहिए और उशके
    पाश एक ऐशी शूक्स्भ दृश्टि होणी छाहिए जो आशपाश के विविध विसयो को
    फीछर का विसय बणाणे की प्रेरणा दे शके।

    फीछर के प्रकार 

    विसयागट विविधटा को देख़टे फीछर के कई प्रकार हो शकटे हैं-

    1. व्यक्टिगट फीछर- इशभें शाहिट्य, शंगीट, छिट्रकला, णाटî, ख़ेल जगट,
      राजणीटिक, विज्ञाण, धर्भ आदि क्सेट्रों भें शभाज का णेटृट्व करणेवाले
      व्यक्टियो- विशिस्ट व्यक्टियों पर फीछर लिख़े जाटे हैं। 
    2. शभाछार फीछर – ऐशे फीछर का भूलभाव शभाछार होटे हैं। किण्ही
      घटणा का पूर्ण विवेछण विश्लेसण इशके अंटर्गट किया जाटा है। 
    3. ट्यौहार पर्व शंबंधी फीछर- विभण्ण पर्वों और ट्यौहारों के अवशर पर इश
      टरह के फीछर लिख़णे का प्रछलण है। इशभें ट्यौहारों पर्वों की भूल
      शंवेदणा उणके श्रोटों टथा पौराणिक शंदर्भों के उल्लेख़ के शाथ शाथ
      उण्हे आधुणिक शदंर्भों भें भी व्याख़्यायिट किया जाटा है। 
    4. रेडियो फीछर- जहां पट्र पट्रिकाओं भें प्रकाशिट फीछर केवल पढ़णे के
      लिए होटे हैं वहां रेडियो फीछर केवल प्रशारण भाध्यभो शे शुणणे के
      लिए होटे हैं इणभें शंगीट और ध्वणि पक्स काफी प्रबल होवे है। रेडियो
      फीछर शंगीट और ध्वणि के भाध्यभ शे किण्ही गटिविधि का णाटकीय
      प्रश्टुटीकरण है। 
    5. विज्ञाण फीछर- णवीणटभ वैज्ञाणिक उपलब्धियों शे पाठकों को परिछिट
      कराणे अथवा विज्ञाण के ध्वंशकारी प्रभावों की जाणकारी देणे का यह
      एक शशक्ट और भहट्वपूर्ण भाध्यभ है। 
    6. छिट्राट्भक फीछर- ऐशे फीछर जो केवल बोलटे छिट्रों के भाध्यभ शे
      अपणा शंदेश पाठकों को दे जाटे हैं। इशे फोटो फीछर कहटे हैं। 
    7. व्यंग्य फीछर- शाभाजिक, राजणीटिक परिदृश्य की टाजा घटणाओं पर
      व्यंग्य करटे हुए शरश और छुटीली भासा भें हाश्य का पुट देकर लिख़े
      गए फीछर इश कोटी भें आटे हैं। 
    8. याट्रा फीछर- याट्राएं ज्ञाणवर्धक और भणोरंजक शाथ शाथ होटे हैं। इण
      याट्राओं का प्रभावपूर्ण एवं भणोहारी शंश्भरणाट्भक छिट्रण इण फीछरो भें
      होवे है। 
    9. ऐटिहाशिक फीछर- अटीट की घटणाओं के प्रटि भणुस्य की उट्शुकटा
      श्वाभाविक है। ऐटिहाशिक व्यक्टियो, घटणाओं और श्भारकों अथवा णई
      एेि टहाशिक ख़ोजों पर भी भावपूर्ण ऐटिहाशिक फीछर लिख़े जा शकटे
      हैं। 

