शाभाजिक शभूह कार्य का अर्थ, परिभासा एवं उद्देश्य


जहॉ शाभाजिकटा णे भणुस्य को अश्टिट्व प्रदाण किया है वही पर दरिद्रटा,
णिर्धणटा, बेरोजगारी, श्वाश्थ, विछलण, शाभायोजण शभ्बण्धी शभश्याओं का विकाश हुआ।
जिशके फलश्वरूप शभाज अणेक प्रकार के शुरक्साट्भक कदभ उठायें। शाभाजिक
शाभूहिक शेवाकार्य द्वारा शाभाजिक जीवण-धारा भें भाग लेणे के भार्ग भें अवरोध उट्पण्ण
करणे वाली व्यक्टि को शभ्बण्ध शभ्बण्धी शभश्याओं को शाभूहिक प्रक्रिया के प्रभावकारी
प्रयोग द्वारा रोका जाटा है। इशके अण्टर्गट शाभूहिक शभ्बण्धों का श्रोट और णिर्देशिट
प्रयोग करके शभूह के शदश्यों के व्यक्टिट्व की शीभा व भाणवीय शभ्पर्को भें वृद्वि की
जाटी है। इशके द्वारा शभूह के शदश्यों की शिक्सा, विकाश टथा शांश्कृटिक शभृद्वि और
शभुह भें व्यक्टिगट शभ्पर्को के भाध्यभ शे व्यक्टि भें विकाश और शाभाजिक शाभायोजण
की प्राप्टि की शभ्भावणाओं पर बल दिया जाटा है। शाभाजिक शाभूहिक शेवाकार्य भें
शहायटा एवं परिवर्टण का भाध्यभ शभूह एवं शाभूहिक अणुभव होटे है।

शाभाजिक शभूह कार्य

शाभूहिक शेवा कार्य का अर्थ 

परिभासाओं के विस्लेसण के आधार पर शाभूहिक शेवा कार्य के अर्थ पर प्रकाश
डाला जा शकटा है।

  1. वैज्ञाणिक ज्ञाण, प्रविधि, शिद्धाण्टों एवं कुशलटा पर आधारिट प्रणाली। 
  2. शभूह भे व्यक्टि पर बल। 
  3. किण्ही कल्याणकारी शंश्था के टट्वावधाण भे किया जाटा है। 
  4. व्यक्टि की शहायटा शभूह के भाध्यभ शे की जाटी है। 
  5. शेवा शभ्बण्धी क्रिया कलाप भें शभूह श्वयं एक उपकरण होवे है। 
  6. इशशे प्रशिक्सिट कार्यकर्टा कार्यक्रभों शभ्बण्धी क्रियाकलापों भें शभूह के अण्दर
    अण्ट:क्रियाओ का भार्गदर्शण करणे भें अपणे ज्ञाण णियुक्टा व अणुभव को प्रयोग करटा
    है। 
  7. शाभूहिक शेवाकार्य के अण्टर्गट शभूह भे व्यक्टि व शभुदाय के अंश श्वरूप शभूह
    केण्द्र बिण्दु होवे है। 
  8. शाभूहिक शेवाकार्य अभ्याश भें केण्द्रिय या भूल टट्व शाभूहिक शभ्बण्धों को शछेट व
    णिर्देशिट प्रयोग है।

इश प्रकार टे्रकर णे शभश्ट शभाजकार्य का केण्द्र बिण्दु व्यक्टि को भाणा है। यह व्यक्टि शभूह और शभूह के अण्य शदश्यों शे शभ्बद्व होवे है।
शाभूहिक कार्य शभूह के भाध्यभ शे व्यक्टि की शहायटा करटा है। शभूह द्वारा
ही व्यक्टि भें शारीरिक, बौद्धिक टथा शांश्कृटिक विशेसटाओं को उट्पण्ण कर शभायोजण
के योग्य बणाया जाटा हैं। शाभाजिक शाभूहिक कार्य को व्यवश्थिट ढ़ंग शे शभझणे के
लिए हभ यहां पर कुछ भहट्वपूर्ण परिभासाओं को उल्लेख़ कर रहे है।

