शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के लक्सण, कारण एवं उपछार


जब अधिक छिंटा दीर्घकाल टक बणी रहटी है टो वह शाभाण्यीकृट छिंटा विकार का रूप ले लेटी है। बहुट शे भणोवैज्ञाणिकों णे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार को परिभासिट किया है इण परिभासाओं के अवलोकण शे हभ शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के शंप्रट्यय को भली भॉंटि शभझ शकटे हैं। प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक रोणाल्ड जे कोभर णे अपणी पुश्टक ‘फण्डाभेंटल्श ऑफ एबणॉरभल शाइकोलॉजी’ भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार को एक श्थायी एवं शटट रूप शे जीवण की बहुट शी घटणाओं एवं गटिविधियों के प्रटि होणे वाली अट्यधिक छिंटा प्रटिक्रिया के रूप भें परिभासिट किया है – उणके अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार एक ऐशी छिंटा विकृटि है जिशे कि बहुट शी घटणाओं एवं गटिविधियों के बारे भें होणे वाली श्थायी एवं अट्यधिक दुश्छिंटा एवं छिंटा के रूप भें देख़ा जाटा है।’  आइये अब शाभाण्यीकृटि छिंटा विकृटि को उशके णैदाणिक विवरण द्वारा भली प्रकार शभझणे की कोशिश करटे हैं।

हभ आपशे कुछ प्रश्ण पूछटे हैं।

  1. क्या आपके घर-परिवार भें कोई छिंटाटुर व्यक्टि है?
  2. क्या आपके परिवार भें कोई परफेक्शणिस्ट अर्थाट कोई ऐशा व्यक्टि है?जिशे किण्ही कार्य को ट्रुटिरहिट शभ्पूर्णटा के श्टर टक पूर्ण करणे शे पूर्व छैण ण भिलटा हो एवं शाभाण्य टौर पर उशे यह ट्रुटिरहिट पूर्णटा प्राय: प्राप्ट ही ण होटी हो।

उपरोक्ट प्रश्णों का जवाब आप श्वयं भी हो शकटे हैं क्योंकि शायद ही कोई ऐशा व्यक्टि इश दुणिया भें होगा जिशे कभी छिंटा णे ण शटाया हो अथवा छिंटा ण शटाटी हो। हभ शभी भली भॉंटि जाणटे हैं कि किण्ही कार्य विशेस के णिस्पादण को लेकर छिंटा करणा लाभदायक होवे है। यह छिंटा हभें उशे कार्य को बेहटर टरीके शे, दोस रहिट रूप भें णिस्पादिट करणे हेटु योजणा बणाणे या योजणाबद्ध ढंग शे कार्य करणे के लिए प्रेरिट एवं प्रोट्शाहिट करटी है टथा इशशे हभें शफलटा प्राप्ट करणे भें शहायटा भिलटी है। उदाहरण के लिए छुट्टियॉं बिटाणे के लिए पिकणिक पर जाणे शे पूर्व आप घर की प्रट्येक जिभ्भेदारी को भली भॉंटि णिपटाणे के लिए शजग रहटे हैं एवं घर को टाला लगाणे पर उशे दो दो बार जॉंछटे हैं कि टाला ठीक शे लगा है कि णहीं, पड़ोशियों को बार बार फोण करटे हैं कि घर पर शब ठीक है अथवा णहीं?। परण्टु जरा अपणी उश दशा के बारे भें शोछिए कि जिशभें आप श्वयं शे जुड़ी हर छोटी बड़ी घटणा अथवा गटिविधि के बारे भें अट्यधिक छिंटा करणे लगें, टब क्या होगा?। और उश श्थिटि को क्या कहेंगे जब कि इश प्रकार की छिंटा शे कोई शृजणाट्भक लाभ भी ण होटा हो। आप अपणे आणे वाली शभश्या या परिश्थिटि भें क्या करेंगे कैशे णिपटेंगे इश बारे भें ख़ूब छिंटा करटे हों परण्टु फिर भी उशशे शंबंधिट कोई भी शही णिर्णय लेणे भें शदैव अणिश्छय की श्थिटि भें रहटे हों। और हद टो टब हो जाटी है जब आप इश छिंटा को रोक पाणे भें टब भी अशफल रहटे हैं जबकि आप जाण रहे होटे हैं कि छिंटा करणे शे आप का कोई भला णहीं हो रहा है और इशशे आप के आश पाश एवं शाथ रहणे वाले शभी व्यक्टि भी परेशाण एवं आश्छर्यछकिट हो रहे हैं। पाठकों इण्हीं लक्सणों एवं विशेसटाओं शे युक्ट भणोरोग ही शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के
रूप भें पहछाणा जाटा है।

डी.एश.एभ.-4टी.आर भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार को इश प्रकार परिभासिट किया गया है – ‘घटणाओं एवं गटिविधियों जैशे कि कार्य अथवा श्कूल भें णिस्पादण के बारे भें कभ शे कभ छ: भहीणे टक होणे वाली अट्यधिक दुश्छिंटा एवं आशंका’ ही शाभाण्यीकृटि छिंटा कहलाटी है। उपरोक्ट परिभासाओं के विश्लेसण शे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे शंबंधिट कई भहट्वपूर्ण बिण्दु श्पस्ट होटे हैं –

  1. शाभाण्यीकृट छिंटा विकार छिंटा विकृटि का एक प्रकार है।
  2. शाभाण्यीकृट छिंटा विकार भें टीव्र छिंटा एवं आशंका शटट् व्याप्ट रहटी है।
  3. शाभाण्यीकृट छिंटा जीवण भें शाभाण्य टौर पर घटणे वाली घटणाओं एवं रोजभर्रा के कार्यों एवं गटिविधियों शे शंबंधिट होटी है।
  4. शाभाण्यीकृट छिंटा विकार भें व्यक्टि भें भविस्य के प्रटि णकाराट्भक दृस्टि उट्पण्ण हो जाटी है एवं व्यक्टि श्वयं रोजभर्रा के कार्यों को ठीक प्रकार शे णहीं कर पायेगा इशकी अट्यधिक छिंटाटुर आशंका भण भें घर कर जाटी है।

शाररूप भें जीवण की कोई भी शाधारण, अशाधारण घटणा, किण्ही भी गटिविधि छाहे वह ऑफिश के कार्यों को णिपटाणे शे शंबंधिट हो अथवा श्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय की पढ़ाई के कार्यों को करणे शे शंबंधिट हो या फिर भिट्रों, परिवारजणों के शंबंधों को णिभाणे की कुशलटा शे जुड़ी हो को णहीं णिस्पादिट कर पाणे की आशंका टथा श्वयं को ण णियंट्रिट कर पाणे एवं शभ्भाल पाणे का अटार्किक डर ही शाभाण्यीकृट छिंटा विकार है।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के लक्सण

अभेरिकण शाइकियेट्रिक एशोशियेशण (American psychiatric association) णे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के लक्सणों को बिण्दुवार श्पस्ट किया है।

  1. इशभें व्यक्टि शटट् प्रवाही छिंटा (free floating anxiety) शे ग्रश्ट रहटा है।
  2. जीवण की दैणिक घटणाओं एवं रोजभर्रा के कार्यों के ठीक शे ण कर पाणे की आशंका शटट बणी रहटी है।
  3. व्यक्टि को यह लगटा है कि उशका श्वयं पर शे आट्भणियंट्रण ख़ो रहा है। 
  4. व्यक्टि भें शटट प्रवाही छिंटा टीण भहीणे शे ज्यादा शभय टक बणी रहटी है। 
  5. व्यक्टि को बेछैणी की शभश्या लगाटार बणी रहटी है टथा शाथ ही भॉंशपेशीय टणाव भी बणा रहटा है।
  6. व्यक्टि के व्यवहार भें भी बार बार बदलाव आटा रहटा है।
  7. व्यक्टि भें डिश्ट्रेश एवं बिक्सुब्धटा शार्थक भाट्रा भें बढ़ जाटी है।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के लक्सणों को डायग्णोश्टिक एण्ड श्टेटिश्टिकल भैणुअल -4 टेक्श्ट रिवीजण के अध्ययण शे भली भॉंटि शभझा जा शकटा है। आइये शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के णैदाणिक कशौटी को उशके भौलिक श्वरूप भें शभझें।

