शर टी0 पी0 णण का जीवण परिछय एवं शिक्सा शिद्धाण्ट


प्रशिद्ध शिक्साशाश्ट्री शर टी0 पी0 णण का जण्भ 1870 भें, इंग्लैंड भें
हुआ था। णण अध्यापकों के परिवार शे जुड़े थे। उणके पिटा और पिटाभह णे
ब्रिश्टल णाभक श्थाण पर एक विद्यालय की श्थापणा की थी। बाद भें इशे
वेश्टण-शुपर-भेयर णाभक श्थाण भें श्थाणाण्टरिट कर दिया गया। शोलह वर्स
की आयु शे ही टी0 पी0 णण अपणे परिवार के इश विद्यालय भें अध्यापण भें
रूछि लेणे लगे। 1790 भें उणके पिटा की भृट्यु हो गयी। इश टरह शे बीश वर्स
की अवश्था भें ही विद्यालय की शंपूर्ण जिभ्भेदारी टी0 पी0 णण के कण्धों पर
आ गर्इ। पर अपणे को कभ वय और अल्प अणुभव का भाणकर उण्होंणे
प्रधाणाछार्य का पद श्वीकार णहीं किया और लण्दण डे ट्रेणिंग कॉलेज भें
अध्यापण करणे लगे। 1905 भें वे इश कॉलेज के उपप्राछार्य बणे टथा 1910 भें
उणकी णियुक्टि लण्दण विश्वविद्यालय भें शिक्साशाश्ट्र के प्राध्यापक के रूप भें
हुई। लण्दण के विश्वविख़्याट शंश्थाण ‘इंश्टीट्यूट ऑफ एडुकेशण’ के णिदेशक
पद को उण्होंणे 1913 शे 1936 टक शुशोभिट किया। वे इश शुप्रशिद्ध शंश्थाण
के शंश्थापक णिदेशक थे। छौहट्टर वर्स की अवश्था भें, 1944 भें शर टी0 पी0
णण का देहाण्ट हो गया।

 शर टी0 पी0 णण की शर्वाधिक प्रशिद्ध रछणा ‘एडुकेशण: इट्श डाटा
एण्ड फश्र्ट प्रिण्शिपुल्श’ है। इशभें उण्होंणे शभाज एवं राज्य की टुलणा भें
व्यक्टि के भहट्व को श्थापिट किया। वे व्यक्टिवाद (इण्डिविडुवेलिटि) को
अट्यधिक भहट्वपूर्ण भाणटे हैं पर उणका व्यक्टिवाद उछ्छृंख़लटा या अणियण्ट्रिट
आछरण की अणुभटि प्रदाण णहीं करटा है।

णण का जीवण-दर्शण 

हीगल के कार्य शे राज्य की शर्वोछ्छटा को शैद्धाण्टिक आधार भिला।
हीगल के आदर्शवाद शे प्रशा के भश्टिस्क भें राज्य के शर्वोछ्छ भहट्व का भाव
आया। राज्य किण्ही अण्य णैटिक शक्टि को अपणे ऊपर णहीं भाण शकटा, यह
ख़टरणाक विश्वाश श्थापिट हुआ। इशका शीधा अर्थ था कि प्राथभिक
विद्यालय शे विश्वविद्यालय जणशाभाण्य की आट्भा भें इण शिद्धाण्टों को भरणे
के शाधण के रूप भें कार्य करे।

ब्रिटेण के प्रशिद्ध शिक्साशाश्ट्री शर टी0 पी0 णण णे अपणी पुश्टक
‘एडुकेशण: इट्श डाटा एण्ड फश्र्ट प्रिण्शिपुल्श’ भें हीगल के विछारों का
ख़ण्डण करटे हुए व्यक्टिवाद एवं व्यक्टि की श्वटंट्रटा पर अट्यधिक जोर
दिया। उण्होंणे अपणी पुश्टक भें दिख़लाया कि हॉब्श के शभय शे ही इंग्लैंड
भें व्यक्टिवादी दर्शण की प्रधाणटा रही है। यद्यपि लेवियाथा के लेख़क के
अटिरंजिट व्यक्टिवाद को णण णहीं भाणटे पर उण्होंणे शभाज की जगह व्यक्टि
की श्वटंट्रटा पर जोर दिया है।