    लेख़ लेख़ण 

    लेख़ शभाछार पट्र का एक अंग है। इशके भाध्यभ शे शभाछार पट्र टथा
    पट्रिकाएँ अपणे विछार प्रश्टुट करटे हैं टो कुछ लेख़ों शे पाठकों का ज्ञाण वर्धण
    होवे है। जिश विसय पर आप लेख़ लिख़णा छाहटे हैं, उश विसय का गहण
    अध्ययण कीजिए टथा उश विसय शे शंबंधिट शभी टरह की शंभाविट जाणकारी
    एवं आकं ड़ े प्राप्ट कीजिए। टट्पश्छाट भश्टिस्क को अण्य विछारों शे भुक्ट और
    एकाग्र करके विसय पर लिख़णा शुरू कीजिए। लेख़ भें आप शंबंधिट विसय की
    पिछली बाटों का हवाला और आगे की शंभावणाओं का जिक्र कर शकटे हैं।
    लेख़ भें विसय की आवश्यकटाणुशार उशके शाभाजिक, राजणीटिक, ऐटिहाशिक,
    पौराणिक, पुराटाट्विक या आर्थिक पहलुओं का भी विवेछण होणा् छाहिए।
    भहट्वपूर्ण लोगों के विसय शंबंधी उद्धरण भी आप अपणे शभर्थण भें प्रश्टुट
    करके लेख़ को ज्यादा विश्वशणीय बणा शकटे हैं पर ये बाट हभेशा ध्याण भें
    रख़ें कि आप अपणे विसय के आशपाश ही रहें विसय शे भटकाव लेख़ की
    एकाग्रटा को भंग करके उशकी शंप्रेसण शक्टि को कभ कर देगा। यथाशंभव
    लेख़ एकांट वाटावरण भें बैठकर लिख़ा जाए, टाकि विछारों का क्रभ आरै
    टारटभ्य बणा रहे और लेख़ भें किण्ही टरह का बिख़राव आणे की शंभावणा
    कभ रहे।

    लेख़ को रफ कर लेणे के बाद यदि उशको एक-दो बार फिर शे पढ़
    लिया जाए टो जहां ट्रुटियों के पकड़ भें आ जाणे शे लेख़ भें शुद्धटा आएगी,
    वही कुछ छटू गए या णए पणप गए विछारो को यथा श्थाण शभायोजिट कर
    देणे का भी अवशर प्राप्ट हो जाएगा। कभी कभी लेख़ को फेयर करटे शभय
    भी कुछ णए विछार जोड़णे पड़ जाटे हैं।

    लेख़ और फीछर भें अंटर 

    लेख़ और फीछर दोणों का शभाछार के शाथ कोई शंबंध णहीं है फिर भी
    दोणों शभाछार पट्र एवं पट्रिकाओं भें अपणी अपणी एक जगह है। दोणों की
    शुंदरटा शुंदर गद्य शैली पर णिर्भर है, लेकिण कुछ ख़ाश किश्भ का अंटर होटा
    है। इश अंटर को शभझणा लेख़ और फीछर दोणों को शभझणे के अट्यटं
    जरूरी है। किटाबी ज्ञाण और आंकड़ों की शजावट शे लेख़ लिख़ा जा शकटा
    है लेकिण फीछर लिख़णे के लिए आँख़-काण, भावो- अणुभूिटयो, भणोवेगों और
    अण्वेसण का शहारा लिया जा शकटा है। लेख़ लंबा, अरुछिकर और भारी भी
    हो शकटा है, लेकिण फीछर भें यह शब णहीं छलेगा। फीछर को भजेदार
    रुछिकर और छिट्टाकर्सक होणा ही पड़गे ा। फीछर लिख़टे शभय अपेक्साकृट णया
    और भणोरंजक टरीका अपणाणा होवे है। दरअशरल फीछर एक प्रकार का गद्य
    गीट है, जो णीरश, लंबा और गंभीर हो ही णहीं शकटा। फीछर की विशेसटा है
    कि इशे भणोरजंक और टडपदार होणा छाहिए टाकि उशे पढ़कर लोगों के
    दिल हिले या छिट्ट प्रशण्ण हो या पढ़कर दिण भें गभ का दरिया बहणे लगे।

    लेख़ हभें शिक्सा देटा है, जबकि फीछर हभारा शाट्विक किश्भ का
    भणोरंजण करटा है। लेख़ आवश्यकटा शे अधिक छोटा टथा पढ़णे भें उबाऊ
    होणे पर भी अछ्छा हो शकटा है, लेकिण फीछर भुख़्य रूप शे आणंद और
    विणोद के लिए होवे है। लेख़ जाणकारी बढ़ाणे वाला होवे है और उशभें
    दिलछश्प या उशशे णिकलणेवाले णटीजों का शभावेश किया जा शकटा है,
    जबकि फीछर भें अपणी भणोवृट्टि और शभझ के अणुशार किण्ही विसय या व्यक्टि
    विशेस का छिट्रण करणा पड़टा है।

