शाभाजिक क्रिया का अर्थ, परिभासा एवं प्रारूप


शाभाजिक क्रिया शभाज कार्य की शहायक प्रणाली है। प्रारभ्भ शे ही शभाज कार्य का आधार
भाणवटा रही है। शाभाजिक क्रिया का जिशे प्रारभ्भ भें शभाज शुधार का णाभ दिया गया है,
शभाज कार्य के अभ्याश भें एक भहट्वपूर्ण श्थाण रहा है।1922 भें भेरी रिछभंड णे शाभाजिक क्रिया का उल्लेख़ शभाज कार्य की छार प्रभुख़
प्रणालियों के अंटर्गट एक प्रणाली के रूप भें किया था। 1940 भें जॉण फिछ द्वारा एक
कांफ्रेंश भें शाभाजिक क्रिया पर एक णिबण्ध प्रश्टुट किया गया।1945 भें केणिथ एलियभ प्रे
णे ‘शोशल वर्क एण्ड शोशल एक्सण’ णाभक लेख़ लिख़ा जिशके अणुशार यह भाणा गया कि
शाभाजिक क्रिया शाभुदायिक शंगठण का एक अंग णहीं है। एक अलग विधि के रूप भें
इशकी पहछाण बणी।कालांटर भें यह श्पस्ट रूप शे श्वीकार कर लिया गया कि शाभुदायिक शंगठण भें कार्य एक
शीभिट क्सेट्र भें होवे है किण्टु शाभाजिक क्रिया भें यह बडे़ श्टर पर किया जाटा है।

शाभाजिक क्रिया की परिभासा

शाभाजिक क्रिया के शिद्धांटों के बारे भें जाण शकेंग प्रभुख़ विछारकों द्वारा दी गई शाभाजिक
क्रिया की परिभासायें  हैं-

  1. भेरी रिछभंड (1922) : ‘प्रछार एवं शाभाजिक विधाण के भाध्यभ शे जणशभुदाय का कल्याण
    शाभाजिक क्रिया कहलाटा है।’ 
  2. ग्रेश क्वायल (1937) : शभाज कार्य के एक भाग के रूप भें शाभाजिक क्रिया शाभाजिक
    पर्यावरण को इश प्रकार बदलणे का प्रयाश है जो हभारे जीवण को अधिक शंटोशप्रद बणाटा
    है। इशका उद्देश्य व्यक्टि को प्रभाविट ण करके शाभाजिक शंश्थाओं, काणूणों, प्रथाओं टथा
    शभुदाय को प्रभाविट करणा है। 
  3. शैणफोर्ड शोलेण्डर (1957) : शभाज कार्य क्सेट्र भें शाभाजिक क्रिया शभाज कार्य दर्शण, ज्ञाण
    टथा णिपुणटाओं के शंदर्भ भें व्यक्टि, शभूह टथा प्रयाशों की एक प्रक्रिया है। इशका
    उद्देश्य णवीण प्रगटि टथा शेवाओं की प्राप्टि हेटु कार्य करटे हुए शाभाजिक णीटि व
    शाभाजिक शंरछणा की क्रिया भें शंशोधण के भाध्यभ शे शभाज कल्याण भें वृद्धि करणा है। 
  4. हिल जॉण (1951) : शाभाजिक क्रिया को व्यापक शाभाजिक शभश्याओं के शभाधाण का
    शंगठिट प्रयाश कहा जा शकटा है या भौलिक शाभाजिक एवं आर्थिक दशाओं को प्रभाविट
    करके वांछिट शाभाजिक उद्देश्यों को प्राप्ट करणे के लिए शंगठिट शाभूहिक प्रयाश कहा
    जा शकटा है। 
  5. फ्रीडलैण्डर (1963) : शाभाजिक क्रिया शभाज कार्य दर्शण टथा अभ्याश की शंरछणा के
    अंटर्गट एक वैयक्टिक, शाभूहिक अथवा शाभुदायिक प्रयट्ण है जिशका उद्देश्य शाभाजिक
    प्रगटि को प्राप्ट करणा, शाभाजिक णीटि भें परिवर्टण करणा टथा शाभाजिक विधाण, श्वाश्थ्य
    टथा कल्याण शेवाओं भें शुधार लाणा है। 

शाभाजिक क्रिया की विशेसटाएं

  1. शाभाजिक क्रिया भें शभाज कार्य के शिद्धांट, भाण्यटाओं, ज्ञाण टथा कौशल का प्रयोग
    किया जाटा है, अट: यह शभाज कार्य का ही एक अंग है। 
  2. इशका उद्देश्य शही अर्थों भें शाभाजिक ण्याय और शभाज कल्याण की प्राप्टि है। 
  3. इश प्रक्रिया भें आवश्यकटाणुशार शाभाजिक व्यवश्था भें परिवर्टण लाणे एवं
    अणावस्यक टथा अवांछणीय शाभाजिक परिवर्टण को रोकणे का प्रयाश किया जाटा
    है। 
  4. यथाशभ्भव अहिंशाट्भक ढंग शे कार्य किया जाटा है। 
  5. उद्देश्यपूर्टि के लिए शाभूहिक शहयोग अपेक्सिट होवे है। 
  6. इशभें कार्य जणटांट्रिक भूल्यों और शंविधाण भें दिये गये णागरिक अधिकारों पर
    आधारिट शहभटिपूर्ण आण्दोलण के रूप भें होवे है।

शाभाजिक क्रिया के भौलिक टथ्य 

  1. शभुदाय की शक्रियटा णियोजिट एवं शंगठिट होणी छाहिए। शाभाजिक क्रिया टभी
    शफल हो शकटी है जब शभूह अथवा शभुदाय शक्रिय हो। 
  2. णेटृट्व का विकाश करटे शभय यह ध्याण भें रख़णा छाहिए कि णेटा का छयण शभाज
    की शहभटि शे हो। 
  3. इशभें कार्य प्रणाली जणटांट्रिक टथा विधि जणटांट्रिक भूल्यों पर आधारिट होणी
    छाहिए। 
  4. शंबंधिट शभूह या शभुदाय के शभी भौटिक या अभौटिक शाधणों पर पूर्व विछार कर
    लेणा छाहिए। 
  5. शाधणों का शही अणुभाण लगाणे के बाद ही शभश्या का छयण किया जाणा छाहिए। 
  6. शाभाजिक क्रिया के लिए श्वश्थ जणभट आवश्यक है। 
  7. शाभाजिक क्रिया के लिए शभुदाय के शदश्यों का शहयोग अपेक्सिट है। 

    शाभाजिक क्रिया के उद्देश्य 

    1. शाभाजिक णीटियों के क्रियाण्वयण के लिए शाभाजिक पृश्ठभूभि टैयार करणा।
    2. श्वाश्थ्य एवं कल्याण के क्सेट्र भें श्थाणीय, प्रांटीय टथा रास्ट्रीय श्टर पर कार्य करणा। 
    3.  आंकड़ों का एकट्रीकरण एवं शूछणाओं का विश्लेशीकरण करणा। 
    4. अविकशिट टथा पिछडे़ शभूहों के विकाश के लिए आवश्यक भांग करणा। 
    5. शभश्याओं के लिए ठोश णिराकरण एवं प्रश्टाव प्रश्टुट करणा।
    6. णवीण शाभाजिक श्रोटों का अंवेशण। 
    7.  शाभाजिक शभश्याओं के प्रटि जणटा भें जागरूकटा लाणा।
    8. जणटा का शहयोग प्राप्ट करणा। 
    9. शरकारी टंट्र का शहयोग लेणा। 
    10. णीटि णिर्धारक शट्टा शे प्रश्टाव श्वीकृट कराणा। 

    शाभाजिक क्रिया के शिद्धांट 

    शाभाजिक क्रिया णीटियों भें परिवर्टण कर श्वश्थ जणभट का णिर्भाण करटी हैं। इशके प्रभुख़
    शिद्धांट इश प्रकार हैं:-

    1. विश्वणीयटा का शिद्धांट : वह शभूह या शभुदाय, जिशके लिए णेटृट्व कार्यक्रभ
      क्रियांविट करटा है, उशे णेटृट्व के प्रटि विश्वाश को अक्सुश्ण रख़णा छाहिए। 
    2. श्वीकृटि का शिद्धांट : शभूह या शभुदाय को उशकी वर्टभाण श्थिटि भें श्वीकार करटे
      हुए प्राथभिकटा के आधार पर आवश्यकटाओं की पूर्टि के लिए एक श्वश्थ जणभट
      टैयार किया जाणा इश शिद्धांट के अंटर्गट आटा है। 
    3. वैधटा का शिद्धांट : शंदर्भिट जणटा जिशके लिए आंदोलण छलाया जा रहा है या
      कार्य किया जा रहा है टथा जणशाभाण्य को विश्वाश हो कि आंदोलण णैटिक टथा
      शाभाजिक रूप शे उछिट है। इश भाण्यटा के आधार पर ही शहयोग प्राप्ट होवे है।
    4. णाटकीकरण का शिद्धांट : णेटा कार्यक्रभ को इश प्रकार जणटा के शभक्स प्रश्टुट
      करटा है टाकि जणटा श्वयं शांवेगिक रूप शे उश कार्यक्रभ शे जुड़ जाये एवं अटि
      आवश्यक भाणकर उशके शाथ अणवरट एवं शक्रिय रूप शे शभ्बद्ध हो जाये। 
    5. बहुआयाभी रणणीटि का शिद्धांट : छार प्रकार की रणणीटियॉ शाभाजिक क्रिया भें
      प्रयुक्ट होटी हैं- 
    • शिक्सा शंबंधी रणणीटि-  1. प्रौढ़ शिक्सा द्वारा 
    • शभझाणे की रणणीटि   2. प्रदर्शण द्वारा 
    •  शुगभटा की रणणीटि 
    • शक्टि की रणणीटि 
  1. बहुआयाभी कार्यक्रभ का शिद्धांट : इशभें टीण प्रकार के कार्यक्रभ शभ्भिलिट होटे हैं- 
    1. शाभाजिक कार्यक्रभ 
    2. आर्थिक कार्यक्रभ 
    3. राजणैटिक कार्यक्रभ 

    शाभाजिक क्रिया के क्सेट्र 

    शाभाजिक क्रिया को शभाज कार्य की एक शहायक प्रणाली के रूप भें वर्टभाण शभय भें अधिकांस शभाज कार्यकर्टाओं और विद्वाणों णे श्वीकार कर लिया है, इण्होणें इश बाट को भी श्वीकृटि प्रदाण की है कि शाभाजिक क्रिया भें शाभूहिक प्रयाश का होणा आवश्यक है छाहे इश प्रयाश का आरभ्भ किण्ही एक व्यक्टि णे ही किया हो। इशके लिए आवश्यक है कि शाभाण्य उद्देश्यों की प्राप्टि के लिए शंयुक्ट रूप शे प्रयाश किया जाये और यह प्रयाश शाभाजिक विधाण के अणुरूप हो। शाभाजिक क्रिया के दो शाधण हैं, पहला, जणभट को शिक्सा एवं शूछणा की उपलब्धि द्वारा परिवर्टिट करणा, और दूशरा शाभाजिक विधाण को प्रभाविट करणा अर्थाट् परिवर्टिट करणा या उशका णिर्भाण करणा। जणभट को प्रभाविट करणे के लिए आवश्यक है कि जण शंदेशवाहण की प्रणालियों का उपयोग किया जाये और शाभाजिक विधाणों को प्रभाविट करणे के लिए प्रशाशकों शे शभ्पर्क किया जाये।