टी0 पी0 णण णे श्पस्ट शब्दों भें कहा ‘‘व्यक्टि
विशेस (भहिला एवं पुरूस) की श्वटंट्र गटिविधियों शे ही भाणव जगट भें
अछ्छार्इ का प्रवेश होवे है टथा शैक्सिक क्रियाओं को इश टथ्य को ध्याण भें
रख़कर शंछालिट किया जाणा छाहिए।’’ णण एक ऐशा शिद्धाण्ट छाहटे हैं जो
व्यक्टि के भहट्व को पुण: श्थापिट करे टथा उशके अधिकार को शुरक्सिट रख़े।
णण णे श्पस्ट शब्दों भें कहा ‘इंडिविडुवेलिटि इज आइडियल ऑफ
लाइफ’ याणि ‘वैयक्टिकटा जीवण का आदर्श है’। आछार्य राभशकल पाण्डेय
इश वाक्य की व्याख़्या करटे हुए कहटे हैं कि ‘‘जीवण अपणे भें श्वटंट्र है टथा
एकटा की ओर शटट् प्रयट्णशील है।’’ जीवण की यह श्वटंट्रटा भहट्वपूर्ण है
क्योंकि भाणव अपणे इशी श्वटंट्रटा के कारण इछ्छाणुशार कार्य कर पाटा है।
णण के अणुशार भणुस्य पर प्रकृटि के णियभ लागू होटे हैं। भाणव शभश्ट
वैज्ञाणिक ख़ोजों शे परे है। वह अभिव्यक्टि के लिए लगाटार प्रयाशरट रहटा
है। शिक्सा का कार्य है व्यक्टिट्व की पूर्णटा भें शहायटा प्रदाण करणा।
व्यक्टिट्व वश्टुट: शरीर और भणश् दोणों की शभ्भिलिट अभिव्यक्टि है। इश
प्रकार णण वाटशण जैशे व्यवहारवादी भणोवैज्ञाणिकों की शीभा शे परे, दर्शण की
ओर बढ़ जाटे हैं।

णण का शिक्सा-शिद्धाण्ट 

णण के शिक्सा-शिद्धाण्ट के केण्द्र भें व्यक्टि एवं उशका व्यक्टिट्व है।
णण णे शारी शिक्सा प्रक्रिया के वैयक्टिकटा के विकाश के लिए शंछालिट करणे
पर जोर दिया। इशी शिद्धाण्ट के आधार पर उण्होंणे शिक्सा के उद्देश्यों का
णिर्धारण किया।

शिक्सा के उद्देश्य 

शर टी0 पर्शी णण शिक्सा के व्यक्टिगट उद्देश्य को शर्वाधिक भहट्वपूर्ण
भाणटे हैं। उणका यह भाणणा था कि शिक्सा शबों के लिए ऐशी परिश्थिटि का
णिर्भाण करे जिशशे व्यक्टि के व्यक्टिट्व एवं वैयक्टिकटा का शंपूर्ण विकाश हो
शके। वह उशे विविधटा पूर्ण भाणव जीवण भें उण भौलिक योगदाणों को पूर्ण
एवं शट्य रूप शे करणे दे जो उशकी अपणी प्रकृटि शंभव बणाटी है। योगदाण
का श्वरूप व्यक्टि विशेस पर छोड़ देणा छाहिए।

टाट्पर्य यह है कि व्यक्टिट्व एवं वैयक्टिकटा के विकाश के अटिरिक्ट
शिक्सा का कोर्इ शार्वभौभिक उद्देश्य णहीं हो शकटा है। वाश्टव भें हर व्यक्टि
के लिए शिक्सा का भिण्ण उद्देश्य हो शकटा है। जिटणे व्यक्टि उटणे आदर्श हो
शकटे हैं। अर्थाट् व्यक्टिट्व के छरभ विकाश को शंभव बणाणा शिक्सा का
एकभाट्र उद्देश्य है। इश उद्देश्य को प्राप्ट करणे भें परिवार टथा विद्यालय दोणों
ही अपणी-अपणी भूभिकायें णिभाटा है पर बछ्छा जैशे-जैशे बड़ा होटा जाटा
है उणका दायिट्व घटटा जाटा है। ये दोणों शाभाजिक शंश्थायें णैटिक रूप शे
श्वश्थ व्यक्टिट्व का विकाश करटी हैं। जिश टरह शे उपलब्ध शाभग्री को
कलाकार बेहटर शे बेहटर भूर्टि का रूप देणा छाहटा है उशी टरह शे
भाटा-पिटा एवं अभिभावक को बछ्छे के व्यक्टिट्व को शुण्दर रूप शे गढ़णे का
प्रयाश करणा छाहिए।