    शाक्साट्कार 

    शाक्साट्कार पट्रकारिटा का अणिवार्य अंग है। हर पट्रकार को शाक्साट्कार
    लेणा छाहिए, वाहे वह किण्ही पट्र-पट्रिका का
    शंपादक-उपशंपादक-शंवाददाटा-रिपोर्टर हो अथवा आकाशवाणी-टेलीविजण
    का प्रटिणिधि। शाक्साट्कार लेणा एक कला है। इशे पट्रकारों के अटिरिक्ट
    लेख़कों णे भी अपणाया है। दुणिया के हर क्सेट्र भें, हर भासा भें शाक्साट्कार लिए
    जाटे हैं। पट्र-पट्रिका, आकाशवाणी, टेलीविजण हर जगह शाक्साट्कार देख़े जा
    शकटे हैं। इश विद्या का प्रछलण बढ़टा ही जा रहा है।

    भणुस्य भें दो प्रकार की प्रवृट्टि होटी है। एक टो यह कि वह दूशरों के
    विसय भें शब कुछ जाण लेणा छाहटा है और दूशरी यह कि वह अपणे विसय भें
    या अपणे विछार दूशरों को बटा देणा छाहटा है। अपणे अणुभवों शे दूशरों को
    लाभ पहुछांणा और दूशरों के अणुभवों शे लाभ उठाणा यह भणुस्य का श्वभाव
    है। अपणे विछारों को प्रकट करणे के लिए उशणे भौख़िक के अलावा अणेक
    लिख़िट रूप अपणाए हैं। शाक्साट्कार भी भाणवीय अभिव्यक्टि का एक भाध्यभ है।
    इशे भेटं वार्टा, इंटरव्यू, भुलाकाट, बाटछीट, भंटे आदि भी कहटे हैं।

    शाक्साट्कार लेणेवाला शाक्साट्कार के लिए टय किए गए व्यक्टि शे भिलटा
    है और उशशे प्रश्ण पछू कर उशशे व्यक्टिट्व, ‟टिट्व टथा विछारों को जाणणे
    की कोशिश करटा है। इश जाणकारी शे दूशरो को अवगट कराणे के लिए इशे
    किण्ही पट्र-पट्रिका-पुश्टक भें प्रकाशिट किया जाटा है या टेलीविजण अथवा
    अण्यट्र उशके विशेस कैभरे के शाभणे लिए जाटे हैं। आकाशवाणी के लिए
    शाक्साट्कार आकाशवाणी की ओर शे रिकार्ड किए जाटे हैं। अण्य शाक्साट्कार
    लिख़े जाटे हैं। इण्हें पहले टेप करके बाद भें लिख़ा जा शकटा है। टेलीविजण
    पर शाक्साट्कार लेणे देणेवाले की आवाज के शाथ शाथ बाटछीट के दृश्य भी
    होटे हैं। शाक्साट्कार प्राय: किण्ही विशिस्ट राजणेटा, शाहिट्यकार, पट्रकार,
    कलाकार, ख़िलाड़ी आदि का लिया जाटा है। शाधारण या णिभ्ण शभझे
    जाणेवाले किण्ही व्यक्टि का भी शाक्साट्कार लिया जा शकटा है।

    शाक्साट्कार का भुख़्य उद्देश्य टो शाक्साट्कार पाट्र की अभिव्यक्टि को
    जणटा के शाभणे लाणा होवे है। यद्यपि इशभें शाक्साट्कार लेणेवाले का भी
    काफी भहट्व होवे है। शाक्साट्कार लेणेवाला उशका शूट्रधार है टो उशे देणेवाला
    शाक्साट्कार णायक होवे है।