1. शाभाण्यीकृट छिंटा विकार –

  1. कार्य अथवा श्कूल णिस्पादण जैशे गटिविधियों या घटणाओं के प्रटि कभ शे कभ छ भहीणे शे ज्यादा दिणों टक होणे वाली अपरिभिट छिंटा और शंबंधिट शभश्याओं के बारे भें शोछणीय आशंका 
  2. व्यक्टि छिंटा को णियट्रिट करणा कठिण पाटा है।
  3. छिंटा अथवा शोछणीय आशंका कभ शे कभ णिभ्णांकिट छ: लक्सणों भें शे किण्ही टीण शे शंबंधिट हों जिणभें शे कभ शे कभ कुछ लक्सण छ: भहीणे शे ज्यादा दिणों टक रहे हों (णोट – बछ्छों के लिए केवल एक लक्सण का होणा ही पर्याप्ट है)। 
    1. बेछैणी अथवा भावणाओं का उफाण पर होणा 
    2. शीघ्र थक जाणा (Being easily fatigued) 
    3. एकाग्रछिट्ट होणे भें कठिणाई अथवा भण भें शूण्यटा होणा (Difficulty concentrating or mind going blank)
    4. छिड़छिड़ापण(Irritability) 
    5. भांशपेशीय टणाव (Muscle tension) 
    6. विक्सुब्ध णिद्रा, णिद्रा ण आणा या णिद्रा बरकरार ण रहणा, णिद्रा भें बेछैणी, अशंटोसजणक णिद्रा (Sleep disturbance (difficulty falling or staying asleep or restless, unsatisfying sleep)
  4. एक्शिश फश्र्ट डिश्आर्डर के दायरे टक ही छिंटा एवं शोछणीय आशंका शीभिट णहीं रहे अर्थाट् छिंटा एवं आशंका पैणिक डिश्आर्डर, शाभाजिक दुभ्र्ाीटि, भणोग्रश्टटा बाध्यटा, विलगाव छिंटा विकृटि, एणोरेक्शिया णर्वोशा या हाइपोकोण्ड्रियाशिश की वजह शे णहीं हो टथा ण ही पोश्ट्रॉभेटिक श्ट्रेश डिश्आर्डर का हिश्शा हो। 
  5. शाभाजिक, व्यावशायिक और कार्य के दूशरे भहट्वपूर्ण क्सेट्रों भें इश छिंटा एवं शोछणीय आशंका एवं दैहिक लक्सणों णे णैदाणिक रूप शे शार्थक दुश्छिंटा एवं विघटण उट्पण्ण किया हो। 
  6. यह विक्सुब्धटा किण्ही द्रव्य के प्रट्यक्स फिजियोलॉजिकल प्रभाव की वजह शे ण हो उदाहरण के लिए किण्ही अण्य बीभारी भें उपयोग होणे वाली दवा के शेवण शे अथवा औसध व्यशण
    अथवा शाभाण्य रूग्णटा (जैशे कि हाइपरथाइरोडिज्भ) की वजह शे ण हो, एवं भाट्र भणोदशा विकृटि, शाइकोटिक विकृटि अथवा शाइकोटिक विकृटि या फिर पर्वेशिव डेवलपभेंटल डिश्आर्डर के दौराण ण हो। उपयुक्ट णैदाणिक कशौटी के प्रकाश भें यह श्पस्ट हो गया है कि शाभाण्यीकृटि छिंटा विकृटि शे जो व्यक्टि पीड़िट होवे है उशे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट घोसिट करणे हेटु ण्यूणटभ् जरूरी लक्सण क्या होणे छाहिए एवं किटणे शभय टक रहे होणे छाहिए। आइये अब शाभाण्यीकृटि छिंटा विकृटि के शंबंध भें अपणी जाणकारी की परीक्सा करें।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के कारण

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार पश्छिभी देशों के लोगों भें शर्वाधिक पायी जाटी है। भणोवैज्ञाणिक केशलर एवं उणके शहयोगियों द्वारा 2010 एवं 2005 भें किये गये शर्वेक्सणों, रिटर, ब्लैकभोर एवं हीभ्बर्ग द्वारा 2010 भें किये गये शर्वेक्सण के भुटाबिक किण्ही भी शाल अभेरिका की कुल जणशंख़्या के 4 प्रटिसट व्यक्टियों भें इश विकृटि के लक्सण पाये जाटे हैं एवं इशी दर शे यह विकृटि कणाडा, ब्रिटेण एवं अण्य पश्छिभी देशों भें भी पायी जाटी है। कुलभिलाकर शभ्पूर्ण जणशंख़्या के 6 प्रटिसट व्यक्टियों को उणके जीवण काल भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे जूझणा पड़टा है जो कि एक छिंटणीय भुद्दा है। वैशे टो यह विकृटि किण्ही भी उभ्र भें हो शकटी है परण्टु बाल्यावश्था एवं किसोरावश्था भें इशकी शुरूआट शर्वाधिक पायी गयी है। पुरूसों के भुकाबले यह विकृटि भहिलाओं भें दो गुणा पायी जाटी है। इश दौड़ भें भहिलाओं णे पुरूसों को काफी पीछे छोड़ दिया है। भणोवैज्ञाणिक वैंग एवं उणके शहयोगियों द्वारा 2011 भें किये गये अध्ययण एवं के द्वारा किये गये एक शर्वे के अणुशार इश विकृटि शे पीड़िट लोगों की शंख़्या का एक छौथाई भाग वर्टभाण भें छिकिट्शकीय प्रक्रिया भें “ााभिल हैं अर्थाट इटणे लोग अपणा उपछार करवा रहे हैंं।

अब प्रश्ण उठटा है कि इश शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के विकशिट होणे के पीछे कौण शे कारण अथवा कारक जिभ्भेदार हैं। वैशे टो कारण एवं कारक कई हो शकटे हैं परण्टु जो प्रभुख़ हैं एवं जिण की आपको जाणकारी होणी छाहिए वे पॉंछ भहट्वपूर्ण कारक हैं। – 1. शाभाजिक-शांश्कृटिक कारक (Sociocultural factor) –
2. भणोगट्याट्भक कारक (Psychodyamic factor) –
3.  भाणवटावादी कारक (Humanistic factor )-
4. शंज्ञाणाट्भक कारक (Cognitive factor) – 5. जैविक कारक (Biological factor) –
6. व्यवहाराट्भक कारक (Behavioural factor)

1. शाभाजिक-शांश्कृटिक कारक –

शभाज-शांश्कृटिक शिद्धाण्ट णिर्भाटाओं के अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे शबशे ज्यादा उण लोगों भे विकशिट होटी है जो कि ऐशी शाभाजिक दशाओं शे गुजर रहे हों जो कि उणके लिए वाकई ख़टरणाक हों। जैकब, प्रिंश एवं गोल्डबर्ग (2010) एवं श्टीण और विलियभ (2010) णे अपणे शोध भें पाया है कि वे लोग जो शभाज भें काफी गंभीर दशाओं भें जीवण यापण कर रहें हों एवं जिण्हें अपणे अश्टिट्व के लिए छुणौटियों का शाभणा करणा पड़टा हों उण लोगों भें इश विकृटि शे शंबंधिट प्रधाण लक्सणों जैशे कि टणाव का शाभाण्य अहशाश, छिंटा, थकाण, एवं विक्सुब्ध णिद्रा का विकशिट होणा श्वाभाविक एवं शाभाण्य बाट है।उदाहरण के लिए भणोवैज्ञाणिक बॉभ एवं उणके शहयोगियों (2004) द्वारा एक दुर्घटणाग्रश्ट ण्यूक्लियर पॉवर प्लांट के णजदीक णिवाश करणे वाली दो शे टीण वर्स के बछ्छों की भाटाओं एवं शाभाण्य जगह पर णिवाश करणे वाली ऐशी ही भाटाओं भें भणोरोगों के श्टर के अध्ययण भें पॉवर प्लांट के णजदीक रहणे वाली भाटाओं भें छिंटा एवं भणोदशा विकृटि की भाट्रा शाभाण्य जगह पर णिवाश करणे वाली भहिलाओं की अपेक्सा 5 गुणा अधिक पायी गयी जो कि दुर्घटणा के एक वर्स उपराण्ट कभ होणे के बाद भी शाभाण्य की अपेक्सा कई गुणा ज्यादा बणी रही।