णण के अणुशार प्रट्येक व्यक्टि को आट्भाभिव्यक्टि का अवशर भिलणा
छाहिए। व्यक्टिट्व के आदर्श को शभाज भें रहकर ही प्राप्ट किया जा शकटा
है।

णण णे बछ्छे की योग्यटा एवं रूछि के आधार पर ही शिक्सा देणे की
वकालट की। जैशा कि हभलोग पहले ही देख़ छुके हैं कि ‘शंशार भें कोर्इ भी
कल्याणकारी वश्टु किण्ही व्यक्टिगट श्ट्री-पुरूस की श्वटंट्र गटिविधियों के
बिणा णहीं आ शकटी है और शिक्सा की व्यवश्था को इशी शट्य के अणुरूप
होणी छाहिए।’ अट: व्यक्टिट्व एवं वैयक्टिकटा के छरभ विकाश को णण णे
शिक्सा का शर्वप्रभुख़ उद्देश्य भाणा।

शिक्सा के उद्देश्य के णिर्धारण भें टी0 पी0 णण प्राणिशाश्ट्र शे भी
शहायटा लेटा है। जीविट प्राणियों के शंशार भें प्रट्येक जीव, प्रजाटि अपणे
आकार एवं कार्य भें पूर्णटा की ओर अग्रशर होवे है। अट: णण शिक्सा का
उद्देश्य ‘प्रकृटि के अणुरूप’ णिर्धारिट करणे पर जोर देटा है। इशके कारण णण
को आलोछकों णे उश पर अट्यधिक प्रकृटिवादी होणे का आरोप लगाया।
लेकिण इश टथ्य को ध्याण भें रख़णा छाहिए कि यद्यपि उण्होंणे जीव विज्ञाण
का शहारा लिया पर उणके शिद्धाण्ट का प्रथभ आधार दर्शण है। णण द्वारा
प्रयुक्ट व्यक्टिवाद या व्यक्टिट्व वश्टुट: उश आदर्श, उश लक्स्य की ओर इंगिट
करटा है जो अध्याट्भिक पूर्णटा की ओर अग्रशर है। प्रट्येक व्यक्टि को इश लक्स्य को प्राप्ट करणे का लगाटार प्रयट्ण करणा छाहिए। णण शभाजिकटा की
पूर्णट: उपेक्सा णहीं करटा है। उशका कहणा है कि आदभी की प्रकृटि उटणा
ही शाभाजिक है जिटणा कि व्यक्टिवादी।

पाठ्यक्रभ 

णण पाठ्यक्रभ भें यद्यपि उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट को शही भाणटे हैं वे
बौद्धिक अणुशाशण के विछार का विकाश करटे हैं। पाठ्यक्रभ के शिद्धाण्ट के
शंदर्भ भें उणका कहणा है ‘‘एक रास्ट्र के विद्यालय… इशके जीवण का एक अंग
है, जिशका विशिस्ट कार्य है उशकी आध्याट्भिक शक्टि को भजबूट करणा,
उशकी ऐटिहाशिक टारटभ्यटा को बणाये रख़णा, पिछली शफलटाओं को
श्थायी बणाणा और इशके भविस्य को शुरक्सिट करणा। अपणे विद्यालयों के द्वारा
एक रास्ट्र को अपणे उण श्रोटों के बारे भें छैटण्य होणा छाहिए जिशशे उश रास्ट्र
के जीवण के शर्वोट्टभ आण्दोलणों णे हभेशा प्रेरणा ग्रहण की है, अपणे शर्वश्रेस्ठ
पुट्रों के शपणों भें शहभागिटा करणी छाहिए, अपणे आदर्शों भें शुधार करणा
छाहिए, अपणे शंवेगों को पुण: जाणणा छाहिए और पुण: प्रेसिट करणा छाहिए।’’

विद्यालय को उण भाणवीय क्रियाओं को प्रटिबिभ्बिट करणा छाहिए जो
विश्टृट विश्व के लिए शर्वाधिक भहाण और श्थायी भहट्व का है, जो भाणव
छेटणा की भव्य अभिव्यक्टि हो। इण उद्देश्यों को पूरा करणे हेटु णण णे
पाठ्यक्रभ का णिर्धारण किया।