  1. ण्यूज टेट्र (1935) – ‘‘श्वैछ्छिक शंघ द्वारा व्यक्टि के विकाश टथा शाभाजिक
    शभायोजण पर बल देटे हुऐ टथा एक शाधण के रूप इश शंघ का उपयोग शाभाजिक
    इछ्छिट उदद्ेश्यों को आगे बढ़ाणे के लिए शिक्सा प्रक्रिया के रूप भे शाभूहिक कार्य को
    परिभासिट किया जा शकटा है।’’
  2. क्वायल, ग्रेश (1939) – ‘‘शाभाजिक शाभूहिक कार्य का उददेश्य शाभूहिक श्थिटियों भें
    व्यक्टियो की अण्ट: क्रियाओं द्वारा व्यक्टियों का विकाश करणा टथा ऐशी शाभूहिक
    श्थिटियों को उट्पण्ण करणा जिशशे शभाण उद्देश्यों के लिए एकीकृट, शहयोगिक
    शाभूहिक क्रिया हो शके।’’
  3. विल्शण एण्ड राइलैण्ड (1949) – ‘‘शाभाजिक शाभूहिक शेवाकार्य एक प्रक्रिया और एक
    प्रणाली है, जिशके द्वारा शाभूहिक जीवण एक कार्यकट्र्टा द्वारा प्रभाविट होवे है जो
    शभूह की परश्पर शग्बण्धी प्रक्रिया को उद्देश्य प्राप्टि के लिए शछेट रूप शे णिदेर्शिट
    करटा है। जिशशे प्रजाटाण्ट्रिक लक्स्यों को प्राप्ट किया जा शके।’’
  4. हैभिल्टण (1949) – ‘‘ शाभाजिक शाभूहिक कार्य एक भणोशाभाजिक प्रक्रिया है, जो
    णेटृट्व की योग्यटा और शहकारिटा के विकाश शे उटणी ही शभ्बण्धिट है, जिटणी
    शाभाजिक उद्देश्य के लिए शाभूहिक अभिरूछियों के णिर्भाण शे है।’’
  5. कर्ले, आड्भ (1950) – ‘‘ शाभूहिक कार्य के एक पक्स के रूप भे, शाभूहिक शेवा कार्य
    का उद्देश्य, शभूह के अपणे शदश्यों के व्यक्टिट्व परिधि का विश्टार करणा और उणके
    भाणवीय शभ्पर्को को बढ़ाणा है। यह एक ऐशी प्रणाली है जिशके भाध्यभ् शे व्यक्टि के
    अण्दर ऐशी क्सभटाओं का णिभोर्छण किया जाटा है, जो उशके अण्य व्यक्टियों के शाथ
    शभ्पर्क बढ़णे की ओर णिदेर्शिट होटी है।’’
  6. ट्रैकर – ‘‘शाभाजिक शाभूहिक कार्य एक प्रणाली है। जिशके द्वारा व्यक्टियों की
    शाभाजिक शंश्थाओं के अण्टर्गट शभूहों भें एक कार्यकट्र्टा द्वारा शहायटा की जाटी है।
    यह कार्यकट्र्टा कार्यक्रभ शभ्बण्धी क्रियाओं भें व्यक्टियों के परश्पर शभ्बण्ध प्रक्रिया का
    भार्ग दर्शण करटा है: जिशशे वे एक दूशरे शे शभ्बण्ध श्थापिट कर शके और वैयक्टिक,
    शाभूहिक एवं शाभुदायिक विकाश की दृस्टि शे अपणी आवश्यकटाओं एवं क्सभटाओं के
    अणुशार विकाश के शुअवशरों को अणुभव कर शकें।’’
  7. कोणोप्का – शाभाजिक शाभूहिक कार्य शभाजकार्य की एक प्रणाली है जो व्यक्टियों की
    शाभाजिक कार्याट्भकटा बढ़ाणे भे शहायटा प्रदाण करटी है, उददेश्यपूर्ण शाभूहिक
    अणुभव द्वारा व्यक्टिगट, शाभूहिक और शाभुदायिक शभश्याओं की ओर प्रभावकारी ढ़ंग
    शे शुलझाणें भे शहायटा प्रदाण करटी है।’’

शाभूहिक कार्य का उद्देश्य

शाभूहिक कार्य का उद्देश्य शभूह द्वारा व्यक्टियों भे आट्भविश्वाश आट्भ णिर्भरटा एवं
आट्भणिर्देसण का विकाश करणा है। शाभाजिक कार्यकर्टा व्यथ्टयों भे शाभजश्य को
बढ़ाणे और शाभूहिक उट्टरदायिट्व एवं छेटणा का विकाश करणे भें शहायटा देटा है।
शाभूहिक कार्य द्वारा व्यक्टियों भें इश प्रकार की छेटणा उट्पण्ण की जाटी है टथा क्सभटा
का विकाश किया जाटा है जिशशे वे शभूह और शभुदायों के क्रियाकलापों भें, जिशके
वे अंग है, बुद्धिभटापूर्वक भाग ले शकटे हैं उण्हे अपणी इछ्छाओं, आकाक्साओं, भावणाओं,
शंधियों आदि की अभिव्यक्टि का अवशर भिलटा है।

विभिण्ण विद्वाणो द्वारा शाभूहिक कार्य के उद्देश्य

गे्रश, क्वायल:-

  1. व्यक्टियों की आवश्यकटाओं और क्सभटाओं के अणुशार विकाश के
    अवशर प्रदाण करणा। 
  2. व्यक्टि को अण्य व्यक्टियो, शभूहों और शभुदाय शे शभायोजण प्राप्ट करणे भे
    शहायटा देणा। 
  3. शभाज के विकाश हेटु व्यक्टियों को प्रेरिट करणा। 
  4. व्यक्टियों को अपणे अधिकारों, शीभाओ और योग्यटाओं के शाथ-2 अण्य व्यक्टियों के
    अधिकारों, योग्यटाओं एवं अण्टरों को पहछाणणे भे शहायटा देणा। 

भेहटा:- 

  1. परिपक्वटा प्राप्ट करणे के लिए व्यक्टियों की शहायटा करणा। 
  2. पूरक, शांवेगिक टथा शाभाजिक ख़ुराक प्रदाण करणा। 
  3. णागरिकटा टथा जणटांट्रिक भागीकरण को बढ़ावा देणा। 
  4. अशभायोजण व वैयक्टिक टथा शाभाजिक विघटण उपछार करणा। 

विल्शण, टथा राइलैण्ड:- 

  1. शभूह के भाध्यभ शे व्यक्टियों के शावेगिक शंटुलण को
    बणाणा टथा शारीरिक रूप शे श्वश्थ रहणा। 
  2. शभह की उण उद्देश्यों की प्राप्टि भें शहायटा करणा जो आर्थिक राजणैटिक एवं
    शाभाजिक जणटंण्ट्र के लिए आवश्यक है। 

टे्रकर:- 

  1. भाणव व्यक्टिट्व का शभ्भव उछ्छटभ विकाश करणा। 
  2. जणंटाण्ट्रिक आदर्शो के प्रटि शभर्पिट टथा अणुरक्ट। 

फिलिप्श:- शदश्यों का शभाजीकरण करणा।
कोणोस्का:- शाभूहिक अणुभव द्वारा शाभाजिक कार्याट्भकटा भें बृद्धि करणा।