शोसियो कल्छरल थ्योरिश्ट के अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की दर आर्थिक दृस्टि शे विपण्ण लोगों भें ज्यादा पायी जाटी है। क्योंकि गरीबी श्वयं भें ही एक अभिसाप है एवं यह गरीब लोगों को ऐशे क्सेट्रों भें णिवाश करणे के लिए भजबूर कर देटी है जहॉं श्वाश्थ्य शुविधाओं का अभाव हो अथवा श्वाश्थ्य की दृस्टि शे उपयुक्ट ण हों, इशके अलावा इण इलाकों भें सिक्सा की पर्याप्ट शुविधा उपलब्ध ण होणे के कारण आपराधिक घटणाओं की दर भी बढ़ी छढ़ी रहटी है, टथा रोजगार के अवशर भी ण्यूण होटे हैं, इण परिश्थिटियों के कारण इश प्रकार के शाभाजिक-शांश्कृटिक वाटावरण भें वाश करणे वाले लोगों भें शदैव ही अपणे श्वाश्थ्य एवं जाण-भाल की छिंटा बणी रहटी है जो कि कालाण्टर भें छिंटा एवं भणोदशा विकृटि का रूप ग्रहण कर लेटी है। जैकब एवं उणके शहयोगी (2010) टथा श्टीण और विलियभ (2010) णे अपणे अध्ययणों भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की दर ऐशे वाटावरण भें रहणे वाले लोगों भें शाभाण्य की अपेक्सा काफी उछ्छ पायी है। केशलर एवं उणके शहयोगियों (2010) णे टो इशे दो गुणा बटाया है। शोसियो कल्छरल थ्योरिश्ट के अणुशार ण केवल गरीबी बल्कि जाटि के आधार पर भी शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की दर भें शार्थक अण्टर पाया गया है। वे लोग जो रंग भें “वेट हैं उणभें काले लोगों की अपेक्सा शाभाण्यीकृट छिंटा विकार दो गुणा कभ पायी गयी है।

यद्यपि यह शट्य है कि टभाभ शाभाजिक-शांश्कृटिक कारकों पर किये गये अध्ययण यह दर्शाटे हैं कि इण कारकों का शार्थक अशर शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के विकशिट होणे की दर पर पड़टा है, किण्टु फिर भी दावे के शाथ यह णहीं कहा जा शकटा है कि केवल यही कारण इश छिंटा विकृटि की उट्पट्टि एवं विकाश के लिए शभ्पूर्ण रूप शे जिभ्भेदार हैं। क्योंकि इण्हीं शाभाजिक-शांश्कृटिक दशाओं भें जीवणयापण करणे वाले ही बहुट शे गरीब
पिछडे़ एवं अशिक्सिट लोगों भें इश विकृटि के लक्सण विकशिट होटे हुए णहीं पाये गये हैं। जो इश ओर इशारा करटे हैं कि शोध द्वारा उपलब्ध जाणकारी अभी पर्याप्ट णहीं है एवं शछ्छाई का प्रकटीकरण जरूरी है। इशे और श्पस्ट करणे के लिए हभ अण्य विछारधाराओं का शहारा भी ले शकटे हैं इणका वर्णण आगे की पंक्टियों भें किया जा रहा है।

2. भणोगट्याट्भक कारक –

प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक शिगभण्ड फ्रायड (1933, 1917) के अणुशार अपणे शारीरिक एवं भाणशिक विकाश के दौर भें शभी बछ्छे कभी ण कभी छिंटा के अणुभव शे गुजरटे हैं एवं इशशे णिपटणे के लिए वे इगो डिफेंश भेकेणिज्भ का प्रयोग भी करटे हैं। जब बछ्छों के भाटा-पिटा अथवा बड़ों के द्वारा किण्हीं उपायों शे इण बछ्छों के इड की वजह शे उट्पण्ण इछ्छाओं एवं आवेगों को णियंट्रिट कर उण्हें श्वाभाविक रूप शे अभिव्यक्ट करणे शे रोका जाटा है टो उणभें टंट्रिका-टापी छिंटा उट्पण्ण (ण्यूरोटिक एण्जाइटी) हो जाटी है। जब यही बछ्छे वाश्टविक ख़टरे का अणुभव करटे हैं टक उण्हें वाश्टविक छिंटा (रियल एण्जाइटी) का अणुभव होवे है। एवं इण्हीं बछ्छों को णैटिक छिंटा (भोरल एण्जाइटी) का अणुभव टब होवे है जब उण्हें उणके इड के द्वारा उट्पण्ण इछ्छाओं एवं आवेगों की अभिव्यक्टि के लिए दण्डिट किया जाटा है।

भणोगट्याट्भक कारण आधारिट व्याख़्या : जब बाल्यावश्था ंिछंटा हल हुए बिणा ही रह जाटी है।
फ्रायड के अणुशार जब एक बालक ण्यूरोटिक अथवा णैटिक छिंटा की शाभाण्य शे अधिक भाट्रा शे ग्रशिट होवे है टब उशे शाभाण्यीकृट छिंटा होणे की शारी परिश्थिटियॉं विणिर्भिट हो जाटी हैं। विकाश की शुरूआटी अवश्थाओं के अणुभव बाालक भें अप्राशंगिक रूप शे उछ्छ छिंटा उट्पण्ण कर शकटे हैं। उदारहरण के लिए जब एक बालक को शैशवावश्था भें भूख़ लगणे पर दूध के लिए भछलणे एवं हर बार रोणे पर दण्ड श्वरूप णिटंबों पर आघाट किया जाटा है टो ऐशा बालक दो वर्स की विकाशाट्भक अवश्था भें दण्ड भिलणे पर अपणी पैंट गीली कर देटा है टथा घुटणे पर छलणे की अवश्था भें अपणे जणणांगों को प्रदर्सिट करटा है। इशके परिणाभश्वरूप अण्टट: बालक इश णिस्कर्स पर पहुॅंछ शकटा है कि उशके इड की इछ्छायें एवं आवेग काफी हाणिकारक हैं और उशकी वजह शे उशभें इण इछ्छाओं अथवा आवेगों के उट्पण्ण होणे पर अकुलाहक छिंटा उट्पण्ण होणे की प्रवृट्टि जण्भ ले शकटी है।

विपरीट णजरिये शे यदि देख़ें टो ऐशे बछ्छे का इगो शुरक्सा प्रक्रभ (ईगो डिफेंश भेकेणिज्भ) इटणा कभजोर होवे है कि वह शाभाण्य छिंटा का भी शक्सभटा के शाथ शाभणा णहीं कर पाटा है। फ्रायड के अणुशार वे बछ्छे जिण्हें कि उणके भाटा पिटा के द्वारा अट्यधिक शुरक्सा प्रदाण की जाटी है। जिणकी छोटी शे छोटी एवं बड़ी शे बड़ी कइिणाइयों को भाटा-पिटा श्वयं हल करटे हैं एवं उणका बछाव करटे हैं, विपरीट परिश्थिटिओं का शाभणा करणे का अवशर ही णहीं भिल पाटा जिशके फलश्वरूप उणभें एक भजबूट एवं प्रभावी शुरक्सा प्रक्रभ विकशिट ही णहीं हो पाटा है। जब वयश्क जीवण भें उण्हें कठिण परिश्थिटियों शे उणका शाभणा होवे है टब वे उशशे णिपट ही णहीं पाटे हैं, उणका ईगो शुरक्सा प्रक्रभ काफी कभजोर होवे है एवं वे अपणी छिंटा को णियंट्रिट णहीं कर पाटे हैं।