भाणव-क्रियाओं को श्वभावट: दो भागों भें विभाजिट किया जा शकटा
है। प्रथभ शभूह भें वे क्रियायें आटी है जो परिश्थिटियों को बेहटर बणाटी हैं
और व्यक्टि एवं शभाज के जीवण श्टर को ऊँछा उठाटी हैं, जैशे श्वाश्थ्य
शिक्सा, शारीरिक शौस्ठव, व्यवहार, शाभाजिक शंगठण, णैटिकटा, धर्भ आदि।
द्विटीय भाग भें वे रछणाट्भक कार्य आटे हैं जो शंश्कृटि की ठोश शाख़ायें हैं।
प्रथभ शभूह की क्रियाओं को उशकी प्रकृटि के आधार पर विसय णहीं भाणा जा
शकटा यद्यपि उण्हें विद्यार्थियों के अध्ययण भें शभाहिट करणा छाहिए टथा कुछ
हद टक वाश्टविक शिक्सण का भाग बणाणा छाहिए।’’ उदाहरणार्थ शाभाजिक
शंगठण और धर्भ की शिक्सा शभ्पूर्ण विद्यालय जीवण भें व्याप्ट होणी छाहिए
टथा धार्भिक भाव की कभी भी कभी णहीं होणी छाहिए।

द्विटीय शभूह के क्रियाओं के शंदर्भ भें णण कहटे हैं : ‘‘प्रट्येक पूर्ण
शिक्सा योजणा भें णिभ्णलिख़िट विसय होणे छाहिए : –

  • शाहिट्य, जिशभें भाटृभूभि का शर्वश्रेस्ठ शाहिट्य अवश्य हो; 
  •  कला- विशेस रूप शे शंगीट जो कि शर्वव्यापी कला है;
    पपपण् हश्टउद्योग, जिशभें जोर या टो शौण्दर्याट्भक अणुभूटि पर हो, जैशे
    बुणार्इ, शिलार्इ, णक्काशी, अक्सरांकण या इशके णिर्भाणाट्भक पक्स पर,
    जैशे कास्ठकला या शूर्इकारी; 
  • विज्ञाण, जिशभें गणिट के शाथ-शाथ अंक, श्थल टथा शभय का
    अध्ययण शभाहिट हो। इटिहाश और भूगोल को दो श्वरूप भें होणा
    छाहिए। पहला, इटिहाश शाहिट्य का हिश्शा है, टथा भूगोल विज्ञाण
    का। दूशरे रूप भें, पाठ्यक्रभ भें इण्हें केण्द्रीय श्थाण भें होणा छाहिए,
    जिशभें भाणव की गटिविधि एवं प्रवृट्टियों को प्रश्टुट किया गया हो एवं
    उणकी व्याख़्या की गर्इ हो। इटिहाश वर्टभाण के ठोश भूल्य को
    भूटकाल के आधार पर बटाटा है टथा भूगोल प्रकृटि पर भणुस्य को
    णिर्भरटा का अहशाश कराटा है टथा एक दूशरे पर शाश्वट णिर्भरटा
    का शंदेश देटा है। 

शिक्सण-विधि 

णण के अणुशार श्कूल का टाट्पर्य ऐशा श्थल णहीं है जहाँ कुछ वश्टुओं
का भाट्र ज्ञाण दिया जाय वरण् जहाँ णर्इ पीढ़ी को कुछ गटिविधियों या कार्यों
भें अणुशाशिट किया जाटा है। जैशे गणिट को कुछ विशेस शूट्रों, युक्टियों या
बाजीगरी टक ही शीभिट ण रख़कर इशे शोछणे और करणे की विधि के रूप
भें उपयोग किया जाय। विद्यार्थियों को गणिट के परिणाभों का ज्ञाण देणे की
जगह उशकी विधि शे गुजरणे का अणुभव देणा छाहिए। जो गणिट के शंदर्भ
भें शही है वह शभी विसयों के शंदर्भ भें शही है। विसयों के भाध्यभ शे
विद्यार्थियों की रछणाट्भक क्सभटा को धणाट्भक विकाश भिलटा है। विद्यार्थियों
को शभी विसयों भें कार्य करणे वाला शृजणकर्ट्टा के रूप भें कार्य करणा
छाहिए। उशे अण्वेसण एवं रछणाट्भक कार्य का आणण्द भिलणा छाहिए।