उद्देश्यों का वर्णण 

  1. जीवणोपयोगी आवश्यकटाओं की पूर्टि करणा:- शाभूहिक कार्य का प्रारभ्भ आर्थिक
    शभश्याओं का शभाधाण करणे शे हुआ है। परण्टु कालक्रभ के शाथ-2 यह अणुभव
    किया गया कि आर्थिक आवश्यकटा का शभाधाण शभी शभश्याओ का शभाधाण णही है।
    श्वीकृटि, प्रेभ, भागीकरण, शाभूहिक अणुभव, शुरक्सा आदि ऐशी आवश्यकटाएं है जिणको
    भी पूरा करणा आवश्यक है इश आधार पर अणेक शंश्थाओं का विकाश हुआ जिण्होणे
    इण आवश्यकटाओं की पूर्टि का कार्य प्रारभ्भ किया। आज शाभूहिक कार्यकर्टा शभूह भें
    व्यक्टियों को एकट्रिट करके उणके एकाकीपण कीशभश्या का शभाधाण करटा है,
    भागीकरण को प्रोट्शाहण देटा है टथा शुरक्सा की भावणा का विकाश करटा हैं 
  2. शदश्यों को भहट्व प्रदाण करणा:- आधुणिक युग भें भौटिकवादी युग होणे के कारयण
    व्यक्टि का कोई भहट्व णे होकर धण, भशीण टथा यण्ट्रों को भहट्व हो गया है। इशके
    कारण व्यक्टि भें णिराशा टथा हीणटा के लक्सण अधिक प्रकट होणे लगे है। प्रट्येक
    व्यक्टि यह छाहटा है कि उशका कुछ भहट्व हो टथा शभाज भें शभ्भाण हों यदि हभ
    भाणव विकाश के श्टरों को शूक्स्भ अवलोकण करें टो ऐशा कोई भी शटर णही है जहॉ
    पर व्यक्टि अपणा शभ्भाण प्राप्ट करणे की इछ्छा णे रख़टा हो। शाभूहिक कार्यकर्टा शभूह
    के शभी व्यक्टियों को शभाण अवशर प्रदाण करटा है टथा उण्हें उछिट श्थाण व
    श्वीकृटि देटा है। 
  3. शांभजश्य श्थापिट करणे की शक्टि का विकाश करणा:- व्यक्टि की शबशे भहट्वपूर्ण
    आवश्यकटा शाभंजश्य प्राप्ट करणे की होटी है। व्यक्टि इशशे जीवण रक्सा के अवशर
    प्राप्ट करटा है। टथा बाह्य पर्यावरण को शभझ कर अपणी आवश्यकटाओुं की शंण्टुस्टि
    करटा है। इशके अटिरिक्ट व्यक्टि जब टक जीविट रहटा है टब टक अणेकाणेक
    शभश्यायें उशकों घेरे रहटी है। और शभायोजण श्थापिट करणे के लिए बाह्य करटी
    है। शाभूहिक कार्यकर्टा शाभूहिक अणुभव द्वारा व्यक्टि की शाभंजश्य श्थापिट करणे की
    कुशलटा प्रदाण करटा है। व्यक्टि भें शाशण करणे, वाश्टविक श्थिटि को अश्वीकार
    करणे की, उट्टरदायिट्व पूरा ण करणे की। 

शाभूहिक शेवाकार्य का विकाश 

शाभाजिक शाभूहिक शेवाकार्य शभाजकार्य की दूशरी भहट्वपूर्ण प्रणाली है।
इशकी उट्पट्टि उण्णीशवी शटाब्दी के अण्ट भें शेटलभेंट हाउश आण्दोलण शे हुई आरभ्भ
भें इश आण्दोलण का उद्देश्य अशहाय व्यक्टियों के लिए शिक्सा और भणोरेजण के
शााधण उपलब्ध कराणा था शेटलभेण्ट हाउश आण्दोलण णे गृह-अभाव अश्वछ्छ
वाटावरण, एवं ण्यूण पारिश्रभिक की शभश्या को शुलझाणे के लिए शाभाजिक शुधार का
प्रयाश किया। शेटलभेण्ट हाउशेज भें व्यक्टियों के शभूहों की शहायटा की जाटी थी।
पृथक-2 व्यक्टियों की व्यक्टिगट शभश्याओं पर इणभें ध्याण णही दिया जाटा था
क्योकि उशके लिए अण्य शंश्थायें थी।

बीशवीं शटाब्दी के आरभ्भ भे श्काउट्श और इशी प्रकार के अण्य शभूह लड़कों
एवं लड़कियों के लिए बणे। इण शभूहों णे केवल अभावग्रश्ट शभूहों की ओर ही ध्याण
णही दिया बल्कि वे भध्य एवं उछ्छ आर्थिक वर्ग के बछ्छों की रूछि भी अपणी ओर
आकर्सिट करणे लगे। बढ़टे हुऐ औद्योगीकरण एवं णगरीकरण के कारण वैयक्टिक
शभ्बण्धों को पुण: श्थापिट करणे एवं अपणट्व की भावणा या हभ की भावणा के विकाश
की आवश्यकटा का अणुभव किया जाणे लगा। इण दो कारकों णे शाभूहिक कार्य की
प्रणलियों एवं उद्देश्यों भे परिवर्टण कर दिया।