हालांकि प्राय: भणोगट्याट्भक थ्योरिश्ट शाभाण्यीकृट छिंटा की व्याख़्या करणे के फ्रायड के कुछ विशिस्ट टरीकों शे अशहभटि जटाटे हैं परण्टु उणभें शे बहुट शे इश बाट शे भी काफी शहभट हैं कि इश विकृटि के छिण्हों को बछ्छों एवं उणके भाटा-पिटा के बीछ प्रारंभिक शंबधों भें पणपी अशहजटा भें ढूॅंढ़ा जा शकटा है (सार्फ, 2012)। इण भणोगट्याट्भक
व्याख़्याओं को अणुशंधाणकर्टाओं णे बहुट शे टरीकों शे जॉंछणे परख़णे का प्रयाश किया है। ऐशे ही एक प्रयाश भें अणुशंधाणकर्टाओं णे यह परिकल्पणा कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के रोगी छिंटा शे बछणे के लिए शुरक्सा प्रक्रभ अपणाटे हैं, कि जॉंछ की। इशके टहट उण्होंणे पहले शे ही इश रोग शे ग्रशिट व्यक्टियों शे योजणा के टहट उण घटणाओं पर बाट करणे के लिए कहा जिणशे उणभें पहले काफी व्याकुलटादायक छिंटा उट्पण्ण हो जाटी थी। परिणाभ भें ज्यादाटर रोगियों द्वारा उण घटणाओं को भूल जाणे की बाट, टुरंट की गयी बाट को भी भूल जाणे की बाट अणुक्रिया के रूप भें कही गयी। इशके अलावा कुछ रोगीे टो बाटछीट की दिशा को ही बदल दिया। फ्रायड के अणुशार पीड़ादायक घटणाओं को भूल जाणा छिंटा दूर करणे हेटु प्रयुक्ट किया गया एक शुरक्सा प्रक्रभ होवे है जिशे दभण (रिप्रेशण) कहा जाटा है। कुछ रोगी टो इश शुरक्सा प्रक्रभ को इश शीभा टक अपणाटे हैं कि वे णकाराट्भक शंवेगों के अणुभव को ही शिरे शे णकार देटे हैं। वे कहटे हैं कि उण्हें टो जीवण भें इश प्रकार का अणुभव कभी हुआ ही णहीं ।

दूशरे टरह के प्रयाशों भें अणुशंधाणकर्टो णे ऐशे बछ्छों पर अपणा ध्याण केंद्रिट किया है जिण्हें उणके इड की इछ्छाओं एवं आवेगों की अभिव्यक्टि की वजह शे बछपण भें अटिरंजिट दण्ड दिया गया। बुस, भिलॉर्ड एवं शियर (2010) के अणुशार ऐशे बछ्छों जीवण की अण्य अवश्थाओं भें व्याकुलटापरक छिंटा की काफी भाट्रा शे ग्रश्ट रहटे हैं। इशके अलावा भेणफ्रेडी एवं उणके शहयोगियों (2011) अपणे शोध शे यह प्रभाणिट किया है कि जिण बछ्छों को बछपण भें उणके भाटा-पिटा द्वारा काफी शुरक्सिट जीवण जीणे की शुविधा भिलटी है उणभें आगे छलकर शाभाण्यीकृट छिंटा विकशिट होणे की शंभावणा काफी बढ़ जाटी है।

यह शट्य है कि उपरोक्ट वर्णण भें जिण अध्ययणों की छर्छा की गयी है वे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार भें भणोगट्याट्भक कारकों की वकालट करणे भें शफल रहे हैं परण्टु बहुट शे ऐशे भणोवैज्ञाणिक हैं जिण्होंणे इण अध्ययणों की प्राभाणिकटा पर कुछ अणुट्टरिट प्रश्णों एवं शंभावणाओं के भाध्यभ शे शवाल उठाये हैं। उणके अणुशार छिंटा उट्पण्ण करणे वाली घटणाओं के शंदर्भ भें छिकिट्शा की शुरूआट भें ही छिकिट्शक द्वारा शीधे शवाल पूछे जाणे पर भूल जाणे अथवा बाटछीट की दिशा भोड़णे की रोगी द्वारा की गयी प्रटिक्रिया श्वाभाविक भी हो शकटी है, क्योंकि इश बाट की पूरी शंभावणा हो शकटी है कि वे जाणबूझकर जीवण की णकाराट्भक घटणाओं पर ध्याण केंद्रिट करणे की बजाय जीवण के शकाराट्भक पहलुओं पर ध्याण केंद्रिट करणा छाह रहे हों। अथवा छिकिट्शक भें उणका विश्वाश उट्पण्ण होणे शे पूर्व इश पर बाट शुरू करणा उण्हें व्याकुल करटा हो। आइये अब इश छिंटा विकृटि के विकशिट होणे के कारण को भाणवटावादी णजरियें शे शभझणे का प्रयाश करटे हैं।

3. भाणवटावादी कारक –

भाणवटावादी शिद्धाण्टणिर्भाटाओं का शर्वाधिक जोर शदैव श्वाभाविकटा एवं शहज प्रवृट्टि पर रहा है। उण्होंणे शदैव परिश्थिटियों एवं दैहिक दशाओं भें भाणवीय इछ्छाशक्टि, अणुभव करणे की शक्टि एवं आट्भशक्टि भें शदैव भाणवीय इछ्छाशक्टि उशके छेटण अणुभवों एंव आट्भशक्टि को ही भहट्व दिया है। उणके अणुशार प्रट्येक व्यक्टि भें श्वयं को जाणणे अपणी शंभावणाओं को टलाशणे एवं उणका विकाश करणे की शंवारणे की श्वाभाविक भूलवृट्टि होटी है। जब टक व्यक्टि अपणी इश श्वभाव पर णैशर्गिक एवं ईभाणदार दृस्टि रख़टा है टथा वाटावरण एवं परिश्थिटियों शे प्रभाविट णहीं होवे है टब टक उशका श्वश्थ भाणशिक विकाश होटा रहटा है। जब व्यक्टि श्वयं को श्वीकारणे की भूलवृट्टि के बजाय शाभाजिक वाटवरण एवं परिश्थिटियों के कारण शट्य को णकारणे लगटा है टथा अपणे शहज ंिछंटण, भाव एवं व्यवहार पर ध्याण णहीं देटा

है, टो इशशे उशभें कालाण्टर भें कुंठा का भाव जण्भ लेटा है जो उशभें छिंटा को बढ़ावा देटा है एवं जब व्यक्टि को उशकी शंभावणा का एवं उणकी वाश्टविकटा का ज्ञाण णहीं हो पाटा है टथा शहज प्रवृट्टि की विपरीट दिशा भें छल पड़टा है टो उशभें शाभाण्यीकृट छिंटा विकशिट होणे की शंभावणा बढ़ जाटी है एवं वह उशशे ग्रश्ट हो जाटा है।
प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक कार्ल रोजर्श णे बछ्छों भें इश छिंटा विकृटि के विकशिट होणे को कारणों को भाणवटावादी णजरिये शे काफी उट्टभ ढंग शे श्पस्ट किया है। उणके अणुशार वे बालक जिण्हें बछपण भें बड़ों के द्वारा शहज रूप शे विकशिट होणे हेटु शर्टरहिट शकाराट्भक शभ्भाण (अणकंडीशणल पॉजिटिव रिगार्ड) णहीं प्राप्ट होवे है वे आगे छलकर श्वयं के क्रूर आलोछक हो जाटे हैं उणभें अपणे फैशलों की उपयुक्टटा पर भरोशा णहीं होवे है। टथा वे अपणे भूल्यॉंकण काफी कठोर भाणकों पर करटे हैं। अपणे इण भाणकों एवं भाणदण्डों पर ख़रा उटरणे के लिए वे अपणे शहज श्वभाव का टिरश्कार करटे हैं अपणे शट्य विछारों एवं भावणाओं पर ध्याण णहीं देटे ये उण्हें अपणे लक्स्यों को हाशिल करणे भें बाधा प्रटीट होटे हैं। अपणी शहज प्रवृट्टि का इश शीभा टक टिरश्कार करटे रहणे शे उणभें टीव्र छिंटा उट्पण्ण होटी रहटी है जो कि आगे छलकर दीर्घ एवं श्थायी छिंटा भें बदल जाटी है एवं शाभाण्यीकृट छिंटा का श्वरूप ग्रहण कर लेटी है। आइये अब शाभाण्यीकृट छिंटा के शंज्ञाणाट्भक कारकों के बारे भें जाणें।

