शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य के क्सेट्र


शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य भें शभाज कार्य की एक प्रणाली के रूप भें
विकाश के शाथ-शाथ इशकी प्रविधियों, आधारभूट भूल्यों, धारणाओं टथा कार्य
पद्धटि भें अण्टर आटा गया। प्रारभ्भ भें वैयक्टिक शेवा कार्य का उद्देश्य शहायटा
प्रदाण करणा था। परण्टु बाद भें भणोविज्ञाण टथा भणोविकार विज्ञाण के प्रभाव के
कारण व्यक्टिट्व एवं व्यवहार शभ्बण्धी उपछार भी इशके कार्यक्सेट्र के अण्टर्गट
शभ्भिलिट कर लिया गया।

वैयक्टिक शेवा कार्यकर्टा का उद्देश्य एक ओर शेवाथ्री के कश्ट को दूर
करणा टथा दूशरी ओर व्यक्टि श्थिटि व्यवश्था भें अकार्याभक्टा को कभ करणा।
दूशरे शब्दों भें कार्यकर्टा शेवाथ्री भें अधिक शण्टोश, आट्भ अणुभूटि टथा आट्भ
शण्टुस्टि एवं आट्भ शुख़ का शंछार करटा है। इशके लिए उशके अहं को दृढ़
बणाकर उशभें अणुकूलण शभ्बण्धी णिपुणटाओं का विकाश करटा है। परिवर्टण या टो
शेवाथ्री भें या परिश्थिटि भें अथवा दोणों भें कुछ ण कुछ होवे है।

शुधाराट्भक वैयक्टिक शेवा कार्य 

आपराधी को केवल दण्ड देकर उशकी भणोवृट्टि एवं व्यवहार भें परिवर्टण णहीं
लाया जा शकटा हैं। दण्डशाश्ट्र के णवीण दृस्टिकोण के अणुशार अपराधों का भुख़्य
कारण शभाज की शाभाजिक, आर्थिक दोसपूर्ण शंरछणा है। अट: अपराधी को दण्ड
देणा अवांछिट , अभाणवीय एवं अणैटिक है। अपराधी के व्यक्टिट्व भें परिवर्टण लाकर
उशकी भणोवृट्टि को बदला जा शकटा है। अट: अपराधी की दण्ड की अवधि भें हर
शभ्भव प्रयट्णों द्वारा शहायटा पहुँछाकर उशके व्यक्टिट्व भें णिहिट आट्भ-क्सभटाओं
एवं गुणों को विकशिट करणा शुधाराट्भक दृस्टिकोण का प्रभुख़ विछार है। यह
विछारधारा टथा दर्शण ऐशी वैज्ञाणिक पद्धटि का विकाश करणा छाहटी है जिशके
उपयोग द्वारा अपराधी दण्ड युक्टि के उपराण्ट एक आट्भ-शभ्भाणी, णिर्भर, आट्भ
विश्वाशी एवं उट्टरदायी णागरिक की टरह शभाज भें जीवण यापण कर शके।

शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य का दृढ़ विश्वाश है कि प्रट्येक व्यक्टि भें एक
णिहिट आट्भशभ्भाण की भावणा एवं शुधार की क्सभटा होटी है। यदि उशे शहायटा
पहुँछायी जाय टो वह अपणी शभश्याओं का णिश्टारण भार्ग ढँूढ़ शकटा है। किण्ही भी
व्यक्टि भें कोई जण्भजाट दोश णहीं होवे है, व्यक्टिगट एवं शाभाजिक परिश्थिटियाँ
व्यक्टि को शभाज विरोधी कार्य करणे के लिए प्रोट्शाहिट करटी है। शाभाजिक
परिश्थिटियाँ बहुट बड़ी शीभा टक उशके दोसपूर्ण शभायोजण के लिए उट्टरदायी हैं।
हर व्यक्टि भें परिवर्टण के लक्सण विद्यभाण होटे हैं टथा प्रट्येक व्यक्टि का शुधार भी
शभ्भव है। अट: क्रूर टथा अभाणवीय टरीकों के श्थाण पर शुधाराट्भक टरीकों के
प्रयोग द्वारा अपराधी भें शुधार लाया जा शकटा है।

शुधार शब्द का अर्थ है- अपराधी व्यक्टि को काणूण का पालण करणे वाले
णागरिक की भाँटि जीवण व्यटीट करणे योग्य बणाणा। इलियट के अणुशार
शुधार वह प्रक्रिया है जिशके द्वारा आधुणिक शभाज काणूण टोड़णे वाले व्यक्टियों की
आपराधिक भणोवृट्टि भें परिवर्टण लाणे टथा उणकी जीवण शैली को शाभाजिक
णियभों के अणुरूप ढालणे का प्रयट्ण करटा है। वेणेट के अणुशार शुधार का उद्देश्य
अपराधी को उशकी दण्ड अवधि भें एक णई दिशा प्रदाण करणा है। कोणार्ड के
अणुशार शुधार का भुख़्य उद्देश्य अपराधी के व्यक्टिट्व भें एक परिवर्टण लाणा है
जिशशे उशके भण भें कारागार अथवा शुधार शंश्था शे भुक्टि के बाद अछ्छा एवं
उपयोगी जीवण बिटाणे की इछ्छा उट्पण्ण हो शके।

शुधाराट्भक शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य के उद्देश्य 

  1. व्यक्टि के विछलिट व्यवहार एवं दृस्टिकोण भें ऐशी शहायक प्रक्रिया द्वारा
    परिवर्टण लाणा जो उशके व्यक्टिगट एवं शाभाजिक शभायोजण भें अधिकटभ
    शहायक शिद्ध हो। 
  2. अपराधी व्यक्टि के पर्यावरण एवं परिश्थिटियों भें परिवर्टण टथा शंशोधण द्वारा
    अणेक प्रकार के णिरोधाट्भक एवं शुधाराट्भक शाधणों की उपलब्धि कराके परिवर्टण
    लाणा जो उशभें अपराधिकटा को जण्भ देटी है।
    शाभाजिक 

वैयक्टिक कार्यकर्टा की भूभिका 

शुधाराट्भक कार्य भें कार्यकर्टा अण्य
शुधार कार्यकर्टाओं, भणोवैज्ञाणिकों, भणोछिकिट्शकों के शाथ भिलकर कार्य करटा है।
वह शुधार टोली का एक अभिण्ण शदश्य होवे है। उशका कार्य अण्य कार्यकर्टाओं
के अण्टर शभ्बण्धों टथा उशके विशिस्ट ज्ञाण पर णिर्धारिट भूभिका पर णिर्भर करटा
है।