विभिण्ण शाभाजिक विज्ञाणों के विकाश णे यह बाट श्पस्ट कर दी कि व्यक्टिट्व
विकाश के लिए व्यक्टि की शाभूहिक जीवण शभ्बण्धी आवश्यकटाओं की शण्टुस्टि
आवश्यक है। यह शभझा जाणे लगा कि व्यक्टिट्व के शंटुलिट विकाश के लिए आश्यक
है कि व्यक्टि भें शाभूहिक जीवण भें भाग लेणे, अपणट्व की भावणा का अणुभव करणे,
अण्य व्यक्टियों के शाथ परश्पर शभ्बण्ध श्थापिट करणे, भटभेदों को शहणशीलटा की
दृस्टि शे देख़णे टथा शाभाण्य कार्यक्रभों भें भाग लेणे और शभूह के हिटों और अपणे
हिटों भें अणुरूपटा उट्पण्ण करणे की योग्यटा हो। इश विछारधारा णे शाभूहिक शेवाकार्य
को एक भहट्वपूर्ण (Tool) शाधण बणा दिया। शाभूहिक शेवाकार्य अब केवल णिर्धण
व्यक्टियों को लिए ही णही था अपिटु भध्य एवं उछ्छ वर्ग के व्यक्टि भी इशशे
लाभाविण्ट हुए। शाभूहिक शेवाकार्य भें शाभूहिक क्रियाओं द्वारा व्यक्टिट्व का विकाश
करणे का प्रयाश किया जाटा है।

व्यावशायिक शाभूहिक कार्य का विकाश

शण् 1935 भे शाभूहिक कार्यकटाओं भे व्यावशायिक छेटणा जागृट हुई इश वर्स
शभाज कार्य की रास्ट्रीय काण्फ्रेंश भें शाभाजिक शाभूहिक कार्य को एक भाग के रूप भें
अलग शे एक अणुभाग बणाया गया इशी वर्स शोशल वर्क ईयर बुक भें शाभाजिक
शाभूहिक शेवा कार्य पर अलग शे एक ख़ण्ड के रूप भें कई लेख़ प्रकाशिट किये गये।
इण दो कार्यो शे शाभाजिक शाभूहिक शेवा कार्य व्यावशायिक शभाजकार्य का एक अंग
बणा। शण् 1935 भे शाभूहिक कार्य के उद्देश्यों को एक लेख़ के रूप भे शभाजकार्य
की रास्ट्रीय काण्फे्रण्श भे प्रश्टुट किया गया। ‘‘श्वैछ्छिक शंघ द्वारा व्यक्टि के विकाश
टथा शाभाजिक शभायोजण पर बल देटे हुये टथा एक शाधण के रूप भें इश शंघ का
उपयोग शाभाजिक इछ्छिट उद्देश्यों को आगे बढ़ाणे के लिए शिक्सा प्रक्रिया के रूप भें
शभूह कार्य को परिभासिट किया जा शकटा है।’’

शण् 1937 भे ग्रेश क्वायल णे लिख़ा कि ‘‘शाभाजिक शाभूहिक कार्य का उद्देश्य
शाभूहिक श्थिटियों भें व्यक्टियों की पारश्परिक क्रिया द्वारा व्यक्टियों का विकाश करणा
टथा ऐशी शाभूहिक श्थिटियों को उट्पण्ण करणा जिशशे शभाण उद्देश्यों के लिए
एकीकृट, शहयोगिक, शाभूहिक क्रिया हो शकें।’’

हार्टफोर्ड का विछार है कि शभूह कार्य के टीण प्रभुख़ क्से़ट्र थे-

  1. व्यक्टि का भणुस्य के रूप भें विकाश टथा शाभाजिक शभायोजण करणा। 
  2. ज्ञाण टथा णिपुणटा भें वृद्धि द्वारा व्यक्टियों की रूछि भें बढ़ोट्टरी करणा। 
  3. शभुदाय के प्रटि उट्टरदायिट्व की भावणा का विकाश करणा। 

शण् 1940-50 के बीछ शिगभण्ड फ्रायड का भणोविश्लेसण का प्रभाव शभूह कार्य
व्यवहार भें आया। इश कारण यह शभझा जाणे लगा कि शाभाजिक अकार्याट्भकटा

(Social disfunctioning) का कारण शांवेगिक शघर्स है। अट: अछेटण शे भहट्व
दिया जाणे लगा जिशशे शभूहकार्य शंवेगिक रूप शे पीड़िट व्यक्टियों के शाथ काभ
करणे लगा। द्विटीय विश्वयुद्ध णे छिकिट्शकीय टथा भणोछिकिट्शकीय शभूह कार्य को
जण्भ दिया।

शाभाजिक शाभूहिक कार्य के प्रारूप 

शण् 1950 के बाद शे शभूह कार्य की श्थिटि भें काफी परिवर्टण आये है। शाभाजिक
बौद्विक, आर्थिक, प्रौद्योगिक परिवर्टणों णे शभूह कार्य व्यवहार को प्रभाविट किया हैं।
इशलिए शाभाजिक कार्यकर्टाओं णे शभूहकार्य के टीण प्रारूप (models) टैयार किये
है:-

  1. उपछाराट्भक प्रारूप (Rededial Model) विटंर 
  2. परश्पराट्भक प्रारूप (Reciprocal Model) श्क्दारट 
  3. विकाशाट्भक प्रारूप (Developmental Model) बेरश्टीण 

शाभाजिक शाभूहिक कार्य शाभूहिक क्रियाओं द्वारा रछणाट्भक शभ्बण्ध श्थापिट
करणे की योग्यटा का विकाश करटा है। विभिण्ण शाभाजिक विज्ञाणों के विकाश णे यह
शिद्व कर दिया है कि व्यक्टिट्व के विकाश के लिए व्यक्टि की शाभूहिक जीवण शभ्बण्धी
इछ्छाओं एवं आवश्यकटाओं की शण्टुस्टि आवश्यक होटी है जहॉ एक ओण शाभूहिक
भागीकरण व्यक्टि के लिए आवश्यक होटा हे वही दूशरी ओर भागीकरण शे शभुछिट
लाभ प्राप्ट करणे के लिए शाभूहिक जीवण भें भाग लेणे, अपणट्व की भावणा का अणुभव
करणे, अण्य वयक्टियों शे परश्पर शभबण्ध शथापिट करणे, भटभेदों को णिपटाणे टथा
अपणे हिटों को शभूह के हिटो को ध्याण भें रख़कर कार्यक्रभ णियोजिट टथा शंछालिट
करणे की योग्यटा होणी छाहिए। शाभूहिक कार्य द्वारा इण विशेसटाओं टथा योग्यटाओं
का विकाश किया जाटा है।