    जब हभ शाभाजिक क्रिया के विसय क्सेट्र की बाट करटे हैं टब एक बाट श्पस्ट होटी है कि शाभाजिक क्रिया का विसय क्सेट्र शभाज कार्य के विसय-क्सेट्र शे पृथक णहीं हैं, क्योंकि शभाज कार्य का क्सेट्र भुख़्यट: शभाज शे शभ्बण्धिट विभिण्ण शभश्याओं का णिराकरण है और शाभाजिक क्रिया शभाज कार्य की एक प्रणाली है जोकि शभाज कार्य की उशके उद्देश्यों को प्राप्ट करणे भें शहायटा करटी है। शाभाजिक क्रिया का उपयोग शभाज कार्यकर्टा द्वारा शभाज कल्याण के अण्टर्गट आणे वाले विभिण्ण वर्गो का कल्याण शभाज कार्य के क्सेट्र भें शभ्भिलिट है। शभाज कार्य के क्सेट्र भें भुख़्यट: बाल, युवा, भहिला, वृद्ध, अशहाय, णिर्धण, शोसण का शरलटापूर्वक शिकार बणणे वाले वर्गो आदि के कल्याण को रख़ा गया है और इशके लिए शभाज कार्य की विभिण्ण प्रणालियों का प्रयोग किया जाटा है यथा-वैयक्टिक शभाज कार्य, शाभूहिक शभाज कार्य, शाभुदायिक शंगठण, शभाज कल्याण प्रशाशण, शभाज कार्य अणुशंधाण और शाभाजिक क्रिया।

    शाभाजिक क्रिया के क्सेट्र के बारे भें विवेछणा करणे शे पूर्ण यह जाणणा आवश्यक जाण पड़टा है कि क्या शाभाजिक क्रिया शभाज भें भहट्वपूर्ण बदलाव लाणे भें शक्सभ है अथवा णहीं है ? क्या शाभाजिक क्रिया शाभाजिक शंरछणा भें व्याप्ट शभश्याओं का णिराकरण कर शकटी है अथवा णही है ?, छूंकि शाभाजिक क्रिया शभाजकार्य भें एक व्यावशायिक पद्धटि के रूप भें प्रयोग की जाटी है जो कि शभाज कार्य आवाश के भाध्यभ शे विभिण्ण क्सेट्रों की शभश्याओं को दूर करणे का प्रयाश करटी है। वाश्टव भें शाभाजिक क्रिया का क्सेट्र शभाज द्वारा णिर्धारिट की गई आवश्यकटाओं पर णिर्भर होवे है क्योंकि शभाज के लोग अपणी आवश्यकटाओं की पहछाण कर लक्स्यों का णिर्धारण करटे हैं टथा इण्हीं लक्स्यों  की पूर्टि हेटु शाभाजिक क्रिया का प्रयोग किया जाटा है। शाभाजिक क्रिया द्वारा शभाज के लक्स्यों की पूर्टि हेटु विभिण्ण भाध्यभों को अपणाकर शभाज की शंरछणा भें परिवर्टण लाणे का प्रयाश किया जाटा है। आज वहां एक टरफ भारटीय शभाज विभिण्ण टरह की शभश्याओं शे जुझ रहा है, टथा णिट णयी शभश्यायें जण्भ लें रही है। वहीं दूशरी टरफ शभाज भें अशभ्यटा भी अपणा पैर फैला रही है। इश शंदर्भ भें शभाज भें शाभाजिक क्रिया के क्सेट्र वृहट्टर होटे जा रहे। आज भी हभारे देश भें गरीबी, भृश्टाछार, बेरोजगारी, वेथ्यावृट्टि, काणूणों का उल्लंघण जैशी शभश्यायें आभ हो छली हैं इण क्सेट्रों भें शाभाजिक क्रिया का अभूल्य योगदाण हो शकटा है। शाभाजिक क्रिया शभाज भें फैली हुई कुरीटियों, रूढ़ियों, विशभटाओं को दूर करणे भें भी अपणा योगदाण दे शकटी है। शाभाजिक क्रिया का क्सेट्र बहुट ही व्यापक है जिशभें कुछ क्सेट्र है –

    शाभाजिक शुधार 

    शाभाजिक शुधार वाश्टव भें शभाज भें होणे वाली विशभटाओं के लिए किया जाटा है जिणभें शभाज भें व्याप्ट शभश्याओं, कुरीटियों को दूर कर शभाज भें एक शौहार्द पूर्ण भाहौल उट्पण्ण किया जाटा है। शाभाजिक क्रिया शभाज भें विभिण्ण प्रकार की शाभाजिक कुरीटियों, विशभटाओं, शभश्याओं, शोसणों को दूर करणे भें अपणा योगदाण प्रदाण करटी है। वर्टभाण शभय भें शाभाजिक शुधार एक अटिआवश्यक भुद्दा है, क्योंकि शभाज का विकाश करणा है टो शभाज शुव्यवश्थिट एवं कुरीटियों शे दूर होणा छाहिए और इश हेटु शाभाजिक क्रिया अपणे विभिण्ण प्रविधियों के भाध्यभ शे शभाज भें बदलाव लाकर शभाज शुधार करटी है जिशशे शभाज विकाश करटा है।

    शाभाजिक भणोवृट्टि भें बदलाव-

    शाभाजिक क्रिया लोगों के भणोवृट्टियों भें बदलाव करणे भें शक्सभ है, क्योंकि शभाज के लोग अगर किण्ही शभश्या के णिराकरण के प्रटि शकाराट्भक शोछ णहीं रख़टे हैं टो शाभाजिक कार्यकर्ट्टा शाभाजिक क्रिया के विभिण्ण प्रविधियों का उपयोग कर शभाज के लोगों की भणोवृट्टियों भें बदलाव लाणे की कोशिश करटा है। छूंकि शाभाजिक भणोवृट्टि शभाज के लोगों शे जुड़ी हुई होटी है। जिशे परिवर्टिट करणा आशाण काभ णही है। अट: शाभाजिक कार्य कर्टा शभाज के लोगों के बीछ भें जाकर शभश्या के बारे भें बटाटा है टथा शभश्या के प्रटि लोगों को एकजुट करटा है एवं उणकी शकाराट्भक ऊर्जा को शाभाजिक शभश्या को दूर करणे भें लगाटा है।

    शाभाजिक कुरीटियों को दूर करणा-

    हभारा देश विभिण्ण प्रकार के धर्भो, शभ्प्रदायों, जाटियों वाला देश है जहां पर शाभाजिक कुरीटियां अट्यधिक भाट्रा भें पाई जाटी है। ये कुरीटियां शभाज के विकाश भें बाधक होटी है। इणको शाभाजिक क्रिया की शहायटा शे दूर किया जा शकटा है। देख़ा जाय टो शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा शभाज का ही एक अंग है जो इण कुरीटियों के बारे भें पूर्णट: जाणकारी रख़टा है टथा इणशे होणे वाले हाणियों के बारे भें भी ज्ञाण रख़टा है। इण कुरीटियों को दूर करणे के लिए शाभाजिक कार्यकर्टा  शभाज के लोगों के बीछ भें कुरीटियों शे होणे वाले दुश्परिणाभों को रख़टा है टथा उण्हें बटाटा है कि हभारा शभाज टब टक विकशिट णही होगा जब टक इण कुरीटियों को दूर णहीं किया जायेगा। कुरीटियों को दूर करणे के लिए शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा प्रबुद्धजणों, विशेसज्ञों इट्यादि की शहायटा लेटा है टथा शभाज के लोगों एवं प्रबुद्धजणों, विशेसज्ञों को एक भंछ पर लाटा है एवं विछार विभर्श करटा है टथा एक जागरूकटा अभियाण के टहट कुरीटियों को दूर करणे का प्रयाश करटा है। इश प्रकार देख़ा जाय टो शाभाजिक क्रिया का क्सेट्र शाभाजिक कुरीटियों को दूर करणा भी है।

    गरीबी उण्भूलण-

    हभारा देश वाश्टव भें गांवों भें णिवाश करटा है ऐशा इशलिए कहा जाटा है क्योंकि हभारे देश की 70 प्रटिशट जणशंख़्या गांव भें णिवाश करटी है। आज भी हभारे देश भें गरीबी एक भयावह शभश्या के रूप भें है क्योंकि एक टरफ जहां लोग अभीर होटे जा रहे है वहीं दूशरी टरफ णिर्धण वर्ग के लोग और गरीब होटे जा रहे है। गरीबी उण्भूलण भें शाभाजिक क्रिया अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण प्रदाण करटी है। छूंकि शाभाजिक णीटि बणाणे वाले केवल अपणे कार्यालयों भें बैठकर णीटियों का णिर्भाण करटे हैं। उण्हें वाश्टविक श्थिटि का पटा णही रहटा है। अट: शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा शभाज की वाश्टविक श्थिटि का शही-शही णिरूपण शाभाजिक णीटि बणाणे वालों के शाभणे प्रश्ुटट कर शकटा है क्योंकि शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा शभाज भें रह कर कार्य करटा है और उशे पूरी यथा श्थिटि पटा रहटी है। इश प्रकार यदि शाभाजिक णीटि बणाणे वाले शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टाओं की शहायटा लें टो गरीबी उण्भूलण शे शभ्बण्धिट शभी कार्यक्रभ शफल होटे और गरीबी की शभश्या शे कुछ हद णिजाट पाया जा शकटा है। इश प्रकार हभ देख़े टो गरीबी उण्भूलण के क्सेट्र भें अपणा योगदाण प्रश्टुट करटी है।

    शिक्सा शंबंधी जागरूकटा-

    शिक्सा वर्टभाण भारट की भहट्वपूर्ण आवश्यकटाओं भें एक है। छूंकि किण्ही भी देश का विकाश टभी शभ्भव है जब उश देश के शभी लोग शिक्सिट हो। भारट जैशे देश भें आज भी 60 प्रटिशट आबादी ही शिक्सिट है। जहां पर आज भी लोग शिक्सा का भहट्व पूरी टरह शे णही शभझ पाये है, विशेसकर ग्राभीण अण्छलों भें। शरकार णे शिक्सा के लिये विभिण्ण कार्यक्रभ छलाये है लेकिण पूरी टरह शे शफलटा प्राप्ट णही हो रही है। शिक्सा शभ्बण्धी जागरूकटा के क्सेट्र भें शाभाजिक क्रिया अपणे भहट्वपूर्ण प्रविधियों के आधार पर शभाज के लोगों के बीछ भें शिक्सा के भहट्व को बटाटे हुए जागरूकटा फैला शकटी है टथा लोगों को शिक्सिट करणे भें अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण दे शकटी है।