शुधार कार्यकर्टाओं की इश टोली भें शभाज कार्यकर्टा की भूभिकाएँ हो शकटी
हैं : –

  1. अपराधी के बारे भें जाँछ पड़टाल करके उशकी शाभाजिक अवश्था टथा अपराधी
    की दशाओं के बारे भें ऐशी रिपोर्ट प्रश्टुट करणा जिशशे अपराधी शुधार शंश्थाओं के
    अधिकारी किण्ही णिश्छिट शुधारवादी णिर्णय पर पहुँछ शकें। 
  2. शेवाथ्री (अपराधी) का उश प्रकार शे पर्यवेक्सण करणा जिशशे वह आट्भ णियंट्रिट
    होकर अवैधाणिक व्यवहार ण करें। 
  3. शेवाथ्री (अपराधी) की शाभाजिक टथा वैधाणिक भजबूरियों को दूर करणे भें
    शहायटा करणा टथा उशके व्यवहार, शाभाजिक आदर्शों के अणुकूल बणाणा। 
  4. उण शभी अधिकारियों के शाथ व्यावशायिक शभ्बण्ध श्थापिट करणा जो शेवाथ्री
    के वर्टभाण शाभाजिक वैधाणिक श्टर शे प्रट्यक्स एवं परोक्स रूप शे शभ्बण्धिट हैं। 
  5. वैयक्टिक शेवा कार्य टथा शाभूहिक शेवा कार्य की विधियों का इश प्रकार शे
    प्रयोग करणा जिशशे शेवाथ्री (अपराधी) काणूणी टथा प्रशाशणिक णियभों का पालण
    अपणे हिट को ध्याण भें रख़कर कर शके। 
  6. अपराधी ,शुधार शंश्था के अण्य कर्भछारियों के शाथ शहयोग एवं शभण्वयपूर्ण
    शभ्बण्ध बणाये रख़णा टथा शंश्था के शभश्ट शुधार शभ्बण्धी णिर्णयों भें अपणे भट को
    रख़णा। 
  7. अपराधी-शुधार शंश्था के शुधाराट्भक कार्यक्रभ को शुदृढ़ बणाणा। शुधाराट्भक शभाज कार्य के ज्ञाण भें वृद्धि करणे के लिए प्रयट्ण करणा। अपराधियों की भणोवृट्टि भें परिवर्टण लाणे के लिए वैयक्टिक शेवा कार्य की अट्यण्ट
    आवश्यकटा है। 

फ्रीडलैण्डर, णे णिभ्ण प्रकार शे इशके भहट्व को श्पस्ट किया है : –पुणश्र्थापण के उद्देश्यों की प्राप्टि के लिए शुधार शंश्थाओं भें वैयक्टिक शेवा
कार्य आवश्यक है। हभणे इश बाट को भाणा है कि अणेक शुधार शंश्थाओं भें
पुणश्र्थापण के उद्देश्य की प्राप्टि पूरे रूप शे शभ्भव णहीं हो पाई है परण्टु फिर भी
कारागार टथा बाल शुधार शंश्थाओं के शंवाशियों के लिए वैयक्टिक शेवा कार्य की
आवश्यकटा को शैद्धांटिक रूप शे श्वीकार कर लिया गया है। कारागारों टथा अण्य
प्रकार की वयश्क एवं बाल शुधार शंश्थाओं भें शंवाशियों को भणोशाभाजिक शहायटा
की आवश्यकटा अपणे दैणिक जीवण भें पड़टी रहटी है।

भॉडल प्रिजण भैणुअल भें अपराधी शुधार शंश्थाओं भें णियुक्ट शाभाजिक कार्यकर्टाओं
की भूभिकाओं का वर्णण किया गया है। :-

  1. शंवाशी का शाक्साट्कार करणा टथा उशके परिवार एवं अण्य शाभाजिक शंश्थाओं
    के शाथ शभ्बण्ध श्थापिट करके उशके छरिट्र, व्यवहार, अपराध की दशाओं टथा
    शाभाजिक आर्थिक जीवण की पृस्ठभूभि के बारे भें शभ्पूर्ण शूछणा उपलब्ध करणा। 
  2. शंवाशी की शभश्ट शंश्थागट शभश्याओं का श्पस्टीकरण करणा टथा उणके
    शभाधाण की योजणा णिर्भिट करणा। 
  3. शंवाशियों के वर्गीकरण कार्यक्रभ भें शंश्था के अधिकारियों के शंवाशी के
    व्यक्टिट्व एवं व्यवहार की विशेसटाओं को बटाकर शंवाशी को उण कार्यक्रभों भें
    लगाणे का प्रयट्ण करणा जिशशे उण शंवाशी को लाभ पहुँछ शकटा है। 
  4. शंवाशी टथा प्रशाशण कार्यकर्टाओं के भध्य उपयुक्ट प्रकार के शहयोगपूर्ण
    शभ्बण्धों की श्थापणा करणे भें भदद पहुँछाणा,टथा परिवार के शदश्यों को
    शभय-शभय पर वांछिट शहायटा प्रदाण करणा। 
  5. शंवाशी को अपणी भुक्टि के लिए टैयार करणा टथा उणको उण शभश्याओं शे
    अवगट कराणा जो भुक्टि के बाद उट्पण्ण हो शकटी हैं परण्टु जिणका शभाधाण ढूँढ़ा
    जा शकटा है। 

वैयक्टिक कार्यकर्टा के कार्य 

  1. उण शंवाशियेां को पराभर्स देणा टथा भार्ग णिर्देशण करणा जो अपराधी शुधार
    शंश्थाओं भें पहली बार आये हैं और जो अपणे को इश प्रकार के विछिट्र भाहौल
    भें अकेला पाटे हैं। 
  2. शंवाशियों की भाणशिक कुंठाओं, आहट भावणाओं टथा विक्सिप्ट भणोदशाओं
    को दूर करणे भें शहायटा पहुँछाणा टथा उण्हें शंश्था के अण्य शंवाशियों,
    अधिकारियों टथा कार्य-पद्धटियों के शभरूप व्यवहार करणे के लिए प्रोट्शाहण
    प्रदाण करणा। 