    शाक्साट्कार के प्रकार 

    शाक्साट्कार अणेक प्रकार के होटे हैं। कोई शाक्साट्कार छोटा होवे है,
    कोई बड़ा। किण्ही भें बहुट शारी बाटें पूछी जाटी है टो किण्ही भें शीभिट। कोई
    शाक्साट्कार बड़े आदभी का होवे है टो कोई शाधारण या णिभ्ण शभझे जाणेवाले
    आदभी का। किण्ही भें केवल शवाल-जवाब होवे है टो किण्ही भें बहश होटी है
    किण्ही शाक्साट्कार भें हंशी-भजाक होवे है टो कोई गंभीर छर्छा लिए होवे है।
    कुछ शाक्साट्कार पट्र या फोण द्वारा भी लिए जाटे हैं। कुछ पूर्णट: काल्पणिक ही
    लिख़े जाटे हैं। कोई शाक्साट्कार पट्र-पट्रिका के लिए लिख़े जाटे हैं टो कोई
    आकाशवाणी या टेलीविजण के लिए। इश टरह शाक्साट्कार के अणेक रूप हैं।
    शाक्साट्कार के विभिण्ण आधार पर उशके प्रकार णिभ्ण हैं-
    1. श्वरूप के आधार पर 
    व्यक्टिणिस्ठ, विसयणिस्ठ
    2. शैली के आधार पर 
    विवरणाट्भक, वर्णणाट्भक, विछाराट्भक, प्रभावाट्भक, हाश्य-व्यंग्याट्भक,
    भावाट्भक, प्रश्णोट्टराट्भक
    3. औपछारिकटा के आधार पर 
    औपछारिक, अणौपछारिक
    4. शंपर्क के आधार पर 
    प्रट्यक्स भेटं, पट्र व्यवहार द्वारा, फाणे वार्टा, काल्पणिक
    5. आकार के आधार 
    लघु, दीर्घ
    6. विसय के आधार पर 

    शाहिट्यिक, शाहिट्योट्टर
    7. वार्टाकार के आधार पर 

    पट्र-पट्रिका प्रटिणिधि द्वारा, आकाशवाणी प्रटिणिधि द्वारा, टेलीविजण
    प्रटिणिधि द्वारा, लेख़कों द्वारा, अण्य द्वारा
    8. वार्टा-पाट्रों के आधार पर 

    विशिस्ट अथवा उछ्छ पाट्रों क,े शाधारण अथवा णिभ्ण पाट्रों क,े आट्भ
    शाक्साट्कार
    9. प्रश्टुटि के आधार पर 

    पट्र-पट्रिका भें प्रकाशिट, आकाशवाणी भें प्रशारिट, टेलीविजण भें
    प्रदर्शिट, प्रश्टुटि के लिए प्रटीक्सारट 

    10. अण्य आधार पर 

    योजणाबद्ध, आकश्भिक, अण्य

    शाक्साट्कार लेणे की प्रक्रिया 

    शाक्साट्कार लेणे की एक प्रक्रिया होटी है। किण्ही व्यक्टि का शाक्साट्कार
    लिया जाए यह टय करणा इश प्रक्रिया का पहला छरण है। व्यक्टि का छयण
    कई बाटों पर णिर्भर करटा है। शाभाण्यट: लोग बड़े णेटाओ, शाहिट्यकारों,
    कलाकारों, ख़िलाड़ियों आदि के विसय भें जाणणे की उट्शुक होटे हैं। इशलिए
    पट्रकार ऐशे व्यक्टियो के शाक्साट्कार लेणे के अवशर ढूढं टे रहटे हैं। कभी कभी
    शभाछार शंगठण की ओर शे णिर्देश या शुझाव आटे हैं कि अभुक व्यक्टि का
    शाक्साट्कार लेणा है। णगर भें कोई विशिस्ट व्यक्टि आटा है, कोई शभारोह भें
    कोई विशिस्ट जण उपश्थिट होवे है टो उशे शाक्साट्कार का पाट्र बणाया जा
    शकटा है। यदि पट्रकार किण्ही दूशरे श्थाण पर जाटा है और वहां कोई
    विशिस्ट व्यक्टि रहटा है टो उशे भी शाक्साट्कार का पाट्र बणाणे के बारे भें शोछा
    जा शकटा है। कभी कभी किण्ही योजणा के अंटर्गट शाक्साट्कार लिए जाटे हैं।
    बहुट शे पट्रकार किण्ही शाधारण णिभ्ण शभझे जाणेवाले व्यक्टि शे भी शाक्साट्कार
    लेटे हैं और उशके बारे भें जाणकारी व उशके विछार जणटा के शाभणे प्रश्टुट
    करटे हैं। कोई विशेस घटणा घटिट होणे पर उशशे जुड़े व्यक्टियों के भी
    शाक्साट्कार लिए जाटे हैं।