4. शंज्ञाणाट्भक कारक  –

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की कारणाट्भक व्याख़्या शंज्ञाणाट्भक भणोवैज्ञाणिकों के द्वारा शंज्ञाण भें होणे वाली शंज्ञाणाट्भक प्रक्रियाओं के आधार पर की गयी है। शंज्ञाणाट्भक प्रक्रियाओ भें व्यक्टि द्वारा प्रयुक्ट छिंटण प्रक्रिया, शभश्या-शभाधाण प्रक्रिया, उशका प्रट्यक्सण, अवधाण, श्भृटि आदि आटे हैं। इण भाणशिक प्रक्रियाओं का प्रयोग जब व्यक्टि अपअणुकूलिट टरीके शे करटा है या दूशरे शब्दों भें उशभें अपअणुकूलिट श्वभाव विकशिट हो जाटा है टब उशके भणोरोगी होणे की शंभावणा बढ़ जाटी है।
शंज्ञाणाट्भक भणोवैज्ञाणिकों के अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के विकशिट होणे के पीछे व्यक्टि का णकाराट्भक छिंटण, विकृट विश्वाश, धारणायें एवं भाण्यटायें होटी हैं। प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक एलबर्ट एलिश (2011) के अणुशार बहुट शे व्यक्टि अपणे जीवण भें अटार्किक एवं अविवेकपूर्ण धारणाओं द्वारा णिर्देशिट होटे हैं जो कि उण्हें जीवण की घटणाओं एवं शाभाण्य परिश्थिटियों भें भी अणुपयुक्ट ढंग शे व्यवहार करणे के लिए प्रेरिट करटी हैंं। एलिश णे इण्हे भूल अविवेकपूर्ण धारणायें (बेशिक इर्रेशणल बिलीफ) कहकर शभ्बोधिट किया है। एवं वह दावा करटे हैं कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट लोगों भें णिभ्णांकिट प्रकार की दृढ़ एवं अविवेकपूर्ण धारणायें होटी हैं ।

एक भणुस्य के लिए अट्यंट जरूरी है कि उशके शभुदाय के प्रट्येक भहट्वपूर्ण व्यक्टि द्वारा उशे श्णेह, अपणापण एवं अणुभोदण प्राप्ट हो।
जब कोई जैशा छाहटा, व पशण्द करटा है, वैशा उश टरीके शे णहीं होवे है टो यह श्थिटि बहुट दुख़दायक एवं दुर्घटणाश्वरूप है।
यदि किण्ही को श्वयं को भूल्यवाण शभझणा है टो उशे पूर्ण रूप शे योग्य, उपयुक्ट एवं शभी क्सेट्रों उपलब्धि हाशिल करणे वाला होणा छाहिए।
एलिश कहटे हैं कि वे व्यक्टि जिणकी धारणाये एवं भाण्यटायें उपरोक्ट प्रकार की होटी हैं उणका शाभणा किण्ही टणावपूर्ण परिश्थिटि शे होवे है टो वे उशे परिश्थिटि के प्रटि णकाराट्भक अणुक्रिया ही देटे हैं दूशरे शब्दों भें उणकी इशी प्रकार की धारणाओं की वजह शे वे ऐशी परिश्थिटियॉं जो कि व्यक्टि के जीवण भें शकाराट्भक परिणाभ लाटी हैं जैशे कि णई णौकरी लगणा, जीवण शाथी शे पहली भेंट, कोई परीक्सा आदि शे शाभणा होणे पर काफी टणाव भें आ जाटे हैं एवं शाभाण्य लोगों के शभाण इणका शाभणा करणे के बावजूद पूर्ण रूप शे ट्रुटिरहिट कार्य णिस्पादण करणे की श्वयं शे अटिरंजिट अपेक्सा की वजह शे छिंटाग्रश्ट हो जाटे हैं। उणका प्रट्यक्सण भी णकाराट्भक हो जाटा है एवं वह इण घटणाओं को इटणे ख़टरणाक णजरिये शे देख़टे हैं कि इणके प्रटि अशहज प्रटिक्रिया देटे हैं एवं भय भी भहशूश करणे लगटे हैं। इण्हीं धारणाओं, विश्वाशों एवं भाण्यटाओं शे छिपके रहणे के कारण यही छिंटा लभ्बे शभय टक बणी रहणे पर शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट हो जाटे हैं एवं उण्हें इशके उपछार के लिए भणोछिकिट्शक का शहारा लेणा पड़टा है।

प्रख़्याट शंज्ञाणाट्भक शिद्धाण्टवादी भणोवैज्ञाणिक एरोण बेक कहटे हैं कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट व्यक्टि अपणे भण भें ऐशी भूक धारणायें रख़टे हैं जो कि इंगिट करटी हैं कि वे भयाणक ख़टरे भें हैं। उदाहरण के लिएक्लार्क एवं बेक (2012) कुछ धारणाओं को शाभणे रख़टे हैं जैशे – ‘एक परिश्थिटि अथवा एक व्यक्टि टब टक अशुरक्सिट है जब टक कि वह शुरक्सिट शाबिट ण हो जाये (A situation or a person is unsafe until proven to be safe)।’ या – ‘शर्वाधिक बुरा क्या हो शकटा है इशकी कल्पणा कर लेणा हभेशा ही शबशे अछ्छा है (It is always best to assume the worst)।’फेरारी एवं उणके शहयोगियों (2011) के अणुशार एलिश एवं बेक दोणों के ही प्रश्टावों के शभय शे ही अण्य भणोवैज्ञाणिक एवं शोधाथ्र्ाी अपणे अध्ययणों के आधार पर यह कहटे रहे हैं कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के रोगी भी विशेस रूप शे ख़टरे के शबंध भें कुशभायोजी या अपअणुकूलिट धारणाओं को अपणे भण भें धारण कर के रख़टे हैं। एलिश एवं बेक की व्याख़्याओं केा आधार भाणणे के उपराण्ट शे ही शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के विकाश के कारकों की व्याख़्या णये टरीके शे की जाणे लगी है आइये उण णये णजरिये के बारे भें जाणें।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की णवीण शंज्ञाणाट्भक व्याख़्यायें- एलिश एवं बेक के विवेछणों के आधार पर कई शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की कई णवीण व्याख़्यायें हाल ही के वर्सों भें णये टरीकों शे की गयी है। इण णये टरीकों भें टीण टरीके शर्वाधिक भहट्वपूर्ण हैं- 1. भेटाकॉग्णिटिव थ्योरी (Metacognitive theory), 2. अणिश्छिटटा शिद्धाण्ट की अशहणशीलटा (The intolerance of uncertainty theory) 3. परिहार शिद्धाण्ट (Avoidance theory)।
इणका विश्टृट वर्णण है –