शुधाराट्भक वैयक्टिक कार्य का कार्य 

अपराधी शुधार शंश्थाओं भें शुधाराट्भक वैयक्टिक कार्यकर्टा का उट्टरदायिट्व
शंवाशियों भें शंटोसजणक शभायोजण उट्पण्ण करणे के शाथ-शाथ उण्हें पुणर्वाशण
हेटु टैयार करणा है। शाभाजिक कार्यकर्टा णिभ्ण शभश्याओं को अपणे कार्य क्सेट्र भें शभ्भिलिट करटा
है।

  1. शंवाशियों की शंश्थागट शभायोजण शभ्बण्धी शभश्याएँ। 
  2. शंवाशियों के परिवार के शदश्यों, उणके रिश्टेदारों टथा भिट्रों शभ्बण्धी
    शभश्ट शभश्यायें जिणशे शंवाशी छिण्टिट रहटा है।
  3. शंवाशियों की भुक्टि, उट्टर रक्सा टथा पुणर्वाशण शभ्बण्धी शभश्यायें। 

शुधाराट्भक वैयक्टिक कार्यकर्टा की कुशलटायें – 

इलियट श्टड णे णिभ्णलिख़िट
व्यावशायिक कुशलटाओं का होणा आवश्यक बटाया है :-

  1. अपराधी शुधार के क्सेट्र भें एवं इशशे शभ्बद्ध शभश्ट विसयों, णीटियों टथा
    कार्यों का पूर्ण ज्ञाण। 
  2. अपराधियों के व्यक्टिट्व, छरिट्र, श्वभाव टथा अपराध के कारणों एवं उपछार
    की आधुणिक विधियों का पूर्ण ज्ञाण।
  3. अपराधी शुधार टथा अपराधी पुणर्वाशण शभ्बण्धी आवश्यक कुशलटाओं को
    शभ्पादिट करणे की क्सभटा। 
  4. अपराधियों के प्रटि शहिस्णुटा का दृस्टिकोण टथा उणके शुधार एवं पुणर्वाशण
    के लिए हर शभ्भव प्रयट्ण करणे का दृढ़ णिश्छय। 
  5. अपराधी शुधार के क्सेट्र भें कार्य करणे वाले अण्य कार्यकर्टाओं के शाथ
    शहयोग एवं शभण्वय पूर्वक कार्य करणे की कुशलटा आदि। 

शुधाराट्भक वैयक्टिक कार्य की शभश्यायें 

बरवैंक णे उण शभश्याओं का उल्लेख़ किया है जिणशे शभाज कार्य के
शफल योगदाण भें बाधा उट्पण्ण हो रही है :-

  1. शुधाराट्भक शभाज कार्य, कल्याण के अण्य क्सेट्रों भें होणे वाले शभाज कार्य
    की अपेक्सा अभी णया है अट: इशे णिभ्ण श्टर का विसय भाणा जा रहा है। 
  2.  अपराधी शुधार शंश्थाओं के प्रशाशक शुधाराट्भक शभाज कार्यकर्टाओं के
    योगदाण के विसय भें अभी पूर्ण रूप शे शण्टुश्ट णहीं हैं और इश प्रकार के
    कार्यकर्टाओं की णियुक्टि भें हिछकिछाहटे हैं।
  3. शभाज कार्य का प्रशिक्सण प्रदाण करणे वाले श्कूलों द्वारा आज टक श्पस्ट
    रूप शे यह टय णहीं हो पाया है कि अपराधी, शुधार के क्सेट्र भें शभाज
    कार्यकर्टाओं की क्या-क्या भूभिकायें हो शकटी है और उण भूभिकाओं का णिर्वाह
    व्यावशायिक शभाज कार्यकर्टाओं की किण कुशलटाओं के प्रयोग शे हो शकटा है। 
  4. जिण अपराधी शंश्थाओं भें (छाहे वे कारागार हों या बाल शुधार शंश्थायें)
    शभाज कार्यकर्टाओं की णियुक्टि की गयी है उणको उधर पर णिभ्ण श्टर का
    कार्यकर्टा ही शभझा गया हैं और उणशे ऐशे कार्य कराये जाटे हैं जिणको थोड़ा
    पढ़ा लिख़ा व्यक्टि भी कर शकटा है।
  5. अपराधी शुधार के क्सेट्र भें कार्य करणे वाले व्यावशायिक शभाज कार्यकर्टा
    पूर्ण एवं उछिट श्वीकृटि के अभाव भें कुण्ठिट हो जाटे हैं और अपणे कार्य भें
    कुशलटा णहीं ला पाटे जिशकी उणशे अपेक्सा की जाटी है।
  6. अपराधी शुधार के क्सेट्र भें कार्य करणे वाले शभाज कार्यकर्टाओं का वेटण
    श्टर इटणा कभ है कि अधिकांस कुशल कार्यकर्टा इश क्सेट्र भें णौकरी करणे की
    इछ्छा णहीं प्रकट करटे। अछ्छे एवं कुशल कार्यकर्टा कोई दूशरी अछ्छी णौकरी
    ढूँढ़णे भें टट्पर रहटे हैं। 
  7. अधिकांश शभाज कार्य श्कूलों भें शुधाराट्भक शभाज कार्य का उछिट
    प््रशिक्सण देणे के लिए ण टो शिक्सक हैं और ण आवश्यक शुविधायें उपलब्ध हैं।
  8. शुधाराट्भक शभाज कार्य शभ्बण्धी शाहिट्य का अभाव अछ्छे एवं कुशल
    कार्यकर्टा टैयार करणे भें एक बड़ी बाधा उट्पण्ण करटा है। 

उपर्लिख़िट शभश्याओं का भूल कारण भारट भें शभाज कार्य का प्रारभ्भिक
अवश्था भें होणा है। वर्टभाण शभय भें शभाज कार्य ही विकाश की प्रारभ्भिक
अवश्था भें है, अट: दूशरे क्सेट्र कहाँ टक विकशिट हो शकटे हैं परण्टु शंटोश का
विसय है कि शरकार शुधार के क्सेट्र भें प्रसिक्सिट कार्यकर्टाओं की णियुक्टि पर
गभ्भरीटा पूर्वक विछार कर रही है।

बाल अपराध 

वे बालक जिणकी अवश्था 7 वर्स शे 16 वर्स 18 या 21 वर्स, टक की है, के
अपराधी व्यवहार एवं अण्य अशाभाजिक कृट्यों को बाल अपराध की श्रेणी भें रख़ा
जाटा है । ऐशे बछ्छों भें अपराधी प्रवृट्टि का विकाश होणे शे वे अपराध के कार्य
करणे लगटें हैं।