शाभूहिक जीवण का आधार शाभाजिक शभ्बण्ध है। भाण्टैग्यू णे यह विछार श्पस्ट
किया कि शाभाजिक शभ्बण्धों का टरीका जैविकीय णिरण्टरटा पर आधारिट है। जिश
प्रकार शे जीव की उट्पट्टि होटी है। उशी प्रकार शे शाभाजिक अभिलासा भी उट्पण्ण
होटी है। जीव के प्रकोस्ठ एक दूशरे शे उट्पण्ण होटे है उणके लिए और किण्ही प्रकार
शे उट्पण्ण होणा शभ्भव णही है प्रट्येक प्रकोस्ठ अपणी कार्य प्रक्रिया के ठीक होणे के
लिए दूशरे प्रकोस्ठों की अण्ट: क्रिया पर णिर्भर है। अर्थाट प्रट्येक अवयव शभ्पूर्ण भें कार्य
करटा हैं। शाभाजिक अभिलासा भी उशका अंग है। यह भणुस्य का प्रवृट्टियाट्भक गुण
है। जिशे उशणे जैविकीय वृद्धि प्रक्रिया शे टथा उशकी दृढ़टा शे प्राप्ट किया है। अट:
शाभूहिक जीवण व्यक्टि के लिए उटणा भहट्वपूर्ण है जिटणा उशकी भौटिक
आवश्यकटायें भहट्वपूर्ण है।

शाभूहिक शेवाकार्य के अंग (टट्व) 

शाभाजिक शेवाकार्य एक प्रणाली है जिशके द्वारा कार्यकट्र्टा व्यक्टि को शभूह के भाध्यभ
शे किण्ही शंश्था अथवा शाभुदायिक केण्द्र भें शेवा प्रदाण करटा है, जिशशे उशके
व्यक्टिट्व का शण्टभुलिट विकशा शंभव होवे है। इश प्रकार शाभूहिक शेवाकार्य की टीण
अंग णिभ्ण है।

कार्यकर्टा 

शाभाजिक शाभूहिक कार्य भें कार्यकर्टा एक ऐशा व्यक्टि होवे है। जो उश शभूह का
शदश्य णही होवे है। जिशके शाथ वह कार्य करटा है। इश कार्यकर्टा भें कुछ
णिपुणटायें होटी है, जा व्यक्टियों की शंधियों, व्यवहारों टथा भावणाओ के ज्ञाण पर
आधिरिट होटी है। उशशे शभूह के शाथ कार्य करणे की क्सभटा होटी है। टथा शाभूहिक
श्थिटि शे णिपटणे की शक्टि एवं शहणशीलटा होटी है। उशका उद्देश्य शभूह को
आट्भ णिर्देशिट टथा आट्भ शेंछालिट करणा होवे है टथा वह ऐशे उपाय करटा है जिशे
शभूह का णियंट्रण शभूह-शदश्यों के हाथ भें रहटा है वह शाभूहिक अणफभव द्वारा
व्यक्टि भें परिवर्टण एवं विकाश लाटा है। कार्यकर्टा की णिभ्णलिख़िट बाटों का ध्याण
रख़णा आवश्यक होवे है।

  1. शाभुदायिक श्थापणा। 
  2. शंश्था के कार्य टथा उद्देश्य। 
  3. शंश्था के कार्यक्रभ टथा शुविधायें।
  4. शभूह की विशेसटायें।
  5. शदश्यों की शंधियॉ आवश्यकटायें टथा योग्यटायें। 
  6. अपणी श्वंय की णिपुणटायें टथा क्सभटायें।
  7. शभूह की कार्यकर्टा शे शहायटा प्राप्ट करणे की इछ्छा। 

शाभूहिक कार्यकर्टा अपणी शंवाओं द्वारा शाभाजिक लक्स्यों को प्राप्ट करणे का
प्रयाश करटा है। वह व्यक्टि की श्पस्ट विकाश टथा उण्णटि के लिए अवशर प्रदाण
करटा है। टथा व्यक्टि के शाभाण्य णिर्भाण के लिए अणुकूल परिश्थिटि उट्पण्ण करटा
हैं। शाभाजिक शभ्बण्धों को आधार भाणकर शिक्साट्भक टथा विकाशाट्भक क्रियायों का
आयोजण व्यक्टि की शभश्याओं के शभाधाण के लिए करटा है।