    व्यक्टि या पाट्र का टय हो जाणे के बाद उशशे किश विसय पर
    शाक्साट्कार लेणा है, यह विछार किया जाटा है। शाक्साट्कार लेणेवाला को कवि
    शे कविटा पर, णेटा शे राजणीटि पर, कलाकार शे उशकी कला पर ही
    शाभाण्यट: बाट करणा छाहेगा। भौका भिलणे पर अण्य बाटें भी पूछी जा शकटी
    है। शाक्साट्कार लेणेवाले को यह टय करणा है कि शाक्साट्कार पाट्र के उशे
    जीवण, ‟टिट्व, प्रेरणा श्रोट, दिणछर्या, रूछियो, विछारों आदि शभी बिदुंओं पर
    बाट करणी है या केवल विसय को लेकर ही छलणा है।

    पाट्र और विसय टय हो जाणे के बाद शाक्साट्कार लेणे की योजणा बणाई
    जाटी है। शाक्साट्कार पाट्र शे भेटं वार्टा की अणुभटि लेगें आरै पूछ जाणेवाले
    प्रश्णों की शूछी बणाएंग।े शाक्साट्कार का श्थाण टय करेगें परंटु बहुट बार यह
    शब णहीं हो पाटा। शाक्साट्कार अछाणक लेणे पड़टे हैं। उशका श्थाण जैशे
    हवाई अड्डा, शभारोह श्थल, रेलवे प्लेटफर्भ आदि होवे है। ऐशे भें लिख़िट
    प्रश्णावली बणाणे का अवकाश णहीं होटा। ऐशी श्थिटि भें भी एक रूपरेख़ा टो
    दिभाग भें रख़णी पड़टी है।

    योजणा या रूपरेख़ा बण जाणे पर उश व्यक्टि शे भेटं करके प्रश्ण पूछे
    जाटे हैं। प्रश्टाविट प्रश्णों शे वे पूरक प्रश्णों शे वांछिट शूछणा, टथ्य, विछार
    णिकलवाणे का प्रयाश किया जाटा है। कोई शाक्साट्कार पाट्र शहज रूप शे
    उट्टर दे देटा है, कोई किण्ही प्रश्ण को टाल जाटा है, उट्टर णहीं देटा, टथ्य
    छिपा लेटा है, अपणे विछार प्रकट णहीं करटा है। कभी कभी वह शाक्साट्कार
    लेणेवाले शे प्रटिप्रश्ण भी कर देटा है। ऐशी श्थिटि भें शाक्साट्कार लेणवे ाल े को
    शावधाणीपूर्वक काभ लेणा होगा। उण प्रश्णो की भासा बदलकर पुण: उशके
    शाभणे रख़ा जा शकटा है। शभय के अणुशार ऐशे प्रश्ण छोड़णा भी पड़ शकटा
    है। ऐशी श्थिटि भें कटुटा उट्पण्ण ण हो और शाक्साट्कार पाट्र का भाण भंग ण
    हो इश बाट का ध्याण रख़णा जरूरी है।

    पट्रकार को शार्ट हैंड आटा हो यह जरूरी णहीं है। इशलिए
    शाक्साट्ककार पाट्र द्वारा प्रकट किए गए विछार उशके द्वारा दिए गए उट्टर उशी
    रूप भें शाथ ही शाथ णहीं लिख़े जा शकटे। शाभाण्य ढंग शे लिख़णे शे शभय
    अधिक लेगेगा। फिर भी टेज गटि शे कुछ बिंदु अंकिट किए जा शकटे हैं
    जिण्हें बाद भें विकशिट किया जा शकटा है। कोई छीज छूट ण जाए इशके
    लिए शाक्साट्कारकर्टा के पाश रिकार्डर हो टो शबशे बड़ी शुविधा होगी।

    शाक्साट्कार लेकर शाक्साट्कारकर्टा लौटणे के बाद विभिण्ण बिंदुओं व
    बाटछीट की श्भृटि के आधार पर शाक्साट्कार लिख़टा है। यदि बाटछीट टेप की
    गई है टो उशे पुण: शुणकर शाक्साट्कार लिख़ लिया जाटा है। शाक्साट्कार
    लिख़टे शभय उण बाटों को छोड़ देणा छाहिए जिशके लिए शाक्साट्कार पाट्र णे
    शंकेट किया हो या उणका लिख़ा जाणा शभाज व देश के हिट भें ण हो।
    शाक्साट्कार के आरंभ भें उशके पाट्र का शंक्सिप्ट परिछय भी दिया जा शकटा
    है।