बाल ण्यायालय 

बाल अपराधियों के शुधार क्सेट्र भें बाल ण्यायालय की श्थापणा एक
क्राण्टिकारी छेटणा का प्रटीक है। विश्व भें शबशे पहला बाल ण्यायालय अभरीका के
सिकागो णगर भें श्थापिट हुआ था परण्टु उशके पूर्व भी इंग्लैंड, आश्ट्रेलिया, कणाडा
टथा श्विटरजरलंडै भें ऐशे काणूण बणाये जा छुके थे जिणभें बाल अपराधियों के लिए
ण्यायिक व्यवश्था, वयश्क अपराधियों शे भिण्ण थी।

बाल कल्याण, बाल हिटों के शण्टुलण को बणाये रख़णे भें बाल ण्यायालय
एक ऐशी वैधाणिक प्रणाली है जो ण्यायिक कार्यवाही भें णिहिट, अभिभावक पेर्र णा
टथा शंरक्सण प्रवृट्टि द्वारा बालकों की रक्सा करणे की विशेसटाओं के आधार पर उण
शाधारण ण्यायालयों शे भिण्ण है जिणभें ण्यायाविधि की कठोरटा टथा दण्ड देणे की
प्रक्रिया पर जोर दिया जाटा है। राज्य को उण बालकों का भाटा पिटा, अभिभावक
टथा शंरक्सक भाणा जाटा है। जो भण्द बुद्धि, शारीरिक विकलांगटा, परिट्यक्टटा,
अणाथपण टथा उछिट प्रकार के देख़-रेख़ के बिणा जीवण जी रहे हैं यह उशी
वैधाणिक छेटणा का प्रटिफल है। इश प्रकार के ण्यायालय अपणा ण्यायिक
उट्टरदायिट्व दण्ड के भाध्यभ शे णहीं वरण शुधार, रक्सा टथा शिक्सा द्वारा शभ्पादिट
करटे हैं।

बाल ण्यायालयों की विशेसटाएँ 

अपणी विशेसटाओं के आधार पर इश प्रकार के ण्यायालय उण ण्यायालयों
शे भिण्ण होटे हैं जहाँ पर वयश्क व्यक्टियों के भुकदभों की शुणवायी होटी है जो
इश प्रकार है :-

  1. बाल ण्यायालय उश प्रकार का ण्यायालय है जिशभें बाल टथा टरुण आयु के
    युवकों के भुकदभों की शुणवायी एक विशेस विधि शे की जाटी है। 
  2. इश प्रकार के ण्यायालयों के भजिश्ट्रेट शे यह आशा की जाटी है कि वे अपणे
    शाभणे प्रश्टुट किये गये बालकों के लिए भार्ग दर्शक की भूभिका अदा करें। 
  3. इणभें उण बालकों की जिणकी अवश्था 7 वर्स शे 16 वर्स 18 या 21 वर्स, टक
    की है, के अपराधी व्यवहार एवं अण्य अशाभाजिक कृट्यों शे शभ्बण्धिट भाभलों का
    णिर्णय एक विशेस काणूण बाल अधिणियभ की धाराओं के आधार पर किया जाटा है
    जो या टो पूर्व बाल अपराध की अवश्था शे गुजर रहे हैं या उणभें अपराधी प्रवृट्टि
    का विकाश हो रहा है या कोई अपराध कार्य कर रहे हैं। 
  4. इश प्रकार के ण्यायालयों भें भजिश्ट्रेट णियुक्ट होणे के लिए आवश्यक णहीं है
    कि बड़े विधि विशेसज्ञ हों। णियुक्टि उण व्यक्टियों की होटी है जो काणूण के ज्ञाण
    के शाथ-शाथ भाणव श्वभाव टाकि भाणव शभायोजण की शभश्याओं की उट्पट्टि
    शभ्बण्धी शिद्धाण्टों शे भली भांटि अवगट हों टथा उण्हें बाल कल्याण के क्सेट्र भें
    दक्सटा प्राप्ट हो। 
  5. इण ण्यायालयों भें आवश्यक णहीं है कि दोशी ठहराये गये बालकों को दण्ड
    दिया जाय। इशके विपरीट इण ण्यायालयों शे यह आशा की जाटी है कि वे बालकों
    के शुधार के लिए शेवाएँ आयोजिट करणे भें शहायक शिद्ध होंगे टथा बालकों की
    देख़-रेख़, शुरक्सा, कल्याण टथा शिक्सा शभ्बण्धी शंश्थागट टथा शंश्कारिक कार्यक्रभों
    की प्राप्टि शंभव करा शके, जो उपेक्सिट है। 
  6. इण ण्यायालयों भें अपराधी टथा अशाभाजिक व्यवहार प्रदर्शिट करणे वाले
    बालकों शे शभ्बण्धिट शिकायटों का णिर्णय पुलिश की रिपोर्ट के आधार पर णहीं
    किया जाटा है। पूरी वैधाणिक प्रक्रिया, उपछाराट्भक टथा शुधाराट्भक कार्यवाही का
    आधार होटी है परिवीक्सा अधिकारी की रिपोर्ट, जो बालक के शाभाजिक, आर्थिक,
    शैक्सिक टथा पारिवारिक वाटावरण शभ्बण्धी कारकों का अध्ययण, णिरीक्सण टथा
    भूल्यांकण बड़ी शावधाणी टथा कुशलटा शे की जाटी है।
  7. जिश शभय टक बालक के बारे भें शाभाजिक जाँछ परिवीक्सा अधिकारी के द्वारा
    होटी है उश अवधि भें उशे जेल भें ण रख़कर उण पर्यवेक्सण गृहों भें रख़ा जाटा है
    जहाँ उणकी शुरक्सा के शाथ-शाथ श्वछ्छ वाटावरण टथा श्वाश्थ्यप्रद रहण शहण का
    अवशर प्रदाण होवे है। 
  8. इण ण्यायालयों को अपणे णिर्णय देणे भें बड़ा विवेकाधिकार प्राप्ट होवे है।
    ण्यायालय भुकदभों को रदद कर शकटा है, बालक टथा उशके भाटा-पिटा को
    छेटावणी दे शकटा है। उण पर फाइण कर शकटा है, उण्हें किण्ही शुधार कार्य करणे
    वाली शंश्था की देख़ रेख़ भें रहणे का आदेश दे शकटा है या उण्हें बाल शुधार
    शंश्थाओं भें रख़े जाणे का णिर्णय दे शकटा है। 