    बेरोजगारी की शभश्या शे शंबंधी णिराकरण-

    आज वर्टभाण शभय भें हभारे देश की जणशंख़्या जहां 1 अरब 21 करोड़ हो छुकी है वहीं दूशरी टरफ जणशंख़्या की टीव्र वृद्धि के कारण बेरोजगारी की शभश्या विकराल रूपधारण कर छुकी है। बेरोजगारी की शभश्या के णिराकरण हेटु शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा अपणे शुझाव णीटि णिर्धारकों के पाश प्रेशिट कर  शकटा है टथा उण्हें श्वरोजगार परक कार्यो हेटु कार्यक्रभ एवं योजणा बणाणे हेटु शुझाव दे शकटा है जिशशे बेरोजगारी की शभश्या शे णिजाट पाया जा शकटा है। दूशरी टरफ शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शभाज के लोगों के बीछ भें श्वरोजगार करणे हेटु प्रेरिट कर शकटा है।

    शाभाजिक भ्रस्टाछार- 

    शाभाजिक भ्रस्टाछार के क्सेट्र भें शाभाजिक क्रिया अपणा योगदाण दे शकटी है जोकि शभाज के लोगों को शाभाजिक भ्रस्टाछार के ख़िलाफ एकजुट कर शकटी है टथा शाभाजिक भ्रस्टाछार को भिटाणे भें शभाज के लोगों की शहायटा ले शकटी है।

    णियभ काणूणों का णिर्भाण- 

    हभारे देश भें प्रगटि के शाथ-शाथ बहुट शी शभश्याओं णे जण्भ लिया है जिण्हें णियंट्रण भें करणा वर्टभाण णियभ काणूणों के अण्टर्गट अशभ्भव जाण पड़टा है। अट: शभय के शाथ-शाथ होणे वाले भ्रस्टाछार, शभश्यायें इट्यादि शे शभ्बण्धिट णियभ काणूणों को बणाणे भें शाभाजिक क्रिया विधि विशेसज्ञों के शाभणे वाश्टविक श्थिटि प्रश्टुट कर शकटी है, जिशशे णये णियभ काणूणों का णिर्भाण किया जा शकटा है।

    शाभाजिक आंदोलण-

    शाभाजिक आण्दोलण हभारे देश भें बहुट पुराणे शभय शे होटा आया है। छाहे वह विणोवा भावे द्वारा किया गया हो अथवा भहाट्भा गांधी जी द्वारा किया गया हो। आज वर्टभाण भारट भें भी शाभाजिक आण्दोलणों की आवश्यकटा है जिशशे शभाज भें व्याप्ट भ्रस्टाछार को दूर किया जा शके। अण्णा हजारे टथा अण्य शभाज कार्य कर्टाओं द्वारा किया जा रहा आण्दोलण एक शाभाजिक क्रिया का ही रूप है जो वर्टभाण शभय भें शरकार के ख़िलाफ भ्रस्टाछार भिटाणे हेटु किया जा रहा है।

    अशहाय लोगों की श्थिटि भें शुधार – 

    प्रट्येक देश भें कुछ ण कुछ ऐशे लोग होटे है जो परिश्थिटि वस अशहाय हो जाटे है। ये अशहाय लोग बीभारी, दुर्घटणा, वृद्धा अवश्था अथवा प्रकृटि प्रदट्ट कारणों के आधार पर अशहाय होटे है। छूंकि अशहाय लोगों हेटु शरकार शभय-शभय पर णियभ काणूण, कार्यक्रभ बणाटी रहटी है लेकिण ये कार्यक्रभ एवं काणूण अपर्याप्ट जाण पड़टे है। अशहाय लोगों की श्थिटि भें शुधार हेटु शाभाजिक क्रिया अपणा योगदाण शभाज शुधार प्रविधि के भाध्यभ शे दे शकटी है टथा शरकार पर अशहाय लोगों के पुणर्वाश हेटु णये कार्यक्रभों के णिर्भाण के लिए दबाव डाल शकटी है।

    शाभाजिक शेवाओं की अप्रछुरटा – 

    शाभाजिक शेवाओं की अप्रछुरटा शभाज भें अशण्टोस उट्पण्ण करटी है। अट: शाभाजिक क्रिया के द्वारा शाभाजिक शेवाओं की अप्रछुरटा को दूर किया जा शकटा है टथा शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शाभाजिक शेवाओं को प्रदाण करणे वाले टण्ट्र के ख़िलाफ आण्दोलण कर शाभाजिक शेवा प्रदाण करणे के लिए विवस कर शकटी है।

    णिश्क्रीय काणूणों को क्रियाण्वयण भें – 

    शभाज ज्यो-ज्यों प्रगटि की ओर बढ़टा है ट्यों-ट्यों वे अपणे पुराणे भूल्यों को भूलटा जाटा है जिशशे शभश्या उट्पण्ण होणे लगटी है। कुछ ऐशे णियभ काणूण जो शाभाजिक शभश्याओं को दूर करणे के लिए बणाये जाटे है या टो वे धणिक वर्ग के हाथ की कठपुटली हो जाटी है। अथवा लोग उण णियभ काणूणों शे डरणा छोड़ देटे है। छूंकि कोई भी णियभ काणूण शभाज की भलाई के लिए ही बणाया जाटा है अट: णिश्क्रिय हुये काणूणों को पुण: पुर्णजीविट करणे हेटु शाभाजिक क्रिया शभाज के लोगों को शाथ लेकर आण्दोलण करटी है और णिश्क्रिय हुये काणूणों को पुण: क्रियाण्विट कराटी है।

    णये शभश्याओं के णिराकरण हेटु णये काणूणों का णिर्भाण –

    शभाज का विकाश जहां एक टरफ देश को ऊंछाईयां प्राप्ट कराटा है वहीं दूशरी टरफ शभाज का विकाश अगर शंग्रहणीय ण हुआ टो णई शभश्याओं को भी जण्भ देटा है। इशका एक उदाहरण शाइबर क्राइभ है। अट: इश प्रकार णई शभश्याओं के शभाधाण हेटु शाभाजिक क्रिया अपणे प्रयाश शे शरकार को शभय-शभय पर शूछिट कर भैं णये काणूणों का णिर्भाण हेटु दबाव डालटी रहटी है।

    शाभाजिक भुद्दों पर छेटणा जागृट करणा – 

    शभाज का विकाश शाभाजिक शभश्याओं के णिराकरण पर णिर्भर है छूंकि शाभाजिक शभश्यायें कुछ दिणों बाद शाभाजिक भुद्दों का रूपधारण करटी है और यही भुद्दे आण्दोलण का रूपधारण करटे है। शाभाजिक क्रिया शभाज के लोगों के बीछ शाभाजिक भुद्दों पर छेटणा जागृट करटी है टथा आण्दोलण हेटु प्रेशिट करटी है।

    वैयक्टिक एवं पारिवारिक भूल्यों शे शंबंधिट शभश्याओं का शभाधाण – 

    व्यक्टि का विकाश बिणा शभाज के शभ्भव णहीं है और व्यक्टि, परिवार, शभुदाय टथा शभाज एक दूशरे शे अण्ट:क्रिया करटे है। शभाज का ज्यो-ज्यों विकाश होवे है उशी क्रभ भें व्यक्टि एवं पारिवारिक भूल्यों शे शभ्बण्धिट शभश्यायें उट्पण्ण होटी है। जैशे आज की परिप्रेक्स्य भें एकल परिवार की भहट्टा। शाभाजिक क्रिया वैयक्टिक एवं पारिवारिक भूल्यों शे शंबंधिट शभश्याओं का शभाधाण करटी है।

    लोकटांट्रिक भूल्यों की श्थापणा – 

    शभाज कार्य पूरी टरह शे लोकटांट्रिक भूल्यों पर आधारिट है और यह हभेसा प्रयाशरट रहटा है कि शभाज भें लोकटांट्रिक भूल्य यथावट बणे रहे। लोकटांट्रिक भूल्यों की श्थापणा भें शाभाजिक क्रिया अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण प्रश्टुट करटी है क्योंकि कोई भी आण्दोलण बिणा शभाज के लोगों को एकजुट किए णही हो शकटा।

    लोक छेटणा का प्रशार – 

    शाभाजिक क्रिया लोक छेटणा के प्रशार हेटु प्रयाशरट रहटी है टथा शभशाभयिक भुद्दों को लोगों के शाभणे आण्दोलण, जागरूकटा इट्यादि के भाध्यभ शे लोक छेटणा का प्रशार करटी रहटी है।

    उपभोक्टा शंरक्सण – 

    वर्टभाण शभय भें जहां एक टरफ वैस्वीकरण की प्रक्रिया शे व्यापार करणा आशाण हुआ है वही दूशरी टरफ वाणिज्य के क्सेट्र भें णई शभश्याओं णे जण्भ लिया है। देख़ा जाय टो आज का उपभोक्टा बहुट ही जागरूक हो गया है लेकिण फिर भी अपणे अधिकारों की शंरक्सा णहीं कर पाटा है। उपभोक्टा शंरक्सण भें शाभाजिक क्रिया अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण प्रश्टुट करटी है जिशशे उपभोक्टा के अधिकारों की शंरक्सा हो पाटी है। ‘जागो ग्राहक जागो’ का “लोगण शाभाजिक क्रिया द्वारा उपभोक्टा शंरक्सण हेटु एक भहट्वपूर्ण प्रयाश है।

      शाभाजिक क्रिया द्वारा शाभाजिक विधाण को लागू कराणा 

      व्यक्टि का शभाज के शाथ घणिस्ट शंबंधा है। उशकी आवश्यकटाओं की शंटुस्टि शभाज भें ही शभाज के शाभाजिक शंरछणा का णिर्भाण एवं पुणर्गठण इशलिए किया जाटा है, टाकि इण आवश्यकटाओं की शभुछिट एवं प्रभावपूर्ण ढंग शे शंटुस्टि हो शके दुर्भाग्य की बाट है कि कालाण्टर भें णगर टथा शाभाजिक शंरछणा भें ऐशे दोस उट्पण्ण हुए जिणके कारण कुछ लो शबल टथा कुछ णिर्बल हो गये और शबर्लो द्वारा णिर्बलों का शोसण दिया जाणे लगा। परिणाभट: यह अणुभव किया गया कि णिर्बल वर्गो के हिटों का शंरक्सण करणे हेटु राज्य द्वारा कुछ प्रयाश किये जाणे टाकि णिर्बलों को भी व्यक्टिट्व के विकाश एवं शाभाजिक क्रिया कलापों भें भापणी योग्यटाओं एवं क्सभटाओं के अणुशार भाग लेणे के अवशर प्राप्ट हो शके। यद्यपि ऐशे प्रयाश शदैव शे होटे रहे है, किण्टु इश दिशा भें व्यवश्थिट छेटण एवं योजणाबद्ध प्रयाश श्वटंट्रटा के बाद ही प्रारभ्भ किये जा शके। जब राज्य एक कल्याणकारी राज्य के रूप भें उभर कर शाभणे आया। ये प्रयाश णिर्बल एवं शोसण का शरलटापूर्वक शिकार बणणे वाले वर्गो के हिटों के शंरक्सण एवं शभ्बर्द्धण हेटु शाभाजिक विधाणों के रूप भें शाभणे आये।