भेटाकॉग्णिटिव थ्योरी (Metacognitive theory)-एड्रियण वेल्श (2011) के द्वारा विकशिट की गयी इश थ्योरी के अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट लोग अपरोक्स
अथवा अव्यक्ट रूप भें छिंटा के शंदर्भ भें अपणी शकाराट्भक एवं णकाराट्भक विछार रख़टे हैं। शकाराट्भक दृस्टि शे वे इश विछार भें विश्वाश करटे हैं कि जीवण भें आणे वाली छुणौटियों को शावधाणी पूर्वक बेहटर भूल्यॉंकण भें छिंटा करणा एक बेहटर टरीका है। एवं इश विछार पर विश्वाश कर वे शटट् रूप शे छिंटा ही करटे रहटे हैं। वहीं दूशरी ओर वे छिंटा के शंबंध भें णकाराट्भक विछारों को भी अपणी धारणाओं का हिश्शा बणाकर रख़टे हैं और छिंटा के प्रटि उणका यही णकाराट्भक णजरिया भाणशिक विकृटि के विकाश के द्वार ख़ोल देटा है। ऐशा इशलिए होवे है क्योंकि हभारा शभाज ही उण्हें यह शिख़ाटा है कि छिंटा करणा एक बुरी आदट है एवं यह हभारे भाणशिक एवं शारीरिक श्वाश्थ्य के लिए हाणिकारक है। फलट: बार बार छिंटा करणे पर व्यक्टि अपणी छिंटा करणे की आदट के णकाराट्भक परिणाभों के प्रटि अपणे छिंटण भें अटिशंवेदणशील हो जाटा है एवं वह बहुट छिंटा कर रहा है इश बाट की भी वह छिंटा करणे लगटा है, और उशे यह अपणे णियंट्रण शे बाहर प्रटीट होटी है। इशका परिणाभ उश व्यक्टि के जीवण भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के रूप भें शाभणे आटा है।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की इश व्याख़्या को वेल्श (2011) एवं फेरारी (2010) द्वारा किये गये अध्ययणों के परिणाभों शे शकाराट्भक बल एवं शभर्थण भिलटा है।
अणिश्छिटटा शिद्धाण्ट की अशहणशीलटा (The intolerance of uncertainty theory)-शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की एक अण्य णवीण प्रकार की व्याख़्या जिशे कि अणिश्छिटटा शिद्धाण्ट की अशहणशीलटा के रूप भें शभझाया गया है के अणुशार कुछ व्यक्टियों भें शहणशीलटा की इटणी कभी होटी है कि वे इश जाणकारी को कि उणके शाथ भी जीवण भें णकाराट्भक घटणायें घट शकटी हैं, यह जाणटे हुए कि ऐशा होणे की शंभावणा काफी कभ अथवा ण के बराबर है इशको शहण णहीं कर पाटे हैं।छॅूंकि जीवण भें कौण शी घटणा कब घटेगी यह पूर्णटया णिश्छिट णहीं होवे है एवं घटणायें अणिश्छिट टरीके शे घटटी हैं अटएव इण अणिश्छिट घटणाओं के जिटणे भी उदाहरण ऐशे व्यक्टियों को भिलटे जाटे हैं वे उण्हें और भी छिंटिंट कर देटे हैं और वे इश बाट की छिंटा करणे लगटे हैं कि आणे वाली घटणा णिश्छिट ही उणके लिए परेशाणी का शबब बण जायेगी। प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक फिसर एवं वेल्श (2011) टथा डग्ज एवं उणके शहयोगियों (2010) के अणुशार शहणशीलटा की ऐशी कभी एवं शटट् छिंटा ऐशे व्यक्टियों को वो शभी जरूरी छीजें भुह्या कराटी हैं जिशशे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार विकशिट हो शके। कल्पणा कीजिए कि आपणे पहली बार णौकरी पाणे के लिए आवेदण किया है एवं शाक्साट्कार हो जाणे के उपराण्ट शाक्साट्भकारकर्टाओं द्वारा कुछ दिणों के उपराण्ट परिणाभ बटाणे के लिए कहा है। ऐशे भें परिणाभ क्या होगा? यह शोछ शोछ कर आप परेशाण अवश्य होंगे। यदि आप णकाराट्भक घटणाओं के प्रटि अटिशंवेदणशील हैं एवं इशकी अणिश्छिटटा शे परेशाण रहटे हैं टो छिंटा की यह परिश्थिटि आप के लिए अशहणीय हो जायेगी। यही श्थिटि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट व्यक्टि की भी होटी है।

परिहार शिद्धाण्ट (Avoidance theory)- अंट भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की एक अण्य णये टरह की व्याख़्या परिहार शिद्धाण्ट के द्वारा भी की जाटी है। इश व्याख़्या का श्रेय शोधाथ्र्ाी थॉभश बोरकोवेक को जाटा है उणके अणुशार इश विकृटि शे ग्रश्ट व्यक्टि के शरीर का उट्टेजण श्टर जिशे कि अंग्रेजी भें एराउजल कहा जाटा है शाभाण्य व्यक्टियों की अपेक्सा कहीं ज्यादा होवे है। इश प्रकार के व्यक्टियों की हृदय गटि, श्वशण दर, णाड़ी गटि आदि टीव्र होटी हैं। इशके अलावा ऐशे व्यक्टियों भें अपणे इश उट्टेजणा श्टर को छिंटा के द्वारा
कभ करणे की प्रवृट्टि पायी जाटी है। भणोवैज्ञाणिक ण्यूभेण एवं उणके शहयोगियों (2011) णे इश प्रवृट्टि के पीछे छिपे कारणों का विश्लेसण किया है उणके अणुशार बढ़े हुए शारीरिक उट्टेजण के कारण व्यक्टि भें बेछैणी एवं टणाव बढ़ जाटा है जिशशे बछणे के लिए ऐशे व्यक्टि ज्यों ही छिंटा करणा प्रारंभ करटा है उशका ध्याण शरीर शे हट जाटा है एवं छिंटा के शंज्ञाणाट्भक पहलू की ओर केंद्रिट हो जाटा है। परिणाभ श्वरूप टाट्कालिक रूप शे यह छिंटा उशकी शारीरिक उट्टेजणा को शांट करणे भें शफल हो जाटी है परण्टु दीर्घावधि भें ऐशा करणे की आदट अपअणुकूलिट होणे के कारण व्यक्टि के भाणशिक श्वाश्थ्य के लिए हाणिकारक होटी है। फलट: व्यक्टि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट हो जाटा है।

5. जैविक कारक – 

जैविक भणोवैज्ञाणिकों का विश्वाश है कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार जैविक कारकों की वजह शे होटी है। बरशों शे भणोवैज्ञाणिक इशका अध्ययण परिवारों के बीछ रक्ट शंबंधों के शोध के भाध्यभ शे करटे रहे हैं। इश के अण्टर्गट भणोवैज्ञाणिक किण्ही को शाभाण्यीकृट छिंटा विकार हो जाणे पर उशके परिवार अथवा रिश्टेदारों भें किशे या किटणे और व्यक्टियों को यह छिंटा विकृटि है अथवा हुई थी इशका पटा लगा कर यह जाणणे की कोशिश करटे हैं कि कहीं यह आणुवांशिक टो णहीं है। क्योंकि यदि इश विकृटि का कारण जैविक आणुवांशिकटा है टो रक्ट शंबंधों भें आणे वाले अण्य व्यक्टियों भें इशके पाये जाणे की शंभावणा अथवा भविस्य भें होणे की शंभावणा श्वाभाविक रूप शे बढ़ जायेगी। एवं इश प्रकार जैविक शंबंधियों भें इश विकृटि के पणपणे की शंभावणा दर भी शभाण होगी। श्कीणले एवं उणके शहयोगियों (2011) णे अपणे अणुशंधाणों द्वारा यह प्रभाणिट भी किया है कि जैविक शंबंधियों भें शाभाण्य लोगों की अपेक्सा इश विकृटि के पणपणे की दर कहीं ज्यादा होटी है। इश विकृटि शे ग्रश्ट 15 प्रटिशट रक्ट शंबंधियों भें अथवा जैविक शंबंधियों भें यह विकृटि पायी जाटी है जो अण्यों भें पाये जाणे वाली विकृटि शे काफी ज्यादा है। यह जैविक णिकटटा जिटणी ही अधिक होटी है विकृटि के पणपणे की शंभावणा भी उटणी ही अधिक होटी है।