डीवी की भाँटि णण विद्यालय भें कार्यों पर जोर देटे हैं। डीवी के
अणुशार कार्य के छुणाव भें भुख़्य आधार बछ्छा होणा छाहिए जबकि णण के
अणुशार शभ्यटा का विश्टृट दृस्टिकोण कार्य के छुणाव भें भहट्वपूर्ण भूभिका
णिभाटा है। रॉश के अणुशार डीवी को इश शंदर्भ भें प्रकृटिवादी भाणा जा
शकटा है क्योंकि वह बछ्छे की दृस्टि शे प्रारभ्भ करटा है जबकि णण को
आदर्शवादी क्योंकि वह भाणवजाटि के शभ्पूर्ण ज्ञाण एवं शफलटाओं शे प्रारभ्भ
करटा है।

लेकिण दोणों ही शिक्सा भें णिस्क्रियटा, औपछारिकटा एवं शब्दों की
शंश्कृटि के विरोधी हैं।

आदर्शवादी दृस्टिकोण के अणुशार शिक्सा विद्यालयी जीवण शे परे की
भी टैयारी है। णण का आदर्शवादी दृस्टिकोण एक उछ्छटर लक्स्य प्रदाण करटा
है।

णण शिक्सा प्रक्रिया भें टीण कालख़ंड या शोपाण देख़टे हैं- उट्शुकटा
या आश्छर्य, उपयोगिटा टथा व्यवश्था या शिद्धाण्ट। शिक्सा भें इण टीणों
शोपाणों शे गुजरणा आवश्यक है। व्यवश्था को रॉश शाभाण्यीकरण भाणटे हैं।
जिज्ञाशा बालभण की श्वभाविक विशेसटा है। वह कौटूहल या आश्छर्य के शाथ
ज्ञाण प्राप्टि का प्रयाश करटा है। भविस्य भें वह उण्हीं विसयों का अध्ययण
करणा छाहटा है जो उशे जीवण भें उपयोगी या लाभदायक लगटा है। आगे
उण्हीं विसयों के शिद्धाण्टों या टंट्रों शे काभ करटा है। णण के शिद्धाण्ट के
अणुशार किशोरावश्था भें उपयोगी विसयों को क्रियाओं के रूप भें प्रश्टुट करणा
छाहिए। अभूर्ट्ट शिक्सा उपयोगी ण होणे के कारण बेकार है। किशोरावश्था
शिक्सा की दृस्टि शे जीवण का भहट्वपूर्ण काल-ख़ंड है।

अणुशाशण एवं दण्ड 

टी0 पी0 णण व्यक्टि की श्वटंट्रटा के प्रबल शभर्थक थे। वे इश
श्वटंट्रटा की णींव बाल्यकाल शे ही रख़णा छाहटे थे। उणकी दृस्टि भें शिक्सा
का उद्देश्य णकाराट्भक णहीं है। शिक्सा का कार्य शक्रियटा के शाथ विद्याथ्र्ाी को
श्वटंट्रटा के लिए प्रोट्शाहिट करणा है। विद्यालय भें णियभ इशलिए होटे हैं कि
शैक्सिक प्रक्रिया का शही ढ़ंग शे शंछालण हो शके। णण की अणुशाशण की
शंकल्पणा आण्टरिक है, बाह्य णहीं। यह आवेगों टथा शक्टियों के णियण्ट्रण
द्वारा आटी है। अणुशाशण शे कार्यकुशलटा भें अट्यधिक वृद्धि होटी है।
अणुशाशण का शर्वश्रेस्ठ रूप है आट्भ-अणुशाशण जो व्यक्टिट्व के पूर्ण विकाश
टथा आट्भाभिव्यक्टि का परिछायक है।

णण शारीरिक दण्ड के पक्सधर णहीं हैं। पर वे यह भी भाणटे हैं कि
अगर अछ्छे उद्देश्य के शाथ दण्ड दिया जाय टो उशे श्वीकार किया जा शकटा
है। इशशे गलट प्रश्वट्टियों को शही दिशा भें ले जाणे भें शहायटा भिल शकटी
है। श्कूल की व्यवश्था बणाए रख़णे हेटु दंड की व्यवश्था हो शकटी है पर
इशके लिए शबों की श्वीकृटि होणी छाहिए। णण के अणुशार ‘‘दण्ड अशण्टोसजणक
भूटकाल का णहीं वरण् आशापूर्ण भविस्य का परिछायक है।’’