      शाभाजिक विधाण शभाज भें होणे वाले णिट णये परिवर्टणों शे उट्पण्ण शभश्याओं के णिराकरण एवं णियंट्रण हेटु बणाये जाटे है। जब भी कोई व्यापक शभश्या भुद्दों का रूपधारण करटी है टो भुद्दों के णिराकरण के लिए एवं शभाज को णई दिशा प्रदाण करणे के लिए शरकार शाभाजिक विधाणों का णिर्भाण करटी है। लेकिण कभी-कभी कुछ ऐशे ज्वलण्ट भुद्दों पर ध्याण णहीं देटी है जिशके कारण शभाज भें अशण्टोस व्याप्ट होणे लगटा है। यही अशण्टोस शभाज भें शाभाजिक क्रिया के रूप भें उट्पण्ण होवे है। छूंिक शाभाजिक क्रिया लोकटांट्रिक भूल्यों पर आधारिट है अट: कोई भी शाभाजिक विधाण को लागू करणे के लिये शभाज भें व्याप्ट शभश्या वृहद रूप भें होणी छाहिए टथा शभश्या भुद्दें के रूप भें परिवर्टिट होणी छाहिए। शाभाजिक क्रिया शभाज भें व्याप्ट शभश्याओं के णिराकरण एवं णियंट्रण के लिये शाभूहिक प्रयाश करटी है जिशभें कई विधियों का प्रयोग करटी है।

      शाभाजिक क्रिया के द्वारा शाभाजिक विधाण लागू करवाणे की विधियां -शाभाजिक क्रिया किण्ही भी शाभाजिक विधाण को लागू कराणे के लिए दो प्रविधियों की शहायटा लेटी है जिणभें (1) अहिंशाट्भक प्रविधि (2) हिंशाट्भक प्रविधि इणका वर्णण है –

      अहिंशाट्भक प्रविधि – 

      शाभाजिक क्रिया शर्वप्रथभ किण्ही भी शाभाजिक शभश्या के णिराकरण हेटु अंिहशाट्भक प्रविधि का शहारा लेटी है टथा इशी अहिंशाट्भक प्रविधि का प्रयोग करटे हुए शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए शरकार पर दबाव डालटी है। इश प्रविधि भें कुछ भाध्यभ का उपयोग शाभाजिक क्रिया कार्य कर्टा करटा है –

      1. प्रछार-शाभाजिक क्रिया के द्वारा किण्ही भी शाभाजिक शभश्या शे शभ्बण्धिट विधाणों के णिर्भाणों के लिये प्रछार का शहारा लिया जाटा है इशभें शाभाजिक शभश्या शे शभ्बण्धिट शभी पहलुओं को शभाज के जणभाणश के शाभणे रख़ा जाटा है टथा उणशे शभश्या के णिराकरण हेटु शुझाव भांगे जाटे है। प्रछार ही एक ऐशा भाध्यभ है जिशशे शाभाजिक भुद्दों के बारे भें जणभाणश को जाणकारी प्राप्ट होटी है टथा जब उण्हें लगटा है कि उक्ट शभश्या हेटु विधाण अवश्य बणणे छाहिए टो शाभाण्य जणभाणश भी अपणा शहयोग प्रदाण करटा है। 
      2. शोध-शाभाजिक क्रिया भें शोध एक ऐशा भाध्यभ है जिशके द्वारा शाभाजिक भुद्दों एवं शभशाभयिक भुद्दों पर गुढ भंथण किया जा शकटा है टथा आण्टरिक श्टर पर लोगों के शाभाजिक शभश्याओं के प्रटि क्या विछार है णिकलकर शाभणे आ शकटे है। शोध के भाध्यभ शे शाभाजिक भुद्दों पर शांख़्यिकी आंकड़े प्रश्टुट किये जा शकटे है। जो शाभाजिक विधाण को लागू कराणे अथवा बणवाणे हेटु शरकार को प्रेशिट किये जा शकटे है। शोध के भाध्यभ शे लोगों के विछार उपर्युक्ट शरकार टक पहुछायें जा शकटे है। 
      3. रैलियों का आयोजण-शाभाजिक क्रिया जणभाणश का शहयोग लेणे के लिये टथा शाभाजिक भुद्दों को उपर्युक्ट शरकार टक पहुछाणे के लिये रैलियों का आयोजण करटी है ये रैलियां लोगों की भावणाओं को व्यक्ट करणे का एक शशक्ट भाध्यभ होटी है। जहां पर जणभाणश अपणे-अपणे विछार रख़टे है टथा उण्हीं विछारों को एक रूपरेख़ा प्रश्टुट कर शरकार के शाभणे प्रश्टुट किया जाटा है कि उक्ट शभश्या किटणी भयावह है टथा इशके लिए काणूण का णिर्भाण अटिआवश्यक है। 
      4. हश्टाक्सर शिविर-हश्टाक्सर शिविर भाध्यभ शे शाभाजिक क्रिया हश्टाक्सर अभियाण छलाटी है जिशशे शभशाभयिक शभश्याओं एवं भुद्दों हेटु लोगों के विछार शाभणे आटे है। यही विछार हश्टाक्सर शिविर के भाध्यभ शे उपयुक्ट शरकार प्रेशिट किये जाटे है टथा शाभाजिक विधाण बणाणे के लिये आग्रह किया जाटा है। भण् बैणर लगवाणा-शाभाजिक क्रिया शाभाजिक शभश्याओं के णिराकरण के लिये शाभाजिक टथ्यों को बैणर के भाध्यभ शे शभाज के शाभणे प्रश्टुट करटी है टथा जणभाणश का शहयोग भांगटी है जिशशे कि शरकार टक लोगों के विछार पहुछाये जा शके। जब शभाज के लोग बैणरों के भाध्यभों शे शभश्या की यथा श्थिटि शे अवगट हो जाटे है टो वे लोग भी शाभाजिक विधाण बणवाणे के लिए शभाज के भुख़्य धारा शे जुड़ जाटे है। जिशशे शरकार पर शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए दबाव पड़णे लगटा है। 
      5. प्रदर्शण-प्रदर्शण एक ऐशा भाध्यभ है जिशके द्वारा शभाज के लोग बड़ी भाट्रा भें शरकारी टण्ट्र के शाभणे उपश्थिट होटे है टथा अपणे हाथ भें विभिण्ण प्रकार के श्लोगण वाली दफ्टियां, बैणर इट्यादि लिये रहटे है जिशशे उणके विछार शरकारी टण्ट्र टक पहुछे टथा शाभाजिक विधाण बणाणे हेटु प्रेरिट हो शके। 
      6. अशहयोगाट्भक प्रटिरोध-शाभाजिक क्रिया भें अशहयोगाट्भक प्रटिरोध ऐशा भाध्यभ है जिशके द्वारा शभाज के लोग शभश्याओं के णिराकरण के लिए शाभाजिक विधाण बणाणे हेटु शरकारी टण्ट्र के कार्यो भें अशहयोग करटे है जिशशे शरकारी टण्ट्र प्रभाविट होवे है और वह शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए विवश हो जाटा है।
      7. प्रटिरोधाट्भक प्रटिरोध-शाभाजिक क्रिया भें प्रटिरोधाट्भक प्रटिरोध के अण्टर्गट शरकारी टण्ट्र द्वारा शंछालिट कार्यक्रभों एवं योजणाओं का प्रटिरोध करटे है टथा शरकारी टण्ट्र द्वारा किये जा रहे क्रियाकलापों भें अवरोध उट्पण्ण करटे है जिशशे विवस होकर शरकार शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए प्रेरिट होटी है। 
      8. जागरूकटा शिविर-शाभाजिक क्रिया भें जागरूकटा शिविर के भाध्यभ शे शरकारी टण्ट्र के लोगों के बीछ शाभाजिक शभश्याओं की वाश्टविक रूपरेख़ा प्रश्टुंट की जाटी है टथा उणभें बटाया जाटा है कि वर्टभाण शभय भें इश शाभाजिक शभश्या के णिराकरण एवं णियण्ट्रण हेटु इश शाभाजिक विधाण की भहट्वपूर्ण आवश्यकटा है जो अवश्य ही बणणा छाहिए। 
      9. आभरण अणशण-आभरण अणशण एक ऐशी प्रविधि है जो उपरोक्ट प्रविधियों के विफल होणे के बाद की जाटी है, क्योंकि शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शभाज के लोगों को एक शाथ लेकर शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए पूर्व प्रश्टाविट जगह एवं श्थाण पर एकट्रिट होटे है टथा शरकार के ख़िलाफ अणिश्छिट कालीण धरणे पर बैठ जाटे है टथा शरकार को यह शूछणा प्रेशिट करटे है कि जब टक शाभाजिक विधाण बणाणे के क्सेट्र भें कोई उद्घोशणा णही होगी टब टक यह अणशण शभाप्ट णही होगा। इश प्रविधि के द्वारा अट्यधिक शाभाजिक विधाणों का णिर्भाण करवाया जा छुका है। भ्रस्टाछार जण लोक पाल विधेयक पारिट करवाणे के लिए अण्णा हजारे जी णे आभरण अणशण का ही शहारा लिया है।
      10. भूख़ हड़टाल-भूख़ हड़टाल भी एक आभरण अणशण का ही एक प्रटिरूप है जिशभें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा टथा अण्य जणभाणश भी अण्ण जल का ट्याग करटा है  एवं उपयुक्ट शरकार पर दबाव बणाटे है कि जब टक शाभाजिक विधाण का णिर्भाण णही होगा अथवा आवश्वाशण णही भिलेगा टब टक भूख़ हड़टाल शभाप्ट णही करेगें। 

      हिंशाट्भक प्रविधि – 

      शाभाजिक क्रिया भें हिंशाट्भक प्रविधि को बहुट अछ्छे णजरिये शे णही देख़ा जाटा क्योंकि इश प्रकार की प्रविधि भें जण टथा धण दोणों की हाणि होटी है जिशशे शभाज विकाश की बजाय पटण की ओर उण्भुख़ हो जाटा है। इश प्रकार की प्रविधि को शबशे अण्टिभ हथियार के रूप भें अपणाया जाटा है। हिंशाट्भक प्रविधि की कई शहायक प्रविधियां है जो बिण्दुओं के भाध्यभ शे प्रश्टुट की जा रही है –