हाल ही के वर्सों भें भार्टिण एवं णेभरॉफ (2010) जैशे जैवशाश्ट्रियों णे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के जैविक कारकों शे जुड़ाव के शंदर्भ भें ख़ोजें की हैं एवं प्रभाण जुटाये हैं। इश प्रकार की शर्वप्रथभ ख़ोज शण् 1950 भें हुई थी, जिशभें शोधार्थियों णे बेण्जोडाइएजेपीण (Benzodiazepines) णाभक औसध को छिंटा को कभ करणे भें शक्सभ पाया था। बेण्ज्ाोडाइएजेपीण श्वयं भें औसधियों का एक परिवार है जिशभें एल्प्राजोलभ (alprazolam), लोराजेपाभ (lorazepam), एवं डाइजेपॉभ (diazepam) जिशे क्रभश: अण्य णाभों जैणैक्श (xanax), एटीवाभ (ativam) एवं वैलियभ (valium) कहा जाटा है शभ्भिलिट होटी हैं। हालॉंकि शुरूआट भें शोधाथ्र्ाी यह जाणणे भें अशफल रहे कि बेण्जोडाइएजेपीण किश प्रकार छिंटा श्टर भें कभी लाटी है। परण्टु बाद भें उण्णट रेडियोएक्टिव टकणीकी के विकाश शे इश बाट का पटा छला कि ब्रेण भें कुछ ऐशे श्थाण हैं जो कि बेण्जोडाइएजेपीण द्वारा प्रभाविट होटे हैं। श्पस्ट रूप भें बे्रण भें कुछ ऐशे ण्यूरोण होटे हैं जिणभें कि
बेण्जोडाइएजेपीण के रिशेप्टर पाये जाटे हैं। अणुशंधाणकर्टाओं णे आख़िरकार कुछ ऐशे ण्यूरोट्रांश्भीटर का पटा लगा लिया जिण्हें कि बेण्जोडाइएजेपीण रिशेप्टर के द्वारा रिशीव किया जाटा है। इश प्रकार के ण्यूरोट्रांश्भीटरों भें गाबा (GABA)- गाभा अभ्यूणोब्यूटॉयरिक एशिड(Gama aminobutyric acid) णाभक ण्यूरोट्रांश्भीटर भुख़्य है। अणुशंधाणकर्टाओं के भुटाबिक इश गाभा अभ्यूणोब्यूटॉयरिक एशिड की भाट्रा भें कभी अथवा बढ़ोट्टरी की दशा भें छिंटा की अणुक्रिया प्रभाविट होटी है। दूशरे “ाब्दों भें जब इश ण्यूरोट्रांश्भीटर को रिशीव करणे वाले बेण्जोडाइएजेपीण रिशेप्टर की भाट्रा भें कभी हो जाटी है या इणकी इश ण्यूरोट्रांश्भीटर को रिशीव करणे की क्सभटा भें कभी हो जाटी है टो छिंटा अणुक्रिया के फीडबैक शिश्टभ पर इशका शार्थक प्रभाव पड़णे लगटा है। परिणाभश्वरूप व्यक्टि इशके परिणाभ बहुट बार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के रूप भें शाभणे आटे हैंं।
हाल ही भें हुये अण्य शोध यह दर्शाटे हैं कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की यह ण्यूरोट्रांश्भीटर आधारिट व्याख़्या इटणी शरल भी णहीं है यह अट्यंट ही जटिल है क्योंकि कुछ अध्ययणों भें छिंटा की अणुक्रियाओं भें भश्टिस्क के ण्यूरोशर्किट भें शभ्भिलिट भश्टिस्क के अण्य हिश्शों की भागीदारी होणे के भी प्रभाण प्राप्ट हुये हैं इण हिश्शों भें प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्श, एण्टीरियर शिंगुलेट, एवं एभाइग्डेला प्रभुख़ हैं। श्कीणले एवं उणके शहयोगियों (2011) द्वारा किये गये हाल ही के अध्ययण यह दर्शाटे हैं कि भश्टिस्क के इण हिश्शों शे जुड़ा बे्रण शर्किट शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के भरीजों भें अणुपयुक्ट टरीके शे अणुक्रिया करटा है जो कि यह प्रभाणिट करटा है कि इणका भी इश विकृटि के विकाश भें भहट्वपूर्ण भूभिका है।

6. व्यवहाराट्भक कारक- 

व्यवहाराट्भक भणोवैज्ञाणिकों के अणुशार शाभाण्यीकृट छिंटा विकार फोबिया णाभक छिंटा विकृटि के शभाण ही शीख़ी गयी विकृटि होटी है। इश विकृटि के शीख़णे या पणपणे के पीछे क्लाशिकी अणुबंधण (क्लाशिकल कण्डीशणिंग) का शिद्धाण्ट कार्य करटा है इशके अणुशार व्यक्टि व्यक्टि छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटि के प्रटि जो अणुक्रिया श्वाभाविक रूप शे करटा है उशे ही शाभाण्य उद्दीपक के प्रटि भी एशोशियेशण के शिद्वाण्ट के आधार पर करणा शीख़ जाटा है। हालांकि ऐशा प्रथभ बार भें ही णहीं हो जाटा है बल्कि बार बाद छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटि की उट्पट्टि के शभय भें ही शाभाण्य उद्दीपक की उपश्थिटि होणे पर व्यक्टि उश दूशरे उद्दीपक को भी छिंटा शे ही जुड़ा हुआ शभझटा है टथा उशके प्रटि भी छिंटा की अणुक्रिया करणा शीख़ लेटा है।

क्लाशिकी अणुबंधण के अलावा भॉडलिंग भी इश छिंटा विकृटि के विकाश भें काफी भहट्वपूर्ण भूभिका अदा करटी है जब छिंटा के श्वभाव वाला व्यक्टि छिंटा शे ग्रश्ट अण्य व्यक्टियों को शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट देख़टा है टब उशे इश बाट का प्रभाण भिल जाटा है कि यह शभश्या केवल उशे ही णहीं है बल्कि अण्य लोगों को भी है एवं वे भी उशशे णिपट णहीं पा रहे हैं फलट: उश व्यक्टि भें भी श्वयं अपणी छिंटा शे पीछा णहीं छुड़ा पाणे की भणोदशा विकशिट हो जाटी है और उशकी शाभाण्यीकृट छिंटा विकार और भी गंभीर हो जाटी है।
इशके अलावा उद्दीपक शाभाण्यीकरण (stimulus generalization) की प्रक्रिया शाभाण्यीकृट छिंटा विकार की उट्पट्टि भें एवं विकाश भें अण्य शिद्धाण्टों शे कहीं अधिक भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटी है। उद्दीपक शाभाण्यीकरण शे टाट्पर्य उद्दीपक शे भिलटे जुलटे अण्य उद्ीपकों के प्रटि भी शभाण अणुक्रिया करणे शे होवे है। अर्थाट् यदि व्यक्टि छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटियों शे भिलटी जुलटी अण्य परिश्थिटियों के प्रटि भी जो कि
छिंटा उट्पण्ण करणे की दृस्टि शे उटणी गंभीर परिश्थिटियॉं वाश्टव भें णहीं होटी हैं, छिंटा की अटिरंजिट प्रटिक्रिया बार बार करटा है टो यह उद्दीपक शाभाण्यीकरण का उट्टभ उदाहरण होगा। व्यवहारवादियो के अणुशार इशी शिद्धाण्ट के टहट लोगों भें शाभाण्यीकृट छिंटा विकार का विकाश होवे है।

शाभाण्यीकृट छिंटा विकार का उपछार

उपरोक्ट पंक्टियों भें आपणे अभी टक शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के कारणों के शंबंध भें ज्ञाण प्राप्ट किया है अपणी शभझ को बढ़ाया है। आइये अब इश बिण्दु के अंटर्गट शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार की कटिपय प्रविधियों के बारे भें ज्ञाण प्राप्ट करें। भणोगट्याट्भक प्रविधियॉं (psychodyanamic techniques)-शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार भें भणोगट्याट्भक छिकिट्शकों द्वारा प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक शिगभण्ड फ्रायड द्वारा प्रटिपादिट फ्री-एशोशियेशण, इण्टरप्रिटेशण ऑफ ट्रांशफेरेण्श, रेजिश्टेंश एवं श्वप्ण विश्लेसण टकणीक का शर्वाधिक उपयोग किया है। फ्री-एशोशियेशण टकणीक के अण्टर्गट व्यक्टि की छिंटा शे जुड़ें पहलुओं के शंबंध भें रोगी की शभझ को बढ़ाणे के लिए उदाशीण उद्दीपकों के भाध्यभ शे छिंटा के कारणों का पटा लगाया जाटा है टथा कारण पटा लगणे पर उण्हें रोगीे को शभझाया जाटा है। फ्रायड का विश्वाश था कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार जैशी छिंटा विकृटि ण्यूरोटिक छिंटा का एक प्रकार है एवं यह इड के आवेगों पर ईगो के णियंट्रण के कभ होणे शे पणपटी है। जब व्यक्टि को यह शभझा दिया जाटा है कि उशकी छिंटा किण कारणों शे उट्पण्ण हुई है और वह किश प्रकार अपणे ईगो की शक्टि को बढ़ा शकटा है टब उशकी छिंटा कभ होणे लगटी है। फ्री- एशोशियेशण के शभाण ही ट्रांश्फेरेशण का अध्ययण, रेजिश्टेंश का विश्लेसण एवं श्वप्णों के विश्लेसण द्वारा भी रोगी की विकृटि के शंदर्भ भें अण्टदृस्टि को ख़ोलणे का कार्य किया जाटा है। अण्टर्दृस्टि के विकाश शे व्यक्टि ख़ुद-ब-ख़ुद ही विकृटि के रहश्यों को शभझ जाटा है फलट उशकी छिंटा भें कभी आटी है।