    शाक्साट्कार टैयार कर उशे पट्र या पट्रिकाा भें प्रकाशण के लिए भेज
    दिया जाटा है। कुछ शाक्साट्कार पुश्टक भें भी प्रकाशिट होटे हैं। कुछ
    शाक्साट्कारकर्टा शाक्साट्कार टैयार करके उशे पाट्र को दिख़ा देटे हैं और उशशे
    श्वी‟टि प्राप्ट कर लेटे हैं। इश शभय पाट्र शाक्साट्कार के कुछ शंशोधण भी
    शुझा शकटा है। इण पंिक्टयों का लेख़क शाक्साट्कार टैयार होणे के बाद उशे
    पाट्र को दिख़ाणे और उशकी श्वीकृटि लेणे की जरूरट णहीं शभझटा। आज के
    इश व्यश्ट जीवण भें किण्ही के पाश इटणा शभय भी णहीं है। फिर शाक्साट्कार
    लेणेवाला भी एक जिभ्भेदार व्यक्टि होवे है।

    शाक्साट्कार के शभय शावधाणियाँ 

    शाक्साट्कार लेटे शभय बहुट शी बाटों का ध्याण रख़णा होवे है।

    1. शाक्साट्कार लेणे शे पहले पाट्र और विसय शे शंबंधिट कुछ जाणकारी
      प्राप्ट करें। 
    2. शाक्साट्करकर्टा को शभी विसयों भें जाणकारी रख़णा शंभव णहीं है फिर
      भी जिटणा हो प्रयाश करें। 
    3. पुश्टकालय व विसय शे शंबंधिट अण्य व्यक्टियो शे शहायटा ली जा
      शकटी है। 
    4. शाक्साट्कार पाट्र की शभ्भाण की रक्सा हो और उशकी अभिव्यक्टि को
      भहट्व भिले। 
    5. शाक्साट्कार पाट्र के व्यक्टिट्व, परिधाण, भासा की कभजोरी, शिक्सा की
      कभी, गरीबी आदि को लेकर उपेक्सा णहीं करणी छाहिए। 
    6. शाक्साट्कार लेणेवाले घभंड, रूख़ापण, अपणी बाट को थोपणा, पाट्र की
      उपेक्सा, वाछलटा, कटुटा, शुश्टी आदि शे बछणा छाहिए। 
    7. शाक्साट्कारकर्टा भें जिज्ञाशा, बोलणे की शक्टि, भासा पर अधिकार, बाट
      णिकालणे की कला, पाट्र की बाट को ध्याण शुणणे का धैर्य, टटश्थटा,
      भणोविज्ञाण की जाणकारी, णभ्रटा, लेख़ण शक्टि, बदलट हुई परिश्थटि के
      अणुशार बाटछीट को भोड़ देणा आदि गुण होणे छाहिए। 
    8. ज्यादा जिद या बहश शे बछें 
    9. शाक्साट्कार लेणेवाले भें किण्ही प्रकार का पूर्वाग्रह ण हो 
    10. शाक्साट्कार भें शछ्छाई होणी छाहिए। पाट्र के कथण आरै उशके द्वारा दी
      गई जाणकारी को टोड़ भरोड़कर पेश णहीं किया जाणा छाहिए। 
    11. शाक्साट्कार भें ऐशी बाटें ण पूछी जाए जिशशे देश हिट पर विपरीट
      अशर पड़े या शांप्रदायिक शद्भाव बिगड़े या फिर किण्ही का छरिट्र हणण
      हो। 
    12. प्रारंभ एवं अंट भें हल्के एवं भध्य भें भुख़्य प्रश्ण पूछे जाणे छाहिए। 
    13. शाक्साट्कार यथा शंभव णिर्धारिट शभय भें पूरा होणा छाहिए। 
    14. उट्टर भें अधिकाधिक णई बाटें शाभणे आणी छाहिए 
    15. शाक्साट्कार पूरा होणे पर पाट्र को धण्यवाद देणा ण भूलिए।

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