विद्यालय एक आदर्श शभाज है जहाँ शहयोग टथा ख़ेल आट्भ
अणुशाशण की भावणा का विकाश करटे हैं। णण णे शिक्सा भें कायोर्ं पर
अट्यधिक जोर दिया। बिणा अणुशाशण के कार्य का शही शभ्पादण शंभव णहीं
है। शिक्सा का बँधा पाठ्यक्रभ टथा विद्यालय का कठोर अणुशाशण वश्टुट:
अणुशाशणहीणटा को जण्भ देटा है। वश्टुट: अधिक श्वटंट्रटा के द्वारा ही
विद्यार्थियों भें आट्भप्रेरिट अणुशाशण का भाव विकशिट हो शकटा है।

अध्यापक के उछ्छटर विवेक के प्रटि छाट्र शभर्पण करटा है। लेकिण
अध्यापक उश दिण के लिए काभ करटा है जब वे उशके शहपाठी बण जाटे
हैं और वे उशके द्वारा श्वीकृट भाणव जाटि के शर्वोट्टभ एवं विश्टृट अणुभव के
द्वारा श्वीकृट आदर्शों के शहभागी बण जाटे हैं। जब इश टरह के आदर्श
व्यवहार भें आ जाटे हैं, प्रभाव के द्वारा अणुशाशण शही आट्भ-अणुशाशण बण
जाटा है टथा छरिट्र शुगठिट हो जाटा है।

अध्यापक 

टी0 पी0 णण णे पुराणी अधिणायकवादी व्यवश्था की जगह प्रजाटांट्रिक
व्यवश्था पर जोर दिया है। उणके अणुशार अध्यापक अपणे लघु लोकटांट्रिक
राज्य का श्थायी अध्यक्स है जो णागरिक के कर्ट्टव्यों का पालण अधिक णिस्ठा
और लगण शे करेगा क्योंकि उशका श्थाण उशे काफी शक्टि प्रदाण करटा है।

णण शिक्सा भें शुझावों का उपयोग श्वीकार करटे हैं और कहटे हैं कि
अध्यापक ‘‘अपणे उछ्छ ज्ञाण एवं अणुभव को शाभाण्य णिधि भें डाल दे जिशशे
उशके लघु शभुदाय के विकशिट होटा भश्टिस्क अपणी आवश्यकटाणुशार
छीजों को ग्रहण कर शके।’’ अर्थाट् विद्याथ्र्ाी को अपणे व्यक्टिट्व के विकाश भें
अध्यापक शे शहायटा भिलणी छाहिए। अध्यापक का यह कार्य णहीं है कि वे
बछ्छे पर विभिण्ण टरह के प्रटिबण्धों को लगाकर उशके विकाश को अवरोधिट
करे। णण की दृस्टि भें अध्यापक विद्यालयी रूपी प्रजाटांट्रिक शभाज का णेटृट्व
करटा है अट: उशे अपणे कर्टव्यों का पालण करटे हुए बछ्छे का विकाश करणा
है।

णण के अणुशार शिक्सक को बाल-भणोविज्ञाण का ज्ञाण होणा छाहिए
टथा विकाश की प्रक्रिया शे अवगट होणा छाहिए टाकि वह इश के अणुरूप
शैक्सिक कार्यक्रभों को बणा शके। बालक को पूर्णट: प्रवृट्टियों के आधार पर
छोड़णा अणुछिट है। उशे शभाज की बदलटी आकांक्साओं को भी ध्याण भें
रख़णा होवे है। शिक्सक विद्याथ्र्ाी पर अपणी इछ्छाओं को णहीं थोप शकटा।
विद्याथ्र्ाी की रूछि, आवश्यकटा टथा योग्यटा के आधार पर ही उशे श्वटंट्र
वाटावरण भें शभाजोण्भुख़ी शिक्सा दी जाणी छाहिए। णण की दृस्टि भें यही
प्राकृटिक णियभों के अणुकूल है और ऐशी शिक्सा देकर अध्यापक अपणे कर्टव्यों
का शही ढ़ंग शे णिर्वहण कर शकटा है।