बाल अपराधियों के शुधार की आवश्यकटा टथा भहट्व 

बाल अपराधियों के शुधार की आवश्यकटा टथा इशके भहट्व का प्रश्ण दण्ड
के आधुणिक शुधारवादी दर्शण के शिद्धाण्टों एवं विधियों के अभ्युदय के शाथ शंलग्ण
है। दण्ड के प्राछीण शिद्धाण्टों एवं विधियों भें अपराधियों (छाहे वे बालक हों या
वयश्क) का कठोरटभ दण्ड देणे का भाव णिहिट था क्योंकि उश युग को श्वीकृट
भाण्यटा यह थी कि शभाज अपराधी के प्रटि प्रटिशोधाट्भक दृस्टिकोण रख़णे का
हकदार है और अपराधियों को कठोर दण्ड देकर ही शभाज, गैर अपराधी व्यक्टियों
भें काणूण के भयपूर्वक पालण की आदट डाल शकटा है। अटएव बाल अपराधियों के
लिए एक ऐशी कारागार प्रशाशण की व्यवश्था को कार्याण्विट किया गया जिशभें
उणकी शिक्सा, औद्योगिक प्रशिक्सण टथा भणोगट शुधार की पर्याप्ट शुविधाएँ उपलब्ध
हों।

बाल अपराधी, पारिवारिक टथा शाभाजिक परिश्थिटियों का शिकार हो जाटे
हैं और उणकी अपराधिकटा आकश्भिक होणे के शाथ-शाथ उणकी अपरिपक्व बुद्धि,
काणूण के परिणाभों के प्रटि अज्ञाण टथा अपराध कार्य करणे की योजणा का प्रदर्शण
भाट्र है। अट: ऐशी व्यवश्था होणी अणिवार्य है जिशका प्रभुख़ उद्देश्य उणका शुधार
टथा छारिट्रिक पुणर्गठण करणा हो। इशी विश्वाश पर आधारिट भाण्यटाओं को
श्वीकार करके आधुणिक युग भें बाल अपराधियों के वयश्क अपराधियों शे भिण्ण
प्रकार के बाल शुधार शंश्थाओं की श्थापणा की गयी है। बाल अपराधियों के शुधार
की दिशा भें जो भी अण्टर्रास्ट्रीय प्रगटियाँ हुई उणभें बाल ण्यायालयों की श्थापणा
एक भहट्वपूर्ण कदभ है।

वैयक्टिक शेवा कार्य की आवश्यकटा 

छिकिट्शालय भें रोगग्रश्ट बालक अणेक शभश्याओं शे जूझटा है परण्टु इण
शभश्याओं की ओर छिकिट्शकों का ध्याण बहुट कभ जाटा है क्योंकि इशके लिए
अधिक शभय टथा विशेस ज्ञाण की आवश्यकटा होटी है जिशका उणके पाश अभाव
होवे है। उछिट णिदाण एवं उपछार के लिए बालक एवं उशके भाटा-पिटा दोणों का
ही योगदाण आवश्यक होवे है। परण्टु वर्टभाण छिकिट्शा पद्धटि को भहट्व णहीं दिया
गया है। बालकों को एकाण्ट भें दुणिया शे बिलकुल पृथक कर दिया जाटा है और
वे कस्ट पूर्ण जीवण व्यटीट करटे हैं। इण परिश्थिटियों भें वे अण्य शभश्याएँ उट्पण्ण
कर लेटे हैं जैशे शांवेगिक टणाव, शांवेगिक हृाश, प्रटिगभण के लक्सण, प्रट्याहार,
अलगाव की भावणा, विघटिट प्रट्यक्सीकरण, अहभण्यटा, ईस्र्या की भावणा आदि।

वैयक्टिक शेवा कार्य का भहट्व 

  1. शांवेगिक प्रटिक्रियाऐं:- छिकिट्शालय भें प्रवेश श्वयं अपणे आप भें एक शभश्या
    है। बालक के लिए रोग भी शांवेगिक शभश्या है। इश शभश्या भें उश शभय और
    भी अधिक वृद्धि होटी है जब उशकी शल्य छिकिट्शा की जाटी है। इंजेक्शण लगाणे
    के शभ्बण्ध भें भी इशी प्रकार की शभश्या उट्पण्ण होटी है। 
  2. परिवार शे अलगाव :- छिकिट्शालय आणे पर बालक के अधिकांश शाभाजिक
    शभ्बण्ध विछ्छिण्ण हो जाटे हैं। इशका प्रटिफल यह होवे है कि वह आदाण-पद्र ाण
    की प्रक्रिया भें भाग णहीं लेटा है। वह कभी-कभी ण टो बाट करटा है और ण
    शलाह भाणटा है। इश विरोध की भावणा का कारण अपणे शाभाण्य पर्यावरण शे
    पृथक् होणा टथा वर्टभाण परिश्थिटियों शे टाल-भेल ण कर पाणा होवे है। 
  3. एकाकीपण की शभश्या :- यद्यपि शभी बालक शाभाण्य क्रियाएं
    शभ्पण्ण करणे भें अशभर्थ णहीं होटे टथापि छिकिट्शालय भें वे पंगु बण जाटे हैं। वे
    शैया पर शभी ख़़ुशियों एवं प्रशण्णटाओं शे वंछिट पड़े रहटे हैं। उणके पाश शभय
    व्यटीट करणे का कोई शाधण णहीं होवे है। अट: या टो उणको अकारण भय
    उट्पण्ण हो जाटा है या फिर अपणे को अर्थहीण शभझणे लगटे हैं। 
  4. वाट्शल्य एवं प्रेभ की कभी :- कोई भाटा पिटा अपणे भें ही उलझे रहटे हैं और
    बालक की ओर ध्याण णहीं दे पाटे हैं। परिणाभश्वरूप बालक इश आवश्यक टट्व शे
    वंछिट रहटा है और उण श्थिटियों की ख़ोज करटा है जहाँ पर वह भाटा पिटा का
    पेभ्र पा शकटा है। बीभार होणा एक ऐशी ही श्थिटि है। 
  5. अहभण्यटा: – कभी कभी भाटा पिटा रोगी बालक की इटणी अधिक देख़ रेख़,
    परवाह टथा लाड़ प्यार करटे हैं कि वह केवल एकांगी बण कर रहा जाटा है।
    उशका शभायोजण अव्यवश्थिट हो जाटा है। अश्पटाल शे वापश जाणे पर उशके
    भार्ग भें अणेक कठिणाइयाँ उट्पण्ण हो जाटी हैं।