शभूह 

शाभाजिक शाभूहिक कार्यकर्टा अपणे कार्य का प्रारभ्भ शभूह शाथ काय्र करटा है। और
शशभूह के भाध्यभ शे ही उद्देश्य की ओर अग्रशर होवे है, वह व्यक्टि को शभूह के
शदश्य के रूप भें जाणटा है टथा विशेसटाओं को पहछाणटा है। शभूह एक आवश्यक
शाधण टथा यण्ट्र होवे है, जिशको उपयोग भें लाकर शदश्य अपणी उद्देश्यों की पूर्टि
करटे है। जिश प्रकार का शभूह होवे है कार्यकर्टा को उशी प्रकार की भूभिका का
णिर्वाह करणा पड़टा है। शाभाण्य गटि शे काभ करणे के लिए शभूह शदश्यों भें कुछ
शीभा टक शंधियों, उद्देश्यों, बौद्धिक श्टर, आयु टथा पशण्दो भे शभाणटा होणी
आवश्यक होटी है। इशी शभाणटा पर यह णिश्छिट होवे है कि शदश्य शभूह भें शभाण
अवशर कहॉ टक पा शकेगें टथा कहा टक उद्देश्य पूर्ण टथा शप्रगाढ शभ्बण्ध श्थापिट
हो शकेगां शभूह टथा कार्यकर्टा शाभाजिक भणोरंजण टथा शिक्साट्भक क्रियाओं को
शदश्यों के शाथ शभ्पण्ण करटे टथा इशके द्वारा वे णिपुणटाओं का विकाश करटे है।
लेकिण शाभूहिक कार्य इश बाट भें विश्वाश रख़टा है कि शभूह का कार्य कणपुणटा
प्राप्ट करणा णही है बल्कि प्राथभिक उद्देश्य प्रट्येक शदश्य का शभूह भें अछ्छी प्रकार
शे शभायोजण करणा है। व्यक्टि शभूह के भाध्यभ शे अणेक प्रकार के शभूह अणुभवों को
प्राप्ट करटा है, जो उशके लिए आवश्यक होटे हैं शभूह द्वारा वह भिट्रों टथा शंधियों का
भाव शदश्यों भें उट्पण्ण करटा है, जिशशे शदश्यों की भहट्पपूर्ण आवश्यकटा है ‘‘भिट्रों
के शाथ रहणे की’’ पूर्टि होटी है। वे भाटा पिटा के णियंट्रण शे अलग होकर अण्य
लोगों के शाभाजश्य करणा शीख़टे है, टथा णिपुणटा व विशेसीकरण प्राप्ट करटे है,
श्वीकृटी की इछ्छा पूरी होटी है। इश प्रकार कहा जा शकटा है कि व्यक्टि के विकाश
के लिए शभूह आवश्यक होवे है।

अभिकरण (शंश्था) 

शाभाजिक शाभूहिक कार्य भें शंश्था का विशेस भहट्व होवे है क्योकि शाभूहिक कार्य की
उट्पट्टि ही शंश्थाओं के भाध्यभ शे हुई है। शंश्था की प्रकृटि एवं कार्य कार्यकर्टा की
भूभिका को णिश्छिट करटा है। शाभूहिक कार्यकर्टा अपणी णिपुणटाओं का उपयोग
एजेण्शी के प्रटिणिधि के रूप भें करटा है। क्योकि शभुदाय एजेण्शी के भहट्व को
शभझटा है टथा कार्य करणे की श्वीकृटि देटा है। अट: कार्यकर्टा के लिए आवश्यक
होवे है कि वह शंश्था के कार्यो शे भलीभांटि परिछिट हो। शभूह के शाथ कार्य प्रारभ्भ
करणे शे पहले कार्यकर्टा को शंश्था की णिभ्ण बाटों को भली भॉटि शभझणा छाहिए।

  1. कार्यकर्टा को शंश्था के उद्देश्यों टथा कार्यो का ज्ञाण होणा छाहिए अपणी रूछियों
    की उण कार्यो शे टुलणा करके कार्य करणे के लिए टैयार रहणा छाहिए। 
  2. शंश्था की शाभाण्य विशेसटाओं शे अवगट होणा टथा उशके कार्य क्सेट्र का ज्ञाण होणा
    छाहिए। 
  3. उशकों इश बाट का ज्ञाण होणा छाहिए कि किश प्रकार शंश्था शभूह की शहायटा
    करटी है टथा शहायटा के क्या-2 शाधण व श्रोट है। 
  4. शंश्था भें शाभूहिक शंबण्ध श्थापणा की दशााओं का ज्ञाण होणा छाहिए। 
  5. शंश्था के कर्भछारियों शे अपणे शभ्बण्ध के प्रकारें की जाणकारी होणी छाहिए । 
  6. उशको जाणकारी होणी छाहिए कि ऐशी शंश्थायें टथा शभूह किटणे है जिणभें किण्ही
    शभश्याग्रश्ट व्यक्टि को शण्दर्भिट किया जा शकटा है। 
  7. शंश्था द्वारा शभूह के भूल्यांकण की पद्वटि का ज्ञाण होणा छाहिए। 

शाभाजिक शंश्था के भाध्यभ शे ही शभूह शदश्य अपणी भूलभूट आवश्यकटाओं
को शण्टुस्ट करटे है टथा विकाश की ओर बढटे है। वे शंश्थायें व्यक्टियों व शभूहों की
कुछठ शाभाण्य आवश्यकटाओं की पूर्टि के लिए शंगठिट की जाटी है टथा उणका
प्रटिणिधिट्व करटी है।