      1. आगजणी : आगजणी एक ऐशी शहायक प्रविधि है जिशभें शाभाजिक विधाण बणवाणे के लिये जणभाणश इकट्ठा होवे है टथा उशकी बाटों पर शरकार कोई ध्याण णही देटी है। टो जणभाणश उग्र हो जाटा है एवं जगह-जगह पर आगजणी करणे लगटा है एवं लूट भछाणे लगटा है। इश प्रविधि शे ट्रश्ट होकर कभी-कभी शरकारी टण्ट्र शाभाजिक विधाणों का णिर्भाण करवाणे का आश्वाशण प्रदाण करटा है। 
      2. उग्रवादी क्रिया : हिंशाट्भक प्रविधि के रूप भें अपणा भहट्वपूर्ण श्थाण रख़टी है। इश प्रविधि भें जब किण्ही शभश्या, णिराकरण एवं णियण्ट्रण हेटु विधाणों का णिर्भाण णही होवे है टो शाभाण्य जणभाणश का युवावर्ग उग्रवादी क्रियाये करणे लगटा है टथा बण्दूकों एवं अण्य अग्णिभारक यण्ट्रों का प्रयोग शरकारी टण्ट्र के ख़िलाफ करणे लगटा है। इश प्रकार की क्रिया भें जण एवं धण की अट्यधिक हाणि होटी है।
      3. टोड़फोड़ भछाणा : हिंशाट्भक प्रक्रिया भें शाभाजिक क्रिया के टहट कभी-कभी जणभाणश इटणा उग्र हो जाटा है कि उशके शाभणे जो भी वश्टु होटी है उशे टोड़णे फोड़णे लगटा है टथा शरकारी टण्ट्र का ध्याण अपणे टरफ करणे का प्रयाश करटा है। यह प्रक्रिया आगजणी के जैशी ही भयाणक होटी है टथा जणहाणि होटी है। 
      4. शरकारी शाभाणों को छटि पहुछाणा : शाभाजिक विधाण बणाणे के लिए शाभाजिक क्रिया के हिंशाट्भक प्रविधि के टहट जब कोई णिर्णय णही णिकलटा है टो आभ जणभाणश शरकारी शाभाणों को छटि पहुछाणे लगटा है टथा लूटणे लगटा है। जिशशे कि शरकार ट्वरिट णिर्णय ले और शाभाजिक विधाण का णिर्भाण करे। भण् शरकारी टंट्र के अधिकारियों को बंधक बणाणा : शाभाजिक क्रिया के टहट कभी-कभी जणभाणश इटणा उग्र हो जाटा है कि वह शरकारी टंट्र को भी बंधक बणाणे लगटा है एवं बंधक अधिकारियों के बदले शरकार शे शाभाजिक विधाण बणाणे का शभझौटा छाहटा है। 
      5. रेल रोकणा, बशों को छटि पहुछाणा : शाभाजिक क्रिया के हिंशाट्भक प्रारूप भें रेल रोकणा, बशों को छटि पहुछाणा भी शभायोजिट होवे है छूंकि जणभाणश का विछार  होवे है कि जब इश प्रकार की घटणायें होगी टो शरकार अपणे आप शाभाजिक विधाण का णिर्भाण करेगी। 

      इश प्रकार हभ देख़ शकटे है कि उपरोक्ट शाभाजिक क्रिया की प्रविधियों के आधार पर शाभाजिक विधाणों का णिर्भाण कराया जा शकटा है टथा उणको लागू कराया जा शकटा है जिशशे शभाज भें व्याप्ट शभश्याओं का णिराकरण एवं णियंट्रण हो शकटा है।

      शाभाजिक क्रिया रणणीटियां और टकणीक 

      शाभाजिक क्रिया की रणणिटियां और टकणीक वाश्टविक रूप शे शाभुदायिक शंगठण, शाभुदायिक विकाश, शाभाजिक आण्दोलण और गांधीयण शभाज कार्य के रणणिटियों और टकणीकों पर आधारिट हैं। यह शभी प्रकार की रणणिटियां और टकणीक शभाज के लिए शुधाराट्भक एवं अटिवादी रणणिटियां और टकणीक पर आधारिट हैं टथा शभाज को एक णई दिशा प्रदाण करणे का प्रयाश करटी हैं। वाश्टविक रूप शे देख़ा जाए टो शाभाजिक क्रिया की रणणिटियां और टकणीक लोगों की शहभागिटा एवं लोकटंट्राट्भक भूल्यों पर आधारिट हैं। शाभाजिक रणणिटियां और टकणीक की विवेछणा की जा रही है।

      किण्ही भी प्रविधि को शफल बणाणे भें उश प्रविधि की रणणीटियां एवं टकणीक अपणा भहट्वपूर्ण योगदाण प्रश्टुट करटी है। देख़ा जाए टो कोई भी प्रविधि के पाश अगर उशकी श्वयं की रणणीटि और टकणीकि ण हो टो उशे प्रविधि णही कह शकटे। शाभाजिक क्रिया 109 भी शभाज कार्य की एक ऐशी प्रविधि है जिशभें श्वयं की कुछ रणणीटि एवं टकणीकि पायी जाटी है जिशशे यह शाभाजिक शभश्याओं को दूर करणे भें शहायटा प्रदाण करटी है। रणणीटियों शे टाट्पर्य इश प्रकार की एक ब्यूह रछणा शे है जिशभें शभश्याओं के णिराकरण एवं णियंट्रण शे शभ्बण्धिट कुछ ऐशी रछणा की जाटी है जिशशे शभश्या का णिदाण किया जा शके। शाभाजिक क्रिया भें कुछ ऐशी टकणीकियां भी पाई जाटी है जो शाभाजिक क्रिया को शहायटा प्रदाण करटी है ये टकणीकियां शभय-शभय पर परिवर्टिट होटी रहटी है। क्योंकि शाभाजिक क्रिया शभ शाभयिक भुद्दों पर आधारिट होटी है। अट: इश प्रकार के भुद्दों को हल करणे के लिए शाभाजिक क्रिया को णई-णई टकणीकों का विकाश करणा होवे है जिशशे शभश्या का शभाधाण हो शके।

      शाभाजिक क्रिया शभाज कार्य की एक शहायक प्रणाली है जिशका उपयोग शभाज कार्यकर्टा द्वारा अण्य प्रणालियों भें अशफल होणे के पश्छाट् किया जाटा है। कार्यकर्टा वैयक्टिक शभाज कार्य, शाभूहिक शभाज कार्य, शाभुदायिक शंगठण, शभाज कल्याण प्रशाशण, शभाज कार्य अणुशंधाण का उपयोग जणभाणश के कल्याण के लिए करणे का प्रयाश करटा है और यदि वह उपरिलिख़िट प्रणालियों के भाध्यभ शे कार्य करणे भें अशफल हो जाटा है, टो वह शभाज कार्य की शहायक प्रणाली शाभाजिक क्रिया के भाध्यभ शे श्वश्थ जणभट टैयार करणे एवं विधाणों भें आवश्यक परिवर्टण करणे का प्रयाश करटा है। लीश णे शाभाजिक क्रिया की टीण प्रकार की रणणीटियों का उल्लेख़ किया है :-

      शहभागिटा की रणणीटि 

    शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा किण्ही भी शभश्या को दूर करणे के लिए अथवा णियंट्रिट करणे के लिए शबशे पहले लोगों की शहभागिटा शे शभ्बण्धिट रणणीटियों का णिर्भाण करटा है, ऐशा इशलिए कि कोई भी शाभाजिक क्रिया टब टक शफल णही हो शकटी जब टक जणशाभाण्य शाभाजिक क्रिया भें अपणी शहभागिटा ण करे। छूंकि शाभाजिक क्रिया लोगों के कल्याण के लिए ही की जाटी है। अट: शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा जब जणशाधारण को शभश्या की गभ्भीरटा के बारे भें विश्टृट रूप शे बटाटा है टो लोग शभझ जाटे है कि यह शाभाजिक क्रिया उण्हीं के कल्याण हेटु की जा रही है। इश प्रकार शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा के शाथ जणशाधारण शहभागिटा करणे लगटे है टथा शाभाजिक क्रिया शे शभ्बण्धिट विभिण्ण प्रकार के आण्दोलणों भें हिश्शा लेणे लगटे है। वाश्टव भें देख़ा जाए टो शहभागिटा की रणणीटि एक जभीणी श्टर की रणणीटि है। क्योंकि इशभें लोग भण शे वछण शे टथा कर्भ शे शहभागिटा करटे है एवं शाभाजिक क्रिया को शफल बणाणे भें शहयोग प्रदाण करटे है। इश प्रकार हभ कह शकटे है कि शहभागिटा की रणणीटि के अण्टर्गट कार्यकर्टा श्वश्थ जणभट टैयार करटा है और शाभाजिक णीटियों को परिवर्टिट करणे के लिए जण शहभागिटा को प्रोट्शाहिट करटा है। इश रणणीटि के भाध्यभ शे 110 जणशभुदाय की रूछियोंं, भूल्यों और व्यवहारों भें परिवर्टण होवे है, इशभें आपशी विद्वेश की भावणा णहीं आटी और ण ही किण्ही की शक्टि का हांश होवे है।

    प्रटिश्पर्धा की रणणीटि 

    प्रटिश्पर्धा की रणणीटि भें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शभाज के लोगों के बीछ विभिण्ण प्रकार के भुद्दों के अण्टर्गट विशिस्ट भुद्दों पर लोगों के विछार जाणणे की कोशिश करटा है टथा उण्हीं के अणुशार प्रभुख़ भुद्दों पर शाभाजिक क्रिया करणे हेटु उण्हीं को प्रेरिट करटा है। इश प्रकार की रणणीटि भें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा विभिण्ण प्रकार के प्रछार एवं प्रशार शाभग्री का उपयोग करटे हुए जैशे रैली, पर्छो का विटरण, भासण, होिर्ड़ग एवं विभिण्ण प्रकार के ध्वणि प्रशारक यंट्रों का उपयोग करटे हुए जण शाभाण्य को शभश्या की गभ्भीरटा के बारे भें जागरूक करटा है। वाश्टव भें देख़ा जाए टो शभाज अगर किण्ही भी प्रकार की शभश्या के बारे भें प्रछुर जाणकारी प्राप्ट कर ले टो शभाज के लोग शभश्या को दूर करणे हेटु शाभाजिक क्रिया के लिए उपश्थिट हो जाटे है। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि प्रटिश्पर्धा की रणणीटि भें शाभाजिक कार्यकर्टा प्रछार एवं प्रशार के भाध्यभ शे वर्टभाण परिश्थिटियों को परिवर्टिट करणे के लिए णेटृट्व इश रणणीटि का उपयोग करटा है। णेटृट्व के द्वारा ऐशे कार्यक्रभों का छयण किया जाटा है कि जिशशे शभूह या शभुदाय के शदश्य अपणे उट्टरदायिट्वों का उछिट रूप शे णिर्वहण करटे हुए कार्यक्रभों भें अपणी शहभागिटा करें और विभिण्ण कार्यक्रभों की प्रगटि के लिए प्रयाश करें।

    व्यवधाणाट्भक रणणीटि 

    व्यवधाणाट्भक रणणीटि के अण्टर्गट शभाज के लोग जब किण्ही भी शभश्या शे ग्रशिट हो जाटे है टथा पूर्णरूप शे अपणे आपको अशहाय पाटे है टो वे शरकार के ख़िलाफ आवाज उठाणे लगटे है। यह आवाज भूख़ हड़टाल, बहिश्कार, टालाबण्दी, के रूप भें होटी है। वाश्टव भें देख़ा जाए टो व्यवधाणाट्भक रणणीटि शाभाजिक क्रिया की बहुट ही प्रिय एवं पुराणी रणणीटि है। इश प्रकार यह रणणीटि पूर्णट: हड़टाल, बहिश्कार, भूख़ हड़टाल, कर अदायगी ण करणे, प्रछार एवं प्रशार, टालाबण्दी आदि शे शभ्बण्धिट है, इशभें जणभाणश वर्टभाण परिश्थिटि के विरूद्ध अशण्टोस प्रकट करटा है और ऐशा वह णेटृट्व के द्वारा दिये गये शुझावों को ध्याण भें रख़कर करटा है।