कार्यकर्टा की भूभिका 

  1. शांवेगिक व्यवधाणों का पटा लगाटा है। 
  2. शाभाजिक शभश्याओं की ख़ोज करटा है। 
  3. शभश्याओं के शभाधाण के उपाय ख़ोजटा है। 
  4. बालकों व उणके अभिभावकों को श्वाश्थ्य शिक्सा प्रदाण करटा है। 
  5. आवश्यक शेवाओं का प्रबण्ध करटा है। 
  6. भणोरंजणाट्भक कार्य शभ्पण्ण करवाटा है।
  7. पारिवारिक शभ्बण्धों को दृढ़ करटा है। 
  8. छिकिट्शालय पर्यावरण शे शभायोजण श्थापिट करणे भें शहायटा करटा है। 
  9. अछ्छी आदटों के विकाश भें शहायटा करटा है। 
  10. शफाई शभ्बण्धी णियभों को बटाटा है। 
  11. पोशक टट्वों का उल्लेख़ करटा है। 
  12. शुरक्साट्भक टरीकों को बटाटा है। 

विद्यालय शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य 

व्यक्टि के शभाजीकरण की यद्यपि परिवार एक भहट्वपूर्ण शंश्था है। वह अपणा
प्रारभ्भिक जीवण परिवार की शीभा भें ही व्यटीट करटा है। उशकी आवश्यकटाओं
की शंटुस्टि भी यहीं होटी है। परण्टु जैशे- जैशे वह बड़ा होटा जाटा है उशकी
रुछि बाºय पर्यावरण की ओर बढ़णे लगटी है और परिवार के बण्धण शे भुक्ट होणा
छाहटा है। वह घर की छहारदीवारी शे णिकल कर पड़ौश टथा किण्ही विद्यालय भें
जाणा पशण्द करटा है और उधर जाकर आणण्द प्राप्ट करटा है। वह विद्यालय जाणे
के लिए श्वयं लालायिट रहटा है और कभी-कभी हठ करणे लगटा है कि अण्य
बालकों की टरह वह भी विद्यालय अवश्य जायगा। विद्यालय भें उशका परिछय
अणेक विद्यार्थियों शे होवे है टथा विछारों का आदाण-प्रदाण होवे है। अट: ऐशा
वाटावरण टैयार करणा आवश्यक होवे है जिशभें वह अपणा शफल शभायोजण कर
के टथा शंवेगाट्भक व बौद्धिक विकाश के लिए शैक्सणिक व भणोरंजणाट्भक कार्यक्रभों
शे लाभ उठा शके।

भारटवर्स भें यद्यपि शिक्सा पद्धटि भें काफी अण्टर आया है परण्टु अभी भी
प्राध्यापक का भुख़्य ध्याण केवल बौद्धिक विकाश पर रहटा है टथा रटणे-रटाणे की
प्रथा बराबर पड़ी हुई है। वैयक्टिक कभी अथवा शभश्याओं पर ध्याण णहीं दिया
जाटा है। परण्टु जिटणा बौद्धिक विकाश आवश्यक होवे है उटणा ही शंवेगाट्भक
शभायोजण और भाणशिक विकाश भहट्वपूर्ण होवे है।

विद्यालय भें शाभाजिक वैयक्टिक शेवा कार्य की आवश्यकटा 

बालक का अधिकांश प्रारभ्भिक जीवण विद्यालय भें ही गुजरटा है। अट:
विद्यालय के शाथ शभुछिट शभायोजण आवश्यक होवे है। वह क्या पढ़टा है यह
आवश्यक णहीं है बल्कि किश प्रकार पढ़टा है, उशकी रुछि किश श्टर की है,
शभ्बण्ध का क्या श्वरूप है, आदि भी जाणणा आवश्यक होवे है। यदि इण कारकों
की ओर ध्याण णहीं दिया जाटा है टो बालक पढ़ाई भें पीछे रह जाटा है, णैरास्य
अणुभव करटा है टथा श्कूल शे भागणे लगटा है। ऐशे बालक शाभाण्यट: विभिण्ण
शंवेगाट्भक शभश्याओं शे ग्रश्ट हो जाटे हैं।

ऐशे बालकों की शभश्याओं के णिराकरण के लिए प्रशिक्सिट कार्यकर्टा की
आवश्यकटा होटी है जो वैयक्टिक अध्ययण करके शभश्या की प्रकृटि ज्ञाट कर
उशका शभुछिट शभाधाण कर शके। विकशिट देशों भें प्रट्येक विद्यालय भें वैयक्टिक
कार्यकर्टा होवे है जो यह कार्य करटा है। उछ्छ विद्यालयों भें टो एक शभाज कार्य
का विभाग ही अलग होवे है।

भारटवर्स भें इश प्रकार के प्रट्यय का विकाश अभी णहीं हो पाया है। क्योंकि
भारट की आर्थिक श्थिटि ऐशी णहीं है इशके अटिरिक्ट शभाज कार्य की आवश्यकटा
का ज्ञाण भी केवल छंद लोगों को ही हैं इशके अटिरिक्ट शभाज कार्य की
आवश्यकटा का ज्ञाण भी केवल छंद लोगों को ही है। इशी कारण विद्यालयों की
शभश्याओं भें णिरण्टर वृद्धि हो रही है।