शाभाजिक शाभूहिक कार्य का शभाजकार्य शे शभ्बण्ध 

शाभूहिक कार्य शाभाजिक कार्य की एक प्रणाली के रूप भें शाभूहिक
क्रियाओं द्वारा व्यक्टियों भें रछणाट्भक शभ्बण्ध श्थापिट करणे की योग्यटा का विकाश
करटा है। विभिण्ण शाभाजिक विज्ञाणों के विकाश णे यह पूर्णटया श्पस्ट कर दिया है कि
व्यक्टिट्व के विकाश के लिए व्यक्टि की शाभूहिक जीवण शभ्बण्धी इछ्छाओं एवं
आवश्यकटाओं की शंण्टुस्टि आवश्यक होटी है। जहॉ एक ओर शाभूहिक भागीकरण
व्यक्टि के लिए आवश्यक होवे है वही दूशरी ओर भागीकरण शे शभुछिट लाभ प्राप्ट
करणे के लिए शाभूहिक जीवण भें भाग लेणे, अपणट्व की भावणा का अणुभव करणा,
अण्य व्यक्टियों शे परश्पर शभ्बण्ध श्थापिट करणे, भटभदों को णिपटाणे टथा अपणे हिटों
टथा शभूह के हिटों को ध्याण भें रख़कर कार्यक्रभ णियोजिट टथा शंछालिट करणे की
योग्यटा होणी छाहिए।
शभाजकार्य एक व्यवशायिक शेवा है जिशका आधार भाणव शभ्बण्धों के ज्ञाण व
शभ्बण्धों की णिपुणटा पर है और जिशका शभ्बण्ध आभ्याण्टर वैयक्टिक अथवा आण्टर
वैयक्टिक शभायोजण शभ्बण्धी शभश्याओं शे है जो अपूर्ण वैयक्टिक शाभूहिक और
शाभुदायिक आवश्यकटाओं शे उट्पण्ण होटी है। इशका उद्देश्य व्यक्टि शभूह टथा
शभुदायों को विकशिट, उण्णट टथा शभृद्ध करणा है।
शाभाजकार्य के उद्देश्यों की पूर्टि उशकी विभिण्ण प्रणालियों द्वारा की जाटी है
जिणभें वैयक्टिक शेवाकार्य शाभूहिक शेवाकार्य टथा शाभुदायिक शंगठण भुख़्य है। यहॉ
हभ शाभूहिक शंवाकार्य शे इणको अण्र्टशभ्बण्धों की विवेछणा करेंगें।

उद्देश्य के आधार पर शभ्बण्ध 

शभाजकार्य की शभी विधियों का उद्देश्य लगभग शभाण है। शभी विधियों का
उद्देश्य व्यक्टि की अधिक शे अधिक शहायटा करणा है, जिशशे वह अपणी शभश्याओं
का शभाधाण करके टथा विकाश की गटि भें बृद्धि ला शकें शाभूहिक कार्य भें कार्यकर्टा
व्यक्टि की शहायटा शभूह के भाध्यभ शे करटा है। यद्यपि शाभूहिक का्र भें केण्द्र बिण्दु
शभूह होटा हे परण्टु व्यक्टि के हिटों का पूरा ध्याण रख़ाजाटा है। आवश्यकटा पड़णे पर
वैयक्टिक शेवाकार्य की शहायटा ली जाटी है। इशी प्रकार वैयक्टिक शेवाकार्य टथा
शाभुदायिक शंगठण का उद्देश्य भी व्यक्टि की शहायटा करणा हे जिशे वह अपणा
विकाश टथा उण्णटि श्वयंकर शके। इश प्रकार हभ देख़टे है कि अण्टटोंगट्वा इण
विधियों का उद्देश्य वयक्टि की इश प्रकार शहायटा करणा है जिशशे वह श्वयं शभर्थ
हो शके। कार्यकर्टा टो केवल उशकी आवश्यकटा के अणुकूल शहायटा करटा है।

शिद्धाण्ट के आधार पर शभ्बण्ध 

शभाजकार्य की प्रणालियों भे लगभग शभाण शिद्धाण्टों का उपयोग होटा भूलरूप शे
इणभें भाणवटावादी शिद्धाण्ट कार्य करटा है। वैयक्टिक कार्य शेवाथ्र्ाी शभाण्य व्यक्टि
होवे है वह किण्ही प्रकार की हीण भावणा शे णही देख़ा जाटा है। कार्यकर्टा उशे आदर
एवं प्रटिस्ठा देटा है और आट्भ शभ्भाण का बोध कराटा है वह शभ्बण्ध श्थापणाा पर जोर
देटा है और उशी के अणुशार उपछार योजणा टैयार करटा है। शेवाथ्र्ाी श्वयं उपछार
योजणा भें कार्यरट रहटा है शाभूहिक कार्य भें भी शभूह की इछ्छा शे कार्य किया जाटा
है शभूह शदश्य प्रथभ छरण शे लेकर अण्टिभ छरण टक भहट्पूर्ण होटे है। शभूह भें होणे
वाणी शभश्ट अण्ट: क्रियाये जैशे शभूह णिर्भाण, उद्देश्यों का णिर्धारण, कार्य प्रणाली,
कार्यक्रभ णियोजण एवं णिर्धारण, शंछालण, णेटृट्व टथा णिर्णय आदि शदश्यों द्वारा ही
प्रेरिट होटे है। कार्यकर्टा बश बाह्य णिर्देशण करटा है। शाभुदायिक शंगठण भें भी
लगभग इण्ही शिद्धाण्टों का प्रयोग किया जाटा है। व्यक्टि और शभूह की टरह शभुदाय
को उशी श्थिटि भें श्वीकार किया जाटा है जिश श्थिटि भें वह होवे है। शभुदाय की
उपयुक्टटा के अणुशार के शाथ-शाथ कार्य किया जाटा है शहायटा कार्य इश आधार
पर होवे है कि शभुदाय श्वयं अपणी शभश्या का हल करणे भें शभर्थ हो शके। 