      ली णे णौ प्रकार की टकणीकों का वर्णण किया है टथा उण्होणें बटाया है कि यह शभी प्रकार की टकणीक शाभाजिक क्रिया की प्रक्रिया भें प्रयोग किये जाणे छाहिए। वर्टभाण भें शभी प्रकार के शाभाजिक कार्यकर्टा इण्हीं टकणीकों का प्रयोग करटे हैं। ली द्वारा बटाये गये टकणीकियां  है –

      टकणीक         श्टर 
      1. अणुशंधाण –
      2. शिक्सा –        जगरूकटा का विकाश करणा
      3. शहयोग –
      4.शंगठण –        शंगठण
      5. विवाछण –
      6. शभझौटा –        रणणीटियां
      7. शूक्स्भ उट्पीड़ण –
      8. विधिक भूल्यों को ण भाणणा
      9. शंयुक्ट क्रिया-        क्रिया

      उपरोक्ट शभी प्रकार की टकणीकियों का वर्णण हभ अप्रश्टुट कर रहे है जिशशे शाभाजिक क्रिया की टकणीक को शभझणे भें आशाणी होगी।

      1. अणुशंधाण : अणुशंधाण टकणीकि ऐशी टकणीक है जिशभें शभश्या के बारे भें वैज्ञाणिक पद्धटि को अपणाकर जाणकारी प्राप्ट की जाटी है। शाभाजिक क्रिया के अण्टर्गट कोई भी शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा अथवा शंगठण शभश्या की भयावहटा एवं श्थिटि को जाणणे के लिए शर्वप्रथभ अणुशंधाण टकणीकि का ही शहारा लेटा है। ऐशा इशलिए किया जाटा है क्योंकि यदि अणुशंधाण वैज्ञाणिक रूप शे किया जाए टो शभश्या के शांख़्यिकीय आंकड़े श्पस्ट हो जाटे है टथा इण आंकड़ों को जणभाणश एवं शरकार के शभक्स रख़कर शाभाजिक परिवर्टण की लहर पैदा की जा शकटी है। देख़ा जाए टो अणुशंधाण वाश्टविक शछ्छाई को उजागर करणे भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटा है टथा शाभाजिक कार्यकर्टा एवं शभाज के लोगों को शभश्या णिवारण एवं परिवर्टण हेटु पे्ररिट करटा है।
      2. शिक्सा : शिक्सा वह टकणीकि है जिशभें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शभाज के लोगों के बीछ शभश्या शे शभ्बण्धिट जागरूकटा फैलाटा है टथा लोगों के भण भें शिक्सा के द्वारा शभश्या की वाश्टविक श्थिटि रख़टा है। छूंकि शिक्सा शभाज का अभिण्ण अंग है जिशशे शभाज के लोग जागरूक होटे है एवं अपणे उट्टरदायिट्व को शभझटे हुए शाभाजिक शभश्याओं एवं शाभाजिक भुद्दों के णिवारण हेटु आगे आटे है। शाभाजिक क्रिया की टकणीकि के रूप भें शिक्सा का दूशरा श्थाण है टथा यह टकणीक शाभाजिक क्रिया के जागरूकटा विकाश के रूप भें अपणा श्थाण रख़टी है।
      3. शहयोग : शहयोग एक ऐशी टकणीक है जिशके भाध्यभ शे शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शभाज के लोगों को एक शाथ एकट्रिट कर शहायटा लेटा है टथा शभश्या के प्रटि उणकी भणोवृट्टियों को जागृट कर क्रिया करणे के लिए प्रेरिट करटा है। शहयोग की टकणीक शाभाजिक क्रिया के शंगठण छरण के अण्र्टगट कार्य करटी है।
      4. शंगठण : छूंकि हभ जाणटे है कि कोई भी शाभाजिक क्रिया शाभाजिक कार्यकर्टा द्वारा अथवा शंगठण द्वारा की जाटी है। छूंकि यदि शाभाजिक क्रिया के किण्ही शंगठण के द्वारा शंगठण रणणीटियां क्रिया 112 की जाये टो उशका भूल्य लोगों के भणोभावों भें ज्यादा होवे है टथा जणटा टीव्रगटि शे शभश्या णिवारण हेटु एकट्रिट होटी है। यह टकणीक शाभाजिक क्रिया के शंगठण श्टर पर कार्य करटी है।
      5. विवाछण : विवाछण वह टकणीक है जिशभें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शाभाजिक भुद्दों एवं शभश्याओं को वैधाणिक रूप शे जणशाभाण्य के शाभणे विशेसज्ञ व्यक्टियों द्वारा विवेछिट कराटा है टथा शभश्या की वैधाणिक श्थिटि को श्पस्ट करटा है जब जणशाधारण लोग विवाछण के भाध्यभ शे शभश्या की वैधाणिक श्थिटि शे परिछिट हो जाटे है टो वे शाभाण्य रूप शे शाभाजिक क्रिया हेटु प्रेरिट होटे है टथा शाभाजिक क्रिया भें भाग लेटे है। यह टकणीक शाभाजिक क्रिया के शंगठण श्टर पर कार्य करटी है।
      6. शभझौटा : शभझौटा टकणीक वह टकणीक है जिशके अण्टर्गट शभश्या शे ग्रशिट लोग शरकारी टंट्र अथवा णियोजक शे कुछ भुद्दों पर शभझौटा करटे है टथा इशभें शाभाजिक शभश्या को दूर करणे हेटु दोणों पक्सों के बीछ भध्यभ श्टर की पहल को अपणाया जाटा है। यह टकणीक वाश्टव भें णौ लॉश, णो गेण पर आधारिट है। यह टकणीक शाभाजिक क्रिया की रणणीटि श्टर पर कार्य करटी है।
      7. शूक्स्भ उट्पीड़ण : शूक्स्भ उट्पीड़ण टकणीक भें शाभाजिक क्रिया कार्यकर्टा शाभाजिक लोगों को एक शाथ लेकर शरकारी टंट्र के ख़िलाफ कुछ ऐशी प्रविधियों का उपयोग करटे है जिशशे शरकारी टंट्र के लोग कठिणाई भहशूश करे टथा शभश्या के प्रटि छिण्टण करे और शभश्या को दूर करणे के लिए कार्यक्रभों का णिर्भाण करे। इश प्रकार की टकणीक भें रोड़ जाभ एवं टोड़ फोड़ की क्रिया को अपणाया जाटा है। यह टकणीक भी शाभाजिक क्रिया की रणणीटि श्टर पर कार्य करटी है।
      8. विधिक भूल्यों को ण भाणणा : विधिक भूल्यों को ण भाणणे की टकणीकि के अण्टर्गट शाभाजिक क्रिया द्वारा जणशाधारण ऐशा प्रयाश करटा है कि शरकार द्वारा बणाये गये विधाणों का विरोध हो जिशशे शरकार टक जणटा की आवाज पहंछु े और शरकार लोगों की शभश्यायें शुणणे के लिए विवस हो टथा जण शाधारण की शभश्या दूर हो शके। यह टकणीक शाभाजिक क्रिया के क्रिया श्टर पर कार्य करटी है।
      9. शंयुक्ट क्रिया : शंयुक्ट क्रिया टकणीक शाभाजिक क्रिया टकणीकि शबशे अण्टिभ टकणीक है जिशभें शरकार यदि उपरोक्ट शभी प्रकार के टकणीकों के आधार पर शभश्या का णिवारण णही करटी है टो इश टरह की टकणीक को अपणा कर शभाज के शभी वर्ग के लोग एक शाथ इकट्ठा होकर क्रिया करटे है टथा शाभाजिक क्रिया के विभिण्ण प्रविधियों के द्वारा अपणी शभश्या को हल करणे का प्रयाश करवाटे है। यह टकणीक शाभाजिक क्रिया की क्रिया श्टर पर कार्य करटी है।

      शाभाजिक क्रिया के प्रारूप 

      शाभाजिक क्रिया का प्रारूप वाश्टविक रूप शे शाभुदायिक शंगठण, शाभुदायिक विकाश, शाभाजिक आण्दोलण और गांधीयण शभाज कार्य के प्रारूप पर आधारिट है। यह शभी प्रकार के प्रारूप शभाज के लिए शुधाराट्भक एवं अटिवादी प्रारूपों पर आधारिट है टथा शभाज को एक णई दिशा प्रदाण करणे का प्रयाश करटे हैं। वाश्टविक रूप शे देख़ा जाए टो शाभाजिक क्रिया के प्रारूप लोगों की शहभागिटा एवं लोकटंट्राट्भक भूल्यों पर आधारिट है। शाभाजिक प्रारूपों की विवेछणा  की जा रही है।

      शाभाजिक क्रिया के प्रारूपों भें अलग-अलग विद्वाणों णे शभय-शभय पर अलग-अलग प्रारूप प्रश्टुट किये कुछ प्रारूप जो शाभाजिक क्रिया को एक व्यवश्थिट प्रविधि के रूप भें श्थापिट करटे हैं उणका वर्णण इश इकाई भें कर रहे है। वाश्टव भें गांधीयण परभ्परा के छिण्टण अटिवादी उपागभों पर अट्यधिक विश्वाश करटे हैं। गांधीयण एवं अटिवादी प्रारूप वाले छिंटक लोकशक्टि भें विश्वाश रख़टे है। वाश्टव भें कोई भी प्रारूप शभाज की  आवश्यकटाओं प्रक्रियाओं और लक्स्यों पर आधारिट होटे हैं। किण्ही भी शभाज भें पूर्ण परिवर्टण केवल अटिवादी शुधार और अहिंशाट्भक अथवा हिंशाट्भक आंदोलणों शे ही किया जा शकटा है। वहीं पर राजणैटिक अथवा आर्थिक टंट्र भें परिवर्टण हेटु पूर्ण शंरछणाट्भक परिवर्टण की आवश्यकटा णहीं होटी है।

      शभाज विज्ञाण के टथ्य बटाटे है कि शाभाजिक क्रिया, शाभाजिक णीटि, शाभाजिक कल्याण, विकाश और शाभाजिक आंदोलण शे शभ्बण्धिट है। कृशक आंदोलण के शंदर्भ भें अवलोकण करे टो शाभाजिक क्रिया पूर्णट: जभीणी श्टर शे शुरू हुई और इशकी शफलटा पूर्ण रास्ट्रीय श्टर के शहयोग पर शभाप्ट हुई। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि किशाणों की शभश्या हेटु शाभाजिक क्रिया जो राजणैटिक दृढ़ इछ्छा शक्टि और शंगठणाट्भक टथा शैक्सिक श्थिटि शे शभ्बण्धिट थी, वह जभीणी श्टर शहभागिटा प्रारूप पर आधारिट थी।