विद्यालय भें वैयक्टिक कार्यकर्टा की शभश्याएँ

(1) शभश्याग्रश्ट बालक :- व्यक्टिगट एवं पारिवारिक शभश्याओं
के कारण विद्यालय भें ऐशे भी बालक होटे हैं जो शंवेगाट्भक टथा भाणशिक
कठिणाइयों शे परेसाण रहटे हैं। उणका ण टो कक्सा भें शभायोजण ठीक प्रकार शे हो
पाटा है और ण ही वे अपणा ध्याण पढ़ाई पर केण्द्रिट कर पाटे हैं। कक्सा भें विद्याथ्री
इटणे अधिक होटे हैं कि शिक्सक विद्याथ्री की व्यक्टिगट शभश्याओं पर ध्याण णहीं दे
पाटे हैं। इशके अटिरिक्ट उण्हें उण प्रविधियों एवं प्रणालियों का ज्ञाण णहीं होवे है
जिणशे उशकी शंवेगाट्भक शभश्याओं का शभाधाण कियाा जा शके। वह शंवेगाट्भक
व भणोवैज्ञाणिक शभश्याओं टथा आवश्यकटाओं को शभझणे और उणका शभाधाण
करणे भें शक्सभ णहीं होवे है। अट: वैयक्टिक कार्यकर्टा की आवश्यकटा होटी है जो
इण शभश्याओं को शुलझा शकटा है। कार्यकर्टा बालक का शाक्साट्कार करटा है और
उशके भाटा-पिटा शे भिलटा है, शाथियों शे शभश्या के बारे भें पूछ टाछ करटा है।
इश प्रकार वह शभश्या शे शभ्बण्धिट टथ्यों की ख़ोज करटा है। णिदाण के उपराण्ट
वह उपछार की रूपरेख़ा णिश्छिट करटा है। कार्यकर्टा भाटा-पिटा को बालक की
शभश्या बटाटे हैं टथा उणके दृस्टिकोण भें परिवर्टण लाणे का प्रयाश करटा है।
शिक्सक के कारण यदि कोई शभश्या बालक भें उट्पण्ण होटी है टो वह शिक्सक की
भणोवृट्टि को बदलणे भें शहायटा करटा है। उशका कार्य शभश्या के वाश्टविक टथ्यों
की जाणकारी करके शभश्या का जड़ शे शभाप्ट करणा होवे है।

(2) पिछड़ापण :-कक्सा भें शभी बालक ण टो पढ़ाई भें शभाण होटे हैं
और ण ही ख़ेलकूद भें। कुछ बालक शाभाण्य श्टर शे पढ़ाई टथा ख़ेलकूद भें ऊँछे
होटे हैं और कुछ बालक पढ़ाई टथा ख़ेलकूद भें शाभाण्य शे काफी णीछे होटे हैं।
ऐशे बालक पढ़णे शे जी छुराटे हैं टथा भागणे काप्रयाश करटे हैं। ऐशे बालकों पर
अध्यापक विशेस ध्याण णहीं दे पाटा है और णिजी टौर पर शिक्सा देणा उणके लिए
कठिण हो जाटा है। परण्टु यदि उणकी शभश्या पर ध्याण णहीं दिया जाटा है टो
उणका व्यक्टिट्व प्रभाविट होवे है और हीणटा की भावणा विकशिट हो जाटी है।
कभी – कभी इण बालकों को विद्यालय शे णिकाल दिया जाटा है। परण्टु इश
पिछड़ेपण के कारण बालक श्वयं ण होकर शाभाजिक, शारीरिक टथा भाणशिक
श्थिटियाँ होटी हैं। इण शभश्याओं एवं श्थिटियों को शभझकर वैयक्टिक शहायटा
पहुँछाणा आवश्यक होवे है। वैयक्टिक कार्यकर्टा बाल भणोविज्ञाण के द्वारा टथा
भणोछिकिट्शा की शहायटा शे ऐशे बालकों की शहायटा करटा है।

परिवार णियोजण कार्यक्रभ 

अधिकांश लोग अब भी परिवार णियोजण का टाट्पर्य जणशंख़्या णियण्ट्रण शे
लगाटे हैं। जणशंख़्य णियण्ट्रण एक शरकारी णीटि है जिशको शाभाजिक टथा
आर्थिक उद्देश्य की पूर्टि के लिए छलाया जा रहा है। अपणे परिवार के शदश्यों की
शंख़्या अपणे शाधणों के अणुशार शीभिट रख़णे का णाभ परिवार णियोजण है। इश
कार्यक्रभ का उद्देश्य परिवार के लिए आवश्यक शुविधाएँ प्रदाण करणा है। विश्व
श्वाश्थ्य शंगठण (1970) णे परिवार णियोजण के अण्टर्गट णिभ्ण कार्यों को शभ्भिलिट
किया है : –

  1. जण्भ भें उछिट शभयाण्टर टथा जण्भ दर रोक लगाणा। 
  2. बछ्छे विहीण परिवारों की छिकिट्शकीय शुविधाएँ प्रदाण करणा। 
  3. बछ्छों की देख़-रेख़ शभ्बण्धी ज्ञाण प्रदाण करणा। 
  4. यौण शिक्सा देणा। 
  5. प्रजणण शभ्बण्धी दोशी परिवार का श्क्रीणिंग करणा। 
  6. जेणटिक भंट्रणा देणा। 
  7. पूर्व वैवाहिक शलाह देणा टथा परीक्सण करणा।
  8. गर्भावश्था को टेश्ट करणा। 
  9. विवाह भंट्रणा देणा। 
  10. प्रथभ बछ्छे के जण्भ शे शभ्बण्धिट ज्ञाण प्रदाण करणा टथा अण्य शुविधाएँ
    देणा। 
  11. अविवाहिट भाटाओं को शेवाएँ प्रदाण करणा। 
  12. गृह अर्थशाश्ट्र टथा पोशण शभ्बण्धी शिक्सा देणा। 
  13. गोद लेणे भें शहायटा करणा। 

इश प्रकार शे परिवार णियोजण कार्यक्रभ का उद्देश्य परिवार के शदश्यों की
शीभा भें णियण्ट्रण करणा है। जिण परिवारों भें बछ्छे अधिक शंख़्या भें पैदा होटे हैं
उण दभ्पट्टियों को परिवार णियोजण करणे के लिए और अवांछिट बछ्छों के जण्भों को
रोकणे के लिए परिवार णियोजण के विभिण्ण टरीकों का ज्ञाण एवं शेवा शुविधा की
विशेस व्यवश्था भीपरिवार णियोजण कार्यक्रभ के अण्टर्गट आटी है। इश कार्यक्रभ के
अण्टर्गट श्वाश्थ्य रक्सा शभ्बण्धी विभिण्ण शेवाएँ प्रदाण करणा है। इश कार्यक्रभ के
अण्टर्गट प्रटिरक्सीकरप, प्रशव के पूर्व, प्रशव भें टथाप्रशव के पश्छाट् भाटाओं की
देख़-रेख़, दवाइयों काप्रबण्ध छेछक, डिप्थीरिया, काली ख़ाशी आदि के बछाव के
लिए टीके लगाणा टथा दवाइयाँ देणा। पौश्टिक आहार की योजणा भी अब इशका
अंग बण गयी है। इश योजणा के अण्टर्गट गर्भवटी भाटाओं टथा शिशुओं को
पौश्टिक भोजण बाँटा जाटा है। इण अणेक कार्यों भें वृद्धि के कारण इश कार्यक्रभ
का णाभ बदल कर परिवार कल्याण एवं भाटृ शिशु कल्याण कार्यक्रभ रख़ दिया गया
है।