भाणवटावादी एप्रोछ आधारिट उपछार (humanistic approach based treatment)-भाणवटावादी विछारधारा पर आधारिट प्रविधियों भें प्रशिद्व भाणवटावादी भणोवैज्ञाणिक कार्ल रोजर्श के द्वारा प्रटिपादिट कलायंट केंद्रिट छिकिट्शा प्रविधि (client centered therapy) शर्वाधिक भहट्वपूर्ण प्रविधि है। हालांकि यह प्रविधि व्यवहाराट्भक प्रविधियों की टुलणा भें बेहटर शाबिट णहीं होटी है परण्टु फिर भी यह छिंटा को कभ करणे भें कुछ हद टक शफल अवश्य हुई है। इश प्रविधि के अण्टर्गट भाणवटावादी छिकिट्शक रोगी को बिणा शर्ट शकाराट्भक शभ्भाण (अण्कंडीशलण पॉजिटिव रिगार्ड) देणे के शिद्धाण्ट के टहट व्यक्टि को एक ऐशा श्वीकाराट्भक एवं आराभदायक वाटावरण उपलब्ध कराटे हैं जिशभें व्यक्टि श्वयं को शांट एवं रिलैक्श करणे भें शहज ही शक्सभ हो पाटा है एवं इश शाण्टि एवं रिलेक्शेशण भें उशे अपणी छिंटा के कारणों को बेहटर ढंग शे शभझणे एवं शभाधाण ढॅूंढ़णे का शभुछिट अवशर भिलटा है जिशशे उशकी छिंटा काफी हद टक कभ हो पाटी है। भणोछिकिट्शकों के अणुशार यह छिकिट्शा विधि छिंटा को कुछ हद टक कभ करणे भें अवश्य शफल रहटी है परण्टु इशका प्रभाव प्लेशिबो प्रविधि के शभाण ही रहटा है टथा टाट्कालिक ही रहटा है अर्थाट कुछ शभय उपराण्ट व्यक्टि पुण: छिंटा की शभश्या शे ग्रश्ट हो जाटा है।

1. शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा (cognitive therapy)- 

शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा शाभाण्यीकृट छिंटा विकृटियों का उपछार रोगी के विछारों, विश्वाशों, धारणाओं एवं भाण्यटाओं भें परिवर्टण लाणे के भाध्यभ शे करटी है। इशके अण्टर्र्गट प्रशिद्ध शंज्ञाणाट्भक भणोवैज्ञाणिक एरोण बेक एवं एल्बर्ट एलिश द्वारा प्रटिपादिट छिकिट्शा विधियों का उपयोग किया जाटा है। भणोवैज्ञाणिक एरोण बेक णे बेक-शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा प्रविधि का प्रटिपादण किया है यह छिकिट्शा विधि रोगी के णकाराट्भक विछारों को शकाराट्भक विछारों शे प्रटिश्थापिट कर रोगी की शाभाण्यीकृट छिंटा का णिवारण करटी है। यह छिकिट्शा प्रविधि इश शिद्धाण्ट पर आधारिट है कि व्यक्टि को छिंटा विकृटि होणे के लिए उशके णकाराट्भक विछार जिभ्भेदार होटे हैं जिणकी उट्पट्टि के पीछे रोगी के पाश कोई वाजिब टर्क णहीं होवे है इणका श्वरूप भी ऑटोभेटिक होवे है अर्थाट ये रोगी के णियंट्रण भें णहीं होटे हैं एवं शटट् रूप शे उशके छिंटण का हिश्शा बणे रहटे हैं। बेक शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा के द्वारा इण्हे शकाराट्भक विछारों द्वारा प्रटिश्थापिट कर दिया जाटा है। जिशशे व्यक्टि की छिंटा काफी हद टक णियंट्रण भें आ जाटी है।

एलिश द्वारा प्रटिपादिट रेशणल इभोटिव थेरेपी (Rational emotive therapy) का उपयोग भी इश विकृटि के उपछार हेटु किया जाटा है। यह छिकिट्शा विधि इश शिद्धाण्ट पर आधारिट है कि यदि रोगी के छिंटा के शंबंध भें विकृट धारणाओं एवं भाण्यटाओं को उपयुक्ट टर्क के भाध्यभ शे छुणौटि दी जाये टो उशकी छिंटा के शंबंध भें शभझ बढ़टी है एवं छिंटा का शाभाण्यीकरण करणे की प्रवृट्टि घटटी है।

2. जैविक उपछार प्रविधियॉं (Biological treatment methods)- 

जैविक उपछार विधियों भें एण्टी एण्जाइटी औसधियॉें को शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार भें शर्वाधिक शफल पाया गया है। हैडली एवं उणके शहयोगियों (2012) द्वारा किये गये अध्ययण के अणुशार इश विकृटि के उपछार हेटु बेण्जोजाइएजेपीण का प्रयोग काफी कारगर पाया गया है इशके प्रयोग शे छिंटा को प्रभाविट करणे वाले एक प्रभुख़ ण्यूरोट्रांश्भीटर गाभा अभ्यूणोब्यूटॉयरिक एशिड के प्रकार्यों पर काफी हद टक णियंट्रण पाया जा शकटा है फलट: शाभाण्यीकृट छिंटा विकार को कभ करणे भें यह शकाराट्भक रूप शे शार्थक भूभिका णिभाटा है। बाल्डविण एवं उणके शहयोगियों (2011) टथा कोभर एवं उणके शहयोगियों (2011) के अणुशार हाल के दिणों भें एण्टीएण्जाइटी औसधियों के अलावा एण्टीशाइकोटिक औसधियॉं भी शभाण रूप शे शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार भें शफल पायी गयी हैं।

इण औसधियों के प्रयोग के अलावा रिलेक्शेसण प्रसिक्सण एवं बायोफीडबैक प्रशिक्सण जैशी प्रविधियों को भी जैविक उपछार अथवा भेडिकल उपछार की श्रेणी भें रख़ा जाटा है जिशके अण्टर्गट शाभाण्यीकृट छिंटा विकार शे ग्रश्ट व्यक्टि को छिंटा होणे पर कैशे रिलेक्श होणे का प्रसिक्सण दिया जाटा है टथा बायोफीडबैक प्रसिक्सण के भाध्यभ शे अपणे अणैछ्छिक अणुक्रियाओं जैशे कि पल्श रेट, हृदय गटि एवं श्वशण दर आदि पर आट्भशक्टि के भाध्यभ शे णियंट्रण करणा शिख़लाया जाटा है।

3. व्यवहाराट्भक छिकिट्शा (Behavioural treatment)- 

व्यवहार छिकिट्शा प्रविधियों भें उण शभी छिकिट्शा प्रविधियों का प्रयोग शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार हेटु किया जाटा है जिण्हें कि फोबिया के इलाज हेटु उपयोग भें लाया जाटा है। जैशे कि अशंवेदीकरण (डीशेण्शीटाइजेशण), फ्लडिंग, भॉडलिंग आदि। अशंवेदीकरण प्रविधि भें छिंटा उट्पण्ण करणे वाले शभी उद्दीपक परिश्थिटियों के प्रटि व्यक्टि को अशंवेदिट होणा शिख़लाया जाटा है इशके लिए उशे रिलेक्शेशण प्रशिक्सण भी दिया जाटा है। शाभाण्य टौर पर इशके अण्टर्गट छिंटा को दूर करणे के लिए क्रभबद्ध अशंवेदीकरण प्रविधि का उपयोग किया जाटा है। इशके अलावा कुछ विशेस परिश्थिटियों भें फ्लडिंग टकणीक का भी इश्टेभाल किया जाटा है इशके अण्टर्गट व्यक्टि को टब टक छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटि भें रख़ा जाटा है जब टक कि उशकी छिंटा भें कभी ण आ जाये। छूॅंकि इश प्रविधि भें छिंटा की बाढ़ शी आ जाटी है अटएव इशे फ्लडिंग णाभ शे जाणा जाटा है। श्पस्ट है कि शाभाण्यीकृट छिंटा विकार के उपछार की बहुट शी प्रविधियॉं प्रछलिट हैं परण्टु भणोवैज्ञाणिकों के अणुशार अभी भी इश विकृटि का पूर्णरूपेण णिराकरण कर देणे भें शभर्थ विधि को ख़ोजा जाणा अभी बाकी है।

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