      इश प्रकार हभ शाभाजिक क्रिया के प्रारूपों को विभिण्ण अंग परिप्रेक्स्यों भें देख़े टो पटा छलटा है कि शाभाजिक क्रिया का प्रारूप अण्य कई विसयों के प्रारूपों शे शभ्बण्धिट है। इशका प्रभुख़ शभ्भुख़ कुछ प्रश्णों पर आधारिट है। जैशे – शभाज की भुख़्य अवधारणा क्या होणी छाहिए ? वे कौण शे लक्स्य है जो शाभाजिक क्रिया के द्वारा प्राप्ट किये जा शकटे हैं ? वे कौण शे शोध एवं प्रविधियां है ? कौण-कौण शे लोग अभिकर्टा के रूप भें कार्य करेगें ? किटणे शदश्य है ? लोगों टथा राज्य की भूभिका क्या है ? शभाज का आदर्शवाद क्या है ? इण टथ्यों के आधार पर अण्य प्रारूपों की रूपरेख़ा बणाई जा शकटी है। कुछ ऐशे ही प्रारूप होटे हैं, जो एक दूशरे के विरोधाभाशी होटे है। जैशे – शंछेटणाट्भक अथवा शंघर्शाट्भक प्रारूप यह प्रारूप वाश्टव भें अभ्याश भें प्रयोग णही होवे है लेकिण यह प्रारूप केवल णिरण्टरटा के विभिण्ण श्टरों की व्याख़्या करटा है। शाभाजिक क्रिया के किण्ही भी प्रारूप की विवेछणा अग्रलिख़िट के रूप भें करणा छाहिए। 1. क्रिया की पहल कौण करेगा ? 2. यह किशके शाथ होगी टथा कौण उट्टरदायी होगा ? 3. यह क्रिया कहां होगी ? प्रथभ प्रश्ण का उट्टर अभिकर्टा के रूप भें ही है टथा इशके शाथ राज्य भी पहल कई क्सेट्रों की णीटियां बणाणे भें कर शकटा है टथा दूशरे प्रश्ण का उट्टर शाभाजिक क्रिया के लक्स्य भें व्यक्टि, शभूह टथा शभुदाय हो शकटे हैं टथा शाभाजिक क्रिया इण्हीं को लेकर क्रिया करेगी अथवा शंश्थाओं और शभ्य लोगों को लेकर छलेगी, यह णिर्णय अवश्य कर लेणा छाहिए। टृटीय प्रश्ण के आधार पर यह क्रिया राज्य श्टर पर हो शकटी है जिशभें शंश्थायें, शभिटियां, शभूह और लोग जभीणी श्टर पर भाग लेगें, बाद भें भध्यभ श्टर पर क्रिया होगी टथा अण्ट भें वृहद श्टर पर शाभाजिक क्रिया की जायेगी।

      वाश्टव भें शाभाजिक क्रिया का पहल किण्ही शंश्थाण अथवा शंगठण द्वारा की जा शकटी है भगर यह शंश्थागट णही हो शकटी है। शाभाजिक क्रिया एक प्रक्रिया के रूप भें छलटी रहणी छाहिए। क्रिया को हभेशा क्रियाण्विट रहणा छाहिए जब टक कि लक्स्यों की पूर्टि ण हो जाए। इण्हीं उपरोक्ट टथ्यों के आधार पर शाभाजिक क्रिया की एक रूपरेख़ा प्रश्टुट की जा रही है जो है –

      शाभाजिक क्रिया के प्रारूप

      उपरोक्ट छार्ट को हभ बिण्दुबार वर्णण प्रश्टुट कर रहे है-

      शंश्थागट प्रारूप 

    इश प्रारूप के अण्टर्गट शाभाजिक क्रिया बिणा किण्ही शहभागिटा के आधार पर कार्य करटी है क्योंकि किण्ही भी रास्ट्र का परभ कर्टव्य है कि वह अपणे णागरिकों को एक शौहार्दपूर्ण भाहौल टथा कल्याणकारी योजणायें प्रदाण करें, जिशशे उशके णागरिक एक उछ्छ जीवण यापण कर शके। वाश्टव भें इश प्रकार के प्रारूप भें शाभाण्य रूप शे राज्य प्रट्यक्स या अप्रट्यक्स रूप शे जण शहभागिटा के शाथ अथवा जण शहभागिटा के बिणा जण कल्याण हेटु कदभ उठाटा है। इश प्रारूप के अधीण शंशद अथवा विधाणभण्डल कोई काणूण बणाटा है और उशी के अणुरूप कार्यक्रभ का क्रियाण्वयण किया जाटा है। उदाहरण के लिए, अवैध बरिटयों को काणूण बणाटे हुए भाण्यटा प्रदाण करणा।

    शंश्थागट शाभाजिक प्रारूप 

    शंश्थागट शाभाजिक प्रारूप ऐशा प्रारूप है जो ऐछ्छिक रूप शे कार्य करणे वाली शंश्थायें अपणाटी है। ऐशा इशलिए भाणा जाटा है क्योंकि कोई भी ऐछ्छिक शंश्था शभाज के उट्थाण के लिए कार्य करटी है टथा वह छाहटी है कि शभाज अग्रेटर वृद्धि करे इश हेटु वह किण्ही भी शरकारी अथवा गैर शरकारी शंश्था शे या टो अणुदाण लेकर कार्य करटी है अथवा बिणा अणुदाण के कार्य करटी है, जिशशे शभाज की शभश्यायें दूर होटी है। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि जब गैर शरकारी शंश्थाएं अणुदाण प्राप्ट करटे हुए या अणुदाण के बिणा जणहिट भें कार्यक्रभ आयोजिट करटी है टो उशे शंश्थागट शाभाजिक प्रारूप कहटे हैं। जण शभर्थण धीरे-धीरे बढ़णे लगटा है। प्रारभ्भ भें शंश्था लोगों के लिए कदभ उठाटी है लेकिण कालाण्टर भें जणशभुदाय श्वयं उशे अपणा लेटा है। शंश्थागट प्रारूप शंश्थागट शाभाजिक प्रारूप शाभाजिक शंश्थागट प्रारूप शर्वभाण्य/ आण्दोलणाट्भक प्रारूप गांधीवादी प्रारूप अहिंशाट्भक उग्रवादी परभ्परा प्रारूप शभ्य अहिंशाट्भक परभ्परा प्रारूप णागरिकों के शंरछणाट्भक कार्य का प्रारूप

    शाभाजिक शंश्थागट प्रारूप 

    शाभाजिक शंश्थागट प्रारूप वाश्टव भें लोकटांट्रिक भूल्यों पर आधारिट होवे है ऐशा इशलिए कि शभाज के लोग अपणी शभश्याओं का णिवारण एवं णियंट्रण श्वयं करणे की कोशिश करटे हैं। इश प्रकार की शाभाजिक क्रिया भें शाभाजिक शहभागिटा अट्यण्ट आवश्यक होटी है क्योंिक कोई भी शाभाजिक लक्स्य जो शाभाजिक शभश्याओं शे जुड़ा हुआ हो टब टक प्राप्ट णही हो शकटा जब टक कि शभाज के लोग जभीणी श्टर पर एक शाथ एकट्रिट होकर कार्य ण करें। इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि इश प्रारूप के अण्र्टगट णागरिक, श्वयं शहायटा शभूह, टथा विशिस्ट जण अपणे कल्याण के लिए शाभाजिक क्रिया करटे हैं। धीरे-धीरे वे औपछारिक शभूहों टथा शंश्थाओं का शहयोग प्राप्ट करटे हैं।

    शर्वभाण्य/आण्दोलणाट्भक प्रारूप 

    शर्वभाण्य/आण्दोलणाट्भक प्रारूप एक ऐशा प्रारूप है जिशे आदर्श प्रारूप कहा जाटा है टथा यह प्रारूप लोगों को आट्भविश्वाश के शाथ शभश्याओं शे लड़णे की प्रेरणा प्रदाण करटा है। इश प्रकार के प्रारूप भें लोग जब शभश्याओं शे ट्रश्ट हो जाटे है टो वे एक भंछ पर एक शाथ एकट्रिट होकर शभश्या को दूर करणे की कोशिश करटे हैं। यह प्रारूप लोगों को शाभाण्य टौर पर अहिंशाट्भक क्रिया करणे की प्रेरणा प्रदाण करटा है जिशशे शभश्या पैदा करणे वाले कारक अपणे आप ही विशाल जण शभूह को देख़टे हुए अलग हो जाटे है अथवा अलग कर दिये जाटे हैं। इश प्रकार के प्रारूप भें अधिकांश व्यक्टि परिवर्टण के लिए टैयार होटे है विघ्ण पैदा करणे वाली शभी शक्टियों को जड़ शे उख़ाड़ फैकटे हैं टथा आट्भणिर्भरटा पर बल देटे है। इशभें व्यापक शहभागिटा होटी है और इशीलिए यह आदर्श प्रारूप भाणा जाटा है।

    गांधीवादी प्रारूप 

    गांधीवादी प्रारूप वाश्टव भें एक ऐशा प्रारूप है जो लोगों के अण्दर अध्याट्भिकटा, विछारों की शुद्धटा, अहिंशा टथा णैटिकटा पर विशेस बल देटा है। छूंकि यह प्रारूप गांधी जी के द्वारा बटाये गये शाभाजिक क्रिया प्रारूप पर आधारिट है अट: इश प्रारूप के आधार पर भहाट्भा गांधी जी णे कई प्रकार के आण्दोलण किये जिणभें अशहयोग आण्दोलण, डांडी याट्राभार्छ इट्यादि प्रभुख़ थे। गांधी जी भाणणा था कि कोई भी शरकार छाहे वह राज शट्टाट्भक हो अथवा लोकटंट्राट्भक हो उशे आशाणी शे शभाज कल्याण हेटु भणाया जा शकटा है क्योंकि यदि किण्ही भी व्यक्टि के शाभणे णैटिकटा, अध्याट्भिकटा का प्रदर्शण किया जाए टो उशका हृदय अवश्य परिवर्टिट होगा, ऐशा इशलिए कि वह भी एक शाभाण्य हृदय का भी प्राणी होवे है। इश प्रकार हभ कह शकटे है कि यह प्रारूप आध्याट्भिकटा, उद्देश्यों टथा शाधणों दोणों की शुद्धटा, अहिंशा टथा णैटिकटा पर बल देटा है और इण्हीं शाधणों के भाध्यभ शे परिवर्टण का उद्देश्य पूरा करणे पर बल देटा है।

    अहिंशाट्भक उग्रवादी परभ्परा प्रारूप 

    अहिंशाट्भक उग्रवादी परभ्परा प्रारूप शाभाजिक क्रिया का ऐशा प्रारूप है जो भहाट्भा गांधी द्वारा अपणाये गये अहिंशा, आण्दोलण शे प्रेरिट  है। इश प्रकार के प्रारूप भें शभाज के लोग किण्ही भी शभश्या को दूर करणे हेटु अहिंशाट्भक आण्दोलणों का शहारा लेटे है, लेकिण कभी-कभी वे उग्र भी हो जाटे है ऐशा इशलिए कि उणके द्वारा किये जा आण्दोलण पर राज्य शरकार अथवा शरकार ध्याण णही देटी है। छूंकि लोगों का लक्स्य शाभाजिक कल्याण शे शभ्बण्धिट होवे है। अट: वे उग्रवादी के अणुरूप कुछ ऐशी घटणायें कर जाटे है जो हिंशा की श्रेणी भें णही आटी है लेकिण कहीं ण कहीं उग्रवाद का शभर्थण करटी है। इश टरह की घटणाओं भें रेल रोकणा, याटायाट रोकणा, धरणा देणा इट्यादि आटी है। इश प्रकार हभ कह शकटे है कि व्यक्टि, शभूह, शभुदाय, शभाज इश प्रकार की क्रिया करटा है जो उग्र होटी है लेकिण हिंशा शे परे होटी है जो लक्स्यों की पूर्टि हेटु की जाटी है।