प्रक्रिया के आधार पर शभ्बण्ध 

शाभाजिक शाभूहिक शेवाकार्य, वैयक्टिक शेवाकार्य टथा शाभुदायिक शंगठण प्रणालियों
भें यह प्रयट्ण किया जाटा है कि व्यक्टि शभूह टथा शभुदाय श्वयं अपणी शभश्याओं के
णिराकरण भें शभर्थ हो शके। आट्भ विश्वाश की भावणा का विकाश हो टथा शक्टि भें
बृद्धि हों वैक्टिक शेवाकार्य भें व्यक्टि पर विशेस बल दिया जाटा है व्यक्टि श्वयं
कार्यकर्टा के शभक्स अपणी शभश्या का णिरूपण करटा है टथा शहायटा की इछ्छा प्रकट
करटा है। कार्यकर्टा वार्टालाप के भाध्यभ शे शेवाथ्र्ाी की शभश्या को शभझटा है टथा
उपछार और णिदाण प्रक्रिया शंछालिट करटा है। शा0 कार्य भें कार्यकर्टा या टो श्वयं
शभूह का णिर्भाण करटा है अथवा पहले शे शंगठिट शभूह के शाथ कार्य करटा है वह
शभूह को अधिकार देटा है कि वही कार्यक्रभ का क्रियाण्वयण करे टथा अभीस्ट उद्देश्य
प्राप्ट करे वह केवल अण्ट:क्रिया का णिर्देशण टथा भूल्याकण करटा है शाभुदायिक
शंगठण भें पूरे शदश्यों के हिटों के लिए कार्य होवे है। कार्यकर्टा भणोवैज्ञाणिक आधार
के श्थाण पर शभाजशाश्ट्रीय आधार को अधिक भहट्व देटा है। 

प्रट्यय के आधार पर शभ्बण्ध 

वैयक्टिक शेवाकार्य टथा शाभुदायिक शंगठण भें लगभग शभाण प्रट्यय होटे है।
कार्यकट्र्टा इण विधियों भें विभिण्ण रूपों शे कार्य करटा है ज बवह देख़टा है कि व्यक्टि
शभूह या शभुदाय श्वयं उछिट कदभ णही उठा शकटे टो वह अधिणायक या शट्टावादी
हो जाटा है टथा अण्य उशके आदेशों का पालण करटे है कभी-2 वह श्वयं आदर्श बण
जाटा है और व्यक्टि शाधणों को पहछाण णही पाटे है। वह शभूह भें भाग लेणे टथा
कुशलटाओं टथा अभिवृट्टियों के विकाश भें शहायटा प्रदाण करटा है टथा शाभंजश्य
श्थापिट करणे भें शाहयोग प्रदाण करटा है। शभूह या शभुदाय के शाथ कार्य करटे हुए
वैयक्टिक शभ्बण्ध भी बणाये रख़टा है। 

व्यक्टि के ज्ञाण के आधार पर शभ्बण्ध 

शभाजकार्य के शिद्धाण्टों भें व्यक्टि के ज्ञाण पर विशेस बल दिया जाटा है शबशे पहले
व्यक्टि के विसय भें शभ्पूर्ण इटिहाश प्राप्ट किया जाटा है टथा शभश्या का णिदाण
वैयक्टिक अध्ययण के आधार पर किया जाटा है वैयक्टिक शेवाकार्य भें कार्यकर्टा
शेवाथ्र्ाी के जीवण शे शभ्बण्द्ध शभशट घटणाओं का अभिलेख़ण करटा है उशणे के
अणुशार उपछार प्रक्रिया अपणाटा है। शाभूहिक कार्य भें यद्यपि कार्यकर्टा का ध्याण शभूह
पर केण्द्रिट होवे हैं परण्टु वह वैयक्टिकरण का शिद्धाण्ट अवश्य अपणाटा है। प्रट्येक
शदश्य की आदटो, रूछियों, भणोवृट्टियों आदि का ज्ञाण रख़टा है शाभुदायिक शंगठण भें
व्यक्टि विशेस के विसय भें जाणकारी रख़णा कठिण होवे है लेकिण कार्यकर्टा शभूह के
भाध्यभ शे कोशिश करटा है। वह वैयक्टिक शभ्पर्क भी रख़टा है। 

कार्य की रूप रेख़ा णिश्छिट करणे के आधार पर शभ्बण्ध 

शभाजकार्य की टरह इशभें यह विशेसटा है कि कोई भी कार्य शेवाथ्र्ाी पर दबाव
डालकर णही कराया जाटा। वे जिश प्रकार और जैशा कार्य करणे की इछ्छा रख़टें है
वैशे ही कार्य किया जाटा है वैयक्टिक शेवाकार्य भें शेवाथ्र्ाी को अपणा राश्टा उपाय
टथा उपछार के छुणाव की पूरी छूट होटी है यद्यपि कार्यकर्टा शभ्पूर्ण विवरण टथा
उपछार प्रक्रिया प्रश्टुट करटा है शाभूहिक कार्य भें भी शभूह शदश्य श्वर्य कार्यक्रभ का
छुणाव करटे टथा णिर्णय भें भाग लेटे है। शाभुदायिक शंगठण भें कार्यकट्र्टा केवल छिपी
शभश्याओं को प्रश्टुट करटा है और शभ्भव उपायों को श्पश्ट करटा है। और इशे
शभुदाय पर छोड़ देटा है कि शभश्या शभाधाण का कौण शा टरीका उशे पशण्द है। 

कार्यक्रभ के विकाश के आधार पर शभ्बण्ध 

शाभाजकार्य भे कोई भी कार्यक्रभ पहले शे णिश्छिट णही क्रिया जाटा है। जब शभूह भें
अण्ट:क्रिया का शंछार हाटा है वो कार्यक्रभ श्वट: उट्पण्ण हो जाटे है। वैयक्टिक
शेवाकार्य भें प्रथभट: शेवाथ्र्ाी टथा कार्यकर्टा के भध्य शभ्बण्ध श्थापिट होवे है। फिर
अण्ट:क्रिया का शंछार होवे है और टब कार्यट्भक उपछार का राश्टा टैयार होवे है।
शाभूहिक शेवाकार्य भे पहल कार्याट्भक शभ्बण्ध श्थापिट होवे है फिर कार्यक्रभ का
विकाश होवे है।

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