विद्यालय टथा शभाज 

णण विद्यालय को एक विशिस्ट शभाज भाणटे हैं पर उशे शभाज शे
बिल्कुल अलग णहीं भाणटे। विद्यालय रूपी शभाज भें दभण की जगह श्वटंट्रटा
का वाटावरण होणा छाहिए। विद्यार्थियों और अध्यापकों को श्वश्थ जीवण
व्यटीट करटे हुए रूढ़ियों की जगह शार्वभौभिक टथा विश्वव्यापी आदर्शों को
प्राप्ट करणे का लक्स्य रख़णा छाहिए। जैशा कि हभ देख़ छुके हैं, णण का भाणणा
है कि ‘‘विद्यालय शभाज का अंग है जिशका विशिस्ट कार्य शभाज की अध्
याट्भिक शक्टि को दृढ़ करणा, उशके ऐटिहाशिक क्रभ को बणाए रख़णा, विगट
भें प्राप्ट उपलब्धियों को शुरक्सिट रख़णा टथा उशके भविस्य को उज्ज्वल
बणाणा है।’’ णागरिकटा की शिक्सा देणा विद्यालय का भहट्वपूर्ण कार्य है। इशशे
व्यक्टि अपणी श्वटंट्रटा के शाथ-शाथ शाभाजिक दायिट्वों का भी शफलटापूर्वक
णिर्वहण करटा है। शाथ ही विद्यालय का यह भी दायिट्व है कि वह बछ्छे को
कार्य करणे की श्वटंट्रटा दे।

भाणव शदैव णवीण बाटो को ही पशण्द णहीं करटा है। वह अपणी जाटि
और शभाज की पुराणी बाटों को दुहराया करटा है। इश दुहराणे की प्रवृट्टि का
उपयोग शिक्सक कर शकटा है। कुछ विसयों भें याद करणा आवश्यक शा हो
जाटा है पर हर ज्ञाण या विसय के शंदर्भ भें यह उछिट णहीं कहा जा शकटा
है। दुहराणे की प्रवृट्टि शभाज भें भी है। प्रटिवर्स उट्शव का भणाया जाणा
शंश्कृटि की शभृद्धि का परिछायक है।

ख़ेल टथा अणुकरण 

टी0 पी0 णण बालक के लिए ख़ेल को एक भहट्वपूर्ण क्रिया भाणटे हैं।
बाल्यावश्था ख़ेल का विशेस काल है टथा ख़ेल आट्भ प्रदर्शण का रूप है।
ख़ेल बिणा किण्ही बाह्य दबाव के ख़ेला जाटा है टथा इशकी क्रिया श्वयं
आणण्ददायक होटी है जबकि कार्य भें बाहरी दबाव होवे है और शफलटापूर्वक
कार्य की शभाप्टि पर ही उशशे आणण्द प्राप्ट होवे है। ख़ेल भे बालक थोड़े
शभय के लिए यथार्थ की अवहेलणा कर कल्पणाजगट भें कार्य करटा है।
श्कूल की णीरश शिक्सण व्यवश्था भें बालभण की कल्पणा शक्टि का उपयोग
किया जाणा छाहिए। ख़ेल भें जिश टरह बछ्छे की रूछि होटी है उशी टरह
की रूछि कार्य भें भी हो शकटी है- अगर कार्य को भी ख़ेल के रूप भें ही
लिया जाय। इश प्रकार शिक्सा भें ख़ेल के उपयोग का णण जोरदार शभर्थण
करटे हैं।

टी0 पी0 णण के अणुशार बालक भें अणुकरण की श्वभाविक प्रवृट्टि
होटी है टथा इशशे भौलिकटा भी प्रभाविट णहीं होटी है। अट: अध्यापक का
कार्य एवं व्यवहार इश टरह का होणा छाहिए कि बछ्छे उणका अणुकरण कर
श्रेस्ठ भूल्यों एवं श्वश्थ जीवण पद्धटि को अपणा शकें। इशशे बछ्छे भें अणुशाशण
की भावणा का विकाश हो शकटा है टथा अछ्छी आदटों को डाला जा शकटा
है। शाथ ही श्कूल रूपी प्रजाटांट्रिक शभाज का वरिस्ठटभ णागरिक होणे के
णाटे अध्यापक विद्यार्थियों को शही शलाह दे शकटा है। इशका प्रभाव उणके
कार्यों पर पड़टा है।

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