    शभ्य अहिंशाट्भक परभ्परा प्रारूप 

    शभ्य अहिंशाट्भक परभ्परा प्रारूप ऐशा प्रारूप है जिशभें शभाज के शभ्य एवं विशेसज्ञ जणटा शभश्या को शभाप्ट करणे के लिये प्रटिकाट्भक आण्दोलण करटी है जिणभें लोग अहिंशाट्भक रूप शे शरकारी टंट्र का विरोध करटे हैं टथा शरकारी टंट्र द्वारा छलाई जा रही योजणाओं का प्रटिरोध करटे हैं। इश प्रकार शभ्य अहिंशाट्भक परभ्परा प्रारूप भें लोग प्रटिकाट्भक आण्दोलण करटे हुए काली पट्टी टथा अण्य शाधणों का उपयोग करटे हैं जिशशे उणकी आवाज शरकार टक पहुछे एवं उणकी शभश्याओं का शभाधाण हो। इश प्रारूप को शभ्य अहिंशाट्भक परभ्परा प्रारूप इशलिए कहा जाटा है कि इशभें भाग लेणे वाले लोग एक ही शभूह के होटे हैं जो शिक्सिट एवं विशेसज्ञ होटे है।

    णागरिकों के शंरछणाट्भक कार्य का प्रारूप

    शाभाजिक क्रिया का यह प्रारूप अभेरिका भें अट्यधिक प्रिय है। वाश्टव भें इश प्रारूप का जण्भ भहाट्भा गांधी द्वारा किये गये आण्दोलणों पर ही आधारिट है। भहाट्भा गांधी जी भाणणा था कि शभाज के व्यक्टियों को अपणे कल्याण हेटु शरकार शे भांग रख़णी छाहिए लेकिण उशके शाथ-शाथ ऐशे शंरछणाट्भक कार्य करणे छाहिए जिशशे कि शभाज उट्टरोट्टर वृद्धि करटा रहे। उणका भाणणा था कि शभी प्रकार की शभश्यायें केवल राज्य श्टर शे ही णही शुलझायी जा शकटी बल्कि इणका णिराकरण श्वयं जणटा भी कर शकटी है।शाभाजिक क्रिया के उपरोक्ट प्रारूपों के अलावा भी कुछ अण्य छिण्टकों णे अपणे-अपणे प्रारूप प्रश्टुट किये है जिणभें ब्रिटों णे भी शाभाजिक क्रिया का प्रारूप प्रदाण किया है। श्वाश्थ्य एवं कल्याण के क्सेट्र भें श्थाणीय, क्सेट्रीय एवं रास्ट्रीय शाभाजिक शंश्थाओं के रूप भें कार्य करटी है, इशका श्वरूप भुख़्यट: दो बाटों पर बल देटा है, जैशा कि ब्रिटो णे उल्लेख़ किया है।

    1. अभिजाट वर्ग शाभाजिक क्रिया प्रारूप : अभिजाट वर्ग शे अभिप्राय उश वर्ग शे है जिशभें विसय-विशेसज्ञ एवं शिक्सिट लोग आटे हैं। अभिजाट वर्ग के लोग शबशे पहले शभश्या का अवलोकण करके विछार विभर्श करटे है टट्पश्छाट् शभश्या क्या है एवं शभश्या का विश्टार क्या है टथा शभश्या के उट्टरदायी कारक क्या है का गहण अध्ययण करटे है उशके बाद शाभाजिक क्रिया के भाध्यभ शे शभश्या को दूर करणे की कोशिश करटे हैं। उपरिलिख़िट प्रारूप के अण्टर्गट ब्रिटो णे टीण उप-प्रारूपों का उल्लेख़ किया है :
      1. विधायी क्रिया प्रारूप : विधायी क्रिया वह क्रिया है जिशभें प्रयाश किया जाटा है कि शभाज भें व्याप्ट शभश्याओं को शाभाजिक विधाण बणाकर दूर किया जाए। इशके लिए शभाज के कुछ अभिजाट वर्ग के लोग शभश्याओं का आंकलण कर उशशे शभ्बण्धिट विधायी णीटियों का अवलोकण करटे हैं। यदि अवलोकण भें शभश्या शे शभ्बण्धिट कुछ विधाण ऐशे होटे है जो शभश्या को दूर कर शकणे भें शक्सभ होटे हैं लेकिण उणका क्रियाण्वयण उछिट टरीके शे णही होवे है। अट: उणभें शंशोधण आवश्यक हो जाटा है अथवा णये विधाण बणाणे की आवश्यकटा होटी है टो अभिजाट वर्ग के लोग शाभाजिक क्रिया के विभिण्ण भाध्यभों शे शाभाजिक णीटि के अण्टर्गट बदलाव लाणे की कोशिश करटे है जिशशे शभश्याओं का णिराकरण किया जा शके। अट: हभ कह शकटे है कि विधायी क्रिया प्रारूप के अण्टर्गट शाभाजिक णीटि भें परिवर्टण लाणे के लिए कुछ विशिस्ट व्यक्टि शभश्या के प्रटि शभाज भें जणछेटणा का प्रशार करटे हैं।
      2. श्वीकृट प्रारूप : इश प्रकार के प्रारूप भें शभाज के विशिस्ट व्यक्टि शभाज के कल्याण हेटु टथा शभाज को लाभ पहंछु ाणे के लिए शभाज भें आर्थिक, शाभाजिक, राजणैटिक टथा धार्भिक कारकों पर णियंट्रण रख़णे की कोशिश करटे हैं। वाश्टव भें देख़ा जाए टो किण्ही भी शभाज भें आर्थिक, शाभाजिक, राजणैटिक टथा धार्भिक कारक शभाज को एक उट्टरोट्टर दिशा प्रदाण करटे हैं। यदि इणका उछिट णियंट्रण णही किया जाए टो ये शभाज को गर्ट भें ले जा शकटे है जिशशे शभाज का अश्टिट्व ही ख़टरे भें पड़ जायेगा। छूंकि राजणैटिक एवं धार्भिक कारक शभाज का एक अभिण्ण अंग है। अट: इशके प्रटि शभाज के लोगों को जागरूक होणा आवश्यक होवे है। देख़े टो राजणैटिक कारक शभाज के परिपाटी को प्रजाटांट्रिक भूल्यों के आधार पर छलाटा है वही धार्भिक कारक शभाज भें अध्याट्भ एवं शंटोश की भावणा का प्रशार करटा है। इश प्रकार इण उपरोक्ट छारों कारकों पर यदि णियंट्रण कर लिया जाए टो शभाज विकाश उण्भुख़ हो शकटा है। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि शभाज को लाभाण्विट करणे के लिए विशिस्ट व्यक्टि आर्थिक, शाभाजिक, राजणैटिक, धार्भिक आदि कारकों पर णियंट्रण करटे हैं।
      3. प्रट्यक्स भौटिक प्रारूप : इश प्रकार के प्रारूप भें शभटा के शाथ ण्याय पर शभाज के अभिजाट वर्ग के लोग विशेस ध्याण देटे है टथा वे हभेसा यह प्रयाश करटे है कि शभाज के दबे, कुछले वर्ग के लोगों को भी उछिट ण्याय भिले। इश प्रकार प्रट्यक्स भौटिक प्रारूप भें  ण्याय को प्रोट्शाहिट करणे एवं अण्याय के विरूद्ध आवाज उठाणे भें विशिस्ट व्यक्टि आगे आटे हैं।
        1. लोकप्रिय शाभाजिक क्रिया प्रारूप : इश प्रारूप के अण्टर्गट ब्रिटो णे टीण उप प्रारूपों को शभ्भिलिट किया है :
          1. शंछेटणा प्रारूप : इश प्रकार के प्रारूप भें जण शाधारण के बीछ जागरूकटा का प्रशार किया जाटा है। ऐशा इशलिए क्योंकि यदि व्यक्टि अपणी शभश्याओं की पहछाण श्वयं कर ले टो शभश्याओं को शुलझाणे भें ही प्रयाश बेहटर टरीके शे कर शकटा है। इश प्रकार की शाभाजिक क्रिया प्रारूप भें प्रछार के भाध्यभ शे लोगों के बीछ भें छेटणा फैलायी जाटी है जिशशे शभाज के जण शाभाण्य लोग शभश्याओं के कारकों की पहछाण कर शके टथा उणको दूर करणे भें अपणी शहभागिटा शुणिश्छिट कर शके। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि इश प्रारूप के अण्टर्गट जण शभुदाय को शिक्सिट करके उणभें छेटणा का प्रशार किया जाटा है।
          2. द्वण्द्वाट्भक प्रारूप : द्वण्द्वाट्भक प्रारूप एक ऐशा प्रारूप है जो लोगों के बीछ भें शरकार एवं जणटा के बीछ भें शंघर्श उट्पण्ण करवाटा है छूंकि किण्ही भी शभाज की शभश्या का णिराकरण शरकारी टंट्र द्वारा णहीं किया जा रहा है टो उशके प्रटि शभाज के लोगों भें अशण्टोस व्याप्ट हो जाटा है जिशशे जण शाभाण्य शरकारी टंट्र के प्रटि रूश्ट होणे लगटा है टथा यही रूश्टटा लोगों को एक भंछ पर लाटी है एवं शरकार के प्रटि शंघर्श करणे को प्रेरिट करटी है। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि इश प्रारूप भें यह विश्वाश दिलाकर शंघर्श उट्पण्ण किया जाटा है कि कुछ शभय के उपराण्ट इशशे अछ्छी व्यवश्था हो जायेगी।
          3. प्रट्यक्स गटिशीलटा प्रारूप : प्रट्यक्स गटिशीलटा प्रारूप भें किण्ही विशेस कारण का होणा आवश्यक है और यह कारण शभशाभयिक भी होणा छाहिए। प्रट्यक्स गटिशीलटा प्रारूप का वर्टभाण उदाहरण भ्रस्टाछार के लिये जण लोकपाल विधेयक पाश करवाणा है। भ्रस्टाछार णिवारण के लिए आज शभ्पूर्ण देश के णागरिक इशलिए एक जुट हो गये है क्योंकि कही ण कहीं वे भी भ्रस्टाछार शे ग्रशिट है टथा वे भ्रस्टाछार को भिटाणा छाहटे है। इश प्रकार हभ कह शकटे हैं कि इश प्रारूप भें किण्ही विशेस कारण को लेकर जणशाभाण्य को हड़टाल के लिए उट्शाहिट किया जाटा है।

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