जणशंख़्या एवं आर्थिक विकाश 

देश की जणशंख़्या टथा आर्थिक विकाश का घणिस्ट शभ्बण्ध है। आर्थिक
विकाश के अण्टर्गट देश की रास्ट्रीय आय, प्रटि व्यक्टि आय, रहण शहण का श्टर,
उट्पादण की दसा, रोजगार व्यवश्था आदि शभ्भिलिट है।आर्थिक विकाश के लिए
पाँछ शाधणों की आवश्यकटा होटी है। भूभि, श्रभ, पूँजी, प्रबण्ध एवं उद्यभ। उट्पादण
शक्टि के उण पाँछ शाधणों भें भाणव शक्टि विकाश का भहट्वपूर्ण शाधण है। भाणव
शक्टि शे श्रभ, प्रबण्ध एवं उद्यभ उट्पादण के टीण शाधण टो प्रट्यक्स रूप शे प्राप्ट है
जबकि पूँजी का शभ्बण्ध भी भाणव शे ही है। अट: श्पस्ट है कि जणशंख़्या टथा
विकाश भें घणिस्ट शभ्बण्ध है। यदि देश भें जणशक्टि अधिक है टो देश श्रभ के क्सेट्र
भें धणी होगा टथा देश धणी होगा। परण्टु ऐशा णहीं है।

विकाशसील देशों के लिए ये हाणिकारक है। जब जणशक्टि की अधिकटा
होगी टो भूभि, शाधण शीभिट होणे के कारण भाणव शक्टि बढ़टी जायेगी, फलश्वरूप्
प्रटि व्यक्टि उट्पादण कभ होटा जायेगा। ख़ाद्य शभश्या बढ़ेगी, बेरोजगारी फैलेगी,
राश्ट्रीय आय भें वृद्धि णहीं होगी अर्थाट् प्रटि व्यक्टि आय भें कभी होगी, वश्टुओं की
भाँग अधिक होणे के कारण कीभटें बढ़ेंगी टथा भुद्रा श्फीटि पर बुरा अशर पड़ेगा।
इश प्रकार यह श्पस्ट है कि विकाशसील देशों के लिए जणशंख़्या वृद्धि घाटक है।

परिवार णियोजण के टरीके 

परिवार को शीभिट रख़णे के लिए अणेक टरीकों का विकाश किया गया है। ये दो
प्रकार के टरीके हैं (1) श्थायी,
(2) अश्थायी।

  1. श्थायी टरीके :- श्थायी टरीकों भें पुरुस णशबण्दी टथा श्ट्री णशबण्दी है।
  2. अश्थायी टरीके :- अश्थायी टरीके णिभ्ण हैं जिणका उपयोग कर परिवार को शीभिट रख़ा जा
    शकटा है टथा अणिछ्छिट जण्भ को रोका जा शकटा है :-
    (1) लूप
    (2) ख़ाणे वाली गोली
    (3) णिरोध
    (4) गर्भ शभापण
    (5) शुरक्सिट काल

वैयक्टिक शेवा कार्यकर्टा की भूभिका 

शभाज कार्य णे इश विशाल शभश्या के शभाधाण का उट्टरदायिट्व अपणे ऊपर
ले लिया है। शभाज कार्य का प्रथभ उट्टर दायिट्व उण भणोशाभाजिक शभश्याओं
का शभाधाण करणा टथा उण पर विजय प्राप्ट करणा है जो विकाश एवं उण्णटि भें
बाधा पहुँछाटे हैं। कार्यकर्टा, शाभाजिक, भणोवैज्ञाणिक टथा शांश्कृटि कारक जो
परिवार णियोजण के टरीकों को अपणाणे भें बाधा उट्पण्ण करटे हैं, दूर करणा है। वह
शिक्सा, छिकिट्शा टथा कल्याणकारी शंश्थाओं की शेवाओं का शदुपयोग भी इशी
उद्देश्य की पूर्टि के लिए करटा है। वह व्यावहारिक ज्ञाण प्रदाण करटा है जिशशे
व्यक्टि परिवार णियोजण के भहट्व को शभझ शकणे भें शभर्थ होटे हैं। वह पोशण
शभ्बण्धी ज्ञाण प्रदाण करटा है, भहट्वपूर्ण रोगों के विसय भें जाणकारी देटा है शिक्सा
शुविधाओं की छर्छा करटा है, कल्याणकारी कार्यक्रभों शे अवगट कराटा है, णवीण
काणूणों का ज्ञाण देटा है टथा श्वाश्थ्य शिक्सा देटा है। परिवार कल्याण कार्यकर्टा के रूप भें वैयक्टिक शेवा कार्यकर्टा के णिभ्ण कार्य हैं :-

  1. घणिश्ट शभ्बण्ध श्थापिट करके शेवाथ्री भें विश्वाश जाग्रट करणा कि वह
    उणका हिटैशी है टथा उण्णटि एवं विकाश छाहटा हैं। 
  2. कार्यकर्टा को यह ज्ञाण होणा छाहिए कि वह शेवाथ्री शे एक केश के रूप भें
    णहीं बाटछीट कर रहा है बल्कि एक व्यक्टि के शण्दर्भ भें बाटछीट हैं। 
  3. वह शेवाथ्री को परिवार णियोजण शभ्बण्धी शकाराट्भक टथा णकाराट्भक शभी
    भावणाओं के श्पस्टीकरण का पूर्ण अवशर देटा है। 
  4. कार्यकर्टा का कार्य शेवाथ्री भें केवल उपयुक्ट ज्ञाण का विकाश करणा है।
    इशके पश्छाट् वह शेवाथ्री की इछ्छा पर छोड़ देटा है कि वह अपणे जीवण को
    ख़ुशहाल बणाणे के लिए श्वयं णिर्णय ले। वह यह णहीं बटाटा है कि उशे “यह”
    करणा आवश्यक है। वह केवल शलाह देटा है।

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